September 09, 2026
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    लाइफस्टाइल /शौर्यपथ / परिवार बढ़ाने की तैयारियों में जुटे हैं? अगर हां तो चुस्त अधोवस्त्र से तौबा कर लें। अमेरिकी शोधकर्ताओं ने यौन समस्याओं से जूझ रहे 656 पुरुषों पर अध्ययन के बाद यह चेतावनी दी है।
    उनके मुताबिक पिता बनने की कोशिशों में जुटे पुरुषों को ढीले-ढाले अधोवस्त्र पहनने चाहिए। इससे शुक्राणुओं का उत्पादन ही नहीं, गुणवत्ता बढ़ाने में भी मदद मिलती है।
    हार्वर्ड टीएच चान स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के शोधकर्ताओं ने संतानोत्पत्ति में दिक्कत महसूस कर रहे पुरुषों के खानपान, उम्र, शारीरिक सक्रियता, दिनचर्या, नींद की गुणवत्ता, सिगरेट-शराब की लत के अलावा पहनावे-ओढ़ावे का विश्लेषण किया।
    इस दौरान चुस्त अधोवस्त्र के बजाय ढीले-ढाले शॉर्ट्स पहनने वाले पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या 17 फीसदी तक ज्यादा मिली। यही नहीं, इन शुक्राणुओं में अंडाणुओं तक पहुंचने और उन्हें निषेचित करने की क्षमता भी 33 फीसदी तक अधिक पाई गई।
    मुख्य शोधकर्ता प्रोफेसर एलन पेसी के मुताबिक पुरुषों में शुक्राणुओं का उत्पादन यौन अंग के तापमान पर निर्भर करता है। इसके 34 डिग्री सेल्सियस से अधिक होने पर मस्तिष्क एफएसएच (फॉलिकल स्टिम्युलेटिंग हार्मोन) का स्त्राव घटा देता है।
    एफएसएच यौन अंग को शुक्राणुओं के उत्पादन का निर्देश देने वाला हार्मोन है। चुस्त अधोवस्त्र पहनने वालों में इसकी मात्रा 14 फीसदी तक कम देखी गई है।
    तीन महीने में होता है सुधार
    -अध्ययन दल में शामिल डॉक्टर जॉर्ज शेवेरो ने कहा, चुस्त अधोवस्त्र पहनने वाले पुरुषों को ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं। ढीले शॉर्ट्स अपनाने के तीन महीने के भीतर ही वे शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता में सुधार ला सकते हैं। अध्ययन के नतीजे ‘जर्नल ह्यूमन रिप्रोडक्शन’ के हालिया अंक में प्रकाशित किए गए हैं।

    धर्म संसार / शौर्यपथ / संगम की रेती पर विश्व प्रसिद्ध माघ मेला 14 जनवरी से शुरू होगा। दुनिया के इस सबसे बड़े मेले की तैयारियां व्यापक स्तर पर शुरू हो गई हैं। कोरोना काल में तमाम चुनौतियों के बीच बस रहा माघ मेला एक नई आशा और उजास का किरण लेकर आ रहा है। क्योंकि इस बार माघ मेला के स्नान पर्वों पर गुरु बृहस्पति का दुर्लभ योग बन रहा है। 14 जनवरी को मकर संक्रांति से शुरू हो रहे माघ मेला के छह स्नान पर्व में चार स्नान पर्व गुरुवार को ही पड़ रहे हैं। ग्रहीय गोचर के अनुसार, गुरु बृहस्पति महामारी व अनिष्टकारी शक्तिओं को नष्ट करने में सक्षम हैं।
    6 में चार स्नान पर्व गुरुवार को-
    माघ मेला का पहला स्नान पर्व 14 जनवरी, गुरुवार मकर संक्रांति से शुरू होगा। इसमें 28 जनवरी को पौष पूर्णिमा, 11 फरवरी को मौनी अमावस्या और 11 मार्च को महाशिवरात्रि का स्नान पर्व गुरुवार को पड़ेगा। इस बीच 16 फरवरी को वसंत पंचमी मंगलवार और माघी पूर्णिमा 27 फरवरी, शनिवार को पड़ेगी।
    गुरु पुण्य योग से बढ़ेगी पर्वों की शुभता-
    ज्योतिषाचार्य अवध नारायण द्विवेदी के अनुसार, शास्त्रों में गुरुवार धर्म-कर्म, पौष्टिक कर्म, यज्ञ, विद्या, वस्त्र, यात्रा और औषधि को बल प्रदान करता है। मकर संक्रांति व मौनी अमावस्या दोनों स्नान पर्व पर गुरु पुण्ययोग व श्रवण नक्षत्र का योग है। श्रवण नक्षत्र के स्वामी विष्णु हैं।
    महामारी को नियंत्रित करेंगे बृहस्पति-
    ज्योतिषाचार्य डॉ. नित्य नाथ पाण्डेय के अनुसार, गुरु बृहस्पति चार प्रमुख स्नान पर्वों पर द्वादश माधव के सानिध्य में शुभता प्रदान करेंगे। साथ ही अपने प्रभाव से विश्व में व्याप्त कोरोना महामारी नियंत्रित करेंगे। ज्योतिषाचार्य उमेश शर्मा के अनुसार गुरु बृहस्पति सौम्य, शक्तिशाली और शुभकारक हैं।
    संक्रांति पर पंचग्रही योग-
    ज्योतिषाचार्य अवध नारायण द्विवेदी के अनुसार, संक्रांति के समय सूर्य सहित चंद्रमा, बुध, गुरु और शनि पांच ग्रही योग बन रहा है। संक्रांति का पुण्य काल दोपहर 1:50 से सूर्यास्त तक रहेगा।

