July 24, 2026
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    लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / ईयरफोन लगाकर संगीत सुनते समय लोग अक्सर इस कदर मशगूल हो जाते हैं कि उन्हें पता ही नहीं चलता कि आसपास क्या घट रहा है। कई बार वे आपात स्थिति से भी अनजान रहते हैं। मगर अब ऐसा नहीं होगा।

    दरअसल, गूगल अपने पिक्सल बड्स में अटेंशन अलर्ट फीचर , शामिल करने जा रहा है। इससे ईयरफोन एआई और सेंसर की मदद से आपात स्थितियों को पहचानकर संगीत की ध्वनि धीमी कर देगा, ताकि यूजर को पता चल सके कि उसके आसपास क्या हो रहा है। नया अपडेट गूगल के टच कंट्रोल हेडफोन में उपलब्ध है।

    अटेंशन अलर्ट फीचर कुत्ते के भौंकने और बच्चे के रोने की आवाज के अलावा एंबुलेंस के सायरन की ध्वनि भांप सकेगा। गूगल अपने पिक्सल बड ईयरफोन के लिए इस आपातकालीन साउंड डिटेक्शन मोड का परीक्षण कर रहा है।

    इस मोड से आपात स्थिति आने पर पिक्सल बड्स में संगीत की आवाज खुद ही धीमी हो जाएगी और यूजर को आसपास की स्थिति का अंदाजा लग सकेगा। फिलहाल इस फीचर का परीक्षण चल रहा है। हालांकि, इससे बैटरी जल्द खर्च होगी।

    ऐसे कर सकेंगे इस्तेमाल-
    -एंड्रॉयड-10 से लैस पिक्सल फोन की सेटिंग में जाकर कनेक्टेड डिवाइस का विकल्प चुनें। इसके बाद पिक्सल बड्स सेटिंग्स में जाएं और साउंड के विकल्प पर टैप करें। फिर एक्सपेरिमेंटल सेक्शन में जाकर अलर्ट को ऑन या ऑफ करें।

     

    खाना खजाना / शौर्यपथ / वेज बिरयानी बहुत ही स्‍वादिष्‍ट होती है। वेज बिरयानी बनाने का तरीका बहुत आसान है। यह झटपट तैयार होने वाली रेसिपी है, आइए सीखतें हैं - वेज बिरयानी बनाने की विधि -
    सामग्री
    बासमती चावल - 1 कप
    देशी घी - 1/4 कप
    तेल - 1/4 कप
    जीरा - 1/2 छोटी चम्मच
    हल्दी पाउडर - 1/4 छोटी चम्मच
    अदरक - 1 इंच टुकड़ा कद्दूकस किया हुआ
    धनिया पाउडर - 1 छोटी चम्मच
    लाल मिर्च पाउडर - 1/4 छोटी चम्मच
    नमक - स्वादानुसार
    काजू - 2 टेबल स्पून
    काली मिर्च - 7-8
    बड़ी इलाइची- 2
    लॉग - 5-6
    फूल गोभी कटा हुआ - 1 कप,
    हरा धनियां - 2 बारीक कटा हुआ,
    गाजर - दो तीन कटी हुई
    मटर - आधी कटोरी
    आलू -आधी कटोरी
    टमाटर -आधी कटोरी
    प्याज -आधी कटोरी
    विधि
    सबसे पहले सभी सब्जियों को अच्छे से साफ करके काट लें और अब कुकर में देशी घी डालकर गर्म करें। फिर उसमें जीरा और खड़े मसाले डालकर भूनें और अब प्याज डालकर सुनहरा होने तक भूनें अब उसमें कटी हुई सब्जियां, सभी मसाले और चावल डालकर चलाएं चावलों को एक मिनट लिए चलाएं। अच्छे से मसालों में मिला दें और अब पानी डालकर कुकर बंद कर दें। एक सीटी लगाकर गैस बंद कर दें और जब कुकर का प्रेशर निकल जाए तब हरा धनिया डालकर गर्मागर्म वेज बिरयानी का आनंद लें।
    ध्यान रखें खड़े मसाले को ही साबुत मसाले कहा जाता है। कुकर में चावल यदि गिलास से नाप के रखें जाएं तो ज्यादा अच्छा रहता है क्योंकि पानी का अंदाज आसानी से लगा सकते हैं। एक गिलास चावल में डेढ़ गिलास पानी और 2 गिलास चावल में ढाई गिलास पानी। लेकिन याद रखे चावल बासमती ही होने चाहिए।

