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शौर्यपथ / अखरोट का नाम सबसे पसंदीदा ड्राई फ्रूट्स में लिया जाता है। सेहत से जुड़े फायदों के साथ स्किन केयर के लिए भी अखरोट बेहद फायदेमंद है। आप अगर चेहरे पर नेचुरल ग्लो पाने के लिए महंगे प्रॉडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं, तो आप इन्हें छोड़कर अखरोट को स्किन केयर रूटीन में शामिल कर सकते हैं।आइए, जानते हैं अखरोट के फायदे-
फेसपैक बनाकर करें इस्तेमाल
एक चम्मच अखरोट का पाउडर, एक चम्मच ओलिव ऑयल, दो चम्मच गुलाब जल व आधा चम्मच शहद मिलाकर पेस्ट बना लें।
इस पैक को अपने चेहरे पर 15 मिनट के लिए लगाकर छोड़ दें।
फिर सूखने पर पानी से मुंह धो लें।
बेहतर परिणाम के लिए आप यह फेसपैक सप्ताह में दो से तीन बार लगा सकते हैं।
डार्क सर्कल के लिए
अखरोट का तेल आपकी आंखों के नीचे आई सूजन को दूर करता है और डार्क सर्कल कम करने में मदद करता है।
आप थोड़ा-सा अखरोट का तेल लें। तेल को गुनगुना करके इसे आंखों के नीचे काले घेरे वाले भाग पर लगाकर सो जाएं। फिर सुबह सामान्य तरीके से चेहरा धो लें। आप इस प्रक्रिया को रोज रात को तब तक दोहराएं, जब तक असर दिखना न शुरू हो जाए।
आंखों ने नीचे की सिलवटों को दूर करें
आप नींबू का रस, शहद, ओटमील और अखरोट का पाउडर एक साथ मिलाकर पेस्ट बना लें।
इस पेस्ट को आंखों के नीचे लगाएं और 15-20 मिनट के लिए छोड़ दें।
फिर पानी से धो लें।
इस प्रक्रिया को आप सप्ताह में तीन से चार बार दोहरा सकते हैं।
धर्म संसार / शौर्यपथ वैदिक धर्म ग्रन्थों के अनुसार वासुदेव द्वादशी व्रत पर्व द्वारकाधीश भगवान श्री कृष्?ण के नाम से प्रसिद्ध है। यह वासुदेव द्वादशी व्रत पर्व चतुर मास के शुरुआत आषाढ़ के महीने में देवसयानी एकादशी के एक दिन बाद बड़े ही धूम-धाम से मनाई जाती है। इस दिन श्रीकृष्?ण के साथ भगवान विष्?णु और माता लक्ष्?मी की पूजा की जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार जो भी भक्त इस अदभुत वासुदेव द्वादशी पर्व को अषाढ़, श्रावण, भाद्रपद और अश्विन मास में वासुदेव द्वादशी की विधि विधान से पूजा करता है उसे मोक्ष की प्राप्?ति होती है। यह व्रत आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वादशी पर मनाना विशेष फलदायी माना जाता है। इसमें देवता वासुदेव की पूजा, और वासुदेव के विभिन्न नामों एवं उनके व्यूहों के साथ पाद से सिर तक के सभी अंगों का पूजन होता है।
नारद मुनि द्वारा कथा का वृतांत :- धर्म ग्रन्थों व वैदिक ब्राह्मणों के आधार पर वासुदेव द्वादशी के दिन वासुदेव की पूजन का विधान इस तरह से है की उस दिन किसी जलपात्र वासुदेव भगवान की प्रतिमा रखकर रक्त व पीत वस्त्रों से ढककर वासुदेव की स्वर्णिम प्रतिमा का पूजन किया जाता है तथा साथ ही उस दिन दान करने का विशेष विधान है । इस व्रत का विधान नारद मुनि द्वारा वसुदेव एवं देवकी को बताया गया था कि जो भक्त इस व्रत को विधि विधान से रखता है तो उनके सारे पाप कट जाते हैं। उसे पुत्र की प्राप्ति होती है या नष्ट हुआ राज्य पुन: मिल जाता है।
