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दुर्ग । शौर्यपथ ।
जिला कांग्रेस कमेटी दुर्ग के महामंत्री राहुल शर्मा ने केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को लेकर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि भाजपा ने अपने वादों से मुंह मोड़कर शिक्षकों, छात्रों और पूरे शिक्षा तंत्र के साथ अन्याय किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा की नीतियां लगातार यह साबित कर रही हैं कि सरकार शिक्षा और शिक्षक—दोनों के प्रति संवेदनहीन है।
राहुल शर्मा ने कहा कि नियमितीकरण एवं अन्य जायज मांगों को लेकर अतिथि शिक्षक संघ पिछले 23 दिनों से शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहा था, लेकिन छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार ने उनकी समस्याओं की ओर ध्यान देना भी उचित नहीं समझा। उन्होंने याद दिलाया कि भाजपा ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में सरकार बनने के 100 दिनों के भीतर अतिथि शिक्षकों की मांगों का समाधान करने का वादा किया था, लेकिन सत्ता में आते ही वह अपना वादा भूल गई। यह भाजपा की पुरानी कार्यशैली बन चुकी है कि चुनाव से पहले बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं और सरकार बनने के बाद उन्हें भुला दिया जाता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मांगों के समाधान के बजाय सरकार ने आंदोलनरत शिक्षकों के साथ दमनकारी रवैया अपनाया। पुलिस प्रशासन द्वारा धरनास्थल से टेंट हटाए गए और शिक्षकों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि सरकार को दमन की जगह संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए था और अतिथि शिक्षकों के नियमितीकरण, सम्मानजनक मानदेय तथा स्थायी नीति पर तत्काल निर्णय लेना चाहिए।
राहुल शर्मा ने कहा कि "शिक्षा के मंदिर को बचाने वाले गुरुजनों पर तानाशाही और अत्याचार की जितनी भी निंदा की जाए, कम है।" उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज का भविष्य गढ़ते हैं और उनके साथ इस प्रकार का व्यवहार किसी भी संवेदनशील सरकार को शोभा नहीं देता।
कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार को भी निशाने पर लेते हुए कहा कि नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक जैसी घटनाओं ने लाखों विद्यार्थियों के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगा दिया। उनके अनुसार इस मामले में लगभग 20 लाख छात्र-छात्राओं की मेहनत प्रभावित हुई, लेकिन दोषियों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से छात्रों में भारी आक्रोश है। उन्होंने कहा कि अपनी मांगों को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों पर कथित लाठीचार्ज किया गया, जिसमें कई छात्र घायल हुए और एक छात्र की मृत्यु होने का भी दावा किया गया।
उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करती तो केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इससे स्पष्ट है कि भाजपा सरकार शिक्षा व्यवस्था से जुड़े गंभीर मुद्दों पर भी जवाबदेही से बचने का प्रयास कर रही है।
राहुल शर्मा ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य—दोनों स्तरों पर भाजपा सरकारों की नीतियां शिक्षा, शिक्षकों और विद्यार्थियों के हितों के विपरीत हैं। उन्होंने कहा कि जब तक शिक्षा के प्रति संवेदनशील और जवाबदेह व्यवस्था स्थापित नहीं होगी, तब तक देश के युवाओं और शिक्षा व्यवस्था को न्याय नहीं मिल सकेगा।
