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June 01, 2026
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ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ / खूबसूरत त्वचा के लिए बाजार में कई सारे प्रोडक्ट्स उपलब्ध हैं। चमकदार स्किन से लेकर ग्लोइंग स्किन तक, डेड स्किन हटाने के लिए या फिर मुंहासों के दाग हटाने के लिए, बाजार में आपको कई सारी क्रीम और ब्यूटी प्रोडक्ट मिल जाएंगे, लेकिन इन सभी चीजों से आपको छुटकारा मिल सकता है। इन सभी का इस्तेमाल करने से पहले आप खूबसूरत त्वचा के लिए आजमाएं ये नेचुरल तरीकों को अपनाने की कोशिश करें।
स्किन के लिए मेडिटेशन करें, इसे करने से आपके स्किन में चमक आएगी। ऐसा करने से आपकी त्वचा को ऑक्सीजन मिलता है। आपके शरीर को संतुलित करने और कोशिका को बढ़ावा देने और ऊतक की मरम्मत करने में मदद करेंगे। ध्यान करने से शरीर में ऊर्जा आती है। हर दिन वर्कआउट करने से जुड़े कई स्वास्थ्य लाभ हैं। व्यायाम करने से दिल और मांसपेशियों में रक्त का प्रवाह बढ़ सकता है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार, मध्यम व्यायाम परिसंचरण को बढ़ा सकता है और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत कर सकता है। नतीजतन, आपकी त्वचा यंग दिखाई दे सकती है।
त्वचा में ग्लो के लिए ब्यूटी स्लीप जरूर लें। रात में 8 घंटे की नींद लेना जरूरी है। नींद पूरी होने पर आप फ्रेश फील करते हैं। एक्सरसाइज करने से नींद भी जल्दी आ जाती है। साथ ही आप तरोताजा महसूस होता है। व्यायाम न केवल आपको जल्दी सोने में मदद करता है, बल्कि यह आपकी नींद की गुणवत्ता को भी बढ़ा सकता है। यदि आप अच्छी तरह से आराम कर रहे हैं, तो आपकी त्वचा का खूबसूरत दिखना स्वाभाविक है।
इसके साथ ही आप स्वस्थ्य खाएं। हेल्दी खाना खाने से आपकी स्किन ग्लो करती है। ग्लोइंग स्किन के लिए आप फेशियल योगा का सहारा भी ले सकती हैं।

टिप्स ट्रिक्स / शौर्यपथ / स्मार्टफोन और टैबलेट में उपयोग की जाने वाली टच स्क्रीन तकनीक को बिना किसी बदलाव के एक शक्तिशाली सेंसर के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने बताया है कि किस तरह स्क्रीन पर मिट्टी या पीने के पानी के नमूने डालकर प्रदूषण के बारे में पता लगाया जा सकता है। पहली बार इस तरह की खोज हुई है जिसमें आम आयनिक प्रदूषकों की पहचान करने के लिए एक सामान्य टच स्क्रीन का उपयोग किया जा सकता है।
फोन की स्क्रीन पर पानी की बूंद डाली: इस तकनीक की मदद से आप पानी को पीने से पहले अपने फोन में इसकी एक बूंद डाल कर पता लगा सकते है कि यह सुरक्षित है या नहीं। टच स्क्रीन सेंसर की संवेदनशीलता विशेष तरह के लैब आधारित उपकरणों के बराबर है, जो इस तरह के कामों को अंजाम दे सकती है।
एक सामान्य स्मार्टफोन की स्क्रीन इलेक्ट्रोड के ग्रिड से ढकी होती है और जब एक उंगली इन इलेक्ट्रोड के स्थानीय विद्युत क्षेत्र को बाधित करती है, तो फोन सिग्नल में बदल जाता है। अन्य टीमों ने भी इस तरह के प्रयोगों को समझने के लिए स्मार्टफोन की गणना करने की शक्ति का उपयोग किया है, लेकिन ये कैमरे या परिधीय उपकरणों पर निर्भर हैं या इनमें स्क्रीन में महत्वपूर्ण बदलाव करने की आवश्यकता होती है।
