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May 25, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

बस्तर की शांति, सुरक्षा और विकास के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों को किया नमन
शहीद जवानों के परिवारों के बीच बैठकर केंद्रीय गृहमंत्री ने बंधाया ढांढस, हरसंभव सहयोग का दिलाया भरोसा
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जवानों के अदम्य साहस को किया नमन

   

रायपुर / शौर्यपथ / केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने अपने बस्तर प्रवास के दौरान आज जगदलपुर स्थित अमर वाटिका पहुंचकर माओवाद के विरुद्ध संघर्ष में अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले एक हजार से अधिक अमर शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय उपस्थित थे ।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि बस्तर की धरती पर शांति, सुरक्षा और विकास स्थापित करने में हमारे जवानों का बलिदान अविस्मरणीय है। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले वीर जवानों का त्याग कभी व्यर्थ नहीं जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र और राज्य सरकार बस्तर में स्थायी शांति स्थापित करने, विकास को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और माओवाद के समूल उन्मूलन के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बीजापुर नक्सली हमले में शहीद हुए जवान कालेन्द्र प्रसाद नायक एवं पवन कुमार मंडावी के परिजनों से आत्मीय मुलाकात की। उन्होंने परिवारजनों के बीच बैठकर उनका दुख साझा किया, ढांढस बंधाया तथा सरकार की ओर से हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सुरक्षाबलों के जवानों से संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया और उनके साहस एवं समर्पण की सराहना की।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि शहीद जवानों का बलिदान छत्तीसगढ़ कभी नहीं भूलेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शहीद परिवारों के सम्मान, सुरक्षा और कल्याण के लिए पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर अब शांति, विश्वास और विकास की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है और इसमें सुरक्षाबलों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा, वन एवं पर्यावरण मंत्री केदार कश्यप, जगदलपुर विधायक किरण देव सहित जनप्रतिनिधिगण, वरिष्ठ पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।

400 अत्याधुनिक आपातकालीन वाहन एवं 32 मोबाइल फॉरेंसिक वैन को दिखाई हरी झंडी‘Science on Wheels – Towards Faster Justice’ के साथ प्रदेश में त्वरित सहायता और वैज्ञानिक जांच व्यवस्था होगी…

राजनांदगांव/शौर्यपथ /जिले को नशा मुक्त बनाने के लिए पुलिस द्वारा लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में चौकी चिखली पुलिस ने अवैध शराब बिक्री के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी के कब्जे से बड़ी मात्रा में देशी शराब और बिक्री रकम जब्त की गई है।

चिखली चौकी प्रभारी से मिली जानकारी के अनुसार पुलिस अधीक्षक सुश्री अंकिता शर्मा के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कीर्तन राठौर के मार्गदर्शन एवं नगर पुलिस अधीक्षक श्रीमती वैशाली जैन के पर्यवेक्षण में जिलेभर में अवैध गांजा, शराब बिक्री, असामाजिक तत्वों और सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने वालों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है।

इसी अभियान के तहत 17 मई 2026 को पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि ग्राम बोईरडीह स्थित प्राथमिक शाला भवन की बाउंड्री के पास एक व्यक्ति अवैध रूप से शराब बिक्री कर रहा है। सूचना मिलते ही चौकी चिखली पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची और चारों तरफ से घेराबंदी कर कार्रवाई की। मौके पर पुलिस ने आरोपी उगेश पारधी पिता संतलाल पारधी उम्र 33 वर्ष निवासी बोईरडीह, ओपी चिखली जिला राजनांदगांव को शराब बेचते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। तलाशी लेने पर आरोपी के कब्जे से 43 पौवा सवा शेरा देशी शराब बरामद हुई, जिसकी कुल मात्रा 7.740 बल्क लीटर एवं कीमत लगभग 3440 रुपये आंकी गई। इसके अलावा शराब बिक्री से प्राप्त 200 रुपये नकद भी जब्त किए गए।

पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 34(2) आबकारी एक्ट के तहत अपराध दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की। बाद में आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। पुलिस के अनुसार आरोपी के विरुद्ध पूर्व में भी आबकारी एक्ट के तहत मामले दर्ज हैं। लगातार कार्रवाई के चलते क्षेत्र में अवैध शराब कारोबारियों में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है। इस पूरी कार्रवाई में चौकी चिखली पुलिस की टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बोले — “जनहित और सुशासन की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण पहल”

