July 24, 2026
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    रायपुर / शौर्यपथ / स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम आज समग्र शिक्षा के माध्यम से बस्तर जिले के शिक्षकों के साथ प्रारंभिक भाषाई एवं गणितीय कौशलों के विकास के संबंध में आयोजित परिचर्चा में शामिल हुए। उन्होंने बस्तर संभाग के शिक्षकों से स्कूलों के खोले जाने के बारे में राय ली। शिक्षकों ने स्कूलों को खोले जाने के संबंध में निर्णय लेने का अधिकार स्थानीय निकायों विशेषकर शाला प्रबंधन समितियों को दिए जाने का आग्रह किया, ताकि स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर पालकों के साथ चर्चा कर उचित निर्णय लिया जा सके। स्कूल शिक्षा मंत्री ने वेबिनार के माध्यम से बस्तर, दंतेवाड़ा, कांकेर, सुकमा, बीजापुर के सुदूर अंचलों में कार्यरत शिक्षकों से सीधा संवाद कर उनके विचारों को जाना।
    स्कूल शिक्षा मंत्री को बस्तर संभाग के संयुक्त संचालक अमिय राठिया ने संभाग के विभिन्न जिलों में संचालित सरल कार्यक्रम एवं उसके माध्यम से बच्चों के प्रारंभिक कौशलों में हुए सुधारों की जानकारी दी। मंत्री डॉ. टेकाम द्वारा शिक्षकों से स्कूलों के खोले जाने के बारे में राय ली गई।
    शिक्षकों ने बताया कि गांवों में कोरोना की स्थिति बहुत कम लेकिन शहरों में इसका प्रभाव अधिक है। स्कूल खुलने पर शहरों में निवासरत शिक्षक यदि गावों में पढ़ने आएंगे तो संक्रमण फैलने की संभावना होगी। स्कूल खुलने पर आधे-आधे बच्चों को रोस्टर पद्धति से या फिर कक्षाओं को अलग अलग दिनों या समय पर खोले जाने का सुझाव भी कुछ शिक्षकों द्वारा दिया गया। शिक्षकों द्वारा पोर्टा केबिन, आश्रम शाला और केजीबीवी में बच्चों की बहुत अधिक संख्या होने से इन संस्थाओं को खोलने से सोशल डिस्टेन्सिंग का पालन नहीं हो पाने और संक्रमण के खतरे की ओर भी ध्यान आकर्षित किया गया।
    स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने केन्द्रों, मोहल्ला कक्षाओं में कोरोना से संबंधित सावधानियों की जानकारी भी ली। सभी शिक्षकों ने अवगत कराया कि साबुन से हाथ धोने, मास्क पहनकर आने और दूरी बनाकर बिठाकर ही उनकी कक्षाएं ली जाती हैं। डॉ. टेकाम ने संकट के समय शिक्षकों द्वारा स्वेच्छा से अध्यापन करवाएं जाने पर सभी की खूब प्रशंसा की एवं बस्तर क्षेत्र में जिला प्रशासन द्वारा संचालित बुल्टू के बोल, लाउडस्पीकर स्कूल और मोहल्ला कक्षाओं को एक ऐसा सफल उपाय बताया जिसकी वजह से बच्चों की पढाई निरंतर जारी रह सकी।
