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धर्म संसार / शौर्यपथ / पौष मास कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को सफला एकादशी कहते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो व्यक्ति सफला एकादशी का व्रत रखता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। सफला एकादशी का व्रत भगवान विष्णु जी के लिए रखा जाता है। एकादशी के दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा की जाती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल सफला एकादशी व्रत पौष माह कृष्ण पक्ष की एकादशी को रखा जाता है। इस साल सफला एकादशी 9 जनवरी 2021 को है।
सफला एकादशी 2021 शुभ मुहूर्त-
एकादशी तिथि प्रारम्भ - जनवरी 08, 2021 को रात 9:40 बजे
एकादशी तिथि समाप्त - जनवरी 09, 2021 को शाम 7:17 बजे तक।
सफला एकादशी 2021 व्रत विधि-
1. सफला एकादशी के दिन स्नान आदि करके सूर्यदेव को अर्घ्य दें।
2. इसके बाद व्रत-पूजन का संकल्प लें।
3. भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करें।
4. भगवान को धूप, दीप, फल और पंचामृत आदि अर्पित करें।
5. नारियल, सुपारी, आंवला और लौंग आदि श्रीहरि को अर्पित करें।
6. अगले दिन द्वादशी पर व्रत खोलें।
7. गरीबों को दान कराएं और उन्हें दान-दक्षिणा दें।
सफला एकादशी व्रत कथा-
पद्म पुराण में वर्णित एक कथा के अनुसार, महिष्मान नाम का एक राजा था। इनका ज्येष्ठ पुत्र लुम्पक पाप कर्मों में लिप्त रहता था। इससे नाराज होकर राजा ने अपने पुत्र को देश से बाहर निकाल दिया। लुम्पक जंगल में रहने लगा।
पौष कृष्ण दशमी की रात में ठंड के कारण वह सो न सका। सुबह होते होते ठंड से लुम्पक बेहोश हो गया। आधा दिन गुजर जाने के बाद जब बेहोशी दूर हुई तब जंगल से फल इकट्ठा करने लगा। शाम में सूर्यास्त के बाद यह अपनी किस्मत को कोसते हुए भगवान को याद करने लगा। एकादशी की रात भी अपने दुखों पर विचार करते हुए लुम्पक सो न सका।
इस तरह अनजाने में ही लुम्पक से सफला एकादशी का व्रत पूरा हो गया। इस व्रत के प्रभाव से लुम्पक सुधर गया और इनके पिता ने अपना सारा राज्य लुम्पक को सौंप दिया और खुद तपस्या के लिए चले गए। काफी समय तक धर्म पूर्वक शासन करने के बाद लुम्पक भी तपस्या करने चला गया और मृत्यु के पश्चात विष्णु लोक में स्थान प्राप्त हुआ।
सेहत /शौर्यपथ / बदलते लाइफस्टाइल और खान-पान की खराब आदतों की वजह से आज हर दूसरा व्यक्ति मोटापे की समस्या से परेशान है। मोटापा कम करने के लिए लोग अपनी डाइट में बदलाव के साथ घंटों जिम में पसीना बहाने से भी परहेज नहीं करते। बावजूद इसके उनकी समस्या जस की तस बनी रहती है। ऐसे में क्या आप जानते हैं इसके पीछे आपके लाइफस्टाइल से जुड़ी कई गलतियां जिम्मेदार हो सकती हैं। आइए जानते हैं आखिर क्या हैं ये गलतियां।
कम कैलोरी का सेवन-
अक्सर लोग वजन कम करने के दौरान अपनी डाइट में से कैलोरी की मात्रा बिल्कुल खत्म कर देते हैं, ऐसा न करें। अगर आप अपना वजन कम करना चाहते हैं तो पर्याप्त मात्रा में कैलोरी का सेवन करें। कैलोरी की पर्याप्त मात्रा आपके शरीर के लिए जरूरी होती है। शोध के अनुसार कैलोरी का सेवन कम करते हुए जब व्यक्ति ज्यादा एक्सरसाइज करता है तो उसे शरीर में कमजोरी महसूस हो सकती है।
कम वसा वाला भोजन-
जो लोग वजन कम करने के लिए अपनी डाइट में से वसा की मात्रा खत्म कर देते हैं। उन्हें सेहत से जुड़े कई नकारात्मक प्रभाव झेलने पड़ सकते हैं। यही वजह है कि डाइट में वसा की कुछ मात्रा जरूर शामिल करनी चाहिए। इसके लिए आप अपनी डाइट में चीनी को शामिल कर सकते हैं जो पर्याप्त मात्रा में वसा की कमी को दूर करने में मदद कर सकता है।
भोजन का त्याग करना-
देखा जाता है कि लोग वजन कम करने के चक्कर में भोजन का त्याग करने लगते हैं। लेकिन ऐसा करने से आपके शरीर में पोषण की कमी हो सकती है, जिससे आपकी सेहत को नुकसान उठाना पड़ सकता है। सेहत से जुड़े कई शोध बताते हैं कि जो लोग आमतौर पर नाश्ता नहीं करते हैं उनके वजन पर कोई फर्क नहीं पड़ता है। रोजाना नाश्ता करने से आप लंबे समय तक ऊर्जावान बने रहने के साथ आसानी से अपना वजन भी कम कर सकते हैं।
अधिक व्यायाम करना-
वजन कम करने की इच्छा रखने वाले कई लोगों को यह लगता है कि अगर वह घंटों एक्सरसाइज करेंगे तो उनका वजन जल्द कम हो जाएगा। लेकिन ऐसा करने से आपके चयापचय पर बुरा असर पड़ सकता है। वजन कम करने की शुरुआत हमेशा साधारण व्यायाम के साथ होनी चाहिए, जिससे बिना चोट और अन्य स्वास्थ्य हानि के अपना वजन कम कर सकते हैं।
अनियमित जीवनशैली-
जो लोग वजन कम करने के दौरान अपनी डाइट पर तो कंट्रोल कर लेते हैं लेकिन शारीरिक गतिविधियों से पूरी तरह से दूर रहते हैं। आपकी यह आदत आपकी सेहत के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। आपकी इस आदत की वजह से आप अपना वजन कम करने की जगह बढ़ा सकते हैं। वजन कम करने के लिए आपको डाइट के साथ अपनी जीवनशैली में भी कई जरूरी बदलाव करने चाहिए।
सेहत /शौर्यपथ / खाने-पीने का जैसा मजा सर्दियों में है, वैसा दूसरे मौसम में कहां! एक तरफ जहां फल-सब्जियों की भरमार होती है, वहीं दूसरी ओर लड्डू, पिन्नी, गुड़-मूंगफली, गजक, रेवड़ी जैसे मिठाई के तौर पर खाए जाने वाले खाद्य-पदार्थों की ढेरों वैराइटी मिलती हैं। सर्दी में अपने शरीर को गर्म रखने के चक्कर में हम कई बार बैलेंस डाइट को नजरअंदाज कर देते हैं और मोटापे और इससे जुड़ी समस्याओं की गिरफ्त में आ जाते हैं,ऐसेे ऐसे में स्वस्थ रहने के लिए डाइट का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। ठंड के मौसम में फलों का सेवन सबसे ज्यादा लाभदायक है।
सेब
सेब पेक्टिन फाइबर, विटामिन, मिनरल्स, फाइटोन्यूट्रिएंट्स और एंटी ऑक्सीडेंट जैसे तत्वों से भरा है, जो हमारे शरीर में एलडीएल कोलेस्ट्रॉल या संतृप्त वसा के स्तर को नियंत्रित करते हैं, हानिकारक मुक्त कणों (फ्री रेडिकल्स) के प्रभाव से बचाते हैं, संक्रमण फैलाने वाले एजेंटों को दूर रखते हैं और चयापचय क्षमता को बढ़ाते हैं। सेब शरीर में हीमोग्लोबिन और आयरन के स्तर को बढमता है और रक्त की कमी को दूर करता है।
अनार
अपने अनोखे खट्टे-मीठे स्वाद और गुणों के कारण अनार ‘एक अनार सौ बीमार‘ की उक्ति को चरितार्थ करता है। फाइटोकैमिकल्स, पॉली-फिनॉल, एंटीऑक्सीडेंट, फाइबर, आयरन, विटामिन से भरपूर अनार उच्च कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर, दिल के दौरे या फ्री रेडिकल्स से बचाव कर हृदय के स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करता है। खून की कमी के रोगियों के लिए अनार का सेवन उपयोगी है।
अमरूद
सर्दियों में अमरूद को फलों का राजा कहा जाता है। इसमें मौजूद पौष्टिक तत्व शरीर को फिट, स्वस्थ रखने के साथ-साथ इम्यूनिटी बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह हाइपोग्लीसेमिक ब्लडप्रेशर और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में फायदेमंद है। इसमें मौजूद पेक्टिन फाइबर पाचन बढ़ाने और भूख में सुधार करने में मदद करता है।
सिट्रस फल
सर्दियों में मिलने वाले संतरा, कीनू जैसे खट्टे जूसी साइट्रस फल अपनी दिनचर्या में जरूर शामिल करें। विटामिन सी, पेक्टिन फाइबर, लाइमोनीन, फाइटोकैमिकल्स से भरपूर ये फल जूस से भरपूर हैं। इनके नियमित सेवन से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में बढोतरी होती है, जिससे वायरल संक्रमण से होने वाले जुकाम-खांसी, फ्लू, वायरल जैसे रोगों से बचाव होता है।
