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खाना खजाना / शौर्यपथ /आयुर्वेद में हल्दी सबसे अच्छी औषधि है। यह पूरे स्वास्थ्य को ठीक रखती है। हल्दी तीखी,कसैली और गर्म तासीर वाली होती है। कच्ची हल्दी आयुर्वेद में सदियों से प्रयोग होती आयी है। हल्दी में विटामिन सी, विटामिन ई, आयरन, जिंक सहित ढेरों पोषक तत्व मौजूद हैं, जो हल्दी को हमारे जीवन का अनिवार्य हिस्सा बनाते हैं।
हल्दी का उपयोग सभी दोषों से मुक्ति के लिए किया जा सकता है
पाचन में मदद करती है, आंत की संतुलन को बनाए रखती है, गैस को कम करती है, इसमें टॉनिक गुण होते हैं और यह एक एंटीबायोटिक है।
हल्दी का उपयोग खांसी, कफ, मधुमेह, बवासीर, घाव में जलन और त्वचा की समस्याओं के लिए किया जा सकता है। यह चिंता और तनाव को कम करने में भी मदद करता है।
इसको आहार में शामिल करने का आसान तरीका है हल्दी का अचार। इसे बनाना आसान है और ये बहुत स्वादिष्ट लगता है। आइये जानते हैं इसे कैसे बनाना है।
हल्दी के अचार के लिए आपको चाहिए ये सामग्री
1 कप कच्ची ताजी हल्दी की जड़ें
3 चम्मच सरसों तेल
1 चम्मच काली सरसों
एक चुटकी हींग
1 चम्मच अचार मसाला पाउडर
2 चुटकी नमक
4 चम्मच नींबू का रस
अब जानिए हल्दी का अचार बनाने की विधि
हल्दी की जड़ और अचार मसाला पाउडर ज्यादातर भारतीय किराने की दुकानों से उपलब्ध हैं। हल्दी की जड़ थोड़ी अदरक की तरह ही लगती है, लेकिन महीने छिलकों के नीचे यह शानदार पीले रंग की होती है।
हल्दी की जड़ों को धोकर अच्छी तरह सुखा लें। छीलकर लम्बा-लम्बा काट लें।
तेल गरम करें और सरसों के बीज डालें और चिटका दें। इसे ठंडा करें और कटी हुई हल्दी के ऊपर डालें।
अब इसमें अचार मसाला पाउडर, नींबू का रस और नमक मिलाएं। अच्छी तरह से हिलाएं।
कांच के एयर टाइट बर्तन में रखें और रेफ्रिजरेटर में स्टोर करें।
ये अचार 1 महीने तक फ्रेश रहता है, बस इसमें पानी की एक बूंद भी नहीं जानी चाहिए। पानी अचार खराब कर देगा। भोजन के साथ इस अचार को कम मात्रा में खाएं।
कच्ची हल्दी स्वास्थ्य लाभ जानना भी है जरूरी
1. कैंसर से लड़ने में सक्षम है
आयुर्वेद में हल्दी को औषधि के रूप में इस्तेमाल करने का बड़ा कारण है हल्दी में मौजूद एन्टी कैंसर कंपाउंड। इटली के नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट में 2016 में हुए एक शोध में यह पुष्टि हुई कि कच्ची हल्दी का सेवन न केवल कैंसर होने की सम्भावना को कम करता है, बल्कि बैड रेडिएशन से होने वाले ट्यूमर को भी खत्म करने में असरदार है।
2. एक्ने से छुटकारा दिलाने में है मददगार
यूनिवर्सिटी ऑफ जॉर्जिया के डर्मेटोलॉजिस्ट डिपार्टमेंट के एक शोध के अनुसार हल्दी को चेहरे पर पैक के रूप में प्रयोग करने से एक्ने से राहत मिलती है। हल्दी में मौजूद एंटीबैक्टीरियल गुण एक्ने पैदा करने वाले बैक्टीरिया को खत्म कर, आपकी त्वचा को साफ करती हैं।
3. गले की सभी समस्याओं को दूर करती है
पंजाब यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ पैथोलॉजी के अनुसार हल्दी गले के इन्फेक्शन से राहत पहुंचाने में कारगर है। गर्म पानी में आधा चम्मच नमक और आधा चम्मच हल्दी मिलाकर गरारे करने से गले की ख़राश और दर्द में तुरंत आराम मिलता है।
4. वजन कम करने में सहायक है
जर्नल ऑफ न्यूट्रिशनल बायो केमेस्ट्री में प्रकाशित लेख के मुताबिक कच्ची हल्दी वजन कम करने में मददगार होती है। एक चम्मच हल्दी को एक गिलास गर्म पानी मे घोल कर उसे हल्का ठंडा होने पर पिएं। हल्दी मेटबॉलिज्म को तेज करती है जिसके कारण वजन कम होता है।
5. इम्यूनिटी बूस्टर भी है हल्दी
क्या आप जानते हैं कि हल्दी आपकी इम्यूनिटी बढ़ाने में भी सक्षम है। हल्दी के इन्हीं गुणों के कारण आयुर्वेद में मुख्य रूप से इसका इस्तेमाल किया जाता है। सर्दियों में आप दूध में हल्दी डाल कर सेवन कर सकते हैं। सर्दी-जुखाम से बचने के लिए हर रात सोने से पहले इसका सेवन करना चाहिए।
