August 25, 2026
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    राजनीति

    राजनीति (1230)

    काला दिवस मनाने वाली भाजपा को कांग्रेस का पलटवार, कहा- संवैधानिक आपातकाल और वर्तमान हालात की तुलना नहीं छिपा सकती सच्चाई

    रायपुर। आपातकाल की बरसी पर भारतीय जनता पार्टी द्वारा मनाए जा रहे "काला दिवस" को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति में तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि देश के लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा आज भाजपा का अलोकतांत्रिक चरित्र बन चुका है।

    दीपक बैज ने कहा कि वर्ष 1975 में लगाया गया आपातकाल संविधान के प्रावधानों के तहत लागू किया गया था। उस समय देश में उत्पन्न परिस्थितियों और आंतरिक संकट को देखते हुए राष्ट्रपति द्वारा संवैधानिक प्रक्रिया के तहत आपातकाल की घोषणा की गई थी, जिसे निर्धारित समय के बाद समाप्त भी कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा आज उस ऐतिहासिक घटना को राजनीतिक हथियार बनाकर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है।

    कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि वास्तविक चिंता का विषय वर्तमान परिस्थितियां हैं, जहां लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता पर लगातार प्रश्न उठ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के कार्यकाल में संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बढ़ा है, विपक्षी दलों को कमजोर करने के प्रयास किए जा रहे हैं तथा केंद्रीय एजेंसियों का राजनीतिक उपयोग हो रहा है।

    बैज ने दावा किया कि चुनाव आयोग, जांच एजेंसियों और अन्य संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर देशभर में सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों के नेताओं पर कार्रवाई, दल-बदल की राजनीति और निर्वाचित सरकारों को अस्थिर करने की घटनाएं लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए गंभीर चुनौती हैं।

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, करों का बोझ, पेपर लीक की घटनाएं और आम नागरिकों की समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उनके अनुसार लोकतंत्र केवल चुनाव कराने तक सीमित नहीं होता, बल्कि जनता की आवाज को सुनना और संस्थाओं की स्वतंत्रता बनाए रखना भी उसकी मूल आत्मा है।

    दीपक बैज ने कहा कि जो संगठन और राजनीतिक दल कभी आपातकाल के विरोध को अपना प्रमुख मुद्दा बनाते थे, वे आज अपनी ही सरकार के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों पर उठ रहे सवालों पर मौन दिखाई देते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों, युवाओं और विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए प्रशासनिक और कानूनी तंत्र का उपयोग किया जा रहा है।

    कांग्रेस ने भाजपा द्वारा मनाए जा रहे काला दिवस को राजनीतिक दिखावा बताते हुए कहा कि यदि लोकतंत्र और संविधान की वास्तविक चिंता है तो पहले वर्तमान व्यवस्था में उठ रहे सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए। वहीं भाजपा लगातार कांग्रेस पर आपातकाल के ऐतिहासिक अध्याय को लेकर निशाना साध रही है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आपातकाल की बरसी को लेकर छिड़ा यह विवाद आने वाले समय में केंद्र और विपक्ष के बीच वैचारिक संघर्ष को और तीखा कर सकता है। फिलहाल कांग्रेस और भाजपा दोनों लोकतंत्र, संविधान और संस्थाओं की स्वतंत्रता को लेकर एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रही हैं, जिससे राजनीतिक माहौल और गर्म होने के संकेत मिल रहे हैं।

    दो-तिहाई पार्षदों का एक साथ केरल रवाना होना बना चर्चा का विषय, शहर की समस्याओं के बीच सियासी समीकरणों और संभावित राजनीतिक खेल पर उठ रहे सवाल।

    दुर्ग राजनीतिक।

    दुर्ग की राजनीति में इन दिनों विकास, गुटबाजी और सियासी रणनीतियों का ऐसा संगम दिखाई दे रहा है, जिसने नगर निगम की राजनीति को नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। नगर निगम के बड़ी संख्या में पार्षदों का सामूहिक रूप से केरल भ्रमण पर जाना केवल एक पर्यटन यात्रा है या इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक संदेश छिपा है, यही प्रश्न आज शहर के राजनीतिक गलियारों से लेकर आम नागरिकों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बन चुका है।

