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मुंबई / शौर्यपथ / मुबंई पुलिस ने मंगलवार को फिल्म डायरेक्टर अनुराग कश्यप के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज की है. डायरेक्टर पर एक्ट्रेस पायल घोष ने 2013 में अपने साथ यौन दुराचार करने का आरोप लगाया था. कश्यप ने इन आरोपों को आधारहीन बताकर खारिज कर दिया था. एक अधिकारी ने बताया है कि घोष और उनके वकील नितिन सातपुते पुलिस में पहुंचे जिसके बाद मंगलवार देर रात वर्सोवा पुलिस स्टेशन कश्यप के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई.
कश्यप के खिलाफ आईपीसी की 376 (I) (रेप), 354 (महिला की शीलता भंग करने के इरादे के साथ उसका शोषण करना या आपराधिक दबाव डालना), 341 (गलत तरीके से नियंत्रण करना) और 342 (गलत तरीके से रोकना) धाराओं में केस दर्ज किया गया है. अधिकारी ने बताया कि मामले की आगे जांच हो रही है. उन्होंने कहा कि कश्यप को सात साल पुराने इस मामले में पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा.
अपनी शिकायत में एक्ट्रेस ने आरोप लगाया है कि कश्यप ने 2013 में वर्सोवा में यारी रोड की एक जगह पर उनका रेप किया था. अधिकारी ने बताया कि घोष और उनके वकील पहले सोमवार को ओशीवारा पुलिस स्टेशन गए थे लेकन वहां से उन्हें वर्सोवा आने को बोला गया क्योंकि कथित घटना उसी न्यायिक क्षेत्र की थी. वो ओशीवारा पुलिस के पास इसलिए गए थे क्योंकि कश्यप का ऑफिस इसी इलाके में है.
नितिन सातपुते ने मंगलवार देर रात ट्वीट कर बताया था कि 'आरोपी के खिलाफ आखिरकार एफआईआर दर्ज कर लिया गया है.' बता दें कि शनिवार को पायल घोष ने ट्विटर पर एक ट्वीट करते हुए दावा किया था कि कश्यप ने उनसे अनुचित यौन व्यवहार किया था. उनके इस आरोप को कश्यप ने खारिज करते हुए कहा था कि उन्हें उनके मुखर विचारों के चलते निशाना बनाए जाने की कोशिश की जा रही है.
कश्यप के वकील की ओर से एक बयान भी जारी किया गया था, जिसमें कहा गया था कि 'मेरे क्लाइंट, अनुराग कश्यप को इन झूठे आरोपों से तकलीफ हुई है. यह बिल्कुल गलत, बेईमान और अपमानजनक आरोप हैं.' उनकी तरफ से यह भी कहा गया था कि इन आरोपों से मी टू मूवमेंट की सार्थकता और विश्वसनीयता कम की जा रही है. कश्यप के समर्थन में उनकी पहली दो बीवियां आरती बजाज और कल्कि कोचलिन भी सामने आई थीं और इन आरोपों के खिलाफ लड़ने के लिए हौसला बढ़ाया था.
नई दिल्ली / शौर्यपथ / आगरा उत्तर प्रदेश के आगरा में एक ऐसी घटना हुई है, जिसने एक बार फिर 'जाको रखे साईंया, मार सके न कोई' वाली बात को सच साबित कर दिया. यहां पर मंगलवार को एक छोटे बच्चे को ट्रेन की चपेट में आने से रोक लिया गया. दरअसल, घटना 21 सितंबर को दोपहर 2 बजे के आसपास हुई आगरा डिवीजन की है. यहां से एक मालगाड़ी दिल्ली से आगरा जा रही थी, तभी एक छोटे बच्चे को पटरी पर फेंक दिया गया लेकिन चमत्कारिक रूप से बच्चे को वक्त रहते देख लिया गया और बच्चा सही-सलामत बचा लिया गया.
बच्चे को थोड़ी बड़ी उम्र के एक दूसरे बच्चे ने ही पटरी पर फेंका था. बल्लभगढ़ स्टेशन से आ रही मालगड़ी ट्रेन, शुक्र है कि 15 की स्पीड से चल रही थी. तभी लोको पायलट दीवान सिंह और अतुल आनंद ने देखा कि एक 12-13 साल के बच्चे ने दो साल के एक बच्चे को चलती मालगाड़ी के आगे फेंक दिया. पायलट ने ब्रेक लगाया लेकिन इंजन आगे निकल गई. बच्चा तो बच गया लेकिन वो इंजन के बीच में फंस गया.
