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ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ /ज्यादातर लोग अपने बालों को साफ और चमकदार बनाए रखने के लिए बाजार में मिलने वाले महंगे शैंपू का इस्तेमाल करते हैं. हालांकि, इन केमिकल वाले शैंपू के इस्तेमाल से बालों की जड़ें कमजोर हो सकती हैं और बालों का झड़ना और रूसी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. इससे कई लोगों के मन में सवाल उठता है कि क्या केमिकल प्रोडक्ट्स का सहारा लिए बिना साफ, सुंदर और मुलायम बाल बनाए रखने के प्राकृतिक तरीके हैं. हम कुछ हर्बल तरीकों के बारे में बता रहे हैं कि कैसे शैंपू के उपयोग के बिना साफ, चमकदार और हेल्दी बाल पा सकते हैं.
बालों को धोने के लिए इन चीजों का इस्तेमाल करें |
1. नींबू
नींबू के रस में लो पीएच लेवल होता है, जो स्कैल्प को बढ़ावा देने के साथ-साथ बालों के नेचुरल बैलेंस को बनाए रखने में मदद करता है. ये रूसी को खत्म करने और आपके बालों को घना और चमकदार बनाने के लिए जाना जाता है. नींबू एक प्राकृतिक डीग्रीजर के रूप में काम करता है, जो आपके बालों से ऑयल और गंदगी को प्रभावी ढंग से हटाता है. अगर आपके बाल ऑयली हैं, तो आप एक कप गर्म पानी में एक नींबू का रस मिलाएं, इसे अपने स्कैल्प पर लगाएं, कुछ मिनट तक मालिश करें और फिर अच्छी तरह से धो लें.
2. आंवला
ये बालों की ग्रोथ को बढ़ावा देने, बालों को मजबूत बनाने और प्राकृतिक चमक देने के लिए जाना जाता है. इनका उपयोग करने के लिए सबसे पहले एक सॉस पैन में 3-4 कप पानी उबालें. एक बार जब यह उबलने लगे तो उबलते पानी में आधा कप सूखा रीठा, आधा कप आंवला पाउडर, आधा कप शिकाकाई पाउडर और आधा कप अलसी के बीज डालें. इस मिश्रण को गाढ़ा होने तक लगभग 20 मिनट तक उबलने दें. 15 मिनिट बाद मिश्रण पर्याप्त गाढ़ा हो जायेगा. इसे कुछ देर ठंडा होने दें, फिर मिश्रण को बारीक छलनी से छान लें.
3. सरसों के बीज का आटा
सरसों के बीज का आटा सभी प्रकार के बालों के लिए सूटेबल है. यह खुजली, ड्राईनेस, डैंड्रफ और ऑयली बालों की समस्याओं को कम करने में मदद कर सकता है. सरसों के बीज का आटा मिनरल और विटामिन बी5 से भरपूर होता है. इसका उपयोग करने के लिए 2-3 बड़े चम्मच सरसों के आटे को पानी में मिलाकर पेस्ट बना लें. इस पेस्ट को अपने बालों पर लगाएं और पानी से धोने से पहले 20-30 मिनट के लिए छोड़ दें.
4. सेब का सिरका
ये रूसी जैसी समस्याओं से निपटने के साथ-साथ आपके सिर और बालों के पीएच बैलेंस को बनाए रखने में मदद कर सकता है. सेब साइडर सिरका का उपयोग करना सरल है. 2-3 बड़े चम्मच एप्पल साइडर विनेगर को पानी में मिलाएं और शैंपू करने के बाद इसे अपने बालों में लगाएं. इसे कुछ मिनट तक लगा रहने दें, फिर पानी से अच्छी तरह धो लें.
नींबू, आंवला, शिकाकाई, सरसों के बीज का आटा और एप्पल साइडर विनेगर जैसे नेचुरल कॉम्पोनेंट के उपयोग से बाल साफ, चमकदार और हेल्दी बनते हैं.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ / छोटे-छोटे मेथी के पीले दाने सेहत को एक नहीं बल्कि कई फायदे देते हैं. इन मेथी के दानों से सेहत को तो कई फायदे मिलते ही हैं, साथ ही ये दाने वजन घटाने में मददगार साबित होते हैं. मेथी के बीजों में फाइबर की अच्छी मात्रा होती है. वजन घटाने में फाइबर असरदार होता है, इससे पेट लंबे समय तक भरा हुआ रहता है और बार-बार भूख नहीं लगती जिससे एक्सेस फूड इंटेक कम होता है और वजन कम होने में मदद मिलती है. मेथी के दानों में पाचन को बेहतर करने वाले गुण भी होते हैं. इनसे मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है, कॉलेस्ट्रोल लेवल्स में कमी आती है और इंसुलिन रेसिस्टेंस कम होता है. यहां जानिए इन गुणकारी बीजों का सेवन वजन घटाने के लिए किस तरह किया जा सकता है.
वजन घटाने के लिए मेथी के दाने |
भीगे मेथी के दाने
इन दानों को यूं तो सब्जी या पकवानों में डालकर भी खाया जा सकता है लेकिन भीगे हुए मेथी के दाने सेहत के लिए अत्यधिक फायदेमंद होते हैं. भीगे दाने खाने पर पेट की चर्बी पर तेजी से असर दिखता है. आधा चम्मच मेथी के दानों को कटोरी में पानी डालकर भिगोकर रखें. अगली सुबह इन भीगे हुए दानों को चबाकर खा सकते हैं आप.
मेथी का पानी
वजन कम करने के लिए मेथी के पानी को बनाकर पी सकते हैं. इस पानी को तैयार करने के लिए आधा चम्मच मेथी के दानों को एक गिलास पानी में डालें और रातभर इस पानी को भिगोकर रखें. मेथी के पानी को आप हल्का गर्म करके सुबह खाली पेट पी सकते हैं.
