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रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज शाम 6.30 बजे अपने निवास कार्यालय से 'मोर बिजली एप' के नए वर्जन का शुभारंभ करेंगे। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिसटीब्यूशन कंपनी द्वारा बनाए गए इस एप में प्रदेश के सभी श्रेणी के बिजली उपभोक्ताओं को बेहतर सुविधा उपलब्ध होगी। मोर बिजली एप के नए वर्जन में नयी तकनीक का उपयोग करके कई नए फिचर जोड़े गए हैं। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनीज के चेयरमैन श्री सुब्रत साहू, प्रबंध निदेशक श्री हर्ष गौतम सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।
मोर बिजली एप के नए वर्जन से बिजली उपभोक्ताओं को विद्युत से संबंधित कार्यों के लिए बिजली दफ्तर के चक्कर लगाने से निजात मिलेगी। इस ऐप को गूगल प्ले स्टोर पर जाकर कोई भी उपभोक्ता नि:शुल्क डाउनलोड कर सकता है और बिजली संबंधित 16 प्रकार से अधिक सेवाओं का लाभ घर बैठे किसी भी समय प्राप्त कर सकता है। यह सुविधा पूरी तरह से नि:शुल्क है। पावर कंपनी प्रबंधन द्वारा उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि नि:शुल्क जनहितकारी मोर बिजली एप अधिक से अधिक लाभ उठाएं।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री बघेल ने कहा है कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ के वनांचल क्षेत्रों में वन आधारित उद्योग लगाने के लिए उद्यमियों को हर संभव मदद देगी। उन्होंने राज्य के उद्यमियों से इसके लिए आगे आने का आह्वान किया है। मुख्यमंत्री आज अपने निवास कार्यालय में उद्योगपतियों और विभिन्न औद्योगिक संगठनों के पदाधिकारियों से राज्य में वन आधारित औद्योगिक इकाईयों की स्थापना को लेकर आयोजित बैठक में चर्चा कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने राज्य में भरपूर वन संपदा के समुचित दोहन एवं इसके जरिए स्थानीय लोगों को रोजगार से जोडऩे के लिए राज्य में वन आधारित औद्योगिक इकाईयों की स्थापना पर राज्य सरकार की ओर से हर संभव सहयोग दिए जाने की बात कही।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य का 44 प्रतिशत भू-भाग वन आच्छादित है। यहां प्रचुर मात्रा में वनौषधि एवं लघु वनोपज की उपलब्धता के साथ ही उद्यानिकी उत्पादन की असीम संभावनाएं विद्यमान है। उन्होंने कहा कि वनोत्पाद एवं उद्यानिकी उत्पाद से संबंधित औद्योगिक इकाईयों की स्थापना से राज्य के आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा और वनांचल के लोगों के लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि वनांचल के लोगों की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने तथा उन्हें रोजगार से जोडऩे के लिए सरकार प्रयासरत है। इस दिशा में वनांचल क्षेत्रों में सामुदायिक वन संसाधन अधिकार पत्र स्थानीय समुदाय को सौंपा जा रहा है। उन्होंने कहा कि अभी हाल ही में राज्य सरकार द्वारा राज्य के 1300 वनांचल के गांव के लोगों को 5 लाख हेक्टेयर से अधिक वन भूमि के उपभोग का अधिकार सौंपा गया है। उन्होंने यह भी कहा कि हमने वन क्षेत्रों में वृक्षारोपण की वर्षों पुरानी नीति को तब्दील करते हुए इमारती पौधों के बजाए फलदार पौधों के रोपण को बढ़ावा दिया है। वन क्षेत्रों में इस साल 86 लाख से अधिक वनौषधि एवं फलदार पौधों का रोपण किया गया है, ताकि इससे स्थानीय लोगों को फायदा हो सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय लोगों की सहभागिता से जंगलों की सुरक्षा और वनांचल के लोगों को जीविकोपार्जन की गतिविधियों से जोडऩा इसका उद्देश्य है।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि राज्य सरकार, वनांचल क्षेत्रों में उद्यमियों के प्रस्ताव के अनुरूप वनौषधि एवं फलदार पौधों के रोपण को बढ़ावा देगी, ताकि वहां स्थापित होने वाले उद्योग को सहजता से कच्चा माल उपलब्ध हो सके। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर छत्तीसगढ़ राज्य की जलवायु विविधता तथा क्षेत्रवार अलग-अलग वनोत्पाद एवं उद्यानिकी उत्पाद के बारे में उद्योगपतियों को जानकारी दी और कहा कि उद्यमियों के प्रस्ताव के अनुरूप सरकार इसको बढ़ावा देने का काम करेगी। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर यह भी कहा कि वन आधारित उद्योगों की स्थापना के लिए भूमि की उपलब्धता की कमी आड़े नहीं आएगी। उन्होंने प्रदेश सरकार की सुराजी गांव योजना के तहत नरवा (नाला) उपचार के जरिए राज्य में सतही जल के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य में वर्तमान में 1300 से अधिक नालों को उपचार का किया जा रहा है, जिसमें से अधिकांश नाले वन क्षेत्रों में स्थित है। इसकी वजह से वनांचल क्षेत्रों में लगने वाले उद्योगों के लिए पानी की उपलब्धता भी सहजता से सुनिश्चित हो सकेगी। उन्होंने कहा कि वन क्षेत्रों में स्थापित होने वाले उद्योगों के लिए मानव संसाधन भी सहज रूप से उपलब्ध हो सकेंगे। मुख्यमंत्री ने उद्यमियों से राज्य के विभिन्न अंचलों में वन आधारित उद्योगों की स्थापना के लिए प्रस्ताव देने के साथ ही आवश्यक तैयारियां शुरू करने की भी बात कही।