बदलाव मापने के लिए कई तरल पदार्थों को डाला
शोधकर्ताओं ने कैपेसिटेंस में बदलाव को मापने के लिए स्क्रीन पर तरल पदार्थों को डाला और टच स्क्रीन परीक्षण सॉफ्टवेयर का उपयोग करके प्रत्येक बूंद से माप को दर्ज किया। तरल में मौजूद सभी आयन स्क्रीन के विद्युत क्षेत्रों के साथ आयनों की सांद्रता और उनके आवेश के आधार पर अलग-अलग तरीके से परस्पर क्रिया करते हैं। यहां बताते चले कि कैपेसिटेंस -विद्युत आवेश को जमा करने की एक प्रणाली है।
स्मार्टफोन का सेंसर प्रदूषण को मापेगा
बर्लिन। जर्मनी के वैज्ञानिक भी एक ऐसे सेंसर का विकास कर रहे हैं जो स्मार्टफोन के साथ जोड़ा जाएगा और हवा में मौजूद धूल के स्तर को माप कर उसका मानचित्र बनाएगा। सेंसर साधारण ऑप्टिकल सेंसर के अनुरूप ही होगा। कम्प्यूटर विज्ञानी मथ्थिआस बड ने कहा कि इंफ्रारेड एलईडी के स्थान पर स्मार्टफोन में फ्लैश एलईडी को ही धूल की गणना करने वाले क्षेत्र के लिए प्रयोग में लाया जाएगा।
कंप्यूटर सिमुलेशन के साथ शुरुआत की
कैम्ब्रिज के डॉ. रोनन डेली ने कहा हम जानना चाहते थे कि क्या हम स्क्रीन को बिना बदलेे, तकनीक के साथ एक अलग तरीके से काम कर सकते हैं। शोधकर्ताओं ने कंप्यूटर सिमुलेशन के साथ शुरुआत की और फिर एक टच स्क्रीन का उपयोग करके अपने सिमुलेशन को सत्यापित किया। हालांकि अब टच स्क्रीन का उपयोग करके आयनों का पता लगाना संभव है। शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि वे तकनीक को और विकसित करेंगे ताकि यह अणुओं की एक विस्तृत श्रृंखला का पता लगा सके। यह संभावित स्वास्थ्य संबंधी प्रयोगों के लिए उपयोग किया जा सकता है।

खाना खजाना / शौर्यपथ /मानसून शुरू होते ही हर घर में पकौड़ों की डिमांड बढ़ जाती है। ऐसे में आलू-प्याज के पकौड़े तो आप कई बार ट्राई कर चुके होंगे लेकिन इस मानसून ट्राई करके देखें बैंगन के पकौड़े। यह पकौड़े न सिर्फ स्वाद में बेहद कमाल होते हैं बल्कि बनने में भी बेहद आसान होते हैं। तो आइए जान लेते हैं कैसे बनाए जोते हैं ये टेस्टी कुरकुरे बैंगन के पकौड़े।
बैंगन के पकौड़े बनाने के लिए सामग्री-
-1 बड़ा बैंगन
-1 कप बेसन
आधा कप चावल का आटा
-कुछ साबूत लाल मिर्च
-1/4 चम्मच अजवाइन
-एक चुटकी हींग
-थोड़ी सी लहसुन
-1 चम्मच नींबू का रस
-तलने के लिए तेल
-नमक स्वादानुसार
बैंगन के पकौड़े बनाने की वि​धि
सबसे पहले बैंगन को अच्छी तरह धोकर गोल-गोल स्लाइस में काट लें। अब बेसन में चावल का आटा, हींग, नमक, अजवाइन डालकर पकौड़े का घोल तैयार करें। साबूत लाल मिर्च, लहसुन, नमक, नींबू का रस मिलाकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को घोल में अच्छी तरह मिला लें। अब कड़ाही में तेल गर्म करके बैंगन की एक-एक स्लाइस बेसन के घोल में डिप करके गर्म तेल में कुरकुरे सुनहरे होने तक तलें। आपके बैंगन के पकौड़े बनकर तैयार हैं। इन्हें सॉस के साथ परोसें।

