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धर्म संसार / शौर्यपथ /खुशहाली का संदेश देने वाला त्योहार ओणम दक्षिण भारत विशेषकर केरल में बहुत ही उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह ऐसा त्योहार है जो केरल के राजा महाबली की याद में हर वर्ष मनाया जाता है। दस दिनों तक इस उत्सव को उल्लास से मनाया जाता है। यह त्योहार संपूर्णता से भरा हुआ है। हर घर को यह पर्व खुशियों से भर देता है। प्रत्येक घर को फूलों से सजाया जाता है। यह ऐसा त्योहार है जिसमें पूजा मंदिर में नहीं बल्कि घर में की जाती है।
इस त्योहार को लेकर पौराणिक कथा के अनुसार केरल में महाबली नामक राजा राज्य करते थे। भगवान श्री हरि विष्णु ने वामन अवतार धारण कर उनसे तीन पग भूमि मांगी और तीन पग में तीनों लोक को माप लिया। भगवान वामन ने जब तीसरा पग रखा तो राजा बलि पाताल लोक चले गए। राजा बलि के दान और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उनसे वर मांगने को कहा। राजा बलि ने कहा कि प्रभु मैं वर्ष में एक बार अपनी प्रजा से मिलने का समय चाहता हूं। माना जाता है कि ओणम पर राजा बलि अपनी प्रजा से मिलने आते हैं और अपनी प्रजा के लिए उमंग तथा खुशियां लाते हैं। इस त्योहार में भगवान श्री हरि विष्णु की आराधना की जाती है। भगवान के वामन अवतार की पूजा की जाती है। ओणम मलयाली हिंदुओं का नववर्ष माना जाता है।
धर्म संसार / शौर्यपथ / उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में कोरोना संक्रमण के चलते इस साल मोहर्रम में सड़कें वीरान रही वहीं लोगों ने घर में ही रहकर कर्बला के शहीदों को याद किया।
जिले में अबकी बार एक से 10वीं तक निकलने वाले गश्ती, मातम और इमामबाड़ा से निकलने वाला शाही जूलूस कोरोना के कारण स्थगित रहा। राज्य सरकार के निदेर्शों और स्थानीय पुलिस प्रशासन के सख्ती के कारण जहां वह इमाम हुसेन और कर्बला के शहीदों के गम को नहीं मना सके वहीं उन्हें इस बात का दुख था कि ऐसा न कर पाने के कारण कहीं कोई अनहोनी न न हो जाये।इस बार मुहर्रम का जूलूस स्थगित हो जाने से सबसे ज्यादा ठेले, मुहर्रम में ताजिया बनाने वालों और अलम उठाने वालो पर पड़ा है। उल्लेखनीय है कि गोरखपुर का मुहर्रम पूरे प्रदेश में सबसे मशहूर है और पूवीर् उत्तर प्रदेश के अधिकतर जिले अपने मुहर्रम के कार्यक्रम गोरखपुर में स्थित इमाम बाडा के मियां साहब फरूख अदनान शाह के निदेर्शों पर होता है।
शिया और सुन्नी समुदाय के लोग मुहर्रम अपने-अपने तौर तरीकों से मनाते हैं। शिया समुदाय के लोगों ने इस दौरान महिलाओं का मजलिस सम्पन्न हुआ जिसमें शहीदों के बलिदान को याद किया गया जबकि सुन्नी समुदाय न कोविड-19 के आदेशों का पालन करते हुए अपने घरों में शहीदे कर्बला पर कार्यक्रम किये गए। 9वीं मुहर्रम को आज शनिवार को इमाम बाडाा पर रखे जाने वाले ताजिये नजर नहीं आये। शहीदों के याद में लोगों को शर्बत भी नहीं पिलाया गया।
इसके अलावा इमाम बाडें में रखे सोने और चांदी के ताजिए का दर्शन करने वाले जो विभिन्न प्रान्तों से भी गोरखपुर आते थे वह नहीं आ सके। इस ताजिए का दर्शन मुहर्रम के एक से दसवी दिन तक किया जाता रहा है। 10वीं मुहर्रम का दरवाजा बन्द हो जाने के बाद अगले साल ही दर्शन करने मौका मिल पायेगा।
छत्तीसगढ़ सरकार जनता के प्रति अपनी जवाबदेही निभा रही है- राहुल गांधी
संसद-विधानसभा संविधान की रक्षा के लिये जरूरी, भावनाओं से बचेगा संविधान- सोनिया गांधी
छत्तीसगढ़ सरकार अंतिम व्यक्ति को ध्यान में रखकर कर रही है फैसले
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल समावेशी दृष्टिकोण से सभी की बेहतरी के लिए कर रहे हैं काम
नये विधानसभा भवन का निर्माण शीघ्र पूरा होगा- मुख्यमंत्री भूपेश बघेल
लोकतंत्र को सुदृढ़ बनाना और लोकतांत्रिक व्यवस्था की अगुवाई हमारा संकल्प- डा. महंत
छत्तीसगढ़ विधासभा भवन के नवीन भवन का नवा रायपुर में शिलान्यास: 270 करोड़ रुपए की लागत से 51 एकड़ में अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त होगा नया भवन

रायपुर / शौर्यपथ / सांसद श्रीमती सोनिया गांधी एवं सांसद राहुल गांधी और मोतीलाल वोरा की वर्चुअल उपस्थिति में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और विधानसभा अध्यक्ष डा. चरणदास महंत ने आज नवा रायपुर में छत्तीसगढ़ विधानसभा के नये भवन के निर्माण के लिए बटन दबाकर शिलापट का अनावरण किया। नवा रायपुर के सेक्टर 19 में लगभग 270 करोड रुपए की लागत से यह भवन महानदी और इंद्रावती भवन के पीछे 51 एकड़ में बनेगा। मुख्य भवन का निर्माण 52 हजार 497 वर्ग मीटर में किया जाएगा।
इस अवसर पर सांसद श्रीमती सोनिया गांधी ने छत्तीसगढ़ विधानसभा के नये भवन के लिए छत्तीसगढ़ की जनता को बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि संसद और विधानसभा लोकतंत्र के सबसे बड़े स्तंभ और पवित्र मंदिर हैं। यहां संविधान की रक्षा होती है, लेकिन यह याद रखना होगा कि संविधान भवनों से नहीं भावनाओं से बचेगा। उन्होंने कहा कि हमारे पुरखों ने आजादी की लड़ाई लड़ी, उनके सपनों पूरा करने के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। श्रीमती सोनिया गांधी ने देश की वर्तमान स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि देश और समाज में नफरत फैलाने वाली ताकतें लोकतंत्र के सामने चुनौती बन गई हैं। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता खतरे में हैं, लोकतांत्रिक संस्थाएं ध्वस्त की जा रही हैं। नफरत फैलाने वाली ताकतें चाहती हैं कि समाज के सभी वर्ग के लोग अपना मुंह बंद रखें। वह देश का मुंह बंद करना चाहती हैं। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, पंडित जवाहर लाल नेहरू, डा. राजेंद्र प्रसाद, बाबा साहब डा. भीमराव अंबेडकर ने यह सोचा नहीं होगा कि आजादी के 73 वर्ष बाद ऐसे कठिन समय का सामना लोगों को करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि आज हम शपथ लें कि हम समाज के अंतिम व्यक्ति को ध्यान में रखकर फैसले लेंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री बघेल और छत्तीसगढ़ सरकार के कामकाज की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार अंतिम व्यक्ति को ध्यान में रखकर फैसले ले रही है। उन्होंने इस मौके पर छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किसानों, आदिवासियों, गरीबों के हित में किए जा रहे कामों के साथ ही राजीव गांधी किसान न्याय योजना, गोधन न्याय योजना, सुपोषण अभियान, तेंदूपत्ता संग्रहण दर में वृद्धि का उल्लेख किया और कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल समावेशी दृष्टिकोण से सभी वर्गों के विकास के लिए काम कर रहे हैं।