कोंडागांव / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में लिफ्ट देने के बहाने 3 आरोपियों ने पीडि़ता को बंधक बना लिया और 3 दिन तक अनाचार किया। पीडि़ता आरोपियों के चंगुल से छूटी और फिर पुलिस को सूचना दी। पीडि़ता की शिकायत पर पुलिस ने रायपुर के सिलतरा इलाके से 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है, जबकि पीडि़ता को सखी केंद्र कोंडागांव में रखा गया है। आरोपियों का नाम पुलिस अधिकारियों द्वारा बसन्त गुप्ता, संदीप गुप्ता और संजय बताया जा रहा है।
यह है पूरा मामला
1 अक्टूबर की शाम बनियागांव से कोंडागांव जाने के लिए एक युवती सड़क के किनारे खड़ी थी। इस दौरान ट्रक सीजी 18 एच 0735 आकर रूका और लिफ्ट देने की बात कही। बस नहीं मिलने पर युवती ट्रक में बैठ गई, तो ड्राइवर और ट्रक में बैठे दो अन्य आरोपियों ने उससे छेडख़ानी शुरू कर दी। कोंडगांव आने पर आरोपियों ने युवती को नहीं उतारा और उसे केशकाल ले गए।
केशकाल पहुंचाने के रास्ते ही आरोपियों ने ट्रक में बारी-बारी से युवती के साथ दुष्कर्म किया। केशकाल के बाद आरोपी बंधक युवती को रायपुर के सिलतरा इलाके में लेकर पहुंचे और यहां भी अनाचार किया। आरोपी गिट्टी अनलोड करा रहे थे, इस दौरान युवती उनके चंगुल से निकली और ढाबा संचालक की मदद से 112 को सूचना दी । 112 की टीम ने आरोपियों को पकड़ा। केशकाल पुलिस की बुलाकर आरोपियों और युवती को हवाले किया। युवती को कोंडगांव के सखी सेंटर में रखा गया है। आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
0 अनुसुचित जाति आदर्श ग्राम के भूमिपूजन में शामिल हुए विधायक बघेल
0 गांधी जयंती पर घुमका को विधायक आदर्श ग्राम की घोषणा
राजनांदगाँव / शौर्यपथ / अनुसूचित जाति प्राधिकरण अध्यक्ष डोंगरगढ़ विधायक भुनेश्वर बघेल 2 अक्टूबर गांधी जयंती के अवसर पर लगभग 2 करोड़ 60 लाख का अनुसूचित जाति आदर्श ग्राम के अपने गृह ग्राम बिरेझर, भदेरानवागांव, जुरलाखुर्द, डुमरडीहखुर्द, धर्मापुर, ककरेल का भूमिपूजन किये। साथ ही घुमका में गांधी जयंती में शामिल हुए व घुमका को विधायक आदर्श ग्राम की घोषणा किये।
विधायक बघेल ने कहा कि इस इस क्षेत्र की विकास की जवाबदारी आपने सौंपी है, वो पूरा हो रहा है। इस क्षेत्र में विकास की कोई कमी नही होगी। ग्राम पंचायत घुमका को विधायक ग्राम घोषित होने पर घुमकावासियों द्वारा विधायक बघेल का स्वागत कर आभार किये।
कार्यक्रम के दौरान जिला पंचायत सदस्य हर्षिता स्वामी बघेल, ब्लॉक अध्यक्ष घुमका दुर्गेश द्विवेदी, राजनादगॉव ब्लॉक अध्यक्ष अजय मारकंडे, जनपद सभापाति ओमप्रकाश साहू, जनपद सदस्य गीतालाल वर्मा, डोमार साहू, किरण बारले, दिलीप पटेल, घुमका सरपंच फूलमती वर्मा, भदेरा सरपंच फुलेश्वरी साहू, जुरलाखुर्द सरपंच सुखीराम मारकंडे, डुमरडीहखुर्द सरपंच मीनाबाई नेताम, युवा कांग्रेस अध्यक्ष सौरभ वैष्णव, किसान कांग्रेस अध्यक्ष मनोज वैष्णव, पूर्व जनपद सदस्य दिलीप वर्मा, जय कुमार वर्मा, केके दुबे, सीके साहू, दिनेश पुराणिक, टिकू यादव, संतोष वर्मा, महेश वर्मा, नवनीत चंदेल, विक्की राजपूत सहित पंचायत जनप्रतिनिधि, कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
दुर्ग / शौर्यपथ / हाथरस की निर्भया जिस तरह से हैवानों की दरिंदगी का शिकार हुई है, उसे लेकर पूरे देश के लोगों में गुस्सा बढ़ता जा रहा है, जो योगी सरकार के लिए परेशानी का सबब बन सकता है. हाथरस की निर्भया 15 दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ती रही और आखिरकार मंगलवार को दिल्ली में दम तोड़ दिया और पुलिस ने रातोरात अंतिम संस्कार भी कर दिया. इस मामले में पीडि़त युवती को न्याय दिलाने के उद्देश्य से और 3 अक्टबूर को कांग्रेसी कार्यकर्ता पर हुए हमले के विरोध में प्रदेश युवा कांग्रेस के अध्यक्ष पूर्णचंद पाढ़ी और प्रदेश युवा कांग्रेस के सचिव जंयत देशमुख के निर्देशानुसार आज विक्रांत ताम्रकार औऱ अहमद चौहान के नेतृत्व में 15 फीट उंची प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का रावण रूपी पुतले का दहन पटेल चौक दुर्ग में किया गया।
रावण रूपी पुतले को पुराने बस स्टैन्ड से पटेल चौक तक ले जाते हुए योगी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी कि गई। इस मामले को लेकर पूर्व जिला पंचायत सभापति और प्रदेश युवा कांग्रेस के सचिव जयंत देशमुख ने कहा कि यूपी के हाथरस में जिस तरह एक दलित लड़की का दुष्कर्म कर हत्या की गई यह घटना बेहद शर्मनाक हैं व योगी आदित्यनाथ के शासन के अंदर के लाचार कानून व्यवस्था को उजागर करती हैं। जैसे एक समय रावण ने साधु का रूप धारण कर माँ सिता का हरण कर लिया था ठीक उसी तरह आज उत्तरप्रदेश में योगी आदित्यनाथ भगवा धारण कर दोषीयों को बचाने कि कोशिश कर रहे हैं। पूर्व में भी भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ जब एक लड़की ने दुषकर्म का आरोप लगाया था, तब भाजपा सरकार लगातार अपने विधायक को बचाने में लगी थी। और जब पीड़ीत लड़की न्याय के लिए हाईकोर्ट पहुंची तब उसकी आवाज को दबाने के लिए उसके परीवार के दो लोगों को मार दिया गया था। ठीक उसी प्रकार भाजपा सरकार इस मामले को भी दबाने कि कोशिश कर रही थी।
