September 09, 2026
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    राजनांदगांव

    राजनांदगांव (1782)

    गौठानों में गोबर से वर्मी कम्पोस्ट के अलावा अन्य उत्पादों का करें निर्माण
    महिला स्वसहायता समूह बाड़ी में व्यवसायिक दृष्टि से सब्जियों का करें उत्पादन

    राजनांदगांव / शौर्यपथ / कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा ने आज कलेक्टोरेट सभाकक्ष में शासन की महत्वाकांक्षी योजनाएं गोधन न्याय योजना, नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी तथा मनरेगा अंतर्गत कार्यों की प्रगति की समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा ने कहा कि गोधन न्याय योजना शासन की प्राथमिकता वाली योजना है जिन गौठानों में गोबर की खरीदी की जा रही है वहां शत प्रतिशत वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन कर विक्रय प्रारंभ होना चाहिए। शासन के जारी निर्देश के अनुसार सभी गौठानों में कार्य करें। कृषि विभाग द्वारा वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन के लिए लगातार प्रशिक्षण दिया जाए। गौठान में वर्मी कम्पोस्ट के निर्माण में तेजी लाए।
    उन्होंने कहा कि सभी गौठानों में गोबर खरीदी लगातार होनी चाहिए। इसमें लापरवाही नहीं होनी चाहिए। प्रत्येक ग्राम सचिव को जिम्मेदारी पूर्वक कार्य करनी होगी। उन्होंने लापरवाही बरतने वाले सचिव पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। जिन गौठानों में वर्मी उत्पादन हो रहा है उनका लगातार विक्रय करें। बड़े किसान, उन्नत किसान तथा द्विफसल लेने वाले किसान को वर्मी कम्पोस्ट की खरीदी के लिए प्रेरित करें। शासकीय विभाग जिनकों वर्मी कम्पोस्ट की आवश्यकता है वे समूहों द्वारा निर्मित कम्पोस्ट का खरीदी करें। उन्होंने कहा कि गोबर का उपयोग वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन के अलावा अन्य ऐसे उत्पाद बनाने में किया जाए जिसकी विक्रय आसानी से हो सके। जिन गांवों में गौठान नहीं है वहां स्थान का चिन्हांकन करें और इन स्थानों को मल्टीएक्टीविटी सेंटर के रूप में तैयार किया जाए। जहां पर महिला स्वसहायता समूह विभिन्न आर्थिक गतिविधियों से जुड़े कार्य कर सके।
    कलेक्टर वर्मा ने कहा कि जिन गांवों में गौठान बने है वहां रबी के रकबे में वृद्धि होना चाहिए। मवेशी गौठान में रहे ताकि फसलों को चराई से बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि सभी गौठानों में स्वसहायता समूह को आर्थिक गतिविधियों से जोडऩा है। गौठानों को मल्टीएक्टीविटी सेंटर के रूप में विकसित करना है। इसके लिए गौठानों में शेड तैयार करें जहां महिला स्वसहायता समूह गौठान में रहकर ही कार्य करें। गौठानों में कार्य करने वाले समूह अपने आमदनी का कुछ हिस्सा रिवाल्विंग फंड में जमा करें। जिससे वे आगे के कार्यों के लिए सामग्री क्रय कर सके। जिससे उनकी गतिविधियां लगातार चलती रहे। कलेक्टर श्री वर्मा ने बाड़ी योजना के अंतर्गत इसके कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि बाड़ी में व्यवसायिक दृष्टि से सब्जियों का उत्पादन किया जाना चाहिए। जिससे महिला समूह की आमदनी में वृद्धि होगी। महिलाएं बाड़ी में सब्जियों का उत्पादन कर स्थानीय बाजार में विक्रय करें। उन्होंने स्वीकृत किए गए वनधन केन्द्र के निर्माण कार्यों के प्रगति की जानकारी लेकर जल्द पूरा करने के निर्देश दिए।
    उन्होंने कहा कि इसका निर्माण हाट बाजार में हो जहां स्वसहायता समूह के माध्यम से वनोपज खरीदा जाए। इन केन्द्रों में वनोपज को शासन द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य में खरीदी की जाए। उन्होंने मनरेगा के कार्यों की समीक्षा कर लक्ष्य के अनुरूप मजदूर बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मनरेगा के अंतर्गत पंचायतों में स्वीकृत कार्य किए जाए। 100 दिन पूरा करने वाले मजदूरों की संख्या में वृद्धि करें। उन्होंने नरवा के कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि इसके अंतर्गत स्वीकृत हुए कार्य पूरे किए जाए। मनरेगा के अंतगत कुओ का निर्माण भी किया जाना चाहिए।
    कलेक्टर वर्मा ने एनआरएलएम के कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि महिला समूहों को आजीविका गतिविधियों से जोड़कर उनके आर्थिक विकास का कार्य करें। विभिन्न पंचायतों में व्यवसायिक परिसरों का निर्माण किया गया है, उनका उपयोग होना चाहिए। व्यवसायिक परिसर में स्थित खाली दुकानों का आबंटन किया जाए। उन्होंने कहा कि शासन द्वारा अनेक बीमा योजना चलाई जा रही हैं। जिसका लाभ हितग्राहियों को मिलना चाहिए। किसी व्यक्ति की मृत्यु या दुर्घटना होने पर बीमित राशि उन्हें प्राप्त होनी चाहिए। इसके लिए सभी अधिकारी प्रारूप तैयार कर जानकारी रखें और हितग्राहियों को लाभ पहुंचाए। जिन गांवों में बैंक नहीं है वहां बैंक सखी के माध्यम से राशि अंतरण का कार्य किया जाए। इसके लिए लोगों को जागरूक करें जिससे बैंक में भीड़ नहीं होगी। इस अवसर पर सीईओ जिला पंचायत श्रीमती तनुजा सलाम, अतिरिक्त सीईओ दिलीप कुर्रे, उप संचालक कृषि बीएस धु्रर्वे, सभी जनपद पंचायत के सीईओ, मनरेगा कार्यक्रम अधिकारी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