खाना खजाना / शौर्यपथ /पूरा दिन उपवास रखने के बाद शाम को व्रत खोलते समय कुछ चटपटा खाने की क्रेविंग हर किसी को होती है। अगर आप भी ऐसे लोगों की लिस्ट में शामिल हैं तो आपकी यह इच्छा व्रत वाली आलू की कढ़ी पूरी कर सकती है। इस कढ़ी का चटपटा स्वाद और आसान रेसिपी आपको हर व्रत में इसे ही बनाने के लिए मजबूर कर देगी। तो आइए जान लेते हैं कैसे बनाई जाती है यह टेस्टी रेसिपी।
व्रत की कढ़ी बनाने के लिए सामग्री-
-आधा किलो आलू उबले और छिले हुए
-2 छोटा चम्मच सेंधा नमक
-एक चौथाई छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर
-आधा कप सिंघाड़े का आटा
-आधा छोटा चम्मच धनिया पाउडर
-तलने के लिए तेल
-आधा कप दही 8-10
-करी पत्ता
-आधा छोटा चम्मच जीरा
-2 साबुत लाल मिर्च
-1 बड़ा चम्मच अदरक कद्दूकस किया हुआ
-1 छोटा चम्मच धनिया पत्ती बारीक कटी हुई
-4 कप पानी
व्रत की कढ़ी बनाने की रेसिपी-
व्रत की कढ़ी बनाने के लिए सबसे पहले एक बाउल में आलू, नमक, लाल मिर्च पाउडर, सिंघाड़े का आटा मिलाकर उसका मिश्रण तैयार करके थोड़ा मिश्रण अलग रख लें। इसके बाद एक कढ़ाही में तेल गर्म करें फिर उसमें आलू और सिंघाड़े के आटे के मिश्रण से पकौड़ियां बना लें और सुनहरा होने तक सेंक कर अलग रख लें। अब एक बर्तन में दही और पानी मिलाकर एक घोल बना लें। इसके बाद एक बड़े बर्तन में तेल गर्म करें, उसमें करी पत्ता, जीरा और साबुत लाल मिर्च डालकर भून लें।इसके बाद कढ़ाही में दही के मिश्रण को डालें और चलाते हुए उबाल आने तक पकाएं। उबाल आने के बाद कढ़ी में नमक मिलाएं और पहले से बनी हुई पकौड़ी डालकर कुछ देर पकाएं। इसके बाद तैयार व्रत की कढ़ी को एक बॉउल में निकालें हरे धनिये से गॉर्निश करके पूरियों के साथ गर्मागर्म सर्व करें।

दुर्ग / शौर्यपथ / दि बुद्धिष्ट सोसायटी ऑफ इंडिया शाखा भिलाई द्वारा आयोजित वर्षावास शुभारंभ समारोह पूज्य भंते डा जीवक के धम्म सानिध्य व अनिल मेश्राम प्रदेश अध्यक्ष दि बुद्धिष्ट सोसायटी ऑफ इंडिया शाखा छत्तीसगढ़ की अध्यक्षता तथा भारती खांडेकर, प्रदेश अध्यक्ष महिला प्रकोष्ठ की विशेष उपस्थिति मे संपन्न हुआ।
समारोह के प्रारंभ मे सर्वप्रथम तथागत भगवान गौतम बुद्ध की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर दीप प्रज्वलित किये गये। तत्पश्चात भंते जीवक द्वारा उपस्थित बौद्ध उपासक उपासिकाओ को त्रिशरण पंचशील ग्रहण करा परित्राण पाठ संपन्न कराया गया। धम्म देशना देते हुए भंतेजी ने कहा कि हमे पूजा के दौरान अदिन्ना दाना वेरमणि, कामे सुमिक्षा चारा वेरमणि, मूसा वादा वेरमणि, सूरा मेरय मज्ज पमादठाना वेरमणि, सिर्फ बोलने से कुछ नही होगा, सच्चे बुद्धिष्ट बनना है तो हमे प्राणी मात्र की हिंसा से दूर रहना होगा। व्यभिचार से दूर रहना होगा, झूठ बोलने से बचना होगा, कच्ची और पक्की शराब पीने से बचना होगा, सभी पाप कर्मो से दूर रहकर पुण्य कर्मो का संचय करना होगा तब कही हम डा बाबा साहेब आम्बेडकर के स्वप्न साकारी सच्चे बौद्ध बन पायेंगे।