    राजनीति में संख्या शक्ति का अपना महत्व होता है। सत्ता पक्ष अपने संगठन और जनप्रतिनिधियों को मजबूत रखने का प्रयास करता है तो विपक्ष सत्ता की कमजोर कड़ियों को तलाशने में जुटा रहता है। दुर्ग नगर निगम की वर्तमान परिस्थितियों को देखें तो निगम की सामान्य सभाओं से लेकर विभिन्न विकास कार्यों तक लगातार मतभेद और टकराव की स्थिति दिखाई देती रही है। कई अवसरों पर भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों को एक सुर में निगम प्रशासन तथा शहरी सरकार के नेतृत्व पर सवाल उठाते देखा गया है।

    ऐसे समय में जब बरसात का मौसम शुरू हो चुका है और शहर के अनेक वार्ड जलभराव, गंदगी, अधूरी सफाई व्यवस्था, बदहाल सड़कों और मूलभूत सुविधाओं की समस्याओं से जूझ रहे हैं, तब बड़ी संख्या में पार्षदों का एक साथ दस दिन की यात्रा पर निकलना स्वाभाविक रूप से सवाल खड़े करता है। यह किसी व्यक्ति विशेष की यात्रा का विरोध नहीं है, बल्कि जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकताओं पर उठता एक लोकतांत्रिक प्रश्न है।

    जनप्रतिनिधि केवल व्यक्तिगत नागरिक नहीं होते। वे अपने वार्ड और हजारों नागरिकों की अपेक्षाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में जब शहर समस्याओं से घिरा हो और निगम के भीतर राजनीतिक असंतोष भी लगातार सामने आ रहा हो, तब सामूहिक यात्रा का राजनीतिक महत्व स्वतः बढ़ जाता है।

    इसी कारण निगम क्षेत्र में "ऑपरेशन पैंथर" की चर्चा जोर पकड़ रही है। हालांकि महापौर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना कानूनी रूप से आसान नहीं है, लेकिन राजनीतिक इतिहास गवाह है कि कई बार बड़ी राजनीतिक घटनाओं की शुरुआत सीधे टकराव से नहीं बल्कि रणनीतिक बैठकों और समूहबद्ध गतिविधियों से होती है। यही कारण है कि पार्षदों का यह सामूहिक भ्रमण केवल पर्यटन न मानकर राजनीतिक दृष्टि से भी देखा जा रहा है।

    चर्चा का दूसरा पहलू आर्थिक है। यात्रा में शामिल पार्षदों द्वारा अलग-अलग राशि बताए जाने से भी जिज्ञासाएं बढ़ी हैं। कोई दस हजार रुपये प्रति व्यक्ति बता रहा है तो कोई पंद्रह हजार रुपये। वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों में दस दिनों का केरल भ्रमण इतनी कम लागत में संभव कैसे हो रहा है, यह भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। राजनीतिक हलकों में यह सवाल भी पूछा जा रहा है कि यदि यात्रा की वास्तविक लागत अधिक है तो शेष खर्च का वहन कौन कर रहा है।

    हालांकि इस प्रश्न का कोई आधिकारिक उत्तर सामने नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राजनीति में कोई भी सामूहिक गतिविधि बिना किसी उद्देश्य के नहीं होती। अक्सर दिखाई देने वाले चेहरे अलग होते हैं और रणनीति तैयार करने वाले चेहरे अलग। यही कारण है कि इस यात्रा को लेकर कई तरह के राजनीतिक अनुमान लगाए जा रहे हैं।

    दूसरी ओर, निगम की राजनीति में लंबे समय से विकास कार्यों को लेकर भी मतभेद सामने आते रहे हैं। कई पार्षदों ने सामान्य सभा में आरोप लगाया है कि विकास कार्यों के आवंटन और स्वीकृति में भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जाता है तथा जनप्रतिनिधियों को विश्वास में नहीं लिया जाता। स्थानीय विधायक एवं प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव की अनुशंसाओं और विकास योजनाओं को लेकर भी समय-समय पर राजनीतिक विवाद सामने आते रहे हैं।

    इन परिस्थितियों में केरल यात्रा केवल एक भ्रमण कार्यक्रम न रहकर राजनीतिक संकेतों का माध्यम बन गई है। यात्रा समाप्त होने के बाद क्या कोई नया राजनीतिक समीकरण सामने आएगा, क्या निगम के भीतर शक्ति संतुलन में बदलाव होगा, या यह केवल सामूहिक पर्यटन साबित होगा—इन सभी प्रश्नों के उत्तर आने वाला समय ही देगा।