    राजनांदगांव / शौर्यपथ / सचिव सह आबकारी आयुक्त निरंजन दास एवं प्रबंध संचालक एपी त्रिपाठी के निर्देशानुसार अवैध शराब विक्रेताओं एवं परिवहन करने वालों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। जिसके अंतर्गत 14 दिसम्बर को सूचना के आधार पर ग्राम बनभेड़ी थाना लालबाग में ओमप्रकाश कंवर के आधिपत्य के रिहायशी मकान से 96 पाव देशी दारू टायगर संत्री केवल महाराष्ट्र में विक्रय हेतु वैध का लेबल लगा प्रत्येक पाव में 180 एमएल कुल मात्रा 17.28 बल्क लीटर जप्त किया गया। इस प्रकार 12 दिसम्बर को बूचटोला मार्ग में नाका लगाकर वाहन चेकिंग के दौरान हीरो एचएफ डीलक्स मोटरसाइकिल वाहन क्रमांक सीजी 08 एडी 6424 में अवैध मदिरा परिवहन करते हुए गोपालपुर थाना छुरिया दीनू टेकाम से 51 पाव देशी दारू टायगर संत्रा केवल महाराष्ट्र में विक्रय हेतु वैध का लेबल लगा प्रत्येक में 180 एमएल कुल मात्रा 9.18 लीटर जप्त किया गया।
    आयुक्त आबकारी नवीन प्रताप सिंह तोमर ने बताया कि आरोपियों के विरुद्ध आबकारी अधिनियम की धाराओं के अंतर्गत प्रकरण दर्ज कर विवेचना किया जा रहा है। कार्रवाई के दौरान सहायक जिला आबकारी अधिकारी श्रीमती निरूपमा लोन्हारे, सहायक जिला आबकारी अधिकारी डोंगरगांव एसके द्विवेदी, आबकारी उपनिरीक्षक वृत्त घुमका जीतेश्वरी आलेंद्र , आबकारी उपनिरीक्षक वृत-चिचोला गीता साहू तथा आरक्षक निजाम शाह ठाकुर, आबकारी मुख्य आरक्षक दीपक गुप्ता, आबकारी आरक्षक वृत्त डोंगरगांव ओमप्रकाश सिन्हा एवं सहयोगी अनिल सिन्हा उपस्थित थे।

    राजनांदगांव / शौर्यपथ / आज डोंगरगढ़ विधायक अध्यक्ष अनुसूचित जाति प्राधिकरण भुनेश्वर बघेल के निर्देशानुसार धान खरीदी केन्द्र पदुमतरा का निरीक्षण क्षेत्रीय जनपद सदस्य व सभापाति ओमप्रकाश साहू व युवा कांग्रेस अध्यक्ष सौरभ वैष्णव पहंुचे।
    जनपद सभापति ओमप्रकाश साहू ने किसानों से मुलाकात किये धान खरीदी की व्यवस्था देखा व अधिकारी-कर्मचारियों व हमालों से बातचीत किये व बेहतर व्यवस्था रखने की बात कही व किसानों को किसी प्रकार परेशानी न हो इस पर विशेष ध्यान रखने कहा गया।
    युवा कांग्रेस अध्यक्ष सौरभ वैष्णव ने कहा छत्तीसगढ़ सरकार किसानों की सरकार है किसानो की धान खरीदी व्यवस्था का ध्यान देने की बात कही।

