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रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ की विशेष आम सभा का आयोजन आज रायपुर के व्हीआईपी रोड स्थित होटल ग्रांड एम्पीरिया में प्रात: 11 बजे से किया गया। इस दौरान ओलंपिक संघ के 31 पदों के लिए चुनाव भी कराया गया जिसमें कुल 31 पदों के लिए 48 लोगों ने अपना नामांकन भरा था, जिसकी सूची गत 17 जुलाई को जारी कर दी गई थी। उसके बाद नाम वापसी की अंतिम तिथि तक कुल 30 पदों के लिए 31 लोग चुनाव मैदान में डटे थे जिसमें एक पद कोषाध्यक्ष के लिए दो लोगों फिरोज अंसारी और साही राम जाखड़ के चुनाव मैदान में रहने से चुनाव कराना पड़ा जिसमें 60 वोटों में से मोहम्मद फिरोज अंसारी को कुल 8 और साही राम जाखड़ को 52 वोट मिले और साही राम जाखड़ ने कोषाध्यक्ष पद पर कब्जा जमाया।
निर्वाचित उम्मीदवार के पद का नाम
जिसमें छग ओलंपिक संघ के अध्यक्ष के रूप में प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जो छत्तीसगढ़ राज्य टेनिस संघ के अध्यक्ष है उनको चुना गया वहीं भिलाई विधायक एवं महापौर देवेन्द्र यादव छग हैण्डबॉल संघ के अध्यक्ष को उपाध्यक्ष, तथा महासमुंद जिला ओलंपिक संघ के अध्यक्ष विनोद चंद्राकर,
दुर्ग जिला अध्यक्ष के रूप में प्रदेश बिलियड्र्स स्नूकर एसोसिएशन छग के अध्यक्ष विजय अग्रवाल, और महासचिव के रूप में बशीर अहमद खान जो प्रदेश तलवारबाजी संघ को, वरिष्ठ उपाध्यक्ष गजराज पगारिया
वरिष्ठ उपाध्यक्ष, सीजी पी बिलियड्र्स और स्नूकर एसोसिएशन,, डॉ ए फरिश्ता को कार्यकारी अध्यक्ष छत्तीसगढ़ स्क्वैश एसोसिएशन, अखिल कुमार धगट को अध्यक्ष छत्तीसगढ़ बैडमिंटन संघ, शरद शुक्ला को अध्यक्ष छत्तीसगढ़ टेबल टेनिस एसोसिएशन, जी एस बामरा को अध्यक्ष छत्तीसगढ़ एथलेटिक्स एसोसिएशन, कैलाश मुरारका अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राज्य तीरंदाजी संघ महासचिव गुरुचरण सिंह होरा सचिव, छत्तीसगढ़ राज्य टेनिस संघ, संयुक्त सचिव डॉ विष्णु श्रीवास्तव सचिव छत्तीसगढ़ स्क्वैश एसोसिएशन, अरुण कुमार द्विवेदी अध्यक्ष छत्तीसगढ़ प्रदेश जूडो संघ,अभिजीत मिश्रा सचिव सीजी प्रदेश कयाकिंग एंड कैनोइंग एसोसिएशन,विजय अग्रवाल उपाध्यक्ष सीजी प्रदेश लॉन बॉलिंग एसोसिएशन, इंजी एन आर पराशर अध्यक्षए बस्तर जिला ओलंपिक संघ, मनीष श्रीवास्तव सचिव छत्तीसगढ़ हॉकी, कोषाध्यक्ष साही राम जाखड़ सचिव छत्तीसगढ़ तैराकी संघ को चुना गया।
वही कार्यकारी सदस्य के रूप में कमलजीत अरोड़ा अध्यक्ष छत्तीसगढ़ एमेच्योर खो खो एसोसिएशन डॉ आलोक दुबे सचिव छत्तीसगढ़ ट्रायथलॉन एसोसिएशन, ठाकुर आनंद मोहन सिंह एडवोकेट हाईबल कोर्ट सीजी सचिव छत्तीसगढ़ राज्य तीरंदाजी संघ, पीयूष भाटिया एडवोकेटए एचएबल हाई कोर्ट सीजी अध्यक्ष स्की एंड स्नोबोर्ड एसोसिएशन ऑफ छत्तीसगढ़ आर के श्रीवास्तव सचिव छत्तीसगढ़ प्रदेश रोइंग एसोसिएशन, अनिल पुसदकर अध्यक्ष मॉडर्न पेंटाथलॉन एसोसिएशन ऑफ़ छत्तीसगढ़, वी आर चन्नावर छत्तीसगढ़ के साइक्लिंग एसोसिएशन के सचिव, डॉ अयाज अहमद खान सचिव छत्तीसगढ़ रग्बी फुटबॉल एसोसिएशन, जगन्नाथ यादव अध्यक्ष छत्तीसगढ़ कुश्ती संघ, जावेद अहमद खान सचिव नेटबॉल एसोसिएशन ऑफ छत्तीसगढ़, राजेश जांघेल सचिव छत्तीसगढ़ प्रदेश भारोत्तोलन संघ, शिव प्रसाद कापसे सचिवए सी जी प्रदेश एमेच्योर मुक्केबाजी संघ को चयन किया गया।
भिलाई / शौर्यपथ / प्रोफेशनल कैरियर के संचालक डॉ. संतोष रॉय रविवार 9 अगस्त को रात्रि साढे 8 बजे से कक्षा 11 वी और बारहवी के छात्रों के लिए एक सेमीनार का आयोजन कराने जा रहे है। इस सेमीनार को कम्बोडिया के घाना शहर के सीएमए एम वी चेलापति राव संबोधित करेंगे। कक्षा 11 वी और बारहवी के छात्रों के लिए सीएमएम एक बेहतर कैरियर, देश विदेश में सीएमए की क्या संभावनाएं है जैसे सवालों का जवाब इस सेमीनार से मिल जायेगा। एक बेहतर कैरियर तो मुठ्ठी मे ंरखे रेत की तरह है। सही सयमसही जगह अमग रेत का उपयोग नही किया गया तो रेत हाथ से फिसल जायेगी। वैसे ही कैरियर के निर्णय लेने से बहुत देर की गयी तो वक्त हाथ से निकल जायेगा। अधिकतर लोग चर्चा तो बहुत करते हैं लेकिन निर्णय तक नही पहुंच पाते। सफलता की आधारशीला है शीघ्र निर्णय। उतावले निर्णय और शीघ्र निर्णय में अंतर है। कामर्स के क्षेत्र मेंनिरंतर बेहतर कार्य करने वाले डॉ. संतोष रॉय का कहना है कि 9 अगस्त को रात्रि साढे 8 बजे यह सेमीनार छात्र-छात्राओं एवं उनके पालकों के लिए आयोजित कियाग गया है। छात्र छात्राओं के साथ ही पालक भी एक्सपर्ट से जो सवाल पूछना है वे पूछ सकते है।
राजनांदगांव / शौर्यपथ / मानव सेवा एवं जनकल्याण के लिए अंचल सहित देशभर में पहचान बना चुकी बर्फानी सेवाश्रम समिति द्वारा 5 अगस्त को अयोध्या में हुए श्रीराम मंदिर निर्माण के भूमिपूजन के ऐतिहासिक अवसर पर बर्फानी आश्रम में भी श्रद्धाभक्ति भाव पूर्ण आयोजन के साथ ही दीपोत्सव कर परिसर को दीपावली के सामान रोशनी से जगमग किया गया। इस अवसर पर भगवान को मिष्ठान व फलों का भोग भी लगाया गया।
