Google Analytics —— Meta Pixel
May 31, 2026
Hindi Hindi

दुर्ग / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ शासन के आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा ‘‘मुख्यमंत्री बाल भविष्य योजना’’ के अंतर्गत संचालित उत्कृष्ठ संस्था प्रयास आवासीय विद्यालय, दुुर्ग में राज्य के सुदूर नक्सल प्रभावित जिले के विद्यार्थियों का कक्षा 11 वीं प्रवेष परीक्षा के माध्यम से प्रवेषित होकर अपने षिक्षा के स्तर में उन्नयन करते हुए राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा जे.ई.ई. मेन-2020 मे उत्कृष्ठ प्रदर्षन किया है।
      विभाग की जिला प्रमुख श्रीमती प्रियंवदा रामटेके, सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास, दुर्ग द्वारा जानकारी दिया गया कि इस वर्ष जे.ई.ई. मेन-2020 में 59 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी, जिसमें 29 विद्यार्थियों ने एडवांस हेतु क्वालिफाई किया है। अनुसूचित जनजाति वर्ग के 16 विद्यार्थी (भोजकुमार, देवेन्द्र कुमार, फलेन्द्र कुमार, गोकुल राम, हेमन्त कुमार, खिलेेष कुमार, निखिल देहारी, नोहेल कोर्राम, प्रकाष कुमार, पुष्पेन्द्र ठाकुर, राजीव ध्रुव, दिप्ती कोमिया, हरिष्मा मरकाम, करिष्मा, लीना एवं मनीषा) अनुसूचित जाति वर्ग के 05 विद्यार्थी (किषोर कुमार टंडन, मनीष कुमार, रूपेष, सचिन बंबोड़े एवं नेहा) अन्य पिछड़ा वर्ग के 07 विद्यार्थी (ऐष्वर्य कुमार, हरोष सोनवानी, हिरेष कुमार, नमेष नमन निषाद, पोषण कुमार वर्मा, निषा गुप्ता एवं प्रियंका) तथा अनारक्षित वर्ग के 01 विद्यार्थी (रवि कुमार विष्वकर्मा) है। इन विद्यार्थीयों में अधिकतर विद्यार्थियो के पालक कृषि/ दैनिक मजदूर किसान निम्न आय वर्ग के हैं। शासन द्वारा विद्यार्थियो को संस्था में हर प्रकार की सुविधाएं मुहैया करवाकर उत्कृष्ठ षिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों के प्रतिभा को निखार कर भविष्य निर्माण करने का प्रयास किया जाता है।
पिता-कृषि मजदूर बेटा बनेगा इंजिनियर
बालोद जिले के डौण्डी लोहारा से फलेन्द्र कुमार, प्रयास आवसीय विद्यालय, दुर्ग के छात्र है। माता-पिता कृषि मजदूर है। जब माता पिता को पता चला कि मेरा बेटा एडवांस के लिए क्वालिफाई किया है, उनके आखों से खुषी के आंसू निकल आए। छात्र द्वारा मुबंई आई.आई.टी. से कम्प्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग करके देष के निर्माण में योगदान करने की इच्छा व्यक्त की है।
मां आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, अब बेटा बनेगा आई.आई.टी. से इंजिनियर
महासमुंद जिले के बागबहरा ब्लाक के छात्र देवन्द्र कुमार जे.ई.ई. परीक्षा में अच्छा रैंक दृढ़ शक्ति से हासिल कर सफलता प्राप्त की। वह भी देष के उत्कृष्ठ आई.आई.टी. से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करना चाहता है। मां आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं पिता कृषि मजदूरी करते हैं।
स्कूल के महौल से हुए मोटिवेट-जे.ई.ई. हेतु 8 घंटे रोजाना अध्ययन