सांसद राहुल गांधी ने अपने प्रेषित संदेश में कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार जनता के प्रति अपने उत्तरदायित्व को बेहतर तरीके से निभा रही है। उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार की राजीव गांधी किसान न्याय योजना और गोधन न्याय योजना के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने अपने इस फैसले से किसानों-गरीबों-मजदूरों के हाथों में पैसा पहुंचाने का काम किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि छत्तीसगढ़ सरकार के जनोन्मुखी कार्य आगे भी जारी रहेंगे। श्री राहुल गांधी ने छत्तीसगढ़ के नये विधानसभा के शिलान्यास के लिए सभी को बधाई दी। सांसद राहुल गांधी के इस संदेश का वाचन संसदीय मंत्री रविंद्र चौबे ने किया।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस मौके पर अपने उद्बोधन की शुरुआत छत्तीसगढ़ महतारी और भारत माता के जयकारे से की। उन्होंने कहा कि नवा रायपुर अटल नगर आबाद हो, इसको लेकर छत्तीसगढ़ सरकार चौतरफा उपाय कर रही है। मंत्रिमंडल के सहयोगियों और अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए आवास बनाने की शुरुआत बीते वर्ष की जा चुकी है। कोरोना संक्रमण की वजह से काम में थोड़ा विलंब हुआ। संसदीय सचिवों को नवा रायपुर में ही आवास आबंटित किए गए हैं। मुख्यसचिव नवा रायपुर में निवास करने लगे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगामी वर्षों में यहां राज्यपाल, मंत्रीगण और शासन-प्रशासन से जुड़े सभी लोग रहने लगेंगे, यहां सुविधाएं बढ़ेंगी। इस नये शहर को बसाने की सभी अड़चनें दूर हो जाएंगी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि हमारी यह कोशिश रहेगी कि विधानसभा का नया भवन जल्दी बनकर तैयार हो जाए और हम सब छत्तीसगढ़ की पौने तीन करोड़ जनता और छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा के लिए यहां बैठेंगे। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विधानसभा भवन के शिलान्यास कार्यक्रम में सांसद श्रीमती सोनिया गांधी और राहुल गांधी की वर्चुअल उपस्थिति के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।

विधानसभा अध्यक्ष डा. चरणदास महंत ने छत्तीसगढ़ विधानसभा के नये भवन के शिलान्यास अवसर पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को बधाई देते हुए कहा कि उनकी परिकल्पना के अनुरूप सर्वसुविधायुक्त आधुनिक तकनीक से लैस भव्य भवन की आधारशिला रखी गई है। यह भवन नहीं, लोकतंत्र का मंदिर है। इस मौके पर हम सभी विधायकगण संकल्प लेते हैं कि हम भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने की अगुवाई करेंगे। इस मौके पर उन्होंने छत्तीसगढ़ के निर्माण में भागीदारी निभाने वाले पुरखों को नमन किया और उम्मीद जताई कि पुरखों के आशीर्वाद से हम सब छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा में जुटे रहेंगे। डा. महंत ने इस मौके पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनकी सरकार का उल्लेख करते हुए कहा कि आप सभी को छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा का मौका मिला है। उन्होंने गरीबों, किसानों, मजदूरों, आदिवासियों, वंचितों की बेहतरी के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की और कहा कि जनकल्याण के कार्यों के लिए सभी का सहयोग मिल रहा है। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि छत्तीसगढ़ बाबा गुरुघासी दास, संत कबीर की धरती है। छत्तीसगढ़ वास्तव में प्रेम की धरती है। हम सब प्रेम और सद्भाव का उदाहरण बनें।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि कोरोना संकटकाल में मास्क लगाएं परंतु वाणी की मिठास बनाए रखें। सोशल डिस्टेंसिंग रखें, परंतु दिलों के बीच दूरी न आने दें। नेता प्रतिपक्ष श्री धरमलाल कौशिक ने विधानसभा भवन के शिलान्यास के लिए मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष सहित सभी लोगों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने उम्मीद जताई कि विधायकों के लिए भी निकट भविष्य में आवास की व्यवस्था होगी।
लोकनिर्माण एवं गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा का भवन महानदी भवन एवं इंद्रावती भवन के बीच पिछले हिस्से में रिक्त भूमि पर बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसकी रूप-रेखा दिल्ली में राष्ट्रपति भवन के सामने स्थित नार्थ एवेन्यू एवं साउथ एवेन्यू जैसी रखी गई है। नये विधानसभा भवन के सामने राजपथ जैसा मार्ग बनेगा, जिसके जरिये महानदी एवं इंद्रावती भवन से पैदल भी विधानसभा पहुंचा जा सकेगा। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बनने वाले नए भवन में छत्तीसगढ़ की गौरवशाली और समृद्ध संस्कृति तथा परंपरा की झलक देखने को मिलेगी। विधानसभा भवन में अत्याधुनिक लाइब्रेरी और ऑडिटोरियम का भी निर्माण किया जाएगा । भविष्य को ध्यान में रखते हुए नये विधानसभा भवन में करीब 150 से 200 विधायकों के बैठने की व्यवस्था एवं अध्यक्षीय दीर्घा, अधिकारी दीर्घा, प्रतिष्ठित दर्शक दीर्घा, पत्रकार दीर्घा एवं दर्शक दीर्घा का निर्माण किया जाएगा। विधानसभा अध्यक्ष, मुख्यमंत्री एवं मंत्रियों, नेता प्रतिपक्ष एवं उपाध्यक्ष और मुख्य सचिव तथा विधानसभा के प्रमुख सचिव, सचिव एवं अन्य सचिव के लिए कक्ष, मीटिंग हॉल एवं स्टाफ कक्षों का निर्माण किया जाएगा। नवीन भवन में विभिन्न समिति कक्षों का निर्माण, पुस्तकालय, एलोपैथिक, होम्योपैथिक एवं आयुर्वेदिक औषधालय, पोस्ट ऑफिस, रेल्वे रिजर्वेशन काऊंटर एवं बैंक के लिए भी कक्षों का निर्माण होगा। विधानसभा के चारों ओर सड़क निर्माण, वृक्षारोपण सहित सौन्दर्यीकरण का कार्य किया जाएगा।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / ईयरफोन लगाकर संगीत सुनते समय लोग अक्सर इस कदर मशगूल हो जाते हैं कि उन्हें पता ही नहीं चलता कि आसपास क्या घट रहा है। कई बार वे आपात स्थिति से भी अनजान रहते हैं। मगर अब ऐसा नहीं होगा।
दरअसल, गूगल अपने पिक्सल बड्स में अटेंशन अलर्ट फीचर , शामिल करने जा रहा है। इससे ईयरफोन एआई और सेंसर की मदद से आपात स्थितियों को पहचानकर संगीत की ध्वनि धीमी कर देगा, ताकि यूजर को पता चल सके कि उसके आसपास क्या हो रहा है। नया अपडेट गूगल के टच कंट्रोल हेडफोन में उपलब्ध है।
अटेंशन अलर्ट फीचर कुत्ते के भौंकने और बच्चे के रोने की आवाज के अलावा एंबुलेंस के सायरन की ध्वनि भांप सकेगा। गूगल अपने पिक्सल बड ईयरफोन के लिए इस आपातकालीन साउंड डिटेक्शन मोड का परीक्षण कर रहा है।
इस मोड से आपात स्थिति आने पर पिक्सल बड्स में संगीत की आवाज खुद ही धीमी हो जाएगी और यूजर को आसपास की स्थिति का अंदाजा लग सकेगा। फिलहाल इस फीचर का परीक्षण चल रहा है। हालांकि, इससे बैटरी जल्द खर्च होगी।
ऐसे कर सकेंगे इस्तेमाल-
-एंड्रॉयड-10 से लैस पिक्सल फोन की सेटिंग में जाकर कनेक्टेड डिवाइस का विकल्प चुनें। इसके बाद पिक्सल बड्स सेटिंग्स में जाएं और साउंड के विकल्प पर टैप करें। फिर एक्सपेरिमेंटल सेक्शन में जाकर अलर्ट को ऑन या ऑफ करें।
खाना खजाना / शौर्यपथ / वेज बिरयानी बहुत ही स्वादिष्ट होती है। वेज बिरयानी बनाने का तरीका बहुत आसान है। यह झटपट तैयार होने वाली रेसिपी है, आइए सीखतें हैं - वेज बिरयानी बनाने की विधि -
सामग्री
बासमती चावल - 1 कप
देशी घी - 1/4 कप
तेल - 1/4 कप
जीरा - 1/2 छोटी चम्मच
हल्दी पाउडर - 1/4 छोटी चम्मच
अदरक - 1 इंच टुकड़ा कद्दूकस किया हुआ
धनिया पाउडर - 1 छोटी चम्मच
लाल मिर्च पाउडर - 1/4 छोटी चम्मच
नमक - स्वादानुसार
काजू - 2 टेबल स्पून
काली मिर्च - 7-8
बड़ी इलाइची- 2
लॉग - 5-6
फूल गोभी कटा हुआ - 1 कप,
हरा धनियां - 2 बारीक कटा हुआ,
गाजर - दो तीन कटी हुई
मटर - आधी कटोरी
आलू -आधी कटोरी
टमाटर -आधी कटोरी
प्याज -आधी कटोरी
विधि
सबसे पहले सभी सब्जियों को अच्छे से साफ करके काट लें और अब कुकर में देशी घी डालकर गर्म करें। फिर उसमें जीरा और खड़े मसाले डालकर भूनें और अब प्याज डालकर सुनहरा होने तक भूनें अब उसमें कटी हुई सब्जियां, सभी मसाले और चावल डालकर चलाएं चावलों को एक मिनट लिए चलाएं। अच्छे से मसालों में मिला दें और अब पानी डालकर कुकर बंद कर दें। एक सीटी लगाकर गैस बंद कर दें और जब कुकर का प्रेशर निकल जाए तब हरा धनिया डालकर गर्मागर्म वेज बिरयानी का आनंद लें।
ध्यान रखें खड़े मसाले को ही साबुत मसाले कहा जाता है। कुकर में चावल यदि गिलास से नाप के रखें जाएं तो ज्यादा अच्छा रहता है क्योंकि पानी का अंदाज आसानी से लगा सकते हैं। एक गिलास चावल में डेढ़ गिलास पानी और 2 गिलास चावल में ढाई गिलास पानी। लेकिन याद रखे चावल बासमती ही होने चाहिए।
