November 02, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    जगदलपुर में राष्ट्रपति का संदेश—जनजातीय समाज की प्रकृति-पोषक जीवनशैली से सीखें; समावेशी विकास और विकसित भारत के लक्ष्य पर दिया जोर

    जगदलपुर। शौर्यपथ। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को बस्तर दशहरा के अवसर पर जगदलपुर में आयोजित सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल हुईं। इस दौरान उन्होंने बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं, जनजातीय समाज की प्रकृति के प्रति संवेदनशील जीवनशैली और सामूहिक सहभागिता की सराहना करते हुए कहा कि जनजातीय समुदाय की प्रकृति-पोषक जीवन पद्धति से सभी को मूल्यवान शिक्षा ग्रहण करनी चाहिए।

    राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में बस्तर दशहरा को छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक गौरव और सामूहिक आस्था का जीवंत प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि इस उत्सव में समाज के विभिन्न वर्गों की व्यापक सहभागिता और लोगों को आत्मीयता से जोड़ने वाले अनुष्ठान इसे विशिष्ट पहचान प्रदान करते हैं। बस्तर दशहरा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकजुटता का भी प्रतीक है।

    जनजातीय जीवनशैली में प्रकृति संरक्षण का संदेश

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि जनजातीय समुदाय प्रकृति को जीवनदायिनी मानते हुए उसकी पूजा और संरक्षण की परंपरा का पालन करते हैं। विकास की यात्रा में समाज को इस जीवन पद्धति से उपयोगी सीख लेनी चाहिए। उन्होंने प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि विकास के साथ पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी भी आवश्यक है।

    उनका संदेश ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है। जनजातीय समाज की पारंपरिक जीवनशैली प्राकृतिक संसाधनों के महत्व और उनके संरक्षण की आवश्यकता को समझने का अवसर प्रदान करती है।

    नक्सलवाद से आगे बढ़ते बस्तर में विकास की उम्मीद

    राष्ट्रपति ने छत्तीसगढ़ में लंबे समय तक नक्सलवाद के कारण उत्पन्न चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों से क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव आए हैं और बस्तर अब प्रगति की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

    उन्होंने जनजातीय उद्यमियों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने और उन्हें बाजार से जोड़ने की पहलों पर प्रसन्नता व्यक्त की। राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि ऐसे प्रयास जनजातीय समुदायों की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने और समतामूलक एवं समावेशी विकास को गति देने में सहायक होंगे। उन्होंने इन पहलों को वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य से भी जोड़ा।

    मां दंतेश्वरी मंदिर में दर्शन, मुरिया दरबार में संवाद

    सार्वजनिक कार्यक्रम से पहले राष्ट्रपति ने जगदलपुर स्थित मां दंतेश्वरी मंदिर में दर्शन कर पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने मुरिया दरबार में स्थानीय मांझी और चालकी समुदाय के प्रतिनिधियों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था और जनजातीय समाज से जुड़े लोगों के साथ संवाद किया।

    राष्ट्रपति ने जगदलपुर में आयोजित रंगोली और दशहरा प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। बस्तर दशहरा के अवसर पर उनका यह दौरा क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत, जनजातीय परंपराओं, प्रकृति संरक्षण और समावेशी विकास के महत्व को रेखांकित करने वाला रहा।

    रायपुर-धनबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर के तहत जिले से गुजरेगी 104 किलोमीटर फोरलेन सड़क; व्यापार, पर्यटन, कृषि और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

    रायपुर। शौर्यपथ। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रयासों से जशपुर जिले में सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में भारतमाला परियोजना के अंतर्गत रायपुर-धनबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर महत्वपूर्ण साबित होने की उम्मीद है। लगभग 3147 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना के तहत करीब 104 किलोमीटर फोरलेन सड़क जशपुर जिले से होकर गुजरेगी। इससे जिले का रायपुर सहित बिलासपुर, कोरबा और पड़ोसी राज्य झारखंड से सड़क संपर्क बेहतर होने की संभावना है।