    फिलहाल इतना तय है कि दुर्ग नगर निगम का यह घटनाक्रम केवल केरल यात्रा तक सीमित नहीं है। इसके पीछे छिपे राजनीतिक संदेश, संभावित रणनीतियां और बदलते समीकरण आने वाले दिनों में दुर्ग की शहरी राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं। इसलिए निगम क्षेत्र से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हर नजर अब केरल से लौटने वाले पार्षदों और उनके अगले कदम पर टिकी हुई है।

    "केरल की यह यात्रा पर्यटन से अधिक राजनीति का विषय बन चुकी है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि लौटने के बाद पार्षद केवल यात्रा की यादें साझा करेंगे या दुर्ग की राजनीति में किसी नए अध्याय का सूत्रपात करेंगे।"

    ​रायपुर:
    कांग्रेस नेता राहुल गांधी के छत्तीसगढ़ दौरे को लेकर राज्य में एक बड़ा राजनीतिक बवंडर खड़ा हो गया है। सत्ताधारी दल भाजपा के नेताओं द्वारा राहुल गांधी पर की गई बेहद निजी और तल्ख टिप्पणियों के बाद दोनों पार्टियों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। जहां भाजपा विधायकों और मंत्रियों ने राहुल गांधी के दौरे को लेकर तंज कसे हैं, वहीं कांग्रेस ने भी इस पर बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए करारा जवाब दिया है।
    ​1. विधायक पुरंदर मिश्रा का बयान: "दिल्ली से आ रहा जोकर"
    ​छत्तीसगढ़ के रायपुर उत्तर से भाजपा विधायक पुरंदर मिश्रा ने राहुल गांधी के दौरे पर टिप्पणी करते हुए विवादित बयान दिया है।
    ​क्या कहा भाजपा विधायक ने: राहुल गांधी के छत्तीसगढ़ आगमन के संदर्भ में पुरंदर मिश्रा ने तंज कसते हुए कहा, "दिल्ली से जोकर आ रहा है और 10 दिन तक सर्कस चलेगा।"
    ​कांग्रेस का पलटवार: विधायक मिश्रा के इस बयान पर छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी और पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने कड़ी आपत्ति जताई है। कांग्रेस नेताओं ने इसे भाजपा विधायक का 'मानसिक दिवालियापन' करार दिया। कांग्रेस ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यदि भाजपा विधायक का मानसिक संतुलन बिगड़ गया है, तो कांग्रेस उनके इलाज का पूरा खर्च उठाने के लिए तैयार है।
    ​2. वन मंत्री केदार कश्यप का तंज: "दारू से धोएं राहुल के चरण"
    ​विवाद को और हवा तब मिली जब छत्तीसगढ़ के वन मंत्री केदार कश्यप ने राहुल गांधी के दौरे से ठीक पहले एक प्रेस वार्ता में कांग्रेस पर सीधा हमला बोला।
    ​क्या कहा वन मंत्री ने: कांग्रेस के स्वागत कार्यक्रमों पर कटाक्ष करते हुए केदार कश्यप ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने अपने पिछले 5 साल के शासनकाल में केवल शराब घोटाला किया है। उन्होंने आगे कहा, "इसलिए जब राहुल गांधी छत्तीसगढ़ आएं, तो कांग्रेसियों को (गंगाजल या पानी के बजाय) उनके चरण 'दारू' से धोने चाहिए।"
    ​कांग्रेस का पलटवार: वन मंत्री के इस बयान पर छत्तीसगढ़ कांग्रेस के अध्यक्ष दीपक बैज ने मोर्चा संभाला। बैज ने कहा कि यह बयान भाजपा के 'निचले स्तर के चरित्र' को उजागर करता है। उन्होंने राज्य की संस्कृति का हवाला देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में अतिथियों का स्वागत हमेशा 'धान' (अक्षत) से किया जाता है, लेकिन भाजपा ने अपने बयानों और नीतियों से राज्य को शराब का गढ़ बना दिया है।
    ​सियासी गलियारों में चर्चा:
    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी के दौरे से पहले इस तरह की बयानबाजी यह दर्शाती है कि राज्य में आगामी दिनों में राजनीतिक मुकाबला और भी दिलचस्प और आक्रामक होने वाला है। जहां भाजपा कांग्रेस को उसके पिछले कार्यकाल के मुद्दों पर घेरने की कोशिश कर रही है, वहीं कांग्रेस इसे छत्तीसगढ़ी संस्कृति के अपमान और भाजपा की हताशा के रूप में पेश कर रही है।