उम्मीद है आप इस आसान रेसिपी को ट्राई करेंगी और कच्ची हल्दी के फायदे लेंगी।
खाना खजाना /शौर्यपथ /सोया चाप प्रोटीन का अच्छा ऑप्शन है. वहीं, वेजिटेरियन लोगों के लिए यह नॉनवेज से कम नहीं है। चाप को कई तरह से बनाया जाता है। आप चाप ग्रेवी, मसाला चाप, मलाई चाप, तंदूरी चाप कोई भी डिश ट्राई कर सकते हैं। आज हम आपको बनाना सिखा रहे हैं तंदूरी मलाई चाप-
सामग्री :
सोया चाप-6 स्टिक
अदरक लहसुन पेस्ट-1 बड़ा चम्मच
शिमला मिर्च-1
दही-आधा कप
मलाई-2 बड़ी चम्मीच
कद्दूकस पनीर - 1/4 कप
बारीक कटी लाल मिर्च- 4
तेल-दो बड़ा चम्मच
नमक-स्वादानुसार कसूरी मेथी- 1 छोटा चम्म च
तंदूरी मसाला- 1 छोटा चम्मच
गरम मसाला- 1 छोटा चम्मच
लाल मिर्च पाउडर-1/2 छोटा चम्मच
सजावट के लिए- धनियापत्ती बारीक कटी
स्लाइस में कटे प्याज
नींबू- आधा
विधि :
तंदूरी मलाई चाप बनाने के लिए सबसे पहले सोया चाप को स्टिक निकाल लें। अब इसे छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर एक बाउल में रख लें। इसके बाद दही, अदरक -लहसुन पेस्ट, कसूरी मेथी और नमक मिलाकर इसे चाप पर अच्छेक से लगाकर, इसे मेरिनेट होने के लिए 15-20 मिनट के लिए छोड़ दें।
तब तक शिमला मिर्च को गैस की आंच पर चारों तरफ से सेक लें, जैसे आप गैस पर बैंगन को भूनते हैं। इसे सेंकने के बाद कुछ देर ठंडा होने के लिए रखें। जब यह ठंडा हो जाए, हाथों से इसकी जली परत को छुड़ा लें। इसके बाद पकी हुए शिमला मिर्च और हरी मिर्च को एक साथ पीस लें।
इसके बाद मेरिनेट किए सोया चाप में शिमला मिर्च पेस्ट, मलाई दही, पनीर, नमक, तंदूरी मसाला, गरम मसाला और लाल मिर्च पाउडर डालकर अच्छे से मिला लें। मिलाने के बाद इसे दोबारा 15 से 20 मिनट के लिए रख दें। फिर मीडियम आंच पर एक पैन में में तेल गरम करें। तेल गरम होने के बाद इसमें सोया चाप डालकर 7-8 मिनट तक पकाएं।
आंच धीमी करके इसे कुछ देर अच्छे से पकने दें। जब यह पक जाए तो आंच बंद कर दें और एक प्लेट में निकाल लें। फिर और धनिया पत्ती से गार्निश करें। आपकी तंदूरी मलाई चाप तैयार है आप इसे शिमला मिर्च, स्लामइस में कटे प्याधज और हरी चटनी और नींबू के साथ सर्व करें।
धर्म संसार /शौर्यपथ / मार्गशीर्ष मास में शुक्लपक्ष की एकादशी को मोक्षदा एकादशी का व्रत रखा जाता है। ऐसा कहाजाता है कि इस दिन ही कुरुक्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को श्रीमद्भागवत गीता का उपदेश दिया था। इसलिए इस दिन गीता जयंती भी मनाई जाती है। इसलिए मोक्ष की प्राप्ति के लिए इस व्रत को सबसे पुण्यकारी माना जाता है। इस दिन से गीता-पाठ का अनुष्ठान प्रारंभ करें।कहा जाता है कि इस व्रत को रखना वाला जन्म-मरण के बंधन से मुक्त होकर मुक्ति प्रदान कर समस्त कामनाओं को पूर्ण करता है।
मोक्षदा एकादशी व्रत मुहूर्त-
एकादशी तिथि प्रारंभ- 24 दिसंबर की रात 11 बजकर 17 मिनट से
एकादशी तिथि समाप्त- 25 दिसंबर को देर रात 1 बजकर 54 मिनट तक
व्रत में इन बातों का ध्यान रखें।
पूजा में तुलसी के पत्तों को अवश्य शामिल करें।
सुबह स्नान करके भगवान को गंगागल से स्नान कराएं।
भगवान को रोली, चंदन, अक्षत आदि अर्पित करें।
रात्रि में भगवान श्रीहरि का भजन-कीर्तन करें।
द्वादशी के दिन ब्राह्मणों को भोजन कराएं और उन्हें दक्षिणा देकर विदा करें।
मोक्षदा एकादशी से एक दिन पहले दशमी के दिन सात्विक भोजन करना चाहिए
शिक्षा /शौर्यपथ / विदुर नीति में विदुर जी के विचारों को बताया गया है। विदुर जी को बुद्धिजीवी मानते हैं। इसलिए आज भी लोग उनके विचारों को अपनाते और मानते हैं। विदुर नीति में ऐसे लोगों के बारे में भी बताया गया है कि जिनके घर में कभी बरकत नहीं आती है। कहा जाता है कि इन लोगों पर मां लक्ष्मी कभी अपनी कृपा नहीं बरसाती हैं। विदुर नीति के अनुसार, ऐसे लोगों का सारा जीवन धन के अभाव में गुजरता है।