    लगभग 707 किलोमीटर लंबे इस इकोनॉमिक कॉरिडोर का उद्देश्य लंबी दूरी के आवागमन और माल परिवहन को सुगम बनाना है। परियोजना पूरी होने पर जशपुर और पत्थलगांव सहित आसपास के क्षेत्रों को बेहतर सड़क नेटवर्क का लाभ मिल सकता है। राजधानी रायपुर तक यात्रा का समय घटकर 5 से 6 घंटे होने की उम्मीद जताई जा रही है, हालांकि वास्तविक समय मार्ग और यातायात की स्थिति पर निर्भर करेगा।

    व्यापार और किसानों को मिलेगा लाभ

    बेहतर सड़क संपर्क से जशपुर के किसानों को कृषि उपज, सब्जियां और उद्यानिकी उत्पाद बड़े बाजारों तक पहुंचाने में सुविधा मिलने की संभावना है। वनोपज, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों के परिवहन में सुधार से व्यापारिक गतिविधियों तथा छोटे उद्यमों को भी बढ़ावा मिल सकता है। निर्माण और परिवहन क्षेत्र में रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर विकसित होने की उम्मीद है।

    पर्यटन को मिलेगी नई गति

    प्राकृतिक सौंदर्य और जनजातीय संस्कृति के लिए प्रसिद्ध जशपुर में मयाली नेचर कैंप, मधेश्वर पर्वत, रानीदाह जलप्रपात और कैलाश गुफा जैसे पर्यटन स्थलों की पहचान है। बेहतर सड़क नेटवर्क से पर्यटकों की आवाजाही आसान हो सकती है। इससे होटल, होमस्टे, स्थानीय परिवहन, खानपान और हस्तशिल्प से जुड़े व्यवसायों को लाभ मिलने की संभावना है।

    आधुनिक सड़क संरचनाओं से बेहतर कनेक्टिविटी

    कॉरिडोर में यातायात को सुचारु बनाने के लिए विभिन्न स्थानों पर अंडरपास और अन्य आधुनिक सड़क संरचनाओं का प्रावधान किया जा रहा है। वन्यजीवों की आवाजाही के अनुकूल संरचनाएं भी पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण होंगी। इन सुविधाओं से स्थानीय आवागमन और लंबी दूरी के परिवहन को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

    रेल संपर्क और ग्रामीण सड़कों पर भी जोर

    जशपुर जिले में सड़क नेटवर्क के साथ रेल संपर्क की संभावनाओं पर भी काम आगे बढ़ाने की पहल की जा रही है। लोहरदगा से धरमजयगढ़ तक प्रस्तावित रेल लाइन से संबंधित जानकारी केंद्रीय राजपत्र में प्रकाशित होने का उल्लेख किया गया है। इसके अतिरिक्त कटनी-गुमला राष्ट्रीय राजमार्ग, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और राज्य की सड़कों के विकास से भी जिले की कनेक्टिविटी मजबूत करने के प्रयास जारी हैं।

    भारतमाला परियोजना के पूर्ण होने पर जशपुर के दूरस्थ ग्रामीण और जनजातीय अंचलों को प्रमुख आर्थिक केंद्रों से जोड़ने में मदद मिलने की उम्मीद है। बेहतर परिवहन सुविधाएं व्यापार, कृषि, पर्यटन और स्थानीय आजीविका के विस्तार का आधार बन सकती हैं।

    दो गोल की बढ़त के बाद मैनपाट को बैलाडिला ने रोका; प्रहलाद बने ‘स्ट्राइकर ऑफ द मैच’, करण धनुक को मिला ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ सम्मान

    रायपुर, 23 अक्टूबर। शौर्यपथ। छत्तीसगढ़ हॉकी लीग के दूसरे दिन मैनपाट टाइटन्स और बैलाडिला बुल्स के बीच खेला गया मुकाबला रोमांचक संघर्ष के बाद 3-3 से ड्रॉ रहा। ओलंपियन प्रदीप मोर की टीम मैनपाट टाइटन्स ने शुरुआती दो क्वार्टर में दबदबा बनाते हुए 2-0 की बढ़त हासिल की, लेकिन ओलंपियन चिंगलेनसाना सिंह की टीम बैलाडिला बुल्स ने शानदार वापसी करते हुए मुकाबले को बराबरी पर ला दिया।