विधानसभा चुनाव की चर्चाओं के बीच राजनीतिक विश्लेषकों की राय—यदि सक्रिय राजनीति में आना है तो किसी एक दल के साथ स्पष्ट वैचारिक प्रतिबद्धता दिखानी होगी, अन्यथा समाजसेवा की सर्वस्वीकार्य छवि ही सबसे बड़ी पूंजी बनी रहेगी।
शौर्यपथ राजनितिक विश्लेषण
दुर्ग शहर के प्रमुख व्यापारी एवं समाजसेवी इंद्रजीत सिंह 'छोटूÓ इन दिनों एक बार फिर राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में हैं। हाल ही में उनके जन्मदिवस का भव्य आयोजन और उसमें विभिन्न क्षेत्रों के लोगों की बड़ी भागीदारी ने यह चर्चा तेज कर दी है कि क्या वे भविष्य में विधानसभा चुनाव की राजनीति में कदम रख सकते हैं।
प्रदेश की वर्तमान राजनीति पर नजर डालें तो मुकाबला मुख्य रूप से भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच सिमटता दिखाई देता है। क्षेत्रीय दलों का प्रभाव लगातार कम हुआ है और मतदाताओं का झुकाव भी दो प्रमुख राष्ट्रीय दलों के इर्द-गिर्द केंद्रित होता जा रहा है। ऐसे राजनीतिक परिदृश्य में यदि कोई नया चेहरा चुनावी राजनीति में उतरना चाहता है, तो उसके लिए केवल लोकप्रिय होना पर्याप्त नहीं, बल्कि किसी एक राजनीतिक विचारधारा के साथ स्पष्ट रूप से खड़ा होना भी आवश्यक माना जाता है।
इंद्रजीत सिंह 'छोटूÓ की सबसे बड़ी ताकत उनकी सामाजिक सक्रियता और जनसंपर्क है। वर्षों से वे विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और जनहित के कार्यों में सक्रिय रहे हैं, जिसके कारण उन्हें लगभग सभी राजनीतिक दलों के नेताओं और समाज के विभिन्न वर्गों का सम्मान मिलता है। यही उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक पूंजी भी है।
हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि समाजसेवा और सक्रिय राजनीति की कार्यशैली अलग-अलग होती है। समाजसेवी सभी वर्गों के बीच समान स्वीकार्यता बनाए रख सकता है, लेकिन राजनीति में अंतत: किसी एक दल, उसकी विचारधारा और संगठन के साथ स्पष्ट प्रतिबद्धता दिखानी पड़ती है।
वर्तमान समय में भाजपा अपने लंबे समय से कार्य कर रहे संगठनात्मक कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देती रही है। वहीं कांग्रेस को लेकर कभी यह धारणा रही कि वह बाहरी या तथाकथित "हेलीकॉप्टर प्रत्याशियों" को भी अवसर देती है, लेकिन बदलते राजनीतिक माहौल में कांग्रेस संगठन भी अब लंबे समय से संघर्ष कर रहे कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देने की दिशा में आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है। ऐसे में किसी भी नए चेहरे के लिए केवल लोकप्रियता के आधार पर टिकट प्राप्त करना पहले की तुलना में कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
इंद्रजीत सिंह 'छोटूÓ के समर्थकों की संख्या भी कम नहीं है, लेकिन यह भी एक चर्चा का विषय है कि उनके अधिकांश समर्थक व्यापारी और परिचित वर्ग से जुड़े दिखाई देते हैं जिनकी सामजिक एवं आम जनता से दुरी स्पष्ट नजर आता है । यदि वे भविष्य में राजनीति को अपना लक्ष्य बनाते हैं तो उन्हें ऐसा मजबूत संगठन तैयार करना होगा, जो उनकी अनुपस्थिति में भी आम जनता की समस्याओं को सुने, उनके बीच लगातार सक्रिय रहे और राजनीतिक आधार को मजबूत करे जिनकी आज कमी है ।
