July 24, 2026
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    खाना खजाना / शौर्यपथ / मिष्टी दोई बंगाल की फेमस मिठाई है, जिसे उपवास या किसी त्यौहार जैसे खास उत्सव में बनाया जाता है। मि​ष्टी दोई, एक प्रकार का ​मीठा दही है, जिसे गाढ़े दूध में चाशनी मिलाकर बनाया जाता है। बंगाल का यह खास डेजर्ट खाने में बेहद स्वादिष्ट होता है। तो देर किस बात की आइए जानते हैं घर पर ही कैसे बनाया जाता है मिष्टी दोई।
    मिष्टी दोई बनाने के लिए सामग्री-
    -दूध - 750 मिलीलीटर
    -चीनी- 7½ टेबल स्पून
    -पानी - ¼ कप
    -ताजा दही - ½ कप
    -कटे हुए बादाम
    - गार्निशिंग के लिए एल्युमिनियम फॉइल
    मिष्टी दोई बनाने का आसान तरीका-
    मिष्टी दोई बनाने के लिए सबसे पहले एक पैन में दूध गर्म करें। दूध को इतना उबालें, कि यह आधा रह जाए। अब एक दूसरे पैन में चीनी डालकर उसे धीमी आंच पर चलाते रहें। गैस को बार-बार बंद और चालू करते रहे, ऐसा तब तक दौहराए, जब तक कि ची​नी पिघलकर ब्राउन न हो जाए। अब गैस बंद कर, पानी मिलाकर उसे अलग रख लें। दूध आधा रह जाए तो इसमें तैयार चाशनी मिलाएं। दूध में चाशनी मिलाने के बाद गैस बंद कर दें। दूध को ठंडा होने के लिए रख दें।
    अब ताजा दही मिलाकर अच्छे से मथे। ​इसके बाद इसे सर्व करने वाले बर्तन या मटको में डालें। इन मटको को एल्युमिनियम फॉइल से कवर करके 10-12 घंटे के लिए ठंडा होने के लिए फ्रिज में रख दें। उसेक बाद फॉइल हटाकर, इन्हें कटे हुए बादाम के साथ गार्निंश कर ठंडा- ठंडा मेहमानों को सर्व करें।

    धर्म संसार / शौर्यपथ / महालक्ष्मी व्रत इस साल 10 सितंबर 2020 को रखा जाएगा। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां लक्ष्मी का व्रत रखने से धन, यश और तरक्की की प्राप्ति होती है। कहते हैं कि गज लक्ष्मी यानी हाथी पर बैठी महालक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए। अश्विन मास में कृष्ण अष्टमी की तिथि को महालक्ष्मी व्रत रखा जाता है।
    महालक्ष्मी व्रत में किन बातों का रखें ध्यान-
    मान्यता है कि महालक्ष्मी व्रत में मां लक्ष्मी के रूप श्रीगज लक्ष्मी, श्रीवीर लक्ष्मी, श्री विजय लक्ष्मी, श्री आदि लक्ष्मी मां, श्री धान्य लक्ष्मी, श्री संतान लक्ष्मी मां की पूजा करने से मां लक्ष्मी की कृपा हमेशा बनी रहती है।
    कहते हैं कि महालक्ष्मी व्रत के दिन पूजा स्थल पर हल्दी से कमल बनाकर उस पर मां लक्ष्मी की मूर्ति स्थापना करें और मूर्ति के सामने श्रीयंत्र और सोने-चांदी के सिक्के रखें।
    महालक्ष्मी व्रत में मां लक्ष्मी के 8 रूपों की पूजा करने के साथ ही महालक्ष्मी मंत्र का जाप करना भी लाभकारी माना जाता है। कहते हैं मंत्र का जाप करने से मां लक्ष्मी का साथ हमेशा बना रहता है।
    माना जाता है कि मां लक्ष्मी की पूजा श्रीयंत्र के बिना अधूरी होती है। कहते हैं कि महालक्ष्मी व्रत में श्रीयंत्र की पूजा करने से आर्थिक स्थिति सुधर जाती है।
    माना जाता है कि मां लक्ष्मी पूजन में पानी से भरे कलश को पान के पत्तों से सजाने से मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसके साथ ही कलश के ऊपर नारियल रखना भी शुभ माना जाता है।
    कलश के पास हल्दी से कमल बनाकर मां लक्ष्मी की प्रतिमा को स्थापित करें। कहते हैं कि महालक्ष्मी व्रत में मां लक्ष्मी को सोने के गहनों से सजाने से भी मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