सेहत / शौर्यपथ / आमतौर पर वजन कम करने के लिए लोग सबसे पहले खाना छोड़ देते हैं या डाइटिंग करना शुरू कर देते हैं लेकिन इन सब तरीकों से वजन कम करने की जगह शरीर में कमजोरी आ जाती हैं और बार-बार बीमार होने का खतरा मंडराने लगता है। ऐसे में ध्यान देने की बात यह है कि वजन कम होने पर कमजोरी महसूस न होना ही एक हेल्दी वेट का संकेत है। ऐसे में अगर आप वजन कम करना चाहते हैं, तो आपको नाश्ते में हेल्दी चीजें लेनी चाहिए. आइए, जानते हैं कौन-सी हैं वे चीजें-
दलिया- वजन संतुलित रखने के लिए ज्यादातर लोग दलिया का सेवन करते हैं। इसे आप दूध में मिलाकर या फिर सब्जियों के साथ बनाकर खा सकते है। कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, मिनरल से भरपूर दलिया आसानी से पच जाता है।
ओट्स- फाइबर का स्त्रोत माना जाता है। इसमें एंटीऑक्सिडेंट भी होते हैं, जो आपको स्वस्थ रखने के साथ दिल की बीमारियों से भी बचाते हैं। ओट प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार है और शुगर व कॉलेस्ट्रॉल को कंट्रोल में रखता है।
मल्टीग्रेन ब्रेड सैंडविच- नाश्ते के लिए मल्टीग्रेन ब्रेड सैंडविच सबसे फायदेमंद है। इसमें आप सब्जियां जैसे टमाटर, खीरा आदि डालकर बना सकते है।
धर्म संसार / शौर्यपथ / हिंदू कैलेंडर में हर तीन साल में एक बार एक अतिरिक्त माह का प्राकट्य होता है, जिसे अधिक मास, मल मास या पुरुषोत्तम मास के नाम से जाना जाता है। हिंदू धर्म में इस माह का विशेष महत्व है। संपूर्ण भारत की हिंदू धर्मपरायण जनता इस पूरे मास में पूजा-पाठ, भगवत भक्ति, व्रत-उपवास, जप और योग आदि धार्मिक कार्यों में संलग्न रहती है।
ऐसा माना जाता है कि अधिक मास में किए गए धार्मिक कार्यों का किसी भी अन्य माह में किए गए पूजा-पाठ से 10 गुना अधिक फल मिलता है। यही वजह है कि श्रद्धालुजन अपनी पूरी श्रद्धा और शक्ति के साथ इस मास में भगवान को प्रसन्न कर अपना इहलोक तथा परलोक सुधारने में जुट जाते हैं।
अब सोचने वाली बात यह है कि यदि यह माह इतना ही प्रभावशाली और पवित्र है, तो यह हर तीन साल में क्यों आता है? आखिर क्यों और किस कारण से इसे इतना पवित्र माना जाता है? इस एक माह को तीन विशिष्ट नामों से क्यों पुकारा जाता है? इसी तरह के तमाम प्रश्न स्वाभाविक रूप से हर जिज्ञासु के मन में आते हैं। तो आज ऐसे ही कई प्रश्नों के उत्तर और अधिक मास को गहराई से जानते हैं-
वैज्ञानिक आधार-
अधिक मास- वशिष्ठ सिद्धांत के अनुसार भारतीय हिंदू कैलेंडर सूर्य मास और चंद्र मास की गणना के अनुसार चलता है। अधिक मास चंद्र वर्ष का एक अतिरिक्त भाग है, जो हर 32 माह, 16 दिन और 8 घटी के अंतर से आता है। इसका प्राकट्य सूर्य वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच अंतर का संतुलन बनाने के लिए होता है। भारतीय गणना पद्धति के अनुसार प्रत्येक सूर्य वर्ष 365 दिन और करीब 6 घंटे का होता है, वहीं चंद्र वर्ष 354 दिनों का माना जाता है। दोनों वर्षों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर होता है, जो हर तीन वर्ष में लगभग 1 मास के बराबर हो जाता है। इसी अंतर को पाटने के लिए हर तीन साल में एक चंद्र मास अस्तित्व में आता है, जिसे अतिरिक्त होने के कारण अधिक मास का नाम दिया गया है।
अधिक मास का पौराणिक आधार-
अधिक मास के लिए पुराणों में बड़ी ही सुंदर कथा सुनने को मिलती है। यह कथा दैत्यराज हिरण्यकश्यप के वध से जुड़ी है। पुराणों के अनुसार दैत्यराज हिरण्यकश्यप ने एक बार ब्रह्मा जी को अपने कठोर तप से प्रसन्न कर लिया और उनसे अमरता का वरदान मांगा। चूंकि अमरता का वरदान देना निषिद्ध है, इसीलिए ब्रह्मा जी ने उसे कोई भी अन्य वर मांगने को कहा। तब हिरण्यकश्यप ने वर मांगा कि उसे संसार का कोई नर, नारी, पशु, देवता या असुर मार ना सके। वह वर्ष के 12 महीनों में मृत्यु को प्राप्त ना हो। जब वह मरे, तो ना दिन का समय हो, ना रात का। वह ना किसी अस्त्र से मरे, ना किसी शस्त्र से। उसे ना घर में मारा जा सके, ना ही घर से बाहर मारा जा सके।
इस वरदान के मिलते ही हिरण्यकश्यप स्वयं को अमर मानने लगा और उसने खुद को भगवान घोषित कर दिया। समय आने पर भगवान विष्णु ने अधिक मास में नरसिंह अवतार यानि आधा पुरुष और आधे शेर के रूप में प्रकट होकर, शाम के समय, देहरी के नीचे अपने नाखूनों से हिरण्यकश्यप का सीना चीर कर उसे मृत्यु के द्वार भेज दिया।
मल मास क्यों कहा गया?-
हिंदू धर्म में अधिक मास के दौरान सभी पवित्र कर्म वर्जित माने गए हैं। माना जाता है कि अतिरिक्त होने के कारण यह मास मलिन होता है। इसलिए इस मास के दौरान हिंदू धर्म के विशिष्ट व्यक्तिगत संस्कार जैसे नामकरण, यज्ञोपवीत, विवाह और सामान्य धार्मिक संस्कार जैसे गृह प्रवेश, नई बहुमूल्य वस्तुओं की खरीदी आदि आमतौर पर नहीं किए जाते हैं। मलिन मानने के कारण ही इस मास का नाम मल मास पड़ गया है।
पुरुषोत्तम मास का नाम क्यों और कैसे पड़ा-
अधिक मास के अधिपति स्वामी भगवान विष्णु माने जाते हैं। पुरुषोत्तम भगवान विष्णु का ही एक नाम है। इसीलिए अधिक मास को पुरुषोत्तम मास के नाम से भी पुकारा जाता है। इस विषय में एक बड़ी ही रोचक कथा पुराणों में पढ़ने को मिलती है। कहा जाता है कि भारतीय मनीषियों ने अपनी गणना पद्धति से हर चंद्र मास के लिए एक देवता निर्धारित किए। चूंकि अधिक मास सूर्य और चंद्र मास के बीच संतुलन बनाने के लिए प्रकट हुआ, तो इस अतिरिक्त मास का अधिपति बनने के लिए कोई देवता तैयार ना हुआ। ऐसे में ऋषि-मुनियों ने भगवान विष्णु से आग्रह किया कि वे ही इस मास का भार अपने उपर लें। भगवान विष्णु ने इस आग्रह को स्वीकार कर लिया और इस तरह यह मल मास के साथ पुरुषोत्तम मास भी बन गया।
इसका महत्व क्यों है?-
हिंदू धर्म के अनुसार प्रत्येक जीव पंचमहाभूतों से मिलकर बना है। इन पंचमहाभूतों में जल, अग्नि, आकाश, वायु और पृथ्वी सम्मिलित हैं। अपनी प्रकृति के अनुरूप ही ये पांचों तत्व प्रत्येक जीव की प्रकृति न्यूनाधिक रूप से निश्चित करते हैं। अधिक मास में समस्त धार्मिक कृत्यों, चिंतन-मनन, ध्यान, योग आदि के माध्यम से साधक अपने शरीर में समाहित इन पांचों तत्वों में संतुलन स्थापित करने का प्रयास करता है। इस पूरे मास में अपने धार्मिक और आध्यात्मिक प्रयासों से प्रत्येक व्यक्ति अपनी भौतिक और आध्यात्मिक उन्नति और निर्मलता के लिए उद्यत होता है। इस तरह अधिक मास के दौरान किए गए प्रयासों से व्यक्ति हर तीन साल में स्वयं को बाहर से स्वच्छ कर परम निर्मलता को प्राप्त कर नई उर्जा से भर जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दौरान किए गए प्रयासों से समस्त कुंडली दोषों का भी निराकरण हो जाता है।
अधिक मास में क्या करना उचित-
आमतौर पर अधिक मास में हिंदू श्रद्धालु व्रत-उपवास, पूजा-पाठ, ध्यान, भजन, कीर्तन, मनन को अपनी जीवनचर्या बनाते हैं। पौराणिक सिद्धांतों के अनुसार इस मास के दौरान यज्ञ-हवन के अलावा श्रीमद् देवीभागवत, श्री भागवत पुराण, श्री विष्णु पुराण, भविष्योत्तर पुराण आदि का श्रवण, पठन, मनन विशेष रूप से फलदायी होता है। अधिक मास के अधिष्ठाता भगवान विष्णु हैं, इसीलिए इस पूरे समय में विष्णु मंत्रों का जाप विशेष लाभकारी होता है। ऐसा माना जाता है कि अधिक मास में विष्णु मंत्र का जाप करने वाले साधकों को भगवान विष्णु स्वयं आशीर्वाद देते हैं, उनके पापों का शमन करते हैं और उनकी समस्त इच्छाएं पूरी करते हैं।
पितृ पक्ष और नवरात्रि प्रारंभ
में
लगभग एक मास का अंतर क्यों !