उन्होंने वर्षावास काल मे धम्म का लाभ लेने का आव्हान सभी उपासको से किया। अंत मे महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष भारती खांडेकर, जयश्री बौद्ध प्रदेश महासचिव, सीमा शेंडे, वंदना पानतवने, कल्पना गजभिये, अल्का बौद्ध, संगीता खोब्रागडे, वंदना बौद्ध सहित अनेक महिलाओ द्वारा भंतेजी को फलदान और धम्मदान भेंट किया गया। समारोह मे डा आर एल वाहने, डीएम डोंगरे, उमराव मेश्राम, शिवचरण पानतवने, अशोक नंदागवली, अनिल मेश्राम, सुधेश रामटेके, खरेन्द्र मेश्राम, बृजेश मेश्राम, जलेन्द्र ऊके, अनिल गजभिये, सत्यम गजभिये सहित अनेक उपासक उपासिका, उपस्थित थी।

सेहत / शौर्यपथ / मानसून ने भी दस्‍तक दे दी है। और सावन सोमवार भी शुरू होने वाले हैं। लेकिन मानसून सीजन में पाचन तंत्र अन्‍य सीजन के मुकाबले कमजोर हो जाता है। ऐसे में व्रत रखने के दौरान सावधानियां बरतना जरूरी है। खान-पान का ख्‍याल विशेष रूप से रखें। क्‍योंकि पाचन तंत्र पर असर पड़ने पर इम्‍यूनिटी कमजोर होने लगती है। और सिस्‍टम बिगड़ जाता है। तो आइए जानते हैं सावन सोमवार 2021 में किस तरह फलाहार करें जिससे एनर्जी भी बनी रहें।
1. सुबह चाय की बजाएं 1 गिलास दूध का सेवन करें। इसके साथ आप केला खा सकते हैं या बादाम भी लें सकते हैं। इससे आपका पेट भरा रहेगा और आपको बार- बार भूख भी नहीं लगेगी। दूध में कैल्‍शियम, प्रो‍टीन, विटामिन बी -2 मौजूद होता है और केले पोटेशियम, विटामिन सी और फाइबर मौजूद होता है। इससे कोलेस्ट्रॉल कम होता है।
2.कभी भूखे पेट नहीं रहें। इससे आपको एसिडिटी, पेट दर्द, सिरदर्द हो सकता है। इसके बजाए आप मुट्ठी भर सूखे मेवे का सेवन करें। इससे आपको कमजोरी महसूस नहीं होगी। साथ ही बार- बार भूख भी नहीं लगेगी।
3. सिंघाड़े के आटे का सेवन करें। उसमें मौजूद फाइबर आपको बहुत फायदा करेगा।
बार- बार भूख भी नहीं लगेगी, कमजोरी महसूस नहीं होगी और पेट भी भरा रहेगा।
4. पानी युक्‍त फलों का सेवन करें। शरीर में पानी की कमी जरा भी नहीं होने दें। इससे आपको कमजोरी नहीं लगेगी। क्‍योंकि शरीर में पानी की कमी होने पर थकान बहुत जल्‍दी लगती है। पाचन तंत्र बिगड़ जाता है, भूख नहीं लगना जैसी समस्‍या होने लगती है।
5. 1 कटोरी दही का सेवन जरूर करें। वह लौ फेट होना चाहिए। इससे पानी की कमी नहीं होगी। बॉडी हाइड्रेट रहेगी। आप इसमें फल और ड्राई फुट्स भी मिला सकते हो।

शौर्यपथ / हमारे माता-पिता यानी हमारे पैरेंट्स जिंदगी में हमेशा हमारा सपोर्ट करते हैं। चाहे वो निजी जीवन हो या कॅरियर हो। हमारी कोई दिक्‍कत हो या कोई चुनौती। हम कहीं भी हों, हम कुछ भी काम करें, वो हमेशा हमारा साथ देते हैं।
उनके इस प्यार और आशीर्वाद को सेलिब्रेट करने के लिए पैरेंट्स डे मनाया जाता है। आज नेशनल पैरेंट्स डे है। नेशनल पैरेंट्स डे हर साल जुलाई महीने के चौथे सप्ताह में मनाया जाता है। इस साल राष्ट्रीय माता-पिता दिवस यानी पैरेंट्स डे 25 जुलाई को मनाया जा रहा है। नेशनल पेरेंट्स डे सबसे पहले 8 मई 1973 को दक्षिण कोरिया में मनाया गया था। इसके बाद वर्ष 1994 में अधिकारिक तौर पर पेरेंट्स डे मनाने की शुरुआत अमेरिका में की गई।