रायपुर।

छत्तीसगढ़ में नागरिक सुरक्षा और त्वरित राहत व्यवस्था को आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। ‘नेक्स्ट जेन CG डायल-112’ सेवा के माध्यम से अब प्रदेश के सभी 33 जिलों में जरूरतमंद नागरिकों को आपात परिस्थितियों में तेज, सुरक्षित और प्रभावी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

इस अत्याधुनिक सेवा के अंतर्गत आज भारत सरकार के माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह आधुनिक इमरजेंसी एवं हाईवे वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। यह पहल सड़क दुर्घटनाओं, मेडिकल इमरजेंसी, महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा, अपराध नियंत्रण तथा अन्य संकटपूर्ण परिस्थितियों में त्वरित सहायता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस पहल को जनहित और सुशासन की दिशा में राज्य सरकार का महत्वपूर्ण निर्णय बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता को बेहतर सुरक्षा और त्वरित सहायता उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि —

“नेक्स्ट जेन CG डायल-112 सेवा केवल एक तकनीकी व्यवस्था नहीं, बल्कि आम नागरिकों के विश्वास और सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण पहल है। इससे आपातकालीन परिस्थितियों में लोगों को शीघ्र राहत मिलेगी और प्रदेश में सुरक्षा तंत्र पहले से अधिक प्रभावी होगा।”

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग और माननीय गृहमंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ लगातार आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था और सुशासन की दिशा में आगे बढ़ रहा है। विशेष रूप से दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों में भी अब बेहतर आपात सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि महिलाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सरकार पूरी गंभीरता के साथ कार्य कर रही है और नई डायल-112 सेवा इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

राज्य सरकार का मानना है कि आधुनिक तकनीक से लैस यह व्यवस्था पुलिस, स्वास्थ्य और आपदा राहत सेवाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेगी, जिससे किसी भी संकट की स्थिति में नागरिकों को कम समय में सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी।

‘नेक्स्ट जेन CG डायल-112’ सेवा को सुरक्षित, संवेदनशील और सशक्त छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में एक बड़ा और जनहितैषी कदम माना जा रहा है।

रायपुर। प्रभु श्रीराम के ननिहाल एवं माता कौशल्या की पावन धरा छत्तीसगढ़ में भारत सरकार के माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के आगमन को लेकर प्रदेशभर में उत्साह और आत्मीयता का वातावरण दिखाई दे रहा है।

प्रदेशवासियों की ओर से उनके प्रति हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन व्यक्त किया गया है। यह दौरा केवल एक औपचारिक प्रवास नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के विकास, सुरक्षा और सुशासन के संकल्प को नई मजबूती देने वाला महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।

प्रदेश में केंद्र सरकार के सतत सहयोग और डबल इंजन सरकार के समन्वित प्रयासों का प्रभाव अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। विशेषकर बस्तर क्षेत्र, जो वर्षों तक नक्सलवाद की चुनौती से प्रभावित रहा, आज विकास और विश्वास की नई दिशा में आगे बढ़ता नजर आ रहा है।

माननीय गृहमंत्री श्री अमित शाह के दृढ़ नेतृत्व, स्पष्ट रणनीति और सुरक्षा बलों के मनोबल को मजबूत करने वाले निर्णयों के कारण बस्तर में शांति स्थापना और विकास कार्यों को नई गति मिली है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार और रोजगार जैसे क्षेत्रों में लगातार हो रहे कार्य अब आमजन के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रहे हैं।

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में यह माना जा रहा है कि गृहमंत्री का यह प्रवास प्रदेश के विकास कार्यों को और अधिक गति देगा तथा सुरक्षित, समृद्ध और आत्मनिर्भर बस्तर के संकल्प को नई ऊर्जा प्रदान करेगा।

छत्तीसगढ़ की जनता को विश्वास है कि केंद्र और राज्य सरकार के साझा प्रयासों से प्रदेश आने वाले समय में विकास, सुरक्षा और जनकल्याण का नया उदाहरण बनेगा।

