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धर्म संसार /शौर्यपथ / पितृ पक्ष के दौरान दिवंगत पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध किया जाता है. माना जाता है कि यदि पितर नाराज हो जाएं तो व्यक्ति का जीवन भी परेशानियों और तरह-तरह की समस्याओं में पड़ जाता है और खुशहाल जीवन खत्म हो जाता है. साथ ही घर में भी अशांती फैलती है और व्यापार और गृहस्थी में भी हानी होती है. ऐसे में पितरों को तृप्त करना और उनकी आत्मा की शांति के लिए पितृ पक्ष में श्राद्ध करना बेहद आवश्यक माना जाता है.
श्राद्ध के जरिए पितरों की तृप्ति के लिए भोजन पहुंचाया जाता है और पिंड दान और तर्पण कर उनकी आत्मा की शांति की कामना की जाती है.
2020 में कब है पितृ पक्ष
हिंदू पंचांग के अनुसार पितृ पक्ष अश्विन मास के कृष्ण पक्ष में पड़ते हैं. इनकी शुरुआत पूर्णिमा तिथि से होती है और समापन अमावस्या पर होता है. अंग्रेजी कैलेंडर के मुताबिक हर साल सितंबर के महीने में पितृ पक्ष की शुरुआत होती है. आमतौर पर पितृ पक्ष 16 दिनों का होता है. इस साल पितृ पक्ष 1 सितंबर से शुरू हो कर 17 सितंबर को खत्म होगा.
1 सितंबर- पूर्णिमा का श्राद्ध, 2 सितंबर- प्रतिपदा का श्राद्ध, 3 सितंबर- द्वितीया का श्राद्ध, 5 सितंबर- तृतीया का श्राद्ध, 6 सितंबर- चतुर्थी का श्राद्ध, 7 सितंबर- पंचमी का श्राद्ध, 8 सितंबर- षष्ठी का श्राद्ध, 9 सितंबर- सप्तमी का श्राद्ध, 10 सितंबर- अष्टमी का श्राद्ध, 11सितंबर- नवमी का श्राद्ध, 12 सितंबर- दशमी का श्राद्ध, 13 सितंबर- एकादशी का श्राद्ध, 14 सितंबर- द्वादशी का श्राद्ध, 15 सितंबर- त्रयोदशी का श्राद्ध, 16 सितंबर- चतुर्दशी का श्राद्ध, 17 सितंबर- अमावस का श्राद्ध.
पितृ पक्ष का महत्व
हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व माना जाता है. हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद मृत व्यक्ति का श्राद्ध किया जाना बेहत जरूरी माना जाता है. माना जाता है कि यदि श्राद्ध न किया जाए तो मरने वाले व्यक्ति की आत्मा को मुक्ति नहीं मिलती है. वहीं ये भी कहा जाता है कि पितृ पक्ष के दौरान पितरों का श्राद्ध करने से वो प्रसन्न हो जाते हैं और उनकी आत्मा को शांति मिलती है. ये भी माना जाता है कि पितृ पक्ष में यमराज पितरो को अपने परिजनों से मिलने के लिए मुक्त कर देते हैं. इस दौरान अगर पितरों का श्राद्ध न किया जाए तो उनकी आत्मा दुखी व नाराज हो जाती है.
पितृ पक्ष में किस दिन करें श्राद्ध
दरअसल, दिवंगत परिजन की मृत्यु की तिथि में ही श्राद्ध किया जाता है. उदाहरण के तौर पर यदि आपके किसी परिजन की मृत्यु प्रतिपदा के दिन हुई है तो प्रतिपदा के दिन ही उनका श्राद्ध किया जाना चाहिए. आमतौर पर इसी तरह से पितृ पक्ष में श्राद्ध की तिथियों का चयन किया जाता है:
- जिन परिजनों की अकाल मृत्यु या फिर किसी दुर्घटना या आत्महत्या का मामला है तो उनका श्राद्ध
चतुर्दशी के दिन किया जाता है.
- दिवंगत पिता का श्राद्ध अष्टमी और मां का श्राद्ध नवमी के दिन किया जाता है.
- जिन पितरों के मरने की तिथि न मालूम हो, उनका श्राद्ध अमावस्या के दिन करना चाहिए.
- यदि कोई महिला सुहागिन मृत्यु को प्राप्त हुई तो उनका श्राद्ध नवमी को करना चाहिए.
- सन्यासी का श्राद्ध द्वादशी के दिन किया जाता है.
श्राद्ध के नियम
- पितृ पक्ष के दौरान हर दिन तर्पण किया जाना चाहिए. पानी में दूध, जौ, चावल और गंगाजल डालकर तर्पण किया जाता है.
- इस दौरान पिंड दान भी करना चाहिए. श्राद्ध कर्म में पके हुए चावल, दूध और तिल को मिलाकर पिंड बनाए जाते हैं. पिंड को शरीर के प्रतीक के रूप में देखा जाता है.
- पितृ पक्ष में कोई भी शुभ कार्य, विशेष पूजा-पाठ और अनुष्ठान नहीं करना चाहिए. हालांकि, देवताओं की नित्य पूजा को बंद नहीं करना चाहिए.
- श्राद्ध के दौरान पाना खाने, तेल लगाने और संभोग की मनाही है.
- इस दौरान रंगीन फूलों का भी इस्तेमाल नहीं किया जाता है.
- पितृ पक्ष में चना, मसूर, बैंगन, हींग, शलजम, मांस, लहसुन, प्याज और काला नमक भी नहीं खाया जाता है.
- इस दौरान नए वस्त्र, नया भवन, गहने या कीमती सामान को खरीदने से भी कई लोग परहेज करते हैं.
श्राद्ध कैसे करें?
- श्राद्ध की तिथि का चयन ऊपर दी गई जानकारी के मुताबिक करें.
- श्राद्ध करने के लिए आप अपने पुरोहित को बुला सकते हैं.
- श्राद्ध के दिन अच्छा खाना या फिर पितरों की पसंद का खाना बनाएं.
- खाने में लहसुन और प्याज का इस्तेमाल न करें.
- मान्यता के मुताबिक श्राद्ध के दिन स्मरण करने से पितर घर आते हैं और भोजन पाकर तृप्त हो जाते हैं.
- श्राद्ध के दिन पांच तरह की बलि बताई गई है: गौ (गाय) बलि, श्वान (कुत्ता) बलि, काक (कौवा) बलि, देवादि बलि, पिपीलिका (चींटी) बलि.
- बता दें, यहां बलि का मतलब किसी पशु या जीव की हत्या नहीं है बल्कि श्राद्ध के दिन इन सभी जानवरों को खाना खिलाया जाता है.
- तर्पण और पिंड दान के बाद पुरोहित या किसी ब्राह्मण को भोजन कराएं और दक्षिणा दें.
- ब्राह्मण को सीधा या सीदा भी दिया जाता है. सीधा में चावल, दाल, चीनी, नमक, मसाले, कच्ची सब्जियां, तेल और मौसमी फल शामिल है.
- ब्राह्मण भोज के बाद पितरों को धन्यवाद दें और जाने-अनजाने में हुई भूल के लिए माफी मांगे.
- इसके बाद अपने पूरे परिवार के साथ बैठ कर भोजन करें.
- श्राद्ध के दौरान पान खाने, तेल लगाने और संभोग करने की मनाही होती है.
- इन दिनों में रंगीन फूलों का इस्तेमाल करना भी वर्जित होता है.
- पितृ पक्ष में चना, मसूर, बैंगन, हींग, शलजम, मांस, लहसुन, प्याज और काला नमक भी नहीं खाना चाहिए,
- इस समय में कई लोग नए वस्त्र या सामान आदि भी नहीं खरीदते हैं.
