August 08, 2026
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    शौर्य की बाते ( सम्पादकीय )

    शौर्य की बाते ( सम्पादकीय ) (227)

         विचार : भारत अपने आजादी का अमृत काल मना रहा है भारत वर्तमान समय में दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र के रूप में भारत की पहचान है . लोकतंत्र जहां आम जनता की चुनी हुई सरकार होती है जहाँ न्यायपालिका का अपना महत्तव है, कार्यपालिका की जिम्मेदारी होती है , प्रशासनिक व्यवस्था का अपना एक अलग स्थान है , चुने हुए जनप्रतिनिधियों की अलग गरिमा होती है . आज भारत के लिए बड़ा महत्तवपूर्ण दिन है आज आजादी के अमृत काल में भारत अपने नए संसद भवन में प्रवेश कर रहा है . यह गौरव की बात है . नए संसद भवन की स्थापना नए भारत की दिशा में एक महत्तवपूर्ण कदम है . नए भारत के उदय पर पूरी दुनिया की निगाहें है किन्तु उसके साथ ही कई प्रश्न है जो मन में पीड़ा को भी जन्म दे रहे है . नव निर्माण की इस दिशा में क्या लोकतंत्र मजबूत हो रहा है या राजतन्त्र की ओर अग्रसर कई सवाल है जिनका जवाब किसी के पास नहीं . पिछले कुछ सालो में अगर देखा जाए तो कई बार जनता की भावनाओं को कुचला गया और जनता की भावनाओं को कुचलने का कार्य किसी और ने नहीं जनता के उन प्रतिनिधियों ने किया जिन्हें जनता ने ही चुना .
      आम जनता के मताधिकार को कई बार कुचला गया ....
       तात्पर्य यह है कि जनता की भावनाओ को दरकिनार कर चुने हुए जनप्रतिनिधि अपने हित की ओर कदम बढ़ने लगे . मध्यप्रदेश , महाराष्ट्र , मेघालय , गोवा , दिल्ली , बिहार जैसे कई राज्य है जहां आमजनता कि भावनाओं को दरकिनार किया गया . महाराष्ट्र की बात ले तो महाराष्ट्र में शिवसेना बड़ी पार्टी बनकर उभरी और त्रिशंकु विधानसभा के आसार बन गए तब शिवसेना / एनसीपी/कांग्रेस ने मिलकर सरकार बनाई यहाँ शिवसेना ने अपने पुराने राजनैतिक साथी को छोड़कर नए दलों के साथ गंठबंधन कर सरकार बनाई महाराष्ट्र की जनता ने शिव सेना पर ज्यादा भरोसा किया किन्तु बड़ा पद किसे की मंशा ने आम जनता के सोंच को बदल दिया और महा अघाड़ी के नेत्रित्व में सरकार बनी किन्तु क्या हुआ जब से सरकार बनी तब से ही इसे तोड़ने की लगातार कोशिशे जारी रही शायद यही कारण रहा कि कभी अधनगे कपड़ो में नशे के आगोश में पार्टियों में शिरकत करने वाली अभिनेत्री के मामले को इतना तुल दिया गया और ऐसे प्रचारित किया गया जैसे कि उसके साथ कोई बड़ा जुर्म हो गया हो और वह अबला अकेले सबला बनकर जंग लड़ रही हो यहाँ तक की केन्द्रीय एजेंसियों द्वारा उच्च श्रेणी की सुरक्षा भी दे दी गए राज्यपाल/केन्द्रीय मंत्रियो ने मुलाकाते शुरू कर दी तब यह कहा जाने लगा कि नारी के सम्मान के लिए सदैव तत्पर रहा जाएगा अच्छी बात भी है ऐसा होना चाहिए किन्तु यही सोंच अब क्यों नजर नहीं आ रही जब भारत के लिए कई अंतरराष्ट्रिय पदक ला कर विदेशो में देश का मान बढाने वाले महिला रेसलर आज हड़ताल पर है उनकी कोई क्यों नहीं सुन रहा क्योकि उनके साथ देने से खुद के सरकार के सदस्यों पर ही ऊँगली उठ रही . अब कहा गया नारी सम्मान जिस पर सब मौन यहाँ तक की महिला अभिनेत्री के विवाद में सरकार तक हिल गयी और महाराष्ट्र में सत्ता परिवर्तन हो गया पर जनता की सोंच और मताधिकार का क्या हुआ कहा बनी उनके मन की चुनी हुई सरकार .ऐसा ही मध्यप्रदेश की बात ले तो मध्यप्रदेश में आम जनता ने बहुमत कांग्रेस को दिया किन्तु सरकार चलना तो दूर रेंगने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा आखिर में सिंधिया ने अपने राजनैतिक फायदे को देखते हुए भाजपा का दामन थाम लिया और शिवराज चौहान की वह बात सही साबित हुई जब उन्होंने मुख्यमंत्री आवास छोड़ते समय कहा था कि छह महीने में वापस आ जायेंगे आवास में . यहाँ भी जनता की भावनाए कुचली गयी कारण सिंधिया रहे और रही उनकी महत्तवकाक्षा . दिल्ली की बात करे तो सरकार तो केजरीवाल की किन्तु बड़े फैसले लेने का कोई अधिकार नहीं अध्यादेश इसका सबसे बड़ा उदहारण जिससे न्यायपालिका के आदेश की भी महत्ता पर सवाल उठा गए . बिहार की बात करे तो यहाँ जनता ने नितीश सरकार पर भरोसा जताया और भाजपा गठबंधन की सरकार को फिर बहुमत दिया किन्तु क्या हुआ रातो रात मतलब के लिए खुर्सी के लिए पलटने में माहिर नितीश कुमार ने फिर से वही रास्ता अपनाया और जिस तरह से भाजपा के समर्थन में सरकार बनाई एक बार फिर लालू यादव की पार्टी के सहयोग से सरकार बना ली यहाँ भी जनता सिर्फ देखती रही . कर्णाटक में भी सत्ता परिवर्तन का खेल कई बार हो चुका है . ऐसे में जनता के मत सिर्फ दिखावा मात्र ही रह गए है सरकार किसे बनानी और पद पर किसे कब किसके साथ बीतना यह जनप्रतिनिधि ही कर रहे जनता की भावनाए तो अब कही नजर नहीं आ रही क्या यही लोकतंत्र है ...
     2014 के बाद बदली भारत की तस्वीर ...
    इन दिनों एक ऐसा माहौल तैयार किया जा रहा है कि भारत में जो भी कार्य हुए 2014 के बाद हुए 2014 के पहले भारत में कुछ भी नहीं था सब निर्माण और उन्नति 2014 के बाद हुई तब यह क्यों भूल जाते है कि 2014 के पहले इसी भारत में निवास करते हुए मजबूत न्यायपालिका ,कार्यपालिका के सहारे ही आज यह स्थिति हुई है .2014 के पहले सर्वोच्च पदों पर बैठे राजनेताओ का अपमान जायज था आज देश की आन के साथ जोड़ा जाने लगा जो हाँ में हाँ मिलाये वो देशभक्त जो ना मिलाये वो देश द्रोही क्या अभिव्यक्ति की आजादी यही है . क्या इसे ही लोकतंत्र कहते है जहा राजा के सुर में सुर मिलाया जाता है जिसे किसी की सुनना नहीं सिर्फ अपनी ही कहना यह परता राजतन्त्र में होती थी जहां सिर्फ राजा की बात ही सही होती थी अब लोकतंत्र कहा है ....
    कौन है भारत का राजा ....
       राजतंत्र में एक राजा होता था जो हर कार्य का श्रेय स्वयं लेता था अगर कुछ गलत भी करे तो चाटुकारों की फौज तैनात रहती थी राजा की बात को सही साबित करने के लिए राजतन्त्र में राजा सिर्फ अपनी कहता किसी सवालों का जवाब देना राजा के लिए जरुरी नहीं होता क्या आज भी ऐसी ही स्थिति है कुछ क्षण ऐसे भी आये है जो यह सोंचने पर मजबूर करते है नोटबंदी का मामला ही देखे तो कालाधन वापसी की बात हुई थी पर आज नोटबंदी के सालो बाद भी यह ज्ञात नहीं हुआ कि कितना कालाधन वापस आया यह भी ज्ञात नहीं हुआ कि इस कालेधन के प्रकरण में कितने लोग घेरे में आये , पुलवामा की बात करे तो देश में इतने बड़े कांड के बाद भी अभी तक इस विषय पर और इसके जाँच पर कोई नतीजे वाली पहल नहीं हुई वही पूर्व राज्यपाल के आरोपों पर भी तथ्यात्मक जवाब नहीं मिलना भी लोकतान्त्रिक देश में आम जनता के साथ एक धोखा ही प्रतीत हो रहा है . जहाँ एक ओर मोदी जाति को लेकर एक महीने में ही सुनवाई पूरी हो गयी और सजा भी हो गयी वही दिल्ली के जंतर मंतर  पर देश का मान विदेशो में बढाने वाले खिलाडी अभी भी न्याय की आस में बैठे है .
