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लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / घरों में कैद रहने और लॉकडाउन में सीमित हुई जीवन की स्वतंत्रता ने अच्छी बौद्धिक क्षमता (आईक्यू) के बच्चों को भी बिगड़ैल बना दिया है। समय से काउंसिलिंग और माता-पिता ने ध्यान न दिया तो आने वाले समय में इनकी परेशानियां बढ़ सकती हैं।
मनोवैज्ञानिकों की संस्था साइकोलॉजिकल टेस्टिंग एंड काउंसिलिंग सेंटर (पीटीसीसी) ने लॉकडाउन से अब तक आए ऐसे 200 मेधावियों के व्यवहार में हुए परिवर्तन का अध्ययन किया है जिनका आईक्यू 120 या इसके ऊपर था। इनमें केवल 10 फीसदी खुद अपनी समस्या लेकर आए थे जबकि 90 प्रतिशत मामलों में माता-पिता साथ लाए।
तेजी से बढ़ रही विनाशकारी सोच-
संस्था के निदेशक और सेवानिवृत्त मंडलीय मनोवैज्ञानिक डॉ. एल.के. सिंह के मुताबिक, उच्च बौद्धिक क्षमता वाले 60 फीसदी बच्चों की सोच डेस्ट्रक्टिव (हानिकारक, विनाशकारी) पाई गई। ये अपने माता-पिता का कहना ही नहीं मान रहे हैं। छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा और मारपीट पर उतारू हो जाते हैं। दोपहर 12 बजे या बाद तक सोते रहते हैं। इनके पास से मोबाइल कोई नहीं हटा सकता। इसके बाद केवल नेट सर्फिंग करते हैं। गलत चीजें सीखते हैं।
इस तरह संभव है सुधार-
माता-पिता को चाहिए कि वह बच्चों के बीच ज्यादा से ज्यादा समय बिताएं। इनकी मनोरंजन में हिस्सेदारी बढ़ाएं। वीडियो गेम्स की जगह सीरियल देखने को कहें। इनका उत्साहवर्धन करते रहें। कोरोना से डराएं नहीं, बल्कि कहें कि जल्द खत्म हो जाएगा। दोस्तों के पास जाने की छूट दें। दोस्तों को आने से न रोकें। इन पर निगाह रखें। खुद रिश्तेदारों या परिचितों के यहां साथ लेकर जाएं। मौका मिलने पर मोबाइल की हिस्ट्री में झांकते रहें। यदि बच्चा अकेलेपन में जीना जा रहा है तो यह एक संकेत है। इसे भांपते ही मनोवैज्ञानिकों के पास ले जाएं और उसकी काउंसिलिंग कराएं।
फैक्टस-
- 200 बच्चों पर मनोवैज्ञानिक अध्ययन, आईक्यू लेवल 120 पार मिला।
-20 फीसदी बच्चों में मानसिक तनाव ज्यादा पाया गया।
-10 फीसदी ने इस दौरान अपने को और बेहतर बनाया।
-10 फीसदी में सुधार की उम्मीद कम, अपने मन की ही करेंगे।
धर्म संसार / शौर्यपथ /पेड़-पौधों में देवताओं का वास माना गया है। घर में पौधे रोपने से कई तरह के संकटों से मुक्ति मिलती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में लगाए गए पौधे भी हमारे जीवन पर प्रभाव डालते हैं। आइए जानते हैं कि किन पौधों को घर में लगाने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है।
घर की छत पर गमले में तुलसी का पौधा लगाने से वास्तु दोष दूर हो जाते हैं। माना जाता है कि जिस स्थान पर तुलसी का पौधा होता है वहां भगवान विष्णु का वास होता है। घर में मनी प्लांट लगाना शुभ होता है। इसे रोपने से दांपत्य जीवन में मधुरता आती है। रसोई घर के अंदर गमलों में पुदीना, धनिया, पालक और हरी मिर्च के पौधे लगाए जा सकते हैं। हल्दी का पौधा लगाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है। चंपा, चमेली, रात की रानी आदि को घर के बाहर लगाएं। घर में नकली पौधे नहीं लगाने चाहिए। घर की किसी दीवार पर पीपल उग आए तो उसे पूजा कर हटाते हुए गमले में लगा देना चाहिए। पीपल के पौधे की जड़ काटने की गलती न करें। पौधे की पूजा करने के बाद इसे गमले में लगाकर किसी मंदिर में रख आएं। घर में कांटेदार पौधा नहीं लगाना चाहिए। गुलाब जैसे पौधे लगाए जा सकते हैं लेकिन इसे छत पर रखें। केले का पौधा घर में लगाने से कई समस्याएं दूर होती हैं। घर के मुख्य द्वार पर केले के पौधे को न लगाएं। घर के पिछले हिस्से में लगाएं। केले के पौधे के आसपास साफ-सफाई रखें। केले के तने में लाल धागा बांधकर रखें। ऐसे पौधे जिनको काटने या छीलने पर सफेद द्रव्य निकलते हैं उनसे नकारात्मक ऊर्जा पैदा होती है। इस प्रकार के पौधे घर में नहीं लगाने चाहिए।
धर्म संसार /शौर्यपथ / शास्त्रों में बताया गया है कि भक्ति-पूजा के लिए कोई समय निर्धारित नहीं है। यानी ईश्वर का स्मरण या उनकी पूजा अराधना जब चाहे की जा सकती है। हालांकि ऐसी मान्यता है कि भगवान की पूजा के लिए समय का ख्याल करना बेहद जरूरी होता है। खास तौर पर जब हम रात में भगवान की पूजा करते हैं, तो कुछ बातों का विशेष ख्याल रखना चाहिए। रात में पूजा के दौरान इन बातों का ध्यान रखने से पूजा फलदायी होती है। जानिए रात में की गई पूजा में किन बातों का रखना चाहिए ध्यान।
शंख बजाना सही या गलत
ऐसी मान्यता है कि रात में पूजा के समय शंख नहीं बजाना चाहिए। माना जाता है कि सूरज अस्त होने के बाद देवी-देवता सोने के लिए चले जाते हैं। ऐसे में सूर्यास्त के बाद शंख बजाने से निद्रा में बाधा आती है। इसलिए रात में पूजा के दौरान शंख बजाना अशुभ माना गया है। हालांकि दीवाली और जन्माष्टमी जैसी कुछ अवसरों पर शंख बजाना अशुभ नहीं माना गया है।
न करें सूर्य भगवान की पूजा
सूर्य भगवान को दिन का देवता माना जाता है। इसलिए रात्रि की पूजा में भगवान सूर्य की पूजा करना वर्जित माना गया है।
तुलसी का प्रयोग
ऐसी मान्यता है कि तुलसी के पत्ते के बिना पूजा अधूरी होती है। लेकिन रात में कभी भी तुलसी का पत्ता नहीं तोड़ना चाहिए। माना जाता है कि तुलसी माता नाराज हो जाती हैं। इसलिए सूर्यास्त से पहले ही तुलसी का पत्ता तोड़कर रख लेना चाहिए।
दूर्वा का इस्तेमाल
हिंदू पुराणों के मुताबिक, रात में वनस्पतियों को तोड़ना अशुभ होता है। लेकिन गणेश जी को दूर्वा प्रिय है। ऐसे में सूर्यास्त से पहले दूर्वा को तोड़कर रख लेना चाहिए।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / जीवन में सफलता हासिल करने के लिए व्यक्ति के भीतर मेहनत और लगन के साथ आत्मविश्वास का गुण भी मौजूद होना बेहद जरूरी होता है। आत्मविश्वास के बिना व्यक्ति का जीवन ऐसे फूल की तरह होता है जिसमें खुशबू नहीं होती है। दुनियाभर में मौजूद सभी सफल व्यक्तियों में आत्मविश्वास का यह गुण देखा जा सकता है। आइए जानते हैं सफलता पाने और आत्मविश्वास बढ़ाने के क्या हैं वो 5 सक्सेस मंत्र।
नकारात्मक विचारों से रहें दूर-