अंगूर
अंगूर विटामिन, मिनरल्स, काबरेहाइड्रेट, ग्लूकोज जैसे पौष्टिक तत्वों और पोली-फिनॉल, एंटीऑक्सीडेंट, एंटी बैक्टीरियल, फाइटोन्यूट्रिएंट्स गुणों से लबरेज है। इसमें मौजूद शर्करा रक्त में आसानी से अवशोषित हो जाती है और थकान दूर कर शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है। कोलेस्ट्रॉल कम करने में सक्षम अंगूर के सेवन से हृदय रोग का खतरा कम रहता है। यह रक्त विकारों को दूर कर क्लींजर का काम करते हैं।
लाइफस्टाइल /शौर्यपथ / आपने अक्सर हेल्थ एक्सपर्ट्स को सलाह देते हुए सुना होगा कि पूरे दिन में सिर्फ 30 मिनट की वॉकिंग आपके दिल को हेल्दी बनाए रखने के साथ मांसपेशियों में मजबूती ,दिल की बिमारी, टाइप 2 मधुमेह, ऑस्टियोपोरोसिस और कई तरह के कैंसर के खतरे को भी कम करने का काम करती है। पर क्या आप वाकई जानते हैं सेहतमंद बने रहने के लिए वॉकिंग करने का सही तरीका क्या है और किस उम्र के व्यक्ति को कैसे करनी चाहिए वॉकिंग। आइए जानते हैं।
कैसा हो वॉक का तरीका-
बच्चों से लेकर उम्र दराज व्यक्ति तक के खड़े होने से लेकर उनके वॉक करने तक के तरीके में कई बड़े बदलाव देखे जाते हैं। लेकिन क्या है इनका सही तरीका, आइए जानते हैं।
खड़े होने का तरीका-
सैर करते समय व्यक्ति को अपने खड़े होने की पोजीशन पर भी ध्यान देना चाहिए। झुककर खड़े होने से व्यक्ति की पीठ में तकलीफ बढ़ सकती है। खड़े होते समय कोशिश करें कि आप सीधे खड़े हों।
हाथों की पोजिशन-
वॉक करते समय अपने हाथों को खुला छोड़ दें। हाथ बांधकर चलने से आप वॉक का फायदा नहीं उठा सकेंगे। हाथ बांधकर चलने से आपके कंधों में परेशानी भी शुरू हो सकती है।
लक्ष्य तय करें -
हर उम्र के व्यक्ति को वॉक करते समय अपने लिए एक लक्ष्य जरुर तय करना चाहिए । रोजाना 25 से 30 मिनट की वॉक व्यक्ति को सेहतमंद बनाए रखती है।
किस उम्र में कितनी वॉक करना सही-
5 से 18 साल तक-
-5 साल से 18 साल के बीच उम्र वाले लड़कों को 16 हजार कदम चलना चाहिए। वहीं लड़कियां 13 हजार तक कदम चल सकती हैं।
-19 से 40 साल तक-
19 से 40 साल के बीच उम्र वाले पुरुष और महिलाएं एक दिन में कम से कम 13 हजार से ज्यादा कदम चलें।
40 साल से बड़े उम्र के व्यक्ति-
अगर बात 40 साल के बाद के लोगों की करें तो उनके लिए 12 हजार कदम आदर्श माने गए हैं।
50 साल के व्यक्ति-
अगर आपकी उम्र 50 साल से ज्यादा है तो रोजाना 9 हजार से 10 हजार तक कदम चलें।
60 साल से ज्यादा-
60 साल से अधिक उम्र के लोगों को स्वस्थ्य बने रहने के लिए रोजाना 7 हजार से 8 हजार कदम चलने चाहिए। लेकिन इस बात का भी ध्यान रखें कि आप सिर्फ उतना ही चलें जिससे आपको चलते समय थकान महसूस न हो।
खाना खजाना /शौर्यपथ / ठंड के मौसम तरह-तरह के लड्डू सिर्फ स्वाद के लिए ही नहीं बल्कि सेहत के लिए भी फायदेमंद हैं।आज हम आपको अजवाइन के लड्डू की रेसिपी बता रहे हैं, जो इम्युनिटी को मजबूत करने साथ उन महिलाओं के लिए बहुत फायदेमंद हैं, जो मां बनी हैं।डिलीवरी के बाद अजवाइन के लड्डू का सेवन बच्चे और मां दोनों के लिए बेहद लाभदायक है।
इन गुणों से भरपूर है अजवाइन के लड्डू
अजवाइन में आयरन, सोडियम, मैग्नीशियम, विटामिन ए और विटामिन सी पाया जाता है, जो हमारी त्वचा और शरीर दोनों के लिए फायदेमंद होता है। इसमें प्रचुर मात्रा में फाइबर भी होता है जो पाचन क्रिया को ठीक रखने में मदद करता है।
सामग्री :
अजवाइन के लड्डू बनाने के लिए 1 किलो अजवाइन पिसी हुई, डेढ़ किलो गेहूं के आटे, 250 ग्राम गोंद, 1 सूखा नारियल कटा हुआ, देसी चीनी या गुड़ और आवश्यकतानुसार देसी घी की जरूरत होती है।
अजवाइन के लड्डू ऐसे बनाएं :
गैस पर कढ़ाई रखें और उसे गर्म होने दें।
अब कढ़ाई में 1 बड़ा चम्मच घी डालें और धीमी आंच पर घी को गर्म होने दें।
इसके बाद घी में गोंद डालें और इसे अच्छी तरह से भूनने के बाद किसी खाली बर्तन में निकाल लें।
अब गर्म-गर्म ही गोंद को पीस लें।
दोबारा कढ़ाई को गर्म करके उसमें घी डालें।
अब आटा डाल दें और इसको तब तक धीमी आंच पर पकाएं जब तक कि उसमें से खुशबू न आने लगे।
फिर इसमें गोंद और पिसा हुआ नारियल डालें।
इसमें पिसी हुई अजवाइन डालकर आटे के साथ मिला दें।
ठंडा होने पर इसमें चीनी या गुड़ डाल दें
चीनी मिलाने से अजवाइन का तीखापन कम हो जाता है।
अब इस चूरमे से लड्डू बना लें।
अजवाइन के लड्डू खाने के फायदे
-अजवाइन महिलाओं को प्रसव के बाद होने वाली पीड़ा से राहत दिलाने का सबसे अच्छा उपाय है। इसमें एंटी-इंफ्लामेट्री गुण होते हैं जो प्रसव के बाद होने वाले दर्द को दूर करते हैं।
-अजवाइन मां और बच्चे दोनों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है।
-यह कफ और बलगम को भी ठीक करती है और सर्दी, जुकाम से बचाती है।
-अजवाइन का पानी नियमित रूप से पीने से शरीर से सारी गंदगी बाहर निकल जाती है। अजवाइन डिलीवरी के बाद शरीर को डिटॉक्सिफाई करने के गुण रखती है।
-इसमें कुछ ऐसे गुण होते हैं जो स्तनपान करवाने वाली महिलाओं के दूध को और पौष्टिक बनाते हैं।
-गर्भावस्था के बाद महिलाओं को हमेशा वजन बढ़ने की शिकायत होती है जिसे अजवाइन से कम किया जा सकता है।
-अक्सर प्रसव के बाद महिलाओं को पीठ और पैरों में दर्द की परेशानी होती है, अजवाइन खाने से इस दर्द में राहत मिलती है।
शौर्यपथ /मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की विशेष रूचि के चलते राज्य में छत्तीसगढ़ की कला-संस्कृति एवं परम्पराओं को जीवंत बनाए रखने का सार्थक प्रयास शुरू हो गया है। सरकारी संरक्षण के चलते कला और संस्कृति के पुष्पित एवं पल्लवित होने का अनुकूल वातावरण निर्मित हुआ है। राज्य में विभिन्न अवसरों एवं तीज-त्यौहारों के मौके पर कला एवं संस्कृति से जुड़े लोगों एवं कलाकारों को बीते दो सालों से लगातार मंच मिलने से उनमें उत्साह जगा है। संस्कृति और परम्पराओं को सहेजने के लिए संस्कृति परिषद के गठन से राज्य के कलाकारों एवं शिल्पियों एक मंच मिला है। इससे छत्तीसगढ की ंसाहित्य, संगीत, नृत्य, रंगमंच, चित्रकला, मूर्तिकला, सिनेमा और आदिवासी एवं लोककलाओं को विस्तार, प्रोत्साहन और कलाकारों के संरक्षण में मदद मिलेगी। सरकार का यह प्रयास सराहनीय है।
संस्कृति परिषद के अंतर्गत साहित्य अकादमी, कला अकादमी, आदिवासी एवं लोककला अकादमी, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम, छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग और छत्तीसगढ़ सिंधी अकादमी प्रभाग बनाए गए हैं। नवा रायपुर में फिल्मसिटी विकसित करने की योजना है। नवा रायपुर में पुरखौती मुक्तांगन के समीप राज्य की जनजातीय कला, शिल्प एवं परम्परा तथा लोक जीवन का विशाल मुक्ताकाशी संग्रहालय ‘पुरखौती मुक्तांगन’ विकसित किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत जनजातीय प्राचीन संस्कृति का विशिष्ट स्वरूप, छत्तीसगढ़ की बहुरंगी संस्कृति के विभिन्न आयामों ‘आमचो बस्तर’ के पश्चात् ‘सरगुजा प्रखंड’ का विकास किया जा रहा है।
जनजातीय समुदाय के नृत्य-गीत, पर्व, आस्था और संस्कृति के संरक्षण, प्रोत्साहन और प्रचार-प्रसार तथा कला परम्परा के परस्पर सांस्कृतिक विनिमय के लिये मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की रूचि के चलते राज्य में राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के गौरवशाली आयोजन की शुरूआत हुई है। इससे जनजातीय कला एवं संस्कृति विश्व पटल पर प्रसारित हुई है। राजिम कुंभ को अब राजिम माघी पुन्नी मेला नाम से जाना जाने लगा है। माघी पुन्नी मेला छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए आस्था का प्रतीक है और इसके आयोजन के वर्षों पुरानी परम्परा को सरकार ने पुनर्जीवित कर दिया है। सिरपुर महोत्सव के आयोजन से छत्तीसगढ़ की कला-संस्कृति को बढ़ावा और कलाकारों को मंच मिलता है।
