September 16, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    रायपुर में 60 करोड़ की आर्चरी अकादमी, पंडरापाठ में 20–25 करोड़ से बनेगी तीरंदाजी अकादमी; 40वें नेशनल गेम्स की मेजबानी के लिए प्रयास करेगा छत्तीसगढ़

    रायपुर । छत्तीसगढ़ के गांवों, वनांचलों और दूरस्थ अंचलों में छिपी खेल प्रतिभाओं को अब बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक संसाधन और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराने की दिशा में राज्य सरकार ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट कहा है कि प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के लिए संसाधनों और अवसरों की कमी नहीं होने दी जाएगी। सरकार खेल अधोसंरचना के विस्तार के साथ प्रतिभा पहचान, प्रशिक्षण और खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने पर विशेष फोकस कर रही है।

    रायपुर के न्यू सर्किट हाउस में आयोजित छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ की एग्जीक्यूटिव बॉडी एवं जनरल काउंसिल मीटिंग में मुख्यमंत्री ने प्रदेश में खेलों के विकास को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं और दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास, टीम भावना और सकारात्मक ऊर्जा विकसित करने का सशक्त साधन भी हैं।

    रायपुर में 60 करोड़ की आर्चरी अकादमी, पंडरापाठ में भी बनेगा बड़ा केंद्र

    मुख्यमंत्री साय ने बताया कि प्रदेश में आधुनिक खेल अधोसंरचना विकसित करने का काम तेजी से चल रहा है। रायपुर, रायगढ़ और कुनकुरी में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाए जा रहे हैं। रायपुर में लगभग 60 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक आर्चरी अकादमी का निर्माण किया जा रहा है।

    वहीं जशपुर के पंडरापाठ में 20 से 25 करोड़ रुपये की लागत से आर्चरी अकादमी स्थापित की जा रही है। इससे जशपुर सहित आसपास के वनांचल के खिलाड़ियों को अपने क्षेत्र में ही आधुनिक प्रशिक्षण, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और आवश्यक संसाधन उपलब्ध होंगे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जशपुर में तीरंदाजी की समृद्ध परंपरा है। विशेष रूप से पहाड़ी कोरवा समुदाय में यह खेल जीवन और संस्कृति से गहराई से जुड़ा हुआ है। ऐसी प्राकृतिक प्रतिभाओं को आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण से जोड़कर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार किए जा सकते हैं।

    बस्तर-सरगुजा ओलंपिक से मिल रहा दूरस्थ प्रतिभाओं को मंच

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर और सरगुजा में खेल प्रतिभाओं की अपार संभावनाएं हैं। बस्तर ओलंपिक ने दूरस्थ क्षेत्रों के हजारों युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर दिया है और राज्य सरकार इसका आयोजन हर वर्ष करेगी। सरगुजा ओलंपिक के माध्यम से भी स्थानीय खिलाड़ियों को आगे आने का मंच मिल रहा है।

    उन्होंने कहा कि खेल उत्कर्ष मिशन के माध्यम से प्रदेशभर में प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें बेहतर प्रशिक्षण और सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। लक्ष्य स्पष्ट है कि खिलाड़ी चाहे बड़े शहर से हो या किसी दूरस्थ गांव और वनांचल से, उसे आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें।

    उद्योगों को खेल संघों से जोड़ने की पहल

    मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विभिन्न खेल संघों को उद्योग समूहों से जोड़ने की पहल में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में कार्यरत बड़े उद्योग समूह यदि अलग-अलग खेलों और खेल संघों के साथ जुड़कर सहयोग करें तो खिलाड़ियों के प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण, प्रतियोगिताओं के आयोजन और खेल अधोसंरचना के विस्तार में अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध हो सकते हैं।

    ओलंपिक संघ के साथ समन्वय के लिए वरिष्ठ अधिकारी को जिम्मेदारी

    मुख्यमंत्री साय ने शासन और छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के बीच बेहतर तालमेल के लिए मुख्यमंत्री सचिवालय के एक वरिष्ठ अधिकारी को विशेष जिम्मेदारी देने की बात कही। इससे खेल संघों की आवश्यकताओं, प्रस्तावों और शासन स्तर की प्रक्रियाओं में तेजी आने की उम्मीद है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि खेलों से जुड़े विषयों का समयबद्ध समाधान और खिलाड़ियों तक योजनाओं का पूरा लाभ पहुंचाने के लिए शासन एवं खेल संगठनों के बीच निरंतर संवाद जरूरी है।

    40वें नेशनल गेम्स की मेजबानी पर छत्तीसगढ़ की नजर

    बैठक में 40वें नेशनल गेम्स की मेजबानी छत्तीसगढ़ को दिलाने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में खेल अधोसंरचना के विस्तार के बाद अब बड़े राष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी के लिए गंभीरता से प्रयास किया जाएगा।

    उन्होंने कहा कि यदि मेजबानी छत्तीसगढ़ को मिलती है तो प्रतियोगिताओं को बस्तर से भी जोड़ने की संभावनाओं पर विचार किया जा सकता है। इससे बस्तर में बन रहे शांति, विकास और विश्वास के नए वातावरण को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।

    वनांचल में तीरंदाजी और मलखम्ब की बड़ी संभावनाएं

    वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ के वनांचलों में तीरंदाजी जीवन और संस्कृति का हिस्सा है। यहां प्रतिभाओं की कमी नहीं है, जरूरत उन्हें तकनीकी प्रशिक्षण और सही मार्गदर्शन देने की है। उन्होंने बताया कि बस्तर के जनजातीय युवा मलखम्ब में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। व्यक्तिगत और सामूहिक दोनों खेलों में प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें विशेष प्रशिक्षण देने की आवश्यकता है।

