
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
Google Analytics —— Meta Pixel
राजनांदगांव / शौर्यपथ / संभागायुक्त टीसी महावर ने आज जिला मुख्यालय राजनांदगांव से दूर आरोहण बीपीओ ग्राम टेड़ेसरा में कलेक्टर्स, एसपी, डीएफओ एवं जिला पंचायत सीईओ के कार्यों की संभाग स्तरीय समीक्षा बैठक ली और इसके साथ पुलिस महानिरीक्षक तथा पुलिस अधिकारियों के साथ कानून व्यवस्था एवं अन्य मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। इस अवसर पर पुलिस महानिरीक्षक विवेकानंद सिन्हा, सीसीएफ (मुख्य वन संरक्षक) श्रीमती शालिनी रैना, कलेक्टर राजनांदगांव टोपेश्वर वर्मा, कलेक्टर दुर्ग सर्वेश्वर नरेन्द्र भूरे, कलेक्टर कबीरधाम रमेश कुमार शर्मा, कलेक्टर बालोद जन्मेजय महोबे, कलेक्टर बेमेतरा शिव अनंत तायल, पुलिस अधीक्षक, डीएफओ एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
संभागायुक्त महावर ने कहा कि सभी अधिकारी समन्वय एवं सहयोग के साथ बेहतरीन कार्य करें। उन्होंने कहा कि शासन की प्राथमिकता की योजनाओं के क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दें और कार्यपालिक मजिस्ट्रेट एवं पुलिस अधिकारी समन्वय के साथ कार्य करें। राजस्व के लंबित प्रकरणों के निराकरण के कार्य में विशेष ध्यान दें। पुलिस महानिरीक्षक श्री विवेकानंद सिन्हा ने कहा कि संभाग में कानून एवं शांति व्यवस्था सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने भी कार्यपालिक मजिस्ट्रेट एवं पुलिस अधिकारियों के बेहतर तालमेल का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि दोनों अधिकारी साथ मिलकर कार्य करते हैं तो समस्या का निपटारा तुरंत हो जाता है। उन्होंने समस्या के तत्काल निराकरण के लिए कहा।
संभागायुक्त ने कहा कि अविवादित नामांतरण, विवादित नामांतरण, अविवादित खाता विभाजन, विवादित खाता विभाजन का समय-सीमा में निराकरण करें। सीमांकन का कार्य महत्वपूर्ण है जहां ज्यादा प्रकरण लंबित है वहां शीघ्र निराकरण करें। उन्होंने जिलावार राजस्व विभाग के लंबित प्रकरणों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि तहसीलवार समीक्षा करने पर यह देखा जा सकता है कि किस तहसील से ज्यादा प्रकरण लंबित है। निराकृत प्रकरणों का राजस्व अभिलेखागार में भेजा जाना महत्वपूर्ण कार्य है। केस के डिस्पोजल के बाद उसे रिकार्ड रूम में सुरक्षित रखा जाना चाहिए। इस कार्य के लिए डिप्टी कलेक्टर की ड्यूटी लगाएं।
संभागायुक्त टीसी महावर ने कहा कि नक्शा नवीनीकरण का कार्य करें। उन्होंने कलेक्टर्स से कहा कि लैण्ड रिकार्ड, डायवर्सन, भू-भाटक वसूली, नजूल की समीक्षा अलग से करें। जिससे राजस्व अमले के कार्य में तेजी आएगी। उन्होंने गिरदावरी कार्य की भुईयां साफ्टवेयर में एन्ट्री की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी अपने अधीनस्थ कार्यालयों का निरीक्षण करें। एसडीएम एवं तहसीलदार निरीक्षण के दौरान दायरा पंजी, डिस्पोजल पंजी का निरीक्षण करें जिससे उन पर नियंत्रण रखा जा सके। भू-अर्जन प्रकरण तथा मुआवजा वितरण की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि अवितरित अवार्ड की राशि कितनी लंबित है इस पर ध्यान रखते हुए कार्य करें। भू-अर्जन के कितने प्रकरण नये हैं इसके साथ ही योजनाओं में भू-अर्जन के प्रकरण, जो समय-सीमा समाप्त होने पर निरस्त कर दिए गए है उन पर भी ध्यान दें। धान खरीदी, मक्का खरीदी एवं किसान पंजीयन की तैयारियों की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि समिति की सीमा देख लें एवं डिफाल्टर समिति पर निगरानी रखें। धान खरीदी के दौरान बार्डर स्थित जिले राजनांदगांव एवं कबीरधाम में राजस्व, पुलिस एवं वन विभाग के अधिकारी समन्वित तरीके से कार्य करेंगे। उन्होंने व्यक्तिगत, सामुदायिक वन अधिकार पत्रों के वितरण की जानकारी ली। नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी योजना के तहत गौठान के फेस-2 का निर्माण एवं वर्मी बेड निर्माण, चारागाह, नरवा की नियमित मॉनिटरिंग