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रसोई टिप्स /शौर्यपथ /किचन में मौजूद लहसुन एक ऐसी सामग्री है जिसे तमाम तरह की रेसिपीज में स्वाद को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन लहसुन को सिर्फ स्वाद ही नहीं सेहत के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. लहसुन को एक एंटीबायोटिक माना जाता है, जिसमें विटामिन सी, विटामिन बी और विटामिन ए पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है. इसके अलावा लहसुन में सल्फ्यूरिक एसिड जैसे कई पोषक तत्व भी पाए जाते हैं. अगर आप हर दिन एक गिलास पानी के साथ लहसुन की केवल दो कलियां खाते हैं, तो सेहत को कई लाभ मिल सकते हैं. तो चलिए जानते हैं इससे होने वाले फायदे.
लहसुन की दो कलियां खाने के फायदे-
1. कोलेस्ट्रॉल के लिए-
लहसुन कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने में भी मददगार माना जाता है. हर दिन सुबह गुनगुने पानी के साथ दो कलियां लहसुन की खाने से कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है.
2. कब्ज के लिए-
अगर आप हर दिन सुबह से एक गिलास पानी के साथ लहसुन की दो कलियां खाते हैं तो इससे पेट संबंधी समस्याओं को ठीक करने में मदद मिल सकती है.
3. ब्लड प्रेशर-
ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए फायदेमंद है कच्ची लहसुन का सेवन. हर दिन सुबह एक गिलास गर्म पानी के साथ लहसुन की कुछ कलियां खाने से ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है.
4. इम्यूनिटी-
इम्यूनिटी को मजबूत बनाने के लिए आप कच्ची लहसुन का सेवन कर सकते हैं. मजबूत इम्यूनिटी शरीर को कई तरह के संक्रमण से बचाने में मदद कर सकती है.
5. मोटापे के लिए-
वजन को घटाने में कच्ची लहसुन को काफी अच्छा माना जाता है. रोज सुबह कच्ची लहसुन की 2 कलियां खाने से वजन को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है.
आस्था /शौर्यपथ / सबके घर में पूजा रूम तो होता ही है और हाल ही में दिवाली छठ जैसे बड़े त्यौहार आ रहे हैं, यानी पूरा महीना त्योहारों से भरा है. इस बीच सभी भगवानों की विधिवत रूप से पूजा अर्चना की जाएगी. ऐसे में पूजा रूम को न्यू लुक देना तो बनता है. यहां आप ऐसे कुछ आसान तरीकों के बारे में जानेंगे जिससे आप बिना किसी खर्च के अपने पूजा रूम को बिल्कुल नया और सुंदर बना सकते हैं. इसमें चाहें तो मंदिर को अलग पेंट कर सकते हैं या फिर उसे सजाने के तरीके को बदल सकते हैं.
इन चीजों से सजाएं पूजा रूम |
लाइट्स लगाना है जरूरी
दिए और लाइट्स की मदद से आप अपने पूजा रूम को नया लुक दे सकते हैं. आप पैटर्न के हिसाब से दिए को सजा सकते हैं. इससे पूजा रूम बेहद खूबसूरत नजर आएगा. छोटी बड़ी सभी तरह के लाइट्स लगाएं इससे इससे मंदिर के साथ-साथ पूरे घर का माहौल अच्छा रहेगा.
वॉलपेपर्स बढ़ाएंगे शान
अक्सर देखने को मिलता है कि हम भगवान को तो अच्छे से सजा तो लेते हैं लेकिन पीछे के दीवार के बारे में भूल जाते हैं. अगर आप पूरी तरह से अपने मंदिर को न्यू लुक देना चाहते हैं तो बाजार से वॉलपेपर्स खरीदें और सभी खाली जगह पर लगाएं. इससे मंदिर भरा हुआ लगेगा.
कलरफुल लकड़ियों का करें इस्तेमाल
कम खर्च में मंदिर सजाने का सबसे आसान तरीका है कलरफुल लकड़ियों का इस्तेमाल करना. आप मंदिर के बैकग्राउंड को उन कलरफुल लकड़ियों से सजा सकते हैं जो मंदिर से मैच करें. ये कलरफुल लकड़ियां आपके पूजा रूम को एक यूनिक लुक देंगी जिससे आपका मंदिर बिल्कुल है हटकर और शानदार लगेगा.