    ० एनीमिक गर्भवती माता श्रीमती गोमती सिन्हा ने स्वस्थ शिशु को दिया जन्म
    ० आंगनबाड़ी केन्द्र में पौष्टिक भोजन, अंडा एवं मूंगफल्ली की चिक्की से स्वास्थ्य हुआ अच्छा


    राजनांदगांव / शौर्यपथ /  मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान अंतर्गत राजनांदगांव की एकीकृत बाल विकास सेवा परियोजना (शहरी) के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा कुपोषण की रोकथाम के लिए एनीमिक गर्भवती माताओं को घर-घर जाकर पौष्टिक आहार दिया जा रहा है और उन्हें गर्भावस्था के दौरान संपूर्ण देखभाल की जानकारी दी जा रही है। आंगनबाड़ी केन्द्र बलराम दास वार्ड नंबर 15 केन्द्र क्रमांक 2 की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती लता सोनटिया ने वजन पंजीयन के दौरान देखा कि गर्भवती महिला श्रीमती गोमती सिन्हा का वजन 50 किलोग्राम था और उनका हिमोग्लोबिन 9.5 ग्राम था। मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के तहत उन्हें लगातार आंगनबाड़ी केन्द्र में सप्ताह में तीन दिन अंडा, मूंगफल्ली की चिक्की एवं प्रतिदिन गर्म भोजन दिया गया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने गृह भेंट के दौरान पौष्टिक भोजन के साथ ही आयरन, फॉलिक एसिड की गोली, टीकाकरण, नियमित जाँच की सतत निगरानी की। जिसके फलस्वरूप गर्भवती महिला श्रीमती गोमती सिन्हा का हिमोग्लोबिन 12 ग्राम हो गया और उन्होंने एक स्वस्थ्य शिशु को जन्म दिया, जिसका वजन 3 किलोग्राम था।
    मार्च 2020 से कोविड-19 के कारण आंगनबाड़ी बंद हो जाने के कारण आंगनबाड़ी कार्यकर्ता द्वारा घर-घर जाकर एनीमिक गर्भवती महिलाओं को सूखा राशन वितरण किया गया और सतत निगरानी की गई। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता द्वारा परिवार एवं समुदाय के बीच एनिमिया और कुपोषण की कमी हेतु उपलब्ध इ-ईला के विडियो और विभिन्न चार्ट, पोस्टरों के माध्यम से जागरूकता लाने का कार्य कर रही हैं। स्वच्छता और कोविड-19 से बचाव हेतु गृह भेंट कर सभी बच्चों के पालकों, गर्भवती महिलाओं एवं परिवार को लगातार मार्गदर्शन दे रही हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन, एएनएम एवं पर्यवेक्षक के आपसी समन्वय से शीघ्र से शीघ्र गर्भवती महिलाओं का पंजीयन, शत प्रतिशत संस्थागत प्रसव, जन्म के तुरन्त बाद या 1 घण्टे के अंदर स्तनपान, टीकाकरण, कुपोषित बच्चों को पर्याप्त ऊपरी पौष्टिक आहार, वजन, कृमिनाशक गोली, आयरन सिरप का वितरण एवं बच्चों और महिलाओं के लिए स्वास्थ्य जाँच शिविर का आयोजन करवा रही हैं। ताकि बच्चों और महिलाओं में कुपोषण और एनीमिया की दर में कमी आ सके।

    ० खाद्य सामग्रियों की प्रदर्शनी लगाकर बताए फायदे
    ० शहरी क्षेत्र के गौरी नगर में हुआ पोषण जागरुकता कार्यक्रम