    खेल अलंकरण की वापसी से बढ़ा खिलाड़ियों का मनोबल

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में खेल अलंकरण समारोह की पुनः शुरुआत की गई है। उत्कृष्ट खिलाड़ियों को सम्मान और आर्थिक सहायता देने के साथ उन्हें शासकीय सेवा में अवसर देने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इससे खिलाड़ियों का उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ा है।

    अन्य जिलों में भी बनेंगे जिला ओलंपिक संघ

    छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के महासचिव डॉ. विक्रम सिसोदिया ने संघ की पिछली बैठक का प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए प्रदेश में खेल गतिविधियों और आगामी कार्यक्रमों की जानकारी दी। बैठक में ओलंपिक दिवस, नेशनल गेम्स, विभिन्न खेल संघों की आवश्यकताओं और बजटीय प्रावधानों पर चर्चा हुई।

    प्रदेश के वर्तमान जिला ओलंपिक संघों के अलावा अन्य जिलों में भी जिला ओलंपिक संघ गठित करने के लिए समिति बनाने पर सहमति बनी। विभिन्न खेल संघों की गतिविधियों और प्रदेश में खेलों के विस्तार से जुड़े विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

    बैठक में सांसद विजय बघेल, वन मंत्री केदार कश्यप, ओलंपिक संघ के पदाधिकारी, विभिन्न खेल संघों के प्रतिनिधि और अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

    सोलर वेंडर के रूप मे कराया पंजीयन, छतो पर लगा रही सोलर पैनल

    ​“सोलर दीदी हर घर रोशनी, हर हाथ को रोजगार” के सेवा संकल्प के साथ आर्थिक सशक्तिकरण की ओर

    रायपुर, / छत्तीसगढ़ सहित देश के कई राज्यों में ग्रामीण स्व-सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा पहलों के तहत सोलर दीदी के रूप में अपनी एक मजबूत पहचान बना रही हैं। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़ी स्व-सहायता समूहों की महिलाएं अब सोलर दीदी के रूप में पहचान बना रही हैं। ​“​“सोलर दीदी हर घर रोशनी, हर हाथ रोजगार” के संकल्प के साथ यह पहल ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को मजबूती प्रदान करेगा।े सेवा संकल्प को आदर्श मानकर यह पहल ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को मजबूती प्रदान करेगा।

    बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के विकासखंड बलौदाबाजार के ग्राम दसरमा में हितग्राही तारनी घृतलहरे के घर 3 किलोवाट क्षमता का सोलर पैनल सिस्टम सफलतापूर्वक स्थापित किया गया है।​ यह पूरी कार्ययोजना कलेक्टर कुलदीप शर्मा एवं जिला पंचायत बलौदाबाजार के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के मार्गदर्शन में संचालित की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को केवल योजनाओं के लाभ तक सीमित न रखकर, उन्हें सौर ऊर्जा आधारित तकनीकी कार्यों में रोजगार व उद्यमिता से जोड़ना है।

    ​संकुल संगठन ने स्वयं कराया वेंडर पंजीयन

    इस पहल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि बिहान के तहत गठित संकुल स्तरीय संगठन ने स्वयं को आधिकारिक सोलर वेंडर के रूप में पंजीकृत कराया है। वेंडर पंजीयन के बाद अब बिहान की प्रशिक्षित सोलर दीदियां सीधे ग्राउंड लेवल पर जाकर हितग्राहियों के घरों में सोलर पैनल लगाने का कार्य संभाल रही हैं।

    ​पर्यावरण संरक्षण के साथ आर्थिक सशक्तिकरण

    सोलर दीदियों द्वारा किए जा रहे इस कार्य से ग्रामीण महिलाओं में तकनीकी दक्षता और व्यावसायिक कौशल का विकास हो रहा है। इससे एक ओर जहां स्वच्छ ऊर्जा एवं पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण परिवारों को बिजली बिल में राहत मिल रही है।

    तकनीकी अड़चनों के बीच फँसा आधार हुआ अपडेट, 75 वर्षीय वासुदेव गुप्ता को मिली राहत, खुले शासकीय योजनाओं के द्वार

    रायपुर / पहचान का एक छोटा-सा दस्तावेज किसी व्यक्ति के जीवन में कितना बड़ा बदलाव ला सकता है, इसका जीवंत उदाहरण बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के ग्राम पंचायत झलपी (पोस्ट-महाराजगंज) निवासी 75 वर्षीय श्री वासुदेव गुप्ता का प्रकरण है। पहचान पत्र न बन पाने के कारण उन्हें लंबे समय से विभिन्न शासकीय योजनाओं के लाभ से वंचित रहना पड़ रहा था। किन्तु यह बदलाव तब संभव हुआ जब प्रशासन की संवेदनशील सोच ने सेवा संकल्प का प्राथमिकता में रखकर कार्य किया।