    शानदार प्रदर्शन के लिए प्रहलाद को ‘स्ट्राइकर ऑफ द मैच’ और करण धनुक को ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ का पुरस्कार दिया गया।

    शुरुआती बढ़त से मैनपाट का दबदबा

    मुकाबले की शुरुआत से ही दोनों टीमों ने आक्रामक खेल दिखाया। सातवें मिनट में मैनपाट टाइटन्स के प्रहलाद टांडी को सर्कल के भीतर गोल करने का अच्छा अवसर मिला, लेकिन बैलाडिला के गोलकीपर ने शानदार बचाव कर दिया। इसके बाद बैलाडिला को पेनल्टी कॉर्नर मिला, जिसे संदीप ठाकुर ने गोल में बदलकर टीम को बढ़त दिलाई।

    दूसरे क्वार्टर में मैनपाट ने वापसी की। हाफ टाइम से कुछ मिनट पहले प्रहलाद के शानदार मूव के बाद प्रवीण यादव ने गेंद को गोल में डिफ्लेक्ट कर स्कोर बराबर किया। इसके बाद मैनपाट ने दूसरा गोल दागते हुए हाफ टाइम तक 2-0 की बढ़त बना ली।

    बैलाडिला की वापसी, मुकाबला हुआ बराबर

    दो गोल से पिछड़ने के बाद बैलाडिला बुल्स ने आक्रामक रुख अपनाया और मैनपाट के डिफेंस पर लगातार दबाव बनाया। जसकरण सिंह ने सर्कल के भीतर से गेंद राहुल यादव की ओर बढ़ाई, जिसे राहुल ने गोल में बदलकर अंतर कम कर दिया।

    चौथे क्वार्टर की शुरुआत में जसकरण सिंह ने पेनल्टी कॉर्नर पर गोल दागकर स्कोर 2-2 कर दिया। इसके बाद दोनों टीमों के बीच मुकाबला और रोमांचक हो गया। मैनपाट के प्रहलाद ने शानदार रिवर्स फ्लिक से गोल कर अपनी टीम को फिर बढ़त दिलाई।

    अंतिम क्षणों में बैलाडिला ने बचाया मुकाबला

    मैच के अंतिम दौर में बैलाडिला बुल्स ने हार नहीं मानी। पेनल्टी कॉर्नर के रिबाउंड पर निहाल हुसैन अंसारी ने गोल दागकर स्कोर 3-3 कर दिया। इसके बाद कोई टीम निर्णायक बढ़त हासिल नहीं कर सकी और मुकाबला ड्रॉ पर समाप्त हुआ।

    मैच में मैनपाट टाइटन्स की शुरुआती आक्रामकता और बैलाडिला बुल्स की शानदार वापसी ने दर्शकों को रोमांचक हॉकी का अनुभव कराया। दो गोल से पिछड़ने के बावजूद बराबरी हासिल करना बैलाडिला के संघर्ष और टीमवर्क का अहम उदाहरण रहा।

    दुलदुला में तीन हितग्राहियों से 2.40 लाख रुपये लेने और मकान अधूरे छोड़ने की शिकायत

    रायपुर। शौर्यपथ। प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के हितग्राहियों से कथित धोखाधड़ी के मामले में कबीरधाम जिले के बोड़ला विकासखंड अंतर्गत ग्राम दुलदुला के ठेकेदार शेख निजामुद्दिन उर्फ निक्की खान के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा के निर्देश पर ऐसी शिकायतों में कार्रवाई जारी है।

    शिकायत के अनुसार, हितग्राही राजिम धुर्वे, उनके भाई सोनेलाल धुर्वे और पड़ोसी छिरवैया धुर्वे से आवास निर्माण के नाम पर 80-80 हजार रुपये, कुल 2.40 लाख रुपये लिए गए, लेकिन मकान पूरे नहीं किए गए और राशि भी वापस नहीं लौटाई गई। इस मामले में थाना चिल्फी में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत अपराध दर्ज किया गया है।

