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चेन्नई / शौर्यपथ/ अभिनेता-नेता कमल हासन ने विवादास्पद कृषि विधेयकों को समर्थन देने पर तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी अन्नाद्रमुक की आलोचना की है और इसे राज्य के किसानों के साथ धोखा करार दिया है. हासन ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए ये बिल राज्यों की स्वायत्तता पर हमला है. उन्होंने कहा कि नए कानून के बाद राज्य कुछ नहीं कर सकेंगे और इससे राज्यों में खतरनाक स्थिति उत्पन्न होगी. हासन ने कहा कि राज्य सरकारें न तो कृषि वस्तुओं की कीमतें घटा-बढ़ा सकेंगी न ही उसकी कमी दूर कर सकेंगी. हासन ने राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद से बिलों को वापस करने का आग्रह किया है, जिसे पिछले हफ्ते संसद ने पारित किया था.
एक बयान जारी कर कमल हासन ने कहा, "मुख्यमंत्री ई पलानीस्वामी ने विवादित बिलों का समर्थन कर तमिलनाडु के किसानों को धोखा दिया है." उन्होंने चेतावनी दी है कि जो किसान आपको सत्ता की कुर्सी पर बिठाते हैं, वो आपको धूल में भी मिला सकते हैं.
तमिलनाडु में अगले साल 2021 में विधान सभा चुनाव होने हैं. AIADMK बीजेपी की सहयोगी पार्टी है जिसकी केंद्र में सरकार है. हासन ने अपने बयान में कहा कि संघीय ढांचे में खेती केंद्र और राज्य का विषय हमेशा से रहा है लेकिन राज्य अपने-अपने हिसाब से कानून बनाते रहे हैं. नए कानून से सभी राज्यों के प्रत्येक किसान कोखतरा पहुंचने का अंदेशा है.
हासन ने कहा, "प्रस्तावित कानून देश के किसी भी हिस्से में माल की आवाजाही की अनुमति देता है; यह खाद्य सुरक्षा के लिए खतरा है और एक खतरनाक स्थिति पैदा करेगा क्योंकि राज्य माल की कमी या उसके मूल्य वृद्धि के बीच कुछ भी नहीं कर पाएगा."
नई दिल्ली / शौर्यपथ / जयपुर पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह का आज 82 वर्ष की आयु में दिल्ली में निधन हो गया. जसवंत सिंह ने राजनीति में शामिल होने के लिए सेना में अपना करियर छोड़ दिया था, अजमेर के मेयो कॉलेज के पूर्व छात्र , उन्होंने अपने करियर में एक सुधार किया क्योंकि उन्हें लगा कि वह सेना में रहते हुए कुछ अलग नहीं कर पाएंगे. भारतीय सेना की सेंट्रल इंडिया होर्स (आर्म्ड रेजिमेंट) में उन्होंने अपना पहला चुनाव राजस्थान के ओसियां से निर्दलीय विधायक के रूप में लड़ा - जो अपने गृह नगर जसोल के करीब था. लेकिन 1980 के दशक में राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.
उन्होंने चार लोकसभा चुनाव जीते और पांच बार राज्यसभा के सदस्य रहे. जोधपुर के पूर्व राजघरानों के घरों में से यह उनका समय था. उन्हें भैरोसिंह शेखावत जैसे राज्य के उभरते राजनीतिक नेताओं के संपर्क में रखा.
वाजपेयी से मुलाकात के बाद...
उनके राजनीतिक जीवन में महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब उन्होंने 1970 के दशक में विजयराजे सिंधिया के करीबी सरदार आंग्रे से अटल बिहारी वाजपेयी से मुलाकात की.उनकी दोस्ती जीवन भर चली.दोनों ने साहित्यिक चीजों के लिए स्वाद साझा किया,और जसवंत सिंह के करीबी याद करते हैं कि कैसे उन्होंने और वाजपेयी ने आम हितों - राजनीति, गद्य और विदेशी मामलों को साझा करने में एक साथ शामें बिताईं.
जसवंत सिंह के बेटे मानवेंद्र ने एक लेख में याद किया था कि कैसे उनके पिता को अक्सर "अटलजी के हनुमान" कहा जाता था.जसवंत सिंह के पास आरएसएस की पृष्ठभूमि नहीं थी.लेकिन वाजयेपी और लालकृष्ण आडवाणी के साथ उनकी निकटता ने सुनिश्चित किया कि उनकी प्रतिभा को पहचान मिली.
