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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
रायपुर, / शौर्यपथ / छत्तीसगढ के बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड स्थित तारापुर गांव की महिलाओं ने अपनी लगन और हुनर से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है। 'मिट्टी के गणेश मूर्ति निर्माण सिद्धि स्व सहायता समूह' की ग्रामीण महिलाओं ने इस गणेश चतुर्थी पर पर्यावरण के अनुकूल (इको-फ्रेंडली) प्रतिमाएं बनाकर महज कुछ हफ्तों में 1.80 लाख रुपये की बंपर कमाई की है।
शांति नागवंशी, दसो भारती और रोमा नागवंशी के नेतृत्व में समूह की महिलाओं ने शुद्ध मिट्टी से बिना किसी हानिकारक केमिकल और कृत्रिम रंगों का इस्तेमाल किए 52 मनमोहक गणेश प्रतिमाएं तैयार की थीं। बाजार में आते ही इन पर्यावरण-हितैषी मूर्तियों की भारी मांग देखने को मिली और पूरा स्टॉक हाथों-हाथ बिक गया।
समूह की सदस्य शांति नागवंशी ने खुशी जताते हुए कहती हैं कि अपनी मेहनत से गढ़ी मूर्तियों की पूजा होते देखना और स्वयं की कमाई हासिल करना उनके लिए किसी सपने के पूरा होने जैसा है। उन्होंने बताया कि इस राशि का उपयोग वे परिवार की जरूरतों को पूरा करने और बच्चों की शिक्षा में करेंगे।
सीमित संसाधनों के बीच शुरू हुई तारापुर की इन महिलाओं की यह पहल न केवल पूरे जिले में सराही जा रही है, बल्कि आसपास के क्षेत्रों की अन्य महिलाओं को भी आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनने की प्रेरणा दे रही है l
13.70 करोड़ से अधिक युवा और 10.64 करोड़ महिलाएं अभियान से जुड़ीं
1.67 लाख से अधिक नशा मुक्ति मित्र बने अभियान का हिस्सा, 31.40 लाख जागरूकता गतिविधियां आयोजित
पिछले दो वर्षों में 755 से अधिक नए नशामुक्ति केंद्र स्थापित
नई दिल्ली / एजेंसी / केंद्र सरकार के ‘नशामुक्त भारत अभियान’ ने देशभर में व्यापक जनभागीदारी के साथ महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। अभियान के तहत अब तक 34.54 करोड़ से अधिक नागरिकों तक जागरूकता पहुंचाई जा चुकी है। इनमें 13.70 करोड़ से अधिक युवा और 10.64 करोड़ महिलाएं शामिल हैं।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सचिव श्री सुधांश पंत ने बताया कि नशे के दुरुपयोग की पहचान, परामर्श और देखभाल के लिए 1.67 लाख से अधिक स्वयंसेवकों, सामुदायिक नेताओं और कर्मियों को प्रशिक्षित किया गया है। सामुदायिक भागीदारी को मजबूत करने के लिए 1.67 लाख से अधिक नशा मुक्ति मित्र भी अभियान से जुड़े हैं।
देशभर में अब तक 31.40 लाख से अधिक जागरूकता एवं संपर्क गतिविधियां आयोजित की गई हैं। उपचार सुविधाओं का विस्तार करते हुए पिछले दो वर्षों में 755 से अधिक नए नशामुक्ति केंद्र स्थापित किए गए हैं। इनमें जिला नशामुक्ति केंद्र, नशा उपचार केंद्र और जेलों में संचालित नशामुक्ति केंद्र शामिल हैं।
मंत्रालय ने बताया कि नशामुक्ति, जागरूकता, परामर्श, उपचार और पुनर्वास के लिए राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, गैर सरकारी संगठनों और सरकारी अस्पतालों को वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।
10 करोड़ नागरिकों को सामूहिक संकल्प से जोड़ने का लक्ष्य
अभियान के तहत अब तक 34 लाख से अधिक नशामुक्ति संकल्प लिए जा चुके हैं। मंत्रालय का लक्ष्य प्रत्यक्ष और ऑनलाइन सहभागिता के माध्यम से 10 करोड़ से अधिक नागरिकों को मादक पदार्थों के दुरुपयोग के खिलाफ राष्ट्रीय सामूहिक संकल्प से जोड़ना है। अभियान की छठी वर्षगांठ के अवसर पर इस माह के अंत तक राष्ट्रीय स्तर पर सामूहिक संकल्प कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
उपचार सेवाओं तक पहुंच आसान बनाने के लिए मंत्रालय ने ‘नशामुक्त भारत 2.0’ मोबाइल अनुप्रयोग भी शुरू किया है, जिसके माध्यम से नागरिक अपने निकटतम नशामुक्ति केंद्र की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
मंत्रालय ने कहा कि अभियान का उद्देश्य केवल नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता बढ़ाना ही नहीं, बल्कि समुदायों को साथ जोड़कर नशामुक्त समाज के निर्माण में जनभागीदारी को मजबूत करना भी है।
नई दिल्ली / एजेंसी / भारत और मर्कोसुर के बीच तरजीही व्यापार समझौते (PTA) के विस्तार के लिए वार्ता शुरू हो गई है। भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल और मर्कोसुर की कार्यवाहक अध्यक्षता कर रहे उरुग्वे के विदेश मंत्री श्री मारियो लुबेटकिन ने वार्ता शुरू करने की घोषणा की।
दोनों पक्षों ने आपसी हित के नए क्षेत्रों को शामिल करते हुए मौजूदा समझौते का विस्तार करने पर सहमति जताई है। इसका उद्देश्य भारत और मर्कोसुर के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत करना तथा दोनों पक्षों के निजी क्षेत्रों के लिए व्यापार एवं निवेश के नए अवसर बढ़ाना है।
भारत और मर्कोसुर प्रस्तावित विस्तारित समझौते के दायरे और संरचना को तय करने वाली संदर्भ की शर्तों (Terms of Reference) को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस 17 सितंबर की संध्या हर घर में ‘आशीर्वाद का दीया’ जलाने का आह्वान
सेवा, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जरूरतमंदों की सहायता के कार्यों से जुड़ने की प्रदेशवासियों से अपील
‘आशीर्वाद का दीया’ बने सेवा, जनकल्याण और विकसित भारत के संकल्प का प्रतीक
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों से 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले ‘सेवा संकल्प अभियान’ से पूरे उत्साह और आत्मीयता के साथ जुड़ने की अपील की है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की सेवा भावना और जनभागीदारी की परंपरा इस अभियान को व्यापक जनसेवा के उत्सव में बदल सकती है।