प्रयास आवासीय विद्यालय दुर्ग की छात्रा प्रियंका राजनांदगाॅव जिले के डोगरगढ़ ब्लाक की रहने वाली है। उसने बताया कि संस्था में पढ़ाई का अच्छा माहौल एवं षिक्षकों के मोटिवेषन से रोजाना 8 घंटे पढ़ाई कर एडवांस हेतु सफलता प्राप्त की। उसने कहा कि मैं आई.आई.टी. से पढ़ाई कर इंजीनियरिंग सेवा में जाना चाहती है।
मेरे अरमानों की पूर्ति का स्तंभ है प्रयास, दुर्ग
कुमारी नेहा जिला बालोद ब्लाॅक डौण्डी लोहारा की रहने वाली छात्रा ने भी एडवांस की परीक्षा की तैयारी कर आई.आई.टी. से बी.टेक करना चाहती है। उसके अनुसार मेरे अरमानों की पूर्ति इस संस्था में आने से सफल हो रही है। प्रयास संस्था भविष्य निर्माण का अच्छा प्लेटफार्म है।

दुर्ग / शौर्यपथ / ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोडऩे के लिए विशेष प्रयास लगातार जारी हैं।बिहान योजना के तहत महिलाओं को रोजगार मूलक कार्य के रूप में वर्मी कम्पोस्ट खाद बनाने का प्रशिक्षण दिया गया इस तरह इनको गांव में ही काम उपलब्ध कराया जा रहा है।राज्य सरकार की योजना नरवा, गरूवा, घुरूवा और बाड़ी योजना से सुराजी गाँव की परिकल्पना साकार होती नजर आ रही है। स्व सहायता समूह की महिलाएं गौठानों में वर्मी कम्पोस्ट खाद और नाडेप टैंकों में पारंपरिक खाद का निर्माण कर रही हैं।
जिला पंचायत से मिली जानकारी के मुताबिक जिले भर के गौठानों में 1176 नाडेप एवं 1264 वर्मी कम्पोस्ट टैंक निर्मित किए गए हैं। दुर्ग जनपद पंचायत के 62 गौठानों में 543 नाडेप और 579 वर्मी कम्पोस्ट टैंक बने हैं जिनसे अब तक 7271 क्विंटल पारंपरिक कम्पोस्ट और43 क्विंटल केंचुआ खाद का उत्पादन किया है।इसी प्रकार जनपद पंचायत धमधा के 79 गौठानों में 274 नाडेप और 375 वर्मी कम्पोस्ट टैंक निर्मित किए गए हैं और की 581 नाडेप, 61 क्विंटल केंचुआ खाद का निर्माण किया गया है।
वहीं जनपद पंचायत पाटन के 77 गौठानों में 359 नाडेप और 310 वर्मी कम्पोस्ट टैंकों में 750 क्विंटल नाडेप और 63 क्विंटल केंचुआ खाद का उत्पादन किया है। जिला पंचायत सीईओ श्री सच्चिदानंद आलोक ने बताया कि महिलाएं आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही हैं। गांव की स्व-सहायता समूह की महिलाएं जिसमें अध्यक्ष व अन्य महिलाएं पूरी तन्मयता से कार्यरत हैं। गौठान का संचालन स्व-सहायता समूह की महिलाएं ही कर रही है। गौवंश के लिए सभी तरह के इंतजाम किए गए है। गोबर खरीदी योजना के अंतर्गत महिला 2 रू किलो में गोबर खरीदकर गौठानों में जैविक खाद का निर्माण किया जा रहा है। जिसे शासन के निर्देशानुसार विक्रय किया जाएगा।
जनपद पंचायत दुर्ग में ग्राम पंचायत आलबरस जय मां लक्ष्मी स्व-सहायता समूह, ग्राम पंचायत विनायपुर में खुशी स्व-सहायता समूह, ग्राम पंचायत मचान्दुर में लक्ष्मी स्व-सहायता समूह, ग्राम पंचायत घुघसीडीह भारत माता स्व-सहायता समूह, चंदखुरी में सिंधुजा स्व-सहायता समूह, ग्राम पंचायत ढाबा में दीप माला स्व-सहायता समूह, ग्राम पंचायत उमरपोटी मां शेरावली स्व-सहायता समूह, जनपद पंचायत पाटन में ग्राम पंचायत अमलीडीह संगवारी स्व-सहायता समूह, ग्राम पंचायत पाहंदा में प्रार्थना स्व-सहायता समूह, ग्राम पंचायत ढौर में प्रगति स्व-सहायता समूह, जनपद पंचायत धमधा में ग्राम पंचायत देवरी, अम्बे स्व-सहायता समूह, पोटिया में जय माता दी स्व-सहायता समूह, खपरी(ग) जय शीतला स्व-सहायता समूह, घटियाखुर्द (खपरी ग) जय माहावीर स्व-सहायता समूह, द्वारा जैविक खाद निर्माण किया जा चुका है।
