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सेहत टिप्स /शौर्यपथ /हेल्थ एक्सपर्ट भीगे चने खाने की सलाह हर रोज खाली पेट खाने की देते हैं. क्योंकि यह आपकी हेल्थ के लिए बहुत फायदेमंद होता है. लेकिन आप रात में जब चना भिगोते हैं तो साथ में किशमिश भी भिगोएं. इन दोनों को साथ में आप खाते हैं तो आपको अनगिनत लाभ मिलने वाले हैं जिसके बारे में हम आपको आर्टिकल में बताएंगे ताकि आप भी इसके फायदे उठा सकें.
किशमिश और चना साथ में खाने के लाभ
- अगर आप चना और किशमिश साथ में खाते हैं तो इससे ब्लड प्रेशर मेंटेन रहेगा जो कि आम समस्या बन चुकी है. वहीं, जिन लोगों को खून की कमी है उन्हें इन दोनों को साथ में जरूर खाना चाहिए.
- कोलेस्ट्रोल जिन लोगों का बहुत बढ़ा हुआ है उन्हें भी इसका सेवन करना चाहिए. इन दोनों को साथ में खाने से आप एनर्जेटिक रहेंगे. इससे इम्यून मजबूत होगा.
- इन दोनों को साथ में खाने से हड्डियां भी मजबूत होती हैं. क्योंकि इसमें कैल्शियम, फॉस्फोरस और मैग्नीसियम पाया जाता है, जो हड्डियों के लिए बहुत जरूरी होता है.
किशमिश के पोषक तत्व
प्रोटीन, आयरन, फाइबर, पोटैशियम, कॉपर, विटामिन बी6, कैल्शियम, फाइटोकैमिकल्स का अच्छा सोर्स होता है. इतना ही नहीं इसमें एंटीऑक्सीडेंट, एंटीबैक्टीरियल, हेल्दी फैट और विटामिन ई भी मौजूद होता है.
चने के पोषक तत्व
प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, कैल्शियम, वसा, आयरन, कॉपर, जिंक, मैग्नियम, फास्फोरस के अलावा राइबोफ्लेविन (विटामिन बी2) और नियासिन (विटामिन बी3) में पाए जाते हैं.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ / सुबह की चाय में एक टुकड़ा अदरक का डालने से स्वाद दोगुना हो जाता है. इससे आप पूरे दिन तरोताजा महसूस करते हैं. लेकिन आप हर दिन 1 चम्मच अदरक का जूस पी लेते हैं, तो इससे आपको कई तरह के फायदे मिल सकते हैं. यह स्वाद ही नहीं सेहत को भी बेहतर करने में मदद करता है. आइए जानते हैं रोज एक चम्मच अदरक का रस कितने फायदेमंद हो सकता है.
अदरक जूस पीने के लाभ
- सबसे पहला फायदा इसका है कि ये आपकी पाचन शक्ति को दुरुस्त करता है. यह खराब पेट को ठीक करने के लिए सबसे असरदार नुस्खा है. आपको अदरक के रस में नींबू का रस मिलाकर पीना है. इससे कड़वा नहीं लगेगा.
- हाई ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने में भी सहायक होता है. इसके अलावा यह ब्लड को पतला बनाने में भी मदद करता है. हालांकि जिनकी सर्जरी होने वाली है उन्हें इसके सेवन से बचना चाहिए.
- इस जूस में एंटीइंफ्लेमेटरी होता है, जो शरीर में होने वाले किसी भी तरह के दर्द को कंट्रोल करता है. यह दांत और माइग्रेन दर्द में भी सहायक होता है. बस आपको जब दर्द हो तो एक टुकड़ा अपने दांत और गाल के बीच दबाकर रखिए.
- सांसों की दुर्गंध को भी कम करने का काम करता है अदरक का रस. आपको बस इस स्थिति में एकबार पी लेना है इस रस को. इसमें मौदूद विटामिन सी और उन बैक्टीरिया को मारने का काम करते हैं, जो सांस को बदबूदार बनाते हैं.