1. साफ-सफाई का करने वाले लोग- मान्यता है कि जिन लोगों के घर में साफ-सफाई का ध्यान नहीं दिया जाता है। उनके घर में मां लक्ष्मी का वास नहीं होता है। कहते हैं कि गंदगी के कारण ऐसे लोगों के घर में बरकत नहीं होती है। इसलिए घर में हमेशा साफ-सफाई का ध्यान रखना चाहिए।
2. पूजा-पाठ- कहते हैं कि जिस घर में पूजा-पाठ होता है, उस घर में पॉजिटिव ऊर्जा हमेशा बनी रहती है।मान्यता है कि घर में पूजा-पाठ करने से मां लक्ष्मी का वास होता है। कहा जाता है कि देवी लक्ष्मी ऐसे घरों में सदैव वास करती है। जिससे घर में सुख-समृद्धि हमेशा बनी रहती है।
3. बड़े-बुजुर्गों का सम्मान- विदुर नीति के अनुसार, जिस घर में बड़े-बुजुर्गों का सम्मान होता है, उस घर में मां लक्ष्मी का वास होता है। कहते हैं कि जो लोग अपने बुजुर्गों को अपमान करते हैं और अपशब्द बोलते हैं। उन घरों मां लक्ष्मी का वास नहीं होता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, जिस घर में बुजुर्ग खुश रहते हैं, वहां मां लक्ष्मी का आशीर्वाद हमेशा बना रहता है।
4. शब्दों का संभलकर करें इस्तेमाल- विदुर नीति के अनुसार, जो लोग शब्दों का चुनाव संभलकर करते हैं। उस घर में मां लक्ष्मी अपना आशीर्वाद हमेशा बनाए रखती हैं। विदुर जी कहते हैं कि जो लोग बिना सोचे-समझे अभद्र शब्दों का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें मां लक्ष्मी का आशीर्वाद कभी प्राप्त नहीं होता है।
गोधन योजना से सृजित हो रहे हैं रोजगार के नए अवसर : किसान बढ़ रहे हैं जैविक खेती की ओर
मुख्यमंत्री ने गोधन न्याय योजना की 10वीं किश्त में गोबर विक्रेताओं के खातों में अंतरित की 5.12 करोड़ रूपए की राशि
गोधन न्याय योजना में अब तक 1.40 लाख गोबर विक्रेताओं को 64.20 करोड़ रूपए का भुगतान
गौठानों में किसानों ने किया 5 करोड़ रूपए मूल्य का पैरादान
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज प्रदेश सरकार की गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों के खाते में गोबर खरीदी की 10वीं किश्त की राशि के रूप में 5 करोड़ 12 लाख रूपए की राशि गौपालकों के खाते में अंतरित की। इस योजना के अंतर्गत प्रदेश के 1 लाख 40 हजार से अधिक पशुपालक लाभान्वित हो रहे हैं।
विधानसभा परिसर स्थित अपने कार्यालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित इस कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा कि गोधन न्याय योजना के अंतर्गत अब तक गौपालकों को 64 करोड़ 20 लाख रूपए की राशि दी जा चुकी है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति में परिवर्तन आ रहा है। रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं और किसान जैविक खेती की ओर बढ़ रहे हैं। गोधन न्याय योजना में गोबर खरीदी के साथ-साथ हजारों ग्रामीण महिलाएं वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन का कार्य कर रही है। वर्मी कम्पोस्ट की विक्रय दर 8 रूपए प्रति किलो से बढ़ाकर 10 रूपए प्रति किलो कर दी गई है। इस योजना से नए रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं। जो किसान वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग कर रहे हैं, वे जैविक खेती की ओर बढ़ रहे हैं। श्री बघेल ने कहा कि जैविक खेती में उत्पादित होने वाले अनाज और फलों की कीमत डेढ़ से दोगुनी बढ़ जाती है। इससे किसानों की आय में भी अच्छी खासी वृद्धि होगी। उन्होंने गोधन योजना से जुड़े सभी हितग्राहियों को बधाई और शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर कृषि एवं जल संसाधन मंत्री रविन्द्र चौबे और कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. एम. गीता उपस्थित थीं।
कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. गीता ने बताया कि प्रदेश में 7 हजार 824 गौठान स्वीकृत किए गए हैं। जिनमें से 4 हजार 704 गौठान पूरे हो गए हैं। इनमें से 4 हजार 173 गौठान सक्रिय हैं। गोधन न्याय योजना के अंतर्गत अब तक 32 लाख 10 हजार क्विंटल गोबर की खरीदी की जा चुकी है। गोबर से गौठानों में तैयार की गई 8 हजार 50 क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट की अब तक बिक्री की जा चुकी है। गौठानों में किसानों ने लगभग 5 करोड़ रूपए मूल्य का पैरा दान किया है। गौठानों में पशु के चारा के रूप में अजोला का उत्पादन किया जा रहा है। जिसमें लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। उन्होंने बताया कि गौठानों में वर्मी कम्पोस्ट के निर्माण के लिए 78 हजार 47 वर्मी टांका स्वीकृत किए गए थे, जिसमें से 54 हजार 241 वर्मी टांका पूर्ण हो गए हैं और 16 हजार 810 वर्मी टांका का निर्माण प्रगति पर है। डॉ. गीता ने बताया कि रायपुर की दो प्रयोगशालाओं सहित दुर्ग, बिलासपुर, सरगुजा, बस्तर और रायगढ़ की एक-एक प्रयोगशाला में वर्मी कम्पोस्ट के नमूनों की जांच की जा रही है। अब तक 1,006 नमूनों का विश्लेषण किया जा चुका है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों में 47.5 प्रतिशत हितग्राही अन्य पिछड़ा वर्ग के, 44 प्रतिशत हितग्राही महिलाएं और 41 प्रतिशत हितग्राही अनुसूचित जनजाति वर्ग और 7.80 प्रतिशत हितग्राही अनुसूचित जाति वर्ग के हैं।
छत्तीसगढ़ सरकार पूरी संजीदगी से कर रही है धान खरीदी का काम, किसानों को नहीं होने देंगे कोई तकलीफ: मुख्यमंत्री बघेल
धान खरीदी की समस्याओं के निराकरण के लिए राज्य सरकार कटिबद्ध
छत्तीसगढ़ विधानसभा में 2387 करोड़ रूपए का द्वितीय अनुपूरक बजट पारित
वित्तीय वर्ष 2020-21 के बजट का आकार बढ़कर हुआ एक लाख 9 हजार 101 करोड़ रूपए
मुख्यमंत्री ने कहा - हमारी प्राथमिकता प्रदेश के गरीब, किसान, मजदूर, महिलाएं और युवाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार लाना
धान खरीदी शुरू हुए एक माह हो रहे, केन्द्र ने अब तक नहीं दी एफसीआई को चावल देने की अनुमति
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज चर्चा के बाद ध्वनिमत से 2 हजार 387 करोड़ रूपए का द्वितीय अनुपूरक बजट पारित कर दिया गया। द्वितीय अनुपूरक के बाद अब प्रदेश के वर्ष 2020-21 के मुख्य बजट का आकार कुल एक लाख 9 हजार 101 करोड़ रूपए हो गया है। वर्ष 2020-21 का मुख्य बजट एक लाख 2 हजार 907 करोड़ रूपए का था। प्रथम अनुपूरक का आकार 3 हजार 807 करोड़ रूपए था।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विधानसभा में हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि राज्य सरकार पूरी संजीदगी के साथ धान खरीदी का काम कर रही है, किसानों को किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होगी। बारदानों की कमी को दूर करने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी प्राथमिकता प्रदेश के गरीब, किसान, मजदूर, महिलाएं और युवा हैं। उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार करना हमारी प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हां हमने कर्ज लिया है, किसानों की कर्ज माफी के लिए, धान खरीदी के लिए और लोगों की सहायता करने के लिए। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार ने स्काई वॉक, एक्सप्रेस-वे, मोबाइल खरीदी और नई राजधानी के लिए ऋण लिया, लेकिन इसका प्रदेश की जनता को क्या फायदा हुआ। मुख्यमंत्री ने नई तहसीलों की जनप्रतिनिधियों की मांग के संबंध में कहा कि राज्य सरकार द्वारा 23 नई तहसीले बनाई गई है। भविष्य में जब भी नई तहसीलें बनाई जाएंगी जनप्रतिनिधियों की मांगों को ध्यान में रखा जाएगा।