छत्तीसगढ़ की वर्तमान सरकार हरेली त्यौहार को बड़े ही धूम-धाम से पूरे राज्य में मनाने की एक नई पहल की गई है। शासन द्वारा हरेली पर्व के अवसर पर सार्वजनिक अवकाश घोषित कर इसकी महत्ता को और बढ़ा दिया है। हरेली पर्व के शुभ अवसर पर ही इस वर्ष छत्तीसगढ़ शासन ने अपनी सार्वधिक लोकप्रिय गोधन न्याय योजना की शुरूआत की और गौवंशीय पशुओं के संरक्षण और संवर्धन को प्रोत्साहित करने का सफल प्रयास किया है। दशहरा महोत्सव अंबिकापुर, रामगढ़ महोत्सव, श्री महावीर मंडल लोक न्यास अंबिकापुर, इग्नेटसचर्च, अंबिकापुर, मैनपाट महोत्सव, तातापानी महोत्सव, कुदरगढ़ महोत्सव के लिए वित्तीय सहायता देकर सरकार ने कला एवं संस्कृति को संरक्षण प्रदान किया है।
राज्य के सभी जिलों में पारंपरिक छत्तीसगढ़ी खानपान एवं व्यंजनों को जन सामान्य को सहजता से उपलब्ध कराने तथा इसको लोकप्रिय बनाने के उद्देश्य से सभी जिलों में गढ़ कलेवा की शुरूआत की गई है। गढ़ कलेवा में सस्ते दर पर छत्तीसगढ़ी व्यंजन का लुत्फ उठाया जा सकता है। राज्य के साहित्यकारों, कलाकारों अथवा उनके परिवार के सदस्यों की लंबी तथा गंभीर बीमारी, दुर्घटना, मृत्यु अथवा दैवीय विपत्ति की स्थिति में ईलाज के लिए सहायता देने का प्रावधान है। कला और साहित्य के विकास में योगदान देने वाले अर्थाभावग्रस्त लेखकों, कलाकारों के आश्रितों को मासिक वित्तीय सहायता दी जा रही है।
भोपाल साहित्य एवं कला महोत्सव के अवसर पर हॉर्टलैण्ड स्टोरिज भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में बस्तर बैण्ड के लोक कलाकार दल ने सराहनीय प्रस्तुति देकर छत्तीसगढ़ की कला को राष्ट्रीय क्षितिज पर गौरान्वित किया है। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा भोरमदेव महोत्सव, गनियारी लोक कला महोत्सव, कर्णेश्वर महादेव मेला महोत्सव, रतनपुर में माघी पूर्णिमा एवं आदिवासी विकास मेला, संत समागम महामेला दामाखेड़ा, मल्हार महोत्सव, शिवरीनारायण मेला महोत्सव तथा लोक मड़ई महोत्सव राजनांदगांव आदि के आयोजन के लिए दी जाने वाली मदद से छत्तीसगढ़ की कला एवं संस्कृति को बढ़ावा तथा छत्तीसगढ़ी लोक कलाकारों को प्रोत्साहन मिल रहा है।
शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में छत्तीसगढ़ी खानपान एवं व्यंजन विक्रय केन्द्र गढ़कलेवा शुरू करने के निर्देश दिए हैं। रायपुर के महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय परिसर में प्रयोग के तौर पर छत्तीसगढ़ी खानपान एवं व्यंजन विक्रय केन्द्र संचालित है। यह रायपुर शहर के अन्य खान-पान केन्द्रों से प्रतिस्पर्धा करते हुए, गुणवत्ता और मानकों पर खरा उतरा है, जिससे पारंपरिक और स्वास्थ्यकर, स्वादिष्ट खान-पान को बल मिला है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप संस्कृति विभाग द्वारा राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में गढ़कलेवा शुरू किया गया है।
छत्तीसगढ़ की संस्कृति में खान-पान की विशिष्ट परंपराए हैं, जो हर प्रहर, बेला, मौसम और तीज त्यौहारों के अवसर पर पकाए, खाए और खिलाए जाते हैं। वनवासी-जनजातीय समाज का कलेवा मुख्यतः प्राकृतिक वनोपज पर आधारित है, तो जनपदीय संस्कृति के वाहकों के कलेवा में रोचक रसपूर्ण विविधता है। मांगलिक और गैरमांगलिक दोनों प्रसंग के व्यंजनों की अपार श्रृंखला है। ये व्यंजन भुने हुए, भाप से पकाये, तेल में तले और ये तीनों के बगैर भी तैयार होते हैं।
छत्तीसगढ़ के कुछ प्रमुख पकवानों में चीला, बेसन चीला, गुरहा चीला, फरा, मुठिया, धुसका, चंाउर रोटी, चंउर पातर रोटी, खुपुर्री रोटी, बफौरी, चंवसेला, बरा, पताल चटनी, देहरउरी, अईरसा, दुधफरा, पकवा, ठेठरी, खुरमी, बिड़िया, पिड़िया, पपची, पूरन लाडू, करी लाडू, बुंदी लाडू, मुर्रा लाडू, लाई लाडू शामिल है।
राज्य शासन द्वारा छत्तीसगढ़ी खान-पान एवं व्यंजन विक्रय केन्द्र गढ़कलेवा छत्तीसगढ़ के सभी जिला मुख्यालयों में वित्तीय वर्ष 2020-21 में प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया है। इसके अतर्गत स्थानीय महिला स्वसहायता समूहों को प्रशिक्षित कर तथा गढ़कलेवा हेतु स्थल, शेड़ आदि तैयार कर संचालन हेतु दिया जाएगा। जिससे समूह के गरीब परिवारों को जीवन यापन के लिए स्वरोजगार प्राप्त हो सके और आत्म निर्भर बन सकंे। भारत सरकार की योजना ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के अंतर्गत अंतर्राष्ट्रीय काईट फेस्टिवल 06 से 14 जनवरी 2019 में गुजरात के अहमदाबाद में छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं छत्तीसगढ़ व्यंजन स्टाल लगाया गया था, जहां लोगों ने छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का भरपूर लुत्फ उठाया।
लाइफस्टाइल /शौर्यपथ / साल 2020 को यकीनन कोई भूला नहीं सकता। इस साल ने जिंदगी के मायने समझाए। तो वहीं लाइफ में कुछ ऐसे बदलाव हुए जिनके बारे में हमने कभी कल्पना भी नहीं कि होगी। जी हां कोरोनावायरस के प्रकोप ने सेहत का ख्याल रखना कितना जरूरी है इस बात को बहुत अच्छी तरह से समझा दिया। वहीं लॉकडाउन के दौरान पूरे वक्त घर में रहकर आप कैसे फिट रह सकते है। वहीं रोजाना जिम, योग और ऐरोबिक्स क्लास लेने वाले लोग घर पर ही कैद होकर रह गए, लेकिन लोगों ने इसके लिए भी नए रास्ते निकालें।
तो आइए जानते हैं कुछ ऐसे फिटनेस के कुछ ऐसे तरीके जो साल 2020 में ट्रेंड में रहे...
ऑनलाइन फिटनेस क्लास
बात चाहे पढ़ाई को हो या आपके ऑफिस के काम की लॉकडाउन में
आधे से ज्यादा काम ऑनलाइन होने लगे तो फिटनेस कैसे पीछे रह सकती है। लोगों ने फिट रहने के लिए ऑनलाइन फिटनेस क्लासेस को अपनाया। जिसमें योगा से लेकर एरोबिक्स क्लासेस भी शामिल है।
वॉक
लॉकडाउन के बाद जब जिंदगी धीरे-धीरे पटरी पर आने लगी तो लोगों को बाहर निकलकर वॉक करने की अनुमति मिल गई। जिसके बाद लोगों नें पार्क में टहलने गए और खुद को फिट रखने के लिए सोशल डिस्टेंसिग के साथ वॉक कर खुद को सेहतमंद रखा।
खेल-खेल में फिटनेस
फिटनेस के लिए साल 2020 में
बैडमिंटन और टेनिस भी काफी ट्रेंड में रहे लोगों ने खेल को अपनाकर खुद को फिट रखने की कोशिश की इनकी मदद से लोग फिट तो रह ही पाएं साथ ही मूड भी फ्रेश हुआ।
साइकिल प्रेम
साल 2020 में लोगों का साइकिल प्रेम साफ नजर आया। लोगों ने खुद को फिट रखने के लिए साइकिल की मदद ली। ऐसे में लोगों ने साइकिल के क्रेज को फिर से बढ़ावा दिया। तो वहीं साइकिल की डिमांड में भी इजाफा हुआ।
शौर्यपथ / वर्ष 2020 में पूरे विश्व में सिर्फ एक ही नाम गूंजा और वह है कोरोनावायरस। इस वायरस से निपटने के लिए लोगों ने तमाम तरह के उपायों को आजमाया। साफ-सफाई, हाथों को साफ रखना, मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग आदि। ये एक ऐसे हथियार हैं, जो कोरोना के कहर से लोगों को बचाने में मददगार हैं। वहीं वर्ष 2020 लोगों के जीवन में कई तरह के बदलाव लेकर आया जिसमें सेहत संबंधी कई बदलाव देखे गए, क्योंकि कोरोना काल में खुद को स्वस्थ और कोरोना से दूर रखना किसी चुनौती से कम नहीं था। तो आइए जानते हैं कि साल 2020 में सेहत से जुड़ीं 20 बड़ी बातों के बारे में...