- हेल्दी हेयर ग्रोथ के लिए भी अदरक का रस बहुत फायदेमंद होता है. यह स्कैल्प में ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाने का काम करता है. इसके एंटीसेप्टिक गुण रूसी कंट्रोल करते हैं.
ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ / सफेद बालों को काला करने, झड़ते बालों को रोकने और लंबा करने के लिए अब तक आपने कई तरह की होम रेमेडी अप्लाई की होगी. लेकिन इस बार हम जो उपाय बताने वाले हैं वो जरा हट के है. आपको बालों में कोई हेयर मास्क या ऑयल नहीं अप्लाई करना है, बल्कि रात में सोने से पहले नाभि में तेल डालना है. लेकिन कौन सा तेल डालना है ये आपको हम आगे आर्टिकल में बताने वाले हैं.
नाभि में कौन सा तेल डालें
1- आप अपने बाल को काला घना रखना चाहते हैं औऱ सफेद हो रहे बालों पर रोक लगाना चाहते हैं, तो फिर रोज रात में सरसों का तेल अपनी नाभि में लगाइए. इससे आपके बाल नैचुरल ब्लैक तो होंगे ही साथ ही उनमें चमक भी आएगी.
2- इसके अलावा आप अपनी नाभि में नारियल तेल भी डाल सकते हैं. इससे आपके ड्राई बाल में नमी आएगी. यह बालों की रूसी को भी कम करते हैं. इससे बाल लंबे और घने भी बन सकते हैं.
3- नाभि में आप बादाम का तेल भी डाल सकते हैं. इसमें मौजूद विटामिन ई आपके बालों में नमी और चमक बनाए रखने का काम करेगा. यह भी बालों को काला और घना बनाते हैं.
3- आप रात में सोने से पहले अपनी नाभि में घी भी डाल सकते हैं. यह तरीका भी बाल की ग्रोथ के लिए अच्छा माना जाता है. यह बालों को सफेद होने से भी रोकता है.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ / यूरिक एसिड शरीर में इकट्ठा वेस्ट प्रोडक्ट है. कभी-कभी, यूरिक एसिड जोड़ों और ऊतकोंमें जमा हो सकता है, जिससे कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है, जैसे- हाथ और पैर की जोड़ों में दर्द और चलने फिरने में परेशानी होती है. हालांकि इसका इलाज एलोपैथी में है, लेकिन आपको हम यहां पर कुछ घरेलू नुस्खा बता रहे हैं जिससे भी आप इसको कंट्रोल कर सकते हैं.
यूरिक एसिड कैसे करें कंट्रोल
1- यूरिक एसिड में ग्रीन टी बहुत काम आती है. आप रोज सुबह इसको पीते हैं तो फिर आपको इसे कंट्रोल लाने में बहुत मदद मिलेगी. इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स मौजूद होते हैं.
2- वहीं, हल्दी जिसका उपयोग हर रोज खाने में होता है, आपकी यूरिक को कंट्रोल कर सकती है. यूरिक एसिड बढ़ने से शरीर में सूजन हो जाती है जिसे यह मसाला कम करने में असरदार साबित हो सकती हैं.
3- यूरिक एसिड में आप खीरे का भी सेवन कर सकते हैं. यह भी आपके लिए बहुत फायदेमंद साबित होता है. इसमें पानी की मात्रा ज्यादा होती है जो यूरिक को कंट्रोल करने में मदद कर सकता है.
4- नींबू पानी का भी सेवन काफी हद तक असरदार होता है. यह ड्रिंक शरीर में एल्कलाइन को प्रोड्यूस करता है, जिससे यूरिक कंट्रोल में रहती है. इसमें मौजूद सिट्रिक एसिड यूरिक में मिलकर इसको घटाती है.