करें। उन्होंने कहा कि नरवा शासन की महत्वपूर्ण योजना है जिसमें राजनांदगांव और बालोद जिले में अच्छा कार्य हुआ है। चबूतरा निर्माण का कार्य 15 नवम्बर तक पूर्ण हो जाना चाहिए। वर्मी बेड के निर्माण पर जिला पंचायत सीईओ विशेष ध्यान दें। डीएमएफ एवं समग्र ग्रामीण विकास के तहत अप्रारंभ कार्यों पर ध्यान देते हुए कार्य करें। गोधन न्याय योजना शासन की महत्वाकांक्षी योजना है। गोबर एकत्रित होने पर डीकम्पोजर का उपयोग करते हुए वर्मी कम्पोस्ट का निर्माण कराएं। वर्मी कम्पोस्ट निर्माण चक्रशील बना रहे। संभागायुक्त ने सभी जिला पंचायत सीईओ से वर्मी कम्पोस्ट निर्माण के संबंध में जानकारी ली। परिवीक्षाधीन अधिकारियों के नियमित प्रशिक्षण एवं उनके कार्यों की मॉनिटरिंग करें।
संभागायुक्त महावर ने कहा कि जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन ने समन्वय करते हुए अच्छा कार्य किया है। उन्होंने कहा कि कार्यपालिक मजिस्ट्रेट एवं पुलिस अधिकारी आपसी समन्वय से कार्य करेंगे। कानून व्यवस्था के निरीक्षण के दौरान दोनों अधिकारी साथ में रहेंगे और जरूरी बातों के संबंध में जिला मजिस्टे्रट को अवगत कराएंगे। उन्होंने जिला मजिस्ट्रेट को प्रतिबंधात्मक धाराओं से संबंधित प्रकरणों की समीक्षा करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि निकट समय में ईद एवं दीपावली का पर्व आ रहा है और कानून व्यवस्था पर विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटना होने से कानून एवं व्यवस्था की स्थिति निर्मित होती है। खतरनाक सड़कों का चिन्हांकन कर पीडब्ल्यूडी से समन्वय कर इसे दूर कराएं। कोविड-19 के संकट की चुनौती का सामना करते हुए हमें कार्य करना है। पुलिस महानिरीक्षक के निर्देश पर कोविड-19 के कठिन समय में शासन के निर्देशों का पालन किया गया और त्वरित गति से क्रियान्वयन भी हुआ। संभागायुक्त ने सभी पुलिस अधीक्षकों से उनके जिले की कानून व्यवस्था के संबंध में जानकारी ली।
पुलिस महानिरीक्षक विवेकानंद सिन्हा ने कहा कि राजस्व, पुलिस एवं वन विभाग शासन के महत्वपूर्ण आधार स्तंभ है। एकता एवं समन्वय के साथ इनका कार्य होना चाहिए। कानून व्यवस्था एवं शांति बनाए रखने में जिला मजिस्टे्रट की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। समाज के हित के लिए सभी को मिलकर कार्य करना है। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में राजनांदगांव जिले के बागनदी बार्डर में बड़ी संख्या में श्रमिकों के आने पर जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन ने आपसी समन्वय से बेहतरीन कार्य किया। सड़क चिरचारी के राहत कैम्प में जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन ने श्रमिकों के लिए सराहनीय कार्य किए, जिससे जिला एवं पुलिस प्रशासन की नई छवि निर्मित हुई। उन्होंने कहा कि सभी जिलों में भूमि संबंधी एवं वन संबंधी विवादों का निराकरण आपसी समन्वय से किया जा सकता है। महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं एवं बातों को ध्यान में रखते हुए कार्य करें।
मुख्य वन संरक्षक श्रीमती शालिनी रैना ने बताया कि वनधन केन्द्र एवं हाट बाजार स्वीकृत हो गए है। इस कार्य को प्राथमिकता से करते हुए गति लाने की जरूरत है। खैरागढ़ एवं कबीरधाम में लघु वनोपज संग्रहण का कार्य आरंभ हो गया है। लघु वनोपज प्रसंस्करण एवं लघु वनोपज केन्द्र पर ध्यान केन्द्रित करने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक राजनांदगांव डी श्रवण, पुलिस अधीक्षक दुर्ग प्रशांत ठाकुर, पुलिस अधीक्षक बालोद जितेन्द्र सिंह मीणा, पुलिस अधीक्षक कबीरधाम शलभ कुमार सिन्हा, पुलिस अधीक्षक बेमेतरा दिव्यांग कुमार पटेल, वनमंडलाधिकारी राजनांदगांव बीपी सिंह, वनमंडलाधिकारी खैरागढ़ रामावतार दुबे, जिला पंचायत राजनांदगांव श्रीमती तनुजा सलाम एवं दुर्ग संभाग के सभी जिला पंचायत सीईओ तथा एसडीएम राजनांदगांव मुकेश रावटे एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
