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June 03, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

सेहत /शौर्यपथ /आयरन की कमी और एनीमिया आजकल हर दूसरे व्यक्ति के लिए परेशानी का सबब बन गया है। यह समस्या अधिकतर महिलाओं में ज्यादा देखी जाती है। अगर आपके शरीर में भी हीमोग्लोबिन की कमी है तो रोजाना शाम को डाइट में शामिल करें काले चने की चाट। यह खाने में तो टेस्टी है ही साथ ही पोषण तत्वों से भी भरपूर है। चने में आयरन की मात्रा काफी होती है जो शरीर में खून की कमी को दूर करती है। इतना ही नहीं इसका सेवन करने से कब्ज जैसी समस्या भी छूमंतर हो जाती है। तो देर किस बात की आइए जानते हैं कैसे बनाई जाती है ये हेल्दी चाट रेसिपी।
काले चने की चाट बनाने की सामग्री-
- 4-5 घंटे भिगोया हुआ 1 कप काला चना
-1/4 कप धनिया कटा हुआ
-हरी मिर्च कटी हुई
-1 कप प्याज कटी हुई
-1 कप उबला हुआ आलू कटा हुआ
-स्वादानुसार नमक
-2 टी स्पून चाट मसाला
-1 टी स्पून पिसा जीरा
-स्वाद के लिए नींबू का रस
काले चने की चाट बनाने का तरीका-
काले चने की चाट बनाने के लिए सबसे पहले काले चनों को धोकर ताजे पानी में उबाल लें। अब चनों में से पानी निकालकर उन्हें ठंडा कर लें। बताई गए सभी मसालों को स्वादानुसार मिलाकर चना चाट सर्व करें।

सेहत / शौर्यपथ / कोरोना वायरस ने लोगों के जीने का तरीका बदल दिया है। आज लोग इस जानलेवा संक्रमण से बचने के लिए घरों से निकलने से पहले चेहरे पर मास्क लगाना बिल्कुल नहीं भूलते। विशेषज्ञों की मानें तो कोरोनावायरस संक्रमण के जोखिम को रोकने के लिए, मास्क पहनना सबसे सरल और अच्छा बचाव का उपाय बताया गया है। मास्क हवा में मौजूद वायरस को हमारी आंख, नाक और मुंह द्वारा भीतर प्रवेश करके व्यक्ति को संक्रमित होने से रोकता है।

कई अध्ययनों की मानें तो मास्क पहनने से संक्रमित होने के जोखिम को 50 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। यही वजह है कि लोगों को घर से बाहर निकलने से पहले मास्क पहनने की सलाह दी जा रही है। हालांकि, कई लोग घंटो मास्क पहनने से होने वाली असुविधा से भी बेहद परेशान हैं। जिसमें चेहरे पर मुंहासे, तनाव, चश्मे में भाप का आना और अब गले में खराश भी शामिल हो गई है।

लंबे समय तक या गंदे मास्क चेहरे पर पहनने वाले कई लोगों ने गले में खराश की शिकायत की है। आइए जानते हैं क्या है इसका कारण और हल।

गंदा मास्क और गले की खराश -
कोरोना संक्रमण से बचने के लिए जिस तरह समय-समय पर हाथ धोना, कपड़े बदलना और अन्य चीजों को साफ रखने की आवश्यकता होती है। उसी तरह कीटाणुओं और जीवाणुओं के संपर्क के जोखिम को कम करने के लिए मास्क को भी नियमित रूप से धोया जाना चाहिए।

बैक्टीरिया, वायरस, धूल और एलर्जी ये सब मिलकर गले में खराश की समस्या पैदा कर सकते हैं। लंबे समय तक मास्क का इस्तेमाल बिना धोएं करने से इसके ऊपर बैक्टीरिया के कण जमा हो जाते हैं। यही छोटे कण गले में पहुंचकर जलन और खिंचाव पैदा करते हैं। जिन लोगों की इम्युनिटी कमजोर होती है या जिन्हें धूल के कणों से एलर्जी होती है उन्हें इसका खतरा अधिक होता है।

इसके अलावा जब लोग मास्क पहनकर किसी दूसरे व्यक्ति से बात करते हैं तो उन्हें बाकी समय की तुलना में अपनी बात दूसरों तक पहुंचाने के लिए जोर से बोलना पड़ता है। जो गले में अनावश्यक तनाव डाल सकता है, जिसकी वजह से भी गले में जलन या खराश पैदा हो सकती है।