प्रदेशवासियों के नाम जारी अपनी अपील में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष राष्ट्र और जनसेवा को समर्पित किए हैं। प्रधानमंत्री के जन्मदिवस 17 सितंबर के अवसर पर देशभर में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ आयोजित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सेवा छत्तीसगढ़ की संस्कृति और संस्कारों का अभिन्न हिस्सा है। प्रत्येक नागरिक अपनी सहभागिता से इस अभियान को जनसेवा और जनभागीदारी का व्यापक उत्सव बनाए। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपने गांव, शहर और आसपास स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, जरूरतमंदों की सहायता तथा जनसेवा से जुड़े कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाने और अधिक से अधिक लोगों को अभियान से जोड़ने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गरीब कल्याण और विकास की योजनाओं से लाखों परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। पक्का आवास, स्वच्छ पेयजल, बिजली, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हुआ है। विकास की इन उपलब्धियों के केंद्र में आम नागरिकों के पूरे होते सपने, बढ़ता आत्मविश्वास और जीवन में आती खुशहाली है।
17 सितंबर की संध्या जलाएं ‘आशीर्वाद का दीया’
मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर प्रदेशवासियों से विशेष अपील करते हुए कहा कि 17 सितंबर की शाम 7 बजे प्रत्येक परिवार अपने घर में ‘आशीर्वाद का दीया’ जलाए और अपने आसपास के लाभार्थी परिवारों को भी इस पहल से जोड़े।
उन्होंने कहा कि यह दीया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन के लिए छत्तीसगढ़वासियों की शुभकामनाओं के साथ-साथ सेवा, जनकल्याण और विकसित भारत के निर्माण के सामूहिक संकल्प का प्रतीक बने। मुख्यमंत्री ने कहा कि सेवा संकल्प अभियान के दौरान समाज का प्रत्येक वर्ग अपनी क्षमता के अनुसार सेवा का कोई न कोई कार्य करे। जब सेवा का भाव जनभागीदारी से जुड़ता है, तो वह समाज में व्यापक और स्थायी परिवर्तन का माध्यम बनता है।
विकसित भारत के संकल्प में विकसित छत्तीसगढ़ की सशक्त भागीदारी
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में छत्तीसगढ़ अपनी सशक्त भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए संकल्पित है। विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब गांव विकसित हों, शहर आगे बढ़ें और प्रत्येक परिवार विकास की मुख्यधारा से जुड़े। सेवा संकल्प अभियान इस सामूहिक संकल्प को मजबूत करने का महत्वपूर्ण अवसर है।
उन्होंने प्रदेशवासियों का आह्वान करते हुए कहा, “आइए, हम सभी मिलकर सेवा संकल्प अभियान को छत्तीसगढ़ में जनभागीदारी का उत्सव बनाएं। सेवा और जनकल्याण के कार्यों से जुड़कर विकसित भारत के निर्माण में विकसित छत्तीसगढ़ की सशक्त भागीदारी सुनिश्चित करें।”
जापान की एहिमे यूनिवर्सिटी के 17 सदस्यीय छात्र प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से की सौजन्य मुलाकात
मुख्यमंत्री ने जापानी विद्यार्थियों से किया आत्मीय संवाद, छत्तीसगढ़ की समृद्ध विरासत से कराया परिचित
एनआईटी रायपुर के स्टार्टअप और तकनीकी नवाचारों में जापानी विद्यार्थियों ने दिखाई विशेष रुचि
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से राजधानी स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में जापान की एहिमे यूनिवर्सिटी से आए 17 सदस्यीय छात्र प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। भारत-जापान इंटर एक्सचेंज कार्यक्रम के तहत तीन दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण पर छत्तीसगढ़ पहुंचे विद्यार्थियों से मुख्यमंत्री ने आत्मीय संवाद किया। इस दौरान भारत-जापान के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों, बौद्ध विरासत, शिक्षा, अनुसंधान, तकनीकी नवाचार, स्टार्टअप और युवाओं के बीच बढ़ते संवाद पर चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री साय ने जापानी विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि भारत और जापान की मित्रता की जड़ें दोनों देशों की प्राचीन सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत में गहराई से जुड़ी हैं। समय के साथ यह संबंध संस्कृति और आध्यात्मिकता से आगे बढ़कर शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, नवाचार और आर्थिक सहयोग तक विस्तृत हुआ है। उन्होंने कहा कि युवाओं और विद्यार्थियों के बीच ऐसे शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान से दोनों देशों के संबंध आने वाली पीढ़ियों में और मजबूत होंगे।
साझा बौद्ध विरासत भारत-जापान को जोड़ती है
मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान बुद्ध के शांति, करुणा, मैत्री और मानव कल्याण के संदेश ने दुनिया को प्रभावित किया है। जापान की संस्कृति में भी बौद्ध दर्शन की गहरी छाप दिखाई देती है। यह साझा आध्यात्मिक विरासत भारत और जापान को विशिष्ट सांस्कृतिक सूत्र में जोड़ती है।
उन्होंने विद्यार्थियों को छत्तीसगढ़ की समृद्ध पुरातात्विक विरासत की जानकारी देते हुए सिरपुर, मैनपाट और भोंगापाल जैसे स्थलों का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि महानदी के तट पर स्थित सिरपुर प्राचीन सभ्यता, कला, स्थापत्य और बौद्ध विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है। राज्य सरकार छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक, पुरातात्विक और सांस्कृतिक धरोहर को देश-दुनिया में नई पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। सिरपुर को विश्वस्तरीय ऐतिहासिक एवं पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में भी योजनाबद्ध प्रयास किए जा रहे हैं।
जापान की कार्यसंस्कृति और तकनीकी प्रगति से सीखने की जरूरत
मुख्यमंत्री साय ने अपनी जापान यात्रा के अनुभव साझा करते हुए वहां की अनुशासित कार्यसंस्कृति, तकनीकी प्रगति और परंपराओं के प्रति सम्मान की सराहना की। उन्होंने कहा कि जापान ने आधुनिक विज्ञान और तकनीक में उल्लेखनीय प्रगति के साथ अपनी सांस्कृतिक पहचान को जिस तरह सहेजकर रखा है, वह प्रेरणादायी है।