    चाटुकार मिडिया का भी अहम् हिस्सा लोकतंत्र को कुचलने में ....
       देश में इनदिनों चाटुकार मिडिया चेनल की भरमार है जो सत्य की जगह अपनी ही धुन में एक तरफ़ा प्रचार में लगे है . जिस तरह महिला अभिनेत्री पर अत्याचार की बात पर 24 घंटे आवाज़ बुलंद करने वाली मिडिया अब महंगाई पर बात नहीं करती रोजगार की बात पर मौन , सरकार के कार्यो पर जवाब विपक्ष से मांगती कार्य न करने पर आरोप विपक्ष पर लगाती . पत्रकार का धर्म होता है कि सरकार के कामो की /कमियों की बात करे किन्तु वर्तमान परिदृश्य में देखा जा रहा है कि काम करे तो सरकार की सफलता और काम ना करे तो विपक्ष की आलोचना जबकि फैसले लेने का सम्पूर्ण अधिकार सत्ता के पास फिर भी आरोप विपक्ष पर जिस प्रदेश में गैर भाजपा सरकार वो सरकार देश द्रोही . सभी को याद होगा कि किस तरह कुछ चेनल के चाटुकार पत्रकार एक तरफ तो देश के प्रधान मंत्री के बारे में टिपण्णी को देश की आन के साथ जोड़ते हुए दिखते  है वही प्रदेश के मुख्यमंत्रियों के बारे में खुले आम अनगर्ल बाते करते हुए अपमान जनक  टिपण्णी करने से भी बाज नहीं आते . देश का मुखिया हो या प्रदेश का मुखिया दोनों ही लोकतंत्र में देश व प्रदेश में प्रमुख होते है दोनों का ही सम्मान होना चाहिए किन्तु अक्सर यह देखा गया है कि इसमें भी भेदभाव की झलक देखने को मिल जाति है . हास्यपद खबर भी सरकार के पक्ष में चलाने वाली घटनाएं बहुत हुई सभी ने देखा है कि जब देश में नोटबंदी के बाद 2000 का नोट आया तो कैसे कई मिडिया चेनल्स ने इसमें नेनो चिप की बात को प्रमुखता से उठाया और सरकार के कदम की सराहना की अब जब 2000 के नोट को एक बार फिर बंद करने का आदेश जारी हुआ तो नेनो चिप  की प्रशंशा करने वाले मौन है क्या आम जनता की भावनाओं से खेलने का अधिकार मिल गया चाटुकार पत्रकारों को जो अपनी जिम्मेदारियों को भी दफ़न कर देते है . ये सत्य है कि सत्ताधारी के पक्ष की बाते वर्तमान समय में जरुरत बन जाती  है किन्तु क्या उनकी कमजोरियों को उजागर कर समाज हित में कार्य नहीं किया जा सकता . अगर कमजोरियों को उजागर किया जाता तो हो सकता है उसमे सुधार हो किन्तु यहाँ गलत कार्यो को भी सही करार देने की प्रथा क्या आने वाले समय में मजबूत भारत की दिशा में रुकावट नहीं ...
    ईडी की कार्यवाही प्रश्नीय और एक अच्छे प्रथा का उदय ....
       आज जिस तरह प्रवर्तन निदेशल कार्य कर रहा है वह सराहनीय है आज भले ही ईडी ने विगत 9 सालो में 95 % कार्यवाही विपक्ष पार्टियों के नेताओं पर की है किन्तु इस प्रथा से यह तो उम्मीद जगी है कि सत्ता परिवर्तन की दिशा में सत्ताधारी भी ऐसे ही कार्यवाही की दिशा में आगे बढेगा . आज कोई भी यह नहीं कह सकता कि फला राजनायक ने कोई घोटाला ना किया हो परोक्ष अपरोक्ष रूप से सभी शामिल रहते है किन्तु सत्ताधारी की ताकत के सामने कार्यवाही विपक्ष पर ही होती है जिसके पास राजदंड वही आदेश जारी करेगा ऐसी प्रथा से आने वाले समय में सभी का नंबर लगेगा जो भ्रष्टाचार में लिप्त होंगे कम से कम तब राजनेताओ को इस बात का डर तो रहेगा कि अगर भ्रष्टाचार हुआ तो आज नहीं तो कल उनका भी नंबर आया . यह भारत देश है यहाँ ना तो पंडित नेहरु का हमेशा शासन रहा ना इंदिरा का रहा और ना मोदी का रहेगा शासन की बागडोर परिवर्तित होगी ही क्योकि किसी ने भी अमृत नहीं पिया आज नहीं तो कल ईश्वर  के आगे सभी को नतमस्तक होना ही होगा .....
    राजदंड की प्रथा क्या लोकतंत्र में जरुरी ...
      आज राजदंड सेंगोल पर हर तरफ चर्चा हो रही है कि एक राज को उसके राज्याभिषेक के समय यह शक्ति दी जाति है और इसकी पौराणिक महत्ता भी है किन्तु क्या भारत में राजदंड की आवश्यकता है . भारत लोकतान्त्रिक देश है लोकतान्त्रिक देश में कार्यपालिका , न्यायपालिका का अपना अपना महत्तव है किसी एक को सर्वशक्तिमान घोषित नहीं किया जा सकता जैसा कि राजतन्त्र में होता है लोकतंत्र में सभी एक दुसरे के पूरक है भारत के इस नव निर्माण में अगर लोकतंत्र से ज्यादा महत्तव राजतन्त्र को दिया जाएगा तो क्या भारत में एक बार फिर राजतंत्र की दिशा में बढ़ रहा भारत .बात अगर राजदंड के स्वरुप सेंगोल की करे तो सेंगोल आज के लोकतंत्र में कई बातो को भी याद दिलाता है भारत शुरू से ही तपोभूमि के रूप में इतिहास के पन्नो में दर्ज है यहाँ धर्म,न्याय,सर्वभाव,समृद्धि सभी को महत्तव दिया जा रहा है सेंगोल सिर्फ एक राजदंड ही नहीं नंदी का स्वरुप समर्पण का प्रतिक ,नंदी की स्थापना एक गोल मंच पर की गई है, यह गोल मंच संसार का प्रतीक ,लक्ष्मी का रूप राज्य के वैभव का प्रतिक ,देवी लक्ष्मी के आस-पास हरियाली के तौर पर फूल-पत्तियां, बेल-बूटे उकेरे गए हैं, जो कि राज्य की कृषि संपदा का प्रतीक . ऐसी खूबियों से शोभित है सेंगोल जिसकी स्थापना की गयी है . यह सेंगोल भृत्य लोकतंत्र में यह भी दर्शाता है कि लोकतंत्र में राजधर्म का भी विशेष महत्तव है और हिन्दू प्रधान देश में धार्मिक आस्थाव का भी महत्तव . भारत की जनता एक स्वस्थ लोकतंत्र की कल्पना ही कर रही जहां पक्ष विपक्ष और कार्यपालिका समाज और देश हित में फैसले ले . अब से कुछ देर में ही नए संसद भवन का उद्घाटन होगा जिसमे लोकतंत्र के कई हिस्से ( विपक्षी पार्टी ) शामिल नहीं होंगे ऐसे में क्या यह उद्घाटन राजतन्त्र की दिशा में सिर्फ एक शुरुवात है .
       मेरे विचार से लोकतंत्र के इस पवित्र मंदिर का उद्घाटन का दृश्य ऐसा होना चाहिए था कि जिसमे न्यायपालिका /कार्यपालिका पक्ष विपक्ष सभी मौजूद हो और पूरी दुनिया के सामने एक मिसाल बने कि भारत के लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर संसद भवन के उद्घाटन पर सभी पुरे मन से मौजूद है और सभी का सम्मान लोकतंत्र की खुबसूरत तस्वीर के रूप में आने वाली पीढ़ी याद रखे काश ऐसा होता किन्तु यह सत्य है कि ऐसा नहीं हो रहा . संसद भवन के उदघाटन पर विपक्ष का बड़ा धडा नहीं , देश की प्रथम नागरिक उपस्थित नहीं और इसके जिम्मेदार सत्ता पक्ष ही नहीं विपक्ष भी है जो लोकतंत्र के मंदिर में भी राजनितिक कर रहे है ...

