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रमन सिंह को मिला कमीशन खोरी और भ्रष्टाचार के हिस्सा पहुंचाने का पुरस्कार
छत्तीसगढ़ से महिला एवं आदिवासी वर्ग को भाजपा केंद्रीय संगठन में दायित्व नहीं मिलना छत्तीसगढ़ अपमान
रायपुर / शौर्यपथ / भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी से सरोज पांडे को महासचिव पद से हटाये जाने पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी प्रदेश प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि सरोज पांडे जी को महासचिव पद से हटाकर महिला शक्ति का अपमान किया गया है। आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत के छत्तीसगढ़ दौरा में आने के बाद ही तय हो गया था कि छत्तीसगढ़ की महिलाओं एवं आदिवासी वर्ग को भाजपा के केंद्रीय संगठन में स्थान नहीं मिलेगा। भारतीय जनता पार्टी में गुटबाजी चरण सीमा पर है, गुटबाजी के चलते रमन सिंह स्थापित रहे लेकिन जो मातृ-शक्ति है भारतीय जनता पार्टी में उसको उपेक्षित किया गया है। सरोज पांडे भारतीय जनता महिला मोर्चा का नेता रही है, महिलाओं का प्रतिनिधित्व करती थी भाजपा में उसको हटाकर एक बार फिर से महिला विरोधी चरित्र का उजागर किये है। बहुत ही दुख का विषय है कि भाजपा में महिलाओं का सम्मान नहीं है। भाजपा में चाटुकारिता प्रभावी है भाजपा में गुटबाजी चरम सीमा पर है।
कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने सत्ता में रहते कमीशन खोरी और भ्रष्टाचार का हिस्सा भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचाया उसका पुरस्कार उनको मिला है। भाजपा के केंद्रीय संगठन में प्रदेश के एकमात्र महिला नेत्री को बाहर करना एवं आदिवासी वर्ग को दायित्व नहीं मिलना भाजपा के महिला एवं आदिवासी वर्ग विरोधी को उजागर करता है।
इंदौर । शौर्यपथ । इंदौर के विजय नगर थाना पुलिस ने अवैध रूप से विदेशी लड़कियों से देहव्यापार कराने वाले गैंग का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने इनके कब्जे से 13 लड़कियों, जिसमें कुछ नाबालिग हैं उन्हें मुक्त कराया है. पुलिस ने इस गिरोह के 10 सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जिसमें तीन महिलाएं शामिल हैं. पुलिस सभी आरोपियों से पूछताछ कर रही है. 21 सितंबर को मुंबई की दो मॉडल्स ने पुलिस से शिकायत की थी कि उन्हें काम के बहाने मुंबई से इंदौर बुलाया गया था. जहां उन्हें बाणगंगा इलाके के एक फ्लैट में बंधक बनाकर रखा गया फिर कुछ युवकों ने उनके साथ रेप किया था और उनका वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उनसे डेढ़ लाख रुपये ले लिए थे. इंदौर पुलिस ने मॉडल्स की शिकायत को गंभीरता से लिया और आरोपियों को पकड़ने के लिए एक टीम बनाई गई. पुलिस ने नवीन ,कुलदीप, राजेन्द्र और एक महिला आरोपी को गिरफ्तार किया है. पूछताछ में पुलिस को पता चला कि ये गैंग बाहर से युवतियों को बुलाकर देह व्यापार कराता है. इसके अलावा पुलिस को पता चला कि गिरोह की महिलाएं अपने एजेंट के माध्यम से बांग्लादेश, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र से गरीब लड़कियों को काम दिलाने का झांसा देकर यहां लाती थीं. फिर उन्हें बंधक बनाकर देह व्यापार में धकेल दिया जाता था. वीजा और पासपोर्ट न होने की वजह से विदेशी लड़कियां अपने कमरे से बाहर नहीं निकल पाती थीं. पुलिस ने 9 बांग्लादेशी युवतियों को मुक्त कराया. इनमें कुछ नाबालिग लड़कियां भी शामिल हैं. पुलिस ने कुल 13 लड़कियों को बदमाशों के चुंगल से मुक्त कराया. इस गैंग से जुड़ी तीन महिला समेत 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और उनके कब्जे से 25 मोबाइल फोन एक लैपटॉप व एक लाख रुपये कैश बरामद किए.
