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March 07, 2026
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राजनीति

राजनीति (1192)

शौर्यपथ लेख । सरोज पाण्डेय छत्तीसगढ़ की भाजपा नेत्री जिसने राजनैतिक शुरुवात दुर्ग निगम के महापौर पद से शुरू की और एक ही समय मे महापौर , विधायक , सांसद होने का गौरव प्राप्त किया । राजनीतिक घटनाक्रम में एक ऐसा समय भी आया जब डॉ सरोज पाण्डेय ना ही महापौर थी ना विधायक थी और ना सांसद थी तब भी दुर्ग और छत्तीसगढ़ में चर्चा तेज हो गई कि अब सरोज पाण्डेय का राजनैतिक सफर का अंत हो गया अब सक्रिय राजनीति से दूर हो गई तभी अचानक केंद्रीय संगठन में सरोज पाण्डेय को महासचिव के पद से नवाजा गया और महाराष्ट्र का प्रभारी बना दिया गया लगातार 5 साल तक निर्विवाद एक मात्र महिला महासचिव होने का गौरव सरोज पाण्डेय को प्राप्त हुआ । और एक बार फिर विरोधियों की बोलती बंद हो गई । संगठन में डॉ सरोज पाण्डेय के कद को जब जब छोटा समझने की कोशिश हुई तब तब उनका कद बढ़ते गया । वर्तमान में भी ऐसा ही समय आया है जब भाजपा के अध्यक्ष ने डॉ सरोज पाण्डेय को संगठन में कोई जगह नही दी भाजपा अध्यक्ष के जम्बो टीम में से डॉ पाण्डेय के नाम नही होने की खबर लगते ही एक बार फिर राजनैतिक चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया कि अब सरोज पाण्डेय को संगठन में कोई महत्त्व नही दिया जा रहा विपक्षी इसे छत्तीसगढ़ की महिला का अपमान बता रहे तो खुद की पार्टी के लोग इसे घमंड का अंत बता रहे थे किंतु इन सब बातों में लोग ये भूल गए कि सालो पहले जिस सरोज पाण्डेय ने निगम से राजनीतिक जीवन का सफर आरंभ किया और केंद्र की राजनीति तक का सफर किया जिसमें बहुतेरे विरोध के बाद भी सीढ़ी दर सीढ़ी अपना सफर तय किया वो आज जिस मुकाम पर है वहाँ तक पहुंचने में छत्तीसगढ़ का कोई भी भाजपा नेता सफलता हांसिल नही कर सका । सरोज पाण्डेय जिस संगठन का हिस्सा है वह एक पद एक व्यक्ति की बात परिभाषित होती है । विरोधी शायद इस बात को भी भूल गए कि जब भी डॉ सरोज पाण्डेय को संगठन एक कदम पीछे करती है तो भविष्य में दो कदम आगे बढ़ा देती है । आज सरोज को संगठन ने महासचिव पद से हटाया तो हो सकता है आगे कोई बड़ा पद उनके लिए बना रही हो । वर्तमान में मोदी सरकार के मंत्री मंडल में 57 सदस्य है और 81 सदस्य मंत्री मंडल शामिल हो सकते है उस लिहाज से 24 पद पर मंत्री बनाया जा सकता है । जैसा कि सभी को मालूम है कि सरोज पाण्डेय अभी राज्य सभा सदस्य है और 2022-23 तक इस पद में रहेंगी । महासचिव पद से हटाने के बाद इस बात की भी चर्चा जोरों पर है कि उन्हें संगठन से हटा कर मंत्री मंडल में शामिल किया जा सकता है । डॉ पाण्डेय प्रखर प्रवक्ता है और वर्तमान में छत्तीसगढ़ में कोई भी ऐसा भाजपा नेता भूपेश सरकार को घेरने में उतना सफल नही हो पा रहा जितनी उम्मीद केंद्रीय संगठन को है ऐसे में ये भी कयास लगाए जा रहे है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह देने के साथ संगठन छत्तीसगढ़ में डॉ सरोज पाण्डेय को मुख्य चेहरा बना सकती है । वर्तमान में भले ही महासचिव पद से सरोज पाण्डेय को हटा दिया गया किन्तु इसका ये मतलब निकलना कि अब डॉ पाण्डेय का कद घट गया जल्दबाजी होगी । ये राजनीति है यह एक कदम पीछे हटने का मतलब हार नही किसी बड़ी जीत की तैयारी माना जाता है । आगे जो भी हो किन्तु इतना तो तय है कि सरोज पाण्डेय का कद संगठन में आज भी बड़ा है और ये सूची आने वाले बड़े फेरबदल का एक आगाज़ मात्र है ..( शरद पंसारी - संपादक शौर्यपथ दैनिक समाचार पत्र )