    धर्म संसार / शौर्यपथ / पौष मास कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को सफला एकादशी कहते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो व्यक्ति सफला एकादशी का व्रत रखता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। सफला एकादशी का व्रत भगवान विष्णु जी के लिए रखा जाता है। एकादशी के दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा की जाती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल सफला एकादशी व्रत पौष माह कृष्ण पक्ष की एकादशी को रखा जाता है। इस साल सफला एकादशी 9 जनवरी 2021 को है।
    सफला एकादशी 2021 शुभ मुहूर्त-
    एकादशी तिथि प्रारम्भ - जनवरी 08, 2021 को रात 9:40 बजे
    एकादशी तिथि समाप्त - जनवरी 09, 2021 को शाम 7:17 बजे तक।
    सफला एकादशी 2021 व्रत विधि-
    1. सफला एकादशी के दिन स्नान आदि करके सूर्यदेव को अर्घ्य दें।
    2. इसके बाद व्रत-पूजन का संकल्प लें।
    3. भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करें।
    4. भगवान को धूप, दीप, फल और पंचामृत आदि अर्पित करें।
    5. नारियल, सुपारी, आंवला और लौंग आदि श्रीहरि को अर्पित करें।
    6. अगले दिन द्वादशी पर व्रत खोलें।
    7. गरीबों को दान कराएं और उन्हें दान-दक्षिणा दें।
    सफला एकादशी व्रत कथा-
    पद्म पुराण में वर्णित एक कथा के अनुसार, महिष्मान नाम का एक राजा था। इनका ज्येष्ठ पुत्र लुम्पक पाप कर्मों में लिप्त रहता था। इससे नाराज होकर राजा ने अपने पुत्र को देश से बाहर निकाल दिया। लुम्पक जंगल में रहने लगा।
    पौष कृष्ण दशमी की रात में ठंड के कारण वह सो न सका। सुबह होते होते ठंड से लुम्पक बेहोश हो गया। आधा दिन गुजर जाने के बाद जब बेहोशी दूर हुई तब जंगल से फल इकट्ठा करने लगा। शाम में सूर्यास्त के बाद यह अपनी किस्मत को कोसते हुए भगवान को याद करने लगा। एकादशी की रात भी अपने दुखों पर विचार करते हुए लुम्पक सो न सका।
    इस तरह अनजाने में ही लुम्पक से सफला एकादशी का व्रत पूरा हो गया। इस व्रत के प्रभाव से लुम्पक सुधर गया और इनके पिता ने अपना सारा राज्य लुम्पक को सौंप दिया और खुद तपस्या के लिए चले गए। काफी समय तक धर्म पूर्वक शासन करने के बाद लुम्पक भी तपस्या करने चला गया और मृत्यु के पश्चात विष्णु लोक में स्थान प्राप्त हुआ।