राजनीतिक गलियारों में यह भी कहा जा रहा है कि विधानसभा चुनाव में अभी पर्याप्त समय शेष है। यदि इंद्रजीत सिंह 'छोटूÓ वास्तव में राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाना चाहते हैं, तो उन्हें अभी से किसी एक दल और उसकी विचारधारा के प्रति अपना स्पष्ट झुकाव दिखाना होगा। राजनीति में लंबे समय तक दोनों पक्षों के साथ समान दूरी या समान निकटता बनाए रखने की रणनीति अब पहले जैसी प्रभावी नहीं मानी जाती।
दूसरी ओर, यदि वे राजनीति से दूरी बनाकर केवल समाजसेवा के मार्ग पर आगे बढ़ते हैं, तो उनकी निष्पक्ष और सर्वस्वीकार्य छवि और अधिक मजबूत हो सकती है। समाजसेवा के क्षेत्र में उनकी पहचान किसी राजनीतिक सीमा में बंधे बिना लगातार विस्तार पा सकती है और यही उनकी सबसे बड़ी विरासत भी बन सकती है।
अंतत: फैसला इंद्रजीत सिंह 'छोटूÓ को ही करना है कि वे अपनी पहचान एक सफल समाजसेवी के रूप में आगे बढ़ाना चाहते हैं या फिर सक्रिय राजनीति की चुनौतियों को स्वीकार कर किसी राजनीतिक दल के साथ नई पारी शुरू करेंगे। आने वाले समय में उनका निर्णय न केवल उनकी राजनीतिक दिशा तय करेगा, बल्कि दुर्ग की राजनीति में भी नई चर्चाओं को जन्म दे सकता है।
रायपुर/ शौर्यपथ / एथेनाल मिश्रित पेट्रोल (ई-20) के कारण जनता परेशान हो रही है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि ई-20 पेट्रोल देश की जनता के लिए मुसीबत बना। मोदी सरकार ने नफा नुकसान का वैज्ञानिक परीक्षण किये बिना पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनाल मिला कर पेट्रोल बेचना शुरू कर दिया है जिसके कारण लोगों के वाहन खराब हो रहे है। ई-20 पेट्रोल के कारण लोगों की गाड़ियां न सिर्फ खराब हो रही है इस एथेनाल वाले पेट्रोल के कारण वाहनों की माईलेज भी आधा हो गया है। मोदी सरकार ने अपने एक मंत्री की जिद और उनके पुत्रों के व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए पूरे देश को संकट में डाल दिया है। ई-20 पेट्रोल आम पेट्रोल की अपेक्षा शुरू नहीं है इसीलिए माईलेज में कमी आ रही है तथा गाड़ियों के इंजन भी खराब हो रहे है।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि विशेषज्ञों का कहना है ई-20 पेट्रोल के कारण एथेनाल हवा से नमी को जल्दी सोख लेता है। पुराने वाहनों में लगे मेटल (लोहे) के फ्यूल टैंक और फ्यूल पंप में इस नमी के कारण अंदर ही अंदर जंग लगने की संभावना बढ़ जाती है, जो इंजन में जाकर उसे नुकसान पहुंचा सकता है।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि एथेनाल एक बेहतरीन (घुलनशील) की तरह काम करता है। अप्रैल 2023 से पहले बनी (या केवल ई-10 के लिए डिजाइन की गई) गाड़ियों के रबर सील, गैस्कैट, प्लास्टिक और फ्यूल पाइप एथेनाल के संपर्क में आने से कमजोर होकर टूटने या रिसने लगते है।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि लंबे समय तक ई-10 या उससे कम क्षमता के लिए बनी गाड़ियों में सीधे ई-20 ईंधन डालने से फ्यूल इंजेक्टर जाम हो सकते है और महंगे पुर्जे खराब हो सकते है, जिससे भारी मेंटेनेंस खर्च उठाना पड़ सकता है।
रायपुर / शौर्यपथ (राजनितिक) /पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोहम्मद अकबर ने नकटी प्रकरण में मंत्री केदार कश्यप द्वारा दी गई चुनौती को स्वीकार करते हुए कहा है कि जो दस्तावेज सार्वजनिक करने की बात मंत्री कह रहे हैं वे पहले ही सार्वजनिक है।