बचाव के लिए क्या करें-
कोरोना संक्रमण से बचने के लिए हाथों को धोना जितना जरूरी है, उतना ही मास्क को धोना भी है। मास्क के हर उपयोग के बाद, उसे गर्म पानी और साबुन से धोएं। मास्क को पहनने से पहले उसे सूर्य की रोशनी में अच्छे से सूखने दें। यही वजह है कि व्यक्ति को दो मास्क रखने की सलाह दी जाती है ताकि आप उन्हें बदल-बदलकर इस्तेमाल कर सकें।

इसके अलावा अपने मास्क को बार-बार छूने से बचें और इसे पहनने से पहले और इसे हटाने के बाद अपने हाथों को अच्छी तरह से धोएं।

 

खाना खजाना / शौर्यपथ / कचौरी एक लोकप्रिय स्ट्रीट फूड है जिसे खाने के लिए किसी बहाने की जरूरत नहीं है। कचौरी को ​कई अलग-अलग स्टफिंग के साथ बनाया जाता है। लेकिन ऑयली होने की वजह से अगर आप कचौरी से दूरी बना रहे हैं तो टेंशन छोड़ अब खाएं जी भर कर यह टेस्टी स्नैक। जी हां, कचौरी को आप डिप फ्राई की जगह हेल्दी तरीके से भी बना सकते हैं। आइए जानते हैं कैसे।
बेक्ड कचौरी बनाने के लिए सामग्री-
-50 ग्राम उड़द दाल पाउडर
-3 टी स्पून लाल मिर्च पाउडर
-4 टी स्पून सौंफ का पाउडर
-6 टी स्पून धनिया पाउडर
-1/4 टी स्पून हींग
-1 टी स्पून यीस्ट
-250 ग्राम गेंहू का आटा
-2 टी स्पून चीनी
-पानी
-स्वादानुसार नमक
-1-2 टी स्पून तेल
बेक्ड कचौरी बनाने का तरीका-
फीलिंग के लिए-
बेक्ड कचौरी की फीलिंग तैयार करने के लिए सबसे पहले एक बाउल में उड़द दाल का पाउडर लेकर उसमें जरूरत के अनुसार पानी ​डालकर अच्छे से मिलाकर 30 मिनट के लिए छोड़ दें। ध्यान दें यह फूला और ड्राई होना चाहिए। अब इसमें लाल मिर्च पाउडर, सौंफ पाउडर, नमक, धनिया पाउडर, हींग मिलाकर गर्म पानी की मदद से इसे नरम कर लें।
कचौरी बनाने के लिए-
कचौरी बनाने के लिए सबसे पहले एक बाउल में गेंहू का आटा, चीनी, पानी और यीस्ट डालकर अच्छे से गूंथकर एक घंटे के लिए रख दें। अब डो पर हल्का सा तेल डालकर इसकी पैटी बनाएं। पैटी के बीच उड़द दाल की पीठी भरकर बेलन से 6 से 7 इंच में बेल लें। अब एक बेकिंग ट्रे में तेल लगाकर 160 डिग्री पर प्रीहिट ओवन में इसे ​क्रिस्पी और गोल्डन ब्राउन होने तक बेक करें। तैयार हैं आपकी गर्मा-गर्म कचौरी।

नुस्खा / शौर्यपथ / करेला स्वाद में भले ही कड़वा होता है, लेकिन सेहत के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। करेला का सेवन करने से सेहत को कई अद्भुत फायदे होते हैं। करेले का नियमित सेवन करने से कब्ज और अपच से राहत मिलने के साथ मधुमेह में रामबाण औषधि का काम करता है। लेकिन इसके कड़वे स्वाद की वजह से कई लोग इसे अपने आहार की हिस्सा बनाने से कतराते हैं। अगर आप भी ऐसा करते हैं तो आइए जानते हैं क्या हैं करेले का कड़वापन दूर करने के उपाय।