गौठान गोबर और गांव से निकले कचरे से भी बनाएंगी जैविक खाद गौठान योजना के जरिये, गांव की महिलाओं ने साफ रखने के साथ कमाई का जरिया भी ढूंढ लिया है। गांव से निकलने वाला कचरे, अपशिष्ट पदार्थ और गौठान के गोबर से भी खाद बनाने की तैयारी की जा रही है। जिससे जैविक खाद भी बनेंगे और गांव भी स्वच्छ होंगे। महिलाओं को इस योजना से रोजगार का साधन मिल पाया है साथ ही महिलाएं अपने पैरों में खड़े होने का जज्बा भी दिखा रही हैं।

सेहत / शौर्यपथ / हमारे जीवन में बहुत बार ऐसी स्थितियां आती हैं जब हम अपने ही विचारो में खो जाते हैं। फिर इस उलझन को सुलझाना लगभग असंभव हो जाता है। अगर आपके साथ यह बहुत कम होता है तब चिंता करने की कोई बात नही हैं। पर अगर आपको लगता है कि आपके साथ यह हर दूसरे दिन होने वाली घटना है, तब तो आपको सतर्क होकर कार्य करने के लिए तैयार हो जाना चाहिए।
लगातार ज़्यादा सोचना गंभीर दिमागी परेशानी जैसे कि चिंता और अवसाद को जन्म दे सकता है। इसलिए इतनी कम उम्र में इतना ज्?यादा सोचना अच्?छी बात नहीं है।
यदि आप बीते हुए कल के बारे में या आने वाले कल के बारे में ही सोचती रहती हैं, तो आपको अपनी मेंटल हेल्?थ के प्रति सतर्क हो जाना चाहिए। हम बता रहे हैं, ऐसे कुछ संकेत जो यह जानने में आपकी मदद करेंगे कि आप वाकई जरूरत से ज्?यादा सोचती हैं। जिसे ओवर थिंकर कहा जाता है।
पहला संकेत : क्या आप हर चीज मे मतलब ढूंढती हैं?
क्या आप हर छोटी से छोटी बात का भी कारण ढूंढती हैं, जो कि आपके जीवन में घटित होती है (या नहीं होती)। इसका मतलब आप खुद को हर समय हर छोटी-बड़ी चीज पर सोचने में व्?यर्थ कर रहीं हैं! आपको सार्वजनिक स्थान पसंद होंगे, परंतु वह आपके लिए एक ही समय पर आकर्षक और भारी दोनों हो सकते हैं।
आप उन सभी चीजों के बारे में सोचेंगी जो आप के आस पास हो रही हैं और आप सभी पर विश्वास भी करने लगेंगी। जो कि असल में एक पेचीदा मामला है। आपको बस अपने आप को यह याद दिलाना है कि हर चीज के पीछे एक बहुत बड़ा कारण नहीं होता। बस बात इतनी सी है कि आपका दिमाग कुछ ज्यादा ही भार उठा रहा है ।
दूसरा संकेत : आपको सोने में बहुत परेशानी होती है।
अगर आप बहुत ज्यादा सोचती हैं, तो यह परेशानी आपके दिमाग को बिल्कुल सक्रिय कर देती है और इसको आराम करने की एक क्षण भी अनुमति नहीं देती। आप अच्छी तरह से सोने में इसलिए असमर्थ होते हैं, क्योंकि आपके दिमाग में बहुत सारे विचार एक साथ आ रहे होते हैं। आपको बिस्तर पर जाने से पहले कोई किताब पढऩी चाहिए या फिर ध्यान लगाना चाहिए।
तीसरा संकेत : आप हर चीज में परफेक्?शन ढूंढती हैं।
क्या आप एक परफेक्?शनिस्?ट हैं और हर कार्य को बिना किसी विघ्न बाधा के पूरा करना चाहती हैं। यह एक कला हो सकती है, परंतु कभी कभार यह कला भी एक कमजोरी के रूप में प्रकट हो सकती है।
यह बस इस पर निर्भर है कि आप इस कला का किस प्रकार प्रयोग करते हैं। जब कोई काम आपके हिसाब से नहीं होता, तो आप घबरा जाती हैं और अपनी शांति खो बैठती हैं।
चौथा संकेत : क्या आप जितना काम नहीं करतीं उससे ज्यादा सोचती हैं?