छत्तीसगढ़ की समस्त जनता की ओर से

माननीय केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह जी का हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन।

कर्तव्यनिष्ठ पुलिस अधिकारी अमित शुक्ला के निधन से शोक की लहर

बस्तर सहित पूरे पुलिस महकमे के लिए अत्यंत दुःखद समाचार सामने आया है।

बस्तर के विभिन्न थानों में अपनी सेवाएं देने वाले पुलिस अधिकारी श्री अमित शुक्ला का असमय निधन हो गया। उनके निधन की खबर से पुलिस विभाग, सहयोगियों और क्षेत्रीय नागरिकों में गहरा शोक व्याप्त है।

श्री अमित शुक्ला अपने शांत स्वभाव, कर्तव्यनिष्ठ कार्यशैली और जनता के प्रति संवेदनशील व्यवहार के लिए जाने जाते थे। बस्तर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए पुलिस विभाग में अपनी अलग पहचान बनाई थी।

उनकी कार्यशैली में अनुशासन के साथ मानवीय संवेदनाएं भी स्पष्ट दिखाई देती थीं, यही कारण रहा कि वे अपने साथियों और आम नागरिकों के बीच सम्मानित अधिकारी के रूप में पहचाने जाते थे।

उनका असमय निधन केवल एक अधिकारी की विदाई नहीं, बल्कि पुलिस महकमे के लिए ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई लंबे समय तक संभव नहीं होगी।

विभाग के अनेक अधिकारियों और कर्मचारियों ने उनके निधन पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए इसे व्यक्तिगत क्षति बताया है।

शोक संदेशों का सिलसिला लगातार जारी है।

सहकर्मियों का कहना है कि अमित शुक्ला ने अपने सेवा काल में कठिन परिस्थितियों के बीच भी कर्तव्य को सर्वोपरि रखा और सदैव ईमानदारी एवं समर्पण के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाईं।

ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोकाकुल परिवार को यह असीम दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें।

ॐ शांति ?

राजनीतिक लेख 

मध्यप्रदेश की राजनीति में एक बार फिर ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेकर बहस तेज हो गई है।

2020 में कमलनाथ सरकार गिरने के बाद जो राजनीतिक भूचाल आया था, उसकी गूंज आज भी प्रदेश की राजनीति में साफ सुनाई देती है। समय बीत गया, सरकारें बदल गईं, चेहरे बदल गए, लेकिन कांग्रेस कार्यकर्ताओं के मन में पैदा हुई टीस अब भी खत्म नहीं हुई।

राजनीति में दल बदल नया नहीं है। भारतीय लोकतंत्र ने कई बड़े नेताओं को विचारधारा बदलते देखा है। लेकिन सिंधिया का मामला केवल “पार्टी बदलने” तक सीमित नहीं माना गया। कांग्रेस के भीतर एक बड़ा वर्ग इसे उस जनादेश के टूटने के रूप में देखता है, जिसे जनता ने 2018 में भाजपा के खिलाफ दिया था।

कांग्रेस की पीड़ा: “नेता गया या भरोसा टूटा?”

कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ताओं का एक हिस्सा आज भी यह मानने को तैयार नहीं है कि सिंधिया की विदाई केवल व्यक्तिगत राजनीतिक निर्णय था।

उनके लिए यह उस संघर्ष का अंत था, जिसे कार्यकर्ताओं ने वर्षों तक भाजपा के खिलाफ लड़कर खड़ा किया था।

2018 के चुनाव में कांग्रेस सत्ता तक पहुंची, लेकिन डेढ़ साल बाद सरकार गिर गई।

उसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच एक भावना गहराई से बैठ गई कि सत्ता परिवर्तन केवल राजनीतिक घटना नहीं थी, बल्कि लाखों समर्थकों के भरोसे पर भी आघात था।

यही कारण है कि जब भी सिंधिया की संभावित वापसी या कांग्रेस से किसी तरह के राजनीतिक संवाद की चर्चा होती है, पार्टी के भीतर विरोध की आवाजें तेज हो जाती हैं।

कई कार्यकर्ता खुलकर कहते हैं कि “विश्वास एक बार टूट जाए तो राजनीतिक रिश्ते पहले जैसे नहीं रहते।”

भाजपा में भी पूरी सहजता नहीं?