    अब तक तीन ठेकेदारों पर कार्रवाई

    कबीरधाम जिले में इससे पहले ग्राम आमानारा के हितग्राही बैसाखू बैगा की शिकायत पर ठेकेदार तुमेश गोड़ के खिलाफ थाना तरेगांव जंगल तथा ग्राम राजाढ़ार के हितग्राही देवसिंह की शिकायत पर ठेकेदार कुमार मेरावी के खिलाफ थाना चिल्फी में FIR दर्ज की गई थी।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, तीनों मामलों में कुल 7.49 लाख रुपये की कथित ठगी के आरोप हैं।

    उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने स्पष्ट किया है कि जरूरतमंद परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराना शासन की प्राथमिकता है और आवास निर्माण के नाम पर हितग्राहियों के साथ धोखाधड़ी करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। मामलों में आरोपों की पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया के तहत होगी।

     

    सांसद संतोष पांडेय और महापौर मधुसूदन यादव होंगे शामिल, मूर्ति अनावरण एवं विमोचन कार्यक्रम भी होगा

    राजनांदगांव/शौर्यपथ। छत्तीसगढ़ राजपूत महासभा द्वारा राजनांदगांव में विशाल कार एवं बाइक रैली का आयोजन किया जाएगा। रैली में राजपूत समाज के विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी, युवा कार्यकर्ता एवं सामाजिक बंधु बड़ी संख्या में शामिल होंगे। आयोजन को लेकर समाज के लोगों में उत्साह है।

    0 विभिन्न सामाजिक संगठनों की रहेगी सहभागिता

    रैली में छत्रिय कल्याण संघ, भिलाई बेस समाज, छत्री करणी सेना, सर्व छत्रिय महासंघ सहित राजपूत समाज के विभिन्न संगठनों के सदस्य शामिल होंगे। इसके साथ ही कवर्धा, बिलासपुर, दुर्ग, भिलाई और बालोद सहित विभिन्न जिलों से सामाजिक कार्यकारिणी के सदस्य एवं पदाधिकारी भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। आयोजन का उद्देश्य समाज की एकजुटता और सामाजिक समरसता को मजबूत करना है।

    0 विधानसभा अध्यक्ष के बंगले के पास से निकलेगी रैली

    आयोजकों के अनुसार, विशाल कार एवं बाइक रैली विधानसभा अध्यक्ष के बंगले के समीप से प्रारंभ होकर शहर के विभिन्न मार्गों और प्रमुख चौराहों से होते हुए ठाकुर लोटन सिंह स्मृति भवन स्थित महाराणा प्रताप भवन पहुंचेगी। यहीं रैली का समापन होगा। कार्यक्रम में राजनांदगांव के सांसद संतोष पांडेय और महापौर मधुसूदन यादव भी शामिल होंगे।

    0 मूर्ति अनावरण एवं विमोचन

    कार्यक्रम रैली के समापन के बाद महाराणा प्रताप भवन में मूर्ति अनावरण एवं विमोचन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर समाज के वरिष्ठजन, युवा प्रतिनिधि और विभिन्न जिलों से पहुंचे पदाधिकारी उपस्थित रहेंगे। प्रेसवार्ता में पदाधिकारी रहे उपस्थित आयोजन की जानकारी देने के लिए आयोजित प्रेसवार्ता में समाज के अध्यक्ष विश्व बहादुर राजपूत, युवा संगठन अध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह, विशाल सिंह, आदर्श ठाकुर, फतेंद्र सिंह, रामनारायण सिंह, सतीश सिंह और हर्षवर्धन सिंह सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

    कुम्हड़ाकोट से ससम्मान वापस लाया गया आठ चक्कों वाला विशाल विजय रथ, नवाखानी की रस्म के साथ संपन्न हुई बाहर रैनी

    जगदलपुर, शौर्यपथ। विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरे में सदियों पुरानी परंपराओं, जनजातीय आस्था और सामाजिक समरसता का अनूठा संगम एक बार फिर देखने को मिला। भीतर रैनी के बाद निभाई जाने वाली बाहर रैनी की रस्म गुरुवार को पारंपरिक रीति-रिवाजों और उत्साह के साथ संपन्न हुई। इस अवसर पर कुम्हड़ाकोट में छिपाए गए आठ चक्कों वाले विशाल विजय रथ को मान-मनौव्वल और पारंपरिक रस्मों के बाद ससम्मान वापस लाया गया।