    धर्म संसार / शौर्यपथ / अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को ऋषि विश्वकर्मा की पूजा की जाती है। माना जाता है कि इस दिन ही भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था। इस दिन को विश्वकर्मा पूजा और विश्वकर्मा डे कहा जाता है। इस साल विश्वकर्मा पूजा 16 सितंबर (बुधवार) को मनाई जाएगी। भगवान विश्वकर्मा को दुनिया का पहला इंजीनियर और वास्तुकार मनाते हैं। इसलिए फैक्ट्रियों से लेकर कंपनियों तक में विश्वकर्मा पूजा की जाती है। इस दिन भगवान विष्णु, ऋषि विश्वकर्मा और औजारों की पूजा की जाती है।

    विश्वकर्मा पूजा का शुभ मुहूर्त-

    चतुर्दशी तिथि आरंभ (15 सितंबर)- 11 बजकर 1 मिनट से।
    चतुर्दशी तिथि समाप्त (16 सितंबर)- 7 बजकर 56 मिनट तक।
    पूजा का शुभ मुहूर्त- 16 सितंबर- सुबह 10 बजकर 9 मिनट से 11 बजकर 37 मिनट तक।

    ऐसे हुई थी भगवान विश्वकर्मा की उत्पत्ति-

    पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान विष्णु भगवान सागर में शेषशय्या पर प्रकट हुए। कहते हैं कि धर्म की 'वस्तु' नामक स्त्री से जन्मे 'वास्तु' के सातवें पुत्र थे। जो शिल्पकार के जन्म थे। वास्तुदेव की 'अंगिरसी' नामक पत्नी से ऋषि विश्वकर्मा का जन्म हुआ था। माना जाता है कि अपने पिता की तरह ही ऋषि विश्वकर्मा भी वास्तुकला का आचार्य बनें। माना जाता है कि भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र और भगवान शिव का त्रिशूल भी ऋषि विश्वकर्मा ने ही बनाया था। माना जाता है कि भगवान शिव के लिए लंका में सोने के महल का निर्माण भी विश्वकर्मा जी ने ही किया था। कहते हैं कि रावण ने महल की पूजा के दौरान इसे दक्षिणा के रूप में ले लिया था।

     

    धर्म संसार / शौर्यपथ / धन की देवी लक्ष्मी जी को खुश करने के लिए मां की पूजा अर्चना की जाती है। दिवाली पर भी मां लक्ष्मी के आगमन के लिए महीने भर पहले से लोग घरों की साफ-सफाई शुरू कर देते हैं। मां लक्ष्मी अपने भक्तों से प्रसन्न होकर उन्हें धन और वैभव का वरदान देती हैं। ऐसा कहा जाता है कि जिस इंसान से माता लक्ष्मी प्रसन्न नहीं होती, उन्हें धन का अभाव का सामना करना पड़ता है।

    कुछ ऐसी मान्यताएं हैं जिनमें कहा गया है कि शाम या रात के वक्त इन कामों को करने से माता लक्ष्मी नाराज होती हैं। इसलिए हमें इन कामों को नहीं करना चाहिए। आइए जानते हैं इन कामों के बारे में:

    1.ऐसा कहा जाता है कि शाम के वक्त या रात में दूध या दही को किसी को देना नहीं चाहिए। इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि शाम के समय आप इन्हें बाहर से खरीदकर घर में तो ला सकते हैं, लेकिन इन्हें घर से बाहर किसी को न दें। ऐसा करने से मां लक्ष्मी नाराज होती हैं।

    2. जिस तरह सुबह घर में पूजा करने से पहले साफ-सफाई करते हैं, उसी प्रकार शाम को भी घर में सूरज के अस्त होने से पहले झाड़ू जरूर लगाएं। घर में शाम को भी साफ-सफाई रखें। खासकर मुख्य द्वार पर कभी भी गंदगी न रहने दें।

    3. रात को रसोईघर में साफ-सफाई करने के बाद ही सोना चाहिए। रात को घर में झूठे बर्तन बिल्कुल भी ना छोड़ें। इस बात का ध्यान रखें कि किचन पूरी तरह से साफ रहे।

    4. मां लक्ष्मी की कृपा से ही हमें अन्न की भी प्राप्ति होी है। इसलिए कभी भी अन्न का अनादर न करें। इसके साथ ही कभी भी खाने को छोड़ना नहीं चाहिए, इससे मां लक्ष्मी नाराज होती हैं। जिससे जीवन में धन, वैभव में कमी आती है।

    5. इसके साथ ही यह भी कहा जाता है कि जिस घर में महिलाओं का अपमान होता है, वहां लक्ष्मी जी वास नहीं करती हैं। इसलिए महिलाओं का हमेशा आदर करना चाहिए। इसके अलावा घर में शाम के समय मीठा बनाकर मां लक्ष्मी जी को भोग लगाना चाहिए।

     

    खेल /शौर्यपथ /बांग्लादेश के सलामी बल्लेबाज सैफ हसन और टीम के स्ट्रेंथ और कंडिशनिंग कोच निक ली कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी। बीसीबी ने श्रीलंका दौरे से पहले सोमवार को 17 खिलाड़ियों और सात स्टाफ सहित 24 सदस्यों को टेस्ट किया गया था। ली का गत अगस्त को दुबई में टेस्ट पॉजिटिव आया था, लेकिन 10 दिनों तक आइसोलेशन में रहने के बाद 23 अगस्त को उनका नतीजा नेगेटिव आया था। ढाका आने पर वह 14 दिनों तक क्वारंटाइन में रहे थे।

    बीसीबी के स्पोटर्स फिजिशियन डॉ देबाशीष चौधरी ने कहा, “कोरोना के लिए हमारे कंसलटेंट ली के मामले को देख रहे हैं कि क्या यह नए तरीके से कोरोना संक्रमित हुए हैं या पहले से संक्रमित थे।” अक्टूबर-नवंबर के श्रीलंका दौरे के लिए टीम का अभ्यास शिविर इस महीने के आखिर में शुरू होना है। बांग्लादेश में अभी तक कोरोना संक्रमण के तीन लाख से अधिक मामले आ चुके हैं और 4500 से अधिक मौतें हो चुकी हैं।
    मुख्य चयनकर्ता मिन्हाजुल अबेदिन के अनुसार श्रीलंका दौरे को देखते हुए नियमानुसार 37 सदस्यों का टेस्ट कराया गया। बीसीबी ने इससे पहले एहतियातन व्यक्तिगत रुप से ट्रेनिंग करने की इजाजत दी थी। सैफ हसन बांग्लादेश की टीम के लिए 2 टेस्ट मैच खेल चुके हैं, जिसमे उन्होंने 24 रन बनाए हैं। पाकिस्तान के खिलाफ 24 फरवरी 2020 को ही उन्होंने अपना डेब्यू किया था।
    बता दें कि बांग्लादेश के कई क्रिकेटर अबतक कोरोना वायरस का शिकार हो चुके हैं। बांग्लादेश के पूर्व स्पिनर मुशर्रफ हुसैन, पूर्व कप्तान मशरेफ मुर्तजा, नजमुल इस्लाम और नफीस इकबाल भी कोरोना वायरस संक्रमित हो चुके हैं। बांग्लादेश का एक अंडर 19 क्रिकेटर इफ्तिखार हुसैन भी कोविड-19 की चपेट में आ चुके हैं।
    बता दें कि विश्व में कोरोना वायरस (कोविड-19) से संक्रमित होने वाले लोगों की संख्या 2.73 करोड़ से अधिक हो गई है और 8.92 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। अमेरिका की जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के विज्ञान एवं इंजीनियरिंग केन्द्र (सीएसएसई) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार कोरोना से विश्वभर में अब तक 27342332 लोग संक्रमित हुए हैं और 892648 लोगों की मौत हुई है।