आस्था /शौर्यपथ / बस कुछ ही दिनों में शारदीय नवरात्रि शुरू होने वाला है और पूरे देश में हर्षोल्लाह से इसकी तैयारियां शुरू हो चुकी है. 9 दिनों तक चलने वाले इस तयोहार में मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए लोग तरह-तरह के उपाय करते हैं. यहां आपको वो उपाय जानने को मिलेगा जो अगर आप आजमां कर देखते हैं तो आपकी रूठी किस्मत चमक जाएगी. मां को मनाने के लिए आपको बस इस उपाय को आजमां कर देखना है. और कुछ दिनों में आपके जीवन में एक बदलाव देखने को मिलेगा. इस उपाय को करने के लिए आपको बस चाहिए एक लौंग का जोड़ा क्योंकि लौंग मां दुर्गा की सबसे प्रिय वस्तुओं में से एक है. तो चलिए आपको बताते हैं कुछ खास उपाय
आर्थिक संकट दूर करने के लिए
अगर आप मां दुर्गा को प्रसन्न करना चाहते हैं और अपनी सोई किस्मत को जगाना चाहते हैं एक पीले कपड़े में लौंग का एक जोड़ा रखकर उसके साथ 5 इलायची और 5 सुपारी मां को अर्पित करें. अगले दिन मां की पूजा करके इस कपड़े को उस जगह रखें जहां आपने पैसे या सोना चांदी रखा हो.
राहु- केतु के अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए
कई बार राशियों में राहु- केतु की वजह से भी हमारे काम बिगड़ जाते हैं. अगर आप इसके प्रभाव से मुक्ति पाना चाहते हैं तो एक जोड़ा लौंग रोज शिवलिंग पर अर्पित करें. ऐसा करने से आपकी कुंडली से राहु- केतु का अशुभ प्रभाव दूर हो जाएगा.
लौंग कपूर का धुआं है असरदार
9 दिनों तक चलने वाले नवरात्रि में नियमित रूप से लौंग और कपूर का धुंआ पूरे घर में दिखाएं. इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होगी. अगर आप रोजाना नौ दिनों तक सुबह यह काम करते हैं तो घर में जितनी भी नकारात्मकता है जितने भी क्लेश हो रहे हैं वो सब मिट जाएंगे.
आस्था /शौर्यपथ / 15 अक्टूबर रविवार यानी कल से शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ हो रहा है. 9 दिनों तक चलने वाले इस त्योहार की तैयारियां जोरों- शोरों से शुरू हो चुकी है. बाजारों में रौनक देखने को बन रही है. सभी बाजार माता रानी के वस्त्रों, फूलों और साज- श्रृंगारों से सज चुके हैं. और सभी देशवासी पलके बिछाए माता के स्वागत में खड़े हैं. बाजार से मां की चुनरी उनके साज- श्रृंगार और फल फूलों को लेने में का दौर शुरू हो चुका है. ऐसे में आपको बता दें की कुछ ऐसी चीजें भी हैं जो नवरात्रि में खरीदना बहुत शुभ माना जाता है. अगर आप इन चीजों को खरीदेंगे तो माता प्रसन्न होगी और पूरे साल उनकी कृपा पर आपके परिवार पर बरसती रहेगी.
नवरात्रि में खरीदें ये 5 चीजें |
कलश
नवरात्रि में अपने घर में कलश जरूर लेकर आएं. आप चाहें तो सोने, चांदी, पीतल, या मिट्टी के कलश भी ला सकते हैं. कलश के साथ सकारात्मक ऊर्जा भी आपके घर में प्रवेश करेगी.
मौली
अगर माता रानी को प्रसन्न करना चाहते हैं तो मौली लाना बिल्कुल ना भूलें. इससे घर के सभी दुख- तकलीफ दूर होते हैं और जीवन खुशियों से भर जाता है.
पद चिह्न
शारदीय नवरात्रि में माता रानी के पद को लाना बहुत शुभ माना जाता है. अगर आप माता रानी के पद चिह्न को पूजा घर के पूजा स्थान पर लगाते हैं तो मां हमेशा आपके घर में विराजमान रहेंगी और उनकी कृपा सदैव बनी रहेगी.
मोर पंख
बहुत कम लोग जानते हैं की नवरात्रि में अगर आप मोर पंख अपने घर लाते हैं तो ये आपके लिए बहुत फलदाई हो सकता है. घर में सकारात्मक ऊर्जा आएगी और सुख संपन्नता होगी.