अगर आप जितना काम कर रहीं हैं, उससे कही ज्?यादा सोच रहीं हैं, तो यह निश्चित है कि सोचना आपकी बीमारी है। इससे उत्पादकता कम होती है।
जी हां यह बिल्कुल सच है! आपके दिमाग में कई उम्दा विचार होंगे पर आप सोचते-सोचते ही अपना सारा समय व्यर्थ कर देती हैं और अंत में आप कुछ नहीं कर पाती। तो अपने सोचने के समय को कम करके काम करने के समय को बढ़ाएं।
पांचवा संकेत : आप आमतौर पर सर दर्द की परेशानी से जूझती हैं
जी हां बहुत सारे विचार अगर आपके दिमाग में हैं, तो यह सर दर्द की परेशानी को जन्म दे सकता है। यह हमारे शरीर का एक संकेत है कि अब हमारे दिमाग को आराम करने की जरूरत है। इस परेशानी से उभरने में गहरी सांस लेने वाले व्यायाम बहुत मदद कर सकते हैं।
छठा संकेत : आपको कोई भी निर्णय लेने में बहुत समय लगता है
अब क्योंकि आपके दिमाग में बहुत सारे विचार दौड़ रहे होते हैं, तो आप बेचैन और निर्णय लेने में असमर्थ महसूस कर सकते हैं। अगर आप यह परेशानी आम तौर पर महसूस करती हैं तो तय कीजिए कि अब एक ही चीज पर पूरी तरह फोकस करेंगी और निर्णय लेंगी।
अब जब आपने जान लिया है कि ज्यादा सोचने की परेशानी को कैसे रोक सकती हैं, तो वर्तमान में जिएं। आने वाले कल की चिंता में अपने जिंदगी के आज के आनंद को व्?यर्थ न गंवाएं। हर एक लम्हे को अच्छी तरीके से जीने की कोशिश करें, तभी आप खुद को हल्?का महसूस कर पाएंगी।

सेहत / शौर्यपथ / दुनिया भर में चाय का शौक रखने वालें की कमी नहीं है। चाय के अलग-अलग स्वाद और प्रकार अपने-अपने फायदे के लिए जाने जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि काली चाय भी आपके लिए बहुत फायदेमंद होती है। काली चाय से होने वाले लाभ जानना चाहते हैं, तो जरूर पढ़ें -
1 हृदय के लिए फायदेमंद - जी हं काली चाय आपके दिल के लिए बेहद फायदेमंद है। रोजाना एक कप काली चाय पीना दिल की सेहत को बनाए रखने में आपकी मदद करेगा। इसमें मौजूद फ्लेवेनॉयड्स एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को कम करता है। इसके
अलावा काली चाय का प्रयोग हृदय की धमनियों को स्वस्थ रखने में मदद करती है और रक्त के जमने की प्रक्रिया को भी कम करने में सहायक है।
2 कैंसर - काली चाय को रोजाना अपनी डाइट में शामिल कर आप प्रोस्टेट, ओवेरियन और फेफड़ों के कैंसर से बच सकते हैं। काली चाय का प्रयोग शरीर में कैंसर कोशि?काओं को खत्म करने में मदद करता है। यह महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर की संभावना को रोकती है साथ ही मुंह के कैंसर से भी बचाने में मदद करती है।
3 दिमाग के लिए - दिमाग की कोशि?काओं को स्वस्थ रखने के साथ ही उनमें रक्त के प्रवाह को और भी बेहतर बनाने के लिए काली चाय पीना बहुत उपयोगी है। दिन में लगभग 4 कप काली चाय का सेवन तनाव को कम करने में सहायक है यह दिमाग को तेज की आप की याददाश्त को बढ़ाती है और आप पहले से अधि?क सतर्क व सक्रिय होते हैं।
4 पाचन - काली चाय में मौजूद टेनिन पाचन के लिए बहुत फायदेमंद होता है। यह गैस के अलावा पाचन संबंधी अन्य समस्याओं में भी काफी लाभदायक होती है। साथ ही दस्त या अतिसार होने पर काली चाय का सेवन बहुत फायदेमंद होता है।
