August 08, 2026
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        सेहत टिप्स /शौर्यपथ /अंडे को सेहत से भरपूर माना जाता है. अंडे को प्रोटीन का सबसे अच्छा सोर्स माना जाता है. अंडे को डाइट में शामिल कर आप कई स्वास्थ्य समस्याओं से बच सकते हैं. असल में अंडे विटामिन-बी से भरपूर होते हैं, इसके अलावा इसमें विटामिन बी12, बायोटिन, रिबोफ्लाविन, थियामिन और सेलेनियम भी मौजूद होता है. ये सभी विटामिन अच्छे बालों, त्वचा और नाखूनों के लिए ज़रूरी होते हैं. अंडे को रोज डाइट में शामिल करने से शरीर को कई लाभ मिलते हैं.तो चलिए जानते हैं एक उबला अंडा खाने के फायदे.  
    अंडा खाने के फायदे-
    1. मसल्स-
       अंडे के सफेद भाग में प्रोटीन और अमीनो एसिड्स की भरपूर मात्रा रहती है, जो शरीर में मांसपेशियों के निर्माण में मदद कर सकता है.
    2. खून की कमी-
      उबले अंडे का पीला पार्ट खाने से आयरन की कमी पूरी होती है. अगर आपको आयरन की कमी है तो आप अपनी डाइट में उबले अंडे के पीले हिस्से को शामिल कर सकते हैं.
    3. आंखों-
        रोजाना एक उबला अंडा खाने से आंखों को हेल्दी रखा जा सकता है. अंडे में भरपूर मात्रा में कैरोटिनायड्स पाया जाता है, जो आंखों की सेहत के जरूरी है.
    4. हड्डियों-
       अंडे में विटामिन डी पाया जाता है. विटामिन डी की कमी को दूर करने और हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए आप नाश्ते में एक उबला अंडा खा सकते हैं.

       व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /आज 23 अक्टूबर, सोमवार शारदीय नवरात्री का नौंवा दिन है जिसे नवमी या महानवमी कहा जाता है. इस दिन मां दुर्गा के नौंवे रूप मां सिद्धिदात्री  की पूजा की जाती है. नवमी पर जितना महत्व पूजा-आराधना का होता है उतना ही महत्व माता को लगाए जाने वाले भोग का भी है. मां को भोग में भक्त उनके प्रिय पकवान अर्पित करते हैं तो माता प्रसन्न होती हैं और माना जाता है कि भक्तों पर उनकी विशेष कृपादृष्टि भी पड़ती है. नवमी  के ही दिन बहुत से भक्त अपने घर में कन्यापूजन करते हैं. कन्यापूजन यानी कंजक में नौ कन्याओं को बुलाकर प्रसाद खिलाया जाता है और उपहार दिए जाते हैं. साथ ही, माता के समक्ष लगाए गए भोग को भी प्रसाद स्वरूप वितरित किया जाता है. ऐसे में भोग का विशेष महत्व होता है. जानिए आज मां को किन-किन चीजों का भोग लगाया जा सकता है.
    नवमी पर माता को किन चीजों का भोग लगाएं
     नवमी पर मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है. इस चलते भोग भी मां के प्रिय पकवानों से तैयार किया जाता है.
    पूरी
      सादे आटे की पूरी मां को भोग में विशेषकर लगाई जाती है. पूरी छोटी-छोटी हों तो देखने में अच्छी भी लगती हैं. ज्यादातर पूरी के साथ हलवा और चना भोग में लगाए जाते हैं और यही प्रसाद में कन्याओं को भी परोसा जाता है.
    काले चने
       भोग में माता को काले चने  चढ़ाना शुभ मानते हैं. काले चनों से भोग तैयार करने के लिए रात में ही चने भिगोकर रख दें. सुबह इन चनों को उबालें और फिर तेल, जीरा और नमक डालकर फ्राई कर लें. चने बेहद स्वादिष्ट बनेंगे और प्रसाद में भी चढ़ाए जा सकेंगे.
    हलवा
      नवमी भोग  में हलवा चढ़ाना बेहद शुभ इसलिए भी होता है क्योंकि यह मीठा पकवान है और मीठे को पूजा-पाठ और मांगलिक कार्यों में खाना बेहद अच्छा मानते हैं. भोग में हलवा चढ़ाने के लिए सबसे पहले सूजी को कढ़ाही में डालकर भून लें. जब सूजी सुनहरी हो जाए तो इसमें घी, चीनी, इलायची पाउडर और सूखे मेवे डालकर अच्छे से मिलाएं. पानी डालकर पकाएं और बस तैयार है आपका सूजी का हलवा.