करेले का कड़वापन दूर करने के उपाय-
-करेले का कड़वापन खत्म करने के लिए इसे ऊपर से छील लें। करेले के ऊपर जितनी भी खुरदुरी स्किन मौजूद होती है वह सब निकाल दें।
-करेले को पकाने से पहले उसके बड़े बीज निकाल दें। करेले के बीज काफी कड़वे होते हैं जो सब्जी में कड़वापन ला सकते हैं।
-करेले का कड़वापन हटाने के लिए उस पर नमक लगाकर करीब 20 से 30 मिनट के लिए अलग रखें। आप देखेंगे करेला पानी छोड़ देगा जो कि इसका कड़वा रस है।
-नमक लगाने के बाद करेले को निचोड़ें। करेले को पानी से साफ करके दोबारा निचोड़े, ऐसा करने से करेले का कड़वापन निकल जाएगा।
-करेले का कड़वापन निकालने के लिए इसके छोटे-छोटे टुकड़े करके दही में एक घंटे के लिए भिगोकर रख दें।
-करेले की कड़वाहट कम करने के लिए करेले छीलकर उन पर आटा और नमक लगाकर एक छंटे के लिए अलग रखे दें। फिर धोकर इसकी सब्जी बनाएं।
-करेले में चीरा लगाकर चावल के पानी में आधा घंटे भिगाकर रखें और फिर इसकी सब्जी बनाएं। करेले की कड़वाहट का पता नहीं चलेगा।

खेल / शौर्यपथ /किंग्स इलेवन पंजाब और राजस्थान रॉयल्स के बीच आईपीएल का नौवां मैच रोमांच से भरपूर रहा। इस मुकाबले में दर्शकों को छक्के-चौकों की बारिश देखने को मिली। इस मैच में पंजाब ने पहले खेलते हुए 20 ओवर में 223 रन को बड़ा स्कोर बनाया। इसके जवाब में राजस्थान ने राहुल तेवतिया, संजू सैमसन और कप्तान स्टीव स्मिथ की बेहतरीन बल्लेबाजी के दम पर तीन गेंद पहले ही लक्ष्य का पीछा कर लिया। इस मैच में पंजाब के निकोलस पूरन की कमाल की फील्डिंग ने सभी का दिल जीत लिया। उनके इस प्रयास को दुनियाभर के लोगों ने सराहा है। बाउंड्री पर पूरन की छलांग को दुनिया के सबसे बेहतरीन फील्डर रहे ओर टीम के कोच जोंटी रोड्स ने भी सलाम किया।
हालांकि, इस कैच पर बल्लेबाज आउट तो नहीं हुआ लेकिन टीम के लिए निकोलस पूरन ने पांच रन जरूर बचा लिए। मैच के दौरान टीम के फील्डिंग कोच व अपने दौर के सर्वश्रेष्ठ फील्डर रहे दक्षिण अफ्रीका के महान जोंटी रोड्स ने खड़े होकर पूरन के सम्मान में सिर झुकाया।
पूरन की इस शानदार फील्डिंग की तारीफ मैदान पर मौजूद सभी खिलाड़ियों ने की। वहीं शॉट लगाने वाले संजू सैमसन पूरन के इस प्रयास से हैरान रह गए। इससे पहले पूरन ने बल्लेबज़ी में भी जलवा दिखाया था। उन्होंने सिर्फ आठ गेंदो में तीन छक्कों की मदद से नाबाद 25 रन बनाए थे और टीम का स्कोर 220 के पार पहुंचाया था। हालांकि, पूरन की बल्लेबाज़ी और शानदार फील्डिंग भी उनकी टीम को जीत नहीं दिला सकी और राजस्थान ने आईपीएल के इतिहास का सबसे बड़ा रन चेज़ कर लिया।
इससे पहले केएल राहुल और मयंक ने पहले विकेट के लिए 183 रनों की साझेदारी की जो आईपीएल में ओपनिंग के तौर पर की गई तीसरी सबसे बड़ी साझेदारी है। मयंक ने अपने आईपीएल करियर का पहला शतक जमाया। मयंक आईपीएल के इतिहास में भारतीय बल्लेबाजों के द्वारा सबसे तेज शतक जंमाने के मामले में दूसरे नंबर पर पहुंच गए हैं। यूसुफ पठान इस मामले में नबर वन भारतीय हैं।

मनोरंजन/ शौर्यपथ / भारतीय सिनेमा जगत में पिछले सात दशक से लता मंगेश्कर ने अपनी मधुर आवाज से लोगों को अपना दीवाना बनाया हुआ है, लेकिन उनके बारे में कुछ ऐसे दिलचस्प फैक्ट्स हैं जिनसे आप आज तक अंजान हैं। आज लता मंगेशकर अपना 91वां बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं। मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में जन्मीं लता एक मध्यम वर्गीय मराठी परिवार से हैं।