मुख्यमंत्री ने बारदानों की व्यवस्था के संबंध में कहा कि राज्य सरकार ने भारत सरकार के जूट कमिश्नर से छत्तीसगढ़ को 4.50 लाख गठान बारदाना उपलब्ध कराने का आग्रह किया था, लेकिन उन्होंने एक लाख 43 हजार गठान बारदाने उपलब्ध कराने की स्वीकृति दी। लेकिन हमें एक लाख 5 हजार गठान बारदानें जूट कमिश्नर से मिले हैं। कोरोना काल में जूट मिलें बंद थी, इसलिए राज्य सरकार ने पीडीएस की दुकानों से 65 हजार गठान पुराने बारदाने, राईस मिलर्स से 80 हजार गठान बारदाने की व्यवस्था की है। हमें अब तक 2 लाख 62 हजार गठान बारदाने मिले हैं, जिनमें से एक लाख 58 हजार गठान बारदानों का उपयोग किया जा चुका है और एक लाख 4 हजार गठान बारदाने शेष हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने आम जनता को सुविधाएं उपलब्ध कराने के कार्य किए, उनकी सराहना भारत सरकार और नीति आयोग ने भी की। कोरोना काल में प्रदेश में 22 हजार से अधिक क्वॉरेंटाइन सेंटर स्थापित किए गए, गरीबों को 35 किलो के मान से 3 माह का अनाज मुफ्त दिया गया, मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम के अंतर्गत बच्चों को घर पहुंचाकर सूखा राशन दिया गया। श्री बघेल ने कहा कि प्रदेश के भ्रमण के दौरान उन्होंने कई धान खरीदी केंद्रों का भी दौरा किया वहां भीड़-भाड़ नहीं थी और व्यवस्थाएं काफी अच्छी थी। नई सरकार बनने के पहले प्रदेश में 1900 धान खरीदी केंद्र थे, जिन्हें पहले चरण में बढ़ाकर 2000 किया गया और अब 2300 केंद्रों पर धान की खरीदी हो रही है। पिछले वर्ष 23 दिसंबर तक 5 लाख किसानों ने 18 लाख मेट्रिक टन धान बेचा था, जबकि इस वर्ष 23 दिसंबर तक 9 लाख 90 हजार किसानों ने 38 लाख मैट्रिक टन धान बेचा है। इस वर्ष धान के विक्रय के लिए 21 लाख 38 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है, जो पिछले वर्षों की तुलना में सर्वाधिक है। धान के रकबे में भी 6 लाख एकड़ की वृद्धि हुई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि धान खरीदी में आ रही समस्याओं के निराकरण के लिए राज्य सरकार कटिबद्ध है। इस संबंध में मिल रही शिकायतों का लगातार समाधान किया जा रहा है। डायल 112 में अब तक 1700 शिकायतें मिली जिनमें से 483 का निराकरण किया जा चुका है। रकबे में त्रुटि के संबंध में 413 शिकायतें मिली हैं, जिनके निराकरण के लिए अधिकारियों को कहा गया है। उन्होंने बताया कि कल ही उन्होंने केंद्रीय मंत्री श्री पीयूष गोयल से एफसीआई को चावल देने की अनुमति देने का आग्रह किया था, लेकिन उन्होंने कहा कि मैं किसान आंदोलन में व्यस्त हूं। धान खरीदी को एक माह हो गया है लेकिन यह दुर्भाग्यजनक है कि अभी तक एफसीआई में चावल देने की अनुमति नहीं मिल पाई है। राईस मिलर्स अब तक 7 लाख मेट्रिक टन से अधिक उठाव कर चुके हैं। यदि एफसीआई में चावल जमा करने की अनुमति नहीं मिलती है तो बारदाने की कमी होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को एकमुश्त धान की कीमत 2500 रूपए प्रति क्विंटल इसलिए नहीं दी जा सकी क्योंकि केन्द्र सरकार ने हमारे हाथ-पांव बांध दिए थे। समर्थन मूल्य और 2500 रूपए प्रति क्विंटल के अंतर की राशि किसानों को देने के लिए राज्य सरकार राजीव गांधी किसान न्याय योजना लेकर आई जिसमें किसानों को प्रति एकड़ 10 हजार रूपए की राशि दी जा रही है। इस योजना में किसानों को तीन किश्तों का भुगतान किया जा चुका है। चौथी किश्त भी इसी वित्तीय वर्ष में दे दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना मरीजों का सरकारी अस्पतालों में मुफ्त में इलाज किया जा रहा है। राज्य सरकार कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए भारत सरकार की गाइडलाइन का पालन कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने स्वास्थ्य संबंधी अधोसंरचना विकसित करने के भी पूरे प्रयास किए है। 15 वर्षों में प्रदेश में केवल 46 आईसीयू बेड थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 400 हो गई है। हजारो बेड, वेंटिलेटर की व्यवस्था की गई। कोरोना पैंडेमिक से निपटने के लिए स्वास्थ्य और पुलिस विभाग सहित पंचायत, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा सहित सभी विभागों के लोगों और जनप्रतिनिधियों में सराहनीय कार्य किया। उन्होंने कहा कि अब कोरोना वायरस का नया स्ट्रेन आ गया है। यदि विदेशों से आने वालों को पहले ही बड़े शहरों में रोक लिया गया होता, तो यह छत्तीसगढ़ नहीं आ पाता। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे छत्तीसगढ़ की संस्कृति पर गर्व है और छत्तीसगढ़िया होने का अभिमान है। नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि नरवा प्रोजेक्ट में भारत सरकार ने सूरजपुर और बिलासपुर जिले को पूरे देश में प्रथम पुरस्कार प्रदान किया है। स्वच्छता के मामले में छत्तीसगढ़ पूरे देश में पहला है। गोधन न्याय योजना में अब तक 32 लाख क्विंटल से अधिक गोबर की खरीदी की जा चुकी है और पशुपालकों को 64 करोड़ रूपए का भुगतान किया जा चुका है। अंबिकापुर के वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन करने वाले एक महिला स्व-सहायता समूह ने एक बड़ी कम्पनी के साथ 16 रूपए प्रति किलो की दर पर वर्मी कम्पोस्ट की बिक्री के लिए एमओयू किया है। उन्होंने कहा कि गोबर हमारे लिए पवित्र वस्तु है। आज भी घरों में चूल्हे और पूजा स्थल की लिपाई गोबर से की जाती है। गोबर को हमने अर्थव्यवस्था से जोड़ा है।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष द्वारा कर्ज के आकार बढ़ने के संबंध में की गई शिकायतों का जवाब देते हुए कहा कि भारत सरकार द्वारा वर्ष 2019-20 के केन्द्रीय बजट में राज्य को केन्द्रीय करों में राज्य के हिस्से की राशि 26 हजार 13 करोड़ रूपए निर्धारित की गई थी, किन्तु राज्य को वास्तविक रूप से केवल 20 हजार 205 करोड़ रूपए ही प्राप्त हुए। इस प्रकार राज्य को 5 हजार 808 करोड़ रूपए कम प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार वर्ष 2019-20 में राज्य को जीसएसटी क्षतिपूर्ति अनुदान की राशि 4 हजार 506 करोड़ प्राप्त होनी थी, किन्तु केवल 2 हजार 644 करोड़ ही प्राप्त हुए हैं। इस प्रकार इन दोनों मदो में कुल 7 हजार 670 करोड़ की कमी होने से राज्य के संसाधनों में भारी कमी आई है।
मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि वर्ष 2019-20 में केन्द्रीय करों में राज्य के हिस्से में कमी को देखते हुए भारत सरकार द्वारा विशेष रियायत के रूप में राज्य को एक हजार 813 करोड़ की अतिरिक्त अधार-सीमा का लाभ एफआरबीएम एक्ट में संशोधन करने की शर्त पर प्रदाय किया गया था। 22 मार्च 2020 से देशव्यापी लॉकडाउन के कारण राज्य के स्वयं के राजस्व में भी आंशिक कमी हुई है, किन्तु वैश्विक आपदा के समय में राज्य के लोगों को फौरी तौर पर राहत प्रदान करने तथा स्वास्थ्य सुविधाओं की तत्काल उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु राज्य द्वारा लोकहित में आवश्यक व्यय किए गए है। केन्द्र सरकार द्वारा दी गई अतिरिक्त उधार सीमा के लिए निर्देशानुसार राज्य के एफआरबीएम एक्ट में 2019-20 के लिए वित्तीय घाटे की सीमा में वृद्धि हेतु संशोधन किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वास्तविकता यह है कि सामान्य आर्थिक मंदी एवं कोविड-19 महामारी से उत्पन्न विशेष परिस्थितियों के कारण केन्द्र सरकार के साथ-साथ सभी राज्यों के राजस्व प्राप्तियों में भारी कमी दर्ज की गई है। जिसकी पूर्ति के लिए ऋण लिया गया है।
राज्यों की जीएसडीपी के तिमाही आंकड़े जारी नहीं किए जाते हैं किन्तु केन्द्रीय सांख्यिकी संगठन के हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार देश की जीडीपी में प्रथम तिमाही में 23.9 प्रतिशत तथा द्वितीय तिमाही में 7.5 प्रतिशत की गिरावट आयी है। मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि अंत में मार्च 2020 में केन्द्र सरकार ने राज्य को एक हजार 813 करोड़ अतिरिक्त ऋण लेने का निर्देश दिया। लेकिन हमन अतिरिक्त ऋण न लेकर उपलब्ध राशि में ही राज्य के खर्चों को संचालित किया। वर्ष 2020-21 में तो भारत सरकार द्वारा सभी राज्यों को 2 प्रतिशत अतिरिक्त ऋण लेनेे की अनुमति प्रदान की जा चुकी है, किन्तु छत्तीसगढ़ ने अभी तक इस अतिरिक्त ऋण सीमा का लाभ नहीं लिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व प्राप्तियों में छत्तीसगढ़ ने बेहतर प्रदर्शन किया है।
