August 08, 2026
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       सेहत टिप्स /शौर्यपथ / दही को सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. दही एक डेयरी प्रोडक्ट है और डेयरी प्रोडक्ट को सेहत के लिए लाभदायक माना जाता है. रोजाना डाइट में दही को शामिल कर शरीर को कई लाभ मिल सकते हैं. आपको बता दें दही में विटामिन सी मौजूद होने से ये इम्यूनिटी  को बढ़ाने में मदद कर सकता है. इतना ही नहीं दही स्किन लिए काफी लाभदायक है. असल में दही में प्रोटीन, कैल्शियम, राइबोफ्लेविन, विटामिन बी6 और विटामिन बी12 जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को कई स्वास्थ्य समस्याओं से बचाने में मदद कर सकते हैं. तो चलिए जानते हैं दही खाने से होने वाले फायदे.
    दही खाने के 9 फायदे-
    1. पाचन-
      दही में पाए जाने वाले पोषक तत्व पेट को सही रखने और पाचनतंत्र को मजबूत बनाने में मदद कर सकते हैं.
    2. वजन घटाने-
     दही में कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो आपके वजन को कंट्रोल करने में मदद कर सकते हैं.
    3. इम्यूनिटी-
      दही विटामिन सी का अच्छा सोर्स है, जो इम्यूनिटी को बढ़ाने में मदद कर सकता है.
    4.  हड्डियों-
     कैल्शियम से भरपूर दही का रोजाना सेवन कर हड्डियों को मजबूत बना सकते हैं. दही हड्डियों को कमजोर होने से बचाने में मददगार है.
    5. इंफेक्शन-
      दही में कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर में होने वाले इंफेक्शन से बचाने में मदद कर सकते हैं.
    6. मुंह के छाले-
     अगर आपको भी बार-बार हो रहे हैं मुंह में छाले तो खाना शुरू कर दें एक कटोरी दही. दही के सेवन से मुंह के छाले को दूर कर सकते हैं.
    7. हार्ट-
      हार्ट को हेल्दी रखने में हमारी हेल्दी डाइट अहम मानी जाती है. अगर आप भी हार्ट को हेल्दी रखना चाहते हैं, तो दही का सेवन कर सकते हैं.
    8. स्किन-
      स्किन को हेल्दी रखने में मददगार है दही. दही के सेवन से स्किन को हेल्दी रखा जा सकता है.
    9. पेट की गर्मी-
      दही की तासीर ठंडी होती है. अगर आपके पेट में गर्मी बढ़ गई है तो आप दही के सेवन से पेट की गर्मी को दूर कर सकते हैं.

      व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /देश भर में जल्द  ही शक्ति की प्रतीक मां दुर्गा के नवरात्र आरंभ हो रहे हैं. 26 सितंबर यानी रविवार से नौ दिनों के लिए पूरा देश मां दुर्गा की आराधना में लीन हो जाएगा. नौ दिनों तक चलने वाले इस महा उत्सव में मां के नौ विभिन्न स्वरूपों की पूज की जाती है. लोग घट स्थापना करके व्रत आदि रखते हैं और देश भर में जगराते और गरबा आयोजन होते हैं. ऐसे में अगर आप भी इस महापर्व को मना रहे हैं तो आप नवरात्र पर अपने दोस्तों, परिजनों और मित्रों को व्हाट्सएप के जरिए शुभकामना संदेश भेज सकते हैं. यहां हम आपके साथ व्हाट्सएप और सोशल मीडिया पर पॉपुलर कुछ ऐसे ही संदेश साझा कर रहे हैं जिन्हें आप मोबाइल के जरिए साझा कर सकते हैं.
    नवरात्रि के लिए खास मेसेज और कोट्स
    सर्व मंगल मांगल्ये,
    शिवे सर्वार्थ साधिके,
    शरण्ये त्र्यम्बके गौरी
    नारायणी नमोस्तुते ।
    नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं !
    लक्ष्मी का हाथ हो,
    सरस्वती का साथ हो,
    गणेश का निवास हो,
    और माँ दुर्गा के आशीर्वाद से
    आपके जीवन में प्रकाश ही प्रकाश हो….
