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June 08, 2026
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राजनांदगांव

राजनांदगांव (1769)

? राजनांदगांव / शौर्यपथ

राजनांदगांव जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने आज अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय मेडिकल कॉलेज परिसर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 10 नई 108 संजीवनी एक्सप्रेस एम्बुलेंस को हरी झंडी दिखाकर शुभारंभ किया। साथ ही 3 अतिरिक्त एम्बुलेंस की स्वीकृति के साथ जिले को कुल 13 अत्याधुनिक एम्बुलेंस की सौगात मिली है।

डॉ. रमन सिंह ने कहा कि यह पहल न केवल राजनांदगांव, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं को नई गति और मजबूती प्रदान करेगी। उन्होंने इसे प्रदेश में स्वास्थ्य ढांचे को सुदृढ़ करने की दिशा में “मील का पत्थर” बताया।

नई एम्बुलेंस में 8 बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS) और 2 एडवांस लाइफ सपोर्ट (ALS) वाहन शामिल हैं। इन्हें जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात किया जाएगा। एम्बुलेंस में जीपीएस आधारित लोकेशन सिस्टम, मोबाइल डेटा टर्मिनल, बीपी मॉनिटर, पल्स ऑक्सीमीटर, ऑक्सीजन, नेबुलाइजर सहित सभी जरूरी जीवनरक्षक उपकरण उपलब्ध हैं।

इस सेवा का रिस्पॉन्स टाइम शहरी क्षेत्रों में 15 मिनट और ग्रामीण क्षेत्रों में 30 मिनट निर्धारित है, जिससे सड़क दुर्घटना, प्रसूति एवं अन्य आपात स्थितियों में त्वरित सहायता सुनिश्चित होगी।

डॉ. सिंह ने बताया कि वर्ष 2011 में शुरू हुई 108 सेवा ने अब तक जिले में 1.26 लाख से अधिक लोगों को समय पर उपचार उपलब्ध कराया है, वहीं पिछले वर्ष 8,463 महिलाओं को इसका लाभ मिला।

कार्यक्रम में वर्चुअल रूप से जुड़े सांसद संतोष पाण्डेय ने इसे प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि नई एम्बुलेंस दूरस्थ क्षेत्रों में जीवन रक्षक भूमिका निभाएंगी। महापौर मधुसूदन यादव ने भी इस पहल के लिए आभार व्यक्त करते हुए इसे स्वास्थ्य सेवाओं को और सशक्त बनाने वाला कदम बताया।

इस अवसर पर जनप्रतिनिधि, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, चिकित्सक एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

? कुल मिलाकर, 108 संजीवनी एक्सप्रेस की यह नई सौगात जिले में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को तेज, आधुनिक और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

  राजनांदगांव / शौर्यपथ / प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के अंतर्गत आरडीसी रोड से बाकल तक 2.45 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया गया है। विभाग की सतत निगरानी और गुणवत्ता मानकों के कड़ाई से पालन के चलते यह कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप संपन्न हुआ।
निर्माण कार्य के दौरान विभाग द्वारा गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। वर्तमान में पूरे मार्ग का डामरीकरण कार्य पूर्ण हो चुका है तथा परीक्षण में सड़क की गुणवत्ता संतोषजनक पाई गई है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि पीएमजीएसवाई के तहत सड़कों की मजबूती और दीर्घकालिक टिकाऊपन सुनिश्चित करना ही प्रमुख उद्देश्य है।
अधीक्षण अभियंता, दुर्ग संभाग श्री बी.एस. पटेल ने स्थल का निरीक्षण कर कार्य की समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान पूर्व में बिछाए गए ओवरहीट मटेरियल और उसके स्थान पर किए गए सुधार कार्य का जायजा लिया गया। उन्होंने सुधार कार्य को मानक अनुरूप बताते हुए संतोष व्यक्त किया।
कार्यपालन अभियंता ने जानकारी दी कि डामरीकरण के दौरान ठेकेदार लेखराम साहू के प्लांट में तकनीकी खराबी के कारण डामर मिश्रण ओवरहीट हो गया था, जो उपयोग के लिए अनुपयुक्त था। निरीक्षण के बाद ऐसे मटेरियल को तत्काल हटाकर पुनः मानक के अनुरूप डामरीकरण कराया गया।