राजनांदगांव / शौर्यपथ / स्ट्रोक दिवस हर वर्ष 29 अक्टूबर को मनाया जाता है। स्ट्रोक ब्रेन अटैक के नाम से भी जाना जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य लोगों को स्ट्रोक से होने वाले खतरों के प्रति आगाह करने के साथ-साथ ही उनको इससे बचाव के उपाय भी सुझाना है। विश्व स्ट्रोक संगठन के अनुसार स्ट्रोक का खतरा हर चार व्यक्तियों में से एक को होता है, इसलिए इस बार की थीम वह एक न बनें रखी गयी है।
इस बारे में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथलेश चौधरी ने बताया आज-कल लोग काफी मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं, क्योंकि वैश्विक महामारी कोरोना के कारण किसी की नौकरी छूट गयी है तो किसी का व्यापार बंद हो गया है। ऐसे में उनको स्ट्रोक होने का जोखिम और अधिक है। इसलिए स्ट्रोक के प्रति अधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
विश्व स्ट्रोक संगठन के अनुसार पूरी दुनिया में हर वर्ष लगभग 1.70 करोड़ लोग स्ट्रोक्स की समस्या का सामना करते हैं, जिसमें से 60 लाख लोग तो मर जाते हैं, जबकि 50 लाख लोग स्थायी रूप से विकलांग हो जाते हैं। दुनिया में होने वाली मौतों में स्ट्रोक दूसरा प्रमुख कारण है, जबकि विकलांगता होने का यह तीसरा प्रमुख कारण है। इतना गंभीर होने के बाबजूद भी कम से कम आधे से अधिक स्ट्रोक्स को लोगों में पर्याप्त जागरूकता पैदा कर रोका जा सकता है द्य
क्या है स्ट्रोक?
जब रक्त वाहिका नलिकायें किसी रुकावट या रिसाव के कारण मस्तिष्क को रक्त की आपूर्ति नहीं कर पाती हैं तो ऐसी स्थिति को स्ट्रोक कहते है। इसको ब्रेन अटैक के नाम से भी जाना जाता है।
स्ट्रोक्स के लक्षणों को स्न्रस्भ् रणनीति के माध्यम से आसानी से पहचाना जा सकता हैः-
स्न- फेस : किसी व्यक्ति के मुस्कुराने पर उसका चेहरा एक तरफ लटक रहा है तो उसे स्ट्रोक का खतरा हो सकता है।
्र-आर्म : किसी व्यक्ति द्वारा दोनों हाथों को उठाने पर एक हाथ का न उठ पाना या गिर जाना।
स्- स्पीच : यदि किसी व्यक्ति द्वारा साधारण शब्द बोलने पर उसकी आवाज में लडख़ड़ाहट होना।
भ्- टाइम टू एक्शन : यदि आपको उपरोक्त में से कोई भी लक्षण है तो एम्बुलेंस के लिए आपातकालीन नंबर पर कॉल करें।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा कोरोना काल में आर्थिक विकास को सुचारू रूप से जारी रखने के लिए अपनाई गई रणनीति के उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। संकट के बावजूद प्रदेश के त्यौहारी बाजार में अच्छी रौनक दिख रही है। वाहन बाजार से मिले आंकड़ों के अनुसार पिछले नवरात्रि की तुलना में इस बार की नवरात्रि में ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्र के लोगों ने जमकर वाहनों की खरीदी की है। वर्ष 2019 में नवरात्र के दौरान जहां 417 एग्रीकल्चर ट्रेक्टर बिके थे, वहीं इस साल 679 ट्रेक्टरों की बिक्री हुई। इसी तरह कमर्शियल ट्रेक्टर पिछले साल 28 बिके थे, जबकि इस साल यह संख्या 35 रही। यह आंकड़ा ग्रामीण क्षेत्रों में आ रही समृद्धि तथा किसानों में बढ़ते आत्मविश्वास को दर्शाता है। इसी तरह मोटर कार की बिक्री में भी वृद्धि दर्ज की गई है। पिछली नवरात्र को जहां 2426 मोटर कार लोगों ने खरीदी थीं, वहीं इस बार 2795 मोटर कारों की बिक्री हुई। यदि हार्वेस्टर की बात करें तो पिछले नवरात्रि में मात्र एक हार्वेस्टर की बिक्री हुई थी, जबकि इस नवरात्रि में 24 लोगों ने हार्वेस्टर की खरीदी की है। गांवों की तरह शहरी क्षेत्रों में भी लोगों में उत्साह और आत्मविश्वास का वातावरण बना हुआ है। कोरोनाकाल के बाद तेजी से छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था संवर रही है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किसानों की जेब में पैसा डालने इसे असर माना जा सकता है।