    मालपुए
      पूजा के भोग में मालपुए बनाकर भी मां के समक्ष अर्पित किए जा सकते हैं. मालपुए या पुए आटे से बनते हैं और स्वाद में मीठे होते हैं. इन्हें आटे में चीनी, इलायची पाउडर और पानी मिलाकर तैयार किया जाता है. तेल में इस मिश्रण को डालकर सुनहरा भूरा होने तक पकाते हैं और फिर सादा या चाशनी में डुबोकर खाते हैं.

        लाइफस्टाइल /शौर्यपथ /हर बच्‍चा एक-दूसरे से अलग होता है। कोई खेल में अच्‍छा प्रदर्शन करता है, तो कोई पढ़ाई में अच्‍छा होता है। इसी तरह सक्‍सेसफुल बच्‍चों में भी कुछ खास गुण होते हैं और अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्‍चा भी सफल बने तो आप अपने बच्‍चे में इन स्किल्‍स को डेवलप कर सकते हैं। इसके साथ ही अगर आप ये जानना चाहते हैं कि आपका बच्‍चा सक्‍सेसफुल बनेगा या नहीं, तो आप उसमें इन स्किल्‍स की पहचान कर सकते हैं। तो चलिए जानते हैं कि सक्‍सेसफुल बच्‍चों में कौन-से स्किल्‍स होते हैं, जो उन्‍हें दूसरों से अलग बनाते हैं।
    आत्‍मविश्‍वास
    बच्‍चों का आत्‍मसम्‍मान बढ़ाने से पढ़ाई में उनके सफल होने की संभावना बढ़ जाती है। जो बच्‍चे अपनी मेहनत और काबिलियत से अच्‍छे नंबर लाते हैं, वो उन बच्‍चों की तुलना में ज्‍यादा सक्‍सेसफुल बनते हैं जिन्‍हें लगता है कि पढ़ाई के ऊपर उनका कोई कंट्रोल नहीं है। अच्‍छा करने, अड़चनों का सामना करने, समाधान निकालने और खुद को सपोर्ट करने से बच्‍चों का आत्‍मविश्‍वास बढ़ता है। सक्‍सेेसफुल बच्‍चों में आत्‍म-सम्‍मान की भावना और आत्‍मविश्‍वास दोनों होते हैं।
    खुद पर नियंत्रण रख पाना
    अपना ध्‍यान, अपनी भावनाएं, विचारों, कामों और इच्‍छाओं पर कंट्रोल पाने की क्षमता रखना भी आपको जीवन में सफल बना सकता है। अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्‍चा अपनी जिंदगी में सफल बने, तो आप उसे अपनी इन सभी चीजों पर कंट्रोल रखना सिखाएं। बच्‍चों ही नहीं बल्कि बड़ों के लिए भी आत्‍म-नियंत्रण बहुत जरूरी होता है। अगर आपका बच्‍चा कम उम्र में ही खुद पर कंट्रोल रखना सीख जाएगा, तो इससे उसे आगे चलकर भी बहुत फायदा होगा।
    जिज्ञासा रखना
    हर बच्‍चा एक उम्र तक जिज्ञासु होता है और तरह-तरह के सवाल पूछते हैं लेकिन कुछ बच्‍चों के व्‍यवहार में ही जिज्ञासा देखी जाती है और उन्‍हें हर चीज के बारे में जानने की उत्‍सुकता होता है। इससे बच्‍चे के ज्ञान का दायरा बढ़ता है और उसके सफल होने के दरवाजे खुलते हैं। अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्‍चा बुद्धिमान और जिज्ञासु बने, तो उसमें हर चीज को जानने और समझने की उत्‍सुकता पैदा करें।
    आशावादी बनना
    इस बात से तो आप भी सहमत होंगे कि आशावादी बनकर आप अपनी जिंदगी की हर जंग को जीत सकते हैं। आशावादी बन्‍ने चुनौतियों और अड़चनों को अस्‍थायी तौर पर देखते हैं और उन्‍हें विश्‍वास होता है कि वो उससे बाहर निकलने में सक्षम रहेंगे। इससे बच्‍चों को सफलता मिलने में पाने में आसानी होती है। जो बच्‍चे चुनौतियों को स्‍थायी तौर पर देखते हैं और जिन्‍हें लगता है कि मुश्किलें कभी खत्‍म नहीं होंगी, वो बच्‍चे निराशावादी होते हैं और उन्‍हें अपनी जिंदगी में आगे बढ़ने में बहुत मुश्किलें आती हैं।