उन्होंने कहा कि भारत भी अपनी प्राचीन सभ्यता और सांस्कृतिक मूल्यों के साथ आधुनिक तकनीक, नवाचार और ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में भारत और जापान के युवाओं के बीच बढ़ता संवाद दोनों देशों के भविष्य के संबंधों के लिए महत्वपूर्ण है।
शिक्षा, अनुसंधान और स्टार्टअप में सहयोग की नई संभावनाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज ज्ञान, अनुसंधान, नवाचार और तकनीक विकास के प्रमुख आधार हैं। भारत और जापान के शैक्षणिक संस्थानों के बीच बढ़ता सहयोग विद्यार्थियों को नई तकनीकों और शोध से जुड़ने के अवसर प्रदान कर सकता है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि एहिमे यूनिवर्सिटी और छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षण एवं तकनीकी संस्थानों के विद्यार्थियों के बीच संवाद से भविष्य में संयुक्त अनुसंधान, तकनीकी सहयोग, स्टार्टअप और इनोवेशन के नए अवसर विकसित होंगे। ऐसे कार्यक्रम संस्थागत संबंधों के साथ-साथ युवाओं के बीच मित्रता और आपसी समझ को भी मजबूत करते हैं।
छत्तीसगढ़ की संस्कृति और आत्मीयता से प्रभावित हुए जापानी विद्यार्थी
जापानी विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री के साथ अपने छत्तीसगढ़ प्रवास के अनुभव साझा किए। उन्होंने रायपुर की संस्कृति, परंपराओं और लोगों के सहज एवं आत्मीय व्यवहार की सराहना की। विद्यार्थियों ने भारतीय खान-पान की भी प्रशंसा की।
प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने बताया कि उन्हें गणेश उत्सव की परंपराओं और सांस्कृतिक महत्व को करीब से जानने का अवसर मिला। जापानी छात्राओं ने उत्साहपूर्वक बताया कि उन्होंने मेहंदी लगवाई और भारतीय परिधानों की खरीदारी भी की। विद्यार्थियों ने कहा कि इस यात्रा से उन्हें भारत को पुस्तकों और कक्षाओं से आगे बढ़कर यहां के समाज, संस्कृति और जीवनशैली के माध्यम से समझने का अवसर मिला।
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों के अनुभवों पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ अपनी सहजता, आत्मीयता और अतिथि सत्कार के लिए जाना जाता है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रदेश की सुखद स्मृतियां साथ ले जाने और भविष्य में पुनः छत्तीसगढ़ आने के लिए आमंत्रित किया।
एनआईटी रायपुर के स्टार्टअप और नवाचारों ने खींचा ध्यान
छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान जापानी छात्र प्रतिनिधिमंडल ने एनआईटी रायपुर के विभिन्न रिसर्च सेंटरों और इन्क्यूबेशन सेंटर का भ्रमण किया। विद्यार्थियों ने स्टार्टअप गतिविधियों, अनुसंधान परियोजनाओं और विकसित की जा रही नई तकनीकों की जानकारी ली। विशेष रूप से आम लोगों की दैनिक समस्याओं के तकनीकी समाधान विकसित करने वाले स्टार्टअप ने विद्यार्थियों का ध्यान आकर्षित किया। प्रतिनिधिमंडल ने इन नवाचारों की सराहना करते हुए टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, अनुसंधान और नवाचार आधारित सहयोग की संभावनाओं में रुचि दिखाई।
भारत-जापान इंटर एक्सचेंज कार्यक्रम के तहत आया यह 17 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल अपने प्रवास के दौरान शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में हिस्सा ले रहा है। प्रतिनिधिमंडल ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक स्थल सिरपुर का भी भ्रमण करेगा, जहां विद्यार्थी छत्तीसगढ़ की प्राचीन बौद्ध विरासत, स्थापत्य, कला और सांस्कृतिक इतिहास को करीब से जानेंगे।
मुख्यमंत्री साय ने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ऐसी यात्राएं नई पीढ़ी को एक-दूसरे की संस्कृति, उपलब्धियों और संभावनाओं से परिचित कराने का प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत और जापान के युवाओं के बीच यह संवाद भविष्य में मित्रता, ज्ञान, नवाचार और साझी प्रगति के नए अध्याय लिखेगा।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद, एनआईटी रायपुर के प्रोफेसर दिलीप सिंह सिसोदिया, डॉ. समीर बाजपेयी, आईआईटी हैदराबाद के प्रोफेसर सी.के. मोहन, उद्योग विभाग के अतिरिक्त संचालक संजय गजघाटे, उपसंचालक अमय त्रिपाठी, चिप्स के ज्वाइंट सीईओ अनुपम आशीष टोप्पो सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
नई दिल्ली / प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 75वें जन्मदिन के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी द्वारा 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ आयोजित किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन और जनसेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर सेवा, जनभागीदारी और सुशासन से जुड़े कार्यक्रमों को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाना है।
अभियान की शुरुआत 17 सितंबर को ‘सेवा दिवस’ के रूप में होगी। इस दौरान देशभर में बड़े स्तर पर रक्तदान शिविर आयोजित किए जाएंगे। इसी शाम प्रत्येक बूथ पर ‘आशीर्वाद का दिया’ कार्यक्रम के तहत दीप प्रज्वलित कर प्रधानमंत्री के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन के प्रति आभार व्यक्त किया जाएगा।
युवा शक्ति के नेतृत्व में सेवा ज्योति कलश यात्रा
अभियान के दौरान युवाओं की भागीदारी को विशेष महत्व दिया गया है। वडनगर से वाराणसी तक ‘सेवा ज्योति कलश यात्रा’ के साथ बाइक रैलियों और पदयात्राओं का आयोजन प्रस्तावित है। इसके माध्यम से सेवा और जनभागीदारी का संदेश लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
2 अक्टूबर को विशेष स्वच्छता अभियान
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती 2 अक्टूबर के अवसर पर देशभर में विशेष स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा। वहीं अभियान के दौरान सभी जिलों में पंचायती राज के निर्वाचित प्रतिनिधियों और नागरिकों की भागीदारी से ‘सुशासन संवाद’ कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलने वाला यह अभियान सेवा, स्वच्छता, सुशासन और जनभागीदारी को केंद्र में रखकर देशव्यापी गतिविधियों का स्वरूप लेगा। भाजपा के अनुसार, अभियान का संदेश है कि जनसेवा केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि निरंतर चलने वाला संकल्प है।