    दुर्ग / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर यह जानकारी दिया कि छत्तीसगढ़ प्रायवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसियेशन, रायपुर के द्वार उच्च न्यायालय के 1040/2020 दिनांक 9 जुलाई 2020 का गलतढंग से परिभाषित कर तिथि निर्धारित कर बच्चों को ऑनलाईन क्लासेस से वंचित कर देने की धमकी देकर दबावपूर्वक फीस वसूलने का प्रयास किया जा रहा है। कई बड़े दैनिक अखबारों में 6 सिंतबर 2020 को विज्ञप्ति जारी कर 9 सिंतबर तक फीस जमा कर देने और फीस नहीं जमा करने की स्थिति में ऑनलाईन क्लासेस से वंचित करने की बात प्रकाशित किया गया है, जो उच्च न्यायालय बिलासपुर के निर्णय दिनांक 9 जुलाई 2020 और नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 16 का स्पष्ट उल्लघंन है।
    श्री पॉल का कहना छत्तीसगढ़ प्रायवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसियेशन, रायपुर के इस प्रकार की धमकी-चमकी से जिले में कानून व्यवस्था बिगड़ सकती है, जिसको लेकर दिनांक 7 सिंतबर को एसोसियेशन का एक प्रतिनिधि मंडल डीईओ कार्यालय पहुंचा था, लेकिन डीईओ कार्यालय में नहीं मिले तो प्रतिनिधि मंडल ने बाल आयोग पहुंचकर छत्तीसगढ़ प्रायवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसियेशन, रायपुर के अध्यक्ष और सचिव के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने पुलिस अधिक्षक को निर्देशित करने की मांग की गई और फिर प्रतिनिधि मंडल ने पुलिस अधिक्षक को भी छत्तीसगढ़ प्रायवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसियेशन, रायपुर के अध्यक्ष और सचिव के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग किया गया।
    एसोसियेशन के रायपुर जिला सचिव पनेश त्रिवेदी ने बताया कि मा. उच्च न्यायालय बिलासपुर के निर्णय 1040/2020 दिनांक 9 जुलाई 2020 में यह उल्लेख नहीं है कि यदि पालक ट्यूशन फीस जमा नहीं करता है तो उसके बच्चे को ऑनलाईन क्लासेस से वंचित कर दिया जाएगा। एसोसियेशन के रायपुर जिला अध्यक्ष उमेश साहू का कहना है कि शिक्षा बच्चों का मौलिक अधिकार है, कोई भी प्रायवेट स्कूल किसी भी प्रवेशित बच्चे को किसी भी परिस्थिति में शिक्षा से वंचित नहीं कर सकता है। यदि कोई भी प्रायवेट स्कूल बच्चों को किसी भी प्रकार से जान-बुझकर प्रताडि़त करता है, जान-बुझकर अनावश्यक मानसिक कष्ट देता है, किसी प्रकार से जान-बुझकर उसकी उपेक्षा करता है तो यह किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम 2015 (अधिनियम क्रमांक 2 सन् 2016) की धारा 75 और 86 के अंतर्गत गंभीर प्रवृति का अपराध है।