दूसरी तरफ भाजपा में भी सिंधिया की स्थिति को लेकर समय-समय पर चर्चाएँ उठती रही हैं।

हालांकि पार्टी नेतृत्व ने उन्हें केंद्र में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ दीं, लेकिन जमीनी स्तर पर भाजपा के पुराने कार्यकर्ताओं के भीतर पूरी सहजता हमेशा दिखाई दे — ऐसा भी नहीं कहा जा सकता।

भाजपा का एक परंपरागत कैडर वर्षों तक कांग्रेस और विशेष रूप से सिंधिया परिवार की राजनीति के खिलाफ संघर्ष करता रहा।

ऐसे में अचानक वही चेहरा पार्टी का बड़ा नेता बन जाए, यह बदलाव हर कार्यकर्ता सहजता से स्वीकार कर पाए — यह जरूरी नहीं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने सिंधिया को रणनीतिक रूप से स्वीकार किया, लेकिन भावनात्मक स्वीकार्यता का सवाल अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

“किंगमेकर” से “राजनीतिक संतुलन” तक

कभी मध्यप्रदेश की राजनीति में सिंधिया को भविष्य के मुख्यमंत्री चेहरे के रूप में देखा जाता था।

उनकी युवा छवि, प्रभावशाली वक्तृत्व और ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में मजबूत पकड़ उन्हें कांग्रेस की बड़ी उम्मीद बनाती थी। लेकिन 2020 के बाद उनकी राजनीति की दिशा पूरी तरह बदल गई।

आज स्थिति यह है कि वे सत्ता के केंद्र में होने के बावजूद लगातार राजनीतिक विमर्श के केंद्र में बने रहते हैं — लेकिन अलग वजहों से।

सवाल अब यह नहीं रह गया कि सिंधिया कितने प्रभावशाली हैं, बल्कि यह बन गया है कि वे किस राजनीतिक ध्रुव पर पूरी तरह स्वीकार किए जाते हैं।

क्या “बीच की राजनीति” सबसे कठिन होती है?

भारतीय राजनीति में सबसे कठिन स्थिति अक्सर उन्हीं नेताओं की होती है जो दो वैचारिक या राजनीतिक ध्रुवों के बीच खड़े दिखाई देते हैं।

न पूरी तरह पुराने साथियों का भरोसा बचता है, न नए राजनीतिक परिवार में पूर्ण आत्मीयता तुरंत बन पाती है।

सिंधिया आज शायद उसी दौर से गुजरते दिखाई देते हैं।

कांग्रेस उन्हें “विश्वासघात” की राजनीति के प्रतीक के रूप में देखती है, जबकि भाजपा में भी उन्हें लेकर एक सतर्क दूरी समय-समय पर महसूस की जाती है।

आगे क्या?

राजनीति संभावनाओं का खेल है।

यहां स्थायी दोस्त और दुश्मन जैसी परिभाषाएँ अक्सर बदलती रहती हैं। लेकिन जनता और कार्यकर्ताओं की स्मृति सत्ता के समीकरणों से कहीं अधिक लंबी होती है।

यही वजह है कि 2020 का घटनाक्रम आज भी मध्यप्रदेश की राजनीति में केवल इतिहास नहीं, बल्कि वर्तमान बहस का हिस्सा बना हुआ है।

और सबसे बड़ा सवाल अब भी वही है—

क्या ज्योतिरादित्य सिंधिया अब ऐसी राजनीतिक स्थिति में पहुंच चुके हैं, जहाँ सत्ता तो है, लेकिन दोनों पक्षों में पूर्ण स्वीकार्यता का संकट भी साथ चल रहा है?