एक ओर जहां पूरे देश में आर्थिक मंदी और बेरोजगारी का माहौल देखा जा सकता है वहीं छत्तीसगढ़ राज्य में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के द्वारा कोरोनाकाल में लिए गए सकारात्मक और दूरदर्शी निर्णय का परिणाम उपलब्धियों के रुप में देश में सुर्खियां बटोर रहा है। किसानों के खाते में संकट के समय पैसा डालने, लॉकडाउन में उद्योग का संचालन सुचारू रखकर रोजगार के अवसर को बनाए रखने, मनरेगा के माध्यम से सर्वाधिक रोजगार देने जैसे अभिनव प्रयासों का ही यह असर है कि छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था पूरी रफतार से गतिमान रही। राज्य में मंदी का असर नहीं पड़ा। अनलॉक होने के बाद जब बाजार खुले तो व्यवसाय में भी रौनक आई और त्योहार का सीजन आने के साथ खरीददारी भी बढ़ गई। इस नवरात्रि में गत नवरात्रि की अपेक्षा अधिक संख्या में कृषि कार्य के लिए ट्रैक्टर, कार और हार्वेस्टर की बिक्री फिर से देखा जा सकता है।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज विधानसभा के विशेष सत्र में छत्तीसगढ़ कृषि उपज मंडी (संशोधन) विधेयक 2020 पर चर्चा करते हुए कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा लाया गया नया कृषि कानून किसानों के लिए नहीं, बल्कि पूंजीपतियों को लाभ देने वाला है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार एक राष्ट्र-एक बाजार की दुहाई देती है। जब एक राष्ट्र-एक बाजार है, तो कीमत भी एक होनी चाहिए। यदि केन्द्र सरकार एक राष्ट्र-एक बाजार-एक कीमत की व्यवस्था लागू कर दें, तो हमंे कानून में संशोधन करने की जरूरत ही नहीं पड़ती। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में तीन नये कानून बनाकर केन्द्र सरकार पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाना चाहती है। केन्द्र सरकार का कानून किसानों को ठगने वाला कानून है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार के नए कानूनों से किसानों के मन में संशय पैदा हो गया है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार को इस बात की गारंटी देनी चाहिए कि किसानों के उपज को कोई भी समर्थन मूल्य से नीचे नहीं खरीदेगा।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सदन में केन्द्र सरकार द्वारा पारित तीनों कृषि कानूनों की खामियों की जमकर आलोचना की और कहा कि हम अपने किसानों के हितों को सुरक्षित रखना चाहते हैं, छत्तीसगढ़ के व्यापार को सुरक्षित रखना चाहते है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के लोग भोले-भाले है। लोग ठगाए मत, इसलिए हम मंडी विधेयक में संशोधन कर किसानों और आम उपभोक्ता के हितों की रक्षा की व्यवस्था कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय वित्त मंत्री द्वारा कोरोना संक्रमण काल के दौरान 20 लाख करोड़ रूपए के राहत पैकेज का उल्लेख करते हुए कहा कि इस विशेष पैकेज से किसी को एक पैसा भी नहीं मिला। उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और शांता कुमार कमेटी सिफारिशों का उल्लेख किया और केन्द्र सरकार द्वारा किसानों के हितों की अनदेखी के मामले को सदन में बड़े ही तार्किक ढंग से उठाए। मुख्यमंत्री के संबोधन के दौरान पूरे सदन में खामोशी छायी रही। सदन के सदस्य, किसानों के हित में मुख्यमंत्री के तर्काें को बड़े ही गौर से सुनते नजर आए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब छत्तीसगढ़ की बात हो, किसानों की बात हो, तो दल नहीं, दिल देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पीएम किसान सम्मान निधि से छत्तीसगढ़ के किसानों को लाभ देने के मामले में केन्द्र सरकार द्वारा अड़ंगा लगाया जा रहा है। केन्द्र सरकार किसानों को भ्रमित कर रही है।