मूर्ति
मां की पूजा हो और मां की मूर्ति ना हो ऐसा हो नहीं सकता. इसलिए छोटी ही सही पर नवरात्रि में मां दुर्गा की मूर्ति जरूर खरीद कर लाएं. इससे माता रानी का आशीर्वाद आपके घर परिवार पर हमेशा बना रहेगा.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के कूष्मांडा स्वरूप की पूजा अर्चना की जाती है. देवी कूष्मांडा सृष्टि की आदिशक्ति मानी जाती हैं. मां दुर्गा के इस स्वरूप में सूर्य के समान तेज होता है. ऐसी मान्यता है कि जो लोग देवी कूष्मांडा की पूजा अर्चना करते हैं उनके बुद्धि का विकास तेज होता है. वहीं, ऐसे लोगों की निर्णय क्षमता भी तेज होती है. ऐसे में आइए जानते हैं देवी कूष्मांडा की पूजा विधि और आरती.
देवी कूष्मांडा पूजा विधि
शारदीय नवरात्र के चौथे दिन देवी कूष्मांडा की पूजा करते समय पीले रंग का वस्त्र धारण करें.
वहीं देवी मां को पीला चंदन लगाएं. साथ ही कुमकुम, मौली, अक्षत चढ़ाएं.
इसके अलावा आप ॐ कुष्माण्डायै नम: मंत्र की एक माला जाप करें.
इसके बाद दुर्गा सप्तशती या सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करें.
मां कूष्मांडा को पीला रंग अत्यंत प्रिय है.
इस दिन पूजा में देवी को पीले वस्त्र, पीली चूड़ियां और पीली मिठाई अर्पित करें.
वहीं, कूष्मांडा को मालपूए का भोग लगाएं
कूष्मांडा देवी आरती
चौथा जब नवरात्र हो, कूष्मांडा को ध्याते।
जिसने रचा ब्रह्मांड यह, पूजन है उनका
आद्य शक्ति कहते जिन्हें, अष्टभुजी है रूप।
इस शक्ति के तेज से कहीं छांव कहीं धूप॥
कुम्हड़े की बलि करती है तांत्रिक से स्वीकार।
पेठे से भी रीझती सात्विक करें विचार॥
क्रोधित जब हो जाए यह उल्टा करे व्यवहार।
उसको रखती दूर मां, पीड़ा देती अपार॥
सूर्य चंद्र की रोशनी यह जग में फैलाए।
शरणागत की मैं आया तू ही राह दिखाए॥
नवरात्रों की मां कृपा कर दो मां
नवरात्रों की मां कृपा करदो मां॥
जय मां कूष्मांडा मैया।
आस्था /शौर्यपथ /नवरात्रि में भक्त नौ दिन तक व्रत और उपवास रखकर शक्ति की प्रतीक माता की पूजा अर्चना करते हैं. नवरात्रि के दौरान सात्विक भोजन करने की परंपरा के कारण भक्त प्याज लहसुन नहीं खाते हैं. हमेशा से आप सुनते आ रहे होंगे की व्रत में लहसुन और प्याज नहीं खाया जाता, लेकिन आखिर ऐसा करने का कारण क्या है चलिए आपको बताते हैं.आइए जानते हैं नवरात्रि के दौरान प्याज लहसुन नहीं खाने के पीछे धार्मिक मान्यता क्या है.
प्याज लहसुन का है राहु केतु से संबंध
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार प्याज और लहसुन को राहु और केतु का प्रतीक माना जाता है. देवताओं और असुरों के समुद्र मंथन से कई दिव्य चीजें निकली थी. इसमें अमृत का कलश भी था. भगवान विष्णु नहीं चाहते थे कि असुर अमृत पान करें इसलिए वे अमृत बांटने के लिए मोहिनी का रूप धारण कर देवताओं को अमृतपान कराने लगे. एक असुर वेश बदल कर देवताओं की लाइन में लग कर अमृत पी लिया लेकिन भगवान विष्णु उसे पहचान लिए और सुदर्शन चक्र से उसका सिर धड़ से अलग कर दिया. इस असुर को सिर राहु और धड़ केतु के नाम से जाना जाता है. मान्यता है कि अमृत पान के कारण वे अमर हो गए हैं और अब भी लोगों के राशिफल में परेशानियां खड़ी करते हैं. असुर का सिर कटने के कारण दो बूंद रक्त धरती पर गिर पड़ा जो प्याज और लहसुन बन गया.