    दुर्ग । शौर्यपथ । एनएसयूआई के जिला कार्यकारिणी अध्यक्ष सोनू साहू ने माननीय मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को छ:ग में स्कूल फीस नियामक आयोग बनाए जाने पर आभार व्यक्त किया में जिसकी पूर्णकालिक सरकार बीजेपी ने ठंडे बस्ते में डाल दिया था यहां तक कि स्कूल शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि निजी स्कूल हमारे नियत्रन में नहीं है दिल्ली में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड एवम् मानव संसाधन मंत्री को भी सिबिएसई स्कूलों की फीस तय करने ग्रेडिंग करने ज्ञापन दिया गया था।जिस पर केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को नियामक आयोग गठन एवं सिबिएसई स्कूलों की ग्रेडिंग करने आदेश में तब्दील कर निजी स्कूल को संरक्षण दिया फीस विनियामक समिति का गठन पूर्व भाजपा सरकार व उसके सभी शिक्षा मंत्री के मुंह में करारा तमाचा है। जिन्होंने पुर 10 साल पलको के शोसान व उत्पीड़न की अनदेखी और बढ़ावा दिया है। कांग्रेस ने समस्या को गंभीरता पूर्वक लिया और अपने घोषणा पत्र में शामिल किया और प्रदेश के संवेदनशील मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल जी एक साल में ही वादा पुर किया फीस विनियामक समिति बनाकर पालकों को बहुत बड़ी राहत दी है। भिलाई विधानसभा के विधायक को श्री देवेन्द्र यादव जी ने फीस विनियामक आयोग बनने के लिए समर्थन देते हुए अपने छात्र जीवन में एनएसयूआई की ओर से पूर्व के भाजपा सरकार को समिति गठित करने के लिए सड़कों की लड़ाई लड़े और आज जब फीस विनियामक आयोग का समिति का गठन होने जा रहा है उसमे विधानसभा में वह एक सदस्य के रूप में सरकार के अहम हिस्से में सामिल है जिस पर सदन के और भी विधायकों ने श्री यादव का बात सुनकर गदगद हो गए इस प्रदेश में फीस विनियामक बनने से प्रदेश के स्कूल पल संघ और राज्य की आम जनता राहत महसूस कर रहे है जिससे अब प्रबन्धक एवम् संचालकों के उपर नकेल कसना शुरू हो गया है।यह सभी छात्र संगठन और पालकों के लिए बड़ी जीत है खास कर भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन NSUI की ओर से राज्य सरकार के स्कूल शिक्षा मंत्री श्री प्रेमसाय सिंग जी का बहुत- बहुत धन्यवाद आप ने जन हित और छात्र हित में एक सार्थक निर्णय लिए है

    0 ऑनलाइन पढ़ाई से वंचित करने की मिल रही है धमकी पालक संघ ने की अपराध दर्ज करने की मांग
    0 पालकों को देख प्राचार्य ने स्कूल में लगवाया ताला
    0 बच्चों का पिछले साल का रिजल्ट रोका प्रबन्धन ने

    दुर्ग / शौर्यपथ / फीस के मामले को लेकर आज राजधानी में छत्तीसगढ़ छात्र पालक संघ के नेतृत्व में सैकड़ो पालकों ने बाल संरक्षण आयोग में अपनी शिकायत दर्ज करवाकर कार्यवाही की मांग की। इस मौके पर आयोग अध्यक्ष प्रभा दुबे ने पालक संघ को कार्रवाई का आश्वासन दिया। इससे पूर्व पालकों ने एक स्कूल में जाकर फीस को लेकर दी जा रही धमकी का विरोध किया। यहां पुलिस के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ।