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि केन्द्र सरकार ने कृषि के क्षेत्र में जो तीन नए कानून बनाए है, उसकी जरूरत क्या थी? क्या किसी किसान संगठन ने या किसी राजनीतिक दल ने कानून में बदलाव की मांग की थी? कोरोना संकट काल में जब देश के लोग समस्याओं से जूझ रहे थे, ऐसी स्थिति में केन्द्र सरकार ने किसानों के हितों की परवाह न करते हुए कृषि के क्षेत्र में तीन नए अध्यादेश जारी कर दिए। उन्होंने कहा कि इसके चलते केन्द्र सरकार के एक सहयोगी दल की मंत्री ने इस्तीफा दे दिया। इन्ही तीनों कानूनों के चलते एनडीए के सहयोगी दल नाराज है। एनडीए के कई केन्द्रीय मंत्री भी इस कानून से सहमत नहीं है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि केन्द्र सरकार का कहना है कि कृषि के तीनों नए कानून, किसानों के लिए लाभकारी है। उन्होंने कहा कि यह भ्रम पूरे देश में फैलाया जा रहा है। इससे किसानों का भला होने वाला नहीं है। यह कानून पूंजीपतियों को लाभ देने वाला कानून है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में 2006 से यह कानून लागू है। आज हालत यह है कि समर्थन मूल्य तो दूर की बात, बिहार में 1300 रूपए क्विंटल से अधिक मूल्य पर किसानों का धान खरीदने वाला कोई नहीं है। उन्होंने कहा कि जब इस कानून से बिहार के किसानों का कोई भला नहीं हुआ तो देश के किसानों का भला होने वाला नहीं है।
केन्द्र सरकार के नए कानून के तहत निजी मंडी खोलने की बात पर एतराज जताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके जरिए सरकारी मंडियों को समाप्त करने का षड़यंत्र रचा जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस कानून की वजह से धीरे-धीरे मंडियां खत्म हो जाएंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह चिटफंड कम्पनी जैसी व्यवस्था है। उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य में चिटफंड कम्पनियों के कारनामों को भी एक-एक कर उजागर किया और कहा कि जिस तरीके से चिटफंड कम्पनियां लोगों को लालच देकर लूटती है। उसी तरह केन्द्र सरकार द्वारा पारित नए कानूनों के जरिए किसान और आम उपभोक्ता लूटे जाएंगे। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि समर्थन मूल्य भारत सरकार घोषित करती है, तो किसानों को समर्थन मूल्य दिलाने के जिम्मेदारी भी केन्द्र सरकार की है। राज्य सरकारें एजेंसी के रूप में काम करती है। उन्होंने कहा कि जब हम छत्तीसगढ़ के किसानों का धान 2500 रूपए क्विंटल में खरीद रहे थे। भारत सरकार ने किसानों को बोनस देने पर प्रतिबंध लगा दिया। उन्होंने कहा कि धान और गेहूं खरीदने पर यूपीए सरकार ने किसानों को बोनस दिया था। वर्तमान में केन्द्र में ऐसी सरकार है, जो किसानों को बोनस देने से रोकती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार से किसानों को बोनस देने की अनुमति के लिए हम कृषि मंत्री और खाद्य मंत्री के साथ दिल्ली गए थे। तत्कालीन केन्द्रीय खाद्य मं़त्री से मुलाकात कर छत्तीसगढ़ और यहां के किसानों की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए बोनस दिए जाने की मांग की थी। परंतु हमारी इस मांग को केन्द्र सरकार ने ठुकरा दिया था। मजबूरन हमें किसानों का धान 2500 रूपए प्रति क्विंटल के बजाए समर्थन मूल्य पर खरीदना पड़ा। किसानों के हितों की रक्षा और उनके उपज का वाजिब मूल्य दिलाने के लिए हमने राजीव गांधी किसान न्याय योजना शुरू की है। इसका लाभ हम राज्य के धान उत्पादक किसानों के साथ-साथ गन्ना और मक्का उपजाने वाले किसानों को भी दे रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ ऐसा राज्य है, जहां स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों पर अमल किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि केन्द्र सरकार, राज्य सरकारों के हितों की लगातार अनदेखी कर रही है। उन्होंने कहा कि बीते छह माह से जीएसटी का पैसा केन्द्र सरकार ने नहीं दिया है। केन्द्र सरकार से छत्तीसगढ़ को 4000 करोड़ रूपए लेना है। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर अत्यावश्यक वस्तु विधेयक में केन्द्र सरकार द्वारा किए गए बदलाव को आम लोगों के लिए नुकसानदायक बताते हुए कहा कि यह विपणन कानून है। इसमें बदलाव पंूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया है। इससे अत्यावश्यक वस्तुओं में जैसे खाद्यान्न, तेल, आलू, प्याज आदि के भंडारण की सीमा को खत्म कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि इसका फायदा उठाकर कारपोरेट और बड़े-बड़े व्यापारी मन माफिक कीमत पर किसानों की उपज खरीदकर जमाखोरी करेंगे। पूरा बाजार उनके कब्जे में हो जाएगा और मनमाने दाम पर सामान बचेंगे। उन्होंने कहा कि इसका दुष्परिणाम अभी से देखने को मिलने लगा है। आलू और प्याज की कीमतें कई गुना बढ़ गई है। यह कानून आम उपभोक्ताओं के खिलाफ है।