शौर्यपथ / सपनों का जीवन से गहरा संबंध होता है. खास समय में आने वाले सपने अपना अलग अर्थ रखते हैं. नवरात्रि के समय सपने में कुछ खास चीजों का दिखना बहुत शुभ होता है. खासकर माता रानी से जुड़ी चीजों का दिखाई पड़ना किस्मत बदलने के संकेत होते हैं. आइए जानते हैं नवरात्रि में सपने में खास चीजों के दिखने का क्या मतलब होता है.
मातारानी का दिखना
नवरात्रि के समय अगर आपके सपने में स्वयं मां दर्शन दें तो समझ लीजिए माता रानी आपको आशीर्वाद दे रही हैं. आपके उपर अब हमेशा दुर्गा मां की कृपा बनी रहेगी. यह काफी शुभ संकेत वाला सपन है.
शेर पर माता रानी
अगर आपको सपने में माता रानी शेर की सवारी करते दिखती हैं तो यह आपके जीवन में आने वाले अच्छे समय का संकेत है. इस सपने का आना बताता है कि आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव आने वाला है.
फल
नवरात्रि के दौरान अगर सपने में फल नजर आना आपके और आपके परिवार में खुशहाली आने का संकेत है. यह जीवन में मिलने वाले सफलताओं की ओर भी इशारा करता है.
सुहाग चिन्ह
नवरात्रि के समय सुहाग चिन्ह जैसे चूड़ी, बिंदी, सिंदूर या लाल चुनरी का दिखना बहुत शुभ होता है. यह वैवाहिक जीवन में खुशियां आने और मतभेद दूर होने का संकेत होता है. यह बताता है कि आने वाले समय में आपका वैवाहिक जीवन बहुत सुखमय होने वाला है.
हाथी
मां दुर्गा की पूजा अर्चना के विशेष पर्व नवरात्रि में सपने में हाथी का दिखना या माता को हाथी पर सवार देखना बहुत शुभ होता है. यह आपको अपने जीवन में मिलने वाली किसी बड़ी उपलब्धि का संकेत होता है.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ / जब सेहत के लिए सबसे अच्छे फलों की बात होती है तो अमरूद का जिक्र जरूर आता है. अमरूद उन फलों की गिनती में भी शामिल है जिनके पत्ते भी सेहत के लिए बेहद अच्छे साबित होते हैं. अमरूद के पत्तों के सेवन से शरीर को फाइबर, विटामिन सी और कई एंटी-ऑक्सीडेंट्स मिलते हैं. इन पत्तों का असर वजन कम करने से लेकर कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों को दूर करने में भी दिखता है. यहां जानिए अमरूद के पत्तों का कैसे सेवन किया जा सकता है और ये सेहत के लिए किन-किन तरीकों से फायदेमंद साबित होते हैं.
सेहत पर अमरूद के पत्तों के फायदे |
कॉलेस्ट्रोल होता है कम
रोजाना सुबह खाली पेट अमरूद के पत्ते चबाने पर कॉलेस्ट्रोल कम होने में मदद मिल सकती है. ये पत्ते शरीर से गंदे कॉलेस्ट्रोल को बाहर निकाल देते हैं. इन पत्तों का नियमित सेवन किया जाए तो गंदा कॉलेस्ट्रोल कम होने में असर दिखने लगता है.
डायबिटीज में फायदेमंद
डायबिटीज के मरीज को अपने खानपान का खास ध्यान देने की जरूर होती है. इस बात का खास ख्याल रखा जाता है कि कुछ खाने-पीने से ब्लड शुगर जरूरत से ज्यादा घट या बढ़ ना जाए. ऐसे में अमरूद के पत्ते काम आते हैं. इन पत्तों की चाय बनाकर पी जा सकती है. कुछ अमरूद के पत्ते पानी में डालकर उबाल लें. बस तैयार है आपकी अमरूद के पत्तों की चाय. इससे ब्लड शुगर लेवल्स रेग्यूलेट होते हैं.
घटने लगता है वजन
वजन घटाने में भी अमरूद के पत्ते अपना असर दिखाते हैं. इन पत्तों को खाने पर या फिर इनका पानी बनाकर पीने पर फैट बर्न होने लगता है. अमरूद के पत्तों का पानी शरीर से टॉक्सिंस निकालता है. इससे वजन भी कम होता है और शरीर फिट भी नजर आता है.
