August 25, 2026
Hindi Hindi

Login to your account

Username *
Password *
Remember Me
    राजनीति

    राजनीति (1230)

      रायपुर / शौर्यपथ / प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने आज पत्रकार वार्ता में भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने कहा कि राज्य और देश की नीतिगत विफलताओं का खामियाजा आम जनता, उद्योग जगत और कर्मचारी भुगत रहे हैं।

    बस्तर में बाढ़ से तबाही, तत्काल राहत व मुआवजा की मांग
    दीपक बैज ने कहा कि बस्तर संभाग में भारी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
    कई मार्ग अवरुद्ध हैं, दर्जनों गांव जलमग्न हो चुके हैं। मकान गिर गए, मवेशी बह गए और वाहनों के डूबने की खबरें हैं। एक पर्यटक परिवार के चार सदस्यों की मौत भी हुई है। उन्होंने मांग की कि सरकार तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू करे और नुकसान का आंकलन कर पीड़ितों को मुआवजा दिया जाए।

    मुख्यमंत्री विदेश में, प्रदेश में उद्योग बंद
     कांग्रेस अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री निवेश लाने विदेश (जापान और दक्षिण कोरिया) गए हैं, जबकि प्रदेश में ही हालात चिंताजनक हैं। भाजपा शासन में अब तक 4288 कंपनियां बंद हो चुकी हैं। स्पंज आयरन, रोलिंग मिल, राइस मिल, सहकारी शक्कर कारखाने बंद पड़े हैं। महंगी बिजली और उद्योग विरोधी नीतियों को उन्होंने जिम्मेदार बताया।
     बैज ने पूछा – “जब अपने उद्योग बंद हो रहे हैं तो बाहर से निवेशक यहां क्यों आएंगे?”

    एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल पर सरकार को घेरा
     बैज ने कहा कि प्रदेश में 16000 से अधिक एनएचएम कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं, लेकिन सरकार उनकी मांगें मानने की बजाय बर्खास्तगी की धमकी दे रही है। चुनाव के दौरान भाजपा ने “मोदी की गारंटी” के तहत नियमितीकरण का वादा किया था। 21 महीने बीत चुके हैं, पर वादा पूरा नहीं हुआ।

    उन्होंने कहा, “डबल इंजन की सरकार होने के बावजूद यह कहना कि यह केंद्र का मामला है, जनता और कर्मचारियों को गुमराह करना है।”

    अमेरिकी टैरिफ को बताया मोदी सरकार की विफलता
     दीपक बैज ने कहा कि अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर 50% टैरिफ बढ़ा दिया है, जिससे हमारे उद्योग प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा, मोदी खुद को ट्रंप का मित्र बताते थे, फिर अब चुप क्यों हैं? यदि अमेरिका ऐसा कर सकता है तो भारत को भी अमेरिकी उत्पादों पर वैसा ही कदम उठाना चाहिए।
    भाजपा कार्यकर्ता ने मांगी इच्छा मृत्यु
    बैज ने भाजपा के अंदरूनी हालात पर भी सवाल उठाए।सूरजपुर जिले के पूर्व मंडल महामंत्री विशंभर यादव ने मुख्यमंत्री से इच्छा मृत्यु मांगी है।यादव दो साल पहले रायपुर में प्रधानमंत्री मोदी की सभा में जाते समय सड़क दुर्घटना का शिकार हो गए थे। इलाज में 35 लाख से अधिक खर्च हो चुका है, घर-बार बिक चुका है और वे स्थायी रूप से विकलांग हो गए हैं।

    भाजपा की सरकार बनने के बावजूद उन्हें कोई मदद नहीं मिली।
     बैज ने कहा – “भाजपा कार्यकर्ताओं को देवतुल्य बताती है, लेकिन सच यह है कि संकट में अपने ही कार्यकर्ताओं को बेसहारा छोड़ देती है।”

    निष्कर्ष :दीपक बैज ने प्रेसवार्ता के अंत में कहा कि भाजपा सरकार को चाहिए कि वह बस्तर बाढ़ राहत कार्य, उद्योग संकट, एनएचएम कर्मचारियों की मांग और अमेरिकी टैरिफ जैसे गंभीर मुद्दों पर तत्काल कार्रवाई करे, वरना जनता में सरकार के प्रति असंतोष और बढ़ेगा।

    रायपुर / शौर्यपथ /
    मुख्यमंत्री के विदेश प्रवास और नए निवेश आकर्षित करने के दावों पर कांग्रेस ने तीखा पलटवार किया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने भाजपा सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए सवाल किया है कि – “छत्तीसगढ़ में जून 2025 तक 18,940 पंजीकृत कंपनियां संचालित थीं, इनमें से 4,288 कंपनियां आखिर क्यों बंद हो गईं?”

    उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री जापान और दक्षिण कोरिया जाकर विदेशी निवेश का ढिंढोरा पीट रहे हैं, जबकि प्रदेश की हकीकत यह है कि पहले से संचालित स्पंज आयरन प्लांट, रोलिंग मिलें, राइस मिल, सहकारी शक्कर कारखाने और एथेनॉल प्लांट भाजपा सरकार की उपेक्षा और उद्योग-विरोधी नीतियों की वजह से ठप हो गए हैं।

    वर्मा ने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में कृषि और वनोपज प्रसंस्करण, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई थी। सीमेंट और स्टील उत्पादन में छत्तीसगढ़ ने नए कीर्तिमान स्थापित किए थे। लेकिन भाजपा की सरकार आते ही उद्योगों पर लगातार चोट की गई—20 महीनों में चार बार बिजली दरों में बढ़ोतरी की गई।

    आज की स्थिति यह है कि छत्तीसगढ़ के उद्योगों को पड़ोसी राज्यों उड़ीसा, झारखंड और मध्यप्रदेश की तुलना में डेढ़ गुना महंगी औद्योगिक बिजली चुकानी पड़ रही है। कांग्रेस काल में बनी उद्योग नीति को बदलकर भाजपा सरकार ने स्थानीय उद्योगों को बर्बाद करने की राह पर धकेल दिया।

    वर्मा ने आगे कहा—

    “भाजपा सरकार एक तरफ छत्तीसगढ़ के लघु और कुटीर उद्योगों तथा रीपा (रूरल इंडस्ट्रियल पार्क) जैसी योजनाओं को समाप्त करने पर तुली है, वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री विदेशी धरती पर उद्यमियों को आमंत्रित कर छत्तीसगढ़ की जनता को गुमराह कर रहे हैं।”

    कांग्रेस प्रवक्ता ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि बीते 20 महीनों में हजारों उद्योग बंद होने से लाखों युवा बेरोजगार हो गए हैं। उन्होंने कहा कि रोजगार सृजन में नाकाम भाजपा सरकार अपनी नाकामी से ध्यान भटकाने के लिए केवल “राजनीतिक पर्यटन” कर रही है।


    ? यह मुद्दा अब प्रदेश की राजनीति में भाजपा सरकार की औद्योगिक नीतियों बनाम कांग्रेस सरकार की उपलब्धियों के मुकाबले के रूप में उभर चुका है।

    रायपुर / शौर्यपथ / प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने आरोप लगाया है कि सरकार की लापरवाही के कारण छत्तीसगढ़ में आयुष्मान योजना ठप होने की स्थिति में पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि निजी अस्पतालों को पिछले 17 माह से भुगतान नहीं किया गया, जिसके चलते अस्पतालों ने गरीबों का इलाज बंद करने की अंतिम चेतावनी सरकार को दे दी है।
      दीपक बैज ने कहा— “यदि निजी अस्पताल आयुष्मान योजना के तहत गरीब मरीजों का इलाज बंद कर देंगे तो हजारों जरूरतमंद लोग संकट में आ जाएंगे। कई गंभीर बीमारियों का इलाज केवल निजी अस्पतालों में ही संभव है, जबकि सरकारी अस्पतालों पर पहले से ही भारी दबाव है।”

    कांग्रेस शासन में स्वास्थ्य ढांचे को किया गया था मजबूत
      बैज ने दावा किया कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को 2018 की तुलना में ढाई गुना बेहतर किया था।
    जिला अस्पतालों को मल्टी स्पेशलिटी सेंटर में बदला गया था।
    ब्लॉक स्तर पर भर्ती सुविधा विकसित की गई।
    डायलिसिस व क्रिटिकल केयर यूनिट शुरू किए गए।
    25 लाख तक की मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना लागू की गई।
    4000 से अधिक डॉक्टर, नर्स और तकनीकी स्टाफ की नियमित भर्ती की गई।
    हाट बाजार क्लिनिक, मोहल्ला क्लीनिक, दाई दीदी क्लिनिक, हमर अस्पताल और हमर लैब जैसे कार्यक्रम शुरू किए गए।
    भाजपा शासन में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल – बैज
      बैज ने कहा कि भाजपा सरकार के आने के बाद महज़ 11 महीनों में ही प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराकर रह गई है। मेकाहारा से लेकर उपस्वास्थ्य केंद्र तक की स्थिति भगवान भरोसे है। मलेरिया, पीलिया और डायरिया जैसी बीमारियों से रोज मौतें हो रही हैं। सुकमा के गोगुंडा गांव में 15 दिनों में 10 आदिवासियों की मलेरिया से मौत हो गई। मलेरिया संक्रमण दर 8 गुना बढ़ चुकी है। हमर अस्पताल, हाट बाजार क्लिनिक और मोहल्ला क्लिनिक जैसे जनकल्याणकारी कार्यक्रम ठप हो चुके हैं।
    त्वरित निर्णय की मांग
      दीपक बैज ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने तत्काल निजी अस्पतालों का बकाया भुगतान नहीं किया तो आयुष्मान योजना के तहत इलाज पूरी तरह बंद हो जाएगा और गरीब जनता को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

    20 अगस्त को तीन नए चेहरों ने ली शपथ, विभाग भी आवंटित — पूर्व CM बोले, कांग्रेस सरकार को नहीं मिली थी अनुमति, अब भाजपा ने कैसे कर लिया विस्तार?