श्राद्ध की तिथियां
1 सितंबर- पूर्णिमा का श्राद्ध, 2 सितंबर- प्रतिपदा का श्राद्ध, 3 सितंबर- द्वितीया का श्राद्ध, 5 सितंबर- तृतीया का श्राद्ध, 6 सितंबर- चतुर्थी का श्राद्ध, 7 सितंबर- पंचमी का श्राद्ध, 8 सितंबर- षष्ठी का श्राद्ध, 9 सितंबर- सप्तमी का श्राद्ध, 10 सितंबर- अष्टमी का श्राद्ध, 11 सितंबर- नवमी का श्राद्ध, 12 सितंबर- दशमी का श्राद्ध, 13 सितंबर- एकादशी का श्राद्ध, 14 सितंबर- द्वादशी का श्राद्ध, 15 सितंबर- त्रयोदशी का श्राद्ध, 16 सितंबर- च
कैसे मिलता है पितरों का आशीर्वाद, पढ़िए पूरी कथा
पितृ कभी भी अपनी संतानों को परेशान नहीं करना चाहते हैं, वे बहुत दयालु होते हैं। लेकिन संतानों की उपेक्षा से दुखी हो जाते हैं, क्योंकि संतान के द्वारा श्राद्धकर्म और पिंडदान आदि करने पर उन्हें तृप्ति मिलती है, और वे अपनी संतानों को धन-धान्य और खुश रहने का आशीर्वाद देते हैं। पितृ ये नहीं चाहते कि उनकी संतानें उनको तृप्त करने के लिए बहुत कुछ करें, वे श्रद्धा भाव से किए गए श्राद्ध के खुशी के साथ स्वीकारते हैं। कहा भी गया है कि श्रद्धा के बिना श्राद्ध अधूरा होता है। इसी से जुड़ी है श्राद्ध पक्ष की पौराणिक कथा, जानते हैं कि कैसे श्रद्धा भाव से प्रसन्न होकर पितर देते हैं अपना आशीर्वाद...
पौराणिक कथा के अनुसार जोगे और भोगे नाम के दो भाई थे। दोनों अलग-अलग घरों में रहा करते थे। जोगे के पास धन की कोई कमी न थी, लेकिन भोगे निर्धन था। दोनों भाई एक दूसरे से बहुत प्रेम करते थे। लेकिन जोगे की पत्नी को धन का अभिमान था, तो वहीं भोगे की पत्नी सुशील और शांत स्वाभाव की थी। जब पितृ पक्ष आने पर जोगे की पत्नी ने उससे पितरों का श्राद्ध करने के लिए कहा तो जोगे इसे व्यर्थ का कार्य समझकर टालने की कोशिश की, लेकिन जोगे की पत्नी केवल अपनी शान दिखाने के लिए श्राद्ध का कार्यक्रम रखना चाहती थी। ताकि वह अपने मायके पक्ष के लोगों को बुलाकर दावत कर सके। जोगे की पत्नी से उसने कहा कि मुझे कोई परेशानी न हो इसलिए आप ऐसा कह रहे हैं। लेकिन मैं सत्य कहती हूं, मुझे इसमें कोई परेशानी नहीं है, मैं भोगे की पत्नी को बुला लूंगी। हम दोनों मिलकर सारा काम कर लेंगी।
दूसरे दिन भोगे की पत्नी सुबह आकर सारा कार्य करवाने लगी, उसने अनेक पकवान बनाए, फिर सभी काम निपटाने के बाद अपने घर वापस आ गई, क्योंकि उसे भी पितरों का तर्पण करना था। जब पितर भूमि पर उतरे जब वे जोगे के यहां गए तो देखा कि उसके ससुराल पक्ष के सभी लोग भोजन पर जुटे हुए हैं। वहां ये सब देखकर वे बहुत निराश हुए उसके बाद जोगे-भोगे के पितर भोगे के यहां गए, तो देखते हैं कि मात्र पितरों के नाम पर केवल 'अगियारी' दे दी गई है। पितर उसकी राख चाटते हैं, और भूखे ही नदी के तट पर पहुंच जाते हैं।
कुछ ही देर में सारे पितर अपने-अपने यहां का श्राद्ध ग्रहण करके इकट्ठे हो गए और बताने लगे कि उनकी संतानों ने किस-किस तरह से उनके लिए श्राद्धों के पकवान बनाए। जोगे-भोगे के पितरों ने भी अपना सारा कुछ बताया। उन्होंने सोचा कि अगर भोगे निर्धन न होता और श्राद्ध करने में समर्थ होता तो शायद उन्हें भूखा वापस नहीं आने पड़ता, क्योंकि भोगे के घर में तो खाने के लिए भी दो जून की रोटी नहीं थी। ये सारी बातें सोचकर पितरों को भोगे पर दया आ गई। अचानक से वे नाच-नाचकर गाने लगे कि भोगे के घर धन हो जाए, भोगे के घर धन हो जाए।
सांझ का समय हो चला था, लेकिन भोगे के घर में खाने को कुछ भी नहीं था। उसके बच्चे भूखे थे। बच्चों ने अपनी मां से कहा कि भूख लगी है। तब उन्हें टालने के लिए गुस्से से गरज कर भोगे की पत्नी ने कहा कि जाओ आंगन में हौदी औंधी रखी है, उसे जाकर खोल लो उसमें जो भी मिल जाए आपस में बांटकर खा लेना। बच्चे जब वहां जाकर हौदी देखते हैं, तो वे दौड़े-दौड़े मां के पास जाकर कहते हैं कि मां हौदी तो मोहरों से भरी पड़ी है। आंगन में आकर भोगे की पत्नी ने यह सब कुछ देखती है, तो उसके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहता है।
इस तरह पितरों के आशीर्वाद से भोगे भी धन-धान्य से परिपूर्ण हो जाता है, लेकिन वह इस बात का बिल्कुल अंहकार नहीं करता है, और अगले बरस पूरी श्रद्धा के साथ भोगे एवं उसकी पत्नी अपने पितरों का श्राद्ध करते हैं। भोगे की पत्नी पितरों के लिए 56 प्रकार के व्यंजन तैयार करती है, वे दोनों ब्राह्मणों को भोजन कराते हैं, अपने जेठ-जेठानी को बुलाकर सम्मान के साथ सोने और चांदी के बर्तनों में भोजन कराते हैं। इससे उनके पितर बहुत प्रसन्न होते हैं।
सपने में पितरों को देखने का क्या होता है मतलब
श्राद्ध पक्ष आरंभ होने वाले हैं जो 2 सितंबर से शुरु होकर 17 सितंबर तक चलेंगे, ये पूरे 16 दिन पितरों को समर्पित होते हैं। इस समय पितरों का श्राद्ध, पितृ तर्पण करके उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। तो आज हम जानेगें कि स्वप्न शास्त्र के अनुसार सपने में पितरों को देखने का क्या मतलब होता है। हम सभी सोते समय अच्छे और बुरे दोनों तरह के सपने देखते हैं। स्वप्न शास्त्र के अनुसार हर सपने का अपना एक मतलब होता है। कभी-कभी जो हमारे मस्तिष्क में चल रहा होता है, वही हमें सपने में दिखाई देता है। लेकिन कुछ सपने हमारी जिंदगी की घटनाओं से जुड़े होते हैं। स्वप्न शास्त्र कहता है कि सपनों में पितरों को देखना आपकी जिंदगी से जुड़े कई तरह के संकेत देता है। इससे पता लगाया जा सकता है कि आपकी जिंदगी में क्या घटित होने वाला है, आइए जानते हैं कि सपने में पितरों को देखने का क्या मतलब होता है।
अगर कोई व्यक्ति सपने में अपने पितरों को हंसते-मुस्कुराते खुशहाल अवस्था में देखता है, तो इसका अर्थ होता है कि आपके पितर आपसे प्रसन्न हैं। ऐसे स्वप्न शुभफलदायक होते हैं। स्वप्न शास्त्र के अनुसार इस तरह के सपने देखने का अर्थ होता है कि व्यक्ति पर और परिवार पर पितरों की कृपा है। यह घर में सुख-समृद्धि आने के संकेत हैं।
अगर सपने में पितर खुशियां मनाते हुए मिठाई खा रहे हैं या फिर बांट रहे हैं, तो इसका अर्थ है कि आपके घर में खुशियां आने वाली हैं। इससे घर में मांगलिक कार्य होने के संकेत होते हैं। ऐसे सपने देखने का अर्थ होता है कि किसी के विवाह या फिर संतान के योग बन रहे हैं।
सपने में किसी के पितर दुखी या फिर नाराज दिखाई देते हैं, तो इसका अर्थ होता है कि आपके पितर आपसे प्रसन्न नहीं हैं। ऐसे सपने शुभ नहीं होते हैं। ज्यादातर ऐसे सपने पितृदोष लगने पर आते हैं। ऐसे में आपको अपने पितरों को प्रसन्न करने के उपाय करने चाहिए।
स्वप्न शास्त्र के अनुसार जब कोई व्यक्ति स्वप्न में देखता है कि उसके पितर उससे बातें कर रहें है, तो इसका अर्थ होता है, वे आपको कुछ बताना चाहते हैं या किसी आने वाली घटना से आपको आगाह कर रहे हैं।
हर भारतीय महिला एक पुरुष की निगरानी में बड़ी होती है. जो बचपन से शुरू होती है और उसकी आंखिरी सांस तक चलती है. इसी के बीच वह गुम सी हो जाती है.