सर्दी-जुकाम में असरदार
अमरूद के पत्ते सर्दी-जुकाम में असरदार होते हैं. इन पत्तों में पाए जाने वाले विटामिन सी और आयरन का मौसमी फ्लू और इंफेक्शंस को दूर करने में अच्छा असर नजर आता है. आप काढ़ा बनाने में इन पत्तों का इस्तेमाल कर सकते हैं या फिर इन पत्तों के पानी को काढ़े की तरह पी सकते हैं.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /आमतौर पर पेट से जुड़ी कई दिक्कतें हैं जो परेशान करती ही रहती हैं और इन्हीं में से एक है कब्ज. खानपान में फाइबर और तरल पदार्थों की कमी होने पर कब्ज की दिक्कत हो जाती है. कब्ज होने पर मलत्याग करने में दिक्कत होती है और पेट सही तरह से साफ नहीं हो पाता है. लेकिन, कब्ज से राहत पाने के लिए आप पपीते का सेवन कर सकते हैं. पपीता विटामिन ए, बी, सी के साथ ही कैल्शियम, फाइबर, मैग्नीशियम और पौटेशियम का भी अच्छा स्त्रोत है. इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट्स भी पाए जाते हैं. ऐसे में कब्ज से राहत पाने के लिए पपीते का सेवन किया जा सकता है. जानिए पपीते को कब्ज में कैसे खाएं और इसके अलावा कौनसे फल कब्ज से छुटकारा दिला सकते हैं.
कब्ज से राहत दिलाने वाले फल |
पपीता
कब्ज से परेशान हैं तो रोजाना सुबह खाली पेट पपीता खा सकते हैं. इससे शरीर को फाइबर की भरपूर मात्रा मिलती है जो मलत्याग में मदद करती है. इसके अलावा, पपीता खाने पर अपच और एसिडिटी जैसी पेट की दिक्कतें भी दूर हो जाती हैं.
नाशपाती
अगर कब्ज से छुटकारा पाना चाहते हैं तो आप नाशपाती का सेवन भी कर सकते हैं. यह फाइबर से भरपूर है और इसीलिए कब्ज पर रामबाण साबित होने वाला फल भी है. इससे मल का भार बढ़ता है और मल बिना ज्यादा जद्दोजहद के बाहर निकल आता है. रोजाना नाशपाती का सेवन किया जाए तो पेट साफ होने में दिक्कत नहीं आती है.
सेब
फाइबर से भरपूर सेब भी कब्ज में खाए जाने के लिए अच्छे हैं. सेब अच्छे गट बैक्टीरिया को भी बढ़ाता है. इसके अलावा, इससे मलत्याग आसान बनता है. सेब को सादा भी खाया जा सकता है और इसे ओट्स, सलाद या फिर स्मूदी बनाकर भी पी सकते हैं.
आलूबुखारा
आलूबुखारा में भरपूर फाइबर होता है और इसे खाने पर पेट पर लैक्सेटिव इफेक्ट पड़ता है जिससे मलत्याग आसान बनता है. आलूबुखारा को इस चलते कब्ज दूर करने के लिए खाया जा सकता है. आलूबुखारा से ब्लोटिंग और गैस से भी राहत मिलती है.
शौर्यपथ / कहते हैं कि आप खुद से किस तरह से बात करते हैं यह बहुत मायने रखता है. कोई और आपके आत्मविश्वास को घटाने या बढ़ाने का काम करे उससे पहले आप खुद अपने आत्मविश्वास को निर्धारित करते हैं. ऐसी बहुत सी आदतें हैं या कहें बुरी आदतें हैं जिनसे व्यक्ति खुद को ही अंडरकोन्फिडेंट बनाता रहता है. ये आदतें खुद से बात करने से जुड़ी हो सकती हैं, किसी और को अपना परिचय देने से जुड़ी हो सकती हैं या फिर किसी स्थिति में खुद को कैसे तैयार किया जाता है उसपर भी निर्भर करती हैं. यहां जानिए इन्हीं आदतों के बारे में जिनसे आप जाने-अनजाने अपना आत्मविश्वास कम करते चले जाते हैं.
आपको अंडरकोन्फिडेंट बनानी वाली आदतें |
हमेशा खुद की निंदा करना
बहुत से लोगों की यह आदत होती है कि वे अपनी ही निंदा करने लगते हैं. उनसे कोई कुछ कहे ना कहे लेकिन उन्हें लगता है कि वे हर काम के लिए बुरे हैं या सही चॉइस नहीं है. इससे आपका आत्मविश्वास बढ़ने के बजाय कम होता चला जाता है.
अपनी नकारात्मकता पर ध्यानकेंद्रित करना
कई स्थितियों में व्यक्ति अपनी खूबियों पर ध्यान देने के बजाय सिर्फ अपनी नकारात्मक बातों पर ध्यानकेंद्रित करने लगता है. वह क्या कर सकता है इससे ज्यादा उसकी चिंता रहती है कि वह क्या नहीं कर सकता. उसमें क्या अच्छाई है इससे ज्यादा व्यक्ति को फिक्र सताती है कि अपनी बुराइयों का वह क्या करे. कई बार हमें अपनी सकारात्मकता पर गौर करना चाहिए और नकारात्मकता को खुदपर हावी नहीं होने देना चाहिए.