मेथी की चाय
मेथी की चाय बनाना बेहद आसान है. इसके लिए एक चम्मच मेथी के दानों को एक कप पानी के साथ आंच पर चढ़ा दीजिए. इसमें अदरक का एक छोटा सा टुकड़ा भी डाल लें. जब यह पानी उबल जाए तो इसे कप में छानें और खाली पेट चुस्कियां लेते हुए पिएं.
अंकूरित मेथी
जिस तरह मूंग की दाल का अंकूरण करके उसे खाया जाता है बिल्कुल उसी तरह मेथी को भी अंकूरित कर सकते हैं. मेथी से स्प्राउट्स बनाने के लिए इसे भिगोएं और फिर गीले सूती के कपड़े में बांधकर रख दें. 2 से 3 दिन में ये बीज अच्छी तरह अंकूरित हो जाएंगे.
टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ / आजकल के बदलते ट्रेंड्स के बीच अक्सर कपड़े और उनका फैशन भी रातों-रात बदल जाता है. जो कपड़ा कल अच्छा लग रहा था वो आज आंखों को नहीं सुहाता. ऐसे में कई बार लोग किसी कपड़े को 4 से 5 बार पहनकर ही फेंकने के लिए निकालकर रख देते हैं. इसके अलावा, बहुत से लोग पुराने कपड़ों को कबाड़ी वगैरह को दे देते हैं. लेकिन, क्या आप जानते हैं पुराने कपड़ों को कई तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है. देखने वाले भी आपकी कलाकारी को देखकर हैरान रह जाएंगे और आपकी कलाकारी को देखकर वाहवाही जरूर करेंगे. जानिए पुराने कपड़ों को यूनिक तरह से कैसे करें इस्तेमाल.
पुराने कपड़ों को कैसे करें फिर से इस्तेमाल |
बनाएं फ्रेम
अगर आप अपने घर को सजाना चाहते हैं तो पुराने कपड़े आपके बड़ी काम की चीज हैं. अगर किसी कपड़े पर कुछ अच्छे कोट्स लिखे हैं या कोई डिजाइन है तो उसे फोटो फ्रेम के आकार का काटिए और उसे फ्रेम में लगाकर दीवार पर चिपका दीजिए. देखने में लगेगा किसी आर्ट गैलरी से खरीदा है फ्रेम.
पैचवर्क
आप पैचवर्क के लिए पुराने कपड़े इस्तेमाल कर सकते हैं. कपड़ों को काटकर उन्हें एकसाथ सिलकर बैग्स, जैकेट या चादर वगैरह बना सकते हैं.
बनाएं ड्रेसेस
आप पुराने कपड़ों को काटकर एक नए लुक में उन्हें ढाल सकते हैं. चाहे बड़ी टीशर्ट से बच्चों के कपड़े बनाने हों या फिर कोई ट्रेंडी ड्रेस. पुराने कपड़ों पर थोड़ी सी सिलाई कमाल दिखा देती है.
स्क्रंची बना सकते हैं
आजकल लड़कियों को बालों में रबड़ बैंड की जगह स्क्रंची लगाना पसंद है. इस स्क्रंची को कपड़े को काटकर 2 मिनट में बनाकर तैयार कर सकते हैं.
तकिये में भरें
तकिये का खोल लें और उसमें मोटी रूई भरने की जगह अपने पुराने कपड़े भरकर तकिया बना लें. तकिया ज्यादा फ्लफी बने इसके लिए कपड़ों को छोटा-छोटा काट सकते हैं.
बना सकते हैं गिफ्ट रैप
कई पुराने कपड़े देखने में बेहद सुंदर होते हैं बस दिक्कत यह होती है कि ये कपड़े आउट ऑफ ट्रेंड हो गए हैं या अब फिट नहीं आते. ऐसे में इन कपड़ों का इस्तेमाल गिफ्ट रैप की तरह किया जा सकता है.
करें धागे की तरह इस्तेमाल
पुराने कपड़ों को पतला-पतला धागे की तरह काट लें. लंबा-लंबा काटें और फिर गोला बनाकर रख लें. इन कपड़ों को आप बुनकर कुछ नया बना सकते हैं जैसे कार्पेट, फर्श का फूट मैट या कुछ और.
ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ / करी पत्ते एंटी-ऑक्सीडेंट्स और प्रोटीन के अच्छे स्त्रोत होते हैं. इन पत्तों के इस्तेमाल से स्कैल्प को नुकसान पहुंचाने वाले फ्री रेडिकल्स की छुट्टी हो जाती है. ना सिर्फ एक बल्कि करी पत्तों के इस्तेमाल से बालों को कई फायदे मिलते हैं. इन पत्तों में बी विटामिन्स भी होते हैं जो हेयर फॉलिक्लस को फायदा पहुंचाते हैं. इन पत्तों का सही तरह से इस्तेमाल किया जाए तो बालों के समय से पहले सफेद होने की दिक्कत से भी छुटकारा मिलता है और बालों का झड़ना पतले होना और डैंड्रफ से भी छुटकारा मिल जाता है. जानिए किन-किन तरीकों से बालों पर लगा सकते हैं करी पत्ते.
बालों के लिए करी पत्ते का इस्तेमाल |
झड़ते बालों के लिए
लगातार बाल झड़ने लगते हैं तो सिर पर बाल कम और चमकती हुई स्कैल्प ज्यादा नजर आने लगती है. ऐसे में बालों पर करी पत्ते का तेल बनाकर लगाया जा सकता है. इसके लिए मुट्ठीभर करी पत्ते लेकर पीस लें और पेस्ट बना लें. इस पेस्ट में थोड़ा गर्म नारियल का तेल मिलाएं जिससे यह पतला हो जाए. अब बालों पर इस तेल से मालिश करें और कम से कम एक घंटा लगाए रखने बाद सिर धो लें. बालों का झड़ना कम हो जाएगा.