5 एनर्जी - रोजाना काली चाय पीने का एक बेहतरीन फायदा यह भी है कि इसे पीने से आप अधि?क ऊर्जा महसूस करते हैं और सक्रिय भी रहते हैं। काली चाय में मौजूद कैफीन, कॉफी या कोला के मुकाबले अधि?क फायदेमंद होता है और आपके मस्तिष्क को सतर्क रखता है जिससे आपके शरीर में ऊर्जा का संचार निरंतर होता रहता है।
6 कोलेस्ट्रॉल - यह आपके शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करती है, जिससे आपका वजन धीरे-धीरे कम होने लगता है। इसके अलावा इसमें फैल बहुत कम मात्रा में होता है, जो मोटापा नहीं बढ़ाता। साथ ही यह शरीर में मेटाबॉलिक प्रक्रि?या को बढ़ाने में सहायक है जो वजन कम होने में मदद करता है।
7 त्वचा - काली चाय पीना आपको त्वचा की समस्याओं, खास तौर से संक्रमण से बचाने में मदद करता है। इसके अलावा यह झुर्रियों से आपकी त्वचा को बचाती है और इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट तत्व, त्वचा के कैंसर से भी आपको बचाने में सहायक है।

खाना खजाना / शौर्यपथ / अरबी के पत्तों की सब्जी बनाने के लिए सबसे पहले इन पत्तों को अच्छी तरह से साफ कर लें। कोरोना काल में सब्जियों को अच्छी तरह से साफ करना बहुत जरूरी है। इसके लिए आप पहले सादे पानी से इन पत्तों को धो लें, फिर गर्म पानी करके इसमें नमक डालें। फिर इन पत्तों को नमक वाले पानी से अच्छी तरह साफ कर लें।
अब 1 कटोरी बेसन लें। इसमें अदरक, लहसुन का पेस्ट, नमक स्वाद के अनुसार, लालमिर्च पाउडर, धनिया पाउडर व हल्दी पाउडर मिला लें और इन्हें अच्छी तरह से मिक्स करके अलग रख दें।
अब जो अरबी के पत्ते आपने धोकर रखे हैं, उन्हें लें। उन पर तेल लगा लें। फिर इस पेस्ट को उनके ऊपर लगाकर इन्हें लपेट लें। यदि ये खुल रहे हैं, तो आप ऊपर से धागा भी बांध सकते हैं ताकि ये अरबी के पत्ते खुल न पाएं।
अब एक बर्तन में पानी गर्म कर लें और उसके ऊपर एक छन्नी रखें। जब पानी अच्छी तरह से गर्म हो जाए तो अरबी के पत्तों को छन्नी के ऊपर रख दें ताकि अरबी के पत्ते अच्छी तरह से स्टीम हो जाए।
स्टीम होने के इन्हें थोड़ी देर ठंडा होने दें। जब ये ठंडे हो जाएं तो इन्हें कट कर लें।
अब बारी आती है इन्हें फ्राई करने कि तो गर्म तेल में इन्हें तलकर अलग प्लेट में निकाल लें।
ग्रेवी के लिए...
2 प्याज, अदरक, लहसुन का पेस्ट, राई और जीरा। इनका पेस्ट तैयार कर लें।
अब तेल गर्म होने के बाद इस पेस्ट को तेल में डालकर अच्छी तरह पका लें।
ख्याल रखें कि आपको मसाला अच्छी तरह से पका लेना है।
अब हल्दी, मिर्च, नमक व स्वाद अनुसार धनिया पाउडर इन मसालों को तेल में डालकर पकाना है।
जब ये अच्छी तरह से पक जाएं और तेल ऊपर आ जाए तो इसमें पानी मिला लें। ग्रेवी के लिए फिर एक उबाल के बाद इसमें अरबी के पत्ते डालकर इसे 5 मिनट रखने के बाद गैस बंद कर दें।
तो लीजिए तैयार है आपकी घर में तैयार अरबी के पत्तों की सब्जी।

शौर्यपथ / पितृपक्ष में पडऩे वाली एकादशी को इंदिरा एकादशी के नाम से जानते हैं। इस साल इंदिरा एकादशी 13 सितंबर (रविवार) यानी आज है। मान्यता है कि इंदिरा एकादशी का व्रत रखना, भगवान विष्णु की पूजा और इंदिरा एकादशी व्रत कथा सुनना पुण्यकारी होता है। कहते हैं कि इस व्रत को रखने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि इंदिरा एकादशी में व्रत कथा सुनना जरूरी होता है, वरना एकादशी का व्रत अधूरा माना जाता है।
इंदिरा एकादशी की व्रत कथा-