इस प्रकार से इस व्रत का पालन वसुदेव और देवकी ने रखा और उनको हर प्रकर से मुक्ति व खोया हुआ राज्य प्राप्त हुआ इस व्रत का नियम सुबह सबसे पहले नहाने के बाद साफ कपड़े पहनने चाहिये। और पूरे दिन निराहार व्रत रहना होता। भगवान को आप हाथ के पंखे, लैंप के साथ फल फूल चढ़ाने चाहिये। भगवान विष्?णू की पंचामृत से पूजा करनी चाहिये। उन्?हें भोग लगाना चाहिये। इस दिन विष्?णु सहस्?त्रनाम का जाप करने से आप की हर समस्?या का समाधान होगा। और भक्त सदैव सुख पूर्वक सम्पन्न व अपनी सभी मनोकामनां को सुख पूर्वक जीता है
धर्म संसार / शौर्यपथ / हिंदू पंचांग में हर माह आने वाली आठवीं तिथि को अष्टमी कहा जाता है। यह तिथि मास में दो बार आती है। एक बार पूर्णिमा के बाद और दूसरी बार अमावस्या के बाद यह तिथि आती है। पूर्णिमा के बाद आने वाली अष्टमी को कृष्ण पक्ष की अष्टमी और अमावस्या के बाद आने वाली अष्टमी को शुक्ल पक्ष की अष्टमी कहा जाता है। इस तिथि पर मां दुर्गा की उपासना की जाती है। इस दिन मां दुर्गा का व्रत, पूजन करने से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। सुख, समृद्धि, संपन्नता की प्राप्ति होती है। अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन दुर्गा चालीसा का पाठ अवश्य करें।
हिंदू पंचांग की आठवीं तिथि अष्टमी का विशेष नाम कलावती है। इस तिथि में कई तरह की कलाएं और विधाएं सीखना लाभकारी होता है। मान्यता है कि इस तिथि में अभिनय, नृत्य, गायन आदि कला सीखने के लिए प्रवेश लेना शुभ होता है। यह तिथि चंद्रमा की आठवीं कला है। अष्टमी तिथि के स्वामी भगवान शिव माने गए हैं लेकिन अष्टमी तिथि मां दुर्गा की शक्ति के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। शुक्ल पक्ष की अष्टमी में भगवान शिव का पूजन करना वर्जित है, लेकिन कृष्ण पक्ष की अष्टमी में भगवान शिव का पूजन करना उत्तम माना गया है। किसी भी पक्ष की अष्टमी तिथि में नारियल का सेवन नहीं करना चाहिए। इस पावन तिथि पर लाल फूल, लाल चंदन, दीया, धूप आदि से विधि-विधान से मां की उपासना करें। इस दिन तामसिक भोजन का सेवन न करें। भोग विलासिता से दूर रहें। रात्रि में जमीन पर शयन करें।
मनोरंजन / शौर्यपथ / पॉप्युलर टीवी शो 'ये रिश्ते हैं प्यार के' जल्द ही बंद होने वाला है। हाल ही में इसकी जानकारी दी गई। शो के ऑफएयर होने से फैन्स काफी निराश हैं। यहां तक कि फैन्स ने चैनल और मेकर्स से शो के एक्सटेंशन की अपील की थी। अब इस शो को लेकर नई खबर सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि शो का दूसरा सीजन लाया जाएगा, जो अगले साल लॉन्च हो सकता है। हालांकि अभी तक इसकी ऑफिशियल घोषणा नहीं की गई है।
पिकंविला ने अपनी एक रिपोर्ट में सूत्र के आधार पर बताया, कम टीआरपी के चलते शो को बंद करने का फैसला किया है। इस बीच आईपीएल, बिग बॉस 14 और केबीसी 12 जैसे शुरू होने वाले हैं। ऐसे में आपसी सहमति से पाया गया कि शो की टीआरपी में उछाल के बेहद कम चांस है। यह वजह है कि मेकर्स ने शो को ऑफ एयर करने का निर्णय लिया गया है।
गौरतलब है कि ये रिश्ते हैं प्यार के में शहीर शेख, रिया शर्मा, कावेरी प्रियम, अविनाश मिश्रा समेत अन्य सितारे अहम भूमिका निभा रहे हैं। शहीर शेख, रिया और कावेरी ने शो के बंद होने की खबरों पर हैरानी जाहिर की थी। सभी स्टार्स इस महीने तक शो के लिए शूट करेंगे।
शो ये रिश्ते हैं प्यार के का लास्ट एपिसोड 17 अक्टूबर को टेलीकास्ट किया जाएगा। इस शो की जगह अब फैंस साथ निभाना साथिया 2 देख पाएंगे। जानकारी के अनुसार, यह शो 19 अक्टूबर से शुरू हो सकता है। मालूम हो कि ये रिश्ते हैं प्यार के मार्च 2019 में शुरू हुआ था। शो को लोगों ने खूब पसंद किया।