    रायपुर। शौर्यपथ ।
       छत्तीसगढ़ की राजनीति एक बार फिर गरमाती दिख रही है। प्रदेश में हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद मुख्यमंत्री के साथ कुल 14 मंत्रियों की सरकार अब सत्ता संचालन कर रही है। 20 अगस्त को शपथ ग्रहण के साथ ही तीन नए चेहरों – दुर्ग से गजेंद्र यादव, आरंग से गुरु खुशवंत सिंह एवं सरगुजा संभाग से राजेश अग्रवाल – को कैबिनेट मंत्री बनाया गया और देर शाम इन्हें विभाग भी आवंटित कर दिए गए।
    लेकिन, इस विस्तार के तुरंत बाद प्रदेश की राजनीति में भूचाल आ गया। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि “मौजूदा मंत्रिमंडल अवैधानिक है।” बघेल के मुताबिक, कांग्रेस सरकार ने 2018 से ही 14 मंत्री शामिल करने की कोशिशें की थीं और इस विषय को न केवल विधानसभा में उठाया गया बल्कि केंद्र को भी प्रस्ताव भेजा गया था, मगर तत्कालीन केंद्र शासन ने अनुमति नहीं दी।
       अब सवाल यह उठ रहा है कि भाजपा सरकार ने किस आधार पर 14 मंत्रियों का मंत्रिमंडल गठित किया और क्या इसे केंद्र की औपचारिक मंजूरी मिली है?
    "हरियाणा मॉडल" की तर्ज पर छत्तीसगढ़
       सूत्र बताते हैं कि राज्य में "हरियाणा मॉडल" अपनाते हुए 14 सदस्यों की कैबिनेट बनाई गई है। लेकिन पूर्व CM के आरोपों ने यह बहस शुरू कर दी है कि क्या इस मॉडल को प्रदेश में लागू करने के लिए संवैधानिक प्रक्रिया पूरी की गई है, या फिर यह सिर्फ़ राजनीतिक प्रयोग है?
    सियासी गर्माहट और आने वाले सवाल
       भूपेश बघेल के बयान के बाद से कांग्रेस हमलावर है और भाजपा को इस पर स्पष्टीकरण देना होगा कि आखिर अब जो संख्या बढ़ाई गई, उसकी संवैधानिक वैधता क्या है। प्रदेश की सियासत में अब चर्चाओं का नया दौर शुरू हो गया है—“क्या राज्य सरकार ने केंद्र की मंजूरी लेकर ही यह कदम उठाया है या फिर यह निर्णय सिर्फ़ राजनीतिक दबाव और दिखावे के तहत लिया गया?”
    आगे की राजनीतिक दिशा
      एक तरफ भाजपा सरकार अपने नए मंत्रियों के साथ प्रशासनिक गति पकड़ने की तैयारी कर रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इस “ग़ैरक़ानूनी मंत्रिमंडल” के मुद्दे पर आर-पार की लड़ाई की रणनीति बना रहा है। आने वाले दिनों में इस मसले पर न केवल विधानसभा में तेज़ हलचल देखने को मिलेगी, बल्कि प्रदेश की जनता भी सरकार और विपक्ष दोनों की राजनीतिक चालों पर कड़ी नज़र बनाए रखेगी।
    ? यह खबर राजनीतिक निहितार्थों से भरपूर है और सीधे तौर पर जनता के विश्वास बनाम संवैधानिक वैधता की बहस खड़ी करती है।

    दुर्ग शहर की अव्यवस्था से जनता निराश, अतिक्रमण और गंदगी ने बढ़ाई परेशानी; कैबिनेट मंत्री बने गजेंद्र यादव से विकास की नई गाथा लिखने की आस

    दुर्ग / शौर्यपथ / नगरीय निकाय चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी प्रत्याशी श्रीमती अलका बाघमार ने शहरवासियों से अतिक्रमण मुक्त दुर्ग, स्वच्छ और व्यवस्थित बाजार, भ्रष्टाचार पर कड़ी कार्रवाई जैसी कई बड़ी घोषणाएँ की थीं। इन वादों पर भरोसा जताते हुए दुर्ग की जनता ने मतदान के माध्यम से उन्हें महापौर के रूप में चुना। लेकिन महज़ कुछ महीनों के कार्यकाल में ही नगर सरकार की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है।
      शहर के मुख्य मार्गों पर आवारा पशुओं का जमावड़ा, जवाहर नगर से सुराना कॉलेज तक फैली गंदगी और कचरे के ढेर, सड़कों के किनारे अवैध अतिक्रमण, जगह-जगह बुझी पड़ी स्ट्रीट लाइटें और थोड़ी-सी बारिश में ही पूरे शहर का जलभराव जैसी समस्याओं ने जनता को निराश किया है। दो महीने तक चले 'महासफाई अभियानÓ का परिणाम भी कुछ घंटों की बारिश में ही धुल गया।
      इन हालातों ने न केवल महापौर की कार्यशैली पर बल्कि महापौर चयन में निर्णायक भूमिका निभाने वाले दुर्ग लोकसभा सांसद विजय बघेल की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं। जनता का मानना है कि जिस प्रत्याशी को उन्होंने सांसद के प्रभाव से चुना, वही अब अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर पा रही हैं।
    जनता की आवाज़
      व्यापारीयो का कहना है – "बाजार क्षेत्र में हर दिन ट्रैफिक जाम और गंदगी से जूझना पड़ता है। हम उम्मीद कर रहे थे कि महापौर बनने के बाद कुछ सुधार होगा, परंतु हालात जस के तस हैं।"
      स्थानीय निवासियों ने कहा – "महज कुछ घंटों की बारिश में ही पूरा इलाका जलमग्न हो जाता है। बच्चे स्कूल नहीं जा पाते, बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। जनता पूछ रही है कि आखिर सफाई और नालों की देखरेख का जिम्मा किसका है?"