शौर्यपथ / यही निगरानी उसकी हर मांग को तय करती है- उसे क्या पहनना है, क्या छिपाना है. किस वक्त तक घर वापस आना है. कॉलेज में किस तरह के लड़कों से बचना है. शादी के लिए सही उम्र क्या है. शादी से पहले सेक्स नहीं करना है. कैसे पोर्न देखना ठीक नहीं है. कैसे हस्तमैथुन गंदा है. एक अच्छी लड़की की यही कहानी है- सती सावित्री शुद्ध भारतीय नारी. नैतिक रूप से ईमानदार. सेक्सुअली तनावग्रस्त.
परछाई से डर लगता है.
अंधेरे के बाद रास्तों को खतरनाक समझाया गया. शहरों को "असुरक्षित" के रूप में प्रचारित किया गया. नैतिक आचरण का एक कड़ा परदा होना चाहिए. उम्मीद की जाती है कि खुद को बुरी नजर से बचाने के लिए खुद एक लक्ष्मण रेखा बनाए रखें.
पेपर स्प्रे. आत्मरक्षा की क्लास. कार की पिछली सीट पर हॉकी रखना. फोन के स्पीड डॉयल में पिताजी और भैया का नंबर रखना. दिल्ली पुलिस के नंबर के साथ. लंबे बाजू वाले टॉप. कोई तंग जींस नहीं.
छूना नहीं. क्लीवेज नहीं. कोई इच्छा नहीं.
और फिर भी हर रोज लगभग हर भारतीय मेट्रो में महिलाओं के साथ यौन अपराध के चौंकाने वाले मामले सामने आते हैं. ऐसी जगहों पर पहली बार में आप उन पुरुषों को बलात्कारियों के रूप में वर्गीकृत नहीं करते हैं. उदाहरण के लिए उबेर टैक्सी ड्राइवर का मामला ही लीजिए, जिसने गुड़गांव में एक महिला सवारी को जबरन किस करने की कोशिश की. कुछ महीनों पहले एक 27 वर्षीय फाइनेंस एक्जीक्यूटिव ने आरोप लगाया था कि उसके साथ एक अन्य उबेर टैक्सी ड्राइवर ने गुड़गांव में एक सुनसान जगह पर उस वक्त बलात्कार किया था जब वह टैक्सी में जाते वक्त सो गई थी. नए मामले में पीड़िता के भाई ने अपने आक्रोश को बाहर निकालने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया है.
यह जानते हुए कि उस लड़की को अब खामोश रहने के लिए मजबूर किया जाएगा, यह चुप्पी शर्म की बात है. इस वक्त में...
हमारे पुराने पड़ोसी पोतोल की तरह. कोलकाता में एक मध्यम आयु वर्ग का मोटे व्यक्ति, जिनके कानों और नाक से बाहर बाल निकल आए थे. हमारी बर्तन धोने वाली नौकरानियों को वह अपनी छत से घूरा करता था. और अपने नंगे सीने और गुप्तांग को छूता था. इसी वजह से हम हमेशा अपने स्टडी रूम की खिड़की को बंद रखते थे ताकि हमें पोतोल का मलिन बेडरूम दिखाई न दे. जहां से वह ताक झांक करता था.
उसकी पत्नी निःसंतान थी.
क्या यह एक तरह की सजा थी? मैं रोज उन लोगों को फुसफुसाते हुए सुनती थी. कुछ नौकरानियां आपस में बातें किया करती थीं कि उसकी पत्नी पर आत्माओं का साया है, इसीलिए वह जो चाहता था उसकी पत्नी उसे नहीं दे सकती थी.
एक बिगड़ा हुआ आम भारतीय वास्तव में क्या चाहता है? क्या पोतोल का रोजाना खराब व्यवहार उचित सेक्स की कमी से जूझने की वजह से था? क्यों हमने उसे इतनी आसानी से जाने दिया? क्यों नौकरानियां हमेशा उसके घर में रहती थी? क्या वह उन्हें गलत तरीके से छूने की कोशिश करता था? क्या यह छूना एक लिंग के प्रति संवेदनशीलता थी? क्या स्पर्श करना एक वर्ग बाधा है? क्या एक गरीब नौकरानी का शरीर उसका अपना नहीं था? क्या बलात्कार केवल एक शहरी घटना है?
अभिनेत्री प्रीति जिंटा ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा था कि "मुझे हर वक्त मुस्कुराना चाहिए, हमेशा अच्छा व्यवहार करना चाहिए. मैं एक ट्रॉफी की तरह हूं. मेरे चेहरे पर कोई दाना नहीं होना चाहिए, वजन नहीं बढ़ाना चाहिए और जब फोटोग्राफर मेरे चेहरे पर फ्लैश चमाकाएं तो मुझे अंधेरे में भी अपना चेहरा कवर नहीं करना चाहिए, चाहे यह मुझे डराने वाला ही क्यों न हो. भारी भीड़ मुझे परेशान करती हो और पुरुष मुझे छूने की कोशिश कर रहे हों फिर भी मैं प्रतिक्रिया न करूं क्योंकि वे सभी मेरे फैन हैं? आखिर क्या मैं एक औरत नहीं हूं!"
क्या हम कभी जिंटा की परेशानी को समझ सकते हैं?
ज्यादातर भारतीय पुरुषों की कामेच्छा जो स्वस्थ यौन शिक्षा का हिस्सा नहीं हैं उसकी शुरूआत स्कूलों और कॉलेजों से पहले घरों से होती है... काम करने की जगह पर कामेच्छा को काबू में रखना? क्या यह आत्म नियत्रंण हमारी उस पाखंडी संस्कृति का परिणाम तो नहीं है, जिसमें एक ओर तो वह खजुराहो में कामसूत्र के किरदारों को देखने आए नीली-आंखों वाले पर्यटकों को घूरता है और दूसरी ओर सख्त आत्म नियंत्रण की बात करता है. माता-पिता ने शायद ही कहीं कभी हाथ पकड़े हों? यहां तक कि एक युवा विवाहित जोड़ा बच्चे पैदा करने में देरी के लिए इजाजत नहीं ले सकता, क्या उन्हें अधिकार नहीं कि वे सेक्स का आनंद लें. जो एक शारीरिक जरूरत है. एक स्वस्थ काम. आपसी खोज की यह अवस्था निश्चित रूप से सुहाग रात, कौमार्य और अरेंज शादियों का पर्याय नहीं है. सेक्स एक अवस्था है न कि एक शर्त. जीभ, स्तन, योनी, स्क्रोटम, होंठ, बाहें, उंगलियां...
क्या हम हर रोज विकृत लोगों को पैदा कर रहे हैं?
अधिकांश किशोर चुपके से इंटरनेट से ट्रिपल एक्स-रेटेड कंटेंट डाउनलोड करते हैं. सनी लियोन ने सेक्सुअली चार्ज भारतीय युवाओं को बहुत कुछ दिया है... उन्हें मर्द बना दिया है, सिर्फ मस्ती की चाह वाला!
इस तरह से वो खुद तो सेक्स के मामले में विफल होते हैं. और दूसरी ओर महिलाओं को इसकी इजाजत ही नहीं है. यहां तक कि यदि वह कोई फिल्म का चुनाव करती है, तो कथित नारीवादी उसकी क्वालिटी पर ही सवाल खड़े करने लगते हैं.
मैं बंगलौर में बिल्कुल नई थी. 2004 की बात है. ऑफिस में मेरा दूसरा ही दिन था. वहीं लावेले रोड से मैं एक ऑटो में सवार हुई. मुझे किसी काम से ब्रिगेड रोड पर जाना था. अभी हमारी कार दिल्ली से नहीं आई थी. सफर के दौरान ऑटो चालक मुझे लगातार बुरी नजर से घूरता रहा. मैंने अपनी बाहों को कवर किया हुआ था. कुछ मोड़ के बाद मैंने उससे कहा मुझे एक जगह पर छोड़ दे. उसने अपने कंधों को उचकाकर यह बताने की कोशिश की कि उसे हिंदी समझ में नहीं आई. मेरी परेशानी बढ़ रही थी. शहर में नया होने के नाते मैंने भगवान से किसी भी तरह ब्रिगेड रोड पर पहुंचने की प्रार्थना की. हम पहुंच गए. बाहर आते ही मैंने उसे 50 रुपये दिए, मैं बचे हुए पैसे भी वापस नहीं लेना चाहती थी.