कंधार विमान हाईजैक
अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में, जसवंत सिंह ने वित्त मंत्री, विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री के रूप में कार्य किया. वह योजना आयोग के उपाध्यक्ष, राज्यसभा में विपक्ष के नेता और लोकसभा में विपक्ष के उपाध्यक्ष थे. विदेश मंत्री के रूप में, वह पोखरण में परमाणु परीक्षणों के बाद अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाने के लिए भारत के मामले को उठाने में सहायक बने. सिंह ने क्लिंटन प्रशासन में अमेरिकी विदेश मंत्री मैडलिन अलब्राइट के साथ घनिष्ठ व्यक्तिगत मित्रता साझा की.
लेकिन अपने कार्यकाल में सिंह को भी कंधार अपहरण प्रकरण से निपटने के लिए आलोचना झेलनी पड़ी, जब भारत सरकार ने मसूद अजहर जैसे आतंकवादियों को एयर इंडिया के यात्रियों को बंधक बनाकर रिहा करने के लिए रिहा कर दिया. जसवंत ने बंधकों को वापस लाने के लिए अफगान शहर के लिए उड़ान भरी थी.
जसवंत से जुड़ा जिन्ना विवाद
भाजपा के संस्थापक सदस्य, जसवंत सिंह पार्टी की विचारधारा के साथ तालमेल नहीं रखने के विचार व्यक्त करने से नहीं कतराते. उनकी पुस्तक "जिन्ना: इंडिया पार्टिशन इंडिपेंडेंस" 2009 में प्रकाशित हुई, जिसने जिन्ना की प्रशंसा की और विभाजन के लिए कांग्रेस को दोषी ठहराया, ऐसा ही एक उदाहरण है. पाकिस्तान के संस्थापक जिन्ना की जगह जसवंत सिंह ने जवाहरलाल नेहरू और वल्लभ भाई पटेल पर विभाजन का आरोप लगाया था.
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि जिन्ना विवाद में लालकृष्ण आडवाणी का समर्थन करने वाले नेता तब निराश हो गए थे जब आडवाणी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी. लेकिन वह अपने विचारों और उस विशाल विवाद पर पीछे नहीं हटे जिसके कारण जसवंत सिंह का निष्कासन हुआ.
शिमला में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में, पार्टी गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के दबाव में आई, जिन्होंने कहा कि वल्लभभाई पटेल एक प्रतिष्ठित व्यक्ति थे. गुजरात सरकार ने जसवंत सिंह की किताब पर प्रतिबंध लगा दिया था. उस समय दार्जिलिंग से जसवंत सिंह सांसद थे. उन्हें अपने मूल राजस्थान, बंगाल से दूर पहाड़ी जिले से चुनाव लड़ने के लिए भेजा गया था.
चूंकि उनकी सेना की पृष्ठभूमि निर्वाचन क्षेत्र में गोरखा मतदाताओं के साथ अच्छी थी. गोरखा दशकों से बंगाल सरकार के साथ अपनी राज्य की मांग पर अड़े हुए हैं.
मोदी को गुजरात सीएम पद से हटाना चाहते थे वाजपेयी
अपनी किताब में जसवंत सिंह ने यह भी दावा किया कि वाजपेयी नरेंद्र मोदी को गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री पद से बर्खास्त करना चाहते थे, लेकिन लालकृष्ण आडवाणी ने उन्हें रोक दिया. उन्होंने यह भी दावा किया कि गुजरात के दंगों के बाद वाजपेयी ने पीएम पद से इस्तीफा देना चाहा था, लेकिन सिंह के हाथ पकड़ने के बाद उन्होंने अपना त्याग पत्र लिखना बंद कर दिया.
मई चुनाव के तुरंत बाद जसवंत सिंह को अगस्त में अपने दिल्ली निवास में अटैक का सामना करना पड़ा और वो कोमा में चले गए. उनका इलाज आर्मी रिसर्च एंड रेफरल अस्पताल में चल रहा था.
नरसिंह राव को रोकनी पड़ी अहम योजना
सैन्य और विदेशी मामलों में गहरी रुचि रखने वाले एक विद्वान और राजनयिक, जसवंत सिंह ने आठ से अधिक पुस्तकें लिखीं. उनकी पुस्तक "ए कॉल टू ऑनर" ने विवाद को आकर्षित किया जब उन्होंने 1995 में नरसिम्हा राव सरकार में एक गुप्तचर के बारे में लिखा था, जिसके कारण सरकार ने अमेरिका के दबाव में अपनी परमाणु योजना को आगे नहीं बढ़ाया.