संस्था के सचिव गणेश प्रसाद शर्मा गन्नू ने बताया कि अखिल भारतीय चर्तुः सम्प्रदाय के श्रीमहंत श्रीश्री 1011 योगाधिराज ब्रम्हर्षि बर्फानी दादा जी के आशीर्वाद व मार्गदर्शन से नगर में बर्फानी आश्रम स्थित मां पाताल भैरवी राज राजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी दस महाविद्या द्वादश ज्योर्तिलिंग शिव शक्ति सिद्धपीठ में दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर स्थित राम दरबार में अयोध्या के साथ ही सारे विश्व में श्रीराम मंदिर निर्माण शिलान्यास अवसर पर उत्साह एवं भक्तिपूर्ण आयोजन किये गये। इसी के तहत राजनांदगांव संस्कारधानी में स्थित बर्फानी आश्रम में भी श्रीराम मंदिर निर्माण महोत्सव आयोजन श्रद्धा भक्तिभाव पूर्ण ढंग से आयोजित किया गया। 5 अगस्त को दोपहर 12 बजे से हनुमान चालीसा का पाठ प्रारंभ हुआ तथा अयोध्या में शिलान्यास पूजन के शुभ मुहूर्त पश्चात भगवान मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की आरती उतारी गई। इस अवसर पर भगवान श्रीराम, माता जानकी, लक्ष्मण जी एवं रामभक्त हनुमान का विशेष श्रृंगार कर सवामन दालबाटी चुरमा और अन्न व्यंजनों के अलावा फल का भोग प्रसाद भगवान को मंत्रोच्चार के मध्य अर्पित किया गया।
हनुमान चालीसा का पाठ संस्था के अध्यक्ष राजेश मारू, उपाध्यक्ष दीपक जोशी, सचिव गणेश प्रसाद शर्मा गन्नू, महंत गोविंद दास, कोषाध्यक्ष नीलम जैन, महेन्द्र लुनिया, सूरज जोशी, आलोक जोशी, बलविंदर सिंह भाटिया, मनीष परमार, संजय खंडेलवाल, आलोक बिंदल, संतोष खंडेलवाल, प्रियांश सोनी, नत्थू सिंह महाराज के अलावा अन्य सदस्यगण के द्वारा किया गया। संस्था द्वारा 4 व 5 अगस्त को श्रीराम मंदिर सहित पूरे सिद्धपीठ में दीप प्रज्ज्वलित कर रोशनी भी की गई।
राजनांदगांव / शौर्यपथ / कमरछठ यानी हलषष्ठी पर्व पर माताओं ने संतानों की दीर्घायु की कामना लेकर कठिन व्रत रखा। हलषष्ठी पर्व को उत्साहपूर्वक मनाते हुए महिलाओं ने दोपहर बाद पूजा-अर्चना शुरू की।
सामूहिक रूप से शहरभर में अलग-अलग चौराहों और मोहल्लों में महिलाओं ने भगवान शिव और पार्वती की अलौकिक गाथाओं से जुड़ी कथाएं सुनी। माना जाता है कि कमरछठ पर्व भगवान शिव के पूरे परिवार से जुड़ा हुआ है। पूरे परिवार के सदस्यों की कथाओं के जरिये वर्णन किया जाता है। जिसमें मुख्य रूप से भगवान शिव और पार्वती की धार्मिक गाथाएं शामिल हैं।
महिलाएं पूजा-अर्चना के दौरान प्रतिकात्मक रूप से गड्ढे खोदकर सगरी का निर्माण करती है। जिसमें पेड़-पौधे लगाकर अलग-अलग पूजन सामग्रियां चढ़ाई जाती है। वहीं भगवान शिव-पार्वती को भोग स्वरूप पसहर चावल, भैंस का दूध, दही, घी, बेल पत्ती, कांशी, खमार, बांटी, भौरा सहित अन्य सामग्रियां अर्पित की गई। दोपहर तक कथा और धार्मिक रूप से शिव-पार्वती का स्तुति गान करते हुए औलादों की लंबी आयु की कामना की।
राजनांदगांव / शौर्यपथ /कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा ने खैरागढ़ विकासखंड के ग्राम सहसपुर में गौठान का निरीक्षण किया और वहां ग्रामवासियों से मुलाकात की। उन्होंने गौठान में वर्मी बेड का निरीक्षण किया और उन्होंने स्वसहायता समूह की महिलाओं को अधिक मात्रा में जैविक खाद का निर्माण करने के लिए कहा। इस अवसर पर उन्होंने जय मां शारदा स्वसहायता समूह को उद्यानिकी विभाग द्वारा 13 हजार रूपए का जैविक खाद विक्रय करने पर चेक सांैपा। समूह की महिलाओं ने बताया कि वर्मी कम्पोस्ट बनाने के लिए कृषि विभाग से प्रशिक्षण दिया गया है।
कलेक्टर ने गौठान में उपस्थित चरवाहा केवल से बातचीत की और उन्हें गोबर एकत्रित करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि शासन ने पशुओं की देखभाल के लिए इतना बड़ा गौठान बनाया है सभी ग्रामवासी अपने पशुओं को गौठान में रखे। उन्होंने जनपद पंचायत सीईओ को गौठान में शेड निर्माण का कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने गौठान परिसर में आंवला का पौधरोपण किया। इस अवसर पर एसडीएम श्रीमती निष्ठा पाण्डेय, जनपद सीईओ श्रीमती रोशनी भगत टोप्पो, नायब तहसीलदार सुश्री मनीषा देवांगन, हुलेश्वर खुंटे, ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी रविन्द्र मेहरा, पीओ मनरेगा उपेन्द्र वर्मा, डीपीएम बिहान दिनानाथ लिलहरे एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
राजनांदगांव / शौर्यपथ / मोहला वनांचल के अंतिम छोर में बसे शेरपार संकुल के अंतर्गत आने वाले प्राथमिक शाला मुचर में मोहल्ला क्लास की शुरुवात की गई। शाला के प्रधान पाठक उमाशंकर दिल्लीवार और गोटाटोला जोन के मीडिया प्रभारी शेख अफजल ने बताया कि कोरोना महामारी के कारण स्कूल अनिश्चितकाल के लिए बंद है। ऐसे समय मे पढ़ई तुंहर दुआर योजना के माध्यम से बच्चों को पढ़ाई से जोडऩे के लिए शाला के दोनों ही शिक्षकों ने बहुत ही अच्छा प्रयास किया। बच्चों को ऑनलाइन क्लास से जोडऩे में मुचर से मोबाइल धारक निकिता, रेशम, मंजू, टोमेश और देव कुमार ने बहुत सहयोग किया। बच्चों की होमवर्क करने में, होमवर्क की फोटो खींच कर शिक्षकों को भेजने में इस युवाओं ने काफी मदद किया। लेकिन नेटवर्क की समस्या के कारण सभी बच्चे ऑनलाइन क्लास से जुड़ नहीं पाते थे। इसी समस्या के समाधान के रूप में स्कूल शिक्षा विभाग ऑफलाइन शिक्षा के विकल्प के रूप में मोहल्ला क्लास की योजना ले के आई। अब इस योजना का मकसद बच्चों को उनके घरों के आस पास शिक्षकों और शिक्षक सारथी की मदद से पढ़ाना है। इसी योजना पर अमल करते हुए ग्राम मुचर में भी मोहल्ला क्लास की शुरूआत की गई।