वर्ष 2020 में पितृ पक्ष 02 सितंबर 2020 से प्रारंभ होकर 17 सितंबर 2020 तक रहेगा, इसके बाद 18 सितंबर से 16 अक्टूबर 2020 तक मल मास रहेगा जिस कारण पितृ पक्ष और नवरात्रि में लगभग एक मास का अंतर होगा। ऐसा संयोग इसके पूर्व 1963 और 2001 में हुआ था।
शौर्यपथ । पतितपावनी गंगा को देव नदी कहा जाता है क्योंकि शास्त्रों के अनुसार गंगा स्वर्ग से धरती पर आई है। मान्यता है कि गंगा श्री हरि विष्णु के चरणों से निकली है और भगवान शिव की जटाओं में आकर बसी है। श्री हरि और भगवान शिव से घनिष्ठ संबंध होने पर गंगा को पतित पाविनी कहा जाता है। मान्यता है कि गंगा में स्नान करने से मनुष्य के सभी पापों का नाश हो जाता है। एक दिन देवी गंगा श्री हरि से मिलने बैकुण्ठ धाम गई और उन्हें जाकर बोली," प्रभु ! मेरे जल में स्नान करने से सभी के पाप नष्ट हो जाते हैं लेकिन मैं इतने पापों का बोझ कैसे उठाऊंगी? मेरे में जो पाप समाएंगे उन्हें कैसे समाप्त करूंगी?" इस पर श्री हरि बोले,"गंगा! जब साधु, संत, वैष्णव आ कर आप में स्नान करेंगे तो आप के सभी पाप घुल जाएंगे।" गंगा नदी इतनी पवित्र है की प्रत्येक हिंदू की अंतिम इच्छा होती है उसकी अस्थियों का विसर्जन गंगा में ही किया जाए लेकिन यह अस्थियां जाती कहां हैं? इसका उत्तर तो वैज्ञानिक भी नहीं दे पाए क्योंकि असंख्य मात्रा में अस्थियों का विसर्जन करने के बाद भी गंगा जल पवित्र एवं पावन है। गंगा सागर तक खोज करने के बाद भी इस प्रश्न का पार नहीं पाया जा सका। सनातन धर्म की मान्यता के अनुसार मृत्यु के बाद आत्मा की शांति के लिए मृत व्यक्ति की अस्थि को गंगा में विसर्जन करना उत्तम माना गया है। यह अस्थियांं सीधे श्री हरि के चरणों में बैकुण्ठ जाती हैं। जिस व्यक्ति का अंत समय गंगा के समीप आता है उसे मरणोपरांत मुक्ति मिलती है। इन बातों से गंगा के प्रति हिन्दूओं की आस्था तो स्वभाविक है। वैज्ञानिक दृष्टि से गंगा जल में पारा अर्थात (मर्करी) विद्यमान होता है जिससे हड्डियों में कैल्सियम और फोस्फोरस पानी में घुल जाता है। जो जलजन्तुओं के लिए एक पौष्टिक आहार है। हड्डियों में गंधक (सल्फर) विद्यमान होता है जो पारे के साथ मिलकर पारद का निर्माण होता है। इसके साथ-साथ यह दोनों मिलकर मरकरी सल्फाइड साल्ट का निर्माण करते हैं। हड्डियों में बचा शेष कैल्शियम, पानी को स्वच्छ रखने का काम करता है। धार्मिक दृष्टि से पारद शिव का प्रतीक है और गंधक शक्ति का प्रतीक है। सभी जीव अंततःशिव और शक्ति में ही विलीन हो जाते हैं। हर हर गंगे
नई दिल्ली । शौर्यपथ । ऑनलाइन सेक्स रैकेट चलाने वाले तीन युवकों को कोतवाली पुलिस ने किदवईपुरी इलाके में स्थित होटल के समीप से गिरफ्तार कर लिया। वहीं दो कॉलगर्ल और एक महिला दलाल को भी पुलिस ने पकड़ा है। कॉलगर्ल कोलकाता की रहने वाली है। दरअसल कोतवाली थानेदार रामशंकर सिंह को यह खबर मिली थी कि जिस्मफरोशी के धंधे में शामिल कुछ लड़के किदवईपुरी इलाके में घूम रहे हैं। इसके बाद पुलिस ने अपनी पहचान छिपाकर इसमें शामिल लड़कों को पकड़ा। सूत्रों की मानें तो इन्हीं युवकों की निशानदेही पर एक महिला दलाल व दो कॉलगर्ल को पकड़ा गया। पकड़े गये युवकों में बुद्धा कॉलोनी बांसघाट का रहने वाला आलोक रंजन, पूर्णिया के रौटा का रहने वाला मन्नौवर आलम और परसा के ब्रह्मस्थान का कुंदन कुमार शामिल है। पुलिस ने सभी से पूछताछ की है। काफी दिनों से ये लोग पटना के अलग-अलग इलाकों में सेक्स रैकेट चला रहे थे।
शौर्यपथ / अमेरिका में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय (यूसी)- डेविस के वैज्ञानिकों ने एक नए अध्ययन में दावा किया है कि पशुओं की कई प्रजातियां कोरोना महामारी की चपेट में आ सकती हैं। अध्ययन के अनुसार कोविड-19 बीमारी का कारण बनने वाले कोरोना वायरस के संभावित खतरे का सामना करने वाली एकमात्र प्रजाति मनुष्य नहीं है। पशुओं की कई प्रजातियों को भी बड़ा खतरा है।
अध्ययन के अनुसार कई गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजातियां जैसे कि पश्चिमी गोरिल्ला, ऑरंगुटन और गाल पर सफेद बाल वाले काले लंगूर आदि वायरस से संक्रमण के लिए अतिसंवेदनशील हो सकते हैं। समुद्री स्तनधारियों जैसे ग्रे व्हेल और बॉटलनोज डॉल्फिन के साथ-साथ चीनी हैम्स्टर में भी वायरस के उच्च जोखिम में हैं।
वैज्ञानिकों ने कहा कि घरेलू पशुओं में बिल्लियों, मवेशियों और भेड़ों में एक मध्यम जोखिम पाया गया, जबकि कुत्तों, घोड़ों और सूअरों के लिए कम जोखिम है। वैज्ञानिकों ने एसीई-2 रिसेप्टर प्रोटीन की संरचना की तुलना करने के लिए जीनोमिक विश्लेषण का उपयोग किया। जो कोरोना वायरस, मछली सहित उभयचर, सरीसृप और स्तनधारी कशेरुकी जीवों की 410 विभिन्न प्रजातियों की कोशिकाओं में प्रवेश करने के लिए उपयोग करता है।
पीएनएएस नामक पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, एसीई-2 सामान्य रूप से कई अलग-अलग प्रकार की कोशिकाओं और ऊतकों में पाया जाता है, जिसमें नाक, मुंह और फेफड़ों की बाहरी परत को शामिल करने वाली कोशिकाएं शामिल हैं। अध्ययन के प्रमुख लेखक हैरिस लेविन ने कहा, हमें उम्मीद है कि यह उन प्रतिक्रियाओं को प्रेरित करेगा, जो महामारी के दौरान पशु और मानव स्वास्थ्य दोनों की रक्षा करती हैं।
खाना खजाना / शौर्यपथ / अक्सर मन कुछ चटपटा खाने का करता है। ऐसे में बाहर से कुछ खाने की बजाय आप घर में ही भरवा चीज मिर्ची रेसिपी ट्राई कर सकते हैं। यह रेसिपी उन लोगों को खासतौर पर पसंद आएगी, जो तीखा या चटपटा खाने के शौकीन लोगों को खासतौर पर पसंद आएगी-
विधि:
5 हरी मिर्च
20 ग्राम पनीर
10 ग्राम जालपीनो
10 ग्राम अजवायन
10 ग्राम सफेद मिर्च पाउडर
आवश्यकतानुसार ब्रेड क्रम्ब्स
आवश्यकतानुसार पानी
20 ग्राम चेडर चीज़
10 ग्राम शिमला मिर्च (हरी मिर्च)
10 ग्राम मिर्च साबुत
10 ग्राम काली मिर्च
30 ग्राम बेसन (बेसन)
तलने के लिए तेल
विधि :