    वेबिनार में बस्तर संभाग में प्रथम के साथ संचालित सरल कार्यक्रम में बेहतर उपलब्धि हासिल किए हुए बच्चों एवं पीछे छूट रहे बच्चों का अध्यापन कर रहे शिक्षकों के साथ विस्तार से उनके अनुभवों को सुना गया। वेबिनार के माध्यम से राज्य में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत प्रस्तावित फाउंडेशनल लिटरेसी और न्यूमेरेसी पर कार्ययोजना बनाने हेतु जमीनी स्तर से आइडियाज निकालने का प्रयास किया गया। स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. टेकाम ने ऐसी विषम परिस्थितियों में बच्चों को सिखाने संबंधी विधियों की जानकारी ली। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा संचालित सौ दिवसीय कार्यक्रम में किस प्रकार से शिक्षक रोचक गतिविधियों का इस्तेमाल कर स्थानीय सामग्री का उपयोग कर सरल विधि से पढ़ा रहे हैं, इसकी जानकारी दी गयी।

    सफलता की कहानी /शौर्यपथ /

    पशुधन विकास विभाग द्वारा हितग्राही मूलक योजनाओं का क्रियान्वयन सुकमा जिले में सफलता पूर्वक हो रहा है। जिले में विभागीय योजनाओं जैसे बैकयार्ड कुक्कट पालन, शबरी लेयर फार्मिंग, शूकर पालन, मुर्गी पालन, बकरी पालन आदि योजनाओं के तहत हितग्राहियों को आजीविका मूलक गतिविधियों से जोड़कर आर्थिक मजबूती, स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
    गरीबी उन्मूलन योजना के अन्तर्गत महिला स्व-सहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्येश्य से पशुधन विकास विभाग जिला सुकमा द्वारा नवम्बर माह में ग्राम पंचायत केरलापाल के ग्यारह स्व-सहायता समूहों को एक-एक माह के 50-50 नग कड़कनाथ चूजे एवं दाना प्रदान किया गया था। जिससे उन्हें अपनी आय में वृद्धि के साथ-साथ आर्थिक स्थिति सदृढ़ करने में सहायता मिल सके।
    चूज़ों की देख-रेख में देती हैं पर्याप्त समय
    पटेलपारा केरलापाल में सत्यम स्व सहायता समूह, जय मां काली स्व सहायता समूह एवं शिवम् स्व सहायता समूह की महिलाओं ने बताया कि कड़कनाथ के चूजे मिलने से उन्हें आत्मनिर्भरता की राह नजर आई। महिलाओं ने बताया कि विभाग द्वारा प्रदाय किए गए चूजे उत्तम नस्ल के है जिनसे वे निश्चित ही आर्थिक लाभ कमा सकेंगी। जय मां काली समूह की अध्यक्ष श्रीमती सुकड़ी मरकाम ने बताया कि इन चूजों को रोजाना तीन समय खुराक दी जाती है जो इनकी वृद्धि होने में सहायक है। विभाग द्वारा चूजों के लिए 50 किलो दाना भी प्रदान किया गया है।
    वहीं ग्राम केरलापाल सड़कपारा के शेरावाली स्व सहायता समूह की अध्यक्ष श्रीमती गन्धेश्वरी मंडल ने बताया कि समूह की महिलाएं चूजो की देख रेख के लिए पर्याप्त समय देती है। समूह के सदस्य कड़कनाथ चूजों के पालन को लेेकर खासी उत्साही हैं। चूजों को खुराक में वे दाने के साथ चावल, धान, कोंढा आदि मिलाकर देती है जिससे उनमें जल्दी वृद्धि हो। इसके साथ ही ठंड से बचाने के लिए बाड़े को चारों तरफ से कपड़े और बोरे से ढंक रखा है ताकि चूजे मौसमी सर्दी से बचे रहे। सुबह और रात को बाड़े को गरम रखने के लिए बल्ब और अलाव जलाकर व्यवस्था करती है, जिससे बाड़े में संतुलित तापमान बना रहता है।