मुख्यमंत्री ने सदन में विपक्षी सदस्यों द्वारा चर्चा के दौरान धान खरीदी के संबंध में उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए कहा कि केन्द्र सरकार ने चावल उपार्जन की जो लिमिट इस साल तय की है। वह भी भेदभाव पूर्ण है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ से छोटे राज्यों की भी लिमिट छत्तीसगढ़ से ज्यादा है। उन्होंने कहा कि धान से एथेनॉल बनाने के उनके प्रस्ताव का शुरूआती दौर में लोगों ने मजाक उठाया था। अब तो केन्द्र सरकार ने हमारे प्रस्ताव को लाभकारी बताते हुए मान्य कर लिया है। धान से एथेनॉल बनाने की अनुमति भी दे दी है और इसका विधिवत दर 54.87 रूपए घोषित कर दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य में धान की अतिशेष मात्रा तथा गन्ना से एथेनॉल बनाने के लिए राज्य सरकार ने एमओयू भी कर लिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी एक साल में राज्य में एथेनॉल का उत्पादन भी शुरू हो जाएगा। इससे किसानों को उनकी उपज का वाजिब मूल्य मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने चर्चा के दौरान शांता कुमार कमेटी की सिफारिशों को उल्लेख करते हुए कहा कि केन्द्र सरकार इसके जरिए बोनस को समाप्त करने के बाद अब पीडीएस सिस्टम को भी बंद करने की जुगत में लगी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश का एक ऐसा राज्य है, जहां का पीडीएस सिस्टम पूरे देश के लिए मॉडल है। हमारे राज्य में पीडीएस के 98 प्रतिशत उपभोक्ताओं का राशनकार्ड उनके आधार कार्ड से लिंक है। उन्होंने कहा कि शांता कुमार कमेटी की रिपोर्ट के एकदम उलट छत्तीसगढ़ राज्य में 80 प्रतिशत से अधिक किसान समर्थन मूल्य से लाभान्वित होते हैं। मुख्यमंत्री ने केन्द्र सरकार के कॉन्ट्रेक्ट फॉर्मिंग कानून को भी किसानों के लिए घातक बताया। उन्होंने कहा कि हम अपने किसानों के हितों की रक्षा के लिए नया कानून लेकर आए हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार किसानों के हित में खड़ी है और उनके हितों की अनदेखी नहीं होने देगी। मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ के किसानों और आम उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए सर्व सम्मति से मंडी विधेयक संशोधन विधेयक 2020 को पारित करने का आग्रह किया।
धमतरी /Rajshekhar Nair
कलेक्टर श्री जयप्रकाश मौर्य की अध्यक्षता में आज आत्मसमर्पित नक्सली एवं नक्सल पीड़ित परिवारों को राज्य शासन द्वारा दी जाने वाली सुरक्षा एवं पुनर्वास नीति के लिए गठित जिला स्तरीय समिति की बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न मांगों पर सकारात्मक चर्चा की गई। सहायक आयुक्त आदिवासी विकास डाॅ. रेशमा खान ने बताया कि ब्लाॅक मुख्यालय नगरी के आसपास जीविकोपार्जन के लिए शासकीय भूमि की मांग आवेदकों के द्वारा की गई थी, जो अभी तक लम्बित है। इस पर कलेक्टर ने अनुविभागीय अधिकारी राजस्व नगरी को एक माह के भीतर शासकीय राजस्व भूमि का चयन कर प्रस्ताव करने के लिए निर्देशित किया। इसी तरह पीड़ित परिवार के विद्यार्थियों की निजी स्कूलों में निःशुल्क शिक्षा के लिए भी मांग की गई, जिस पर कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी को प्रावधान के अनुरूप कार्रवाई करने के निर्देश दिए। साथ ही कौशल विकास योजना का लाभ दिलाने के लिए रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण कार्यक्रमों से पीड़ित परिवारों को जोड़ने के निर्देश दिए। इसके अलावा विभिन्न एजेण्डों पर भी बैठक में चर्चा की गई। अवसर पर जिला पंचायत की सी.ई.ओ. श्रीमती नम्रता गांधी, अपर कलेक्टर श्री दिलीप अग्रवाल, अनुविभागीय अधिकारी द्वय श्री मनीष मिश्रा एवं श्री सुनील शर्मा सहित पीड़ित परिवार के सदस्य उपस्थित थे।