इसके बाद पुनः प्लांट में आई खराबी के चलते प्रभावित हिस्सों में बिछाए गए मटेरियल को ग्रेडर से हटवाकर अगले ही दिन उच्च गुणवत्ता के साथ कार्य पूर्ण कराया गया। तकनीकी अधिकारियों की उपस्थिति में पूरे हिस्से का पुनर्निर्माण सुनिश्चित किया गया।
विभाग ने कार्य में लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए संबंधित ठेकेदार के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। साथ ही चेतावनी दी गई है कि भविष्य में किसी भी प्रकार की तकनीकी त्रुटि या गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मृणेन्द्र चौबे

राजनांदगांव। शौर्यपथ। भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेई स्मृति शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय संबद्ध चिकित्सालय पेंड्री में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की संवेदनशीलता तथा समर्पण से एक लावारिस बुजुर्ग मरीज को नया जीवन मिला है। कोमा और गैस्पिंग की गंभीर अवस्था में अस्पताल लाए गए इस अज्ञात मरीज का लगभग 20 दिनों तक लगातार उपचार किया गया, जिसके बाद वह पूरी तरह स्वस्थ होकर अस्पताल से डिस्चार्ज हो गया।

जानकारी के अनुसार 24 फरवरी 2026 को 108 एम्बुलेंस के माध्यम से एक अज्ञात बुजुर्ग मरीज को अत्यंत नाजुक हालत में अस्पताल लाया गया था। भर्ती के समय मरीज गहरे कोमा में था और गैस्पिंग की स्थिति में अंतिम सांसें ले रहा था। चिकित्सकीय जांच में पता चला कि मरीज लीवर की गंभीर बीमारी से ग्रसित था, जिसके कारण वह हेपेटिक एन्सेफैलोपैथी (दिमाग पर असर) की खतरनाक स्थिति में पहुंच चुका था।

इसके साथ ही मरीज के शरीर में प्रोटीन की अत्यधिक कमी के कारण पूरे शरीर में सूजन थी और संक्रमण फैलने से वह सेप्टिक शॉक की स्थिति में था। चिकित्सकों के अनुसार इस अवस्था में मरीज के बचने की संभावना बेहद कम होती है, लेकिन समय पर मिले उपचार और टीमवर्क से उसे नया जीवन मिल सका।

डीन डॉ. पी. एम. लुका एवं मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. देशकर के मार्गदर्शन तथा मेडिसीन विभागाध्यक्ष डॉ. एन. के. तिरकी के नेतृत्व में चिकित्सकों की टीम ने तत्काल उपचार शुरू किया। मरीज के अज्ञात और लावारिस होने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए उसके सभी आवश्यक परीक्षण, जांच और दवाइयों की व्यवस्था पूरी तरह नि:शुल्क कराई।

इलाज की जिम्मेदारी डॉ. प्रकाश खुंटे के साथ डॉ. आशीष दुलानी, डॉ. भूपेंद्र जंघेल, डॉ. आकाश चंद्राकर और डॉ. विकास जैन की टीम ने संभाली। चिकित्सकों ने मरीज की स्थिति को देखते हुए लगातार मॉनिटरिंग और आवश्यक उपचार जारी रखा। इस दौरान इंटर्न डॉक्टरों ने भी उपचार प्रक्रिया में सक्रिय सहयोग दिया।

डॉक्टरों के साथ-साथ नर्सिंग स्टाफ की विशेष देखभाल भी मरीज के स्वस्थ होने में महत्वपूर्ण साबित हुई। सिस्टर इंचार्ज रेखा और नर्सिंग ऑफिसर केसर, राजलक्ष्मी, मोहिनी, पूजा निषाद तथा चंद्रकला ने चौबीसों घंटे मरीज की सेवा की। वार्ड बॉय और आया वर्ग ने भी मरीज की देखभाल में पूरा सहयोग दिया, जिससे उसकी हालत में धीरे-धीरे सुधार होता गया।

लगातार लगभग 10 दिनों तक आईसीयू और क्रिटिकल केयर में गहन उपचार के बाद मरीज की स्थिति स्थिर हुई और वह धीरे-धीरे होश में आने लगा। इसके बाद सामान्य वार्ड में रखकर उपचार जारी रखा गया। करीब 20 दिनों तक चले उपचार के बाद 14 मार्च 2026 को बुजुर्ग मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो गया और उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।