    कड़कनाथ का व्यवसाय कर कमाएंगी हजारों रुपए
    चर्चा के दौरान हितग्राही महिलाओं ने बताया कि कड़कनाथ नस्ल के मुर्गियों की बाजार में अच्छी खासी कीमत है। अपने पौष्टिक गुणों के कारण साधारण प्रजाति की मुर्गियों की तुलना में इसकी कीमत लगभग दो से तीन गुना है। मंहगी होने के बावजूद भी लोग इसे खरीदने से कतराते नहीं। स्थानीय बाजार में कड़कनाथ बड़ी आसानी से लगभग 800 रुपए प्रति किलो की दर से बिक जाते है। जय मां काली स्व सहायता समूह की सदस्य श्रीमती देवे मिश्रा ने बताया कि उनके आस पास पड़ोस के लोगों ने अभी से मुर्गियों के लिए नाम लिखवा रखे हैं। चूज़े अभी लगभग 700 ग्राम वजनी हैं, पर्याप्त वजन होने के बाद वे अपने ग्राहकों को कड़कनाथ विक्रय कर देंगी।
    शासन द्वारा प्रदाय किए गए कड़कनाथ का व्यवसाय कर स्व-सहायता समूह की महिलाएं अधिक आय अर्जित कर सकती हैं। व्यवसाय से उन्हें कड़कनाथ विक्रय करने से तो फायदा होगा ही साथ ही अंडों से निकलने वाले चूजों से वे अगली खेप खुद ही तैयार कर सकती है। अपने विशिष्ट स्वाद और पौष्टिक तत्वों के कारण कड़कनाथ प्रजाति के मुर्गे-मुर्गियां कई प्रकार के रोग के निवारण में फायदेमंद होने के कारण इसकी अच्छी मांग रहती है। जिसको ध्यान में रखते हुए शासन द्वारा गरीब तबके की महिलाओं को स्वावलंबी और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से चूजे प्रदान किए गए हैं। स्व-सहायता समूह की महिलाओं की निष्ठा और लगन इस बात को दर्शाता है कि शासन की योजनाएं ग्रामीण अंचल के लिए लाभकारी सिद्ध हो रही है। जिसमें ग्रामीणों को स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता की राह सुदृढ नजर आती है।

    लाइफस्टाइल /शौर्यपथ / किसी भी स्पेशल मौके पर रेड लिपस्टिक आउटफिट को बहुत ही स्टाइलिश लुक देती है. खासतौर पर पार्टी या फिर वेडिंग फंक्शन में रेड लिपस्टिक का अलग ही क्रेज देखने को मिलता है लेकिन कई बार ऐसा होता है कि इस रंग की लिपस्टिक लगाते वक्त कुछ बेसिक बातों का ध्यान नहीं रखा जाता, जिसकी वजह से लिपस्टिक आपके चेहरे को चार्मिंग लुक देने की बजाय अलग से हाइलाइट होने लगती है. आइए, रेड लिपस्टिक लगाने के कुछ टिप्स जानते हैं-
    -लाल रंग की लिपस्टिक को ब्रश से लगाने की जगह उसे अपनी ऊंगली से बीच से लगाते हुए साइड की ओर लगाएं। इससे आपके होंठों का रंग नेचुरल दिखेगा।
    अगर आपके होंठों का रंग दो शेड का है, तो लाल लिपस्टिक लगाने से पहले आपको प्राइमर लगाने की जरूरत है। प्राइमर लगाने से होंठों का रंग एक जैसा हो जाएगा और लाल रंग उभर कर आएगा।
    -लाल लिपस्टिक के फैलने का खतरा ज्यादा होता है इसलिए हमेशा प्राइमर या फाउंडेशन लगाने के बाद ही लिपस्टिक लगाएं, लिपस्टिक फैले नहीं। प्राइमर लगाने से पहले लिप बाम भी जरूर लगाएं ताकि होंठों को पर्याप्त नमी मिलती रहे। लिप लाइनर लगाना न भूलें।