नकारात्मक विचार व्यक्ति को हमेशा आगे बढ़ने से रोकते हैं। जीवन में आगे बढ़ने के लिए हमेशा खुद पर विश्वास रखते हुए चुनौती भरे कामों को भी करने के लिए आगे बढ़ें। ऐसे लोग और विचार जो मन में किसी भी तरह की नेगेटिविटी को जन्म देते हैं उनसे दूर रहें।
अपने हुनर को पहचानें-
खुद पर विश्वास और अपने हुनर को पहचानते हुए जीवन में मिलने वाली हर चुनौती को स्वीकार करते हुए अपने लक्ष्य की तरफ आगे बढ़ते जाएं।
कंफर्ट जोन से निकलें बाहर-
अक्सर जब व्यक्ति को कोई नया काम सौंप दिया जाता है तो वो थोड़ा घबरा जाता है। लेकिन आप चुनौतियां स्वीकार करना सीखें और जीवन में आगे बढ़ें। जैसे ही आप कुछ नया करना शुरू करेंगे आपके अंदर आत्मविश्वास दिखने लगेगा।
फैसले लेने में ज्यादा देर न करें-
आज के समय में जब जिंदगी बेहद व्यस्त हो गई है तो लोगों को अच्छे अवसरों के लिए सोचने समझने के लिए मौके और समय बेहद कम मिलता है। इसलिए सफलता पाने के लिए जल्द से जल्द सही फैसले लेने की क्षमता को खुद के भीतर विकसित करें। जब आप गंभीर फैसले लेने लगेंगे तो वहीं से आप में आत्मविश्वास आना भी शुरू हो जाएगा।
आत्मविश्वासी लोगों को बनाएं अपना साथी-
अगर आपने ऐसे लोगों को अपना दोस्त बनाया हुआ है जिनमें आत्मविश्वासी नहीं हैं तो आप जीवन में कभी भी सफल नहीं हो सकते हैं। सफलता पाने के लिए ऐसे लोगों से मिलना शुरू करें जो आपको अपने कामों से प्रभावित करने वाले हों।
शौर्यपथ / सपने तो हर कोई देखता है। चाहे वह खुली आंखों से हो या फिर नींद में। कभी-कभी कोई सपना सुहाना होता है, जो अपनी अच्छी याद छोड़ जाता है। वहीं कुछ सपने ऐसे होते हैं जो कुछ बुरी यादें छोड़ जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर सपने का कोई न कोई अर्थ जरूर होता है। कुछ सपने ऐसे होते हैं, जिन्हें स्वप्नशास्त्र में शुभ माना गया है। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ सपनों के बारे में और उनका अर्थ-
1. कमल का फूल, हाथी, बंदर, गाय और हंस का स्वप्न शुभ माना गया है। कहते हैं कि इस तरह के सपने धन संपत्ति या संतान का सुख के सूचक हैं।
2. अगर किसी व्यक्ति की मौत का सपना दिखाई दे, तो समझना चाहिए कि उस शख्स पर आया हुआ कोई संकट टल गया है। इस तरह का स्वप्न आयु वृद्धि का सूचक भी माना गया है।
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3. सपने में खुद को घोड़े पर चढ़ते हुए देखना शुभ माना गया है। कहते हैं कि इस तरह के स्वप्न व्यापार या नौकरी में लाभ होने का संकेत मिलता है।
4. स्वप्न में खुद का चेहरा शीशे में देखना शुभ माना गया है। माना जाता है कि आपकी लव लाइफ में प्यार और मिठास और बढ़ती है। अगर इस तरह का सपना कोई लड़की देखती है, तो समझना चाहिए कि उसे जल्द ही जीवनसाथी मिलने वाला है।
5. सपने में काले बादल के साथ बारिश दिखाई देना शुभ माना गया है। माना जाता है कि आपने जिन चीजों में निवेश किया है, उसमें लाभ होने वाला है।
6. सपने में खान-पान का देखना भी शुभ माना गया है। कहते हैं कि इस तरह से स्वप्न समृद्धि और धन का संकेत देते हैं। इसके साथ ही यह स्थान परिवर्तन का भी सूचक है।
नजरिया /शौर्यपथ / ट्वंटी-20 विश्व कप के स्थगित होते ही आईपीएल के 13वें सत्र के आयोजन की तैयारियों में तेजी आ गई है। आईपीएल के चेयरमैन बृजेश पटेल ने इसे 19 सितंबर से 8 नवंबर तक संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में आयोजित करने की घोषणा कर दी है। हालांकि, इस आयोजन के लिए सरकार की अनुमति का इंतजार है, पर जिस तरह से तैयारियां चल रही हैं, उनसे लगता है कि बीसीसीआई को अनुमति मिल जाने का पूरा भरोसा है। यह सही है कि यूएई में 2014 में आईपीएल के कुछ मैचों का आयोजन हो चुका है, पर इस बार कोविड-19 के कारण यह आसान नहीं होगा। हां, इतना जरूर है कि इस बार का आयोजन आईपीएल के पिछले संस्करणों से भिन्न होगा। बीसीसीआई को मैच से ज्यादा इंतजाम स्टेडियम के बाहर करने होंगे। फें्रचाइजियों को भी इस बार ज्यादा खिलाड़ी साथ रखने होंगे, क्योंकि किसी खिलाड़ी के कोरोना पॉजिटिव आ जाने पर उसे आइसोलेशन में भेजना जरूरी हो जाएगा। फिर बार-बार टेस्ट होने से खिलाड़ियों के ऊपर भी मानसिक दबाव बना रहेगा। मगर इतना जरूर है कि इंग्लैंड जैसी व्यवस्था करके खिलाड़ियों को दबाव मुक्त किया जा सकता है, पर इसके लिए प्रॉटोकोल को सख्ती से लागू करना पड़ेगा।
आईपीएल क्रिकेट और मनोरंजन का मिला-जुला रूप है। इसे देखने के लिए पहुंचने वाले हजारों दर्शकों में तमाम ऐसे होते हैं, जो क्रिकेट की बजाय मैच के माहौल का लुत्फ उठाने जाते हैं। अव्वल तो यूएई में भारत जैसा माहौल मिलना संभव नहीं है, फिर यदि वहां की सरकार दर्शकों को स्टेडियम में आने की अनुमति दे देती है, तब भी सोशल डिस्टेंसिंग को अपनाने से स्टेडियम में एक चौथाई दर्शक ही आ सकेंगे। बीसीसीआई के सामने सबसे महत्वपूर्ण काम होगा, खिलाड़ियों, सपोर्ट स्टाफ, टीम प्रबंधन से जुड़े लोगों को ठहरने के लिए सुरक्षित माहौल मुहैया कराना। इस संबंध में ईसीबी ने इंग्लैंड और वेस्ट इंडीज के बीच टेस्ट सीरीज के दौरान बहुत अच्छा काम किया है, मगर ईसीबी जैसा जैव सुरक्षित माहौल यूएई में बनाना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। इसकी वजह यह है कि इंग्लैंड में सीरीज के दौरान दोनों टीमों को आयोजन स्थल पर ही ठहराया गया, जबकि आईपीएल में आठ टीमों को एक जगह ठहराना संभव नहीं है।
आईपीएल शुरू होने से पहले बीसीसीआई को एक बड़ा काम दुनिया भर से क्रिकेटरों, सपोर्ट स्टाफ, कमेंटेटरों व अन्य अधिकारियों को यूएई पहुंचाने का करना होगा। अभी ज्यादातर देशों में उड़ान की शुरुआत हुई नहीं है। बताया जा रहा है कि फ्रेंचाइजियों से निजी विमानों की व्यवस्था करने को कहा गया है। यही नहीं, इन सभी को लाने से पहले 72 घंटों में दो बार कोविड टेस्ट भी करना होगा। कोविड टेस्ट निगेटिव आने पर ही उन्हें विमान में चढ़ने की अनुमति मिलेगी। हां, इतना जरूर है कि यूएई में कोविड टेस्ट निगेटिव लेकर आने वालों को क्वारंटीन में नहीं रहना पडे़गा। हालांकि, कुछ फ्रेंचाइजी मालिक तो आयोजन से जुड़ने वालों, खासकर खिलाड़ियों के रोजाना कोविड टेस्ट का सुझाव दे रहे हैं। लिहाजा यह देखने वाली बात होगी कि बीसीसीआई इस संबंध में क्या दिशा-निर्देश जारी करता है?