करी पत्तों के साथ हेयर मास्क
एक कटोरी में दही और करी पत्तों के पेस्ट को एकसाथ मिला लें. बस तैयार है आपका करी पत्ते का हेयर मास्क. इस हेयर मास्क को स्कैल्प पर भी और बालों पर भी अच्छी तरह लगा लें. स्कैल्प पर जमे बिल्ड-अब और डैंड्रफ को हटाने में इस हेयर पैक का कमाल का असर दिखता है. इसके अलावा, बाल बढ़ाने और बालों को मुलायम बनाने के लिए भी यह हेयर मास्क फायदेमंद होता है. इसे सिर पर आधा घंटा लगाए रखने के बाद धोया जा सकता है.
आंवला के साथ करी पत्ते
करी पत्ते आंवला के साथ मिलाकर लगाने पर पतले बालों की दिक्कत दूर हो जाती है. छोटे टुकड़ों में आंवला को काटें और कुछ करी पत्तों के साथ ब्लेंडर में डालकर पीस लें. इस तैयार पेस्ट को बालों पर लगाएं और एक से डेढ़ घंटे लगाए रखने के बाद सिर धो लें. हफ्ते में एक बार इस तरह करी पत्ते को सिर पर लगाने से बालों को मोटे होने में मदद मिलती है.
करी पत्ते का पानी
फ्रिजी, उलझे या ड्राई बालों पर करी पत्ते का पानी बनाकर लगाया जा सकता है. इसके लिए एक कप पानी में मुट्टीभर करी पत्ते डालकर उबाल लें. इस पानी को ठंडा होने रखें और फिर छानकर स्प्रे बोतल में भर लें. करी पत्ते का यह पानी आप जब चाहे तब अपने फ्रिजी बालों पर स्प्रे करके देखें, फ्रिजीनेस कम होगी.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ / क्या आप ऐसे व्यक्ति हैं जो वजन कम करने के लिए हर कोशिश कर के परेशान हो गए हैं, लेकिन आपका वजन कम होने का नाम नहीं ले रहा है? आप भी इसी बात से परेशान हैं कि आखिर सारी मेहनत के बावजूद भी वजन कम क्यों नहीं हो रहा है तो आज हम आपको बतातें हैं उसकी वजह. सबसे पहले बात करते हैं वजन घटाने के लिए किए जाने वाले कामों की तो इसके लिए सबसे पहली चीज आती है हेल्दी खाना और एक्सरसाइज, लेकिन हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने के बाद भी कुछ लोगों के लिए वजन कम करना अभी भी एक सपना है. कोरियाई वजन घटाने की तकनीकें और आसान टिप्स वेट लॉस में काफी कारगर हो सकते हैं. यहां कुछ हेल्दी कोरियाई ड्रिंक्स की लिस्ट दी गई है, जिन्हें आप वेट लॉस के लिए पी सकते हैं.
वजन घटाने के लिए कोरियाई ड्रिंक
1. जौ की चाय
कोरिया में जौ की चाय या बोरिचा एक कैफीन-फ्री ड्रिंक है जिसको गर्म और ठंडे दोनों तरह से पिया जा सकता है. यह भुने हुए जौ के दानों से तैयार किया जाता है और इसके बेहतरीन हेल्थ बेनेफिट्स हैं. यह हल्का सा कड़वा होता है लेकिन वजन घटाने, थकान, सूजन और लूज मोशन के लिए भी उपयोगी माना जाता है.
2. ग्रीन टी
कोरिया में, भुने हुए ब्राउन राइस के साथ ग्रीन टी को मिलाकर बनाते हैं जिसे नोक्चा के नाम से जाना जाता है. यह हेल्दी और पौष्टिक तत्वों से भरी हुई ड्रिंक को हरी चाय की पत्तियों और ब्राउन राइस को एक साथ मिलाकर बनाया जाता है. यह ड्रिंक बेहद पौष्टिक है क्योंकि इसमें एंटीऑक्सिडेंट होते हैं जो बॉडी से टॉक्सिंस को बाहर निकालने में मदद करते हैं, जो वजन घटाने में भी लाभदायी होता है.
3. अदरक की चाय
ट्रेडिशनल कोरियाई अदरक चाय को सेंग गंगचा कहा जाता है जो अदरक, बेर और बादाम जैसे नट्स को मिलाकर बनाई जाती है. यह हेल्दी ड्रिंक सर्दी और फ्लू के लक्षणों से राहत दिलाने में मदद करता है और इसमें एंटीऑक्सिडेंट होते हैं जो शरीर को डिटॉक्सीफाई करने में मदद कर सकते हैं.
4. लोटस लीफ टी
लोटस लीफ एक जंगली हर्बल चाय है जो सफेद कमल के फूलों का उपयोग करके तैयार की जाती है. ट्रेडिशनल चीनी मेडिकल के अनुसार, इस चाय में विटामिन बी, कैल्शियम और पोटेशियम भी होता है. यह ब्लड को प्यूरीफाई करने और नींद को बढ़ाने में भी मदद कर सकता है. यह चाय विशेष रूप से विटामिन सी और फ्लेवोनोइड्स से भरपूर होता है.
5. रोस टी
गुलाब की चाय एक और हेल्दी और इफेक्टिव कोरियाई ड्रिंक है जो वजन घटाने में लाभदायी होती है और इसे आप अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं. यह प्रीमियम केसर और गुलाब की पंखुड़ियों से बनी एक शाही चाय है. यह कोरियाई ड्रिंक विटामिन सी और फ्लेवोनोइड से भरपूर है जो इम्यूनिटी को बढ़ाता है और शरीर को हेल्दी बनाने में मदद कर सकता है.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /वजन घटाने के लिए क्या कुछ नहीं करते हैं. कई लोग खाना छोड़ देते हैं, घंटो जिम में पसीना बहाते हैं. लेकिन कई बार इन सब चीजों के बावजूद भी वजन कम होने का नाम नहीं लेता है. क्या आप जानते हैं कि इसका कारण क्या है? वो है आपकी खाने-पीने से जुड़ी ऐसी गलतियां जिन पर आप ध्यान नहीं दे पाते हैं और नजर अंदाज कर देते हैं. जो आपके वजन को कम करने के बीच अड़चन बन जाता है.