इस स्वादिष्ट रेसिपी को तैयार करने के लिए, मिर्च और शिमला मिर्च को पानी से धोएं फिर, हरी मिर्च को सेंटर से, लम्बाई में और शिमला मिर्च को डाइस करें। एक गहरी तली का पैन लें और मध्यम आंच पर रखकर उसमें पानी उबालें। अब मिर्च को इस खोलते हुए पानी में 1 मिनट के लिए डाल दें। एक मिनट बाद इन्हें बाहर निकालें और ठंडे पानी में धो लें।
एक बड़ा कटोरा लें और उसमें चीज़ और पनीर को पीस लें। अगर आपके पास चीज नहीं है, तो आप सिर्फ पनीर से भी काम चला सकते हैं
इस मिश्रण में सफेद काली मिर्च पाउडर, काली मिर्च और अजवायन के साथ घिसी हुई शिमला मिर्च, जालपैनो और चिली फ्लेक्स डालें। इस मिश्रण से मिर्च को स्टफ करें और एक तरफ रख दें।
एक बाउल लें और उसमें बेसन को पानी में मिलाएं। इस मिश्रण को कुछ गाढ़ा बनाएं ताकि इसमें मिर्च डुबोने पर यह मिर्च को कवर करते हुए चिपक जाए। अब एक अलग बोल में ब्रेड का चूरा डालें और एक तरफ रख दें
एक कढ़ाही लें और उसे मध्यम आंच पर गर्म करें। अब उसमें तलने के लिए तेल गरम करें। इस बीच, भरवां मिर्च लें और उन्हें बैटर और फिर ब्रेड क्रम्ब्स में डिप करें। जब तेल पर्याप्त गर्म हो जाए तो ध्यान से मिर्च को कढ़ाही में डालें और उन्हें सुनहरा भूरा होने तक तलें।
अच्छी तरह तल जाने पर इन्हें एक प्लेट में निकालें। इस प्लेट में पहले ही टिश्यू पेपर बिछाकर रख लें ताकि यह एक्स्ट्रा ऑइल सोख ले। अब इन्हें गर्मागर्म ही हरी और लाल चटनी के साथ सर्व करें।
सेहत / शौर्यपथ / काली मिर्च मसालों में एक ख़ास जगह रखता है। इसके इस्तेमाल से खाने का स्वाद बढ़ जाता है. आयुर्वेद में भी काली मिर्च को एक औषधि और जड़ी-बूटी माना जाता हैं। यही वजह है कि कोरोना वायरस महामारी से बचाव के लिए काली मिर्च को इम्युनिटी बूस्टर माना जाता है। काली मिर्च के कई फायदे हैं, जिनके बारे में जानकार आप इसका लाभ उठा सकते हैं।
काली मिर्च में पैपरीन नामक तत्व पाया जाता है। यह तत्व औषधीय गुणों से भरपूर है। इसमें आयरन, पोटैशियम, मैग्नीशियम, मैंग्नीज, जिंक, क्रोमियम, विटामिन ए और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं।
सर्दी-खांसी होने पर 8-10 काली मिर्च, 10-15 तुलसी के पत्ते मिलाकर चाय बनाकर पीने से आराम मिलता है।
100 ग्राम गुड़ पिघला कर 20 ग्राम काली मिर्च का पाउडर उसमंप मिलाएं। थोड़ा ठंडा होने पर उसकी छोटी-छोटी गोलियां बना लें। खाना खाने के बाद 2-2 गोलियां खाने से खांसी में आराम मिलता है।
दो चम्मच दही, एक चम्मच चीनी और 6 ग्राम पिसी काली मिर्च मिलाकर चाटने से काली और सूखी खांसी में आराम मिलता है।
एक चम्मच शहद में 2-3 पिसी काली मिर्च और चुटकी भर हल्दी मिलाकर खाने से जुकाम में बनने वाले कफ से राहत मिलेगी।
नाक में एलर्जी होने पर 10-10 ग्राम सोंठ, काली मिर्च, पिसी इलायची और मिश्री को पीस कर चूर्ण बना लें। इसमें बीज निकला 50 ग्राम मुनक्का और तुलसी के 10 पत्ते पीसकर डालें और अच्छी तरह मिला लें। इस मिश्रण की 3-5 ग्राम की गोलियां बनाकर छाया में सुखा लें। सुबह-शाम 2-2 गोलियां गर्म पानी के साथ लें।
पिसी काली मिर्च पुराने गुड़ के साथ खाने से नाक से बहता खून बंद हो जाता है।
गला बैठ गया है, तो 7 काली मिर्च और 7 बताशे रात को सोने से पहले चबाकर खाएं।
बुखार में तुलसी, काली मिर्च और गिलोय का काढ़ा पीना फायदेमंद होता है।
फेफड़े और सांस नली में संक्रमण होने पर काली मिर्च और पुदीने की चाय का सेवन करें। इसके अलावा पिसी काली मिर्च, घी और मिश्री बराबर मात्रा में मिलाएं। सुबह-शाम एक-एक चम्मच लें, लाभ होगा।
काली मिर्च और काला नमक दही में मिलाकर खाने से पाचन संबंधी विकार दूर होते हैं। छाछ में काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर पीने से पेट के कीटाणु मरते हैं और पेट की बीमारियां दूर होती हैं।
पेट में गैस की समस्या होने पर एक कप पानी में आधा नीबू का रस, आधा चम्मच पिसी काली मिर्च और आधा चम्मच काला नमक मिला कर पिएं।
कब्ज होने पर 4-5 काली मिर्च के दाने दूध के साथ रात में लेने से आराम मिलता है।
बदहजमी होने पर कटे नीबू के आधे टुकड़े के बीज निकाल कर काली मिर्च और काला नमक भरें। इसे तवे पर थोड़ा गर्म करके चूसें।
20 ग्राम काली मिर्च, 10 ग्राम जीरा और 15 ग्राम शक्कर या मिश्री पीस कर मिश्रण बना लें। इसे सुबह-शाम पानी के साथ फांक लें। बवासीर रोग में आराम मिलेगा।
काली मिर्च आंखों के लिए उपयोगी है। भुने आटे में देसी घी, काली मिर्च और चीनी मिला कर मिश्रण बनाएं। सुबह-शाम 5 चम्मच मिश्रण का सेवन करें।
नमक के साथ काली मिर्च मिलाकर दांतों में मंजन करने से पायरिया ठीक होता है। दांतों में चमक और मजबूती बढ़ती है।
मुंह से बदबू आती है, तो दो काली मिर्च रात को ब्रश करने से पहले चबा लें।
ब्लड पे्रशर काबू करने के लिए दिन में 2-3 बार 5-5 दाने काली मिर्च के साथ 20-20 दाने किशमिश का सेवन करें।
हाई ब्लड प्रेशर में आधा गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच काली मिर्च पाउडर घोल कर 2-2 घंटे
के अंतराल पर पीने से आराम मिलता है।
माइग्रेन होने पर एक कप दूध में एक चम्मच पिसी काली मिर्च और एक चुटकी हल्दी मिला कर उबाल कर पिएं।
काली मिर्च शहद में मिलाकर खाने से कमजोर याददाश्त में फायदा होता है।
चेहरे पर झाइयां होने पर एक गिलास गाजर के रस में नमक और पिसी काली मिर्च मिलाकर पीना फायदेमंद है।
चेहरे पर झाइयां होने पर काली मिर्च, जायफल और चंदन तीनों का पाउडर बराबर मात्रा में मिलाएं। 2-3 चुटकी पाउडर और थोड़ा पानी मिलाकर उबटन बनाएं। इसे चेहरे पर लगाएं। सूखने पर सादे पानी से चेहरा धो लें।
शरीर के किसी भी अंग में सूजन होने पर काली मिर्च का लेप लगाएं, आराम मिलेगा।
खेल / शौर्यपथ / टीम इंडिया के पूर्व तेज गेंदबाज आरपी सिंह का मानना है कि महेंद्र सिंह धोनी में मैच को खत्म करने की जो स्किल्स थी, वो किसी और में नहीं है। इस मामले में उन्होंने धोनी को 'बीस्ट' बताया है। आरपी सिंह ने फिनिशर के तौर पर एक और खिलाड़ी का नाम लिया है, जिसने अपने देश को कई मैच जिताए और वो हैं ऑस्ट्रेलिया के पूर्व क्रिकेटर माइकल बेवन, लेकिन साथ ही कहा कि धोनी जैसा कोई फिनिशर नहीं रहा है। अपने करियर में धोनी ने ज्यादातर नंबर-5 या नंबर-6 पर बल्लेबाजी की है।