-637 क्विंटल खरीदने की है योजना, अब तक 250 क्विंटल खाद खरीद कर 2 लाख 11 हजार 888 रुपए का किया भुगतान
-जिले के ग्रामीण गौठानों में अब तक 1 लाख 55 हजार किलो खाद का हुआ निर्माण , 66 हजार 666 किलो खाद का हो चुका उठाव, 49 हजार 241 का उठाव शेष
-गौठानों में निर्मित 4 हजार 161 कम्पोस्ट टैंकों में अगली खेप की तैयारी शुरू
दुर्ग / शौर्यपथ / ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के उददेश्य से राज्य शासन द्वारा शुरू की गई नरवा, गरुवा, घुरूवा, बाड़ी योजना के परिणाम सामने आने लगे है। इस योजना से स्व-सहायता समूह की महिलाओं को रोजगार मिल रहा है खाद बेचकर आमदनी भी होने लगी है।जिससे उन्हें आर्थिक संबल मिल रहा है।कल तक जो महिलाएं घर में खाली बैठी थीं या मजदूरी करती थीं आज खुद के लिए काम कर रही हैं।
साथ ही जैविक खेती का प्रचलन भी बढ़ रहा है। गांव की महिलाएं समूह बनाकर गौठानो में स्थापित वर्मी कम्पोस्ट और नाडेप टंकियो में आर्गेनिक खाद का निर्माण कर रही हैं। महिलाओं को उनकी मेहनत का मूल्य दिलाने के लिए उद्यानिकी विभाग द्वारा प्रयास भी किए जा रहे हैं। उपसंचालक उद्यानिकी श्री सुरेश ठाकुर ने बताया कि अब तक गौठानों से 250 क्विंटल खाद की खरीदी कर 2 लाख 11 हजार 880 रुपए का भुगतान किया गया है। उनकी योजना है कि गौठानों से 637 क्विंटल अगले एक दो माह में खरीदें। इसके बाद आने वाले दिनों में और खरीदी की जाएगी। उन्होंने बताया कि हमें हर साल अपनी नर्सरियों के लिए अच्छी गुणवत्ता के खाद की आवश्यकता होती ही है। स्व-सहायता समूह की हमारी बहनें गौठानों में खाद बना रही हैं। हमने उनको भी आर्थिक संबल देने के लिए उनके द्वारा बनाए गए वर्मी कम्पोस्ट खाद को क्रय करने का निर्णय लिया जिसमें हमें भी अपने नर्सरियों के लिए पौधे उत्पादन व विभिन्न योजनाओं में लगने वाले खाद की पूर्ति आसानी से हो जाएं और महिलाओं को भी प्रोत्साहन मिले की उनकी मेहनत खाली नहीं जाएगी। उद्यानिकी विभाग द्वारा अपने सभी ब्लॉक लेवल आफिसरों को यह कार्य भार दिया है, कि खुद जाकर खाद की उर्वरता व गुणवत्ता की परख कर खाद खरीदें। साथ ही किसानों को भी सब्जी, भाजी व फलों की खेती में वर्मी कम्पोस्ट खाद उपयोग की सलाह भी दें।
गौठानों में बने 1550 क्विंटल केंचुआ खाद की बिक्री से मिलेंगे 10 लाख 72 हजार 214 रुपए , महिला समूहों को होगा सीधा फायदा- जिला पंचायत से मिली जानकारी के मुताबिक अब तक जिले के ग्रामीण अंचलों में स्थित गौठानों में स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा लगभग 1 लाख 55 हजार किलोग्राम यानि 1550 क्विंटल केंचुआ खाद बनाया जा चुका है। जिसका मूल्य 10 लाख 72 हजार 214 रुपए निर्धारित किया गया है। जिसका सीधा फायदा खाद निर्माण में लगी महिलाओं को होगा। जनपद पंचायत दुर्ग में 50 हजार 150 किलोग्राम केंचुआ खाद बनाया गया है जिसका मूल्य है, 3 लाख 20 हजार 680 रुपए , जनपद पंचायत धमधा में 54 हजार 697 किलोग्राम वर्मी कम्पोस्ट खाद का निर्माण किया गया जिसका मूल्य 4 लाख 81 हजार 434 रुपए निर्धारित बकित गया है। इसी प्रकार जनपद पंचातय पाटन में कुल 50 हजार 230 किलोग्राम केंचुआ खाद निर्मित किया गया। जिसका मूल्य मुल्य 2 लाख 71 हजार है। जिले के ग्रामीण गौठानों में अब तक निर्मित 1 लाख 55 हजार किलो खाद में से 66 हजार 666 किलोग्राम खाद का उठाव हो चुका है और 49 हजार 241किलोग्राम का उठाव शेष है।
गौठानों में निर्मित 4 हजार 161 कम्पोस्ट टैंकों में अगली खेप की तैयारी शुरू, अगली खेप के लिए गौठानों में 4 हजार से अधिक टंकियां भरी गईं- राज्य शासन द्वारा जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए किए गए प्रयासों से वर्मी कम्पोस्ट खाद की मांग काफी बढ़ने लगी है इस लिहाज से आने वाले समय मे महिलाओं को और अधिक फायदा होगा।