     

    सेहत / शौर्यपथ / आमतौर पर वजन कम करने के लिए लोग सबसे पहले खाना छोड़ देते हैं या डाइटिंग करना शुरू कर देते हैं लेकिन इन सब तरीकों से वजन कम करने की जगह शरीर में कमजोरी आ जाती हैं और बार-बार बीमार होने का खतरा मंडराने लगता है। ऐसे में ध्यान देने की बात यह है कि वजन कम होने पर कमजोरी महसूस न होना ही एक हेल्दी वेट का संकेत है। ऐसे में अगर आप वजन कम करना चाहते हैं, तो आपको नाश्ते में हेल्दी चीजें लेनी चाहिए. आइए, जानते हैं कौन-सी हैं वे चीजें-

     

    दलिया- वजन संतुलित रखने के लिए ज्यादातर लोग दलिया का सेवन करते हैं। इसे आप दूध में मिलाकर या फिर सब्जियों के साथ बनाकर खा सकते है। कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, मिनरल से भरपूर दलिया आसानी से पच जाता है।

    ओट्स- फाइबर का स्त्रोत माना जाता है। इसमें एंटीऑक्सिडेंट भी होते हैं, जो आपको स्वस्थ रखने के साथ दिल की बीमारियों से भी बचाते हैं। ओट प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार है और शुगर व कॉलेस्ट्रॉल को कंट्रोल में रखता है।

    मल्टीग्रेन ब्रेड सैंडविच- नाश्ते के लिए मल्टीग्रेन ब्रेड सैंडविच सबसे फायदेमंद है। इसमें आप सब्जियां जैसे टमाटर, खीरा आदि डालकर बना सकते है।

     

    धर्म संसार / शौर्यपथ / हिंदू कैलेंडर में हर तीन साल में एक बार एक अतिरिक्त माह का प्राकट्य होता है, जिसे अधिक मास, मल मास या पुरुषोत्तम मास के नाम से जाना जाता है। हिंदू धर्म में इस माह का विशेष महत्व है। संपूर्ण भारत की हिंदू धर्मपरायण जनता इस पूरे मास में पूजा-पाठ, भगवत भक्ति, व्रत-उपवास, जप और योग आदि धार्मिक कार्यों में संलग्न रहती है।

    ऐसा माना जाता है कि अधिक मास में किए गए धार्मिक कार्यों का किसी भी अन्य माह में किए गए पूजा-पाठ से 10 गुना अधिक फल मिलता है। यही वजह है कि श्रद्धालुजन अपनी पूरी श्रद्धा और शक्ति के साथ इस मास में भगवान को प्रसन्न कर अपना इहलोक तथा परलोक सुधारने में जुट जाते हैं।

    अब सोचने वाली बात यह है कि यदि यह माह इतना ही प्रभावशाली और पवित्र है, तो यह हर तीन साल में क्यों आता है? आखिर क्यों और किस कारण से इसे इतना पवित्र माना जाता है? इस एक माह को तीन विशिष्ट नामों से क्यों पुकारा जाता है? इसी तरह के तमाम प्रश्न स्वाभाविक रूप से हर जिज्ञासु के मन में आते हैं। तो आज ऐसे ही कई प्रश्नों के उत्तर और अधिक मास को गहराई से जानते हैं-
    वैज्ञानिक आधार-

    अधिक मास- वशिष्ठ सिद्धांत के अनुसार भारतीय हिंदू कैलेंडर सूर्य मास और चंद्र मास की गणना के अनुसार चलता है। अधिक मास चंद्र वर्ष का एक अतिरिक्त भाग है, जो हर 32 माह, 16 दिन और 8 घटी के अंतर से आता है। इसका प्राकट्य सूर्य वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच अंतर का संतुलन बनाने के लिए होता है। भारतीय गणना पद्धति के अनुसार प्रत्येक सूर्य वर्ष 365 दिन और करीब 6 घंटे का होता है, वहीं चंद्र वर्ष 354 दिनों का माना जाता है। दोनों वर्षों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर होता है, जो हर तीन वर्ष में लगभग 1 मास के बराबर हो जाता है। इसी अंतर को पाटने के लिए हर तीन साल में एक चंद्र मास अस्तित्व में आता है, जिसे अतिरिक्त होने के कारण अधिक मास का नाम दिया गया है।
    अधिक मास का पौराणिक आधार-