        टिप्स ट्रिक्स/शौर्यपथ /ठंड के मौसम में मेथी के साग की डिमांड खूब होती है। पराठे से लेकर सब्जी समेत कई तरह से इसका सेवन किया जाता है। इतना ही नहीं मेथी सेहत के लिए भी फायदेमंद है। खासतौर पर मेटाबॉलिक  डिसऑर्डर के उपचार में इसे बहुत ही कारगर पाया गया है। इसमें विटामिन ए, सी, और के समेत कई अहम पोषक तत्व मौजूद होते हैं। लेकिन इसकी कड़वाहट के कारण लोग सही मात्रा में इसका सेवन नहीं कर पाते हैं। हालांकि कि कुछ आसान से उपायों के साथ मेथी की कड़वाहट को कम किया जा सकता है।
    मेथी के पत्ते कड़वे क्यों होते हैं
    इस तरीके से काटें मेथी की भाजी
       मेथी को काटने का तरीका भी इसके कड़वाहट का कारण होता है। यदि आप इसे इसके डंठल समेत काटते हैं तो रेसिपी अधिक कड़वी बनेगी। इसलिए हमेशा सिर्फ इसके पत्तों को काटकर अलग करना चाहिए।
    नमक वाले पानी में भिगोकर रखें
      मेथी के साग को काटने के बाद कम से कम 20 मिनट के लिए नमक के पानी में भिगोकर रखें। इससे काफी हद तक मेथी के पत्तों से कड़वाहट खत्म हो जाती है।
    आज ही ट्राई करें मेथी की ये डिश
    ​यह तरीका भी है जबरदस्त
       मेथी के पत्तों से कड़वाहट हटाने के लिए आप नींबू का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए उबले पानी में 2 चम्मच नींबू का रस मिलाकर 5 मिनट के लिए कटी हुई मेथी भाजी को इसमें भिगो दें। फिर ठंडे पानी से धोकर यूज कर लें।

        सेहत टिप्स /शौर्यपथ /नसों में बहता खून जिंदा रहने की वजह है। यह शरीर में घूम-घूमकर ऑक्सीजन और न्यूट्रिशन पहुंचाता है, इसके बिना शारीरिक अंग मरने लगते हैं। पैरालिसिस, पैर दर्द, कमर दर्द, किडनी फेलियर, खराब आंख, हार्ट अटैक और स्ट्रोक के पीछे नर्व डैमेज सबसे बड़ा कारण है।
        एक न्यूरोलॉजिस्ट के रूप में 3 काम करने के लिए वो कभी किसी को नहीं कहेंगी। क्योंकि ये काम धीरे-धीरे सिर से लेकर पैर के अंगूठों तक की नसों को खराब  देते हैं और ना जाने कितनी भयंकर बीमारियों का शिकार बना सकते हैं।
    जिंदगी में कभी ना करें ये 3 काम
    नींद पर ध्यान न देना
        एक हेल्दी ब्रेन के लिए अच्छी नींद बहुत जरूरी है। रात 10 बजे से सुबह 5 बजे तक का टाइम सोने के लिए बेस्ट है। 7 घंटे की नींद बेहद आवश्यक है और सोने से 1 घंटा पहले डिजिटल डिवाइस जैसे कि मोबाइल, लैपटॉप का इस्तेमाल बंद कर दें। माइग्रेन के मरीजों के लिए तो स्लीप डेप्रिवेशन से दर्द बढ़ सकता है।
    नसों में ताकत भरने वाले फूड
    खाली पेट रहना
         खाली पेट रहने से शरीर में विटामिन और मिनरल कम हो सकते हैं। डॉ. ने खासकर ब्रेकफास्ट को मिस करने से मना किया है। सुबह का नाश्ता इम्यूनिटी बढ़ाता है, इसलिए कभी भी खाली पेट ना खुद ऑफिस जाएं और ना ही बच्चों को स्कूल भेजें। इससे उनके लिए इंफेक्शन का खतरा पूरे दिन ज्यादा रहता है। ध्यान रखें कि खाली पेट रहने से सिरदर्द भी ज्यादा होता है।
    आलस भरी लाइफस्टाइल
        सुस्त लाइफस्टाइल से हार्ट अटैक, कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियों का खतरा होता है। लाइफस्टाइल हेल्दी करने के फिजिकल एक्टिविटी पर पूरा ध्यान दें। मगर इसका मतलब कमरे में घूमने से नहीं है, बल्कि अगर आप जिम, जागिंग नहीं कर पा रहे हैं तो कम से कम बाहर जाकर कम से कम 30 मिनट की ब्रिस्क वॉल्क जरूर करें।