एक बयान में श्री अकबर ने कहा- यह सत्य है कि शासकीय दस्तावेज स्पष्ट रूप से बताते हैं कि नकटी सहित सेरीखेड़ी, मंदिर हसाैद, रमचंडी, बरौंदा, और रीको की कुल 436.01 हेक्टेयर( करीब 1076 एकड़) भूमि को नगर विकास योजना के नाम पर निजी हाथों में सौंपने की तैयारी की जा रही है। इस प्रस्तावित योजना में नकटी की भी कुछ जमीनों को शामिल किया गया है। जिसके बारे में सरकार को स्पष्ट करने का आग्रह किया गया है कि इस योजना में वह विवादित जमीन तो शामिल नहीं है। जहां विध्वंस हुआ है।वन मंत्री केदार कश्यप जी ने इस पर चुनौती देते हुए बयान दिया है कि मोहम्मद अकबर दस्तावेजो को सार्वजनिक करें। जबकि मेरा कहना है कि सभी दस्तावेज सार्वजनिक है, मैंने 11 जुलाई को ही इसे मीडिया के लिए जारी किया है।मंत्री जी की चुनौती का स्वागत हैश्री अकबर ने कहा- मंत्री जी की चुनौती का स्वागत है। लेकिन चुनौती देने के पहले उन्हें संबंधित विभाग की निविदा को पढ़ लेना चाहिए था। या संबंधित मंत्री से ही पूछ लेते। मेरे द्वारा जो कहा गया है वह सरकार के दस्तावेज पर आधारित है। किसी अफवाह के आधार पर नहीं। मंत्री जी की जानकारी के लिए स्पष्ट किया जा रहा है कि निविदा सूचना 245 पृष्ठों की है। प्रथम पृष्ठ में नवा रायपुर अटल नगर के लेयर -2 में स्थित टाउन डेवलपमेंट स्कीम( टीडीएस) के लिए आधारभूत संरचना के विकास हेतु डेवलपर के चयन, जिसके बदले मिश्रित उपयोग की भूमि के विकास एवं विक्रय अधिकार प्रदान किए जाएंगे, लिखा है। इस निविदा को प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 22 जुलाई 2026 रखी गई है। पृष्ठ क्रमांक 6 के बिंदु क्रमांक 1.1.4 में ग्रामों के नाम और कुल भूमि का क्षेत्रफल 436.0152 हेक्टेयर लिखा है। पृष्ठ 28, 29, 30, 31, में ले-आउट और नक्शे लगे हैं जो निविदा सूचना में ही हैं। सभी जानकारियों एवं दस्तावेज सार्वजनिक हैं, लेकिन यदि मंत्री जी को और अलग से कोई जानकारी चाहिए तो चुनौती स्वीकार है। दस्तावेज कहां भेजना है, बता दें।
सड़क पर सत्ता से ज़्यादा नज़र आ रही है विपक्ष की चुप्पी, अब फैसला धीरज बाकलीवाल को करना होगा
दुर्ग। लोकतंत्र में एक मजबूत विपक्ष केवल सरकार की आलोचना करने के लिए नहीं होता, बल्कि जनता की आवाज़ बनकर सत्ता को जवाबदेह बनाने के लिए होता है। यदि विपक्ष ही अपनी भूमिका से पीछे हट जाए तो नुकसान केवल किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और आम जनता का होता है।
दुर्ग नगर निगम की वर्तमान परिस्थितियों को लेकर शहर में लगातार सवाल उठ रहे हैं। गंदगी, बदहाल व्यवस्थाएं, विकास कार्यों में कथित भेदभाव और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर सत्ता पक्ष के भीतर से भी समय-समय पर आवाजें उठती रही हैं। ऐसे में स्वाभाविक रूप से उम्मीद नेता प्रतिपक्ष से होती है कि वे इन मुद्दों को निगम परिषद से लेकर सड़कों तक मजबूती से उठाएं। लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज होती जा रही है कि नेता प्रतिपक्ष संजय कोहले इन मुद्दों पर अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखा पा रहे हैं।
कांग्रेस संगठन इन दिनों नए तेवर और नई कार्यशैली की बात कर रहा है। प्रदेश नेतृत्व लगातार यह संदेश दे रहा है कि संगठन में केवल पद धारण करने वाले नहीं, बल्कि मैदान में संघर्ष करने वाले कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता मिलेगी। कई मंचों से यह भी कहा गया है कि जो लोग केवल पद के भरोसे राजनीति कर रहे हैं, उन्हें अब सक्रिय संघर्षशील कार्यकर्ताओं के लिए जगह छोड़नी चाहिए।
ऐसे में सवाल यह उठना स्वाभाविक है कि क्या यही कसौटी नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका पर भी लागू होगी?