पायलट की सतर्कता से इंजन में फंसे बच्चे को निकाल लिया गया. पीछे से बच्चे की मां आ रही थी, जिसे बच्चे को सौंप दिया गया. वहीं बड़े बच्चे को आगरा के GRP पुलिस को सौंप दिया गया है. माना जा रहा है कि दोनों भाई हैं. पुलिस मामले की जांच कर रही है.
नई दिल्ली / शौर्यपथ /वाराणसी भारतीय वायु सेना में महिला फाइटर पायलटों की भर्ती शुरू होने के बाद राफेल को उड़ाने का मौका बनारस की शिवांगी को मिला है. बीएचयू से एनसीसी करने के बाद शिवांगी ने भारतीय वायु सेना की राफेल स्क्वाड्रन की पहली महिला फाइटर पायलट बनने का सौभाग्य हासिल किया है.
फ्रांस से राफेल विमानों का बेड़ा भारत आने के बाद से ही चर्चा थी कि आखिर कौन फाइटर पायलट इसे उड़ाएगा. इसमें पुरुषों के साथ महिला पायलट भी होंगी या नहीं जैसी चर्चा हो रही थी. अब इस चर्चा पर बनारस में पली बढ़ीं और बीएचयू से एनसीसी करने वाली शिवांगी ने विराम लगा दिया है. शिवांगी भारतीय वायु सेना की राफेल स्क्वाड्रन की पहली महिला फाइटर पायलट बनने का सौभाग्य हासिल किया है.
शिवांगी को महिला लड़ाकू पायलटों के दूसरे बैच के हिस्से के रूप में 2017 में भारतीय वायु सेना में कमीशन मिला था. वाराणसी जिले की मूल निवासी फ्लाइट लेफ्टिनेंट शिवांगी सिंह फिलहाल प्रशिक्षण के दौर में हैं. जल्द ही शिवांगी अंबाला में 17 स्क्वाड्रन गोल्डन एरो में शामिल होंगी. भारतीय वायु सेना में वर्ष 2017 में शामिल होने के बाद शिवांगी सिंह मिग -21 बाइसन उड़ा रही हैं. वह अंबाला में भारत के सर्वश्रेष्ठ फाइटर पायलटों में से एक विंग कमांडर अभिनंदन के साथ भी काम कर चुकी हैं.
शिवांगी के पिता शिवांगी की इस उपलब्धि पर बताते हैं कि उसका सपना था कि वह विमान उड़ाए. हम लोगों को गर्व है कि हमारी बेटी बनारस के साथ ही देश का नाम रोशन करेगी. शिवांगी ने 2013 से 2016 तक बीएचयू के एनसीसी का प्रशिक्षण लिया था और सनबीम भगवानपुर से बीएससी किया था.
नई दिल्ली / शौर्यपथ / दिल्ली विधानसभा के पैनल के नोटिस के खिलाफ फेसबुक इंडिया के उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक अजीत मोहन की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस कृष्ण मुरारी की बेंच ने सुनवाई की. दिल्ली के दंगों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की कथित भूमिका से संबंधित कार्यवाही में दिल्ली विधानसभा की शांति और सद्भाव समिति ने फेसबुक को नोटिस जारी किया है. समिति ने अब फेसबुक इंडिया के अजीत मोहन को 23 सितंबर को समिति के समक्ष पेश होकर गवाही सुनिश्चित करने के लिए एक नया नोटिस जारी किया है. समिति द्वारा रविवार को जारी बयान में चेतावनी दी गई है कि नोटिस को न मानना समिति को ‘संवैधानिक रूप से प्रदत्त विशेषाधिकार का उल्लंघन' माना जाएगा.
अपनी याचिका में अजीत मोहन ने नोटिस को खारिज करने की मांग की है. याचिका में यह भी कहा गया है कि दिल्ली विधानसभा की समिति उसे पेश होने के लिए मजबूर नहीं कर सकती. यह मुद्दा संसद के समक्ष है. मोहन संसदीय पैनल के सामने पेश हुए हैं. दिल्ली में पुलिस और पब्लिक ऑर्डर केंद्र के पास है. आम आदमी पार्टी (आप) द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा गया कि फेसबुक पहली नजर में दोषी है और सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की जानी है. 'आप' ये यह कैसे कह सकती है? वह अदालत नहीं है.