    चार वर्षों की लंबी भागदौड़ और संघर्ष

    आधार कार्ड आज के समय में हर भारतीय नागरिक की पहचानए वित्तीय लेन.देन और सरकारी योजनाओं का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज बन गया है। बीते चार वर्षों के दौरान श्री वासुदेव गुप्ता ने क्षेत्र के लगभग हर आधार केंद्र के चक्कर काटे और कई बार नामांकन भी करवाया। हालांकि, जब भी वे पावती से स्थिति की जांच करवाते, तो हर बार तकनीकी कारणों का हवाला देकर उनका आवेदन निरस्त कर दिया जाता था। इस समस्या के समाधान और पहचान संख्या प्राप्त करने की उम्मीद में उन्होंने अंबिकापुर स्थित सेवा केंद्र तक की दौड़ लगाई, लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगी। लगातार आ रही इन बाधाओं के चलते उनकी उम्मीदें धीरे-धीरे टूटने लगी थीं।

    प्रशासन की संवेदनशील पहल और त्वरित समाधान

    इस मामले में नया मोड़ तब आया जब बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी की संवेदनशील पहल पर जिला प्रशासन ने आम नागरिकों की ऐसी लंबित शिकायतों को प्राथमिकता देते हुए उनके त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। कलेक्टर के मार्गदर्शन में जिला टीम तथा संबंधित तकनीकी कार्यालयों (ई-डीएम, डीसी एवं एमटीओ) ने तकनीकी अड़चनों की गहराई से पड़ताल की। आपसी समन्वय से समाधान का मार्ग निकालते हुए अंततः श्री गुप्ता का दस्तावेज सफलतापूर्वक तैयार कर उन्हें सौंप दिया गया।

    खुले शासकीय और जनकल्याणकारी योजनाओं के द्वार

    दस्तावेज के तैयार होते ही वृद्ध कृषक के लिए शासन की तमाम कल्याणकारी योजनाओं के रास्ते खुल गए हैं। इसके अपडेट होने से अब श्री वासुदेव गुप्ता एग्री स्टैक पोर्टल पर अपना पंजीयन करा सकेंगे, जिससे उन्हें सुगमता से धान विक्रय करने और अन्य कृषि-हितैषी योजनाओं का लाभ मिलने लगेगा। इसके अतिरिक्त पेंशन योजना, राशन कार्ड की ई-केवायसी, बैंकिंग सेवाओं तथा ऋण संबंधी प्रक्रियाओं का मार्ग भी प्रशस्त हो गया है, जिससे वृद्धावस्था में उन्हें आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का संबल प्राप्त होगा।

    प्रशासन की दूरदर्शी सोच

    जिला प्रशासन का यह प्रयास केवल एक अकेले प्रकरण के निराकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य एक ऐसी पुख्ता व्यवस्था विकसित करना है जहाँ पहचान से जुड़ी तकनीकी दिक्कतें किसी भी पात्र हितग्राही के अधिकारों के आड़े न आएं। इस दिशा में नामांकन व अपडेशन प्रक्रियाओं को सुगम बनाने, तकनीकी कारणों से अटके मामलों की पहचान कर उन्हें विशेष अभियान के तहत पूरा करने तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया जा रहा है। प्रशासन के इस संवेदनशील दृष्टिकोण से दूरस्थ अंचलों और वृद्धजनों को कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर काटने से मुक्ति मिल रही है, जो कि अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में एक सार्थक कदम है।

    प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत हुआ भव्य सामूहिक गृह प्रवेश, नए घरों की चौखट पर खिले हितग्राहियों के चेहरे
    पक्का आवास परिवार की सुरक्षा और सम्मान का आधार

    रायपुर / छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में ग्रामीण विकास और आवासहीन जरूरतमंद परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 में 1 अप्रैल 2026 से अब तक पूर्ण हुए कुल 6 हजार 968 नवनिर्मित आवासों का भव्य एवं सामूहिक गृह प्रवेश कार्यक्रम 11 सितंबर 2026 को पूरे जिले में बेहद उत्साह के साथ संपन्न हुआ। आगामी 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलने वाले सेवा संकल्प अभियान से पहले हजारों परिवारों का अपने पक्के घर में प्रवेश करना जिले के लिए एक विशेष उपलब्धि बन गया है।

    परंपरागत रीति-रिवाज के साथ सौंपी गई चाबियां

    बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के सभी विकासखंडों में पंचायत प्रतिनिधियों, स्थानीय जनप्रतनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में पारंपरिक रीति-रिवाजों और पूजा-अर्चना के साथ हितग्राहियों को उनके नए घरों की चाबियां सौंपी गईं। वर्षों तक कच्चे मकानों और झोपड़ियों में जीवन बिताने वाले परिवारों के लिए यह पल बेहद भावुक और गौरव से भरा हुआ था।

    विकासखंडवार पूर्ण हुए आवासों की स्थिति

    प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत विकासखंड रामचन्द्रपुर में 2,276 आवास, विकासखंड वाड्रफनगर 1 हजार 772 आवास, विकासखंड कुसमी 1 हजार 215 आवास, विकासखंड बलरामपुर 1 हजार 142 आवास, विकासखंड राजपुर 353 आवास और विकासखंड शंकरगढ़ 210 पक्का आवास पूर्ण कराए गए हैं।

    *पक्का आवास सुरक्षा और उज्ज्वल भविष्य का आधार *

    गृह प्रवेश करने वाले सभी हितग्राही परिवारों को बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी ने कहा कि पक्का आवास केवल ईंट-गारे का ढांचा नहीं, बल्कि परिवार की सुरक्षा, सम्मान और उज्ज्वल भविष्य का मजबूत आधार है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का निरंतर प्रयास है कि हर पात्र परिवार को तय समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण आवास मिले और शासकीय योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने हितग्राहियों को आवास के साथ-साथ अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया। साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिए कि शेष स्वीकृत आवासों को प्राथमिकता से पूरा किया जाए और श्सेवा संकल्प अभियानश् की तैयारियां समय पर सुनिश्चित हों।