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी राजेन्द्र कुमार देवांगन, मुकादाह सरपंच श्रीमती द्रौपदी कोला, ब्लॉक नोडल अधिकारी केवल साहू, सोमाटोला से राजकुमार यादव, मुकादाह हाई स्कूल के प्राचार्य विक्रम साहू, शेरपार संकुल समन्वयक प्रदीप मंडावी, जगदेव उर्वशा, पुरुषोत्तम तरम, श्रीमती शारदा कुमेटी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी राजेन्द्र कुमार देवांगन ने बताया कि प्राथमिक शाला मुचर हमेशा से ही मोहला और शेरपार संकुल के अच्छे स्कूलों में शामिल रहा है। उन्होंने बताया कि मुचर के शिक्षक उमाशंकर दिल्लीवार और शेख अफजल हमेशा से बहुत सक्रिय रहे है और ब्लॉक, जिले के अलावा राज्य तक मे अपनी अलग पहचान बनाई है। सरपंच ने अपने उद्बोधन में दोनों शिक्षकों के इस प्रयास की तारीफ करते हुए पंचायत की तरफ से भरपूर मदद देने का आश्वासन दिया है। इस दौरान शिक्षक सारथी कुमारी मंजू, कुमारी रेशम, कुमारी निकिता, टोमेश कुमार, शारदा कुमेटी को मुख्य अतिथियों के हाथों से चॉक, पेन, कॉपी, सैनिटाइजर बोतल, ब्लैक बोर्ड का वितरण किया गया। मुचर में 5 से 6 मोहल्ला क्लास के संचालन की तैयारी शिक्षकों और ग्रामीणों द्वारा किया गया है। शाला के सभी बच्चों को मास्क का वितरण भी दोनों शिक्षकों द्वारा किया गया।
इस कार्यक्रम में ग्राम मुचर से दीपक, जनक, कलीराम के अलावा पालक भी मौजूद थे। कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों के दोनों ही शिक्षकों के इस प्रयास की तारीफ करते हुए दूसरे स्कूलों में इसी मॉडल को लागू करने पर जोर दिया है। शाला के प्रधान पाठक उमाशंकर दिल्लीवार और शिक्षक शेख अफजल ने कार्यक्रम में आए सभी अतिथियों को धन्यवाद देते हुए उम्मीद जाहिर की है कि इस योजना से बच्चों को बहुत लाभ होगा और वे फिर से नियमित पढ़ाई से जुडेंगे।
दुर्ग / शौर्यपथ / गृह एवं लोकनिर्माण मंत्री ताम्रध्वज साहू ने गुरुवार 6 अगस्त को अपना जन्मदिन सादगी के साथ मनाया। कोरोना संक्रमण के दौरान शासन द्वारा जारी दिशा निर्देशों का उल्लंघन न हो इसक पूरा ध्यान रखा गया। इस मौके पर छत्तीसगढ़ रक्त सेवा संगठन के 6 सदस्यों ने स्वैच्छिक रक्तदान कर गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू का जन्मदिन मनाया। संगठन के इस सेवा कार्य पर प्रदेश कांग्रेस के महासचिव जितेन्द्र साहू ने सभी का आभार व्यक्त किया। गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू के जन्मदिन पर छत्तीसगढ़ रक्त सेवा संगठन के सदस्यों ने रक्तदान जीवनदान के भाव को चरितार्थ करते हुए चंदुलाल चंद्राकर हॉस्पिटल में स्वैच्छिक रक्तदान किया। इस मौके पर संगठन के सदस्य शरदचंद्र तिवारी, प्रदीप सोनी, अभिषेक यादव, देवचंद्र निर्मलकर, विक्की कलसी व योगेश देवांगन ने रक्तदान किया। इन सभी सदस्यों के सेवा भाव व समर्पण पर प्रदेश कांग्रेस के महासचिव जितेन्द्र साहू ने आभार जताते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ रक्त सेवा संगठन के उक्त सभी सदस्य बधाई के पात्र हैं। इन्होंने गृहमंत्री के जन्मदिन पर स्वैच्छिक रक्तदान कर सराहनीय कार्य किया है।
धर्म संसार / शौर्यपथ / भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को कजरी तीज मनाते हैं। यह त्योहार इस साल 6 अगस्त को पड़ रहा है। कजरी तीज को बूढ़ी तीज या सातूड़ी तीज के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से पति की लंबी आयु और सुख समृद्धि की प्राप्ति के साथ मनोकामनाएं भी पूरी होती है। इस व्रत को शाम को चंद्रमा के निकलने के बाद उसे अर्घ्य देकर खोला जाता है।
शुभ मुहूर्त-
तृतीया तिथि प्रारंभ- सुबह 10 बजकर 50 मिनट से
तृतीया तिथि समाप्ति- रात 12 बजकर 15 मिनट पर।
चंद्रोदय का समय- रात 9 बजकर 8 मिनट पर।
कैसे करें पूजा-
कजरी दिन के दिन सुबह स्नान के बाद साफ सुथरे कपड़े पहनने चाहिए। इस दिन जौ, गेहूं, सत्तू ,चने, चावल और घी को मिलाकर कई तरह के पकवान बनाए जाते हैं। सुहागिनें इस दिन माता पार्वती और महादेव की विधि-विधान से पूजा करती हैं। चंद्रोदय के बाद इस व्रत को खोला जाता है। इस दौरान कजरी तीज की व्रत कथा भी पढ़ना शुभ माना जाता है।
चंद्रमा को कैसे दें अर्घ्य-
कजरी तीज में बाद की पूजा के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देना शुभ माना जाता है। सबसे पहले चंद्रमा को मौली, अक्षत और रोली अर्पित करें। इसके बाद अपने स्थान पर खड़े होकर चंद्रमा को अर्घ्य दें। इसके बाद व्रत को पानी या कुछ मीठा खाकर खोला जाता है।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / ग्रूमिंग एक बहुत ही जरूरी खुद की त्वचा का खयाल रखने का एक रूटीन होता है और इसके लिए सभी महिलाओं को वक्त निकालना चाहिए. एक ग्रूमिंग किट को महिलाओं को देने के लिए अच्छे तोहफे के रूप में भी देखा जा सकता है, जिसमें त्वचा को रिलेक्स करने के सभी प्रोडक्टस मौजूद हों. महिलाएं, अक्सर ग्रूमिंग सेशन के बाद कॉन्फिडेंट और खूबसूरत महसूस करती हैं. ऐसे में किसी ओर के आपको ग्रूमिंग किट गिफ्ट करने का इंसजार क्यों करना, जब आप खुद अपनी पर्सनलाइज्ड ग्रूमिंग किट बना सकती हैं.
एक आदर्श ग्रूमिंग किट वो होती है, जिसमें आपकी स्किन के मुताबिक ब्यूटी प्रोडक्टस शामिल हों और कुछ ऐसे प्रोडक्ट्स हो, जिनका इस्तेमाल आप किसी फंक्शन से पहले कर सकती हैं. तो चलिए हम आपको बताते हैं कि आपको अपनी ग्रूमिंग किट में किन प्रोडक्ट्स एड करना चाहिए.
1. क्लेंजिंग जेल
पहला स्टेप हमेशा क्लेंजिंग से शुरू होता है और इसलिए आपको अपने चेहरे की क्लेंजिंग के लिए एक क्लेंजर की आवश्यकता है. अगर आपको कभी ऐसा लगे कि आपका चेहरा डल हो गया है तो आप एक हाइड्रेटिंग क्लेंजिंग जेल या फॉम का इस्तेमाल कर सकती हैं, जो तुरंत आपके चेहरे को निखार देगा. तो अपने सामान्य साबुन या फिर फेसवॉश को जेंटल और हाइड्रेटिंग क्लेंजिंग जेल से बदल दें.