अगर आप वजन कम करना चाहते हैं तो आपको अपनी डाइट का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है. खासतौर से मार्निंग रूटीन की. सुबह ऐसी चीजों का सेवन करना चाहिए जो आपके पेट को लंबे समय तक भरा रखने में मदद करें. इसके लिए आप अपनी डाइट में चिया सीड्स को शामिल कर सकते हैं. दरअसल, चिया सीड्स में पाया जाने वाला फाइबर आपके पेट को लंबे समय तक भरा रखने में मदद कर सकता है. इससे आपका वजन कम करने में मदद मिल सकती है. तो आइए जानते हैं कि वजन कम करने के लिए चिया सीड्स के फायदे.
चिया सीड्स का सेवन कैसे करें
चिया सीड्स में फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो आपके पाचन को धीमा कर देता है. जिससे बल्ड में ग्लूकोज देर से रिलीज होता है. साथ ही यह आपके मेटाबॉलिज्म को भी बेहतर बनाते हैं जो आपका वजन कम करने में मदद कर सकता है.
वजन कम करने के लिए आपको 1 गिलास पानी में 1 चम्मच चिया सीड्स मिलाकर रातभर के लिए भिगोकर रख दें. सुबह उठने पर खाली पेट इस पानी का सेवन करें. आपको कुछ ही दिनो में फर्क दिखने लगेगा. आप चाहें तो इसके साथ आप नींबू या फिर शहद को भी मिलाकर पी सकते हैं. यह ड्रिंक वजन कम करने के साथ आपके बैली फैट को कम करने में भी आपकी मदद कर सकता है.
खाना खजाना /शौर्यपथ /कचौरी, एक प्रिय पारंपरिक भारतीय खाना है, जिसे किसी परिचय की जरूरत नहीं है. चाहे सर्दी हो, गर्मी हो या बरसात का मौसम, आप कचौरी की एक प्लेट खाने से खुद को नहीं रोक सकते. सभी को पसंद आने वाला यह स्वादिष्ट नाश्ता आपकी सुबह की चाय, दोपहर के खाने या शाम के लिए बिल्कुल परफेक्ट स्नैक्स और काने के तौर पर खाया जा सकता है. बात करें राजस्थान से आने वाली कचौरी की तो उसमें प्याज की कचौरी, मटर की कचौरी और मसाला कचौरी हैं. इसकी लोकप्रियता भारतीय त्योहारों और शादियों तक फैली हुई है. लोग इसे अलग-अलग तरीकों और अपनी पसंद के हिसाब से खाना पसंद करते हैं. कुछ जगह इसे आलू की सब्जी और तली हुई मिर्च के साथ परोसा जाता है, जबकि कुछ जगह इसे चटनी या छोले की सब्जी के साथ परोसा जाता है, जिससे इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है. आज, हम आपके साथ एक ऐसी ही रेसिपी शेयर कर रहे हैं जिसे खाने के बाद आप अपनी उंगलियां चाटते रह जाएंगे. हम आपको आज बताने जा रहे हैं भरवां बेसन कचौरी की रेसिपी जो खाने में स्वादिष्ट और बनाने में बिल्कुल आसान है.
क्या बेसन गेहूं से ज्यादा हेल्दी है?
बेसन को अक्सर गेहूं से ज्यादा हेल्दी माना जाता है. यह चने से बनता है और इसे ग्लूटेन-फ्री माना जाता है. फाइबर, आयरन, मैग्नीशियम, जिंक और प्रोटीन जैसे आवश्यक खनिजों से भरपूर, बेसन उन लोगों के लिए एक बेहतर ऑप्शन है जो वजन कम करना चाहते हैं. सबसे अच्छी बात यह है कि इसे मीठा और नमकीन दोनो हीं तरीकों से खाया जा सकता है.
भरवां बेसन कचौरी कई फेस्टिवल और शुभ अवसरों पर भारतीय घरों में बनती है, और सबसे अच्छी बात है कि इसे बनाना बेहद आसान है. इसके लिए केवल बेसिक चीजों की जरूत होती है. बेसन भारतीय रसोई में इस्तेमाल किया जाता है, इसका इस्तेमाल बाइंडिंग, ग्रेवी को गाढ़ा करने, स्नैक्स बनाने और भी बहुत कुछ करने के लिए किया जाता है. इस कचौरी रेसिपी में बेसन को सुगंधित मसालों के साथ भूनकर एक मसालेदार स्टफिंग तैयार की जाती है. फिर स्टफिंग को आटे में भरकर कचौरी बनाई जाती है और सुनहरा होने तक डीप फ्राई किया जाता है.
कचौरी रेसिपी | भरवां बेसन कचौरी कैसे बनायें
कचौरी को बनाने के लिए सबसे पहले एक कटोरे में मैदा, नमक, कलौंजी और घी मिलाएं. सभी चीजों को मिलाकर नरम आटा गूंध लें और अलग रख दें. अब स्टफिंग के लिए एक पैन में तेल गर्म करें और उसमें हींग, जीरा और सौंफ डालें. थोड़ी देर मिलाएं, फिर कटा हुआ प्याज और हरी मिर्च डालें. कुछ सेकंड के लिए भूनें. अब इसमें बेसन डालें और 2 मिनट तक भूनते रहें. इसमें कटी हुई लाल मिर्च, धनिया पाउडर और अचार मसाला डालकर अच्छी तरह मिला लें. 2 मिनट पकने के बाद आंच बंद कर दें और ताजा हरा धनिया डालें. अब डीप फ्राई करने के लिए एक पैन में तेल गर्म करें. जब तक तेल गर्म हो जाए, आटे के कुछ हिस्से लें, उन्हें बॉल्स में रोल करें और उन्हें छोटी डिस्क में चपटा करें. हर रोल में बेसन की स्टफिंग को फिल कर के कचौरी का शेप दें. कचौरियों को गर्म तेल में मध्यम-धीमी आंच पर सुनहरा भूरा होने तक तलें. गरमा गरम कुरकुरी भरवां बेसन कचौरी को अपनी पसंदीदा चटनी के साथ या चाय के साथ नाश्ते के रूप में परोसें.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /खाना खाने के बाद डकार आना नॉर्मल है. डकार आने को बर्पिंग भी कहा जाता है. लेकिन कई बार खाना ज्यादा खाने के बाद खट्टी डकार आने लगती है. खट्टी डकार आने के कई कारण हो सकते हैं. जैसे, खराब खान-पान, ओवरइटिंग, पेट में इंफेक्शन, बदहजमी, समय पर ना खाना, सिगरेट या शराब का सेवन, टेंशन अधिक लेना और ज्यादा मसालेदार भोजन करना आदि. असल में जब पेट में खाना सही से पच नहीं पाता तब खट्टी डकार आने लगती है. इसके कारण पेट गैस, भूख ना लगना आदि समस्याएं हो सकती है. तो अगर आप भी इस करह की समस्या से छुटकारा पाना चाहते हैं तो इन घरेलू उपायों की मदद ले सकते हैं.