    शारदीय नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं!
    दिव्य है मां की आंखों का नूर,
    संकटों को मां करती हैं दूर,
    मां की ये छवि निराली
    नवरात्रि में आपके घर लाए खुशहाली।।
    नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं!
    मंगलकरनी दुखहरनी मां दुर्गा की जय हो
    सबका मंगल करने वाली मां दुर्गा की जय
    सब रहे खुशहाल मां के साम्राज्य में
    सबकी रक्षा करने वाली मां दुर्गा की जय हो
    नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं!
    माता रानी ये वरदान देना,
    बस थोड़ा सा प्यार देना,
    आपकी चरणों में बीते जीवन सारा
    ऐसा आशीर्वाद देना।
    आप सभी को नवरात्रि की शुभकामनाएं।
    मां करती सबका उद्धार है
    मां करती सबकी बेड़ा पार है,
    मां सबके कष्टों को हरती है,
    मां भक्तों के लिए कितना कुछ करती है।
    शारदीय नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं!
    मां भरती झोली खाली! मां अम्बे वैष्णो वाली!
    मां संकट हरने वाली! मां विपदा मिटाने वाली!
    मां के सभी भक्तों को नवरात्रि की हार्दिक शुभकामना

     आस्था /शौर्यपथ /15 तारीख दिन रविवार से शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ हो गया है. अब पूरे नौ दिन तक मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाएगी. आपको बता दें कि मां के हर स्वरूप का खास महत्व है. ऐसे में इसकी विधि-विधान के साथ पूजा करने के साथ मां दुर्गा के 6 पावरफुल मंत्रों का जाप किया जाए तो आपके सारे कष्ट दूर होंगे और मन शांत भी रहेगा. देवी दुर्गा के इन मंत्रों को जपने से त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश का भी आशीर्वाद आपके साथ बना रहता है.
    मां दुर्गा के मंत्र |
    1- ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
    दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।
    2- या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता,
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।\
    3- या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता,
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
    4-या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता,
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
    5- सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
    शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।
    6- दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः। सवर्स्धः स्मृता मतिमतीव शुभाम् ददासि।।
    दुर्गे देवि नमस्तुभ्यं सर्वकामार्थसाधिके। मम सिद्धिमसिद्धिं वा स्वप्ने सर्वं प्रदर्शय।।
    मां दुर्गा ध्यान मंत्र है |
    ॐ जटा जूट समायुक्तमर्धेंन्दु कृत लक्षणाम|
    लोचनत्रय संयुक्तां पद्मेन्दुसद्यशाननाम॥
    दुर्गा मंत्र के लाभ
    - यह मंत्र आत्मा को खोलेगा और चेतना को जगाएगा.यह सारे महत्वपूर्ण मंत्र हैं.
    - इस मंत्र का उच्चारण करने से व्यक्ति को ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है.
    - देवी दुर्गा की पूजा करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है और नकारात्मकता का दूर होती है.
    - इस मंत्र का जाप करने वाले व्यक्ति की आर्थिक स्थिति अच्छी होती है.

        व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / हर साल आश्विन महीने की प्रतिपदा तिथि से नवरात्रि पर्व की शुरूआत होती है. नौ दिनों तक चलने वाले इस त्योहार में भक्त मां की पूजा पूरी विधि-विधान से करते हैं. साथ ही मां के लिए नौ दिनों तक व्रत रखते हैं. मान्यता है कि इन नौ दिनों के दौरान मां अपने हर उपासक की मनोकमना पूरी करती हैं. नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है. इनकी पूजा से जुड़ी जरूरी बातें और मान्यता हम आपको आर्टिकल में बताने वाले हैं.