    अधिक मास के लिए पुराणों में बड़ी ही सुंदर कथा सुनने को मिलती है। यह कथा दैत्यराज हिरण्यकश्यप के वध से जुड़ी है। पुराणों के अनुसार दैत्यराज हिरण्यकश्यप ने एक बार ब्रह्मा जी को अपने कठोर तप से प्रसन्न कर लिया और उनसे अमरता का वरदान मांगा। चूंकि अमरता का वरदान देना निषिद्ध है, इसीलिए ब्रह्मा जी ने उसे कोई भी अन्य वर मांगने को कहा। तब हिरण्यकश्यप ने वर मांगा कि उसे संसार का कोई नर, नारी, पशु, देवता या असुर मार ना सके। वह वर्ष के 12 महीनों में मृत्यु को प्राप्त ना हो। जब वह मरे, तो ना दिन का समय हो, ना रात का। वह ना किसी अस्त्र से मरे, ना किसी शस्त्र से। उसे ना घर में मारा जा सके, ना ही घर से बाहर मारा जा सके।

    इस वरदान के मिलते ही हिरण्यकश्यप स्वयं को अमर मानने लगा और उसने खुद को भगवान घोषित कर दिया। समय आने पर भगवान विष्णु ने अधिक मास में नरसिंह अवतार यानि आधा पुरुष और आधे शेर के रूप में प्रकट होकर, शाम के समय, देहरी के नीचे अपने नाखूनों से हिरण्यकश्यप का सीना चीर कर उसे मृत्यु के द्वार भेज दिया।

    मल मास क्यों कहा गया?-

    हिंदू धर्म में अधिक मास के दौरान सभी पवित्र कर्म वर्जित माने गए हैं। माना जाता है कि अतिरिक्त होने के कारण यह मास मलिन होता है। इसलिए इस मास के दौरान हिंदू धर्म के विशिष्ट व्यक्तिगत संस्कार जैसे नामकरण, यज्ञोपवीत, विवाह और सामान्य धार्मिक संस्कार जैसे गृह प्रवेश, नई बहुमूल्य वस्तुओं की खरीदी आदि आमतौर पर नहीं किए जाते हैं। मलिन मानने के कारण ही इस मास का नाम मल मास पड़ गया है।
    पुरुषोत्तम मास का नाम क्यों और कैसे पड़ा-

    अधिक मास के अधिपति स्वामी भगवान विष्णु माने जाते हैं। पुरुषोत्तम भगवान विष्णु का ही एक नाम है। इसीलिए अधिक मास को पुरुषोत्तम मास के नाम से भी पुकारा जाता है। इस विषय में एक बड़ी ही रोचक कथा पुराणों में पढ़ने को मिलती है। कहा जाता है कि भारतीय मनीषियों ने अपनी गणना पद्धति से हर चंद्र मास के लिए एक देवता निर्धारित किए। चूंकि अधिक मास सूर्य और चंद्र मास के बीच संतुलन बनाने के लिए प्रकट हुआ, तो इस अतिरिक्त मास का अधिपति बनने के लिए कोई देवता तैयार ना हुआ। ऐसे में ऋषि-मुनियों ने भगवान विष्णु से आग्रह किया कि वे ही इस मास का भार अपने उपर लें। भगवान विष्णु ने इस आग्रह को स्वीकार कर लिया और इस तरह यह मल मास के साथ पुरुषोत्तम मास भी बन गया।
    इसका महत्व क्यों है?-