    कारण बताओ नोटिस, अयोग्यता की मांग और कार्यकर्ताओं को संभालने की कवायद; महा विकास अघाड़ी के सामने भी नई चुनौती

      राजनीतिक विश्लेषण
    2022 में पार्टी का संगठन और चुनाव चिन्ह खोने के बाद उद्धव ठाकरे ने लोकसभा चुनावों में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन कर अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता साबित की थी।
    अब यदि 9 में से 6 सांसद अलग राह चुनते हैं, तो यह केवल संख्या का नुकसान नहीं बल्कि नेतृत्व पर विश्वास के संकट का संकेत माना जाएगा।
    संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत UBT गुट लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष अयोग्यता की मांग कर रहा है, लेकिन अंतिम निर्णय संसदीय प्रक्रिया और उपलब्ध तथ्यों पर निर्भर करेगा।
    महाराष्ट्र की राजनीति में इसका सीधा असर महा विकास अघाड़ी (MVA) की एकजुटता और भविष्य की चुनावी रणनीति पर पड़ सकता है।
    दूसरी ओर, यदि ये सांसद एनडीए के साथ जाते हैं तो महाराष्ट्र में भाजपा-शिंदे गठबंधन की राजनीतिक ताकत और बढ़ सकती है।
    सबसे बड़ा सवाल
    उद्धव ठाकरे के सामने अब चुनौती केवल बागी सांसदों पर कार्रवाई की नहीं, बल्कि यह साबित करने की है कि चुनाव चिन्ह, संगठन और लगातार हो रही टूट-फूट के बावजूद उनकी पार्टी अभी भी महाराष्ट्र की राजनीति में एक प्रभावशाली शक्ति बनी हुई है।
    तीखा राजनीतिक निष्कर्ष
    "पहले धनुष-बाण गया, फिर संगठन का बड़ा हिस्सा गया, और अब यदि सांसद भी साथ छोड़ते हैं तो उद्धव ठाकरे के सामने लड़ाई सिर्फ सत्ता की नहीं, बल्कि राजनीतिक अस्तित्व बचाने की होगी।

    दुर्ग। आम जनता पर बढ़ते आर्थिक बोझ, अत्यधिक ई-चालान की कार्रवाई और परिवहन सेवाओं की बढ़ी हुई शुल्क दरों के विरोध में जिला कांग्रेस कमेटी दुर्ग शहर के अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल के नेतृत्व में कांग्रेसजनों ने जोरदार प्रदर्शन कर संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। कांग्रेस ने इसे आम नागरिकों, वाहन चालकों, विद्यार्थियों, श्रमिकों और मध्यमवर्गीय परिवारों से जुड़ा गंभीर जनहित का मुद्दा बताते हुए तत्काल राहतकारी कदम उठाने की मांग की।

    ज्ञापन के माध्यम से कांग्रेस ने कहा कि यातायात पुलिस एवं परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली के कारण आम लोगों पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। ई-चालान की बढ़ती संख्या और परिवहन सेवाओं के शुल्क में वृद्धि से लोगों को अतिरिक्त वित्तीय भार उठाना पड़ रहा है, जिससे व्यापक जनअसंतोष की स्थिति निर्मित हो रही है।

    जिला कांग्रेस अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल ने कहा कि कांग्रेस पार्टी जनता की आवाज बनकर सड़कों पर उतरी है। आम नागरिकों की जेब पर पड़ रहे अतिरिक्त बोझ को कम करने के लिए सरकार और संबंधित विभागों को संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनसुविधा के नाम पर जनता पर आर्थिक भार डालना उचित नहीं है और कांग्रेस इस मुद्दे पर लगातार संघर्ष करती रहेगी।

    कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि ई-चालान प्रणाली को अधिक पारदर्शी, न्यायसंगत और जनहितकारी बनाया जाए तथा परिवहन सेवाओं की बढ़ी हुई शुल्क दरों की पुनर्समीक्षा कर आम लोगों को राहत प्रदान की जाए। साथ ही वाहन चालकों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित करने की भी मांग की गई।