    रूठे ग्रामीणों को मनाने पहुंचे राजपरिवार के सदस्य

    बस्तर दशहरे की विशिष्ट परंपरा के अनुसार, भीतर रैनी की रस्म पूरी होने के बाद बुधवार को माड़िया जनजाति के लोगों ने विशाल विजय रथ को खींचकर लालबाग स्थित कुम्हड़ाकोट के जंगलों में पहुंचा दिया था। रथ को प्रतीकात्मक रूप से छिपाने की यह परंपरा बस्तर की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान है, जिसमें राजा और प्रजा के बीच आत्मीय संबंध, संवाद और मान-मनौव्वल का भाव समाहित है।

    गुरुवार को बाहर रैनी की रस्म के दौरान बस्तर राजपरिवार के सदस्य रथ को वापस लाने के लिए कुम्हड़ाकोट पहुंचे। यहां उन्होंने माड़िया समाज के लोगों और ग्रामीणों के साथ बैठकर पारंपरिक रीति से संवाद किया। ग्रामीणों की मान-मनौव्वल की गई और आपसी सौहार्द के बीच रथ को वापस लाने का मार्ग प्रशस्त हुआ।

    नवाखानी में दिखी परंपरा और सामाजिक समरसता की झलक

    इस अवसर पर कुम्हड़ाकोट में पारंपरिक नवाखानी का आयोजन भी किया गया। नई फसल के आगमन की खुशी में नए चावल से तैयार खीर का नैवेद्य अर्पित किया गया। इसके बाद राजपरिवार के सदस्य कमलचंद भंजदेव, सांसद एवं बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप, महापौर संजय पाण्डे तथा ग्रामीणों ने एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। इस सामूहिक आयोजन ने बस्तर की लोकपरंपराओं और सामाजिक एकजुटता की विशिष्ट तस्वीर प्रस्तुत की।

    गाजे-बाजे और जयकारों के साथ लौटा विजय रथ

    मान-मनौव्वल और नवाखानी की रस्म पूरी होने के बाद माड़िया समुदाय के लोगों तथा राजपरिवार के सदस्यों ने मिलकर विशाल विजय रथ को वापस लाने की परंपरा निभाई। पारंपरिक गाजे-बाजे और जयकारों के बीच रथ को खींचकर राजमहल के सिंहद्वार तक लाया गया। इसी के साथ बाहर रैनी की महत्वपूर्ण रस्म संपन्न हुई।

    बस्तर दशहरे की यह परंपरा केवल रथ की आवाजाही तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें स्थानीय जनजातीय समाज की भागीदारी, पारस्परिक सम्मान और पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत की झलक मिलती है। यही विशिष्ट परंपराएं बस्तर दशहरे को देश-दुनिया के अन्य उत्सवों से अलग पहचान प्रदान करती हैं।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुरिया दरबार में होंगी शामिल, बस्तर दशहरा प्रदर्शनी का करेंगी अवलोकन; जनजातीय प्रतिनिधियों के साथ करेंगी दोपहर का भोजन

    जगदलपुर, शौर्यपथ। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू शुक्रवार, 23 अक्टूबर को बस्तर प्रवास पर रहेंगी। उनके छत्तीसगढ़ प्रवास का दूसरा दिन बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, परंपराओं, आस्था और ऐतिहासिक विरासत के नाम रहेगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार राष्ट्रपति सुबह 10:30 बजे भारतीय वायुसेना के विशेष विमान से जगदलपुर पहुंचेंगी।

    जगदलपुर पहुंचने के बाद राष्ट्रपति शक्तिपीठ मां दंतेश्वरी मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर देश और बस्तर अंचल की सुख-समृद्धि की कामना करेंगी। बस्तर की आराध्य देवी के दर्शन के पश्चात वे सिरहासार भवन पहुंचेंगी, जहां बस्तर की पारंपरिक लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनजातीय परंपराओं के प्रतीक मुरिया दरबार में शामिल होंगी।

    इसके बाद राष्ट्रपति लालबाग मैदान पहुंचकर बस्तर दशहरा प्रदर्शनी का अवलोकन करेंगी। इस दौरान वे बस्तर की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान, पारंपरिक रीति-रिवाजों और स्थानीय विरासत से रूबरू होंगी। इसके पश्चात आयोजित आमसभा को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करेंगी।