जस्सू (उनके दोस्त उन्हें इसी नाम से बुलाते) को शब्दों के एक व्यक्ति के रूप में सबसे अच्छा याद किया जाएगा, एक राजनेता का एक दुर्लभ संयोजन, जो कभी भी अपनी राय व्यक्त करने से पीछे नहीं हटता, जो कि उसकी पार्टी का दृष्टिकोण हो सकता है.
नई दिल्ली / शौर्यपथ /दक्षिणी दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रहे एक छात्र को गिरफ्तार किया है जो फ़र्ज़ी फेसबुक प्रोफाइल बनाकर महिलाओं को अश्लील मैसेज भेजता था. दक्षिणी दिल्ली के डीसीपी अतुल ठाकुर के मुताबिक महरौली में रहने वाली एक महिला ने शिकायत दर्ज कराई कि उसे फेसबुक पर करण नाम एक लड़का भद्दे और अश्लील मैसेज भेजता है. दक्षिणी दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने जब केस दर्ज कर जांच शुरू की और उस फेसबुक प्रोफाइल का आईपी कॉल लॉग फ़ेसबुक से लिया तो तकनीकी जांच के बाद उसे पकड़ लिया गया.
आरोपी की पहचान महरौली के रहने वाले काफिल के तौर पर हुई. उसने करण नाम से फेसबुक पर फ़र्ज़ी प्रोफाइल बनाया हुआ था और वो आदतन महिलाओं को फेसबुक पर अश्लील मैसेज भेजता था.
पुलिस के मुताबिक काफिल दिल्ली विश्वविद्यालय से डिस्टेंस एजुकेशन से बीए कर रहा है. वो फर्स्ट ईयर का छात्र है. उसके पिता महरौली में ही मीट शॉप चलाते हैं. पुलिस ने आरोपी का मोबाइल भी जब्त कर लिया है.
नई दिल्ली / शौर्यपथ /बिहार के पूर्व DGP गुप्तेश्वर पांडे रविवार की शाम राज्य की सत्ताधारी पार्टी जनता दल यूनाइडेड में शामिल हो गए. गुप्तेश्वर पांडे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास पर पार्टी में शामिल हुए. पांडे शनिवार को भी जेडीयू दफ्तर गए थे और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की थी लेकिन पार्टी में शामिल नहीं हो सके थे. पांडे ने चुनावी पारी खेलने के लिए ही पिछले दिनो डीजीपी पद से इस्तीफा देते हुए स्वैच्छिक सेवानिवृति (वीआरएस) ली थी. माना जा रहा है कि गुप्तेश्वर पांडे अपने गृह जिले बक्सर से चुनाव लड़ सकते हैं.
शनिवार को पांडे जेडीयू दफ्तर में करीब 10 मिनट तक रहे थे. इसी दौरान उन्होंने सीएम से मुलाकात की थी. बाहर जब मीडिया ने उनसे पूछा था कि कब जेडीयू में शामिल हो रहे हैं, तब उन्होंने कहा था कि वह फिलहाल किसी भी दल में शामिल होने नहीं जा रहे. वह सिर्फ शिष्टाचार मुलाकात करने आए थे क्योंकि सीएम ने बतौर डीजीपी काम करने के लिए अच्छा माहौल दिया था.
हालांकि, पांडे ने इशारा किया था कि उनके समर्थक चाहते हैं कि वो चुनाव लड़ें. इस दौरान पांडे नेनीतीश सरकार की शराबबंदी से लेकर बिजली, सड़क और विकास के तमाम काम की खुलकर प्रशंसा की. पांडे के अलावा एक और पूर्व डीजी ने जेडीयू के साथ अपना सियासी सफऱ शुरू किया है. पूर्व डीजी (भवन निर्माणः सुनील कुमार ने पिछले महीने ही जेडीयू ज्वाइन किया था.
पिछले महीने पांडे तब सुर्खियों में थे, जब उन्होंने सुशांत सिंह राजपूत मौत के केस में रिया चक्रवर्ती पर औकात से जुड़ी टिप्पणी की थी. गुप्तेशवर पहले पूर्व डीजी (महानिदेशक) नहीं है जो रिटायरमेंट के बाद सियासी पारी खेलने जा रहे हैं.