वर्ष 2020 में कोरोना के कहर के साथ-साथ लोगों ने कई अन्य बीमारियों का भी सामना किया। इसी के साथ सेहतमंद जिंदगी को पाने व बीमारियों से दूर रहने के लिए कुछ बातों को अपनी दिनचर्या में शामिल किया। आइए जानते हैं...
1- कोरोना काल में सेहत के लिए लोगों में काफी जागरूकता देखी गई। रोगों से दूर रहने के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होना बेहद जरूरी है। इस बात को लोगों ने समझा और अपनी डाइट में ऐसी चीजों को शामिल किया, जो रोगों से लडऩे के लिए शरीर को अंदर से मजबूत कर सके।
2- स्वच्छता का ख्याल- साल 2020 कोरोना का साल रहा, यह कहना गलत नहीं होगा। इस वर्ष लोगों का पूरा ध्यान अपनी सेहत और खुद को कैसे स्वस्थ रख सकते हैं, यह सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण रहा। कोरोना से बचाव के लिए लोगों ने व्यक्तिगत हाइजीन का ख्याल रखा। उचित समय पर हाथ धोना और अपने हाथों को साफ रखना सेहत के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है ताकि वायरस से दूर रहा जा सके।
3- मानसिक तनाव- कोरोनावायरस लोगों में मानसिक तनाव लेकर आया। लोगों के मन में उनकी सेहत, करियर व नौकरी आदि इन तमाम बातों को लेकर चिंता बनी रही जिस वजह से वे मानसिक रूप से खुद स्वस्थ महसूस नहीं कर पाए। पूरी नींद न होने, पूरे वक्त कोरोना से जुड़ी खबरों को सुनने-पढऩे की वजह से लोगों में चिड़चिड़ापन देखा गया। कुछ लोग उदासी, बोरियत, अकेलापन और निराशा से भी जूझते नजर आए।
4- मास्क है तो जीवन है- वर्ष 2020 में कोरोना से बचने के लिए मास्क का इस्तेमाल करना बेहद जरूरी है, इसे सुरक्षा कवच कहना गलत नहीं होगा। मास्क के इस्तेमाल से लोग कोरोना जैसी घातक बीमारी से बच सकते हैं। लेकिन पूरे वक्त मास्क लगाकर रखने की वजह से लोगों में स्किन से जुड़ी समस्याएं भी देखने को मिलीं।
5- वर्क फ्रॉम होम कल्चर- वर्ष 2020 में लोगों को वर्क फ्रॉम होम मिला जिससे ऐसे में लंबे वक्त एक जगह बैठकर काम करने की वजह से लोगों में पीठ व कमर दर्द की परेशानियां बढ़ीं।
6- कोरोनावायरस से बचने के लिए लंबे समय तक मास्क लगाए रखने से लोगों को सांस लेने में दिक्कत, सिर में दर्द, घबराहट, आंखों के सामने अचानक अंधेरा छाना जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
7- कोरोना काल में मास्क का इस्तेमाल करना बेहद जरूरी है। मास्क का उपयोग कर आप इस वायरस से बच सकते हैं। लेकिन मास्क के इस्तेमाल के कारण लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्हीं में से एक है कानों में दर्द। लंबे समय तक मास्क का इस्तेमाल करने से कुछ लोगों के कान में दर्द की समस्या आ रही है।
8- मास्क का बहुत देर तक इस्तेमाल करने से स्किन की कई समस्याएं भी पैदा हो रही हैं। मास्क से चेहरे पर मुंहासे, दाने और स्किन की परेशानी बढ़ रही है। घंटों मास्क लगाकर सड़क पर चलने या काम करने से स्किन में नमी, पसीना और गंदगी जमी रह जाती है जिसकी वजह से फेस पर लाल रंग के निशान, पिंपल्स, स्वेलिंग, एक्ने जैसी दिक्कतें होने लगती हैं।
9- हैंड सैनिटाइजर में ट्राइक्लोसान नाम एक केमिकल होता है जिसे हाथ की स्किन सोख लेती है। इसके ज्यादा इस्तेमाल से यह केमिकल आपकी त्वचा से होते हुए आपके रक्त में मिल जाता है। रक्त में मिलने के बाद यह आपकी मांसपेशियों के ऑर्डिनेशन को नुकसान पहुंचाता है।
10- सैनिटाइजर में खुशबू के लिए फैथलेट्स नामक रसायन का इस्तेमाल किया जाता है। इसकी मात्रा जिन सैनिटाइजर में ज्यादा होती है, वे हमारे लिए हानिकारक होते हैं। इस तरह के अत्यधिक खुशबू वाले सैनिटाइजर लिवर, किडनी, फेफड़े तथा प्रजनन तंत्र को नुकसान पहुंचाते हैं।
11- सैनिटाइजर में अल्कोहल की मात्रा होने की वजह से ये बच्चों की सेहत पर बुरा असर डाल सकते हैं, खासकर यदि बच्चे इसे नादानी में निगल लें।
12- कई रिसर्च के अनुसार इसका ज्यादा प्रयोग बच्चों की इम्युनिटी को भी घटाता है।
13- नींद न आना- कोरोना काल में लगातार मन में चिंताओं और बदलती दिनचर्या की वजह से लोगों को नींद न आने जैसी समस्याओं से भी जूझना पड़ रहा है। ऐसे में इसका सीधा असर उनके स्वास्थ्य पर दिखाई दे रहा है।
14 डिप्रेशन- कोरोना काल में लोगों पर नकारात्मकता हावी हो रही है। लगातार अपने भविष्य व नौकरी की चिंता ऐसी तमाम बातें युवाओं को डिप्रेशन की ओर ले जा रही हैं। इसके लिए विशेषज्ञ भी सकारात्मक सोच रखने की सलाह दे रहे हैं, साथ ही मेडिटेशन करने के लिए भी कह रहे हैं ताकि डिप्रेशन से बच सकें।
15- साल 2020 सेहत के लिए लिहाज से काफी चुनौतीपूर्ण रहा। इस वर्ष लोगों को जहां सेहत समस्या का सामना करना पड़ा, वहीं नियमों का पालन कर वे अपनी सेहत का ख्याल भी रख रहे हैं। कोरोना काल में लोगों ने भीड़भाड़ वाले इलाकों में जाने से दूरी बनाई। सेहतमंद रहने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का पालन कर रहे हैं।
16- सेहत को ध्यान में रखते हुए और अपनी सुरक्षा का पूरा ख्याल रखते हुए साफ-सफाई का भी पूरा ख्याल रखा जा रहा है, जैसे घर में बाहर से लाई गई किसी भी चीज को चाहे वे सब्जियां हों या फल, इन्हें बिना सैनिटाइज किए नहीं रख रहे हैं। सबसे पहले उन्हें अच्छी तरह से साफ करके फिर उन्हें स्टोर किया जा रहा है।
17- घर से बाहर जाने या घर पर कहीं बाहर से आने पर व्यक्तिगत हाइजीन का पूरा ख्याल रखा जा रहा है ताकि वायरस से बचा जा सके। कहीं बाहर से आने पर नहाने और अपने कपड़े बदलने के बाद ही घर के अन्य सदस्यों के संपर्क में आ रहे हैं।
18- सेहतमंद रहने और अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत रखने के लिए लोगों ने अपनी खाने-पीने की आदत में काफी बदलाव किए। इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए काढ़े, तुलसी, अदरक, हर्बल टी व कालीमिर्च जैसी तमाम चीजों का सेवन किया जा रहा है, जो सेहत के लिए फायदेमंद हों।