सुप्रीम कोर्ट में अजीत मोहन की ओर से वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कहा कि एक डिप्टी सेकेट्ररी यह तय नहीं कर सकता कि विशेषाधिकार का उल्लंघन क्या होता है. अनुच्छेद 19 के तहत मेरा अधिकार है और उसमें भी, मुझे न बोलने का अधिकार है. मैं एक बाहरी व्यक्ति हूं और मैं समिति की कार्यशैली में हस्तक्षेप नहीं कर रहा हूं, ना ही मैंने विधायी कर्तव्यों में हस्तक्षेप किया है. ये मुद्दा राजनीतिक फेरबदल का है. नोटिस से मेरे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है.
हरीश साल्वे ने दलील दी कि कमेटी को इस तरह के समन जारी करने का विशेषाधिकार हासिल नहीं है. मुझे दो समन मिले हैं. इस बात की जानकारी नहीं है कि वो मेरी बतौर गवाह पेशी चाहते हैं या एक्सपर्ट के तौर पर. हमने 13 सिम्बर को इस बारे में कमेटी को लिखा भी है कि वह समन को वापस ले, लेकिन अजीत मोहन के पेश न होने पर कमेटी ने इसे विशेषाधिकार हनन मानते हुए समन जारी कर दिया, जबकि विशेषाधिकार का मसला विधानसभा तय करती है, कमेटी नहीं.
हरीश साल्वे ने कहा कि आर्टिकल 19 के तहत अभिव्यक्ति की आजादी के अंर्तगत ही किसी मसले पर न बोलने का अधिकार भी निहित है. यह मसला राजनीतिक रंग ले चुका है. मैं इसका हिस्सा नहीं बनना चाहता. लेकिन मुझे कमेटी के सामने पेश होने के लिए मज़बूर करना और ऐसा न करने की सूरत में दंड भुगतने की धमकी देना मेरी अभिव्यक्ति की आजादी के मूल अधिकार का हनन है.
हरीश साल्वे ने कहा कि सांप्रदायिक दंगों से जुड़े मुद्दे दिल्ली विधानसभा के अधिकार में नहीं आते हैं. पुलिस तथा सार्वजनिक व्यवस्था दिल्ली विधानसभा के अधिकार क्षेत्र में नहीं है. समिति को इन मुद्दों से निपटने के लिए कानून का कोई अधिकार नहीं है. विधानसभा चाहे, वो फैसला लेने या कमेटी के गठन के लिए स्वतंत्र है. लेकिन आप समझने की कोशिश कीजिए मैं अमेरिकी की एक कंपनी के लिए काम करता हूं, लेकिन अगर मैं राजनीतिक रूप से संवेदनशील इस मसले पर अगर कमेटी के सामने कोई राय नहीं रखता, तो मुझे इसके लिए बाध्य नहीं किया जा सकता.
फेसबुक इंक की ओर से मुकुल रोहतगी ने दो टूक कहा कि वो समन पूरी तरह असंवैधानिक है. अजीत मोहन हमारे अधिकारी हैं. हम कतई नहीं चाहते कि इस पचड़े में वो पड़ें. केन्द्र सरकार और सदन को हम जवाब दे चुके हैं. साल्वे ने कहा कि अजीत मोहन कमेटी के समक्ष पेश नहीं होते तो कोई कार्रवाई ना हो, अदालत ये आदेश जारी करे.
मुकुल रोहतगी ने कहा कि विधायी समिति को न्याय निर्णय की कोई शक्ति नहीं है. विधायिका न्याय की अदालत नहीं होती. कमेटी केअध्यक्ष का कहना है कि फेसबुक दोषी है. उनका कहना है कि समिति ने पहले ही कहा है कि FB का दिल्ली दंगों में हाथ है. वह यह कहने वाले कौन होते हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष वकील अभिषेक मनु सिंघवी से कहा कि हम नोटिस जारी करने के इच्छुक हैं. क्या सरंक्षण आदेश दिया जा सकता है?
दिल्ली विधानसभा पैनल के वकील सिंघवी ने अदालत को बताया उनके खिलाफ कोई कठोर कदम नहीं उठाया जाएगा.अजीत मोहन को गवाह के रूप में बुलाया गया है. फेसबुक को आरोपी नहीं कहा गया है. हम सुरक्षा उपाय चाहते हैं ताकि फेसबुक का दुरुपयोग न हो. सिंघवी ने कहा कि हम फेसबुक को संशोधित नेटिस भेजने को तैयार हैं. फेसबुक को आरोपी के रूप में नहीं बुलाया गया, लेकिन उसका दुरुपयोग हुआ है.