मृणेन्द्र चौबे

राजनांदगांव। शौर्यपथ। प्रेस क्लब राजनांदगांव के प्रतिष्ठापूर्ण चुनाव का आयोजन रविवार को उत्साहपूर्ण और लोकतांत्रिक माहौल में सम्पन्न हुआ। अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष के तीन प्रमुख पदों के लिए मतदान के माध्यम से चुनाव कराया गया। चुनाव परिणाम में सचिन अग्रहरि ने लगातार तीसरी बार अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज कर इतिहास दोहराया। वहीं अनिल त्रिपाठी सचिव और बसंत शर्मा कोषाध्यक्ष पद पर निर्वाचित घोषित किए गए। परिणाम घोषित होते ही विजेताओं और समर्थकों ने एक-दूसरे को बधाई देते हुए जीत का जश्न मनाया।

अध्यक्ष पद के लिए हुए चुनाव में दो प्रत्याशियों के बीच सीधा मुकाबला हुआ। इसमें सचिन अग्रहरि को 107 मत प्राप्त हुए, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी कमलेश स्वर्णकार को 41 वोट मिले। इस प्रकार सचिन अग्रहरि ने 66 मतों के बड़े अंतर से जीत हासिल कर लगातार तीसरी बार अध्यक्ष बनने का गौरव प्राप्त किया।

सचिव पद के लिए हुए मुकाबले में अनिल त्रिपाठी को सर्वाधिक 74 वोट मिले। उनके बाद विक्रम बाजपेयी को 50 मत प्राप्त हुए। वहीं सुरेंद्र गुप्ता को 12, मनोज राठौर को 6 और योगेश शर्मा को 6 मत मिले।

कोषाध्यक्ष पद के लिए हुए चुनाव में बसंत शर्मा को 85 वोट प्राप्त हुए। उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी रवि सिंह ठाकुर को 32 और प्रमोद शेंडे को 31 मत मिले।

148 मतदाताओं ने किया मतदान

प्रेस क्लब चुनाव में कुल 158 मतदाता थे, जिनमें से 148 सदस्यों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक मतदान प्रक्रिया चली। इसके बाद दोपहर 3 बजे से मतगणना शुरू हुई और शाम करीब 5 बजे तक परिणाम घोषित कर दिए गए।

इस चुनाव में पहली बार लगभग 93.67 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो सदस्यों के उत्साह और सक्रिय भागीदारी को दर्शाता है। अस्वस्थता और व्यस्तता के बावजूद बड़ी संख्या में पत्रकारों ने मतदान कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी निभाई।

चुनाव में निर्वाचन अधिकारी के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ता उमाकांत भारद्वाज के साथ मनोज चौधरी, विमल हाजरा, मनीष तिवारी, सुनीता वर्मा, खेमराज वर्मा, नंदिनी, खुशी और नितिन साहू ने अपनी जिम्मेदारी निभाई।

पत्रकारों के हित में होगा और बेहतर काम : सचिन अग्रहरि

तीसरी बार अध्यक्ष चुने जाने के बाद सचिन अग्रहरि ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि यह जीत प्रेस क्लब के सभी सदस्यों की जीत है। उन्होंने बताया कि पिछले दो कार्यकाल के दौरान पत्रकारों के लिए आवासीय परिसर का आवंटन और वहां विकास कार्य कराए गए हैं।

उन्होंने कहा कि नए कार्यकाल में शेष विकास कार्यों को पूरा कराने के साथ जिन पत्रकारों को अभी तक आवासीय भूखंड नहीं मिल पाया है, उन्हें भूखंड उपलब्ध कराना प्राथमिकता होगी। उन्होंने भरोसा जताया कि इस बार भी पहले से बेहतर कार्य कर पत्रकारों के हितों को आगे बढ़ाया जाएगा।