    हिंदू धर्म के अनुसार प्रत्येक जीव पंचमहाभूतों से मिलकर बना है। इन पंचमहाभूतों में जल, अग्नि, आकाश, वायु और पृथ्वी सम्मिलित हैं। अपनी प्रकृति के अनुरूप ही ये पांचों तत्व प्रत्येक जीव की प्रकृति न्यूनाधिक रूप से निश्चित करते हैं। अधिक मास में समस्त धार्मिक कृत्यों, चिंतन-मनन, ध्यान, योग आदि के माध्यम से साधक अपने शरीर में समाहित इन पांचों तत्वों में संतुलन स्थापित करने का प्रयास करता है। इस पूरे मास में अपने धार्मिक और आध्यात्मिक प्रयासों से प्रत्येक व्यक्ति अपनी भौतिक और आध्यात्मिक उन्नति और निर्मलता के लिए उद्यत होता है। इस तरह अधिक मास के दौरान किए गए प्रयासों से व्यक्ति हर तीन साल में स्वयं को बाहर से स्वच्छ कर परम निर्मलता को प्राप्त कर नई उर्जा से भर जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दौरान किए गए प्रयासों से समस्त कुंडली दोषों का भी निराकरण हो जाता है।
    अधिक मास में क्या करना उचित-

    आमतौर पर अधिक मास में हिंदू श्रद्धालु व्रत-उपवास, पूजा-पाठ, ध्यान, भजन, कीर्तन, मनन को अपनी जीवनचर्या बनाते हैं। पौराणिक सिद्धांतों के अनुसार इस मास के दौरान यज्ञ-हवन के अलावा श्रीमद् देवीभागवत, श्री भागवत पुराण, श्री विष्णु पुराण, भविष्योत्तर पुराण आदि का श्रवण, पठन, मनन विशेष रूप से फलदायी होता है। अधिक मास के अधिष्ठाता भगवान विष्णु हैं, इसीलिए इस पूरे समय में विष्णु मंत्रों का जाप विशेष लाभकारी होता है। ऐसा माना जाता है कि अधिक मास में विष्णु मंत्र का जाप करने वाले साधकों को भगवान विष्णु स्वयं आशीर्वाद देते हैं, उनके पापों का शमन करते हैं और उनकी समस्त इच्छाएं पूरी करते हैं।
    पितृ पक्ष और नवरा‍त्रि प्रारंभ
    में
    लगभग एक मास का अंतर क्यों !

    वर्ष 2020 में पितृ पक्ष 02 सितंबर 2020 से प्रारंभ होकर 17 सितंबर 2020 तक रहेगा, इसके बाद 18 सितंबर से 16 अक्टूबर 2020 तक मल मास रहेगा जिस कारण पितृ पक्ष और नवरा‍त्रि में लगभग एक मास का अंतर होगा। ऐसा संयोग इसके पूर्व 1963 और 2001 में हुआ था।

    शौर्यपथ । पतितपावनी गंगा को देव नदी कहा जाता है क्योंकि शास्त्रों के अनुसार गंगा स्वर्ग से धरती पर आई है। मान्यता है कि गंगा श्री हरि विष्णु के चरणों से निकली है और भगवान शिव की जटाओं में आकर बसी है। श्री हरि और भगवान शिव से घनिष्ठ संबंध होने पर गंगा को पतित पाविनी कहा जाता है। मान्यता है कि गंगा में स्नान करने से मनुष्य के सभी पापों का नाश हो जाता है। एक दिन देवी गंगा श्री हरि से मिलने बैकुण्ठ धाम गई और उन्हें जाकर बोली," प्रभु ! मेरे जल में स्नान करने से सभी के पाप नष्ट हो जाते हैं लेकिन मैं इतने पापों का बोझ कैसे उठाऊंगी? मेरे में जो पाप समाएंगे उन्हें कैसे समाप्त करूंगी?" इस पर श्री हरि बोले,"गंगा! जब साधु, संत, वैष्णव आ कर आप में स्नान करेंगे तो आप के सभी पाप घुल जाएंगे।" गंगा नदी इतनी पवित्र है की प्रत्येक हिंदू की अंतिम इच्छा होती है उसकी अस्थियों का विसर्जन गंगा में ही किया जाए लेकिन यह अस्थियां जाती कहां हैं? इसका उत्तर तो वैज्ञानिक भी नहीं दे पाए क्योंकि असंख्य मात्रा में अस्थियों का विसर्जन करने के बाद भी गंगा जल पवित्र एवं पावन है। गंगा सागर तक खोज करने के बाद भी इस प्रश्न का पार नहीं पाया जा सका। सनातन धर्म की मान्यता के अनुसार मृत्यु के बाद आत्मा की शांति के लिए मृत व्यक्ति की अस्थि को गंगा में विसर्जन करना उत्तम माना गया है। यह अस्थियांं सीधे श्री हरि के चरणों में बैकुण्ठ जाती हैं। जिस व्यक्ति का अंत समय गंगा के समीप आता है उसे मरणोपरांत मुक्ति मिलती है। इन बातों से गंगा के प्रति हिन्दूओं की आस्था तो स्वभाविक है। वैज्ञानिक दृष्टि से गंगा जल में पारा अर्थात (मर्करी) विद्यमान होता है जिससे हड्डियों में कैल्सियम और फोस्फोरस पानी में घुल जाता है। जो जलजन्तुओं के लिए एक पौष्टिक आहार है। हड्डियों में गंधक (सल्फर) विद्यमान होता है जो पारे के साथ मिलकर पारद का निर्माण होता है। इसके साथ-साथ यह दोनों मिलकर मरकरी सल्फाइड साल्ट का निर्माण करते हैं। हड्डियों में बचा शेष कैल्शियम, पानी को स्वच्छ रखने का काम करता है। धार्मिक दृष्टि से पारद शिव का प्रतीक है और गंधक शक्ति का प्रतीक है। सभी जीव अंततःशिव और शक्ति में ही विलीन हो जाते हैं। हर हर गंगे