रायपुर । शौर्यपथ ।वरिष्ठ कांग्रेस नेता राजेश बिस्सा ने स्पीक अप फॉर किसान के लिए बोलते हुए आरोप लगाया की लोकसभा में मिले बहुमत के आधार पर भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली नरेंद्र मोदी की सरकार लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नष्ट कर भारत में लूट का तंत्र विकसित कर देश को मल्टिनेशनल कंपनियों का गुलाम बना देना चाहती है। कांग्रेस ने जिस जमींदार प्रथा को खत्म किया था उसे भाजपा वापस लाना चाहती है। बिस्सा ने कहा की मोदी सरकार ने वर्तमान में संपन्न हुए लोकसभा व राज्यसभा के सत्र में कुल 08 दिनों में 20 से अधिक विधेयक सत्ता की दादागिरी के बल पर पारित कर लिए हैं। आज हम के लिए आप के मध्य उपस्थित हुए आपको मैं बताना चाहूंगा जो विभिन्न विधेयक केंद्र सरकार ने लोकसभा और राज्यसभा में सत्ता की ताकत के आधार पर पारित किए हैं उनमें से तीन बिल ऐसे हैं जो संपूर्ण भारत वर्ष को प्रभावित करेंगे। ये बिल हैं - 1. किसान उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक 2020 2. किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) मूल्य आश्वासन कृषि सेवा विधेयक 2020 3. आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020 बिस्सा ने आरोप लगाया की नरेंद्र मोदी जी की सरकार ने इन बिलों के माध्यम से अपने पूंजीपति मित्रों के लिए 130 करोड़ भारतवासियों को लूटने एवं देश के खजाने को लुटाने हेतु मार्ग बना कर देने का काम किया है। आज अगर हमने इसका विरोध नहीं किया तो राष्ट्र के खजाने के साथ साथ आने वाली कई पीढ़ियां शोषण का शिकार रहेंगी। इन कानूनों की आड़ में एक खतरनाक कानूनी तंत्र विकसित कर लिया है मोदी सरकार ने, जिसको हमें बहुत गंभीरता से लेना चाहिए। बिस्सा ने कहा की कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक, 2020 के अनुसार कृषि उपज मंडी समितियों जैसी सरकारी मंडियों के दायरे के बाहर व्यापारिक मंडिया बनाई जाएंगी। जहां किसान अपनी उपज बेच सकेंगे और तो और राज्य सरकारें इन इलाकों पर कोई टैक्स नहीं लगा सकेंगी। लेकिन इस कानून में इस बात को शामिल नहीं किया गया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कृषि उपज को खरीदने को व्यापारी बाध्य रहेंगे। इसके दुष्परिणाम यह निकलेंगे कि पहले तो व्यापारी किसानों को उनकी उपज का पर्याप्त मूल देगा और जब अर्थाभाव के कारण धीरे-धीरे सरकारी मंडियां अस्तित्वहीन हो जाएंगी उस दिन से किसान समर्थन मूल्य पाने के लिए भी तरस जाएगा। भाजपा सरकार इस बात को अच्छी तरीके से जानती है और उसके मन में खोट है इसलिए वह न्यूनतम समर्थन मूल्य की बात को विधेयक में जोड़ना नहीं चाहती उसका तो एकमात्र उद्देश्य है अपने पूंजीपति मित्रों को लाभ पहुंचाना। इसी तरह किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) मूल्य आश्वासन कृषि सेवा विधेयक 2020 में कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग (अनुबंध खेती) की व्यवस्था की गई है।सरकार का कहना है कि इससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हो जाएगी। जबकि वास्तविकता तो यह है कि सरकार किसान और बिचौलियों के बीच से हट जाएगी और सीधे तौर पर लूटने का अधिकार बिचौलियों को दे देगी।इस बिल के माध्यम से कांग्रेस सरकार ने जिस तरह जमींदार प्रथा को खत्म किया था वापस वह उस जमींदार प्रथा को स्थापित करने का प्रयास है केंद्र सरकार ने आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020 में संशोधन कर अनाज, दलहन, आलू ,प्याज खाद्य पदार्थों को आवश्यक वस्तु की सूची से बाहर किया गया है। इसका प्रभाव ये होगा कि इन वस्तुओं के उत्पादन, वितरण और भंडार पर किसी तरह का प्रतिबंध नहीं रहेगा। जमाखोरों की चांदी हो जायेगी। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत दिये जाने वाले राशन को जमाखोरों से खरीदने के लिये मजबूर हो जायेंगी सरकारें। एक ओर तो प्रति वर्ष राष्ट्र का लाखों करोड़ रुपया मुनाफाखोरों की जेब में जायेगा दूसरी ओर आम जनता भी महंगाई का सामना करने को बेबस नजर आयेगी। बिस्सा ने कहा की इन तीनों कानूनों को पारित करने के पीछे मोदी सरकार का एक ही लक्ष्य है कि देश भले ही आजाद कहलाए, भले ही यहां की चुनाव प्रक्रिया लोकतांत्रिक कहलाए, लेकिन देश की आत्मा किसान व अर्थव्यवस्था को चंद पूंजीपतियों का गुलाम बना दिया जाए। बिस्सा ने अपील है कि देशवासियों को मोदी सरकार के षड्यंत्र भरे निर्णयों पर पूरी ताकत के साथ खड़ा होना चाहिए वरना सिर्फ पछताना पड़ेगा।
दुर्ग । शौर्यपथ । कृषि बिल को लेकर प्रदेश कांग्रेस के महासचिव राजेंद्रसाहू ने एक बार फिर केंद्र सरकार पर हमला बोला । राजेन्द्र साहू ने कहा कि केंद्र सरकार की कृषि बिल नीति से किसानों को नही उद्योगपतियों को फायदा होगा । केंद्र सरकार अगर किसानों के हितों की सोंचती तो स्वामीनाथन की रिपोर्ट को आधार बना कर अनाज के न्यूनतम समर्थन मूल्य का डेढ़ गुना निर्धारित करती किन्तु वर्तमान में जो बिल पास हुआ उससे किसानों को कोई फायदा नही होगा उससे ज्यादा फायदा बड़े बड़े उद्योगपतियों को होगा । केन्द्र की भाजपा सरकार द्वारा लागू कृषि विधेयक किसानों के साथ धोखा है बिलकुल नोटबंदी जी एस टी एवं बीस लाख करोड़ रुपये के पैकेज जैसा है जिससे आमजनता मज़दूर व किसानों सहित छोटे व्यवसायियों को किसी तरह का राहत या लाभ नही मिलता।इसलिए केन्द्र सरकार द्वारा लागू कृषि विधेयक किसानों के हित में तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाये। राजेन्द्र साहू ने अपनी बात speeakupfarmer के तहत फेसबुक लाइव के माध्यम से अपनी बात रखी । देखिये राजेन्द्र साहू ने क्या कहा ...