आईपीएल बीसीसीआई ही नहीं, दुनिया भर के क्रिकेटरों व पूर्व क्रिकेटरों के लिए क्या मायने रखता है, यह कोई छिपी बात नहीं है। यह अच्छी-खासी कमाई का साधन है। यही वजह है कि ज्यादातर क्रिकेटर ट्वंटी-20 विश्व कप की बजाय आईपीएल के आयोजन के पक्षधर थे। निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक इसे मार्च में आयोजित होना था और चूंकि बीसीसीआई प्रायोजकों से करीब आधी रकम ले भी चुका है, इसलिए वह हर हाल में इस आयोजन के पक्ष में है। यदि यह आयोजन नहीं होता, तो उसे यह रकम लौटानी पड़ सकती थी। वैसे, फ्रेंचाइजी को मौजूदा माहौल में प्रायोजक तलाशने में दिक्कत हो सकती है, पर इंग्लैंड-वेस्ट इंडीज टेस्ट सीरीज को टीवी दर्शकों ने जिस तरह से हाथों-हाथ लिया है, उससे लगता नहीं है कि आईपीएल देखने वालों में कोई कमी आएगी।
आईपीएल का आयोजन यदि सफलतापूर्वक हुआ, तो अन्य खेलों के लीग आयोजनों की भी मांग तेज होगी। क्रिकेटर ही नहीं, आज अन्य खेलों के खिलाड़ी भी बहुत उम्मीद लगाए बैठे हैं। खेल आयोजन बढ़े, तो महामारी के समय लोगों का मनोबल और उत्साह भी बढ़ेगा।
(ये लेखक के अपने विचार हैं) मनोज चतुर्वेदी, वरिष्ठ खेल पत्रकार
सम्पादकीय लेख / शौर्यपथ / कोरोना के समय भी अंतरिक्ष विज्ञान विकास का न रुकना न केवल सुखद, बल्कि स्वागतयोग्य भी है। विशेष रूप से मंगल अभियान की दिशा में जो प्रगति हुई है, वह बहुत प्रेरित करती है। अव्वल तो 19 जुलाई को संयुक्त अरब अमीरात दुनिया का पहला मुस्लिम देश हो गया, जिसने मंगल की ओर अपना यान भेजा है, दूसरी ओर, 23 जुलाई को चीन ने भी उधर अपना यान रवाना किया है। अब एशिया में भारत सहित तीन देश हो गए, जो मंगल की खोज में आगे बढे़ हैं। 1960 के बाद से करीब 60 अभियान मंगल की ओर गए हैं, लेकिन उनमें से 26 को ही थोड़ी या ज्यादा कामयाबी मिली है। इसलिए मंगल पर किसी खोज के लिए चलाया जाने वाला कोई भी अभियान पूरी दुनिया के लिए ही बहुत महत्व रखता है।
वैसे चीन ने रूस के साथ मिलकर एक प्रयास 2011 में भी किया था, लेकिन वह यान पृथ्वी की कक्षा से बाहर नहीं निकल पाया था। इसके बाद भारत ने 2014 में अपने पहले ही प्रयास में मंगल की कक्षा में यान स्थापित कर इतिहास रच दिया। ध्यान रहे, तब चीन ने भी भारत की तारीफ की थी। फिलहाल चीन के अभियान की सफलता की प्रतीक्षा करनी चाहिए। उसने न केवल मंगल की कक्षा में घूमने वाला यान ऑर्बिटर रवाना किया है, बल्कि साथ में लैंडर और रोवर भी भेजे हैं। यूएई और चीन, दोनों के ही यान आगामी फरवरी में मंगल की कक्षा में पहुंच जाएंगे। उम्मीद करनी चाहिए कि दोनों को सफलता मिले। अभी तक दुनिया में अमेरिका, रूस, यूरोपीय यूनियन और भारत को ही मंगल अभियान में सफलता मिली है। इसमें भी सबसे खास भारत की सफलता है, पहली ही बार में कामयाब भारत का यान अभी भी मंगल की परिक्रमा कर रहा है। चीन ने इस मिशन को तियानवेन नाम दिया है, यह दो सदी पुरानी एक कविता के शीर्षक पर आधारित है, जिसका अर्थ है, जन्नत से सवाल। वाकई, जब हम अंतरिक्ष में किसी भी अभियान में जुटते हैं, तब हमारी जिज्ञासा दूसरी दुनिया या जन्नत की खोज से जुड़ जाती है। ऐसी खोज सकारात्मक होती है और हमारे दिलो-दिमाग को सपने और खुशी देती है, जिसकी जरूरत आज कोरोना काल में बहुत ज्यादा है।
अभी अमेरिका, यूरोप और भारत के करीब आठ अंतरिक्ष यान मंगल की सतह पर हैं या उसकी परिक्रमा कर रहे हैं, चीन और यूएई के यानों को अगर कामयाबी मिली, तो न केवल मुस्लिम देशों, बल्कि चीन को भी एक सकारात्मक दिशा मिलेगी। अमेरिका मंगल पर पहले भी रोवर स्थापित कर चुका है और जल्दी ही ज्यादा बड़ा रोवर भेजने वाला है। अपने अभियान के शुरू होने के बाद चीन ने जिस भावना का प्रदर्शन किया है, उसकी प्रशंसा होनी चाहिए। चीन के एक वैज्ञानिक ने कहा है, ‘यह चीनी अभियान एक वैज्ञानिक पहल है, किसी के साथ प्रतिस्पद्र्धा के लिए नहीं, बल्कि एक-दूसरे से सहयोग के लिए है’। चीन मंगल ग्रह पर पानी और बर्फ के संकेतों की खोज करेगा, उसके रोवर में 13 वैज्ञानिक उपकरण लगे हैं। चीन का यान उत्तरी गोलाद्र्ध में एक मैदान, यूटोपिया प्लैनिटिया में उतरने की कोशिश करेगा। वहां लैंडर की मदद से रोवर तैनात करेगा। मंगल पर दक्षिणी यूटोपिया प्लैनिटिया में कोई भी खोज इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि वैज्ञानिकों को लगता है, मंगल के इस हिस्से पर कभी महासागर था।
मेलबॉक्स /शौर्यपथ / कोरोना महामारी से मानव जीवन का हरेक पहलू प्रभावित हुआ है। ऐसे में, शिक्षा-व्यवस्था में परिवर्तन समय की मांग है। मौजूदा शिक्षा-सत्र पूरी तरह से कोरोना की भेंट चढ़ गया है और विकल्प के तौर पर ऑनलाइन क्लास की व्यवस्था की गई है। हालांकि, हर जगह ऑनलाइन कक्षा संभव नहीं है। बेशक कॉलेज व विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को कुछ नियमित तरीके से, और कुछ विषयों में पत्राचार से पढ़ाई कराते रहे हैं, लेकिन अभी जिस माध्यम से पढ़ाई हो रही है, वह खुला विश्वविद्यालय की तरह ही है। ऐसे में, सरकार को अब यह निर्णय लेना चाहिए कि हर विश्वविद्यालय खुले विश्वविद्यालय की तरह ऑनलाइन नामांकन ले और विद्यार्थियों को पाठ्य-सामग्रियां डाक से भेजे, ताकि वे अपने-अपने घर पर ही पढ़ाई कर सकें। परीक्षा भी खुले विश्वविद्यालय के मानकों की तरह आयोजित हो। इस तरह की व्यवस्था होने से बच्चों के सत्र बरबाद नहीं होंगे।
मिथिलेश कुमार, भागलपुर
पोल खोलती बारिश
