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शौर्यपथ /माना जाता है कि व्यक्ति की पहचान में उसके कपड़े और जूते में महत्वपूर्ण कारक हैं, लेकिन कोई कितने भी अच्छे कपड़े पहन ले, अगर जूते ठीक नहीं है तो व्यक्ति को महत्व नहीं दिया जाता। ज्योतिष शास्त्र में मानव जीवन की धुरी हर वस्तु पर किसी ने किसी ग्रह को संबध रखती है। काल पुरुष सिद्धांत के अनुसार व्यक्ति की कुंडली का आठवां भाव पैरों के तलवों से संबंधित है और पैरों के जूते भी आठवें भाव को महत्व देते हैं। कुछ जूते दुर्भाग्य का सूचक होते हैं। इनको पहनने से व्यक्ति के जीवन में आर्थिक और कार्यक्षेत्र से संबंधित समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं। ऐसे जूतों के दोष के कारण कई काम बिगड़ जाते हैं। जानिए ज्योतिष की दृष्टि से जूतों का गणित।
-कभी भी उपहार में मिले हुए जूते नहीं पहनने चाहिए। इसे शनिदेव कार्य मे बाधाएं डालते हैं। जूते ना तो किसी से उपहार में लेने चाहिए और ना ही देने।
-चुराए हुए जूते कभी भी ना पहने। कई बार मंदिर और कीर्तन आदि स्थानों से जूते अथवा चप्पल की चोरी जाती हैं। चोरी करने वाले ध्यान रखें कि चोरी के जूते चप्पल पहनने से वह अपने स्वास्थ्य और धन का विनाश कर रहा है।
-उधड़े हुए अथवा फटे जूते पहनकर नौकरी ढूंढने अथवा महत्वपूर्ण कार्य के लिए न जाए, असफलता मिलेगी।
-ऑफिस या कार्यक्षेत्र में भूरे रंग के जूते पहनकर जाने से व्यक्ति के कार्यों में अक्सर बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं।
-चिकित्सा और लोहे से संबंधित व्यक्तियों को कभी भी सफेद जूते नहीं पहननी चाहिए।
-जल से संबंधित और आयुर्वेदिक कार्यों से जुड़े लोगों को नीले रंग के जूते नहीं पहनने चाहिए।
- कॉफी रंग के जूते बैंक कर्मचारियों और अध्ययन क्षेत्र से जुड़े हुए लोगों को नहीं पहनी चाहिए। इससे आपकी कार्यशैली में दिक्कतें बनी रहती हैं। आपके कार्य को संदेह की दृष्टि से देखा जाता है।
-अपने जूते अथवा चप्पल की पॉलिस और चमक सदैव बनी रहनी चाहिए। यह आपके व्यक्तित्व का प्रभाव दूसरे लोगों पर छोड़ती है।
- ज्योतिष और वास्तु में जूते-चप्पल (मृत चर्म) शनि राहु के कारक हैं। जब भी हम अपने बेडरूम में जूते रखते हैं तो पति-पत्नी के बीच का लगाव एवं सम्मान धीरे-धीरे कम होता जाता है।
- जो व्यक्ति बाहर से आकर अपने चप्पल, जूते, मोजे इधर-उधर फेंक देते हैं, उन्हें शत्रु बहुत परेशान करते हैं। कार्य में बाधा उत्पन्न होती हैं और उनकी कार्य योजना ठीक प्रकार से पूर्ण नहीं हो पाती।
- जूते पहनकर भोजन करने से शरीर में धीरे-धीरे नकारात्मकता आ जाती है और शरीर की पवित्रता भंग हो जाती है।
-घर में जूतों के लिए अलग स्थान रखें। कभी भी मंदिर अथवा रसोई में जूते चप्पल पहनकर न जाएं।
-रसोई में महिलाएं अक्सर काम करती हैं। रसोई के लिए अलग से प्लास्टिक चप्पल या कपड़े के जूते प्रयोग कर सकती हैं। ये जूते-चप्पल केवल रसोई में ही प्रयोग करें।
- भगवान को भोग लगाते समय अथवा खाना परोसने के समय जूते निकाल कर उचित स्थान पर रखें।
-वास्तु के अनुसार जूते-चप्पल निकालने के लिए शुभ स्थान दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम ,उत्तर-पश्चिम अथवा पश्चिम दिशा ठीक मानी गई है। इन दिशा में उचित स्थान पर शू रैक बनाकर जूतों को उसमें ढक कर रखें। मुख्य द्वार पर या मुख्य द्वार के सामने शू रैक बनाना अच्छा नहीं होता है। जीने के कोने में बने शू रैकघर की उन्नति के लिए शुभ नहीं होते। हमें ऐसे स्थानों पर जूते-चप्पल रखने से बचना चाहिए।
सेहत / शौर्यपथ /कान में लगातार सीटी बजने की शिकायत को हल्के में न लें जनाब। यह शरीर में विटामिन-बी12 की कमी का संकेत हो सकती है। यूएस नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में छपे एक हालिया अध्ययन में यह चेतावनी दी गई है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक विटामिन-बी12 पानी में घुलनशील एक महत्वपूर्ण विटामिन है, जिसे ‘कोबालामिन’ के नाम से भी जाना जाता है। लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन के अलावा डीएनए के निर्माण में इसकी अहम भूमिका होती है।
मस्तिष्क के सुचारू रूप से काम करने के लिए भी इसकी जरूरत पड़ती है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के अध्ययन में जिन 42.5 फीसदी प्रतिभागियों में ‘टिनिटस’ यानी कान में सीटी बजने या झनझनाहट की समस्या देखी गई, उनमें से सभी में विटामिन-बी12 की कमी भी नजर आई।
शौर्यपथ / मकर संक्राति को मनाने की सभी की अपनी परम्पराएं है। किसी के लिए तिल-गुड़ के बिना यह त्योहार अधूरा है, तो कहीं दाल-चावल और तिल दान किए जाते हैं। वहीं, इस दिन खिचड़ी बनानी शुभ मानी जाती है। इसके अलावा खिचड़ी दान भी करने की परम्परा है। ऐसे में क्या आप जानते हैं कि खिचड़ी क्यों मानी जाती है शुभ और सेहत से जुड़े फायदे-
खिचड़ी खाने का पौराणिक महत्व
मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी खाने से सूर्यदेव प्रसन्न होते है। इस दिन खरीफ की फसलों चावल, चना, मूंगफली, गुड़, तिल उड़द इन चीजों से बनी सामग्री से भगवान सूर्य और शनि देव की पूजा की जाती है। मकर संक्रांति के दिन चावल और उड़द की दाल से खिचड़ी बनाकर भगवान सूर्य को भोग लगाया जाता है और इसे प्रसाद के रूप में लोग एक दूसरे के घर भेजते हैं।
-पाचन क्षमता कमजोर होने पर भी यह आहार आसानी से पच जाता है और पाचन क्रिया को दुरुस्त करता है, इसलिए बीमारी में मरीजों को इसे खिलाया जाता है, क्यों उस वक्त पाचन शक्ति कमजोर होती है।
-दाल, चावल, सब्जियों और मसालों से तैयार की गई खिचड़ी काफी स्वादिष्ट और पोषण से भरपूर होती है, जो शरीर को ऊर्जा और पोषण देती है। इसके माध्यम से एक साथ सभी पोषक तत्व प्राप्त किए जा सकते हैं।
-अक्सर कब्ज या अपच की स्थिति में खिचड़ी खाना फायदेमंद होता है और आरामदायक भी। इसे खाने के बाद पेट में अतिरिक्त भारीपन नहीं लगता और जल्दी पाचन भी हो जाता है।
-घी, दही, नींबू या अचार के साथ अलग-अलग फायदे भी देती है, जैसे घी डालकर खाने से शक्ति भी मिलती है और प्राकृतिक चिकनाई भी, दही के साथ यह कई गुना फायदेमंद होती है और नींबू से विटामिन सी के साथ अन्य फायदे देती है।
-कफ, फीवर, कमजोरी होने पर खिचड़ी खाने से शरीर को जरूरी पोषक तत्वों की प्राप्ति होती है और बॉडी जल्दी हील कर पाती है। खिचड़ी बॉडी को डिटॉक्स करने का काम भी करती है।
-अगर किसी को लूज मोशन की समस्या हो रही है तो ऐसे में छिलकेवाली मूंग दाल की खिचड़ी खानी चाहिए। यह खिचड़ी सूखी नहीं बल्कि कुछ अधिक लिक्विड वाली बनानी चाहिए। इससे लूज मोशन और पेट दर्द में तुरंत राहत मिलती है। साथ ही यह शरीर में कमजोरी भी नहीं आने देती है।
-आपका वजन तेजी से बढ़ रहा है या फिर पेट के आसपास चर्बी जमा हो रही है, तो दिन में एक बार खिचड़ी जरूर खाएं। इससे आपका वजन कंट्रोल रहने के साथ पेट की चर्बी भी घट जाएगी।
सेहत /शौर्यपथ /सर्दियों में कुछ चीजों का सेवन करना किसी जड़ी-बूटी के सेवन करने से कम नहीं है। हम आपको सर्दियों में गुड़ खाने के फायदे और इससे बनी चीजें खाने के फायदे बता चुके हैं। तिल हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मददगार है. कई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि तिल में पाया जाने वाला तेल हाई ब्लड प्रेशर को कम करता है और दिल पर ज्यादा भार नहीं पड़ने देता यानी दिल की बीमारी दूर करने में भी तिल मददगार है-
तिल में मौजूद पोषक तत्व
तिल में सेसमीन नाम का एन्टीऑक्सिडेंट पाया जाता है जो कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने से रोकता है। अपनी इस खूबी की वजह से ही यह लंग कैंसर, पेट के कैंसर, ल्यूकेमिया, प्रोस्टेट कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर होने की आशंका को कम करता है। इसके अलावा भी तिल के कई फायदे हैं।
तिल खाने के फायदे-
-शरीर में खून की मात्रा को सही बनाए रखने में भी मददगार है तिल।
-बाल और त्वचा को मजबूत और सेहतमंद रखने के लिए रोजाना तिल का सेवन बहुत ही लाभकारी माना जाता है।
-तिल में मौजूद प्रोटीन पूरे शरीर को भरपूर ताकत और एनर्जी से भर देता है. इससे मेटाबोलिज्म भी अच्छी तरह काम करता है।