राजनांदगांव /भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कम्पनी ऑफ इंडिया लिमिटेड के निगमित सामाजिक दायित्व के निगमित सामाजिक दायित्व भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम (एलिम्को) जबलपुर द्वारा एवं समाज कल्याण विभाग के सहयोग से जिले के दिव्यांगजनों को आवश्यकता अनुसार सहायक उपकरण प्रदाय करने के लिए जिले के सभी विकासखंडों में मूल्यांकन शिविर का आयोजन किया गया। इसी कड़ी में छुरिया विकासखंड के जनपद पंचायत छुरिया के सामुदायिक भवन में आयोजित मूल्यांकन शिविर में जिले के अंतिम छोर से 100 से अधिक दिव्यांगजनों ने पहुंचकर सहायक उपकरण के लिए पंजीयन कराया।
जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती किरण वैष्णव ने दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण प्रदान करने के लिए आयोजित मूल्यांकन शिविर की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के शिविरों के आयोजन से शासकीय एवं सामाजिक सहभागिता सुनिश्चित होती है। उन्होंने दिव्यांगजनों को शिविर में शामिल होकर सहायक उपकरण के लिए पंजीयन कराने की अपील की। शिविर को अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी संबोधित किया। शिविर में अध्यक्ष जनपद पंचायत छुरिया श्री संजय सिन्हा, सभापति समाज कल्याण श्रीमती भेष बाई साहू, श्रीमती बिरम रामकुमार मंडावी, श्रीमती रेखा गंधर्व, श्रीमती उत्तरा निषाद, श्री उभेराम मंडावी, श्री चंद्रप्रकाश मोटघरे, उप संचालक समाज कल्याण सुश्री वैशाली मरडवार, समाज कल्याण विभाग के प्रमुख कलाकार श्री बीरसिह साहू, प्रभारी अधीक्षक शासकीय बौद्धिक मंदता वाले विशेष विद्यालय राजनांदगांव श्री बालकृष्ण बघेल सहित बड़ी संख्या में दिव्यांगजन एवं अन्य नागरिक उपस्थित थे।

राजनांदगांव । कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव के निर्देशानुसार जिले में शासकीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, व्यवस्थाओं में सुधार तथा योजनाओं को जमीनी स्तर पर मूर्त रूप देने के उद्देश्य से सभी विभागों के जिला स्तरीय अधिकारियों द्वारा अपने-अपने विभागों से संबंधित क्षेत्रों का विशेष मैदानी निरीक्षण किया गया। जिससे योजनाओं का लाभ प्रभावी रूप से अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने संबंधित कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। इस दौरान अधिकारियों ने मैदानी स्तर पर योजनाओं की प्रगति और व्यवस्थाओं का अवलोकन कर वास्तविक स्थिति की जानकारी ली।
विशेष मैदानी निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने स्वास्थ्य संस्थानों का निरीक्षण कर स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, मरीजों को मिल रही सुविधाओं तथा दवाओं की उपलब्धता की जानकारी ली। साथ ही मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक निर्देश दिए गए। इसी प्रकार अधिकारियों ने निर्माणाधीन कार्यों एवं सड़कों का अवलोकन कर उनकी गुणवत्ता और प्रगति की समीक्षा की तथा आवश्यक निर्देश दिए। छात्रावासों का निरीक्षण कर वहां रह रहे विद्यार्थियों को मिल रही सुविधाओं का अवलोकन किया गया। निरीक्षण के दौरान विद्यार्थियों के भोजन, स्वच्छता व्यवस्था, पेयजल तथा स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं की जानकारी ली गई और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाए रखने के निर्देश दिए गए। महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्यों का भी विशेष रूप से निरीक्षण किया गया। अधिकारियों ने आंगनबाड़ी केन्द्रों का निरीक्षण कर बच्चों को दिए जा रहे पूरक पोषण आहार, प्री-स्कूल गतिविधियों, केन्द्रों में उपलब्ध सुविधाओं तथा गर्भवती एवं माताओं को प्रदान की जा रही सेवाओं की जानकारी ली। साथ ही विभाग के माध्यम से संचालित विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की स्थिति का भी अवलोकन किया गया। आयुष्मान आरोग्य मंदिर के चिकित्सकों द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर जाकर होम विजिट के माध्यम से मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया तथा आवश्यक उपचार और परामर्श प्रदान किया गया। इस दौरान बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं तथा अन्य मरीजों की स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी लेते हुए आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराई गईं। इसके साथ ही विभिन्न विभागों के मैदानी कार्यालयों का निरीक्षण कर शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति का आकलन किया गया।

मृणेन्द्र चौबे

राजनांदगांव/ शौर्यपथ /भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेई स्मृति शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय संबद्ध चिकित्सालय राजनांदगांव में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की संवेदनशीलता तथा समर्पण से एक लावारिस बुजुर्ग मरीज को नया जीवन मिला है। कोमा और गैस्पिंग की गंभीर अवस्था में अस्पताल लाए गए इस अज्ञात मरीज का लगभग 20 दिनों तक निरंतर उपचार किया गया, जिसके बाद वह पूरी तरह स्वस्थ होकर अस्पताल से डिस्चार्ज हो गया।