    नई दिल्ली । शौर्यपथ । ऑनलाइन सेक्स रैकेट चलाने वाले तीन युवकों को कोतवाली पुलिस ने किदवईपुरी इलाके में स्थित होटल के समीप से गिरफ्तार कर लिया। वहीं दो कॉलगर्ल और एक महिला दलाल को भी पुलिस ने पकड़ा है। कॉलगर्ल कोलकाता की रहने वाली है। दरअसल कोतवाली थानेदार रामशंकर सिंह को यह खबर मिली थी कि जिस्मफरोशी के धंधे में शामिल कुछ लड़के किदवईपुरी इलाके में घूम रहे हैं। इसके बाद पुलिस ने अपनी पहचान छिपाकर इसमें शामिल लड़कों को पकड़ा। सूत्रों की मानें तो इन्हीं युवकों की निशानदेही पर एक महिला दलाल व दो कॉलगर्ल को पकड़ा गया। पकड़े गये युवकों में बुद्धा कॉलोनी बांसघाट का रहने वाला आलोक रंजन, पूर्णिया के रौटा का रहने वाला मन्नौवर आलम और परसा के ब्रह्मस्थान का कुंदन कुमार शामिल है। पुलिस ने सभी से पूछताछ की है। काफी दिनों से ये लोग पटना के अलग-अलग इलाकों में सेक्स रैकेट चला रहे थे।

    शौर्यपथ / अमेरिका में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय (यूसी)- डेविस के वैज्ञानिकों ने एक नए अध्ययन में दावा किया है कि पशुओं की कई प्रजातियां कोरोना महामारी की चपेट में आ सकती हैं। अध्ययन के अनुसार कोविड-19 बीमारी का कारण बनने वाले कोरोना वायरस के संभावित खतरे का सामना करने वाली एकमात्र प्रजाति मनुष्य नहीं है। पशुओं की कई प्रजातियों को भी बड़ा खतरा है।
    अध्ययन के अनुसार कई गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजातियां जैसे कि पश्चिमी गोरिल्ला, ऑरंगुटन और गाल पर सफेद बाल वाले काले लंगूर आदि वायरस से संक्रमण के लिए अतिसंवेदनशील हो सकते हैं। समुद्री स्तनधारियों जैसे ग्रे व्हेल और बॉटलनोज डॉल्फिन के साथ-साथ चीनी हैम्स्टर में भी वायरस के उच्च जोखिम में हैं।
    वैज्ञानिकों ने कहा कि घरेलू पशुओं में बिल्लियों, मवेशियों और भेड़ों में एक मध्यम जोखिम पाया गया, जबकि कुत्तों, घोड़ों और सूअरों के लिए कम जोखिम है। वैज्ञानिकों ने एसीई-2 रिसेप्टर प्रोटीन की संरचना की तुलना करने के लिए जीनोमिक विश्लेषण का उपयोग किया। जो कोरोना वायरस, मछली सहित उभयचर, सरीसृप और स्तनधारी कशेरुकी जीवों की 410 विभिन्न प्रजातियों की कोशिकाओं में प्रवेश करने के लिए उपयोग करता है।
    पीएनएएस नामक पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, एसीई-2 सामान्य रूप से कई अलग-अलग प्रकार की कोशिकाओं और ऊतकों में पाया जाता है, जिसमें नाक, मुंह और फेफड़ों की बाहरी परत को शामिल करने वाली कोशिकाएं शामिल हैं। अध्ययन के प्रमुख लेखक हैरिस लेविन ने कहा, हमें उम्मीद है कि यह उन प्रतिक्रियाओं को प्रेरित करेगा, जो महामारी के दौरान पशु और मानव स्वास्थ्य दोनों की रक्षा करती हैं।