    प्रधानमंत्री के प्रति जताया आभार

    सेवा संकज्प के इस अवसर पर लाभान्वित हितग्राहियों ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके दूरदर्शी संकल्प और आमजन के हित में उठाए जा रहे कदमों के कारण ही आज उनका अपने पक्के घर का सपना साकार हो सका है। हितग्राहियों ने सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लेने और विकसित भारत 2047 के सपने में अपनी सहभागिता निभाने का संकल्प लिया।

    प्रशासन के कुशल मार्गदर्शन और मैदानी अमले की लगातार निगरानी के चलते सभी निर्माण कार्य तय समय-सीमा के भीतर और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरे किए गए हैं। पक्की छत मिलने से गदगद परिवारों ने मुख्यमंत्री श्री विश्णुदेव साय का और शासन-प्रशासन के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया है, वहीं प्रशासन ने भी बाकी बचे स्वीकृत आवासों को जल्द और गुणवत्ता के साथ पूरा करने की बात दोहराई है।

    आईसीएफएआई विश्वविद्यालय के तृतीय दीक्षांत समारोह में राज्यपाल हुए शामिल
    19 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल तथा 16 विद्यार्थियों को सिल्वर मेडल से सम्मानित
    504 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गई

      रायपुर / राज्यपाल रमेन डेका आज आईसीएफएआई विश्वविद्यालय के तृतीय दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। समारोह में वर्ष 2025 एवं वर्ष 2026 शैक्षणिक सत्र के विद्यार्थियों को विभिन्न संकायों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पदक प्रदान किए गए, जिनमें 19 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल तथा 16 विद्यार्थियों को सिल्वर मेडल से सम्मानित किया गया शामिल हैं। स्नातकोत्तर एवं स्नातक स्तर पर कुल 504 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गई

    विद्यार्थियों को तकनीक का सदुपयोग करते हुए इसके दुष्प्रभावों से बचने सलाह
    राज्यपाल डेका ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आप इंटरनेट युग के विद्यार्थी हैं, जबकि हम उस दौर के विद्यार्थी हैं, जब शिक्षा चाक ,पेंसिल पुस्तकों और गुरुओं के माध्यम से प्राप्त करते थे। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आज बहुत जरूरी है, लेकिन इसका उपयोग उतना ही होना चाहिए, जितना मानव समाज के हित में आवश्यक है। आज डिजिटल एडिक्शन किसी भी अन्य एडिक्शन से अधिक खतरनाक हो गया है। विद्यार्थियों को तकनीक का सदुपयोग करते हुए इसके दुष्प्रभावों से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यूक्लियर एनर्जी, क्लाइमेट चेंज और माइक्रो प्लास्टिक आज दुनिया के सामने बड़ी चुनौतियां हैं। 21वीं सदी में विकास के साथ उसके दूसरे पहलुओं पर भी ध्यान देना होगा और सतत विकास को प्राथमिकता देनी होगी।

    विद्यार्थियों पढ़ाई और लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रहें
    राज्यपाल ने विद्यार्थियों को भगवत गीता के कर्मयोग का संदेश देते हुए कहा कि कर्म ही जीवन है। हमें इस बात की चिंता किए बिना कि दूसरे हमारे बारे में क्या सोचते हैं, अपने कर्म, पढ़ाई और लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आपका ज्ञान कोई आपसे नहीं छीन सकता। अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनें और सही रास्ते पर आगे बढ़ें।

    विद्यार्थियों को अपने जीवन का रोडमैप तैयार कर योजनाबद्ध ढंग से सफलता की ओर आगे बढ़ना चाहिए
    श्री डेका ने कहा कि विद्यार्थियों ने ज्ञान और डिग्री इसलिए हासिल की है कि उसका उपयोग मानव समाज के हित में हो। विज्ञान, तकनीक और इनोवेशन का उद्देश्य मानव जीवन को बेहतर बनाना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में लौह अयस्क प्रचुर मात्रा में है और यह देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। अब छत्तीसगढ़ को एजुकेशन हब के रूप में विकसित करने की दिशा में भी प्रयास करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत, आत्मनिर्भर भारत और 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को प्राप्त करने में समाज के प्रत्येक वर्ग की भूमिका महत्वपूर्ण है। विद्यार्थियों को अपने जीवन का रोडमैप तैयार कर योजनाबद्ध ढंग से सफलता की ओर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से नशे से दूर रहने तथा मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रहते हुए राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की अपील की।
    समारोह में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के सदस्य एवं डिफेंस साइंटिस्ट डॉ. वी. सतीश रेड्डी तथा विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रोफेसर आर.पी. कौशिक ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया। स्वागत भाषण विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ. शिव दयाल पांडे ने दिया और विश्वविद्यालय का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की शासी परिषद एवं कार्य परिषद के सदस्य, अधिष्ठाता, प्राध्यापक, छात्र-छात्राएं एवं उनके पालक उपस्थित थे।

      रायपुर, / भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकारों (BOCW) के कल्याण, सामाजिक सुरक्षा और श्रमिक हितों को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से मुंबई में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन ('National Conference on BOCW') का शुभारंभ हुआ। 11 और 12 सितंबर 2026 तक आयोजित इस सम्मेलन में देशभर के निर्माण श्रमिकों के सुरक्षित, सम्मानजनक और समृद्ध भविष्य पर विस्तृत चर्चा की जा रही है।