प्याज लहसुन तामसिक भोजन
प्याज लहसुन को तामसिक भोजन माना जाता है और इससे मानव में तामसिक इच्छाएं जन्म लेती हैं और इसके कारण सकारात्मक एनर्जी में कमी आती है. नवरात्रि के दौरान वातावरण को शुद्ध और सात्विक रखने के लिए प्याज लहसुन नहीं खाना चाहिए. आयुर्वेद के अनुसार भी प्याज लहसुन को शरीर में गर्मी बढ़ाने वाला माना गया है. नवरात्रि के दोरान भक्तों को सरल और सादा जीवन जीना चाहिए, इसलिए प्याज लहसुन नहीं खाना चाहिए.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /इस बार दशहरा का त्योहार कब मनाया जाएगा और रावण दहन की टाइमिंग क्या होगी, इन सारे सवालों के जवाब इस आर्टिकल में आपको मिल जाएंगे. विजयादशमी का पर्व नवरात्रि के समापन के बाद मनाया जाता है. इस दिन जगह-जगह पर रावण के पुतले को दहन किया जाता, लेकिन इस बार दशहरा की तारीख को लेकर थोड़ी कंफ्यूजन है. कुछ लोग 23 को तो कुछ 24 को दशहरा मनाने की बात कह रहे हैं. ऐसे में हम जानेंगे इस आर्टिकल में विजयादशमी पर्व की सही तारीख और मुहूर्त के बारे में.
विजयादशमी कब है
1- पंचांग के अनुसार, अश्विन माह की शुक्ल पक्ष तिथि की शुरूआत 23 अक्टूबर 2023 को शाम 5 बजकर 44 मिनट से 24 अक्टूबर 2023 को दोपहर 3 बजकर14 मिनट तक रहेगा. उदयातिथि के अनुसार इस साल 24 अक्टूबर 2023 को विजयादशमी का पर्व मनाया जाएगा.
2- रावण दहन का शुभ मुहूर्त - आपको बता दें कि रावण दहन प्रदोष काल में किया जाता है. 24 अक्टूबर को 5 बजकर 43 मिनट से अगले ढ़ाई घंटे तक दशहरे का मुहूर्त होगा.
3- क्यों मनाते हैं दशहरा - ऐसी मान्यता है कि इस दिन देवी दुर्गा ने महिषाशुर नाम के राक्षस का वध किया था और भगवान राम ने रावण को युद्ध में पराजित किया था. इसलिए दशहरा को विजयदशमी के नाम से भी जाना जाता है. इस पर्व को बुराई पर अच्छाई की जीत के लिए भी जाना जाता है. दशमी के दिन गृह प्रवेश, नामकरण, मुंडन, कान छेदन जैसे मांगलिक कार्य शुभ माने जाते हैं.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /इस समय पूरे भारत में नवरात्रि की धूम नजर आ रही है. 15 अक्टूबर 2023 से शुरू हुई शारदीय नवरात्रि इस बार पूरे 9 दिन तक रहेगी और 24 अक्टूबर 2023 को विजयदशमी का त्योहार मनाया जाएगा. नवरात्रि के हर दिन दुर्गा मां के अलग-अलग रूप की पूजा होती है, ऐसे में पंचमी से लेकर दुर्गा विसर्जन तक का शुभ मुहूर्त क्या है,आइए हम आपको बताते हैं.
शारदीय नवरात्रि पंचमी
शारदीय नवरात्रि 2023 में पंचमी का त्योहार 19 अक्टूबर 2023 को मनाया जाएगा. पंचमी की तिथि 19 अक्टूबर मध्य रात्रि 1:12 से शुरू होगी और 20 अक्टूबर देर रात 12:31 तक रहेगी.