हेग/नई दिल्ली / एजेंसी / प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नीदरलैंड यात्रा भारत की वैश्विक कूटनीति में एक नए अध्याय के रूप में उभरी है। हेग स्थित डच प्रधानमंत्री आवास कैटश्यूस…

अम्बेडकर चौक से रूद्री चौक तक फोरलेन, गौरवपथ और पेयजल इंटेकवेल निर्माण की बड़ी घोषणाएं
सुशासन तिहार बना जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण और संवेदनशील प्रशासन का सशक्त माध्यम : मुख्यमंत्री

  धमतरी / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज धमतरी में आयोजित सुशासन तिहार कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने जिलेवासियों को 465 करोड़ रुपये की लागत के 102 विकास कार्यों की बड़ी सौगात दी। मुख्यमंत्री साय ने 423 करोड़ 52 लाख 56 हजार रुपये लागत के 52 कार्यों का भूमिपूजन तथा 41 करोड़ 50 लाख 48 हजार रुपये से अधिक लागत के 50 कार्यों का लोकार्पण किया। इन विकास कार्यों के माध्यम से जिले में सड़क, पेयजल, नगरीय अधोसंरचना और जनसुविधाओं का विस्तार होगा तथा आमजन को बेहतर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार सुशासन, संवेदनशील प्रशासन और त्वरित समाधान की कार्यसंस्कृति के साथ आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि 1 मई से 10 जून तक आयोजित सुशासन तिहार के माध्यम से गांव-गांव में क्लस्टरवार शिविर लगाकर आम नागरिकों की समस्याओं का प्राथमिकता से निराकरण किया जा रहा है। राजस्व प्रकरणों के निराकरण के लिए विशेष अभियान चलाया गया है, जिससे हजारों लोगों को राहत मिली है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों, महिलाओं, युवाओं और गरीब परिवारों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की जा रही है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार अंत्योदय की भावना के साथ समाज के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री साय ने प्रशासनिक पारदर्शिता और डिजिटल गवर्नेंस को सरकार की प्राथमिकता बताते हुए कहा कि शीघ्र ही मुख्यमंत्री हेल्पलाइन प्रारंभ की जाएगी, जिसके माध्यम से नागरिक घर बैठे अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे और समय-सीमा में उनका निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना एवं बिजली बिल भुगतान समाधान योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार जरूरतमंद परिवारों को राहत पहुंचाने के लिए संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने नागरिकों से प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का अधिक से अधिक लाभ लेने की अपील भी की।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर संभाग में सुशासन तिहार के साथ "बस्तर मुन्ने" और "नियद नेल्लानार 2.0" अभियान भी संचालित किए जा रहे हैं, जिनसे दूरस्थ क्षेत्रों में विकास कार्यों को नई गति मिलेगी। उन्होंने "मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान" का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर पहुंचकर लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर रही हैं तथा जरूरतमंदों के उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित कर रही हैं।

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के साथ विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में जनसहभागिता का आह्वान किया।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय ने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन किया। उन्होंने आयुष्मान कार्ड एवं प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को चाबी सौंपकर लाभान्वित किया। मुख्यमंत्री ने बटन दबाकर "ड्रीम कॉरिडोर" वीडियो एवं "मां अभियान" की कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया। इस अवसर पर जिला प्रशासन धमतरी एवं लर्निंग जॉय बेंगलुरु के मध्य एमओयू किया गया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने धमतरीवासियों को कई महत्वपूर्ण सौगातें दीं। उन्होंने अम्बेडकर चौक धमतरी से रूद्री चौक तक फोरलेन सड़क निर्माण, धमतरी में पेयजल हेतु इंटेकवेल निर्माण, रानी दुर्गावती चौक से बिलाईमाता मंदिर तक गौरवपथ निर्माण, कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कुरूद भवन के लिए डेढ़ करोड़ रुपये तथा पीएमश्री स्वामी आत्मानंद स्कूल के लिए राशि स्वीकृत करने की घोषणा की।
कार्यक्रम में सांसद महासमुंद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी, विधायक कुरूद अजय चन्द्राकर, विधायक धमतरी ओंकार साहू, महापौर रामू रोहरा, छत्तीसगढ़ पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष नेहरू निषाद, रायपुर संभाग के कमिश्नर श्याम धावड़े, पुलिस अधीक्षक सूरज सिंह परिहार सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