    इस राष्ट्रीय सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री श्री मनसुख मांडविया, केंद्रीय राज्य मंत्री श्रीमती शोभा करंदलाजे, मध्यप्रदेश के श्रम मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल और छत्तीसगढ़ के श्रम सचिव श्री हिम शिखर गुप्ता सहित विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी और प्रतिनिधि शामिल हुए।

    सम्मेलन में छत्तीसगढ़ राज्य का प्रतिनिधित्व भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह तथा मंडल सचिव श्री गिरीश रामटेके ने किया। सम्मेलन के दौरान विभिन्न राज्यों ने श्रमिक हित में लागू की गई कल्याणकारी योजनाओं, श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों और नए नवाचारों के अनुभवों को साझा किया। साथ ही निर्माण श्रमिकों तक सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का अधिकतम लाभ पहुंचाने और उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए भविष्य की रणनीतियों पर रणनीति तैयार की जा रही है। यह आयोजन देश के निर्माण श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और सुलभ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

    विवाह-तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और लिव-इन संबंधों पर हुई चर्चा; आदिवासी परंपराओं के संरक्षण से लेकर लैंगिक समानता तक उठे मुद्दे

    रायपुर । छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) के संभावित क्रियान्वयन को लेकर राज्य स्तर पर गठित उच्च स्तरीय समिति की दो दिवसीय परामर्श बैठक में विभिन्न सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों, अधिवक्ताओं, चिकित्सा क्षेत्र के प्रतिनिधियों और राज्य आयोगों के सदस्यों के साथ व्यापक चर्चा की गई। पुराना सर्किट हाउस के सभाकक्ष में आयोजित बैठक में विवाह एवं तलाक, उत्तराधिकार एवं विरासत, भरण-पोषण और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील विषयों पर विभिन्न पक्षों से सुझाव आमंत्रित किए गए।

    समिति के सदस्य एवं भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी एम.के. राउत की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में समिति के सदस्य एवं वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार भी उपस्थित रहे। प्रारंभ में पीपीटी के माध्यम से समान नागरिक संहिता से संबंधित वर्तमान नियमों और कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई। इसके बाद विभिन्न सामाजिक एवं सामुदायिक प्रतिनिधियों के साथ विषयवार चर्चा की गई।

    आदिवासी परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण की मांग

    बैठक में गोंडी धर्म संस्कृति संरक्षण समिति के प्रांतीय सचिव गजानंद नुरूटी ने आदिवासी समाज की रूढ़िगत परंपराओं और विशिष्ट सांस्कृतिक ताने-बाने के संरक्षण का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आदिवासी समुदाय की मौलिक पहचान, परंपराओं और अधिकारों को सुरक्षित रखने की आवश्यकता बताते हुए उन्हें समान नागरिक संहिता के दायरे से पृथक रखने का औपचारिक अनुरोध समिति के समक्ष रखा।

    लैंगिक समानता और समान उत्तराधिकार पर जोर

    राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत सिंह छाबड़ा ने समाज में लैंगिक समानता को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने महिला और पुरुष को समान अधिकार देने तथा बेटे और बेटी को संपत्ति में बराबर उत्तराधिकार का अधिकार सुनिश्चित करने का सुझाव दिया।

    उन्होंने विवाह एवं तलाक के अनिवार्य पंजीयन, संपत्ति और वसीयत से जुड़े प्रावधानों को स्पष्ट बनाने तथा कानूनी व्यवस्था में पारदर्शिता और समानता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

    ईसाई समाज ने विवाह संस्था और लिव-इन संबंधों पर रखी राय

    क्रिश्चियन समाज के राजेश जॉन पाल सहित प्रतिनिधियों ने विवाह संस्था को लेकर अपने विचार समिति के समक्ष रखे। उन्होंने कहा कि उनके समाज में विवाह को ईश्वर द्वारा बनाई गई अटूट जोड़ी के रूप में माना जाता है। प्रतिनिधियों ने लिव-इन संबंधों को सामाजिक रूप से स्वीकार्य नहीं मानने संबंधी अपनी राय भी समिति के सामने रखी।

    बच्चों के अधिकार और सामाजिक सुरक्षा पर भी चर्चा

    बैठक में राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा ने बच्चों के अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे। उन्होंने समान नागरिक संहिता के संदर्भ में बच्चों के हितों और उनके संरक्षण से जुड़े विषयों को महत्वपूर्ण बताया।

    समिति के सदस्यों ने विभिन्न प्रतिनिधियों द्वारा प्रस्तुत सुझावों को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुना। समिति ने कहा कि अलग-अलग सामाजिक समूहों से प्राप्त सुझावों, व्यावहारिक अनुभवों और महत्वपूर्ण तथ्यों का गहन विश्लेषण किया जाएगा, ताकि आगे तैयार होने वाला मसौदा समावेशी, संतुलित और निष्पक्ष हो।

    कानूनी प्रावधानों को स्पष्ट और पारदर्शी बनाने पर जोर

    बैठक में अधिवक्ता संघ के वरिष्ठ अधिवक्ता बृजेश पांडेय, अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष दिनेश देवांगन, अधिवक्ता परिषद के अध्यक्ष प्रमोद तिवारी तथा वरिष्ठ उपाध्यक्ष भारती राठौर ने भी अपने सुझाव दिए। उन्होंने समान नागरिक संहिता के प्रावधानों को अधिक कारगर, स्पष्ट और पारदर्शी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