    सेहत /शौर्यपथ / बदलते लाइफस्टाइल और खान-पान की खराब आदतों की वजह से आज हर दूसरा व्यक्ति मोटापे की समस्या से परेशान है। मोटापा कम करने के लिए लोग अपनी डाइट में बदलाव के साथ घंटों जिम में पसीना बहाने से भी परहेज नहीं करते। बावजूद इसके उनकी समस्या जस की तस बनी रहती है। ऐसे में क्या आप जानते हैं इसके पीछे आपके लाइफस्टाइल से जुड़ी कई गलतियां जिम्मेदार हो सकती हैं। आइए जानते हैं आखिर क्या हैं ये गलतियां।

    कम कैलोरी का सेवन-
    अक्सर लोग वजन कम करने के दौरान अपनी डाइट में से कैलोरी की मात्रा बिल्कुल खत्म कर देते हैं, ऐसा न करें। अगर आप अपना वजन कम करना चाहते हैं तो पर्याप्त मात्रा में कैलोरी का सेवन करें। कैलोरी की पर्याप्त मात्रा आपके शरीर के लिए जरूरी होती है। शोध के अनुसार कैलोरी का सेवन कम करते हुए जब व्यक्ति ज्यादा एक्सरसाइज करता है तो उसे शरीर में कमजोरी महसूस हो सकती है।

    कम वसा वाला भोजन-
    जो लोग वजन कम करने के लिए अपनी डाइट में से वसा की मात्रा खत्म कर देते हैं। उन्हें सेहत से जुड़े कई नकारात्मक प्रभाव झेलने पड़ सकते हैं। यही वजह है कि डाइट में वसा की कुछ मात्रा जरूर शामिल करनी चाहिए। इसके लिए आप अपनी डाइट में चीनी को शामिल कर सकते हैं जो पर्याप्त मात्रा में वसा की कमी को दूर करने में मदद कर सकता है।

    भोजन का त्याग करना-
    देखा जाता है कि लोग वजन कम करने के चक्कर में भोजन का त्याग करने लगते हैं। लेकिन ऐसा करने से आपके शरीर में पोषण की कमी हो सकती है, जिससे आपकी सेहत को नुकसान उठाना पड़ सकता है। सेहत से जुड़े कई शोध बताते हैं कि जो लोग आमतौर पर नाश्ता नहीं करते हैं उनके वजन पर कोई फर्क नहीं पड़ता है। रोजाना नाश्ता करने से आप लंबे समय तक ऊर्जावान बने रहने के साथ आसानी से अपना वजन भी कम कर सकते हैं।

    अधिक व्यायाम करना-
    वजन कम करने की इच्छा रखने वाले कई लोगों को यह लगता है कि अगर वह घंटों एक्सरसाइज करेंगे तो उनका वजन जल्द कम हो जाएगा। लेकिन ऐसा करने से आपके चयापचय पर बुरा असर पड़ सकता है। वजन कम करने की शुरुआत हमेशा साधारण व्यायाम के साथ होनी चाहिए, जिससे बिना चोट और अन्य स्वास्थ्य हानि के अपना वजन कम कर सकते हैं।

    अनियमित जीवनशैली-
    जो लोग वजन कम करने के दौरान अपनी डाइट पर तो कंट्रोल कर लेते हैं लेकिन शारीरिक गतिविधियों से पूरी तरह से दूर रहते हैं। आपकी यह आदत आपकी सेहत के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। आपकी इस आदत की वजह से आप अपना वजन कम करने की जगह बढ़ा सकते हैं। वजन कम करने के लिए आपको डाइट के साथ अपनी जीवनशैली में भी कई जरूरी बदलाव करने चाहिए।