अपना ही मजाक बनाना
बहुत से लोगों की आदत होती है कि वे किसी और के कुछ कहने से पहले अपना ही मजाक उड़ाने लगते हैं. मजाक उड़ाने की यह आदत लो सेल्फ एस्टीम की तरफ इशारा करती है. यह आदत आत्मविश्वास कम करने वाली होती है.
तारीफ स्वीकार ना करना
आपको कोई यह कहे कि आप सुंदर लग रहे हैं तो आपको थैंक्यू बोलकर तारीफ स्वीकार करनी चाहिए बजाय यह कहने के कि 'नहीं तुम झूट कह रहे हो' या फिर 'नहीं मैं कहां खूबसूरत हूं'. अपने ही आप ना सिर्फ आप अपने आत्मविश्वास को कम करते हैं बल्कि दूसरे व्यक्ति को भी आपकी तारीफ करके आपके आत्मविश्वास को बढ़ाने का मौका नहीं देते. इससे आप खुद को अंडरकोंफिडेंस के गड्ढे में धंसाते जाते हैं.
हर मुश्किल से पहले ही हार मान लेना
कई बार हमें अपने आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए अपनी मुश्किलों से पार पाने की जरूरत होती है. हार के डर से, जीत का सपना ना देखना गलत है. आपको कोशिश तो करनी ही चाहिए. जिंदगी में जैसे-जैसे आप चुनौतियों को पार करते जाते हैं वैसे-वैसे आपका आत्मविश्वास बढ़ता जाता है. इसके उलट जब आप चुनौतियों से भागते हैं तो आपकी यही आदत आपको अंडरकोन्फिडेंट बनाती जाती है.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ / पीरियड्स के दौरान आइसक्रीम, पास्ता, पिज्जा या चॉकलेट जैसी हमारी पसंदीदा चीजों की अचानक इच्छा होना आम बात है. महिलाओं को ऐसी हर चीज की तलाश रहती हैं जो पीरियड्स क्रैम्प्स से राहत दे सके. असुविधा और बेचैनी पैदा करने वाले क्रैम्प्स हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकते हैं. ज्यादातर महिलाएं पेन किलर्स और हॉट बोतल का सहारा लेती हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि कैमोमाइल टी जैसे हर्बल उपचार मसल्स को आराम देने वाले गुणों के लिए जाने जाते हैं. ये मसल्स को प्रभावी ढंग से शांत कर सकते हैं और दर्द को कम कर सकते हैं. कैमोमाइल टी में एंटीस्पास्मोडिक गुण होते हैं जो पीरियड्स क्रैम्प्स को प्रभावी ढंग से कम कर सकते हैं. ये एक प्राकृतिक उपचार, कैमोमाइल टी अपने सूजनरोधी, मांसपेशियों को आराम देने वाली, दर्द निवारक और तनाव कम करने वाले गुणों के साथ, पीरियड्स में वेल्यूएबल ऑप्शन है.
पीरियड्स के दर्द और क्रैम्प्स के लिए कैमोमाइल टी |
1. मसल्स और दर्द से राहत देने वाले गुण
मसल्स क्रैम्प्स से आराम देने वाले गुणों वाली कैमोमाइल टी क्रैम्प्स को कम करने में मदद करती है. एक नेचुरल एनाल्जेसिक, कैमोमाइल टी क्रैम्प्स से जुड़े दर्द से कोमल और प्राकृतिक राहत देने में अद्भुत काम करती है. क्रैम्प्स और दर्द को प्राकृतिक रूप से शांत करने के लिए कैमोमाइल चाय का सेवन करना आइडियल है.
2. एंटी इंफ्लेमेटरी गुण
पीरियड्स की असुविधा पहले से ही अप्रिय है होती है और सूजन तो इसे और भी बदतर बना देती है. यहां कैमोमाइल टी सूजन से प्रभावी ढंग से लड़ती है. गर्भाशय की मांसपेशियों में सूजन को कम करके, क्रैम्प्स से राहत दिला सकती है.
पीरियड्स की असुविधा पहले से ही अप्रिय है होती है और सूजन तो इसे और भी बदतर बना देती है. यहां कैमोमाइल टी सूजन से प्रभावी ढंग से लड़ती है. गर्भाशय की मांसपेशियों में सूजन को कम करके, क्रैम्प्स से राहत दिला सकती है.