भिलाई नगर/शौर्यपथ/ महापौर एवं भिलाई नगर विधायक देवेन्द्र यादव जोन क्रमांक 4 के अंतर्गत संचालित गोबर खरीदी केंद्र पहुंचे वहां पर उन्होंने गोबर से बन रहे विभिन्न उत्पादों को देखकर महिलाओं के द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की! और महिलाओं को प्रोत्साहित करते हुए फौरन 100 पैकेट दीया तैयार करने का ऑर्डर भी दे दिया! एक पैकेट में छोटी एवं बड़ी गणेश की प्रतिमा, कमल स्वरूप बना हुआ डेकोरेशन मूर्ति, छोटे एवं बड़े विभिन्न प्रकार का दीया सम्मिलित है! उन्होंने कहा कि गोधन न्याय योजना शासन की महत्वकांक्षी योजना है, गोबर से वर्मी कंपोस्ट बनाने के साथ ही इनसे बने उत्पादों को तैयार कर महिलाएं अपने आय में वृद्धि कर रही है! महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए इस योजना से जोड़ा गया है ताकि इन्हें रोजगार मिले और इनकी आर्थिक स्थिति में और सुधार हो सके! महापौर यादव एवं निगमायुक्त ऋतुराज रघुवंशी लगातार गोबर खरीदी केंद्रों का निरीक्षण कर रहे हैं! खुर्सीपार में स्थित गोबर खरीदी केंद्र में महिलाएं प्रतिदिन 10000 दीया 1 दिन में तैयार करने का लक्ष्य लेकर चल रही है! दीया के साथ ही दीपावली का त्यौहार को देखते हुए लक्ष्मी गणेश की प्रतिमा, और अन्य प्रकार की सीनरी इत्यादि बना रही है! समिति की अध्यक्ष भारती पखाले ने बताया कि महिलाओं ने छोटे-बड़े डेढ़ लाख दीया तैयार कर लिए हैं और लगभग एक लाख दीया खरीदी के लिए आर्डर मिल चुका है! उल्लेखनीय है कि कई पशु पालक पहले गोबर को इधर-उधर फेंक दिया करते थे परंतु शासन की महत्वकांक्षी योजना से जुड़कर आज लाभ अर्जित कर रहे हैं! इस दौरान जोन आयुक्त जोन क्रमांक 4 अमिताभ शर्मा, कार्यपालन अभियंता संजय बागड़े, सहायक अभियंता अखिलेश चंद्राकर, उप अभियंता नितेश मेश्राम एवं चंद्रकांत साहू मौजूद रहे!
दुर्ग । शौर्यपथ । छत्तीसगढ़ शासन के स्वास्थ्य विभाग 104 आरोग्य सेवा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं पिरामल स्वास्थ्य द्वारा छत्तीसगढ़ के 40 प्रमुख निजी अस्पतालों में किए गए कोविड-19 सर्वेक्षण में 92.86 फ़ीसदी अंकों के साथ बीएसआर हाईटेक सुपर स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल को सर्वश्रेष्ठ कोविड-19 अस्पताल घोषित किया गया है. यह सूची सीधे मरीजों एवं उनके परिजनों से लिए गए फीडबैक के आधार पर बनाई गई है. कोविड पेशेंट फीडबैक के इस सर्वेक्षण में स्वास्थ्य सेवा सुविधाएं , औषधि , भोजन एवं पानी , मास्क , सोशल डिस्टेंसिंग एवं स्वच्छता संबंधी प्रश्नों को शामिल किया गया था , इस सर्वेक्षण की सूचना सर्वेक्षण में शामिल किए गए अस्पतालों को भी नहीं थी, इन आंकड़ों के आधार पर 4 अस्पतालों को बेहद कार्य निष्पादन के लिए प्रमाणित किया गया है , प्रथम नंबर पर जहां बीएसआर सुपर स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल को रखा गया है वहीं दूसरे नंबर पर वर्धमान हॉस्पिटल वहाँ तीसरे नंबर पर उपाध्याय हॉस्पिटल रायपुर तथा चौथे नंबर पर वी केयर हॉस्पिटल रायपुर को रखा गया है जबकि श्री नारायणा इस सूची में पांचवें क्रम पर हैं, बीएसआर हॉस्पिटल प्रबंधन ने इसका पूरा श्रेय कोविड में लगे अपने चिकित्सकों एवं सहयोगी टीमों को दिया है | *उपलब्धियां * कोविड-19 सर्वेक्षण में मिले 92.86 फ़ीसदी अंक * फीडबैक में औषधि भोजन सहित अनेक प्रश्नों को किया गया था शामिल* *सुविधा को लेकर सर्वोच्च प्राथमिकता- मनोज* हॉस्पिटल के निदेशक मनोज अग्रवाल ने बताया कि अस्पताल की पूरी टीम को भी प्रोटोकॉल को फॉलो करने के साथ-साथ कलेक्टर दुर्ग द्वारा समय-समय पर जारी किए गए निर्देशों का पूरी तरह से पालन करते हुए इन पायदान पर पहुंचने में सफल रही उन्होंने बताया कि अस्पताल ने पेशेंट सेफ्टी, पेशेंट केयर तथा उनके हॉस्पिटल स्टे को अधिक से अधिक सुविधाजनक बनाने सर्वोच्च प्राथमिकता दी है उन्होंने बताया कि पेशेंट फीडबैक सर्वे में सर्वोच्च रैंकिंग मिलने का सुखद अवसर है पर यह हमारी जिम्मेदारी को और भी बढ़ा देती है हमारी पूरी कोशिश होगी कि हम जनता के इस भरोसे को टूटने नहीं देंगे और उन पर पूरा विश्वास बनाए रखेंगे ।