राजनांदगांव/शौर्यपथ / संचालक लोक शिक्षण संचालनालय इन्द्रावती भवन, नवा रायपुर द्वारा दिनांक 20 सिंतबर 2020 को पत्र लिखकर सभी कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया गया है कि निजी स्कूल छोड़ने वाले विद्यार्थियों को सरकारी स्कूलों में प्रवेश लेने के लिए प्रेरित किया जावे, क्योंकि प्रायवेट स्कूल एसोसियेशन के द्वारा यह लिखित दावा किया जा रहा है कि लगभग 2 लाख बच्चों ने निजी स्कूल छोड़ दिया है।
छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल का कहना है कि शाला त्यागी बच्चे जो ज्यादातर अंग्रेजी माध्यम से है और सरकार की सरकारी स्कूलें ज्यादातर हिन्दी मिडियम के है। ऐसी परिस्थिति में अंग्रेजी माध्यम से आने वाले बच्चों को जबरदस्ती हिन्दी मिडियम में प्रवेश दिया जाना उचित नहीं होगा, क्योंकि संचालक के पत्र में यह स्पष्ट नहीं है कि इन शालात्यागी बच्चों को सरकारी स्कूलों के किस मिडियम में प्रवेश दिया जाएगा।
पॉल का कहना है कि सरकार द्वारा विगत दो वर्ष पूर्व हर विकासखंड में अंग्रेजी मिडियम स्कूल आरंभ किया गया था और इस वर्ष सभी जिले में उत्कृष्ट अंग्रेजी मिडियम स्कूल आंरभ किया गया है, लेकिन स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा अब इन सभी शालात्यागी बच्चों को सरकारी हिन्दी मिडियम स्कूलों में प्रवेश दिलाने की योजना बनाई जा रही है।
पॉल ने बताया कि जिला शिक्षा अधिकारियों के द्वारा निजी इंग्लिश मिडियम स्कूलों से आने वाले बच्चों को भी सरकारी हिन्दी मिडियम स्कूलों में प्रवेश दिया जाना न्यायसंगत नहीं है। सरकार की नियत और नीति दोनों पर सवाल उठाया जाएगा, क्योंकि निजी इंग्लिश मिडियम स्कूल में जो बच्चा बचपन से इंग्लिश मिडियम में पढ़ा हो उसे कैसे हिन्दी मिडियम में प्रवेश दिलाया जा सकता है। शिक्षा विभाग इन बच्चों के जीवन व भविष्य के साथ इस प्रकार जान-बुझकर खिलवाड़ नहीं कर सकती है, इसलिए एसोसियेशन की यह मांग है कि अंग्रेजी माध्यम से आने वाले बच्चों को अंग्रेजी माध्यम में और हिन्दी माध्यम से आने वाले बच्चों को हिन्दी माध्यम में प्रवेश दिलाया जाए। बच्चों के जीवन व भविष्य के खिलवाड़ बर्दास्त नहीं किया जाएगा।
पॉल का कहना है कि बच्चा जब निजी स्कूल से सरकारी स्कूल में प्रवेश लेगा, तो सबसे पहले उसकी किताबें और कोर्स नई होगी, क्योंकि प्रायवेट स्कूलों में ज्यादातर किताबें प्रायवेट प्रकाशक की पढ़ाई जाती है। उसके पश्चात् सभी स्कूलों में कम से कम 50 प्रतिशत कोर्स पूर्ण किया जा चुका है ऐसे परिस्थिति में जो बच्चे प्रायवेट स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूल में जा रहे है उनका क्या होगा?
दुर्ग / शौर्यपथ / 15 साल बाद कांग्रेस सत्ता में आयी भाजपा के कार्यकाल के भ्रष्टाचार की बात करते करते और सुशासन देने का वादा करते हुए कांग्रेस चुनावी मैदान में उतरी थी . प्रदेश की जनता ने कांग्रेस की चुनावी वादों का सम्मान करते हुए सत्ता की चाबी सौपी किन्तु कांग्रेस के कुछ नेता ऐसे है जो प्रदेश सरकार की छवि खराब करने की अपने तरफ से पुरजोर कोशिश कर रहे है इन्ही कोशिशो में दुर्ग जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती शालिनी यादव के पति और मंत्री के करीबी रिवेंद्र यादव द्वारा शासन के पैसे गबन करने का आरोप लग रहा है कहते हैं जब सैयां भये कोटवार तो डर काहे का ये वाकया चरितार्थ हो रहा है दुर्ग जिले के ग्राम पंचायत बोरई में जहां रिवेंद्र यादव, जो वर्तमान जिला-पंचायत दुर्ग अध्यक्ष शालिनी यादव के पति हैं। साथ ही पंचायती राज के उच्च पद पर आसीन है वही रिवेंद्र यादव प्रदेश के कद्दावर मंत्री के करीबी भी है . राजनितिक हल्को में ये चर्चा है कि शालिनी यादव को जिला पंचायत अध्यक्ष बनाने में इन्ही मंत्री की महत्तवपूर्ण भूमिका रही थी . ग्राम पंचायत बोरई के सरपंच रहते हुए उन्होंने अपने साथी वेंडर सिन्हा ट्रेडर्स नगपुरा के संचालक ताम्रध्वज सिन्हा से मिलकर 21 लाख 70 हजार रुपए डकार दिए, निर्वाचन के 6 महीने बाद भी कई नोटिस दिए गए पर पैसा पंचायत को वापिस नही लौटाया गया। अब चूंकि जनपद व जिला-पंचायत उनके अधीनस्थ व नतमस्तक हैं , जिला प्रशासन की क्या मजाल की शासन के पैसों की वसूली कर पाए ।