भिलाई / शौर्यपथ / भिलाई की जनता को ठगने वाले, झूठी वाहवाही लूटने वाले, विकास कार्यों में छोटी सोच रखकर दलगत राजनीती करने वाले नेता अब अपने आप को बड़ा पाकसाफ बता रहे हैं। पहले वे खुद अपने बारे में सोचें अपने कार्यकाल में भाजपाई वार्डों में हुए एकतरफा बंदरबाट और कांग्रेसी वार्डों और वहाँ की जनता को झुनझुना पकड़ाया है इसलिए पहले वे देखें कि उन्होंने अपने कार्यकाल में क्या किया है। वोट मांगने लोगों को भरमाते रहे, विकास कार्य के नाम में सिर्फ भूमिपूजन करते रहे। यही नहीं टाउनशिप में एलईडी लाइन लगाने के नाम पर सरकार का लाखों रूपए का भ्रष्टाचार किया जिसका कोई माई-बाप नही है और स्थिति यह कि आज टाउनशिप के वार्डों जगह जगह में सिर्फ अंधेरा छाया रहता है।
यही नहीं जब पूरे शहर में डेंगू महामारी छाई थी। बच्चों सहित कई लोगों की जान चली गई थी पूरे शहर में मातम छाया था। तब पूर्व मंत्री अपने सेक्टर 9 बंगले में एसो आराम से नगर निगम पर आरोप लगाने की राजनीति कर रहे थे। तब उन्हें जनता का दुख नहीं दिखा। आज भी जब कोरोना महामारी का दौर चल रहा है ऐसे में भी मंत्री को कभी फुर्सत नहीं मिली की वे एक दिन भी जनता के सहयोग के लिए अपने बंगले से बाहर निकले और गरीबों की मदद करें।
कोरोना काल में अपने दल के पार्षदों तक को जनता के पास न जाने और घर पर रहने की सलाह देने वाले पूर्व मंत्रीजी का पार्षदों पर बयान देना उनकी गिरती लोकप्रियता और खत्म होती साख को दर्शाता है जिससे वे अपना आपा खो बैठे हैं और इस तरह के बयानबाजी करने को मजबूर हो गए हैं।
ऐसे वोट लोभी, स्वार्थी नेता के अंध भक्त आज उनकी बढ़ाई कर रहे हैं। पर वे भूल रहे हैं कि कोरोनाकाल में पूर्व मंत्रीजी स्वयं लुप्त हैं। जो अन्य भक्त पार्षद अपने नेता की बढ़ाई रहे हैं उसने भी इस कोरोना काल में उनकी कोई मदद नहीं की बल्कि भिलाई के युवा महापौर ने पूरे शहर की जनता को अपना परिवार माना और वे खुद लगातार जुटे रहे। कोरोना से अपने टीम के साथ निरंतर लड़ते रहे। युवा महापौर और विधायक ने एक कोरोना से लड़ाई में एक दिन भी घर पर ना बैठकर लगातार आमजन, अधिकारियों-कर्मचारियों और पार्षदों से संवाद बनाये रखा और तो और कोरोना से जंग के दौरान कोरोना संक्रमित भी हुए। जनता के लिए अपनी जांन तक जोखिम में डाली। लेकिन जनता के आर्शीवाद और प्यार ने उन्हें फिर से स्वस्थ्य कर दिया और वे फिर से कोरोना की जंग जीतने जनता के साथ खड़े है। पार्टी भेदभाव के परे दलगत राजनीति से कोसो दूर केवल भिलाई और भिलाई की जनता के लिए समर्पित होकर नि:स्वार्थ भाव से महापौर ने हर क्षेत्र में संभव सकारात्मक प्रयास किया है चाहे सभी 70 पार्षदों को पार्षद-निधि की राशि कोराेना वायरस से लड़ने खर्च करने की स्वीकृति शासन से मांग कर लाए,चंदूलाल को 800 बिस्तर का कोविड अस्पताल बनाना हो या फिर शंकराचार्य को संक्रमितों के लिए आरक्षित करवाना हो या फिर बीएसपी से अतिरिक्त वेंटीलेटर की व्यवस्था करने के लिए आदेशित किया, मुख्यमंत्री जी से माँग कर डोनेशन आन व्हील्स की शुरुवात की समाज के सबसे निचले क्रम तक हर जरूरतमंद के लिए राशन व सामग्री जुटाना हो या अन्य मदद की व्यवस्था करना हो महापौर जी सदैव आगे रहे। लेकिन महापौर ने इस बात का कभी बखान नहीं किया।