शौर्यपथ लेख । पत्रकार यानी कि चौथा स्तंभ जो कि अब नाम का ही चौथा स्तंभ है । कौन सा पत्रकार सुरक्षित रहेगा कौन सा पत्रकार असुरक्षित अब ये सत्ता के ऊपर निर्भर हो गया है । अगर पत्रकार सत्ता के अवैधानिक कार्यो को उजागर कर तो वह पत्रकार ज्यादा समय तक सुरक्षित नही हो सकता । आज पत्रकार को सुरक्षित रहना है तो सत्ता के हिसाब से चलना पड़ता है तभी पत्रकार सुरक्षित रह सकता है ये छोटे और बड़े बेनर के पत्रकार को अच्छे से मालूम है । किंतु आज भी ऐसे पत्रकार है जो 1947 से पहले की शैली अपना रहे है जब देश गुलाम था जब अंग्रेजो का शासन था तब के पत्रकार ऐसे थे जो कलमवीर थे और खुल कर अपनी बात लिखते थे गुलाम भारत मे भी पत्रकार उतने असुरक्षित नही थी जितने आज है । आज अधिकतर बेनर किसी ना किसी राजनैतिक पार्टी की विचारधारा के आगोश में है अगर वह विचारधारा सत्ताधारी के अनुसार हो तो सुरक्षित ही नही समृद्ध पत्रकार की श्रेणी में गिना जाएगा । ऐसा नही है कि सिर्फ छत्तीसगढ़ में ये हालात है पूरे देश मे यही आलम है तभी तो पत्रकार या तो किसी समिति के अध्यक्ष है किसी सदन के सदस्य है या फिर किसी दल के अघोषित प्रचारक । देश मे गरीबी , शिक्षा , स्वास्थ्य , रोजगार के मुद्दे अब गायब हो गए है उसकी जगह ले ली है बेतुकी बातों ने फला हीरोइन कितने बार कपड़े बदली कितने बार रोइ कितने बार हंसी क्या पहनी क्यो पहनी , फला आदमी देश भक्त है या समाज का दुश्मन ये फैसला कुछ चापलूस पत्रकार अपने आकाओं को खुश करने के लिए उछलते रहते है और खुद को न्याय पालिका तक समझते है । ऐसी ऐसी बाते सामने लाते है कि कभी कभी ऐसा लगता है देश की इंटेलिजेंस एजेंसी सिर्फ टाइम पास कर रही असली काम यही कर रहे एक प्रश्नवाचक चिन्ह और सूत्र की बात कर किसी को बजी देशद्रोही , समाज का दुश्मन , देशभक्त , समाज सुधारक तक का तमगा दे देते है । कुछ ऐसे ही पक्षपात और एकतरफा स्थिति के कारण भूपेश सरकार ने चुनाव के समय पत्रकार सुरक्षा कानून की बात की थी और इस चुनावी वादों को मूर्त रूप देने का आश्वासन दिया था । आज भूपेश सरकार को सत्ता संभाले लगभग दो साल हो गए किन्तु आज भी छत्तीसगढ़ में पत्रकार सुरक्षित नही है जब भी पत्रकारों पर कोई हमला होता है तो इसे आपसी रंजिश की बात कह कर मामले को दूसरा रूप देने की बात चालू हो जाती है । ऐसे कई मामले सामने आ भी चुके है लेकिन हम वर्तमान मामले की ही बात करे तो कमल शुक्ला के साथ जिस तरह जी घटना हुई उससे एक बार फिर पत्रकार समूह को सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या सरकार गठन के दो साल बाद भी पत्रकारों के लिए सुरक्षा कानून पर कोई ठोस पहल होगी । कई अखबारों में गृह मंत्री का बयान प्रकाशित हुआ कि दोनों पार्टी में वादी परिवादी में जो भी गलत होगा उस पर कार्यवाही होगी गृह मंत्री का यह बयान एक दक्ष राजनैतिक बयान था जिसमे उनके द्वारा पत्रकारों की सुरक्षा की बात पर कोई जवाब नही दिया गया वही दूसरी तरफ कांग्रेस के प्रवक्ता ने कहा कि घटना को अंजाम देने वालो को पार्टी से निष्काषित कर दिया गया क्या निष्कासन ही सही रास्ता है क्या कांग्रेस के मुखिया का वादा स्थानीय कांग्रेस संगठन भूल गया । वीडियो में देखने से साफ लग रहा है कि कमल शुक्ला पर आक्रमण करने वाला किस विश्वास के साथ बात कर रहा था जैसे कि शहर की प्रशासनिक व्यवस्था