3. तनाव और चिंता को कम करती है
तनाव और चिंता पीरियड्स क्रैम्प्स के दुश्मन हैं, क्योंकि वे इसे खराब कर सकते हैं और मांसपेशियों में दर्द और तनाव पैदा कर सकते हैं. अपनी आरामदेह और स्ट्रेस फ्री क्षमताओं के लिए जानी जाने वाली कैमोमाइल टी में ऐसे यौगिक होते हैं जो ब्रेन में रिसेप्टर्स को बांधते हैं.
टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ / जब एक महिला मेनोपॉज की उम्र के करीब होती है, तो वह कई बदलावों से गुजरती है जो उसके शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर प्रभाव डालते हैं. जबकि मेनोपॉज की औसत उम्र 45-55 के बीच होती है. बहुत सी महिलाएं खराब लाइफस्टाइल और डाइट संबंधी आदतों के कारण जल्दी मेनोपॉज का अनुभव करती हैं. वजन बढ़ना, हॉट फ्लैशेस और इर्रेगुलर पीरियड्स मेनोपॉज के शुरुआती लक्षण हैं. ऐसे कई अन्य लक्षण हैं जिन्हें महिलाएं अक्सर नजरअंदाज कर देती हैं जो प्रीमेनोपॉज का संकेत हो सकते हैं.
मेनोपॉज के शुरुआती लक्षण
1. ड्राई वेजाइना
अगर वेजाइना ड्राई है तो यह मेनोपॉज का संकेत हो सकता है. मेनोपॉज तब आता है जब शरीर में एस्ट्रोजन या महिला हार्मोन का लेवल कम हो जाता है. इससे स्किन में खुजली होती है और सूजन होने की संभावना बढ़ जाती है. इससे यूरिनरी इन्फेक्शन का खतरा भी बढ़ जाता है.
2. पेशाब का बढ़ना
एस्ट्रोजेन की कमी यूरीनरी ब्लैडर के कार्यों में बाधा पैदा कर सकती है, जहां आपको अचानक पेशाब करने की इच्छा महसूस हो सकती है लेकिन आप पेशाब नहीं कर पाएंगे. इसके अलावा यूरीनरी ब्लैडर पर भार बढ़ने से यूटीआई और अन्य गंभीर समस्याएं भी हो सकती हैं. कैफीन, एसिडिक फूड, खट्टी चीजें और शराब जैसे ट्रिगर्स से सावधान रहें.
3. कोमल ब्रेस्ट
स्तन कोमलता पीरियड्स का एक सामान्य संकेत है लेकिन ये मेनोपॉज का चेतावनी संकेत भी हो सकता है, जिन महिलाओं को 40 की उम्र में निपल्स में दर्द और कोमल स्तनों का अनुभव होता है, वे प्रीमेनोपॉज स्टेज में हो सकती हैं. अगर आपके स्तनों में असहनीय दर्द हो तो डॉक्टर को दिखाने की सलाह दी जाती है.
4. नींद की समस्या
हार्मोनल बदलाव आपके स्लीप पैटर्न को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं. जो महिलाएं मेनोपॉज के करीब हैं, उन्हें अनिद्रा और नींद में खलल का अनुभव होने की ज्यादा संभावना है. हालांकि ये हाई स्ट्रेस लेवल के कारण भी हो सकता है.
5. चक्कर आना
ये मेनोपॉज के प्राइमरी और सूक्ष्म लक्षणों में से एक है जिसे अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है. हार्मोन्स में उतार-चढ़ाव से ब्लड शुगर स्थिरता में बाधा आती है जिसके कारण आपको चक्कर आने का अनुभव हो सकता है.