उस आदमी ने मुझे हैरान होकर देखा. मैंने उसकी आंखों में देखा और पूछा कि जो किराया मैंने दिया है क्या वो कम था? उसने अपने होंठों पर जीभ घुमाई. और शक के लहजे में अपनी एक भौं उठाई. मैंने नजर नीचे कर ली. और उस वक्त मैं बुरी तरह चौंक गई जब मैंने देखा कि उसके कपड़े खुले थे और उसका गुप्तांग सार्वजनिक रूप से दिख रहा था. मैंने वहां से दौड़ लगाई. और पीछे मुड़कर नहीं देखा. किसी से भी इस घटना के बारे में बात करना मुझे अच्छा नहीं लग रहा था.
हम एक सेक्स के रूप में कैसे सुरक्षित हैं?
हम किस आदमी पर भरोसा कर सकते हैं?
ड्राइवर? धोबी? डिलिवरी ब्वॉय? चौकीदार? माली?
क्या भारत की लोकप्रिय संस्कृति वास्तव में ईव-टीज़र, ताक-झांक करने वालों और सेक्स के भूखे अधेड़ों वाली है? क्या हमने मुख्यधारा की बॉलीवुड फिल्मों में नहीं देखा कि कॉलेज में लड़कियों की एंट्री पर हीरो और उसके दोस्त गीत गाते हैं? आमतौर पर हीरो के साथ एक कॉमेडी सीन भी जुडा हुआ होता है, जब हीरो छात्रावास में स्नान करने वाली एक महिला की तस्वीर क्लिक करता है? जहां खलनायक हमेशा हीरोइन के साथ बलात्कार और यौन शोषण करता है? क्या सेक्स को लेकर ये दोहरापन हमारे घरों का हिस्सा है, जहां ये बिलकुल नहीं सिखाया जाता कि दूसरे सेक्स का सम्मान कैसे करें? जहां लड़के खुले तौर पर अपने पिता को माताओं पर ताने मारते हुए देख कर बड़े होते हैं. आवाजें उठ रही हैं. तो फिर... भारतीय सामाजिक संरचना क्या महिलाओं का नसीब यही है कि उन्हें यौन गुलाम बनाकर रखा जाएगा? कभी पलटकर जवाब नहीं देना... अंत में.
क्या सभी भारतीय पुरुष लगभग बलात्कारी हैं? जो एक मुक्त और मुखर महिला को सजा देना चाहते हैं?
दिमाग से?
जब सच्चाई जगजाहिर है...
हमारी सबसे बड़ी ताकत हकीकत में हमारी गहरी, अंधेरी आशंका पर आधारित है.
कब तक हम एक आदमी से डरते रहेंगे?
श्रीमई पियु कुंडू की कलम से
बालोद / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर बालोद जिले से भी आईआईटी जेईई (JEE) और नीट (NEET) परीक्षा के परीक्षार्थियों को उनके परीक्षा केन्द्र तक पहुॅचाने तथा वापसी के लिए नि:शुल्क बस की व्यवस्था की जाएगी। कलेक्टर जनमेजय महोबे ने आज शाम संयुक्त जिला कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित बैठक में इस संबंध में जानकारी दी। कलेक्टर ने व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु बालोद एस.डी.एम. श्रीमती सिल्ली थॉमस को नोडल अधिकारी और तहसीलदार बालोद श्रीमती रश्मि वर्मा व जिला परिवहन अधिकारी रविन्द्र ठाकुर को सहायक नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। अन्य संबंधित एस.डी.एम. समन्वय का कार्य करेंगे।
कलेक्टर ने कहा कि परीक्षा में शामिल हो रही छात्राओं के साथ उनके एक अभिभावक को भी यात्रा की अनुमति होगी। परिवहन वाहन में फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन अनिवार्य रूप से किया जाएगा। परीक्षार्थियों को वाहन में यात्रा के लिए अपने प्रवेश परीक्षा का प्रवेश पत्र दिखाना ही पर्याप्त होगा। प्रवेश पत्र दिखाने पर परीक्षार्थियों को वाहन में यात्रा की अनुमति दी जाएगी। कलेक्टर ने बताया कि आईआईटी जेईई की प्रवेश परीक्षा हेतु प्रदेश में पॉच परीक्षा केन्द्र बनाए गए हैं। परीक्षा का आयोजन 01 सितम्बर 2020 से है। कलेक्टर ने बताया कि जिले के ऐसे परीक्षार्थी जो जेईई और नीट की परीक्षा में सम्मिलित होना चाहते हैं तथा उनके पास परीक्षा केन्द्र तक जाने आने के लिए वाहन की सुविधा नहीं है, ऐसे परीक्षार्थियों के लिए हेल्पलाईन नम्बर की सुविधा दी जा रही है। परीक्षार्थियों को हेल्पलाईन नम्बर में सम्पर्क कर अपना नाम, परीक्षा का नाम, परीक्षा केन्द्र का नाम एवं शहर का नाम, परीक्षा की तिथि एवं समय, अपना मोबाईल नम्बर इत्यादि की जानकारी आवश्यक रूप से देनी होगी।
1.बालोद तहसील- मनोज भारद्धाज, नायब तहसीलदार ,(मोबाईल नम्बर - 7587870733) 2.डौण्डीलोहारा तहसील - रामरतन दुबे, तहसीलदार (मोबाईल नम्बर - 9685640306) 3. डौण्डी तहसील सुश्री प्रतिमा ठाकरे, तहसीलदार (मोबाईल नम्बर - 9406373510) 4. गुरूर तहसील-सुब्रत प्रधान, प्रभारी तहसीलदार (मोबाईल नम्बर - 9993684757) 5. गुण्डरदेही तहसील-अश्वन पुसाम, तहसीलदार (मोबाईल नम्बर - 9406211477)
बालोद जिले के परीक्षार्थियों के ऑनलाईन पंजीयन हेतु जिला प्रशासन द्वारा जारी लिंक:-
JEE Mains -: https://forms.gle/5P1cUcrsXV8eaNcp6
NEET EXAM -: https://forms.gle/9sZjFBaoJU1miYX87
कलेक्टर ने बताया कि बालोद तहसील के परीक्षार्थियों के लिए सरदार वल्लभ भाई पटेल मैदान में बस की सुविधा उपलब्ध रहेगी। डौण्डी तहसील के परीक्षार्थियों के लिए दल्लीराजहरा के बस स्टैण्ड में बस की सुविधा उपलब्ध रहेगी। इसी प्रकार डौण्डीलोहारा, गुरूर और गुण्डरदेही तहसील के परीक्षार्थियों के लिए संबंधित तहसील मुख्यालय के बस स्टैण्ड में बस की सुविधा उपलब्ध रहेगी।
भिलाई / शौर्यपथ / भिलाई इस्पात संयंत्र के कार्यपालक निदेशक वक्र्स बी पी सिंह ने यूनिवर्सल रेल मिल में हॉट सॉ-1 एवं क्रेन क्रमाँक-412 का उद्घाटन किया। इन दोनों उपकरणों को आंतरिक संसाधनों से पूर्णरूपेण प्रारंभ किया गया। बीएसपी के रेल एवं स्ट्रक्चरल मिल तथा यूनिवर्सल रेल ने संयुक्त रूप से भारतीय रेलवे द्वारा प्राप्त रेल्स के आर्डर्स को पूरी प्रतिबद्धता के साथ पूर्ण करने के लिए कृत-संकल्पित है। वर्तमान वित्तवर्ष में आरएसएम तथा यूआरएम के समक्ष प्राइम लाँग रेल्स के उत्पादन में वृद्धि का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य है, जिसे पूर्ण करने हेतु निरंतर प्रयासरत् है। हाल ही में भारतीय रेलवे ने कम ल बाई वाले रेल्स की अपनी माँग में कमी कर दी है। भारतीय रेलवे की लाँग रेल्स की माँग को ध्यान में रखते हुए यूआरएम ने ल बी रेल्स की उत्पादकता बढ़ाने, नुकसान को कम करने और 130 मीटर ल बी रेल्स के उत्पादन में वृद्धि हेतु लगातार प्रयास कर रहा है।
उल्लेखनीय है कि यूआरएम परियोजनाओं के प्रारंभ में हॉट सॉ-1 एवं क्रेन क्रमाँक-412 जैसे उपकरणों का आंशिक रूप से कमीशन किया गया। स्पेयर्स की अनुपलब्धता के कारणों से इन उपकरणों की पूर्ण कमीशनिंग नहीं हुई थी। इन दोनों उपकरणों को आंतरिक संसाधनों का प्रयोग करते हुए पूर्णरूपेण प्रचालन प्रारंभ कर दिया गया है। मु य महाप्रबंधक (यूआरएम) पी मुरगेसन के मार्गदर्शन में अनुभागीय प्रमुख महाप्रबंधक (ऑपरेशन) एम वी के रामप्रसाद, महाप्रबंधक (मेकेनिकल) प्रकाश बोन्डेकर एवं महाप्रबंधक (इलेक्ट्रिकल) अनिश सेनगुप्ता की टीम ने आंतरिक संसाधनों और विशेषज्ञता के साथ इन दोनों महत्वपूर्ण उपकरणों के प्रचालन को प्रारंभ करने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। बीडी-2 स्टैंड के बाद लगे हॉट सॉ-1 द्वारा ब्लू स के अधिक ल बाई/अधिक वजन को कटिंग किया जाता है। अगर यह कटिंग न की जाए तो परिणामस्वरूप लंबाई बढऩे के कारण रेल रोलिंग में कोबल्स की समस्या उत्पन्न होती थी जिसे निकालने में अधिक समय लगता था जिससे उत्पादन में कमी आती थी। इसके अलावा जब अधिक वजन वाले ब्लू स को भट्टी में चार्ज किया जाता है उसे वापस लौटा दिया जाता है, जो उत्पादकता पर प्रतिकूल प्रभाव डालता था और रोलिंग को बाधित करता था।