-तिल में कुछ ऐसे तत्व और विटामिन पाए जाते हैं जो तनाव और डिप्रेशन को कम करने में सहायक होते हैं।
-तिल में कई तरह के लवण जैसे कैल्शिेयम, आयरन, मैग्नीशियम, जिंक और सेलेनियम होते हैं जो हृदय की मांसपेशियों को सक्रिय रूप से काम करने में मदद करते हैं।
-तिल में डाइट्री प्रोटीन और एमिनो एसिड होता है जो बच्चों की हड्डियों के विकास को बढ़ावा देता है। इसके अलावा यह मांस-पेशियों के लिए भी बहुत फायदेमंद है।
-तिल का तेल त्वचा के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। इसकी मदद से त्वचा को जरूरी पोषण मिलता है और इसमें नमी बरकरार रहती है।
कितनी मात्रा में खाना चाहिए तिल
तिल को ज्यादा नहीं खाना चाहिए क्योंकि यह गर्म होते हैं इसलिए आपको तिल का सेवन करने में सावधानी रखनी चाहिए। आपको रोजाना 50-70 ग्राम तक तिल का सेवन नहीं करना चाहिए। खासतौर पर महिलाओं और छोटे बच्चों को इससे भी कम मात्रा में तिल का सेवन करना चाहिए।
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / नाचने-गाने और खुशियां बांटने का त्योहार है लोहड़ी. यह त्योहार केवल हरियाणा, हिमाचल, दिल्ली व जम्मू -कश्मीरर तक ही सीमित नहीं रह गया है, बल्कि देश के कई और राज्यों में भी इसे मनाया जाता है वहीं, पंजाब में इस त्योकहार को लेकर अलग ही उत्सारह देखने को मिलता है। पंजाब में इस पर्व को नई फसलों से जोड़कर भी देखा जाता है। इस त्योयहार के समय गेहूं व सरसों की फसल अंतिम चरण में होती है। इस बार लोहड़ी 13 जनवरी को मनाई जाएगी। ऐसे में अगर आप अपने दोस्तों को लोहड़ी के बधाई संदेश भेजना चाहते हैं, तो नीचे लिखे मैसेज को भेज सकते हैं-
दस्तक दी, किसी ने कहा सपने लाया हूँ,
खुश रहो आप हमेशा, इतनी दुआ लाया हूँ
नाम है मेरा संदेश,
आपको हैप्पी लोहड़ी विश करने आया हूँ।
मूंगफली दी खुशबू ते गुड़ दी मिठास,
मक्की दी रोटी ते सरसों दा साग,
दिल दी खुंशी ते आपनों दा प्यार,
मुबारक होवे तुहानूं लोहड़ी दा ये त्योहार
फिर आ गई भांगड़े दी वारी,
लोहड़ी मनौन दी करो तियारी,
आग दे कोल सारे आओ,
सुंदरिए मुंदरिए जोर नाल गाओ।
इससे पहले कि लोहड़ी की शाम हो जाए,
मेरा संदेश औरों की तरह आम हो जाए,
और सभी मोबाइल नेटवर्क जाम हो जाएं,
आपको लोहड़ी की शुभकामनाएं।
मीठे गुड़ में मिल गया तिल,
उड़ी पतंग और खिल गया दिल,
आपके जीवन में हर दिन आए शुख-शांति।
wish you a very Happy Lohri
गन्ने दे रस तों चीनी दी बोरी,
फेर बनी उसतों मीठी-मीठी रेवड़ी,
रल मिल सारे खाइये तिल दे नाल,
ते मनाइये अस्सी खुशियां भरी लोहड़ी
पंजाबी भंगड़ा ते मक्खन-मलाई,
पंजाबी तड़का ते दाल-फ्राई,
तुहानू लोहड़ी दी लख-लख बधाई।
खाना खजाना /शौर्यपथ /सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश करने की घटना सूर्य की मकर संक्रांति कहलाती है। इस साल मकर संक्रांति का त्योहार 14 जनवरी दिन गुरुवार को मनाया जाएगा। मकर संक्रांति के दिन उड़द दाल खिचड़ी जरूर बनाई जाती है। उड़द दाल की खिचड़ी न सिर्फ खाने में स्वादिष्ट होती है बल्कि सेहत से भी भरपूर होती है। आइए जानते हैं कैसे बनाई जाती है यह टेस्टी खिचड़ी।
उड़द दाल की खिचड़ी बनाने के लिए आवश्यक सामग्री-
-चावल - 200 ग्राम
-उड़द की छिलके वाली दाल - 150 ग्राम
-घी - 2 बड़े चम्मच
-नमक - स्वादानुसार
-हरा धनिया - 1 बड़ा चम्मच
-हींग - 1 चुटकी
-जीरा - 1 छोटा चम्मच
-हरी मिर्च - 2 (बारीक कटी हुई)
-अदरक - 1 इंच टुकड़ा (बारीक कटा हुआ)
-हल्दी पाउडर - 1/2 छोटा चम्मच
-हरी मटर के दाने - 1 छोटा कटोरी
उड़द दाल की खिचड़ी बनाने का तरीका-
उड़द दाल की खिचड़ी बनाने के लिए सबसे पहले चावल को अच्छी तरह धोकर थोड़ी देर भिगोकर रख दें। इसके बाद कुकर में घी गर्म करके उसमें हींग और जीरा डालें। जब जीरा अच्छी तरह से भुन जाए तो उसमें हरी मिर्च, अदरक, हल्दी पाउडर और मटर के दाने डाल कर 2 मिनट तक भूनें। इसके बाद इसमें चावल डालकर 2-3 मिनट तक करछी से चलाकर खिचड़ी को भूनें।
जब चावल मसालों के साथ अच्छी तरह से भुन जाए तो इसमें दाल और चावल की मात्रा का चार गुना पानी डालकर कुकर बंद कर दें। अब एक सीटी आने के बाद 5 मिनट तक धीमी आंच पर खिचड़ी को पकने दें। इसके बाद गैस बंद करके कुकर का प्रेशर खत्म होने पर ही कुकर का ढक्कन खोलें। आपकी मकर संक्रांति की टेस्टी खिचड़ी सर्व करने के लिए तैयार है।
लाइफस्टाइल /शौर्यपथ/ आंखों के किनारे काले धब्बे (डार्क सर्कल) भला किसे अच्छे लगते हैं। कोई इनसे निजात पाने के लिए महंगे कॉस्मेटिक उत्पादों का सहारा लेता है तो कोई आलू के छिल्के रगड़ने जैसे घरेलू उपाय आजमाता है। हालांकि, ब्राजील में महिलाएं ‘डार्क सर्कल’ छिपाने के लिए सारी हदें पार कर दे रही हैं। वे आंखों के आसपास त्वचा की रंगत वाला टैटू गुदवा रही हैं, ताकि किसी को काले घेरों की भनक न लग पाए।
‘डार्क सर्कल’ पर पर्दा डालने वाली टैटू तकनीक ब्राजील के मशहूर टैटू कलाकार रोदोल्फो तोरिज के दिमाग की उपज है। वह टैटू गन की मदद से आंखों के किनारे ग्राहक की त्वचा से हूबहू मेल खाते रंग वाली खास स्याही का छिड़काव करते हैं। इससे ‘डार्क सर्कल’ तो ढक ही जाते हैं, साथ ही दाग-धब्बे और झुर्रियों के निशान भी सामने वाले को नजर नहीं आते।
रोदोल्फो के मुताबिक टैटू में इस्तेमाल स्याही त्वचा की बाहरी परत के नीचे जम जाती है। यह बाहरी परत और काले घेरों का सबब बनने वाले रसायनों के बीच एक दीवार की भूमिका निभाती है। इससे इन रसायनों का असर त्वचा पर नहीं उभर पाता और ‘डार्क सर्कल’ दूर रहते हैं।
रोदोल्फो ने दावा किया कि टैटू में इस्तेमाल स्याही पूरी तरह से सुरक्षित है। इससे लैस टैटू गुदवाने के लिए ग्राहक का महज एक बार पार्लर आना काफी है। हालांकि, उसे कुछ दिनों तक मेकअप से दूरी बनाए रखनी पड़ सकती है।
‘स्ट्रेच मार्क’ ढंकने वाली तकनीक भी पेश की
-रोदोल्फो इससे पहले ‘स्ट्रेच मार्क’ ढंकने वाली तकनीक ईजाद कर सुर्खियां बंटोर चुके हैं। दरअसल, पुरुषों को चर्बी के घटने-बढ़ने और महिलाओं को शिशु को जन्म देने के बाद अक्सर ‘स्ट्रेच मार्क’ उभरने की शिकायत सताती है। रोदोल्फो ‘एयरगन’ की मदद से ‘स्ट्रेच मार्क’ की धारियों को ग्राहक की त्वचा की रंगत वाली स्याही से भर देते हैं। इससे ‘स्ट्रेच मार्क’ त्वचा के रंग से इस कदर घुल जाते हैं कि उनकी भनक तक नहीं लगती।
सोशल मीडिया पर छाने तो डिजिटल मेकअप का सहारा
-कोरोनाकाल में लोग न सिर्फ अपनों की झलक पाने, बल्कि ऑफिस की मीटिंग निपटाने के लिए भी वीडियो कॉल का सहारा ले रहे हैं। हालांकि, घर में लोगों का हर वक्त सजे-धजे रहने का मन नहीं करता। काम की व्यस्ता बढ़ने के कारण उनके पास मेकअप के लिए समय भी नहीं होता। ऐसे में एक अमेरिकी कंपनी ने ‘वर्चुअल मेकअप’ ऐप पेश किया है, जो चेहरे पर जंचने वाला मेकअप धारण कर वीडियो कॉल पर खुद को आकर्षक रूप में दर्शाने में मदद करेगा।
-ब्राजील के मशहूर टैटू आर्टिस्ट रोदोल्फो तोरिज ने यह नई तकनीक ईजाद की है।
जानें क्या है खास-
- इस तकनीक में रोदोल्फो टैटू गन से त्वचा की रंगत वाली खास स्याही का छिड़काव करते हैं ।
-आंखों के नीचे के काले घेरे ढक जाते हैं, झुर्रियां और दाग-धब्बे भी छिप जाते हैं।
क्यों पड़ते हैं काले घेरे-
-‘डार्क सर्कल’ सबसे आम समस्याओं में से एक है, ढलती उम्र, नींद की कमी, थकान और लगातार कई घंटों तक स्क्रीन का इस्तेमाल इसकी मुख्य वजह माना जाता है।
हालांकि, कई मामलों में यह विटामिन ए, सी, के, ई और आयरन सहित विभिन्न पोषक तत्वों की कमी की तरफ भी इशारा करता है, सिगरेट-शराब की लत भी जिम्मेदार है।
धर्म संसार /शौर्यपथ / साल 2021 में मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जा रही है। इस दिन पर्व का का पुण्य काल 8 घंटे का रहेगा।
यह सुबह 8 बजकर 30 मिनट से लेकर शाम 5 बजकर 46 मिनट तक होगा। शास्त्रों के अनुसार इस दौरान स्नान-दान से कई गुना फल प्राप्त होता है। मकर संक्रांति पर मकर राशि में कई महत्वपूर्ण ग्रह एक साथ गोचर करेंगे। इस दिन सूर्य, शनि, गुरु, बुध और चंद्रमा मकर राशि में रहेंगे। जो एक शुभ योग का निर्माण करते हैं। इसीलिए इस दिन किया गया दान और स्नान जीवन में बहुत ही पुण्य फल प्रदान करता है और सुख समृद्धि लाता है।
इस वर्ष मकर संक्रांति पर सूर्य, शनि, गुरु, बुध और चंद्रमा मकर राशि में होंगे। इस स्थिति को मकर संक्रांति के लिए बेहद शुभ फलदायी माना गया है।