मनोरंजन / शौर्यपथ / बॉलीवुड एक्टर सोनू सूद लोगों की मदद करने के लिए सबसे आगे रहते हैं। एक्टर से गुहार लगाने वाले जरूरतमदों तक उनकी मदद न पहुंचे ऐसा हो ही नहीं सकता है। अब सोनू सूद ने एक बच्चे को मोबाइल दिया है ताकि वह ऑनलाइन क्लास अटेंड कर पाए। दरअसल, हाल ही में सोनू सूद से एक यूजर ने ट्वीट करते हुए एक बच्चे को ऑनलाइन क्लास के लिए स्मार्टफोन देने का आग्रह किया था। इस इस सोनू ने रिप्लाई करते हुए कहा था कि अगर वह मुझसे वादा करे कि वह मुझे पॉपकॉर्न की पार्टी देगा तो मैं जरूर उसे फोन दूंगा।
अब सोनू सूद ने अपना वादा पूरा कर दिया है। उन्होंने बच्चे तक मोबाइल पहुंचा दिया है। यूजर ने फिर से ट्वीट करते हुए लिखा, 'सर हैप्पी को मोबाइल तो मिल गया, अब वह बच्चा ऑनलाइन क्लास कर पाएगा। सर आपने तो अपना वादा 10 घंटे में ही पूरा कर दिया। अब हमारी बारी है, तो सर कब आ रहे हैं पॉपकॉर्न खाने।Ó इसके जवाब में सोनू सूद ने लिखा, 'अरे वाह। हीरो लग रहा है हैप्पी। पॉपकॉर्न तैयार रख जल्दी आता हूं खाने।Ó
हाल ही में एक्टर सोनू सूद ने नेपोटिज्म को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा कि करियर के शुरुआती दिनों में फिल्म इंडस्ट्री में उन्होंने भी पक्षपात का सामना किया। उन्हें फिल्मों के पोस्टर्स से उन्हें हटा दिया जाता था।
सोनू सूद ने जी न्यूज के साथ इंटरव्यू में कहा, 'मैं फिल्म फैमिली से नहीं हूं। जब मैंने इंडस्ट्री में प्रवेश किया तो ऐसी कई फिल्में थीं, जिनके पोस्टर्स में मुझे होना चाहिए थे लेकिन मुझे हटा दिया गया। ऐसे में सिर्फ दो ही रास्ते हैं, या तो मैं पोस्टर पर नहीं होने, रोल में कटौती के बारे में शिकायत कर सकता हूं कि या फिर कड़ी मेहनत करके मैं इस योग्य बन जाऊं कि लोग कहें कि मैं पोस्टर्स में होने का हकदार हूं।Ó
एक्टर ने आगे कहा कि जिसके पास पावर होता है वह हमेशा इसका इस्तेमाल करेगा। चाहे वह बॉलीवुड हो, कॉर्पोरेट वल्र्ड या फिर क्लॉथ शॉप। शक्तिशाली शख्स हमेशा नीचे वालों को दबाने की कोशिश करेगा। ऐसे में आपको इससे उबरने के लिए पावर की जरूरत है।
शौर्यपथ लेख / शहर में लॉक डाउन की घोषणा हुई और इस घोषणा से पहले जिला प्रशासन ने आम जनता की राय ली ऐसा सुनने में आया जब इस बात की गहराई तक गए तो पता जला कि एक बैठक हुई और शहर के जनप्रतिनिधि , व्यापारी संगठन और जिला प्रशासन के बड़े अधिकारियों ने मिल कर ये फैसला लिया कि शहर में एक बार फिर लॉक डाउन होना चाहिए और बहुत ही सख्त इतना सख्त कि हवा भी इधर से उधर ना हो सके सभी दुकाने बंद रहेंगी , सभी पेट्रोल पम्प बंद रहेंगे , सब्जी दूकान बंद रहेगी , राशन दूकान बंद रहेगी . सुनकर अच्छा लगा कि चलो शासन ने कोई सख्त कदम उठाया और जनता के हित की बात सोंची . पर क्या किसी ने भी यह सोंचा कि इन १० दिनों के सख्त लॉक डाउन और उसमे भी ७ दिनों का अति सख्त लॉक डाउन का क्या परिणाम निकलेगा . और आम जनता मिडिल क्लास जनता , गरीब तबके के लोगो पर इसका क्या असर पड़ेगा . गरीब और मध्यम वर्ग की पीड़ा क्या जनप्रतिनिधि समझते है , क्या अधिकारी समझते है , क्या व्यापारिक संगठन के मठाधीश समझते है . मेरे नजर से तो कोई भी नहीं समझता इनमे से .