    सेहत /शौर्यपथ / खाने-पीने का जैसा मजा सर्दियों में है, वैसा दूसरे मौसम में कहां! एक तरफ जहां फल-सब्जियों की भरमार होती है, वहीं दूसरी ओर लड्डू, पिन्नी, गुड़-मूंगफली, गजक, रेवड़ी जैसे मिठाई के तौर पर खाए जाने वाले खाद्य-पदार्थों की ढेरों वैराइटी मिलती हैं। सर्दी में अपने शरीर को गर्म रखने के चक्कर में हम कई बार बैलेंस डाइट को नजरअंदाज कर देते हैं और मोटापे और इससे जुड़ी समस्याओं की गिरफ्त में आ जाते हैं,ऐसेे ऐसे में स्वस्थ रहने के लिए डाइट का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। ठंड के मौसम में फलों का सेवन सबसे ज्यादा लाभदायक है।
    सेब
    सेब पेक्टिन फाइबर, विटामिन, मिनरल्स, फाइटोन्यूट्रिएंट्स और एंटी ऑक्सीडेंट जैसे तत्वों से भरा है, जो हमारे शरीर में एलडीएल कोलेस्ट्रॉल या संतृप्त वसा के स्तर को नियंत्रित करते हैं, हानिकारक मुक्त कणों (फ्री रेडिकल्स) के प्रभाव से बचाते हैं, संक्रमण फैलाने वाले एजेंटों को दूर रखते हैं और चयापचय क्षमता को बढ़ाते हैं। सेब शरीर में हीमोग्लोबिन और आयरन के स्तर को बढमता है और रक्त की कमी को दूर करता है।
    अनार
    अपने अनोखे खट्टे-मीठे स्वाद और गुणों के कारण अनार ‘एक अनार सौ बीमार‘ की उक्ति को चरितार्थ करता है। फाइटोकैमिकल्स, पॉली-फिनॉल, एंटीऑक्सीडेंट, फाइबर, आयरन, विटामिन से भरपूर अनार उच्च कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर, दिल के दौरे या फ्री रेडिकल्स से बचाव कर हृदय के स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करता है। खून की कमी के रोगियों के लिए अनार का सेवन उपयोगी है।
    अमरूद
    सर्दियों में अमरूद को फलों का राजा कहा जाता है। इसमें मौजूद पौष्टिक तत्व शरीर को फिट, स्वस्थ रखने के साथ-साथ इम्यूनिटी बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह हाइपोग्लीसेमिक ब्लडप्रेशर और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में फायदेमंद है। इसमें मौजूद पेक्टिन फाइबर पाचन बढ़ाने और भूख में सुधार करने में मदद करता है।
    सिट्रस फल
    सर्दियों में मिलने वाले संतरा, कीनू जैसे खट्टे जूसी साइट्रस फल अपनी दिनचर्या में जरूर शामिल करें। विटामिन सी, पेक्टिन फाइबर, लाइमोनीन, फाइटोकैमिकल्स से भरपूर ये फल जूस से भरपूर हैं। इनके नियमित सेवन से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में बढोतरी होती है, जिससे वायरल संक्रमण से होने वाले जुकाम-खांसी, फ्लू, वायरल जैसे रोगों से बचाव होता है।
    अंगूर
    अंगूर विटामिन, मिनरल्स, काबरेहाइड्रेट, ग्लूकोज जैसे पौष्टिक तत्वों और पोली-फिनॉल, एंटीऑक्सीडेंट, एंटी बैक्टीरियल, फाइटोन्यूट्रिएंट्स गुणों से लबरेज है। इसमें मौजूद शर्करा रक्त में आसानी से अवशोषित हो जाती है और थकान दूर कर शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है। कोलेस्ट्रॉल कम करने में सक्षम अंगूर के सेवन से हृदय रोग का खतरा कम रहता है। यह रक्त विकारों को दूर कर क्लींजर का काम करते हैं।