शौर्य पथ बालोद भूपेन देशमुख की रिपोर्ट
बालोद। पुलिस अधीक्षक किरण गंगाराम चव्हाण (भा.पु.से.) के निर्देशन में, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक चन्द्रकांत गवर्ना एवं एसडीओपी गुरूर माया शर्मा के मार्गदर्शन में बालोद पुलिस द्वारा संयुक्त कार्रवाई करते हुए अवैध शराब के विरुद्ध ताबड़तोड़ कार्रवाई की गई।
_साहू ढाबा में कार्रवाई_
थाना पुरुर पुलिस द्वारा एनएच-30 मार्ग स्थित साहू ढाबा, ग्राम पुरुर में कार्रवाई करते हुए अवैध शराब बरामद की गई। मामले में आरोपी जगत राम साहू, पिता मोहित राम साहू, उम्र 28 वर्ष, निवासी कुम्हारखान, थाना पुरुर, जिला बालोद के विरुद्ध आबकारी अधिनियम के तहत वैधानिक कार्रवाई की गई।
_हाईवे ढाबा में कार्रवाई_
इसी प्रकार ग्राम बिटोडा स्थित हाईवे ढाबा परिसर में कार्रवाई के दौरान अवैध रूप से बिक्री हेतु रखी गई देशी मदिरा बरामद की गई। मामले में आरोपी शुभम सालुंके, पिता पंजाबराव सालुंके, उम्र 25 वर्ष, निवासी ग्राम बिटोडा, जवाहर चौक के पास, थाना पुरुर, जिला बालोद के विरुद्ध आबकारी अधिनियम के तहत वैधानिक कार्रवाई की गई।
? _यातायात नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई_
बालोद पुलिस द्वारा यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के विरुद्ध भी सघन कार्रवाई। इस दौरान मोटरयान अधिनियम के तहत कुल 49 प्रकरणों में कार्रवाई की गई, जिसमें धारा 185 एमव्ही एक्ट के तहत शराब के नशे में वाहन चलाने के 05 प्रकरण शामिल हैं।
_उक्त कार्रवाई में जिनकी विशेष भूमिका रही_ -
निरीक्षक नवीन बोरकर, निरीक्षक मुकेश सिंह, रक्षित निरीक्षक रेवती वर्मा, सूबेदार अखिलेश सिंह, निरीक्षक सोन सिंह सोरी, उप निरीक्षक जोगेन्द्र साहू, चित्ररेखा खांडे, सउनि अनिल राजपूत, सउनि अजित महोबिया, सउनि लता तिवारी, सउनि देवकुमारी
? बालोद पुलिस की अपील
बालोद पुलिस आम नागरिकों एवं ढाबा संचालकों से अपील करती है कि अवैध रूप से शराब का विक्रय, भंडारण अथवा सेवन न करें। नशे की हालत में वाहन न चलाएं तथा यातायात नियमों का अनिवार्य रूप से पालन करें। अवैध गतिविधियों की जानकारी मिलने पर तत्काल पुलिस को सूचना दें। बालोद पुलिस की कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी
40 साल के वोरा प्रभाव से निकलकर संगठन खड़ा कर रही कांग्रेस, लेकिन पूर्व विधायक अरुण वोरा की अलग राह ने बढ़ाई चिंता; जनता के बीच नया चेहरा तलाशने की चर्चा तेज
दुर्ग।
दुर्ग विधानसभा की राजनीति इस समय एक ऐसे मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है, जहां कांग्रेस के सामने सबसे बड़ा सवाल भाजपा से मुकाबले का कम और अपने भीतर की दिशा, नेतृत्व और प्रत्याशी चयन का अधिक नजर आ रहा है। लगभग चार दशक तक दुर्ग कांग्रेस की राजनीति पर वोरा परिवार का प्रभाव रहा। संगठन से लेकर चुनावी राजनीति तक एक समय ऐसा था जब कांग्रेस की अधिकांश राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र वोरा बंगला माना जाता था। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी लंबे समय तक रही कि जिसने वोरा परिवार से दूरी बनाई, उसकी दुर्ग की राजनीति भी धीरे-धीरे कमजोर होती चली गई।
लेकिन समय बदल चुका है। कांग्रेस के भीतर अब पुराने राजनीतिक ढांचे से बाहर निकलकर संगठन को नए तरीके से खड़ा करने की कोशिश दिखाई दे रही है। यही बदलाव आगामी विधानसभा चुनाव के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
संगठन बनाम व्यक्तिगत राजनीतिक सक्रियता
वर्तमान में दुर्ग शहर जिला कांग्रेस की कमान धीरज बाकलीवाल के हाथों में है। उनके नेतृत्व में कांग्रेस संगठन को सड़क पर उतारने, आंदोलनों और विरोध-प्रदर्शनों के माध्यम से जनता के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश लगातार दिखाई दे रही है। लंबे समय से जिस कांग्रेस कार्यालय को लेकर निष्क्रियता की चर्चा होती थी, वह अब कार्यकर्ताओं और आम जनता के लिए अधिक सक्रिय नजर आ रहा है।
कांग्रेस के लिए यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि चुनाव केवल किसी एक नेता की लोकप्रियता से नहीं, बल्कि संगठन, बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं, जनसंपर्क और सामूहिक नेतृत्व से लड़ा जाता है।
यहीं से पूर्व विधायक अरुण वोरा की राजनीतिक सक्रियता को लेकर कांग्रेस के भीतर और बाहर चर्चा शुरू होती है। राजनीतिक चर्चाओं में यह सवाल उठ रहा है कि क्या पूर्व विधायक संगठन की सामूहिक रणनीति के साथ चल रहे हैं या अपनी राजनीतिक राह अलग बनाए हुए हैं।
विपक्षी दल के लिए यह स्थिति निश्चित रूप से राहत देने वाली हो सकती है, क्योंकि किसी भी चुनाव में यदि संगठन और संभावित प्रत्याशी के बीच तालमेल कमजोर दिखाई दे तो उसका सीधा असर चुनावी प्रदर्शन पर पड़ सकता है।
क्या राजनीति का केंद्र अब भी सिर्फ टिकट है?
दुर्ग की राजनीतिक चर्चा में सबसे ज्यादा जिस बात की चर्चा है, वह है आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट की दावेदारी।
राजनीतिक हलकों में यह धारणा तेजी से चर्चा का विषय बनी हुई है कि पूर्व विधायक अरुण वोरा एक बार फिर टिकट के लिए अपनी दावेदारी मजबूत करने की दिशा में सक्रिय हैं। आलोचकों का सवाल है कि यदि पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए सामूहिक रूप से आगे बढ़ रही है, तो संभावित प्रत्याशी को भी उसी संगठनात्मक अभियान का हिस्सा बनकर सामने आना चाहिए।
जनता के बीच चर्चा यह भी है कि केवल प्रेस विज्ञप्तियों, सोशल मीडिया पोस्ट और रीलों के माध्यम से राजनीतिक सक्रियता प्रदर्शित करने से वह जमीनी जुड़ाव पैदा नहीं हो सकता, जिसकी आवश्यकता चुनाव के समय होती है।
बेशक, किसी भी नेता को अपनी राजनीतिक दावेदारी रखने का पूरा अधिकार है। लेकिन सवाल यह है कि क्या व्यक्तिगत राजनीतिक दावेदारी संगठनात्मक एकता से बड़ी हो सकती है?
यही प्रश्न दुर्ग कांग्रेस के सामने आने वाले समय में सबसे महत्वपूर्ण हो सकता है।
भाजपा को कमजोर कांग्रेस चाहिए या मजबूत कांग्रेस?