19- सेहत के लिहाज से लोगों ने योग को अपनी दिनचर्या में शामिल किया। एक्सपर्ट बताते हैं कि रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा लें या यूं कहें कि इसे मजबूत कर लें और साथ ही अपना श्वसन तंत्र सक्रिय रखें तो कोई भी बीमारी हमें नुकसान नहीं पहुंचा सकती है। योगासन के माध्यम से शरीर को आसानी से सक्रिय किया जा सकता है।
20- वर्ष 2020 में कोरोना काल में मानसिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ा है। ऐसे में मेडिटेशन को लोगों ने अपने जीवन में शामिल किया ताकि वे तनावमुक्त रह सकें।
धर्म संसार /शौर्यपथ / महाभारत के युद्ध में द्रोण पुत्र अश्वत्थामा ने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग करके जगत में हलचल मचा दी थी। कौरवों की ओर से लड़ रहे द्रोण, भीष्म, अश्वत्थामा और जयद्रथ को मारना तो लगभग नामुमकीन था, परंतु श्रीकृष्ण जिसके साथ हो वहां सबकुछ संभव हो सकता है। कुरुक्षेत्र के युद्ध के अंत के बाद द्रोण पुत्र अश्वत्थामा ने जो अस्त्र छोड़ा था वह भयंकर था। आओ जानते हैं कि क्यों और किस तरह यह अस्त्र छोड़ा गया था।
क्यों : कुरुक्षेत्र के युद्ध में जब गुरु द्रोणाचार्य से यह झूठ बोला किया कि अश्वत्थामा मारा गया है तो गुरु द्रोण को पहले तो ये विश्वास नहीं हुआ क्योंकि उनका पुत्र तो अजर अमर है जिसे कोई मार नहीं सकता तब उन्होंने युधिष्ठिर से इसकी पुष्टि करना चाहिए। युधिष्ठिर को पता था कि अश्वत्थामा नहीं मारा गया है बल्कि इसी नाम का एक हाथी भीम द्वारा मार गिराया गया है। चूंकि युधिष्ठिर हाथी को भी मरते या मारते हुए नहीं देखा था अत: वह झूठ बोलने को तैयार नहीं थे। द्रोणाचार्य के पूछते पर उन्होंने कहा कि हां अश्वत्थामा मारा गया है।..युधिष्ठिर के इतना कहने पर ही श्रीकृष्ण अपना शंख बजा देते हैं जिसके शोर में द्रोणाचार्य युधिष्ठिर द्वारा कही गई आगे की बात नहीं सुन पाते हैं कि.. परंतु वह हाथी था या ओर कोई यह मैं नहीं जानता।
गुरु द्रोणाचार्य आखिरी शब्द 'हाथी' नहीं सुन पाए और उन्होंने समझा मेरा पुत्र मारा गया। यह सुनकर उन्होंने शस्त्र त्याग दिए और युद्ध भूमि में आंखें बंद कर शोक में डूब गए। यही मौका था जबकि द्रोणाचार्य को निहत्था जानकर द्रौपदी के भाई धृष्टद्युम्न ने तलवार से उनका सिर काट डाला। जब यह बात अश्वत्थामा को पता चली की मेरे पिता को छल से मारा गया है तो उसने क्रोधित होकर पांडवों के समूल नाश की शपथ ली।
अपने पिता के मारे जाने के बाद अश्चत्थामा बदले की आग में जल रहा था। उसने पांडवों का समूल नाश करने की प्रतिज्ञा ली और चुपके से पांडवों के शिविर में पहुंचा और कृपाचार्य तथा कृतवर्मा की सहायता से उसने पांडवों के बचे हुए वीर महारथियों को मार डाला। केवल यही नहीं, उसने पांडवों के पांचों पुत्रों के सिर भी काट डाले।
पुत्रों की हत्या से दुखी द्रौपदी विलाप करने लगी। उसने पांडवों से कहा कि जिस मणि के कारण वह अजर अमर है उस मणि को उसके मस्तक पर से उतार लो। अर्जुन ने जब यह भयंकर दृश्य देखा तो उसका भी दिल दहल गया। उसने अश्वत्थामा के सिर को काटने की प्रतिज्ञा ली। अर्जुन की प्रतिज्ञा सुनकर अश्वत्थामा वहां से भाग निकला। भीम को जब यह पता चला तो वह अश्वत्थामा को मारने के लिए उसे ढूढंने निकल पड़े। उनके पीछे युधिष्ठिर भी निकल पड़े। बाद में श्रीकृष्ण और अर्जुन भी अपने रथ पर सवार होकर निकल पड़े।
किस तरह : पांडवों से बचने के लिए अश्वत्थामा उस वक्त धृत लगाकर कुश के वस्त्र पहनकर गंगा के तट पर बैठा था। वहां वेद व्यासजी के साथ अन्य ऋषि भी थे। यह भी कहा जाता है कि उसे जब यह पता चला कि अर्जुन और श्रीकृष्ण उसे पकड़ने के लिए उसके पीछे आ रहे हैं तो वह वेदव्यासजी के आश्रम में पहुंच गया। तभी वहां पर अर्जुन और श्रीकृष्ण पहुंच जाते हैं। उन्हें देखकर अश्वत्थामा एक कुश को निकालकर मंत्र पढ़ने लगता है और उस कुश को ही ब्रह्मास्त्र बनाकर उसे अर्जुन पर छोड़ देता है। यह देखकर श्रीकृष्ण और वेद व्यासजी अचंभित हो जाते हैं। तब तक्षण श्रीकृष्ण के कहने पर अर्जुन भी ब्रह्मास्त्र का प्रयोग करता है।
यह देखकर वेदव्यासजी घबरा जाते हैं और वह अपने बल से दोनों के ब्रह्मास्त्र को बीच में ही रोककर कहते हैं कि अपने अपने ब्रह्मास्त्र को वापस लो अन्यथा विनाश हो जाएगा। अर्जुन तो अपना ब्रह्मास्त्र वापस ले लेता है परंतु अश्वत्थामा कहता है कि मैं ऐसा करने में असमर्थ हूं तब वह उस ब्रह्मास्त्र का रुख अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ में पल रहे बालक पर छोड़ देता है। यह देखकर सभी अचंभित और क्रोधित हो जाते हैं।
यह देखकर कृष्ण ने अश्वत्थामा से कहा- 'उत्तरा को परीक्षित नामक बालक के जन्म का वर प्राप्त है। उसका पुत्र तो होगा ही। यदि तेरे शस्त्र-प्रयोग के कारण मृत हुआ तो भी मैं उसे जीवित कर दूंगा। वह भूमि का सम्राट होगा और तू? नीच अश्वत्थामा! तू इतने वधों का पाप ढोता हुआ 3,000 वर्ष तक निर्जन स्थानों में भटकेगा। तेरे शरीर से सदैव रक्त की दुर्गंध नि:सृत होती रहेगी। तू अनेक रोगों से पीड़ित रहेगा।' वेद व्यास ने श्रीकृष्ण के वचनों का अनुमोदन किया।
तब अश्वत्थामा ने कहा, 'हे श्रीकृष्ण! यदि ऐसा ही है तो आप मुझे वह मनुष्यों में केवल व्यास मुनि के साथ रहने का वरदान दीजिए, क्योंकि मैं सिर्फ उनके साथ ही रहना चाहता हूं।' जन्म से ही अश्वत्थामा के मस्तक में एक अमूल्य मणि विद्यमान थी, जो कि उसे दैत्य, दानव, अस्त्र-शस्त्र, व्याधि, देवता, नाग आदि से निर्भय रखती थी।
कहते हैं कि गुरु द्रोण के पुत्र अश्वत्थामा ने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया था जिसके चलते इतना जोर का धमाका हुआ था कि गर्भ में पल रहे शिशुओं तक की मौत हो गई थे। मोहन जोदड़ो में कुछ ऐसे कंकाल मिले थे जिसमें रेडिएशन का असर होने की बात कही जा रही थी। महाभारत में सौप्तिक पर्व के अध्याय 13 से 15 तक ब्रह्मास्त्र के परिणाम दिए गए हैं। यह परिणाम ऐसे ही हैं जैसा कि वर्तमान में परमाणु अस्त्र छोड़े जाने के बाद घटित होते हैं। हिंदू इतिहास के जानकारों के मुताबिक 3 नवंबर 5563-64 वर्ष पूर्व छोड़ा हुआ ब्रह्मास्त्र परमाणु बम ही था?