चलिए आप ही अपने दिल पर हाँथ रखकर बताइये फैसले लेने वाले महोदय १० दिन तो क्या अगर १०० दिन भी लॉक डाउन रहेगा तो भी शहर के किसी भी निर्वाचित जनप्रतिनिधि को कोई परेशानी नहीं आएगी ना ही उनके घर में राशन की दिक्कत होगी और ना ही किसी अन्य तरह की परेशानी १०० दिन भी अगर घर पर रहेंगे तो भी उनकी सेहत पर कोई असर नहीं पड़ेगा . ऐसी ही हालत व्यापारी संगठन की है शहर के व्यापारी संगठन वालो में से कोई ऐसा व्यापारी हो तो हमे जरुर बताइए जिसे १० तो क्या अगर १०० दिन भी लॉक डाउन रहे और घर के अंदर रहना पड़े तो कितने होंगे जिन्हें दो वक्त की रोटी के लिए मोहताज़ होना होगा . यहाँ बात नफ़ा नुक्सान की नहीं दो वक्त की भूख मिटाने की हो रही है . ऐसी ही हालत बड़े बड़े पद में विराजमान शासकीय अधिकारी की ही बात करे तो एक भी ऐसा अधिकारी बता दीजिये जिन्हें दो वक्त पेट की आग शांत करने की चिंता होगी . मेरी नजर में इनमे से कोई नहीं है .

क्या शहर में सिर्फ गणमान्य नागरिक ही रहते है जिनकी राय ली जाती है क्या शहर की आम जनता के जीवन का कोई मोल नहीं है ये वही गणमान्य नागरिक है जो अपने व्यापर में कई बार शासन के नियमो की धज्जी उड़ाते हुए व्यापार करते है और ये देते है अपनी राय कि शहर में लॉक डाउन होना चाहिए क्या कोई ऐसा जनप्रतिनिधि है जो गरीब जनता की बात सुने तकलीफ सुन कर समस्या का हल करे यहाँ तो स्थिति इसी है कि जनप्रतिनिधि ज्ञान पेलने पर माहिर है क्योकि पेट के आग की इन्हें चिंता नहीं है अपनी नाकामी हुपाने और झूठी वाहवाही लुटने में ही इन्हें आत्म संतुष्टि मिलती है .
क्या फैसला लेने वाले मठाधिशो ने कभी सोंचा है कि १० दिन के लॉक डाउन में उस परिवार का क्या होगा जो रोज मजदूरी करता है और रोज घर में दो वक्त का खाना खाता है क्या उस परिवार का सोंचा है जो घर में बेरोजगार बैठा है , क्या उस व्यक्ति की पीड़ा का आभास है इन्हें जो अपनी तकलीफों के बावजूद इस लिए काम करता है कि रात को अपने परिवार को दो वक्त की रोटी दे सके . साहब पेट की आग क्या होती है फैसले लेने वाले को कभी अहसास ही नहीं है छोटी छोटी जरुरत को भी ना पूरी करने वाला इन १० दिनों में कैसे एक एक दिन गुजारेगा इस बात का अहसास एसी कमरे में हॉट काफी और कोल्ड काफी पीने वालो को यक़ीनन नहीं होगा इनके लिए तो १० दिन एक टार्गेट है क्योकि सारी सुविधाए , सारी शक्तियों के बाद भी ये महामारी से लड़ने के लिए कोई रास्ता तो नहीं निकाल रहे जिसे जनता का हित हो अपितु यही रास्ता निकाल लिए कि १० दिन घर में आराम करो . अरे साहब कौन १० दिन घर में आराम करेगा गरीब व्यक्ति १० दिन ऐसे बिताएगा जैसे एक एक पल सजा काट रहा हो और नजरो के सामने परिवार के सदस्यों की जरुरत को पूरी न कर पाने की पीड़ा सहन करते हुए ११ वे दिन का इंतज़ार करते हुए एक एक पल गिनता रहेगा और दिल से उन लोगो को बद्दुआ देगा जो जो इसके कारण है क्योकि १० दिन शासन के नियम को मानने वाला यही गरीब परिवार होता है इन १० दिनों की पीड़ा का अहसास अगर करना है तो आप रहो अपने आलिशान बंगले में किन्तु साथ यह भी करो कि घर से दो वक्त की रोटी के सारे इंतजाम हटा दो और देखो फिर कैसे आपको भी ये १० दिन १० साल जैसे लगेंगे .