जानकारी के अनुसार 24 फरवरी 2026 को ‘108’ एम्बुलेंस के माध्यम से एक अज्ञात बुजुर्ग मरीज को अत्यंत नाजुक हालत में अस्पताल लाया गया था। भर्ती के समय मरीज गहरे कोमा में था और गैस्पिंग की स्थिति में अंतिम सांसें ले रहा था। चिकित्सकीय जांच में पता चला कि मरीज लीवर की गंभीर बीमारी से ग्रसित था, जिसके कारण वह हेपेटिक एन्सेफैलोपैथी (दिमाग पर असर) की खतरनाक स्थिति में पहुंच चुका था। इसके साथ ही मरीज के शरीर में प्रोटीन की अत्यधिक कमी के कारण पूरे शरीर में सूजन थी और संक्रमण फैलने से वह सेप्टिक शॉक की स्थिति में था। चिकित्सकों के अनुसार इस अवस्था में मरीज के बचने की संभावना बेहद कम होती है, लेकिन समय पर मिले उपचार और टीमवर्क से उसे नया जीवन मिल सका।

डीन डॉ. पी. एम. लुका एवं मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. देशकर के मार्गदर्शन तथा मेडिसीन विभागाध्यक्ष डॉ. एन. के. तिरकी के नेतृत्व में चिकित्सकों की टीम ने तत्काल उपचार शुरू किया। मरीज के अज्ञात और लावारिस होने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए उसके सभी आवश्यक परीक्षण, जांच और दवाइयों की व्यवस्था पूरी तरह नि:शुल्क कराई।

इलाज की जिम्मेदारी डॉ. प्रकाश खुंटे के साथ डॉ. आशीष दुलानी, डॉ. भूपेंद्र जंघेल, डॉ. आकाश चंद्राकर और डॉ. विकास जैन की टीम ने संभाली। चिकित्सकों ने मरीज की स्थिति को देखते हुए लगातार मॉनिटरिंग और आवश्यक उपचार जारी रखा। इस दौरान इंटर्न डॉक्टरों ने भी उपचार प्रक्रिया में सक्रिय सहयोग दिया।

डॉक्टरों के साथ-साथ नर्सिंग स्टाफ की विशेष देखभाल भी मरीज के स्वस्थ होने में महत्वपूर्ण साबित हुई। सिस्टर इंचार्ज रेखा और नर्सिंग ऑफिसर केसर, राजलक्ष्मी, मोहिनी, पूजा निषाद तथा चंद्रकला ने चौबीसों घंटे मरीज की सेवा की। वार्ड बॉय और आया वर्ग ने भी मरीज की देखभाल में पूरा सहयोग दिया, जिससे उसकी हालत में धीरे-धीरे सुधार होता गया। लगातार लगभग 10 दिनों तक आईसीयू और क्रिटिकल केयर में गहन उपचार के बाद मरीज की स्थिति स्थिर हुई और वह धीरे-धीरे होश में आने लगा। इसके बाद सामान्य वार्ड में रखकर उपचार जारी रखा गया। करीब 20 दिनों तक चले उपचार के बाद 14 मार्च 2026 को बुजुर्ग मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो गया और उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।

राजनांदगांव / शौर्यपथ /

भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है। मीडिया की जिम्मेदारी केवल सूचना देना नहीं, बल्कि सत्ता से सवाल करना, प्रशासन की कार्यप्रणाली पर नजर रखना और जनता की आवाज को शासन तक पहुंचाना भी है। लेकिन जब प्रशासन स्वयं मीडिया को सवाल पूछने या स्वतंत्र रूप से कवरेज करने से रोकने लगे, तो स्वाभाविक रूप से कई गंभीर सवाल खड़े हो जाते हैं।

ऐसा ही एक मामला छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ से सामने आया है, जहां मीडिया की स्वतंत्रता को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।

क्या है पूरा मामला

डोंगरगढ़ स्थित मां बम्लेश्वरी धाम में 19 मार्च से चैत्र नवरात्रि का विशाल मेला प्रारंभ होने वाला है। लाखों श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए प्रशासन द्वारा तैयारियों की समीक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी।

इस बैठक में संभाग आयुक्त, राजनांदगांव आईजी, कलेक्टर जितेंद्र यादव, जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, पुलिस विभाग के अधिकारी, मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि और मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित थे।