    सुराना कॉलेज के छात्र बोले – "हमारे कॉलेज के सामने कचरे के ढेर और आवारा मवेशियों की समस्या महीनों से बनी हुई है। प्रशासन और नगर निगम दोनों ही सिर्फ आश्वासन देते हैं।"

    अब नजरें टिकी हैं मंत्री गजेंद्र यादव पर
     ऐसे में अब उम्मीद की किरण दिख रही है दुर्ग शहर के विधायक गजेंद्र यादव से, जिन्हें हाल ही में प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। यह संयोग स्वर्गीय हेमचंद यादव के बाद पहली बार आया है जब दुर्ग शहर विधानसभा का कोई विधायक मंत्री पद से सुशोभित हुआ है।
      जनता को विश्वास है कि गजेंद्र यादव के मंत्री बनने से शहर के विकास की नई गाथा लिखी जाएगी। बड़े पद के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी आती है और अब नागरिकों की अपेक्षा है कि मंत्री गजेंद्र यादव गुटबाजी और राजनीतिक खींचतान से ऊपर उठकर दुर्ग के लिए ठोस कार्य करेंगे।

    दुर्ग की जनता चाहती है कि—
    सड़कों और नालों की तत्काल मरम्मत हो,
    अतिक्रमण पर कड़ी कार्रवाई की जाए,
    स्वच्छता और प्रकाश व्यवस्था को प्राथमिकता मिले,
    और जिला मुख्यालय के रूप में दुर्ग का विकास पूरे प्रदेश में मिसाल बने।
      आज दुर्ग की जनता जिस अव्यवस्था और उपेक्षा से गुजर रही है, उससे निकलने का रास्ता केवल मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और संवेदनशील नेतृत्व ही दिखा सकता है। ऐसे में शहरवासियों की निगाहें एक बार फिर अपने विधायक और अब मंत्री बने गजेंद्र यादव पर टिकी हैं कि वे दुर्ग की तकदीर बदलने की दिशा में निर्णायक कदम उठाएँ।

    ?? विश्लेषण बॉक्स

    राजनीतिक समीकरण:दुर्ग महापौर चुनाव में विजय बघेल की भूमिका ने भाजपा की स्थानीय राजनीति में हलचल मचाई थी। महापौर पर सवाल खड़े होने से उनकी साख भी प्रभावित हो रही है। गजेंद्र यादव की सक्रियता अब भाजपा के भीतर संतुलन साधने में अहम साबित हो सकती है।

    मुख्य चुनौतियाँ:
    नगरीय निकाय में भ्रष्टाचार और अव्यवस्था पर अंकुश लगाना
    सफाई व्यवस्था और जलभराव की स्थायी समस्या का समाधान
    शहर में अवैध अतिक्रमण और यातायात अव्यवस्था पर सख्त कार्रवाई
    जनता की उम्मीदों को जल्द ठोस कामों में बदलना

    संभावनाएँ:यदि गजेंद्र यादव अपने मंत्री पद का प्रभाव शहर के विकास में दिखा पाते हैं तो वे न केवल दुर्ग बल्कि प्रदेश स्तर पर भी एक मजबूत नेतृत्वकर्ता के रूप में उभर सकते हैं। वहीं, यदि अव्यवस्था जस की तस रही तो इसका सीधा राजनीतिक असर आगामी चुनावों पर पड़ सकता है।

      मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के संभावित विदेश दौरे से पहले विस्तार की चर्चा तेज़
      90-सदस्यीय विधानसभा में संवैधानिक सीमा अनुसार अधिकतम 14 मंत्री (मुख्यमंत्री सहित) संभव—वर्तमान में 11
      क्या 33% महिला भागीदारी की ‘आदर्श परिपाटी’ मंत्रिमंडल में दिखेगी?

     रायपुर/विशेष संवाददाता शौर्यपथ
      छत्तीसगढ़ में कैबिनेट विस्तार की अटकलें एक बार फिर परवान चढ़ गई हैं। सियासी गलियारों में चर्चा है कि 18 से 21 अगस्त के बीच किसी भी दिन मंत्रिमंडल में नए चेहरों को जगह मिल सकती है। फिलहाल सरकार में मुख्यमंत्री सहित 11 मंत्री हैं; संवैधानिक सीमा के अनुरूप तीन रिक्त पद भरे जा सकते हैं। चर्चा यह भी है कि इस विस्तार में महिला प्रतिनिधित्व को प्रमुखता दी जाएगी ताकि 33% आरक्षण की ‘आदर्श परिपाटी’ का संदेश कैबिनेट स्तर पर भी जाए।