दिल्ली में बारिश अभी पूरी तरह से शुरू भी नहीं हुई है और नाले उफनने लगे हैं। यह दयनीय स्थिति है, क्योंकि जब मूसलाधार बारिश होगी, तब हालात कैसे होंगे? दिक्कत यह है कि हर बरसात में लोगों को इस संकट से गुजरना पड़ता है, फिर भी हमारे नगर निगम सिर्फ निरीक्षण की खानापूर्ति कर शांत हो जाते हैं। नालों की सफाई रोजाना नहीं, तो कम से कम हफ्ते में एक बार तो हो ही सकती है। यदि ऐसी व्यवस्था बन जाए, तो लोगों को काफी राहत मिलेगी।
रितिक सविता, दिल्ली विश्वविद्यालय
अयोध्या का कायाकल्प
लंबे समय से लंबित श्रीराम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद का निपटारा होने के बाद हर भारतवासी की निगाहें अयोध्या की तरफ थीं कि आखिर मंदिर कब बनेगा? अब इसका रास्ता साफ हो गया है। प्रधानमंत्री मंदिर का भूमि पूजन करने वाले हैं। मंदिर बनने से सबसे ज्यादा फायदा अयोध्यावासियों को होगा, क्योंकि इससे पर्यटकों का आना बढ़ेगा, जिससे व्यापार के नए मार्ग खुलेंगे और यहां का चौतरफा विकास हो सकेगा। आखिर बरसों से उपेक्षित अयोध्या में रामराज्य पुन: स्थापित होगा और उम्मीद है कि आगामी वर्षों में अयोध्या का विकास उसे देश के बड़े दार्शनिक स्थलों में शुमार कर देगा।
शुभम पांडेय गगन
अयोध्या, फैजाबाद
चुनाव कराना बड़ी चुनौती
बिहार में जिस रफ्तार से कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ रही है, उसे देखते हुए इस राज्य में विधानसभा का चुनाव कराना खतरे को बढ़ावा देना है। इससे बिहार में संक्रमण की गति और बढ़ सकती है। सरकार को अभी लोगों की फिक्र करने की जरूरत है, न कि चुनाव की। चुनाव आयोग को करोड़ों बिहारवासियों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर ही फैसला करना चाहिए, क्योंकि जान है, तभी जहान है। यदि कोई भी कोरोना संक्रमित मतदाता वोट देने मतदान केंद्र पर पहुंच जाता है, तो वह दूसरे को भी संक्रमित करेगा। इसलिए इस साल चुनाव को स्थगित कर देना चाहिए। ‘न्यू नॉर्मल’ में नए तरीके से चुनाव आयोग को सोचना चाहिए।
मो. अजहरुद्दीन
जनता बाजार, छपरा
महिलाओं का सम्मान
काफी लंबे समय से महिलाओं के स्थाई कमीशन की मांग सेना में चल रही थी, जिसे अब जाकर पूरा किया गया है। अब महिलाएं भी सेना में अहम भूमिका निभा सकेंगी। सवाल यह है कि इस फैसले को अमल में लाने में इतना वक्त क्यों लग गया? खैर, कहते हैं न कि देर आए, दुरुस्त आए। इस एक फैसले से बहुत से क्षेत्रों में महिलाओं के प्रति हीन भावना खत्म होगी। हमें इसका स्वागत करना चाहिए।
अमन कुमार
ओपिनियन / शौर्यपथ /खबर अमेरिका से आई है। मगर चिंता पूरी दुनिया की है। कोरोना का हाल सुधरते-सुधरते अचानक बिगड़ता नजर आया। अनिश्चितता बढ़ रही है कि यह बीमारी काबू में आती दिखे, तब भी चैन से नहीं बैठा जा सकता। इसी तरह, अमेरिका में बेरोजगारी भत्ता मांगने वालों की गिनती भी पिछले हफ्ते अचानक तेजी से उछली है। जुलाई के पहले हफ्ते में करीब 3.20 करोड़ अमेरिकियों ने यह भत्ता लिया है। कोरोना की वजह से हरेक बेरोजगार के खाते में 600 डॉलर अलग से पहुंचते हैं। सरकार पर दबाव बन रहा है कि कोरोना थम नहीं रहा है और इस मदद की मीयाद भी बढ़ाई जाए। इधर, 18 जुलाई को जो हफ्ता खत्म हुआ, उसमें करीब 14 लाख नए लोगों ने बेरोजगारी भत्ते की अर्जी लगाई है। यह पिछले हफ्ते से करीब एक लाख नौ हजार ज्यादा है। ऐसी बढ़त पिछले चार महीने में पहली बार हुई है। इससे यह आशंका मजबूत हो रही है कि रोजगार के मोर्चे पर अमेरिका में हालत खराब है।
इसके उलट भारतीय रोजगार बाजार में धीरे-धीरे सुधार दिख रहा है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के अनुसार, शहरी इलाकों में रोजगार का आंकड़ा अप्रैल के 26 प्रतिशत से बढ़ते-बढ़ते जुलाई में करीब 38 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। शहरी इलाकों में लोगों के काम पर लौटने की रफ्तार तेज है और इसमें ज्यादातर वे लोग हैं, जो मध्यमवर्गीय घरों में जरूरी काम करते हैं। जैसे बाई, रसोइए, ड्राइवर या सफाईकर्मी। इस तरह के लोग ही सबसे तेजी से काम पर लौटे हैं और इसका नतीजा है कि मध्यवर्ग के लिए अब लॉकडाउन शायद उतना कष्टकारी नहीं रह गया है।
हालांकि सीएमआईई के ही एक सर्वे में पता चला है कि लोगों के बजट टाइट हो रहे हैं। खासकर अप्रैल से जून के बीच बहुत से परिवारों की कमाई पर भारी असर पड़ा है। जहां पिछले साल इस दौरान 33 प्रतिशत परिवारों ने कहा था कि उनकी कमाई बढ़ गई है, वहीं इस साल ऐसा कहने वालों की गिनती छह प्रतिशत के आसपास है। हालांकि कई और आंकड़े हैं, जिन्हें देखकर लगता है कि कामकाज वापस पटरी पर आ रहा है। दोपहिया बेचने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनियों की बिक्री में तेज उछाल दिख रहा है। जून में हीरो मोटो ने साढ़े चार लाख गाड़ियां बेचीं, मई से चार गुना ज्यादा। हालांकि, पिछले साल के जून के मुकाबले यह 26 प्रतिशत कम है। कंपनी के चेयरमैन सुनील मुंजाल के अनुसार, सबसे अच्छी मांग गांव और कस्बों से आ रही है। इसकी वजह सरकार के आर्थिक पैकेज से निकली रकम का इन इलाकों तक पहुंचना है। सामान्य मॉनसून और रबी की बंपर पैदावार के बाद उन्हें लग रहा है कि अब अगर कोई नया झटका नहीं लगा, तो साल खत्म होते-होते बिक्री में इतनी तेजी आ चुकी होगी कि दो महीने की बंदी से हुआ नुकसान भी धुल जाएगा।
रोजमर्रा की चीजें बनाने वाली कंपनियों का हाल भी अलग नहीं है। जिस दौरान पूरा देश लॉकडाउन की सबसे गंभीर मार झेल रहा था, उसी समय यानी अप्रैल से जून के बीच ब्रिटैनिया का मुनाफा पिछले साल से दोगुने से भी ज्यादा हो गया। यही हाल कुछ अन्य कंपनियों का है।