महाभारत में इसका वर्णन मिलता है- ''तदस्त्रं प्रजज्वाल महाज्वालं तेजोमंडल संवृतम।।'' ''सशब्द्म्भवम व्योम ज्वालामालाकुलं भृशम। चचाल च मही कृत्स्ना सपर्वतवनद्रुमा।।'' 8 ।। 10 ।।14।।- महाभारत
अर्थात : ब्रह्मास्त्र छोड़े जाने के बाद भयंकर वायु जोरदार तमाचे मारने लगी। सहस्रावधि उल्का आकाश से गिरने लगे। भूतमातरा को भयंकर महाभय उत्पन्न हो गया। आकाश में बड़ा शब्द हुआ। आकाश जलाने लगा पर्वत, अरण्य, वृक्षों के साथ पृथ्वी हिल गई।
अश्वत्थामा के मामा कृपाचार्य आज भी जीवित हैं? जानिए 10 रहस्य
हस्तिनापुर के कौरवों के कुलगुरु द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा के मामा कृपाचार्य महाभारत युद्ध में कृपाचार्य कौरवों की ओर से सक्रिय थे। इनकी बहन 'कृपि' का विवाह द्रोणाचार्य से हुआ था। महाभारत के युद्ध में कृपाचार्य बच गए थे, क्योंकि उन्हें चिरंजीवी रहने का वरदान था। आओ जानते हैं उनके बारें में 10 रहस्य।
1. गौतम ऋषि के पुत्र शरद्वान और शरद्वान के पुत्र कृपाचार्य की माता का नाम नामपदी था जो एक देवकन्या थी। इंद्र ने शरद्वान को साधना से डिगाने के लिए नामपदी को भेजा था, क्योंकि वे शक्तिशाली और धनुर्विद्या में पारंगत थे जिससे इंद्र खतरा महसूस होने लगा था।
देवकन्या नामपदी (जानपदी) के सौंदर्य के प्रभाव से शरद्वान इतने कामपीड़ित हो गए कि उनका वीर्य स्खलित होकर एक सरकंडे पर गिर पड़ा। वह सरकंडा दो भागों में विभक्त हो गया जिसमें से एक भाग से कृप नामक बालक उत्पन्न हुआ और दूसरे भाग से कृपी नामक कन्या उत्पन्न हुई। शरद्वान-नामपदी ने दोनों बच्चों को जंगल में छोड़ दिया जहां महाराज शांतनु ने इनको देखा और इन पर कृपा करके दोनों का लालन पालन किया जिससे इनके नाम कृप तथा कृपी पड़ गए।
2. कृपाचार्य महाभारत युद्ध में कौरवों की ओर से लड़े थे। महाभारत युद्ध के कृपाचार्य, गुरु द्रोणाचार्य और भीष्म पितामह की जोड़ी थी। युद्ध में द्रोणाचार्य, कृपाचार्य और अश्वत्थामा तीनों ही भयंकर योद्धा था। तीनों ही ही अपने युद्ध कौशल के बल पर पांडवों की सेना का संहार कर दिया था।
2. कृपाचार्य जिंदा बच गए 18 महायोद्धाओं में से एक थे। भीष्म और द्रोण के बाद उन्हें ही सेनापति बनाया गया था।
3. कृपाचार्य अश्वत्थामा के मामा थे। कृपाचार्य की बहन कृपी का विवाह गुरु द्रोण के साथ हुआ था। कृपि के पुत्र का नाम था- अश्वत्थामा। अर्थात अश्वत्थामा के वे मामाश्री थे।
4.द्रोणाचार्य के छल से वध होने के बाद मामा और भांजे की जोड़ी ने युद्ध में कोहराम मचा रखा था।
5. कृपाचार्य भी धनुर्विद्या में अपने पिता के समान ही पारंगत थे। भीष्म ने इन्हीं कृपाचार्य को पाण्डवों और कौरवों की शिक्षा-दीक्षा के लिए नियुक्त किया और वे कृपाचार्य के नाम से विख्यात हुए।
6. कुरुक्षेत्र के युद्ध में ये कौरवों के साथ थे और कौरवों के नष्ट हो जाने और दुर्योधन की मृत्यु के बाद अश्वत्थामा, कृपाचार्य और कृतवर्मा अलग-अलग हो गए। कृपाचार्य ने बाद में इन्होंने परीक्षित को अस्त्रविद्या सिखाई।
7. युद्ध में कर्ण के वधोपरांत उन्होंने दुर्योधन को बहुत समझाया कि उसे पांडवों से संधि कर लेनी चाहिए किंतु दुर्योधन ने अपने किए हुए अन्यायों को याद कर कहा कि न पांडव इन बातों को भूल सकते हैं और न उसे क्षमा कर सकते हैं। युद्ध में मारे जाने के सिवा अब कोई भी चारा उसके लिए शेष नहीं है।
8. महाभारत के युद्ध में अर्जुन और कृपाचार्य के बीच भयानक युद्ध हुआ।
9. जब अश्वत्थामा द्रौपदी के सोते हुए पांचों पुत्रों का वध कर देते हैं तब गांधारी कृपाचार्य से कहती है कि अश्वत्थामा ने जो पाप किया है उस पाप के भागीदार आप भी हैं। आप चाहते तो उसे ऐसा करने से रोक सकते थे। आपने अश्वत्थामा का साथ दिया। आप हमारे कुलगुरु हैं। आप धर्म और अधर्म को अच्छी तरह समझते हैं। आपने यह पाप क्यों होने दिया? कृपाचार्य को इस बात का पछतावा भी हुआ था।
10. 'भागवत' के अनुसार सावर्णि मनु के समय कृपाचार्य की गणना सप्तर्षियों में होती थी।
अश्वत्थामा बलिव्र्यासो हनूमांश्च विभीषण:।
कृप: परशुरामश्च सप्तएतै चिरजीविन:॥
सप्तैतान् संस्मरेन्नित्यं मार्कण्डेयमथाष्टमम्।
जीवेद्वर्षशतं सोपि सर्वव्याधिविवर्जित।।
अर्थात- अश्वत्थामा, राजा बलि, महर्षि वेदव्यास, हनुमानजी, विभीषण, कृपाचार्य, परशुराम व ऋषि मार्कण्डेय- ये आठों अमर हैं।
लेख /शौर्यपथ / वनों को सहेजने के मामले में छत्तीसगढ़ राज्य पूरे देश में अग्रणी है। कोरोना-काल में जहां पूरे देश में वन आधारित आर्थिक गतिविधियां ठप रहीं, वहीं मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने इस दौरान अच्छी उपलब्धि हासिल की। लॉकडाउन के दौरान देशभर में हुए वनोपज संग्रहण में छत्तीसगढ़ की सर्वाधिक भागीदारी रही। इससे वनवासियों को सलाना लगभग 2500 करोड़ की आय होने की संभावना है। ट्राईफेड के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में माह जुलाई तक 112 करोड़ रूपए मूल्य के 4 लाख 75 हजार क्विंटल वनोपजों का संग्रहण किया गया। जबकि कोरोना ने दुनिया की अर्थव्यवस्था को ध्वस्त कर रखा है, ऐसे में छत्तीसगढ़ के वनवासी वनोपजों के संग्रहण से जीवकोपार्जन के साथ-साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी गतिमान बनाये हुए हैं।
लॉकडाउन के दौरान फैक्ट्रियों के बन्द होने से देश-दुनिया में रोजगार की समस्या गहरा गयी, लेकिन छत्तीसगढ़ में इस संकटकाल में भी वनवासियों को वनोपज और वनोषधि संग्रहण से रोजगार मिलता रहा। आर्थिक रूप से प्रदेश में आत्मनिर्भरता आई, साथ ही अर्थव्यवस्था के पहिये भी सुचारू रूप से चलते रहे। छत्तीसगढ़ शासन की नयी आर्थिक रणनीति वनों के जरिये वनवासियों की बड़ी जनसंख्या के जीवन में बदलाव ला रही है। राज्य में हर साल तेंदूपत्ता संग्रहण से 12 लाख 65 हजार संग्राहक परिवारों को रोजगार मिल रहा है। राज्य शासन द्वारा तेंदूपत्ता का मूल्य बढ़ाकर अब 4000 रुपए प्रति मानक बोरा कर दिया गया है, जिससे उन्हें 649 करोड़ रुपए का सीधा लाभ प्राप्त हो रहा है।
छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदे जाने वाले वनोपजों की संख्या 7 से बढ़ाकर अब 52 कर दी है। छत्तीसगढ़ लघु वनोजपजों के संग्रहण में देश में पहले स्थान पर है। यहां इस वर्ष शुरुआती छह माह में ही लघु वनोपजों के संग्रहण का सालाना लक्ष्य पूर्ण कर लिया गया। चालू वनोपज संग्रहण के दौरान राज्य में जुलाई 2020 तक 112 करोड़ रूपए की राशि के 4 लाख 75 हजार क्विंटल लघु वनोपजों का संग्रहण किया गया। राज्य में वनवासियों के हित को ध्यान में रखते हुए महुआ का समर्थन मूल्य 17 से बढ़ाकर 30 रूपए प्रति किलोग्राम किया गया। योजना के दायरे में लाए गए वनोपजों का कुल 930 करोड़ रुपए का व्यापार राज्य में होता है। वनोपजों की खरीदी 866 हाट बाजारों के माध्यम से की जा रही है। प्रदेश में काष्ठ कला विकास, लाख चूड़ी निर्माण, दोना-पत्तल निर्माण, औषधि प्रसंस्करण, शहर प्रसंस्करण, बेल मेटल, टेराकोटा हस्तशिल्प कार्य आदि से 10 लाख मानव दिवस रोजगार का सृजन हो रहा है। वन विकास निगम के जरिये बैंम्बू ट्री गार्ड निर्माण, बांस फर्नीचर निर्माण, वनौषधि बोर्ड के जरिये औषधीय पौधों का रोपण आदि से करीब 14 हजार युवकों को रोजगार दिया जा रहा है। इसी तरह सीएफटीआरआई मैसूर की सहायता से महुआ आधारित एनर्जी बार, चाकलेट, आचार, सैनेटाइजर, आंवला आधारित डिहाइड्रेटेड प्रोड्क्ट्स, इमली कैंडी, जामुन जूस, बेल शरबत, बेल मुरब्बा, चिरौंजी एवं काजू पैकेट्स आदि के उत्पादन की योजना बनाई जा रही है। इससे 5 हजार से ज्यादा परिवारों को रोजगार मिलेगा।