रायपुर / शौर्यपथ / भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल द्वारा नक्सल समस्या पर दिए गए बयान पर कांग्रेस ने कहा कि जिनके राज में नक्सल समस्या को खाद, पानी मिली वही ज्ञान दे रहे है। प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाने के पहले भारतीय जनता पार्टी और बृजमोहन अग्रवाल को अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। प्रदेश आज नक्सलवाद के दंश को झेल रहा है तो उसके पीछे भारतीय जनता पार्टी की रमन सरकार जबाबदेह है । जिसके राज में नक्सलवाद बस्तर के तीन ब्लाकों से निकल कर प्रदेश के 14 जिलो तक पहुंच गया।
उस रमन सरकार में बृजमोहन अग्रवाल गृहमंत्री सहित अनेक प्रमुख विभागो के मंत्री पूरे पन्द्रह साल तक रह चुके है । जब तक सत्ता में थे तब तक न भाजपा को और बृजमोहन को नक्सल समस्या की कोई चिंता थी। पन्द्रह सालो में नक्सल समस्या से निपटने के लिए भाजपा सरकार ने किसी भी प्रकार की ठोस राजनैतिक, सामाजिक आर्थिक और सामरिक नीति नही बनाई । हर बड़े नक्सल वारदात के बाद उसे नक्सलियों की कायराना हरकत बता कर भाजपा के हुक्मरान अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लेते थे।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि भाजपा के राज में बस्तर का आम आदमी नक्सलवाद और सुरक्षा बलों के दो पाटों में पीस रहा था । राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्प्ष्ट कहा कि उनकी सरकार बस्तर में रहने वाले नागरिकों, व्यापारियों, पत्रकारों, सुरक्षा बलों के जवानों जन प्रतिनधियों की मंशा के अनुरूप काम करेगी ।सरकार बस्तर वासियों की मंशा के अनुरूप वहां काम कर रही है । बस्तर के आम नागरिकों की सुरक्षा सरकार का प्रमुख ध्येय है। सुरक्षा बल के जवान उसी दिशा में काम कर रहे हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि बस्तर में भाजपा सरकार ने वहाँ के नागरिकों की संविधान प्रदत्त अधिकारों को लंबित कर दिया था। नागरिकों को छोटी-छोटी धाराओं में वर्षो तक बन्द रखा था। आदिवासियों को नक्सली बता कर जेलों में डाल दिया था लेकिन भाजपा सरकार उनके विरुद्ध आरोप साबित नही कर पाती थी ।बस्तर में भाजपा की रमन सरकार ने आदिवासियों के खिलाफ विद्वेषवश झूठे मुक़दमें बनवाये थे कुछ लोगो के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज गिरफ्तारियां कर ली गयी उनके खिलाफ वर्षो तक चालान नही प्रस्तुत किया ।न्यायालय में सुनवाई नही शुरू हुई । जिन धाराओं के तहत उनकी गिरफ्तारियां की गई थी उन धाराओं में दोष सिद्ध हो जाने पर उतनी सजा नही थी जितने दिनों से वे आदिवासी न्याय की आस में जेलों में निरुद्ध रखे गए है।
कांग्रेस की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने वर्षो में जेलों में बंद निर्दोष आदिवासियों की रिहाई का निर्णय लिया ।इसके लिए जस्टिस पटनायक की अध्यक्षता में कमेटी भी बनाई गई है जो बैठक कर मामलों की समीक्षा कर रही है । कुछ आदिवासियों की रिहाई के कानूनी अड़चने दूर भी की जा रही है। भाजपा को इस प्रकार निर्दोषों को जेलों में बंद करने के लिए बस्तर की जनता से सार्वजनिक माफी मांगनी चाहिये। प्रदेश में नक्सल के विस्तार को नही रोक पाने की नैतिक जिम्मेदारी भी स्वीकार करनी चाहिये।

रमन सिंह को मिला कमीशन खोरी और भ्रष्टाचार के हिस्सा पहुंचाने का पुरस्कार
छत्तीसगढ़ से महिला एवं आदिवासी वर्ग को भाजपा केंद्रीय संगठन में दायित्व नहीं मिलना छत्तीसगढ़ अपमान