'खुद धोनी नंबर-4 पर बल्लेबाजी करना चाहते थे'
आरपी सिंह का मानना है कि धोनी अगर बैटिंग ऑर्डर में ऊपर खेलने आते तो उनका रिकॉर्ड और भी बेहतर होता, लेकिन वो खुद लोअर ऑर्डर में खेले, जिससे वो दबाव में भी टीम को जीत दिला सकें। Cricket.com को दिए इंटरव्यू में आरपी सिंह ने कहा, 'अगर मैं गलत नहीं हूं तो धोनी ने एक इंटरव्यू में खुद कहा था कि वो नंबर-4 पर बल्लेबाजी करना चाहते हैं, लेकिन टीम ने सोचा था कि लोअर ऑर्डर में दबाव में उनसे बेहतर खेलने वाला और कोई नहीं है। अगर आप इस खेल के इतिहास के बारे में बात करें तो आपको कभी धोनी जैसा कोई खिलाड़ी नहीं मिलेगा, जिसने लोअर ऑर्डर में बल्लेबाजी करके अपनी टीम को इतना सारे मैच जिताए हों।'
'अब हम देखेंगे कि क्या वो सच में रिटायर हो गए हैं'
उन्होंने आगे कहा, 'हम माइकल बेवन के बारे में बात कर सकते हैं, लेकिन एमएस एकदम अलग तरह के 'बीस्ट' थे इस मामले में।' आरपी सिंह ने धोनी के ऑफ-फील्ड नेचर के बारे में भी बात की और कहा कि वो हमेशा से जमीन से जुड़े शख्स रहे हैं। उन्होंने कहा, 'वो हमेशा से जमीन से जुड़े व्यक्ति रहे हैं। हम इसकी शिकायत करते रहते हैं कि वो हमारे फोन कॉल्स नहीं उठाते, एक बार उन्होंने मुनफ पटेल और मुझसे कहा था, जब मैं रिटायर हो जाऊंगा तो आधी रिंग में ही फोन उठा लूंगा, अब हम देखेंगे कि क्या वो सच में रिटायर हो गए हैं।'
धर्म संसार / शौर्यपथ / बलरामजी को विष्णुजी बताते हैं कि उसे शक्ति माता दुर्गा ने वर दिया है। यदि तुम वध करोगे तो ये अनुचित होगा। इसीलिए शिवजी के आशीर्वाद से कामदेव ने श्रीकृष्ण के रूप में पृथ्वीलोक पर संभरासुर का वध करने के लिए जन्म लिया है जो सर्वथा उचित है। मैं अलग-अलग माध्यमों से अधर्मियों का संहार करता हूं इस समय में प्रद्युम्न के माध्यम से संभरासुर का वध करूंगा। यही विधि का विधान है बलराम। यही भगवान शिवजी की इच्छा है। इसलिए प्रद्युम्न के लिए आतंकित होने की कोई आवश्यकता नहीं है। बलराम वो सुरक्षित है बिल्कुल सुरक्षित। यह सुनकर बलरामजी प्रसन्न हो जाते हैं। फिर विष्णुजी कहते हैं- बलराम श्रीकृष्ण वासुदेव का कहना मानो अत: तुम्हें पानी रोकने की आवश्यकता नहीं है। इस पर बलरामजी कहते हैं- जैसी आपकी आज्ञा भगवन। फिर विष्णुजी कहते हैं- बलराम अब तुम मेरा ये दर्शन भूल जाओगे और यह भी भूल जाओगे की तुम शेषनाग का अवतार हो।
फिर श्रीकृष्ण और बलराम खुद को उसी नदी के किनारे खड़ा पाते हैं तब बलरामजी कुछ समझ नहीं पाते हैं कि ये हुआ क्या। तभी श्रीकृष्ण कहते हैं- दाऊ भैया अब आप हल निकाल लीजिये। यह सुनकर बलरामजी कहते हैं- हल! इस पर श्रीकृष्ण कहते हैं- हां दाऊ भैया हल निकाल लीजिये।..बलरामजी को कुछ समझ में नहीं आता है परंतु वे श्रीकृष्ण की आज्ञा मानकर हल निकाल लेते हैं तब सभी नदियों का प्रवाह पहले जैसा हो जाता है। फिर श्रीकृष्ण बलरामजी से कहते हैं- चलिये दाऊ भैया आइये। बलरामजी कुछ बोले बगैर ही उनके साथ हो लेते हैं।
उधर, संभरासुर जोर-जोर से हंसते हुए अपनी पत्नी से कहता है- और महारानी जिस कृष्ण ने हमसे हमारा पुत्र छीन लिया था हमने उससे उसका पुत्र छीन लिया है। काश आप देखती रानी कि कृष्ण की रानियां पुत्र शोक के कारण किस तरह से विलाप कर रही थीं। उन्हें शोकाकुल देखकर पुत्र वियोग के कारण मेरा शोकाकुल मन शांत हुआ था।
इधर, रुक्मिणी उदास बैठी रहती है अपने पुत्र वियोग में तो श्रीकृष्ण कहते हैं कि देवी अब ये भावुकता छोड़िये और इस नाटक से बाहर आइये। देखिये देवी हम जैसा चाहते थे वैसा ही हो गया। वाह देवी आपके अभिनय ने तो संभरासुर जैसे मायावी को भी धोखे में डाल दिया। यह सुनकर रुक्मिणी कहती हैं- वो अभिनय नहीं था भगवन, वो तो एक मां के दिल की वेदनाओं का प्रदर्शन था। मेरे आंसू झूठे नहीं थे। वह तो एक मां की आंखों में झलकने वाले ममता के मोती थे। इस पर श्रीकृष्ण कहते हैं कि देवी पृथ्वीलोक में निवास करने के बाद आप भी माया-मोह के चक्कर में उलझ गई।.. तब रुक्मिणी कहती हैं कि एक देवी के भीतर एक मां भी है। प्रद्युम्न और मेरा जब मिलन होगा तब वह बड़ा हो चुका होगा। उसका बचपन मेरे हाथ से फिसल गया है। जब वह पहली बार किसी को मां कहकर पुकारेगे तब मैं तो उसके पास भी नहीं होऊंगी भगवन।...इस तरह दोनों में वार्तालाप होता है।
बाद में रुक्मिणी और श्रीकृष्ण देखते हैं कि समुद्र में एक मछली के पेट के भीतर प्रद्युम्न है। यह देखकर रुक्मिणी कहती है वाह प्रभु! आपकी लीला अगाथ है। प्रद्युम्न को देखकर मेरा व्याकुल मन शांत हो गया। फिर यह बताया जाता है कि नाव में बैठे कुछ मछुआरे जाल डालकर उस मछली को पकड़ लेते हैं जिसने प्रद्युम्न को निगल लिया था।
यह देखकर श्रीकृष्ण कहते हैं- देवी मायावी संभारासुर का वध करने के लिए प्रद्युम्न को भी मायावी विद्या की शिक्षा लेना जरूरी है। अब इन मछुआरों के माध्यम से प्रद्युम्न संभरासुर के साम्राज्य में प्रदेश करेगा और संभरासुर का काल बनेगा।
उधर, वो मुछआरे उस मछली को बड़ी मुश्किल से जल से बाहर निकालकर खुश हो जाते हैं। एक कहता है- बहुत बड़ी मछली फंसी आज। इतनी बड़ी मछली बेचेंगे कहां और खरीदेगा कौन? ऐसा लगता है कि मछली नहीं मजरमच्छ गले पड़ गया है। तब दूसरा कहता है यही तो समस्या है इसे हम कहां ले जाएंगे? तब तीसरा कहता है कि यदि हम इस मछली को महाराज संभरासुर को भेंट कर दें तो? इस पर एक कहता है वो क्यों? तब वह कहता है कि अरे! महाराज हमें इनाम देंगे तो हम वारे-न्यारे हो जाएंगे।
तब वे सभी उस मछली को ले जाकर महाराज संभरासुर को दे देते हैं। संभरासुर उस मछली को देखकर कहता है- वाह! महारानी हमारे इन शुभचिंतकों को इस अनुपम भेंट के लिए पुरुस्कार मिलना ही चाहिए। फिर उन मछु्आरों को महारानी मायावती सिक्कों की एक थैली दे देती हैं। वह थैली लेकर मछुआरे वहां से चले जाते हैं।