    -लाल रंग की लिपस्टिक के कई शेड मार्केट में उपलब्ध हैं। कौन-सा शेड आप पर अच्छा दिखता है, इस बारे में अपना होमवर्क पूरा करने के बाद ही लिपस्टिक खरीदें। इसके लिए लिपस्टिक लगाने के बाद पर्याप्त रोशनी में खड़े होकर किसी से पूछें कि लिपस्टिक का रंग आप पर अच्छा लग रहा है या नहीं।
    -अपने होंठों और नाखूनों का रंग कभी भी मैच न करें। लाल लिपस्टिक और लाल नेलपॉलिश साथ-साथ कभी भी अच्छे नहीं दिखेंगे।
    -लाल लिपस्टिक लगा रही हैं, तो अपनी आंखों और पूरे चेहरे का मेकअप कम-से-कम रखें। लाल लिपस्टिक के साथ डार्क मेकअप करने से आप जोकर से कम नहीं दिखेंगी।

    खाना खजाना /शौर्यपथ /लोहड़ी का त्योहार मूंगफली, गजक और रेवड़ी के स्वाद और खुशबू के बिना अधूरा है। गजक एक ट्रडिशनल डिश है जो कि लोहड़ी हो या मकर संक्रान्ति ज्यादातर घरों में बनाई या बाजार से जरूर खरीदी जाती है। तो देर किस बात की आइए जानते हैं कैसे बनाई जाती है स्वादिष्ट तिल की गजक।
    सामग्री-
    -साफ किए हुए तिल-200 ग्राम
    -गुड़ -300 ग्राम
    -बादाम कटे हुए - 15-16
    -काजू कटे हुए -15-16
    -बारीक कटा मेवा- 1 कप
    -इलायची पिसी- 2-3
    घी- 3 चम्मच
    गजक बनाने का तरीका-
    सबसे पहले एक मीडियम आंच में एक कड़ाही रखें और इसमें तिल को अच्छी तरह भून लें। तिल भूनने के बाद इसमें सोंधी सी खुशबू आने लगेगी। इसे एक प्लेट में निकालकर ठंडा होने दें। जब तक तिल ठंडा हो रहा है उसी कड़ाही में घी और गुड़ डालकर धीमी आंच पर उन्हें पकाएं।
    जब तक चाश्नी तैयार हो रही है, तब तक तिल को मिक्सर में दरदरा पीस लें। एक बड़ी और गहरी प्लेट को घी लगाकर चिकना कर लें। अब चाशनी में इलायची पाउडर और तिल का चूरा डालकर अच्छी तरह मिक्स करके चलाते हुए कुछ देर पकाएं। फिर आंच को बंद कर इस मिश्रण को चिकनाई लगी हुई प्लेट में डालकर फैला लें।
    अब इसमें कटे हुए मेवे फैला दें। जब मिश्रण थोड़ा टाइट हो जाए तो इसे बेलन से बेलकर फैला लें। 10 मिनट बाद इसे चाकू की मदद से मनचाहे साइज में काटकर लगभग 30 मिनट के लिए छोड़ दें। ऐसा करने से आपकी गजक अच्छी तरह से सेट हो जाएगी। अब चाहे तो इस गजक को एयर टाइट डिब्बे में रखकर भी स्टोर कर सकते हैं।

    सेहत /शौर्यपथ /ठंड में ड्राई फूट्स खाने के बहुत फायदे हैं।खासतौर पर किशमिश खाने से न सिर्फ आपका हाजमा ठीक रहता है बल्कि इससे आपको ज्यादा ठंड भी नहीं लगती।किशमिश में फॉस्फोरस, कैल्शियम और पोटेशियम पाया जाता है, जो बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में मदद करता है। बच्चों को किशमिश खिलाने से मस्तिष्क को पोषण मिलता है और यादाश्त मजबूत होती है। किशमिश में उच्च मात्रा में फाइबर होता है