उन्होंने आगे बताया की हाथरस में जिस तरह दरिंदो ने आपसी रंजिश के चलते पीडि़ता के साथ गैंग रेप किया तथा उसके बाद उसके पूरे शरीर पर चोट मारी जिसके कारण पीडि़ता की गर्दन, रीढ़ की हड्डी टूट गई और तो और दरिंदगी की सारी हदें पार करते हुए उसकी जीभ भी काट दी ताकि वो कुछ बोल ना सकें। इसके बाद 15 दिनों तक उसका उपचार भी चला लेकिन उसे बचाया नही जा सका और कल बीते मंगलवार को उसने दम तोड़ दिया। इस जघन्य कृत्य के बाद उत्तरप्रदेश पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठा हैं क्योंकि उत्तरप्रदेश पुलिस ने अपराधियों पर कार्यवाही करने की जगह उन 105 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करदी जिन्होंने इसके खिलाफ आवाज उठाई थीं। उत्तरप्रदेश के आला अधिकारी पिछले 15 दिनों तक इस घिनोने –कृत्य को फर्जी बताने में लगे रहे तथा उन्हीं लोगों पर कार्यवाही करते रहे जो मनीषा के पक्ष में आवाज उठा रहे थें। योगी आदित्यनाथ की उत्तरप्रदेश पुलिस ने तानाशाही की सारी हदें तो जब पार करदी जब परिजनों को मनीषा का शव भी नही सौंपा गया और देर रात खुद पुलिस ने मनीषा के शव का अंतिम संस्कार कर दिया।
*पुतला दहन में प्रमुख रूप से प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री राजेन्द्र साहू, पूर्व महापौर आर.एन. वर्मा, राजेश यादव (सभापति दुर्ग नगरनिगम दुर्ग) शहर कांग्रेस अध्यक्ष गया पटेल , एल्डरमेन रत्ना नामदेव, एमआईसी मेबर मनदीप सिंह भाटिया, पूर्व सिरसा सरपंच भुनेश्वर यादव, पूर्व जिला अध्यक्ष एन.एस.यू.आई कुणाल तिवारी, चंदन सिन्हा, छत्तिसगढ़ प्रदेश यूवा कांग्रेस आई.टी.सेल चियरमैन अनूप वर्मा, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष राजकुमार पाली शहर जिला कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता नासीर खोखर, साथ ही कार्यक्रम में जिला युवा कांग्रेस के महासचिव सिराज खान और अजित यादव, रोहित राव गायकवाड, मनिष ठाकुर, तरुण पुष्टि, सिमांत, अनिल देशमुख, सौगात गुप्ता, , आकाश सेन, लोकेश चंद्रकार, अख्तर खोखर, मोहम्मदरियाज सुलड़ा, आदित्य नारंग, , राकेश सिन्हा, अकील पुवार, मनप्रित यादव, फैजान खान, देवा श्रीकांत चंद्राकार, देवन्द्र देशमुख (पप्पु), चिंटु साव, निषाद खान, शय्यद अनिस रज़ा, धर्मेद्र चंद्राकार, गुरदीप सिंह भाटिया,ललित साहू, दुर्ग ग्रामिण युवा कांग्रेस आई.टी.सेल के संयोजक हेमंत साहू की टीम सहित सैकड़ो की संख्या में अन्य कांग्रेसी कार्यकर्ता मौजुद थें।
शौर्यपथ लेख / कंगना रनौत एक मशहूर हिरोइन देश की सबसे ज्यादा चर्चित महिला जो कभी ड्रग्स लेती थी , क्लबो में डांस करती थी , बीफ खाती थी आज फ़िल्मी दुनिया की पोल खोल रही है अपने आप को झाँसी की रानी , तो कभी अबला , तो कभी घर दुबारा बनाने के पैसे नहीं है की बात करने वाली एक ऐसी ज्ञानवान महिला जो चुनाव में उस जगह भी शिवसेना के उम्मीदवार को मज़बूरी में वोट डाल दी जहां शिवसेना का उम्मीदवार ही नहीं खडा था , एक ऐसी महिला जो अपने आप को महिलाओ की खैरख्वा बताती है जो इन्साफ की लड़ाई के लिए किसी से भी भीड़ जाती है यहाँ तक की मुंबई महानगर पालिका की कार्यवाही के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को दोषी मानती है और मुबई को pok जैसे शब्द से तुलना करने में भी पीछे नहीं हटती है , एक ऐसी महिला जो अपने अवैध रूप से बने घर को राम मंदिर से जोडती है , एक ऐसी बहादुर महिला जिसे केंद्र सरकार ने वाई श्रेणी की सुरक्षा दी है क्योकि वो महाराष्ट्र सरकार पर आरोप लगा रही है क्योकि जिसने अवैधानिक रूप से अपने कार्यालय का निर्माण किया है जिस पर मामला अब अदालत में विचाराधीन है ऐसी महान महिला ने वर्तमान में देश के सबसे बड़े काण्ड हाथरस काण्ड में घटना के १६ दिन बाद मृत मासूम के लिए इन्साफ की आवाज़ उठाई .
अब भई कंगना ने आवाज़ उठाई है तो बात तो बड़ी होगी ही और चर्चा तो होगी ही क्योकि वो कंगना है देश की सबसे मशहूर सेलिब्रिटी जिसे तुरंत वाई श्रेणी की सुरक्षा मिल गयी उस कंगना ने मनीषा के साथ हुए उत्तर पप्रदेश की बेटी हाथरस जिले की रहने वाली मासूम मनीषा के साथ हुए घटना पर १६ दिन बाद अपना आक्रोश जताया . किन्तु इस बार आक्रोश जताने का अंदाज़ कुछ जुदा था जो कंगना अपने कार्यालय के टूट जाने पर सीधे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पर आरोप लगाईं उस कंगना ने मनीषा के साथ हुए दुर्दांत हादसे पर एक ट्वीट किया उसके ट्वीट पर नज़र डालते है देखिये कंगना जी ने क्या कहा
"अपना गुस्सा ट्विटर पर ज़ाहिर किया. उन्होंने लिखा, “मुझे हमारे योगी आदित्यनाथ पर पूरी तरह से विश्वास हैं. उन्होंने जिस तरह से प्रियंका रेड्डी के दोषियों को घटनास्थल पर ही गोली मारने का हुकुम दिया था, वैसे ही हाथरस भी उनसे इस न्याय की उम्मीद कर रहा है.”