    मां ब्रह्मचारिणी पूजा विधि
      मां दुर्गा की दूसरा स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी सिद्धि और सफलता की प्रतीक मानी जाती है. इनकी पूजा नवरात्रि के दूसरे दिन की जाती है. इस दिन पूजा के समय आपको हरे रंग का वस्त्र धारण करना चाहिए. पूजा के समय पीले या सफेद रंग के कपड़े का इस्तेमाल करें. मां का अभिषेक पंचामृत से करें और रोली, अक्षत, चंदन, जैसी चीजों का भोग लगाएं. मां ब्रह्मचारिणी को प्रसन्न करने के लिए आप उन्हें चीनी और पंचामृत का भी भोग लगा सकते हैं. मां को गुड़हल और कमल का फूल पसंद है.
    मां ब्रह्मचारिणी मंत्र
        ॐ ऐं ह्रीं क्लीं भ्रामचारिह्य नमः
        या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः  (108 बार जाप करें)
        ह्रीं श्री अम्बिकायै नमः
    मां ब्रह्मचारिणी से जुड़ी मान्यता
      हिन्दू मान्यताओं के अनुसार जब माता पार्वती भगवान शिव को अपना वर बनाने के लिए तपस्या पर बैठी थी तो उन्होंने सब कुछ त्याग करके ब्रह्मचर्य अपना लिया था. मां के इसी रूप को ब्रह्मचारिणी के नाम से जाना जाता है. दुर्गा मां की इस रूप की पूजा अविवाहित देवी के रूप में किया जाता है. इनके एक तरफ कमंडल होता है और दूसरी तरफ जप माला होती है. मां को सरलता, शांति और सौम्य रूप में पूजा जाता है.
    मां ब्रह्मचारिणी की आरती
    जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता ।
    जय चतुरानन प्रिय सुख दाता।
    ब्रह्मा जी के मन भाती हो।
    ज्ञान सभी को सिखलाती हो।
    ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा ।
    जिसको जपे सकल संसारा।
    जय गायत्री वेद की माता ।
    जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता।
    कमी कोई रहने न पाए।
    कोई भी दुख सहने न पाए।
    उसकी विरति रहे ठिकाने ।
    जो तेरी महिमा को जाने ।
    रुद्राक्ष की माला ले कर ।
    जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर आलस छोड़ करे गुणगाना।
    मां तुम उसको सुख पहुंचाना।
    ब्रह्माचारिणी तेरो नाम।
    पूर्ण करो सब मेरे काम।
    भक्त तेरे चरणों का पुजारी।
    रखना लाज मेरी महतारी।

       रसोई टिप्स /शौर्यपथ /रोटी बनाने के लिए गेहूं के आटे का इस्तेमाल तो लगभग हर घर में होता है। ऐसे में यदि उसमें कीड़े या घुन लग जाए तो इसे साफ करने का काम अलग बढ़ जाता है। क्योंकि घुन लगा आटा खाना सेहत के लिए अच्छा नहीं होता है। इसलिए हर बार खाना बनाते समय यह सुनिश्चित करना जरूरी हो जाता है कि आटा पूरी तरह से साफ हो।
    इसमें कोई दोराय नहीं कि यह काम कुकिंग टाइमिंग को बढ़ा देता है। ऐसे में इस परेशानी को दूर करने के लिए आज हम आपको कुछ ऐसे टिप्स बता रहे हैं, जिसकी मदद से एक ही बार में सारा आटा साफ किया जा सकता है।
    सबसे पहले करें ये काम
    यदि आटे के डिब्बे में घुन या कीड़े नजर आ रहे हैं, तो इसे सबसे पहले एक बड़े बर्तन में बारीक छेद वाले छलनी से साफ कर लें। इससे आप सारे बड़े साइज के कीड़े को आसानी से मिनट भर में आटे से अलग कर सकते हैं। हालांकि छोटे कीड़ों को साफ करने के लिए यह तरीका उत्तम नहीं है।