    धीरज बाकलीवाल के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि पार्टी सदैव जनसरोकारों के मुद्दों पर जनता के साथ खड़ी रही है और भविष्य में भी आम नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी।

    मुख्य मांगें

    ? अत्यधिक ई-चालान की कार्रवाई पर पुनर्विचार।

    ? परिवहन सेवाओं की बढ़ी हुई शुल्क दरों में कमी।

    ? ई-चालान प्रक्रिया में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करना।

    ? आम जनता पर बढ़ते आर्थिक बोझ को कम करने के लिए ठोस राहतकारी उपाय लागू करना।

      राजनांदगांव - भारतीय जनता पार्टीके प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव, प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय, भाजपा महिला मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष विभा अवस्थी तथा जिला भाजपा अध्यक्ष कोमल सिंह राजपूत की सहमति से भाजपा महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष पुष्पा गायकवाड ने महिला मोर्चा के विभिन्न मंडलों के पदाधिकोरियोंकी नियुक्ति की घोषणा की है।  

    डोंगरगांव मंडल:- अध्यक्ष एकल बाई साहू, उपाध्यक्ष विभा हिरवानी, मनीषा साहू, मधु यदु, संतोषी मानिकपुरी, महामंत्री अनिता वाल्दे, चित्ररेखा, मंत्री ज्योति साहू, रानी तिवारी, महेश्वरी गंजीर, स्वाति पंसारी, कोषाध्यक्ष ममता उईके, मीडिया प्रभारी अंजना यादव, सोशल मीडिया प्रभारी नीलम चतुर्वेदी, बुथ मित्र प्रभारी कुमारी वैष्णव, सांस्कृतिक प्रभारी अनिता साहू, प्रवक्ता अरूणा पाण्डेय, कार्यालय प्रभारी कुंती आल्हा, मन की बात प्रमुख प्रतिभा पटेल।

    राजनांदगांव दक्षिण मंडल:- अध्यक्ष मधु बैद, उपाध्यक्ष शशि सहारे, मंजू यादव, संध्या वर्मा, कृति प्रजापति, महामंत्री करूणा राजपूत, तूईशा वांदिले, मंत्री चन्द्रिका साहू, प्रतिमा खण्डेलवाल, लता यादव, भारतीय सोनकर, कृती साहू, कोषाध्यक्ष ज्योति जैन, मीडिया प्रभारी ज्योति सहारे, सोशल मीडिया प्रभारी अनिता सिन्हा, सह-सोशल मीडिया प्रभारी उतरा दामले, बुथ मित्र प्रभारी लता यादव, सांस्कृति प्रभारी अमृता सिन्हा, प्रवक्ता गीताजंली साहू, कार्यालय पभारी दूर्गा साहू, मन की बात कार्यालय प्रभारी अर्चना अग्रवाल।

    राजनांदगांव ग्रामीण पश्चिम मंडल:- अध्यक्ष गायत्री साहू, उपाध्यक्ष पुर्णिमा साहू, मीनाक्षी अम्बादे, दुलारी बाई साहू, लता साहू, महामंत्री भुनेश्वरी साहू, मनिषा साहू, मंत्री मीना चतुर्वेदी, ममता धु्रव, बिसन्तीन नेताम, प्रभा साहू, टोमीन लाउत्रे, कोषाध्यक्ष ज्योति भारद्वाज, मीडिया प्रभारी मिशा साहू, सोशल मीडिया प्रभारी सीमा साहू, मन की बात प्रमुख सोमिता साहू।
    अर्जुनी मंडल:- अध्यक्ष ममता पटेल, उपाध्यक्ष कविता साहू, मंजू साहू, नूतन साहू, फुलेश्वरी साहू, महामंत्री पूनम साहू, मंजू वैष्णव, मंत्री चम्पा धनकर, शैल साहू, उमा साहू, जयश्री राधा सोनकर, पूर्णिमा साहू, चन्द्रकली साहू, कोषाध्यक्ष महेश्वरी निषाद, सह-कोषाध्यक्ष ललती निषाद, मीडिया प्रभारी चांदनी निषाद, सह-मीडिया प्रभारी लुकेश्वरी साहू, प्रवक्ता कल्याणी धनकर, सह-प्रवक्ता नीतू साहू, सोशल मीडिया प्रभारी पूजा वैष्णव, पदमनी साहू, बुधंमीन साहू, रेश्मी आदिवासी, कार्यालय मंत्री कामनी रामटेके, सांस्कृतिक कांति साहू, दुलारी बाई साहू।