उन्होंने साल 1942 में 'किटी हसाल' के लिए अपना पहला गाना गाया, लेकिन उनके पिता दीनानाथ मंगेश्कर को लता का फिल्मों के लिए गाना पसंद नहीं आया और उन्होंने उस फिल्म से लता के गाए गीत को हटवा दिया था। हालांकि, इसी साल लता को 'पहली मंगलगौर' में अभिनय करने का मौका मिला। लता की पहली कमाई 25 रुपये थी जो उन्हें एक कार्यक्रम में स्टेज पर गाने के दौरान मिली थी। बचपन में उन्हें काफी संघर्षों का सामना करना पड़ा था। जब वह 13 साल की थीं तभी दिल का दौरा पड़ने से उनके पिता की मौत हो गई थी।

लता मंगेशकर ने 36 भाषाओं में 50 हजार से ज्यादा गीत गाए हैं। लता मानती हैं, “पिता का गायन सुन-सुनकर ही मैंने सीखा था, लेकिन मुझ में कभी इतनी हिम्मत नहीं थी कि उनके साथ गा सकूं।” मास्टर गुलाम हैदर ने लता को फिल्म 'मजबूर' के गीत 'अंग्रेजी छोरा चला गया' में गायक मुकेश के साथ गाने का मौका दिया था। यह लता का पहला बड़ा ब्रेक था। इसके बाद उन्हें काम की कभी कमी नहीं हुई। बाद में लता मंगेशकर ने चांदनी, राम लखन, सनम बेवफा, लेकिन, फरिश्ते, पत्थर के फूल, डर, हम आपके हैं कौन, दिल वाले दुल्हनियां ले जाएंगे, माचिस, दिल तो पागल है, वीर जारा, कभी खुशी कभी गम, रंग दे बसंती और लगान जैसी फिल्मों में गाने गाए।

लता ने क्यों नहीं की शादी
पिता के गुजर जाने के बाद घर की सारी जिम्मेदारियां लता मंगेशकर पर आ गईं थीं। एक इंटरव्यू में लता मंगेशकर ने कहा था कि घर के सभी सदस्यों की जिम्मेदारी मुझ पर थी। ऐसे में कई बार शादी का ख्याल आता भी तो उस पर अमल नहीं कर सकती थी। बेहद कम उम्र में ही मैं काम करने लगी थी। सोचा कि पहले सभी छोटे भाई बहनों को सेटल कर दूं। फिर बहन की शादी हो गई। बच्चे हो गए। तो उन्हें संभालने की जिम्मेदारी आ गई। इस तरह से वक्त निकलता चला गया और मैंने शादी नहीं की।

जब किशोर कुमार से यूं हुई थी मुलाकात
किशोर कुमार के साथ लता की अनबन का वाकया काफी दिलचस्प है। इस घटना के बारे में बताते हुए लता ने बताया था कि 'बॉम्बे टॉकीज' की फिल्म 'जिद्दी' के गाने की रिकॉर्डिंग पर जाने के लिए वह लोकल ट्रेन से सफर कर रही थीं। उस समय उन्होंने देखा कि एक शख्स भी उसी ट्रेन में सफर कर रहा है। स्टूडियो जाने के लिए जब उन्होंने तांगा लिया तो देखा कि वह शख्स भी तांगा लेकर उसी ओर जा रहा है। जब वह बॉम्बे टॉकीज पहुंचीं तो उन्होंने देखा कि वह शख्स भी बॉम्बे टॉकीज पहुंचा हुआ है। बाद में उन्हें पता चला कि वह शख्स किशोर कुमार हैं। बाद में 'जिद्धी' में लता ने किशोर कुमार के साथ 'ये कौन आया रे करके सोलह सिंगार' गाना गाया था।

रफी से बातचीत कर दी थी बंद
लता ने पार्श्वगायक मोहम्मद रफी के साथ सैकड़ों गीत गाए थे, लेकिन एक वक्त ऐसा भी आया था जब उन्होंने रफी से बातचीत तक बंद कर दी थी। लता गानों पर रॉयल्टी की पक्षधर थीं, जबकि मोहम्मद रफी ने कभी भी रॉयल्टी की मांग नहीं की। दोनों का विवाद इतना बढ़ा कि मोहम्मद रफी और लता के बीच बातचीत भी बंद हो गई और दोनों ने एक साथ गीत गाने से इनकार कर दिया। हालांकि, चार साल बाद अभिनेत्री नरगिस के प्रयास से दोनों ने एक साथ एक कार्यक्रम में 'दिल पुकारे' गीत गाया।