    बैठक के द्वितीय सत्र में कान्यकुब्ज ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष डॉ. सुरेश मिश्रा और आशीष बाजपेयी ने समान नागरिक संहिता को लेकर अपने विचार एवं अभिमत समिति के समक्ष दर्ज कराए।

    इसी क्रम में मेडिकल एसोसिएशन के प्रतिनिधि डॉ. कुलदीप सोलंकी, डॉ. सुरभि दुबे और डॉ. के.पी. आजमानी ने भी समान नागरिक संहिता के क्रियान्वयन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपनी राय रखी और समिति को सुझाव दिए।

    सभी पक्षों की राय को शामिल करने की कवायद

    दो दिनों तक चली इस परामर्श प्रक्रिया से स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता को लेकर समिति विभिन्न सामाजिक वर्गों और समुदायों की राय को व्यापक स्तर पर सामने लाने का प्रयास कर रही है। विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और पारिवारिक कानूनों से जुड़े प्रावधानों के साथ-साथ सांस्कृतिक विविधता, आदिवासी परंपराओं, महिलाओं के अधिकार, बच्चों की सुरक्षा और सामाजिक मान्यताओं जैसे मुद्दे भी चर्चा के केंद्र में रहे।

    शिवराज सिंह चौहान बोले—प्रतिदिन 1600 से अधिक आवास हो रहे पूर्ण; मुख्यमंत्री साय ने कहा—कोई पात्र गरीब परिवार पक्के घर से नहीं रहेगा वंचित

    रायपुर । छत्तीसगढ़ में गरीब और जरूरतमंद परिवारों के पक्के मकान के सपने को साकार करने की दिशा में शुक्रवार को एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ी। सक्ती में आयोजित प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के राज्यस्तरीय गृह प्रवेश समारोह में 2 लाख नवनिर्मित आवासों में हितग्राही परिवारों का गृह प्रवेश कराया गया। केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मौजूदगी में हितग्राहियों को प्रतीकात्मक रूप से नए घरों की चाबी सौंपी गई।

    समारोह में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने छत्तीसगढ़ को प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के 3.65 लाख अतिरिक्त आवासों की बड़ी सौगात दी। उन्होंने नवगठित सक्ती जिले में कृषि विज्ञान केंद्र की स्थापना की घोषणा की। साथ ही बस्तर संभाग में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के सर्वे की समय-सीमा बढ़ाकर 31 अक्टूबर 2026 तक करने का ऐलान किया। अतिरिक्त आवासों की स्वीकृति संबंधी पत्र केंद्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को सौंपा।

    छत्तीसगढ़ में हर दिन 1600 से ज्यादा पीएम आवास पूरे हो रहे : चौहान

    केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार गरीबों, किसानों, महिलाओं और ग्रामीण परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए लगातार काम कर रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण इसी संकल्प को धरातल पर उतारने वाली महत्वपूर्ण योजना है।

    उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में आवास निर्माण का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है और प्रतिदिन 1600 से अधिक आवास पूर्ण किए जा रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की सराहना करते हुए कहा कि दोनों सरकारों के समन्वित प्रयासों से प्रदेश के विकास को नई गति मिली है।

    चौहान ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में केवल पक्के मकान ही नहीं, बल्कि सड़क, पेयजल, स्वच्छता, स्वास्थ्य और आजीविका जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी विस्तार किया जा रहा है। पीएम आवास योजना के हितग्राहियों को उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, मुफ्त राशन, स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं का भी लाभ मिल रहा है।

    सक्ती में खुलेगा कृषि विज्ञान केंद्र

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ कृषि की अपार संभावनाओं वाला राज्य है। प्रदेश धान उत्पादन के साथ अब सब्जी उत्पादन के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। किसानों की आय बढ़ाने, आधुनिक कृषि तकनीक को बढ़ावा देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर काम कर रही हैं।

    सक्ती में कृषि विज्ञान केंद्र की स्थापना से क्षेत्र के किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, उन्नत खेती, फसल विविधीकरण और वैज्ञानिक मार्गदर्शन स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होगा।

    गरीब का पक्का घर सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्यमंत्री साय

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि गरीब परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में ही 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति देकर अपनी प्राथमिकता स्पष्ट कर दी थी।

    उन्होंने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश में 11.50 लाख से अधिक प्रधानमंत्री आवास पूर्ण किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेश का कोई भी पात्र गरीब परिवार पक्के मकान से वंचित न रहे।

    उन्होंने बताया कि आवास सर्वे-2011 और आवास प्लस सर्वे के अंतर्गत आवासों के लक्ष्य की स्वीकृति मिल चुकी है। अब आवास प्लस-प्लस सर्वे में शामिल शेष पात्र परिवारों के लिए भी आवास स्वीकृत करने का अनुरोध केंद्र सरकार से किया गया है।

    13.85 लाख महिलाएं बनीं लखपति दीदी

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और बिहान के माध्यम से महिलाओं को आजीविका के नए अवसर मिल रहे हैं। प्रदेश में अब तक 13 लाख 85 हजार महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं।

    उन्होंने कहा कि यह महिलाओं की मेहनत, आत्मविश्वास और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में हो रहे बदलाव का प्रमाण है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की लगभग 70 लाख माताओं-बहनों को लाभ मिल रहा है और अब तक 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि उनके खातों में अंतरित की जा चुकी है।