    कब्ज दूर करती है किशमिश
    किशमिश खाने से कब्ज में बहुत फायदा मिलता है। इसे पानी में भिगाकर खाने से कब्ज दूर होती है। अगर आपको कब्ज, एसिडिटी और थकान की समस्या है, तो यह काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। इसका नियमित रूप से सेवन करने से जल्द आपको फायदा नजर आएगा।
    खून की कमी दूर करने के लिए
    किशमिश में पर्याप्त मात्रा में विटामिन बी कॉम्प्लेक्स पाया जाता है जिससे खून की कमी नहीं होती। आप में अगर खून की कमी है तो आप 7-10 किशमिश का सेवन रोजाना कर सकते हैं।
    ब्लड प्रेशर
    यदि आपके घर में किसी को उच्च रक्तचाप की समस्या है तो रात को आधे गिलास पानी में 8-10 किशमिश भिगो दें। सुबह उठकर बिना कुछ खाएं किशमिश के पानी को पी लें। आप चाहें तो भीगी हुई किशमिश को खा भी सकते हैं। इससे कुछ दिन में उच्च रक्तचाप की समस्या में आराम मिलेगा।
    लिवर को सेहतमंद रखता है
    प्रतिदि‍न किशमिश के पानी का सेवन करना आपके लिवर को सेहतमंद बनाए रखने और उसे सुचारू रूप से कार्य करने के लिए प्रेरित करने का काम भी करता है। साथ ही आपके मेटाबॉलिज्म के स्तर को नियंत्रित करने में भी सहायक है।
    वजन बढ़ाने में मददगार
    अगर आप अंडरवेट हैं और अपने वजन को बढ़ाना चाहते हैं, तो किशमिश आपकी मदद कर सकती है। किशमिश फ्रुक्टोज से भरपूर होती है, जो शरीर का वजन बढ़ाने में मदद कर सकती है।

    वास्तु /शौर्यपथ /घर में मौजूद ऊर्जा का असर हमारे सपनों पर भी पड़ता है। नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव अधिक होने से सपने भी नकारात्मकता दर्शाते हुए नजर आते हैं। माना जाता है कि मनुष्य अपने कर्मों के अनुसार ही अच्छे या बुरे स्वपन देखता है। अशुभ सपने अगर लगातार आ रहे हैं तो घर का वास्तु ठीक करना आवश्यक हो जाता है। वास्तु में कुछ आसान से उपाय बताए गए हैं, जिन्हें अपनाने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ाया जा सकता है और डरावने स्वपन से मुक्ति भी मिल सकती है।

    हनुमान जी सभी प्रकार का अनिष्ट दूर करने वाले हैं। अगर लगातार डरावने स्वपन आते हैं तो हनुमानजी को याद करें। घर में सुंदरकांड का पाठ करें। रोजाना हनुमान चालीसा का पाठ करें। भयानक स्वप्न आए तो ॐ नमः शिवाय का जप करते हुए सो जाएं। लगातार बुरे स्वपन आएं तो प्रातः उठकर बिना किसी से कुछ बोले तुलसी के पौधे से पूरा स्वप्न कह डालें। बच्चों को अगर डरावने स्वप्न परेशान करते हैं तो उनके सिरहाने पर चाकू रख लें। यह भी माना जाता है कि बेड के सिरहाने पर जूते या चप्पल रखे हों तो भी डरावने स्वप्न आ सकते हैं। गहरे रंग की चादर न ओढ़ें। रात में झूठा मुंह कर सोने से भी डरावने सपने आते हैं। सपने में नदी, झरना या पानी दिखाई दे तो यह पितृ दोष की वजह से हो सकता है। घर में नियमित गंगाजल का