    इस अवसर पर जिला अध्यक्ष पुष्पा गायकवाड ने सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी संगठन कार्यकर्ताओं की मेहनत, समर्पण और सेवा भाव के आधार पर निरंतर आगे गढ़ रही है। महिला मोर्चा की नई टीम संगठन को और अधिक सशक्त बनाने के साथ-साथ पार्टी की रीति-नीति, सिद्धांतों एवं केन्द्र तथा राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। जिला अध्यक्ष पुष्पा गायकवाड ने विश्वास व्यक्त किया कि महिला मोर्चा की नईटीम संगठन के विस्तार एवं पार्टी की मजबूती के लिए सक्रिय रूप से कार्य करेगी तथा आगामी कार्यक्रमों एवं अभियानों को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देगी। 

    स्वास्थ्य सेवा और संगठन विस्तार को नई गति देने 16 मंडलों के संयोजकों की नियुक्ति

    राजनांदगांव। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्री किरण सिंह देव, प्रदेश संगठन महामंत्री श्री पवन साय, भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक डॉ. देवेन्द्र कश्यप तथा भाजपा जिलाध्यक्ष श्री कोमल सिंह राजपूत की सहमति से भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ के जिला संयोजक डॉ. निलेश सिंह ने जिला चिकित्सा प्रकोष्ठ एवं जिले के 16 मंडलों की नई कार्यकारिणी की घोषणा की है।

    जारी सूची के अनुसार डॉ. निलेश सिंह को जिला संयोजक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं सह-संयोजक के रूप में डॉ. चन्द्रेश साहू, डॉ. पी. डी. मानिकपुरी, डॉ. आलोक भट्टाचार्य, डॉ. जितेन्द्र तिवारी, डॉ. लोकेश चन्द्राकर एवं डॉ. हरिश्चन्द्र साहू को नियुक्त किया गया है। डॉ. अशोक तिवारी को जिला मीडिया प्रभारी तथा डॉ. कामेश साहू को महत्वपूर्ण दायित्व प्रदान किया गया है।

    मंडल स्तर पर राजनांदगांव उत्तर से डॉ. प्रमोद साहू, राजनांदगांव दक्षिण से डॉ. यशवंत कुमार साहू, राजनांदगांव ग्रामीण पूर्व से डॉ. अनुपम श्रीवास्तव, राजनांदगांव ग्रामीण पश्चिम से डॉ. गुणीत साहू, डोंगरगढ़ शहर से डॉ. राजेश राघोत्रे, डोंगरगढ़ ग्रामीण से डॉ. मोरध्वज वर्मा, घुमका से डॉ. लक्ष्मण वर्मा, तिलई से डॉ. नारायण मानिकपुरी, डोंगरगांव शहर से डॉ. ललित रामटेके, डोंगरगांव ग्रामीण से डॉ. फग्गू पटेल, मुसरा-मुरमुंदा से डॉ. श्यामलाल साहू, तुमड़ीबोड़ से डॉ. भूपेन्द्र वर्मा, अर्जुनी से डॉ. टीमेश्वर साहू, लाल बहादुर नगर से डॉ. उत्तम कुमार विश्वास, छुरिया से डॉ. हेमंत कुमार लड़े, कुमर्दा से डॉ. हेमंत बनपेला तथा गैंदाटोला से डॉ. अश्वनी कुमार साहू को मंडल संयोजक नियुक्त किया गया है।

    भाजपा द्वारा संगठन के विस्तार तथा समाज के विभिन्न वर्गों तक प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चिकित्सा प्रकोष्ठ की नई टीम का गठन किया गया है। इस अवसर पर भाजपा जिलाध्यक्ष श्री कोमल सिंह राजपूत ने नवनियुक्त पदाधिकारियों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि चिकित्सा प्रकोष्ठ संगठन की विचारधारा, सेवा कार्यों एवं जनकल्याणकारी गतिविधियों को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    उन्होंने कहा कि चिकित्सा प्रकोष्ठ की नई टीम समाजसेवा की भावना के साथ स्वास्थ्य संबंधी जनहितकारी गतिविधियों को और अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने का कार्य करेगी।