    लाइफस्टाइल /शौर्यपथ / आपने अक्सर हेल्थ एक्सपर्ट्स को सलाह देते हुए सुना होगा कि पूरे दिन में सिर्फ 30 मिनट की वॉकिंग आपके दिल को हेल्दी बनाए रखने के साथ मांसपेशियों में मजबूती ,दिल की बिमारी, टाइप 2 मधुमेह, ऑस्टियोपोरोसिस और कई तरह के कैंसर के खतरे को भी कम करने का काम करती है। पर क्या आप वाकई जानते हैं सेहतमंद बने रहने के लिए वॉकिंग करने का सही तरीका क्या है और किस उम्र के व्यक्ति को कैसे करनी चाहिए वॉकिंग। आइए जानते हैं।
    कैसा हो वॉक का तरीका-
    बच्चों से लेकर उम्र दराज व्यक्ति तक के खड़े होने से लेकर उनके वॉक करने तक के तरीके में कई बड़े बदलाव देखे जाते हैं। लेकिन क्या है इनका सही तरीका, आइए जानते हैं।
    खड़े होने का तरीका-
    सैर करते समय व्यक्ति को अपने खड़े होने की पोजीशन पर भी ध्यान देना चाहिए। झुककर खड़े होने से व्यक्ति की पीठ में तकलीफ बढ़ सकती है। खड़े होते समय कोशिश करें कि आप सीधे खड़े हों।
    हाथों की पोजिशन-
    वॉक करते समय अपने हाथों को खुला छोड़ दें। हाथ बांधकर चलने से आप वॉक का फायदा नहीं उठा सकेंगे। हाथ बांधकर चलने से आपके कंधों में परेशानी भी शुरू हो सकती है।
    लक्ष्य तय करें -
    हर उम्र के व्यक्ति को वॉक करते समय अपने लिए एक लक्ष्य जरुर तय करना चाहिए । रोजाना 25 से 30 मिनट की वॉक व्यक्ति को सेहतमंद बनाए रखती है।
    किस उम्र में कितनी वॉक करना सही-
    5 से 18 साल तक-
    -5 साल से 18 साल के बीच उम्र वाले लड़कों को 16 हजार कदम चलना चाहिए। वहीं लड़कियां 13 हजार तक कदम चल सकती हैं।
    -19 से 40 साल तक-
    19 से 40 साल के बीच उम्र वाले पुरुष और महिलाएं एक दिन में कम से कम 13 हजार से ज्यादा कदम चलें।
    40 साल से बड़े उम्र के व्यक्ति-
    अगर बात 40 साल के बाद के लोगों की करें तो उनके लिए 12 हजार कदम आदर्श माने गए हैं।
    50 साल के व्यक्ति-
    अगर आपकी उम्र 50 साल से ज्यादा है तो रोजाना 9 हजार से 10 हजार तक कदम चलें।
    60 साल से ज्यादा-
    60 साल से अधिक उम्र के लोगों को स्वस्थ्य बने रहने के लिए रोजाना 7 हजार से 8 हजार कदम चलने चाहिए। लेकिन इस बात का भी ध्यान रखें कि आप सिर्फ उतना ही चलें जिससे आपको चलते समय थकान महसूस न हो।

    खाना खजाना /शौर्यपथ / ठंड के मौसम तरह-तरह के लड्डू सिर्फ स्वाद के लिए ही नहीं बल्कि सेहत के लिए भी फायदेमंद हैं।आज हम आपको अजवाइन के लड्डू की रेसिपी बता रहे हैं, जो इम्युनिटी को मजबूत करने साथ उन महिलाओं के लिए बहुत फायदेमंद हैं, जो मां बनी हैं।डिलीवरी के बाद अजवाइन के लड्डू का सेवन बच्चे और मां दोनों के लिए बेहद लाभदायक है।
    इन गुणों से भरपूर है अजवाइन के लड्डू
    अजवाइन में आयरन, सोडियम, मैग्नीशियम, विटामिन ए और विटामिन सी पाया जाता है, जो हमारी त्वचा और शरीर दोनों के लिए फायदेमंद होता है। इसमें प्रचुर मात्रा में फाइबर भी होता है जो पाचन क्रिया को ठीक रखने में मदद करता है।
    सामग्री :
    अजवाइन के लड्डू बनाने के लिए 1 किलो अजवाइन पिसी हुई, डेढ़ किलो गेहूं के आटे, 250 ग्राम गोंद, 1 सूखा नारियल कटा हुआ, देसी चीनी या गुड़ और आवश्यकतानुसार देसी घी की जरूरत होती है।
    अजवाइन के लड्डू ऐसे बनाएं :
    गैस पर कढ़ाई रखें और उसे गर्म होने दें।
    अब कढ़ाई में 1 बड़ा चम्मच घी डालें और धीमी आंच पर घी को गर्म होने दें।
    इसके बाद घी में गोंद डालें और इसे अच्छी तरह से भूनने के बाद किसी खाली बर्तन में निकाल लें।
    अब गर्म-गर्म ही गोंद को पीस लें।
    दोबारा कढ़ाई को गर्म करके उसमें घी डालें।
    अब आटा डाल दें और इसको तब तक धीमी आंच पर पकाएं जब तक कि उसमें से खुशबू न आने लगे।
    फिर इसमें गोंद और पिसा हुआ नारियल डालें।
    इसमें पिसी हुई अजवाइन डालकर आटे के साथ मिला दें।
    ठंडा होने पर इसमें चीनी या गुड़ डाल दें
    चीनी मिलाने से अजवाइन का तीखापन कम हो जाता है।
    अब इस चूरमे से लड्डू बना लें।
    अजवाइन के लड्डू खाने के फायदे
    -अजवाइन महिलाओं को प्रसव के बाद होने वाली पीड़ा से राहत दिलाने का सबसे अच्छा उपाय है। इसमें एंटी-इंफ्लामेट्री गुण होते हैं जो प्रसव के बाद होने वाले दर्द को दूर करते हैं।
    -अजवाइन मां और बच्चे दोनों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है।
    -यह कफ और बलगम को भी ठीक करती है और सर्दी, जुकाम से बचाती है।
    -अजवाइन का पानी नियमित रूप से पीने से शरीर से सारी गंदगी बाहर निकल जाती है। अजवाइन डिलीवरी के बाद शरीर को डिटॉक्सिफाई करने के गुण रखती है।
    -इसमें कुछ ऐसे गुण होते हैं जो स्तनपान करवाने वाली महिलाओं के दूध को और पौष्टिक बनाते हैं।
    -गर्भावस्था के बाद महिलाओं को हमेशा वजन बढ़ने की शिकायत होती है जिसे अजवाइन से कम किया जा सकता है।
    -अक्सर प्रसव के बाद महिलाओं को पीठ और पैरों में दर्द की परेशानी होती है, अजवाइन खाने से इस दर्द में राहत मिलती है।