पर उसका ही राज हो और जब fir दर्ज हुई तो एक शिकायत कमल शुक्ला के खिलाफ प्रेषित कर दी ताकि मामला बराबर का हो जाये । हा भई हो भी सकता है क्योंकि सरकार के एक अपरोक्ष अंग हो सत्ताधारी दल के सक्रिय सदस्य हो इसलिए किसी बात का डर नही आज जब fir दर्ज हुई तो याद आ गया कि कमल शुक्ला ने पूर्व में कभी जान से मारने की धमकी दी थी । चलो याद तो आया पर तब क्यो मौन थे जब जान से मारने की धमकी दी थी तभी पहुंच जाते कानून के दरवाजे और शिकायत कर देते तब किस बात ने रोक रखा था महोदय आपको । एक पत्रकार को सरे आम मार कर कौन सी बहादुरी दिखा दिए पत्रकार ने तो कलम से लड़ाई लड़ी तुम भी कलम से लड़ लेते भाई तुम्हे तो किसी ने नही रोका था शिकायत से । आज जब चौतरफा वीडियो वायरल हुआ तो सब याद आ गया । वैसे तुम भी सही हो महोदय क्योकि पत्रकार एक नही है यहां तो पत्रकारिता में भी राजनीति जगजाहिर है पुराने और वरिष्ठ पत्रकार पर हमला होता है तो बवाल खड़ा हो जाता है किंतु जब मझोले और छोटे पत्रकार पर कोई विपदा आती है तो यही कुछ वरिष्ठ पत्रकार होते है जो समर्थन तो नही करते उल्टे विरोध के स्वर निकलते है । ऐसा नही कि सभी वरिष्ठ पत्रकार ऐसा करते है कुछ ऐसे वरिष्ठ आज भी है जो युवा पीढ़ी का दिल से स्वागत करते है और सही गलत के बारे में बताते है । आज जो भी घटना पत्रकारों के साथ हो रही उसमें कुछ हद तक जिम्मेदार पत्रकार भी है एकता में बल की बात तो करते है पर एकता में अभी भी अभाव है । आज पत्रकार अगर एक हो जाये तो मारपीट की बात तो दूर कोई तिरछी आंख भी नही करेगा । इस तरह की घटना से शासन को , पत्रकारों को भी सीख लेने की ज़रूरत है क्योंकि अगर देश के चार स्तम्भ में से एक स्तम्भ पत्रकार है तो उनकी मजबूती भी सबसे ज्यादा जरूरी है । बस एक बार दिल मे हांथ रखकर ज़रूरत है उस कल्पना की जिसमे ये देखे की तीन स्तम्भ के सहारे देश का लोकतंत्र कैसे और कब तक खड़ा रहेगा ...( शरद पंसारी - संपादक दैनिक शौर्यपथ समाचार पत्र )
खेल / शौर्यपथ / इंडियन प्रीमियर लीग(आईपीएल) के 8वें मैच के दौरान दुबई इंटरनेशल स्टेडियम में कोलकाता नाइट राइडर्स ने डेविड वॉर्नर की कप्तानी में सनराइजर्स हैदराबाद को हराकर अपना जीत का खाता खोल लिया। केकेआर को जीत के लिए 143 रनो का आसान लक्ष्य मिला था, जिससे उसने शुभमन गिल के नाबाद 70 और इयोन मोर्गन के नाबाद 38 रनों से उसने दो ओवर पहले ही यह लक्ष्य हासिल कर लिया. इससे पहले सनराइजर्स हैदराबाद ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर के कोटे में 4 विकेट पर 142 रन बनाए थे। केकेआर ने बेशक इस मैच में जीत हासिल की हो लेकिन उनके कप्तान दिनेश कार्तिक के नाम एक शर्मनाक रिकॉर्ड जुड़ गया है।
कार्तिक को इस मैच में लेग स्पिनर राशिद ने एलबीडब्ल्यू कर बिना खाता खोले पवेलियन भेज दिया। कार्तिक इस मैच में शून्य पर आउट हुए और आइपीएल में हैदराबाद के खिलाफ शून्य पर आउट होने के मामले में पहले नंबर पर आ गए। उन्होंने अजिंक्य रहाणे का रिकॉर्ड तोड़ा। रहाणे हैदराबाद के खिलाफ 3 बार जीरो पर आउट हो चुके थे। मैच के बाद कार्तिक ने माना कि वह अच्छा नहीं खेल पाए। कार्तिक ने आगे कहा कि एक जीरो आपको खराब खिलाड़ी नहीं बनाती। मुझे लय पाने के लिए रन बनाने की जरूरत है।