छिड़काव करें। अगर बुरा स्वप्न देखकर नींद खुल जाए तो फिर से सो जाना चाहिए। घर में हवन करने के बाद इससे मुक्ति पाई जा सकती है। बुरे स्वप्न किसी को नहीं बताने चाहिए। नियमित रूप से अगर सूर्यदेव की आराधना की जाए तो भी बुरे स्वप्न से निजात पाई जा सकती है। बुरे स्वप्नों से मुक्ति पाने के लिए सुबह उठने के बाद गायत्री मंत्र का जाप करें। जरूरतमंद व्यक्ति को दान दें।

    वास्तु टिप्स /शौर्यपथ / घर में बेडरूम की अपनी एक खास जगह होती है। जहां व्यक्ति आराम करने के साथ ही विचार-विमर्श करता है। व्यक्ति के दिन की शुरुआत और अंत बेडरूम से होती है। कहते हैं कि अगर बेडरूम से खुशी मन से बाहर आते हैं तो पूरा दिन अच्छा निकलता है। जबकि बेडरूम से चिंतित मन से निकलेंगे तो दिन खराब हो जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, बेडरूम सिर्फ व्यक्ति के जीवन में सुख-शांति नहीं लाता है बल्कि यह आर्थिक स्थिति भी मजबूत करता है। कहते हैं कि बेडरूम हमेशा सही होना चाहिए क्योंकि इसका आपके जीवन पर काफी प्रभाव पड़ता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, अगर बेडरूम का वास्तु ठीक नहीं होता तो व्यक्ति के पास पैसा नहीं टिकता है।
    1. वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के उत्तर दिशा में गृह स्वामी का बेडरूम नहीं होना चाहिए। कहते हैं कि कमरे में किसी भी मृत व्यक्ति की तस्वीर नहीं लगानी चाहिए। ऐसा करने से धन हानि और मान-सम्मान में कमी आती है। घर के अन्य सदस्यों के लिए इस दिशा में बेडरूम उत्तम रहता है।
    2. वास्तु शास्त्र के अनुसार, पूर्व दिशा में पति-पत्नी का बेडरूम होना अशुभ माना जाता है। कहते हैं कि इस स्थान पर बेडरूम होने से अशुभ फलों की प्राप्ति होती है।
    3. पूर्व-दक्षिण दिशा को आग्नेय कोण कहा जाता है। कहा जाता है कि इस दिशा में बेडरूम नहीं होना चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार, इस दिशा में बेडरूम होने से अनिंद्रा और व्यक्ति क्रोधी हो जाता है। मानसिक शांति भी नहीं मिलती है। इतना ही नहीं धन संबंधी लिए गए फैसले गलत साबित होते हैं।
    4. वास्तु शास्त्र के अनुसार, दक्षिण दिशा में गृह स्वामी का बेड होना शुभ माना जाता है। कहते हैं कि इस स्थान में चुंबकीय शक्ति अनुकूल होने के कारण तन और मन दोनों स्वस्थ होते हैं। ध्यान रहे कि इस दिशा में सोएं उस वक्त सिर दक्षिण और पैर उत्तर दिशा में होना शुभ होता है। इससे धन लाभ होने की मान्यता है।
    5. पश्चिम दिशा में बच्चों के लिए बेडरूम शुभ माना गया है। सिर्फ घर के मुखिया का बेडरूम इस दिशा में नहीं होना चाहिए। कहते हैं कि बच्चों का इस दिशा में बेडरूम होने से पढ़ाई में मन लगता है और नींद अच्छी आती है।