    मुख्य विवरण
    संवैधानिक ढाँचा: अनुच्छेद 164(1A) के तहत 90-सदस्यीय विधानसभा में मंत्रिपरिषद की अधिकतम संख्या 14 तय है (मुख्यमंत्री सहित)।
    वर्तमान स्थिति: सरकार में 11 मंत्री कार्यरत; 3 स्थान रिक्त।
    चर्चा: 18–21 अगस्त के बीच विस्तार की संभावना—आधिकारिक घोषणा शेष।
    राजभवन के ‘दरबार हॉल’ का नाम ‘छत्तीसगढ़ मंडपम’ किए जाने व यहीं शपथ समारोह की तैयारी की चर्चा—औपचारिक पुष्टि प्रतीक्षित।

    महिला प्रतिनिधित्व: नारा नहीं, नीति
       वर्तमान मंत्रिपरिषद में महिला मंत्रियों की संख्या 1 है। यदि कैबिनेट 14 तक भरता है, तो 33% के आदर्श मानक के हिसाब से कम-से-कम 5 महिलाओं की हिस्सेदारी का लक्ष्य प्रतीकात्मकता से आगे बढ़कर नीतिगत भागीदारी का संकेत देगा। विस्तार में कम-से-कम 1–2 नई महिला चेहरों को शामिल किए जाने की चर्चा है। बस्तर से लता उसेंडी और दुर्ग संभाग से भावना बोहरा (जिन्हें 2024 में ‘उत्कृष्ट विधायक’ के रूप में सम्मानित किए जाने का उल्लेख है) जैसे नाम सियासी चर्चा में हैं।
      केंद्र स्तर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘नारी शक्ति वंदन’ (33% आरक्षण) के पैरोकार रहे हैं और यह विधेयक संसद से पारित हो चुका है। ऐसे में छत्तीसगढ़ के लिए यह विस्तार ‘आदर्श राज्य’ की छवि गढ़ने का अवसर बन सकता है।

    संभावित दावेदारों की भूमिका: दिए गए नाम सियासी चर्चाओं में चल रहे संभावित विकल्प हैं; आधिकारिक सूची/घोषणा शेष है। उद्देश्य सभी प्रमुख दावेदारों की भूमिका और संभावित संकेत को समग्रता से रखना है।

    1) गजेन्द्र यादव: दुर्ग से कांग्रेस के पिछले तीस सालो से लगातार हार / जीत के बावजूद प्रत्याशी रहे अरुण वोरा को चुनावी मैदान में आसान शिकस्त दी आसान इसलिए कहा जा सकता है कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी के खिलाफ कांग्रेसी ही मैदान में परदे के पीछे खड़े रहे शहर की जनता भी लगातार एक ही कांग्रेस प्रत्याशी के नामांकन से उब चुकी थी निष्क्रियता और चाटुकारिता से घिरे विधायक की छवि के कारण दुर्ग विधान सभा में चुनावी मौसम में यह चर्चा रही कि भाजपा से कोई भी प्रत्याशी मैदान में होगा जीत निश्चित है ऐसे में भाजपा प्रत्याशी गजेन्द्र यादव को आसान और बड़ी जीत मिली.वर्तमान समय में विधायक यादव और महापौर बाघमार की राजनैतिक दुरी संगठन के कार्यकर्ताओ की विधायक से दुरी के साथ साथ दल्बद्लुओ की फौज का करीबी होना चर्चा का विषय है तो सामाजिक स्तर पर यादव समाज के प्रतिनिधितत्व एक बड़ा फेक्टर साथ दे रहा है .

    2) राजेश अग्रवाल (सरगुजा)

    क्षेत्रीय महत्व: सरगुजा संभाग का प्रतिनिधित्व मज़बूत करता है, जहाँ संतुलन साधना आवश्यक माना जा रहा है। उत्तरी छत्तीसगढ़ की प्राथमिकताओं—सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, सिंचाई—पर फोकस।
    3) गुरु खुशवंत साहिब (रायपुर संभाग ): गुरु खुशवंत साहिब प्रदेश के एक बड़े वर्ग के धार्मिक guru के रूप में जाने जाते है ऐसे में प्रदेश सरकार इस बड़े वर्ग को भी साधने के लिए इन्हें मौका दे सकती है . एससी /एसटी वर्ग को प्रतिनिधितव मिलने से इस वर्ग के मतदाता का रुझान भी पार्टी की तरफ ज्यादा रहेगा ऐसे में इनकी दावेदारी की भी प्रबल संभावना व्यक्त की जा रही है और इन्हें केबिनेट में जगह मिलने की बात से चर्चो का बाजार गर्म है .
    4) राजेश मूणत : लंबे समय से सक्रिय और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की जानकारी रखने वाले वरिष्ठ नेता।अनुभवी हाथों से विभागीय डिलीवरी में तेजी लाने का संकेत। किन्तु पिछली बार भाजपा की सत्ता में रहने के दौरान महत्तवपूर्ण विभाग कीई जिम्मेदारी सँभालने वाले पूर्व मंत्री राजेश मुड़त के कई विभागीय कार्यो में अनियमितता और कमीशनखोरी की चर्चो से पूर्व की भाजपा सरकार को काफी नुकसान हुआ था और सत्ता हाथ से जाने का एक बड़ा कारण भी मुड़त को माना गया .
    5) अमर अग्रवाल: भाजपा के कद्दावर नेता के रूप में पहचान अनुभवी होने के साथ साथ प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ विधायक व लम्बे प्रशासनिक कार्यो का अनुभव किन्तु बड़ी अड़चन यह कि प्रदेश सरकार की वर्तमान राजनितिक गलियारों में चर्चा के अनुसार नए एवं युवा विधायको को यह मौका देने का जोर कही ना कही अमर अग्रवाल जैसे वरिष्ठ भाजपा विधायक को दरकिनार करता नजर आ रहा है वर्तमान समय में मंत्री मंडल में नए विधायको को जिम्मेदारी मिली जो सरकार की मंशा के अनुरूप जोश के साथ कार्य को अंजाम दे रहे है वही नै पीढ़ी को आगे करने की रणनीति कार्यकर्ताओ में भी उम्मीद की किरण के रूप में एक सार्थक माहौल को जन्म दे रही जो संगठन के लिए भी काफी महत्तवपूर्ण है भविष्य की राजनीती के
    6) भावना बोहरा (दुर्ग संभाग ): भावना बोहरा : महिला सशक्तिकरण की नई पहचान