एक दिन में 12 मिर्चे तक खा लेती हैं लता
बहुत कम लोगों को यह पता होगा कि लता का असली नाम हेमा हरिदकर है। बचपन के दिनों से उन्हें रेडियो सुनने का बड़ा ही शौक था। 18 साल की उम्र में उन्होंने अपना पहला रेडियो खरीदा था और रेडियो ऑन करते ही उन्हें के. एल. सहगल की मृत्यु की खबर मिली थी, जिसके बाद उन्होंने वह रेडियो दुकानदार को वापस लौटा दिया था। लता को अपने बचपन के दिनों में साइकल चलाने का काफी शौक था जो पूरा नहीं हो सका। बता दें कि उन्होंने अपनी पहली कार 8000 रुपये में खरीदी थी। स्पाइसी खाने की शौकीन लता एक दिन में तकरीबन 12 मिर्चे तक खा लेती हैं। उनका मानना है कि मिर्च खाने से गले की मिठास बढ़ती है। लता को किक्रेट देखने का भी काफी शौक रहा है। लार्डस में उनकी एक सीट हमेशा रिजर्व रहती है।

सिर्फ एक दिन के लिए गईं स्कूल
बहुत कम लोगों को पता होगा कि लता महज एक दिन के लिए स्कूल गई थीं। इसकी वजह यह रही कि जब वह पहले दिन अपनी छोटी बहन आशा भोंसले को स्कूल लेकर गई तो टीचर ने आशा को यह कहकर स्कूल से निकाल दिया कि उन्हें भी स्कूल की फीस देनी होगी। बाद में लता ने निश्चय किया कि वह कभी स्कूल नहीं जाएंगी। इसके बाद उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा घर में ही रहकर अपने नौकर से प्राप्त की। हालांकि, बाद में उन्हें न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी सहित छह विश्वविधालयों से मानक उपाधि से नवाजा गया।

भारत रत्न से नवाजा गया
लता को अपने सिने करियर में मान-सम्मान बहुत मिला। वह फिल्म इंडस्ट्री की पहली महिला हैं जिन्हें भारत रत्न और दादा साहब फाल्के पुरस्कार प्राप्त हुआ।

 