मीडिया अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए इस बैठक की वीडियो कवरेज कर रही थी, ताकि नवरात्रि मेले की व्यवस्थाओं और प्रशासनिक तैयारियों की जानकारी आम जनता तक पहुंचाई जा सके।

लेकिन इसी दौरान राजनांदगांव कलेक्टर जितेंद्र यादव ने मीडिया को यह कहते हुए कवरेज करने से रोक दिया कि “खबर आपको पीआरओ से मिल जाएगी।”

इस बयान के बाद बैठक में मौजूद पत्रकारों में असंतोष फैल गया और प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के कई प्रतिनिधियों ने बैठक का बहिष्कार (बायकॉट) कर दिया।

खड़े हो रहे हैं कई बड़े सवाल

इस घटना के बाद स्थानीय पत्रकारों और मीडिया जगत में कई सवाल उठने लगे हैं —

क्या अब मीडिया को सिर्फ पीआरओ द्वारा जारी प्रेस नोट तक सीमित कर दिया जाएगा?

क्या प्रशासन नहीं चाहता कि मीडिया सीधे घटनास्थल से सच्चाई दिखाए और सवाल पूछे?

या फिर कहीं प्रशासन को यह आशंका तो नहीं कि मीडिया के सवालों से व्यवस्थाओं की कमजोरियां उजागर हो सकती हैं?

लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका

लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका केवल सरकारी प्रेस विज्ञप्ति प्रकाशित करना नहीं होती।

मीडिया का कार्य है

घटनास्थल से वास्तविक स्थिति सामने लाना

प्रशासन से जवाबदेही सुनिश्चित करना

जनता की समस्याओं को उठाना

और शासन की कार्यप्रणाली पर निगरानी रखना

अगर मीडिया को केवल पीआरओ द्वारा जारी जानकारी तक सीमित कर दिया जाए, तो स्वतंत्र पत्रकारिता का मूल उद्देश्य ही कमजोर पड़ जाता है।

संविधान क्या कहता है

भारत के संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार देता है। इसी अधिकार के अंतर्गत मीडिया को भी स्वतंत्र रूप से समाचार जुटाने और प्रसारित करने की आज़ादी प्राप्त होती है।

हालांकि प्रशासनिक प्रोटोकॉल और सुरक्षा कारणों से कुछ परिस्थितियों में कवरेज सीमित किया जा सकता है, लेकिन सामान्य समीक्षा बैठक में मीडिया को रोकना कई बार पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर देता है।

पत्रकारों में नाराजगी

इस घटना के बाद स्थानीय प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों में नाराजगी देखी गई। कई पत्रकारों का कहना है कि —

“अगर खबर केवल पीआरओ के माध्यम से ही दी जाएगी, तो फिर स्वतंत्र रिपोर्टिंग कैसे होगी?

और अगर अधिकारी मीडिया के सवालों से बचने लगें, तो जनता तक सही जानकारी कैसे पहुंचेगी?”

प्रशासन की संभावित दलील

कुछ लोगों का यह भी मानना है कि कई बार प्रशासन व्यवस्था, सुरक्षा या बैठक की गोपनीयता के कारण मीडिया की कवरेज सीमित करता है।

लेकिन सवाल यह भी उठता है कि जब बैठक में मीडिया को आमंत्रित किया गया था, तो फिर कवरेज से रोकना कितना उचित है?

लोकतंत्र की मजबूती पारदर्शिता से

लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत पारदर्शिता और जवाबदेही है। जब प्रशासन खुलकर मीडिया के सवालों का जवाब देता है, तो जनता का भरोसा भी मजबूत होता है।

लेकिन यदि मीडिया को केवल सरकारी प्रेस नोट तक सीमित कर दिया जाए, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत नहीं माना जाता।

अब बड़ा सवाल

डोंगरगढ़ की इस घटना ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि —

क्या प्रशासन और मीडिया के बीच दूरी बढ़ रही है?

क्या पत्रकारों को केवल पीआरओ की जानकारी तक सीमित किया जाएगा?

या फिर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को उसका पूरा अधिकार मिलेगा?