दूसरी तरफ, कोरोना के आंकड़े देखिए, जो डरावनी रफ्तार से बढ़ रहे हैं। इसके बावजूद शेयर बाजार को देखिए, तो लगता ही नहीं कि कहीं कोई मुसीबत है। भारी गिरावट के बाद सेंसेक्स और निफ्टी फिर से नई ऊंचाई की ओर रेस लगा रहे हैं। छोटी और मंझोली कंपनियों में भी तेजी दिख रही है। बाजार में इस तेजी के कई कारण बताए जा रहे हैं। एक तो नए लोगों को बताया जा रहा है कि भारी गिरावट के बाद बाजार में तेजी आती है और ऐसी गिरावट ही पैसा बनाने के लिए सबसे अच्छा समय होता है। इस चक्कर में बहुत से नए लोग शेयर बाजार में आ गए हैं। लेकिन 23 मार्च की तेज गिरावट के बाद उछाल की शुरुआत इन लोगों के भरोसे नहीं हुई थी। दरअसल, अमेरिका और यूरोप के कई देशों में सरकारों ने बहुत बड़ी रकम लोगों के हाथों में खर्च करने के लिए दी है। उस पैसे का एक बड़ा हिस्सा उन देशों के म्यूचुअल फंड के रास्ते भारत पहुंचा है। यह रकम कुछ गिनी-चुनी बड़ी कंपनियों में ही लगती है, लेकिन इससे आई तेजी से दूसरे निवेशक आकर्षित होते हैं।
एक समस्या यह है कि बैंकों में पैसा रखना करीब-करीब बेकार लगने लगा है। ऐसे में, अगर कोई शेयर बाजार का लालच दिखा दे, तो मन मचलना स्वाभाविक है। कुछ लोग हिम्मत कर रहे हैं और कूद रहे हैं। जनवरी से मई के बीच देश में करीब 29 लाख नए डीमैट अकाउंट खुले हैं और शेयर बाजार में कैश सेगमेंट में जो कारोबार हो रहा है, अप्रैल से जून के बीच उसका आधे से ज्यादा हिस्सा छोटे निवेशकों से ही आया है। पिछले साल से मुकाबला करें, तो इस दौरान रिटेल निवेशकों का कारोबार 78 प्रतिशत बढ़ा है और उन्होंने 33 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का लेन-देन किया है।
बाजार में इस तेजी से सबको मजा आ रहा है, लेकिन यह खतरनाक स्थिति है। रिजर्व बैंक के गवर्नर ने भी शुक्रवार को जारी फाइनेंशियल स्टैबिलिटी रिपोर्ट में चिंता जताई है कि बाजार और बाजार के सूचकांक जिस तरह चल रहे हैं, उनका देश की आर्थिक स्थिति या जमीनी सच्चाई से कोई रिश्ता नहीं दिखता। रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि बैंकों के डूबे कर्ज दोगुने हो सकते हैं और उस स्तर पर पहुंच जाएंगे, जहां पिछले 20 साल में कभी नहीं रहे। साफ है, जमीनी तकलीफ दूर किए बिना इस समस्या से पार नहीं पाया जा सकता। आर्थिक विशेषज्ञ शोभना सुब्रमण्यम कहती हैं कि सरकार को बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर खर्च करना होगा। इसके लिए कम से कम चार-पांच लाख करोड़ रुपये का कर्ज लेना होगा। सवाल है कि इस वक्त सरकार कर्ज लेगी, तो चुकाएगी कब और कैसे? क्या कमाई का कोई दूसरा रास्ता है? काम-धंधे बिगड़ते रहे, तो टैक्स की कमाई भी घटेगी। रास्ता एक ही है कि सरकार खर्च करे। इसके लिए पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा का सुझाव है कि सरकार को सारी हिचक और रेटिंग वगैरह की चिंता छोड़ नए नोट छापने चाहिए और उसे प्रोजेक्ट्स में भी लगाने चाहिए और जनता की जेब में भी पैसा डालना चाहिए। इससे इकोनॉमी में वह रफ्तार आ सकेगी, जो इस आपदा को अवसर में बदल पाएगी।
(ये लेखक के अपने विचार हैं) आलोक जोशी, वरिष्ठ पत्रकार
शौर्यपथ । सेहत । शिक्षा । ज्यादातर लोगों को क्या लगता है कि सेक्स के बाद सभी कपल्स फिल्मों की तरह एक दूसरे को बांहों में भर कर सो जाते हैं या फिर दोनों एक दूसरे से प्यार भरी बातें करते हैं। जबकि ऐसा नहीं है, क्योंकि फिल्मों में जैसा दिखाते हैं वैसा आपके साथ रियल में भी हो ऐसा मुमकिन नहीं है। आज हम आपको कुछ ऐसी बातें बताने जा रहे हैं, जिनको जानकर आपका ये भ्रम दूर हो जाएगा। जी हां कुछ कपल्स ने सेक्स के बाद एक दूसरे के साथ ऐसा व्यवहार किया जो हैरान करने लायक था। एक कपल ने बताया कि जब उन्होंने पहली बार सेक्स किया तो मर्द पार्टनर सेक्स के बाद बिल्कुल चुप हो गया। घर जाकर बाद में उसने मैसेज करके पूछा कि बैड पर मैं कितना सक्सेस हुआ। मर्द पार्टनर को ये लग रहा था कि कहीं अगर महिला को मजा नहीं आया तो शायद वो उससे इस बात के लिए रिश्ता भी तोड़ सकती है। एक कपल ने बताया कि जब उन्होंने सेक्स किया तो महिला पार्टनर सेक्स के तुरंत बाद बहुत जोर-जोर से रोने लगी। जब वो ज्यादा देर तक रोने लगी तो मर्द पार्टनर ने उससे पूछा कि तुम क्यों रो रही हो तो महिला पार्टनर ने बताया कि कुछ दिनों पहले तुम्हारी मां से मेरी लड़ाई हो गई थी। एक लड़के ने बताया कि एक बार उसने एक लड़की के साथ सेक्स किया तो उससे पहले हमने काफी देर बात की और एक दूसरे को अपने बारे में बताया। जब हमने सेक्स कर लिया तो लड़की ने बोला कि मेरा असली नाम कुछ और ही है। एक लड़की ने बताया कि एक बार वो अपने बॉयफ्रेंड के साथ सेक्स कर रही थी तो उसे याद आया कि थोड़ी देर बार उसकी रूप मेट आने वाली है। तो लड़की ने सेक्स के तुरंत बाद ही लड़के से कहा कि तुम यहां से निकल जाओ अभी के अभी। फिर लड़की ने बाद में फोन पर लड़के को सारी बात बताई। नोट: 18+ स्टोरी का उद्देश्य अश्लीलता परोसना नहीं, बल्कि सेक्स के प्रति जागरूकता फैलाना है, ताकि आपके जीवन में खुशहाली आए।
सेहत / शौर्यपथ / संतरा एक आम फल हो सकता है लेकिन संतरे के स्वास्थ्य लाभ आम नहीं होते हैं. संतरा का सेवन कर आप कमाल के फायदे ले सकते हैं. संतरे में काफी मात्रा में विटामिन सी की मात्रा पाई जाती है. संतरे में फैट, कोलेस्ट्रॉल और सोडियम की मात्रा न के बराबर होती है.