    शरद पंसारी ...

    लेख : आज सोशल मीडिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का संदेश देखा जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने अपने 9 वर्ष के कार्यकाल के विषय में एवं 9 वर्षों में किए हुए कार्यों के लिए जनता द्वारा की गई सराहना ऊपर आभार व्यक्त कर रहे थे और कुछ संदेश दे रहे थे. ट्विटर में दिया गया यह संदेश पूर्ण रूप से अंग्रेजी शब्दों के प्रयोग से भेजा गया जिस पर काफी लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया भी व्यक्त की संदेश तो काफी अच्छा था किंतु अंग्रेजी वर्णमाला शब्दों का प्रयोग पर मन में कुछ खटक महसूस हुई. अभी पिछले दिनों ही पूरी दुनिया ने देखा कि किस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेशी राजनयिकों के सामने भी हिंदी भाषा का प्रयोग कर भारत का मान बढ़ाया किंतु वही सोशल मीडिया में अंग्रेजी वर्णमाला का प्रयोग मन में कई तरह के सवालों को जन्म देने लगा.

    भारत की राष्ट्रीय भाषा हिंदी है और हिंदी को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार द्वारा निरंतर प्रयास किए जाते रहे हैं पिछले दिनों भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जापान सहित 3 देशों की यात्रा पर गए थे और वहां उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए विभिन्न देशों के राजनयिकों को भारत की तरफ से जो संदेश दिया वह शुद्ध हिंदी में था। सुनकर अच्छा लगा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हिंदी को बढ़ावा देने के लिए विदेशों में भी  हिंदी का प्रयोग कर रहे हैं हिंदी मैं दिए गए वक्तव्य को पूरी दुनिया ने सुना. हिंदी में दिए गए वक्तव्य को सुनकर भारतीयों ने गर्व ही महसूस किया कि कोई भारत का प्रधानमंत्री है जो विदेशों में भी हिंदी मैं अपने वक्तव्य कह रहा है किंतु वही जब भारत की बात करें तो भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोशल मीडिया अकाउंट मैं प्रधानमंत्री मोदी द्वारा संदेश दिया जाता है वह पूरी तरह अंग्रेजी वर्णमाला में होता है. आखिर यह बात समझ में नहीं आई कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदेशों में हिंदी में बात करते हैं और भारत आकर सोशल मीडिया में अंग्रेजी में संदेश देते हैं आखिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की क्या मंशा है जो वह  विदेशों में तो हिंदी का प्रयोग करते हैं किंतु भारत में भारतीयों को जो संदेश देते हैं सोशल मीडिया के द्वारा वह अंग्रेजी वर्णमाला में होता है. क्या भारतीयों को अपने प्रधानमंत्री के हिंदी संदेशों का इंतजार खत्म होगा या सोशल मीडिया पर अंग्रेजी वर्णमाला का ही प्रयोग किया जाएगा और विदेशों में हिंदी शब्द का...

     प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से गुजारिश है कि सोशल मीडिया अकाउंट में भी हिंदी में संदेश दें ताकि भारत की जनता उनके संदेशों को समझें और उस पर अमल करें....

    निजी विचार एवं सविनय निवेदन...

       नई दिल्ली / देश में हो रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय की कार्यवाही से आम जनता जहां खुश है वही ऐसे कई सवाल हैं जो आम जनता के मन में शंकाए भी पैदा कर रहे हैं भ्रष्टाचार के मामले में किसी भी सरकार को क्लीन चिट नहीं दिया जा सकता भारत के इतिहास में ऐसी शायद ही कोई सरकार होगी जिनके ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप ना लगे हैं चाहे वह प्रदेश की सरकार हो या केंद्र की सरकार वर्तमान में केंद्र में भारतीय जनता पार्टी का शासन है ऐसे में पूरे देश में जगह-जगह से खबर आती रहती है कि फला प्रदेश में या फला व्यक्ति के यहां प्रवर्तन निदेशालय #ED की कार्यवाही जारी है प्रवर्तन निदेशालय की कार्यवाही में सभी जगह एक बात कॉमन सी नजर आती है वर्तमान परिदृश्य में अगर देखा जाए तो प्रवर्तन निदेशालय #ED की कार्यवाही उन प्रदेशों में युद्ध स्तर पर जारी है जिन प्रदेशों में भारतीय जनता पार्टी का शासन ना हो वही उन व्यक्तियों पर भी प्रवर्तन निदेशालय की कार्यवाही जोरों पर है जो भारतीय जनता पार्टी #BJP या फिर केन्द्र सरकार की नीतियों के विरोधी हैं .
       वर्तमान स्थिति में अगर देखा जाए तो आम जनता की नजरों में अभी भारतीय जनता पार्टी का कोई भी सदस्य ना तो भ्रष्टाचारी है और ना ही किसी तरह के घोटालेबाज में शामिल है भारतीय जनता पार्टी के नेताओं पर लगे हुए आरोपों पर ही प्रवर्तन निदेशालय या जांच एजेंसियां मौन है छत्तीसगढ़ की बात ले तो छत्तीसगढ़ में पूर्ववर्ती सरकार डॉक्टर रमन सिंह #RamanSingh के समय में हुए नान घोटाले, पनामा पेपर लीक जैसे कई मामले हैं जिन पर जांच एजेंसी की कार्यवाही की रफ़्तार कितनी है सभी को ज्ञात है . वही झीरम घाटी मामले पर भी जांच अभी तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है देश की आम जनता भ्रष्टाचार के उजागर होने से खुश तो है उनकी खुशी दुगनी तक हो जाएगी जब सभी राजनीतिक पार्टियों के भ्रष्टाचारियों पर प्रवर्तन निदेशालय निष्पक्ष होकर कार्यवाही करें चाहे वह भ्रष्टाचारी किसी भी पार्टी का सदस्य हो किंतु वर्तमान समय में ऐसा नजर कहीं नहीं आ रहा .
       आज सत्ता में भारतीय जनता पार्टी #bjp है तो उनके विपक्षी पार्टियों पर लगातार जांच और कार्यवाही जारी है भ्रष्टाचार के उजागर होने से जनता खुश है और अब जनता भी यह दुआ करने लगी है कि सत्ता परिवर्तन हो और एक बार प्रवर्तन निदेशालय फिर सत्ताधारी पार्टियों के भ्रष्टाचारियों को छोड़कर विपक्ष के भ्रष्टाचारियों पर अपनी लगाम कसे इस तरह से हर 5-10 साल में सत्ता परिवर्तन होते रहे और राजनितिक दल  एक दूसरे के ऊपर जांच समिति बैठ आते रहे जिसके आने वाले समय में राजनीतिक पार्टियों के भ्रष्टाचारियों #curruption पर यह भय बना रहेगा कि अगर भ्रष्टाचार करेंगे तो सत्ता नहीं होने के बाद जाँच की तलवार लटकती रहेगी और प्रवर्तन निदेशालय या अन्य जाँच एजेंसियो की निगाहे करम उनके ऊपर पड़ जाएगी हो सकता है तब भ्रष्टाचार में कमी हो और देश विकास की राह में दुगनी रफ्तार के आगे बढ़े . आज आम आदमी देश के विकास और भ्रष्टाचार मुक्त भारत की कल्पना करता है जो लगातार सत्ता परिवर्तन होने से ही संभव नजर आ रहा है...
      