    मुख्यमंत्री ने नागरिकों से मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 और सेवा सेतु पोर्टल का अधिक से अधिक लाभ लेने की अपील की। उन्होंने बताया कि बिजली बिल समाधान योजना के अंतर्गत अब तक 750 करोड़ रुपये से अधिक के बकाया बिजली बिल माफ किए जा चुके हैं।

    ग्रामीण विकास के कई नए अभियानों का शुभारंभ

    कार्यक्रम में 2 लाख आवासों के गृह प्रवेश के साथ ग्रामीण विकास से जुड़े कई अभियानों और नवाचारों की शुरुआत की गई। मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत एआई आधारित जियो-टैग सत्यापन का शुभारंभ हुआ।

    विकसित भारत-जी राम जी के अंतर्गत ‘धार अपार’ और ‘सुघ्घर बाड़ी’ अभियान शुरू किए गए। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत 270 नवीन इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टरों का विमोचन किया गया। वहीं इन्क्यूबेशन प्रोग्राम ‘अथ उद्यमिता की ओर’ के तहत चैलेंज फंड इवेंट का भी शुभारंभ हुआ।

    इस अवसर पर आजीविका के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली लखपति दीदियों और डीलर दीदियों तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास में उल्लेखनीय कार्य करने वाली पंचायतों के प्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया।

    अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा योजनाओं का लाभ : तोखन साहू

    केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का अंत्योदय का चिंतन सरकार के लिए मार्गदर्शक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में गरीब, किसान, महिला और समाज के अंतिम व्यक्ति के कल्याण के लिए योजनाएं संचालित की जा रही हैं।

    उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से गांवों में बुनियादी सुविधाओं के साथ रोजगार और आजीविका के अवसर भी बढ़ रहे हैं।

    नक्सल प्रभावित और आत्मसमर्पित परिवारों के आवास की भी चिंता : विजय शर्मा

    उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि प्रदेश में सरकार बनने के बाद अब तक 11.50 लाख से अधिक प्रधानमंत्री आवास पूर्ण किए जा चुके हैं। सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि कोई भी पात्र परिवार पक्के आवास से वंचित न रहे। नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों और आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटे लोगों के आवास की भी चिंता की जा रही है।

    उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास केवल आवास निर्माण तक सीमित नहीं है। गांवों में शिक्षा, स्वच्छता और अन्य बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है। 26 जनवरी 2027 तक प्रदेश के प्रत्येक विद्यालय में बालिका शौचालय की सुविधा सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है।

    उप मुख्यमंत्री ने बताया कि पंचायतों में कराए जा रहे विकास कार्यों पर बारकोड लगाया जा रहा है। नागरिक बारकोड स्कैन कर संबंधित विकास कार्य की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इससे ग्रामीण विकास कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी तथा आम नागरिक भी निगरानी में सहभागी बनेंगे।

    कार्यक्रम के अंत में जिले के प्रभारी मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती द्रौपती कीर्तन चंद्रा सहित जनप्रतिनिधि, पंचायत पदाधिकारी, लखपति दीदियां, प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राही और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

    सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और ग्रामीण अधोसंरचना से जुड़े विकास कार्यों से क्षेत्र में बढ़ेंगी सुविधाएं

    रायपुर / केंद्रीय ग्रामीण विकास, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज सक्ती जिले के ग्राम जेठा में आयोजित कार्यक्रम में जिले को लगभग 122 करोड़ रुपए के विभिन्न विकास कार्यों की सौगात दी। दोनों अतिथियों ने 121 करोड़ 70 लाख रुपए से अधिक की लागत के कुल 38 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया।

    इनमें लगभग 79.25 करोड़ रुपए की लागत के 23 विकास कार्यों का भूमिपूजन तथा लगभग 42.46 करोड़ रुपए की लागत के 15 विकास कार्यों का लोकार्पण शामिल है। इन कार्यों से जिले में सड़क संपर्क के विस्तार के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, प्रशासनिक और ग्रामीण अधोसंरचना को मजबूती मिलेगी।

    भूमिपूजन किए गए प्रमुख कार्यों में लगभग 25.82 करोड़ रुपए की लागत से देवरघटा, बरतुंगा, तुलसीडीह, अण्डा, चरौदा होते हुए सपिया नहरपार तक 22 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण तथा लगभग 15.30 करोड़ रुपए की लागत से छुहीपाली से कटेकोनी बड़े-कर्राखई-ठाकुरपाली होते हुए सेमराडीह तक 12 किलोमीटर सड़क का चौड़ीकरण एवं नवीनीकरण शामिल है। इसके साथ ही अण्डी-किरकार-जगमहन से सातबहिनिया तक सड़क, नगझर-नवापारा मार्ग और गुरेराडीह किरारी से केसला मुख्य मार्ग सहित विभिन्न सड़क परियोजनाओं का भूमिपूजन किया गया।

    शिक्षा और युवाओं के लिए शासकीय कन्या महाविद्यालय सक्ती के नवीन भवन, बेदराम शासकीय महाविद्यालय मालखरौदा में अतिरिक्त भवन तथा नवीन लाइवलीहुड संस्थान भवन का भूमिपूजन किया गया। स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए विभिन्न ग्रामों में उप स्वास्थ्य केंद्र भवन तथा महिलाओं के लिए महतारी सदनों के निर्माण कार्यों की भी आधारशिला रखी गई।