        व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /दशहरा का पर्व असत्य की सत्य पर जीत का पर्व है। दशहरा जिसे विजय दशमी भी कहते हैं यह पर्व अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को आता है। विजयदशमी यानी दशहरा नवरात्रि खत्म होने के अगले दिन मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम ने रावण का वध करने से पहले 9 दिनों तक मां दुर्गा की उपासनी की थी और 10वें दिन रावण का वध किया था।
       विजयदशमी का पर्व आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाए जाने वाले मुख्य पर्वों में से है। श्री वाल्मीकि रामायण, श्री रामचरितमानस, कालिका उप पुराण और अन्य अनेक धार्मिक ग्रन्थों के अनुसार भारतीय जनता के प्राण, मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के साथ इस पर्व का गहरा संबंध है। विद्वानों के अनुसार श्री रामजी ने अपनी विजय यात्रा इसी तिथि को आरंभ की थी। इसलिए विजय यात्रा के लिए यह पर्व शास्त्र सम्मत माना जाता है। आइए दशहरे की मान्यताओं, इतिहास और शुभ मुहूर्त के बारे में जानते हैं विस्‍तार से।
        भारतीय काल गणना के अनुसार इसका आरंभ आज से लगभग नौ लाख वर्ष पूर्व सिद्ध होता है। ज्योतिष के सिद्धान्तानुसार इस समय में ऐसे ग्रह नक्षत्रों का संयोग होता है, जिससे विजय यात्रा का श्रीगणेश करने पर विजय यात्री को जय की प्राप्ति होती है। इसलिए इस तिथि में राजागण अपने राज्यों की सीमा का अतिक्रमण करते रहे हैं और यूं भी भगवान श्री राम की विजय यात्रा के स्मरणार्थ मनाया जाने वाला विजयदशमी का पर्व आज भी अपने अनेक शाश्वत मूल्यों के कारण प्रासंगिक है। श्रीराम द्वारा रावण पर विजय दैवीय और मानवीय गुणों-सत्य, नैतिकता और सदाचार की राक्षसी और अमानवीय दुर्गुणों- अनैतिकता, असत्य, दंभ, अहंकार और दुराचार पर विजय है। यह पर्व न्याय की जीत एवं नारी जाति के अपमान करने वालों का संहारक है।
        इसे लेकर एक अन्य पौराणिक कथा कहती है कि एक महिषासुर नाम का राक्षस था जिसने ब्रह्मा जी की उपासना करके वरदान प्राप्त किया था कि वह पृथ्वी पर कोई भी उसे पराजित नहीं कर पाएगा अर्थात उसका वध नहीं कर पाएगा। महिषासुर से अपने पाप से हाहाकार मचा दिया था। तब ब्रह्मा विष्णु महेश ने अपनी शक्ति से दुर्गा मां का सर्जन किया था। मां दुर्गा और महिषासुर के बीच में 9 दिनों तक मुकाबला चला और 10वें दिन मां दुर्गा ने असुर का वध कर दिया।
    राम के पदचिह्नों पर चलने का शुभ मुहुर्त
      इस तिथि की विजय यात्रा मात्र लंका या रावण पर की जाने वाली राजनीतिक जयमात्र नहीं है, बल्कि सनातन धर्म और मानवीय मूल्यों की विजय है। यह दुख में धैर्य करने और सुख के समय कभी न इतराने के उपदेश से आरंभ हुई थी। यह अवसर भगवान श्रीराम के पदचिह्नों पर चलने के लिए संकल्प लेने का शुभ मुहूर्त है। दशहरे का पर्व निरपराध लोगों को सतत रुलाने वाले रावण के अहंकार रूपी दस सिरों और पौरूष की दुरुपयोगिनी बीस भुजाओं के विनाश का प्रतीक है। विजयदशमी की पूर्वपीठिका का आरंभ आश्विन शुल्क पक्ष के पहले नवरात्र से ही हो जाता है।
    नीलकंठ के दर्शन शुभ
      लोकहित के लिए विष पीकर अपने कंठ को नीला कर लेने वाले भगवान शिव के रूप नीलकंठ के दशहरे के पर्व पर दर्शन बहुत ही सौभाग्यपूर्ण माने जाते हैं। मान्‍यताओं के अनुसार भगवान नीलकंठ दर्शनार्थियों को स्वस्थ, सुखी और यथावत रहने का आशीर्वाद देते हैं। यही कारण है कि लोग सजधजकर स्वस्थ प्रसन्न मन से उनका दर्शन करते हैं।
    रुके काम शुरू हो जाते हैं