   दुर्ग । शौर्यपथ / दुर्ग नगर निगम के स्वास्थ्य प्रभारी एवं भाजपा पार्षद निलेश अग्रवाल एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। इस बार मामला वर्षों पुराने भूमि सौदे और सीमांकन विवाद से जुड़ा है, जिसमें राजनीतिक प्रभाव, प्रशासनिक दबाव और सत्ता के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं। पूरे घटनाक्रम ने न केवल राजस्व प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि भाजपा की स्थानीय छवि को भी प्रभावित करने वाली स्थिति निर्मित कर दी है।

भूमि स्वामी रजत सुराना ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए आरोप लगाया कि वर्ष 2005 में उन्होंने पवन अग्रवाल से खसरा नंबर 80/3 की भूमि खरीदी थी। इसी खसरा नंबर की भूमि कई अन्य लोगों को भी वर्षों पहले बेची जा चुकी है। उस समय खरीदारों के आवागमन के लिए लगभग 30 फीट और 60 फीट चौड़ी सड़क छोड़ी गई थी, जिसका उपयोग आज भी रहवासी कर रहे हैं।

आरोप है कि अब पवन अग्रवाल के पुत्र और भाजपा पार्षद निलेश अग्रवाल उक्त सड़क-रास्ते की भूमि को रजत सुराना की भूमि खसरा नंबर 80/352 में समायोजित कराने का प्रयास कर रहे हैं। जबकि पूर्व में स्वयं पवन अग्रवाल विभिन्न राजस्व प्रकरणों में यह स्वीकार कर चुके हैं कि उक्त बची हुई भूमि सड़क-रास्ते के रूप में उपयोग में है।

सत्ता का प्रभाव या प्रशासनिक निष्पक्षता पर दबाव?

शहर में इस बात को लेकर चर्चाएं तेज हैं कि भाजपा पार्षद होने और सत्ता से निकटता के कारण निलेश अग्रवाल प्रशासनिक तंत्र पर प्रभाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि वे स्वर्गीय हेमचंद यादव के पुत्र भाजपा नेता जीत यादव के करीबी माने जाते हैं, जिनकी प्रदेश स्तर तक मजबूत राजनीतिक पकड़ रही है। हालांकि जीत यादव की राजनीति में साफ-सुथरी छवि मानी जाती है, लेकिन स्थानीय स्तर पर निलेश अग्रवाल को लेकर लगातार विवाद सामने आने से भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच भी असहज स्थिति निर्मित हो रही है।

सूत्रों के अनुसार, महापौर अलका बाघमार से करीबी संबंधों को लेकर भी प्रशासनिक दबाव की चर्चाएं तेज हैं। सीमांकन प्रक्रिया के दौरान जिस प्रकार आपत्तियों और दस्तावेजों को लेकर विवाद सामने आया, उसने पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।

स्वास्थ्य प्रभारी के कार्यकाल पर पहले से उठते रहे हैं सवाल

निलेश अग्रवाल वर्तमान में दुर्ग निगम में स्वास्थ्य प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, लेकिन उनके कार्यकाल में शहर की सफाई व्यवस्था लगातार सवालों के घेरे में रही है। शहर के कई इलाकों में कचरे के ढेर, बदबूदार वातावरण और अव्यवस्था को लेकर आम नागरिकों में नाराजगी बनी हुई है। वार्ड के स्थानीय निवासियों द्वारा भी निष्क्रियता और जनसमस्याओं की अनदेखी के आरोप लगाए जाते रहे हैं।

ऐसे में अब भूमि विवाद में उनका नाम सामने आने से विपक्ष को भाजपा और निगम प्रशासन पर निशाना साधने का अवसर मिल गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि समय रहते मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो यह विवाद भाजपा की छवि को स्थानीय स्तर पर नुकसान पहुंचा सकता है।

निष्पक्ष जांच की मांग तेज

भूमि स्वामी रजत सुराना ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि पूरे सीमांकन प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा वास्तविक सड़क-रास्ते की भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में पृथक दर्ज किया जाए। साथ ही विवादित प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों और राजनीतिक हस्तक्षेप की भूमिका की भी जांच की मांग उठ रही है।

फिलहाल यह मामला केवल जमीन विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सत्ता, प्रशासन और राजनीतिक प्रभाव के उपयोग को लेकर दुर्ग की राजनीति में बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।

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