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली विधानसभा सचिव, केंद्र, राज्यसभा और लोकसभा महासचिव और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है. दिल्ली विधानसभा सचिव ने अदालत को पैनल की बैठक नहीं करने का आश्वासन दिया है. समिति की आज की बैठक टाल दी गई है. मामले की 15 अक्टूबर को अगली सुनवाई होगाी.
सुप्रीम कोर्ट ने विधानसभा सचिव के बयान को रिकॉर्ड पर लिया कि फिलहाल समिति की बैठक को टाल दिया गया है. दिल्ली विधानसभा की शांति और सौहार्द समिति की बैठक टाली गई है. समिति के अध्यक्ष राघव चड्ढा ने बैठक को सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के मद्देनजर टालने की घोषणा की
नई दिल्ली / शौर्यपथ / शारजाह आईपीएल-2020 के अंतर्गत मंगलवार को महेंद्र सिंह धोनी की चेन्नई सुपरकिंग्स के खिलाफ युवा बल्लेबाज संजू सैमसन मानो कहर बरपाने को आमादा थे. राजस्थान रॉयल्स की ओर से खेल रहे संजू ने अपनी 74 रनों की ताबड़तोड़ पारी के दौरान चेन्नई के किसी भी गेंदबाज को नहीं बख्शा. उनके आगे सभी विपक्षी बल्लेबाज सहमे नजर आए. संजू ने मात्र 32 गेंदों पर 9 छक्कों और एक चौके की मदद से 74 रन ठोक डाले और CSK को हराने में अहम भूमिका निभाई. उनका स्ट्राइक रेट 231.25 का रहा.यह संजू की तूफानी पारी का ही कमाल था कि राजस्थान रॉयल्स निर्धारित 20 ओवर्स में 216 रन बनाने में सफल रही. जवाब में चेन्नई की टीम 20 ओवर में छह विकेट पर 200 रन ही बना पाई और 16 रन से मैच हार गई.
मैच में इस शानदार पारी के लिए संजू को मैन ऑफ द मैच का पुरस्कार तो मिला ही, साथ ही इससे भी एक 'बड़ा अवार्ड' मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर की तारीफ के रूप में मिला. यह मैच शारजाह क्रिकेट स्टेडियम में खेला गया.
संजू की धमाकेदार पारी की तारीफ करते हुए 'क्रिकेट के भगवान' कहे जाने वाले सचिन ने ट्वीट किया, 'संजू की ओर से साफसुथरे स्ट्रोक्स (Clean striking). ये प्रापर क्रिकेट शॉट्स थे, स्लॉग नहीं. लुंगी एंगिडी ने चतुराई से बॉलिंग की. उन्होंने गेंदों को थोड़ा वाइड और स्लो रखा #CSKvsRR' सचिन से मिली इस प्रशंसा को बढ़कर भला क्या हो सकता है. उनके ट्वीट के जवाब में संजू ने लिखा, 'थैंक्स ए लाट सर.' सचिन के अलावा तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने भी संजू की बैटिंग की जमकर प्रशंसा की. उन्होंने लिखा- तिरुवनंतपुरम के अपने संजू सैमसन की बेहतरीन पारी. कल उन्होंने देश और दुनिया को दिखाया कि अपने प्रापर क्रिकेटिंग शॉट से वे क्या कर सकते हैं.
नई दिल्ली / शौर्यपथ / बिहार में विधानसभा चुनाव सिर पर है. सभी सियासी दल तैयारियों में जुटे हैं. सीट बंटवारे से लेकर कैंडिडेट के चयन तक सभी दलों के अंदर मंथन चल रहा है. सत्ता पक्ष की तरफ से खुद सीएम नीतीश कुमार ने कमान संभाल रखी है. पीएम नरेंद्र मोदी भी उनका साथ दे रहे हैं. अब तक कई शिलान्यास, उद्घाटन कार्यक्रम के बहाने पीएम मोदी आधा दर्जन सभाओं को वर्चुअली संबोधित कर चुके हैं. इन सभाओं में वो नीतीश कुमार की तारीफों के पुल बांध चुके हैं लेकिन ये पहली बार है, जब बीजेपी और जेडीयू का चुनाव प्रचार इतना आक्रामक रुख अपनाए हुए है.