सुविधा का लाभ उठाने इसके लिए नियुक्त किये गए नोडल अधिकारी डॉ रविराज ठाकुर से कर सकते हैं संपर्क, उनका नंबर 73895-77569
दुर्ग / शौर्यपथ / आगामी नीट और आईआईटीजेईई परीक्षाओं में छात्र-छात्राओं को परीक्षा केंद्र तक पहुंचने की सुविधा उपलब्ध कराने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सभी कलेक्टरों को निर्देशित किया था। दुर्ग जिले में आदेश के अनुपालन में कलेक्टर डॉ सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने इसकी व्यवस्था के लिए नोडल अधिकारी की नियुक्ति की है। डॉ रविराज ठाकुर यह कार्य देखेंगे। जिन छात्र-छात्राओं को स्वयं के वाहन से आने में असुविधा है वे इसके लिए डॉ ठाकुर से संपर्क कर सकते हैं। परीक्षा केंद्र तक लाने ले जाने की सुविधा उनके द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी। छात्राएं अपने साथ एक अभिभावक को भी ले जा सकती हैं। इसके लिए डॉ. ठाकुर के मोबाइल नंबर 73895-77569 पर सम्पर्क कर सकते हैं।
दुर्ग / शौर्यपथ / निजी विधालय की फीस बढ़ोतरी को लगाम लगाने के लिए फीस नियामक गठन कर भूपेश बघेल सरकार का छत्तीसगढ़ वासियों के लिए एक ओर महत्पूर्ण जनप्रिय इतिहासिक फैसला लिया है। मुख्यमंत्री द्वारा लिये गये इस फैसले पर कांग्रेसी नेता एवं पूर्व लोकसभा अध्यक्ष युकां अयूब खान ने उनके प्रति आभार व्यक्त किया है।
अयूब खान ने आगे कहा कि जबसे प्रदेश में कांग्रेस की सरकार आयी है तबसे लगातार अनेक लाभकारी योजनाएं की घोषणा और राहत देने का कार्य भूपेश बघेल सरकार कर रही है जैसे किकिसानो के कर्ज माफ करना ओर सरकार घोषणा के अनुसार किसानो बोनस देना, वायपारियो उद्योगतियों के लिए जमीन फ्रीहोल्ड की घोषणा , आमजनता के लिए बिजली बिल आधा करना, ए पी ल और बी पी एल कार्ड धारियों को राशन देना, छत्तीसगढ़ वासियों राशन कार्ड से अस्पतालों में तय सीमा खर्चों तक मुफ्त इलाज देना , जमीन रजिस्ट्री शुल्क कम करना ये इन सभी फैसले से प्रदेश के हर वर्ग को राहत मिला और फायदा हुआ है
अब सरकार का एक और निर्णय मध्यम वर्गीय और गरीब परिवार के हित को लेकर प्रदेश निजी विद्यालयो बेतहाशा फीस वृद्धि को रोक लगाने के लिए फीस नियामक गठन करने का फैसला लेना जिसमें प्रदेश के सभी स्कूल हर वर्ष की फीस या अन्य शुल्क के बढ़ोतरी के पूर्व नियामक से परमिशन लेना होगा ओर नियामक कमेटी में सरकार के तीन वरिष्ठ मंत्रीगण ताम्रध्वज साहू, रवीन्द्र चोबे ओर शिक्षा मंत्री प्रेम सिंह टेकाम सदस्य होंगे और इनके द्वारा फीस के मांप कर फीस लागू करना होगा जिसमें निश्चित फीस बढ़ोतरी कम होगी ओर लगाम में रहेगी जिसका सीधा असर मध्य वर्गी ओर गरीब परिवार को मिलेगा।
शौर्यपथ / वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण उत्तराखंड में पर्यटन उद्योग पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव तथा उनसे जुड़ी समस्याओं एवं सुझावों पर विचार-विमर्श के दौरान औद्योगिक प्रतिनिधयों ने साहसिक पर्यटन शुरू करने और क्वारंटीन अवधि कम करने के सुझाव दिए हैं। पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर की मौजूदगी में होटल, राफ्टिंग, एयरो स्पोट्र्स, सीआईआई और फिक्की के 20 से अधिक प्रतिनिधियों की शनिवार को यहां वचुर्अल बैठक में उद्योग प्रतिनिधियों ने यह सुझाव दिया। श्री जावलकर ने सरकार की तरफ से उद्योग के कर्मियों को उपलब्ध करायी जा रही मदद की जानकारी दी और उद्योग से सरकार को सहयोग करने की अपेक्षा जाहिर की। होटल उद्योग प्रतिनिधियों ने कोविड टेस्ट के सम्बंध में असमंजस की स्थिति से अवगत कराया। साथ ही पर्यटकों हेतु क्वारंटीन अवधि सात दिन से कम किये जाने का सुझाव दिया गया। राज्य के बॉर्डर पर पर्यटक सहायता केन्द्र भी स्थापित किये जाने के सुझाव दिए गए। शादी समारोह व अन्य कार्यक्रमों से सम्बन्धित आयोजनों में अधिकतम 5० अतिथियों की सीमा के स्थान पर प्रति वर्ग मी० के आधार पर अतिथियों की संख्या के निधार्रण करने का सुझाव दिया गया है।
ऑनलाईन बैठक के दौरान राफ्टिंग व साहसिक पर्यटन से जुड़े प्रतिनिधियों द्वारा साहसिक पर्यटन की गतिविधियों को खोले जाने का अनुरोध किया गया है। साथ ही ट्रैकिंग गतिविधियों को खोलने के लिए वन विभाग को दिशा-निदेर्श जारी किये जाने का भी सुझाव दिया गया। साहसिक पर्यटन की गतिविधियों के संचालन हेतु एडवेंचर टुअर ऑपरेटर एसोसिएशन ऑफ इण्डिया (एटीएएआई) द्वारा तैयार की गई गाईडलाइन्स को प्रयोग में लाने का सुझाव दिया गया। सीआईआई के प्रतिनिधि ने पर्यटकों से जुड़ी समस्याओं एवं उनके समाधान के लिए कॉल सेंटर स्थापित किये जाने का सुझाव दिया। फिक्की के प्रतिनिधि द्वारा राज्य में पर्यटन को बढ़ाने के उद्देश्य से पर्यटकों को इनसन्टिवध्डिस्काउंट दिये जाने के साथ ही सकारात्मक प्रचार अभियान चलाये जाने का भी सुझाव दिया गया। कोविड से सम्बन्धित सभी प्रोटोकॉल गाईडलाइन्स पर स्पष्ट आदेश जारी किये जाने के सुझाव दिये गये, जिसमें किसी प्रकार का असमंजस न हो। श्री जावलकर ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा पर्यटन उद्योग के कार्मिकों को तात्कालिक सहायता के रूप में 1000 रुपये प्रति कार्मिक उपलब्ध कराये जाने हेतु धनराशि जिलाधिकारियों को उपलब्ध कराई गई है, जिसमें लगभग 2.5० करोड़ की धनराशि वितरित भी की जा चुकी है।
लाइफस्टाइल /शौर्यपथ /ऐसा माना जाता है कि अधेड़ उम्र में लोगों का व्यवहार रूखा और चिड़चिड़ा हो जाता है। लेकिन, अधेड़ उम्र के लोग असल में अन्य उम्र के लोगों की तुलना में ज्यादा सकारात्मक होते हैं। एक हालिया शोध के अनुसार 40 से 60 साल की उम्र के लोग युवाओं और बुजुर्गों की तुलना में कहीं ज्यादा सकारात्मक होते हैं।
अमेरिका और नीदरलैंड में 30,000 लोगों पर किए गए शोधों की समीक्षा करने वाले शोधकर्ताओं ने पाया कि अधेड़ उम्र के लोग जीवन में अच्छी चीजें होने लेकर ज्यादा सकारात्मक होते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अधेड़ लोग जो अपने जीवन में मूल्यों और संतुष्टि को ज्यादा कीमती समझते हैं वे अच्छी बातों पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करते हैं। हालांकि, शोध में यह पता चला कि जर्मनी के लोग अधेड़ उम्र में भी सकारात्मक नहीं होते। मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर विलियम चोपिक ने कहा, जैसे-जैसे लोग परिपक्व होते हैं वे अपने काम में अधिक सक्षम हो जाते हैं।