ट्वीट को ध्यान से पड़ने वालो को ये बात तो साफ़ समझ आ जाएगी की इतने बड़े काण्ड और १५ दिन बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री जिन्होंने घटना को संज्ञान में तब लिया जब हमारे देश के यशस्वी , लोकप्रिय प्रधानमन्त्री नरेन्द्र दामोदर दास जी मोदी ने संज्ञान लेने की बात कही . वो तो भला हो हमारे प्रधानमंत्री जी का जिन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को घटना की जानकारी दे दी और कार्यवाही की बात कही वरना अगर कही प्रधानमंत्री जी किसी राजनितिक यात्रा पर विदेश प्रवास में होते और किसी कारणवश कुछ दिन और बीत जाते तो ना जाने क्या होता खैर जो हुआ अब उस पर जांच होगी क्योकि अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भारत के सच्चे देशभक्त मोहमाया से दूर श्री योगी आदित्यनाथ जी ने मामले को संज्ञान लिया और १५ दिन बाद कड़ी कार्यवाही की बात की तो ऐसे में १५ दिन तक मौन रहने वाली आदरणीय कंगना जी भला कैसे चुप रहती एक ट्वीट तो बनता ही है और दे मारा एक ट्वीट और करने लगी इन्साफ की उम्मीद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से . इन्साफ तो खैर अब होगा ही मनीषा के साथ हुए कृत्य का , मनीषा की मृत देह के साथ हुए कृत्य का और उस कृत्य का भी जिसमे एक माँ को जिसने ९ माह अपनी कोख में जिस बेटी को पाला और दुनिया से १९ साल तक बचा के रखा जिसका अंतिम दर्शन करना भी नसीब नहीं हुआ चंद पुलिस वालो के कारण उन पुलिस वालो के कारण जो ला एंड आर्डर की रक्षा करते है जिसका नियंत्रण प्रदेश के मुखिया के हाथ में है किन्तु यहाँ कंगना जी ने प्रदेश के मुखिया से उम्मीद जाहिर की इन्साफ की अपनी ही नियत का दोहरा चेहरा दिखा दी कंगना ने अरे कंगना जी जब आपका कार्यालय टुटा तो वो कार्य बीएमसी का था तब क्यों नहीं आप प्रदेश के मुखिया से इन्साफ की उम्मीद करते हुए गुहार लगाईं क्या महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने आपका बंगला तोडा था जिस तरह मनीषा के साथ हुए हादसे में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की कोई गलती नहीं है उसी तरह आपका आशियाना तोड़ने में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की कोई गलती नहीं है . अगर आप सोंचती है कि प्रदेश के मुखिया की गलती है तो यह बात दोनों ही प्रदेश में लागू होगी अगर आप घटना की ही तुलना कर लेती तो घर टूटना और अस्मत लूटना दोनों में जमीन आसमान का अंतर है घर तो फिर बन जायेगा किन्तु क्या मनीषा वापस आएगी . दुनिया की कोई ताकत अब उसे वापस नहीं ला सकती . ऐसी दोहरी निति से आपने स्वयं ही साबित कर दिया की तलुवे चाटो और मौज करो ......
( शरद पंसारी - संपादक शौर्यपथ दैनिक समाचार )
हाथरस / शौर्यपथ / उत्तर प्रदेश के हाथरस में हुए कथित गैंगरेप की घटनास्थल से कुछ दूर दो युवा खड़े हैं. एक ने कमर पर कीटनाशक छिड़कने वाली मशीन बांध रखी है. वो अपनी फ़सल पर कीटनाशक छिड़कने निकले थे. खेत पर जाने के बजाए वो यहाँ चले आए हैं.
ये दलित युवा बेहद आक्रोशित हैं. वो पीडि़ता को नहीं जानते. पूछने पर कहते हैं, "हमारी बहन के साथ दरिंदगी हुई है. हमारा ख़ून उबल रहा है. जबसे सोशल मीडिया पर उसके बारे में पढ़ा है, हम बेचैन हैं. हम अब ऐसी घटनाओं को बर्दाश्त नहीं करेंगे. चुनाव आने दो, इसका जवाब दिया जाएगा."
हालांकि यूपी के एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) प्रशांत कुमार का कहना है कि फ़ोरेंसिक रिपोर्ट में ये साफ़ कहा गया है कि महिला के साथ रेप नहीं हुआ. बल्कि मौत का कारण गर्दन में आई गंभीर चोटें हैं.
वहीं दूसरी ओर दिल्ली के सफ़दरजंग अस्पताल की ओर से जारी बयान में कहा गया है, 'Ó20 वर्ष की महिला को 28 सितंबर को सफ़दरजंग अस्पताल में लाया गया और उनकी हालत काफ़ी गंभीर थी. जब उन्हें भर्ती किया गया तो वह सर्वाइकल स्पाइन इंजरी, क्वेड्रिफ़्लेजिया (ट्रॉमा से लकवा मारना) और सेप्टिकेमिया (गंभीर संक्रमण) से पीडि़त थीं. 'Ó
हालांकि यूपी पुलिस ये बार बार कह रही है कि रीढ़ की हड्डी नहीं टूटी बल्कि गर्दन की हड्डियां टूटी थी जो गला दबाने की कोशिश में टूट गईं. और यही मौत का कारण है.
यहाँ बाजरे के खेत हैं. गाँव को मुख्य मार्ग से जोडऩे वाली सड़क से कऱीब 100 मीटर दूर बाजरे के ही खेत में कथित गैंगरेप हुआ था. घटनास्थल पर पत्रकारों का आना-जाना लगा है. यहाँ मिले कुछ स्थानीय पत्रकार कहते हैं, "ये घटना उतनी बड़ी थी नहीं, जितनी बना दी गई है. इसकी सच्चाई कुछ और भी हो सकती है."
जब मैंने उनसे पूछा कि अगर सच्चाई कुछ और है, तो फिर आपने रिपोर्ट क्यों नहीं की, उनका कहना था, "इस घटना को लेकर भावनाएँ उबाल पर हैं. हम अपने लिए कोई ख़तरा मोल क्यों लें?" हालाँकि अपनी बात के समर्थन में उनके पास कोई ठोस सबूत नहीं थे. वो सुनी-सुनाई बातें ही ज़्यादा कह रहे थे. ये 'बातेंÓ आगे चलकर गाँव में भी सुनाई दीं.