इस दिन सूर्यदेव के साथ इन सब ग्रहों का पूजन करें। सूर्यदेव के साथ नवग्रहों का विधि-विधान से पूजा करने पर व्यक्ति को मनचाहा वरदान प्राप्त होता है।
मकर संक्रांति के दिन अगर दान किया जाए तो इसका महत्व बेहद विशेष होता है। इस दिन व्यक्ति को अपने सामर्थ्यनुसार दान देना चाहिए। साथ ही पवित्र नदियों में स्नान करना चाहिए। इस दिन खिचड़ी का दान देना विशेष फलदायी माना जाता है। साथ ही गुड़-तिल, रेवड़ी, गजक आदि का प्रसाद के रूप में बांटा जाता है।
जब तक सूर्य पूर्व से दक्षिण की ओर चलता है, इस दौरान सूर्य की किरणों को अशुभ माना गया है, लेकिन जब सूर्य पूर्व से उत्तर की ओर गमन करने लगता है, तब उसकी किरणें शुभता, सेहत और शांति को बढ़ाती हैं। जो आध्यात्मिक क्रियाओं से जुड़े हैं उन्हें शांति और सिद्धि प्राप्त होती है। अगर सरल शब्दों में कहा जाए तो पूर्व के कड़वे अनुभवों को भुलकर मनुष्य आगे की ओर बढ़ता है।
स्वयं भगवान कृष्ण ने गीता में कहा है कि, उत्तरायण के 6 माह के शुभ काल में, जब सूर्य देव उत्तरायण होते हैं, तब पृथ्वी प्रकाशमय होती है, अत: इस प्रकाश में शरीर का त्याग करने से मनुष्य का पुनर्जन्म नहीं होता है और वह ब्रह्मा को प्राप्त होता है। महाभारत काल के दौरान भीष्म पितामह जिन्हें इच्छामृत्यु का वरदान प्राप्त था। उन्होंने भी मकर संक्रांति के दिन शरीर का त्याग किया था।
इस बार कब है मकर संक्रांति? जानिए महत्व, मान्यता, मुहूर्त और मंत्र
हर साल जनवरी की 14 या 15 तारीख को मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाता है। इस साल यह त्योहार 14 जनवरी को मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का त्योहार विशेष महत्व रखता है। इस दिन श्रद्धालु भक्ति-भाव से भगवान सूर्य की उपासना करते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मकर संक्रांति वाले दिन भगवान सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं, अन्य राशि प्रवेश से यह प्रवेश अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना गया है।
मकर संक्रांति के दिन भगवान सूर्य के साथ-साथ भगवान गणेश, माता लक्ष्मी और भगवान शिव की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है और मनुष्य का सोया नसीब जाग जाता है। इस दिन गुड़ और तिल का दान किया जाता है, साथ ही खिचड़ी का दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। मकर संक्रांति के दिन स्नान का भी विशेष महत्व है। इस दिन प्रात:काल उठकर पवित्र नदी में स्नान करने से पुण्य मिलता है।
मकर संक्रांति व्रत महत्व: हिंदू पुराणों में वर्णित कथाओं के अनुसार मकर संक्रांति के दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र भगवान शनि के पास जाते हैं। उस समय भगवान शनि मकर राशि का प्रतिनिधित्व कर रहे होते हैं। शनि, मकर राशि के देवता हैं इसलिए इस दिन को मकर संक्रांति के रूप में मनाया जाता है। इस विशेष दिन पर जब कोई पिता अपने पुत्र से मिलने जाता है, तो उनकी सारी समस्याएं दूर हो जाती हैं।
मकर संक्रांति का महाभारत में भी वर्णन किया गया है, जो भीष्म पितामह के जीवन से जुड़ी हुई है। भीष्म पितामह को इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था।
युद्ध में जब वह बाण की शैय्या पर लेटे हुए थे, तब वे अपने प्राण त्यागने के लिए सूर्य के उत्तरायण होने का इंतजार कर रहे थे, क्योंकि उनका मानना था कि उत्तरायण में प्राण त्यागने से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होगी।
मकर संक्रांति तिथि और शुभ मुहूर्त: इस साल 14 जनवरी को मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाएगा।
इस साल पुण्य काल के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 8.30 बजे से 12.30 बजे तक है, जिसकी अवधि 4 घंटे 26 मिनट है वहीं, महापुण्य काल का समय सुबह 8.03 से 8.27 तक है, यानी यह अवधि केवल 24 मिनट की है।
मकर राशि में 5 ग्रहों का संयोग
मकर संक्रांति पर मकर राशि में कई महत्वपूर्ण ग्रह एक साथ गोचर करेंगे। इस दिन सूर्य, शनि, गुरु, बुध और चंद्रमा मकर राशि में रहेंगे। जोकि एक शुभ योग का निर्माण करते हैं। इसीलिए इस दिन किया गया दान और स्नान जीवन में बहुत ही पुण्य फल प्रदान करता है और सुख समृद्धि लाता है।
मकर संक्रांति सूर्य मंत्र : ॐ ह्रीम ह्रींम ह्रौमं स: सूर्य्याय नमः
मकर संक्रांति के दिन इस विशेष सूर्य मंत्र का जाप किया जाना चाहिए।
वर्ष 2021 में मकर संक्रांति किस वाहन पर आ रही है, जानिए पुण्यकाल का समय
मकर संक्रांति के भिन्न-भिन्न रूप, जानिए रोचक 6 बातें
हिन्दू महीने के अनुसार पौष शुक्ल पक्ष में मकर संक्रांति पर्व मनाया जाता है। इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है और तभी से सूर्य उत्तरायण हो जाता है। उत्तरायन अर्थात उस समय से धरती का उत्तरी गोलार्द्ध सूर्य की ओर मुड़ जाता है, तो उत्तर ही से सूर्य निकलने लगता है। इसे सोम्यायन भी कहते हैं। 6 माह सूर्य उत्तरायन रहता है और 6 माह दक्षिणायन। अत: यह पर्व 'उत्तरायन' के नाम से भी जाना जाता है। मकर संक्रांति से लेकर कर्क संक्रांति के बीच के 6 मास के समयांतराल को उत्तरायन कहते हैं। यह त्योहार संपूर्ण भारत ही नहीं बल्कि अन्य देशों में भी विभिन्न रूप में मनाया जाता है।
इस दिन से वसंत ऋतु की भी शुरुआत होती है और यह पर्व संपूर्ण अखंड भारत में फसलों के आगमन की खुशी के रूप में मनाया जाता है। खरीफ की फसलें कट चुकी होती हैं और खेतों में रबी की फसलें लहलहा रही होती हैं। खेत में सरसों के फूल मनमोहक लगते हैं। मकर संक्रांति के इस पर्व को भारत के अलग-अलग राज्यों में वहां के स्थानीय तरीकों से मनाया जाता है।
1. पोंगल : दक्षिण भारत में मकर संक्रांति का त्योहार पोंगल के रूप में मनाया जाता है। यह त्योहार गोवर्धन पूजा, दिवाली और मकर संक्रांति का मिला-जुला रूप है। पोंगल विशेष रूप से किसानों का पर्व है। यह उत्सव लगभग 4 दिन तक चलता है। लेकिन मुख्य पर्व पौष मास की प्रतिपदा को मनाया जाता है। पोंगल अर्थात खिचड़ी का त्योहार। पोंगल के पहले अमावस्या को लोग बुरी रीतियों का त्यागकर अच्छी चीजों को ग्रहण करने की प्रतिज्ञा करते हैं। यह कार्य 'पोही' कहलाता है तथा जिसका अर्थ है- 'जाने वाली।' पोंगल का तमिल में अर्थ उफान या विप्लव होता है। पोही के अगले दिन अर्थात प्रतिपदा को दिवाली की तरह पोंगल की धूम मच जाती है।
2.लोहड़ी : पंजाब और हरियाणा एवं इनके प्रभाव क्षेत्र में इसे लोहड़ी कहते हैं। लोहड़ी बसंत के आगमन के साथ 13 जनवरी, पौष महीने की आखरी रात को मनाया जाता है। इसके अगले दिन माघ महीने की सक्रांति को माघी के रूप में मनाया जाता है। वैसाखी त्योहार की तरह लोहड़ी का सबंध भी पंजाब के गांव, फसल और मौसम से है। लोहड़ी की संध्या को लोग लकड़ी जलाकर अग्नि के चारों ओर चक्कर काटते हुए नाचते-गाते हैं और आग में रेवड़ी, मूंगफली, खील, मक्की के दानों की आहुति देते हैं। अग्नि की परिक्रमा करते और आग के चारों ओर बैठकर लोग आग सेंकते हैं। इस दौरान रेवड़ी, खील, गज्जक, मक्का खाने का आनंद लेते हैं।
3. बीहू : बिहू असम में फसल कटाई का प्रमुख त्योहार है। यह फसल पकने की खुशी में मनाया जाता है। इसी त्योहार को पूर्वोत्तर क्षेत्र में भिन्न भिन्न नाम से मनाते हैं। एक वर्ष में यह त्योहार तीन बार मनाते हैं। पहला सर्दियों के मौसम में पौष संक्रांति के दिन, दूसरा विषुव संक्राति के दिन और तीसरा कार्तिक माह में मनाया जाता है। पौष माह या संक्राति को भोगाली बिहू, विषुव संक्रांति को रोंगाली बिहू और कार्तिक माह में कोंगाली बिहू मनाया जाता है।
4. चहार-शंबे सूरी : ईरान में भी नववर्ष का त्योहार इसी तरह मनाते हैं। यह त्योहार भी लोहड़ी से ही प्रेरित है जिसमें आग जलाकर मेवे अर्पित किए जाते हैं। मसलन, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में मनाई जाने वाली लोहड़ी और ईरान का चहार-शंबे सूरी बिल्कुल एक जैसे त्योहार हैं। इसे ईरानी पारसियों या प्राचीन ईरान का उत्सव मानते हैं। यह त्योहार नौरोज या नवरोज के एक दिन पहले मनाया जाता है।