    शौर्यपथ /मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की विशेष रूचि के चलते राज्य में छत्तीसगढ़ की कला-संस्कृति एवं परम्पराओं को जीवंत बनाए रखने का सार्थक प्रयास शुरू हो गया है। सरकारी संरक्षण के चलते कला और संस्कृति के पुष्पित एवं पल्लवित होने का अनुकूल वातावरण निर्मित हुआ है। राज्य में विभिन्न अवसरों एवं तीज-त्यौहारों के मौके पर कला एवं संस्कृति से जुड़े लोगों एवं कलाकारों को बीते दो सालों से लगातार मंच मिलने से उनमें उत्साह जगा है। संस्कृति और परम्पराओं को सहेजने के लिए संस्कृति परिषद के गठन से राज्य के कलाकारों एवं शिल्पियों एक मंच मिला है। इससे छत्तीसगढ की ंसाहित्य, संगीत, नृत्य, रंगमंच, चित्रकला, मूर्तिकला, सिनेमा और आदिवासी एवं लोककलाओं को विस्तार, प्रोत्साहन और कलाकारों के संरक्षण में मदद मिलेगी। सरकार का यह प्रयास सराहनीय है।
    संस्कृति परिषद के अंतर्गत साहित्य अकादमी, कला अकादमी, आदिवासी एवं लोककला अकादमी, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम, छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग और छत्तीसगढ़ सिंधी अकादमी प्रभाग बनाए गए हैं। नवा रायपुर में फिल्मसिटी विकसित करने की योजना है। नवा रायपुर में पुरखौती मुक्तांगन के समीप राज्य की जनजातीय कला, शिल्प एवं परम्परा तथा लोक जीवन का विशाल मुक्ताकाशी संग्रहालय ‘पुरखौती मुक्तांगन’ विकसित किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत जनजातीय प्राचीन संस्कृति का विशिष्ट स्वरूप, छत्तीसगढ़ की बहुरंगी संस्कृति के विभिन्न आयामों ‘आमचो बस्तर’ के पश्चात् ‘सरगुजा प्रखंड’ का विकास किया जा रहा है।
    जनजातीय समुदाय के नृत्य-गीत, पर्व, आस्था और संस्कृति के संरक्षण, प्रोत्साहन और प्रचार-प्रसार तथा कला परम्परा के परस्पर सांस्कृतिक विनिमय के लिये मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की रूचि के चलते राज्य में राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के गौरवशाली आयोजन की शुरूआत हुई है। इससे जनजातीय कला एवं संस्कृति विश्व पटल पर प्रसारित हुई है। राजिम कुंभ को अब राजिम माघी पुन्नी मेला नाम से जाना जाने लगा है। माघी पुन्नी मेला छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए आस्था का प्रतीक है और इसके आयोजन के वर्षों पुरानी परम्परा को सरकार ने पुनर्जीवित कर दिया है। सिरपुर महोत्सव के आयोजन से छत्तीसगढ़ की कला-संस्कृति को बढ़ावा और कलाकारों को मंच मिलता है।
    छत्तीसगढ़ की वर्तमान सरकार हरेली त्यौहार को बड़े ही धूम-धाम से पूरे राज्य में मनाने की एक नई पहल की गई है। शासन द्वारा हरेली पर्व के अवसर पर सार्वजनिक अवकाश घोषित कर इसकी महत्ता को और बढ़ा दिया है। हरेली पर्व के शुभ अवसर पर ही इस वर्ष छत्तीसगढ़ शासन ने अपनी सार्वधिक लोकप्रिय गोधन न्याय योजना की शुरूआत की और गौवंशीय पशुओं के संरक्षण और संवर्धन को प्रोत्साहित करने का सफल प्रयास किया है। दशहरा महोत्सव अंबिकापुर, रामगढ़ महोत्सव, श्री महावीर मंडल लोक न्यास अंबिकापुर, इग्नेटसचर्च, अंबिकापुर, मैनपाट महोत्सव, तातापानी महोत्सव, कुदरगढ़ महोत्सव के लिए वित्तीय सहायता देकर सरकार ने कला एवं संस्कृति को संरक्षण प्रदान किया है।
    राज्य के सभी जिलों में पारंपरिक छत्तीसगढ़ी खानपान एवं व्यंजनों को जन सामान्य को सहजता से उपलब्ध कराने तथा इसको लोकप्रिय बनाने के उद्देश्य से सभी जिलों में गढ़ कलेवा की शुरूआत की गई है। गढ़ कलेवा में सस्ते दर पर छत्तीसगढ़ी व्यंजन का लुत्फ उठाया जा सकता है। राज्य के साहित्यकारों, कलाकारों अथवा उनके परिवार के सदस्यों की लंबी तथा गंभीर बीमारी, दुर्घटना, मृत्यु अथवा दैवीय विपत्ति की स्थिति में ईलाज के लिए सहायता देने का प्रावधान है। कला और साहित्य के विकास में योगदान देने वाले अर्थाभावग्रस्त लेखकों, कलाकारों के आश्रितों को मासिक वित्तीय सहायता दी जा रही है।
    भोपाल साहित्य एवं कला महोत्सव के अवसर पर हॉर्टलैण्ड स्टोरिज भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में बस्तर बैण्ड के लोक कलाकार दल ने सराहनीय प्रस्तुति देकर छत्तीसगढ़ की कला को राष्ट्रीय क्षितिज पर गौरान्वित किया है। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा भोरमदेव महोत्सव, गनियारी लोक कला महोत्सव, कर्णेश्वर महादेव मेला महोत्सव, रतनपुर में माघी पूर्णिमा एवं आदिवासी विकास मेला, संत समागम महामेला दामाखेड़ा, मल्हार महोत्सव, शिवरीनारायण मेला महोत्सव तथा लोक मड़ई महोत्सव राजनांदगांव आदि के आयोजन के लिए दी जाने वाली मदद से छत्तीसगढ़ की कला एवं संस्कृति को बढ़ावा तथा छत्तीसगढ़ी लोक कलाकारों को प्रोत्साहन मिल रहा है।

    शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में छत्तीसगढ़ी खानपान एवं व्यंजन विक्रय केन्द्र गढ़कलेवा शुरू करने के निर्देश दिए हैं। रायपुर के महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय परिसर में प्रयोग के तौर पर छत्तीसगढ़ी खानपान एवं व्यंजन विक्रय केन्द्र संचालित है। यह रायपुर शहर के अन्य खान-पान केन्द्रों से प्रतिस्पर्धा करते हुए, गुणवत्ता और मानकों पर खरा उतरा है, जिससे पारंपरिक और स्वास्थ्यकर, स्वादिष्ट खान-पान को बल मिला है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप संस्कृति विभाग द्वारा राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में गढ़कलेवा शुरू किया गया है।
    छत्तीसगढ़ की संस्कृति में खान-पान की विशिष्ट परंपराए हैं, जो हर प्रहर, बेला, मौसम और तीज त्यौहारों के अवसर पर पकाए, खाए और खिलाए जाते हैं। वनवासी-जनजातीय समाज का कलेवा मुख्यतः प्राकृतिक वनोपज पर आधारित है, तो जनपदीय संस्कृति के वाहकों के कलेवा में रोचक रसपूर्ण विविधता है। मांगलिक और गैरमांगलिक दोनों प्रसंग के व्यंजनों की अपार श्रृंखला है। ये व्यंजन भुने हुए, भाप से पकाये, तेल में तले और ये तीनों के बगैर भी तैयार होते हैं।
    छत्तीसगढ़ के कुछ प्रमुख पकवानों में चीला, बेसन चीला, गुरहा चीला, फरा, मुठिया, धुसका, चंाउर रोटी, चंउर पातर रोटी, खुपुर्री रोटी, बफौरी, चंवसेला, बरा, पताल चटनी, देहरउरी, अईरसा, दुधफरा, पकवा, ठेठरी, खुरमी, बिड़िया, पिड़िया, पपची, पूरन लाडू, करी लाडू, बुंदी लाडू, मुर्रा लाडू, लाई लाडू शामिल है।
    राज्य शासन द्वारा छत्तीसगढ़ी खान-पान एवं व्यंजन विक्रय केन्द्र गढ़कलेवा छत्तीसगढ़ के सभी जिला मुख्यालयों में वित्तीय वर्ष 2020-21 में प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया है। इसके अतर्गत स्थानीय महिला स्वसहायता समूहों को प्रशिक्षित कर तथा गढ़कलेवा हेतु स्थल, शेड़ आदि तैयार कर संचालन हेतु दिया जाएगा। जिससे समूह के गरीब परिवारों को जीवन यापन के लिए स्वरोजगार प्राप्त हो सके और आत्म निर्भर बन सकंे। भारत सरकार की योजना ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के अंतर्गत अंतर्राष्ट्रीय काईट फेस्टिवल 06 से 14 जनवरी 2019 में गुजरात के अहमदाबाद में छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं छत्तीसगढ़ व्यंजन स्टाल लगाया गया था, जहां लोगों ने छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का भरपूर लुत्फ उठाया।