        नई दिल्ली / शौर्यपथ / आरबीआई ने 2000 के नोट पर पाबंदी लगा दी 30 सितंबर के बाद 2000 नोट के वैधता समाप्त हो जाएगी और बाजार से इसका चलन बंद हो जाएगा 2016-17 में जब नोट बंदी का फैसला हुआ था तब आम जनता को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा किंतु अब भारत सरकार के इस फैसले के बाद आम जनता को भी तरह की कोई परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ रहा है आम जनता तो वैसे भी काफी समय से 2000 के नोट के दर्शन नहीं कर पाई ऐसे में जिनके पास 2000 के नोट की तादाद ज्यादा है एक बार फिर उन्हें वापसी करने में तरह-तरह के रास्ते अख्तियार करने होंगे किंतु इस बार भारत सरकार की जांच एजेंसियों की नजर बराबर ऐसे लोगों पर रहेगी और निश्चित ही कई भ्रष्टाचारी फिर सामने आएंगे. आज भारत की जनता ₹2000 के नोट के बंद होने पर भले ही विचलित ना हो किन्तु एक बार उनके मन में फिर यह प्रश्न सामने आ गया कि 2016-17 में नोटबंदी के बाद भारत में कितना काला धन जमा हुआ इसकी जानकारी आखिर भारत सरकार उजागर क्यों नहीं कर रही है और इस काला धन को जिनसे भी जप्त किया गया है उनके नाम क्या है. नोटबंदी के ऐलान के समय देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह कहा था कि भारत में इतना काला धन है कि नोटबंदी के फैसले के बाद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत हो जाएगी किंतु नोटबंदी के आज 7 साल बाद भी आम जनता को यह नहीं मालूम कि भारत में कितना काला धन सामने आया और उसके अपराधी कौन कौन है .2000 के नोट के बंद होने की घोषणा के बाद एक बार फिर आम जनता के मन में यह सवाल उठने लगा कि इसलिए बाकी नोटबंदी के आंकड़े तो अभी तक उजागर नहीं हुए तो क्या इस बार 2000 की नोट की बंद की घोषणा के बाद काला धन जमा करने वाले सामने आएंगे या इस बार भी मामला शून्य की तरह कहीं लुप्त हो जाएगा . जनता के मन में यह सवाल भी उठ रहा कि जब अल्प समय के लिए 2000 के नोट को लाया गया था जैसा कि भाजपा के नेता और कुछ चाटुकार मिडिया समूह द्वारा प्रचारित किया जा रहा तो फिर 2000 के नोट की छपाई में सरकार ने हजारो करोड़ क्यों बर्बाद कर दिए . क्या सिर्फ भारत की जनता को प्रयोग शाला के रूप में इस्तमाल कर रही सरकार . आखिर देश के प्रधान मंत्री मोदी जी कब तक मन की बात करेंगे और कब जनता के सवालों का जवाब देंगे . पुराने जमाने में राजा के दरबार में राजा ही अपनी बात कहता और उनके चाटुकारों का समूह उनके हर सही गलत बात पर वाह वाही करता तब राजतन्त्र था किन्तु अब लोकतंत्र है लोकतंत्र में जनता को उनके सवालों के जवाब मिलने चाहिए किन्तु ऐसा हो रहा हो कही नजर नहीं आता क्या फिर से भारत में राजतन्त्र की स्थापना हो रही है ....