सफलता उनके लिए थोड़ी आसान हो जाती है क्योंकि वे अपने जीवन के विभिन्न कार्यों में महारत हासिल कर लेते हैं, इसलिए वे अधेड़ उम्र तक पहुंचते ही अधिक आशावादी बनने लगते हैं। अधेड़ उम्र के लोग जीवन में आगे बढ़ने पर कम ध्यान केंद्रित करते हैं और जो वर्तमान में मौजूद है उसे खुशी से जीने को कोशिश करते हैं।
अमेरिका और नीदरलैंड में यह सकारात्मक रवैया 60 साल की उम्र के बाद घटने लगता है। प्रोफेसर चोपिक ने जर्नल ऑफ रिसर्च इन पर्सनैलिटी ने बताया कि सकारात्मक रवैया स्वास्थ्य और लोगों के नजरिये से जुड़ा होता है इसलिए उम्र बढ़ने पर इसमें कमी आती है।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / परिवार बढ़ाने की कोशिशों में जुटे पुरुष जरा गौर फरमाएं। इजरायल में हुए एक नए अध्ययन में दावा किया गया है कि रात में टीवी देखने, मोबाइल पर गेम खेलने या लैपटॉप पर दोस्तों के साथ चैटिंग करने की आदत पिता बनने की खुशी छिन सकती है। स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी के कारण शुक्राणुओं के उत्पादन और गुणवत्ता में आना इसकी मुख्य वजह है।
तेल अविव स्थित असुता मेडिकल सेंटर के शोधकर्ताओं ने अपने ‘स्लीप एंड फैटीग सेंटर’ में नपुंसकता का इलाज करा रहे 116 पुरुषों के शुक्राणुओं के नमूने इकट्ठे किए। ये पुरुष 21 से 59 साल के आयुवर्ग में आते थे। सभी प्रतिभागियों से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के इस्तेमाल और सोने की आदत से जुड़ी एक प्रश्नावली भरवाई गई।
शोधकर्ताओं ने पाया कि दिन ढलने के बाद स्मार्टफोन, टीवी या लैपटॉप का अत्यधिक इस्तेमाल करने से न सिर्फ शुक्राणुओं के उत्पादन में कमी आती है, बल्कि उनकी गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। शुक्राणुओं के तैरकर अंडाणुओं तक पहुंचने और उनके आकर्षित करने की क्षमता भी घट जाती है।
मुख्य शोधकर्ता डॉ. अमित ग्रीन के मुताबिक स्क्रीन से निकलने वाले नीली रोशनी स्लीप हार्मोन ‘मेलाटोनिन’ के उत्पादन में बाधा डालती है। इससे व्यक्ति देर रात तक जगा तो रहता ही है, साथ ही उसमें स्ट्रेस हार्मोन ‘कॉर्टिसोल’ का स्त्राव भी बढ़ जाता है। दोनों ही अवस्थाएं शुक्राणुओं की सेहत को नुकसान पहुंचाती हैं। व्यक्ति को यौन उत्तेजना में कमी की शिकायत सता सकती है।
‘जर्नल स्लीप’ के हालिया अंक में प्रकाशित में ग्रीन ने शाम से ही स्क्रीन का इस्तेमाल घटाने की सलाह दी। उन्होंने यह भी बताया कि स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी कोशिकाओं में विभाजन की प्रक्रिया को भी अनियंत्रित कर सकती है। इससे कैंसर से मौत के खतरा 50 फीसदी तक बढ़ जाता है।
जेब में न रखें मोबाइल-
-सितंबर 2017 में टेक्नियॉन यूनिवर्सिटी की ओर से किए गए अध्ययन में स्मार्टफोन को पैंट की जेब में रखने से बचने की नसीहत दी गई थी। शोधकर्ताओं का दावा था कि फोन से निकलने वाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक विकिरणें शुक्राणुओं को नष्ट करती हैं। इससे व्यक्ति को नपुंकता की शिकायत हो सकती है।
सावधान-
-मोबाइल-टीवी की स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी ‘मेलाटोनिन’ के उत्पादन में बाधा डालती है
-स्ट्रेस हार्मोन कॉर्टिसोल का स्राव बढ़ाती है, इससे शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता में कमी आती है
लत ये गलत लग गई-
-75 फीसदी से अधिक पुरुष फोन को सिरहाने रखकर सोते हैं
-पार्टनर के मुकाबले 02 गुना ज्यादा समय गैजेट के साथ बिताते हैं
-25 प्रतिशत पुरुष पत्नी के बजाय स्मार्टफोन की शक्ल देखकर सोते हैं
-33 फीसदी रिश्तों में सुधार के लिए फोन की लत से काबू पाना चाहते हैं
खाना खजाना /शौर्यपथ / सन्डे को अगर आप कुछ स्पेशल बनाने की सोच रहे हैं, तो आज बनाएं तंदूरी गोभी टिक्का-
सामग्री
गोभी- 1
गाढ़ा दही- 1 कप
लाल मिर्च पाउडर- 1/2 चम्मच
गरम मसाला पाउडर- 1 चम्मच
चाट मसाला पाउडर- 1 चम्मच
हल्दी पाउडर- 1/2 चम्मच
धनिया पाउडर- 1 चम्मच
अजवाइन- 1/2 चम्मच
कसूरी मेथी- 1 चम्मच
बेसन- 3 चम्मच
तेल- आवश्यकतानुसार
नमक- स्वादानुसार
विधि
गोभी की कलियों को काटकर धो लें और चार से पांच मिनट तक भाप में पका लें। गोभी को भाप पर पकाने से मसाले बेहतर तरीके से उसमें समा पाते हैं। भाप पर पकी हुई को गोभी को एक बड़े से बाउल में निकाल लें। उस बाउल में तेल के अलावा अन्य सभी सामग्री डालें और हल्के हाथों से मिलाएं। बाउल को ढककर आधे घंटे के लिए छोड़ दें। कड़ाही में आवश्यकतानुसार तेल गर्म करें और उसमें गोभी के टुकड़ों को डालें। मध्यम आंच पर कुछ मिनट तक पकाएं। तली हुई गोभी एक बाउल में निकालें। कोयले का एक छोटा-सा टुकड़ा गर्म करें। जब कोयला लाल हो जाए तो उसे एक स्टील की कटोरी में डालें। इस कटोरी को तंदूरी गोभी वाले बाउल के बीच में रख दें। कटोरी में एक चम्मच घी डालें और बाउल को एक मिनट के लिए ढक दें। ऐसा करने से कोयले का फ्लेवर गोभी टिक्का में समा जाएगा। तंदूरी गोभी को सर्विंग प्लेट में डालें। हरी चटनी और प्याज के छल्लों के साथ सर्व करें।
सेहत / शौर्यपथ / आयुर्वेद में तुलसी को रोग नाशक जड़ी-बूटी माना जाता है। तुलसी को कई बीमारियों में दवा की तरह इस्तेमाल करने के साथ स्किन इन्फेक्शन में भी तुलसी की पत्तियों को इलाज किया जाता है। आइए, जानते हैं तुलसी के फायदे-
तुलसी के पोषक तत्व
तुलसी में पाए जाने वाले पोषक तत्व तुलसी की पत्तियों में विटामिन और खनिज तत्व मौजूद होते हैं। इसमें मुख्य रूप से विटामिन सी, कैल्शियम, जिंक और आयरन आदि पाए जाते हैं। इसके साथ ही तुलसी में सिट्रिक, टारटरिक एवं मैलिक एसिड पाया जाता है।
तुलसी के फायदे
खांसी अथवा गला बैठने पर तुलसी की जड़ सुपारी की तरह चूसी जाती है।
श्वास रोगों में तुलसी के पत्ते काले नमक के साथ सुपारी की तरह मुंह में रखने से आराम मिलता है।
तुलसी की हरी पत्तियों को आग पर सेंक कर नमक के साथ खाने से खांसी तथा गला बैठना ठीक हो जाता है।
तुलसी के पत्तों के साथ 4 भुनी लौंग चबाने से खांसी जाती है।
तुलसी के कोमल पत्तों को चबाने से खांसी और नजले से राहत मिलती है।
खांसी-जुकाम में - तुलसी के पत्ते, अदरक और काली मिर्च से तैयार की हुई चाय पीने से तुरंत लाभ पहुंचता है।
10-12 तुलसी के पत्ते तथा 8-10 काली मिर्च के चाय बनाकर पीने से खांसी जुकाम, बुखार ठीक होता है।