स्थानीय पत्रकारों के साथ हुई अनौपचारिक बातचीत से उठे सवाल को हाथरस के एसपी विक्रांत वीर का ये बयान और गहरा करता है कि 'मेडिकल रिपोर्ट तैयार करने वाले डॉक्टरों ने अभी रेप की पुष्टि नहीं की है. फ़ॉरेंसिक जाँच की रिपोर्ट का इंतज़ार किया जा रहा है. उसके बाद ही इस बारे में स्पष्ट राय दी जा सकेगी.Ó
कथित गैंगरेप का शिकार हुई पीडि़ता के परिवार को अभी भी मेडिकल रिपोर्ट नहीं दी गई है. जब पीडि़ता को दिल्ली के सफ़दरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था, तब भी उनके परिजनों के पास मेडिकल रिपोर्ट नहीं थी.
पीडि़ता के भाई कहते हैं, "पुलिस ने हमें पूरे कागज़़ नहीं दिए हैं. हमारी बहन की मेडिकल रिपोर्ट भी अभी हमें नहीं दी गई है." जब इस बारे में एसपी विक्रांत वीर से सवाल किया गया तो उनका कहना था कि ये जानकारी गोपनीय है. जाँच का हिस्सा है. हम घटना से जुड़े हर सबूत जुटा रहे हैं. फ़ॉरेंसिक सबूत भी इक_े किए गए हैं.
एसपी बार-बार इस बात पर ज़ोर देते हैं कि पीडि़ता के साथ उस तरह की दरिंदगी नहीं हुई, जिस तरह मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है. वो कहते हैं, "उनकी जीभ नहीं काटी गई थी. रीढ़ की हड्डी भी नहीं टूटी थी. गले पर दबाव बढऩे की वजह से उनकी गले की हड्डी टूटी थी जिससे नर्वस सिस्टम प्रभावित हुआ था." घटना के कुछ देर बाद रिकॉर्ड किए गए एक वीडियो में पीडि़ता ने अपने साथ बलात्कार की बात नहीं की है. इसमें उन्होंने मुख्य अभियुक्त का नाम लिया है और हत्या के प्रयास की बात की है.
हालाँकि अस्पताल में रिकॉर्ड किए गए एक दूसरे वीडियो में और पुलिस को दिए गए बयान में पीडि़ता ने अपने साथ गैंगरेप की बात की है. इस वीडियो में पीडि़ता कहती है कि मुख्य अभियुक्त ने उसके साथ पहले भी छेडख़़ानी और रेप करने की कोशिश की थी. घटना के दिन के बारे में वो बताती हैं, "दो लोगों ने रेप किया था, बाक़ी मेरी माँ की आवाज़ सुनकर भाग गए थे."
घटना के दिन को याद करते हुए पीडि़ता की माँ कहती हैं, "मैं घास काट रही थी, मैंने बेटी से कहा कि घास को इक_ा कर ले, वो घास इक_ा कर रही थी. एक ही ढेरी बना पाई थी. मुझे जब वो नहीं दिखी तो मैं उसे ढूँढती फिरी. घंटा भर तक उसे ढूँढती रही. मुझे लगा कहीं घर तो नहीं चली गई है. मैंने खेतों के तीन चक्कर काटे. फिर मेढ़ के पास खेत में पड़ी मिली. गले में चुन्नी खींच रखी थी. वो बेहोश पड़ी थी. सारे कपड़े उतरे पड़े थे."
वो पीछे गर्दन की ओर इशारा करते हुए कहती हैं, "रीढ़ की हड्डी टूटी हुई थी. जीभ कटी हुई थी. ऐसा लग रहा था जैसे फ़ालिज मार गया हो. मेरी लड़की में बिल्कुल जान नहीं थी." पीडि़ता ने अपने सबसे पहले बयान में सिफऱ् एक युवक का ही नाम लिया था. इस सवाल पर उसकी माँ कहती हैं, "जब हम उसे बाजरा में से निकाल के ले गए, वो पूरी तरह बेहोश नहीं हुई थी, तब उसने एक का ही नाम बताया था. फिर एक घंटे बाद बेहोश हो गई. चार दिन बाद सुध आई तो पूरी बात बताई कि चार लड़के थे."
पीडि़ता का परिवार उसे अस्पताल ले जाने से पहले चंदपा थाने लेकर गए थे. ये थाना घटनास्थल से कऱीब पौने दो किलोमीटर दूर है. उसकी माँ कहती हैं, "वो रास्ते भर ख़ून की उल्टियाँ कर रही थी. जीभ नीली पड़ती जा रही थी. मैंने उससे पूछा कि बेटा कुछ बता, उसने बस इतना कहा कि मेरा गला दबा हुआ है, मैं बता नहीं सकती हूँ. फिर वो बेसुध हो गई."
सफ़दरजंग अस्पताल ने पीडि़ता की जो ऑटॉप्सी रिपोर्ट जारी की है, "उसमें मौत का कारण गले के पास रीढ़ की हड्डी में गहरी चोट और उसके बाद हुई दिक़्क़तों को बताया गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि उसके गले को दबाए जाने के निशान हैं, लेकिन मौत की वजह ये नहीं है. मेडिकल रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि अभी विसरा रिपोर्ट आनी बाक़ी है और उसके बाद ही मौत की सही वजह बताई जा सकेगी."
पीडि़ता की मौत के बाद सफ़दरजंग अस्पताल की प्रवक्ता ने कहा था, "20 वर्ष की महिला 28 सितंबर को साढ़े तीन बजे नए इमरजेंसी ब्लॉक में न्यूरो सर्जरी के तहत दाख़िल हुई थी. उन्हें अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज से रेफऱ किया गया था. भर्ती के समय उनकी स्थिति बहुत नाज़ुक थी. उन्हें सर्वाइकल स्पाइन इंजरी, क्वाड्रीप्लीजिया और सेप्टीसीमिया था. भरसक प्रयास और इलाज के बावजूद उनका कल 29 सितंबर को सुबह 6.25 बजे देहांत हो गया."
14 सितंबर को हुए इस कथित गैंगरेप के मामले में पुलिस ने एफ़आईआर की धाराओं को तीन बार बदला है. पहले सिफऱ् हत्या के प्रयास का मुक़दमा दर्ज किया गया था. उसके बाद गैंगरेप की धाराएँ जोड़ीं गईं. दिल्ली के अस्पताल में 29 सितंबर को पीडि़ता की मौत के बाद हत्या की धाराएँ भी जोड़ी गई हैं.