    छत्तीसगढ़ / छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने नवंबर 2022 में ईडी को पत्र लिखा था कि नान घोटाले पर मीडिया के कब जांच शुरू करेगी 15 दिनों में जांच शुरू नहीं किया गया तो न्यायालय की शरण में जाएंगे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने यह पत्र नवंबर 2022 को लिखा था. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की चिट्ठी का जांच की दिशा में प्रवर्तन निदेशालय ने वर्तमान तक के कोई सार्थक पहल नहीं की किंतु वही प्रवर्तन निदेशालय द्वारा प्रदेश में 2019 से चल रहे शराब घोटाले में जांच युद्ध स्तर पर शुरू कर दी प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार छत्तीसगढ़ में शराब घोटाला लगभग ₹2000 करोड़ का होना बताया जा रहा है वही इस मामले में जांच तेजी से चालू है और कई गिरफ्तारी हो चुकी है इन गिरफ्तारियां में प्रमुख गिरफ्तारियां रायपुर महापौर एजाज ढेबर के भाई अनवर टेबल  शराब और होटल व्यवसाई पप्पू ढिल्लों , गुरुचरण सिंह होरा जैसे लोगों की गिरफ्तारियां भी हो चुकी है एवं कई मशहूर हस्तियों पर जांच की तलवार लटकी हुई है साल 2019 के बाद वह ₹2000 करोड़  के घोटाले की जांच में जिस सक्रियता से प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी जांच जारी की है और लगातार कार्रवाई की जा रही है वही प्रदेश में हजारों को रुपया के नाम घोटाले के संबंध में प्रवर्तन निदेशालय मौन है.
        राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि नान घोटाले में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह का नाम होने के कारण एवं केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार होने से केंद्र सरकार भारतीय जनता पार्टी के किसी पूर्व मुख्यमंत्री के ऊपर कार्यवाही करने के पक्ष में नहीं है इस तरह की राजनीतिक चर्चाओं से आम जनता के मन में इस तरह के सवाल उठने लगे हैं कि क्या प्रवर्तन निदेशालय का उपयोग राजनीतिक पार्टी अपने मतलब से अपने फायदे के लिए कर रही है वही प्रवर्तन निदेशालय के अस्तित्व पर भी सवाल उठने लगे हैं क्या प्रवर्तन निदेशालय सिर्फ केंद्र सरकार की कठपुतली के रूप में कार्य कर रही है और प्रवर्तन निदेशालय का उपयोग राजनीतिक सत्ता पाने एवं विपक्षियों को परेशान करने के लिए ही किया जा रहा है .
       नाल घोटाले का मामला भी प्रवर्तन निदेशालय के पास है और ₹2000 करोड़ के शराब घोटाले का मामला भी प्रवर्तन निदेशालय के पास किंतु नान घोटाले की जांच अभी किसी मुकाम पर नहीं पहुंची वही दो-तीन साल पुराने मामले पर प्रवर्तन निदेशालय द्वारा लगातार छापेमारी गिरफ्तारियां की जा रही है संबंधित लोगों से लगातार पूछताछ जारी है उनकी संपत्तियों को अटैच किया जा रहा है आम जनता को इस बात की खुशी है कि भ्रष्टाचारियों को सामने लाने का कार्य प्रवर्तन निदेशालय कर रही है किंतु एक पक्षीय  कार्रवाई से आम जनता के मन में जांच एजेंसियों के खिलाफ एक विरोधाभास वाली भावना भी जागृत हो रही है वही अब आप जनता यह सब समझने लग गई है कि केंद्र सरकार सत्ता पाने के लिए जांच एजेंसियों का पुरजोर इस्तेमाल कर रही है लोकतंत्र में आम जनता के द्वारा चुनी हुई सरकार को किसी ना किसी बहाने परेशान करने की प्रथा की ज़बरदस्त शुरुवात हो गयी है और इस प्रथा को केंद्र सरकार द्वारा अपनी जांच एजेंसियों के सहारे भरपूर तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है .
     आम जनता में चर्चा का विषय यह भी रहता है कि कल को जब सत्ता परिवर्तन होगा तो यही जांच एजेंसियां आज सत्ताधारी पार्टियों के साथ है उनके विरुद्ध हो जाएंगे और फिर पुराने मामले को खोद कर निकाले जाएंगे इस बदले की राजनीति के चक्कर में आज निष्पक्ष जांच एजेंसियां भी सत्ता की कठपुतली बनते नजर आ रही है ना जाने यह प्रथा कब तक चलेगी और कब तक सत्ता की ताकत के आगे यह जांच एजेंसियां अपने अस्तित्व को खोती रहेंगी .....
       वही देखा जाए तो आम जनता खुश है  कि सत्ता की ताकत के आगे ही सही भ्रष्टाचार सामने आने लगा और कार्यवाही भी होने लगी ऐसी स्थिति में जनता भी हर 5 साल में सत्ता परिवर्तन और भर्ष्टाचार उजागर की दिशा में भी विचार करने लगी है हो सकता है कि आज नहीं तो कल ऐसी प्रथा की शुरुवात भी हो जाए और अल्टरनेट सत्ता की कमान अलग अलग राजनितिक दलों के पास रहे ....

    नरवा, गरूवा, घुरुवा, बाड़ी के संरक्षण एवं संवर्धन का अभियान है सुराजी गांव योजना
    मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल 21 मई को गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों को जारी करेंगे 13.57 करोड़ रूपए
    गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों को हो चुका है अब तक 445 करोड़ 14 लाख रूपए का भुगतान

    रायपुर / शौर्यपथ / कृषक परिवार से जुड़े छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ में खेती-किसानी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की जमीनी हकीकत पर केन्द्रित ‘सुराजी गांव योजना‘ की परिकल्पना की है। उनके कुशल मार्गदर्शन में इस योजना पर तेजी से अमल किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के निर्देशन में किसानों से धान खरीदी, उनकी कर्जमाफी, राजीव गांधी किसान न्याय योजना और गोधन न्याय योजना जैसी अभिनव योजनाओं से प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है ।

    आजीविका सृजन एवं जीवनयापन का सशक्त माध्यम बन रहे हैं गौठान
       जल संरक्षण, पशु संवर्धन, मृदा स्वास्थ्य एवं पोषण प्रबंधन की कार्यवाही को छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक परम्परा से जोड़ा गया है। आम जन के सहयोग से योजना को सफल करने सुराजी गांव योजना के माध्यम से नरवा, गरूवा, घुरुवा, बाड़ी संरक्षण एवं संवर्धन का अभियान प्रारंभ किया है। सांस्कृतिक परंपरा से परिपूर्ण इस कार्यक्रम को सरकार ने अपनाते हुए इसको एक अभियान के रूप में लिया है।
      प्रदेश सरकार द्वारा हरेली के दिन 20 जुलाई 2020 को गोधन न्याय योजना का शुभारंभ किया गया। इसके अंतर्गत सुराजी गांव में स्थापित गौठानों के माध्यम से गौठान समितियों द्वारा 2 रूपए प्रति किलो की दर से खरीदा जा रहा है।  गौठानों में इस गोबर से स्व सहायता समूहों द्वारा वर्मी कंपोस्ट, सुपर कंपोस्ट एवं सुपर कंपोस्ट प्लस का उत्पादन किया जाता है। वर्मी कंपोस्ट को 10 रूपए प्रति किलो, सुपर कंपोस्ट 6 रूपए प्रति किलो एवं सुपर कंपोस्ट प्लस 6.50 रूपए किलो की दर से किसानों को विक्रय किया जा रहा है।
      इस योजना से गोबर से निर्मित वर्मी कम्पोस्ट, सुपर कम्पोस्ट जैसे कार्बनिक खाद से कृषकों के खेतों में जैविक खेती की दिशा में उत्कृष्ट पहल की जा रही है। रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों का उपयोग कम होने से भूमि, जल, वायु, पर्यावरण के प्रदूषण को कम करके खाद्य ऋंखला में रसायनों के अवशेष को कम किया जा रहा है। जिससे खाद्य पदार्थों  गुणवत्ता में सुधार होने की पूर्ण संभावना है। खरीफ वर्ष 2023 हेतु रासायनिक उर्वरकों की खपत को कम करके गुणवत्तापूर्ण अधिकतम वर्मी कम्पोस्ट कृषकों को उपलब्ध कराने की दिशा में सार्थक प्रयास किया जा रहा है।

    नरवा, गरूवा, घुरुवा, बाड़ी के संरक्षण एवं संवर्धन का अभियान है सुराजी गांव योजना
       गोधन न्याय योजना के तहत निर्मित गौठानों में न सिर्फ गोबर की खरीदी, खाद निर्माण और बिक्री भी की जा रही है, बल्कि इसके इतर आजीविका सृजन के नवीन मापदण्ड अपनाए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था स्वावलम्बी, सम्बल और मजबूत बनती जा रही है। गौठान अब न केवल गोबर खरीदी-बिक्री केन्द्र हैं, बल्कि जीवनयापन का सशक्त माध्यम बन चुके हैं। इन गौठानों में वर्मी खाद और विक्रय के अलावा सब्जी उत्पादन, मशरूम स्पॉन, मुर्गी पालन, बकरीपालन, अण्डा उत्पादन, केंचुआ उत्पादन, मसाला निर्माण, कैरीबैग एवं दोना-पत्तल निर्माण, बेकरी निर्माण, अरहर एवं फूलों की खेती सहित विभिन्न प्रकार की गतिविधियों को समूह के सदस्य भलीभांति अंजाम दे रहे हैं। जिले के कुरूद विकासखण्ड के गौठानों में आजीविकामूलक गतिविधियों की सफलता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि उत्पादन कार्य के लागत व्यय को अलग करने के बाद लगभग लाखों रूपए की अतिरिक्त आय इन समूहों को हुई है, जो अपने आप में एक कीर्तिमान है।