     
    सरकार की प्राथमिकता के लोगों को स्वास्थ्य और इलाज नही

       रायपुर/ । भाजपा की सरकार बनने के बाद राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल हो गयी है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि यह बेहद चिंता का विषय है कि छत्तीसगढ़ में जिन मरीजों की मौते हो रही है। उनमें से 60 प्रतिशत से अधिक मरीजो की मौत केवल इसलिये हो रही है कि उनका समय पर ईलाज एक प्रशिक्षित डॉक्टर और स्टाफ से नहीं हो पाता है। सेंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) की हालिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि छत्तीसगढ़ में होने वाली कुल मौतो के पीछे एक बड़ा कारण ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशिक्षित डॉक्टरो की कमी है। पूरे देश में छत्तीसगढ़ इस प्रकार की मौतो के मामलो में बिहार और झारखंड के बाद तीसरे स्थान पर है।

    प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि भाजपा सरकार की प्राथमिकता में लोगो का ईलाज है ही नही, भाजपा सरकार के लिये स्वास्थ्य विभाग केवल भ्रष्टाचार करने का अड्डा मात्र बना हुआ है। प्रदेश के वर्तमान 10 मेडिकल कालेजो में 2660 स्वीकृत पदो में से 1290 पद लगभग आधे खाली पड़े है। ऐसे में मरीजो का कैसे ईलाज होगा। स्वास्थ्य केन्द्र, उपस्वास्थ्य केन्द्रो में 65 प्रतिशत स्थानों तथा जिला अस्पतालो में 60 प्रतिशत पद खाली पड़े है। राज्य के सरकारी अस्पतालो में ईलाज कम भ्रष्टाचार अधिक होता है। प्रदेश के अधिकांश सरकारी अस्पतालो मेडिकल कालेजो में नकली दवाये उपयोग की शिकायते सामने आ चुकी है।

    प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि बेहद शर्मनाक है कि राज्य के लोगो की बड़ी उम्मीद मेकाहारा रायपुर तथा डीकेएस अस्पताल भी अव्यवस्था और सरकार की लापरवाही का शिकार है। मेकाहारा में करोड़ो की मशीने स्टालेशन के आभाव में तथा योग्य चिकित्सको होने के बाद मेकाहारा में सुविधाये नहीं होने के कारण लोगो के ईलाज में देरी होती है। सरकार कभी दवाई नहीं उपलब्ध करवा पाती तो कभी एक्सरे फिल्म, तो कभी पैथालाजी के सामन। प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है।

    प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि सरकार की लापरवाही और बदनियती के चलते ही छत्तीसगढ़ में मरीज जांच, इलाज और दवा के अभाव में बे-मौत मरने मजबूर हैं। नकली और अमानक दवाएं मरीजों को दी जा रही हैं। सरकारी अस्पतालों में दी जा रही कई दवाएं गुणवत्ता जांच में फेल हो रही है। समय पर एम्बुलेंस की सुविधा मरीजों को नहीं मिल पा रही है। सिटी स्कैन, एम आर आई, सोनोग्राफी, एक्स रे और खून पेशाब की जांच के लिए मरीज भटक रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी की सरकार में कमीशनखोरी के लिए स्वास्थ्य विभाग अघोषित तौर पर ठेके में संचालित है। सत्ता के संरक्षण में केवल मुनाफाखोरी का खेल चल रहा है। अक्षम स्वास्थ्य मंत्री तत्काल अपने पद से इस्तीफा दे या उन्हें बर्खास्त करे सरकार।

       रायपुर/ । धान के अलावा अन्य फसल लेने पर 15000 रू. प्रति क्विंटल देने के फैसले को भेदभाव पूर्ण और धान के किसान विरोधी बताते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है, धान के किसान हमारी पहचान है, प्रदेश के अर्थव्यवस्था की धूरी है, भाजपा की सरकार दुर्भावना पूर्वक इसे मिटाने पर तुली है। आखिर इस सरकार को धान के किसानों से इतनी हिकारत क्यों? प्रदेश का जनवायु और मानसून धान के अनुकूल है। दलहन, तिलहन एवं अन्य फसल लेने के लिये न किसानों की तैयारी है, न ही वातावरण अनुकूल। सरकार पहले जो खाद का संकट सामने खड़ा है, उसका निराकरण करे।