आईपीएल में किसी भी टीम के खिलाफ चार बार डक पर रोहित और जाधव आउट हो चुके हैं। कार्तिक तीसरे खिलाड़ी हैं, जो किसी भी टीम के खिलाफ 4 बार जीरो पर आउट हुए हैं। चेन्नई सुपर किंग्स इलेवन से खेलने वाले केदार जाधव किंग्स इलेवन पंजाब के खिलाफ 4 बार आउट हुए थे। वहीं मुंबई इंडियंस के कप्तान रोहित शर्मा भी रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाफ चार बार बिना कोई रन बनाए आउट हो चुके हैं।
मनोरंजन / शौर्यपथ / बॉलीवुड एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण, सारा अली खान और श्रद्धा कपूर समेत मैनेजर करिश्मा प्रकाश का बयान दर्ज कर लिया गया है, एमए जैन, डिप्टी डायरेक्टर जनरल, एनसीबी ने शनिवार को दिए स्टेटमेंट में कहा। इसके अलावा उन्होंने जानकारी दी कि रविवार को किसी को भी दोबारा पूछताछ के लिए नहीं बुलाया गया है। खबरों के मुताबिक, दीपिका पादुकोण पूछताछ के दौरान तीन बार रोईं। रिपोर्ट्स के अनुसार, एनसीबी के अधिकारी ने उनसे कहा कि वह ‘इमोशनल कार्ड’ न खेलें और सवालों का जवाब दें। बता दें कि दीपिका, कोलाबा स्थित एनसीबी के दफ्तर शनिवार सुबह 10 बजे के करीब पहुंची थीं और करीब साढ़े तीन बजे वहां से घर के लिए निकलीं। दीपिका पादुकोण से लगभग 5.30 घंटे, सारा अली खान और श्रद्धा कपूर से करीब 4 घंटे तक सवाल-जवाब किए गए।
टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के मुताबिक दीपिका ने यह कबूल किया कि करिश्मा से उनकी ड्रग्स को लेकर चैट हुई थी। हालांकि उन्होंने इस बात से इनकार किया है कि उन्होंने ड्रग्स लिए हैं। वहीं, धर्मा प्रोडक्शन के एग्जिक्यूटिव प्रोड्यूसर श्रितिज रवि प्रसाद को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने गिरफ्तार कर लिया है।
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, सारा ने एनसीबी को बताया कि फिल्म ‘केदारनाथ’ की शूटिंग के वक्त वह सुशांत के क्लोज आई थीं। सारा ने इस बात को भी कबूला कि वह सुशांत के फार्महाउस में पार्टीज के लिए जाती थीं। हालांकि, वह ड्रग्स नहीं लेती थीं। टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के मुताबिक, सारा ने कबूल किया कि वह सुशांत के साथ थाईलैंड ट्रिप पर भी गई थीं।
धर्म संसार / शौर्यपथ / कोविड-19 के कारण काशी विश्वनाथ को माला-फूल चढ़ाने पर लगी रोक हटा ली गई। मंदिर प्रबंधन के इस निर्णय से न सिर्फ भक्तों, बल्कि माला-फूल विक्रेताओं में भी प्रसन्नता है। उल्लेखनीय है कि विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह में 17 मार्च से ही प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी। इसके बाद 21 मार्च से मंदिर में भक्तों का प्रवेश वर्जित कर दिया गया था। इसी महीने की सात तारीख से भक्तों को गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति पुन: प्रदान की गई थी। माला फूल विक्रेताओं ने मंदिर प्रबंधन के इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि माला-फूल चढ़ाने पर प्रतिबंध से उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो गई थी।
वृंदावन में अब जल्द ही भक्तों को होंगे ठा. बांकेबिहारी के दर्शन
विश्वविख्यात ठा. बांकेबिहारी मंदिर में चल रहे जीर्णोद्धार एवं फर्श निर्माण कार्य तेजी पकड़ रहा है। मंदिर के आंगन में फर्श की ढलाई कर सीलिंग कम्पाउंड बिछाया जा रहा है। इसके बाद कर्नाटका से मंगवाए गए संगमरमर पत्थर फर्श में लगाया जाएगा।