चलिए साहब आप लोगो का फैसला सर आँखों पर ये १० दिन आपके आदेश अनुसार घर पर किन्तु क्या इन दस दिनों के बाद आने वाला समय सामान्य हो जाएगा क्या १० दिनों बाद जो भीड़ बाजार में उतरेगी उसे नियंत्रण कर पायेंगे , १० दिनों बाद जो वातावरण निर्मित होगा उससे क्या कोरोना और विस्फोट नहीं लेगा क्या १० दिनों के लॉक डाउन के बाद सब सामान्य हो जायेगा अगर ऐसा है तो १० क्या आप १५ दिन कर दो लॉक डाउन किन्तु उसके बाद भी अगर स्थिति सामान्य नहीं होगी तो क्या फैसले लेने वाले गणमान्य शहर की जनता के सामने ये कबुल करेंगे कि हमारा फैसला गलत था . हमे मालूम है नहीं करेंगे क्योकि आप लोगो से गलती नहीं होती साहब गलती तो गरीबो से होती है कानून तो गरीबो के लिए है , सारे नियम गरीबो के लिए है अगर आप के फैसले को सफलता मिलेगी तो बड़े बड़े प्रोपोगंडा करके अपनी कामयाबी बताएँगे किन्तु असफल होते ही सारा दोष एक बार फिर गरीब जनता के उपर लगा कर अपनी बुद्धिमता का परिचय देंगे क्योकि आप तो धरती के भगवन बन गए है किन्तु साहब कभी दिल से सोंचना इस दुनिया के बाद भी एक दुनिया है जहा आपका रुतबा नहीं आपके कर्म काम आते है और जिसके दरबार में कोई राजा नहीं होता कोई रंक नहीं होता सब एक सामान होते है और कर्मो का हिसाब देते है उस दरबार में ही सबका निष्पक्ष फैसला होता है . साहब आप लोगो के फैसले शिरोधार्य बस फैसले लेते समय आम जनता की तकलीफों के बारे में आम जनता से ही सवाल कीजिये ख़ास जनता क्या जाने आम जनता की तकलीफ अब तो बस यही दुआ है कि ये १० दिन पल पल के हिसाब से निकल जाए क्योकि पल पल का हिसाब ऍम जनता और गरीब जनता को ही करना है और करेगा भी क्योकि यही वो जनता है जो कानून का सम्मान करती है नियमो का पालन करती है लोकतंत्र की रक्षा करती है एक समाज के निर्माण में अपना अहम् योगदान देती है और वैश्विक महामारी से कही ज्यादा इस बात की चिंता में लीन रहती है कि परिवार को दो वक्त की रोटी कैसे नसीब हो ...( शरद पंसारी - संपादक दैनिक शौर्यपथ समाचार पत्र )

नई दिल्ली / शौर्यपथ / प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मार्च 2015 से नवंबर 2019 के बीच कुल 58 देशों की यात्रा की और इन यात्राओं पर कुल 517.82 करोड़ रुपये खर्च हुए. यह जानकारी मंगलवार को संसद में दी गई. राज्यसभा को एक सवाल के लिखित जवाब में विदेश राज्यमंत्री वी मुरलीधरन ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री के इन दौरों से द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भारत के दृष्टिकोण के बारे में अन्य देशों की समझ बढ़ी तथा संबंधों में मजबूती आई है.