शौर्यपथ लेख । सरोज पाण्डेय छत्तीसगढ़ की भाजपा नेत्री जिसने राजनैतिक शुरुवात दुर्ग निगम के महापौर पद से शुरू की और एक ही समय मे महापौर , विधायक , सांसद होने का गौरव प्राप्त किया । राजनीतिक घटनाक्रम में एक ऐसा समय भी आया जब डॉ सरोज पाण्डेय ना ही महापौर थी ना विधायक थी और ना सांसद थी तब भी दुर्ग और छत्तीसगढ़ में चर्चा तेज हो गई कि अब सरोज पाण्डेय का राजनैतिक सफर का अंत हो गया अब सक्रिय राजनीति से दूर हो गई तभी अचानक केंद्रीय संगठन में सरोज पाण्डेय को महासचिव के पद से नवाजा गया और महाराष्ट्र का प्रभारी बना दिया गया लगातार 5 साल तक निर्विवाद एक मात्र महिला महासचिव होने का गौरव सरोज पाण्डेय को प्राप्त हुआ । और एक बार फिर विरोधियों की बोलती बंद हो गई । संगठन में डॉ सरोज पाण्डेय के कद को जब जब छोटा समझने की कोशिश हुई तब तब उनका कद बढ़ते गया । वर्तमान में भी ऐसा ही समय आया है जब भाजपा के अध्यक्ष ने डॉ सरोज पाण्डेय को संगठन में कोई जगह नही दी भाजपा अध्यक्ष के जम्बो टीम में से डॉ पाण्डेय के नाम नही होने की खबर लगते ही एक बार फिर राजनैतिक चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया कि अब सरोज पाण्डेय को संगठन में कोई महत्त्व नही दिया जा रहा विपक्षी इसे छत्तीसगढ़ की महिला का अपमान बता रहे तो खुद की पार्टी के लोग इसे घमंड का अंत बता रहे थे किंतु इन सब बातों में लोग ये भूल गए कि सालो पहले जिस सरोज पाण्डेय ने निगम से राजनीतिक जीवन का सफर आरंभ किया और केंद्र की राजनीति तक का सफर किया जिसमें बहुतेरे विरोध के बाद भी सीढ़ी दर सीढ़ी अपना सफर तय किया वो आज जिस मुकाम पर है वहाँ तक पहुंचने में छत्तीसगढ़ का कोई भी भाजपा नेता सफलता हांसिल नही कर सका । सरोज पाण्डेय जिस संगठन का हिस्सा है वह एक पद एक व्यक्ति की बात परिभाषित होती है । विरोधी शायद इस बात को भी भूल गए कि जब भी डॉ सरोज पाण्डेय को संगठन एक कदम पीछे करती है तो भविष्य में दो कदम आगे बढ़ा देती है । आज सरोज को संगठन ने महासचिव पद से हटाया तो हो सकता है आगे कोई बड़ा पद उनके लिए बना रही हो । वर्तमान में मोदी सरकार के मंत्री मंडल में 57 सदस्य है और 81 सदस्य मंत्री मंडल शामिल हो सकते है उस लिहाज से 24 पद पर मंत्री बनाया जा सकता है । जैसा कि सभी को मालूम है कि सरोज पाण्डेय अभी राज्य सभा सदस्य है और 2022-23 तक इस पद में रहेंगी । महासचिव पद से हटाने के बाद इस बात की भी चर्चा जोरों पर है कि उन्हें संगठन से हटा कर मंत्री मंडल में शामिल किया जा सकता है । डॉ पाण्डेय प्रखर प्रवक्ता है और वर्तमान में छत्तीसगढ़ में कोई भी ऐसा भाजपा नेता भूपेश सरकार को घेरने में उतना सफल नही हो पा रहा जितनी उम्मीद केंद्रीय संगठन को है ऐसे में ये भी कयास लगाए जा रहे है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह देने के साथ संगठन छत्तीसगढ़ में डॉ सरोज पाण्डेय को मुख्य चेहरा बना सकती है । वर्तमान में भले ही महासचिव पद से सरोज पाण्डेय को हटा दिया गया किन्तु इसका ये मतलब निकलना कि अब डॉ पाण्डेय का कद घट गया जल्दबाजी होगी । ये राजनीति है यह एक कदम पीछे हटने का मतलब हार नही किसी बड़ी जीत की तैयारी माना जाता है । आगे जो भी हो किन्तु इतना तो तय है कि सरोज पाण्डेय का कद संगठन में आज भी बड़ा है और ये सूची आने वाले बड़े फेरबदल का एक आगाज़ मात्र है ..( शरद पंसारी - संपादक शौर्यपथ दैनिक समाचार पत्र )