    लगातार मिल रहे हैं पुरस्कार
      दिल्ली टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी नई दिल्ली के डॉ. बी.आर. अम्बेडकर सभागृह में आयोजित कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ की गोधन न्याय योजना को ई-गवर्नेंस अवार्ड 2022 से नवाजा गया है। यह पुरस्कार कम्प्यूटर सोसायटी ऑफ इंडिया (स्पेशल इंटरेस्ट ग्रुप ऑन ई-गवर्नेंस) द्वारा दिया जाता है। गोधन न्याय योजना को राज्य और प्रोजेक्ट केटेगरी में चयनित किया गया है। उल्लेखनीय है कि गोधन न्याय योजना को पूर्व में ‘‘स्कॉच गोल्ड अवार्ड’’ और राष्ट्रीय स्तर पर एलेट्स इनोवेशन अवार्ड’’ भी मिल चुका है।
      गोधन न्याय योजना के तहत गोबर खरीदी में स्वावलंबी गौठान न सिर्फ अपनी सहभागिता निभा रहे हैं बल्कि निरंतर बढ़त बनाए हुए हैं। बीते कई पखवाड़ों से गोबर खरीदी के एवज में भुगतान की जा रही राशि में स्वावलंबी गौठानों की हिस्सेदारी 60 से 70 प्रतिशत तक रहने लगी है। आज की स्थिति में 50 फीसदी से अधिक गौठान स्वावलंबी हो चुके हैं, जो स्वयं की राशि से गोबर एवं गौमूत्र की खरीदी के साथ-साथ गौठान की अन्य गतिविधियों को स्वयं की राशि से पूरा कर रहे हैं।

    गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों को हो चुका है अब तक 445 करोड़ 14 लाख रूपए का भुगतान
      मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल 21 मई दुर्ग जिले के सांकरा पाटन में आयोजित हो रहे भरोसे के सम्मेलन में गोधन न्याय योजना के हितग्राहियो को 13 करोड़ 57 लाख रूपए की राशि का ऑनलाईन अंतरण करेंगे। जिसमें 01 मई से 15 मई तक गौठानों में क्रय किए गए 1.98 लाख क्विंटल गोबर के एवज में ग्रामीण पशुपालकों को 3.95 करोड़ रूपए तथा गौठान समितियों को 5.66 करोड़ एवं स्व-सहायता समूहों को 3.96 करोड़ रूपए की लाभांश राशि शामिल है।
      गौरतलब है कि गोधन न्याय योजना के तहत गोबर विक्रेताओं, गौठान समितियों एवं महिला स्व-सहायता समूहों को 30 अप्रैल 2023 की स्थिति में 445 करोड़ 14 लाख रूपए का भुगतान किया जा चुका है। 21 मई को 13.57 करोड़ रूपए का भुगतान होने के बाद यह आंकड़ा बढ़कर 458 करोड़ 71 लाख रूपए हो जाएगा।
    साभार : मनोज सिंह, सहायक संचालक, जनसंपर्क विभाग

    नई दिल्ली / शौर्यपथ /  भाजपा के द्वारा चुनावी वर्ष में फिल्मो के सहारे अपनी नैय्या पार लगाने की कोशीश अब उलटे उसी पर भारी पड़ रही है . द केरल स्टोरी जो साउथ की कहानी है जिस पर तथ्यात्मक सच्चाई की कोई खबर अभी तक कही नहीं दिखाई गयी सिर्फ फ़िल्मी स्टोरी के दम पर ही भाजपा के दिग्गज नेता साउथ में अपनी पकड़ मजबूत करने की जुगत लगा रहे थे किन्तु कर्नाटक चुनाव में ना तो भाजपा के द्वारा उठाये गए फ़िल्मी कहानी द केरल स्टोरी  का सहारा मिला और ना ही बजरंगबली जी का आशीर्वाद मिला दोनों ही वार भाजपा के खाली हो गए हाँ ये जरुर रहा कि भाजपा के इस फिल्म के अपरोक्ष प्रचार के कारण फिल्म प्रोड्यूसर की अच्छी खासी कमाई हो गयी . पुरे देश में ऐसे कई भाजपा नेता देखे गए जो अपनी पूरी टीम के साथ इस फिल्म का आनंद लिया जिससे निर्माता को अच्छी कमाई और बिना खर्च किये अच्छा प्रचार मिल गया .
      वही अगर द केरल स्टोरी  विवाद की बात करे तो इस फिल्म में 32 हजार लडकियों के प्रताड़ना की बात प्रचारित की गयी किन्तु सत्यता के प्रमाण किसी ने नहीं दिए वही विपक्ष द्वारा एनसीआरबी के आंकड़े प्रस्तुत कर उलटे भाजपा को ही आइना दिखा दिया द केरल स्टोरी की बात तो सबने की किन्तु गुजरात में केन्द्रीय एजेंसी की प्रमाणित रिपोर्ट जिसमे 40 लडकियों के पिछले 5 साल में गायब होने के तथ्य पेश किये गए उस पर भाजपा के किसी कद्दावर नेता ने दो शब्द भी नहीं कहे क्या गुजरात की लडकियों को द केरल स्टोरी जैसी फ़िल्मी कहानी के आगे शून्य माना गया . क्यों नहीं भाजपा के नेता अब गुजरात से गायब हुई लडकियों के बारे में कोई जवाब दे रहे क्या लडकियों पर भी राजनीति अपने मतलब से की जा रही है . क्या ऐसे ही लोकतंत्र की स्वतंत्र भारत की कल्पना की थी आज़ादी के दीवानों ने जिन्होंने अपने खून से सींच कर देश को आजादी दिलाई क्या गुजरात की या अन्य प्रदेश से गायब हुई लडकियों के बारे में सभी एक होकर कोई ठोस कदम नहीं उठा सकते क्या फ़िल्मी कहानियों पर ही राजनितिक रोटी सकी जायेगी भविष्य में या धर्म के नाम पर बंटवारा किया जाएगा समाज को . आज धर्म के नाम पर कल समाज के नाम पर फिर जात के नाम पर फिर रंगभेद के नाम पर बस ये सिलसिला ही चलता रहेगा या फिर विकास और नवनिर्माण की बात पर होगी चर्चा ....
    लेखक के निजी विचार
    शरद पंसारी  