    पंडरिया विधानसभा से पहली बार चुनाव जीतने वाली विधायक भावना बोहरा ने अपने सामाजिक और विकास कार्यों से जनता के बीच गहरी छाप छोड़ी है। धार्मिक, शैक्षणिक और सामाजिक क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाने वाली बोहरा को 2024 में उत्कृष्ट विधायक सम्मान भी मिला। व्यावसायिक पृष्ठभूमि से आने के बावजूद उन्होंने क्षेत्र की समस्याओं पर पकड़ बनाकर प्रशासनिक दक्षता दिखाई है।
    राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि यदि प्रदेश सरकार उन्हें मंत्रिमंडल में स्थान देती है तो यह न केवल महिला आरक्षण और महिला सशक्तिकरण की दिशा में कदम होगा, बल्कि भाजपा संगठन को भी महिलाओं के बीच सशक्त नेतृत्व प्रदान करेगा।
      निष्कर्षक संकेत: यदि तीन रिक्त स्थान में 2 पुरुष + 1 महिला या 1 पुरुष + 2 महिलाएँ का फार्मूला अपनता है, तो क्षेत्रीय-सामाजिक संतुलन के साथ महिला प्रतिनिधित्व का संदेश भी जाता है। दूसरी ओर 3 पुरुष विकल्प चुनने की स्थिति में महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने का रोडमैप अगले फेरबदल में स्पष्ट करना होगा।
    ‘हरियाणा मॉडल’ का संदर्भ
     चर्चित ‘हरियाणा मॉडल’ का आशय संख्या-संतुलन और कार्य-वितरण वाले संकुचित-सक्षम कैबिनेट से है। छत्तीसगढ़ पहले से 14 की संवैधानिक सीमा में आता है; अतः यहाँ ‘मॉडल’ का अर्थ प्रशासनिक कार्यकुशलता और संतुलित प्रतिनिधित्व की कार्यशैली से है, न कि किसी कानूनी अपवाद से।
    चुनावी गणित बनाम शासन-प्राथमिकताएँ
     विधानसभा चुनावों के चक्र में प्रायः अंतिम वर्ष चुनावी मोड में बीतता है। ऐसे में इस विस्तार के बाद नए मंत्रियों के पास करीब दो वर्ष होंगे—अपने विभागीय प्रदर्शन से संदेश देने के लिए। क्षेत्रीय संतुलन (रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, सरगुजा, बस्तर), सामाजिक संतुलन (ST/SC/OBC/सामान्य/धार्मिक-भाषाई समुदाय) और राजनीतिक योगदान/संगठनात्मक सक्रियता—इन तीनों कसौटियों पर संतुलित चयन सरकार की प्राथमिकताओं का संकेत देगा।

    कैबिनेट विस्तार सरकार के राजनीतिक मनोविज्ञान और शासन-दृष्टि की परीक्षा है। यदि महिला प्रतिनिधित्व को अर्थपूर्ण ढंग से बढ़ाया जाता है, तो यह संदेश जाएगा कि छत्तीसगढ़ में नारी शक्ति केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं, बल्कि निर्णय-निर्माण की मेज़ पर बराबरी से बैठी है।आधिकारिक निर्णय आते ही नामों/तिथियों/स्थल का उल्लेख अद्यतन किया जाएगा।

    रायपुर/शौर्यपथ।
    प्रदेश में शिक्षकों की कमी और युक्तियुक्तकरण नीति को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर सीधा हमला बोला है। प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि सरकार दावा कर रही है कि युक्तियुक्तकरण के बाद प्रदेश का कोई भी स्कूल शिक्षकविहीन नहीं है, जबकि वास्तविकता यह है कि बेमेतरा, बालोद, धमतरी, कोरबा, बस्तर, राजनांदगांव सहित सभी जिलों में बच्चे, पालक और आम नागरिक शिक्षक नियुक्ति की मांग को लेकर धरना, प्रदर्शन और चक्काजाम कर रहे हैं।