शारदीय नवरात्रि छठा दिन
शारदीय नवरात्रि 2023 का छठा दिन 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा, जिसकी तिथि 20 अक्टूबर मध्य रात्रि 12:31 से शुरू होगी और 20 अक्टूबर रात्रि को 11:24 तक रहेगी.
शारदीय नवरात्रि सप्तमी
शारदीय नवरात्रि की सप्तमी का विशेष महत्व होता है, यह तिथि इस बार 20 अक्टूबर रात 11:24 से शुरू होगी और 21 अक्टूबर रात 9:53 तक रहेगी.
शारदीय नवरात्रि अष्टमी तिथि
अष्टमी तिथि को कुंवारी पूजा के नाम से भी जाना जाता है, यह इस बार 22 अक्टूबर 2023 को मनाई जाएगी. जिसकी तिथि 21 अक्टूबर रात 9:53 से शुरू हो जाएगी, जो कि 22 अक्टूबर शाम 7:58 तक रहेगी.
शारदीय नवरात्रि महानवमी
शारदीय नवरात्रि की नवमी का विशेष महत्व होता है, इसकी तिथि 22 अक्टूबर 2023 रात 7:58 से शुरू होगी और नवमी की तिथि 23 अक्टूबर शाम को 5:54 तक ही रहेगी.
विजयदशमी और दुर्गा विसर्जन
शारदीय नवरात्रि के 9 दिन के बाद दशमी पर सिंदूर खेला, विसर्जन और रावण दहन का त्योहार मनाया जाता है, यह तिथि 23 अक्टूबर 2023 को शाम 5:54 से शुरू होगी और 24 अक्टूबर 2023 को 3:14 तक ही रहेगी. दुर्गा विसर्जन का शुभ मुहूर्त 24 अक्टूबर सुबह 5:44 से सुबह 8:03 तक रहेगा.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ / आप सुबह में या फिर शाम को किसी पार्क और जिम से गुजरिए तो ट्रेडमील और पार्क में दौड़ते भागते और पसीना बहाते महिला और पुरुष की बड़ी तादाद देखने को मिल जाएगी. हर किसी को अपने वजन को कम करने की और अच्छा लगने की धुन सवार है. लेकिन आपको अपनी वेट लॉस जर्नी शुरू करने से पहले जरा इस बात पर गौर करना चाहिए कि आप किस उम्र में हैं. असल में बॉडी का वेट आपको अपने उम्र के अनुसार मेंटेन करके रखना चाहिए, जिसकी जानकारी के अभाव के चलते कुछ लोग अंडरवेट हो जाते हैं. ऐसे में आज हम आपको यहां पर उम्र के अनुसार वेट चार्ट शेयर कर रहे हैं, जिससे आपको अपने वजन को कितना कम और ज्यादा करना है, काफी हद तक मदद मिल सकती है.
उम्र के अनुसार वेट चार्ट
1- हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, नवजात शिशु (लड़का-लड़की) का वजन 3.3 किलोग्राम होना चाहिए. वहीं, 2 से ढाई साल के लड़के वेट का 12.5 जबकि लड़की 11.8 किलोग्राम वजन होना चाहिए.
2- वहीं, 9 से 11 साल की उम्र के बच्चे का वजन 28 से 31 किलो आइडल माना जाता है, जबकि लड़की का वेट 28 किलो होना चाहिए. इसके अलावा 15 से 20 की उम्र के लड़के का वजन 40 और लड़की का 45 किलो अच्छा होता है.
3- 21 से 30 साल के पुरुष 60 से 70 और महिला का 50 से 60 किलो के बीच वजन अच्छा माना जाता है. 31 से 40 की उम्र के पुरुष को 59 से 75 और महिला को 60 से 65 किलो वेट मेंटेन रखना चाहिए.