    शौर्यपथ / साल 2021 में राहु ग्रह का राशि परिवर्तन नहीं है, लेकिन राहु देव नक्षत्र परिवर्तन से सभी जातकों को प्रभावित करेंगे। नए साल की शुरुआत में मृगशिरा और 27 जनवरी को रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। साल के अंत में राहु कृतिका में विराजमान होंगे। जानिए इस राहु ग्रह के नक्षत्र परिवर्तन से किन राशियों को होगा महालाभ-
    1. मेष- राहु के नक्षत्र परिवर्तन के दौरान आपको अचानक धन प्राप्ति हो सकती है। प्रॉपर्टी और जमीन की खरीदारी के लिए यह साल शुभ है। इस साल आपके आय के साधन भी बढ़ेंगे। पारिवारिक जीवन सुखद रहेगा।
    2. कर्क- राहु के नक्षत्र परिवर्तन के समय आपकी आमदनी में वृद्धि हो सकती है। व्यापार से जुड़े लोगों को आर्थिक लाभ हो सकता है। वैवाहिक जीवन सुखमय होगा। पार्टनर के साथ अच्छा समय बिताने का मौका मिलेगा। संतान की ओर सुखद समाचार मिल सकता है।
    3. वृश्चिक- इस राशि वालों को आर्थिक लेन-देन में सावधानी बरतनी होगी। दांपत्य जीवन में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। व्यापार के लिए यह साल उत्तम रहेगा। कार्यक्षेत्र में सफलता हासिल हो सकती है।
    4. कुंभ- कुंभ राशि के जातकों की राहु के रोहिणी नक्षत्र में जाने से स्थिति सामान्य होगी। कार्यक्षेत्र में तरक्की मिल सकती है। कानूनी केस का फैसला आपके हित में आ सकता है। इस दौरान पैसों के लेन-देन में सावधानी बरतें।
    5. मीन- इस राशि के जातकों के साहस और पराक्रम में वृद्धि होगी। आप शत्रुओं पर विजय प्राप्त करेंगे। यात्रा पर जाने के योग बन सकते हैं। यात्राओं का लाभ उठाने में भी सफल होंगे। लव लाइफ भी आपके अनुकूल रहेगी।

    शिक्षा /शौर्यपथ / जब श्रीकृष्ण महाभारत के युद्ध के बाद लौटे तो रुक्मिणी ने रोष में उनसे पूछा कि युद्ध में सब ठीक था कि लेकिन उन्होंने द्रोणाचार्य और भीष्म पितामह जैसे धर्मपरायण लोगों के वध में क्यों साथ दिया? इसपर श्री कृष्ण ने उत्तर दिया कि देवी ये सही है कि वे दोनों धर्मपरायण थे और दोनों ने ही पूरे जीवन धर्म का पालन किया लेकिन उनके किए एक पाप ने उनके सारे पुण्यों पर पानी फेर दिया।
    ये सुनकर रुमणि चौंक गईं और पूछा कि उन दोनों ने कौन से पाप किए थे? श्री कृष्ण ने कहा, जब भरी सभा में द्रौपदी का चीर हरण हो रहा था तब ये दोनों भी वहां उपस्थित थे और बड़े होने के नाते ये दुशासन को ऐसा न करने की आज्ञा दे सकते थे, किंतु दोनों ही उस वक्त चुप रहे और अंजाने में ही अधर्म का साथ दिया। उनके इस एक पाप के आगे, धर्मनिष्ठता छोटी पड़ गई और मुझे भी धर्म का पालन करते हुए उनके वध में पांडवों का साथ देना पड़ा।
    इसके बाद रुक्मिणी ने श्री कृष्ण से पुछा कि उन्होंने कर्ण के वध में क्यों साथ दिया जबकि वह तो अपनी दानवीरता के लिए प्रसिद्ध था। कोई कभी भी उसके द्वार से खाली हाथ नहीं गया उसकी क्या गलती थी?