2. शॉवर जेल
अगर आपने अभी तक शॉवर जेल ट्राय नहीं किए हैं,तो आपको बता दें कि ये त्वचा के लिए बहुत ही शानदार होते हैं. आपको अंदाजा नहीं है कि शॉवर जेल का इस्तेमाल न करने से आप क्या मिस कर रही हैं. ये आपके नहाने के समय की सारी वाइब्स को बदल सकता है. साबुह आपकी त्वचा के लिए हार्श होते हैं और लंबे वक्त में आपकी त्वचा को डल कर देते हैं. वहीं शॉवर जेल आपकी त्वचा के लिए जेंटल होता है और त्वचा को सॉफ्ट रखता है. अपने एक्सपीरियंस को बेहतर बनाने के लिए आप अपनी पसंद की खुशबू वाले शॉवर जेल का इस्तेमाल कर सकती हैं.
3. बॉडी लोशन
अपनी त्वचा को कोमल बनाए रखने के लिए आपको शॉवर के बाद अपनी त्वचा पर बॉडी लोशन लगाना चाहिए. आपकी ग्रूमिंग किट बिना बॉडी लोशन के पूरी नहीं होगी. एक बॉडी लोशन आपकी ग्रूमिंग किट में जरूर होना चाहिए.
4. मोइश्चर
मोइश्चराइज्ड त्वचा हैपी त्वचा होती है और अगर आपको अपनी त्वचा से प्यार है तो आपको ये मंत्र याद कर लेना चाहिए. एक अच्छा, प्राकृतिक मोइश्चराइजर आपकी ग्रूमिंग किट में जरूर होना चाहिए. ये आपकी त्वचा के दिखने के तरीके को पूरी तरह से बदल सकता है. अपने चेहरे को क्लेंज करने के बाद आप मोइश्चराइजर की एक लेयर लगाएं क्योंकि इससे आफकी त्वचा कोमल होगी.
5. मिनिएचर परफ्यूम
क्या आपने कभी इस बात पर ध्यान दिया है कि जब आप अच्छा स्मैल करते हैं तो अच्छा महसूस करते हैं. आपकी खुशबू का आपके मूड पर काफी अधिक प्रभाव पड़ता है. इससे आपका कॉन्फिडेंस बड़ता है और आपको दिनभर लोगों को कॉम्प्लिमेंट्स मिलते हैं. आप रोजाना के लिए इस्तेमाल के लिए सामान्य डियो और परफ्यूम रखें लेकिन कुछ मिनिएचर परफ्यूम अपनी ग्रूमिंग किट में भी अपने खास दिनों के लिए रखें.
6. मैनिक्योर किट
एक मैनिक्योर किट को आपको अपनी ग्रूमिंग किट में सबसे पहले रखना चाहिए. ग्रूमिंग किट का मतलब ये तो है कि आप अपनी जरूरत की सारी चीजें उसमें रखें लेकिन इसके साथ ही उसमें ऐसे प्रोडक्टस भी रखें, जिनके लिए आप आसानी से वक्त नहीं निकाल पाती हैं. एक मैनिक्योर किट इसका सही उदाहरण है. आपको अपने नेल्स का मैनिक्योर करके जरूर अच्छा लगेगा लेकिन आपको इसे रोज करने की जरूरत नहीं है.
7. रेजर या ट्रिमर
एक रेजर या ट्रिमर को आपको अपनी ग्रूमिंग किट में जरूर रखना चाहिए. इसके लिए आप तीन ब्लेड वाले रेजर का इस्तेमाल कर सकती हैं, जो त्वचा को नुकसान नहीं पहुंचाता. बस इस बात का ध्यान रखें कि ये साफ और सुखा हो.
वहीं ट्रिमर आज के वक्त में महिलाओं के लिए जरूरी प्रोडक्ट बन गया है. खासकर तब जब बात चेहरे के बालों की होती हैं.
8. फेस मास्क
हम फेस मास्क को कभी भी ज्यादा क्रेडिट नहीं देते हैं. हालांकि, अपनी त्वचा पर हफ्ते में कम से कम दो बार अच्छे फेस पैक का इस्तेमाल करने से आपकी त्वचा स्वस्थ रहती है. इसलिए आप अपनी ग्रूमिंग किट में फेस मास्क रखें. हालांकि, इस दौरान अपनी स्किन टाइप को ध्यान में रखते हुए ही फेस मास्क का चुनाव करें.
9. लिप बाम
लिप बाम किसी भी लड़की के पसंदीदा प्रोडक्ट में से एक होता है. ये आपके लिप्स को सॉफ्ट और हाइड्रेट रखता है और लिपस्टिक भी आसानी से लग जाती है.
10. कॉम्पैक्ट
अगर आप मेकअप के बहुत बड़े फैन हैं तो आपको हमेशा अपनी ग्रूमिंग किट में कॉम्पैक्ट रखना चाहिए. ये आपकी त्वचा को ईवन टोन देगा और मेकअप ब्लंडर्स को ठीक करता है.
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / अच्छी त्वचा के लिए एक्सफोलिएटिंग, क्लेंजिंग, टोनिंग और मोइश्चराइजिंग करना जरूरी है. ये चार चीजें स्वस्थ और ग्लोइंग स्किन के स्तंभ हैं. हम सब ये जानते हैं कि क्लेंजिंग क्या होती है. हालांकि, बहुत से लोग ये नहीं जानते हैं कि क्लेंजिंग और टोनिंग दोनों साथ-साथ चलते हैं. एक ओर जां क्लेंजिग आपके चेहरे को साफ करता है तो वहीं टोनर बची हुई धूल-मिट्टी को हटाने का काम करता है.
हालांकि, यदि आपकी ऑयली स्किन है तो आपके लिए क्लेंजिंग और टोनिंग दोनों ही बहुत अधिक जरूरी है. टोनिंग की मदद से आपके पोर्स छोटे हो जाते हैं और स्किन का पीएच स्केल बना रहता है. इसके साथ ये आपके चेहरे पर प्रोटेक्शन लेयर बनाते हैं और मोइश्चराइजर लगाने से पहले एक बेस तैयार कर देते हैं. साथ ही यहां दिए गए टोनर्स को आप आसानी से घर पर बना सकते हैं.
1. सेब का सिरका
- एक चम्मच सेब का सिरका और एक कप पानी को मिक्स कर लें.
- अब कॉटन पैड को इसमें भिगो लें और चेहरे को साफ कर लें.
2. पुदीने की पत्तियां
- 6 कप पानी उबालें.
- अब इसमें कुछ पुदीने की पत्तियों को डालें.
- इस मिक्स्चर को ठंडा होने दें.
- कॉटन पैड को इसमें भिगो लें और अपने चेहरे को साफ कर लें.
3. नींबू का रस और पेपरमिंट टी
- एक चम्मच नींबू का रस और पेपरमिंट टी बैग लें और इसमें 1 कप गर्म पानी मिला लें.
- टी बैग को पानी में बैठ जाने दें और कुछ मिनट के लिए इस पानी को ऐसे ही छोड़ दें.
- अब पानी में से टी बैग निकाल लें और पानी को ठंडा होने दें.
- कॉटन पैड को इसमें भिगोएं और अपने चेहरे को साफ कर लें.
4. एलोवेरा जेल
- एलोवेरा की एक पत्ती को काटे और उसमें से जेल निकाल लें.
- एक कप पानी में 2 चम्मच जेल को अच्छे से मिला लें.
- इस सॉल्यूशन को अपने चेहरे पर कॉटन पैड से लगाएं.
- ये सॉल्यूशन आपके सनबर्न और रैश को भी ठीक करता है.
5. खीरा
- आधा ताजा खीरा लें और इसके छोटे छोटे टुकड़े कर लें.