    कांग्रेस का आरोप: शिक्षा व्यवस्था ढह गई
    ठाकुर ने कहा कि युक्तियुक्तकरण के चलते स्कूलों में पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। सरकार के “गुणवत्ता सुधार” के दावे बेईमानी साबित हो रहे हैं। 57,000 शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के बजाय, सरकार ने 10,463 स्कूल बंद कर दिए और नये सेटअप में पद घटाकर शिक्षकों को भयादोहन किया। हर माह सैकड़ों शिक्षक सेवानिवृत्त हो रहे हैं, लेकिन पिछले 20 महीनों में एक भी नियमित शिक्षक की नियुक्ति नहीं हुई।

    एक-दो शिक्षकों पर चल रहे हैं स्कूल
    कांग्रेस प्रवक्ता ने बताया कि कई प्राथमिक, हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूल महज एक या दो शिक्षकों पर निर्भर हैं, जिससे पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित है। “युक्तियुक्तकरण का फैसला शिक्षा के क्षेत्र में आत्मघाती कदम साबित हो रहा है,” ठाकुर ने कहा। “बच्चे अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं, लेकिन सरकार उनकी आवाज सुनने को तैयार नहीं।”

    तत्काल सुधार की मांग
    ठाकुर ने मांग की कि सरकार सभी प्रभावित स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध कराए, जबरन मर्ज किए गए स्कूलों का डिस्कोड वापस करे और शिक्षकों को पुनः उनके मूल स्कूलों में भेजे। साथ ही, जिन स्कूलों में शिक्षकों की कमी है, वहां भर्ती प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए।

    शौर्यपथ विशेष रिपोर्ट

       "अगर केंद्र, राज्य और नगर निगम में एक ही पार्टी की सरकार होगी, तो विकास दौड़ेगा!"
        यह था भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुश्री सरोज पांडे का वादा, जब उन्होंने दुर्ग की जनता से "ट्रिपल इंजन" का समर्थन मांगा था।
       लेकिन आज, जब ट्रिपल इंजन से चलने वाला दुर्ग शहर गड्ढों, गंदगी और गुटबाजी के दलदल में फंसा है, जनता खुद सवाल पूछ रही है - "वादा किया था रोशनी का, फिर क्यों पसरा है अंधेरा?"

     जब सरोज पांडे थीं महापौर: दुर्ग बना था विकास का पर्याय
       महापौर रहते सुश्री सरोज पांडे ने दुर्ग नगर निगम को विकास की दिशा में एक नई पहचान दी थी।चौड़ी सड़कें,सुव्यवस्थित बाजार,सुंदर उद्यान,और सफाई व्यवस्था -
    उस दौर में दुर्ग को "छोटा स्मार्ट सिटी" कहने लगे थे लोग।
      आज उसी शहर में, जहां उन्होंने विकास की नींव रखी, वहीं अब बदहाल व्यवस्थाएं और टूटी उम्मीदें एक कटु सच्चाई बन चुकी हैं।
     आज का दुगर्: नालियां जाम, सड़कों पर जान का खतरा ,अतिक्रमण से जकड़े बाजार ,आवारा पशुओं से भरा शहर ,अधूरी सड़कें , और राजेंद्र चौक जैसे व्यावसायिक हब पर सरकारी सुस्ती ,नगर निगम की 6 महीने की सत्ता और राज्य सरकार के 20 महीनों के कार्यकाल में सुधार की बजाय गिरावट ही सामने आई है।
     नालियों की सफाई अब भी "प्रक्रिया में" है, पार्कों की घास सूख रही है, और जनता धूल, दुर्गंध और दुश्वारियों के बीच जूझ रही है।
     गुटबाजी का गड्ढा: महापौर बनाम विधायक
      शहर के दो जिम्मेदार चेहरे - महापौर और स्थानीय विधायक – आमने-सामने हैं। कोई काम अगर हो भी गया, तो उसका श्रेय लेने की राजनीतिक होड़ जारी है। सामंजस्य और टीमवर्क जैसे शब्द शहरी प्रशासन की डिक्शनरी से नदारद हो चुके हैं। विपक्ष को परिषद में बोलने तक का मौका नहीं देना लोकतांत्रिक मर्यादा का खुला उल्लंघन है।

     गरीबों पर सख्ती, रसूखदारों को संरक्षण
      इंदिरा मार्केट हो या कपड़ा लाइन - जहां आम ठेलेवालों को हटाया जा रहा है, वहीं बड़े दुकानदारों द्वारा बरामदे पर कब्जा बरकरार है।
    भाजपा नेता के संरक्षण में राम रसोई को गलत दस्तावेजों के आधार पर करोड़ों की भूमि का आवंटन भी अब चर्चा में है, लेकिन कार्रवाई शून्य।

     जनता पूछ रही - "अब किससे लें जवाब?"
      क्या जवाब दें वो भाजपा संगठन जो विपक्ष में रहकर हर गड्ढे पर धरना देता था? या वो राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज पांडे, जिन्होंने वादा किया था कि "ट्रिपल इंजन" से दुर्ग दौड़ेगा?"
    अब जब वही इंजन धुएं में उलझ गया है, तो जनता सिर्फ इंतज़ार में है कि -"कोई आए, और इन सवालों का ईमानदारी से जवाब दे!"