यह देखकर श्रीकृष्ण कहते हैं- देखा देवी! होनी जब होनी होने को आती है तो मनुष्य कैसा अंधा हो जाता है। इस समय संभरासुर के समक्ष यही समस्या है। उसे अपने समीप प्रद्युम्न के रूप में साक्षात मृत्यु दिखाई नहीं दे रही है। मूर्ख उस मछली को देखकर कितना प्रसन्न हो रहा है।
फिर उधर, संभरासुर अपने एक सेवक से कहता है- प्रतिहारी हमारे उस विशेष रसाइये भाणासुर को हमारा संदेश दो। कहो की महल में इसी समय उपस्थित हो। महाराज ने एक विशेष मछली का विशेष व्यंजन तैयार करने की आज्ञा दी है।..सेवक यह सुनकर कहता है- जो आज्ञा महाराज।
उधर, भाणासुर को बताया जाता है जो अपनी पत्नी के साथ भगवान विष्णु की मूर्ति के समक्ष खड़ा होता है। उसकी पत्नी प्रार्थना करती है कि हे ईश्वर! तू ही जन्मदाता और तूही मृत्यु देने वाला, मेरी गोद कब से खाली है तू उसे भर दे प्रभु, जल्दी भर दे।....यह सुनकर भाणासुर कहता है तो तुम पहले से ही पूजा कर रही थी? यह सुनकर उसकी पत्नी कहती हैं- हां। तब वह कहता है तो अब तक क्यों नहीं सुनी तुम्हारे भगवान विष्णु ने तुम्हारी प्रार्थना? इस पर वह कहती है कि इसलिए की तुमने मेरे साथ प्रार्थना नहीं की। तुम केवल एक बार भगवान विष्णु की प्रार्थना करो। वो हमारी प्राथना अवश्य सुनेंगे। यह सुनकर भाणासुर कहता है- नहीं ये नहीं हो सकता।
तभी वहां पर संभरासुर का भेजा सेवक द्वार पर आवाज लगता है भाणासुर, ओ भाणासुर। ऐसा कहते हुए वह सेवक अंदर प्रवेश कर जाता है तो भाणासुर की पत्नी जल्दी से विष्णु की मूर्ति का परदा गिरा देती है।
फिर वह सैनिक कहता है- भाणासुर क्या कर रहे थे? यह सुनकर भाणासुर कहता है- कुछ नहीं परंतु तुम राजमहल छोड़कर इधर क्या कर रहे हो? तब वह सेवक कहता है कि असुरेश्वर ने तुम्हें तुरंत उपस्थित होने की आज्ञा दी है और तुम्हारी आज की छुट्टी रद्द की गई है। यह सुनकर वह कहता है कि परंतु महल में और भी तो दूसरे रसोईये हैं। तब वह सेवक कहता है- हैं पर असुरेश्वर को एक बहुत बड़ी मछली भेंट में मिली है और आप मछली के व्यंजन बनाने के विशेषज्ञ हैं। इसलिए महाराज ने आप दोनों को ये विशेष काम सौंपा है। चलिये, चलिये।
फिर भाणासुर और उसकी पत्नी दोनों ही राजमहल में जाकर देखते हैं वह विशालकाय मछली। यह देखकर उसकी पत्नी कहती हैं- इतनी बड़ी मछली इसे मैं काटूंगी कैसे? तब भाणासुर बड़ा छूरा देकर कहता है कि बड़ी मछली के लिए बड़ा छूरा। एक भाग तुम काटो और दूसरा भाग मैं काटता हूं। फिर भाणासुर मछली का पिछला हिस्सा और उसकी पत्नी अगला हिस्सा काटने लगते हैं तभी उसकी पत्नी को मछली के पेट में से छपाक-छपाक की आवाज सुनाई देती है तो वह कहती है स्वामी इसका पेट देख रहे हो कितना बड़ा है। ये अवश्य ही गर्भवती है, नहीं मैं इसे नहीं काटूंगी।
यह सुनकर उसका पति भाणासुर कहता है- अरी पगली! यदि ये मछली गर्भवती भी है तो इसके पेट से अंडा निकलेगा, बच्चा थोड़े ही निकलेगा। चलो काटो इसे जल्दी से, मुझे पहले से ही बहुत देर हो चुकी है। फिर भी उसकी पत्नी कहती है कि मैं इसे नहीं काटूंगी।... यह दृश्य देवर्षि नारद, देवी रति, रुक्मिणी और श्रीकृष्ण देख रहे होते हैं।
फिर भाणासुर की पत्नी मछली काटने लग जाती है और वे जैसे ही मछली का अगला हिस्सा काटकर अलग करती है तो उसकी पत्नी ये देखकर दंग रह जाते हैं कि उसके पेट में तो एक जिंदा बालक है। तभी प्रद्युम्न रोने लगता है। यह देखकर उसकी पत्नी आश्चर्य से कहती है- बालक! फिर वह उसे बाहर निकालकर कहती है- स्वामी स्वामी, ये देखिये ये बालक। भाणासुर भी उसे देखकर आश्चर्य करता है। उसकी पत्नी कहती है- स्वामी ये तो रो रहा है ये जीवित है स्वामी।...
उसकी पत्नी भगवान विष्णु का कोटि-कोटि धन्यवाद करती हैं। फिर वह अपने पति भाणासुर से कहती है कि अब तुम भी प्रार्थना करो। यह सुनकर उसका पति कहता है- अरे ये तुम क्या कह रही हो? पता नहीं किसका बच्चा है ये जिसे तुम अपना कह रही हो और इसका श्रेय भी तुम भगवान विष्णु को दे रही हो। तब उसकी पत्न कहती है कि कुछ भी हो ये भगवान विष्णु का ही उपहार है। तब उसका पति कहता है- इस झूठ को तुम भगवान विष्णु का उपहार कह रही हो। अपनी निराश ममता को इस झूठी आस से समझा रही हो। कितनी भोली हो तुम। आज तक तुम मुझसे छुपकर उस गुड़िया को सीने से लगाए मन को बहलाए करती थी अब तुम्हारे पागलपन को ये सचमुच की गुड़िया मिल गई है। मेरा मन तो यह नहीं मान सकता कि ये मेरा बच्चा है। तब उसकी पत्नी कहती है कि सबकुछ मानने से ही होता है स्वामी। मानो तो फूल है वर्ना माटी और धूल है।
यह सुनकर उसका पति कहता है- मानने के लिए कुछ तर्क तो होना चाहिए। ना तो तुमने इसे जन्मा है और ना तुमने इसे दूध पिलाया है फिर मां बेटे के संबंध को भला कोई क्यूं मानेगा? लाओ इस बच्चे को मुझे दे दो। महाराज के पास ले जाकर सब सच-सच बता दूंगा। यह सुनकर उसकी पत्नी कहती है कि नहीं नहीं मैं तुम्हें ऐसा अनर्थ नहीं करने दूंगी। ये बालक तो भगवान विष्णु का दिव्य उपहार है। उनकी पूजा से हमें ये मिला है। यह हमारे भाग्य से हमें ये मिला है। फिर ये बच्चा, इस बच्चे को तो मछली के पेट में ही समाप्त हो जाना चाहिए था। और, फिर ये मछली हमारे पास ही कटने के लिए क्यूं आती? दूसरे रसोइये के पास भी तो जा सकती थी। इधर हम बच्चे के लिए भगवान विष्णु की आराधना कर रहे थे और उधर वे हमारे लिए बच्चे का प्रबंध कर रहे थे। ये केवल बालक ही नहीं भगवान विष्णु की लीला है और आप इस लीला को नकार रहे हैं। उसे मुझसे छीन ले जाना चाहते हैं।
तब भाणासुर कहता है कि तुम्हारे भावुक होने से वास्तविकता तो नहीं बदल सकती। ना तो तुमने इसे जन्म दिया है और ना ही इसे दूध पिलाया है। लाओ ये बच्चा मुझे दे दो। ऐसा कहकर वह उसकी पत्नी से बच्चा छीनकर ले जाने लगता है तब उसकी पत्नी पीछे से उसका हाथ पकड़कर कहती है ये बच्चा मेरा है इसे मुझे दे दो।...तभी रुक्मिणी अपने चमत्कार से उसकी पत्नि के स्तन में दूधभर देती है और दूध बाहर झरने लगता है यह देखकर उसकी पत्नी कहती है- रुको स्वामी ये देखो। देखो ये क्या हो रहा है? ये देखो भगवान विष्णु की एक और लीला। उसका पति भी ये देखकर आश्चर्य करता है और कहता है ये तो सचमुच चमत्कार है।