फेफड़ों में खरखराहट की आवाज़ आने व खांसी होने पर तुलसी की सूखी पत्तियां 4 ग्राम मिश्री के साथ देते हैं।
काली तुलसी का स्वरस लगभग डेढ़ चम्मच काली मिर्च के साथ देने से खाँसी एकदम शान्त होती है।
10 ग्राम तुलसी के रस को 5 ग्राम शहद के साथ सेवन करने से हिचकी, अस्थमा एवं श्वांस रोगों को ठीक किया जा सकता है।
स्किन केयर के लिए तुलसी
तुलसी पिंपल्स और एक्ने पर भी काम करता है। तुलसी रक्त में से टॉक्सिन्स और अशुद्धि हटा कर उसे साफ़ करने का काम करता है। इसमें एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं जो एक्ने को कम करता है। आप इसके लिए तुलसी पत्तियों का पेस्ट बनाकर उसमें गुलाबजल मिलाएं और 10 मिनट के लिए चेहरे पर लगाएं और फिर सादे पानी से धो लें।
धर्म संसार / शौर्यपथ /खुशहाली का संदेश देने वाला त्योहार ओणम दक्षिण भारत विशेषकर केरल में बहुत ही उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह ऐसा त्योहार है जो केरल के राजा महाबली की याद में हर वर्ष मनाया जाता है। दस दिनों तक इस उत्सव को उल्लास से मनाया जाता है। यह त्योहार संपूर्णता से भरा हुआ है। हर घर को यह पर्व खुशियों से भर देता है। प्रत्येक घर को फूलों से सजाया जाता है। यह ऐसा त्योहार है जिसमें पूजा मंदिर में नहीं बल्कि घर में की जाती है।
इस त्योहार को लेकर पौराणिक कथा के अनुसार केरल में महाबली नामक राजा राज्य करते थे। भगवान श्री हरि विष्णु ने वामन अवतार धारण कर उनसे तीन पग भूमि मांगी और तीन पग में तीनों लोक को माप लिया। भगवान वामन ने जब तीसरा पग रखा तो राजा बलि पाताल लोक चले गए। राजा बलि के दान और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उनसे वर मांगने को कहा। राजा बलि ने कहा कि प्रभु मैं वर्ष में एक बार अपनी प्रजा से मिलने का समय चाहता हूं। माना जाता है कि ओणम पर राजा बलि अपनी प्रजा से मिलने आते हैं और अपनी प्रजा के लिए उमंग तथा खुशियां लाते हैं। इस त्योहार में भगवान श्री हरि विष्णु की आराधना की जाती है। भगवान के वामन अवतार की पूजा की जाती है। ओणम मलयाली हिंदुओं का नववर्ष माना जाता है।
धर्म संसार / शौर्यपथ / उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में कोरोना संक्रमण के चलते इस साल मोहर्रम में सड़कें वीरान रही वहीं लोगों ने घर में ही रहकर कर्बला के शहीदों को याद किया।
जिले में अबकी बार एक से 10वीं तक निकलने वाले गश्ती, मातम और इमामबाड़ा से निकलने वाला शाही जूलूस कोरोना के कारण स्थगित रहा। राज्य सरकार के निदेर्शों और स्थानीय पुलिस प्रशासन के सख्ती के कारण जहां वह इमाम हुसेन और कर्बला के शहीदों के गम को नहीं मना सके वहीं उन्हें इस बात का दुख था कि ऐसा न कर पाने के कारण कहीं कोई अनहोनी न न हो जाये।इस बार मुहर्रम का जूलूस स्थगित हो जाने से सबसे ज्यादा ठेले, मुहर्रम में ताजिया बनाने वालों और अलम उठाने वालो पर पड़ा है। उल्लेखनीय है कि गोरखपुर का मुहर्रम पूरे प्रदेश में सबसे मशहूर है और पूवीर् उत्तर प्रदेश के अधिकतर जिले अपने मुहर्रम के कार्यक्रम गोरखपुर में स्थित इमाम बाडा के मियां साहब फरूख अदनान शाह के निदेर्शों पर होता है।
शिया और सुन्नी समुदाय के लोग मुहर्रम अपने-अपने तौर तरीकों से मनाते हैं। शिया समुदाय के लोगों ने इस दौरान महिलाओं का मजलिस सम्पन्न हुआ जिसमें शहीदों के बलिदान को याद किया गया जबकि सुन्नी समुदाय न कोविड-19 के आदेशों का पालन करते हुए अपने घरों में शहीदे कर्बला पर कार्यक्रम किये गए। 9वीं मुहर्रम को आज शनिवार को इमाम बाडाा पर रखे जाने वाले ताजिये नजर नहीं आये। शहीदों के याद में लोगों को शर्बत भी नहीं पिलाया गया।
इसके अलावा इमाम बाडें में रखे सोने और चांदी के ताजिए का दर्शन करने वाले जो विभिन्न प्रान्तों से भी गोरखपुर आते थे वह नहीं आ सके। इस ताजिए का दर्शन मुहर्रम के एक से दसवी दिन तक किया जाता रहा है। 10वीं मुहर्रम का दरवाजा बन्द हो जाने के बाद अगले साल ही दर्शन करने मौका मिल पायेगा।
छत्तीसगढ़ सरकार जनता के प्रति अपनी जवाबदेही निभा रही है- राहुल गांधी
संसद-विधानसभा संविधान की रक्षा के लिये जरूरी, भावनाओं से बचेगा संविधान- सोनिया गांधी
छत्तीसगढ़ सरकार अंतिम व्यक्ति को ध्यान में रखकर कर रही है फैसले
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल समावेशी दृष्टिकोण से सभी की बेहतरी के लिए कर रहे हैं काम
नये विधानसभा भवन का निर्माण शीघ्र पूरा होगा- मुख्यमंत्री भूपेश बघेल
लोकतंत्र को सुदृढ़ बनाना और लोकतांत्रिक व्यवस्था की अगुवाई हमारा संकल्प- डा. महंत
छत्तीसगढ़ विधासभा भवन के नवीन भवन का नवा रायपुर में शिलान्यास: 270 करोड़ रुपए की लागत से 51 एकड़ में अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त होगा नया भवन

रायपुर / शौर्यपथ / सांसद श्रीमती सोनिया गांधी एवं सांसद राहुल गांधी और मोतीलाल वोरा की वर्चुअल उपस्थिति में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और विधानसभा अध्यक्ष डा. चरणदास महंत ने आज नवा रायपुर में छत्तीसगढ़ विधानसभा के नये भवन के निर्माण के लिए बटन दबाकर शिलापट का अनावरण किया। नवा रायपुर के सेक्टर 19 में लगभग 270 करोड रुपए की लागत से यह भवन महानदी और इंद्रावती भवन के पीछे 51 एकड़ में बनेगा। मुख्य भवन का निर्माण 52 हजार 497 वर्ग मीटर में किया जाएगा।
इस अवसर पर सांसद श्रीमती सोनिया गांधी ने छत्तीसगढ़ विधानसभा के नये भवन के लिए छत्तीसगढ़ की जनता को बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि संसद और विधानसभा लोकतंत्र के सबसे बड़े स्तंभ और पवित्र मंदिर हैं। यहां संविधान की रक्षा होती है, लेकिन यह याद रखना होगा कि संविधान भवनों से नहीं भावनाओं से बचेगा। उन्होंने कहा कि हमारे पुरखों ने आजादी की लड़ाई लड़ी, उनके सपनों पूरा करने के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। श्रीमती सोनिया गांधी ने देश की वर्तमान स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि देश और समाज में नफरत फैलाने वाली ताकतें लोकतंत्र के सामने चुनौती बन गई हैं। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता खतरे में हैं, लोकतांत्रिक संस्थाएं ध्वस्त की जा रही हैं। नफरत फैलाने वाली ताकतें चाहती हैं कि समाज के सभी वर्ग के लोग अपना मुंह बंद रखें। वह देश का मुंह बंद करना चाहती हैं। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, पंडित जवाहर लाल नेहरू, डा. राजेंद्र प्रसाद, बाबा साहब डा. भीमराव अंबेडकर ने यह सोचा नहीं होगा कि आजादी के 73 वर्ष बाद ऐसे कठिन समय का सामना लोगों को करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि आज हम शपथ लें कि हम समाज के अंतिम व्यक्ति को ध्यान में रखकर फैसले लेंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री बघेल और छत्तीसगढ़ सरकार के कामकाज की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार अंतिम व्यक्ति को ध्यान में रखकर फैसले ले रही है। उन्होंने इस मौके पर छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किसानों, आदिवासियों, गरीबों के हित में किए जा रहे कामों के साथ ही राजीव गांधी किसान न्याय योजना, गोधन न्याय योजना, सुपोषण अभियान, तेंदूपत्ता संग्रहण दर में वृद्धि का उल्लेख किया और कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल समावेशी दृष्टिकोण से सभी वर्गों के विकास के लिए काम कर रहे हैं।