खट्टी डकार को दूर करने में कारगर हैं ये घरेलू उपाय-
1. इलायची-
इलायची किचन में मौजूद एक ऐसा मसाला है, जिसे कई तरह की डिशेज में सुगंध को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. खट्टी डकार की समस्या में इलायची का सेवन करना फायदेमंद हो सकता है. इलायची खाने से गैस और खट्टी डकार की समस्या से छुटकारा मिल सकता है.
1. हींग-
हींग को पाचन के लिए अच्छा माना जाता है. गैस या खट्टी डकार की समस्या में हींग का इस्तेमाल करना चाहिए. अगर आपको खट्टी डकार की समस्या है तो आप हींग को पानी में घोलकर पी सकते हैं.
3. लौंग-
लौंग खाने के स्वाद को बढ़ाने से लेकर कई स्वास्थ्य लाभ पहुंचाने तक के लिए इस्तेमाल किया जाता है. लौंग के सेवन से पाचन तंत्र को आराम पहुंच सकता है. खट्टी डकार आने पर लौंग का पानी या लौंग का सेवन कर सकते हैं,
4. जीरा-
जीरे को हेल्थ के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है. जीरा पेट की कई समस्याओं के लिए लाभकारी माना जाता है. खट्टी डकार आने पर जीरे को भून कर खाने से आराम मिल सकता है. पेट गैस के लिए आप जीरे के पानी का सेवन भी कर सकते हैं.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /देशभर में जल्द ही शारदीय नवरात्रि आरंभ होने जा रही हैं. मां दुर्गा की आराधना के ये नौ दिन भक्तों के लिए बेहद ही खास होते हैं. इन नौ दिनों में मां की पूजा और कलश स्थापना के साथ हर दिन मां के अलग अलग रूपों की पूजा-अर्चना होती है. इन नौ दिनों मां दुर्गा के नौ रूपों की कृपा पाने के लिए भक्तजन व्रत, पूजा-पाठ और हवन करते हैं. चलिए जानते हैं कि नवरात्रि के नौ दिनों में किस दिन मां के किस स्वरूप की पूजा होती है.
नवरात्रि के नौ दिनों की पूजा |
पहला दिन - मां शैलपुत्री
नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के साथ ही मां के शैलपुत्री रूप की पूजा की जाती है. देवी दुर्गा का यह रूप मां पार्वती का स्वरूप है जिन्होंने हिमालय राजा के घर जन्म लिया था. इन्हें शैलपुत्री कहा जाता है. इस दिन पीले वस्त्र पहनकर मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है और मां शैलपुत्री को गाय के घी का भोग लगाया जाता है. मंत्र- ॐ ऐं ह्रीं क्लीं शैल पुत्री नमः
दूसरा दिन - मां ब्रह्मचारिणी
नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है. मान्यता है कि भक्तजन जीवन में सुख और सफलता पाने के लिए मां ब्रह्मचारिणी देवी की पूजा करते हैं. ये देवी मां का अविवाहित रूप है और प्रेम और बलिदान का प्रतीक माना जाता है. इस दिन मां ब्रह्मचारिणी को शक्कर का भोग लगाया जाता है. मंत्र- ॐ ऐं ह्रीं क्लीं भ्रामचारिह्य नमः
तीसरा दिन - मां चंद्रघंटा
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है. मां चंद्रघंटा की पूजा करने से बुरे कर्मों और पापकर्म से मुक्ति मिलने के योग बनते हैं. मान्यता है कि तीसरे दिन भूरे या ग्रे कलर के कपड़े पहनकर माता की पूजा करने से लाभ होता है. भोग की बात करें तो मां चंद्रघंटा को दूध और दूध से बनी मिठाई चढ़ाने से मनोकामना पूरी होती है. मंत्र- ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चंद्रघंताये नमः
चौथा दिन - मां कुष्मांडा
नवरात्रि के चौथे दिन दुर्गा देवी के रुप मां कुष्मांडा की पूजा का विधान रखा गया है. मां चंद्रघंटा खुशी और सकारात्मकता का प्रतीक कही जाती हैं और इनकी पूजा करने से जीवन में खुशहाली और घर-परिवार में सुख शांति आती है. चौथे दिन नारंगी रंग के कपड़े पहनकर मां चंद्रघंटा की पूजा करनी चाहिए. इस दिन मां चंद्रघंटा को मालपुए का भोग लगाना चाहिए. मंत्र- ओम ऐं ह्रीं क्लीं कुष्मांडाये नमः
पांचवा दिन - मां स्कंदमाता
नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा का विधान है.मां दुर्गा का यह स्वरूप भगवान कार्तिकेय की माता देवी स्कंदमाता के रूप में स्थापित है. इस दिन बच्चों के साथ मां स्कंदमाता की पूजा करनी चाहिए. मां स्कंदमाता घर में सुख, शांति और खुशहाली लाती हैं और परिवार के लोगों के बीच प्यार बना रहता है. मां स्कंदमाता की पूजा के दौरान उनको केले का भोग लगाया जाता है. मंत्र- ओम ऐं ह्रीं क्लीं स्कंध मताय नमः
छठा दिन - मां कात्यायनी
नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा करने की मान्यता है. मां कात्यायनी के चार हाथ हैं और उनकी पूजा करने से अज्ञात भय और बीमारी दूर होती है. इस दिन लाल रंग के कपड़े पहनकर मां कात्यायनी की पूजा करनी चाहिए. पूजा के दौरान मां कात्यायनी को शहद का भोग लगाने से जीवन में मिठास बनी रहती है और भय का माहौल दूर होता है. मंत्र- ओम ऐं ह्रीं क्लीं कात्यायनि नम:
सातवां दिन - मां कालरात्रि
नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है. कालरात्रि मां दुर्गा का सबसे आक्रामक स्वरूप कहा जाता है. मां के इस स्वरूप की पूजा करने से दुश्मनों का नाश होती है और बुरी शक्तियां हार जाती हैं. इस दिन नीले वस्त्र पहन कर मां दुर्गा की पूजा करनी चाहिए. इस दिन पूजा के बाद मां कालरात्रि को गुड़ और गुड़ से बने पकवानों का भोग लगाने से अच्छे फल प्राप्त होते हैं. मंत्र- ओम ऐं ह्रीं क्लीं कल रत्रिय्या नमः
आठवां दिन - मां महागौरी
नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा आराधना की जाती है. मां महागौरी संतान सुख देती हैं और दरिद्रता का नाश करती हैं. मान्यता है कि मां महागौरी की पूजा करते समय गुलाबी रंग के वस्त्र पहनने चाहिए और इससे खुश होकर मां परिवार में धन, स्वास्थ्य का वरदान देती हैं. मां महागौरी को इस दिन नारियल का भोग लगाना चाहिए. मंत्र- ओम ऐं ह्रीं क्लीं महा गौरिये नमः
नौवां दिन - मां सिद्धिदात्री
नवरात्रि का नौवां और अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा के लिए खास माना जाता है. मां सिद्धिदात्री कमल पर बैठी हैं और इनकी पूजा से जीवन में सभी तरह की सिद्धियां प्राप्त होती हैं. मां की पूजा से बीमारी और दुख खत्म हो जाते हैं. इस दिन बैंगनी रंग के कपड़े पहनकर मां सिद्धिदात्री की पूजा करनी चाहिए. इस दिन पूजा करते समय मां को तिल का भोग लगाना चाहिए. मंत्र- ओम ऐं ह्रीं क्लीं सिद्धिदात्रिये नम:
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /पूरे देश में शारदीय नवरात्रि को लेकर रौनक शुरू हो गई है. इस बार अक्टूबर में 15 तारीख से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत होने वाली है, जो 23 अक्टूबर तक चलेगी. ऐसे में कुछ भक्त नवरात्रि के नौ दिन व्रत रखकर पूजा अर्चना करते हैं. लेकिन, व्रत के दौरान आपकी एनर्जी बनी रहे और आप अपना काम भी कर पाए इसके लिए आपको सात्विक भोजन ग्रहण करने की सलाह दी जाती है. अगर आप कंफ्यूज हैं कि नवरात्रि के दौरान आपको व्रत में क्या खाना चाहिए, तो हम आपको बताते हैं तीन ऐसी रेसिपीजो झटपट तैयार भी हो जाती हैं और यह स्वाद के साथ सेहत के लिए भी अच्छी होती हैं.
नवरात्रि फलाहार रेसिपी
साबूदाना खिचड़ी
सामग्री
1 कप साबूदाना
2 आलू
1/2 कप मूंगफली, दरदरी कुटी हुई
2 हरी मिर्च, कटी हुई
1 चम्मच जीरा
1 बड़ा चम्मच घी
1/2 चम्मच सेंधा नमक
ताजा हरा धनिया, कटा हुआ
नींबू का रस
कसा हुआ नारियल
रेसिपी
साबूदाने को बहते पानी के नीचे तब तक धोएं जब तक पानी साफ न निकल जाए. इन्हें लगभग 4-6 घंटे के लिए या जब तक ये नरम न हो जाएं, पानी में भिगो दें.
भीगे हुए साबूदाना से एक्स्ट्रा पानी निकाल कर अलग रख दीजिए.
एक पैन में घी गर्म करें, उसमें जीरा डालें और तड़कने दें. कटी हुई हरी मिर्च और कटे हुए आलू डालें. आलू को पकने और हल्का सुनहरा होने तक भूनें.
अब इसमें दरदरी पिसी हुई मूंगफली डालें और कुछ मिनट तक पकाएं.
भीगा हुआ साबूदाना और सेंधा नमक डालें. अच्छी तरह मिलाएं और कुछ और मिनट तक पकाएं या जब तक कि साबूदाना ट्रांसपेरेंट न हो जाए.
ताजा धनिये की पत्तियों से गार्निश करें और नींबू का रस और कसा हुआ नारियल डालकर गर्म- गर्म परोसें.
लौकी कोफ्ता करी
सामग्री
1 छोटी लौकी
2 मध्यम आकार के आलू
1/4 कप सिंघाड़े का आटा
1/4 कप कुट्टू का आटा
स्वादानुसार सेंधा नमक
तलने के लिए तेल
करी के लिए
1 कप दही
2 बड़े चम्मच सिंघाड़े का आटा
1 चम्मच जीरा
1/2 चम्मच अदरक का पेस्ट
1/2 चम्मच हरी मिर्च का पेस्ट
1/2 चम्मच लाल मिर्च पाउडर
1/2 चम्मच हल्दी पाउडर
1 चम्मच धनिया पाउडर
सजावट के लिए ताजा हरा धनिया
रेसिपी
लौकी और आलू को कद्दूकस कर लीजिए और अतिरिक्त पानी निकाल दीजिए.
एक कटोरे में कद्दूकस की हुई लौकी, कद्दूकस किया हुआ आलू, सिंघाड़े का आटा, कुट्टू का आटा और सेंधा नमक मिलाकर आटा गूंथ लें.
तलने के लिए एक पैन में तेल गर्म करें.