किस देश में कब मनाया जाता है?
अमेरिकन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने 1994 में नेशनल पैरेंट्स डे की शुरुआत की, जब उन्होंने कानून में कांग्रेस के इस प्रस्ताव (36 USC 135) पर हस्ताक्षर किए और रिपब्लिकन सीनेटर ट्रेंट लॉट ने बिल पेश किया।
इसके बाद से ही अमेरिका और भारत में जुलाई के चौथे सप्ताह में पैरेंट्स डे मनाने की शुरुआत हुई। दक्षिण कोरिया में प्रत्येक वर्ष 8 मई को पेरेंट्स डे मनाया जाता है। वियतनाम में 7 जुलाई को सेलिब्रेट किया जाता है। फिलीपींस में दिसंबर के पहले सोमवार को पेरेंट्स डे मनाया जाता है, जबकि रूस और श्रीलंका में प्रत्येक वर्ष 1 जून को 'ग्लोबल पेरेंट्स डे' मनाया जाता है।

लाइफस्टाइल / शौर्यपथ /बारिश में माटी की सौंधी सुगंध सभी के मन को भाती है। मिट्टी ना सिर्फ मन को सुवासित करती है बल्कि इसके बर्तन, खिलौने और सामग्री अगर घर में लाकर रखी जाए तो जिंदगी भी महक सकती है। मिट्टी से बनी चीजें सुख, सौभाग्य और समृद्धि की कारक होती हैं। मिट्टी का उपयोग हमारे जीवन को भाग्यशाली बना सकता है।
पढ़ें 18 खास बातें जो आपका भाग्य चमका सकती है-
1. हर व्यक्ति को मिट्टी या भूमि तत्व के पास ही रहना चाहिए।
2. वास्तुशास्त्र के अंतर्गत भी मिट्टी को महत्वपूर्ण कहा गया है। मिट्टी के घड़े से पानी पीना या घर में मिट्टी के बर्तन रखना अत्यंत लाभदायक माना गया है।
3. ऐसा करने से आसपास सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बना रहता है। लेकिन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मिट्टी के कुछ बर्तन ऐसे हैं जो हर घर में होने ही चाहिए। जो लोग चाहते हैं कि उनके जीवन में सुख-समृद्धि और सफलता हमेशा बरकरार रहे उन लोगों को कुछ विशेष प्रकार के मिट्टी के बर्तन अपने घर में रखने चाहिए।
4. मिट्टी के इन उपयोगी बर्तनों में सबसे पहला नाम है घड़े का।
5. बहुत से परिवारों में घड़े का पानी पिया जाता है, घड़े का पानी पीने से बुध और चंद्रमा का प्रभाव शुभ होता है।
6. यहां तक कि विज्ञान भी यह मानता है कि घड़े का पानी सेहत के लिए अत्यंत लाभकारी होता है।
7. अगर आपके घर में घड़ा हैं तो इसे अपने घर की उत्तर-पूर्वी दिशा में ही रखें। यह आपके घर और आसपास के वातावरण की सभी नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करता है।
8. परिवार में सुख और समृद्धि के मार्ग भी खुल जाते हैं।
9. घर में कोई व्यक्ति तनाव ग्रस्त हैं या मानसिक रूप से परेशान है तो आप उन्हें माटी के घड़े से किसी भी पौधे को पानी देने के लिए कहें।
10. लस्सी और चाय कुल्हड़ में पीने का मजा ही कुछ और है, लेकिन मिट्टी से बने ये गिलास मंगल ग्रह के दुष्प्रभाव से भी मुक्ति दिलवाते हैं।
11. इसलिए जो लोग मंगल के कोप से प्रभावित है, उन्हें कोई भी पेय पदार्थ कुल्हड़ में ही पीने चाहिए।
12. हर शनिवार के दिन किसी कुल्हड़ में पानी भरकर पीपल के पेड़ के नीचे रखने से करियर में लाभ मिलेगा।