पौराणिक कथाओं के अनुसार, सतयुग में महिष्मति नाम का एक नगर था। जिसका राजा इंद्रसेन था। इंद्रसेन एक बहुत ही प्रतापी राजा था। राजा अपनी प्रजा का पालन-पोषण अपनी संतान के समान करते था। राजा के राज में किसी को भी किसी चीज की कमी नहीं थी। राजा भगवान विष्णु का परम उपासक था।
एक दिन अचानक नारद मुनि का राजा इंद्रसेन की सभा में आगमन हुआ। नारद मुनि राजा के पिता का संदेश लेकर पहुंचे थे। राजा के पिता ने कहा था कि पूर्व जन्म में किसी भूल के कारण वह यमलोक में ही हैं। यमलोक से मु्क्ति से के लिए उनके पुत्र को इंदिरा एकादशी का व्रत करना होगा, ताकि उन्हें मोक्ष मिल सके।
पिता का संदेश सुनकर राजा इंद्रसेन ने नारद जी से इंदिरा एकादशी व्रत के बारे में बताने को कहा। तब नारद जी ने कहा कि यह एकादशी आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को पड़ती है। एकादशी तिथि से पूर्व दशमी को विधि-विधान से पितरों का श्राद्ध करने के बाद एकादशी को व्रत का संकल्प करें।
नारद जी ने आगे बताया कि द्वादशी के दिन स्नान आदि के बाद भगवान की पूजा करें और ब्राह्मणों को भोजन कराएं। इसके बाद व्रत खोलें। नारद जी ने कहा कि इस तरह से व्रत रखने से तुम्हारे पिता को मोक्ष की प्राप्ति होगी और उन्हें श्रीहरि के चरणों में जगह मिलेगी।
राजा इंद्रसेन ने नारद जी के बताए अनुसार इंदिरा एकादशी का व्रत किया। जिसके पुण्य से उनके पिता को मोक्ष की प्राप्ति हुई और वे बैकुंठ चले गए। इंदिरा एकादशी के पुण्य प्रभाव से राजा इंद्रसेन को भी मृत्यु के बाद बैकुंठ की प्राप्ति हुई।

शिक्षा / शौर्यपथ / आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र में व्यक्ति को सफल बनाने की बातों का जिक्र किया है। आचार्य चाणक्य एक महान शिक्षाविद और कुशल अर्थशास्त्री भी थे। चाणक्य की नीतियां आप भी लोगों को जीवन में सही रास्ता दिखा रही हैं। नीति शास्त्र में चाणक्य ने धन, तरक्की, वैवाहिक जीवन, मित्रता और दुश्मनी संबंधी समस्याओं का उपाय बताया है।
चाणक्य के अनुसार, व्यक्ति को जीवन में सफल होना है तो उसे नीति शास्त्र को जीवन में अपना लेना चाहिए। चाणक्य ने नीति शास्त्र में बताया है कि व्यक्ति में कौन-से ऐसे दो गुण होने चाहिए, जो दुश्मनों को भी मित्र बना देता है।
1. विनम्रता-
चाणक्य के अनुसार, व्यक्ति को हमेशा विनम्र होना चाहिए। विनम्रता से व्यक्ति लोगों के दिलों में राज करता है। विनम्र व्यक्ति क्रोध से मुक्त होता है और उसे समाज में भी मान-सम्मान मिलता है। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जो काम व्यक्ति धैर्य के साथ करता है, उसे सफलता प्राप्त होती है। चाणक्य कहते हैं कि क्रोध पर काबू पाने के लिए व्यक्ति को विनम्रता का गुण अपनाना चाहिए। इसके साथ ही कई बार दु्श्मन भी आपकी विनम्रता के सामने झुक जाता है और दोस्ती का हाथ खुद ही बढ़ा देता है।
2. सत्य बोलना-
चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति को किसी भी परिस्थिति में झूठ नहीं बोलना चाहिए। नीति शास्त्र के अनुसार, झूठ बोलने से व्यक्ति की प्रतिभा का नुकसान होता है। झूठ बोलने वाला व्यक्ति समाज में मान-सम्मान नहीं पाता है। ऐसे व्यक्ति से लोग दूरी बनाकर रखते हैं और कोई भरोसा नहीं करता है। इसलिए व्यक्ति को हमेशा झूठ से दूर रहना चाहिए।