    श्री कृष्ण ने कहा, वस्तुत: वो अपनी दानवीरता के लिए विख्यात था और उसने कभी किसी को न नहीं कहा, किन्तु जब अभिमन्यु सभी युद्धवीरों को धूल चटाने के बाद युद्धक्षेत्र में आहत हुआ भूमि पर पड़ा था तो उसने कर्ण से, जो उसके पास खड़ा था, पानी मांगा। कर्ण जहां खड़ा था उसके पास पानी का एक गड्ढा था किंतु कर्ण ने मरते हुए अभिमन्यु को पानी नहीं दिया, इसलिये उसका जीवन भर दानवीरता से कमाया हुआ पुण्य नष्ट हो गया। बाद में उसी गड्ढे में उसके रथ का पहिया फंस गया और वो मारा गया।
    शिक्षा: अक्सर ऐसा होता है की हमारे आसपास कुछ गलत हो रहा होता है और हम कुछ नहीं करते। हम सोचते हैं की इस पाप के भागी हम नहीं हैं किंतु मदद करने की स्थिति में होते हुए भी कुछ न करने से हम भी उस पाप के बराबर के ही हिस्सेदार हो जाते हैं। हमारे अधर्म का एक क्षण सारे जीवन के कमाये हुए पुण्य को नष्ट कर सकता है।

    सरकारी खर्च पर करेंगे एमबीबीएस की पढ़ाई: जेएनयू इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस एण्ड रिसर्च सेंटर जयपुर में दिलाया गया प्रवेश
    मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिला प्रशासन दंतेवाड़ा ने निजी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के लिए
    जमा कराई एक करोड़ 36 लाख 74 हजार रूपए की फीस
    तीन विद्यार्थियों के एमबीबीएस कोर्स के लिए कुल 3 करोड़ 32 लाख 25 हजार रूपए का आएगा खर्च
    नीट क्वालिफाई करने के बाद भी तकनीकी कारणों से नहीं मिल पाया
    था एमबीबीएस कोर्स में प्रवेश
    अब साकार होगा डॉक्टर बनने का सपना

    रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की संवेदनशील पहल से प्रदेश के सुदूर अंचल दंतेवाड़ा के तीन प्रतिभावान विद्यार्थियों का डॉक्टर बनने का सपना अब साकार हो सकेगा। पी.ई.टी. तथा पी.एम.टी की कोचिंग हेतु संचालित बालक आवासीय विद्यालय बालूद एवं कन्या आवासीय विद्यालय कारली, दन्तेवाड़ा के इन तीनों छात्र-छात्राओं को जयपुर केे निजी मेडिकल कॉलेज जेएनयू इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस एण्ड रिचर्स सेंटर में सरकारी खर्चे पर प्रवेश दिलाया गया है। इन तीनों छात्र-छात्राओं के प्रवेश के लिए एक करोड़ 36 लाख 74 हजार रूपए फीस जिला प्रशासन दंतेवाड़ा द्वारा जमा करा दी गई है। छत्तीसगढ़ राज्य के इतिहास में यह पहली बार है कि कोई सरकार सुदूर अंचलों के छात्र-छात्राओं को निजी कॉलेज में सरकारी खर्चे पर MBBS की पढ़ाई पूरी कराने जा रही है।
    ज्ञातव्य है कि जिला प्रशासन द्वारा पी.ई.टी. तथा पी.एम.टी की कोचिंग हेतु संचालित बालक आवासीय विद्यालय बालूद एवं कन्या आवासीय विद्यालय कारली, दन्तेवाड़ा से छम्म्ज् 2020 क्वालिफाई कर चुके इन छात्र-छात्राओं का तकनीकी त्रुटि के कारण एमबीबीएस कोर्स हेतु स्टेट काउंसिलिंग में रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाने के कारण ये छात्र-छात्राएं मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लेने से वंचित रह गये थे। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के संज्ञान में जैसे ही यह जानकारी आई, तो उन्होंने संवेदनशील पहल करते हुए छात्र-छात्राओं को निजी मेडिकल कॉलेजों में सरकारी खर्चे पर प्रवेश दिलाने के निर्देश जिला प्रशासन दंतेवाड़ा को दिए। मुख्यमंत्री के निर्देश के परिपालन में जिला प्रशासन द्वारा कार्यवाही करते हुए तीन विद्यार्थियों श्री सुधीर कुमार रजक, श्री जयंत कुमार और कुमारी ऐश्वर्या नाग को निजी कॉलेजों में प्रवेश दिलाने की कार्यवाही सुनिश्चित की गयी। इन तीनों छात्र-छात्राओं के निजी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस कोर्स की फीस 3 करोड़ 32 लाख 25 हजार रूपए में से कुल 1 करोड़ 36 लाख 74 हजार रूपए की राशि जमा करा दी गई है।

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