जनता यह अपेक्षा करती है कि विपक्ष सत्ता के हर निर्णय की समीक्षा करे, जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाए और यदि कहीं अनियमितता हो तो उसके खिलाफ संघर्ष करे। यदि विपक्ष की सक्रियता केवल औपचारिक बैठकों या सीमित राजनीतिक गतिविधियों तक सिमट जाए तो लोकतंत्र का संतुलन प्रभावित होता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दुर्ग शहर कांग्रेस के जिला अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल के सामने अब संगठनात्मक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण चुनौती है। यदि कांग्रेस को नगर निगम में प्रभावी विपक्ष के रूप में स्थापित करना है तो उसे ऐसा नेतृत्व देना होगा जो सड़कों पर संघर्ष करता दिखाई दे, जनता के बीच उपस्थित रहे और सत्ता पक्ष से वैचारिक दूरी बनाए रखते हुए जनहित के मुद्दों को मुखरता से उठाए।
यह किसी व्यक्ति विशेष के निजी जीवन या व्यक्तिगत संबंधों का विषय नहीं है। सार्वजनिक पद पर बैठे प्रत्येक जनप्रतिनिधि का मूल्यांकन उसके सार्वजनिक कार्यों, सक्रियता और जनता के प्रति जवाबदेही के आधार पर होना स्वाभाविक है।
अब सबसे बड़ा राजनीतिक प्रश्न यही है—क्या कांग्रेस संगठन नगर निगम में विपक्ष की भूमिका को और अधिक धार देने के लिए कोई बड़ा निर्णय लेगा, या फिर वर्तमान व्यवस्था को ही जारी रखेगा? इसका उत्तर आने वाले दिनों में संगठन की रणनीति और नेतृत्व के निर्णयों से स्पष्ट होगा।
मध्यप्रदेश, बिहार, उत्तराखंड जैसे भाजपा शासित राज्यों ने अपने प्रदेश के हित में मनरेगा के भार का विरोध किया
रायपुर/ शौर्यपथ / भाजपा शासित राज्य मध्यप्रदेश, बिहार, उत्तराखंड ने मनरेगा में राज्य पर पड़ने वाले बोझ का विरोध किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल ने मनरेगा के जी राम जी स्वरूप का अनुमोदन करते हुए केंद्र और राज्य का खर्च 60 एवं 40 प्रतिशत की मंजूरी दे दिया है। यह राज्य की जनता पर बोझ है। छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल को भी मध्यप्रदेश, बिहार और उत्तराखंड के समान इस कानून पर राज्य के हित में आपत्ति जताना था। यही नहीं भाजपा शासित राज्यों ने किसानी काम के समय मनरेगा के काम बंद करने पर भी आपत्ति जताया है जबकि छत्तीसगढ़ सरकार में बैठे नेताओं ने अपनी कुर्सी बचाने राज्य के हित में विरोध करने की हिम्मत नहीं दिखाई।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि ने कहा कि बड़ा प्रश्न यह है कि राज्य के वित्तीय संसाधन सीमित है। राज्य का सारा टैक्स तो जीएसटी के माध्यम से केंद्र लेता है फिर मनरेगा का बोझ राज्य पर डालने से राज्य के अन्य कार्य प्रभावित होंगे। भाजपा सरकार पिछले ढाई साल से वित्तीय रोना रोकर वैसे ही कोई नई योजना नहीं शुरू कर पाई है, अब मनरेगा का भार उठाने के बाद राज्य के और काम भी प्रभावित होंगे। यह फैसला राज्य की जनता के साथ धोखा है। राज्य को मनरेगा के मामले में केंद्र के सामने विरोध प्रकट करना था कि पूरा खर्च केंद्र उठाये या उसके लिए विशेष सहायता करे।