    आटे से कीड़ों को एक बार में साफ कर देगा ये ट्रिक
    आटे में कीड़े लग जाए तो इसे एयर टाइट प्लास्टिक बैग में डालकर फ्रीज में रख दें। ऐसा करने से ठंड के कारण सारे घुन और कीड़े मर जाते हैं। लेकिन इसके लिए आपको 5-6 दिन तक आटे को फ्रिज में रखना पड़ेगा। समय पूरा होने पर आप आटे को छलनी से साफ करके यूज कर सकते हैं।
    यह तरीका भी कर सकते हैं यूज
    आप आटे को कड़क धूप में भी फैलाकर रख सकते हैं। इससे गर्मी के कारण सारे कीड़े मर जाएंगे या निकल कर भागने लगते हैं। हालांकि इस उपाय से आटे को साफ करने में अधिक मेहनत और समय लगता है। इसके साथ ही आपको यह भी ध्यान रखना होता है कि आटे में दुसरे पशु-पक्षी मुंह ना लगा दें।

    सेहत टिप्स /शौर्यपथ /हड्डियों को मजबूत बनाने वाली ड्रिंक्स
    ​हड्डियों में किसी भी तरह की कमजोरी या बीमारी आपको अपाहिज बना सकती है। हड्डियां तब कमजोर होती हैं, जब आपको पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम और विटामिन डी नहीं मिलता है। कैल्शियम की कमी से कंकाल उम्र से पहले ढहने लगता है। हड्डियों को मजबूत करने के लिए ​दूध की बजाय आप न्यूट्रिशनिस्ट और डाइटीशियन शिखा अग्रवाल शर्मा द्वारा बताई ड्रिंक्स पी सकते हैं।
    ग्रीन स्मूदी
    हरे पत्तेदार सब्जियों में नैचुरली कैल्शियम और अन्य मिनरल्स की मात्रा अधिक पाई जाती है। ग्रीन स्मूदी के सेवन से विटामिन डी का अवशोषण भी बढ़ता है।
    बोन ब्रोथ
    मटन की हड्डियों से बना सूप पीने से आपको हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद मिल सकती है। इसमें कोलेजन और मिनरल्स की मात्रा अधिक होती है, जो हड्डियों के स्वास्थ्य में सुधार करते हैं।
    टोमेटो जूस
    टमाटर का रस पीना हड्डियों को मजबूत करना है क्योंकि इसमें लाइकोपीन की मात्रा अधिक होती है, जो हड्डियों को कमजोर होने से बचाता है।
    बेरीज एंड योगर्ट स्मूदी
    बेरीज में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं जबकि योगर में कैल्शियम और प्रोबायोटिक भरे होते हैं, जो हड्डियों को मजबूत करने का काम करते हैं।
    फोर्टिफाईड ओरेंज जूस
    ओरेंज जूस में नैचुरली विटामिन सी पाया जाता है और यह विटामिन डी के अवशोषण को बढ़ाता है। फोर्टिफाईड ओरेंज जूस पीने से हड्डियों के स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है।

    चाणक्य नीति/शौर्यपथ /इसमें कोई दोराय नहीं कि खुशहाल जीवन के लिए लाइफपार्टनर का अच्छा होना बहुत जरूरी है। यही कारण है कि शादी से पहले व्यक्ति की हर तरह से जांच पड़ताल कर ली जाती है। लेकिन ज्यादातर शादियां लड़के के पैसे और लड़की की खूबसूरती पर ही होती हैं। जिसका परिणाम आज किसी से छिपा नहीं है। इसके कारण ही लगातार तलाक और एक्स्ट्रामैरिटल अफेयर के मामले बढ़ रहे हैं।
    ऐसा कहा जाता है कि एक स्त्री अपने गुणों से किसी भी घर को स्वर्ग या नरक बना सकती है। यदि गहराई से इस बात को सोचा जाए तो इसमें बहुत सत्यता नजर आती है। यह बात तब और पक्की हो जाती है, जब चाणक्य नीति में स्त्री के ऐसे गुणों का वर्णन मिलता है जो पुरुष की सोई किस्मत भी जगा सकती है। आचार्य चाणक्य द्वारा बताए गए अच्छी पत्नी के ऐसे ही कुछ गुण यहां हम आपके साथ शेयर कर रहे हैं।