     

    खाना खजाना / शौर्यपथ / अक्सर मन कुछ चटपटा खाने का करता है। ऐसे में बाहर से कुछ खाने की बजाय आप घर में ही भरवा चीज मिर्ची रेसिपी ट्राई कर सकते हैं। यह रेसिपी उन लोगों को खासतौर पर पसंद आएगी, जो तीखा या चटपटा खाने के शौकीन लोगों को खासतौर पर पसंद आएगी-

    विधि:
    5 हरी मिर्च
    20 ग्राम पनीर
    10 ग्राम जालपीनो
    10 ग्राम अजवायन
    10 ग्राम सफेद मिर्च पाउडर
    आवश्यकतानुसार ब्रेड क्रम्ब्स
    आवश्यकतानुसार पानी
    20 ग्राम चेडर चीज़
    10 ग्राम शिमला मिर्च (हरी मिर्च)
    10 ग्राम मिर्च साबुत
    10 ग्राम काली मिर्च
    30 ग्राम बेसन (बेसन)
    तलने के लिए तेल

    विधि :
    इस स्वादिष्ट रेसिपी को तैयार करने के लिए, मिर्च और शिमला मिर्च को पानी से धोएं फिर, हरी मिर्च को सेंटर से, लम्बाई में और शिमला मिर्च को डाइस करें। एक गहरी तली का पैन लें और मध्यम आंच पर रखकर उसमें पानी उबालें। अब मिर्च को इस खोलते हुए पानी में 1 मिनट के लिए डाल दें। एक मिनट बाद इन्हें बाहर निकालें और ठंडे पानी में धो लें।
    एक बड़ा कटोरा लें और उसमें चीज़ और पनीर को पीस लें। अगर आपके पास चीज नहीं है, तो आप सिर्फ पनीर से भी काम चला सकते हैं
    इस मिश्रण में सफेद काली मिर्च पाउडर, काली मिर्च और अजवायन के साथ घिसी हुई शिमला मिर्च, जालपैनो और चिली फ्लेक्स डालें। इस मिश्रण से मिर्च को स्टफ करें और एक तरफ रख दें।
    एक बाउल लें और उसमें बेसन को पानी में मिलाएं। इस मिश्रण को कुछ गाढ़ा बनाएं ताकि इसमें मिर्च डुबोने पर यह मिर्च को कवर करते हुए चिपक जाए। अब एक अलग बोल में ब्रेड का चूरा डालें और एक तरफ रख दें
    एक कढ़ाही लें और उसे मध्यम आंच पर गर्म करें। अब उसमें तलने के लिए तेल गरम करें। इस बीच, भरवां मिर्च लें और उन्हें बैटर और फिर ब्रेड क्रम्ब्स में डिप करें। जब तेल पर्याप्त गर्म हो जाए तो ध्यान से मिर्च को कढ़ाही में डालें और उन्हें सुनहरा भूरा होने तक तलें।
    अच्छी तरह तल जाने पर इन्हें एक प्लेट में निकालें। इस प्लेट में पहले ही टिश्यू पेपर बिछाकर रख लें ताकि यह एक्स्ट्रा ऑइल सोख ले। अब इन्हें गर्मागर्म ही हरी और लाल चटनी के साथ सर्व करें।

     

     