    राजनांदगांव / शौर्यपथ / बच्चों और महिलाओं को सुपोषित बनाने के लिए जिले में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इन सभी कार्यक्रमों का उद्देश्य कुपोषण को मिटाना है। इसी कड़ी में राजनांदगांव शहरी क्षेत्र के गौरीनगर में महिला एवं बाल विकास विभाग के कर्मचारियों और क्षेत्रीय आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका व मितानिन ने विशेषकर गर्भवती महिलाओं और शिशुवती माताओं के स्वास्थ्य से संबंधित कई कार्यक्रम किए।
    इस अवसर पर मौजूद लाभार्थियों को सुपोषण के प्रति प्रेरित करने का प्रयास किया गया। कुपोषण मुक्ति के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से यहां विभिन्न प्रकार की खाद्य सामग्रियों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। प्रदर्शनी में प्रमुख रूप से मूंगफली, केला, कुंदरू, कद्दू, अंडे, पपीता, सोया बड़ी, चना, उड़द, अरहर दाल, बटरा, पापड़, प्याज, आलू, मुनगा भाजी, कांदा भाजी, पोई भाजी और मीठा नीम जैसी विभिन्न प्रजातियों को रखा गया। साथ ही महिलाओं को इसके सेवन से होने वाले फायदे भी बताए गए। वहीं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका व मितानिन ने गर्भवती महिलाओं व शिशुवती माताओं को कम वजन के नवजात शिशुओं को कंगारू मदर केयर देने की जानकारी दी। साथ ही संक्रमण से बचाव हेतु साफ सफाई बरतने, मां द्वारा शिशु को कम से कम 6 माह तक सिर्फ स्तनपान कराने तथा माता को स्वयं मौसमी फलों, हरी सब्जियों और रेडी-टू-ईट का उपयोग करने हेतु समझाइश दी।
    आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका व मितानिन ने महिलाओं को जागरूक करते हुए कहा, सही पोषण ही बेहतर विकास की नींव मानी जाती है, इसलिए जो चीजें हमारे आसपास ही मौजूद हैं, उसका भरपूर उपयोग करें। शिशु व स्वयं के स्वास्थ्य के प्रति गंभीर लाभार्थी महिलाएं सजगता के साथ समय-समय पर जरूरी सलाह लेती रहेंगी तो कुपोषण के खिलाफ जारी लड़ाई जीतने में निश्चित तौर पर बड़ी मदद मिलेगी। उन्होंने महिलाओं से अपील करते हुए कहा कि, बच्चों को कुपोषित होने से बचाना है तो आंगनबाड़ी केन्द्र में होने वाली गतिविधियों से जरूर जुड़ें। आंगनबाड़ी के लाभ को अपनाएं। इसके साथ-साथ रेडी-टू-ईट, हरी सब्जियों, अंडा और खासकर मुनगा जैसी चीजों को अपने दैनिक जीवन में अपनाएं और कुपोषण से मुक्ति पाएं।
    आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अमृता ठाकुर ने बताया, महिलाओं और शिशुओं में सुपोषण के लिए गोद भराई, उचित पोषण आहार, रेडी-टू-ईट या वजन जांचने जैसे क्रिया-कलाप क्षेत्र में लगातार किए जा रहे हैं और इससे महिलाएं लाभान्वित भी हो रही हैं। इस संबंध में महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी रेणु प्रकाश ने बताया, सुपोषण के लिए जिले में किए जा रहे प्रयासों के सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं। मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजनांतर्गत इस वर्ष अब तक 9,093 बच्चों की स्वास्थ्य जांच की गई एवं 4,281 गंभीर कुपोषित बच्चों को निःशुल्क दवा वितरण किया गया है। जिले में 6 पोषण पुनर्वास केन्द्र संचालित हैं, जिसमें नियमित रूप से बच्चों को लाभ देने का प्रयास किया जा रहा है। वर्ष 2019-20 में माह फरवरी 2020 तक कुल 960 अति गंभीर कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केन्द्र का लाभ दिया गया। पोषण पुनर्वास केन्द्र में 14 दिवस लाभ लेने के बाद घर पर बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण पर विशेष ध्यान देने के लिए अभिभावकों की काउंसलिंग स्वास्थ्य विभाग एवं महिला बाल विकास विभाग द्वारा संयुक्त रूप से की जा रही है।
    उन्होंने बताया, कुपोषण मुक्ति के लिए स्थानीय पौष्टिक आहार को प्रमुखता, बाड़ी, किचन गार्डन को बढ़ावा और अधिक से अधिक जन समुदाय की सहभागिता जैसे कई प्रयास एक साथ और लगातार किए जा रहे हैं। इसके अलावा बच्चे का नियमित टीकाकरण हो, यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है और इसी कड़ी में गौरी नगर क्षेत्र में पोषण से संबंधित जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