    मन से शांत हो
    चाणक्य नीति में बताया गया है कि जो स्त्री मन से शांत हो वह किसी भी परिस्थिति में क्रोध नहीं करती है। वह जगह और समय के हिसाब से सोच समझकर कार्य करने में सक्षम होती है। ऐसी स्त्री अपने पति के जीवन को भी आसान बना देती है।
    धैर्यवान हो
    ऐसा कहा जाता है कि जल्दबाजी का काम शैतान का होता है और इसमें गड़बड़ी की संभावना भी बहुत अधिक होती है। लेकिन धैर्य से काम करने वाला व्यक्ति खराब से खराब स्थिति में भी बहुत ही उच्च कोटी का कार्य करता है। ऐसे में चाणक्य धैर्यवान स्त्री से शादी करने की सलाह देते हैं। क्योंकि पुरुष के घर परिवार को चलाने की अहम जिम्मेदारी उसकी पत्नी पर ही होती है।
    धार्मिक हो
    एक धार्मिक स्त्री अपने पति के भाग्य को पलटने की क्षमता रखती है। वह हमेशा अपने परिवार को अधर्म से बचाती है, जिससे परमात्मा की कृपा घर के लोगों पर हमेशा बनी रहती है। इसलिए चाणक्य हमेशा ईश्वर में विश्वास और धर्म का पालन करने वाली स्त्री से ही शादी करने की सलाह देते हैं।
    सबका सम्मान करे
    स्त्री में यदि सही संस्कार हो तो वह कभी भी घर में कलेष नहीं होने देती है। उसे पता होता है कि बड़े से लेकर छोटे तक सबको कैसे खुश रखना है। इतना ही नहीं वह गुस्से में भी किसी का निरादर नहीं करती है। ऐसी स्त्री के साथ शादी करने से पुरुष के बिगड़े संबंध भी सुधरने लगते हैं।

    व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /नवरात्रि का आरंभ कल से यानी कि रविवार 15 अक्‍टूबर से हो रहा है। नवरात्रि का यह पर्व सकारात्‍मक ऊर्जा और स्‍फूर्ति से भरा होता है। नवरात्रि में पहले दिन से लेकर 9वें दिन मां दुर्गा के अलग-अलग 9 रूपों की पूजा होती है और इन 9 दिनों के लिए भक्‍त अलग-अलग रंगों के वस्‍त्र पहनते हैं। ऐसा करने से आपको मां दुर्गा के सभी 9 रूपों का आशीर्वाद और कृपा प्राप्‍त होती है। हम आपको बता रहे हैं नवरात्रि के इन 9 दिनों में आपको किन-किन रंगों के वस्‍त्र पहनकर मां दुर्गा की पूजा करनी चाहिए।
    नवरात्रि के पहले दिन का रंग- नारंगी, सफेद
    नवरात्रि के पहले दिन घटस्‍थापना के साथ मां शैलपुत्री की पूजा होती है। पर्वत राज हिमालय की पुत्री होने की वजह से उनका वर्ण सफेद है और उनको नारंगी और श्‍वेत रंग सबसे प्रिय है। इसलिए नवरात्रि के पहले दिन आपको सफेद रंग के वस्‍त्र पहनकर मां दुर्गा की पूजा करनी चाहिए।
    नवरात्रि के दूसरे दिन का रंग-सफेद और स‍िल्‍वर
    नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है। मां ब्रह्मचर्य का पालन करने वाली देवी है। इनके स्‍वभाव के अनुरूप सफेद रंग सबसे उत्‍तम माना जाता है। इसलिए नवरात्रि के दूसरे दिन सभी को सफेद रंग के वस्‍त्र पहनकर पूजा करनी चाहिए। सफेद रंग शुद्धता और शांति का प्रतीक माना जाता है। इस रंग को पहनकर पूजा करने से आपके मन में सकारात्‍मक ऊर्जा का संचार होता है और आत्‍मविश्‍वास में वृद्धि होती है।
    नवरात्रि के तीसरे दिन का रंग-लाल रंग
    नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघण्‍टा की पूजा होती है और इस दिन का लकी कलर लाल माना गया है। मां दुर्गा सदैव लाल जोड़े में भक्‍तों को दर्शन देती हैं। लाल रंग वृद्धि और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। इस रंग के वस्‍त्र पहनकर पूजा करने से आपके घर में समृद्धि बढ़ती है। लाल रंग शक्ति और प्रेम का प्रतीक भी होता है।
    नवरात्रि के चौथे दिन का रंग-नीला और बैंगनी रंग
    नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्‍मांडा की पूजा की जाती है। इस दिन गहरे नीले रंग या फिर बैंगनी रंग के वस्‍त्र पहनकर मां दुर्गा के इस रूप की पूजा करें तो आपको मां का संपूर्ण आशीर्वाद मिलता है। इससे आपके घर में समृद्धि बढ़ती है।
    नवरात्रि के पांचवें दिन का रंग-पीला या सुनहरा
    नवरात्रि के पांचवें दिन स्‍कंदमाता की पूजा की जाती है। मां दुर्गा का यह रूप प्रेम और स्‍नेह का प्रतीक माना गया है। मां की गोद में स्‍वामी कार्तिकेय जिन्‍हें स्‍कंद भी कहा जाता है। विराजमान हैं। मां के इस रूप की पूजा पीले या फिर सफेद वस्‍त्र पहनकर करनी चाहिए।
    नवरात्रि के छठे दिन का रंग-गुलाबी रंग
    नवरात्रि की षष्‍ठी तिथि का महत्‍व सबसे अधिक माना गया है। बंगाली समाज के लोग इस दिन से ही मां दुर्गा की पूजा आरंभ करते हैं। मां का यह रूप कात्‍यायनी देवी का माना गया है। कहते हैं कि इस दिन कुंवारी कन्‍याएं गुलाबी वस्‍त्र पहनकर मां दुर्गा की पूजा करें तो उन्‍हें शीघ्र ही सुयोग्‍य वर मिलता है।
    नवरात्रि के सातवें दिन का रंग- स्‍लेटी और कत्‍थई
    नवरात्रि के सातवें दिन मां दुर्गा के कालरात्रि स्‍वरूप की पूजा होती है। मां का यह रूप प्रचंड और तेजमयी माना गया है। मां कालरात्रि के भय से दुष्‍ट दैत्‍य थरथर कांपते थे। मां दुर्गा का यह स्‍वरूप बुराइयों का अंत करने वाला माना गया है। इस दिन स्‍लेटी या फिर कत्‍थई रंग के वस्‍त्र पहनकर मां दुर्गा की पूजा करनी चाहिए।
    नवरात्रि के आठवें दिन का रंग-सफेद और बैंगनी
    नवरात्रि के आठवें दिन महागौरी माता की पूजा करने का विधान है। महागौरी माता गाय की सवारी करती हैं और इनका वर्ण श्‍वेत माना जाता है। इस दिन आपको सफेद और बैंगनी रंग के वस्‍त्र पहनकर मां की पूजा करनी चाहिए।
    नवरात्रि के नवें दिन का रंग- हरा रंग
    नवरात्रि का नवां और आखिरी दिन मां सिद्धिदात्री को समर्पित होता है। इस दिन हरे रंग के वस्‍त्र पहनकर पूजा करने से आपकी पूजा सफल होती है और आपको मां का आशीर्वाद मिलता है। हरा रंग खुशहली का प्रतीक माना जाता है। इस रंग के वस्‍त्र पहनकर पूजा करने से आपके घर में सुख समृद्धि बढ़ती है।

     लाइफस्टाइल /शौर्यपथ / जीवन के हर रिश्ते में उतार-चढ़ाव आते हैं, जो आपसी बातचीत और सूझ-बूझ से सुलझ जाते हैं. लेकिन कई बार हम जाने अनजाने में हंसी मजाक में कुछ ऐसी बातें बोल जाते हैं जो आपके पार्टनर को बुरा लग सकती हैं. इससे आपके बीच तनाव पैदा हो सकता है. इसलिए हंसी मजाक में बातचीत की मर्यादा को बनाए रखना बहुत जरूरी है. इस लेख में हम आपको यहां पर उन्हीं बुरी लगने वाली बातों के बारे में बताने वाले हैं जिससे आपको अपने पति या फिर पत्नी को नहीं बोलनी चाहिए.