दुर्ग विधानसभा में वर्तमान विधायक गजेंद्र यादव हैं, जो प्रदेश सरकार में स्कूल शिक्षा मंत्री भी हैं। उनके खिलाफ क्षेत्र में राजनीतिक असंतोष या लोकप्रियता में कमी को लेकर चर्चाएं होने का दावा कांग्रेस समर्थक खेमों में किया जाता है। यदि वास्तव में भाजपा के वर्तमान विधायक के खिलाफ जनता के बीच नाराजगी का माहौल बनता है तो यह कांग्रेस के लिए अवसर हो सकता है।
लेकिन अवसर तभी चुनावी लाभ में बदलेगा जब कांग्रेस सही प्रत्याशी, मजबूत संगठन और एकजुट कार्यकर्ताओं के साथ मैदान में उतरे।
यही कारण है कि राजनीतिक विश्लेषकों और आम लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि यदि कांग्रेस ने फिर से अरुण वोरा को मैदान में उतारा तो क्या पार्टी पिछली परिस्थितियों को बदल पाएगी?
दुर्ग की राजनीतिक चर्चा में एक वर्ग का मानना है कि लंबे समय तक विधायक रहने के बावजूद अब जनता नए चेहरे की तलाश कर रही है। वहीं वोरा समर्थक राजनीतिक अनुभव और संगठनात्मक पहचान को उनकी ताकत मानते हैं।
इस विरोधाभास का फैसला अंततः जनता ही करेगी।
चार दशक की विरासत बनाम बदलती राजनीतिक सोच
अरुण वोरा की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत उनका लंबा अनुभव और वोरा परिवार की दुर्ग कांग्रेस में रही मजबूत राजनीतिक पहचान है। लेकिन यही विरासत आज उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती भी बनती दिखाई दे रही है।
राजनीति में मतदाता हमेशा पुराने समीकरणों के आधार पर निर्णय नहीं लेता। नई पीढ़ी के मतदाता रोजगार, शिक्षा, सड़क, स्वास्थ्य, शहर के विकास, प्रशासनिक जवाबदेही और स्थानीय समस्याओं के समाधान को लेकर अधिक सीधे सवाल पूछ रहे हैं।
ऐसे में केवल पुराना राजनीतिक प्रभाव किसी भी प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित नहीं कर सकता।
दुर्ग की जनता के बीच अब यह सवाल सुनाई देने लगा है कि क्या कांग्रेस इस बार पुराने चेहरे पर भरोसा करेगी या नए नेतृत्व को अवसर देकर भाजपा को वास्तविक चुनौती देगी?
"मैं नहीं तो कोई नहीं" की राजनीति कितनी कारगर?
राजनीतिक गलियारों में पूर्व विधायक को लेकर एक और चर्चा सुनाई देती है—क्या कांग्रेस की राजनीति में अभी भी व्यक्तिगत दावेदारी इतनी मजबूत है कि टिकट किसी एक चेहरे के इर्द-गिर्द केंद्रित हो जाए?
यदि ऐसी स्थिति बनती है और संगठन में मौजूद दूसरे नेताओं तथा कार्यकर्ताओं को पर्याप्त भूमिका नहीं मिलती, तो चुनाव के समय सामूहिक ऊर्जा कमजोर पड़ सकती है।
इसके विपरीत यदि कांग्रेस नेतृत्व खुले मन से संभावित उम्मीदवारों का आकलन करता है, जमीनी पकड़, कार्यकर्ताओं के साथ संबंध, जनस्वीकार्यता और चुनाव जीतने की क्षमता को आधार बनाता है तो दुर्ग में मुकाबला निश्चित रूप से दिलचस्प हो सकता है।
धीरज बाकलीवाल के सामने भी बड़ी परीक्षा
दुर्ग शहर कांग्रेस अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल के लिए भी आने वाला समय आसान नहीं है। संगठन को सक्रिय करना एक बात है, लेकिन उसे चुनाव तक एकजुट और अनुशासित रखना दूसरी बड़ी चुनौती होगी।
यदि संगठन सड़क पर संघर्ष करता है और कार्यकर्ता जनता के बीच सक्रिय रहते हैं, लेकिन टिकट वितरण के बाद संगठन में ही असंतोष पैदा हो जाता है, तो पिछले प्रयासों पर पानी फिर सकता है।
इसलिए कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा सवाल सिर्फ यह नहीं कि टिकट किसे मिलेगा, बल्कि यह है कि टिकट मिलने के बाद कितने लोग उस प्रत्याशी के साथ खड़े होंगे।
क्या कांग्रेस इतिहास दोहराएगी या नया अध्याय लिखेगी?
विधानसभा चुनाव अभी करीब दो वर्ष दूर हैं, लेकिन राजनीतिक दलों की तैयारियां धीरे-धीरे शुरू हो जाती हैं। अगले वर्ष तक चुनावी गतिविधियां और तेज होने की संभावना है। ऐसे में कांग्रेस के पास पर्याप्त समय है कि वह दुर्ग विधानसभा की राजनीतिक परिस्थितियों का निष्पक्ष आकलन करे।
यदि पार्टी पुराने राजनीतिक समीकरणों को ही प्राथमिकता देती है तो भाजपा को इसका लाभ मिल सकता है। वहीं यदि कांग्रेस संगठन की नई ऊर्जा को प्रत्याशी चयन के साथ जोड़ने में सफल रहती है तो दुर्ग में मुकाबला पूरी तरह बदल सकता है।
आज की सबसे बड़ी जरूरत किसी एक व्यक्ति की जीत नहीं, बल्कि कांग्रेस संगठन की जीत है। क्योंकि मजबूत संगठन के बिना मजबूत प्रत्याशी भी कमजोर पड़ सकता है और मजबूत संगठन के साथ अपेक्षाकृत नया चेहरा भी बड़ा राजनीतिक मुकाबला खड़ा कर सकता है।
फैसला अब कांग्रेस को करना है
दुर्ग की मौजूदा राजनीतिक तस्वीर में एक तरफ वर्षों पुराना राजनीतिक अनुभव और स्थापित नेतृत्व है, तो दूसरी तरफ बदलती जनता की अपेक्षाएं और नए चेहरे की मांग की चर्चा है। एक तरफ संगठन को नए सिरे से सक्रिय करने की कोशिश है, तो दूसरी तरफ संभावित प्रत्याशी की अपनी राजनीतिक गतिविधियां और दावेदारी चर्चा में है।
इस पूरे राजनीतिक परिदृश्य पर यह लेख दुर्ग विधानसभा क्षेत्र में आम नागरिकों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न वर्गों के लोगों से हुई चर्चाओं तथा सामने आ रही राजनीतिक धारणाओं के आधार पर तैयार किया गया है। यह किसी व्यक्ति के पक्ष या विपक्ष में अंतिम निष्कर्ष नहीं, बल्कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों और जनता के बीच चल रही चर्चाओं का विश्लेषण है।
अब देखना यही है कि कांग्रेस टिकट को प्राथमिकता देती है या संगठन को, पुराने समीकरणों पर भरोसा करती है या नए राजनीतिक चेहरे को मौका देती है और सबसे महत्वपूर्ण—क्या पार्टी व्यक्तिगत दावेदारियों से ऊपर उठकर सामूहिक चुनावी रणनीति तैयार कर पाती है?