आटे को छोटी-छोटी गोल लोइयां बनाकर सुनहरा होने तक तल लें.
करी के लिए, दही और सिंघाड़े के आटे को एक कटोरे में एक साथ चिकना होने तक फेंटें.
एक अलग पैन में तेल गरम करें, उसमें जीरा, अदरक का पेस्ट, हरी मिर्च का पेस्ट डालें और एक मिनट तक भूनें.
दही का मिश्रण और मसाले (लाल मिर्च पाउडर, हल्दी पाउडर, धनिया पाउडर) डालें और गाढ़ा होने तक पकाएं.
करी में धीरे से कोफ्ते डालें और कुछ और मिनट तक धीमी आंच पर पकाएं. आखिरी में ताजी हरी धनिया से सजाकर परोसें.
राजगिरा पराठा
सामग्री
1 कप राजगिरा का आटा
2 मध्यम आकार के उबले आलू
2 हरी मिर्च, कटी हुई
स्वादानुसार सेंधा नमक
खाना पकाने के लिए घी
रेसिपी
एक कटोरे में राजगिरा का आटा, मसले हुए आलू, कटी हुई हरी मिर्च और सेंधा नमक मिलाएं.
इससे नरम आटा गूंथ लें. यदि जरूरत हो तो आटा गूंथने के लिए थोड़ा सा पानी मिला लें.
आटे को छोटे-छोटे हिस्सों में बांट लें और उनकी लोइयां बना लें.
हर गोले को बेलन की सहायता से छोटी रोटी के आकार में गोल बेल लें, चिपकने से रोकने के लिए थोड़े से राजगिरा के आटे का उपयोग करें.
तवा गर्म करें और परांठे को थोड़े से घी के साथ दोनों तरफ से गोल्डन ब्राउन और क्रिस्पी होने तक पकाएं.
गरम-गरम दही या आलू-लौकी की सब्जी के साथ परोसें.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / हिंदू त्योहारों में अहोई अष्टमी एक महत्वपूर्ण त्योहार में से एक है. खासकर हिंदू महिलाओं के लिए इसका विशेष महत्व है. जिस तरह से तीज पति की लंबी उम्र के लिए की जाती है उसी तरह अहोई अष्टमी व्रत महिलाएं अपने बच्चों की लंबी उम्र और तरक्की के लिए करती है. महिलाएं अपने बच्चों के लिए अहोई माता से आशीर्वाद लेती हैं. हिंदू पंचांग के अनुसार अहोई अष्टमी कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है. लेकिन इस त्योहार को लेकर महिलाओं में काफी कंफ्यूजन देखने को मिलता है. अगर आप भी दुविधा में है तो यहां अहोई अष्टमी व्रत से जुड़ी आपकी सारी कन्फ्यूजन दूर हो जाएगी. तो आईए जानते हैं इस साल कार्तिक माह की अहोई अष्टमी व्रत की तिथि मुहूर्त और महत्व.
अहोई अष्टमी 2023 तिथि |
पंचांग के अनुसार अहोई अष्टमी व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि यानी 5 नवंबर 2023, रविवार को मनाई जाएगी. इस व्रत की शुरुआत 5 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 59 मिनट से होगी और 6 नवंबर, सोमवार को सुबह 3 बजकर 18 मिनट पर इसका समापन होगा.
अहोई अष्टमी 2023 शुभ मुहूर्त |
अगर अहोई अष्टमी व्रत की शुभ मुहूर्त की बात की जाए तो 5 नवंबर, रविवार को शाम 5 बजकर 42 मिनट से पूजा की शुभ मुहूर्त से शुरू हो रही है और उसी दिन शाम 7 बजे तक रहेगी. माताएं इस बीच विधिवत रूप से मां अहोई की पूजा अर्चना कर सकती हैं.
अहोई अष्टमी 2023 पर तारों को देखने का समय |
बात की जाए तारों को देखने की तो शाम 5 नवंबर 2023, रविवार को शाम 5 बजकर 58 मिनट पर तारों को देखने का शुभ समय है.
अहोई अष्टमी का महत्व |
अहोई अष्टमी व्रत दिवाली से ठीक एक हफ्ता पहले पड़ता है. हिंदू माताओं के लिए अहोई अष्टमी व्रत का विशेष महत्व है. यह व्रत महिलाएं अपने बच्चों की भलाई, उनकी लंबी लंबी उम्र और तरक्की के लिए करती है. मां अहोई से माताएं अपने बच्चों के लिए आशीर्वाद मांगती हैं. इससे बच्चे स्वस्थ रहते हैं और उनके जीवन में सुख समृद्धि होता है और वे विकास के पथ पर हमेशा अग्रसर रहते हैं.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /घर घर में शारदीय नवरात्रि की तैयारी शुरु हो गई है. लोग घर की साफ सफाई कर माता की आगवनी की तैयारी में जुट गए हैं. नवरात्रि के नौ दिन विधि विधान से पूजा अर्चना करने से माता भक्तों की हर मनोकामना पूरी कर देती हैं. भक्त घट स्थापना करने के साथ साथ तरह तरह के पकवान बनाकर माता को भोग लगाते हैं. आइए जानते हैं मां को किन पकवानों का लगाना चाहिए भोग.
नवरात्रि में इन पकवानों का लगाएं भोग |
नारियल की बर्फी |
देवी देवताओं को नारियल विशेष प्रिय होते हैं. नारियल फल है इसलिए नारियल की बर्फी बनाकर माता को भोग लगाना चाहिए. नारियल की बर्फी से भोग लगाने के बाद इसक प्रसाद के रूप में भी बांटना चाहिए.
मखाने की खीर |
खीर का भोग अत्यंत शुभ माना जाता है, लेकिन चावल अन्न में आता है इसलिए माता को भोग लगाने के लिए मखाने की खीर बनानी चाहिए. व्रत रखने वाले भी मखाने की खीर खा सकते हैं.