    कोरोना काल मे स्कूल फीस को लेकर पालकों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। स्कूल संचालकों के अल्टीमेटम के बाद तो पालक और भी गुस्साए हुए हैं। अनेक स्कूलों में तो बच्चों के अभिभावकों को मैसेज भेजकर फीस नहीं जमा करने पर टी सी देने तक की चेतावनी दी जा रही है। इससे गुस्साए लोग सबसे पहले जिला शिक्षा अधिकारी, रायपुर के कार्यालय पहुंचे, मगर वे नहीं मिले। अपनी रणनीति के तहत सभी अभिभावक छात्र-पालक संघ के प्रदेश अध्यक्ष नज़रुल खान की अगुवाई में बाल अधिकार संरक्षण आयोग के कार्यालय भी गए। यहां अध्यक्ष प्रभा दुबे को ज्ञापन सौंपते हुए पालकों ने बताया कि स्कूल संचालकों ने अखबारों और न्यूज़ पोर्टल में विज्ञापन छपवा कर फीस पटाने के लिए दबाव बनाया, साथ ही यह चेतावनी भी दी है कि अगर फीस नहीं जमा किया तो उनके बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई बंद की जा सकती है। इसके अलावा प्रबंधक किसी को टी सी देने की धमकी दे रहे हैं तो किसी को बच्चों का रिजल्ट रोकने के लिए कह रहे हैं।

    बाल आयोग अध्यक्ष ने मामले को संज्ञान में लेते हुए कार्रवाई करने की बात कही है, साथ ही उन्होंने पालकों से यह भी कहा कि वे शिक्षा का अधिकार कानून के तहत अपनी शिकायत व्यक्तिगत रूप से पुलिस के समक्ष रखें, और अगर कार्रवाई नहीं हुई तो प्रकरण की शिकायत प्रशासन के साथ ही बाल आयोग के पास प्रस्तुत करें।

    रिजल्ट रोका स्कूल प्रबंधन ने, ऑनलाइन पढ़ाई से भी किया वंचित

    इससे पूर्व अभिभावक शैलेंद्र नगर स्थित होलीक्रास प्राइमरी स्कूल भी गए। यहां के पालकों की शिकायत थी कि स्कूल प्रबंधन ने अब तक बच्चों का पिछले साल का रिजल्ट नहीं दिया है। वहीं फीस जमा नहीं करने पर बच्चों को स्कूल से बाहर निकालने की धमकी दी जा रही है। यहां पालकों की भीड़ को देखते हुए प्राचार्य ने गेट पर ताला लगवा दिया और पुलिस को सूचना देकर बुलवा लिया। यहां पहुंचे टी आई विनय दुबे ने मामले को समझा और प्राचार्य को चर्चा के लिए बुलाया, मगर प्राचार्य ने खुद को कॉरेन्टीन बताते हुए शिक्षकों को चर्चा के लिए भेज दिया। इस दौरान छात्र-पालक संघ के अध्यक्ष नजरुल खान ने फीस के लिए दबाव बनाने पर विरोध जाताया और कहा कि प्रबंधन जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा अधिसूचित फीस दिखाए तभी पालक फीस जमा करेंगे। रिजल्ट को लेकर शिक्षकों ने सफाई दी कि परीक्षा के बाद कोरोना की महामारी आ जाने के चलते प्रबंधन ने रिजल्ट जारी नहीं किया। फिलहाल बच्चों को उनके व्हाट्सएप पर रिजल्ट भेजने की बात कही गई है। प्रबंधन ने इस बात के लिए भी आश्वस्त किया है कि किसी भी बच्चे की ऑनलाइन पढ़ाई रोकी नहीं जाएगी। यहां पुलिस ने पालकों और शिक्षकों के बीच मध्यस्थता करके प्रबन्धन को चर्चा के लिए 24 घंटे का समय दिया है।