नौरोज़ या नवरोज़, ईरानी नववर्ष का नाम है, जिससे पारसी धर्म के लोग मनाते हैं, परंतु ईरान के शियाओं भी इस त्योहार को इसलिए मनाते हैं क्योंकि यह उनकी प्राचीन संस्कृति का प्रमुख त्योहार है। यह मूलत: प्रकृति प्रेम का उत्सव है। प्राचीन परंपराओं व संस्कारों के साथ नौरोज का उत्सव न केवल ईरान ही में ही नहीं बल्कि कुछ पड़ोसी देशों में भी मनाया जाता है। पश्चिम एशिया, मध्य एशिया, काकेशस, काला सागर बेसिन और बाल्कन में इसे 3,000 से भी अधिक वर्षों से मनाया जाता है। यह ईरानी कैलेंडर के पहले महीने (फारवर्दिन) का पहला दिन भी है।
5. पतंग महोत्सव : गुजरात सहित कई राज्यों में यह पर्व 'पतंग महोत्सव' के नाम से भी जाना जाता है। पतंग उड़ाने के पीछे मुख्य कारण है कुछ घंटे सूर्य के प्रकाश में बिताना। यह समय सर्दी का होता है और इस मौसम में सुबह का सूर्य प्रकाश शरीर के लिए स्वास्थवर्द्धक और त्वचा व हड्डियों के लिए अत्यंत लाभदायक होता है। अत: उत्सव के साथ ही सेहत का भी लाभ मिलता है।
6. संक्रांति उत्सव : कर्नाटक, केरल तथा आंध्र प्रदेश में इसे केवल संक्रांति ही कहते हैं। इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने का, तिल-गुड़ खाने का तथा सूर्य को अर्घ्य देने का महत्व है। यह दिन दान और आराधना के लिए महत्वपूर्ण है। मकर संक्रांति से सभी तरह के रोग और शोक मिटने लगते हैं। माहौल की शुष्कता कम होने लगती है। इस दिन उड़द, चावल, तिल, चिवड़ा, गौ, स्वर्ण, ऊनी वस्त्र, कम्बल आदि दान करने का अपना महत्त्व है। महाराष्ट्र में भी इसे संक्रांति कहते हैं। इस दिन महाराष्ट्र में महिलाएं आपस में तिल, गुड़, रोली और हल्दी बांटती हैं।
अन्य : इसके अलावा गुजरात और उत्तराखंड में इसे उत्तरायण उत्सव कहते हैं। हरियाणा, हिमाचल और पंजाब में इसका नाम माघी भी है। उत्तर प्रदेश और बिहार में इसे खिचड़ी उसत्व कहते हैं।
भारतीय उममहाद्वीप के अन्य देशों में जैसे बांग्लादेश में पौष संक्रान्ति, नेपाल में माघे संक्रान्ति या खिचड़ी संक्रान्ति, थाईलैण्ड में सोंगकरन, लाओस में पि मा लाओ, म्यांमार में थिंयान, कम्बोडिया में
मोहा संगक्रान और श्री लंका में पोंगल एवं उझवर तिरुनल कहते हैं।
इस बार मकर संक्रांति आ रही है श्रवण नक्षत्र में, जानिए कैसा होगा भविष्यफल
पृथ्वी साढ़े 23 डिग्री अक्ष पर झुकी हुई सूर्य की परिक्रमा करती है तब वर्ष में 4 स्थितियां ऐसी होती हैं, जब सूर्य की सीधी किरणें 21 मार्च और 23 सितंबर को विषुवत रेखा, 21 जून को कर्क रेखा और 22 दिसंबर को मकर रेखा पर पड़ती है। वास्तव में चन्द्रमा के पथ को 27 नक्षत्रों में बांटा गया है जबकि सूर्य के पथ को 12 राशियों में बांटा गया है। भारतीय ज्योतिष में इन 4 स्थितियों को 12 संक्रांतियों में बांटा गया है जिसमें से 4 संक्रांतियां महत्वपूर्ण होती हैं- मेष, तुला, कर्क और मकर संक्रांति। जानिए किस नक्षत्र में आने वाली संक्राति कैसी होती है। दरअसल ये मकर संक्रांति के प्रकार है।
नक्षत्र युक्त संक्रांति :
1. 27 या 28 नक्षत्र को सात भागों में विभाजित हैं-
2. ध्रुव (या स्थिर)- उत्तराफाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तराभाद्रपदा, रोहिणी।
3. मृदु- अनुराधा, चित्रा, रेवती, मृगशीर्ष।
4. क्षिप्र (या लघु)- हस्त, अश्विनी, पुष्य, अभिजित, उग्र- पूर्वाफाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा, पूर्वाभाद्रपदा, भरणी, मघा।
5. चर- पुनर्वसु, श्रवण, धनिष्ठा, स्वाति, शतभिषक।
6. क्रूर (या तीक्ष्ण)- मूल, ज्येष्ठा, आर्द्रा, आश्लेषा।
7. मिश्रित (या मृदुतीक्ष्ण या साधारण)- कृत्तिका, विशाखा।
उक्त नक्षत्रों से पता चलता है कि इस बार की संक्रांति कैसी रहेगी। इस बार संक्रांति का नक्षत्र श्रवण है अर्थात इसकी प्रकृति चर है। चर नक्षत्र शुभ फलदायी होता है। अर्थात इस बार का संक्रांति वर्ष सभी जनों के लिए शुभफल देने वाली सिद्ध होगी। मतलब यह कि सभी का भविष्य शुभ और सफल फलदायी होगा।
धर्म संसार /शौर्यपथ / साल 2021 में मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जा रही है। इस दिन पर्व का का पुण्य काल 8 घंटे का रहेगा।
यह सुबह 8 बजकर 30 मिनट से लेकर शाम 5 बजकर 46 मिनट तक होगा। शास्त्रों के अनुसार इस दौरान स्नान-दान से कई गुना फल प्राप्त होता है। मकर संक्रांति पर मकर राशि में कई महत्वपूर्ण ग्रह एक साथ गोचर करेंगे। इस दिन सूर्य, शनि, गुरु, बुध और चंद्रमा मकर राशि में रहेंगे। जो एक शुभ योग का निर्माण करते हैं। इसीलिए इस दिन किया गया दान और स्नान जीवन में बहुत ही पुण्य फल प्रदान करता है और सुख समृद्धि लाता है।
इस वर्ष मकर संक्रांति पर सूर्य, शनि, गुरु, बुध और चंद्रमा मकर राशि में होंगे। इस स्थिति को मकर संक्रांति के लिए बेहद शुभ फलदायी माना गया है।
इस दिन सूर्यदेव के साथ इन सब ग्रहों का पूजन करें। सूर्यदेव के साथ नवग्रहों का विधि-विधान से पूजा करने पर व्यक्ति को मनचाहा वरदान प्राप्त होता है।
मकर संक्रांति के दिन अगर दान किया जाए तो इसका महत्व बेहद विशेष होता है। इस दिन व्यक्ति को अपने सामर्थ्यनुसार दान देना चाहिए। साथ ही पवित्र नदियों में स्नान करना चाहिए। इस दिन खिचड़ी का दान देना विशेष फलदायी माना जाता है। साथ ही गुड़-तिल, रेवड़ी, गजक आदि का प्रसाद के रूप में बांटा जाता है।
जब तक सूर्य पूर्व से दक्षिण की ओर चलता है, इस दौरान सूर्य की किरणों को अशुभ माना गया है, लेकिन जब सूर्य पूर्व से उत्तर की ओर गमन करने लगता है, तब उसकी किरणें शुभता, सेहत और शांति को बढ़ाती हैं। जो आध्यात्मिक क्रियाओं से जुड़े हैं उन्हें शांति और सिद्धि प्राप्त होती है। अगर सरल शब्दों में कहा जाए तो पूर्व के कड़वे अनुभवों को भुलकर मनुष्य आगे की ओर बढ़ता है।
स्वयं भगवान कृष्ण ने गीता में कहा है कि, उत्तरायण के 6 माह के शुभ काल में, जब सूर्य देव उत्तरायण होते हैं, तब पृथ्वी प्रकाशमय होती है, अत: इस प्रकाश में शरीर का त्याग करने से मनुष्य का पुनर्जन्म नहीं होता है और वह ब्रह्मा को प्राप्त होता है। महाभारत काल के दौरान भीष्म पितामह जिन्हें इच्छामृत्यु का वरदान प्राप्त था। उन्होंने भी मकर संक्रांति के दिन शरीर का त्याग किया था।
इस बार कब है मकर संक्रांति? जानिए महत्व, मान्यता, मुहूर्त और मंत्र
हर साल जनवरी की 14 या 15 तारीख को मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाता है। इस साल यह त्योहार 14 जनवरी को मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का त्योहार विशेष महत्व रखता है। इस दिन श्रद्धालु भक्ति-भाव से भगवान सूर्य की उपासना करते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मकर संक्रांति वाले दिन भगवान सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं, अन्य राशि प्रवेश से यह प्रवेश अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना गया है।
मकर संक्रांति के दिन भगवान सूर्य के साथ-साथ भगवान गणेश, माता लक्ष्मी और भगवान शिव की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है और मनुष्य का सोया नसीब जाग जाता है। इस दिन गुड़ और तिल का दान किया जाता है, साथ ही खिचड़ी का दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। मकर संक्रांति के दिन स्नान का भी विशेष महत्व है। इस दिन प्रात:काल उठकर पवित्र नदी में स्नान करने से पुण्य मिलता है।
मकर संक्रांति व्रत महत्व: हिंदू पुराणों में वर्णित कथाओं के अनुसार मकर संक्रांति के दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र भगवान शनि के पास जाते हैं। उस समय भगवान शनि मकर राशि का प्रतिनिधित्व कर रहे होते हैं। शनि, मकर राशि के देवता हैं इसलिए इस दिन को मकर संक्रांति के रूप में मनाया जाता है। इस विशेष दिन पर जब कोई पिता अपने पुत्र से मिलने जाता है, तो उनकी सारी समस्याएं दूर हो जाती हैं।
मकर संक्रांति का महाभारत में भी वर्णन किया गया है, जो भीष्म पितामह के जीवन से जुड़ी हुई है। भीष्म पितामह को इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था।
युद्ध में जब वह बाण की शैय्या पर लेटे हुए थे, तब वे अपने प्राण त्यागने के लिए सूर्य के उत्तरायण होने का इंतजार कर रहे थे, क्योंकि उनका मानना था कि उत्तरायण में प्राण त्यागने से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होगी।