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि राज्य मंत्रिमंडल के द्वारा मनरेगा के वित्तीय प्रावधान में 60-40 की मंजूरी दिये जाने का निर्णय राज्य के जनता पर अन्याय है। अभी तक मनरेगा केंद्र प्रवर्तित योजना थी, अब इसमें 40 प्रतिशत भाग राज्य को देना होगा। केंद्र सरकार की चाटुकारिता में साय सरकार ने राज्य के हितों का ख्याल नहीं रखा। राज्य के हिस्से को 40 प्रतिशत करने के केंद्र के फैसले का विरोध करने के बजाय इस राज्य मंत्रिमंडल के द्वारा अनुमोदित कर दिया गया। साथ ही इसके लिए 4000 करोड़ रू. का वित्तीय प्रावधान भी किया गया है, जबकि अभी तक राज्य के मनरेगा पर 6200 करोड़ रू. खर्च होते थे, इसका मतलब है भले घोषित तौर पर दिन बढ़ा दिया लेकिन सरकार की नीयत मनरेगा के काम में कटौती की है जब बजट कम है तो ज्यादा दिन कैसे काम देंगे? जीरामजी कानून पास हुए 8 महीने हो गये। अमूमन 15 जून के बाद मनरेगा के काम बंद हो जाते है। सरकार अब निर्णय ले रही मतलब इस फैसले से 4 माह तक काम नहीं होगा, उसके बाद काम शुरू होगा।
वार्ड 44 और 52 में आयोजित बैठकों में कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने, जनसंपर्क अभियान तेज करने और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने पर जोर
दुर्ग / शौर्यपथ / प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार दक्षिण ब्लॉक कांग्रेस कमेटी, दुर्ग द्वारा रविवार को वार्ड स्तर पर संगठनात्मक बैठकों का आयोजन किया गया। दक्षिण ब्लॉक अध्यक्ष गुरदीप सिंह भाटिया के नेतृत्व में पहली बैठक शाम 5 बजे वार्ड क्रमांक 44 गुरुघासीदास नगर तथा दूसरी बैठक शाम 6:30 बजे वार्ड क्रमांक 52 बोरसी में संपन्न हुई।
बैठकों में संगठन को बूथ स्तर तक सशक्त बनाने, कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने और आगामी कार्यक्रमों की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान सभी वार्ड एवं बूथों के रजिस्टर संधारित कर कार्यकर्ताओं की अद्यतन सूची तैयार करने के निर्देश भी दिए गए।
बैठक में निर्णय लिया गया कि कांग्रेस के आगामी कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से संचालित करते हुए जनसंपर्क अभियान को और तेज किया जाएगा। साथ ही कार्यकर्ताओं से केंद्र एवं राज्य सरकार की नीतियों को लेकर कांग्रेस का पक्ष घर-घर तक पहुंचाने का आह्वान किया गया।
इस अवसर पर दक्षिण ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष गुरदीप सिंह भाटिया ने कहा कि प्रदेश नेतृत्व के निर्देशानुसार प्रत्येक वार्ड और बूथ को सक्रिय किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि "कार्यकर्ता ही पार्टी की वास्तविक ताकत हैं। उनके सहयोग और समर्पण से संगठन को जमीनी स्तर तक और अधिक मजबूत बनाया जाएगा।"
बैठक में राय सिंह ढीकोला, अजय शर्मा, प्रकाश जोशी, पोषण साहू, नंदा राऊत, भूपेंद्र वर्मा, ललित उके, सुभाष पाल, एमन साहू, बंटी नवरंग, महेंद्र बघेल, कन्या देशलहरे सहित वार्ड अध्यक्ष, बूथ अध्यक्ष एवं बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
बैठक की कार्यवाही रजिस्टर में दर्ज कर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय को प्रेषित किए जाने की जानकारी दी गई।
(यह समाचार दक्षिण ब्लॉक कांग्रेस कमेटी, दुर्ग द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित है।)