        इस पर्व से पहले बरसात के कारण राजाओं की यात्राएं और चातुर्मास के कारण सन्यासियों के आवागमन स्थगित होते हैं, लेकिन आश्विन मास के शुक्ल पक्ष के आते-आते मार्ग सुगम हो जाते हैं। स्वच्छ अम्बर में पवन-संयोग के कारण मेघ बलाहक पक्षी की तरह उड़ने लगते हैं। ऋतु सुहावनी हो जाती है। फसलें लहलहाने लगती हैं।
    दशहरे का शुभ मुहूर्त
      इस साल आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 24 अक्टूबर मंगलवार के दिन है। आपको बता दें कि दशमी तिथि का आरंभ 23 अक्टूबर को शाम के समय 5 बजकर 44 मिनट पर होगा और इसका समापन 24 अक्टूबर को 3 बजकर 14 मिनट पर होगा। दशहरा का त्योहार 24 अक्टूबर को मनाया जाएगा। बता दें कि इस साल दशहरा पर दो बहुत ही शुभ योग बनने जा रहे हैं एक रवि योग और दूसरी वृद्धि योग का संयोग है।

         व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /आज शारदीय नवरात्रि का अंतिम दिन है और नवरात्रि के नौवें दिन मां दुर्गा की 9वीं शक्ति माता सिद्धिदात्री की पूरे विधि-विधान के साथ पूजा अर्चना की जाती है। माता दुर्गा का यह स्वरूप सिद्ध और मोक्ष देने वाला है इसलिए माता को मां सिद्धिदात्री कहा जाता है। इनकी पूजा अर्चना करने से सभी कार्य सिद्ध होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। मां दुर्गा के इस स्वरूप की पूजा देव, दानव, ऋषि-मुनि, यक्ष, साधक, किन्नर और गृहस्थ आश्रम में जीवनयापन करने वाले भक्त मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना करते हैं। इनकी पूजा अर्चना करने से धन, यश और बल की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं मां सिद्धदात्री का स्वरूप, भोग, आरती और मंत्र...
    भगवान शिव को मां से ही मिली हैं सिद्धियां
       धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि मां सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं। देवी पुराण के मुताबिक भगवान शिव ने इनकी कृपा से ही सिद्धियों को प्राप्त किया था। इन्ही देवी की कृपा से भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हुआ था। यह देवी मां लक्ष्मी के समान कमल के आसन पर विराजमान है। माता के हाथों में कमल, गदा, सुदर्शन चक्र, शंख धारण किए हुए है। नौवें दिन सिद्धिदात्री की पूजा करने के लिए नवाहन का प्रसाद और नवरस युक्त भोजन और नौ प्रकार के फल फूल आदि का अर्पण करके नवरात्र का समापन करना चाहिए। सिद्धिदात्री देवी सरस्वती का भी स्वरूप हैं।व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /आज शारदीय नवरात्रि का अंतिम दिन है और नवरात्रि के नौवें दिन मां दुर्गा की 9वीं शक्ति माता सिद्धिदात्री की पूरे विधि-विधान के साथ पूजा अर्चना की जाती है। माता दुर्गा का यह स्वरूप सिद्ध और मोक्ष देने वाला है इसलिए माता को मां सिद्धिदात्री कहा जाता है। इनकी पूजा अर्चना करने से सभी कार्य सिद्ध होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। मां दुर्गा के इस स्वरूप की पूजा देव, दानव, ऋषि-मुनि, यक्ष, साधक, किन्नर और गृहस्थ आश्रम में जीवनयापन करने वाले भक्त मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना करते हैं। इनकी पूजा अर्चना करने से धन, यश और बल की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं मां सिद्धदात्री का स्वरूप, भोग, आरती और मंत्र...