4- 41 से 50 की उम्र के पुरुष 60 से 70 और महिला 59 से 63 किलो वजन मेंटेन कर सकती है. वहीं, 50 से अधिक पुरुष 60 से 70 और महिला 59 से 63 किलो वजन मेंटेन कर सकती है.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ / गुड़ का सेवन सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है. गुड़ और चने का साथ में सेवन कर शरीर को कई लाभ मिल सकते हैं. भूने चने सेहत के लिए गुणकारी माने जाते हैं. चने को प्रोटीन का सबसे अच्छा सोर्स माना जाता है. गुड़ एंटी-ऑक्सिडेंट और सेलेनियम जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होता है जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक माने जाते हैं. तो वहीं चना कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फाइबर व विटामिन-बी सहित कई अन्य पोषक तत्वों का अच्छा सोर्स है. रोजाना गुड़ और चना खाने से इम्यूनिटी को मजबूत, एनर्जी को बूस्ट किया जा सकता है. इतना ही नहीं एनीमिया की शिकायत होने पर गुड़ और चने का सेवन फायदेमंद माना जाता है. तो चलिए जानते हैं गुण और भूने चने का सेवन करने से होने वाले लाभ.
गुड़ और चना खाने के फायदे |
1. हड्डियों-
हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए रोज गुड़ और चने का सेवन करें. गुड़ और चने में मौजूद कैल्शियम हड्डियों को कमजोर होने से बचाने में मदद कर सकता है.
2. इम्यूनिटी-
गुड़ और चना दोनों ही पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं. रोजाना गुड़ और चने का साथ में सेवन कर इम्यूनिटी को मजबूत बनाया जा सकता है.
3. पेट के लिए-
गुड़ और चने का सेवन करने से पेट संबंधी कई समस्याओं से बचा जा सकता है. गुड़ और भुने चने में मौजूद फाइबर के गुण पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं.
4. एनीमिया-
अगर आपको खून की कमी की शिकायत है तो आप गुड़ और चने का सेवन कर सकते हैं. चने और गुड़ में आयरन पाया जाता है, जो खून की कमी को दूर करने में मदद कर सकता है.
5. मोटापा-
भुने चने मोटापे को कम करने के लिए फायदेमंद माने जाते हैं. चने में फाइबर के गुण पाए जाते हैं, जो पेट को लंबे समय तक भरा हुआ एहसास कराते हैं. जिससे आप अधिक खाने से बच सकते हैं.
योग अभ्यास /शोर्यपथ / सूर्य नमस्कार, सूर्य देव को सम्मान देने का एक प्राचीन योग अभ्यास है. सूर्य नमस्कार में सात अलग-अलग आसन 12 चरणों में चक्रीय रूप से किया जाता है. यह एक असरदार कार्डियोवस्कुलर वर्कआउट माना जाता है, जो शरीर और दिमाग के लिए काफी लाभकारी माना जाता है. सूर्य नमस्कार को आमतौर पर सुबह का अभ्यास कहा जाता है, जिसे भोर में किया जाता है. 12 आसनों का योग सूर्य नमस्कार शरीर के सभी चक्रों को उत्तेजित करता है. इस आसन के अन्य स्वास्थ्य लाभों के अलावा, यह मन की शांति और फोकस को बेहतर करने में अहम भूमिका निभाता है. ऐसे में आज इस आर्टिकल में हम आपको सूर्य नमस्कार में कितने आसन हैं और इन्हें करने का सही तरीका और फायदे क्या हैं, डिटेल में जानेंगे.
सूर्य नमस्कार की मुद्राए या क्या हैं?
सूर्य नमस्कार 12 चरणों में किया जाने वाला आसन है जिसमें प्रणामासन, हस्त उत्तानासन, हस्तपादासन, अश्व संचलानासन, अधो मुख श्वानासन, पर्वतासन, अष्टांग नमस्कार , भुजंगासन, अधो मुख श्वानासन/ पर्वतासन, अश्व संचलानासन, हस्तपादासन शामिल हैं.
सूर्य नमस्कार के स्वास्थ्य लाभ
रीढ़ की हड्डी मजबूत और लचीली होती है, इससे पॉश्चर बेहतर होता है.
पूरे स्पाइनल और पैरास्पाइनल में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है.
ऊपरी और निचले अंगों के मस्कुलोस्केलेटल का फंक्शन अच्छा होता है.
हार्ट की फंक्शनिंग में सुधार होता है.
मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है.
सुस्त न्यूरोएंडोक्राइन सिस्टम सक्रिय होता है.
प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा मिलता है.