आपको बता दे की ग्राम पंचायत बोरई के पूर्व सरपंच रिवेन्द्र यादव के द्वारा मनरेगा के तहत ग्राम बोरई में निजी शौचालय निर्माण करवाया गया व उसकी राशि का भुगतान 13 वे वित्त व 14वें वित्त आयोग के तहत किया गया। मनरेगा के तहत बनवाए गए शौचालयों का कुल लागत 21लाख 70 हजार रूपए एफ.टी.ओ. के माध्यम से तत्कालीन सरपंच रिवेन्द्र यादव (जो उस समय सरपंच संघ का अध्यक्ष भी था) के द्वारा जनपद पंचायत दुर्ग से सिन्हा ट्रेडर्स संचालक ताम्रधव्ज सिन्हा जो उसका करीबी आदमी व कार्यकर्ता है के खाते में जमा करवाया गया। लेकिन 3 वर्षा के बाद भी बोरई के पूर्व सरपंच रिवेन्द्र यादव ने सिन्हा ट्रेडस के मालिक ताम्रधव्ज सिन्हा से 21 लाख 70,000 रूपए की राशी को ग्राम पंचायत के खाते में वापस नहीं लिया।
भाजपा नेता अभिषेक जैसवाल की शिकायत के बाद मामला आया सामने
जिला भाजयूमों के नेता अभिषेक जैसवाल के नेतृत्व में जिला कलेक्टर को मुख्यमंत्री औऱ जिलाधिश के नाम ज्ञापन सौंप कर मामले में तुरंत कार्यवाही करने को कहा है, उनका कहना है की यदि 7 दिवसों के भीतर उक्त राशी का समयोजन नहीं किया गया और उक्त आरोपीयों के उपर एफ.आई.आर नहीं की तो भाजयुमों के कार्यकर्ता बड़ा उग्र धरना प्रदर्शन व क्षेत्रीय विधायक का पुतला दहन करेंगे।
पंचायत सचिव व जनपद के कर्मचारियों की भी कार्य प्रणाली संदिग्ध :- उक्त मामला 3 साल पुराना है ,लेकिन वसूली के लिए जनपद ने एक भी नोटिस नहीं दिया जिससे यह कहना उचित है कि , कद्दू कट गया सब में बट गया। एक ओर जिस शौचालय निर्माण का जिस पार्टी के लोग छाती पिट पिट कर विरोध करते नजऱ आते थे वहीं मौका मिलते ही उसका पैसा दबाने में पीछे भी नहीं हटे है।
क्या है मामला
दरअसल ग्राम पंचायत बोरई में मनरेगा के अंतर्गत निजी शौचालय निर्माण किया गया था। जिसमें ग्राम पंचायत द्वारा हितग्राहियों के द्वारा कार्य प्रारंभ करने हेतु ग्राम पंचायत मद के 13वें व 14वें वित्तीय से प्रति 217 हितग्राहियों का प्रति शौचालय 10 हजार के दर से 21 लाख 70 हजार का भुगतान जनपद पंचायत दुर्ग के द्वारा एफ.टि.ओ के माध्यम से सिन्हा ट्रेडर्स के खाते में जमा करवाया जा चुका है, लेकिन सिन्हा ट्रेडर्स के द्वारा 3 साल बीत जाने के बावजूद यह राशि ग्राम पंचायत के खाते में जमा नहीं करवाया गया।
इस राशि का न तो मनरेगा के तहत राशि मिलने से समायोजन किया गया और न ही शौचालयों का निर्माण पूरा किया गया। शौचालय निर्माण के बाद सम्पूर्ण राशि प्राप्त होने के बाद उस राशि से चौदहवें वित्त आयोग से उपयोग की जाने वाली राशि को उसमें समायोजन करना था जो कि नही हुआ।
बड़े नेताओं के साथ सांठ-गांठ के कारण नहीं हो रही कार्यवाही
रिवेंद्र यादव सत्ता पक्ष का नेता है व वर्तमान में उक्त व्यक्ती की पत्नी शालिनी यादव दुर्ग जिला पंचायत की अध्यक्ष है। पूर्व में रिवेन्द्र यादव सरपंच का अध्यक्ष भी रह चुका हैं और साथ ही रिवेन्द्र यादव दुर्ग के बड़े नेता और मंत्री का करीबी भी हैं। इस कारण जिला व जनपद पंचायत के अधिकारी इस मामले को दबाने की भरसक प्रयास कर रहें हैं। जनता के 21 लाख 70 हजार की राशि का गबन
रिवेन्द्र यादव व ताम्रधव्ज सिन्हा(सिन्हा ट्रेडर्स नगपूरा) के द्वारा सरेआम आमजनता का 21लाख 70 हजार रूपए चुना लगाया गया है, जिसका 3 साल का ब्याज ही 1 लाख से ज्यादा होता है। अत: आपके पार्टी के नेता और मंत्री के करीबी व्यक्तियों के द्वारा केंद्र सरकार की लोक कल्याणकारी योजनाओं का पैसा खाकर जनहित का दंभ भरना कदाचित छत्तीसगढ़ की आम जनता के साथ बेईमानी हैं।
मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन में इन मुद्दों को भाजयुमो ने प्रमुखता से उठाया
1. क्यो की रकम स्थांतरण तत्कालिन सरपंच रिवेन्द्र यादव कि सहमती से दिया गया था एवं अपने कार्यकाल पूर्ण होने तक उसके द्वारा एक बार भी रकम वापस नहीं मांगा गया, इससे यह बात स्पष्ट होता है की सिन्हा ट्रेडर्स औऱ सरपंच दोनों बराबरी के जिम्मेदार हैं।
2. शौचालय निर्माण राशी का भुगतान पंचायत के पैसों से किया गया, जो कि दूसरे मद का था, यह भी जांच का विषय हैं।
3. तीन साल से 21 लाख 70 हजार की अनियमितता के बाद भी जनपद पंचायत द्वारा साल दर साल कैसे ऑडिट किया जा रहा है, यह भी जांच का विषय है।