       शौर्यपथ लेख : आज देश भर में जहां कर्नाटक चुनाव के नतीजों की चर्चा चल रही है और दिन भर मीडिया समूह द्वारा चुनाव के नतीजों का इंतजार किया जाता रहा एवं पल-पल की खबर दी जाती रही किंतु जैसे-जैसे कांग्रेस पार्टी बहुमत की ओर बढ़ती गई भारत के मीडिया चैनल इस खबर को स्थान देने से कतरा ने लगे कई मीडिया चैनल यूपी में हुए निकाय चुनाव की खबरों को प्रमुखता से स्थान देते हुए निकाय चुनाव के बारे में चर्चा परिचर्चा करने एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यों की प्रशंसा करते हुए नजर आए. देश में निकाय चुनाव से बढ़कर असेंबली चुनाव होते हैं किंतु भारत के ऐसे कई टीवी चैनल से जो कांग्रेस की जीत को शायद पचा नहीं पा रहे हैं या फिर अपने आकाओं के दुख में साथ देने का और उनकी जी हुजूरी करने में लगे हैं .
      भारत के लोकतंत्र में मीडिया समूह को चौथा स्थान के रूप में माना जाता है और निष्पक्ष समाचार ही इनकी प्रमुख पहचान होती है किंतु जिस तरह से देखने में आ रहा है कि कर्नाटक की जीत के बाद कई मीडिया समूह कर्नाटक से उत्तर प्रदेश की ओर अपना रुख कर लिए हैं और उत्तर प्रदेश के निकाय चुनाव के खबरों को प्रमुखता से स्थान देते हुए योगी आदित्यनाथ के कार्यों की प्रशंसा करते हुए नजर आ रहे हैं . ऐसा नहीं है कि यूपी निकाय चुनाव में योगी आदित्यनाथ का जादू नहीं चला हो उत्तर प्रदेश के निकाय चुनाव में 17 में 17  निकायों में भाजपा की जीत ये संदेश देती है कि उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ  कि सरकार के कामकाज से आम जनता खुश है और मतों के द्वारा अभी भी योगी आदित्यनाथ के साथ है भाजपा के साथ है . देखा जाए तो उत्तर प्रदेश के निकाय चुनाव में कोई बहुत बड़ा उलटफेर नहीं हुआ है पिछले चुनाव में 16 नगर निकाय चुनाव में 14 सीटों पर भाजपा का कब्जा रहा और 2 सीटों पर समाजवादी पार्टी का कब्जा रहा है इस बार 17 निकाय चुनाव में 17 के 17 सीट भारतीय जनता पार्टी के खाते में गई .
       वही अगर कर्नाटक की बात करे तो इससे बड़ा उलटफेर कर्नाटक में हो गया जहां विधानसभा की 224 सीटों में बहुमत के लिए जरूरी 113 सीटों से आगे बढ़ते हुए कांग्रेस ने 136 सीटों पर जीत हासिल कर एक बड़ा उलटफेर कर दिया कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी को 39 सीटों का नुकसान हुआ है मतदान के बाद कई सर्वे रिपोर्ट के अनुसार भारतीय जनता पार्टी को 80 से 90 सीट किसी किसी मीडिया चेनल में 110 से 120 सीट मिलने का दावा किया जाता रहा किंतु उससे बड़ा उलटफेर होते हुए भारतीय जनता पार्टी के खाते में 65 सीट आई किंतु इतने बड़े उलटफेर के बाद भी कई मीडिया चैनल कर्नाटक से अपना रुख हटाते हुए अन्य छोटी बड़ी खबरों को दिखाने में व्यस्त हो गए .
      क्या स्वतंत्र मीडिया अब भारत में संभव नहीं है क्या बिना आकाओं के अनुमति के सच्ची और निष्पक्ष खबरें दिखाना भी अब बंद होने लगेगा. भारत के 140 करोड़ की जनता को अब निष्पक्ष खबरें देखने के लिए किसी और साधनों का उपयोग करना पड़ेगा. मीडिया चौथा स्तंभ ना होकर एक कठपुतली के रूप में आम जनता की नजरों में और सोच में शामिल हो जाएगा.
     सभी मीडिया चैनल को यह अधिकार है कि वह क्या खबर दिखाएं और क्या खबर नहीं दिखाएं किंतु आज भारतीय राजनीति में कई सालों बाद कर्नाटक में एक बड़ा उलटफेर हुआ है परन्तु इसे वह स्थान नहीं मिल पाया जिस की हकदार कांग्रेस पार्टी थी क्या इस तरह की प्रथा भविष्य में और विकराल रूप लेगी . क्या निष्पक्ष पत्रकारिता अब एक पुरानी बातें ही रह जाएंगी जिसे सिर्फ किताबों में ही पढ़ा जाएगा साक्षात रुप से कभी देखना मुनासिब ना होगा....
    लेखक के निजी विचार
    लेख - शरद पंसारी

    शौर्यपथ। आस्था एक ऐसा एहसास है जो किसी व्यक्ति विशेष दल विशेष संगठन विशेष का नहीं हो सकता ईश्वर में आस्था सभी की रहती है आस्था के रूप अलग-अलग हो सकते हैं किंतु विधाता एक ही है । वर्तमान समय में प्रभु श्री राम के नाम पर जिस पार्टी ने अपने अस्तित्व को आज इस मुकाम तक पहुंचाया कि वह दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी के रूप में जानी जाती है जी हां बात अगर करें तो भारतीय जनता पार्टी ने जय श्रीराम के नारों के उद्घोष के साथ अपनी राजनीतिक पराकाष्ठा को एक नई ऊंचाई तक पहुंचा दिया कोई भी दल अगर धर्म को महत्व देता है तो यह उस दल की अपनी सोच रहती है इस पर कोई आक्षेप नहीं लगा सकता और यह कोई गलत भी नहीं किंतु ऐसा भी नहीं की किसी अन्य दल के लोग आस्था पर अपना हक ना जमा सके हैं आस्था किसी दल के सदस्यों की सीमा में नहीं बंधी होती है व्यक्ति चाहे किसी भी दल की मानसिकता का हो किंतु अपने आराध्य को पूरे भाव पूर्ण तरीके से मानता है और अपनाता है वर्तमान में जिस तरह से कर्नाटक चुनाव में बजरंग दल के प्रतिबंध को लेकर राजनीतिक चर्चा जोरों पर है और बजरंग दल के प्रतिबंध को जहां एक और भारतीय जनता पार्टी नीत सरकार के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बजरंगबली को ताला लगाने का आरोप कांग्रेस पर लगा रहे हैं जिसके कारण राजनीतिक चर्चाओं का बाजार गर्म हो रहा है समाचार पत्रों में,न्यूज़ चैनलों में कांग्रेस को लगातार बजरंगबली का विरोधी करार दिया जा रहा है जिसकी आंच जब छत्तीसगढ़ में पहुंची तो छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उल्टे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर ही पलटवार कर दिया मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब फेंकने में माहिर हो गए हैं पूर्व में भी उन्होंने कई संतों को जिनके कार्यकाल की अवधि अलग-अलग सदी की थी 1 साल बैठाकर परिचर्चा की बात कर दी भारत की जनसंख्या को कई गुना बढ़ा दिया अब ऐसे ही बजरंगबली को ताला लगाने की बात कह रहे हैं जबकि कर्नाटक के मेनिफेस्टो में बजरंग दल पर बैन लगाने पर विचार करने की बात कही गई है ना कि बजरंगबली पर ताला.चुनावी मौसम है राजनीतिक चर्चा परिचर्चा तो चलती ही रहेगी आरोप-प्रत्यारोप तो लगते ही रहेंगे किंतु इन सब बातों में एक बात और सामने आई जोकि सोचने भी है और चिंतनीय भी छत्तीसगढ़ में साल 2003 से 2018 तक प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में थी ऐसे में श्रीराम के अनन्य भक्त के रूप में पहचान बना चुकी भारतीय जनता पार्टी आखिर कौशल्या माता को क्यों याद नहीं किया। विश्व के एकमात्र कौशल्या माता मंदिर जो कि रायपुर के चंदखुरी में स्थित है कौशल्या माता प्रभु श्री राम की माता है प्रभु श्री राम जो माता के चरणों में स्वर्ग देखते थे आखिर 15 साल भारतीय जनता पार्टी नीत रमन सरकार ने कौशल्या माता मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए क्या किया । 

     कहने का तात्पर्य यह नहीं की माता कौशल्या को भूलकर भारतीय जनता पार्टी ने कोई अपराध कर दिया हो किंतु यह भी सत्य है कि कौशल्या माता मंदिर का जीर्णोद्धार और महोत्सव वर्तमान की भूपेश सरकार ने बड़े धूमधाम से किया वही वनवास के दौरान प्रभु श्रीराम जिन मार्गों पर अपनी यात्रा किए उन मार्गों को राम वन गमन पथ के नाम से सौंदर्यीकरण करने का कार्य भी भूपेश सरकार ने किया । 