छत्तीसगढ़ में लघु वनोपज संग्रहण से वनवासियों की आय में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। जशपुर और सरगुजा जिलों में चाय बागान से हितग्राहियों को सीधे लाभ मिल रहा है। कोविड-19 के संकट काल में 50 लाख मास्क की सिलाई से एक हजार महिलाओं को रोजगार मिला है। चालू वर्ष में लगभग 12 हजार महिलाओं को इमली के प्राथमिक प्रसंस्करण से 3 करोड़ 23 लाख रूपए की अतिरिक्त आमदनी हुई है। वनवासियों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से वर्ष 2019 में 10 हजार 497 वनवासियों की स्वयं की भूमि पर 18 लाख 56 हजार फलदार और लाभकारी प्रजातियों के पौधे रोपे गए। वर्ष 2020 में वनवासियों की स्वयं की भूमि पर 70 लाख 85 हजार पौधे के रोपण का लक्ष्य है। लाख उत्पादन को बढ़ावा देने के प्रयासों के तहत् 164 उत्पादन क्षेत्रों में 36 हजार मुख्य कृषकों का चयन किया गया है। लगभग 800 हितग्राहियों द्वारा हर वर्ष लगभग 12 हजार क्विंटल वर्मी कंपोस्ट का उत्पादन किया जा रहा है।
इसके अलावा वन आधारित अन्य गतिविधियों से भी वन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर निर्मित हुए हैं। राज्य में वर्षभर में भूजल संरक्षण, बिगड़े वनों का सुधार, कूप कटाई आदि गतिविधियों से 30 लाख मानव दिवस का रोजगार सृजित हो रहा है। वन रोपणी, नदी तट रोपण आदि से 20 लाख मानव दिवस रोजगार सृजित हो रहा है। इसी तरह कैंपा के तहत नरवा विकास कार्यक्रम से करीब 50 लाख मानव दिवस रोजगार मिलता है। आवर्ती चरई योजना, जैविक खाद उत्पादन, सीड बॉल का निर्माण आदि से 7 हजार से ज्यादा आदिवासी युवकों को रोजगार मिला है।
विशेष लेख / शौर्यपथ /समय का पहिया अब बहुत आगे बढ़ गया है। शहर अब सिर्फ शहर ही नहीं रहा, स्मार्ट शहर की राह में अपना कदम बढ़ा चुका हैं। चूंकि हमारा छत्तीसगढ़ राज्य किसानों का राज्य है। धान का कटोरा के रूप इस प्रदेश की पहचान पहले से हैं। स्वाभिमानी और परिश्रमी के प्रतीक किसानों की समृद्धि के साथ गांव का स्वरुप भी तेजी से बदल रहा है। छोटे शहर विस्तृत होकर आकार में फैल रहे हैं और आसपास के गांवों को कालोनियों में तब्दील कर रहे हैं। स्वाभाविक है कि नई कालोनियां छोटे-छोटे शहरों की अपेक्षा वर्तमान और भविष्य की जरूरतों के मुताबिक अनेक सुविधाओं का स्वप्न लेकर बस रहीं है। इन कालोनियों में नई पीढ़ी है। नई सोच है और नई जरूरतें हैं। नई पीढ़ी की नई सोच और नई जरूरतों को पूरा करने मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल और नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री डॉ शिवकुमार डहरिया द्वारा नगरीय क्षेत्रों को बेहतर बनाने की समग्र कोशिश की जा रही है। नगरीय क्षेत्रों में सार्वजनिक स्वास्थ्य, गरीबों के उन्नयन,स्वच्छता से संबंधित कार्य, शहरी गरीबों के लिए आवास, घर-घर पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में बेहतर कदम उठाए जा रहे हैं। यह दो साल में किए गए कार्यों का ही परिणाम है कि नगरीय प्रशासन विभाग अंतर्गत योजनाओं और नागरिकों से जुड़ी सेवाओं में उल्लेखनीय कार्य करने पर पूरे देश में शहरी गवर्नेंस इंडेक्स-2020 रैंकिंग में छत्तीसगढ़ को तीसरा स्थान हासिल किया है।
नगरीय प्रशासन विभाग में नागरिकों से जुड़ी सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री वार्ड कार्यालय का संचालन प्रारंभ किया हैं। वर्तमान में 14 नगर निगम के 101 वार्डों में वार्ड कार्यालय संचालित है। इन कार्यालयों में 18285 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से 16305 का निराकरण भी कर दिया गया है। यहां आम नागरिकों की शिकायतों को प्राथमिकता के साथ निराकृत किया जा रहा है। मुख्यमंत्री वार्ड कार्यालय से घर के पास ही किसी समस्या को दूर करना आसान हो गया है। नागरिकों के लिए टोल फ्री नंबर निदान-1100 भी है। जिसमें फोन कर नगरीय निकायों से संबंधित किसी भी समस्या की शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। निदान के माध्यम से एक लाख से अधिक शिकायतों को निराकृत किया गया है। नागरिक के संतुष्ट होने के बाद ही शिकायतों को निराकृत माना जाता है। कार्य नहीं करने पर अधिकारियों पर जुर्माना भी लगाया जाता है।
छोटी-मोटी बीमारी से ग्रसित परिवार, मौसमी बीमारी सहित अन्य कारणों से बीमार होने पर अस्पताल नहीं जा सकने वालों के उपचार के लिए मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजना प्रारंभ की गई है। पहले चरण में राज्य के 14 नगर निगमों में 60 मोबाइल मेडिकल यूनिट एंबुलेस के जरिए डाक्टरों की टीम सेवाएं प्रदान कर रही है। इस योजना से स्लम क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर लगाकर निःशुल्क में परामर्श, उपचार, दवाइयां तथा खून,पेशाब, शुगर, बीपी विभिन्न प्रकार की जांच भी की जाती है। मुख्यमंत्री दाई-दीदी क्लीनिक भी इसी योजना की एक कड़ी है। जिसमें महिलाओं को महिला चिकित्सक और महिला स्वास्थ्य कर्मियों के माध्यम से निःशुल्क उपचार उनके ही घरों के आसपास ही मुहैया कराया गया है।
मोबाइल मेडिकल यूनिट गरीब बस्तियों में जाकर महिलाओं का उपचार कर रही है। गरीब परिवारों को किसी बीमारी का पता लगाने जांच में अधिक पैसे खर्च न करना पडे, इसके लिए पीपीपी आधार पर रियायती दरों में पैथोलॉजी एवं डायग्नोस्टिक्स सुविधा देने डॉ.राधाबाई डायग्नोस्टिक्स सेंटर प्रारंभ किए जा रहे हैं। पहले चरण में रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, भिलाई एवं रायगढ़ में यह सेंटर प्रारंभ होगी। शासन की योजनाओं का लाभ नागरिकों को घर बैठे मिल सके इसके लिए मुख्यमंत्री मितान योजना प्रारंभ की जा रही है। इस योजना के माध्यम से सौ से अधिक शासकीय सेवाओं जैसे ड्राइविंग लाइसेंस,जाति प्रमाण पत्र,राशन कार्ड, बिजली बिल,पेंशन, राजस्व, जन्म प्रमाण पत्र,राजस्व अभिलेख आदि की सेवाएं घर पहुंचाई जाएगी। मुख्यमंत्री मितान योजना के माध्यम से 8 से 10 हजार युवाओं को रोजगार भी मिलेगा।
शासन द्वारा पेयजल संकट वाले इलाकों को टैंकर मुक्त शहर बनाने की पहल शुरु की गई है। सभी नगरीय निकायों में गर्मी के दिनों में उत्पन्न होने वाली पेयजल संकट को दूर करने 20 करोड़ की राशि जारी की गई है। 4 नगर निगमों, 43 नगर परिषदों एवं 109 नगर पंचायतों में जलप्रदाय योजना शुरु की गई है। 2023 तक अनेक परियोजनायें भी पूरी हो जाएगी। अब तक 62 शहरी स्थानीय निकायों को टैंकर मुक्त बनाया गया है। रायपुर शहर हेतु अमृत योजना अंतर्गत वृहद पेयजल आवर्धन योजना 212 करोड़ रुपए की तत्काल स्वीकृति दी गई है।
शासन द्वारा मोर जमीन मोर मकान योजना की समीक्षा लगातार की जा रही है और हितग्राहियों को लाभान्वित किया जा रहा है। इस योजना से अभी तक 74365 हितग्राहियों का आवास पूर्ण हो गया है। किफायती आवास योजना-मोर मकान मोर चिन्हारी अंतर्गत 1782.83 करोड़ की लागत से 48326 नवीन आवासों को स्वीकृति देकर कार्य प्रारंभ किया गया है। भूमिहीन व्यक्तियों को भूमि धारण का अधिकार प्रदान करने हेतु अधिनियम लाया गया है। 19 नवंबर 2018 के पूर्व काबिज कब्जा धारकों को भू-स्वामित्व अधिकार प्रदान किया जाएगा। इसमें ऐसे व्यक्ति भी लाभान्वित होंगे जिन्हें पूर्व में पट्टा प्रदान किया गया था परंतु नवीनीकरण प्रावधानों के अभाव में वह भूमि का उपभोग नहीं कर पा रहे थे। इस निर्णय में राज्य के लगभग दो लाख से अधिक शहरी गरीब परिवार सीधे लाभान्वित होंगे तथा उन्हें ‘मोर जमीन मोर मकान‘ योजना में 2.5 लाख तक वित्तीय सहायता प्रदान की जा सकेगी। अवैध अनियमित हस्तांतरण भूमि प्रायोजन में परिवर्तन प्रकरण में नियमानुसार भूमि स्वामी अधिकार दिया गया। अतिरिक्त कब्जे की स्थिति में निकाय श्रेणी अनुसार 900 से 1500 वर्गफीट तक नियमतिकरण की सुविधा दी गई है। कालातीत पट्टों का 30 वर्षों हेतु नवीनीकरण की मान्यता दी गई है।
स्थानीय छत्तीसगढ़ी संस्कृति एवं विलुप्त होती हुई स्थानीय परंपरा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से समस्त 166 नगरीय निकायों में पौनी-पसारी योजना प्रारंभ की गई है। पौनी पसारी योजना में प्रति इकाई 30 लाख की लागत से, कुल 255 पौनी-पसारी बाजारों का विकास किया जाएगा जिससे इस परंपरा से संबंधित 12240 परिवारों के लिए रोजगार के नवीन अवसरों का सृजन होगा। इस योजना में विकसित बाजारों में चबूतरा प्रति दिवस मात्र 10 रुपए के मान से व्यवसाय हेतु उपलब्ध कराया जाएगा। चलित ठेले व्यावसायिओं को वार्डों के प्रमुख स्थान पर वेंडिंग जोन चिन्हांकित कर व्यवसाय हेतु उचित स्थान दिया जाएगा।