उधर, विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव अभी भी चुनावी सभाओं के मामले में पीछे पड़े हुए हैं. इनके अलावा नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार जैसे सियासी दिग्गजों और धुरंधर के सामने 31 वर्षीय तेजस्वी के लिए लंबी लकीर खींचना भी मुश्किल हो सकता है क्योंकि मौजूदा वक्त में उनके सामने ये पांच बड़ी चुनौतियां खड़ी हैं-
वर्चुअल चुनाव प्रचार
कोरोना वायरस की वजह से इस बार चुनावी प्रक्रिया से लेकर चुनाव प्रचार का तरीका बदल चुका है. बीजेपी और जेडीयू ने मौके की नजाकत को देखते हुए न सिर्फ डिजिटल मंच तैयार किया है बल्कि उसके जरिए सीएम नीतीश कुमार और पीएम मोदी सीधे जनता से संवाद कर रहे हैं, जबकि तेजस्वी यादव इस मामले में काफी पीछे हैं. हालांकि, सोशल मीडिया पर उनकी सक्रियता पहले से और तेज हुई है.
7 सितंबर को सीएम नीतीश ने वर्चुअली निश्चय संवाद रैली की. इसे देशभर के करीब 40 लाख लोगों ने देखा. पार्टी के मुताबिक बिहार के करीब 12.82 लाख लोगों ने उस दिन नीतीश को द्खा और सुना. नीतीश से भी तीन महीने पहले बीजेपी की तरफ से अमित शाह ने बिहार की वर्चुअल रैली को संबोधित करने की शुरुआत की थी. बीजेपी ने भी दावा किया था कि 40 लाख से ज्यादा लोगों ने उस रैली को देखा-सुना. शाह को राज्य की सभी 243 विधान सभा सीटों के 72,000 बूथों पर एलईडी के जरिए देखा-सुना गया. राजद इस मोर्चे पर एनडीए से काफी पीछे है. वैसे राजद नेता दावा करते हैं कि उनका जोर वर्चुअल नहीं एक्चुअल रैलियों पर है.
लालू का जेल के अंदर होना
1980 के बाद यह पहला विधानसभा चुनाव होगा जब राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव शारीरिक तौर पर इसमें शामिल नहीं होंगे. यानी लोकसभा चुनाव 2019 की तरह ये विधान सभा चुनाव भी बगैर लालू के लड़ा जाएगा. ऐसे में राजद को खासकर ग्रामीण मतदाताओं को लुभाने में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. 2015 में लालू यादवे ने कुल 252 चुनावी सभाओं को संबोधित किया था. उनका गंवई अंदाज और ग्रामीण वोटरों को लुभाने का अंदाज निराला होता है. चुनाव में किस समय पर कौन सा कार्ड फेंकना है, इस सियासी खेल के वो माहिर रहे हैं, लेकिन उनकी गैर हाजिरी में अब सारा बोझ तेजस्वी पर आ चुका है.
पारिवारिक कलह
राजद मुखिया लालू यादव के परिवार में कलह नई बात नहीं है. लोकसभा चुनाव में तेजस्वी के बड़े भाई तेज प्रताप यादव ने अपने मनमुताबिक कई उम्मीदवार उतारे थे जिससे राजद कैंडिडेट की हार हुई थी. सूत्र बता रहे हैं कि तेजप्रताप विधानसभा चुनावों में भी अपने समर्थकों को टिकट दिलाने की जुगत में लगे हैं. अगर पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया तो 2019 के लोकसभा चुनाव जैसा हाल भी हो सकता है. तेजप्रताप के तलाक और ससुर चंद्रिका राय के जेडीयू में जाने का भी खामियाजा राजद को छपरा में भुगतना पड़ सकता है.
महागठबंधन नेताओं की मजबूरी
महागठबंधन के तहत ही राजद चुनाव लड़ेगा. इस गठबंधन में राजद के अलावा कांग्रेस, उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा, मुकेश साहनी की वीआईपी और लेफ्ट दलों में सीपीआई, सीपीएम और सीपीआई (एमएल) शामिल है. जीतनराम मांझी पहले ही महागठबंधन को टाटा-बाय-बाय बोल चुके हैं. गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर खींचतान जारी है. तेजस्वी के लिए सबसे बड़ी समस्या सहयोगी दलों के साथ सीटों का बंटवारा और उपयुक्त कैंडिडेट की तलाश है. वैसे माना जा रहा है कि तेजस्वी सवर्णों को भी लुभाने के लिए कई सीटों पर उस समुदाय के लोगों को टिकट दे सकते हैं.
असदुद्दीन ओवैसी की एंट्री
महागठबंधन खासकर राजद माय (MY) समीकरण यानी मुस्लिम-यादव वोटबैंक के सहारे राज्य में राजनीति करता रहा है. नीतीश भी मुस्लिम वोटों में सेंधमारी करते रहे हैं लेकिन केंद्र की बीजेपी सरकार द्वारा हालिया कुछ फैसलों से माना जा रहा है कि मुसलमान जेडीयू से मुंह मोड़ सकते हैं. ऐसे में उनका विकल्प सिर्फ राजद बचता है. लेकिन हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने बिहार में चुनाव लड़ने का फैसला किया है.