    दुर्ग / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज गोधन न्याय योजना के एप की लॉन्चिंग की। इस अवसर पर उन्होंने पाटन के ग्राम सिकोला के ग्रामीणों से बातचीत की। मुख्यमंत्री ने सबसे पहले सरपंच श्रीमती उषा निषाद से गौठान की स्थिति की जानकारी ली। साथ ही गोबर खरीदी की व्यवस्था की जानकारी भी ली। सरपंच ने बताया कि गोबर खरीदी बहुत अच्छी हो रही है गोधन न्याय योजना से लोगों में काफी उत्साह का वातावरण है। लोग इससे काफी लाभ कमा रहे हैं। ग्रामीण इससे काफी खुश हैं अब इसके दूसरे चरण में वर्मी कंपोस्ट से भी आय होगी। मुख्यमंत्री ने उप सरपंच पुरुषोत्तम यादव से गांव के चारागाह बाड़ी आदि के बारे में जानकारी ली। श्री यादव ने बताया कि नरवा गरवा घुरवा बाड़ी योजना के माध्यम से हम लोग अपने गांव को संवार रहे हैं। बाड़ी का विकास कर रहे हैं। बाड़ी के माध्यम से सब्जियां उगा रहे हैं जिससे हमारे बच्चों को भी पर्याप्त पोषण मिल पा रहा है। मुख्यमंत्री ने पशु पालकों से भी चर्चा की। पशुपालक श्रीमती कविता ने बताया कि वह 35 क्विंटल गोबर बेच चुकी है जिससे उन्हें 7000 रुपये की आय प्राप्त हो चुकी है। गोधन न्याय योजना पशु पालकों के लिए बहुत अच्छी है। साथ ही इससे जैविक खेती करने के लिए भी रास्ता मिलेगा। ग्रामीणों को वर्मी कंपोस्ट से भी आय हो सकेगी। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर गौठान अध्यक्ष श्री गोकरण यादव से भी बातचीत की। श्री यादव ने बताया कि गांव में हम लोगों ने दो चरवाहे रखे हैं । एक चरवाहा समिति की ओर से रखा है और एक चरवाहा गांव की ओर से रखा गया है जो आवारा पशुओं की भी देखभाल करता है। मुख्यमंत्री ने ग्राम सचिव श्री बिहारी लाल साहू से कहा कि ऐप के बारे में प्रचार प्रसार करें साथ ही गोधन योजना के बारे में पर्याप्त प्रचार-प्रसार करें ताकि ग्रामीणों को इस महत्वपूर्ण योजना के माध्यम से आर्थिक लाभ हासिल हो सके। इस मौके पर कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे एवं जिला पंचायत सीईओ श्री सच्चिदानंद आलोक भी उपस्थित थे। कलेक्टर ने इस मौके पर ग्रामीणों से गांव की समस्या एवं गोधन न्याय योजना के क्रियान्वयन के संबंध में जानकारी भी ली तथा उन्हें सामूहिक रूप से काम कर इस योजना का लाभ उठाने की अपील भी की। जिला पंचायत सीइओ एस. आलोक ने बताया कि जिले की 216 गौठान में नोडल अधिकारी नियुक्ति किए गए है। जो शासन की महत्वकांक्षी योजना एनजीजीबी के तहत बनाए गए गौठान में सतत् गतिविधियां एवं गोधन न्याय योजना का क्रियान्वयन निरीक्षण करेंगे।
    गोधन न्याय योजना के तहत गोबर विक्रेताओं के द्वारा बेचे गए गोबर का खरीदी विक्रय का विवरण रखने के लिए एप तैयार किया गया जिसके माध्यम पंजीकृत हितग्राही अपने सभी विवरण इसमें देख सकेगे । इस संबंध में नोडल अधिकारियों को एप से संबंधित जानकार को लेकर प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी एस. आलोक ने बताया कि गोबर खरीदी के लिए शासन के द्वारा चिप्स के माध्यम से एप तैयार कराया गया है। जिले में कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंन्द्र भुरे के मार्ग दर्शन में गोधन न्याय योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। एस. आलोक बताया कि अब एप के माध्यम से गोधन न्याय योजना का संचालन किया जाएगा। जिस तरह से धान खरीदी में किसानों का पंजीयन किया जाता है। उसी तरह गोधन न्याय योजना में गोबर विक्रता का पंजीयन कृषि सहकारी समिति द्वारा किया जाना है। ऐसा करना इसलिए आवश्यक है क्योकि गोबर खरीदी के समय विक्रताओं की जानकारी भरने की आवश्यकता न रहे। केवल क्रय किए गए गोबर की मात्रा ही भरना पड़े। उन्होंने बताया कि जिन हितग्राहियों ने गोबर की विक्रय किया है। उनकी जानकारी एनआईसी में एकत्रित हो गई है। उनका पंजीयन दुबारा करने आवश्यक नही होगा। सिर्फ जिन्होने अब तक गोबर नहीं बेचा है, उनका ही पंजीयन कराये जाने को कहा है। उन्होने गौठान नोडल अधिकारियों को अभियान चलाकर शेष सभी गोबर विके्रता का पंजीयन कराने कहा है। एप के संबंध में सभी नोडल अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसके बाद भी अगर कही पर भी कोई कठिनाई आती है, तो जिलास्तरिय अधिकारी या फिर चिप्स के हेल्पलाईन नम्बर पर कॉल करके समस्या का समाधन कर सकते है। उन्होने कहा कि इस एप को सहायता से पंजीकृत हिजग्राही अपने पंजीयन की जानकारी जैसे व्यक्तिगत विवरण, बैक विवरण एवं संबंधित गौठान का नाम देख पाएगें। इसमें हितग्राही द्वारा बेचे गए गोबर की तिथिवार जानकारी एवं विक्रय से प्राप्त राशि को जानकारी आसानी से देख सकेगें।