13. कुल्हड़ में पानी भरकर अपनी छत पर भी प्यासे पक्षियों के लिए रख सकते हैं, इससे अगर आप नौकरी की तलाश कर रहे हैं तो आपकी तलाश जल्द पूरी होगी।
14. मिट्टी से बनी भगवान की मूर्ति को घर में रखने से भी आपकी धन संबंधी परेशानियां तो दूर होती ही हैं, साथ ही धन की स्थिरता भी बनी रहती है।
15. जो लोग धन संबंधी परेशानियां झेल रहे हैं उन्हें हर शनिवार मिट्टी का दीया पीपल के पेड़ के नीचे जलाना चाहिए।
16. अगर किसी व्यक्ति के दांपत्य जीवन में परेशानियां चल रही हैं तो उसे नियमित तौर पर तुलसी के पौधे पर मिट्टी का दीया जलाना चाहिए।
17. नि:संतान स्त्री या पुरुष को चार मुंह वाले दीये में चार लौ लगाकर श्रीकृष्ण की मूर्ति के आगे प्रज्वलित करना चाहिए।
18. मिट्टी से बनी विभिन्न वस्तुओं या खिलौनों का ड्राइंग रूम में प्रयोग करने से धन की आवक बढ़ती है।

आस्था / शौर्यपथ / शिव चालीसा के आसान शब्दों से भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न किया जा सकता है। शिव चालीसा के सस्स्वर पाठ से मुश्किल काम को बहुत ही आसान किया जा सकता है। शिव चालीसा की 40 शुभ पंक्तियां चमत्कारी हैं। शिव चालीसा सरल है लेकिन अत्यंत प्रभावशाली है। चालीसा का निरंतर 40 बार पाठ करने से वह सिद्ध हो जाता है...इसी तरह मनोकामना और समस्या के अनुसार चालीसा की पंक्ति याद कर 40 बार पाठ करने से वह भी आश्चर्यजनक रूप से मदद करती है।
शिव चालीसा के पाठ की सरल विधि-
* सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
* अपना मुंह पूर्व दिशा में रखें और कुशा के आसन पर बैठ जाएं।
* पूजन में सफेद चंदन, चावल, कलावा, धूप-दीप पीले फूलों की माला और हो सके तो सफेद आक के फूल भी रखें और शुद्ध मिश्री को प्रसाद के लिए रखें।
* पाठ करने से पहले गाय के घी का दिया जलाएं और एक कलश में शुद्ध जल भरकर रखें।
* शिव चालीसा का 3, 5, 11 या फिर 40 बार पाठ करें।
* शिव चालीसा का पाठ बोल बोलकर करें जितने लोगों को यह सुनाई देगा उनको भी लाभ होगा।
-शिव चालीसा का पाठ पूर्ण भक्ति भाव से करें और भगवान शिव को प्रसन्न करें।
* पाठ पूरा हो जाने पर कलश का जल सारे घर में छिड़क दें।
* थोड़ा सा जल स्वयं पी लें और मिश्री प्रसाद के रूप में खाएं, बच्चों में भी बांट दें।
शिव चालीसा
।।दोहा।।
श्री गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥
जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥
भाल चन्द्रमा सोहत नीके। कानन कुण्डल नागफनी के॥
अंग गौर शिर गंग बहाये। मुण्डमाल तन छार लगाये॥
वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे। छवि को देख नाग मुनि मोहे॥
मैना मातु की ह्वै दुलारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी। करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥
नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे॥
कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात न काऊ॥
देवन जबहीं जाय पुकारा। तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥
किया उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥
तुरत षडानन आप पठायउ। लव निमेष महँ मारि गिरायउ॥
आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा॥
त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई। सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥
किया तपहिं भागीरथ भारी। पुरब प्रतिज्ञा तसु पुरारी॥
दानिन महं तुम सम कोउ नाहीं। सेवक स्तुति करत सदाहीं॥
वेद नाम महिमा तव गाई। अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥
प्रगट उदधि मंथन में ज्वाला। जरे सुरासुर भये विहाला॥
कीन्ह दया तहँ करी सहाई। नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥
पूजन रामचंद्र जब कीन्हा। जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥
सहस कमल में हो रहे धारी। कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥
एक कमल प्रभु राखेउ जोई। कमल नयन पूजन चहं सोई॥
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर। भये प्रसन्न दिए इच्छित वर॥
जय जय जय अनंत अविनाशी। करत कृपा सब के घटवासी॥
दुष्ट सकल नित मोहि सतावै । भ्रमत रहे मोहि चैन न आवै॥
त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो। यहि अवसर मोहि आन उबारो॥
लै त्रिशूल शत्रुन को मारो। संकट से मोहि आन उबारो॥
मातु पिता भ्राता सब कोई। संकट में पूछत नहिं कोई॥
स्वामी एक है आस तुम्हारी। आय हरहु अब संकट भारी॥
धन निर्धन को देत सदाहीं। जो कोई जांचे वो फल पाहीं॥
अस्तुति केहि विधि करौं तुम्हारी। क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥
शंकर हो संकट के नाशन। विघ्न विनाशन मंगल कारण ॥
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं। नारद शारद शीश नवावैं॥
नमो नमो जय नमो शिवाय। सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥
जो यह पाठ करे मन लाई। ता पार होत है शम्भु सहाई॥
ॠनिया जो कोई हो अधिकारी। पाठ करे सो पावन हारी॥
पुत्र हीन कर इच्छा कोई। निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥
पण्डित त्रयोदशी को लावे। ध्यान पूर्वक होम करावे ॥
त्रयोदशी व्रत करे हमेशा। तन नहीं ताके रहे कलेशा॥
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे। शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥
जन्म जन्म के पाप नसावे। अन्तधाम शिवपुर में पावे॥
कहत अयोध्या आस तुम्हारी। जानि सकल दुःख हरहु हमारी॥
॥दोहा॥
नित्य नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीस।
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥
मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान।
अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण॥
* मनोकामना के अनुसार शिव चालीसा पाठ करने से होंगे फायदे-
* मन में कोई भय हो तो-
जय गणेश गिरीजा सुवन' मंगल मूल सुजान
कहते अयोध्या दास तुम' देउ अभय वरदान
- ऐसा लगातार 40 दिन तक करने से लाभ होगा।
* दुखों और परेशानी ने यदि घेर लिया है तो-