पटना / शौर्यपथ / बिहार विधान सभा चुनाव में नेता विपक्ष तेजस्वी यादव ने बड़ा दांव खेला है. उन्होंने युवाओं को रिझाने के लिए ऐलान किया है कि अगर उनकी सरकार बनी तो पहली कैबिनेट मीटिंग में ही पहला फैसला राज्य में 10 लाख लोगों को रोजगार देने पर लेंगे. उन्होंने ट्वीट किया है, "पहली कैबिनेट में पहली कलम से बिहार के 10 लाख युवाओं को नौकरी देंगे..बिहार में 4 लाख 50 हज़ार रिक्तियाँ पहले से ही है.. शिक्षा, स्वास्थ्य, गृह विभाग सहित अन्य विभागों में राष्ट्रीय औसत के मानकों के हिसाब से बिहार में अभी 5 लाख 50 हज़ार नियुक्तियों की अत्यंत आवश्यकता है.."
रविवार को पटना में एक संवाददाता सम्मेलन में तेजस्वी ने कहा कि राजद द्वारा विगत 5 सितंबर को लॉन्च बेरोज़गारी हटाओ पोर्टल पर अब तक 9 लाख 47 हज़ार 324 बेरोज़गार युवाओं और 13 लाख 11 हज़ार 626 लोगों ने टोल फ़्री नम्बर पर Missed Call किया है. यानि अब तक कुल 22 लाख 58 हज़ार 950 लोगों ने निबंधन किया है. उनके अनुसार बिहार में 4 लाख 50 हज़ार रिक्तियाँ पहले से ही हैं. शिक्षा, स्वास्थ्य, गृह विभाग सहित अन्य विभागों में राष्ट्रीय औसत एवं तय मानकों के हिसाब से बिहार में अभी भी 5 लाख 50 हज़ार नियुक्तियों की अत्यंत आवश्यकता है.
उन्होंने कहा कि उदाहरण के तौर पर स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा तय मानक पर बिहार आख़िरी पायदान पर है. बिहार की आबादी लगभग साढ़े बारह करोड़ है. WHO के स्वास्थ्य मानक के अनुसार प्रति 1000 आबादी पर एक डॉक्टर होना चाहिए लेकिन बिहार में 17 हज़ार की आबादी पर एक डॉक्टर है. इस हिसाब से बिहार में एक लाख पचीस हज़ार डॉक्टरों की ज़रूरत है. उसी अनुपात में सपोर्ट स्टाफ़ जैसे नर्स,लैब टेक्निशियन, फ़ार्मसिस्ट की ज़रूरत है. सिर्फ़ स्वास्थ्य विभाग में ही ढाई लाख लोगों की ज़रूरत है.
राज्य में पुलिसकर्मियों के 50 हजार से अधिक पद रिक्त हैं. यह तब है, जब बिहार में पुलिस-पब्लिक का अनुपात न्यूनतम स्तर पर पहुंचा हुआ है, यहां प्रति एक लाख की आबादी पर सिर्फ 77 पुलिसकर्मी हैं, जबकि मणिपुर जैसे राज्य में पुलिसकर्मियों की संख्या प्रति एक लाख की आबादी पर एक हजार से अधिक है. राष्ट्रीय औसत 144 पुलिसकर्मी प्रति एक लाख आबादी पर है. बिहार में पुलिसकर्मियों की टोटल स्ट्रैंथ 1.26 लाख है लेकिन अभी सिर्फ 77 हजार कार्यरत पुलिस कर्मियों के भरोसे इतना बड़ा और अपराध की दृष्टि से गंभीर माना जाने वाल राज्य चल रहा है. उन्होंने कहा कि अभी पुलिस विभाग में लगभग 50 हज़ार रिक्तियाँ है. राष्ट्रीय औसत से भी देखें तो बिहार में 1.72 लाख पुलिसकर्मियों की ज़रूरत है. इसके बावजूद पुलिसकर्मियों की नियुक्ति में आनाकानी चलती रहती है और आज तक बहाली की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई.
तेजस्वी ने कहा, शिक्षा क्षेत्र में 3 लाख शिक्षकों की ज़रूरत है. प्राइमरी और सेकंडेरी लेवल पर ढाई लाख से अधिक स्थायी शिक्षकों के पद रिक्त हैं. कॉलेज और यूनिवर्सिटी स्तर पर लगभग 50 हज़ार प्रोफ़ेसर की आवश्यकता है. बिहार में 35 हज़ार के लगभग ऐसे विद्यालय हैं जहाँ एक ही शिक्षक हैं. बिहार के 67.94 फीसदी ऐसे प्राइमरी स्कूल हैं जहाँ विद्यार्थी शिक्षक अनुपात अस्वीकार्य ति में है. इसके ऊपर के विद्यालयों की स्थिति और भी बदतर है. 77.86 फीसदी माध्यमिक विद्यालयों में विद्यार्थी शिक्षक अनुपात बिल्कुल आपत्तिजनक अवस्था में है.
नेता प्रतिप क्ष ने कहा कि राज्य में जूनियर इंजीनियर के 66% पद ख़ाली हैं. पथ निर्माण, जल संसाधन, भवन निर्माण, बिजली विभाग तथा अन्य अभियांत्रिक विभागों में लगभग 75 हज़ार अभियंताओं की ज़रूरत है. इसके अलावा लिपिकों, सहायकों, चपरासी और अन्य वर्गों के लगभग 2 लाख पद भरने की आवश्यकता है ताकि काम-काज सुचारू रूप से चल सके और कार्य में निपुणता और गुणवता आ सके. उन्होंने कहा कि हमारी सरकार की पहली प्राथमिकता रिक्तियों के साथ-साथ नयी नौकरियाँ सृजित करने की होगी. इसके लिए हम वचनबद्ध हैं. हमारी पहली कैबिनेट बैठक में इन पदों को भरने की क़वायद शुरू होगी, विज्ञापन निकाला जाएगा और एक तय समय सीमा के नियुक्तियाँ की जाएँगी.