बता दें कि ठा. बांकेबिहारी मंदिर के आंगन में करीब चार माह पूर्व फर्श में तीन फुट से अधिक गहरा गड्ढा हो गया था। जिसे गंभीरता से लेते हुए मंदिर प्रबंधन द्वारा भवन निर्माण से जुड़ी सरकारी एवं गैर सरकारी कंपनियों के इंजीनियरों से परिसर की गहनता से जांच कराई गई थी। सभी संस्थाओं की जांच रिपोर्ट के आधार काम की शुरुआत कराई गई। मंदिर के फर्श एवं मंदिर भवन की मजबूती को बनाए रखने के उद्देश्य से फर्श में 65 स्थानों पर पाइलिंग कराई गई। साथ ही नींव को भूकम्प रोधी बनाने के लिए अत्याधुनिक तरीके से सुरक्षित किया गया। अब आंगन के फर्श पर लोहे की सरियाओं का जाल बिछाने जाने के बाद ढलाई कराई गई है। साथ ही सीलन से मुक्ति के लिए सीलिंग कम्पाउंड बिछाया जा रहा है। जल्द दी कर्नाटका से मंगवाए गए संगमरमर पत्थर को फर्श में लगाया जाएगा। मंदिर के प्रबंधक मुनीष कुमार शर्मा ने बताया कि मंदिर के फर्श का निर्माण जल्द ही पूर्ण होने को है। फर्श की ढलाई के बाद अब पत्थर लगाने की तैयारी की जा रही है। ताकि कार्य पूर्ण होते ही पिछले करीब सात माह से अपने आराध्य से दूर भक्तों को उनके दर्शन सुलभ हो सकें।
सेहत / शौर्यपथ / फिनलैंड में कोरोना से संक्रमित मरीजों की पहचान के लिए खोजी कुत्तों की मदद ली जा रही है। हेलिंस्की हवाईअड्डे पर हाल ही में चार प्रशिक्षित खोजी कुत्तों की तैनाती की गई है। शोधकर्ताओं का दावा है कि खोजी कुत्ते संक्रमितों की पहचान के लिए कोविड-19 जांच का सस्ता और प्रभावशाली विकल्प साबित हो सकते हैं।
हेलिंस्की यूनिवर्सिटी से जुड़ी एना हेल्म-बोर्कमैन ने बताया कि खोजी कुत्ते दस सेकेंड के भीतर सार्स-कोव-2 वायरस की मौजूदगी भांप सकते हैं। हवाईअड्डों से लेकर अस्पतालों, होटल-रेस्तरां, स्टेडियम, थिएटर और सांस्कृति केंद्रों तक में आगंतुकों में संक्रमण की पुष्टि करने के लिए इनकी मदद ली जा सकती है। खोजी कुत्तों से किसी भी व्यक्ति की स्क्रीनिंग की प्रक्रिया औसतन एक मिनट में पूरी हो जाती है।
बोर्कमैन ने बताया कि हेलिंस्की हवाईअड्डे पर उतरने वाले यात्रियों को सामान लेने के बाद एक टिश्यू पेपर दिया जाता है। यात्री टिश्यू पेपर से अपनी त्वचा पोंछकर कांच के एक कंटेनर में डालते हैं। कंटेनर को पास के एक ही बूथ पर रख दिया जाता है, जहां अन्य गंध से लैस टिश्यू पेपर वाले डिब्बे भी रखे होते हैं।
खोजी कुत्ते एक-एक कर सभी डिब्बों में रखे टिश्यू पेपर को सूंघते हैं। अगर कुत्ते जम्हाई लेकर, लेटकर या गुर्राकर वायरस की मौजूदगी का संकेत देते हैं तो संबंधित यात्री की स्वैब जांच की जाती है, ताकि कुत्ते के इशारे पर चिकित्सकीय मुहर लग जाएगा। स्वैब जांच की रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर यात्री को क्वारंटाइन कर दिया जाता है।
सौ फीसदी सटीक नतीजे-
-हेलिंस्की हवाईअड्डे पर उन कुत्तों की तैनाती की गई है, जो मरीज में कैंसर और डायबिटीज जैसी जानलेवा बीमारियों के प्रति अलर्ट करने में सफल रहे हैं। परीक्षण के दौरान ये कुत्ते सार्स-कोव-2 वायरस की मौजूदगी के सौ फीसदी सटीक नतीजे देने में कारगर रहे हैं।
पसीने की दुर्गंध अलग-
-जून में प्रकाशित एक फ्रांसीसी अध्ययन में दावा किया गया था कि सार्स-कोव-2 वायरस से संक्रमित मरीजों के पसीने की दुर्गंध स्वस्थ लोगों से अलग होती है। खोजी कुत्ते महज 10 से 100 अणुओं की मौजूदगी होने पर भी कोरोना संक्रमण की पोल खोलने में सक्षम हैं।