    जिले में 58 हजार 588 नये राशन कार्ड बने
    कोविड-19 के दौरान बीपीएल श्रेणी के 2 लाख 92 हजार 402 परिवारों एवं 1896 प्रवासी मजदूरों को दिया गया नि:शुल्क राशन

    राजनांदगांव / शौर्यपथ / शासन की ओर से प्रदेश की जनता को खाद्यान्न की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत सशक्त कदम उठाए गए हैं। राजनांदगांव जिले में जनवरी 2019 से 9 दिसम्बर 2020 तक 58 हजार 588 नए राशन कार्ड बनाए गए। जिसमें नये बीपीएल राशन 10 हजार 727 तथा नये एपीएल राशन कार्ड 47 हजार 861 बनाए गए। खाद्य विभाग द्वारा कोविड-19 संक्रमण के दौरान युद्ध स्तर पर कार्य किया गया। वैश्विक महामारी कोविड-19 के संक्रमण के प्रसार को रोकने तथा रोकथाम के उपाय हेतु लगाए गए देशव्यापी लॉकडाउन से लोग घरों में रहने विवश थे। वहीं बीपीएल श्रेणी के परिवारों एवं प्रवासी मजदूरों के सामने लॉकडाउन के समय भोजन व्यवस्था की चिंता सताने लगी थी। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने बीपीएल राशनकार्डधारी तथा बिना राशनकार्डधारी (प्रवासी मजदूर) परिवारों की चिंता दूर करने के लिए माह अप्रैल, मई, जून का राशन एकमुश्त नि:शुल्क प्रदाय करने के निर्णय लेकर तत्काल वितरण प्रारंभ करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के इस निर्णय से जिले के सामान्य एवं आदिवासी वनांचल क्षेत्र के बीपीएल परिवारों की एवं प्रवासी मजदूरों की बड़ी चिंता दूर हो गयी। शासन की ओर से एपीएल परिवारों को भी खाद्यान्न दिया जा रहा है।
    कलेक्टर श्री टोपेश्वर वर्मा के निर्देशानुसार कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिये जिले के सभी 869 शासकीय उचित मूल्य दुकानों में सामान्य दूरी बनाये रखते हुए खाद्यान्न का सफल वितरण किया गया एवं प्रवासी मजदूरों के पलायन के समय मजदूरों के परिवहन हेतु पेट्रोल, डीजल एवं भोजन की व्यवस्था की गयी। जिला खाद्य अधिकारी श्री किशोर सोमावार ने बताया कि कोविड-19 के दौरान जिले में 2 लाख 92 हजार 402 बीपीएल परिवारों को कुल 3 माह का चावल 453566.7 क्ंिवटल, चना 12669.38 क्ंिवटल नि:शुल्क वितरण किया गया। साथ प्रवासी मजदूरों (लगभग 1896) को माह मई, जून, जुलाई 2020 को कुल 29.78 क्ंिवटल चना, 413.61 क्ंिवटल चावल नि:शुल्क वितरण किया गया।

    राजनांदगांव / शौर्यपथ / बैकयार्ड कुक्कुट पालन से डोंगरगढ़ विकासखंड के ग्राम माड़ीतराई के संजय कुमार वर्मा की आमदनी बढ़ी है। उन्होंने बताया कि पशुधन विकास विभाग द्वारा कृत्रिम गर्भाधान केन्द्र डोंगरगढ़ से 45 नग रंगीन चूजे शासन की बैकयार्ड कुक्कुट पालन योजना के तहत प्रदान किए गए थे। मुर्गी पालन से प्रतिदिन 10 से 12 अंडे प्राप्त होते हैं जो 10 से 15 रूपए प्रति अंडे बिकते थे। वहीं मुर्गी को वजन के हिसाब से 400 से 500 रूपए प्रति नग के हिसाब से विक्रय करते हैं। हमने मुर्गी पालन का व्यवसाय बढ़ाने के लिए 112 अंडों की क्षमता का इक्यूवेटर लिया है। जिससे अंडों से चूजे निकालकर विक्रय करते हैं। इस तरह लगभग 10 हजार रूपए की मासिक आमदनी होने लगी है, जिससे मेरी आर्थिक स्थिति मजबूत बनी है। उन्होंने कहा कि पशुधन विकास विभाग के मार्गदर्शन एवं सहयोग से कुक्कुट पालन का कार्य सफलतापूर्वक कर रहे हैं। 

    जिले में उद्योग विभाग द्वारा युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निवेश प्रोत्साहन के लिए किए जा रहे महत्वपूर्ण कार्य