क्योंकि यदि कांग्रेस के भीतर ही यह सवाल अनुत्तरित रह गया कि "कौन चुनाव लड़ेगा?" से पहले "कांग्रेस चुनाव कैसे जीतेगी?", तो दुर्ग विधानसभा में भाजपा के लिए राह आसान होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
मुख्यमंत्री साय ने कहा—“आज मेरा घर आप सभी बहनों का मायका है”; 13 लाख से अधिक महिलाएं बनीं लखपति दीदी, 31 किस्तों में 20 हजार करोड़ से अधिक की महतारी वंदन राशि
रायपुर । नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास शनिवार को छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति, पारिवारिक आत्मीयता और मातृशक्ति के उल्लास से सराबोर नजर आया। अवसर था तीजा-पोरा तिहार का। प्रदेशभर से बड़ी संख्या में पहुंचीं माताओं, बहनों और बेटियों के स्वागत के लिए मुख्यमंत्री निवास को छत्तीसगढ़ी गांव और मायके की थीम पर सजाया गया था। बैलगाड़ी, नंदिया-बइला, लोक शिल्प और ग्रामीण परिवेश के बीच फुगड़ी, रस्साकशी, कुर्सी दौड़, मेहंदी और झूलों ने पूरे परिसर को उत्सव के रंग में रंग दिया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने माताओं-बहनों का आत्मीय स्वागत करते हुए कहा, “आज मेरा घर आप सभी बहनों का मायका है। आपका अपने भाई के घर आना मेरे लिए सौभाग्य और आनंद की बात है।” मुख्यमंत्री के इस संबोधन के साथ पूरा परिसर तालियों की गूंज से भर उठा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तीजा-पोरा केवल त्योहार नहीं, बल्कि माटी, परिवार, रिश्तों, खेती-किसानी, पशुधन और लोकजीवन से जुड़ा जीवंत उत्सव है। हरेली से शुरू होने वाली छत्तीसगढ़ के तीज-त्योहारों की श्रृंखला हमारी लोक परंपराओं और पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करती है।
शिव-पार्वती की पूजा, प्रदेश की खुशहाली की कामना
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्यमंत्री ने भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा-अर्चना से की। उन्होंने प्रदेश की माताओं-बहनों सहित सभी नागरिकों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तीजा माता पार्वती की तपस्या, समर्पण और अटूट आस्था का पर्व है, जबकि पोरा छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति और पशुधन के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता का प्रतीक है।
‘हर घर मुनगा-घर घर मुनगा’ अभियान की शुरुआत
तीजा-पोरा के अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशव्यापी ‘हर घर मुनगा-घर घर मुनगा’ अभियान का शुभारंभ किया और अभियान के लोगो का विमोचन किया। उन्होंने कहा कि मुनगा पोषक तत्वों और आवश्यक मिनरल्स से भरपूर है और विशेष रूप से महिलाओं तथा बच्चों के बेहतर पोषण में उपयोगी हो सकता है।
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपने घरों और आसपास मुनगा लगाने तथा इसके पोषण गुणों को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया।
राष्ट्रीय पोषण माह का शुभारंभ, सुपोषण रथ को हरी झंडी
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में राष्ट्रीय पोषण माह 2026 का शुभारंभ किया। उन्होंने पोस्टर का विमोचन कर माताओं-बहनों को सुपोषण की शपथ दिलाई और सुपोषण रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
9 सितंबर से 8 अक्टूबर तक चलने वाले पोषण माह के दौरान महिलाओं, बच्चों और परिवारों को संतुलित एवं पौष्टिक आहार के प्रति जागरूक करने के लिए विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
बच्चों को खीर खिलाकर कराया अन्नप्राशन
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने नन्हे बच्चों को अपने हाथों से खीर खिलाकर अन्नप्राशन संस्कार कराया। बच्चों को स्नेह और आशीर्वाद देते हुए उन्होंने उनके स्वस्थ, खुशहाल और उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
तीजा-पोरा के पारिवारिक उल्लास के बीच अन्नप्राशन और पोषण संबंधी गतिविधियों ने कार्यक्रम को सुपोषण के संदेश से भी जोड़ दिया।
महतारी वंदन की 31 किस्तों में 20 हजार करोड़ से अधिक पहुंचे खातों में
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महिला सशक्तिकरण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की 68 लाख से अधिक माताओं-बहनों को हर महीने एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। अब तक 31 किस्तों में 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे उनके बैंक खातों में पहुंचाई जा चुकी है।
उन्होंने कहा कि इस राशि का उपयोग महिलाएं बेटियों के भविष्य, स्वरोजगार और छोटे व्यवसायों के लिए कर रही हैं। किसी ने सुकन्या समृद्धि योजना में राशि जमा की, तो किसी ने सिलाई मशीन खरीदी। अनेक महिलाएं सब्जी-भाजी, किराना दुकान और अन्य छोटे व्यवसायों के माध्यम से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं।
लखपति दीदी से ड्रोन दीदी तक—बदल रही मातृशक्ति की तस्वीर
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं। प्रदेश में 13 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं, जबकि निर्धारित लक्ष्य 8 लाख महिलाओं का था।
उन्होंने कहा कि महिलाएं अब पारंपरिक भूमिकाओं से आगे बढ़कर डीलर दीदी, रानी मिस्त्री और ड्रोन दीदी के रूप में भी अपनी पहचान बना रही हैं। कई ड्रोन दीदियां एक दिन में 20 से 25 एकड़ तक खेतों में छिड़काव कर लगभग 7 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं।
मुख्यमंत्री ने सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम दानसरा की महिलाओं का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां माताओं-बहनों ने महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि को एकत्र कर भगवान श्रीराम का मंदिर बनाने का प्रेरणादायी संकल्प लिया है।
महिलाओं के नाम संपत्ति को बढ़ावा, रजिस्ट्री में मिल रही छूट
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ उन्हें संपत्ति में स्वामित्व देने की दिशा में भी सरकार काम कर रही है। महिलाओं के नाम संपत्ति की रजिस्ट्री कराने पर पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत तथा स्टांप शुल्क में एक प्रतिशत की छूट दी जा रही है।
उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण का वास्तविक अर्थ महिलाओं को अवसर, सम्मान, आर्थिक स्वतंत्रता और निर्णय लेने में भागीदारी देना है।
हर जरूरतमंद परिवार को पक्की छत देने का संकल्प