पुलिस ने इस मामले में पहली गिरफ़्तारी पाँच दिन बाद की थी. क्या पुलिस से जाँच में लापरवाहियाँ हुई हैं, इस सवाल पर पुलिस अधीक्षक कहते हैं, "14 सितंबर को सुबह लगभग साढ़े नौ बजे पीडि़ता अपनी माँ और भाई के साथ थाने आईं थीं. पीडि़ता के भाई ने पुलिस को दी शिकायत में कहा था कि मुख्य अभियुक्त ने हत्या की मंशा से उसका गला दबाया है. साढ़े नौ बजे मिली इस सूचना पर हमने साढ़े दस बजे एफ़आईआर कर ली थी."
एसपी विक्रांत वीर कहते हैं, "पीडि़ता को तुरंत जि़ला अस्पताल भेजा गया था. जहाँ से उसे अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज रेफऱ कर दिया गया था. इलाज भी तुरंत शुरू हो गया था. तहरीर के आधार पर पहली एफ़आईआर 307 और एससी-एसटी एक्ट की दर्ज की गई थी. फिर पीडि़ता जब कुछ बोलने लायक़ हुई, तो इंवेस्टिगेटिंग ऑफि़सर, जो सर्किल ऑफि़सर हैं, ने बयान लिए, उसमें पीडि़ता ने एक और लड़के का नाम लिया और कहा कि उसके साथ छेडख़़ानी की गई. ये बयान हमारे पास ऑडियो-वीडियो में है. इस बयान के बाद एक और अभियुक्त का नाम रिपोर्ट में जोड़ा गया."
"इसके बाद 22 तारीख़ को पीडि़ता ने अपने साथ दुष्कर्म और चार लोगों के शामिल होने की बात बताई. जब उससे पूछा गया कि पहले उसने दो लोगों का नाम क्यों लिया था और छेड़छाड़ की बात क्यों बताई थी तो उसने कहा इससे पहले उसे बहुत होश नहीं था. पीडि़ता के इस बयान के बाद हमने 376डी यानी गैंगरेप की धारा जोड़ी और अभियुक्तों की गिरफ़्तारी के लिए टीमें गठित कर दीं. जल्दी ही बाक़ी तीनों अभियुक्तों को भी गिरफ़्तार कर लिया गया और जेल भेज दिया गया."
पीडि़ता ने अस्पताल में दिए अपने बयान में गैंगरेप का जि़क्र किया है. लेकिन क्या मेडिकल रिपोर्ट में गैंगरेप की पुष्टि होती है? इस सवाल पर एसपी कहते हैं, "मेडिकल रिपोर्ट एक अहम सबूत है. अभी जो मेडिकल रिपोर्ट हमें मिली है, उसमें डॉक्टरों ने चोटों का अध्ययन किया है लेकिन सेक्शुअल असॉल्ट (यौन हमले) की पुष्टि नहीं की है. अभी उन्हें फ़ॉरेंसिक रिपोर्ट मिलने का इंतज़ार है. उसके बाद ही वो उस पर राय देंगे. पीडि़ता के प्राइवेट पाट्र्स पर भी किसी चोट का जि़क्र नहीं है. ये मेडिकल रिपोर्ट हमारी केस डायरी का हिस्सा होगी."

रात के अंधेरे में अंतिम संस्कार
पुलिस ने मंगलवार देर रात पीडि़ता का अंतिम संस्कार कर दिया था. परिजनों का आरोप है कि उन्हें घर में बंद करके ज़बरदस्ती अंतिम संस्कार किया गया. हालाँकि पुलिस का कहना है कि परिजनों की मौजूदगी में अंतिम संस्कार हुआ.
इस तरह रात के अंधेरे में ज़बरदस्ती किए गए अंतिम संस्कार के बाद परिजनों और दलित समुदाय का ग़ुस्सा और भड़क गया है. कुछ लोग इसे पीडि़ता का 'दूसरा बलात्कार बता रहे थे.Ó वहीं पुलिस के इस कृत्य को साक्ष्य मिटाने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है. आक्रोशित लोगों का कहना था कि पुलिस ने इस तरह अंतिम संस्कार करके 'दोबारा पोस्टमार्टम की संभावना को ख़त्म कर दिया है.Ó
पीडि़ता के भाई ने बीबीसी से कहा, "हमारे रिश्तेदारों को पीटा गया. ज़बरदस्ती उसे जला दिया. हमें तो पता भी नहीं कि पुलिस ने किसका अंतिम संस्कार किया है. आखऱिी बार चेहरा तक नहीं देखने दिया गया. पुलिस को ऐसी क्या जल्दी थी?"
जब हमने एसपी से यही सवाल किया तो उनका कहना था, "मौत हुए काफ़ी देर हो चुकी थी. पोस्टमार्टम और पंचनामे की कार्रवाई होते-होते 12 बज गए थे. कुछ कारणों से पीडि़ता का शव तुरंत नहीं लाया जा सका था. पीडि़ता के पिता और उनके भाई शव के साथ ही आए थे. परिजनों ने रात में ही अंतिम संस्कार करने का फ़ैसला किया था. पुलिस ने क्रियाकर्म के लिए लकडिय़ाँ और अन्य चीज़ें इक_ा करने में मदद की थी. परिजनों ने ही अंतिम संस्कार किया था."
क्या कहना है अभियुक्तों के परिजनों का?
पीडि़ता के घर से अभियुक्तों का घर बहुत दूर नहीं है. एक बड़े संयुक्त घर में तीन अभियुक्तों के परिवार रहते हैं. जब मैं यहाँ पहुँचा, तो घर में सिफऱ् महिलाएँ हीं थीं. उनका कहना था कि उनके बच्चों को झूठा फँसाया गया है. एक अभियुक्त 32 साल का है और तीन बच्चों का पिता है. दूसरा 28 साल का है और उसके दो बच्चे हैं. बाक़ी दो की उम्र 20 साल के आसपास है और उनकी शादी नहीं हुई है.
जब उनकी माओं से पूछा गया कि अगर उनके बेटे शामिल नहीं हैं, तो फिर उनका नाम क्यों लिया गया है तो उनका कहना था, "बहुत पुरानी रंजिश है. इनका तो काम ही यही है. झूठे आरोप लगा दो. फिर बाद में पैसा ले लो. सरकार से भी मुआवज़ा लेते हैं और लोगों से भी."
परिजनों का कहना था कि पुलिस ने उन्हें गिरफ़्तार नहीं किया था बल्कि उन्हें हाजिऱ किया गया था. एक महिला कहती हैं, "जब नाम आ गया तो हमने अपने बालक पुलिस के हाथ में दे दिए." एक अभियुक्त की माँ कहती हैं कि उनका बेटा दूध की डेयरी पर काम करता है और घटना के दिन वहीं था. उसकी हाजिऱी की जाँच की जा सकती है.