16 कुत्ते तैयार हो रहे-
-कुत्तों को गंध पहचानने की विधा में पारंगत बनाने वाले संगठन ‘वाइज नोज’ ने बताया कि वह कोरोना संक्रमितों की पहचान के लिए 16 खोजी कुत्ते तैयार कर रहा है। इनमें से दस एयरपोर्ट पर तैनात होंगे। चार ने हेलिंस्की हवाईअड्डे पर सेवाएं देनी शुरू भी कर दी हैं।
सेहत /शौर्यपथ / उच्च रक्तचाप की समस्या से परेशान हैं? नमक के सेवन में कटौती से लेकर योग-व्यायाम तक सब आजमा लिया, पर ब्लड प्रेशर काबू में ही नहीं आ रहा है? अगर हां तो हफ्ते में तीन से चार बार गुनगुने पानी से नहाना शुरू कर दें। ‘यूरोपियन एसोसिएशन फॉर द स्टडी ऑफ डायबिटीज एंड हार्ट डिजीजेज’ के हालिया अध्ययन में ‘हॉट बाथ’ को रक्तचाप घटाने में खासा असरदार करार दिया गया है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक गुनगुने पानी से नहाने पर शरीर में ‘वैसोडिलेशन’ की प्रक्रिया को बढ़ावा मिलता है। इससे रक्त धमनियां खुलती हैं और खून के बहाव के दौरान हृदय पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता। नतीजतन ब्लड प्रेशर काबू में रहता है। अध्ययन में गुनगुने पानी के स्नान को हृदय के लिए व्यायाम जितना ही फायदेमंद भी पाया गया। शोधकर्ता एंडी कॉर्बले ने बताया कि ‘हॉट बाथ’ के दौरान दिल 150 बीट प्रति मिनट की दर से धड़कने लगता है। आमतौर पर मध्यमगति की एक्सरसाइज में ऐसा देखने को मिलता है। इससे हृदय की कोशिकाएं मजबूत होती हैं और रक्तचाप नियंत्रण में आता है।
कार्बले और उनके साथियों ने 1500 वयस्कों को तीन समूह में बांटा। पहले समूह में शामिल प्रतिभागियों को लगातार दो महीने तक हफ्ते में एक बार गुनगुने पानी से स्नान करवाया। वहीं, दूसरे समूह को दो से चार मरतबा, जबकि तीसरे समूह को चार से अधिक बार गुनगुने पानी से नहलवाया।
सभी प्रतिभागियों को औसतन 16 मिनट गुनगुने पानी के संपर्क रखा गया। उनके वजन, रक्तचाप और ग्लाइकेटेड हिमोग्लोबीन (ब्लड शुगर का सूचक) की समय-समय पर जांच की गई। इस दौरान हफ्ते में चार से अधिक बार ‘हाथ बाथ’ लेने वाले प्रतिभागियों के डायस्टॉलिक ब्लड प्रेशर में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। उनका वजन और ग्लाइकेटेड हिमोग्लोबीन का स्तर भी औरों की तुलना में ज्यादा घटा।
स्ट्रोक से बचाव में कारगर-
-हार्ट अटैक का खतरा ‘हॉट बाथ’ लेने से 28% घट जाता है
-स्ट्रोक से मौत की आशंका में 26% तक की कमी आती है
-30 हजार वयस्कों पर 20 वर्ष चले जापानी शोध से निकला निष्कर्ष
टाइप-2 डायबिटीज का खतरा भी घटेगा-
-रात में बिस्तर पर जाने से पहले गुनगुने पानी से नहाने की आदत टाइप-2 डायबिटीज से बचाव में खासी मददगार साबित हो सकती है। जापान स्थित कोह्नोदाई यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने हाल ही में 1300 प्रतिभागियों में गुनगुने पानी के स्नान का फायदा आंकने के बाद यह दावा किया था। उन्होंने पाया था कि जो लोग हफ्ते में चार बार गुनगुने पानी से नहाते हैं, उनका न सिर्फ बीएमआई (वजन और कद का अनुपात), बल्कि ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी नियंत्रित रहता है। स्ट्रेस हार्मोन के स्तर में कमी आना और फील गुड हार्मोन का स्त्राव बढ़ना इसकी मुख्य वजह है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