मकर संक्रांति तिथि और शुभ मुहूर्त: इस साल 14 जनवरी को मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाएगा।
इस साल पुण्य काल के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 8.30 बजे से 12.30 बजे तक है, जिसकी अवधि 4 घंटे 26 मिनट है वहीं, महापुण्य काल का समय सुबह 8.03 से 8.27 तक है, यानी यह अवधि केवल 24 मिनट की है।
मकर राशि में 5 ग्रहों का संयोग
मकर संक्रांति पर मकर राशि में कई महत्वपूर्ण ग्रह एक साथ गोचर करेंगे। इस दिन सूर्य, शनि, गुरु, बुध और चंद्रमा मकर राशि में रहेंगे। जोकि एक शुभ योग का निर्माण करते हैं। इसीलिए इस दिन किया गया दान और स्नान जीवन में बहुत ही पुण्य फल प्रदान करता है और सुख समृद्धि लाता है।
मकर संक्रांति सूर्य मंत्र : ॐ ह्रीम ह्रींम ह्रौमं स: सूर्य्याय नमः
मकर संक्रांति के दिन इस विशेष सूर्य मंत्र का जाप किया जाना चाहिए।
वर्ष 2021 में मकर संक्रांति किस वाहन पर आ रही है, जानिए पुण्यकाल का समय
मकर संक्रांति के भिन्न-भिन्न रूप, जानिए रोचक 6 बातें
हिन्दू महीने के अनुसार पौष शुक्ल पक्ष में मकर संक्रांति पर्व मनाया जाता है। इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है और तभी से सूर्य उत्तरायण हो जाता है। उत्तरायन अर्थात उस समय से धरती का उत्तरी गोलार्द्ध सूर्य की ओर मुड़ जाता है, तो उत्तर ही से सूर्य निकलने लगता है। इसे सोम्यायन भी कहते हैं। 6 माह सूर्य उत्तरायन रहता है और 6 माह दक्षिणायन। अत: यह पर्व 'उत्तरायन' के नाम से भी जाना जाता है। मकर संक्रांति से लेकर कर्क संक्रांति के बीच के 6 मास के समयांतराल को उत्तरायन कहते हैं। यह त्योहार संपूर्ण भारत ही नहीं बल्कि अन्य देशों में भी विभिन्न रूप में मनाया जाता है।
इस दिन से वसंत ऋतु की भी शुरुआत होती है और यह पर्व संपूर्ण अखंड भारत में फसलों के आगमन की खुशी के रूप में मनाया जाता है। खरीफ की फसलें कट चुकी होती हैं और खेतों में रबी की फसलें लहलहा रही होती हैं। खेत में सरसों के फूल मनमोहक लगते हैं। मकर संक्रांति के इस पर्व को भारत के अलग-अलग राज्यों में वहां के स्थानीय तरीकों से मनाया जाता है।
1. पोंगल : दक्षिण भारत में मकर संक्रांति का त्योहार पोंगल के रूप में मनाया जाता है। यह त्योहार गोवर्धन पूजा, दिवाली और मकर संक्रांति का मिला-जुला रूप है। पोंगल विशेष रूप से किसानों का पर्व है। यह उत्सव लगभग 4 दिन तक चलता है। लेकिन मुख्य पर्व पौष मास की प्रतिपदा को मनाया जाता है। पोंगल अर्थात खिचड़ी का त्योहार। पोंगल के पहले अमावस्या को लोग बुरी रीतियों का त्यागकर अच्छी चीजों को ग्रहण करने की प्रतिज्ञा करते हैं। यह कार्य 'पोही' कहलाता है तथा जिसका अर्थ है- 'जाने वाली।' पोंगल का तमिल में अर्थ उफान या विप्लव होता है। पोही के अगले दिन अर्थात प्रतिपदा को दिवाली की तरह पोंगल की धूम मच जाती है।
2.लोहड़ी : पंजाब और हरियाणा एवं इनके प्रभाव क्षेत्र में इसे लोहड़ी कहते हैं। लोहड़ी बसंत के आगमन के साथ 13 जनवरी, पौष महीने की आखरी रात को मनाया जाता है। इसके अगले दिन माघ महीने की सक्रांति को माघी के रूप में मनाया जाता है। वैसाखी त्योहार की तरह लोहड़ी का सबंध भी पंजाब के गांव, फसल और मौसम से है। लोहड़ी की संध्या को लोग लकड़ी जलाकर अग्नि के चारों ओर चक्कर काटते हुए नाचते-गाते हैं और आग में रेवड़ी, मूंगफली, खील, मक्की के दानों की आहुति देते हैं। अग्नि की परिक्रमा करते और आग के चारों ओर बैठकर लोग आग सेंकते हैं। इस दौरान रेवड़ी, खील, गज्जक, मक्का खाने का आनंद लेते हैं।
3. बीहू : बिहू असम में फसल कटाई का प्रमुख त्योहार है। यह फसल पकने की खुशी में मनाया जाता है। इसी त्योहार को पूर्वोत्तर क्षेत्र में भिन्न भिन्न नाम से मनाते हैं। एक वर्ष में यह त्योहार तीन बार मनाते हैं। पहला सर्दियों के मौसम में पौष संक्रांति के दिन, दूसरा विषुव संक्राति के दिन और तीसरा कार्तिक माह में मनाया जाता है। पौष माह या संक्राति को भोगाली बिहू, विषुव संक्रांति को रोंगाली बिहू और कार्तिक माह में कोंगाली बिहू मनाया जाता है।
4. चहार-शंबे सूरी : ईरान में भी नववर्ष का त्योहार इसी तरह मनाते हैं। यह त्योहार भी लोहड़ी से ही प्रेरित है जिसमें आग जलाकर मेवे अर्पित किए जाते हैं। मसलन, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में मनाई जाने वाली लोहड़ी और ईरान का चहार-शंबे सूरी बिल्कुल एक जैसे त्योहार हैं। इसे ईरानी पारसियों या प्राचीन ईरान का उत्सव मानते हैं। यह त्योहार नौरोज या नवरोज के एक दिन पहले मनाया जाता है।
नौरोज़ या नवरोज़, ईरानी नववर्ष का नाम है, जिससे पारसी धर्म के लोग मनाते हैं, परंतु ईरान के शियाओं भी इस त्योहार को इसलिए मनाते हैं क्योंकि यह उनकी प्राचीन संस्कृति का प्रमुख त्योहार है। यह मूलत: प्रकृति प्रेम का उत्सव है। प्राचीन परंपराओं व संस्कारों के साथ नौरोज का उत्सव न केवल ईरान ही में ही नहीं बल्कि कुछ पड़ोसी देशों में भी मनाया जाता है। पश्चिम एशिया, मध्य एशिया, काकेशस, काला सागर बेसिन और बाल्कन में इसे 3,000 से भी अधिक वर्षों से मनाया जाता है। यह ईरानी कैलेंडर के पहले महीने (फारवर्दिन) का पहला दिन भी है।
5. पतंग महोत्सव : गुजरात सहित कई राज्यों में यह पर्व 'पतंग महोत्सव' के नाम से भी जाना जाता है। पतंग उड़ाने के पीछे मुख्य कारण है कुछ घंटे सूर्य के प्रकाश में बिताना। यह समय सर्दी का होता है और इस मौसम में सुबह का सूर्य प्रकाश शरीर के लिए स्वास्थवर्द्धक और त्वचा व हड्डियों के लिए अत्यंत लाभदायक होता है। अत: उत्सव के साथ ही सेहत का भी लाभ मिलता है।
6. संक्रांति उत्सव : कर्नाटक, केरल तथा आंध्र प्रदेश में इसे केवल संक्रांति ही कहते हैं। इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने का, तिल-गुड़ खाने का तथा सूर्य को अर्घ्य देने का महत्व है। यह दिन दान और आराधना के लिए महत्वपूर्ण है। मकर संक्रांति से सभी तरह के रोग और शोक मिटने लगते हैं। माहौल की शुष्कता कम होने लगती है। इस दिन उड़द, चावल, तिल, चिवड़ा, गौ, स्वर्ण, ऊनी वस्त्र, कम्बल आदि दान करने का अपना महत्त्व है। महाराष्ट्र में भी इसे संक्रांति कहते हैं। इस दिन महाराष्ट्र में महिलाएं आपस में तिल, गुड़, रोली और हल्दी बांटती हैं।
अन्य : इसके अलावा गुजरात और उत्तराखंड में इसे उत्तरायण उत्सव कहते हैं। हरियाणा, हिमाचल और पंजाब में इसका नाम माघी भी है। उत्तर प्रदेश और बिहार में इसे खिचड़ी उसत्व कहते हैं।
भारतीय उममहाद्वीप के अन्य देशों में जैसे बांग्लादेश में पौष संक्रान्ति, नेपाल में माघे संक्रान्ति या खिचड़ी संक्रान्ति, थाईलैण्ड में सोंगकरन, लाओस में पि मा लाओ, म्यांमार में थिंयान, कम्बोडिया में
मोहा संगक्रान और श्री लंका में पोंगल एवं उझवर तिरुनल कहते हैं।
इस बार मकर संक्रांति आ रही है श्रवण नक्षत्र में, जानिए कैसा होगा भविष्यफल
पृथ्वी साढ़े 23 डिग्री अक्ष पर झुकी हुई सूर्य की परिक्रमा करती है तब वर्ष में 4 स्थितियां ऐसी होती हैं, जब सूर्य की सीधी किरणें 21 मार्च और 23 सितंबर को विषुवत रेखा, 21 जून को कर्क रेखा और 22 दिसंबर को मकर रेखा पर पड़ती है। वास्तव में चन्द्रमा के पथ को 27 नक्षत्रों में बांटा गया है जबकि सूर्य के पथ को 12 राशियों में बांटा गया है। भारतीय ज्योतिष में इन 4 स्थितियों को 12 संक्रांतियों में बांटा गया है जिसमें से 4 संक्रांतियां महत्वपूर्ण होती हैं- मेष, तुला, कर्क और मकर संक्रांति। जानिए किस नक्षत्र में आने वाली संक्राति कैसी होती है। दरअसल ये मकर संक्रांति के प्रकार है।
नक्षत्र युक्त संक्रांति :
1. 27 या 28 नक्षत्र को सात भागों में विभाजित हैं-
2. ध्रुव (या स्थिर)- उत्तराफाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तराभाद्रपदा, रोहिणी।
3. मृदु- अनुराधा, चित्रा, रेवती, मृगशीर्ष।
4. क्षिप्र (या लघु)- हस्त, अश्विनी, पुष्य, अभिजित, उग्र- पूर्वाफाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा, पूर्वाभाद्रपदा, भरणी, मघा।
5. चर- पुनर्वसु, श्रवण, धनिष्ठा, स्वाति, शतभिषक।
6. क्रूर (या तीक्ष्ण)- मूल, ज्येष्ठा, आर्द्रा, आश्लेषा।
7. मिश्रित (या मृदुतीक्ष्ण या साधारण)- कृत्तिका, विशाखा।