    लाइफस्टाइल /शौर्यपथ / साल 2020 को यकीनन कोई भूला नहीं सकता। इस साल ने जिंदगी के मायने समझाए। तो वहीं लाइफ में कुछ ऐसे बदलाव हुए जिनके बारे में हमने कभी कल्पना भी नहीं कि होगी। जी हां कोरोनावायरस के प्रकोप ने सेहत का ख्याल रखना कितना जरूरी है इस बात को बहुत अच्छी तरह से समझा दिया। वहीं लॉकडाउन के दौरान पूरे वक्त घर में रहकर आप कैसे फिट रह सकते है। वहीं रोजाना जिम, योग और ऐरोबिक्स क्लास लेने वाले लोग घर पर ही कैद होकर रह गए, लेकिन लोगों ने इसके लिए भी नए रास्ते निकालें।
    तो आइए जानते हैं कुछ ऐसे फिटनेस के कुछ ऐसे तरीके जो साल 2020 में ट्रेंड में रहे...

    ऑनलाइन फिटनेस क्लास
    बात चाहे पढ़ाई को हो या आपके ऑफिस के काम की लॉकडाउन में
    आधे से ज्यादा काम ऑनलाइन होने लगे तो फिटनेस कैसे पीछे रह सकती है। लोगों ने फिट रहने के लिए ऑनलाइन फिटनेस क्लासेस को अपनाया। जिसमें योगा से लेकर एरोबिक्स क्लासेस भी शामिल है।
    वॉक
    लॉकडाउन के बाद जब जिंदगी धीरे-धीरे पटरी पर आने लगी तो लोगों को बाहर निकलकर वॉक करने की अनुमति मिल गई। जिसके बाद लोगों नें पार्क में टहलने गए और खुद को फिट रखने के लिए सोशल डिस्टेंसिग के साथ वॉक कर खुद को सेहतमंद रखा।
    खेल-खेल में फिटनेस
    फिटनेस के लिए साल 2020 में
    बैडमिंटन और टेनिस भी काफी ट्रेंड में रहे लोगों ने खेल को अपनाकर खुद को फिट रखने की कोशिश की इनकी मदद से लोग फिट तो रह ही पाएं साथ ही मूड भी फ्रेश हुआ।
    साइकिल प्रेम
    साल 2020 में लोगों का साइकिल प्रेम साफ नजर आया। लोगों ने खुद को फिट रखने के लिए साइकिल की मदद ली। ऐसे में लोगों ने साइकिल के क्रेज को फिर से बढ़ावा दिया। तो वहीं साइकिल की डिमांड में भी इजाफा हुआ।

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