    राष्ट्रपति के इस प्रवास का एक विशेष आकर्षण जनजातीय प्रतिनिधियों के साथ उनका आत्मीय संवाद होगा। जनसभा के बाद वे बस्तर के पारंपरिक जनजातीय प्रतिनिधियों मांझी और चालकी के साथ दोपहर का भोजन करेंगी। इस मुलाकात को बस्तर की जनजातीय परंपराओं और देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद के बीच संवाद के महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है।

    निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, जनजातीय प्रतिनिधियों के साथ भोजन के बाद राष्ट्रपति लालबाग मैदान से जगदलपुर एयरपोर्ट के लिए रवाना होंगी। वहां से विशेष विमान द्वारा रायपुर होते हुए नई दिल्ली के लिए प्रस्थान करेंगी।

    राष्ट्रपति का यह दौरा बस्तर की सांस्कृतिक पहचान, ऐतिहासिक परंपराओं और जनजातीय जीवनशैली को राष्ट्रीय स्तर पर रेखांकित करने के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेगा।

    राष्ट्रपति की बस्तर दशहरा एवं मुरिया दरबार में सहभागिता प्रदेश के लिए गौरव का अवसर : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

    रायपुर / शौर्यपथ / राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के आज रायपुर आगमन पर स्वामी विवेकानंद विमानतल में राज्यपाल श्री रमेन डेका और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आत्मीय स्वागत किया।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने प्रभु श्रीराम के ननिहाल और माता कौशल्या की पावन धरा छत्तीसगढ़ में राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु का समस्त प्रदेशवासियों की ओर से हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐतिहासिक बस्तर दशहरा एवं मुरिया दरबार में राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु की सहभागिता छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का अवसर है। उनकी उपस्थिति से प्रदेश की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं का मान बढ़ेगा तथा विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को नई ऊर्जा मिलेगी। समाचार को बेहतरीन हेड लाइन सहित प्रभावशाली स्वरुप में बनाये

    नवा रायपुर में प्रथम क्षेत्रीय कार्यशाला का शुभारंभ, नगरीय विकास के लिए दो महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर
    रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में शहरों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। शहर केवल आवास और नागरिक सुविधाओं के केंद्र नहीं, बल्कि उद्योग, व्यापार, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के प्रमुख आधार भी हैं। इसलिए छत्तीसगढ़ के शहरों का विकास वर्तमान आवश्यकताओं तक सीमित न रहकर आने वाले दशकों की जरूरतों के अनुरूप सुनियोजित, समावेशी और टिकाऊ होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने यह बात नवा रायपुर स्थित मेफेयर लेक रिजॉर्ट में आयोजित अर्बन चैलेंज फंड (यूसीएफ) एवं अर्बन इन्वेस्ट विंडो (यूआईविन) विषयक प्रथम क्षेत्रीय कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए कही। कार्यशाला का आयोजन आवासन एवं शहरी विकास निगम (हुडको) तथा छत्तीसगढ़ शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में शहरी विकास को नई दिशा और गति मिली है। अर्बन चैलेंज फंड नगरीय निकायों के लिए आधुनिक, सुविधासंपन्न और आर्थिक रूप से सशक्त शहर विकसित करने का महत्वपूर्ण अवसर है। निकायों को इस अवसर का अधिकतम लाभ उठाते हुए ऐसी गुणवत्तापूर्ण परियोजनाएं तैयार करनी चाहिए, जिनसे नागरिकों का जीवन बेहतर हो और शहरों की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले।

    नगरीय विकास के लिए दो महत्वपूर्ण समझौते
    कार्यशाला के दौरान नगरीय विकास, वित्तीय संसाधनों के बेहतर प्रबंधन तथा निकायों की तकनीकी एवं संस्थागत क्षमता बढ़ाने के लिए दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। पहला समझौता हुडको और छत्तीसगढ़ शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के बीच तथा दूसरा नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग और सेप्ट विश्वविद्यालय के बीच हुआ।
    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इन समझौतों से नगरीय निकायों को विकास परियोजनाओं की योजना बनाने, वित्तीय संसाधन जुटाने, तकनीकी विशेषज्ञता हासिल करने और प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास में सहयोग मिलेगा। इससे शहरों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप परियोजनाएं तैयार करने और उन्हें प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद मिलेगी।