छत्तीसगढ़ सरकार पर्यावरण संरक्षण हेतु प्रतिबद्ध है, सरकार बनते ही अमृत योजना अंतर्गत रायगढ एवं जगदलपुर शहर के सीवरेज मास्टर प्लान को स्वीकृति दी गई जिससे नदियों में मिल रहे नाले-नालियों के दूषित जल को ट्रीट किया जाएगा। राज्य में सेप्टिक टैंक से निकलने वाले मल के भी ट्रीटमेंट की व्यवस्था की जा रही है। ‘नरवा गरुआ घुरवा बारी‘ कार्यक्रम के अंतर्गत वाटर रीचार्जिंग पर भी कार्य कर रही है। समस्त तालाबों एवं नदियों में प्रवाहित हो रहे जल के शुद्धीकरण हेत कार्य किए जा रहे हैं। समस्त भू-गर्भ आधारित जल स्त्रोतों को सतही स्त्रोत में परिवर्तित किए जाने का कार्य विभिन्न योजनाओं के माध्यम से प्रगति पर है। वी-वायर इंजेक्शन वेल के माध्यम से भू-जल की चार्जिंग हेत परियोजना तैयार की गयी है जिससे न केवल जल स्त्रोत सुदृढ होगें अपितु जल भराव की समस्या भी हल हो सकेगी। इसके साथ ही क्लीन खारुन योजना का क्रियान्वयन प्रारंभ किया गया है। स्वच्छ सर्वेक्षण 2020 प्रतियोगिता में भारत सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ को प्रथम पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। इसके साथ ही प्रदेश के छोटे बड़े अनेक शहरों में राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त की है।
छत्तीसगढ़ में लागू मिशन क्लीन सिटी योजना का पृथकीकरण आधारित सॉलिड वेस्ड मैनेजमेंट मॉडल को ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा बेस्ट प्रैक्टिस निरूपित करते हुए अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय बताया है। इस योजना से प्रदेश में स्व-सहायता समूहों की 9 हजार से अधिक महिला सदस्यों को रोजगार का अवसर मिला वहीं इनकी कड़ी मेहनत का नतीजा है कि शहरी छत्तीसगढ़ ने स्वच्छ सर्वेक्षण 2019 एवम स्वच्छ सर्वेक्षण 2020 में स्वच्छतम राज्य होने का दर्जा प्राप्त किया है। कोविड 19 के दौरान देशव्यापी लॉकडाउन के समय में भी इन महिलाओं ने बखूबी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर एक मिसाल कायम किया है। इन महिलाओं को अब गोधन न्याय योजना अंतर्गत खाद निर्माण की भी जिम्मेदारी दी गई है। इससे महिलाओं के आय में वृद्धि होगी। इस योजना के तहत एसएलआरएम सेंटर का उन्नयन करते हुए 377 गोधन न्याय सह गोबर खरीदी केंद्र का विकास नगरीय निकायों में किया जा रहा है। साथ ही इन केंद्रों के निकट ही नवीन गौठान बनाए जा रहे हैं । शहरी क्षेत्रों में गोबर विक्रेता के रूप में हितग्राहियों का पंजीयन किया गया है तथा हर 15 दिवस में इनके भुगतान की व्यवस्था की गई है।
नगरीय प्रशासन विभाग शहर के विकास के साथ नागरिकों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य कर रही है। इंदिरा गाँधी हरित अभियान के अंतर्गत शहरी क्षेत्रों में वृक्षारोपण, शहरी बाड़़ी एवं आक्सीजोन के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। जवाहर जिम योजना के माध्यम से सर्वसुविधायुक्त जिम की स्थापना की पहल की जा रही है। प्रत्येक निकाय के चिन्हित वार्डों में राजीव गाँधी ज्ञानोदय केंद्र स्थापित कर ऑनलाइन रीडिंग जोन तथा पठन पाठन हेतु वाचनालय की सुविधा देने तैयारी की जा रही है। शहर स्तर पर स्थानीय प्रतिभाओं एवं विभूतियों को सम्मान देने हेतु महात्मा गांधी शहरी सम्मान पुरस्कार जिसमे नगर भूषण अवार्ड, नगर शिक्षक अवार्ड, नगर हितैषी अवार्ड, नगर खिलाड़ी अवार्ड आदि प्रदान किए जाएंगे। शहर के प्रमुख तालाबों में धार्मिक कार्यक्रमों के लिए विसर्जन कुंड का निर्माण तथा घाटों में महिलाओं के लिए चेंजिंग रुम बनाए जाएंगे। नगरीय निकायों को शासन की ओर से प्रदान की जाने वाली चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि में वृद्धि की जाएगीं राजधानी में आधुनिक स्तर की सुविधाओं में वृद्धि की जा रही है। जवाहर बाजार का उन्नयन किया गया है। ऐतिहासिक बूढ़ा तालाब की गंदगी को साफ कर सौंदर्यीकरण कर नया स्वरूप प्रदान किया गया है। मल्टी स्टोरी पार्किंग बनाई जा रही है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग वर्तमान और भविष्य में नागरिकों की आवश्यकताओं को ध्यान रखकर योजना तैयार करने के साथ छत्तीसगढ़ के विकास में कदम बढ़ा रही है।
शौर्यपथ / कोरोना वायरस महामारी और कड़कड़ाती ठंंड के बीच इम्युनिटी पावर को मजबूत बनाना सबसे जरूरी है। ऐसे में आप रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने के लिए कोई खास प्रयास करने की जरुरत नहीं बल्कि आपको बस डाइट में कुछ चीजों को जोड़ते हुए इसकी मात्रा बढ़ानी होगी। जैसे, चाय का इस्तेमाल थकान उतारने या नींद भगाने के लिए सबसे ज्यादा किया जाता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि चाय आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बूस्ट करता है। ऐसी कई चीजें हैं जिनका इस्तेमाल हम रोजाना करते हैं। आइए, जानते हैं इनके बारे में-
विटामिन-सी युक्त फल
शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए आपको एंटी ऑक्सीडेंट युक्त फलों और सब्जियों का सेवन करना चाहिए। इसके लिए आपको संतरा, किवी,चेरी, अमरुद, लीची, नीबू को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए। विटामिन सी शरीर में सफेद रक्त कोशिकाओं को बढ़ाने में मदद करता है।
हल्दी
भारतीय परिवेश में हल्दी ऐसा मसाला है, जो ज्यादातर घरों में इस्तेमाल होता है। ऐसे में हल्दी का फायदा बढ़ाने के लिए आपको हल्दी वाली चाय का सेवन भी शुरु कर देना चाहिए। साथ ही रात को सोते वक्त हल्दी वाला दूध पीने से आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता पर सकारात्मक असर होगा।
दही
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए दही भी काफी असरदायक है। खाने के साथ रोजाना दही का इस्तेमाल आपको कई बीमारियों से बचाता है। आप दही को ज्यादा सेहतभरा और जायकेदार बनाना चाहते हैं, तो इससे फल मिला सकते हैं।
चाय
सर्दियों में चाय पीना बहुत फायदेमंद है, इससे आपकी हल्की-फुल्की थकान गायब होने के साथ गले में खराश, जुकाम जैसी कई छोटी-मोटी बीमारियां भी दूर होती हैं।
दालचीनी
दालचीनी सिर्फ एक मसाला ही नहीं बल्कि कई रोगों पर वार भी करता है। खाने में दालचीनी के इस्तेमाल से आपके शरीर में रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ जाती है।
सेहत /शौर्यपथ /ठंड के मौसम में सर्दी जुकाम ये एक आम समस्या बन जाती है। जिसके लिए हम तरह-तरह के उपाय करते हैं, लेकिन क्या आप भाप से होने वाले फायदों के बारे में जानते हैं? दरसअल भाप आपको सेहत और सौंदर्य दोनों ही फायदे पहुंचाती है। अगर आप अपनी त्वचा में चमक लाना चाहते हैं, तो भाप आपकी इस चाहत को पूरा कर सकती है। वहीं सर्दी के मौसम में जुकाम से परेशान है, तो स्टीम लेने से आपको राहत मिलेगी तो आइए जानते हैं ऐसे ही बेहतरीन फायदों के बारे में.....
1 सर्दी-जुकाम और कफ होने की स्थिति में भाप लेना रामबाण उपाय है। भाप लेने से न केवल आपकी सर्दी ठीक होगी बल्कि गले में जमा हुआ कफ भी आसानी से निकल सकेगा और आपको किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।
2 त्वचा की गंदगी को हटाकर अंदर तक त्वचा की सफाई करने और त्वचा को प्राकृतिक चमक प्रदान करने के लिए भाप लेना एक बेहतरीन तरीका है। बगैर किसी मेकअप प्रोडक्ट का इस्तेमाल किए यह तरीका आपकी स्किन को ग्लोइंग बना सकता है।
3 अस्थमा जैसी स्वास्थ्य समस्याओं में भी भाप लेना काफी फायदेमंद साबित होता है। डॉक्टर्स ऐसी परिस्थति में भाप लेने की सलाह देते हैं, ताकि मरीज को राहत की सांस मिल सके।
4 चेहरे की मृत त्वचा को हटाने एवं झुर्रियों को कम करने के लिए भी भाप लेना एक बढ़िया उपाय है। यह आपकी त्वचा को ताजगी देता है, जिससे आप तरोताजा नजर आते हैं। त्वचा की नमी भी बरकरार रहती है।
5 अगर चेहरे पर मुंहासे हैं, तो बिना देर किए चेहरे को भाप दीजिए। इससे रोमछिद्रों में जमी गंदगी और सीबम आसानी से निकल पाएगा और आपकी त्वचा साफ हो पाएगी।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