    ये हैं माता की 8 सिद्धियां
       पौराणिक कथाओं के अनुसार, अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व ये आठ सिद्धियां हैं। सभी देवी देवताओं, गंदर्भ, ऋषि, असुरों को इनकी पूजा करने से ही सिद्धियां प्राप्त होती हैं। जो भी भक्त नवरात्रि के नौ दिन उपवास, पूजा अर्चना और अंत में कन्या पूजन करते हैं, उन पर मां की असीम कृपा प्राप्त होती है और सभी अटके कार्य पूर्ण होते हैं। साथ ही घर परिवार में सुख शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
    ऐसा है मां सिद्धिदात्री का स्वरूप
      मां सिद्धिदात्री मां लक्ष्मी की तरह कमल पर विराजमान हैं और मां चार भुजाओं से युक्त हैं। माता के दाहिनी तरफ के नीचे वाले हाथ में कमल पुष्प और ऊपर वाले हाथ में शंख सुशोभित है। वहीं बाएं तरफ के नीचे वाले हाथ में गदा और ऊपर वाले हाथ में चक्र सुशोभित है। मां दुर्गा इस रूप में लाल वस्त्र धारण की हैं।
    माता सिद्धिदात्री का भोग
       नौवें दिन माता सिद्धिदात्री को हलवा, पूड़ी, काले चने, मौसमी फल, खीर और नारियल का भोग लगाया जाता है। माता की पूजा करते समय बैंगनी या जामुनी रंग पहनना शुभ रहता है। यह रंग अध्यात्म का प्रतीक होता है।
    नवरात्रि में कन्या पूजन का महत्व
       नवरात्रि की नवमी तिथि पर कन्या पूजन करने का विधान है। कन्या पूजन में कन्याओं की संख्या 9 होनी चाहिए अन्यथा दो कन्याओं के साथ भी पूजा कर सकते हैं। कन्याओं के साथ एक लांगूरा (बटुक भैरव) भी होना चाहिए। कन्याओं को घर पर आदर सत्कार के साथ बुलाकर उनके पैरों को जल या दूध से धुलकर कुमकुम व सिंदूर का टिका लगाएं और आशीर्वाद लें। फिर भोजन के लिए कन्या और लागूंरा को हलवा-चना, पूड़ी-सब्जी, फल आदि चीजें दें। भोजन कराने के बाद लाल चुनरी ओढाएं और सामर्थ्य के अनुसार दान दक्षिणा दें। इसके बाद पूरे परिवार के साथ सभी कन्या और लागूंरा के चरण स्पर्श करें और माता के जयाकरे लगाते हुए कन्या और लागूंरा को विदा करें। कन्या पूजन करने से माता की विशेष कृपा प्राप्त होती है और घर के सभी सदस्यों की उन्नति होती है।
    मां सिद्धिदात्री पूजा विधि
      शारदीय नवरात्रि के अंतिम दिन ब्रह्ममुहूर्त में उठकर ही घर की पूरी साफ सफाई के बाद अन्य दिनों की तरह ही माता की पूजा-अर्चना करें लेकिन इस दिन हवन का विशेष महत्व रहा है। आज नवरात्रि का अंतिम दिन है इसलिए माता की पूजा करने से बाद सभी देवी-देवताओं की भी पूजा की जाएगी। लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां की मूर्ति या तस्वरी रखें और फिर चारों तरफ गंगाजल से छिड़काव करें। इसके बाद माता को पूजा सामग्री अर्पित करके हवन करें। हवन करते समय सभी देवी-देवताओं को नाम की आहुति भी एकबार दे दें। हवन के समय दुर्गा सप्तशती के सभी श्लोक के साथ मां दुर्गा की आहुति भी दी जाती है। इसके साथ ही देवी के बीज मंत्र 'ऊँ ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे नमो नम:' का 108 बार जप करते हुए आहुति दें और फिर आरती उतारें। हवन करने के बाद पूरे परिवार के साथ माता के जयाकरे लगाएं और माता का आशीर्वाद लेते हुए कन्या पूजन शुरू करें। मां सिद्धिदात्री को भोग में हलवा व चना का विशेष महत्व है। इसके साथ ही पूड़ी, खीर, नारियल और मौसमी फल भी अर्पित करें और व्रत का पारण करें।