    सेहत / शौर्यपथ / काली मिर्च मसालों में एक ख़ास जगह रखता है। इसके इस्तेमाल से खाने का स्वाद बढ़ जाता है. आयुर्वेद में भी काली मिर्च को एक औषधि और जड़ी-बूटी माना जाता हैं। यही वजह है कि कोरोना वायरस महामारी से बचाव के लिए काली मिर्च को इम्युनिटी बूस्टर माना जाता है। काली मिर्च के कई फायदे हैं, जिनके बारे में जानकार आप इसका लाभ उठा सकते हैं।

    काली मिर्च में पैपरीन नामक तत्व पाया जाता है। यह तत्व औषधीय गुणों से भरपूर है। इसमें आयरन, पोटैशियम, मैग्नीशियम, मैंग्नीज, जिंक, क्रोमियम, विटामिन ए और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं।

    सर्दी-खांसी होने पर 8-10 काली मिर्च, 10-15 तुलसी के पत्ते मिलाकर चाय बनाकर पीने से आराम मिलता है।
    100 ग्राम गुड़ पिघला कर 20 ग्राम काली मिर्च का पाउडर उसमंप मिलाएं। थोड़ा ठंडा होने पर उसकी छोटी-छोटी गोलियां बना लें। खाना खाने के बाद 2-2 गोलियां खाने से खांसी में आराम मिलता है।
    दो चम्मच दही, एक चम्मच चीनी और 6 ग्राम पिसी काली मिर्च मिलाकर चाटने से काली और सूखी खांसी में आराम मिलता है।
    एक चम्मच शहद में 2-3 पिसी काली मिर्च और चुटकी भर हल्दी मिलाकर खाने से जुकाम में बनने वाले कफ से राहत मिलेगी।
    नाक में एलर्जी होने पर 10-10 ग्राम सोंठ, काली मिर्च, पिसी इलायची और मिश्री को पीस कर चूर्ण बना लें। इसमें बीज निकला 50 ग्राम मुनक्का और तुलसी के 10 पत्ते पीसकर डालें और अच्छी तरह मिला लें। इस मिश्रण की 3-5 ग्राम की गोलियां बनाकर छाया में सुखा लें। सुबह-शाम 2-2 गोलियां गर्म पानी के साथ लें।
    पिसी काली मिर्च पुराने गुड़ के साथ खाने से नाक से बहता खून बंद हो जाता है।
    गला बैठ गया है, तो 7 काली मिर्च और 7 बताशे रात को सोने से पहले चबाकर खाएं।
    बुखार में तुलसी, काली मिर्च और गिलोय का काढ़ा पीना फायदेमंद होता है।
    फेफड़े और सांस नली में संक्रमण होने पर काली मिर्च और पुदीने की चाय का सेवन करें। इसके अलावा पिसी काली मिर्च, घी और मिश्री बराबर मात्रा में मिलाएं। सुबह-शाम एक-एक चम्मच लें, लाभ होगा।
    काली मिर्च और काला नमक दही में मिलाकर खाने से पाचन संबंधी विकार दूर होते हैं। छाछ में काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर पीने से पेट के कीटाणु मरते हैं और पेट की बीमारियां दूर होती हैं।
    पेट में गैस की समस्या होने पर एक कप पानी में आधा नीबू का रस, आधा चम्मच पिसी काली मिर्च और आधा चम्मच काला नमक मिला कर पिएं।
    कब्ज होने पर 4-5 काली मिर्च के दाने दूध के साथ रात में लेने से आराम मिलता है।
    बदहजमी होने पर कटे नीबू के आधे टुकड़े के बीज निकाल कर काली मिर्च और काला नमक भरें। इसे तवे पर थोड़ा गर्म करके चूसें।
    20 ग्राम काली मिर्च, 10 ग्राम जीरा और 15 ग्राम शक्कर या मिश्री पीस कर मिश्रण बना लें। इसे सुबह-शाम पानी के साथ फांक लें। बवासीर रोग में आराम मिलेगा।
    काली मिर्च आंखों के लिए उपयोगी है। भुने आटे में देसी घी, काली मिर्च और चीनी मिला कर मिश्रण बनाएं। सुबह-शाम 5 चम्मच मिश्रण का सेवन करें।
    नमक के साथ काली मिर्च मिलाकर दांतों में मंजन करने से पायरिया ठीक होता है। दांतों में चमक और मजबूती बढ़ती है।
    मुंह से बदबू आती है, तो दो काली मिर्च रात को ब्रश करने से पहले चबा लें।
    ब्लड पे्रशर काबू करने के लिए दिन में 2-3 बार 5-5 दाने काली मिर्च के साथ 20-20 दाने किशमिश का सेवन करें।
    हाई ब्लड प्रेशर में आधा गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच काली मिर्च पाउडर घोल कर 2-2 घंटे
    के अंतराल पर पीने से आराम मिलता है।
    माइग्रेन होने पर एक कप दूध में एक चम्मच पिसी काली मिर्च और एक चुटकी हल्दी मिला कर उबाल कर पिएं।
    काली मिर्च शहद में मिलाकर खाने से कमजोर याददाश्त में फायदा होता है।
    चेहरे पर झाइयां होने पर एक गिलास गाजर के रस में नमक और पिसी काली मिर्च मिलाकर पीना फायदेमंद है।
    चेहरे पर झाइयां होने पर काली मिर्च, जायफल और चंदन तीनों का पाउडर बराबर मात्रा में मिलाएं। 2-3 चुटकी पाउडर और थोड़ा पानी मिलाकर उबटन बनाएं। इसे चेहरे पर लगाएं। सूखने पर सादे पानी से चेहरा धो लें।
    शरीर के किसी भी अंग में सूजन होने पर काली मिर्च का लेप लगाएं, आराम मिलेगा।