संतरा एक आम फल हो सकता है लेकिन संतरे के स्वास्थ्य लाभ आम नहीं होते हैं. संतरा का सेवन कर आप कमाल के फायदे ले सकते हैं. संतरे में काफी मात्रा में विटामिन सी की मात्रा पाई जाती है. संतरे में फैट, कोलेस्ट्रॉल और सोडियम की मात्रा न के बराबर होती है. संतरा आपके दिल को स्वस्थ्य रखता है, ये आपकी आंखों को भी सुरक्षित रखता है और संतरे एक खासियत जिसकी हर किसी को जरूरत है. इम्यूनिटी बढ़ाने में संतरा फायदेमंद हो सकता है. संतरा कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज जैसी परेशानियों को दूर करने में भी लाभदायक माना जाता है. संतरे के फायदे कई हैं, लेकिन ऐसा नहीं है कि यह स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक नहीं होता है.संतरे के ज्यादा सेवन से संतरे के दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं. अगर आप इम्यून सिस्टम को बूस्ट करना चाहते हैं तो आप संतरे का सेवन बेझिझक कर सकते हैं लेकिन संतरा खाने का भी एक समय होता है जिसमें इसका सेवन करने की सलाह दी जाता है. यहां हम बता रहे हैं संतरे के फायदे और नुकसान के साथ संतरा किस समय खाना नुकसानदायक हो सकता है. संतरे को खाने का क्या है सही समय...
संतरे का सेवन कर पाएं ये कमाल के फायदे 7
1. इम्यूनिटी बढ़ाने में है मददगार
संतरे में विटामिन सी की मात्रा बहुत अच्छी होती है. संतरा विटामिन सी का एक अच्छा स्रोत है. विटामिन सी एक तरह से एंटीऑक्सीडेंट का काम करता है और शरीर में डैमेज सेल्स को रिपेयर करने के साथ-साथ फ्री रेडिकल्स से लड़ता है. संतरा शरीर के इम्यून सिस्टम को मजबूती भी देता है. इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए आप संतरे का सेवन कर सकते हैं.
2. कोलेस्ट्रॉल में फायदेमंद है संतरा
संतरे में कोलेस्ट्रॉल नहीं होता है, बल्कि इसके सेवन से शरीर में मौजूद बैड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करने में मदद मिल सकती है. संतरे में मौजूद विटामिन सी आपके शरीर में फ्री रेडिकल्स को न्यूट्रिलाइज कर कोलेस्ट्रॉल को ऑक्सिडाइज करता है, जिससे पहले से जमा हुआ कोलेस्ट्रॉल धीरे-धीरे कम हो सकता है.
3. डायबिटीज में फायदेमंद
संतरा डायबिटीज में फायदेमंद माना जाता है. संतरे में फाइबर की मात्रा अच्छी होती है. फाइबर ब्लड शुगर लेवल को बढऩे से रोक सकता है. अगर संतरे को साबूत खाया जाए तो यह डायबिटीज में मदद कर सकता है अगर आप इसका जूस पिएंगे तो यह ब्लड शुगर लेवल को बढ़ा सकता है क्योंकि जूस निकालने पर इसका फाइबर कम हो सकता है.
4. दिल की बीमारियों को रखे दूर
अगर आप रोज एक संतरा खाते हैं, तो यह दिल की बीमारियों का खतरा कम कर सकता है. इसका कारण यह है कि संतरे में फ्लैवोनॉइड्स होते हैं, जो आर्टरीज के ब्लॉकेज को खोलते हैं और ब्लड सर्कुलेशन को ठीक रखने में मदद कर सकते हैं.
5. कब्ज से राहत दिलाने में फायदेमंद
संतरे में घुलनशील और अघुलनशील दोनों ही प्रकार के फाइबर होते हैं. यह आपके पेट को भी भरा रखता है और आंतों की सफाई करने में भी मददगार हो सकते हैं. संतरा खाने से आपकी कब्ज की समस्या दूर हो सकती है. संतरा पेट दर्द और फूड पॉयजनिंग को भी रोक सकता है.
6. संतरा स्किन के लिए भी असरदार
संतरा खाने से आपकी स्किन पर ग्लो आ सकता है. संतरे में बीटा कैरोटीन होता है, जो सेल्स को डैमेज से बचाने के लिए एक पावरफुल एंटीऑक्सीडेंट माना जाता है. संतरा झुर्रियां, डार्क सर्कल्स और बुढ़ापे के लक्षणों को दूर करने में फायदेमंद माना जाता है. इसके अलावा बीटा कैरोटीन आपकी आंखों की रोशनी को भी लंबे समय तक बनाए रखने में मददगार हो सकता है.
ज्यादा संतरा खाने से हो सकते हैं ये नुकसान 7
1. पाचन की समस्या हो सकती है.
2. ज्यादा सेवन से बढ़ सकता है ब्लड शुगर लेवल.
3. वजन बढऩे की हो सकती है समस्या
4. दांतों से संबंधित हो सकती है परेशानी
5. ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा
इस समय न खाएं संतरा
संतरे में विटामिन सी भरपूर मात्रा में होती है. इसके साथ ही इसमें विटामिन ए, बी कॉप्लेक्स, फ्लेवोनॉयड, अमिनो एसिड के अलावा भी कई फायदेमंद तत्व होते हैं. हालांकि इन फायदों के लिए इसे सही समय पर ही खाना होता है. भूलकर भी संतरे को एकदम सुबह और रात में न खाएं. कोशिश करें संतरे को हमेशा दिन में खाएं. संतरे का खाने के तुरंत बाद सेवन न करें. खाने से एक घंटा पहले या खाने के एक घंटे बाद ही संतरे का सेवन करना चाहिए.
अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए जि़म्मेदारी का दावा नहीं करता है.