लाइफस्टाइल / शौर्यपथ /जीवन में परेशानियां आना आम बात है. इस दुनिया में ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं है, जो कभी भी दुखी न हुआ हो। बुरे दिनों को आप कैसे हैंडल करते हैं, यह बात बहुत महत्व रखती है। कहते हैं कि कोई भी परिस्थिति स्थाई नहीं होती। ऐसे में अगर आपके सामने कोई मुसीबत आ भी जाती है, तो आपको यही बात सोचकर आगे बढऩा चाहिए। आइए, जानते हैं कि आप खुश रहकर परिस्थितियों से कैसे निपट सकते हैं-
परिवर्तन ही सृष्टि का नियम है
भगवत गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं कि युग, व्यक्ति, स्वभाव, जीवन, भाव सबकुछ परिवर्तनशील है, इसलिए दुख या बोझिल दिन भी एक दिन जरूर बदलेंगे।
खुश रहने से सोचने की क्षमता बढ़ती है
आप किसी घटना से हमेशा दुखी रहेंगे, तो इससे न सिर्फ आपकी क्रियाशीलता कम होगी बल्कि तार्किक सोचने की क्षमता भी प्रभावित होगी, इसलिए खुद को समझाते रहें कि खुश रहने से दिन उपाय जल्दी मिलता है।
खुशियां बांटने से बढ़ती है और गम बांटने से घटता है।
जिस तरह खुशियां शुभचिंतकों के साथ बांटने पर बढ़ती है, उसी तरह गम विश्वासपात्र और अपनों के साथ बांटने से कम होता है, इसलिए अपने मन की बात जरूर कहें।
अपनी संभावनाओं को पहचानने का समय
जिस तरह बुरे वक्त में अपने-पराए की पहचान होती है, उसी तरह बुरे वक्त में खुद की प्रतिभा और संभावनाओं को भी परखा जा सकता है, इसलिए बुरे दिनों में ये बातें ध्यान रखकर मुस्कुराकर आगे बढऩे की प्रेरणा मिलेगी।

धर्म संसार / शौर्यपथ / सावन का महीना शुरू हो चुका है। ऐसे में शिव भक्त अपनी भक्ति से भोलेबाबा को मनाने में लगे हुए हैं। शिव पुराण के अनुसार जो भी व्यक्ति इस महीने व्रत रखता है भगवान शिव उसकी सभी इच्छाएं पूरी करते हैं। माना जाता है कि इस पावित्र महीने में अकाल मृत्यु से बचने,दुर्घटना, अनिष्ट ग्रहों के प्रभावों से दूर करने आयु बढ़ाने के साथ असाध्य रोगों से मुक्ति के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जप करना बेहद शुभ होता है।
सावन के महीने में इस मंत्र का जाप करने से इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। लेकिन हर पूजा और मंत्र जाप के लिए हिंदू धर्म में कुछ खास नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करने पर ही व्यक्ति को उसका लाभ मिलता है। जबकि पूजा करते समय की गई कुछ गलतियों से आप भगवान को नाराज कर सकते हैं। तो आइए जान लेते हैं, लंबी आयु का वरदान देने वाला भोलेनाथ के महामृत्युंजय मंत्र को करते समय साधक को भूलकर भी नहीं करनी चाहिए कौन सी गलतियां।
महामृत्युंजय मंत्र-
ऊँ हौं जूं स:। ऊँ भू: भुव: स्व: ऊँ त्रयम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।। ऊँ स्व: भुव: भू: ऊँ। ऊँ स: जूं हौं।
महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते समय न करें ये गलतियां-
-सबसे पहले इस बात को समझ लें कि भगवान शंकर के इस मंत्र का जाप करते समय मंत्र का उच्चारण ठीक होना चाहिए।
-महामृत्युंजय मंत्र की संख्या हमेशा बढ़ाकर की जाती है। मंत्र का जाप एक निश्चित संख्या निर्धारण करके शुरू करें। अगले दिन इनकी संख्या बढ़ाते रहें, याद रखें मंत्र की संख्या कम न करें।
-इस मंत्र का जाप करते समय शुद्ध आसन बिछा कर बैठे। कभी भी धरती में बैठकर इस मंत्र का जाप नहीं करना चाहिए।