अभियुक्तों के परिजन बार-बार अपने ठाकुर होने और पीडि़ता के परिवार के दलित होने का जि़क्र कर रहे थे. अभियुक्त की माँ कहती हैं, "हम ठाकुर हैं, वो हरिजन, हमसे उनका क्या मतलब. वो रास्ते में दिखते हैं तो हम उनसे वहाँ दूरी बना लेते हैं. उन्हें छुएँगे क्यों, उनके यहाँ जाएँगे क्यों?"

अभियुक्तों के बारे में क्या कहना है गाँव के लोगों का?
अभियुक्तों के बारे में गाँव की लोगों की राय उनके परिवार से अपने रिश्तों के आधार पर बँटी है. पास के ही ठाकुर परिवार की कुछ महिलाएँ कहती हैं कि एक अभियुक्त तो पहले से ही ऐसा था. सड़क चलती लड़कियों को छेड़ता था. अपने खेत पर काम कर रहे कुछ ठाकुर परिवारों से जुड़े युवक भी कहते हैं, "ये परिवार ऐसा ही है. लड़ाई-झगड़े करते रहते हैं. बड़ा परिवार है, तो इनके डर से कोई कुछ बोलता नहीं है. सभी एकजुट हो जाते हैं. इनका दबदबा है. गाँव में इनके ख़िलाफ़ कोई कुछ नहीं बोलेगा."
कुछ दूर एक दूसरे खेत पर काम कर रहा एक और युवक कहता है, "सर इस घटना के बारे में जैसा आप सोच रहे हैं वैसा नहीं है. अब एसआईटी जाँच करेगी. एक हफ़्ते में सब पता चल जाएगा कि क्या हुआ. देखते रहिए. टीम गाँव आ रही है."
पड़ोस के ही दलित परिवार के एक बुज़ुर्ग कहते हैं, "ये पहली बार नहीं है कि हम पर इस तरह का हमला किया गया है. हमारी बहू-बेटी अकेले खेत पर नहीं जा सकती है. और ये बेटी तो माँ-भाई के साथ गई थी तब भी उसके साथ ये हो गया. इन लोगों ने हमारी जि़ंदगी को नर्क बना दिया है. हम ही जानते हैं इस नर्क में हम कैसे रह रहे हैं."
गांव में जातिवाद
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से कऱीब 160 किलोमीटर दूर बसे इस गाँव में अधिकतर ठाकुर और ब्राह्मण परिवार ही रहते हैं. दलितों के कऱीब दर्जनभर घर हैं, जो आसपास ही हैं.
दलितों और गाँव के बाक़ी लोगों के बीच सीधा संबंध नजऱ नहीं आता है. इस घटना के बाद तथाकथित उच्च जाति के लोगों ने पीडि़ता के घर जाकर सांत्वना नहीं दी है. पीडि़ता के रिश्तेदार भी यही कहते हैं कि दूसरी जाति के लोगों से उनका संबंध नहीं है. एक अभियुक्त का नाबालिग़ भाई अपने भाई को निर्दोष बताते हुए बार-बार अपनी जाति का जि़क्र करता है. वो कहता है, "हम गहलोत ठाकुर हैं, हमारी जाति इनसे बहुत ऊपर है. हम इन्हें हाथ लगाएँगे, इनके पास जाएँगे."
दलितों में भड़कता आक्रोश
पुलिस ने गाँव पहुँचने के सभी रास्तों पर बैरिकेडिंग की है. अधिकतर लोगों को बाहर ही रोका जा रहा है. पत्रकारों को भी पैदल ही गाँव जाने दिया जा रहा है. दलित समुदाय से जुड़े लोग पीडि़ता के घर पहुँचकर सांत्वना देना चाहते हैं. लेकिन पुलिस उन्हें बाहर ही रोक रही है.
उत्तराखंड से आए दलितों के एक प्रतिनिधिमंडल को भी पुलिस ने बाहर ही रोक दिया. इसमें शामिल लोग कहते हैं, "सरकार हमारे साथ बहुत अन्याय कर रही है, हम इसे अब और नहीं सहेंगे. हम अपने लोगों के घर जाकर उन्हें ढांढस भी नहीं बंधा सकते." इस समूह में शामिल एक युवा कहता है, "इस सरकार का घमंड अब चुनावों में ही टूटेगा."
मैंने गाँव से मुख्य मार्ग तक जाने के लिए एक बाइक सवार से लिफ़्ट ली. ये यहाँ से कऱीब 30 किलोमीटर दूर स्थित एक गाँव का कोई 18-20 साल की उम्र का युवा था. वो नोएडा में नौकरी करता है और घटना का पता चलने के बाद यहाँ आया है.
वो कहते हैं, "जब से अपनी बहन के बलात्कार के बारे में पता चला है. चैन से नहीं बैठा हूँ. रोज़ सोशल मीडिया पर उसके बारे में पढ़ रहा था. उसकी मौत की ख़बर सुनते ही तुरंत गाँव चला आया. अगर वो दरिंदे मेरे सामने आए तो गोली मार दूँ."
एसआईटी जाँच
सरकार ने अब इस घटना की जाँच के लिए तीन सदस्यों की स्पेशल इंवेस्टिगेटिंग टीम गठित कर दी है, जो बुधवार शाम हाथरस पहुँच गई. अब गाँव की सीमाओं को मीडिया समेत बाक़ी सभी के लिए सील कर दिया गया है. एसआईटी ने जाँच शुरू कर दी है.
एक सप्ताह बाद एसआईटी को अपनी रिपोर्ट सौंपनी हैं. एसआईआटी की जाँच में ही घटना का पूरा सच पता चल सकेगा. घटना का सच जो भी है, इससे शायद अब बहुत ज़्यादा फ़कऱ् नहीं पड़ेगा. दलित समुदाय का ग़ुस्सा इस घटना के बाद भड़क गया है, उसे अब थामना बहुत आसान नहीं होगा.
पुलिस की भूमिका पर उठते सवाल
इस घटना के बाद पुलिस की शुरुआती जाँच और भूमिका पर कई गंभीर सवाल उठे हैं, जिनके जवाब अभी नहीं मिल सके हैं.