निकाय चुनाव से पहले दावेदारों की सक्रियता तेज, स्टार प्रचारकों से लेकर महापौर प्रत्याशी तक नामों की चर्चा; सत्ता और संगठन की परीक्षा बनेगा रिसाली
भिलाई/रिसाली। रिसाली नगर निगम चुनाव की आहट के साथ ही राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी ने अभी भले ही आधिकारिक तौर पर अपने प्रत्याशियों की घोषणा नहीं की हो, लेकिन दोनों दलों में संभावित चेहरों को लेकर मंथन तेज हो गया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं हैं कि इस बार रिसाली का चुनाव केवल महापौर चुनने का नहीं, बल्कि दोनों प्रमुख दलों की संगठनात्मक ताकत और जनाधार की बड़ी परीक्षा भी होगा।
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार कांग्रेस की ओर से पूर्व मंत्री ताम्रध्वज साहू चुनाव प्रचार की कमान संभाल सकते हैं, जबकि भाजपा की ओर से विधायक ललित चंद्राकर प्रमुख रणनीतिक भूमिका में दिखाई दे सकते हैं। दोनों नेताओं के अनुभव और संगठनात्मक पकड़ को देखते हुए चुनावी मुकाबला बेहद रोचक होने की संभावना जताई जा रही है।
महापौर की दौड़ में कई चेहरे, कांग्रेस में सबसे आगे रामेश्वरी का नाम
महापौर पद के संभावित दावेदारों की चर्चा भी तेज हो गई है। कांग्रेस में रामेश्वरी दिवाकर गायकर का नाम सबसे प्रमुख दावेदार के रूप में सामने आ रहा है। वहीं हेमिन चतुर्वेदी भी टिकट की दौड़ में सक्रिय मानी जा रही हैं। हालांकि अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व और चुनावी समीकरणों के आधार पर लिया जाएगा।
भाजपा में भी दावेदारों की लंबी कतार
भाजपा में भी महापौर पद को लेकर कई नाम चर्चा में हैं। पार्टी के भीतर पार्वती ढीढ़ी का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। इसके अलावा चंद्रकली चतुर्वेदी, हिंदी डाहरे सहित अन्य संभावित दावेदार भी संगठन के संपर्क में बताए जा रहे हैं। उम्मीदवार चयन में संगठन, सामाजिक समीकरण और जीत की संभावना अहम आधार बन सकते हैं।
40 वार्ड, सीधा मुकाबला और प्रतिष्ठा की लड़ाई
रिसाली नगर निगम के 40 वार्डों में इस बार मुख्य मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच ही माना जा रहा है। हालांकि आम आदमी पार्टी और अन्य क्षेत्रीय दल भी चुनावी मैदान में सक्रिय होने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुकाबले का केंद्र कांग्रेस और भाजपा ही रहेंगी।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के कारण चुनाव में सत्ता पक्ष को प्रशासनिक अनुभव का लाभ मिल सकता है, जबकि कांग्रेस स्थानीय मुद्दों और अपने पारंपरिक जनाधार के भरोसे मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है।
28 जून तक नामांकन, ऑनलाइन मतदान से होगा नए अध्यक्ष का चुनाव; संगठन ने अपनाया निष्पक्ष रुख
दुर्ग। दुर्ग शहर युवा कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव ने अब पूरी तरह राजनीतिक सरगर्मी पैदा कर दी है। नामांकन प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और 28 जून तक नामांकन दाखिल किए जा रहे हैं। चुनाव की तिथि की आधिकारिक घोषणा भले अभी शेष हो, लेकिन यह तय है कि मतदान पूरी तरह ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से कराया जाएगा।