- अब एक बर्तन में एक कप पानी डालें और कटा हुआ खीरा डालें.
- पानी में खीरे को ब्लेंड कर लें.
- इसे ठंडा होने दें और फिर छनी से पानी को छान लें.
- कॉटन पैड की मदद से इसे अपने चेहरे पर लगाएं.
6. बर्फ का पानी
- बर्फ के पानी में कॉटन पैड को डालें और इसे अपने चेहरे पर लगाएं.
- आप चाहें तो सीधे बर्फ को भी अपने चेहरे पर रगड़ सकती हैं.
7. कच्ची अंबी का बीज
- कुछ कच्ची अंबी के बीज लें.
- इन बीज को पानी के बर्तन में रखें और उसे 30 मिनट के लिए उबाल लें.
- पानी को ठंडा होने दें
- हर बार मुंह धोने के बाद इस टोनर का अपने चेहरे पर इस्तेमाल करें.
8. कैमोमाइल
- 5 मिनट के पानी में कैमोमाइल चाय की पत्ति के बैग को उबालें.
- अब इसे ठंडा होने दें और फिर एक बोतल में ये पानी डाल लें.
- हर बार मुंह धोने के बाद अपने चेहरे पर कॉटन पैड की मदद से इसे लगाएं.
9. नींबू का रस
- 1 कप पानी में 1 चम्मच नींबू का रस मिला लें.
- इस सॉल्यूशन को कॉटन पैड की मदद से अपने चेहरे पर लगाएं.
- आप चाहें तो सीधे नींबू के छिलके को अपने चेहरे पर रगड़ सकती हैं.
- इससे आपके चेहरे से टैन हटेगा और ऑयल भी कंट्रोल होगा.
10. ग्रीन टी
- ग्रीन टी बैग को उबालें और इसे ठंडा होने दें.
- इस चाय को हर बार मुंह धोने के बाद टोनर के रूप में लगाएं.
बता दें कि ऑयली त्वचा के लिए टोनर बेहद आवश्यक हैं और ये आपकी त्वचा को फ्रेश और ग्रीस फ्री रखते हैं. इसके अलावा ये मुंहासों को होने से रोकते हैं.
नजरिया / शौर्यपथ / आज हिरोशिमा दिवस है। साल 1945 में 6 अगस्त के दिन ही दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका ने इस जापानी शहर पर ‘लिटिल ब्यॉय’ नामक परमाणु बम गिराए थे। और इसके तीन दिनों बाद 9 अगस्त को जापान के ही नागासाकी में ‘फैट मैन’ नामक एक अन्य परमाणु बम गिराया गया था। इन बमों की तबाही ऐसी मची कि दोनों शहरों में लगभग साढ़े तीन लाख लोग झटके में मारे गए, जबकि विकिरण का प्रभाव ऐसा फैला कि बाद की कई पीढ़ियां विकलांग पैदा होती रहीं। आज विश्व में परमाणु हथियारों की संख्या लगभग 13,450 हो गई है, जिनकी मारक क्षमता इन दोनों बमों से कई गुना ज्यादा है। ये हथियार अपने अल्पकालीन और दीर्घकालीन प्रभाव से मानव सहित पृथ्वी के अधिकांश जीवन को समाप्त करने की विध्वंसक क्षमता रखते हैं। बेशक शीत युद्ध के चरम के समय की तुलना में आज परमाणु हथियारों के खिलाफ जागरूकता बढ़ी है, फिर भी तमाम विशेषज्ञ यही मानते हैं कि परमाणु हथियारों से जुड़ा खतरा कम नहीं हुआ है, बल्कि बढ़ गया है।
इसके अनेक कारण दिखाई देते हैं। पहली वजह तो यह है कि उस समय अमेरिका और रूस के बीच परमाणु हथियारों के नियंत्रण की जो संधियां या समझौते थे, उनका असर तेजी से कम होता जा रहा है। इनमें से एक संधि ‘द इंटरमीडिएट-रेंज न्यूक्लियर फोर्सेस’ (आईएनएफ) 2019 में टूट चुकी है, जबकि दूसरी बड़ी संधि ‘न्यू स्टार्ट’ के अगले साल फरवरी में नवीनीकरण की संभावना बहुत कम है, क्योंकि इसकी तैयारी बहुत धीमी नजर आ रही है। दूसरा कारण यह है कि परमाणु शस्त्र कम करने के समझौते समय के साथ-साथ कई कमियों के शिकार हो गए। वर्ष 1987, 1991 और 1993 में अमेरिका और सोवियत संघ (या रूस) के बीच तीन महत्वपूर्ण समझौते हुए थे, जिनका व्यापक स्तर पर स्वागत किया गया था और यह माना गया था कि अब इन दोनों देशों में बडे़ पैमाने पर परमाणु शस्त्र नष्ट किए जाएंगे, पर वास्तविक स्थिति मानव विकास रिपोर्ट 1994 बताती है, जिसके मुताबिक, ‘इन संधियों से तनाव कम तो हुआ, लेकिन इनकी अपनी सीमाएं हैं। इनमें यह निर्देश नहीं दिया गया है कि ‘वारहेड’ को ही नष्ट कर दिया जाए।’
एक समय था, जब परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का खतरा मुख्य रूप से दो बड़ी ताकतों अमेरिका और रूस की ओर से था, पर अब परमाणु हथियार नौ देशों के पास हैं। इतना ही नहीं, आतंकवादियों के पास भी छोटे परमाणु हथियार पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। फिर, चार-पांच ऐसे देश भी हैं, जो निकट भविष्य में परमाणु हथियार प्राप्त कर सकते हैं। एक अनुमान यह भी जताया गया है कि अमेरिका से संबंध अधिक तनावपूर्ण होने के बाद चीन तेजी से अपने परमाणु शस्त्र बढ़ा सकता है। हाल ही में स्टॉकहोम पीस रिसर्च संस्थान ने भी अपनी रिपोर्ट में बताया है कि जिन देशों के पास परमाणु हथियार हैं, वे सभी इनके आधुनिकीकरण की दौड़ में हैं। इसके अलावा, युद्ध में परमाणु हथियारों के ‘टैक्टिकल’ हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की आशंका भी जताई जा रही है। इसका अर्थ है कि किसी देश की बढ़ती सेना को रोकने के लिए रणभूमि में इसका इस्तेमाल हो सकता है।
इन्हीं तमाम कयासों को ध्यान में रखते हुए कई विशेषज्ञ यह मानने लगे हैं कि परमाणु हथियारों का खतरा बढ़ रहा है। इसके अतिरिक्त, जिस तरह से अंतरिक्ष क्षेत्र का सैन्यीकरण तेजी से बढ़ रहा है, वह भी चिंता का विषय है। दुनिया में अमन-शांति बहाल करने की दिशा में काम करने वाले कई संस्थानों का मानना है कि किसी भी हालत में अंतरिक्ष क्षेत्र में किसी परमाणु हथियार का प्रवेश नहीं होना चाहिए। ऐसे में, मौजूदा वक्त की मांग यही है कि परमाणु हथियारों की विध्वंसकता के अभिशाप से धरती को मुक्त किया जाए। इसके लिए विश्व स्तर पर सभी अमनपसंद नागरिकों और संस्थाओं को एक बड़ा वैश्विक अभियान चलाना चाहिए।
इसमें कोई दोराय नहीं कि संयुक्त राष्ट्र के अधिकांश सदस्य देश भी परमाणु हथियारों से मुक्त धरती के पैरोकार हैं। हम भी परमाणु हथियार विहीन धरती के उद्देश्य का समर्थन करते हैं, जबकि हम एक परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र हैं। हम इसलिए इसमें मुखर हैं, क्योंकि परमाणु शक्ति होने के बावजूद एक जिम्मेदार राष्ट्र का अपना दायित्व बखूबी समझते हैं।
(ये लेखक के अपने विचार हैं) भारत डोगरा, सामाजिक कार्यकर्ता
सम्पादकीय लेख / शौर्यपथ /करोड़ों भारतीयों की आस्था के प्रतीक मर्यादा पुरुषोत्तम राम के जन्मस्थल पर भव्य मंदिर का सपना सदियों पुराना था, और अब जब वह साकार रूप लेने लगा है, तो स्वाभाविक ही तमाम आस्थावान लोगों के लिए यह खुशी का एक अवसर है। अयोध्या में मंदिर-निर्माण का शुभारंभ करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल एक सूत्र वाक्य दोहराया कि ‘राम सबके हैं और सब राम के हैं।’ इस वाक्य के गहरे निहितार्थ हैं। यह एक समरस समाज का आधार वाक्य है। निर्माण की प्रस्तावना है। यह प्रस्तावना धर्म के दायरे से आगे जाकर राष्ट्र-निर्माण से जुड़ती है। जाहिर है, राष्ट्र का निर्माण कभी थमता नहीं, वह हर पल आकार लेता रहता है। अपने नागरिकों में, अपनी संस्थाओं के जरिए। और किसी भी समाज में संस्थाओं का निर्माण होता है, उनमें जनता के अटूट विश्वास से। इसलिए मंदिर-निर्माण का यह अवसर याद दिला रहा है कि हमें अपनी राष्ट्रीय संस्थाओं की मर्यादा को भी कमतर नहीं करना चाहिए।