फिर वह उस बच्चे को स्तनपान कराते हुए कहती है- स्वामी अब तो आपकी शिकायत दूर हो गई ना? अब ये बच्चा मेरा दूध पिकर मेरा हो गया है। अब ये मेरा बच्चा है और जब मैं इसकी मां बन गई हूं तो आप इसके पिता बन गए हैं ना? यह सुनकर भाणासुर कहता है- हां भानामति।.. तब भानामति कहती है कि तो फिर आप एक वचन दीजिये कि आप यह किसी को नहीं बताएंगे कि ये बच्चा मछली के पेट से मिला है। तब भाणासुर कहता है कि मैं वचन देता हूं। फिर भानामति कहती है कि आपका ये वचन मेरे माथे पर लगे बांछपन के कलंक को मिटा देगा।
फिर बाद में वे दोनों महाराज संभरासुर और रानी मायावती के पास जाकर उन्हें प्रणाम करते हैं और कहते हैं- महाराज ये हम दोनों का पहला पुत्र है। इसलिए हम दोनों आपसे आशीर्वाद लेने आएं हैं। यह सुनकर संभरासुर कहता है- लाओ हम भी देखें कि तुम्हारा पुत्र कैसा है।... यह सुनकर रति घबरा जाती है और नारदमुनि भी देखने लगते हैं। श्रीकृष्ण और रुक्मिणी भी इस घटना को देखते हैं।
फिर भाणासुर अपने पुत्र (प्रद्युम्न) को संभरासुर के हाथ में दे देता है। संभरासुर हंसते हुए उसे अपनी गोद में लेता है और तब फिर उस बालक को गौर से देखकर वह कुछ समझ नहीं पाता है तब फिर वह पूछता है ये तुम्हारा बालक है? यह सुनकर भाणासुर सकपका जाता तो उसकी पत्नी भानामति कहती है- हां महाराज ये मेरा ही पुत्र है। फिर संभरासुर कहता है- ये बालक बड़ा ही शूरवीर लगता है। यह सुनकर भानापति कहती है- महाराज आप इसे लंबी आयु का आशीर्वाद दीजिये। यह सुनकर संभरासुर कहता है- आयुष्यमान भव:। ऐसा कहकर वह उस बालक को अपनी रानी मायावती के हाथ में देकर कहता है- लीजिये महारानी आप भी देखिये इस बालक को। महारानी हाथ में लेकर कहती है- बधाई हो भाणासुर, बधाई हो भानामति। तुम्हें पुत्र की प्राप्ति हुई ये देखकर मुझे परम संतोष हुआ।
फिर संभरासुर अपने गले का एक हार निकालकर कहता है- ये लो भाणासुर हमारी तरफ से तुम्हारे पुत्र के लिए भेंट। क्या नामकरण किया है तुमने अपने पुत्र का? यह सुनकर भाणासुर कहता है- महाराज अभी तक नामकरण नहीं हुआ है। यह सुनकर रानी मायावती कहती है- क्यों भाणासुर? यह सुनकर भानामति कहती है यदि आप दोनों ही इसे आशीर्वाद देकर इसका नामकरण करेंगे तो हम धन्य हो जाएंगे महारानी। फिर भाणासुर कहता है कि महाराज संभरासुर जैसे परमप्रतापी, बलशाली, शौर्यशाली और महावीर का आशीर्वाद यदि हमारे पुत्र को प्राप्त हुआ तो भविष्य में हामारा पुत्र भी वीर बनकर दुष्टों को नष्ट करेगा। यह सुनकर गर्वित होकर संभरासुर कहता है- अवश्य करेगा। तुम्हारा पुत्र बड़ा होकर शत्रु का सर्वनाश करेगा।
फिर भाणासुर कहता है- महाराज इसका नामकरण तो कीजिये। यह सुनकर संभरासुर कुछ सोचने लग जाता है और फिर कहता है- हम इसका नाम प्रद्युम्न रखते हैं।... यह सुनकर देवर्षि और रति चौंक जाते हैं। रुक्मिणी श्रीकृष्ण की ओर देखती है तो वे मुस्कुराने लगते हैं।
यह नाम सुनकर रानी मायावती संभरासुर की ओर देखकर कहती है- प्रद्युम्न! तब संभरासुर मुस्कुरा देता है। फिर भाणासुर और उसकी पत्नी कहती है- प्रद्युम्न अच्छा नाम है महाराज। अब आज्ञा दें महाराज। फिर वे दोनों वहां से चले जाते हैं तब मायावती पूछती है कि महाराज आपने ये कैसा नाम रखा है? तब संभरासुर कहता है क्यों मायावती आपको ये नाम पसंद नहीं आया? तब वह कहती हैं- परंतु प्रद्युम्न तो वासुदेव श्रीकृष्ण के पुत्र का नाम था। यह सुनकर संभरासुर कहता है कि तो क्या हुआ। भाणासुर और भानामति के पुत्र को देखकर न जाने क्यों मुझे कृष्ण का पुत्र याद आ गया। इसीलिए मैंने उसका नाम प्रद्युम्न रख दिया। यह सुनकर मायावती कहती है- परंतु शत्रु पुत्र का नाम अब इस महल में गुंजकर शत्रु की याद दिलाता रहेगा। यह सुनकर संभरासुर कहता है- नहीं मायावती नहीं, बल्कि शत्रु पर विजय की याद दिलाता रहेगा जिसके पुत्र का मैंने वध किया है।
फिर उधर रसोई घर में प्रद्युम्न रो रहा होता है तो उसकी पत्नी भानामति कहती है- आप ध्यान नहीं दे रहे इस पर। तब वह कहता है कि भानापति आज राजमहल में राजगुरु पधार रहे हैं उनके लिए भोजन बनाना है यदि देर हो गई तो महाराज क्रोधित हो जाएंगे। इसलिए तुम बालक को संभालो, मैं भोजन बनाता हूं। फिर भानामति बालक को चुप कराने लग जाती है।
उधर राजमहल के बाहर संभरासुर के राजगुरु रथ से उतरते हैं।... उन्हें देखकर रति नारदमुनिक से कहती हैं- ये क्यों आए हैं? देवर्षि राजगुरु को देखकर मेरे मन में भय की आंधी क्यों उठ रही है। संभरासुर के राजगुरु का चेहरा बता रहा है कि वो ज्ञानी हैं, तपस्वी हैं।
संभरासुर के राजगुरु रथ से उतरकर राजमहल की छत पर देखते हैं तो उन्हें काला साया नजर आता है। तभी पास में खड़ा संभरासुर का पुत्र कुंभकेतु कहता है गुरुदेव आप रुक क्यों गए, क्या हुआ? तब वे कहते हैं कि मुझे राजमहल पर संकट की काली छाया दिखाई दे रही है। तब वह कुंभकेतु कहता है परंतु मुझे तो नहीं दिखाई दे रही गुरुदेव। यह सुनकर गुरुदेव कहते हैं तुम्हें वह काली छाया नहीं दिखाई देगी युवराज कुंभकेतु। तब कुंभकेतु कहता है यदि काली छाया है भी तो इसमें संकट की क्या बात है गुरुदेव? तब वे कहते हैं ये छाया घोर संकट का प्रतीक है कुंभकेतु। राजमहल पर अवश्य ही कोई विकट समय आने वाला है।
फिर गुरुदेव अपनी शक्ति से भगवान शंकर का नाम लेकर उस काली छाया से प्रकट होने का कहता है और पूछते हैं बताओ की तुम कौन हो तो वह काली छाया प्रकट होकर कहती है कि मैं काल हूं और संभरासुर का भक्षण करूंगा। यह सुनकर गुरुदेव कहते हैं- परंतु संभरासुर तो अजेय और अमर हैं। यह सुनकर काल कहता है कि केवल में ही अजर और अमर हूं और कोई नहीं। ये उसकी भूल है मैं संभरासुर का काल हूं। यह सुनकर गुरुदेव चौंक जाते हैं। जय श्रीकृष्णा।
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