      सरकारी कोई भी हो किंतु धर्म का महत्व और स्थान अपने आप में अलग है धर्म ना तो किसी दल की सीमा में है और ना ही किसी की निजी संपत्ति, धर्म और आस्था हर उस व्यक्ति का है जो अपने आराध्य को मन भाव से मानता है और अपनाता है आज राजनीति में विकास की बात रोजगार की बात स्वास्थ्य की बात शिक्षा की बात उद्योग की बात ना होकर अगर धर्म के सहारे राजनीति हो तो उस आम जनता का क्या होगा जो अपना धर्म अपने कर्म को मानता है जो सुबह उठकर यह सोचता है कि शाम तक कोई काम मिल जाए ताकि परिवार का पोषण कर सके उस गरीब और निचले तबकों के लिए सबसे बड़ा धर्म यही है कि उसे कोई ऐसा काम मिले जिससे वह अपने परिवार को दो वक्त की रोटी और सादगी पूर्ण जीवन बिताने के लिए मददगार साबित हो आज भी देश और प्रदेश के की बड़ी आबादी अपने कर्म को ही धर्म मानती है क्योंकि उसे यह मालूम है कि अगर कर्म नहीं करेंगे तो परिवार का पोषण नहीं कर पाएंगे. शास्त्रों में भी कर्म को ही पूजा जाता है अगर कर्म अच्छे रहें तो धर्म सर्वोच्च हो ही जाएगा काश वह दिन कब आएगा जब भारत की राजनीति में धर्म के जगह कर्म स्थान लेगा, बेरोजगारी का मुद्दा स्थान लेगा, स्वास्थ्य का मुद्दा स्थान लेगा, महंगाई का मुद्दा स्थान लेगा,उद्योग का मुद्दा स्थान लेगा,शिक्षा का मुद्दा स्थान लेगा,तरक्की और खुशहाली का मुद्दा स्थान लेगा, विकास का मुद्दा स्थान लेगा......

           रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ भारतीय जनता पार्टी को प्रदेश में कोई ऐसा मुद्दा नहीं मिल रहा जिसके सहारे आने वाले विधान सभा में भाजपा सत्ता के द्वार तक पहुँच सके . देश का शायद छत्तीसगढ़ ही पहला ऐसा प्रदेश होगा जिसने अपने चुनावी घोषणा पत्र के एक बड़े हिस्से को पूरा कर दिया हो और साथ में ऐसी कई योजनाओं को क्रियान्वित किया है जो घोषणा पत्र में भी नहीं था .
       आज प्रदेश में शिक्षा की बात करे तो स्वामी आत्मानंद स्कूल , स्वास्थ्य में डॉ. खूबचंद बघेल योजना , गोधन न्याय योजना , गौठान योजना , नालो को संरक्षित कर कृषि क्षेत्र में बढ़ोतरी , वनोपज का समर्थन मूल , भूमिहीन मजदूरो के लिए योजना ऐसी  कई योजनाये है जिसे लागू भी किया गया और जमीनी स्तर पर क्रियान्वित भी किया गया . ऐसे में प्रदेश भाजपा अब मुद्दों की तलाश में है वही छोटी छोटी बात में कई बातो को जोड़कर बड़ी बात बनाने का प्रयास भी निरंतर ज़ारी है . उसी तारतम्य में अगर बजरंग बलि जी को ताले में बंद करने की बात को ही ले ले तो साफ़ नजर आ रहा है कि बात कुछ और ही कही गयी किन्तु प्रचार किसी और तथ्यों का किया जा रहा है .
      बता दे के कर्णाटक विधान सभा चुनाव के अपने संकल्प पत्र में कांग्रेस ने पीएफआई और बजरंग दल पर बेन का उल्लेख किया किन्तु कही पर भी हिन्दुओ के आराध्य बजरंग बलि जी को ताले में बंद करने की बात नहीं कही गयी किन्तु कर्णाटक के एक चुनावी सभा में देश के पीएम मोदी जी  ने बजरंग बलि को ताले में बंद करने का आरोप कांग्रेस पर लगा दिया बस फिर क्या इसकी आंच छत्तीसगढ़ में पहुंचनी थी जो पहुंच गयी और जैसा कि सभी को मालुम है कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भारत के ऐसे राजनेता /मुख्यमंत्री/प्रधानमंत्री नहीं है जो प्रेस की बातो का सवालों का जवाब ना दे . मुख्यमंत्री ने स्पष्ट तौर पर कहा कि कर्नाटक चुनाव में संकल्प पत्र में पीएफआई और बजरंग दल पर बेन लगाने पर वहा की सरकार बनने के बाद विचार किया जाएगा वही छत्तीसगढ़ में बजरंगदल के कार्यो पर नजर रखी जा रही है यहाँ सब ठीक है . कांग्रेस ने बजरंग दल ,पीएफआई पर बेन लगाने के विचार का उल्लेख किया ना कि हिन्दुओ के आराध्य देव बजरंगबली जी पर .
       किन्तु प्रदेश भाजपा के द्वारा और उनके कई राजनेताओ के द्वारा बजरंगबली को ताले में बंद ? की बात का पुरजोर प्रचार करते हुए मुख्यमंत्री को हिन्दू विरोधी होने का अभियान छेड़ दिया गया . सोशल मिडिया के माध्यम से ऐसा प्रचार अभियान शुरू हो गया कि सच धुंधला  होते जा रहा और झूठ तेज रौशनी में नहा गया बिलकुल ठीक उसी तरह जिस तरह आलू से सोना बनाने की बात कही किसी और ने थी और प्रचार किसी और का हो गया क्योकि यहाँ की राजनीति में नेता सिर्फ अपने मन की बात कहता है आम जनता की सुनता ही नहीं हाँ ये जरुर है कि हर 5 साल में हाथ जोड़ का वोट मांगने ज़रूर दरवाजे पर आ जाता है .
      आश्चर्य है कि प्रदेश में स्वयमेव ही मुख्यमंत्री की खुर्सी की दौड़ में अपने आप को रखने वाले राजनेता भी बजरंग बलि जी को ताले में बंद करने की बात का आरोप लगाने में मुखिया बनने कि जुगत लगा रहे है क्यों देश के पीएम ने यह बात जो कह दी अब उनकी बात का प्रचार करना तो ज़रूरी क्योकि ये भारत है यहाँ बड़े बड़े जादू होते है देश की जनसँख्या 600करोड़ पहुँच जाती है , तीन अलग अलग सदी के महापुरुष / संत एक मंच पर बैठ कर मंत्रणा करते है , डिजिटल कमरे का अविष्कार के पहले ही फोटो शूट हो जाता है जैसे बातो पर भी आँख बंद कर विश्वास कर लेते है क्योकि चाटुकारिता परमोधर्म माना जाता है राजनीति में .
       अब देखना यह है कि छत्तीसगढ़ में जिस तरह से भाजपा के बड़े बड़े नेता बजरंग बलि को ताले में बंद करने वाले आरोप लगा रहे उसे क्या सिद्ध कर पायेंगे या आराध्य देव बजरंगबली के नाम के सहारे सत्ता के द्वारा तक पहुँचने में कामयाब होंगे क्योकि विकास की बात , महंगाई की बात तो कही नजर नहीं आ रही अब तक ...( लेखक के निजी विचार )

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