6. मिजाज
मूड स्विंग पीएमएस का एक प्रमुख संकेत है लेकिन प्रीमेनोपॉजल महिलाएं इसका बहुत अनुभव करती हैं और अक्सर इसे नजरअंदाज कर देती हैं. इससे उनके भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य पर असर पड़ता है जो उनके व्यक्तिगत और व्यावसायिक संबंधों को और प्रभावित करता है.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / नवरात्रि का नौ दिवसीय शुभ त्योहार बस कुछ ही दिनो में शुरू होने वाला है. देश भर में भक्त इस त्योहार की तैयारियों में डूबे हुए हैं. शारदीय नवरात्रि आमतौर पर हिंदू कैलेंडर महीने के आश्विन माह के शुक्ल पक्ष को मनाई जाती है, जो सितंबर या अक्टूबर के ग्रेगोरियन महीने में आती है. इस साल, शारदीय नवरात्रि पितृ पक्ष के बाद 15 अक्टूबर को शुरू होगी और 24 अक्टूबर को महानवमी के उत्सव के साथ समाप्त होगी. इन दिनो में मां देवी दुर्गा के नौ अलग-अलग अवतारों की पूजा करने से लेकर नौ दिन के व्रत रखने तक, भक्त देवी का आशीर्वाद पाने के लिए कई अनुष्ठान करते हैं. व्रत रखते समय, भक्तों को अपने द्वारा खाए जाने वाले खाद्य पदार्थों का खास ख्याल रखना पड़ता है. क्योंकि इन नौ दिनों में कई नियम होते हैं जिनका पालन करना चाहिए. खासतौर से खाने-पीने पर. कई ऐसे फूड आइटम्स हैं जिनका सेवन नवरात्रि के दौरान नहीं करना चाहिए. तो आइए जानते हैं वो फूड आइटम्स जिनका सेवन नवरात्रि के दौरान करना चाहिए और किन फूड आइटम्स का सेवन नहीं करना चाहिए.
नवरात्रि के व्रत में क्या नहीं खाना चाहिए
नवरात्रि के नौ शुभ दिनों के दौरान गेहूं और चावल जैसे नियमित अनाज से परहेज करना चाहिए.
प्याज और लहसुन जैसे तामसिक खाने से परहेज करना चाहिए. ये शरीर और दिमाग के लिए हानिकारक माने जाते हैं. इन नौ दिनों के दौरान सात्विक आहार का ही सेवन करना चाहिए.
नवरात्रि के दौरान मांस, मछली, चिकन, अंडे जैसे मांसाहारी खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए.
नवरात्रि के दिनों के शराब का सेवन करने से भी बचना चाहिए.
जो लोग व्रत नहीं रखते हैं उनको भी तामसिक भोजन, शराब, मांस आदि चीजों से दूर रहना चाहिए और उनका सेवन नहीं करना चाहिए.
व्रत रखने वाले भक्तों को फलियां, दाल, चावल, आटा, मक्के का आटा, साबुत गेहूं और सूजी (रवा) का सेवन भी नहीं करना चाहिए.
नवरात्रि व्रत में क्या खाएं
नवरात्रि व्रत में श्रद्धालु फलों का सेवन कर सकते हैं.
इस व्रत में आपको सफेद नमक खाने से बचना चाहिए और सेंधा नमक का इस्तेमाल करना चाहिए.
मसालों में आप जीरा, जीरा पाउडर, हरी इलायची, काली मिर्च पाउडर, दालचीनी, अजवाइन, लौंग और काली मिर्च का इस्तेमाल कर सकते हैं.
सब्जियों की बात करें तो व्रत में आप आलू, टमाटर, शकरकंद, अरबी, लौकी, खीरा, कद्दू और पालक जैसी सब्जियों का सेवन कर सकते हैं.
शारदीय नवरात्रि के दौरान दूध और डेयरी उत्पाद जैसे दूध, घी, दही, पनीर, पनीर और खोया भी खाया जा सकता है.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /सौंफ एक ऐसा मसाला है जिसका इस्तेमाल कई डिशेज में किया जाता है. सौंफ को अचार बनाने में सबसे ज्यादा उपयोग किया जाता है. इतना ही नहीं इसे माउथ फ्रेशनर के रूप में भी इस्तेमाल करते हैं. असल में सौंफ को सेहत से भरपूर माना जाता है. क्योंकि इसमें कई औषधीय गुण पाए जाते हैं, जो शरीर को कई लाभ पहुंचाने में मदद कर सकते हैं. सौंफ में भरपूर मात्रा में फाइबर, मैग्नीशियम, पोटैशियम और कैल्शियम पाया जाता है. सौंफ के पानी का सुबह खाली पेट सेवन करने से वजन को कम करने और पाचन को बेहतर रखने में मदद मिल सकती है. तो चलिए बिना देर किए जानते हैं सौंफ से मिलने वाले फायदे.
सौंफ खाने के फायदे-
1. ब्लड प्रेशर-
माना जाता है कि सौंफ के दाने चबाने से सलाइवा में पाचक एंजाइम की मात्रा बढ़ती है, जो ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखने में मदद कर सकती है. ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए सौंफ का सेवन फायदेमंद हो सकता है.
2. मोटापा-
सौंफ का सेवन करने से जल्दी भूख नहीं लगती है, जिससे अधिक खाने से बचे रहते हैं और वजन को कम कर सकते हैं. मोटापा कम करने के लिए आप सुबह खाली पेट सौंफ के पानी का सेवन भी कर सकते हैं.