वर्तमान चुनावी परिदृश्य में ऋषि साहू और मनीष सोनवानी सबसे मजबूत दावेदारों के रूप में उभरकर सामने आए हैं। दोनों युवा नेता लगातार कार्यकर्ताओं और युवा मतदाताओं के बीच जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं। संगठन के भीतर भी दोनों की सक्रियता और स्वीकार्यता को लेकर सकारात्मक चर्चा है।
सूत्रों के अनुसार, रौनक दुबे ने भी अध्यक्ष पद के लिए अपनी दावेदारी प्रस्तुत की है, जिससे चुनावी मुकाबला और अधिक दिलचस्प हो गया है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों की नजर फिलहाल मुख्य रूप से ऋषि साहू और मनीष सोनवानी के बीच बनते मुकाबले पर टिकी हुई है।
संगठन ने नहीं खोले अपने पत्ते
इस चुनाव की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि संगठन ने किसी भी प्रत्याशी के समर्थन में आधिकारिक रुख नहीं अपनाया है। संगठन के जिम्मेदार पदाधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि "सभी प्रत्याशी हमारे अपने हैं। जो कार्यकर्ताओं का अधिक विश्वास प्राप्त करेगा, वही विजयी होगा। संगठन पूरी तरह निष्पक्ष है।"
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि संगठन का यह निर्णय भविष्य में किसी प्रकार की गुटबाजी से बचने और लोकतांत्रिक परंपरा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
35 वर्ष तक के युवाओं को मिलेगा मतदान का अधिकार
युवा कांग्रेस के संगठनात्मक नियमों के अनुसार अध्यक्ष पद के चुनाव में 35 वर्ष तक की आयु वाले सदस्य ही मतदान कर सकेंगे। मतदान ऑनलाइन होने से युवा मतदाताओं में भी उत्साह का माहौल दिखाई दे रहा है।
जीत किसी की भी हो, संगठन रहेगा मजबूत
चुनावी प्रतिस्पर्धा के बावजूद सबसे सकारात्मक संदेश दोनों प्रमुख दावेदारों की ओर से सामने आया है। ऋषि साहू और मनीष सोनवानी दोनों ने स्पष्ट कहा है कि चुनाव परिणाम चाहे जो भी हो, वे मिलकर संगठन को बूथ स्तर तक और अधिक मजबूत बनाने का कार्य करेंगे। दोनों नेताओं ने आपसी सामंजस्य और कांग्रेस संगठन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
वरिष्ठ नेताओं का मिल रहा निष्पक्ष सहयोग
इस पूरे चुनाव में वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं द्वारा भी निष्पक्ष भूमिका निभाई जा रही है। संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी सभी दावेदारों को समान अवसर देने और चुनाव प्रक्रिया को लोकतांत्रिक एवं पारदर्शी बनाने पर जोर दे रहे हैं।
बूथ स्तर तक संगठन विस्तार पर रहेगा फोकस
दुर्ग युवा कांग्रेस का यह चुनाव केवल नए अध्यक्ष के चयन तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे आगामी राजनीतिक चुनौतियों की तैयारी के रूप में भी देखा जा रहा है। कांग्रेस संगठन लगातार बूथ स्तर तक अपनी सक्रियता बढ़ाने की रणनीति पर कार्य कर रहा है और माना जा रहा है कि नया युवा अध्यक्ष संगठन की इस रणनीति को और गति देगा।
अब सभी की निगाहें ऑनलाइन मतदान की तिथि की आधिकारिक घोषणा और नामांकन प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद बनने वाले अंतिम चुनावी समीकरणों पर टिकी हुई हैं।
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