उनकी पार्टी AIMIM 22 जिलों की 32 सीटों पर उम्मीदवार उतार सकती है। इनमें से अधिकांश मुस्लिम और यादव बहुल इलाके हैं. माय समीकरण में ही सेंधमारी करते हुए ओवौसी ने पिछले दिनों पूर्व केंद्रीय मंत्री देवेंद्र यादव को पार्टी में शामिल करवाया है.
दुर्ग । शौर्यपथ । दुर्ग निगम खेतर में 20 से 30 सितंबर तक लॉक डाउन है ऐसे में जहाँ प्रशासन द्वारा लॉक डाउन के नियमों को पालन करने की अपील की जा रही वही कुछ संचालकों द्वारा अभी भी नियम विरुद्ध व्यापार किया जा रहा है ऐसे स्थिति में दुर्ग निगम बाजार विभाग भी सक्रिय हो गया । आज दुर्ग निगम बाजार विभाग द्वारा लॉक डाउन के नियमो का कड़ाई से पालन करवाने निगम आयुक्त के निर्देश पर निरीक्षण के दौरान कई दुकानदारों द्वारा व्यापार संचालन किया जा रहा था जिसे बन्द करवाया गया और जुर्माना वसूला गया । इस कार्यवाही में गायत्री मंदिर के समीप संचालित मुकेश मोबाइल शॉप को निगम प्रशासन के बाजार विभाग द्वारा सीलबंद की कार्यवाही की साथ ही सांझा चूल्हा , शिमला टायर्स , दीपक ट्रेडर्स , शांति किराना स्टोर्स , एसके जैन , भिलाई बेकरी , सुखदेव पंजवानी सहित अन्य लोगो से लॉक डाउन का उल्लंघन करने पर जुर्माने की कार्यवाही की और जुर्माना राशि 10500 रुपये वसूला गया । बाजार विभाग की इस कार्यवाही में निगम के अधिकारी थानसिंग यादव एवम उनकी टीम शशिकांत यादव , संजय यादव , भूषण साहू , ईश्वर वर्मा , भारती आदि मौजूद थे । निगम आयुक्त बर्मन ने शहर की जनता और व्यापारियों से अपील की कि लॉक डाउन के नियमो का पालन करे बाजार विभाग की कार्यवाही व जुर्माने से बचे लॉक डाउन शहर को सुरक्षित रखने की दिशा में एक प्रयास है जिसमे सफलता आम जनों और व्यापारियों के सहयोग से ही मिलेगी साथ ही आयुक्त ने बताया कि अगले 30 सितंबर तक यह कार्यवाही निरंतर चलेगी किसी को भी लॉक डाउन के उल्लंघन करने पर बख्शा नही जाएगा और शासन के नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी ।
दुर्ग । शौर्यपथ । दुर्ग शहर मध्य ब्लाक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अलताफ अहमद ने कृषि विधेयक को लेकर केंद्र सरकार के दावे को झूठा करार दिया है। अलताफ ने कहा कि यह विधेयक पूरी तरह किसान विरोधी है। केंद्र सरकार की नीतियों से देश के करोड़ों किसानों का विश्वास उठ चुका है। कृषि प्रधान देश में पूरी खेती की व्यवस्था को मोदी सरकार ने कार्पोरेट जगत के हवाले कर दिया है। केंद्र सरकार अगर वास्तव में किसानों का हित चाहती है तो पूरे देश में भूपेश सरकार की नीतियों को लागू करना चाहिए। अलताफ ने कहा कि मोदी सरकार के इस बिल से किसान तबाह हो जाएंगे। विधेयक लागू होने के बाद देश के किसान फसल की पैदावार के लिए जी-तोड़ मेहनत करेंगे और इसका मुनाफा बड़े औद्योगिक-व्यवसायिक घराने कमाएंगे। अलताफ ने सवाल किया कि अगर यह बिल किसानों के फायदे के लिए है तो हरियाणा, पंजाब, मप्र सहित अन्य राज्यों में किसान बिल के विरोध में सड़कों पर आंदोलन किसलिए कर रहे हैं। अलताफ ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों से कर्जमाफी और 25 सौ रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी का वादा किया था। यह वादा सरकार बनाने के दो दिनों के भीतर लागू कर दिया गया। दूसरी ओर मोदी सरकार ने 6 साल पहले लोकसभा चुनाव में किसानों की आय दोगुना करने का वादा किया था। यह वादा आज तक पूरा नहीं किया गया। केंद्र सरकार के किसान विरोधी फैसलों के कारण बड़े राज्यों में किसान आत्महत्या कर रहे हैं। अलताफ ने कहा कि मोदी सरकार अगर किसानों का भला चाहती है तो धान, गेहूं, मक्का,जौ सहित सभी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करने का फैसला करे। केंद्र सरकार को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की किसान नीतियों को पूरे देश में लागू करना चाहिए। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के फैसलों से छत्तीसगढ़ के किसान बेहद खुश हैं। केंद्र सरकार को भी भूपेश सरकार की नीतियों को फालो करना चाहिए। -0-0-0-0-
सेहत / शौर्यपथ / क्या आप टाइप-2 डायबिटीज से जूझ रहे हैं? अगर हां तो मुमकिन है कि आपका अग्नाशय 25 फीसदी तक सिकुड़ गया हो। इससे न सिर्फ आपको ब्लड शुगर नियंत्रित रखने में परेशानी होती है, बल्कि हाजमा भी बिगड़ जाता है। हालांकि, ब्रिटेन स्थित न्यूकैसल यूनिवर्सिटी के हालिया अध्ययन की मानें तो डायबिटीज रोगी वजन घटाकर सिकुड़े अग्नाशय को दोबारा सामान्य आकार में ला सकते हैं। इसके लिए उनका न सिर्फ डाइटिंग और एक्सरसाइज करना, बल्कि नींद पर भी ध्यान देना बेहद जरूरी है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक अग्नाशय में सिकुड़न टाइप-2 डायबिटीज की बड़ी वजह है। शरीर में अत्यधिक चर्बी जमने के कारण टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित मरीजों के अग्नाशय के आकार में स्वस्थ लोगों के मुकाबले 25 फीसदी तक की कमी दर्ज की गई है। इससे उनमें इंसुलिन के उत्पादन में तो कमी आती ही है, साथ ही पाचन क्रिया को बढ़ावा देने वाले एनजाइम का स्त्राव भी घट जाता है।
खास बात यह है कि डायबिटीज रोगी अगर वजन में 10 से 15 किलो तक की कटौती करें तो उनका अग्नाशय सामान्य आकार में लौट जाता है। मोटापे पर काबू पाने के लिए उनका स्वस्थ खानपान और व्यायाम अपनाना ही काफी नहीं है। आठ घंटे की मीठी नींद लेना भी बेहद अहम है।
मुख्य शोधकर्ता प्रोफेसर रॉय टेलर कहते हैं, 2018 में हमारी टीम ने पाया था कि जो प्रतिभागी सूप और जूस से लैस डाइट लेकर दिनभर में 850 से ज्यादा कैलोरी का सेवन न करने का लक्ष्य तय करते हैं, उनके वजन में दो से तीन महीने में ही 10 से 15 किलो की कमी आती है। इससे वे धीरे-धीरे डायबिटीज को मात देने की दिशा में भी आगे बढ़ने लगते हैं।
ताजा अध्ययन में हमने देखा कि इन प्रतिभागियों के अग्नाशय में दो साल में 20 से 25 फीसदी तक की वृद्धि होती है। यानी वह सामान्य आकार में लौट आता है। इससे शरीर में इंसुलिन का उत्पादन बढ़ना और ब्लड शुगर नियंत्रित होना लाजिमी है। अध्ययन के नतीजे ‘द लांसेट डायबिटीज एंड एंडोक्राइन जर्नल’ के हालिया अंक में प्रकाशित किए गए हैं।
हफ्ते में चार बार गुनगुने पानी से नहाएं-
रात में बिस्तर पर जाने से पहले गुनगुने पानी से नहाते हैं? अगर हां तो आपकी यह आदत टाइप-2 डायबिटीज और हृदयरोगों से बचाव में खासी मददगार साबित हो सकती है। जापान स्थित कोह्नोदाई यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने 1300 प्रतिभागियों में गुनगुने पानी के स्नान का फायदा आंकने के बाद यह दावा किया है। उन्होंने पाया कि जो लोग हफ्ते में चार बार गुनगुने पानी से नहाते हैं, उनका न सिर्फ बीएमआई (वजन और कद का अनुपात), बल्कि ब्लड शुगर का स्तर और रक्तचाप भी नियंत्रित रहता है। स्ट्रेस हार्मोन के स्तर में कमी आना और फील गुड हार्मोन का स्त्राव बढ़ना इसकी मुख्य वजह है।