अत: उक्त राशि का ब्याज सहीत वसूला जांए, साथ ही अगर राशि जमा नहीं कि गई तो उक्त आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार किया जांए।
शौर्यपथ लेख / क्रिस्टोफर पाल और नजरुल खान ये दो ऐसे बेवकूफ इंसान है जो शिक्षा के लिए आज लड़ाई जमीनी स्तर पर लड़ रहे है और समझदार पालक सोशल मिडिया पर ज्ञान पेल रहे है . मुझे इनकी शिक्षा और निजी स्कूल की लड़ाई देख कर एक किस्सा याद आया . आज से तीन साल पहले की बात थी मेरे निक्की का स्कूल फीस समय पर नहीं दे पाने के कारण डीएवी स्कूल हुडको से बार बार फोन आ रहे थे जब भी फोन आता मई कॉल पर अपनी मज़बूरी बता कर कुछ दिनों बाद फीस जमा करने की बात बता देता किन्तु मेरे बताये समय का इंतज़ार भी नहीं हो रहा था स्कूल प्रबंधन को रोज रोज के काल और मेरे निक्की द्वारा फीस जमा करने के लिए स्चूओल से मेसेज आना बंद नहीं हुआ तब मैंने स्कूल के प्राचार्य से मुलाकात की और अपनी समस्या राखी तथा ये भी बताया कि मेरे द्वारा समय माँगा गया किन्तु इसके बावजूद भी लगातार मेसेज किया जा रहा है . मुझे मेसेज किया जा रहा है यहाँ तक तो सही है किन्तु मेरे बेटे के द्वारा मेसेज कर मेरे लाल के बाल मन में क्यों जहर घोला जा रहा है उसे क्यों सबके सामने शर्मिंदा किया जा रहा है प्रिंसिपल द्वारा इतनी बड़ी बात होने पर भी नियमो की दुहाई देने और फीस जमा करने की बात कही गयी जबकि शासन के नियमानुसार फीस के लिए बच्चो को परेशां करना मानसिक आघात पहुँचाना अपराध की श्रेणी में आता है किन्तु लालच से भरपूर स्कूल प्रबंधन को किसी से कोई मतलब नहीं मतलब है तो फीस से खैर मैंने जो समय माँगा था उस तय समय पर मेरे द्वारा फीस भर दी गयी पुरे पेनाल्टी सहित . पेनाल्टी सहित फीस भरने के बाद जब प्रिंसिपल से मुलाकात की और कहा की सर मेरे द्वारा देर से फीस भरने के कारण आपने जो पेनाल्टी तय की थी उसे भी भर दिया गया अब आपकी बारी है पेनाल्टी भरने की प्रिंसिपल के शब्द थे कि हम कौन सी पेनल्टी भरे तब मैंने कहा कि इतने दिनों आपने जो बच्चे को मानसिक पीड़ा दी उसकी पेनाल्टी कौन भरेगा मुझे अच्छे से याद है कि प्रिन्सिपल के वो वाक्य देर आपने की हमने हमारा काम किया . अगर आपको अच्छा नहीं लगता तो आप बच्चो को स्कूल से निकाल सकते है हम हर मामले में सही है . हालंकि प्रिंसिपल को समझ में आया की गलती उसकी भी है किन्तु बच्चो के भविष्य के लिए हमने बात खत्म की .
लेकिन उसके कुछ दिनों बाद ही एक वाकया हुआ तब वार्षिक उत्सव की तैयारी चलने लगी जिसके लिए जो जो प्रतिभागी था उसे समय समय पर स्कूल बुलाया जाता था मेरा लाल भी इस प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और निर्धारित समय पर स्कूल बस से जाने लगा लगातार १० दिनों तक जाने के बाद जिस दिन फाइनल सलेक्शन होना था उस दिन जाने का समय परिवर्तन हुआ जिसकी सुचना स्कूल से मिलनी चाहिए थी किन्तु मुझे समय पर नहीं मिली और मेरा लाल फाइनल सलेक्शन के दिन नहीं जा पाया इस तरह वो आयोजन में प्रतिभागी नहीं बन पाया जिसके कारण काफी उदास हो गया रोया भी मुझे इस बात का पता चलते ही मई अपने बेटे को स्कूल लेकर गया और प्रिंसिपल से मुलाक़ात की सारी बात राखी तब प्रिंसिपल का दो शब् मुझे स्तभ कर गया सॉरी स्टाफ से गलती हो गयी . किन्तु मुझे सार्री मंजूर नहीं था जिस तरह फीस की देरी की सजा मुझे मिली मेरे बच्चे को मिली उसी तरह इस लापरवाही की सज़ा भी जिम्मेदार को मिलनी ही चाहिए मई प्राचार्य के सामने अड़ गया कि जिसकी भी गलती के कारण मेरा बेटा प्रतिभागी नहीं बन पाया उसे सजा मिलनी ही चाहिए क्योकि मेरे द्वारा आपके स्कूल का हर नियम का पालन किया गया अब ये स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी है कि जिसने भी गलती की है उसे सजा मिले काफी बहस और तर्क वितर्क के बाद स्कूल के प्राचार्य ने जिम्मेदार लोगो को जिसमे बस कंडक्टर जिसने फोन पर सूचित नहीं किया , मेसेज भेजने वाले स्टाफ जिसने समय पर मेसेज नहीं भेजा , नहीं आने का कारण नहीं पूछने वाले टीचर पर कार्यवाही की बात स्व्वेकार की तब मैंने कहा की इन सबके जिम्मेदार आप भी है जिनके अंडर में