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में प्रतिदिन 1,600 से अधिक आवासों का निर्माण हो रहा है। पिछले ढाई वर्षों में 18 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हुए हैं और इनमें से साढ़े 11 लाख से अधिक आवास पूर्ण किए जा चुके हैं।
उन्होंने बताया कि केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान प्रदेश के लिए 3 लाख 65 हजार नए प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का संकल्प है कि कोई भी जरूरतमंद परिवार पक्के मकान से वंचित न रहे।
मुख्यमंत्री निवास में दिखा गांव का जीवंत स्वरूप
तीजा-पोरा के लिए मुख्यमंत्री निवास को छत्तीसगढ़ी गांव की थीम पर विशेष रूप से सजाया गया। बैलगाड़ी, नंदिया-बइला, पारंपरिक खिलौने और ग्रामीण परिवेश के बीच लोकसंस्कृति जीवंत नजर आई। लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने वातावरण को और भी रंगीन बना दिया।
माताओं-बहनों ने फुगड़ी, रस्साकशी और कुर्सी दौड़ में उत्साह से हिस्सा लिया। मेहंदी और झूलों का भी आनंद लिया। पूरा मुख्यमंत्री निवास ऐसा प्रतीत हुआ मानो छत्तीसगढ़ के अलग-अलग अंचलों की लोक परंपराएं एक ही आंगन में उतर आई हों।
‘विष्णु भैया’ के घर बहनों का मायके जैसा अपनापन
तीजा-पोरा के इस आयोजन ने मुख्यमंत्री निवास को महज एक सरकारी परिसर नहीं, बल्कि भाई-बहन के आत्मीय रिश्ते और छत्तीसगढ़ी पारिवारिक परंपरा के प्रतीक मायके में बदल दिया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि उनकी कामना है कि प्रदेश की हर माता और बहन के सपनों को नई उड़ान मिले, उनके परिवारों में सुख-समृद्धि बनी रहे और मातृशक्ति की भागीदारी से छत्तीसगढ़ विकास के पथ पर निरंतर आगे बढ़ता रहे।
महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने भी प्रदेश की माताओं-बहनों को तीजा-पोरा की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि तीजा छत्तीसगढ़ की समृद्ध परंपराओं और मातृशक्ति से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। उन्होंने ‘हर घर मुनगा-घर घर मुनगा’ अभियान को पोषण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
जनभागीदारी से सूरजपुर जिले के शासकीय विद्यालयों में आयोजित हुए विभिन्न कार्यक्रम
न्योता भोजन के साथ बच्चों ने लिया उत्साहपूर्वक हिस्सा
रायपुर / बैगलेस डे (Bagless Day) पर विद्यालयों में बच्चों को बस्ते के बोझ से मुक्त रखकर स्वच्छता, रचनात्मक और व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से आनंदमय शिक्षा दी जाती है। बैगलेस डे के अंतर्गत बच्चों को पारंपरिक पढ़ाई के अतिरिक्त खेल, चित्र, चर्चा, स्वतंत्रता जागरूकता एवं मौलिक विचारधारा की स्थापना में शामिल किया जाएगा। इससे बच्चों में नेतृत्व क्षमता, निर्देशन, सहयोग एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित होगी।
कलेक्टर सूरजपुर श्रीमती रेना जमील और जिला पंचायत सीईओ के मार्गदर्शन तथा जिला शिक्षा अधिकारी के नेतृत्व में शनिवार को जिले के सभी शासकीय विद्यालयों में बैगलेस डे के अवसर पर विभिन्न रचनात्मक और व्यावहारिक गतिविधियों का आयोजन किया गया। जनप्रतिनिधियों, पालकों और स्थानीय समुदाय की सक्रिय सहभागिता में विद्यार्थियों ने स्वच्छता अभियान, खेलकूद और कलात्मक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का पाठ
बैगलेस डे के तहत विद्यालय परिसरों में विशेष सफाई अभियान चलाया गया। बच्चों ने गाजर घास उन्मूलन, परिसर व शौचालयों की साफ-सफाई, पाउच-पन्नी का सुरक्षित निस्तारण और पेयजल स्रोतों की स्वच्छता का कार्य किया। इन गतिविधियों के जरिए विद्यार्थियों को स्वच्छता, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया, जिससे वे स्वच्छ और सुंदर विद्यालय के महत्व को समझ सकें।
रचनात्मकता और कल्पनाशीलता को मिला नया आयाम
विद्यार्थियों के बौद्धिक और सृजनात्मक विकास के लिए कई दिलचस्प गतिविधियां आयोजित की गईं। कल्पनात्मक निबंध पेड़ बोल सकते तो क्या कहते विषय पर बच्चों ने अपनी कल्पनाशीलता के आधार पर सुंदर निबंध लिखे। पेपर क्राफ्ट और कला के माध्यम से कागज को मोड़ने और काटने की तकनीक से बच्चों ने नाव, हवाई जहाज, तितली और मेंढक जैसी आकर्षक आकृतियां बनाईं। बेस्ट आउट ऑफ़ वेस्ट के द्वारा विद्यार्थियों ने कागज से ग्रीटिंग कार्ड और कबाड़ से जुगाड़ यानी अनुपयोगी सामग्री से उपयोगी कलात्मक वस्तुएं तैयार कीं।
सामुदायिक सहभागिता से हुआ न्योता भोजन
इस विशेष दिन पर विद्यालयों में समुदाय आधारित न्योता भोजन का भी आयोजन किया गया। माध्यमिक शाला कन्या रामानुजनगर में स्थानीय व्यवसायी श्री श्रवण कुमार गुप्ता ने अपने जन्मदिन के अवसर पर संकुल समन्वयक श्री जयप्रकाश बरेठा के साथ मिलकर बच्चों को न्योता भोजन कराया। इस दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी-कर्मचारी भी उपस्थित रहे। वहीं, भैयाथान विकासखंड के प्राथमिक शाला शिवप्रसाद नगर में समुदाय के सहयोग से बच्चों को कॉपियां वितरित की गईं और विद्यालय परिसर में स्वच्छता अभियान चलाया गया।
बैगलेस डे के तहत विद्यालयों में आयोजित सभी गतिविधियों की मॉनिटरिंग एडी शिक्षा, एडीपीओ समग्र, सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारी, बीआरसीसी, संकुल प्राचार्य और संकुल समन्वयकों द्वारा की गई। अधिकारियों ने स्कूलों का दौरा कर गतिविधियों का अवलोकन किया और बच्चों व शिक्षकों का मार्गदर्शन किया।
रायपुर / प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष की सेवा, समर्पण और जनकल्याणकारी नेतृत्व की यात्रा के उपलक्ष्य में आयोजित किए जा रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ को लेकर प्रदेशभर में तैयारियां तेज हो गई हैं। आगामी 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक चलने वाले इस एक माह के अभियान के अंतर्गत विभिन्न जनसेवा, सामाजिक सहभागिता और जनजागरण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
राजस्व एवं जिला प्रभारी मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से धमतरी जिले में अभियान की तैयारियों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सेवा संकल्प अभियान को जनभागीदारी का व्यापक स्वरूप देते हुए समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता सुनिश्चित की जाए। समीक्षा के दौरान जिला प्रशासन ने बताया कि अभियान के सफल संचालन के लिए टास्क फोर्स समिति का गठन कर विभिन्न विभागों के अधिकारियों को जिम्मेदारियां सौंप दी गई हैं। सभी विभागों द्वारा निर्धारित कार्यक्रमों के अनुरूप आवश्यक तैयारियां पूरी की जा रही हैं।