धर्म संसार / शौर्यपथ / सावन का महीना खत्म होने में अब कुछ ही दिन बचे हैं। 3 अगस्त को सावन के आखिरी सोमवार का व्रत रखा जाएगा। सावन का महीना भगवान शिव को बेहद प्रिय है। ऐसी मान्यता है कि इस महीने में सच्चे दिल से की गई पूजा का फल और आशीर्वाद भक्तों को महादेव जरूर देते हैं। शास्त्रों के मुताबिक, सोमवार का दिन भगवान शिव की अराधना का होता है। माना जाता है कि भगवान शिव की पूजा के दौरान कुछ बातों का ध्यान रखना भी जरूरी होता है।
इन बातों का जरूर रखें ध्यान-
1. ऐसी मान्यता है कि सावन में बैंगन का सेवन नहीं करना चाहिए। इसलिए भगवान शिव के उपासकों को सावन महीने में बैंगन का सेवन नहीं करना चाहिए।
2. कहा जाता है कि सावन महीने में पूजा में तुलसी के पत्तों और केतकी के फूलों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। मान्यता है कि भगवान शिव को सफेद रंग के पुष्प अर्पित करने से पूजा का फल मिलता है।
3. कहते हैं कि भगवान शिव की पूजा में शिवलिंग को कभी हल्दी और कुमकुम नहीं लगाना चाहिए। कुमकुम को लेकर कहा जाता है कि सुहागिनें पति की लंबी आयु के लिए कुमकुम लगाती हैं। जबकि भगवान शिव को संहारक के रूप में जाना जाता है। ऐसे में पूजा के दौरान कुमकुम का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
4. ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव की पूजा करते समय शिवलिंग पर नारियल के पानी से अभिषेक नहीं करना चाहिए। हालांकि भगवान शिव की प्रतिमा पर नारियल का फल अर्पित करना शुभ माना गया है।
5. शिवलिंक का अभिषेक करते समय कास्य और पीतल के बर्तनों का इस्तेमाल करना शुभ माना गया है।
6. भगवान शिव को अर्पित की जाने वाले सभी चीजें शुद्ध और निर्मल होनी चाहिए।
सेहत / शौर्यपथ / संतरा एक आम फल हो सकता है लेकिन संतरे के स्वास्थ्य लाभ आम नहीं होते हैं. संतरा का सेवन कर आप कमाल के फायदे ले सकते हैं. संतरे में काफी मात्रा में विटामिन सी की मात्रा पाई जाती है. संतरे में फैट, कोलेस्ट्रॉल और सोडियम की मात्रा न के बराबर होती है.
संतरा एक आम फल हो सकता है लेकिन संतरे के स्वास्थ्य लाभ आम नहीं होते हैं. संतरा का सेवन कर आप कमाल के फायदे ले सकते हैं. संतरे में काफी मात्रा में विटामिन सी की मात्रा पाई जाती है. संतरे में फैट, कोलेस्ट्रॉल और सोडियम की मात्रा न के बराबर होती है. संतरा आपके दिल को स्वस्थ्य रखता है, ये आपकी आंखों को भी सुरक्षित रखता है और संतरे एक खासियत जिसकी हर किसी को जरूरत है. इम्यूनिटी बढ़ाने में संतरा फायदेमंद हो सकता है. संतरा कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज जैसी परेशानियों को दूर करने में भी लाभदायक माना जाता है. संतरे के फायदे कई हैं, लेकिन ऐसा नहीं है कि यह स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक नहीं होता है.संतरे के ज्यादा सेवन से संतरे के दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं. अगर आप इम्यून सिस्टम को बूस्ट करना चाहते हैं तो आप संतरे का सेवन बेझिझक कर सकते हैं लेकिन संतरा खाने का भी एक समय होता है जिसमें इसका सेवन करने की सलाह दी जाता है. यहां हम बता रहे हैं संतरे के फायदे और नुकसान के साथ संतरा किस समय खाना नुकसानदायक हो सकता है. संतरे को खाने का क्या है सही समय...
संतरे का सेवन कर पाएं ये कमाल के फायदे |
1. इम्यूनिटी बढ़ाने में है मददगार
संतरे में विटामिन सी की मात्रा बहुत अच्छी होती है. संतरा विटामिन सी का एक अच्छा स्रोत है. विटामिन सी एक तरह से एंटीऑक्सीडेंट का काम करता है और शरीर में डैमेज सेल्स को रिपेयर करने के साथ-साथ फ्री रेडिकल्स से लड़ता है. संतरा शरीर के इम्यून सिस्टम को मजबूती भी देता है. इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए आप संतरे का सेवन कर सकते हैं.
2. कोलेस्ट्रॉल में फायदेमंद है संतरा
संतरे में कोलेस्ट्रॉल नहीं होता है, बल्कि इसके सेवन से शरीर में मौजूद बैड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करने में मदद मिल सकती है. संतरे में मौजूद विटामिन सी आपके शरीर में फ्री रेडिकल्स को न्यूट्रिलाइज कर कोलेस्ट्रॉल को ऑक्सिडाइज करता है, जिससे पहले से जमा हुआ कोलेस्ट्रॉल धीरे-धीरे कम हो सकता है.
3. डायबिटीज में फायदेमंद
संतरा डायबिटीज में फायदेमंद माना जाता है. संतरे में फाइबर की मात्रा अच्छी होती है. फाइबर ब्लड शुगर लेवल को बढ़ने से रोक सकता है. अगर संतरे को साबूत खाया जाए तो यह डायबिटीज में मदद कर सकता है अगर आप इसका जूस पिएंगे तो यह ब्लड शुगर लेवल को बढ़ा सकता है क्योंकि जूस निकालने पर इसका फाइबर कम हो सकता है.
4. दिल की बीमारियों को रखे दूर
अगर आप रोज एक संतरा खाते हैं, तो यह दिल की बीमारियों का खतरा कम कर सकता है. इसका कारण यह है कि संतरे में फ्लैवोनॉइड्स होते हैं, जो आर्टरीज के ब्लॉकेज को खोलते हैं और ब्लड सर्कुलेशन को ठीक रखने में मदद कर सकते हैं.
5. कब्ज से राहत दिलाने में फायदेमंद
संतरे में घुलनशील और अघुलनशील दोनों ही प्रकार के फाइबर होते हैं. यह आपके पेट को भी भरा रखता है और आंतों की सफाई करने में भी मददगार हो सकते हैं. संतरा खाने से आपकी कब्ज की समस्या दूर हो सकती है. संतरा पेट दर्द और फूड पॉयजनिंग को भी रोक सकता है.
6. संतरा स्किन के लिए भी असरदार
संतरा खाने से आपकी स्किन पर ग्लो आ सकता है. संतरे में बीटा कैरोटीन होता है, जो सेल्स को डैमेज से बचाने के लिए एक पावरफुल एंटीऑक्सीडेंट माना जाता है. संतरा झुर्रियां, डार्क सर्कल्स और बुढ़ापे के लक्षणों को दूर करने में फायदेमंद माना जाता है. इसके अलावा बीटा कैरोटीन आपकी आंखों की रोशनी को भी लंबे समय तक बनाए रखने में मददगार हो सकता है.
ज्यादा संतरा खाने से हो सकते हैं ये नुकसान |
1. पाचन की समस्या हो सकती है.
2. ज्यादा सेवन से बढ़ सकता है ब्लड शुगर लेवल.