3. पाचन-
पाचन की समस्या से परेशान रहते हैं, तो आप सौंफ का सेवन कर सकते हैं. पाचन के लिए आप खाना खाने के बाद सौंफ को चबाचबा कर खाएं इससे खाना आसानी से पचने में मदद मिल सकती है.
4. मुंह की बदबू-
कई लोगों में मुंह से बदबू आने की शिकायत रहती है. अगर आप भी ऐसी समस्या से परेशान हैं, तो आप सौंफ का दिन में 3-4 बार सेवन करें. इससे मुंह की बदबू से छुटकारा मिल सकता है.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / हिन्दू धर्म में मासिक शिवरात्रि का विशेष धार्मिक महत्व है. यह व्रत हर महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को रखा जाता है. ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने वाले की सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में आने वाली सारी बाधाओं को भोलेनाथ दूर कर देते हैं. इस व्रत को करने वालों पर सदैव भगवान शिव का हाथ होता है. ऐसे में इस बार अक्टूबर के महीने की शिवरात्रि कब है और व्रत विधि क्या है इस लेख में आपको बताने वाले हैं.
कब है अक्टूबर की मासिक शिवरात्रि
इस साल अक्टूबर की 12 तारीख को मासिक शिवरात्रि का उपवास रखा जाएगा. आपको बता दें कि हिन्दू पंचांग के अनुसार मासिक शिवरात्रि हर महीने कृष्ण पक्ष के 14वें दिन मनाई जाती है.
क्यों मनाते हैं मासिक शिवरात्रि
यह व्रत ना केवल इंद्रियों को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है, बल्कि क्रोध, इर्ष्या, अभिमान और लालच जैसी भावनाओं को रोकने में भी मदद करता है. मासिक शिवरात्रि हर महीने मनाई जाती है. शास्त्रों के अनुसार साप्ताहिक त्योहारों में सोमवार का दिन भगवान भोले नाथ को समर्पित है.
मासिक शिवरात्रि व्रत विधि
- मासिक शिवरात्रि वाले दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर लीजिए.
- अब आप घर पर या किसी शिव मंदिर में भगवान शिव और उनके परिवार की पूजा करिए.
- सबसे पहले आप शिवलिंग का रुद्राभिषेक जल, घी, दूध,चीनी, शहद, दही आदि से करें.
- अब आप शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा और श्रीफल चढ़ाएं.
- अब आप भगवान शिव की धूप, दीप, फल और फूल से पूजा करिए.
-शिव पुराण, शिव स्तुति, शिव अष्टक, शिव चालीसा और शिव श्लोक का पाठ करिए.
-शाम के समय आप फलहार कर सकते हैं.
-अगले दिन भगवान शिव की पूजा करें और दान आदि करने के बाद अपना उपवास खोलें.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / इस साल शारदीय नवरात्रि कब से है, किस दिन कौन से मां की पूजा होगी और अष्टमी कब है, इन सारे सवालों के जवाब आपको इस आर्टिकल में मिल जाएगा. आपको बता दें कि हर साल शारदीय नवरात्रि में पूरे नौ दिन तक सुबह शाम देवी मंदिरों में आरती, पूजा और मां का सिंगार किया जाता है. इस दौरान कुछ पूरे 9 दिन तो कुछ लोग पहला और आखिरी नवरात्र का व्रत करते हैं.
15 अक्टूबर 2023, दिन रविवार से शुरू हो रही है. जिसमें घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 11.44 मिनट से दोपहर 12.30 तक है.