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की फौजिया खान ने सरकार से जानना चाहा था कि वर्ष 2015 से आज की तारीख तक प्रधानमंत्री ने कितने देशों का दौरा किया और इन दौरों पर कुल कितना व्यय हुआ. इसके जवाब में मुरलीधरन ने बताया, ‘‘2015 से प्रधानमंत्री ने 58 देशों की यात्रा की. इन यात्राओं पर कुल 517.82 करोड़ रुपए व्यय हुआ.''
विदेश राज्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं के दौरान उनके द्वारा किए गए पारस्परिक विचार-विमर्शों से द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भारत के दृष्टिकोण के बारे में अन्य देशों की समझ बढ़ी है और इन वार्ताओं से व्यापार और निवेश, प्रौद्योगिकी, सामुद्रिक सहयोग, अंतरिक्ष, रक्षा सहयोग और लोगों के बीच परस्पर संपर्कों सहित अनेक क्षेत्रों में उनके साथ संबंध मजबूत हुए हैं. उन्होंने कहा, ‘‘संबंधों में आई इस मजबूती ने हमारे आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और हमारे नागरिकों की भलाई के लिए भारत के राष्ट्रीय विकास एजेंडे में योगदान दिया है.''
मुरलीधरन ने कहा कि भारत अब जलवायु परिवर्तन, अंतरराष्ट्रीय अपराध और आतंकवाद, साइबर सुरक्षा और परमाणु अप्रसार सहित बहुपक्षीय स्तर पर वैश्विक एजेंडे को मूर्तरूप देने के लिए बढ़-चढ़कर योगदान दे रहा है और अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और आपदा समर्थ अवसंरचना के लिए गठबंधन जैसे वैश्विक मुद्दों के लिए दुनिया को अपनी अनूठी पहलों की पेशकश कर रहा है.
नई दिल्ली / शौर्यपथ / दिल्ली दंगों में भड़काऊ भाषण देने और दंगों में भूमिका को लेकर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने बीजेपी नेता कपिल मिश्रा के 27 जुलाई को बयान दर्ज किए थे. यह बयान सवाल और जबाब के रूप में दर्ज किए गए. पुलिस ने कपिल मिश्रा के बयान को दंगों की चार्जशीट का हिस्सा बनाया है. दिल्ली पुलिस के सवाल और कपिल मिश्रा के जबाब ये हैं-
सवाल-उत्तर पूर्वी दिल्ली का दौरा क्यों किया?
जवाब-यमुना विहार में मेरा घर है. मेरा घर नार्थ ईस्ट डिस्ट्रिक्ट में ही आता है. दंगाइयों ने दंगे के दौरान जो पेट्रोल पंप जलाए वे मेरे घर के पास ही थे.
सवाल- तुमने उत्तर पूर्वी दिल्ली का किस दिन और किस तारीख में दौर किया?
जवाब-क्योंकि मेरा घर उसी इलाके में है, मेरा जाने-आने का कोई वक़्त तय नहीं है.
सवाल-क्या तुम खुद मौजपुर गए थे?
जवाब-जी हां, मैं अपनी पर्सनल कैपेसिटी में 3 से 3.30 बजे मौजपुर पहुंच गया था.
सवाल-तुम्हारे जाने का उद्देश्य क्या था?
जवाब-क्योंकि कुछ लोग फेसबुक पर 2-3 दिन से मुहिम चला रहे थे कि रोड ब्लॉक होने की वजह से उन्हें बहुत ज़्यादा समस्याओं का सामने करना पड़ रहा है, लोग आफिस नहीं जा पा रहे हैं, बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं, ज़रूरी सुविधाएं लोगों तक नही पहुंच पा रही हैं, इसलिए मैं उन लोगों की समस्याओं को पुलिस तक पहुंचाने और पुलिस की मदद से बंद रोड को खुलवाने की पेशकश करने वहां गया था. जाने से पहले मैंने डीसीपी सूर्या साहब से फ़ोन पर बात की थी.
सवाल-क्या तुमने उत्तर पूर्वी दिल्ली में 23 फरवरी की कोई भाषण दिया था, उस भाषण में क्या था?