सेहत /शौर्यपथ / कोरोना से ठीक होने के तुरंत बाद अगर आप सामान्य दिनचर्या में लौटना चाहते हैं तो व्यायाम जैसे मेहनत वाले काम करने से पहले दिल की जांच करा लें। अमेरिकी वैज्ञानिकों ने एक शोध में पाया कि बीमारी से ठीक होने पर भी मरीजों का हृदय क्षतिग्रस्त हो जाता है, ऐसे लोग अगर जिम जाकर व्यायाम करने लगेंगे तो उनकी जान भी जा सकती है।
अरिजोना राज्य की बैनर यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स मेडिसिन के निदेशक डॉ. स्टीवन एरिकसन के शोधदल ने यह पता लगाया है। उनका कहना है कि बीमारी से ठीक हुए लोगों को वर्कआउट करने या किसी खेल आयोजन में भाग लेने से पहले कार्डियक स्क्रीनिंग जरूर करा लेनी चाहिए। उनका कहना है कि मरीज याद रखें कि कोरोना वायरस महज श्वसन तंत्र से जुड़ा रोग नहीं है बल्कि यह शरीर के हर अहम हिस्से को लंबे वक्त तक क्षति पहुंचाता है। इसके कारण हृदय पर चकत्ते और सूजन आ सकती है।
निगेटिव होने के 14 दिन बाद ही ट्रेनिंग करें-
शोध दल की सलाह है कि कोई भी जिम करने वाला व्यक्ति या खिलाड़ी संक्रमित होने के बाद ठीक हो जाता है तो उसे निगेटिव रिपोर्ट आने के 14 दिन बाद ही अपनी ट्रेनिंग शुरू करनी चाहिए। साथ ही वह अपने हृदय की जांच कराए और शरीर में हो रहे बदलावों पर निगाह रखे। शोधकर्ता एरिकसन कहते हैं कि अगर किसी ऐसे खिलाड़ी को जल्द ही किसी खेल आयोजन में भाग लेना है तो वह पहले किसी हृदयरोग विशेषज्ञ से अपनी जांच करा ले।
इसलिए वायरस से खराब होते दूसरे अंग-
शोधकर्ता व अरिजोना कॉलेज ऑफ मेडिसिन के प्रो. क्रिस ग्लेमबोटस्की का कहना है कि शरीर में वायरस के घुसने पर वह कई दूसरे अंगों और ऊतकों में भी प्रवेश करता है, जिससे इंफ्लेमेशन प्रतिक्रिया होने लगती है। यानी उस अंग को काम करने के लिए अपनी क्षमता से अधिक शक्ति लगानी पड़ती है जिससे उस पर बुरा असर पड़ता है।
बिना लक्षण वालों को कम खतरा-
शोधदल ने पाया कि बिना लक्षण वाले कोरोना मरीजों में हृदय क्षति की संभावना कम है। वे मरीज इस बात को लेकर ज्यादा सतर्क रहें जिनके शरीर में कोरोना के लक्षण दिख रहे थे और उन्हें वायरस ने कम से कम तीन दिन तक चपेट में लिया। ऐसे लोगों विशेषकर जिम जाने वालों और खिलाड़ियों को अपनी ट्रेनिंग शुरू करने से पहले दिन की जांच करा लेनी चाहिए।
ये जांच कराएं-
वैज्ञानिकों ने ऐसे लोगों को इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम और खून की जांच कराने की सलाह दी है। पहली जांच के जरिए हृदय में इलेक्ट्रिकल सिग्नल मापते हैं। वहीं, रक्त जांच से ट्रॉपोनिन प्रोटीन की मात्रा पता की जाती है जो कि सामान्यत: हृदय की मांसपेशियों में रहता है पर हृदय में क्षति होने पर इसका रिसाव खून में होने लगता है।
संक्रमित खिलाड़ियों को हुई दिल की बीमारी -
प्रतिष्ठित जामा जर्नल में छपे शोध में दावा किया गया कि संक्रमण से ठीक होकर खेल प्रतिस्पर्धा में भाग लेने वाले 15% एथलीटों में मायकार्डिटिस के लक्षण दिखाई दिए। यह हृदय की मांसपेशियों से जुड़ा रोग है, जिसमें अचानक हार्टफेल के कारण मौत हो सकती है। ओहियो राज्य विश्वविद्यालय ने शोध में पाया कि 26 महिला व पुरुष एथलीटों में से चार के शरीर में इस बीमारी के लक्षण दिखे।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