    पति को क्या नहीं बोलें
    पहली बात - अक्सर पत्नियां मजाक में पति को बोलती हैं कि आपने मुझे कोई महंगी चीज नहीं दी. ऐसा कहना आपके पति को बुरा लग सकता है. इससे उनका अब तक किए सारे एफर्ट्स पर पानी फिर जाएगा.
    दूसरी बात - अक्सर पत्नियां मजाक में बोल देती हैं कि कोई दूसरा होता तो मुझे रानी बनाकर रखता. ये बात आपके पति को बहुत बुरी लग सकती है. यह मजाक आपको बिल्कुल नहीं करना चाहिए.
    तीसरी बात - वहीं, बात-बात में दूसरे पति से तुलना करना भी आपके पति को बुरा लग सकता है. इसके अलावा हर बात में मायके से कंपेयर करना भी आपके पति का दिल दुखा सकती है. पुरानी बातों को दोहराना या मजाक में उस बात को बोल देना उनको बुरा लग सकता है.
    चौथी बात - बात-बात पर ताना मारना की शादी के पहले मेरे घर वाले तुम्हारे बारे में जो सोचते थे सही था. या फिर मेरी मां तुम्हारे बारे में सही कह रही थी. ये सारी बातें पति को बुरी लग सकती हैं.

      टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ / ये तो आपने अक्सर देखा होगा कि बच्चों को जब भी पढ़ने बोलो उनके बहाने शुरू हो जाते हैं. पढ़ने के समय  ही उन्हें नींद आने लगती है, भूख लगने लगती है, वॉशरूम जाना  होता है. अब इन चीजों के लिए उन्हें रोका तो नहीं जा सकता लेकिन कुछ पेरेंटिंग टिप्स जरूर अपनाया जा सकता है. अगर आप इन टिप्स को ध्यान रखें तो आपके बच्चे की नहीं पढ़ने की आदत छूट जाएगी. यहां तक कि वके खुद से बैठकर  पढ़ना शुरू कर देंगे. तो चलिए जानते हैं किन बातों का आपको रखना है ख्याल ताकि बच्चों का पढ़ाई में लगने लगे मन.
    बच्चों का पढ़ाई में मन लगाने के लिए कुछ आसान टिप्स |
    मोटिवेशन है जरूरी
       अक्सर मां बाप यह गलती करते हैं कि अपने बच्चे की  दूसरे बच्चों से तुलना करते हैं. ये करना छोड़ दें. इससे बच्चे पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और उन्हें लगता है कि हम अच्छा नहीं कर सकते. इसलिए तुला करने की बजाय उन्हें मोटिवेट करें.
    पढ़ाई का प्रेशर ना बनाएं
       अगर आप बच्चों पर पढ़ाई का ज्यादा प्रेशर बनाएंगे तो यह अच्छा नहीं होगा. इससे उन्हें हर समय पढ़ाई का डर सताता रहेगा जिससे वह उससे दूरी बनाना शुरू कर देंगे. केवल पढ़ाई के समय ही पढ़ाई की बातें करें.
    रूटिंग बनाएं
        पढ़ाई करने के लिए एक बेहतर रूटीन बनाना बेहद जरूरी है. इससेबच्चों में भी अनुशासन आएगा और वह हर काम समय पर करेंगे. शुरुआत में बच्चों को लंबे समय तक पढ़ने के लिए ना बिठाएं.
    ध्यान भटकने वाली चीजे रखें दूर
      अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा मन लगाकर पढ़े और पढ़ाई से भागे ना, तो उनके सामने से वो हर चीज हटा दें जो उनका ध्यान भटकाता हो. जैसे फोन को दूर रखें, खिलौने हटा दें.
    कमियां निकालना बंद करें
        किसी भी बच्चे की कमी निकालने से उनका मन उदास हो जाता है. बच्चों को ऐसा लगने लगता है कि उनमें सिर्फ कमियां है वो कुछ अच्छा नहीं कर सकतें. इसलिए समय-समय पर बच्चों का उत्साह बढ़ाते रहे, उनकी सराहना करते रहें.

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