    जलभराव और अव्यवस्थित तारों की समस्या का हो स्थायी समाधान
    मुख्यमंत्री ने नगरीय निकायों को निर्देशित किया कि विकास योजनाएं केवल तात्कालिक समस्याओं को ध्यान में रखकर न बनाई जाएं, बल्कि अगले कई दशकों की जरूरतों को भी उनमें शामिल किया जाए। तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच पेयजल, सड़क, बिजली, जल निकासी, स्वच्छता और परिवहन जैसी सुविधाओं के लिए दीर्घकालिक योजना जरूरी है।
    उन्होंने बारिश के दौरान शहरों में होने वाले जलभराव का उल्लेख करते हुए कहा कि नागरिकों को हर साल होने वाली परेशानी का स्थायी समाधान निकाला जाना चाहिए। इसके लिए प्रभावी जल निकासी व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने बिजली और अन्य सेवाओं के अव्यवस्थित तारों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जहां संभव हो, वहां तारों को भूमिगत करने की योजनाएं तैयार की जाएं। साथ ही, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर पेयजल, सड़क, बिजली और स्वच्छता संबंधी कार्यों को समग्र शहरी नियोजन का हिस्सा बनाया जाए।

    एक लाख करोड़ रुपये का अर्बन चैलेंज फंड बड़ा अवसर : अरुण साव
    उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने कहा कि भारत सरकार ने अर्बन चैलेंज फंड के लिए एक लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। यह छत्तीसगढ़ के शहरों के विकास के लिए बड़ा अवसर है। अब नगरीय निकायों के सामने चुनौती है कि वे कितनी गुणवत्तापूर्ण और आर्थिक रूप से व्यवहार्य परियोजनाएं तैयार कर इस फंड का अधिकतम लाभ प्राप्त कर पाते हैं।
    उन्होंने कहा कि बदलती तकनीक और नागरिकों की बढ़ती अपेक्षाओं के अनुरूप नगरीय विकास की कार्यशैली में बदलाव आवश्यक है। परियोजनाओं की सफलता केवल निर्माण तक सीमित नहीं होती, बल्कि उनके संचालन, रखरखाव और वित्तीय व्यवहार्यता की योजना भी शुरुआत से तैयार होनी चाहिए। जनप्रतिनिधियों को ऐसे कार्यों को प्राथमिकता देनी चाहिए, जिनका लाभ आने वाली पीढिय़ों को भी मिले।

    आधुनिक तकनीक और नवाचार से मजबूत होंगे शहर
    केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी, स्वच्छ भारत मिशन और अमृत मिशन जैसी योजनाओं से नागरिक सुविधाओं का विस्तार हुआ है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण आवास, पेयजल, सड़क, परिवहन और स्वच्छता की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में नगरीय निकायों को वित्तीय रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना आवश्यक है।
    उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाएं नागरिकों के लिए उपयोगी होने के साथ आर्थिक रूप से व्यवहार्य भी होनी चाहिए। सरकारी सहायता के अतिरिक्त बैंक वित्तपोषण, बाजार आधारित संसाधनों और सार्वजनिक-निजी भागीदारी जैसे विकल्पों का भी प्रभावी उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने अन्य शहरों में कचरे से ऊर्जा उत्पादन और तकनीक आधारित जल प्रबंधन जैसे नवाचारों का उल्लेख करते हुए छत्तीसगढ़ के निकायों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप सफल प्रयोग अपनाने की सलाह दी।
    मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि कार्यशाला से मिलने वाला तकनीकी मार्गदर्शन और विशेषज्ञों के सुझाव प्रदेश के नगरीय विकास को नई दिशा देंगे। शासन, जनप्रतिनिधियों, नगरीय निकायों और विशेषज्ञ संस्थाओं के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ के शहरों को स्वच्छ, सुंदर, सुव्यवस्थित, सुविधासंपन्न और आत्मनिर्भर बनाया जा सकेगा।
    कार्यशाला में प्रदेश के सभी 14 नगर निगमों के महापौर, नगर पालिकाओं के अध्यक्ष, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, हुडको के सीएमडी संजय कुलश्रेष्ठ, सेप्ट विश्वविद्यालय के प्रेसिडेंट बरजोर मेहता सहित जनप्रतिनिधि, विशेषज्ञ और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

    यपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बिलाईगढ़ स्थित रैनीभाठा में ऐतिहासिक राजशाही दशहरा उत्सव में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने क्षेत्रवासियों को विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हुए पांच महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। इनमें बिलाईगढ़ में अपर कलेक्टर कार्यालय खोलने, बस स्टैंड से हायर सेकेंडरी स्कूल तक 3 करोड़ रुपये की लागत से गौरव पथ निर्माण, राजमहल मार्ग पर पुल, वार्ड क्रमांक 15 में मुक्तिधाम तथा मां समलाई मंदिर के समीप डोम शेड का निर्माण शामिल है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि इन कार्यों से प्रशासनिक सुविधाओं का विस्तार होगा और नागरिकों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं मिलेंगी। अपर कलेक्टर कार्यालय खुलने से लोगों को प्रशासनिक कार्यों के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा, जबकि गौरव पथ से नगर की सुंदरता और आवागमन बेहतर होगा।

    राजशाही दशहरा हमारी सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक
    मुख्यमंत्री ने कहा कि बिलाईगढ़ का ऐतिहासिक राजशाही दशहरा धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता की पहचान है। राजपरिवार ने पीढिय़ों से इस परंपरा को सहेजकर रखा है। उन्होंने आयोजन समिति, राजपरिवार और क्षेत्रवासियों को इस परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए बधाई दी।
    उन्होंने कहा कि विजयादशमी अधर्म पर धर्म, अन्याय पर न्याय और असत्य पर सत्य की विजय का संदेश देती है। पर्व की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब हम अपने भीतर के काम, क्रोध, लोभ, मद और अहंकार रूपी रावण का अंत करें। भगवान श्रीराम के आदर्श हमें मर्यादा, कर्तव्य, न्याय और लोककल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।

    छत्तीसगढ़ से भगवान श्रीराम का गहरा नाता
    मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ माता कौशल्या की जन्मभूमि और प्रभु श्रीराम का ननिहाल है। वनवास के दौरान भगवान श्रीराम ने दंडकारण्य क्षेत्र में लंबा समय बिताया। शिवरीनारायण में माता शबरी की भक्ति और राजिम का त्रिवेणी संगम प्रदेश की आध्यात्मिक विरासत के प्रतीक हैं। उन्होंने बताया कि श्रीरामलला दर्शन योजना के माध्यम से अब तक 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को शासकीय खर्च पर अयोध्या में दर्शन का अवसर मिला है।

    18 लाख गरीब परिवारों को आवास देने का निर्णय
    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार विकास और सुशासन को गति दे रही है। सरकार गठन के अगले ही दिन मंत्रिपरिषद की पहली बैठक में 18 लाख गरीब परिवारों को प्रधानमंत्री आवास उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया। केंद्र के सहयोग से आवास निर्माण तेज हुआ है और प्रतिदिन लगभग 1,600 आवास बनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों, युवाओं, गरीबों और मातृशक्ति का कल्याण सरकार की प्राथमिकता है।
    बस्तर में शांति से खुल रहे विकास के नए द्वार
    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, सुरक्षा बलों और बस्तर की जनता के सहयोग से नक्सलवाद के विरुद्ध महत्वपूर्ण सफलताएं मिली हैं। बस्तर में शांति और विश्वास का वातावरण मजबूत होने से सड़क, रेल, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार सुविधाओं के विस्तार की नई संभावनाएं खुली हैं। बेहतर रेल कनेक्टिविटी से आवागमन के साथ व्यापार, पर्यटन और रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार विरासत और विकास को साथ लेकर आगे बढ़ रही है। उन्होंने क्षेत्रवासियों से भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपनाने तथा प्रेम, एकता और सद्भाव के साथ प्रदेश के विकास में सहभागी बनने का आह्वान किया।

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