 रायपुर / शौर्यपथ / भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी से सरोज पांडे को महासचिव पद से हटाये जाने पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी प्रदेश प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि सरोज पांडे जी को महासचिव पद से हटाकर महिला शक्ति का अपमान किया गया है। आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत के छत्तीसगढ़ दौरा में आने के बाद ही तय हो गया था कि छत्तीसगढ़ की महिलाओं एवं आदिवासी वर्ग को भाजपा के केंद्रीय संगठन में स्थान नहीं मिलेगा। भारतीय जनता पार्टी में गुटबाजी चरण सीमा पर है, गुटबाजी के चलते रमन सिंह स्थापित रहे लेकिन जो मातृ-शक्ति है भारतीय जनता पार्टी में उसको उपेक्षित किया गया है। सरोज पांडे भारतीय जनता महिला मोर्चा का नेता रही है, महिलाओं का प्रतिनिधित्व करती थी भाजपा में उसको हटाकर एक बार फिर से महिला विरोधी चरित्र का उजागर किये है। बहुत ही दुख का विषय है कि भाजपा में महिलाओं का सम्मान नहीं है। भाजपा में चाटुकारिता प्रभावी है भाजपा में गुटबाजी चरम सीमा पर है।
कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने सत्ता में रहते कमीशन खोरी और भ्रष्टाचार का हिस्सा भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचाया उसका पुरस्कार उनको मिला है। भाजपा के केंद्रीय संगठन में प्रदेश के एकमात्र महिला नेत्री को बाहर करना एवं आदिवासी वर्ग को दायित्व नहीं मिलना भाजपा के महिला एवं आदिवासी वर्ग विरोधी को उजागर करता है।

रायपुर । शौर्यपथ ।वरिष्ठ कांग्रेस नेता राजेश बिस्सा ने स्पीक अप फॉर किसान के लिए बोलते हुए आरोप लगाया की लोकसभा में मिले बहुमत के आधार पर भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली नरेंद्र मोदी की सरकार लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नष्ट कर भारत में लूट का तंत्र विकसित कर देश को मल्टिनेशनल कंपनियों का गुलाम बना देना चाहती है। कांग्रेस ने जिस जमींदार प्रथा को खत्म किया था उसे भाजपा वापस लाना चाहती है। बिस्सा ने कहा की मोदी सरकार ने वर्तमान में संपन्न हुए लोकसभा व राज्यसभा के सत्र में कुल 08 दिनों में 20 से अधिक विधेयक सत्ता की दादागिरी के बल पर पारित कर लिए हैं। आज हम के लिए आप के मध्य उपस्थित हुए आपको मैं बताना चाहूंगा जो विभिन्न विधेयक केंद्र सरकार ने लोकसभा और राज्यसभा में सत्ता की ताकत के आधार पर पारित किए हैं उनमें से तीन बिल ऐसे हैं जो संपूर्ण भारत वर्ष को प्रभावित करेंगे। ये बिल हैं - 1. किसान उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक 2020 2. किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) मूल्य आश्वासन कृषि सेवा विधेयक 2020 3. आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020 बिस्सा ने आरोप लगाया की नरेंद्र मोदी जी की सरकार ने इन बिलों के माध्यम से अपने पूंजीपति मित्रों के लिए 130 करोड़ भारतवासियों को लूटने एवं देश के खजाने को लुटाने हेतु मार्ग बना कर देने का काम किया है। आज अगर हमने इसका विरोध नहीं किया तो राष्ट्र के खजाने के साथ साथ आने वाली कई पीढ़ियां शोषण का शिकार रहेंगी। इन कानूनों की आड़ में एक खतरनाक कानूनी तंत्र विकसित कर लिया है मोदी सरकार ने, जिसको हमें बहुत गंभीरता से लेना चाहिए। बिस्सा ने कहा की कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक, 2020 के अनुसार कृषि उपज मंडी समितियों जैसी सरकारी मंडियों के दायरे के बाहर व्यापारिक मंडिया बनाई जाएंगी। जहां किसान अपनी उपज बेच सकेंगे और तो और राज्य सरकारें इन इलाकों पर कोई टैक्स नहीं लगा सकेंगी। लेकिन इस कानून में इस बात को शामिल नहीं किया