1. पुलिस ने घटना स्थल को सील क्यों नहीं किया. घटना के पहले दिनों में वहाँ से साक्ष्य क्यों नहीं जुटाए?
2. रात के अंधेरे में ज़बरदस्ती अंतिम संस्कार क्यों किया?
3. पीडि़ता के परिवार के साथ उसकी मेडिकल रिपोर्ट साझा क्यों नहीं की?
4. तकनीकी साक्ष्य क्यों नहीं जुटाए गए और अभियुक्तों की गिरफ़्तारी में देर क्यों की गई?
हालाँकि इन सवालों पर हाथरस के एसपी विक्रांत वीर का कहना था, "पुलिस ने अपने काम में कोई लापरवाही नहीं की है. सभी सबूत जुटाए गए हैं और जुटाए जा रहे हैं. घटना की विवेचना निष्पक्षता से की जा रही है. कोई गुनाहगार बचेगा नहीं और किसी बेगुनाह को झूठा फँसाया नहीं जाएगा."
वो कहते हैं, "हमारी जाँच अपनी रफ़्तार से चल रही है, हम मामले को फ़ॉस्ट ट्रैक अदालत ले जाकर पीडि़ता को इंसाफ़ दिलाएँगे."
(समाचार संकलन बीबीसी हिंदी से )
मुंबई / शौर्यपथ / मुंबई में वडाला GRP ने लोकल में यात्रा करने के लिए फर्जी QR कोड बनाने वाले शख्स का पर्दाफाश किया है. मामले में मुख्य आरोपी अनीस राठौड़ के साथ फर्जी QR कोड पर यात्रा करने वाले कुछ यात्रियों को भी गिरफ्तार किया गया है. वडाला GRP के वरिष्ठ निरीक्षक राजेन्द्र पाल ने बताया कि कुछ दिन पहले वडाला रेल स्टेशन पर दो यात्रियों को फर्जी QR कोड पर यात्रा करते पकड़ा गया था. मुंबई में ऐसे 6 स्टेशनों पर अलग-अलग मामले सामने आने पर पुलिस ने जब जांच शुरू की तो सभी में अनीस राठौड़ का नाम सामने आया.
अनीस के घर पर दबिश दी गई तो उसके घर से कंप्यूटर और बाकी साहित्य जब्त हुए. अनीस ने पूछताछ में बताया कि वह 500 से 1000 रुपये लेकर फर्जी QR कोड बनाकर देता था. अब तक 500 के करीब लोगों को कोड बेच चुका है.
कोरोना काल में जो लोग सरकारी या अत्यावश्यक सेवा में हैं, उन्हें ही लोकल से यात्रा करने की इजाजत है. इसके लिए QR कोड बनाकर दिया जाता है. पता चला है कि अनीश से QR कोड लेने वाले ज्यादातर गरीब मजदूर हैं, जो खाने के स्टॉल पर काम करते हैं.
नई दिल्ली / शौर्यपथ / राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की यात्रा के लिए विशेष रूप से निर्मित बी-777 विमान गुरुवार को अमेरिका से भारत पहुंचेगा. सरकारी अधिकारियों ने यह जानकारी दी. अधिकारियों ने बताया कि विमान को अगस्त में ही विमान निर्माता कंपनी बोइंग द्वारा एअर इंडिया को सौंपा जाना था, लेकिन तकनीकी कारणों से इसमें देरी हुई.
अधिकारियों ने बताया कि बोइंग से विमान प्राप्त करने के लिए एअर इंडिया के वरिष्ठ अधिकारी अगस्त में ही अमेरिका पहुंच गए थे.
विमान बृहस्पतिवार को अपराह्न लगभग तीन बजे टेक्सास से दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरेगा. उन्होंने कहा कि वीवीआईपी की यात्रा के लिए एक और विशेष रूप से निर्मित बी777 विमान बाद में बोइंग से प्राप्त होने की संभावना है. उम्मीद की जा रही थी कि VVIP यात्रा के लिए इन दोनों विमानों को जुलाई तक सौंप दिया जाएगा, लेकिन कोविड-19 के कारण इनकी आपर्ति में कुछ महीनों की देरी हुई है. एक अधिकारी ने बताया कि वीवीआईपी की यात्रा के दौरान, दोनों बी777 विमानों को एअर इंडिया के पायलट नहीं, बल्कि भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के पायलट उड़ाएंगे. गौरतलब है कि वर्तमान में, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री एअर इंडिया के बी747 विमानों से यात्रा करते हैं.
पटना / शौर्यपथ / बिहार की राजधानी पटना में इन दिनों घरों में चोरी आम बात है लेकिन बुधवार को प्रख्यात कथाकार फणीश्वरनाथ रेणु के पटना स्थित आवास पर चोरों ने हाथ साफ़ कर लिया. चोरों ने उनकी कई सारी साहित्य विरासत और पांडुलिपियां चुराकर ले गए .जिसमें रेणु जी के परती परिकथा , मैला आंचल और सत्तर के दशक में चुनाव में हार के बाद अधूरी लिखी काग़ज़ की नांव शामिल हैं . परिवार के सदस्यों की माने तो इसके अलावा कई और किताबें, दुर्लभ चिट्टियां और उनके विधायक रहे पुत्र पद्म प्रयाग रेणु के अहम काग़ज़ात भी शामिल हैं.
इस चोरी की घटना को अंजाम देने वाले चोरों ने किसी महंगे समान जैसे टीवी, फ़्रिज को हाथ भी नहीं लगाया. परिवार वाले उनके हस्तलिखित पांडुलिपि के चोरी होने से अधिक दुखी हैं .पटना के राजेंद्र नगर स्थित इस घर में फ़िलहाल उनके छोटे बेटे का एक सम्बंधी रहता था जो घटना के समय बाहर गया हुआ था.
हालांकि इससे पूर्व उनके गांव में रेणु स्मृति भवन में भी इस साल जनवरी में चोरी हुई थी .हालांकि इस घटना के बाद पटना पुलिस के वरीय अधिकारी पहुंचे और सीसीटीवी में उन्हें चोरों का सुराग भी मिला है . लेकिन इस घटना ने पूरे राज्य में विधि व्यवस्था और ख़ासकर राजधानी पटना में चोरों के बढ़ते साम्राज्य को फिर से दर्शाया हैं . रेणु जी की लिखी मारे गये गुलफाम पर तीसरी क़सम फिल्ब बनी थी वहीं मैला आंचल पर धारावाहिक बन चुका हैं.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