ये सारा कार्य हो रहा है मुखिया होने के नाते गलती आपकी भी है आखिर कार स्कूल के प्राचार्य ने भी माफ़ी मांगी इन सब वाक्य में मैंने अपने बेटे को साथ रखा . जब स्कूल से बाहर निकले तब मैंने बेटे को बताया कि बेटा स्कूल फीस किसी मज़बूरी वश देर से देने के बाद भी सजा के तौर पर पेनाल्टी भरी क्योकि गलती हमारी थी कि हमने स्कूल फीस समय पर जमा नहीं कराई और इस गलती के लिए पेनाल्टी भरने के साथ स्कूल प्रबंधन से देर से फीस जमा करने के लिए माफ़ी भी मांगी उसी तरह इस बार तुम वार्षिक उत्सव में प्रतिभागी नहीं बने इसमें गलती तुम्हारी नहीं स्कूल प्रबंधन की थी और इस लिए स्कूल प्रबंधन से न्याय के लिए लड़ाई लड़ी उनके माफ़ी मांगने से जीत नहीं हुई जीत इस लिए हुई कि तुम कही गलत नहीं थे वो गलत थे इसलिए मन में ये ना सोंचो की वार्षिक उत्सव में भाग नहीं ले पाए अगले साल फिर मेहनत करना और भाग लेना . किन्तु भगवान को शायद मंजूर नहीं था अगले साल मेरा बेटा ही इस दुनिया में नहीं रहा उसे तो इश्वर ने सभी प्रतियोगिता से मुक्त कर दिया स्कूल की भी और जिन्दगी की भी .
आज उन्ही बच्चो पर अन्याय ना हो और बच्चो का हक उन्हें मिले इस लिए शहर के दो पागल इंसान क्रिस्टोफर पाल और नजरुल खान निजी स्कूल की मनमानी निति के खिलाफ लड़ रहे है और कुछ पालक तो साथ है किन्तु बहुतेरे पालक दुर से सोशल मिडिया से ज्ञान दे रहे है किन्तु साथ नहीं आ रहे है . अरे समझदार पालको नजरुल खान और क्रिस्टोफर पाल जैसे लोग अपने बच्चो के लिए नहीं लड़ रहे है आपके लिए लड़ रहे है उन निजी स्कूल वालो से जो सालो पहले एक छोटे से घर में रहते थे एक छोटी सी किराए की बिल्डिंग में स्कूल चलाते थे आज लाखो की गाडियों में घूम रहे है करोडो की बिल्डिंग के मालिक है लाखो रूपये घुमने फिरने में खर्च करते है लखपति से करोडपति हो गए है किन्तु वैश्विक महामारी के समय भी ऐसे पेश आ रहे है कि अगर फीस नहीं मिली तो बर्बाद हो जायेंगे बस एक बार दिल में हाँथ रखकर ये सोंचो कि जो आज स्कूल के मालिक है वो कुछ साल पहले कैसी जिन्दगी जी रहे थे और कितनी संपत्ति थी और अब कितनी है . नजरुल खान और क्रिस्टोफर पाल जैसे लोग बेवकूफ नहीं है बेवकूफ तो वो है जो अपने बच्चो के साथ हो रहे अन्याय के बाद भी मौन है शिक्षा पर सबका अधिकार है किन्तु शिक्षा को बेचने वाले को ये बात तभी समझ आएगी जब आप लोग संगठित हो जाओगे नहीं तो आज नहीं तो कल आपके बच्चो के कंधो का सहारा लेकर ये निजी स्कूल वाले लालची प्रवित्ति के लोग आपको बेइज्जत करते रहेंगे साथ ही बच्चो के बालमन के साथ खिलवाड़ मै तो बेवकूफ नजरुल खान के साथ हु मै तो बेवकूफ क्रिस्टोफर के साथ हूँ क्योकि मै बेवकूफ हूँ लेकिन एक पिता हूँ जो अपने बच्ची के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकता और लालची लोगो का साथ नहीं दे सकता समझदारी से अच्छा बेवकूफ कहलाना पसंद करूँगा क्योकि अपने बच्ची के साथ अन्याय नहीं होने दूंगा . हाँ मै क्रिस्टोफर और नजरुल जैसे लोगो के साथ हूँ जो शिक्षा के लिए लड़ाई लड़ रहे है . आप किसके साथ है ये आपके ऊपर है क्योकि बच्चे आपके है उनके भविष्य की चिंता आपको ज्यादा है सबसे ज्यादा .... ( शरद पंसारी - सम्पादक , दैनिक शौर्यपथ समाचार पत्र )
राजनांदगांव / शौर्यपथ / भारत का संविधान की अनुच्छेद 21 (ए) के अनुसार राज्य के द्वारा सभी बच्चों को नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराया जायेगा। नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के अनुच्छेद 8 (व्याख्या) (1) व (2) के अनुसार राज्य सभी बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने और अनिवार्य दाखिले, उपस्थिति और प्राथमिक शिक्षा पूर्ण करने को सुनिश्चित करने के लिए बाध्य है।
छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल का कहना है कि संविधान या आरटीई कानून सिर्फ कमजोर तबका को नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराया करने की बात नहीं करते है, बल्कि यह सार्वभौमिक है। कोई बच्चा जो भारत का नागरिक है, अमीर या गरीब, लड़का या लड़की, किसी भी जाति का हो, उसे नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा पाने का अधिकार प्राप्त है।