देवन जबहिं जाय पुकारा' तबहिं दुख प्रभु आप निवारा।
* किसी भी कार्य को सिद्ध करने के लिए-
पूजन रामचंद्र जब कीन्हा' जीत के लंक विभीषण दीन्हा।
* मनोवांछित वर प्राप्ति के लिए इस पंक्ति का पाठ करें-
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर' भई प्रसन्न दिए इच्छित वर।
* कर्ज से मुक्ति पाने के लिए इसे जपें-
ॠनिया जो कोई हो अधिकारी। पाठ करे सो पावन हारी॥
* धन प्राप्ति के लिए-
धन निर्धन को देत सदाहीं। जो कोई जांचे वो फल पाहीं॥
* संतान प्राप्ति के लिए-
पुत्र हीन कर इच्छा कोई। निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥
* शत्रु नाश के लिए और अशुद्ध भावनाओं/विकारों से मुक्ति के लिए-
दुष्ट सकल नित मोहि सतावै। भ्रमत रहे मोहि चैन न आवै॥
त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो। यही अवसर मोहि आन उबारो॥
लै त्रिशूल शत्रुन को मारो। संकट से मोहि आन उबारो॥

खाना खजाना / शौर्यपथ / दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं, एक जिन्हें बैंगन का भर्ता बहुत-बहुत पसंद होता है और दूसरे जिन्हें बैंगन भरता बिल्कुल भी पसंद नहीं होता। ऐसे में आप किसी भी कैटगरी में क्यों न हों लेकिन आपको बैंगन भरता बनाने के लिए कुछ टिप्स जरूर ट्राई करने चाहिए जिससे कि बैंगन भरता चटपटा बने। आइए, जानते हैं कुछ कुकिंग टिप्स -

-बैंगन को धोकर बीच में चीरा लगाकर अंदर चेक कर लें कि कहीं कोई कीड़ा तो नहीं।
-बैंगन भूनने से पहले इस पर तेल जरूर लगा लें इससे छिलका आसानी से उतर जाएगा।
-बैंगन भूनने में इसके जल जाने का डर बिल्कुल न करें।
-बैंगन जितना ज्यादा भूना जाएगा इसका स्वाद उतना ही बढ़िया आएगा।
-बैंगन भर्ते में जब तक वो 'स्मोकी' (Smoky) वाली खुशबू नहीं आती, तब तक उसका मजा नहीं आता है।
-मटर डालकर बनाया गया भर्ता भी बहुत स्वादिष्ट लगता है।
-प्याज, लहसुन, हरी मिर्च और टमाटर। इन सभी चीजों का इस्तेमाल जरूर करें।

 

ऐसे बनाएं
सामग्री-
2 बड़ा बैंगन
2 मीडियम प्याज
3 टमाटर
250 ग्राम दही
2 टी स्पून लाल मिर्च पाउडर
1 टी स्पून हल्दी पाउडर
1 टी स्पून धनिया पाउडर
स्वादानुसार नमक
1/2 कप तेल
2 टी स्पून अदरक लहसुन का पेस्ट
1 टी स्पून गरम मसाला
गार्निशिंग के लिए:
हरी मिर्च , टुकड़ों में कटा हुआ
हरा धनिया, टुकड़ों में कटा हुआ

वि​धि-
बैंगन को आंच पर रख कर भून लें।
जब बैंगन काला या भूरा हो जाए तो उसका छिलका उतार लें।
बैंगन को मैश करें।
एक पैन में तेल गर्म करें। इसमें कटा हुआ प्याज डालें और फ्राई करें। इसमें अदरक लहसुन को पेस्ट डालें। कटे हुए टमाटर डालकर तेल अलग होने तक इसे चलाएं।
इसमें लाल मिर्च, धनिया पाउडर, हल्दी पाउडर, गरम मसाला और नमक डालें। इसे अच्छे से मिलाएं इसमें दही डालकर मिलाएं।
मैश किया हुआ बैंगन इसमें डालें और चलाएं।
मैश किया हुआ बैंगन इसमें डालें और चलाएं।
इस 5 मिनट तक चलाते हुए अच्छे से मिलाएं।
हरी मिर्च, हरा धनिया और गरम मसाला डालकर गार्निश करें।
रोटी के साथ सर्व करें।

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