एक ऐसे दौर में, जब हम कुदरती व मानवीय विध्वंसों से लोहा ले रहे हैं, निर्माण का महत्व कहीं अधिक शिद्दत से महसूस होना चाहिए। हमें कितना कुछ गढ़ना अभी शेष है, यह महामारी हमें बता रही है और देश की सरहदें भी इसके संकेत कर रही हैं। गौर कीजिए, देश में कोविड-19 से मरने वालों की तादाद 40 हजार तक पहुंच गई है और उनमें से कई सारे लोगों की जान हम इसलिए नहीं बचा सके, क्योंकि हमारे पास उनके इलाज की माकूल व्यवस्था नहीं थी। लाखों भारतीय हर साल बाढ़ की चपेट में आकर महीनों खानाबदोश जिंदगी जीते हैं। ऐसे में, एक सशक्त भारत रचने के लिए न सिर्फ हमें अभी बहुत सारे अस्पतालों व स्कूलों की दरकार है, बल्कि अनगिनत पुलों, पनाहगाहों, ताल-तलैयों और सीमाओं पर सड़कों-बंकरों के जाल की भी आवश्यकता है। जाहिर है, इनके लिए बहुत सारे संसाधनों की जरूरत है। और यह कोई बाहर वाला हमें नहीं देगा। इस देश के नागरिकों को अपने कर्म से अर्जित करने पड़ेंगे। राष्ट्र-निर्माण के लिए उनमें भाईचारे की कमी नहीं पड़नी चाहिए।
अयोध्या में कारसेवकों की कमी न पहले थी और न भविष्य में पडे़गी। कभी किसी धर्म के आयोजन में लोग अपनी श्रद्धा से न धन की कमी पड़ने देते हैं और न श्रम-बल की। आज भारत-निर्माण को भी उसी भाव की जरूरत है। खासकर कोरोना काल में देश को अपने नागरिकों की श्रद्धा युक्त समझदारी की बहुत जरूरत है। धीरोदात्त राम ने अपने जीवन में धीरज के साथ विकट संकटों का सामना किया, तभी वह जीत का पथ निर्माण कर सके थे। अयोध्या में प्रधानमंत्री का संयम के साथ कोरोना के मुकाबले का आह्वान राम के इसी रूप से प्रेरित था। धैर्य के साथ सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन करके ही हम इस महामारी से अपने देश को मुक्ति दिला सकते हैं। एक लंबे विवाद और ध्वंस के पटाक्षेप के बाद अयोध्या की फिजाओं ने खुशियों की खुनक महसूस की है। और इस दिन की पटकथा लिखने में पूरे भारत के नागरिक समाज ने अपने धैर्य, उत्साह, संतोष और समझदारी की रोशनाई मिलाई है। भारत-निर्माण के लिए इसी भाव को स्थाई रूप देने की जरूरत है। बहुलतावादी भारत में बन रहा भव्य राम मंदिर हमारे सामाजिक-सामुदायिक भाईचारे और शांति का संदेश पूरी दुनिया को दे सके, यह पूरा देश चाहेगा। आखिरकार राम सबके हैं और सब राम के हैं।
ओपिनियन / शौर्यपथ / खुशी, खूबसूरती और खैर-खैरियत के साथ श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर के निर्माण का शुभारंभ हो गया है। यह सिर्फ मेरे भारत के लोगों के संस्कार, संस्कृति और संकल्प की शक्ति का ही करिश्मा है। मुझे याद है, सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से पहले मेरे सरकारी निवास पर 5 नवंबर, 2019 को धार्मिक और सामाजिक क्षेत्रों में सक्रिय 100 से ज्यादा प्रबुद्ध लोगों की बैठक हुई थी। गौर करने की बात है कि उस बैठक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी भी मौजूद थे। बैठक में सभी ने एकमत से यह तय किया था कि सुप्रीम कोर्ट का अयोध्या मुद्दे पर जो भी फैसला आएगा, उसका दोनों पक्ष पूरा सम्मान भी करेंगे और स्वीकार भी करेंगे। जब फैसला आया, तब सभी पक्षों ने वैसा ही किया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले को किसी ने भी अपनी जीत या हार के रूप में नहीं लिया और सभी ने शांति-सद्भाव के साथ फैसले को स्वीकार किया।
अब श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर के निर्माण का शुभारंभ हो गया है, उधर सुन्नी वक्फ बोर्ड को भी मस्जिद निर्माण के लिए पांच एकड़ जमीन भी दे दी गई है। बोर्ड ने निर्माण के लिए समिति का भी गठन कर दिया है।
अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर का भूमि पूजन सद्भाव और समरसता के साथ संपन्न होना ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की ताकत और ‘अनेकता में एकता’ की शक्ति के साथ पूरी दुनिया में हिन्दुस्तान की धाक मजबूत करता है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम किसी सीमित दायरे में नहीं बांधे जा सकते। वह न केवल हिन्दुस्तान, बल्कि पूरी मानवता के लिए आदर्श हैं।
कवि अल्लामा इकबाल ने अपनी मृत्यु (1938) से पूर्व मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के लिए जो कहा था, वह एक बार फिर हमें गर्व का एहसास कराता है।
लबरेज है शराब-ए-हकीकत से जाम-ए-हिंद।
सब फलसफी हैं खित्ता-ए-मगरिब के राम-ए-हिंद।।
यह हिंदियों के फिक्र-ए-फलक रस का है असर।
रिफअत में आसमां से भी ऊंचा है बाम-ए-हिंद।।
इस देस में हुए हैं हजारों मलक सरिश्त।
मशहूर जिनके दम से है दुनिया में नाम-ए-हिंद।।
है राम के वुजूद पे हिन्दोस्तां को नाज।
अहले-नजर समझते हैं उनको इमाम-ए-हिन्द।।
दशकों से जिस मुद्दे ने भारत के लोगों को बेचैन कर रखा था, जिसके समाधान के लिए महंत रामदास जी परमहंस और हाशिम अंसारी एक ही रिक्शे से मुकदमे की पैरवी के लिए अदालत जाया करते थे। हाशिम अंसारी के मन में भी भगवान राम के प्रति भरपूर श्रद्धा थी, तभी तो इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के बाद उन्होंने कहा था, ‘अब यह विवाद यहीं खत्म होना चाहिए, श्रीराम जन्मभूमि पर राम मंदिर का निर्माण हो, अयोध्या का विकास हो, अब यही मेरी तमन्ना है’। तब से अब तक सरयू में खूब पानी बह चुका है, अब न महंत रामदास जी परमहंस इस दुनिया में हैं, और न हाशिम अंसारी। खुशी की बात यह है कि हाशिम अंसारी के बेटे कल के भव्य ऐतिहासिक आयोजन के साक्षी बने हैं। भारत का इतिहास इस बात का गवाह रहेगा कि कितना लंबा खिंचा है अयोध्या का यह मामला। आज सम्मान, सहमति और सद्भाव के सुंदर माहौल में यह विवाद खत्म ही नहीं हुआ, बल्कि श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर का सपना भी साकार होने जा रहा है।