पॉल का कहना है कि प्रदेश में स्कूली बच्चों के मौलिक अधिकार का हनन हो रहा है। कोरोना महामारी में अब मंदी के कारण लोगों की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो चुका है, जिसके कारण कई पालक अपने बच्चों की ट्यूशन फीस जमा करने की स्थिति में नहीं है। मात्र ऊंची फीस नहीं देने के कारण प्रायवेट स्कूलों के द्वारा बच्चों को शिक्षा से वंचित किया जा रहा है। इस सत्र 2020-21 में लगभग 2 लाख बच्चे प्रायवेट स्कूल छोड़ कर जा चुके है। सरकार शिक्षा को लेकर गंभीर नहीं है, शालात्यागी बच्चों का आकड़ा सरकार के पास नहीं है।
पॉल का कहना है कि प्रदेश के 8 हजार प्राईवेट स्कूलों में अध्ययनरत् 10 लाख बच्चों की नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा की चिंता करना भी सरकार का दायित्व है। शिक्षा पाना बच्चों का मौलिक अधिकार है और यह सरकार का दायित्व है कि सभी बच्चे नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्राप्त करे। लोक शिक्षण संचालनालय ने प्रायवेट स्कूल छोड़ रहे बच्चों को सरकारी स्कूलों में प्रवेश दिलाने के लिए दिनांक 20 सिंतबर 2020 को पत्र जारी किया है, लेकिन ज्यादातर बच्चे अंग्रेजी मिडियम स्कूलों से बाहर किये जा रहे है और सरकार इन बच्चों को किस सरकारी अंग्रेजी मिडियम स्कूल में प्रवेश दिलाने का प्रयास कर रही है यह समझ से परे है, क्योंकि ज्यादातर सरकारी स्कूल तो हिन्दी मिडियम के है। पॉल ने प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर प्रायवेट स्कूलों में अध्ययनरत् 10 लाख बच्चों की इस सत्र 2020-21 की ट्यूशन फीस वहन करने की मांग की है।
भिलाई नगर / शौर्यपथ / संपत्तिकर दाताओं के द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली स्व विवरणी जो उनके स्वयं के द्वारा भरकर प्रस्तुत की जाती है इसके आधार पर संपत्तिकर की राशि जमा की जाती है! स्व विवरणी प्रस्तुतकर्ता की रेंडम जांच के लिए आयुक्त श्री ऋतुराज रघुवंशी ने निर्देश दिए थे! आयुक्त के निर्देश पर उपायुक्त एवं संपत्तिकर प्रभारी तरुण पाल लहरें ने जोन क्रमांक 1 के सहायक राजस्व अधिकारी को छत्तीसगढ़ नगर पालिका भवनों/भूमियों के वार्षिक भाड़ा मूल्य का अवधारण नियम 1997 के अधीन सूर्या ट्रेजर आईलैंड जुनवानी द्वारा 18 मई 2018 को प्रस्तुत संपत्ति कर स्व विवरणी की स्थल पर सत्यता जांच कर माप एवं गणना सहित प्रतिवेदन देने के लिए दिनांक 30 जुलाई 2020 को पत्र प्रेषित किया था!
पत्र प्राप्त होते ही नगर पालिक निगम भिलाई के जोन क्रमांक 1 की तीन सदस्यीय टीम जोन आयुक्त सुनील अग्रहरि के साथ 4 अगस्त 2020 को सूर्या ट्रेजर आईलैंड पहुंची और प्रबंधन से दस्तावेज प्राप्त कर सूर्या मॉल भवन की नाप जोख कर स्व विवरणी के अनुसार स्थल पर सत्यापन किया और सत्यापन कार्य पूर्ण कर सहायक राजस्व अधिकारी शरद दुबे ने पूरी विस्तृत रिपोर्ट संपत्ति कर अधिकारी को सौंप दी है! तीन सदस्यीय टीम में उप अभियंता अरविंद शर्मा, आलोक पसीने एवं सहायक राजस्व अधिकारी शरद दुबे ने जांच की कार्रवाई शुरू की थी! सुबह से शाम तक सूर्या मॉल में नक्शा के अनुसार नापजोख किया गया था इस दौरान भवन निर्माण अधिकारी हिमांशु देशमुख, सहायक राजस्व अधिकारी संजय वर्मा, बाल कृष्ण नायडू भी मौजूद थे! भवन के पूरे मंजिलों का स्वीकृत मानचित्र के आधार पर सत्यापन करने के बाद स्व विवरणी के राशि गणना की सत्यता परखने के लिए सहायक अभियंता अनिल सिंह को जिम्मेदारी दी गई !
सहायक अभियंता ने अपने रिपोर्ट में बताया कि वित्तीय वर्ष 2020-21 में कुल संपत्ति कर 4410436 रुपए गणना की गई थी परंतु जांच उपरांत 4924456 रुपए देय राशि पाया गया है जिसमें 514020 रुपए का अंतर है यानी कि इस अंतर की राशि की 5 गुणा राशि को सूर्या ट्रेजर आईलैंड के प्रबंधन को जमा करना होगा!
करो के भुगतान के लिए स्क्वायर फिट में भी अंतर जांच में यह भी पाया गया है कि सूर्या ट्रेजर आईलैंड के द्वारा कुल 432086.31 वर्ग फीट के अनुसार से कर का भुगतान किया जाता रहा है परंतु जांच के उपरांत 493644.70 वर्ग फीट स्थल पर पाया गया है और इसके अंतर की बात करें तो 61558.39 वर्ग फीट है जो कि 10त्न से अधिक का अंतर है!