3. वजन बढ़ने की हो सकती है समस्या
4. दांतों से संबंधित हो सकती है परेशानी
5. ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा
इस समय न खाएं संतरा
संतरे में विटामिन सी भरपूर मात्रा में होती है. इसके साथ ही इसमें विटामिन ए, बी कॉप्लेक्स, फ्लेवोनॉयड, अमिनो एसिड के अलावा भी कई फायदेमंद तत्व होते हैं. हालांकि इन फायदों के लिए इसे सही समय पर ही खाना होता है. भूलकर भी संतरे को एकदम सुबह और रात में न खाएं. कोशिश करें संतरे को हमेशा दिन में खाएं. संतरे का खाने के तुरंत बाद सेवन न करें. खाने से एक घंटा पहले या खाने के एक घंटे बाद ही संतरे का सेवन करना चाहिए.
अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.
गेजेट्स / शौर्यपथ / WhatsApp पर बेहतरीन फीचर्स की भरमार है, लेकिन एक चीज़ है जिसको लेकर व्हाट्सऐप हमें निराश करता है वो है मैसेज को शेड्यूल करने का फीचर। जी हां, व्हाट्सऐप पर अब तक मैसेज शेड्यूल करने का तरीका पेश नहीं किया गया है, जिस वजह से हमें कई बार परेशानी का सामना करना पड़ता है। एक उदाहरण यह ही ले लीजिए अपने दोस्त को सबसे पहले बर्थडे मैसेज भेजने के लिए आपको रात के 12 बजे तक जागना पड़ता है, अगर व्हाट्सऐप पर शेड्यूलिंग मैसेज का फीचर होता तो रात के 12 बजे तक जागने की परेशानी न झेलनी पड़ती। भले ही व्हाट्सऐप पर इस फीचर को अब तक न जोड़ा गया हो, लेकिन आज हम आपकी इस परेशानी को दूर करने का तरीका जरूर बताएंगे। एंड्रॉयड व आइफोन स्मार्टफोन पर व्हाट्सऐप मैसेज शेड्यूल करने के कई दूसरे तरीके मौजूद हैं। तो चलिए जानते हैं क्या है वो तरीका जिनकी मदद से बिना व्हाट्सऐप खोले ही व्हाट्सऐप मैसेज भेजा जा सकता है।
जैसा कि हमने पहले बताया, WhatsApp ने मैसेज शेड्यूल करने का कोई ऑफिशियल फीचर पेश नहीं किया है। हालांकि, अगर आप एंड्रॉयड डिवाइस इस्तेमाल करते हैं, तो आप व्हाट्सऐप पर मैसेज को कई थर्ड-पार्टी ऐप की सहायता से शेड्यूल कर सकते हैं। जी हां, कई थर्ड-पार्टी ऐप्स मौजूद हैं, जो आपकी इस काम में सहायता कर सकते हैं, लेकिन एक ऐप है SKEDit जो अपना काम बेहतर तरीके से करता है। तो चलिए जानते हैं कैसे इस ऐप की मदद से करें व्हाट्सऐप मैजेस शेड्यूल-
1. सबसे पहले गूगल प्ले स्टोर पर जाकर SKEDit डाउनलोड और इंस्टॉल कर लें।
2. ओपन करने के बाद आपको सबसे पहले इसमें साइन-इन करना होगा।
3. साइन-इन करने के बाद मैन मैन्यू में से WhatsApp पर टैप करें।
4. इसके बाद ऐप आपसे कुछ परमिशन मांगेगा, उसे Grant कर दें। अब Enable Accessibility पर टैप करें फिर SKEDit पर जाएं और टॉगल को ऑन कर दें। आखिर में आपको Allow पर टैप करना है।
5. इसके बाद ऐप में वापस जाएं, जहां पर आप अपने मैसेज को शेड्यूल कर पाएंगे। सबसे पहले जिसे मैसेज भेजना है, उसे चुने और फिर अपना मैसेज लिखें। अब तारीख और समय को सेट करें। यहां आपको एक विकल्प यह भी मिलेगा कि आप इस मैसेज को दोहराना चाहते हैं या नहीं।
6. नीचे अब आपको फाइनल टॉगल दिखेगा। यहां आपको Ask Me Before Sending का विकल्प दिखेगा, यदि आप इसे ऑन करके शेड्यूल करते हैं, तो मैसेज भेजने से पहले यह आपको एक नोटिफिकेशन भेजेगा, जिस पर क्लिक करने के बाद ही यह मैसेज Send होगा। वहीं, अगर आप इस विकल्प को ऑफ करते हैं, तो बिना नोटिफिकेशन भेजे यह मैसेज Send कर देगा। दोस्त को बर्थडे विश करना है, तो आप इसे ऑफ भी रख सकते हैं।
How to schedule WhatsApp message in iPhone
एंड्रॉयड की तरह आइओएस में व्हाट्सऐप मैसेज शेड्यूल करने के लिए कोई थर्ड पार्टी ऐप उपलब्ध नहीं है। हालांकि, यहां हम आपको आइफोन पर व्हाट्सऐप मैसेज शेड्यूल करने का एक अलग तरीका बताएंगे, यह तरीका है Siri Shortcuts। यह एक ऐप्पल ऐप है, जो कि एक निश्चित समय पर व्हाट्सऐप मैसेज को ऑटोमेटिकली भेज देतe है। आइफोन पर व्हाट्सऐप मैसेज भेजने का तरीका-
1. सबसे पहले ऐप स्टोर पर जाकर Shortcuts app अपने आइफोन में डाउनलोड और इंस्टॉल करें।
2. अब नीचे दिए Automation टैब को चुनें।
3. अब टॉप राइट कॉर्नर पर दिए + आइकन पर क्लिक करें और Create Personal Automation पर टैप करें।
4. अगली स्क्रीन में Time of Day पर टैप करें जब भी आपको अपना मैसेज भेजना है उसे शेड्यूल कर दें। यह होने के बाद Next पर टैप कर दें।
5. अब Add Action पर टैप करें और सर्च बार में जाकर Text टाइप करें, अब नीचे आ रही लिस्ट में से Text को सिलेक्ट कर लें।
6. अब Text में जाकर अपना मैसेज टाइप करें, जो भी आप शेड्यूल करके भेजना चाहते हैं।
7. अब मैसेज बॉक्स के नीचे आपको एक + आइकन दिखेगा उस पर टैप करें और फिर सर्च बार में जाकर व्हाट्सऐप को सर्च करें।
8. यहां आपको कुछ विकल्प की लिस्ट दिखेगी, जहां पर आपको Send Message via WhatsApp सिलेक्ट करना है। अब जिसे मैसेज भेजना चाहते हैं उनका नंबर सिलेक्ट करें और फिर Next पर क्लिक कर दें। आखिर की स्क्रीन पर आपको Done पर टैप करना है।
अब आपको शेड्यूल टाइम पर Shortcuts app के द्वारा एक नोटिफिकेशन मिलेगा, जिस पर टैप करके आपका व्हाट्सऐप ओपन हो जाएगा और टाइप किया मैसेज भी दिखेगा। अब आपको बस इस मैसेज को Send करना है।
गौर करने वाली बात यह है कि इस तरीके से आप केवल एक हफ्ते के अंदर ही मैसेज को शेड्यूल कर सकते हैं, जो थोड़ा कम समय है। लेकिन मैसेज शेड्यूल न हो पाने से अच्छा है इस 1 हफ्ते वाले तरीके को अपनाकर दोस्तों को टाइम पर बर्थडे विश करना।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