सांसद राहुल गांधी ने अपने प्रेषित संदेश में कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार जनता के प्रति अपने उत्तरदायित्व को बेहतर तरीके से निभा रही है। उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार की राजीव गांधी किसान न्याय योजना और गोधन न्याय योजना के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने अपने इस फैसले से किसानों-गरीबों-मजदूरों के हाथों में पैसा पहुंचाने का काम किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि छत्तीसगढ़ सरकार के जनोन्मुखी कार्य आगे भी जारी रहेंगे। श्री राहुल गांधी ने छत्तीसगढ़ के नये विधानसभा के शिलान्यास के लिए सभी को बधाई दी। सांसद राहुल गांधी के इस संदेश का वाचन संसदीय मंत्री रविंद्र चौबे ने किया।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस मौके पर अपने उद्बोधन की शुरुआत छत्तीसगढ़ महतारी और भारत माता के जयकारे से की। उन्होंने कहा कि नवा रायपुर अटल नगर आबाद हो, इसको लेकर छत्तीसगढ़ सरकार चौतरफा उपाय कर रही है। मंत्रिमंडल के सहयोगियों और अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए आवास बनाने की शुरुआत बीते वर्ष की जा चुकी है। कोरोना संक्रमण की वजह से काम में थोड़ा विलंब हुआ। संसदीय सचिवों को नवा रायपुर में ही आवास आबंटित किए गए हैं। मुख्यसचिव नवा रायपुर में निवास करने लगे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगामी वर्षों में यहां राज्यपाल, मंत्रीगण और शासन-प्रशासन से जुड़े सभी लोग रहने लगेंगे, यहां सुविधाएं बढ़ेंगी। इस नये शहर को बसाने की सभी अड़चनें दूर हो जाएंगी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि हमारी यह कोशिश रहेगी कि विधानसभा का नया भवन जल्दी बनकर तैयार हो जाए और हम सब छत्तीसगढ़ की पौने तीन करोड़ जनता और छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा के लिए यहां बैठेंगे। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विधानसभा भवन के शिलान्यास कार्यक्रम में सांसद श्रीमती सोनिया गांधी और राहुल गांधी की वर्चुअल उपस्थिति के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।

विधानसभा अध्यक्ष डा. चरणदास महंत ने छत्तीसगढ़ विधानसभा के नये भवन के शिलान्यास अवसर पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को बधाई देते हुए कहा कि उनकी परिकल्पना के अनुरूप सर्वसुविधायुक्त आधुनिक तकनीक से लैस भव्य भवन की आधारशिला रखी गई है। यह भवन नहीं, लोकतंत्र का मंदिर है। इस मौके पर हम सभी विधायकगण संकल्प लेते हैं कि हम भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने की अगुवाई करेंगे। इस मौके पर उन्होंने छत्तीसगढ़ के निर्माण में भागीदारी निभाने वाले पुरखों को नमन किया और उम्मीद जताई कि पुरखों के आशीर्वाद से हम सब छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा में जुटे रहेंगे। डा. महंत ने इस मौके पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनकी सरकार का उल्लेख करते हुए कहा कि आप सभी को छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा का मौका मिला है। उन्होंने गरीबों, किसानों, मजदूरों, आदिवासियों, वंचितों की बेहतरी के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की और कहा कि जनकल्याण के कार्यों के लिए सभी का सहयोग मिल रहा है। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि छत्तीसगढ़ बाबा गुरुघासी दास, संत कबीर की धरती है। छत्तीसगढ़ वास्तव में प्रेम की धरती है। हम सब प्रेम और सद्भाव का उदाहरण बनें।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि कोरोना संकटकाल में मास्क लगाएं परंतु वाणी की मिठास बनाए रखें। सोशल डिस्टेंसिंग रखें, परंतु दिलों के बीच दूरी न आने दें। नेता प्रतिपक्ष श्री धरमलाल कौशिक ने विधानसभा भवन के शिलान्यास के लिए मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष सहित सभी लोगों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने उम्मीद जताई कि विधायकों के लिए भी निकट भविष्य में आवास की व्यवस्था होगी।
लोकनिर्माण एवं गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा का भवन महानदी भवन एवं इंद्रावती भवन के बीच पिछले हिस्से में रिक्त भूमि पर बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसकी रूप-रेखा दिल्ली में राष्ट्रपति भवन के सामने स्थित नार्थ एवेन्यू एवं साउथ एवेन्यू जैसी रखी गई है। नये विधानसभा भवन के सामने राजपथ जैसा मार्ग बनेगा, जिसके जरिये महानदी एवं इंद्रावती भवन से पैदल भी विधानसभा पहुंचा जा सकेगा। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बनने वाले नए भवन में छत्तीसगढ़ की गौरवशाली और समृद्ध संस्कृति तथा परंपरा की झलक देखने को मिलेगी। विधानसभा भवन में अत्याधुनिक लाइब्रेरी और ऑडिटोरियम का भी निर्माण किया जाएगा । भविष्य को ध्यान में रखते हुए नये विधानसभा भवन में करीब 150 से 200 विधायकों के बैठने की व्यवस्था एवं अध्यक्षीय दीर्घा, अधिकारी दीर्घा, प्रतिष्ठित दर्शक दीर्घा, पत्रकार दीर्घा एवं दर्शक दीर्घा का निर्माण किया जाएगा। विधानसभा अध्यक्ष, मुख्यमंत्री एवं मंत्रियों, नेता प्रतिपक्ष एवं उपाध्यक्ष और मुख्य सचिव तथा विधानसभा के प्रमुख सचिव, सचिव एवं अन्य सचिव के लिए कक्ष, मीटिंग हॉल एवं स्टाफ कक्षों का निर्माण किया जाएगा। नवीन भवन में विभिन्न समिति कक्षों का निर्माण, पुस्तकालय, एलोपैथिक, होम्योपैथिक एवं आयुर्वेदिक औषधालय, पोस्ट ऑफिस, रेल्वे रिजर्वेशन काऊंटर एवं बैंक के लिए भी कक्षों का निर्माण होगा। विधानसभा के चारों ओर सड़क निर्माण, वृक्षारोपण सहित सौन्दर्यीकरण का कार्य किया जाएगा।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