किस दिन किस देवी की होगी पूजा
शैलपुत्री पूजा- 15 अक्टूबर 2023 रविवार
ब्रह्मचारिणी पूजा -16 अक्टूबर 2023 सोमवार
चन्द्रघण्टा 17 अक्टूबर 2023 मंगलवार
कूष्माण्डा पूजा 18 अक्टूबर 2023 बुधवार
स्कन्दमाता - 19 अक्टूबर 2023 गुरुवार
कात्यायनी माता - 20 अक्टूबर 2023 शुक्रवार
कालरात्रि पूजा - 21 अक्टूबर 2023 शनिवार
दुर्गा अष्टमी, महागौरी पूजा- 22 अक्टूबर 2023 रविवार
महानवमी, हवन - 23 अक्टूबर 2023 सोमवार
विजयादशमी, दशहरा, नवरात्रि पारण, दुर्गा विसर्जन - 24 अक्टूबर 2023 मंगलवार
शारदीय नवरात्रि कन्या पूजन तारीख
इस साल शारदीय नवरात्रि की दुर्गा अष्टमी 22 अक्टूबर 2023 को है. इस दिन कन्या पूजन और मां महागौरी की उपासना होती है.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / इस साल पितृ पक्ष तिथि 29 सितंबर से शुरू हो गई है, जो 14 अक्टूबर दिन शनिवार को समाप्त होगी. पितृ पक्ष का हिन्दू धर्म में विशेष मान्यता है. इस दौरान कोई नया औऱ शुभ काम नहीं किया जाता है. पूरे 15 दिन पूर्वजों का तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान किया जाता है. वहीं, जिन लोगों की कुंडली में पितृदोष होता है वो कई तरह के उपाय भी करते हैं जिसमें से कुछ हम भी आपको बताने वाले हैं. जिसको अपनाकर आप भी पितृ दोष को दूर कर सकते हैं. पितृदोष कैसे करें दूर
- इस दौरान आप पितृ दोष दूर करने के लिए उनको अर्पित किए जाने वाले भोजन में गंगाजल डालें. इससे पितर खुश होते हैं. वहीं, आप पितृपक्ष के दौरान घर में गंगाजल का छिड़काव करें.
- आपको बता दें पितृ पक्ष के दौरान पूर्वज घर के किसी भी स्थान पर हो सकते हैं. ऐसे में गंगाजल का छिड़काव करके आप उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं.
- आप श्राद्ध करते समय काले तिल में गंगाजल की कुछ बूंदें मिलाकर पितरों को अर्पित करें. इससे आपके पितर प्रसन्न होते हैं. वहीं, घर की दक्षिण दिशा पूर्वजों की मानी जाती है, ऐसे में आप गंगाजल का छिड़काव इस दिशा में जरूर करें.
- आप लोग इन उपायों को अपनाकर पितरों को प्रसन्न कर सकते हैं. मान्यता है कि ऐसा करने से पितृ दोष दूर होता है. आपको बता दें कि हिन्दू धर्म में गंगा नदी बहुत पवित्र मानी जाती है.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / हिंदू धर्म में पितरों को सम्मान और विशेष स्थान दिया गया है. मान्यता है कि वे किसी न किसी रूप में मौजूद रहते हैं. जो बुजुर्ग अब नहीं रहे और जिनकी वजह से वंश आगे बढ़ा है उन्हें पितर के रूप में पूजा जाता है. कभी-कभी किसी कारण से पितर नाराज होते हैं तो इसे पितृ दोष कहते हैं. पितृ दोष होने पर घर में कुछ संकेत नजर आने लगते हैं जिससे पता चलता है कि पितृ दोष लग गया है. पितृ दोष लगने पर घर की सुख-समृद्धि और खुशहाली पर प्रभाव पड़ता है. जानिए क्या-क्या हो सकते हैं पितृ दोष के संकेत.
घर में पितृ दोष के संकेत |
तुलसी का अचानक सूखना
घर में लगे तुलसी के पौधे का अचानक सूख जाना पितृ दोष का संकेत है. तुलसी का पौधा घर की सुख समृद्धि का प्रतीक माना जाता है और इसका सूख जाना अशुभ होता है. तुलसी के पौधे के अचानक सूखने पर पितृ दोष से मुक्ति के उपाय आजमाने चाहिए.
अचानक पीपल उग आना
पीपल के पेड़ का शुभ माना जाता है लेकिन इसे घर में नहीं लगाने की सलाह भी दी जाती है. घर के आसपास पीपल के पौधे का उग आना पितरों की नाराजगी का संकेत होता है. ये संकेत मिलने पर पितरों की शांति के लिए उपाय करने की जरूरत होती है.
किसी का बार-बार बीमार पड़ना
घर के किसी सदस्य का बार-बार बीमार पड़ना और सेहत में सुधार नहीं आने का कारण पितरों का नाराज होना हो सकता है. ऐसे में किसी ज्योतिष से सलाह लेकर उचित उपाय करने चाहिए.
प्रयासों के बावजूद सफलता नहीं मिलना
बहुत प्रयास के बावूद सफलता नहीं मिलना, बनते काम का बार-बार बिगड़ जाना और घर में बरकत नहीं होना भी पितृ दोष की ओर संकेत करता है.
घर में कलेश
घर के सदस्यों में बिना किसी कारण के विवाद और लड़ाई-झगड़े होना. रिश्तेदारों से कलेश भी पितरों की नाराजगी का फल हो सकता है.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