पाचन क्रिया बेहतर होती है.
अनिद्रा से निपटने में मदद मिलती है.
ब्लड शुगर को मेंटेन रखता है.
तनाव के स्तर को कम करता है.
हार्मोन को नियंत्रित करता है
रीढ़, गर्दन और भुजाओं को टोन करता है.
सूर्य नमस्कार करने सही समय क्या है?
हालांकि, सूर्य नमस्कार करने का सबसे अच्छा समय सूर्योदय है. इसके अलावा आप पूरे दिन में किसी भी समय कर सकते हैं.
सूर्य नमस्कार करने की सावधानी
सूर्य नमस्कार करने से पहले और बाद में कुछ भी न खाएं. सूर्य नमस्कार करने से पहले वार्म-अप जरूर करें.
अगर आपको कोई हेल्थ इश्यू है तो फिर अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लीजिए.
मासिक धर्म और गर्भावस्था के दौरान सूर्य नमस्कार से बचना चाहिए.
शरीर की सही मुद्रा बनाए रखने के लिए निर्देशों का ठीक से पालन करें.
कठिन मुद्रा में बहुत देर तक रहने की कोशिश न करें क्योंकि इससे शरीर को परेशानी हो सकती है.
सूर्य नमस्कार करते समय आरामदायक कपड़े पहनें जिससे आप आराम से और बिना रुके अभ्यास कर सकें.
टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ /जब से हेडफोन नाम के यंत्र का इजाद हुआ तब से लोग ज्यादातर समय इसको कान में लगाए घूमते हैं. यहां तक कि खाना खाते समय भी इसका साथ नहीं छूटता. फोन में लीड लगाकर मूवी देखना और गाने सुनना कंटीन्यू रहता है. इतना ही नहीं, जब सुबह फिटनेस फ्रीक वॉक के लिए निकलते हैं, तो भी इसको कान में लगाकर गाने सुनते हुए ही टहलते या फिर रनिंग करते हैं, जो कि सही तरीका नहीं है. आपको रनिंग और वॉक साइलेंट तरीके से करनी चाहिए, क्योंकि इसके फायदे सेहत को ज्यादा मिलते हैं. ऐसे में आज हम इस आर्टिकल में बिना म्यूजिक सुने टहलने के कितने फायदे हो सकते हैं, उसी के बारे में बताने वाले हैं.
बिना म्यूजिक के टहलने और दौड़ने के फायदे |
1- आपको बता दें कि साइलेंटली वॉक करने से ध्यान अपने आप पर होता है. इससे आपका दिमाग शांत रहता है जिससे फोकस अच्छा होता है. यह आपकी मेंटल हेल्थ के लिए बहुत अच्छा साबित हो सकता है.
2- वहीं, जब आप साइलेंट वॉक करते हैं तो फिर आप जरूरत के मुताबिक अपनी गति को तेज और कम कर सकते हैं. इससे पैर में मोच आने जैसी संभावना कम हो जाती है. साइलेंट वॉक आपके फेफड़ों की सेहत के लिए भी बहुत अच्छा माना जाता है. इससे ऑक्सीजन का फ्लो शरीर में बेहतर होता है. इससे आपकी हार्ट की हेल्थ भी बेहतर होती है.
3- इसके अलावा जब आप साइलेंट वॉक करते हैं तो फिर अपने आस-पास के वातावरण और पशु पक्षी, पेड़ पौधों पर ध्यान दे पाते हैं. इससे आप प्रकृति के करीब जा पाते हैं. यह तरीका आपको अंदर से पॉजिटिव रखता है, जो कि आपको क्रिएटिव बनाने में मदद कर सकता है.
4- बिना हेडफोन लगाए वॉक करने के लिए इसलिए भी सलाह दी जाती है क्योंकि गाना सुनते समय आपका ध्यान खुदपर नहीं होता बल्कि आप इमेजनरी दुनिया में होते हैं. यह आपको डिस्ट्रैक्ट भी करता है. जिससे आपके टहलने दौड़ने का जितना फायदा मिलना चाहिए हेल्थ को नहीं मिल पाता है.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