गया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कृषि उपज को खरीदने को व्यापारी बाध्य रहेंगे। इसके दुष्परिणाम यह निकलेंगे कि पहले तो व्यापारी किसानों को उनकी उपज का पर्याप्त मूल देगा और जब अर्थाभाव के कारण धीरे-धीरे सरकारी मंडियां अस्तित्वहीन हो जाएंगी उस दिन से किसान समर्थन मूल्य पाने के लिए भी तरस जाएगा। भाजपा सरकार इस बात को अच्छी तरीके से जानती है और उसके मन में खोट है इसलिए वह न्यूनतम समर्थन मूल्य की बात को विधेयक में जोड़ना नहीं चाहती उसका तो एकमात्र उद्देश्य है अपने पूंजीपति मित्रों को लाभ पहुंचाना। इसी तरह किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) मूल्य आश्वासन कृषि सेवा विधेयक 2020 में कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग (अनुबंध खेती) की व्यवस्था की गई है।सरकार का कहना है कि इससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हो जाएगी। जबकि वास्तविकता तो यह है कि सरकार किसान और बिचौलियों के बीच से हट जाएगी और सीधे तौर पर लूटने का अधिकार बिचौलियों को दे देगी।इस बिल के माध्यम से कांग्रेस सरकार ने जिस तरह जमींदार प्रथा को खत्म किया था वापस वह उस जमींदार प्रथा को स्थापित करने का प्रयास है केंद्र सरकार ने आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020 में संशोधन कर अनाज, दलहन, आलू ,प्याज खाद्य पदार्थों को आवश्यक वस्तु की सूची से बाहर किया गया है। इसका प्रभाव ये होगा कि इन वस्तुओं के उत्पादन, वितरण और भंडार पर किसी तरह का प्रतिबंध नहीं रहेगा। जमाखोरों की चांदी हो जायेगी। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत दिये जाने वाले राशन को जमाखोरों से खरीदने के लिये मजबूर हो जायेंगी सरकारें। एक ओर तो प्रति वर्ष राष्ट्र का लाखों करोड़ रुपया मुनाफाखोरों की जेब में जायेगा दूसरी ओर आम जनता भी महंगाई का सामना करने को बेबस नजर आयेगी। बिस्सा ने कहा की इन तीनों कानूनों को पारित करने के पीछे मोदी सरकार का एक ही लक्ष्य है कि देश भले ही आजाद कहलाए, भले ही यहां की चुनाव प्रक्रिया लोकतांत्रिक कहलाए, लेकिन देश की आत्मा किसान व अर्थव्यवस्था को चंद पूंजीपतियों का गुलाम बना दिया जाए। बिस्सा ने अपील है कि देशवासियों को मोदी सरकार के षड्यंत्र भरे निर्णयों पर पूरी ताकत के साथ खड़ा होना चाहिए वरना सिर्फ पछताना पड़ेगा।

दुर्ग । शौर्यपथ । कृषि बिल को लेकर प्रदेश कांग्रेस के महासचिव राजेंद्रसाहू ने एक बार फिर केंद्र सरकार पर हमला बोला । राजेन्द्र साहू ने कहा कि केंद्र सरकार की कृषि बिल नीति से किसानों को नही उद्योगपतियों को फायदा होगा । केंद्र सरकार अगर किसानों के हितों की सोंचती तो स्वामीनाथन की रिपोर्ट को आधार बना कर अनाज के न्यूनतम समर्थन मूल्य का डेढ़ गुना निर्धारित करती किन्तु वर्तमान में जो बिल पास हुआ उससे किसानों को कोई फायदा नही होगा उससे ज्यादा फायदा बड़े बड़े उद्योगपतियों को होगा । केन्द्र की भाजपा सरकार द्वारा लागू कृषि विधेयक किसानों के साथ धोखा है बिलकुल नोटबंदी जी एस टी एवं बीस लाख करोड़ रुपये के पैकेज जैसा है जिससे आमजनता मज़दूर व किसानों सहित छोटे व्यवसायियों को किसी तरह का राहत या लाभ नही मिलता।इसलिए केन्द्र सरकार द्वारा लागू कृषि विधेयक किसानों के हित में तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाये। राजेन्द्र साहू ने अपनी बात speeakupfarmer के तहत फेसबुक लाइव के माध्यम से अपनी बात रखी । देखिये राजेन्द्र साहू ने क्या कहा ...