    लोकार्पित प्रमुख कार्यों में लगभग 14.35 करोड़ रुपए की लागत से मालखरौदा क्षेत्र में कलमी नहरपार से चिखली, छोटेकोट, बड़ेकोट, सिंघरा होते हुए बेल्हाडीह तक सड़क तथा लगभग 11.35 करोड़ रुपए की लागत से देवरघटा से कठरापाली, निमोही, सिंघीतराई, बेनीपाली होते हुए ओड़ेकेरा मुख्य मार्ग तक पुल-पुलिया सहित सड़क निर्माण शामिल है। बुंदेली-अड़भार मार्ग का भी लोकार्पण किया गया।

    इसके अलावा जल जीवन मिशन के अंतर्गत स्थापित सोलर ड्यूल पंप, चन्द्रपुर एवं हसौद के नवीन तहसील कार्यालय भवन, डभरा, चन्द्रपुर एवं जैजैपुर के नवीन पुलिस थाना भवन, अड़भार पुलिस चौकी भवन, सुलौनी हाईस्कूल भवन, गोपालपुर प्रशिक्षण भवन तथा गोबरा में महतारी सदन सहित अन्य विकास कार्य जनता को समर्पित किए गए।

    इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े सहित जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

    बेमेतरा, जशपुर, डोंगरगढ़ और कांकेर में सहेजे जाएंगे तालाब, पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण और भूजल संवर्धन को मिलेगी मजबूती
    शहरी क्षेत्रों को स्वच्छ, हरित और जल-सुरक्षित बनाने सरकार प्रतिबद्ध – उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव

    रायपुर / नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने राज्य के 4 शहरों में तालाबों के पुनर्जीवन के लिए 22 करोड़ 18 लाख रुपए मंजूर किए हैं। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन मंत्री श्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद नगरीय क्षेत्रों में जल संरक्षण और पारंपरिक जल स्रोतों को सहेजने मिशन अमृत 2.0 के तहत बेमेतरा, जशपुर, डोंगरगढ़ और कांकेर के लिए यह राशि स्वीकृत की गई है। राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) द्वारा चारों शहरों में इन कार्यों के लिए आज प्रशासकीय स्वीकृति जारी कर दी गई है।

    राज्य शासन द्वारा शहरों में तालाबों को पुनर्जीवित करने और उनके जीर्णोद्धार के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में मिशन अमृत 2.0 के वॉटर बॉडी रिज्यूविनेशन घटक के अंतर्गत 4 शहरों के लिए कुल 22 करोड़ 18 लाख रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई है। सूडा द्वारा स्वीकृत इन परियोजनाओं से शहरों के पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने, जल संरक्षण को बढ़ावा देने और भूजल संवर्धन की मजबूती के काम किए जाएंगे।

    मिशन अमृत (अटल शहरी नवीकरण एवं परिवर्तन मिशन) 2.0 के तहत सूडा द्वारा जशपुर नगर पालिका के वार्ड क्रमांक-9 में सती तालाब के पुनर्जीवन के लिए 4 करोड़ 17 लाख रुपए, कांकेर नगर पालिका के वार्ड क्रमांक-19, अघननगर में दुधावा तालाब के लिए 5 करोड़ 4 लाख रुपए, अहिवारा नगर पालिका में छटवा तालाब के लिए 9 करोड़ 60 लाख रुपए तथा डोंगरगढ़ नगर पालिका में सिंघोला बांधा तालाब के पुनर्जीवन के लिए 3 करोड़ 38 लाख रुपए मंजूर किए गए हैं। स्वीकृत राशि में इन परियोजनाओं के 5 वर्षों के संचालन एवं संधारण (O&M) के प्रावधान भी शामिल है। इनके निर्माण कार्यों की निगरानी भारत सरकार द्वारा नियुक्त थर्ड पार्टी इंडिपेंडेंट रिव्यू एंड मॉनिटरिंग एजेंसी (IRMA) द्वारा की जाएगी।

    चारों कार्यों में गुणवत्ता, पारदर्शिता और समय-सीमा का कड़ाई से पालन करने के निर्देश

    उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव ने चारों निकायों में कार्यों में गुणवत्ता, पारदर्शिता और समय-सीमा का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ सरकार शहरी क्षेत्रों को स्वच्छ, हरित और जल-सुरक्षित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। 'अमृत मिशन 2.0' का मुख्य उद्देश्य हमारे पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करना और नगरीय निकायों को आत्मनिर्भर बनाना है। अहिवारा, कांकेर, जशपुरनगर और डोंगरगढ़ में स्वीकृत ये 4 परियोजनाएं न केवल हमारे प्राकृतिक जल निकायों का अस्तित्व बचाएंगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा की मजबूत नींव रखेंगी।

    जल स्रोतों के संरक्षण और भूजल संवर्धन को मिलेगी मजबूती

    नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने बताया कि मिशन अमृत 2.0 के माध्यम से प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। तालाब केवल जल संग्रहण के साधन नहीं हैं, बल्कि वे शहरों के पर्यावरणीय संतुलन और भूजल स्तर को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। श्री बोरा ने कहा कि इन तालाबों के पुनर्जीवन से जल संरक्षण और भूजल संवर्धन को मजबूती मिलेगी तथा नगरीय क्षेत्रों में नागरिक सुविधाओं और पर्यावरणीय गुणवत्ता में भी सुधार आएगा। उन्होंने चारों निकायों को सभी कार्यों को निर्धारित मापदंडों और स्वीकृत प्राक्कलन के अनुसार सुनिश्चित करने को कहा है।

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