     आईना देखिए, पोस्टर नहीं
      यह सिर्फ बदहाल दुर्ग की रिपोर्ट नहीं, बल्कि उन तमाम वादों का आइना है, जो वोट से पहले बड़े-बड़े मंचों पर बोले गए थे।
    महापौर रहते सरोज पांडे का विकास मॉडल आज खुद सवाल कर रहा है - "क्या भाजपा की आज की नगर सरकार उस स्तर को भी छू पाई?"
    अब जनता तय करेगी -बातों के ट्रिपल इंजन से शहर नहीं चलता, ज़मीन पर पसीने से काम करना होता है।

        रायपुर / शौर्यपथ / क्रेडा अध्यक्ष भूपेंद्र सवन्नी पर तीन प्रतिशत कमीशन मांगने और ठेकेदारों को धमकाने के आरोपों के बाद अब इस प्रकरण में सियासी तापमान और बढ़ गया है। जहां एक ओर कांग्रेस ने खंडन पत्रों को दबाव और डर के तहत कराया गया बताया है, वहीं भाजपा खामोश नजर आ रही है। कांग्रेस ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए भूपेंद्र सवन्नी को तत्काल पद से हटाने की मांग की है।
      प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने आज मीडिया से चर्चा करते हुए कहा, "यह पहला मौका है जब किसी शिकायत की जांच नहीं की जा रही, बल्कि खंडन करवाया जा रहा है। मुख्यमंत्री को भेजी गई ठेकेदारों की शिकायत के बाद मुख्यमंत्री सचिवालय ने स्वयं इस पर पत्र जारी कर पूरी जानकारी मांगी थी। बावजूद इसके, अब जो खंडन सामने आ रहे हैं, वो शिकायतकर्ताओं से नहीं, बल्कि अन्य ठेकेदारों से करवाए जा रहे हैं, जोकि बेहद गंभीर मामला है।"
      धनंजय ठाकुर ने सीधे तौर पर भूपेंद्र सवन्नी पर आरोप लगाया कि उन्होंने शिकायतकर्ताओं को धमका कर, दबाव बना कर खंडन के लिए विवश किया। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि यही तरीका अगर मुख्यमंत्री तक की गई शिकायतों के साथ अपनाया जा रहा है, तो आम नागरिकों को न्याय की उम्मीद कैसे होगी?

        "क्या भूपेंद्र सवन्नी मुख्यमंत्री से भी ऊपर हैं, जो जांच के आदेश के बाद भी वह ठेकेदारों को धमका रहे हैं? क्या भाजपा सरकार में कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है?" – धनंजय ठाकुर

    ? पृष्ठभूमि में क्या है मामला?

    इस पूरे विवाद की शुरुआत भूपेंद्र सवन्नी के खिलाफ ठेकेदारों की ओर से मुख्यमंत्री को भेजी गई शिकायत के सोशल मिडिया में उजागर होने के बाद राजनैतिक रंग चढ़ा । शिकायत में आरोप था कि क्रेडा में कार्य कराने वाले ठेकेदारों से भूपेंद्र सवन्नी तीन प्रतिशत कमीशन मांगते हैं और मना करने पर काम में अड़चन डालने की धमकी देते हैं।
      शिकायत पर मुख्यमंत्री सचिवालय ने विभागीय स्तर पर संज्ञान लेते हुए क्रेडा से विवरण मांगा था, लेकिन इसके तुरंत बाद ही कुछ ठेकेदारों के नाम से खंडन पत्र सामने आने लगे, जिनमें आरोपों को निराधार बताया गया।
      हालांकि, अब कांग्रेस का दावा है कि जो खंडन दिए जा रहे हैं, वे उन्हीं ठेकेदारों से नहीं हैं जिन्होंने शिकायत की थी। कांग्रेस इसे भाजपा द्वारा प्रशासनिक दबाव और राजनीतिक संरक्षण के तहत कराया गया ‘खंडन प्रबंधन’ बता रही है।
    ? कांग्रेस ने क्या मांग की है?

    कांग्रेस की मांग है कि इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच हो। जब तक जांच पूरी न हो, भूपेंद्र सवन्नी को उनके पद से हटाया जाए। जिन ठेकेदारों ने शिकायत की है, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
      धनंजय सिंह ठाकुर ने आगे कहा, “भाजपा की सरकार में सुशासन की बात बेमानी हो चुकी है। जब मुख्यमंत्री तक की गई शिकायतों को दबाया जा रहा है तो यह संकेत है कि प्रदेश में लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं खतरे में हैं। गुंडागर्दी की ये राजनीति अब उजागर हो रही है।”

    हमारा शौर्य

    हमारे बारे मे

    whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
     
    CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
    CONTECT NO.  -  8962936808
    EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
    Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
    LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
    © 2015 Shouryapath. All Rights Reserved. Designed By Global Vision