उक्त नक्षत्रों से पता चलता है कि इस बार की संक्रांति कैसी रहेगी। इस बार संक्रांति का नक्षत्र श्रवण है अर्थात इसकी प्रकृति चर है। चर नक्षत्र शुभ फलदायी होता है। अर्थात इस बार का संक्रांति वर्ष सभी जनों के लिए शुभफल देने वाली सिद्ध होगी। मतलब यह कि सभी का भविष्य शुभ और सफल फलदायी होगा।
सेहत /शौर्यपथ /ग्रीन टी वजन घटाने में मददगार है। टाइप-2 डायबिटीज और दिल की बीमारियों से बचाव में भी इसे खासा कारगर पाया गया है। अब ब्रिटेन स्थित सैलफोर्ड यूनिवर्सिटी के हालिया अध्ययन में यह कैंसर के इलाज में भी असरदार मिली है।
ऊर्जा केंद्र पर करती है वार
शोधकर्ताओं के मुताबिक ग्रीन टी कैंसर कोशिकाओं के ‘माइटोकॉन्ड्रिया’ (सूत्रकणिका) पर हमला करती है। ‘माइटोकॉन्ड्रिया’ किसी भी कोशिका का ऊर्जा केंद्र कहलाता है। इसके नष्ट होने से कैंसर कोशिकाओं को पर्याप्त मात्रा में ऊर्जा नहीं मिल पाती और वे धीरे-धीरे दम तोड़ने लगती हैं।
छीन लेती है प्रोटीन की खुराक
मुख्य शोधकर्ता प्रोफेसर माइकल लिसांती की मानें तो ग्रीन टी ‘राइबोजोम’ को भी कमजोर बनाती है। आरएनए और उससे जुड़े प्रोटीन से लैस ‘राइबोजोम’ कोशिकाओं को जिंदा रखने के लिए बेहद जरूरी है। यह उन प्रोटीन का उत्पादन करता है, जिनके दम पर कोशिकाएं फलती-फूलती हैं।
दवा की जगह लेने का दमखम
लिसांती को उम्मीद है कि ग्रीन टी भविष्य में कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली ‘रेपामाइसिन’ की जगह ले सकती है। यह दवा माइटोकॉन्ड्रिया को निष्क्रिय कर कैंसर कोशिकाओं को जिंदा रहने और अपनी संख्या बढ़ाने से रोकती है। अध्ययन के नतीजे ‘जर्नल एजिंग’ के हालिया अंक में प्रकाशित किए गए हैं।
फायदेमंद
-सैलफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों का दवा, इलाज में कुछ दवाओं जितनी कारगर
-कैंसरग्रस्त कोशिकाओं के ऊर्जा केंद्र यानी ‘माइटोकॉन्ड्रिया’ को निष्क्रिय कर देती है
-विकास में मददगार प्रोटीन पैदा करने वाले ‘राइबोजोम’ को भी कमजोर बनाती है
‘माचा ग्रीन टी’ ज्यादा असरदार-
-अध्ययन में जापान में बेहद लोकप्रिय ‘माचा ग्रीन टी’ को कैंसर के इलाज में ज्यादा प्रभावी करार दिया गया है
-चाय की ताजा हरी पत्तियों से होती है तैयार, पाउडर के रूप में मिलती है, मोटापे से निजात दिलाने में कारगर
ऐसे होती है तैयार
-चाय के पौधों को धूप से दूर रखा जाता है, ताकि ‘एल-थियानाइन’ सहित अन्य पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ जाए।
-ताजा पत्तियां तोड़कर उन्हें भांप से पकाया जाता है, हवा में सुखाने के बाद बारीक पाउडर के रूप में पीसा जाता है।
धर्म संसार /शौर्यपथ / कल यानी 13 जनवरी 2021 को पौष अमावस्या है। पौष मास के कृष्ण पक्ष की आखिरी तिथि को पड़ने वाली अमावस्या को पौष अमावस्या कहते हैं। साल 2021 में पौष अमावस्या सू्र्य के उत्तरायण से ठीक एक दिन पहले पड़ रही है। ज्योतिष शास्त्र में पौष मास को बेहद अहम माना जाता है। ऐसे में इस मास में पड़ने वाली अमावस्या का भी विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि पौष अमावस्या सर्वसिद्धिदायक, सफलताकारी और पितरों को मोक्ष प्रदान करती है। कहा जाता है इस दिन धार्मिक कार्य, स्नान, दान, पूजा-पाठ और मंत्र जप करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। जानिए पौष अमावस्या के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इससे होने वाले लाभ-
पौष अमावस्या शुभ मुहूर्त-
पौष अमावस्या तिथि की शुरुआत- 12 जनवरी 2021, दिन मंगलवार को दोपहर 12 बजकर 22 मिनट से।
अमावस्या तिथि समाप्त- 13 जनवरी, 2021, दिन बुधवार को सुबह 10 बजकर 29 मिनट पर।
पौष अमावस्या पूजा विधि-
1. पौष अमावस्या के दिन किसी नदी या तालाब में स्नान करना चाहिए।
2. स्नान करने के बाद सबसे पहले तांबे के पात्र में शुद्ध जल से सूर्यदेव को अर्घ्य देना चाहिए। अर्घ्य में लाल पुष्य या लाल चंदन डालना उत्तम माना जाता है।
3. सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद पितरों को तर्पण देना चाहिए।
4. मान्यता है कि पितृ दोष से पीड़ित लोगों को पौष अमावस्या के दिन पितरों के मोक्ष प्राप्ति के लिए व्रत रखना चाहिए।
5. पौष अमावस्या के दिन गरीबों को भोजन कराने से भाग्य खुलता है।
पौष अमावस्या व्रत-पूजा के लाभ-
1. इस दिन पितृ दोश की शांति कराने से तरक्की में आने वाली बाधाएं दूर हो जाती हैं।
2. पितृ दोष दूर होने से संतान की उत्पत्ति में आने वाली बाधाएं खत्म हो जाती हैं।
3. पितृ दोष दूर होने से बिजनेस या नौकरी संबंधी परेशानियां दूर हो जाती हैं।
धर्म संसार /शौर्यपथ / मकर संक्रांति 14 जनवरी को है। इस त्योहार को देशभर में अलग-अलग रूप और तरीके से मनाया जाता है। मकर संक्रांति में सूर्य देव धनु राशि से मकर राशि में आते हैं। इस दिन स्नान, दान-पुण्य के कार्य किए जाते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन लोग कुंडली में ग्रह मजबूत करने के लिए उपाय करते हैं। जानिए अपनी राशि के हिसाब से मकर संक्रांति के दिन कौन-से करने चाहिए उपाय-
1. मेष- मकर संक्रांति के दिन मेष राशि वालों को गुड़ का दान करना चाहिए। इससे आर्थिक लाभ होने की मान्यता है।
2. वृष- मकर संक्रांति के दिन वृष राशि को मिश्री का दान करना चाहिए। ऐसा करने से उनके जीवन में सुख और समृद्धि आने की मान्यता है।
3. मिथुन- इस दिन आपको हरे रंग की मूंग की दाल दान करना शुभ होता है। ऐसा करने से वैवाहिक जीवन की समस्याएं खत्म हो जाती हैं।
4. कर्क- कर्क राशि वालों को चावलों का दान अवश्य करना चाहिए। कहते हैं कि ऐसा करने से मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।
5. सिंह- मकर संक्रांति के दिन इस राशि वालों को गेहूं का दान करना चाहिए। कहते हैं कि ऐसा करने से मान-सम्मान में वृद्धि होने की मान्यता है।
6. कन्या- ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन इस राशि वालों को हरे रंग का चारा जानवरों को खिलाना शुभ होता है। कहते हैं कि ऐसा करने से जीवन की सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं।
7. तुला- इस राशि वालों को मकर संक्रांति के दिन कन्याओं को खीर का दान करना शुभ होता है। कहते हैं कि ऐसा करने से व्यक्ति को सुख-संपदा की प्राप्ति होती है।
8. वृश्चिक- मकर संक्रांति के दिन वृश्चिक राशि वालों को गुड़ और चना बंदरों को खिलाना शुभ होता है। कहते हैं कि ऐसा करने से शत्रुओं का नाश होता है।
9. धनु- धनु राशि वालों को मकर संक्रांति के दिन किसी मंदिर में चने का दान करना चाहिए। कहते हैं कि ऐसा करने से जीवन की सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं और सुखों की प्राप्ति होती है।
10. मकर- मकर राशि वालों को इस दिन कंबल दान करना चाहिए। कहते हैं कि ऐसा करने से नौकरी में आ रही समस्याएं दूर हो जाती हैं।
11. कुंभ- मकर संक्रांति के दिन कुंभ राशि वालों को काली उड़द की दाल दान करना शुभ होता है। माना जाता है कि ऐसा करने से बिजनेस संबंधी समस्याएं दूर हो जाती हैं।
12. मीन- इस राशि वालों को हल्दी और बेसन से बनी चीजों का दान करना चाहिए। कहते हैं कि ऐसा करने से व्यक्ति की लाइफ में पैसे संबंधी दिक्कतें दूर हो जाती हैं।
शिक्षा / शौर्यपथ / जिंदगी में जब हम कोई काम करते हैं या कुछ हासिल करते हैं तो उससे हमें बहुत अनुभव हासिल होता है। अनुभव जीवन में हमेशा काम आता है। इसी तरह से विदुर नीति भी हमें बहुत कुछ सिखा देती है और हम इसके अनुसार चलते हैं तो जिंदगी जीने का कठिन रास्ता भी आसान हो जाता है। आज भी लोग विदुर नीति को मानते और अपनाते हैं। महात्मा विदुर ने विदुर नीति में ऐसे लोगों का भी जिक्र किया है, जिनपर हमें भूलकर भी भरोसा नहीं करना चाहिए। विदुर जी कहते हैं कि अगर आप इन लोगों को अपना राजदार बनाएंगे तो ये कहीं न कहीं आगे जाकर आपके लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं। आखिर में आप इन पर भरोसा करने के लिए खुद को कोसेंगे।
विदुर नीति के अनुसार, इन 3 लोगों पर नहीं करना चाहिए भरोसा-
1. ऐसे लोग को स्वभाव से लालची होते हैं। विदुर जी कहते हैं कि ऐसे लोग एक समय पर आपके लिए अच्छे और भरोसेमंद हो सकते हैं लेकिन लालच के आड़े आने पर यह आपको नुकसान पहुंचाने से पीछे नहीं हटते हैं। इसलिए ऐसे लोगों पर भूलकर भी भरोसा नहीं करना चाहिए।