-कलेक्टर डाॅ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे , महापौर बाकलीवाल ने एम्बुलेंस यूनिट का किया मुआयना
-41 तरह के खून जांच की होगी सुविधा
दुर्ग / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ शासन की अति महत्वाकांक्षी योजना मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजना का शुभारंभ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर 01 नवंबर को किया जाएगा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल योजना का विधिवत् शुभारंभ कर राज्य की जनता को समर्पित करेंगे। योजनांतर्गत राज्य के सभी शहरी क्षेत्रों में मोबाइल यूनिट पहुँचकर स्लम बस्तियों के लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण और उपचार की व्यवस्था करेगी। योजनांतर्गत दुर्ग जिले के सभी नगरी निकायों के लिए 11 यूनिट मोबाइल एम्बुलेंस उपलब्ध होगी। इसके अंतर्गत आज पहली यूनिट दुर्ग पहुंची। कलेक्टर ने यूनिट का मुआयना कर इसमें उपलब्ध सुविधा सहित उपचार के लिए की गई व्यवस्था को देखा कलेक्टर भूरे के साथ दुर्ग निगम के महापौर बाकलीवाल ने भी एम्बुलास का मुयायना किया । योजना के संचालन के लिए निजी एजेंसियों की सेवाएं ली जाएगी। इसके संचालन के लिए जिला स्तर पर निगरानी टीम इसकी माॅनिटरिंग करेगी। मोबाइल यूनिट में चिकित्सक, ए.एन.एम., लैब टेक्निशियन, फार्मासिस्ट मौजूद रहेंगे।
कलेक्टर डाॅ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजनांतर्गत अधिकृत एजेंसी एवं चयनित मोबइल यूनिट टीम के स्टाॅफ की संक्षिप्त बैठक लेकर योजना के उददेश्य की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह योजना छत्तीसगढ़ शासन द्वारा संचालित महत्वाकांक्षी योजना है। योजना का शुभारंभ आगामी 01 नवंबर को किया जाएगा। इसके लिए निजी एजेंसी की सेवाएं ली जाएगी। उन्होंने कहा कि योजना की सफलता के लिए आप सब की महती भूमिका की आवश्यकता है। जो दायित्व दिया जाएगा उसे पूर्ण जवाबदेही के साथ कर्मठता पूर्वक किया जाना अपेक्षित है। उन्होंने कहा कि योजना को लेकर शहरी मलीन बस्ती में निवास करने वाले लोगों की काफी अपेक्षा है। उल्लेखनीय है कि मलीन बस्ती में ज्यादातर गरीब तबके के लोग निवासरत होते हैं। जिन्हें सामान्य तौर पर स्वास्थ्य सुविधा का लाभ नहीं मिल पाता है। किसी प्रकार की कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर वे आसपास के बड़े अस्पतालों पर निर्भर होते हैं। इससे उन्हें डाॅक्टर की फीस एवं दवाइयों के लिए पैसे खर्च करने पड़ते हैं । साथ ही अपनी दैनिक कार्यों को छोड़कर दिनभर अस्पताल का चक्कर लगाना होता है। इन सबसे मुक्ति दिलाने और अपने मोहल्ले में ही स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजना प्रारंभ की जा रही है।
कलेक्टर ने कहा कि सामान्य तौर पर किसी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या का समय पूर्व उपचार हो जाने से बीमारी ठीक हो जाती है। समय पर उपचार नहीं मिलने से बीमारी के प्रकोप बढ़ने का खतरा बना रहता है। ऐसे स्थिति में यह योजना लोगों के लिए वरदान साबित होगी। योजना की सार्थकता और सफलता के लिए योजना से जुडे़ चिकित्सकों की टीम पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि योजनांतर्गत 41 प्रकार के खून जांच और बीमारियों के उपचार की सुविधा रहेगी।
इस टीम को सामान्य मौसमी बीमारियों, डेंगू, मलेरिया, पीलिया, टायफाईड जैसे बीमारियों के लिए भी सतर्क रहना होगा। कलेक्टर ने योजनांतर्गत चिन्हित टीम को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सभी मुख्यमंत्री की मंशानुरूप कार्य करेंगे। सभी अपनी पूर्ण दक्षता और निष्ठा के साथ कार्य का संपादन करेंगे ।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