    राजनांदगांव / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में समन्वित समावेशी एवं सस्टेनेबल औद्योगीकरण के माध्यम से आत्मनिर्भर एवं प्रगतिशील अर्थव्यस्था निर्माण की दिशा में प्रभावी कार्य किए जा रहे हैं। राजनांदगांव जिले में जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र द्वारा विभिन्न योजनाओं के तहत समावेशी विकास के लिए तथा निवेश प्रोत्साहन के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए गए हंै। स्थानीय रोजगार को प्राथमिकता देते हुए समाज के कमजोर वर्ग को मजबूत बनाने के लिए विशेष प्रयास किए गए हैं, ताकि शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके। मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना से जिले के युवाओं के जिन्दगी में परिवर्तन आया है और आत्मनिर्भर बने हैं। वर्ष 2018-19 में 25 युवाओं के लिए 31 लाख 14 हजार रूपए का ऋण वितरित किया गया है। वहीं वर्ष 2019-20 में 11 युवाओं को 29 लाख 75 हजार रूपए का ऋण प्रदान किया गया है। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत वर्ष 2018-19 में 48 युवाओं को राज्य अनुदान के साथ 1 करोड़ 55 लाख 74 हजार रूपए की राशि तथा वर्ष 2019-20 में 50 युवाओं को 2 करोड़ 17 लाख 16 हजार रूपए की राशि प्रदान की गई है।
    जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र के महाप्रबंधक श्री एसके सिंह ने बताया कि नवीन उद्योग की स्थापना के लिए युवाओं को स्टॉम्प शुल्क में छूट प्रदान किया गया है। वर्ष 2018-19 में जिले में 41 हितग्राहियों को जिनमें 13 बैंक ऋण के लिए एवं 28 भूमि क्रय के लिए स्टॉम्प शुल्क छूट प्रदान किया गया है। 63 हितग्राहियों को 3 करोड़ 12 लाख 84 हजार की राशि उद्योग स्थापना हेतु बैंक से लिए गए ऋण पर ब्याज अनुदान प्रदान किया गया है। उद्योगों द्वारा भूमि, भवन, शेड एवं यंत्र-संयत्र के व्यय पर अनुदान के रूप में 30 औद्योगिक इकाईयों को 6 करोड़ 78 लाख 8 हजार 917 रूपए की राशि लागत पूंजी अनुदान के रूप में प्रदान की गई। वहीं एक औद्यागिक इकाई को 17 करोड़ 92 लाख 94 हजार की राशि पूंजीगत अनुदान निवेश प्रोत्साहन सहायता अनुदान के रूप में प्रदान की गई। वहीं वर्ष 2019-20 में 23 हितग्राहियों को नवीन उद्योगों की स्थापना के लिए स्टॉम्प शुल्क प्रदान किया गया है। जिनमें 11 हितग्राहियों को बैंक ऋण पर एवं 12 हितग्राहियों को भूमि क्रय पर स्टॉम्प शुल्क प्रदान किया गया है। 62 हितग्राहियों को उद्योग स्थापना के लिए 2 करोड़ 58 हजार की राशि बैंक से लिए गए ऋण पर ब्याज अनुदान प्रदान किया गया है। उद्योगों द्वारा भूमि, भवन, शेड एवं यंत्र-संयत्र के लिए व्यय पर 21 हितग्राहियों को 4 करोड़ 74 लाख 41 हजार रूपए औद्योगिक इकाईयों को लागत पूंजी अनुदान प्रदान किया गया है। वर्ष 2020-21 में 14 हितग्राहियों को स्टॉम्प शुल्क छूट प्रदान किया गया वहीं 57 हितग्राहियों को 1 करोड़ 63 लाख 95 हजार रूपए ब्याज अनुदान एवं 28 औद्यागिक इकाईयों को 8 करोड़ 25 लाख 40 हजार 119 रूपए की राशि लागत पूंजी अनुदान प्रदान की गई है।