हलवा |
नवरात्रि में अष्टमी और नवमी को हलवा बनाया जाता है. माता को भोग लगाने के लिए बादाम का हलवा बनाना चाहिए. इसे भोग लगाने के साथ साथ व्रत रखने वाले फलाहार के रूप में भी ग्रहण कर सकते हैं.
साबूदाने की खीर |
व्रत में फलहार के लिए अधिकतर लोग साबूदाना का उपयोग करते हैं. साबूदाने की खीर बनाकर माता को भोग के रूप में चढ़ाएं और फिर उसका उपयोग फलाहार के लिए करना चाहिए.
मिल्क केक |
दूध से तैयार यह मिठाई देवी को भोग में चढ़ाना चाहिए. दूध से बने होने के कारण नवरात्रि के दौरान अन्न ग्रहण नहीं करने वाले इसे फलाहार के रूप में भी खा सकते हैं.
काजू कतली |
माता को खोए से बनी चीजें अत्यंत प्रिय होती हैं. काजू और खोए से तैयार काजू कतली से भोग लगाने से माता अत्यंत प्रसन्न होती हैं.
रसोई टिप्स /शौर्यपथ /किसी भी डिश को अच्छा बनाने में सबसे जरूरी होता है उसमें डाले जाने वाले मसाले की मात्रा. अगर सब्जी में मसाले की सही मात्रा डाली जाए तो सब्जी अच्छी बनेगी. और अगर एक- आध मसाला भी ऊपर नीचे हो गया तो पूरा स्वाद ही बेकार हो जाता है. भारतीय खाने में मिर्च का तड़का ना हो तो खाने का स्वाद नहीं आता लेकिन कई बार गलती से सब्जी में मिर्च ज्यादा पड़ जाती है. ऐसे में आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है. हम आपको कुछ ऐसे घरेलू नुस्खे बता रहे हैं जो मिर्च के तीखेपन को कम करने में आपकी मदद करेंगे.
सब्जी में मिर्च कम करने का ये है तरीका |
देसी घी
अगर आपकी सब्जी में कभी मिर्च तेज हो जाए तो उसमें देसी घी डाल दें. ये नुस्खा दादी- नानी का है और बहुत प्रभावी है. मिर्च के तेज को कम करने का ये सबसे आसान तरीका है.
मलाई
सब्जी में पड़े ज्यादा लाल मिर्च को दूर करने के लिए मलाई एक अच्छा उपाय है. सब्जी बनने के बाद इसे ऊपर से दाल दें. ये आपकी सब्जी को अच्छी ग्रेवी देगा और सब्जी स्वादिष्ट बनेगी.
नींबू का रस
अगर आपकी सब्जी में मिर्च के साथ नमक भी ज्यादा हो गया है तो आप नींबू के रस का इस्तेमाल कर सकते हैं. ये सब्जी का तीखापन दूर करेगा और खाने का स्वाद भी बढ़ जाएगा.
पनीर
अगर आपकी सब्जी में गलती से ज्यादा मिर्च डल गई है तो आप उसमें पनीर के टुकड़े या पनीर को पीसकर डाल सकते हैं. इससे सब्जी का स्वाद बैलेंस हो जाएगा.
टमाटर का पेस्ट
सब्जी में टमाटर के पेस्ट को डालने से मिर्च का स्वाद कम हो जाता है और आपकी सब्जी गाढ़ा और स्वादिष्ट बनती है.
टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ / ये तो आपने अक्सर देखा होगा कि बच्चों को जब भी पढ़ने बोलो उनके बहाने शुरू हो जाते हैं. पढ़ने के समय ही उन्हें नींद आने लगती है, भूख लगने लगती है, वॉशरूम जाना होता है. अब इन चीजों के लिए उन्हें रोका तो नहीं जा सकता लेकिन कुछ पेरेंटिंग टिप्स जरूर अपनाया जा सकता है. अगर आप इन टिप्स को ध्यान रखें तो आपके बच्चे की नहीं पढ़ने की आदत छूट जाएगी. यहां तक कि वके खुद से बैठकर पढ़ना शुरू कर देंगे. तो चलिए जानते हैं किन बातों का आपको रखना है ख्याल ताकि बच्चों का पढ़ाई में लगने लगे मन.
बच्चों का पढ़ाई में मन लगाने के लिए कुछ आसान टिप्स |
मोटिवेशन है जरूरी
अक्सर मां बाप यह गलती करते हैं कि अपने बच्चे की दूसरे बच्चों से तुलना करते हैं. ये करना छोड़ दें. इससे बच्चे पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और उन्हें लगता है कि हम अच्छा नहीं कर सकते. इसलिए तुला करने की बजाय उन्हें मोटिवेट करें.
पढ़ाई का प्रेशर ना बनाएं
अगर आप बच्चों पर पढ़ाई का ज्यादा प्रेशर बनाएंगे तो यह अच्छा नहीं होगा. इससे उन्हें हर समय पढ़ाई का डर सताता रहेगा जिससे वह उससे दूरी बनाना शुरू कर देंगे. केवल पढ़ाई के समय ही पढ़ाई की बातें करें.
रूटिंग बनाएं
पढ़ाई करने के लिए एक बेहतर रूटीन बनाना बेहद जरूरी है. इससेबच्चों में भी अनुशासन आएगा और वह हर काम समय पर करेंगे. शुरुआत में बच्चों को लंबे समय तक पढ़ने के लिए ना बिठाएं.
ध्यान भटकने वाली चीजे रखें दूर
अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा मन लगाकर पढ़े और पढ़ाई से भागे ना, तो उनके सामने से वो हर चीज हटा दें जो उनका ध्यान भटकाता हो. जैसे फोन को दूर रखें, खिलौने हटा दें.
कमियां निकालना बंद करें
किसी भी बच्चे की कमी निकालने से उनका मन उदास हो जाता है. बच्चों को ऐसा लगने लगता है कि उनमें सिर्फ कमियां है वो कुछ अच्छा नहीं कर सकतें. इसलिए समय-समय पर बच्चों का उत्साह बढ़ाते रहे, उनकी सराहना करते रहें.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