     

    खेल / शौर्यपथ / टीम इंडिया के पूर्व तेज गेंदबाज आरपी सिंह का मानना है कि महेंद्र सिंह धोनी में मैच को खत्म करने की जो स्किल्स थी, वो किसी और में नहीं है। इस मामले में उन्होंने धोनी को 'बीस्ट' बताया है। आरपी सिंह ने फिनिशर के तौर पर एक और खिलाड़ी का नाम लिया है, जिसने अपने देश को कई मैच जिताए और वो हैं ऑस्ट्रेलिया के पूर्व क्रिकेटर माइकल बेवन, लेकिन साथ ही कहा कि धोनी जैसा कोई फिनिशर नहीं रहा है। अपने करियर में धोनी ने ज्यादातर नंबर-5 या नंबर-6 पर बल्लेबाजी की है।

    'खुद धोनी नंबर-4 पर बल्लेबाजी करना चाहते थे'

    आरपी सिंह का मानना है कि धोनी अगर बैटिंग ऑर्डर में ऊपर खेलने आते तो उनका रिकॉर्ड और भी बेहतर होता, लेकिन वो खुद लोअर ऑर्डर में खेले, जिससे वो दबाव में भी टीम को जीत दिला सकें। Cricket.com को दिए इंटरव्यू में आरपी सिंह ने कहा, 'अगर मैं गलत नहीं हूं तो धोनी ने एक इंटरव्यू में खुद कहा था कि वो नंबर-4 पर बल्लेबाजी करना चाहते हैं, लेकिन टीम ने सोचा था कि लोअर ऑर्डर में दबाव में उनसे बेहतर खेलने वाला और कोई नहीं है। अगर आप इस खेल के इतिहास के बारे में बात करें तो आपको कभी धोनी जैसा कोई खिलाड़ी नहीं मिलेगा, जिसने लोअर ऑर्डर में बल्लेबाजी करके अपनी टीम को इतना सारे मैच जिताए हों।'
    'अब हम देखेंगे कि क्या वो सच में रिटायर हो गए हैं'

    उन्होंने आगे कहा, 'हम माइकल बेवन के बारे में बात कर सकते हैं, लेकिन एमएस एकदम अलग तरह के 'बीस्ट' थे इस मामले में।' आरपी सिंह ने धोनी के ऑफ-फील्ड नेचर के बारे में भी बात की और कहा कि वो हमेशा से जमीन से जुड़े शख्स रहे हैं। उन्होंने कहा, 'वो हमेशा से जमीन से जुड़े व्यक्ति रहे हैं। हम इसकी शिकायत करते रहते हैं कि वो हमारे फोन कॉल्स नहीं उठाते, एक बार उन्होंने मुनफ पटेल और मुझसे कहा था, जब मैं रिटायर हो जाऊंगा तो आधी रिंग में ही फोन उठा लूंगा, अब हम देखेंगे कि क्या वो सच में रिटायर हो गए हैं।'

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