दुर्ग / शौर्यपथ / 15 साल बाद कांग्रेस सत्ता में आयी भाजपा के कार्यकाल के भ्रष्टाचार की बात करते करते और सुशासन देने का वादा करते हुए कांग्रेस चुनावी मैदान में उतरी थी . प्रदेश की जनता ने कांग्रेस की चुनावी वादों का सम्मान करते हुए सत्ता की चाबी सौपी किन्तु कांग्रेस के कुछ नेता ऐसे है जो प्रदेश सरकार की छवि खराब करने की अपने तरफ से पुरजोर कोशिश कर रहे है इन्ही कोशिशो में दुर्ग जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती शालिनी यादव के पति और मंत्री के करीबी रिवेंद्र यादव द्वारा शासन के पैसे गबन करने का आरोप लग रहा है कहते हैं जब सैयां भये कोटवार तो डर काहे का ये वाकया चरितार्थ हो रहा है दुर्ग जिले के ग्राम पंचायत बोरई में जहां रिवेंद्र यादव, जो वर्तमान जिला-पंचायत दुर्ग अध्यक्ष शालिनी यादव के पति हैं। साथ ही पंचायती राज के उच्च पद पर आसीन है वही रिवेंद्र यादव प्रदेश के कद्दावर मंत्री के करीबी भी है . राजनितिक हल्को में ये चर्चा है कि शालिनी यादव को जिला पंचायत अध्यक्ष बनाने में इन्ही मंत्री की महत्तवपूर्ण भूमिका रही थी . ग्राम पंचायत बोरई के सरपंच रहते हुए उन्होंने अपने साथी वेंडर सिन्हा ट्रेडर्स नगपुरा के संचालक ताम्रध्वज सिन्हा से मिलकर 21 लाख 70 हजार रुपए डकार दिए, निर्वाचन के 6 महीने बाद भी कई नोटिस दिए गए पर पैसा पंचायत को वापिस नही लौटाया गया। अब चूंकि जनपद व जिला-पंचायत उनके अधीनस्थ व नतमस्तक हैं , जिला प्रशासन की क्या मजाल की शासन के पैसों की वसूली कर पाए ।
आपको बता दे की ग्राम पंचायत बोरई के पूर्व सरपंच रिवेन्द्र यादव के द्वारा मनरेगा के तहत ग्राम बोरई में निजी शौचालय निर्माण करवाया गया व उसकी राशि का भुगतान 13 वे वित्त व 14वें वित्त आयोग के तहत किया गया। मनरेगा के तहत बनवाए गए शौचालयों का कुल लागत 21लाख 70 हजार रूपए एफ.टी.ओ. के माध्यम से तत्कालीन सरपंच रिवेन्द्र यादव (जो उस समय सरपंच संघ का अध्यक्ष भी था) के द्वारा जनपद पंचायत दुर्ग से सिन्हा ट्रेडर्स संचालक ताम्रधव्ज सिन्हा जो उसका करीबी आदमी व कार्यकर्ता है के खाते में जमा करवाया गया। लेकिन 3 वर्षा के बाद भी बोरई के पूर्व सरपंच रिवेन्द्र यादव ने सिन्हा ट्रेडस के मालिक ताम्रधव्ज सिन्हा से 21 लाख 70,000 रूपए की राशी को ग्राम पंचायत के खाते में वापस नहीं लिया।
भाजपा नेता अभिषेक जैसवाल की शिकायत के बाद मामला आया सामने
जिला भाजयूमों के नेता अभिषेक जैसवाल के नेतृत्व में जिला कलेक्टर को मुख्यमंत्री औऱ जिलाधिश के नाम ज्ञापन सौंप कर मामले में तुरंत कार्यवाही करने को कहा है, उनका कहना है की यदि 7 दिवसों के भीतर उक्त राशी का समयोजन नहीं किया गया और उक्त आरोपीयों के उपर एफ.आई.आर नहीं की तो भाजयुमों के कार्यकर्ता बड़ा उग्र धरना प्रदर्शन व क्षेत्रीय विधायक का पुतला दहन करेंगे।
पंचायत सचिव व जनपद के कर्मचारियों की भी कार्य प्रणाली संदिग्ध :- उक्त मामला 3 साल पुराना है ,लेकिन वसूली के लिए जनपद ने एक भी नोटिस नहीं दिया जिससे यह कहना उचित है कि , कद्दू कट गया सब में बट गया। एक ओर जिस शौचालय निर्माण का जिस पार्टी के लोग छाती पिट पिट कर विरोध करते नजऱ आते थे वहीं मौका मिलते ही उसका पैसा दबाने में पीछे भी नहीं हटे है।

क्या है मामला
दरअसल ग्राम पंचायत बोरई में मनरेगा के अंतर्गत निजी शौचालय निर्माण किया गया था। जिसमें ग्राम पंचायत द्वारा हितग्राहियों के द्वारा कार्य प्रारंभ करने हेतु ग्राम पंचायत मद के 13वें व 14वें वित्तीय से प्रति 217 हितग्राहियों का प्रति शौचालय 10 हजार के दर से 21 लाख 70 हजार का भुगतान जनपद पंचायत दुर्ग के द्वारा एफ.टि.ओ के माध्यम से सिन्हा ट्रेडर्स के खाते में जमा करवाया जा चुका है, लेकिन सिन्हा ट्रेडर्स के द्वारा 3 साल बीत जाने के बावजूद यह राशि ग्राम पंचायत के खाते में जमा नहीं करवाया गया।