अब प्रतिवर्ष अंतर की राशि के साथ जमा करना होगा संपत्ति कर सूर्या ट्रेजर आइलैंड के द्वारा पूर्व में 4410436 रुपए संपत्तिकर का भुगतान किया जा रहा था! अब 4924455.82 रुपए संपत्तिकर प्रतिवर्ष जमा करना होगा! जांच के उपरांत इन दोनों की राशि का अंतर की बात करें तो 514020 रुपए की राशि निकलती है!यह भी पाया गया जांच में इसलिए 2570100 रुपए की होगी वसूली
पूर्व में हुई गणना में ग्राउंड फ्लोर पर आर्टियम का एरिया नहीं लिया गया था एवं प्रथम, द्वितीय, तृतीय, चतुर्थ, पंचम एवं षष्टम तल पर भवन पूर्णता प्रमाण पत्र के आधार पर गणना किया गया था! जबकि गणना कुल निर्मित क्षेत्र के आधार पर की जानी थी! अब सही गणना के अनुसार 514020 रुपए का अंतर प्राप्त हुआ है! छत्तीसगढ़ नगर पालिका नियम 1997 की कंडिका 11 के अनुक्रम में कंडिका एक में उल्लेखित है कि पुन:निर्धारण में किसी ओर 10त्न की फेरफार को ध्यान में नहीं लिया जाएगा परंतु फेरफार 10त्न से अधिक हो वहां पर भूमि/भवन का स्वामी ऐसे शक्ति का भुगतान करने के दायित्वाधीन होगा जो ऐसे स्वामी द्वारा किए गए स्व निर्धारण तथा नगर पालिका द्वारा किए गए पुन:निर्धारण के अंतर की राशि के 5 गुणा के बराबर होगी! इस आशय से अब अंतर की राशि 514020 का 5 गुणा राशि 2570100 सूर्या ट्रेजर आईलैंड जुनवानी से वसूली की जाएगी!
राजनांदगांव / शौर्यपथ / बीती रात शहर के बसंतपुर स्थित नवीन कृषि उपज मंडी थोक सब्जी बाजार में एक युवक की सामूहिक रूप से मिलकर आधा दर्जन युवकों ने हत्या कर दी। घटना के बाद चार युवकों ने बकायदा पुलिस के समक्ष समर्पण कर दिया हैए वहीं तीन आरोपी फरार हैं।
मिली जानकारी के मुताबिक बीती रात लगभग 12 बजे बसंतपुर वार्ड नंबर 43 के रहने वाले गोल्डी मरकाम की मोहल्ले के ही आधा दर्जन युवकों ने मिलकर धारदार हथियार से हत्या कर दी। बताया जा रहा है कि आरोपियों और मृतक के बीच अवैध कारोबार को लेकर मनमुटाव चल रहा था। मृतक और मुख्य आरोपी राजा निकोसे के बीच पहले गहरी दोस्ती थी। बाद में मतभेद के चलते दोनों के बीच आपसी दुश्मनी ठन गई।
पिछले कुछ दिनों से मृतक लगातार आरोपियों के साथ मारपीट कर रहा था।
मुख्य आरोपी राजा निकोसे का अपने साथियों पंकज यादव, विष्णु यादव, विकास वैष्णव, खेमू यादव तथा छीन यादव के साथ मृतक से आमना-सामना हो गया। दोनों में कहा-सुनी होते ही मृतक पर सभी ने ताबड़तोड़ धारदार हथियार से कई वार किए। जिसके चलते वह लहुलुहान हो गया। वहीं मृतक के साथ मौजूद कौरिनभाठा के प्रतीक ताम्रकार को भी आरोपियों ने वार कर घायल कर दिया। बताया जा रहा है कि मृतक को अस्पताल में जब लाया गया तब तक उसकी जान चली गई। वहीं साथी प्रतीक का इलाज चल रहा है।
इधर बीते तीन दिन के भीतर हुए हत्या की दो घटनाओ ं से शहर में फिर से गैंगबाजों के सिर उठाने की चर्चा से लोग सहमे हुए हैं। बीते 21 सितंबर को भी एक निगरानीशुदा बदमाश परवेज कुरैशी की कंचनबाग में आपसी रंजिश के चलते भी आधा दर्जन युवकों ने धारदार हथियार से वार कर हत्या कर दी थी।
इस संबंध में बसंतपुर थाना प्रभारी व प्रशिक्षु डीएसपी रूचि वर्मा ने बताया कि फरार आरोपियों की खोजबीन की जा रही है। घटना की वजह आपसी रंजिश है। उधर हत्या से गुस्साए वार्ड के लोगों ने आरोपियों के वाहनों को भी आग के हवाले कर दिया। बताया जा रहा है कि आरोपियों को मारने की नियत से मृतक के परिवार के लोग भी हथियार बंद होकर पहुंचे थे। पुलिस की दखल से मामले को संभाला गया।
बीती रात हुई गोल्डी मरकाम की हत्या की घटना के दौरान मौके पर मौजूद बसंतपुर थाना में पदस्थ एक आरक्षक मुकेश कुर्रे को तत्काल एसपी डी. श्रवण ने निलंबित कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि वारदात से पहले आरक्षक कुर्रे मृतक के साथ शराब का सेवन कर रहा था। इसी बीच मौके पर चाकू-छुरी चली। किसी तरह आरक्षक वहां से भागने में कामयाब हो गया। जिसके चलती उसकी जान बच गई। चर्चा है कि मृतक के साथ आरक्षक का रोज का उठना-बैठना था। मृतक भी कई अवैध कारोबार में शामिल था। बताया जा रहा है कि एसपी श्रवण ने आरक्षक के आचरण को सिविल सेवा अधिनियम के विपरीत मानते हुए निलंबित किया है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