       व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /आज 22 अक्टूबर के दिन शारदीय नवरात्रि की अष्टमी तिथि है जिसे दुर्गा अष्टमी के नाम से जाना जाता है. दुर्गाष्टमी नवरात्रि का आठवां दिन होता है और इस दिन माता के महागौरी रूप की पूजा-आराधना की जाती है. महागौरी भगवान गणेश की माता और महादेव की पत्नी हैं. अष्टमी के दिन महागौरी की विशेष उपासना की जाती है. इस दिन घर में कंजक बैठाई जाती है और कन्यापूजन होता है. बहुत से भक्त अष्टमी के व्रत के साथ ही नवरात्रि उपवास का समापन करते हैं. इस दिन माता के नाम से शुरूआत हो और सभी पर माता की विशेष कृपादृष्टि पड़े इसके लिए आप माता रानी के ये शुभकामना संदेश सभी को भेज सकते हैं. दुर्गाष्टमी की बधाई पाकर सभी का दिन मंगलमय हो जाएगा.
    दुर्गा अष्टमी के शुभकामना संदेश |
    लाल रंग की चुनरी से सजा मैया का दरबार
    हर्षित हुआ मन और पुलकित हुआ संसार.
    दुर्गा अष्टमी की शुभकामनाएं!
    दुर्गा अष्टमी का त्योहार
    जीवन में लाए खुशियां अपार,
    मां दुर्गा पधारें आपके द्वार
    हमारी मनोकामना मां करो स्वीकार.
    दुर्गा अष्टमी की शुभकामनाएं!
    जो करे मां दुर्गा का मनन, कटे उसके सारे कलेश,
    युग-युग में साधु-मुनि देते हैं सबको यह उपदेश.
    दुर्गा अष्टमी की शुभकामनाएं!
    मां के कदम आपके घर में आएं
    आप खुशी से नहाएं
    परेशानियां आपसे आंखें चुराएं.
    दुर्गा अष्टमी की शुभकामनाएं!
    कुमकुम भरे कदमों से आएं
    मां दुर्गा आपके द्वार
    सुख-संपत्ति मिले आपको अपार
    आपके लिए शुभ हो दुर्गाष्टमी का त्योहार.
    दुर्गा अष्टमी की शुभकामनाएं!
    आप और आपको समस्त परिवार खुशहाल रहे
    मातारानी की कृपा आप पर बनी रहे
    सुख, समृद्धि और सफलता आपके कदम चूमें.
    दुर्गा अष्टमी की शुभकामनाएं!
    श्वेत वस्त्र धारण करने वाली
    बैल पर सवार, चार भुजा वाली,
    त्रिशूल धारण करने वाली
    मां महागौरी आपके परिवार और संतान की सुरक्षा करें.
    दुर्गा अष्टमी की शुभकामनाएं!
    चांद की चांदनी
    बसंत की बहार
    फुलों की खुशबू
    अपनों का प्यार
    मुबारक हो आपको दुर्गा अष्टमी का त्योहार.
    दुर्गा अष्टमी की शुभकामनाएं!
    जग है सारा मां तेरे चरणों में
    रखना सदा हमे अपनी शरण में,
    सिर पर हम रखें चरणों की धूल
    आओ मिलकर चढ़ाएं माता को फूल.
    दुर्गा अष्टमी की शुभकामनाएं!

        ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ /जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है वैसे-वैसे चेहरे की चमक ढलती जाती है. कई लोग इस चमक को बनाए रखने के लिए अलग-अलग कॉस्मेटिक्स का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन इसका बहुत ज्यादा साइड इफेक्ट्स भी होता है. ऐसे में नेचुरल स्किन ग्लो के लिए फेस मसाज करना बहुत अच्छा हो सकता है. मसाज करने से स्कीन रिलैक्स होता है. बढ़े से बढ़े स्किन एक्सपर्ट्स और डॉक्टर हफ्ते में एक बार फेस मसाज करने की सलाह देते हैं. आइए जानते हैं फेस मसाज के और क्या-क्या फायदे हैं.