    राजनांदगांव / शौर्यपथ / कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा ने जिले में व्यापक रूप से की जा रही धान खरीदी की समीक्षा के लिए राजनांदगांव विकासखंड के ग्राम सिंघोला, रानीतराई, सुरगी, भर्रेगांव एवं अंजोरा धान खरीदी केन्द्र का निरीक्षण किया। कलेक्टर वर्मा ने किसानों से बातचीत की एवं उनकी समस्याओं के संबंध में भी जानकारी ली। किसानों ने उन्हें बताया कि टोकन लेने में कोई परेशानी नहीं हुई है और केन्द्र में समिति प्रबंधक एवं अन्य कर्मचारियों का व्यवहार अच्छा है।
    कलेक्टर ने कहा कि किसानों को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए और किसी भी धान खरीदी केन्द्र से पैसे लेने की शिकायत नहीं आनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों से पैसे लेने वाले प्रबंधक एवं कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर ने यह भी कहा कि धान खरीदी के पहले ढेरी लगाकर धान की गुणवत्ता की जांच करें। उन्होंने धान तौलाई, कांटा-बाट, बारदानों की व्यवस्था, नमी मापक यंत्र, पेयजल व्यवस्था एवं अन्य सुविधाओं का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि अच्छी गुणवत्ता का साफ-सुथरा धान खरीदें और डीओ काटकर धान खरीदी केन्द्रों से धान का शीघ्र ही उठाव कराएं।
    कलेक्टर ने किसानों से बातचीत की। इस दौरान ग्राम भंवरमरा के रामभगत ने बताया कि उनकी 5 एकड़ जमीन है और 75 कट्टा धान बिक्री के लिए लेकर आए हैं। किसान श्री सुरेश साहू, श्री चेतन साहू एवं श्री नेमीचंद पटेल ने उन्हें बताया कि धान विक्रय करने के लिए पैसे लेने जैसी कोई मांग यहां नहीं की गई है और समिति की व्यवस्था के प्रति संतुष्टि जाहिर की। समिति प्रबंधक ने बताया कि 82 किसानों का टोकन कटा है और ग्रामवार धान खरीदी की जा रही है। छोटे किसानों का धान पहले खरीदा जा रहा है। कृषक श्री नारायण सिन्हा ने बताया कि उनके पास 3 एकड़ जमीन है और वे एक साथ 55 क्विंटल धान विक्रय करने के लिए लेकर आएं हैं। धान खरीदी केन्द्र रानीतराई में कलेक्टर ने किसानों से बातचीत की जहां किसानों ने उन्हें अवगत कराया कि इस साल फसल अच्छी हुई है। यहां धान खरीदी केन्द्र में किसी तरह के पैसे की मांग नहीं की जा रही है।
    समिति प्रबंधक ने धान खरीदी केन्द्र में बैनर में किसी भी कर्मचारी को पैसा नहीं देने के लिए उल्लेख किया है। कलेक्टर श्री वर्मा ने धान खरीदी केन्द्रों में निरीक्षण के लिए नोडल अधिकारी के नहीं आने पर नाराजगी जाहिर की और कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। समिति के प्रबंधक ने उन्हें जानकारी दी कि डीओ कट गया है और अब तक 1860 क्ंिवटल धान का उठाव हो गया है। कलेक्टर को धान खरीदी केन्द्र भर्रेगांव के किसान विष्णु प्रसाद, कार्तिक राम बंजारे एवं सियाराम कुम्भकार ने बताया कि यहां किसी तरह की पैसे की मांग नहीं गई है। कलेक्टर ने किसानों को बताया कि रकबा की शिकायत होने पर इसमें आवेदन कर संशोधन करा सकते है। धान खरीदी केन्द्र अंजोरा में भी किसानों से बातचीत की। जहां किसानों ने व्यवस्था के प्रति संतुष्टि जाहिर की।

    ० शारीरिक या मानसिक आघात की चाइल्ड लाइन को 1098 पर दें सूचना
    ० बच्चों को दें श्गुड टच व बैड टचश् की जानकारीए बचाएं उन्हें शोषण से
    ० कोरोना संकटकाल में उनके संपूर्ण स्वास्थ्य की सुरक्षा पर जोर

    राजनांदगांव / शौर्यपथ / कोरोना संक्रमण के संकटकाल का व्यापक असर बच्चों के शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ा हैण् लॉकडाउन के कारण लगातार घर में रहने व स्कूलों व कोचिंग संस्थानों के नियमित नहीं खुलने के कारण उनकी दिनचर्या पर असर पड़ा है, उनके जीवनशैली में अचानक हुए इस बदलाव के कारण उनका मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हुआ है। ऐसे में बच्चों में कई नकारात्मक सोच उभरने की आशंका भी बढ़ी है। इस परिस्थिति में उन्हें भावनात्मक मदद मिलनी जरूरी है, अन्यथा वह किसी बड़े शारीरिक व मानसिक आघात का शिकार हो सकते हैं। बच्चों को इस संकट से उबारने के लिए दी ब्लू ब्रिगेड, राष्ट्रीय सेवा योजना एवं यूनिसेफ ने मिलकर लोगों को इसके प्रति जागरूक करने व उन्हें बच्चों के प्रति उनकी नैतिक जिम्मेदारियों के प्रति सजग बनाने के उद्देश्य से एक मार्गदर्शिका जारी की है।
    मार्गदर्शिका के अनुसार बच्चों के साथ किसी प्रकार की भी ऐसी घटना जिसमें शारीरिक शोषण, बच्चें की पिटाई, किसी वस्तु से चोट पहुंचाना, घर से निकालना, काटना, जलाना या ज्यादा ही सख्ती से पेश आना, उपयुक्त भोजन एवं सुरक्षा प्रदान नहीं करना, अपमानित करना, अनुचित भाषा का प्रयोग करना, यौन शोषण करना व उपेक्षा करना आदि शामिल हों, इसकी सूचना चाइल्ड लाइन को 1098 पर कॉल कर देनी है।