2. विदुर जी कहते हैं कि जो लोग जरुरत से ज्यादा बातें करते हैं और जिनके अधिक मित्र होते हैं। ऐसे लोगों पर कभी विश्वास नहीं करना चाहिए। विदुर नीति के अनुसार, जिनका फ्रेंड सर्किल बहुत ही बड़े हो और बहुत ज्यादा बातूनी किस्म के होते हैं। ऐसे लोगों पर कम भरोसा करना चाहिए। क्योंकि यह लोग कभी आपके काम नहीं आते हैं।
3. विदुर नीति के अनुसार, जो लोग धूर्त होते हैं। उन पर कभी विश्वास नहीं करना चाहिए। विदुर जी कहते हैं कि जो पहले से ही कई लोगों का अहित कर चुके हैं वो कभी भी आपका हित नहीं कर सकते हैं। ऐसे में इन लोगों को अपना राजदार नहीं बनाना चाहिए।
’युवाओं की प्रतिभा को संवारने और आजीविका के बेहतर अवसर दिलाने के अभियान में नहीं होगी कोई कमी’- मुख्यमंत्री भूपेश बघेल’
’मुख्यमंत्री रेडियोवार्ता लोकवाणी की 14वीं कड़ी में युवाओं से हुए रूबरू’
’स्वामी विवेकानंद ने मानव उत्थान की सीख दी मुख्यमंत्री ने युवाओं को स्वामी विवेकानंद के विचारों की दी जानकारी’
’छत्तीसगढ़वासियों ने अपने कठिन परिश्रम, दृढ़ इच्छाशक्ति और सेवा भावना से कोरोना का किया मुकाबला’
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल अपनी रेडियोवार्ता लोकवाणी की 14वीं कड़ी में आज युवाओं से रूबरू हुए। रेडियोवार्ता की यह कड़ी युवाओं को समर्पित रही। मुख्यमंत्री ने युवाओं द्वारा रिकार्डेड संदेश के माध्यम से साझा किए गए विचारों और सुझावों पर विस्तार से चर्चा की और युवाओं की जिज्ञासाओं का समाधान करने का प्रयास किया। मुख्यमंत्री ने इस कड़ी में युवाओं को नए वर्ष की बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की तरूणाई नई अंगड़ाई लेकर उठ खड़ी हुई है। जो हम सबके सुरक्षित और सुखद भविष्य का संकेत है। लोकवाणी रेडियोवार्ता को जांजगीर-चांपा जिले के ग्रामीण व नगरीय क्षेत्र में बड़े उत्साह के साथ सुना गया। जिला मुख्यालय में नैला स्टेशन के मेडिकल स्टोर में सर्वश्री संतोष यादव, राजधु्रवे, कन्हैया दास, विष्णु शर्मा, प्रकाश यादव, हिमांशु पाण्डेय, रज्जू सेन, कालू धुर्वे, और राजेन्द्र चैहान ने सामूहिक रूप से लोकवाणी का श्रवण किया।
मुख्यमंत्री बघेल ने युवाओं को उनके उज्जवल भविष्य के प्रति आश्वस्त करते हुए कहा कि युवाओं की प्रतिभा को संवारने और उन्हें आजीविका के बेहतर अवसर दिलाने के राज्य सरकार के अभियान में किसी तरह की कोई कमी नहीं होगी। उन्होंने कहा कि हमारे छत्तीसगढ़ी युवा हर मंच पर छत्तीसगढ़ का झण्डा गाड़ रहे हैं। छत्तीसगढ़ का नाम रोशन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने 12 जनवरी को स्वामी विवेकानन्द की जयंती राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर उनकी प्रेरणादायक शिक्षाओं और सीख की चर्चा भी युवाओं के साथ की। उन्होंने स्वामी विवेकानन्द के शब्दों को उद्यत करते हुए युवाओं से कहा कि ’एक विचार उठाओ, उसे अपना जीवन बना लो’ यह सफलता का मार्ग है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के युवाओं को देखकर यही लगता है कि उन पर गांधी-नेहरू-स्वामी विवेकानन्द का असर है। उन्होंने कहा कि बेहतर खेल अधोसंरचनाओं के विकास से खेल प्रतिभाओं को अपनी प्रतिभा निखारने और छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद के जरिए युवा साहित्यकारों और कलाकारों को सही मंच, मार्गदर्शन और प्रोत्साहन मिलेगा।
’छत्तीसगढ़वासियों ने अपने कठिन परिश्रम, दृढ़ इच्छाशक्ति और सेवा भावना से किया कोरोना का मुकाबला’
मुख्यमंत्री ने लोकवाणी में कहा कि पिछला साल बड़ी चुनौतियों के साथ बीता है। वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के कारण दुनिया में अनेक परिवारों को अपने प्रियजनों से बिछड़़ना पड़ा। नौकरी, व्यापार, व्यवसाय तथा भिन्न-भिन्न आजीविका के साधनों पर कोरोना महामारी का बहुत घातक आघात रहा। छत्तीसगढ़वासियों ने अपने कठिन परिश्रम, दृढ़ इच्छाशक्ति और सेवा भावना से कोरोना का मुकाबला किया। आप सबकी बदौलत ही छत्तीसगढ़ ने कोरोना काल में भी बहुत उपलब्धियां हासिल कीं, जिसके कारण राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ को ख्याति मिली। हमारी उपलब्धियों के पीछे एक बहुत बड़ी ताकत हमारी युवा शक्ति है।
’स्वामी विवेकानंद ने भारत को दुनिया में सर्वोच्च प्रतिष्ठा दिलाई’
मुख्यमंत्री बघेल ने लोकवाणी में कहा कि मैं स्वामी विवेकानंद जी को, उनके जन्मदिन के अवसर पर, प्रदेश की जनता की ओर से नमन करना चाहूंगा। स्वामी विवेकानंद का मन मानव जाति की सेवा में रमा। बहुत छोटी-सी आयु में ही वे स्वामी रामकृष्ण परमहंस के शिष्य बन गए और वेदांत तथा आध्यात्मिक ज्ञान के शिखर की ओर बढ़ चले। 11 सितम्बर 1893 को शिकागो की धर्मसंसद में स्वामी विवेकानंद के व्याख्यान ने स्वयं उन्हें तथा भारत को दुनिया में सर्वोच्च प्रतिष्ठा दिलाई। स्वामी विवेकानंद को युवाओं का आदर्श माना गया। मुझे यह कहते हुए बहुत गर्व का अनुभव हो रहा है कि भारत में ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ का आयोजन 12 जनवरी 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के कार्यकाल में शुरू हुआ।
’स्वामी विवेकानंद ने मानव उत्थान की सीख दी’
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने विभिन्न धर्मों की आपसी प्रतियोगिता व वैमनस्यता के खिलाफ कड़ा रूख अपनाया था। उन्होंने आडम्बरों का मुखर विरोध किया। वे अपनी सारी चेतना और शक्ति को मानव के उत्थान में ही लगाने में विश्वास करते थे और इसी की सीख दिए। शिकागो की प्रसिद्ध विश्व धर्मसंसद में स्वामी जी ने कहा था कि उन्हें ऐसे धर्म पर गर्व है, जिसने दुनिया को सहिष्णुता और सार्वभौमिक स्वीकृति दोनों सिखाई है। हम सभी धर्मों को सच मानते हैं। उन्हंे एक ऐसे देश से संबंधित होने पर गर्व है, जिसने सभी धर्मों और पृथ्वी के सभी देशों के पीडि़तों और शरणार्थियों को शरण दी है। उन्होंने कहा वास्तविक शिक्षा वह है, जो किसी को अपने दम पर खड़ा करने में सक्षम बनाती है। छात्रों को चरित्र और मानवीय मूल्य सिखाती है। आज मैं स्वामी जी के शब्दों में ही युवाओं का आह्वान करता हूं-‘एक विचार उठाओ, उसे अपना जीवन बना लो। उसके बारे में सोचो, उसके सपने देखो, उस विचार पर जियो।
’छत्तीसगढ़ के युवाओं ने हर क्षेत्र में छत्तीसगढ़ का नाम किया रोशन’
मुख्यमंत्री ने लोकवाणी में बताया कि रामकृष्ण मिशन, स्वामी विवेकानंद, स्वामी आत्मानंद मेरे मन में बचपन से बसे थे। गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर ने कहा था कि यदि भारत को जानना है तो स्वामी विवेकानंद को पढिए। पंडित जवाहर लाल नेहरू कहते थे कि युवाओं को चाहिए कि वे विवेकानंद को बार-बार पढं़े, उनकी बुद्धिमत्ता, जोश और विवेक से नई पीढ़ी को काफी मदद मिलेगी। स्वामी विवेकानंद जी का छत्तीसगढ़ प्रवास हमें उस यश और गौरव से जोड़ता है, जो उन्होंने मात्र 39 वर्ष की उम्र में ही कमा लिया था। यही वजह है कि हम रायपुर में स्वामी जी की यादों को सहेजने का काम कर रहे हैं। हाल के दो वर्षों की बात करूं तो ऐसा पहली बार हुआ है कि हमारी बस्तर की एक बेटी नम्रता जैन यूपीएससी में देश में बारहवें स्थान पर रही हैं। बिलासपुर के वर्णित नेगी तेरहवें स्थान पर रहे। भिलाई की सिमी करण सहित उमेश गुप्ता, आयुष खरे, योगेश पटेल, प्रसून बोपचे जैसे युवाओं ने एक सिलसिला बना दिया है। वर्ष 2020 में दुर्ग के कल्पित अग्रवाल गेट की परीक्षा में टॉपर रहे तो रायपुर के तनय राज ने नीट में परचम लहराया।
’‘छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद’ के माध्यम से युवा साहित्यकारों,’ ’कलाकारों को मिलेगा सही मंच, मार्गदर्शन तथा प्रोत्साहन’
मुख्यमंत्री ने लोकवाणी में युवाओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि हमारी सरकार ने पहली बार छत्तीसगढ़ में ‘छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद’ के गठन का निर्णय लिया है, जिसके अंतर्गत साहित्य अकादमी, कला अकादमी, आदिवासी और लोककला अकादमी, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम, छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग, छत्तीसगढ़ सिंधी अकादमी आदि संस्थाएं काम करेंगी। हमारा प्रयास है कि यह काम जल्दी से आगे बढ़े ताकि आप लोगों को सही मंच, मार्गदर्शन तथा प्रोत्साहन मिल सके। इसके अलावा साहित्यकारों, कलाकारों और उनके परिवारजनों को सहायता देने के अनेक प्रावधान भी हैं। हमने स्थानीय कला-संस्कृति को महत्व देते हुए यह कोशिश की है कि हमारे स्थानीय कलाकारों को भरपूर अवसर मिले।