    प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि सरकार का फैसला अव्यावहारिक है। धान के खेत में तिली, राहेर, कोदो, कुटकी, रागी, कपास, उड़द, मूंग कैसे बोयेंगे किसान? क्या किसान मेढ़ पार फोड़ कर, धान के खेत को पाट कर भर्री बना दे? छत्तीसगढ़ में मानसून, वर्षा, मिट्टी, जलवायु, धान के खेती के अनुकूल है, जरूरत के मुताबिक खाद उपलब्ध कराने में नाकाम सरकार अपनी अक्षमता छुपाने अब 15 हजार का प्रलोभन दे रही है, पहले अन्य फसलो की समर्थन मूल्य पर खरीदी की व्यवस्था करें सरकार।

    प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि यह सरकार खाद नहीं दे पा रही है इसलिए प्रलोभन दे रही है। पिछले तीन साल में धान की एमएसपी वृद्धि का लाभ पहले ही किसानों से छीन लिया गया है, साय सरकार आने के बाद 117 फिर 69 और 72 रुपए की वृद्धि धान के एमएसपी में हो चुकी है कुल 258 रुपए बढ़े है लेकिन यह सरकार 3358 की जगह केवल 3100 रुपए प्रति क्विंटल ही दे रही है, आगे भी धान की कीमत बढ़ाने का इरादा इस सरकार का नहीं है जबकि कृषि लागत पिछले ढाई साल में 12 से 15 हजार रुपए प्रति एकड़ बढ़ चुका है।

    प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि सरकार बताये, खरीफ के लिये कितने उर्वरको की व्यवस्था हो पाई है? सरकार का खुद का दावा है कि लक्ष्य 15 लाख 54 हजार मीट्रिक टन के लक्ष्य के विपरीत केवल 11 लाख 11 हजार मीट्रिक टन का कुल भंडारण है, जिसमें से अभी तक कुल केवल 4 लाख 11 हजार मीट्रिक टन का वितरण हुआ है जो कुल डिमांड का मात्र 26 प्रतिशत है। सोसायटियों तक पर्याप्त खाद कब तक पहुंचेगा? सरकार किसानों के लिये आवश्यक यूरिया डीएपी की व्यवस्था करे।

    प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि मोदी निर्मित महंगाई के कारण खेती की लागत बढ़ गई है, डीजल महंगा होने से जुताई, मताई, हार्वेस्टिंग की लागत 20 प्रतिशत बढ़ गया है, खाद बीज के दाम बढ़ाए, पोटास एन पी के महंगा हुआ है, एक तरफ यह सरकार एनपीके को डीएपी का विकल्प बता रही है, दूसरी तरफ एन पी के और पोटास के दाम में 15 और 30 प्रतिशत की वृद्धि कर देती है, यह कैसा विकल्प? यह तो किसानों पर दुगुना आर्थिक बोझ है। कृषि की लागत पिछले साल की तुलना में कम से कम 12 से 15 हजार रुपए प्रति एकड़ बढ़ गई है। वैकल्पिक खाद, नैनो यूरिया, नैनो डीएपी की गुणवत्ता पर किसानों को भरोसा नहीं है। भाजपा की सरकार में छत्तीसगढ़ नकली खाद नकली बीज अमानत दावों को खपाने का संरक्षण स्थल बन चुका है सत्ता के संरक्षण में जमकर कालाबाजारी हो रही है किसान शोषण के शिकार हैं। कीटनाशक के दाम बढ़ाए, लेकिन धान के एम एस पी में वृद्धि का लाभ किसानों को नहीं मिलेगा? कांग्रेस ने 2500 का दावा करके 2640 और 2660 रुपए दिया यह सरकार एम एस पी वृद्धि को खुद ही खा रही है। यह सरकार तरह-तरह के बहाने बनाकर अड़ंगे लगा रही है। किसानों को पिछले खरीफ सीजन में दिए गए डीएपी की मात्रा से 40 प्रतिशत और यूरिया में 20 प्रतिशत कम देने का तुगलकी फरमान जारी किया गया है। सहकारी समितियों से खाद का कोटा तय करके (प्रति एकड़ के हिसाब से) कम खाद का वितरित किया जा रहा है। पिछले साल तक किसानों को सोसायटी से नगदी और सामग्री का अनुपात 60रू40 था जिसे अब घटाकर 70रू30 कर दिया गया है अर्थात खाद बीज (सामग्री) लेने की की लिमिट 10 प्रतिशत घटा दिया गया है। यदि राहत देना है तो बिना भेदभाव के सभी किसानों को 15 हजार प्रति एकड़ की दर से इनपुट सब्सिडी दे सरकार।
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