    आवश्यक टीकाकरण को भी दी गई है तरजीह
    कोविड-19 संक्रमण के असर के मद्देनजर बच्चों के आवश्यक टीकाकरण को भी तरजीह दी गयी है। बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र, जिला अस्पताल सहित सामुदायिक व प्राथमिक व उप स्वास्थ्य केंद्रों पर जाकर टीकाकरण जरूर दिलाया जाना चाहिए। बच्चों को दिये जाने वाले टीकाकरण में विशेषतौर पर हेपेटाइटिस बी, काली खांसी, टीबी, हिब इंफेक्शन, दिमागी बुखार, पोलियो, खसरा व रूबेला, डिप्थेरिया व टिटनेस शामिल हैं। ये टीकाकरण बच्चों को जानलेवा बीमारियों से रक्षा करने के साथ उनके रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने का काम करती हैं।

    गर्भस्थ शिशु का भी रखा गया है पूरी तरह ध्यान
    मार्गदर्शिका में कोविड-19 संकटकाल में गर्भस्थ शिशु के भी स्वास्थ्य का संपूर्ण ध्यान रखते हुए गर्भवती महिलाओं से प्रसव के लिए सरकारी या निजी स्वास्थ्य केंद्रों का चयन करने के लिए कहा गया है। इस बात पर बल दिया गया है कि स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव के क्या फायदे हैं और इसकी तैयारी किस प्रकार होनी चाहिए। साथ ही जननी सुरक्षा योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना तथा भगिनी प्रसूति सहायता योजना आदि की भी जानकारी दी गयी है। गर्भवती महिलाओं में कोविड-19 के भय को दूर करने तथा गर्भवती को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व आशा या नर्स से मिलवाना व सरपंच या पंचायत प्रतिनिधियों से सहयोग दिलावाने के लिए लोगों से अपील की गयी है।

    गुड टच, बैड टच व्यवहार के प्रति भी जागरूकता
    जारी मार्गदर्शिका में बच्चों को शारीरिक स्पर्श के बारे में भी सजग व जागरूक बनाने के लिए कहा गया है। बच्चों को यह बताने की अपील की गयी है कि यदि कोई उन्हें अनुचित ढंग से छुए तो उसे रोकें और मदद के लिए जोर से चिल्लाए। ऐसे व्यवहार जिनमें वे स्वयं को सहज महसूस नहीं करते उन्हें बैड टच के रूप में देखा जाता है। पैर के बीच, नितंब व जांघों के बीच, छाती व चेहरा को छूना या ऐसे कोई भी स्पर्श जिससे बच्चा असहज होता है बैड टच की श्रेणी में आता है। ऐसी बातों को मां-पिता, दादा-दादी व शिक्षक आदि से बताने के लिए कहा गया है।

    कोविड के दौरान घर पर ही सीखने की प्रक्रिया पर बल
    कोविड के दौरान इस बात पर जोर दिया गया है कि बच्चों के घर पर सीखना जारी रहे। कोविड-19 के कारण बच्चों के सामने शिक्षा को लेकर कई चुनौतियां हैं। ऐसी चुनौतियों के बीच बच्चे घर पर रहते हुए सीखना जारी रखें। स्वयं को सीखने की प्रक्रिया में व्यस्त रख इस महामारी में तनाव से निपटन में मदद मिलेगी। सीखने की प्रक्रिया में उनके भाई-बहन, माता-पिता या चाचा-चाची अपनी जिम्मेदारी निभा सकते हैं, उनके साथ पंसदीदा कहानियां पढ़ने या खेलने सहित अन्य रचनात्मक कार्य में मदद कर सकते हैं।

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