-महामृत्युंजय मंत्र का जाप हमेशा पूर्व दिशा की ओर मुख करके ही करें।
-मंत्र का जाप करते समय अपने मन को भटकने न दे।
महामृत्युंजय मंत्र के लाभ-
-ग्रहों के सारे कुप्रभाव नष्ट होते हैं।
-शोक, मृत्यु के संकट टल जाते हैं।
-लंबे समय से चल रहे रोगों से मुक्ति मिलती है।
-पुराने कर्ज से मुक्ति मिलती है।

लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / कोरोनावायरस से बचने का एकमात्र उपाय है कि सावधानी के साथ आगे कदम बढ़ाया जाए। घर के बाहर निकलने से लेकर घर आने तक हमें इस बात की जानकारी होनी जरूरी है कि हमें क्या करना है और कैसे इस वायरस निपटना है? अब धीरे-धीरे लोग अपनी सामान्य दिनचर्या की तरह कदम बढ़ा रहे हैं। ऐसे में हमारी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि अत्यधिक सावधानी बरती जाए।
कोरोना के लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए हमें सावधान व सतर्क रहने की जरूरत है। हम में से कुछ ऐसे लोग हैं, जो अभी भी भीड़भाड़ वाले इलाकों में जाने से बच रहे हैं, वहीं कुछ लोगों ने बाहर आना-जाना शुरू कर दिया है। यदि आप भी मॉल या किसी भीड़भाड़ वाली जगह में जा रहे हैं तो आपको कुछ बातों का ख्याल रखने की जरूरत है। हम इस लेख में आपको बता रहे हैं कि यदि आप मॉल जा रहे हैं, तो आपको किन-किन बातों का विशेष ख्याल रखने की जरूरत है? आइए जानते हैं।
मॉल जाएं तो क्या सावधानियां रखें?
मॉल में प्रवेश करने पर हमें सबसे पहले पार्किंग मिलती है। जब आप गाड़ी पार्क करते हैं तो वहां कर्मी मौजूद होते हैं, जो कई लोगों के संपर्क में आते हैं। ऐसे में आपको ख्याल रखना है कि मास्क और ग्लव्स का उन्होंने इस्तेमाल किया हो। रखें कि बिना थर्मल स्कैनिंग के मॉल में प्रवेश नहीं करना है।
मॉल में फिजिकल टच से बचें। बिना मास्क व ग्लव्स के प्रवेश न करें। मास्क और ग्लव्स का उपयोग आपको करना ही है, इस बात का ख्याल रखें।
जब आप मॉल में प्रवेश करें और यदि आप कतार में लगे हैं तो आपको इस बात का ख्याल रखना है कि कतार में लगे लोगों से आपको उचित दूरी बनाए रखनी है। इस बात का ख्याल हर पल रखें।
एस्केलेटर और लिफ्ट का इस्तेमाल भी आपको सावधानीपूर्वक करना है। जब एस्केलेटर का इस्तेमाल करें तो एक स्टेप छोड़कर आपको खड़े रहना है। ख्याल रखें कि आपने ग्लव्स पहनें हों, क्योंकि यदि आप एस्केलेटर की स्ट्रिप को टच करते हैं तो आपको ग्लव्स पहनना बहुत जरूरी हो जाता है इसलिए बिना ग्लव्स के इन्हें टच न करें।
लिफ्ट का इस्तेमाल करते वक्त हाथों में टिशू रखें। लिफ्ट के बटन को प्रेस करते वक्त टिशू का इस्तेमाल करें फिर इसे डिस्पोज कर दें।
लिफ्ट में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। जहां डिस्टेंसिग मार्क बने हैं, वहीं खड़े रहें।
मॉल में टॉयलेट का इस्तेमाल करते हुए किन बातों का ख्याल रखें?
सबसे जरूरी कि आप मॉल में टॉयलेट जाना अवॉइड ही न करें तो बेहतर है।
यदि आप टॉयलेट का इस्तेमाल करते भी हैं तो आपको हाथों में टिशू को रखना है और इन्हीं की मदद से टॉयलेट के गेट को खोलना और बंद करना है।

हमारा शौर्य

हमारे बारे मे

whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
 
CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
CONTECT NO.  -  8962936808
EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)