जवाब-नहीं मैंने कोई स्पीच नहीं दी. मैंने केवल पुलिस को तीन दिनों में रोड खुलवाने के लिए कहा था और ये भी कहा था कि अगर तीन दिन में रोड नहीं खुली तो हम रोड खुलवाने के लिए धरने पर बैठेंगे.
सवाल-इस स्पीच का उद्देश्य क्या था?
जवाब-मैंने पहले ही कहा, मैंने कोई स्पीच नहीं दी. मेरा मकसद केवल रोड खुलवाना था जिससे लोगों की समस्याओं का निपटारा हो सके.
सवाल-क्या तुम्हारे पास स्पीच की कोई कॉपी है?
जवाब-मैंने पहले ही कह दिया, मैंने कोई स्पीच नहीं दी.
सवाल-क्या तुम किसी दूसरे धरना स्थल पर गए थे?
जवाब-नहीं मैं किसी धरना स्थल पर नहीं गया.
सवाल-क्या तुम वहां अकेले गए थे?
जवाब-हां, मैं अकेले ही मौजपुर चौक गया था. वहां पर मेरे पहुंचने से पहले ही भीड़ जमा थी. लोकल होने के नाते मैं वहां के कई दुकानदारों और लोगों को जानता था.
सवाल-तुम्हारी उस इलाके के बारे में निजी राय क्या है?
जवाब-मैंने वहां जाने से पहले डीसीपी सूर्या साहब से बात की थी. लोगों ने बताया वहां पर करीब दो बजकर 45 मिनट पर पथराव शुरू हो चुका था. मेरे सामने भी लोग दौड़ दौड़कर आ रहे थे और कह रहे थे कि भीड़ पथराव कर रही है. जाफराबाद की तरफ व बेरिकेड के पास काफी भीड़ थी जिसको पुलिस बड़ी मुश्किल से रोक पा रही थी. अगर पुलिस न होती तो वे लोग आगे आ जाते. मैं वहां करीब साढ़े चार बजे तक रुका. मुस्लिम भीड़ पथराव कर रही थी और भीड़ को पुलिस ने हमसे 300 मीटर पहले रोका हुआ था. मुझे लोगों ने बताया कि लोग रोड खुलवाने के लिए करीब दो बजे से इकट्ठे होना शुरू हो गए थे. मेरे सामने उस वक़्त 50-60 लोगों की भीड़ थी. दूसरी तरफ मुस्लिमों की 500 से 700 की भीड़ थी. मैंने स्थानीय लोगों से 3.30 से 4.3० बजे तके बात की और रोड खुलवाने के लिए पुलिस से बार-बार आग्रह किया. लोगों की परेशानी से अवगत कराया. ये रोड पिछले 2-3 महीने से मुस्लिम लोगों द्वारा ब्लॉक किया हुआ था. ये लोग कभी सर्विस रोड तो कभी मेन रोड बंद कर देते थे जिस वजह से लोगों को अपने काम धंधे पर जाने में, बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी हो रही थी. लोगों का जीना दूभर हो गया था. मुस्लिम लोगों ने डर का और आतंक का माहौल बना रखा था. मरीजों को हॉस्पिटल ले जाने व लोगों को हॉस्पिटल ले जाने एम्बुलेंस की दिक्कत हो रहा थी. इसी वजह से स्थानीय लोगों के फ़ोन कॉल्स आने लगे. लोगों की फेसबुक पोस्ट पढ़कर मैं पुलिस से रोड खुलवाने का आग्रह करने वहां गया था. बातचीत में मैंने डीसीपी साहब से कहा कि अब हम जा रहे हैं, आप रोड खुलवा दें नहीं तो हम रोड खुलवाने के लिए धरने पर बैठ जाएंगे. उसके बाद चार बजकर 35 मिनट पर मैं वहां से निकल गया.
सवाल- तुमने वहां कितना टाइम व्यतीत किया?
जवाब-मैं वहां करीब एक घंटा, 3.30 से 4.30 तक रुका था.
सवाल-क्या वहां तुम्हारा कोई इनविटेशन था?
जवाब-मैं फेसबुक की पोस्ट पढ़कर गया था.
नई दिल्ली / शौर्यपथ / दुनिया के अलग-अलग देशों में रह रहे 373 भारतीय नागरिकों की कोविड-19 से मौत हुई है. लोकसभा में सवालों का जवाब देते हुए विदेश राज्यमंत्री वी मुरलीधरन ने यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि 10 सितंबर 2020 तक उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक विदेशों में रह रहे 11,616 भारतीय कोरोना से संक्रमित हुए.