धमतरी में 10 लाख दीयों से होगा सेवा और समर्पण का संदेश
अभियान के प्रथम दिवस 17 सितंबर को आयोजित होने वाले ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम के तहत धमतरी जिले में लगभग 10 लाख दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। मुख्य आयोजन रुद्री स्थित रुद्रेश्वर महादेव मंदिर एवं महानदी घाट में होगा। इसके साथ ही कर्णेश्वर महादेव मंदिर सिहावा, अंगारमोती माता मंदिर गंगरेल, विंध्यवासिनी माता मंदिर धमतरी सहित जिले के प्रमुख धार्मिक स्थलों में दीप प्रज्ज्वलन किया जाएगा। इसके अलावा पीएम जनमन आवासों, अटल आवासों तथा आम नागरिकों के घरों में भी दीप जलाकर सेवा एवं समर्पण का संदेश दिया जाएगा। प्रशासन ने इसे जन-जन की सहभागिता वाला कार्यक्रम बनाने की दिशा में व्यापक तैयारी की है।
जनभागीदारी से अभियान को मिलेगा व्यापक स्वरूप
राजस्व एवं जिला प्रभारी मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे 17 सितंबर को अपने घरों में दीप प्रज्ज्वलित कर सेवा और राष्ट्र निर्माण के संकल्प में सहभागी बनें। उन्होंने जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, युवाओं, महिला समूहों और विभिन्न सामाजिक वर्गों से अभियान के कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी निभाने का आग्रह किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभियान के सभी कार्यक्रमों का आयोजन गरिमापूर्ण, सुव्यवस्थित एवं समयबद्ध ढंग से किया जाए ताकि सेवा, समर्पण और जनकल्याण का संदेश समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।
रटगा में खराब हैंडपंप की शिकायत पर तत्काल कार्रवाई, ग्रामीण संत राम बोले—समय पर हुआ समाधान, शासन-प्रशासन पर बढ़ा भरोसा
रायपुर, / राज्य शासन की सुशासन नीति और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशा के अनुरूप जिला प्रशासन द्वारा आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित, पारदर्शी एवं संवेदनशील निराकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। शासन की इसी प्रतिबद्धता का प्रभाव अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। ‘विष्णु का सुशासन’ केवल एक संकल्प नहीं, बल्कि आम नागरिकों के जीवन में प्रत्यक्ष सकारात्मक बदलाव लाने वाली व्यवस्था के रूप में साकार हो रहा है।
इसी सुशासन की प्रभावी मिसाल मरवाही विकासखंड के ग्राम पंचायत रटगा में देखने को मिली, जहां एक ग्रामीण की पेयजल संबंधी समस्या का समाधान शिकायत दर्ज होने के महज 24 घंटे के भीतर कर दिया गया। ग्राम रटगा निवासी श्री संत राम ने अपने आसपास खराब पड़े हैंडपंप की समस्या को लेकर सीएम हेल्पलाइन नंबर 1076 पर शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत प्राप्त होते ही जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभाग को तत्काल आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के मैदानी अमले ने बिना विलंब मौके पर पहुंचकर खराब हैंडपंप का निरीक्षण किया और आवश्यक मरम्मत कार्य शुरू किया। विभागीय टीम की तत्परता से महज 24 घंटे के भीतर हैंडपंप को दुरुस्त कर पुनः चालू कर दिया गया।
हैंडपंप के चालू होने से श्री संत राम सहित आसपास के ग्रामीणों को अब आसानी से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो रहा है। पेयजल की समस्या दूर होने से ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है। साथ ही, त्वरित निराकरण से ग्रामीणों के बीच शासन-प्रशासन के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ है।
शिकायत करने के बाद इतनी जल्दी समाधान होगा, इसकी उम्मीद थी, लेकिन 24 घंटे में ही हैंडपंप चालू हो गया
समस्या के शीघ्र समाधान से प्रसन्न श्री संत राम ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय एवं जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि हैंडपंप खराब होने से हम लोगों को पानी के लिए काफी परेशानी हो रही थी। मैंने सीएम हेल्पलाइन 1076 पर अपनी शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद विभाग के कर्मचारी तुरंत पहुंचे और 24 घंटे के अंदर हैंडपंप ठीक कर दिया गया। अब हम लोगों को फिर से आसानी से पानी मिल रहा है। इतनी जल्दी समस्या का समाधान होने से हमें बहुत खुशी हुई है। सीएम हेल्पलाइन आम लोगों के लिए बहुत उपयोगी व्यवस्था है। मैं मुख्यमंत्री जी और जिला प्रशासन का धन्यवाद करता हूं।
शिकायत के साथ ही हरकत में आया विभाग
ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा से जुड़ी समस्याओं का समय पर निराकरण आम नागरिकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। रटगा में सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से प्राप्त शिकायत पर संबंधित विभाग द्वारा तत्काल कार्रवाई किए जाने से यह स्पष्ट हुआ कि शिकायतों के निराकरण के लिए प्रशासनिक तंत्र लगातार सक्रिय है।
सीएम हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से ग्रामीणों को अपनी समस्याएं सीधे शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का सरल माध्यम उपलब्ध हुआ है। शिकायत दर्ज होने के बाद उसे संबंधित विभाग तक पहुंचाने और उसके निराकरण की प्रक्रिया सुनिश्चित करने से आम नागरिकों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता भी कम हुई है।
सुशासन का असर, ग्रामीणों को मिला सीधा लाभ
रटगा की यह घटना इस बात का उदाहरण है कि शासन की जनसुनवाई और शिकायत निराकरण व्यवस्था किस तरह आम नागरिकों के दैनिक जीवन में बदलाव ला रही है। एक ओर जहां शिकायत के माध्यम से ग्रामीण की आवाज प्रशासन तक पहुंची, वहीं दूसरी ओर संबंधित विभाग ने तत्परता दिखाते हुए समस्या का समाधान किया। शिकायत दर्ज होने से लेकर समाधान तक की यह पूरी प्रक्रिया ‘सुशासन’ की उस भावना को प्रदर्शित करती है, जिसमें नागरिकों की समस्याओं का समाधान संवेदनशीलता और समयबद्धता के साथ किया जाता है।
सीएम हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से रटगा के ग्रामीणों को मिली यह राहत शासन की उस प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है, जिसमें हर नागरिक की समस्या को सुना जाए, उसका समाधान किया जाए और शासन की योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जाए।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