’‘खेलबो-जीतबो-गढ़बो-नवा छत्तीसगढ़‘’
मुख्यमंत्री ने विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धाओं में शानदार उपलब्धियां हासिल करने वाले छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी दीपेश कुमार सिन्हा, शिखर सिंह, आकर्षि सहित अन्य सभी खिलाडि़यों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मैंने नारा दिया था, ‘खेलबो-जीतबो-गढ़बो-नवा छत्तीसगढ़।’ हमें पता है कि विरासत में हमें बेहद कमजोर खेल अधोसंरचना मिली है, वहीं खिलाडि़यों को भी बहुत से अभावों से जूझना पड़ता था। इसलिए हमने ‘छत्तीसगढ़ खेल विकास प्राधिकरण’ का गठन किया। हॉकी, फुटबाल, बैडमिंटन, तीरंदाजी, वालीबॉल, कबड्डी आदि खेलों के निःशुल्क प्रशिक्षण की सुविधा दी गई है। अब ‘खेलो इंडिया योजना’ के तहत रायपुर में राष्ट्रीय स्तर की आवासीय हॉकी अकादमी तथा बिलासपुर में तीरंदाजी का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाया जाएगा। बिलासपुर में तीरंदाजी, हॉकी और एथलेटिक्स की राज्य स्तरीय अकादमी, जगदलपुर में फुटबॉल तथा रनिंग सिंथेटिक टर्फ ग्राऊंड, अम्बिकापुर इंडोर हॉल की मंजूरी प्राप्त की गई है।
नगरीय-निकायों तथा पंचायतों में ‘राजीव युवा मितान क्लब’
प्रदेश के सभी नगरीय-निकायों तथा पंचायतों में ‘राजीव युवा मितान क्लब’ का गठन किया जा रहा है। जिसके माध्यम से युवाओं के सर्वांगीण विकास का कार्य किया जाएगा। हमारी योजना है कि प्रत्येक जिले में स्थानीय विशेषता के अनुसार प्रशिक्षण सुविधाएं विकसित की जाएं और उसमें उद्योगों की मदद भी ली जाए। मुझे तो विगत वर्ष मनाए गए युवा महोत्सव की याद आ रही है, जिसमें ब्लॉक से लेकर राज्य स्तर तक युवाओं ने भाग लिया था और हजारों युवा साथी राज्य स्तरीय प्रदर्शन के लिए रायपुर आए थे। इस वर्ष कोरोना के कारण वैसा आयोजन नहीं हो पा रहा है, लेकिन हम प्रयास करेंगे कि भविष्य में कोई बड़ा आयोजन हो।
युवा प्रतिभाओं को दी बधाई
मुख्यमंत्री ने लोकवाणी में आइफा अवार्ड विजेता सरगुजा के दो युवाओं युवा संगीतकार सौरव गुप्ता और वैभव सिंह सेंगर तथा इंडिया बेस्ट डांसर टीव्ही शो में फस्ट रनरअप मुकुल गाइन को बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आपके माध्यम से मैं उन सभी युवा प्रतिभाओं को बधाई देता हूं जिन्होंने छत्तीसगढ़ का नाम ऊंचा किया है। मैं चाहता हूं कि आप लोग इसी तरह लगातार काम करते रहें और सफलताएं हासिल करते रहें, इसके लिए मेरी शुभकामनाएं।
’दो वर्षों में 46 हजार से अधिक युवाओं ने मुख्यमंत्री कौशल प्रशिक्षण योजना से बने हुनरमंद’
लोकवाणी में कौशल विकास प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके अनेक युवाओं ने अपने बारे में संदेश रिकॉर्ड करवाए जिसमें उन्होंने इस योजना को युवाओं के लिए उपयोगी बताते हुए इसे जारी रखने का आग्रह मुख्यमंत्री से किया। श्री बघेल ने इन युवाओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि कोरोना संक्रमण से बचने के लिए केन्द्र सरकार की गाइडलाइन के तहत स्कूल, कॉलेज, कोचिंग तथा अन्य प्रशिक्षण संस्थानों पर रोक लगाई गई थी। कौशल विकास योजना को बेहतर ढंग से चलाने के लिए हमने नई गाइडलाइन जारी की, जिसके तहत बाजार की मांग और आधुनिक तकनीकी पर आधारित प्रशिक्षण शुरू किया गया। मुझे खुशी है कि दो वर्षों में 46 हजार से अधिक युवाओं ने प्रशिक्षण लिया है, जिसमें से लगभग 23 हजार युवाओं ने अपना काम शुरू कर दिया है। आपकी सहूलियत के लिए हमने ‘रोजगार संगी मोबाइल एप’ शुरू किया, जो प्रशिक्षित युवा और नियोक्ता के बीच पुल का काम कर रहा है। कोरोना के कारण जो प्रवासी श्रमिक वापस लौटे उनमें से 2 लाख 14 हजार लोगों की स्किल मैपिंग करके उनके प्रशिक्षण और रोजगार की व्यवस्था की जा रही है। जैसे ही कोरोना का असर कम होगा या इसकी गाइडलाइन इजाजत देगी, वैसे ही हम जल्दी से जल्दी कौशल प्रशिक्षण शुरू करने की व्यवस्था करेंगे। ’युवाओं की प्रतिभा को संवारने और आजीविका के बेहतर अवसर दिलाने के अभियान में नहीं होगी कोई कमी’
मुख्यमंत्री ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आपने जिन पदों पर भर्ती के लिए परीक्षाएं दी हैं, उनमें कहीं कोर्ट केस या प्रक्रियागत बाधाओं के कारण तकलीफें थीं, जिनका उचित ढंग से निराकरण किया जा रहा है। बहुत से प्रकरणों में तो मामला वेरीफिकेशन तक पहुंच गया है, हमारा प्रयास है कि जितनी जल्दी हो सके, नियुक्ति पत्र जारी कर दिए जाएं। इस संबंध में मैंने विभिन्न विभागों को निर्देश दे दिए हैं। साथियों, मैं एक बार फिर यह कहना चाहूंगा कि आप लोगों ने जिस तरह से धैर्य बनाए रखा है, वह काबिले-तारीफ है। छत्तीसगढ़ में युवाओं का भविष्य उज्ज्वल है। मैं चाहूंगा कि आपकी प्रतिभा को संवारने और आपको बेहतर आजीविका दिलाने के हमारे अभियान में कहीं कोई कसर नहीं रहेगी।
’दो वर्ष में 22 प्रतिशत से घटकर 2 से 4 प्रतिशत के बीच हुई बेरोजगारी दर’
’नए उद्योगों में ही 15 हजार लोगों को मिला रोजगार’
मुख्यमंत्री ने कहा कि वह जमाना गया जब सिर्फ सरकारी नौकरी को ही रोजगार माना जाता था। अब तो बहुत से काम और बहुत सी नौकरियों को सरकारी नौकरी से बेहतर माना जाता है। यही वजह है कि हमने प्रदेश में ऐसे विकास कार्यों या योजनाओं को अपनाया है, जिसमें युवाओं की भागीदारी बड़े पैमाने पर हो। कृषि, वानिकी, इनके उत्पादनों का प्रसंस्करण, नई उद्योग नीति आदि के माध्यम से हमने सर्वांगीण विकास और चैतरफा विकास की रणनीति अपनाई है, ताकि छोटे-बड़े हर स्तर पर लोगों को काम मिले। अब देखिए कि राजीव गांधी किसान न्याय योजना, गोधन न्याय योजना, सुराजी गांव योजना के कारण भी गांव-गांव में रोजगार के नए अवसर बने हैं। मुझे यह देखकर खुशी होती है कि हम एक रास्ता बनाते हैं तो उसमें से दस रास्ते लोग अपनी सोच, समझदारी और प्रतिभा से बना लेते हैं। गोबर हमारी पूरी कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के केन्द्र में तो आ ही गया है, लेकिन अब इससे बनने वाले कलात्मक उत्पादों के लिए राज्य से लेकर दिल्ली तक मार्ट खुल जाना एक नई तरह की क्रांति है। क्योंकि ऐसा कोई भी काम होता है, तो उसमें रोजगार के अवसर समाहित रहते हैं। नई उद्योग नीति से नए उद्योग लगने की पहल हो रही है तो उसमें भी करीब 50 हजार लोगों को रोजगार मिलने की संभावना बन गई है। सिर्फ नए उद्योगों में ही लगभग दो साल में 15 हजार लोगों को रोजगार मिल गया है। गांव से लेकर सरकारी नौकरी और उद्योगों तक, जब हम समग्र रूप में देखते हैं तो पाते हैं कि प्रदेश की बेरोजगारी दर देश की बेरोजगारी दर की आधी भी नहीं है। दो वर्ष में 22 प्रतिशत से घटकर बेरोजगारी दर 2 से 4 प्रतिशत के बीच रही है।
’बेरोजगार युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने ई-श्रेणी पंजीयन योजना की शुरूआत’
’स्नातक इंजीनियर, डिग्रीधारी, डिप्लोमाधारी राजमिस्त्री को भी रोजगार’
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने यह व्यवस्था की है कि बेरोजगार युवा यदि स्नातक इंजीनियर हैं तो इन्हें ई-श्रेणी में एकीकृत पंजीयन कर ब्लॉक स्तर पर 20 लाख तक के कार्य दिए जाएं। इन्हें एक वर्ष में अधिकतम 50 लाख रू. तक के कार्यों की पात्रता होगी। वहीं अनुसूचित क्षेत्रों में हायर सेकेण्डरी उत्तीर्ण युवाओं को भी ई-पंजीयन की सुविधा दी गई है, ताकि वे भी निर्माण कार्यों में सीधी भागीदारी निभा सकें। इसके अलावा बेरोजगार डिग्रीधारीध्डिप्लोमाधारीध्राज मिस्त्री को भी आसानी से रोजगार दिलाने के लिए पृथक से निविदा प्रक्रिया की व्यवस्था की गई है। जिसके तहत स्नातक इंजीनियरों को एक बार में 50 लाख तक और वर्ष में 2 करोड़ रू. तक का दिया जाएगा। डिप्लोमाधारी इंजीनियरों को एक बार में 25 लाख रू. तक तथा वर्ष में अधिकतम एक करोड़ रू. तक के कार्यों की पात्रता होगी। राज मिस्त्रियों को एक बार में 15 लाख रू. तथा वर्ष में अधिकतम 60 लाख रू. तक के कार्यों की पात्रता होगी।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