सबसे खूबसूरत बात यह है कि देश के न किसी मोहल्ले में तनाव है, न किसी शहर में अशांति, और न किसी गांव में हंगामा, सभी ने इस ऐतिहासिक अवसर का स्वागत किया है। सब इस गौरवपूर्ण क्षण के गवाह बनकर आनंदित हैं। यही नहीं, आज के कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों ने भगवान श्रीराम को संपूर्ण मानवता, इंसानियत और इंसाफ का प्रतीक बताया है।
हमारे देश के मुस्लिम समाज को किसी विदेशी आक्रमणकारी की करतूतों-गुनाहों का गुनहगार नहीं समझा जा सकता। इस ऐतिहासिक क्षण का उसने भी सकारात्मक सोच के साथ स्वागत किया है। एक मुल्क के तौर पर हमारी प्राथमिकताएं सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक प्रगति है। यह बदलते हुए भारत की नई पीढ़ी समझ चुकी है, इसलिए नरेंद्र मोदी सरकार के आने के बाद समाज का हर हिस्सा प्रगति में बराबर का हिस्सेदार और भागीदार बन रहा है। उदाहरण के लिए, अभी-अभी प्रशासनिक सेवाओं के परिणाम आए हैं, जिसमें अल्पसंख्यक समाज के 187 नौजवान चुने गए हैं। इन नौजवानों में बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के होनहार भी शामिल हैं। मोदी सरकार के ‘बिना भेदभाव सबके सशक्तीकरण, काबिलियत की कद्र’ का नतीजा है कि आज समाज के सभी वर्ग तरक्की की दिशा में हमसफर बन रहे हैं। इसी तरह, साल 2017-2018 के भी प्रशासनिक सेवाओं के परिणाम काफी उत्साहवद्र्धक रहे हैं। आजादी के बाद सबसे ज्यादा अल्पसंख्यक समाज के लोग प्रशासनिक सेवाओं में अब चुने जा रहे हैं। जो लोग आज तक मुस्लिम समाज को भावनात्मक मुद्दों में उलझाकर वास्तविक सवालों से भरमाने का चक्रव्यूह रचते रहे, उनको भी अब यह अच्छी तरह समझ में आ रहा है कि मोदी सरकार का ‘विकास का मसौदा’, ‘वोट के सौदे’ से कोसों दूर है।
हमने सदियों पुराने सद्भाव के जिस रास्ते को चुना है, वही ‘नए भारत, मजबूत भारत, समावेशी भारत’ की नई इबारत लिखेगा। भारत की संस्कृति समावेशी सोच से भरपूर रही है। हिन्दुस्तान अकेला देश है, जहां दुनिया के सभी धर्मों के मानने वाले रहते हैं, जहां समाज के सभी वर्गों के धार्मिक, सामाजिक अधिकार सुरक्षित हैं। भारत अकेला देश है, जहां मंदिरों के घंटे, मस्जिदों की अजान, गुरुद्वारों की गुरुवाणी, चर्च की प्रार्थनाओं की गूंज हमेशा बनी रहती है। विभिन्न धर्मों की मिली-जुली यह गूंज दुनिया को हिन्दुस्तान के समावेशी समाज का खूब एहसास कराती है।
बुधवार को भव्य राम मंदिर के निर्माण के शुभारंभ का संदेश पूरी दुनिया के लिए स्पष्ट है कि भारत में किसी ने इसे अपनी विजय नहीं कहा। सभी ने मानवता और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई। सभी ने सद्भाव से भरपूर समावेशी समाज के संकल्प को दोहराया। यह हमारे लिए सबक भी है और संदेश भी। हमें इसी सबक या संदेश को आने वाले दिनों में भी सार्थक करते चलना है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं) मुख्तार अब्बास नकवी, केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री
// शहीद महेन्द्र कर्मा के नाम पर तेंदूपत्ता संग्राहक , सामाजिक सुरक्षा योजना का शुभारंभ
// प्रदेश के 12.50 लाख तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों को मिलेगा लाभ
// गोधन न्याय योजना के तहत गोबर विक्रेताओं को मिला पहला भुगतान, मुख्यमंत्री श्री बघेल ने अंतरित किए 1.65 करोड़ रूपए
// 46 हजार 964 गोबर विक्रेताओं को मिला लाभ
// शहीद महेन्द्र कर्मा को उनकी जयंती पर दी गई श्रद्धांजलि
// मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से गोबर विक्रेताओं से की चर्चा
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि गोधन न्याय योजना देश-दुनिया की एक अनूठी योजना है। इस योजना पर सभी लोगों की निगाह है। उन्होंने कहा कि येाजना के शुरूआत के एक पखवाड़े के भीतर इसके उत्साह जनक परिणाम देखने और सुनने को मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजना ग्रामीणों, किसानों और पशुपालकों के जीवन में बदलाव लाने वाली तथा लोगों को बारहों महीने रोजगार देने वाली योजना है। मुख्यमंत्री बघेल आज अपने निवास कार्यालय में आयोजित गरिमामय कार्यक्रम में राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘गोधन न्याय योजना’ के तहत गोबर खरीदी के पहले भुगतान का शुभारंभ करते हुए उक्त बातें कही। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर 46 हजार 964 गोबर विक्रेताओं के खाते में एक करोड़ 65 लाख रूपए की राशि आनलाइन अंतरित की।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कार्यक्रम की शुरूआत में शहीद महेन्द्र कर्मा की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके नाम पर प्रदेश में ‘तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना‘ का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने पूर्व मंत्री और लोकप्रिय नेता शहीद श्री महेंद्र कर्मा की जयंती पर उनके तैलचित्र पर माल्यार्पण उन्हेें विनम्र श्रद्धंाजलि दी। इस अवसर पर मंत्रिमंडल के सभी सदस्यगणों ने भी शहीद श्री कर्मा को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा है कि श्री महेन्द्र कर्मा बस्तर टाइगर के नाम से जाने जाते थे, वे आदिवासियांे के हक की हर लड़ाई में दमदारी से खड़े रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गोधन न्याय योजना देश-दुनिया में अपने तरह की पहली अनूठी योजना है, जिसमें पशुपालकों, किसानों से 2 रूपए प्रति किलो की दर पर गौठानों में खरीदी की जा रही है। इस योजना के माध्यम से एक ओर जहां पशुपालकों को आर्थिक लाभ होगा, दूसरी ओर प्रदेश में जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा। इस योजना से लोगों को कई फायदे मिलेंगे। इससे गांवों में बारह महीने लोगों को रोजगार सुलभ होगा। गोबर विक्रय करने से ग्रामीणों, किसानों और पशुपालकों को नियमित आमदनी होगी। इसके अलावा गौठानों में गोबर से वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन होगा। खुले में चराई पर रोक लगेगी और किसान एक से अधिक फसलों का उत्पादन कर सकेंगे। इससे पशुओं के संरक्षण तथा संवर्धन को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि राज्य के हर गौठानों में रोजगार ठौर स्थापित किए जाएंगे। गौठानों में इसके लिए एक-एक एकड़ जमीन को आय मूलक व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन के लिए सुरक्षित रखा जाएगा। इनमें समूहों के सदस्य गोबर से वर्मी कम्पोस्ट के अलावा गौमूत्र से फिनाईल तथा औषधि का निर्माण, साबुन, अगरबत्ती का निर्माण, धान कुट्टी मशीन के माध्यम से चावल निकालने और सिलाई मशीन के माध्यम से सिलाई-बुनाई आदि जैसी विभिन्न गतिविधियों का प्रशिक्षण एवं संचालन सुगमता से कर सकेंगे और इससे उन्हें गांव में ही रोजगार और जीवन यापन का जरिया मिलेगा।