इस राशि का न तो मनरेगा के तहत राशि मिलने से समायोजन किया गया और न ही शौचालयों का निर्माण पूरा किया गया। शौचालय निर्माण के बाद सम्पूर्ण राशि प्राप्त होने के बाद उस राशि से चौदहवें वित्त आयोग से उपयोग की जाने वाली राशि को उसमें समायोजन करना था जो कि नही हुआ।
बड़े नेताओं के साथ सांठ-गांठ के कारण नहीं हो रही कार्यवाही
रिवेंद्र यादव सत्ता पक्ष का नेता है व वर्तमान में उक्त व्यक्ती की पत्नी शालिनी यादव दुर्ग जिला पंचायत की अध्यक्ष है। पूर्व में रिवेन्द्र यादव सरपंच का अध्यक्ष भी रह चुका हैं और साथ ही रिवेन्द्र यादव दुर्ग के बड़े नेता और मंत्री का करीबी भी हैं। इस कारण जिला व जनपद पंचायत के अधिकारी इस मामले को दबाने की भरसक प्रयास कर रहें हैं। जनता के 21 लाख 70 हजार की राशि का गबन
रिवेन्द्र यादव व ताम्रधव्ज सिन्हा(सिन्हा ट्रेडर्स नगपूरा) के द्वारा सरेआम आमजनता का 21लाख 70 हजार रूपए चुना लगाया गया है, जिसका 3 साल का ब्याज ही 1 लाख से ज्यादा होता है। अत: आपके पार्टी के नेता और मंत्री के करीबी व्यक्तियों के द्वारा केंद्र सरकार की लोक कल्याणकारी योजनाओं का पैसा खाकर जनहित का दंभ भरना कदाचित छत्तीसगढ़ की आम जनता के साथ बेईमानी हैं।

मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन में इन मुद्दों को भाजयुमो ने प्रमुखता से उठाया
1. क्यो की रकम स्थांतरण तत्कालिन सरपंच रिवेन्द्र यादव कि सहमती से दिया गया था एवं अपने कार्यकाल पूर्ण होने तक उसके द्वारा एक बार भी रकम वापस नहीं मांगा गया, इससे यह बात स्पष्ट होता है की सिन्हा ट्रेडर्स औऱ सरपंच दोनों बराबरी के जिम्मेदार हैं।
2. शौचालय निर्माण राशी का भुगतान पंचायत के पैसों से किया गया, जो कि दूसरे मद का था, यह भी जांच का विषय हैं।
3. तीन साल से 21 लाख 70 हजार की अनियमितता के बाद भी जनपद पंचायत द्वारा साल दर साल कैसे ऑडिट किया जा रहा है, यह भी जांच का विषय है।
अत: उक्त राशि का ब्याज सहीत वसूला जांए, साथ ही अगर राशि जमा नहीं कि गई तो उक्त आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार किया जांए।

दुर्ग । शौर्यपथ । दुर्ग शहर मध्य ब्लाक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अलताफ अहमद ने कृषि विधेयक को लेकर केंद्र सरकार के दावे को झूठा करार दिया है। अलताफ ने कहा कि यह विधेयक पूरी तरह किसान विरोधी है। केंद्र सरकार की नीतियों से देश के करोड़ों किसानों का विश्वास उठ चुका है। कृषि प्रधान देश में पूरी खेती की व्यवस्था को मोदी सरकार ने कार्पोरेट जगत के हवाले कर दिया है। केंद्र सरकार अगर वास्तव में किसानों का हित चाहती है तो पूरे देश में भूपेश सरकार की नीतियों को लागू करना चाहिए। अलताफ ने कहा कि मोदी सरकार के इस बिल से किसान तबाह हो जाएंगे। विधेयक लागू होने के बाद देश के किसान फसल की पैदावार के लिए जी-तोड़ मेहनत करेंगे और इसका मुनाफा बड़े औद्योगिक-व्यवसायिक घराने कमाएंगे। अलताफ ने सवाल किया कि अगर यह बिल किसानों के फायदे के लिए है तो हरियाणा, पंजाब, मप्र सहित अन्य राज्यों में किसान बिल के विरोध में सड़कों पर आंदोलन किसलिए कर रहे हैं। अलताफ ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों से कर्जमाफी और 25 सौ रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी का वादा किया था। यह वादा सरकार बनाने के दो दिनों के भीतर लागू कर दिया गया। दूसरी ओर मोदी सरकार ने 6 साल