    इन कारणों से बहुत फायदेमंद हैं फेस मसाज
    स्ट्रेस लेवल करता है कम
    अच्छी तरह से अगर फेस मसाज किया जाए तो इससे चेहरे की सारी मसल्स को बहुत आराम मिलता है. मसल्स रिलैक्स करने से दिमाग का टेशन और स्ट्रेस लेवल भी कम होता है. रिलैक्स रहने से चेहरा खूबसूरत और जवान नजर आता है.
    बेहतर ब्लड सर्कुलेशन
    फेस मसाज करने से चेहरे और शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है. खून के बेहतर फ्लो से चेहरे पर नेचुरल ग्लो आता है और आप लंबे समय तक यंग नजर आएंगे.
    प्रोडक्ट यूज के लिए बेहतर
    चेहरे पर कई बार साइड इफेक्ट्स के डर से हम ब्यूटी प्रोडक्टस नहीं यूज करते हैं. लेकिन नियमित फेस मसाज से चेहरे की किसी भी प्रोडक्ट को अब्सॉर्प्शन करने की क्षमता बढ़ जाती हैं. आपकी त्वचा को वो सभी पोषक तत्व मिलते हैं जिनकी उसे जरूरत है.
    फाइन लाइंस हटाने के लिए
    फेस मसाज से आपके चेहरे की फइन लाइंस और झुर्रियां गायब हो जाती है. मॉइस्चराइजर की मदद से चेहरे की मसाज करने से उसकी इलास्टिसिटी बढ़ती है. साथ ही इससे कोलेजन प्रोडक्शन को बड़ाने में भी मदद मिलती है.
    रिलैक्सेशन के लिए
    एक अच्छे फेस मसाज से आपका बॉडी और दिमाग दोनों पूरी तरह से रिलैक्स हो जाते हैं. इससे स्किन भी रिलैक्स होती है. नेचुरल ग्लो के लिए आप फेस मसाज को जरूर अपनाएं.

       टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ / वैसे तो आपने ऐसे कई फल के बारे में सुना होगा जिसे खाने से खून साफ होता है. लेकिन यहां आप एक ऐसे फल के बारे में जानेंगे जिसका फल ही नहीं बल्कि उसके पत्ते भी हमारे लिए बहुत गुणकारी है. इस पत्ते का जूस पीने से खून साफ होता है और चेहरे की चमक बढ़ जाती है. इस जूस के और भी कई फायदे हैं जो आज आप जान लेंगे तो अपनों को भी इसे पीने की सलाह जरूर देंगे.
    पपीते के पत्ते के जूस के हैं कई फायदे |
    कई हेल्थ एक्सपर्ट पपीता खाने की सलाह देते हैं और जिस तरह पपीता हमारे लिए फायदेमंद है उसी तरह इसके पत्ते के जूस भी कई औषधीय गुणों से भरपूर है.
    खून साफ करे
     पपीते के पत्ते के जूस पीने से आपके शरीर की सारी गंदगी बाहर निकल जाएगी और आपका खून पूरी तरह से साफ हो जाएगा.
    स्किन के लिए फायदेमंद
      अगर आपको त्वचा से संबंधित कोई भी समस्या है तो पपीते का जूस जरूर पीएं. इसमें विटामिन सी और विटामिन ई जैसे गुण पाए जाते हैं जो झुर्रियों से लड़ने में मदद करता है साथ ही आपको हानिकारक किरणों से भी बचाता है.
    हेल्दी हेयर के लिए जरूरी
      अगर आपको बाल झड़ने की समस्या है तो पपीते का रस का सेवन करें. ये आपके बालों को मजबूत बनाएगा और बालों का झड़ना रोक देगा.
    इम्यून सिस्टम होगा मजबूत
      अगर आप पपीते के पत्ते के रस का सेवन करते हैं तो इससे आपकी इम्यून सिस्टम मजबूत होगी और प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ेगी.
    पाचन तंत्र होगा अच्छा
      पपीते के पत्ते का जूस आपकी पाचन तंत्र को भी मजबूत करेगा और पेट से संबंधित कब्ज दस्त जैसी सभी बीमारियों से छुटकारा दिलाएगा.

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