यह सवाल केवल राजनांदगांव जिले का नहीं, बल्कि पूरे लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका और स्वतंत्रता से जुड़ा विषय बन गया है।

मृणेन्द्र चौबे

राजनांदगांव/शौर्यपथ /थाना बसंतपुर क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन और ग्रामीणों के साथ मारपीट तथा फायरिंग के मामले में फरार चल रहे दो आरोपियों ने अंततः न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया। स्थायी गिरफ्तारी वारंट, उद्घोषणा की कार्रवाई और संपत्ति कुर्की की आशंका के बाद दोनों आरोपी न्यायालय में उपस्थित हुए, जिन्हें वैधानिक प्रक्रिया पूरी कर जिला जेल राजनांदगांव भेज दिया गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रार्थी द्वारा थाना बसंतपुर में शिकायत दर्ज कराई गई थी कि 11 जून 2025 की शाम ग्राम मोहड़ नदी में अवैध रूप से रेत निकालने के लिए रैम्प बनाने हेतु जेसीबी मशीन पहुंची थी। इसकी जानकारी मिलने पर कुछ ग्रामीण मौके पर पहुंचे और अवैध उत्खनन का विरोध किया। इसी दौरान एक कार में सवार 7-8 लोग वहां पहुंचे और ग्रामीणों के साथ मारपीट करते हुए फायरिंग कर दी।

घटना के संबंध में थाना बसंतपुर में अपराध क्रमांक 257/2025 दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं, आर्म्स एक्ट की धारा 25 व 27 तथा खनिज अधिनियम की धारा 21 के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की गई थी। इस मामले में पहले ही नौ आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जिला जेल राजनांदगांव भेजा जा चुका है तथा उनके विरुद्ध अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया जा चुका है। मामले के दो अन्य आरोपी संजय सिंह निवासी भिण्ड (मध्यप्रदेश) और अमन बैसन्दर निवासी ग्वालियर (मध्यप्रदेश) घटना के बाद से फरार चल रहे थे। इनके विरुद्ध न्यायालय द्वारा स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था।

पुलिस अधीक्षक सुश्री अंकिता शर्मा के निर्देशन में फरार आरोपियों की तलाश लगातार जारी थी। गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए न्यायालय से उद्घोषणा की कार्रवाई कर आरोपियों के निवास स्थानों पर नोटिस चस्पा किए गए और भिण्ड, मुरैना व ग्वालियर के समाचार पत्रों में भी प्रकाशन कराया गया था, जिसमें आरोपियों को 16 मार्च 2026 तक न्यायालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया था। पुलिस की लगातार कार्रवाई और संपत्ति कुर्की की आशंका के चलते दोनों आरोपी 10 मार्च 2026 को न्यायालय के समक्ष पेश हुए। न्यायालय के निर्देश पर उन्हें थाना बसंतपुर को सुपुर्द किया गया, जहां आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद जेल वारंट प्राप्त होने पर दोनों आरोपियों को जिला जेल राजनांदगांव दाखिल किया गया।

मृणेन्द्र चौबे

राजनांदगांव।शौर्यपथ /छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त नीलू शर्मा आज पश्चिम बंगाल के पुरुलिया ज़िले के मानबाजार विधानसभा क्षेत्र में आयोजित परिवर्तन यात्रा (रथ यात्रा) में शामिल हुए। इस दौरान कार्यक्रम स्थल पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों की भीड़ उमड़ी और लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला।

नीलू शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी विकास, पारदर्शिता और जनकल्याण की नई दिशा देने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि परिवर्तन यात्रा में कार्यकर्ताओं और नागरिकों का उत्साह इस बात का संकेत है कि पश्चिम बंगाल में अब बदलाव की मजबूत इच्छा दिखाई दे रही है और जनता भाजपा के विज़न को स्वीकार कर रही है।

उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन यात्रा केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि जनता के विश्वास और समर्थन का प्रतीक है। भाजपा का उद्देश्य प्रदेश में विकास, सुशासन और जनकल्याण की नई शुरुआत करना है।

कार्यक्रम में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, केंद्रीय राज्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद सतीश चंद्र दुबे, पुरुलिया के सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो और वरिष्ठ नेत्री एवं पूर्व राज्यसभा सांसद रूपा गांगुली सहित प्रदेश और जिला स्तर के कई पदाधिकारी मौजूद रहे। मानबाजार विधानसभा में आयोजित परिवर्तन यात्रा ने यह संदेश दिया कि पश्चिम बंगाल अब बदलाव की राह पर आगे बढ़ रहा है और भाजपा के नेतृत्व में विकास का नया अध्याय लिखने के लिए तैयार है।

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