इससे पूर्व मुख्यमंत्री बघेल ने जशपुर, जांजगीर-चांपा, सुकमा, बलौदाबाजार जिले कीे विभिन्न गौठान समितियों, स्व-सहायता समूह की महिलाओं, पशुपालक एवं गोबर विक्रेताओं से गोधन न्याय योजना के संबंध में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने गोबर विक्रय करने वाले लोगों से भुगतान की राशि प्राप्त होेने, महिला स्व-सहायता समूहों से उनके द्वारा संचालित गतिविधियों विशेषकर वर्मी कम्पोस्ट खाद के निर्माण एवं विक्रय की स्थिति, गौठानों में आने वाले पशुओं की संख्या एवं उनके चारे-पानी के प्रबंध के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने गौठान समितियों से गौठानों में वर्मी कम्पोस्ट टांका पर्याप्त संख्या में तैयार करने तथा स्थानीय स्तर पर ग्रामोद्योग से जुड़ी गतिविधियों का संचालन गौठानों में सुनिश्चित करने की बात कही। मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा 31 प्रकार के लघु वनोपज की खरीदी समर्थन मूल्य पर की जा रही है। लघु वनोपज के वेल्यू एडिशन के कार्य गौठानों में करके अतिरिक्त लाभ अर्जित किए जाने की दिशा में हम सब को मिलकर काम करना है। उन्होंने कहा कि गोधन न्याय योजना के माध्यम से समाज के सभी वर्ग के लोगों को न्याय योजना का लाभ मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने राज्य में इस योजना की लोकप्रियता और इसकी सफलता को देखते हुए अपने मंत्रिमंडलीय सहयोगियों के साथ ही मुख्य सचिव एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को बधाई और शुभकामनाएं दी।
कार्यक्रम के शुभारंभ में कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने गोधन न्याय योजना की अब तक की गतिविधियों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की परिकल्पना आज मूर्तरूप ले चुकी है। यह योजना ग्राम पंचायतों के बाद गांव तक विस्तारित होगी। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने गोबर खरीदी के एवज में गोबर विक्रेताओं को 15 दिन के भीतर उनके बैंक खाते में राशि के भुगतान का जो वादा किया था, वह आज पूरा हो रहा है। इस योजना के तहत हर 15वें दिन गोबर विक्रेताओं को भुगतान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गोधन न्याय योजना के तहत 20 जुलाई से 1 अगस्त तक राज्य में कुल 4140 गौठानों में पंजीकृत 65 हजार 694 हितग्राहियों में से 46 हजार 964 हितग्राही द्वारा 82 हजार 711 क्विंटल गोबर का विक्रय किया गया, जिसकी कुल राशि 2 रूपए प्रति किलो की दर से 1 करोड़ 65 लाख रूपए पशुपालकों के बैंक खातों में जमा की गई है। इस योजना से 38 प्रतिशत महिला हितग्राही, 48 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग, 39 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति, 8 प्रतिशत अनुसूचित जाति एवं 5 प्रतिशत सामान्य वर्ग के हितग्राही लाभान्वित हुए हैं। गोबर खरीदी का आगामी भुगतान 20 अगस्त को किया जाएगा। कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. एम. गीता ने प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस योजना के अंतर्गत राज्य के रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, धमतरी और बालोद जिलों में सबसे अधिक गोबर विक्रय किया गया है। इसी प्रकार नगरीय क्षेत्रों में रायपुर एवं दुर्ग के पशुपालकों ने सबसे ज्यादा गोबर विक्रय किया गया है।
प्रदेश में शुरू हुई शहीद महेन्द्र कर्मा तेन्दूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना
प्रदेश में आज से शुरू हुई शहीद महेन्द्र कर्मा तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना में तेंदूपत्ता संगहण कार्य में लगे पंजीकृत संग्राहक परिवार के मुखिया (50 वर्ष से अधिक आयु न हो) की सामान्य मृत्यु पर नामांकित व्यक्ति अथवा उत्तराधिकारी को 2 लाख रूपए की अनुदान सहायता राशि प्रदान की जाएगी। दुर्घटना से मृत्यु होने पर दो लाख रूपए अतिरिक्त प्रदान किया जाएगा। दुर्घटना में पूर्ण विकलांगता की स्थिति में 2 लाख रूपए और आंशिक विकलांगता की स्थिति में एक लाख रूपए की सहायता अनुदान राशि दी जाएगी।
वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशा के अनुरूप तेन्दूपत्ता संग्राहकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए विशुद्ध रूप से वन विभाग द्वारा संचालित होने वाली शहीद महेन्द्र कर्मा तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि तेन्दूपत्ता संग्राहकों को बीमित किए जाने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा संचालित बीमा योजना के बंद होने के कारण प्रदेश सरकार द्वारा यह सामाजिक सुरक्षा योजना तेन्दूपत्ता संग्राहकों के लिए शुरू की जा रही है। उन्होंने कहा कि वन विभाग द्वारा संचालित इस योजना के तहत बीमा दावा के प्रकरणों का तत्परता से निराकरण एवं पीड़ित परिवार को एक माह के भीतर दावा राशि का भुगतान हो सकेगा। उन्होंने कहा कि संग्राहक परिवार के मुखिया की 50 से 59 आयु वर्ष के बीच सामान्य मृत्यु होती है, तो 30 हजार रूपए, दुर्घटना में मृत्यु होने पर 75 हजार रूपए, दुर्घटना में पूर्ण विकलांगता की स्थिति पर 75 हजार रूपए और आंशिक विकलांगता की स्थिति में 37 हजार 500 रूपए की सहायता अनुदान राशि परिवार के नामांकित व्यक्ति अथवा उत्तराधिकारी को दी जाएगी।
इस अवसर पर मंत्री सर्वश्री रविन्द्र चौबे, मोहम्मद अकबर, ताम्रध्वज साहू, टी. एस. सिंहदेव, डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, डॉ. शिव कुमार डहरिया, कवासी लखमा, गुरू रूद्र कुमार, अमरजीत भगत, श्रीमती अनिला भेंड़िया, संसदीय सचिव श्री शिशुपाल सोरी एवं चंद्रदेव राय, मुख्यमंत्री के सलाहकार श्री प्रदीप शर्मा, श्री रूचिर गर्ग, श्री विनोद वर्मा, मुख्य सचिव आर. पी. मण्डल, अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू एवं अमिताभ जैन, कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. एम. गीता, वन विभाग के प्रमुख सचिव मनोज पिंगुआ सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