       शौर्यपथ / किसी भी रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए व्यवहार प्रमुख आधार होता है। कद-काठी या रंग-रूप का ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ता। लेकिन एक हालिया अध्ययन की मानें तो थोड़ी मोटी काया वाले पुरुष बेहतर पिता साबित होते हैं। उन्हें बेहतर अभिभावकीय क्षमता वाला आंका जाता है।

    शोधकर्ताओं के मुताबिक अभिभावक के तौर ऐसे पुरुष बच्चों से दुबली कद-काठी वाले पिताओं की तुलना में बेहतर रूप से पेश आते हैं। वहीं अध्ययन में गठीले बदन वाले पिताओं की अभिभावकीय क्षमताओं को नकारात्मक तौर पर आंका गया। द टाइम्स में प्रकाशित इस अध्ययन के मुताबिक लोग पुरुषों की अभिभावकीय क्षमताओं का आकलन उनके शरीर के अनुसार करते हैं।

    प्रतिभागियों को दिखाई तस्वीरें -
    -अध्ययन में शामिल 800 से अधिक प्रतिभागियों को दुबले, सामान्य, थोड़े मोटे और अधिक वजन वाले पुरुषों की तस्वीरें दिखाई गईं। फिर उनसे इसके आधार पर बेहतर पिता की छवि के बारे में पूछा गया। दुबली काया वाले पुरुषों को लेकर प्रतिभागियों ने उनके अभिभावक वाले गुणों को नकारात्मक आंका। वहीं, थोड़े ज्यादा वजन वाले पिताओं को बेहतर पिता माना।

    बच्चों पर विचार नहीं थोपते-
    यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न मिसिसिपी के शोधकर्ताओं ने बताया कि ज्यादा वजन वाले पिताओं को लेकर हम मानते हैं कि वह बच्चों पर जल्दी अपने विचार नहीं थोपते हैं। इसलिए बच्चों से उनके रिश्ते कीफी मजबू होते हैं। लोग अक्सर इसकी मिसालें भी दिया करते हैं। हालांकि, अध्ययन में यह भी कहा गया कि बहुत अधिक वजन होना भी ठीक नहीं। इससे भी पिता के तौर पर नकारात्मक छवि ही बनती है।

     

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