पहले लोकसभा चुनाव में किसानों की आय दोगुना करने का वादा किया था। यह वादा आज तक पूरा नहीं किया गया। केंद्र सरकार के किसान विरोधी फैसलों के कारण बड़े राज्यों में किसान आत्महत्या कर रहे हैं। अलताफ ने कहा कि मोदी सरकार अगर किसानों का भला चाहती है तो धान, गेहूं, मक्का,जौ सहित सभी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करने का फैसला करे। केंद्र सरकार को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की किसान नीतियों को पूरे देश में लागू करना चाहिए। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के फैसलों से छत्तीसगढ़ के किसान बेहद खुश हैं। केंद्र सरकार को भी भूपेश सरकार की नीतियों को फालो करना चाहिए। -0-0-0-0-

दुर्ग / शौर्यपथ / नगर निगम की सामान्य प्रशासन विभाग की प्रभारी जयश्री जोशी ने भाजपा पार्षदों के आरोपो का जवाब देते हुए दोहराया है कि शहर में बार-बार पानी सप्लाई बंद होने और स्ट्रीट लाइट व्यवस्था ठप होने के लिए पिछले 20 साल में पूर्व महापौरों की कार्य प्रणाली जिम्मेदार है। जयश्री ने कहा कि शहरवासियों की फिक्र किए बगैर जिस तरह से 20 साल तक नगर निगम का पूरा सिस्टम चौपट रहा। सही मायनों में जनता की समस्याएं दूर न करने के कारण ही शहर का समग्र विकास नहीं हो पाया।
जयश्री ने कहा कि भाजपा पार्षदों को 20 साल के कार्यकाल का महिमा मंडन करने से पहले यह स्पष्ट कर दें कि अगर बहुत अच्छे काम किए गए हैं तो दुर्ग में भाजपा विधानसभा और दुर्ग नगर निगम चुनाव में कैसे हार गई। जयश्री ने तंज कसते हुए कहा कि पिछले कार्यकाल में महापौर चंद्रिका चंद्राकर के कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाने वाले भाजपा पार्षद बताएं कि खुद के वार्ड में वे अपने पति रत्नेश चंद्राकर को क्यों नहीं जिता पाई।
जयश्री ने कहा कि बीते 20 वर्षों के कार्यकाल में काम नहीं हुआ बल्कि विकास के नाम पर दिखावेबाजी होती रही। कमीशनखोरी चरम पर रही। इसी दिखावेबाजी और कमीशनखोरी के कारण भाजपा की इतनी करारी हार हुई है। जयश्री ने कहा कि उनके द्वारा पूर्व महापौरों पर लगाए गए आरोप नगर निगम की पिछली परिषद के कार्यकाल पर करारा तमाचा है।
राज्य निर्माण के बाद पहली बार दुर्ग शहर में इतनी बेहतरीन प्लानिंग के साथ विकास कार्य हो रहे हैं। जयश्री ने भाजपा पार्षदों से कहा है कि शहर में जनहित का ध्यान रखकर समग्र विकास कैसे होता है, यह जानने-समझने के लिए उन्हें विधायक अरुण वोरा और महापौर धीरज बाकलीवाल से विकास का सबक सीखना चाहिए। 20 साल तक विकास कार्यों को लेकर भाजपा पार्षदों के ज्ञान चक्षु नहीं खुल पाए हैं, तो अब खुल जाएंगे।
जयश्री ने कहा कि उन्होंने भा जपा से पार्षद चुनाव जीता और लोक कर्म प्रभारी बनने के बाद लगातार मेहनत की और सभी 60 वार्डों में लगातार विकास कार्य कराने सक्रिय रही। इसी का नतीजा रहा कि उन्हें दूसरी बार भी लोक कर्म प्रभारी बनाया गया। कठपुतली बनने से इंकार करने और नगर निगम में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ आवाज उठाने के कारण 2014 के चुनाव में भाजपा ने उन्हें सामान्य सीट होने और योग्यता के बावजूद महापौर की टिकट नहीं दी।
जयश्री ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने सम्मान के साथ इस बार के चुनाव में पार्षद की टिकट दी और एमआईसी प्रभारी बनाया। उनके पार्टी बदलने पर हायतौबा मचाने वाले भाजपा पार्षद बताएं कि मध्यप्रदेश में 22 विधायकों को किसने दलबदल कराया? उन्होंने कहा कि जिनके घर कांच के होते हैं उन्हें हाथ में पत्थर रखने से बचना चाहिए।

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