नई दिल्ली / शौर्यपथ / दिल्ली में हत्या करने के इरादे से आए लड़कों को पेट्रोलिंग करती पुलिस ने बहादुरी दिखाते हुए दबोच लिया. एक युवक पर चाकूबाजी की जा रही थी. पूरी वारदात सीसीटीवी में कैद हो गई. घटना रात 9:30 बजे आनंद पर्वत स्थित नई बस्ती की है. पुलिस के मुताबिक, आनंद पर्वत थाने में तैनात हेड कांस्टेबल दामोदर और कांस्टेबल विजय डूडी पेट्रोलिंग कर रहे थे. तभी उन्होंने देखा कि दो समूहों में झगड़ा हो रहा है और कुछ लड़के एक लड़के पर चाकू से हमला कर रहे हैं.
हेड कांस्टेबल ने अपनी लाठी से हमलावरों को काबू किया और दोनों पुलिसकर्मियों ने मिलकर दो हमलावरों को पकड़ लिया. जांच में पता चला कि घायल गौरव अपने 2 दोस्तों थान सिंह और प्रेम सागर के साथ श्रीधाम ढाबा गया था. यह ढाबा हमला करने वाले आकाश और उसके भाई नीलेश का है.
खाने में देरी को लेकर गौरव और ढाबा मालिक के बीच झगड़ा हो गया और फिर ढाबे के पूरे स्टाफ और ढाबा मालिक ने मिलकर गौरव पर चाकू और रॉड से हमला कर दिया. इसी बीच पुलिसकर्मियों ने बहादुरी दिखाते हुए नीलेश और उसके भाई आकाश को गिरफ्तार कर लिया और गौरव की जान बच गई. गौरव को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर आगे की कार्यवाही की गई.

 

नई दिल्ली / शौर्यपथ / आमतौर पर जब आप एक डाइनिंग टेबल के बारे में सोचते हैं तो आपकी कल्पना शायद बहुत सीधी और सपाट हो. लेकिन डाइनिंग टेबल को भी कल्पना की मिसाल बनाया जा सकता है. इसका एक उदाहरण सामने आया है. दरअसल नागालैंड के एक मूर्तिकार ने टेबल के ऊपर गांव का एक प्राकृतिक नजारा पेश किया है. लकड़ी के टेबल पर झोपड़ी, पुल और झरने की कलाकारी बनाई है. नागालैंड के मूर्तिकार निंगवोन ज़िंगखाई ने लकड़ी के टेबल पर गांव की ये खूबसूरती पेश की है. टेबल पर उन्होंने नदी, तालाब, झरना, पुल और झोपड़ी बनाई है.
मूर्तिकारी का काम करने वाले जिंगखाई बताते हैं कि उनको इस कलाकृति को पूरा करने में लगभग साल भर का समय लग गया. उन्होंने लकड़ी के एक बड़े टुकड़े से ये डाइनिंग टेबल तैयार किया है.
जिंगखाई की पत्नी ने बताया कि उन्हें बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि उनके पति क्या कर रहे हैं. दरअसल उनकी हमेशा पति से शिकायत रहती थी कि वे क्या करते रहते हैं. जिंगखाई और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं है.
मूर्तिकारी के जरिए जिंगखाई अपना घर परिवार चलाते हैं. उन्होंने एक दोस्त से मदद लेकर ये लकड़ी का टुकड़ा खरीदा था और उससे कहा था कि काम पूरा होने पर वे पैसे लौटा देंगे.
जिंगखाई के पड़ोसियों ने बताया कि जब वे उनसे पूछते थे कि वे क्या कर रहे हैं तो जिंगखाई बताते थे कि वे एक डाइनिंग पर अपनी कल्पनाओं को पूरा कर रहे हैं. ये सब सुनकर उनका मजाक ही उड़ाया करते थे. लेकिन आज सब को यकीन हो गया कि उन्होंने जो सोचा वो कर दिखाया.
जिंगखाई ने बताया कि उन्होंने इस कल्पना को पूरा करने में एक लाख 70 हजार रुपये की राशि खर्च की है. वे इस कलाकृति को 20 लाख रुपये में बेचना चाहते हैं. उनका कहना है कि इसके पीछे उनकी बहुत मेहनत और समय लगा है.

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