अलग-अलग देशों में भारत के मिशनों ने इनकी मदद के लिए करीब 22.5 करोड़ रुपये खर्च किए. संसद में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक सउदी अरब में सबसे ज्यादा 284 भारतीयों की मौत कोविड से हुई. हालांकि यहां संक्रमित कितने थे इसका आंकड़ा उपलब्ध नहीं है.
सबसे ज्यादा संक्रमित सिंगापुर में 4618 थे. हालांकि यहां मौत सिर्फ एक भारतीय नागरिक की हुई. बहरीन में 2639 भारतीय कोविड से संक्रमित हुए और 30 की मौत हुई. वहीं कुवैत में 1769 भारतीय कोविड संक्रमित हुए लेकिन जान किसी की नहीं गई. अमेरिका में 24 भारतीय संक्रमित हुए और 13 की मौत हो गई.
नई दिल्ली / शौर्यपथ/ सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आमतौर पर उत्तर प्रदेश और हरियाणा में ऑनर किलिंग होती हैं लेकिन तमिलनाडु में यह कैसे हो सकता है ? चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने आश्चर्य जताते हुए कहा, 'ऑनर किलिंग यूपी और हरियाणा में होती है. तमिलनाडु में ऑनर किलिंग कैसे हो सकती है?' दरअसल, चीफ जस्टिस की बेंच एक ऑनर किलिंग मामले में ट्रायल पूरा करने की समयसीमा बढ़ाने की राज्य की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, उसी दौरान CJI ने यह टिप्पणी की.
तमिलनाडु में ओबीसी समुदाय के नेता युवराज ऑनर किलिंग की हत्या का मुख्य आरोपी है. उस पर दलित इंजीनियरिंग के छात्र गोकुलराज का अपहरण और हत्या करने का आरोप है, जो अपनी सहपाठी और एक गैर-दलित लड़की से प्यार करता था. तमिलनाडु के तिरुचेनगोडे में उसकी हत्या कर दी थी. उसे मद्रास हाईकोर्ट ने सशर्त जमानत दे दी थी. बाद में शीर्ष अदालत ने उसकी जमानत रद्द कर दी थी और मुकदमे को पूरा करने के लिए 18 महीने की समय सीमा निर्धारित की थी. चूंकि ट्रायल पूरा नहीं हुआ था, अधिकारियों ने समय सीमा बढ़ाने के लिए शीर्ष अदालत की अनुमति मांगी है.
मंगलवार को सुनवाई के दौरान युवराज के वकील ने जमानत मांगी तो चीफ जस्टिस ने कहा-आपके मुवक्किल को जेल में रहना होगा. आप लोगों की जिंदगी छीन लेंगे.क्या किसी ने कोई अपराध किया है? किसी ने शादी की और आपने उसे मार दिया. वे (दंपति) लंबे समय तक जीवित रहना चाहते थे और वे आत्महत्या नहीं करना चाहते थे. वकील ने कहा कि युवराज 2015 से जेल में है और उसकी लंबित जमानत याचिका पर अदालत द्वारा विचार किया जा सकता है क्योंकि ट्रायल में लंबा समय लग रहा है. इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि उसके जैसे व्यक्तियों को जेल में होना चाहिए.आपने धरती से किसी को हटा दिया है.
युवराज के वकील ने कहा कि यह एक दुर्घटना थी और उसके मुवक्किल ने लड़के की हत्या नहीं की तो मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हम समझते हैं कि आप अपने मुवक्किल को निराश नहीं कर सकते.हम सभी जानते हैं कि क्या होता है.शीर्ष अदालत ने तमिलनाडु में निचली अदालत द्वारा मुकदमे को पूरा करने के लिए 6 महीने की और अवधि बढ़ा दी और जमानत याचिका खारिज कर दी.गोकुलराज का शव इरोड के पास रेलवे पटरियों पर पाया गया था. अक्टूबर 2015 में युवराज ने सरेंडर कर दिया. मई 2016 में मद्रास हाई कोर्टने जमानत दे दी थी, जिसे बाद में शीर्ष अदालत ने रद्द कर दिया था.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