जैविक खेती का महत्त्व समझने लगे हैं इसलिए गांव में स्थित बाड़ियों में भी वर्मी कम्पोस्ट की अच्छी खपत हो रही है। जैविक खाद की मदद से पौष्टिक सब्जियां उगाई जा रही है। जिले के गौठानो में वर्मी कम्पोस्ट की 4161 टंकियां बन चुकी हैं। इन सभी वर्मी कम्पोस्ट से खाद निकालने के बाद दूसरे चरण का उत्पादन लेने की तैयारी शुरू हो गई है। अगली खेप के लिए टंकिया भरी जा चुकी है। डी-कंपोजर का इस्तेमाल कर टंकी भरने के बाद 45 सर 60 दिनों के अंदर खाद बनकर तैयार होगी। ये पूरा काम महिलाओं द्वारा किया जा रहा है । गौठानो में टंकी भरने से लेकर खाद की बिक्री का काम महिलाएं संभाल रही है। कृषि विभाग द्वारा आत्मा योजना के तहत पहले महिलाओ को केंचुआ खाद बनाने का निःशुल्क प्रशिक्षण दिया गया फिर धीरे-धीरे इन महिलाओं का आत्म विश्वास बढ़ा। किसान भाई भी अब गौठानों से खाद खरीद रहे हैं।
सेहत /शौर्यपथ /क्या आप जानते हैं कि सिर्फ पीठ के बल सोने मात्र से ही आपकी कौन सी 5 सेहत समस्याएं दूर हो सकती है? आइए, हम आपको बाताते हैं उन सेहत परेशानियों के बारे में जो सिर्फ पीठ के बल सोने से ठीक हो सकती है -
1 कमर दर्द से बचाव - पीठ के बल सोना कमर को आधार देता है, जिसके कारण कमर दर्द नहीं होता और अगर होता भी है तो उसमें काफी हद तक राहत मिलती है।
2 गर्दन के दर्द से राहत - चूंकि पीठ के बल लेटने पर आपकी गर्दन को भी सही तरीके से तकिये का सपोर्ट मिल पाता है, अत: गर्दन के दर्द में लाभ होता है। जबकि गलत तरीके से सोने पर गर्दन को सही सपोर्ट नहीं मिल पाता।
3 अम्लीय रिसाव में कमी - यह सोने की वह अवस्था है जिसमें आपके पेट की स्थिति सही होती है, जिसके कारण पेट में अम्लीय रिसाव नहीं होता या उसमें कमी आती है।
4 झुर्रिया कम होती हैं - जब आप पीठ के बल सोने के बजाए गलत तरीके से सोते हैं, तो आपका चेहरा भी उसके अनुरूप अवस्था में होता है, और उस पर दबाव एवं झुर्रियां आती हैं। खास तौर से लंबे समय तक ऐसा होने पर झुर्रिया बढ़ सकती है।
5 शरीर सुडौल रहता है -
जब आप लंबे समय तक अपने शरीर को बेढंग और गलत अवस्था में रखते हैं तो शरीर का बेडोल होना स्वभाविक है। इसका एक कारण यह भी है कि जब आप सोते हैं तब आपका शरीर विकास करता है।
शौर्यपथ / कई लोगों को पूरे दिन में अत्यधिक बार डकार आने की शिकायत होती है, जिस वजह से उन्हें अन्य लोगों के सामने शर्मिंदगी भी उठानी पड़ती है। अगर आपको भी अत्यधिक डकार आने की शिकायत रहती हो तो इसे हल्के में न लें। आइए, जानते हैं किन कारणों से बार-बार डकार आ सकती है - 1 कई बार आपके खान-पान का गलत तरीका भी डकार आने का कारण बनता है। तली-भुनी चीजें, कोल्ड्रिंक, फूलगोभी, बीन्स, ब्रोकोली आदि को खाने से पेट में गैस बनती है, जो डकार आने का कारण हो सकता है। इन चीजों को रात में न खाएं।
2 लंबे समय तक कब्ज की समस्या का बना रहना भी अत्यधिक डकार आने का एक प्रमुख कारण है। इस मामले में पहले आपको कब्ज से निपटने की जरूरत होगी।
3 बार-बार डकार आने का एक प्रमुख कारण है अपचन। जी हां, अगर आपके द्वारा ग्रहण किया हुआ भोजन पच नहीं पा रहा है तो यह समस्या होना आम बात है।
4 कई बार छोटे-छोटे कारण पेट में गैस पैदा करके इस तरह की समस्याओं को जन्म देते हैं, जैसे ग्लास से पानी पीने के बजाए ऊपर से पीना, खाना खाते समय बात करना, च्यूइंग गम आदि कारणों से पेट में हवा जाकर गैस पैदा करती है और यह समस्या होती है। इसे ऐरोफेस कहते हैं।
5 जब गैस की वजह से आपका पाचन तंत्र गड़बड़ा जाए तो एच पायलोरी नामक बैक्टीरिया के कारण पेप्टिक असर की समस्या पैदा होती है जो डकार आने के साथ-साथ पेट दर्द का भी कारण हो सकता है।
शौर्यपथ / हिन्दू धर्म के अनुसार हमारा ब्रह्मांड, धरती, जीव, जंतु, प्राणी और मनुष्य सभी का निर्माण आठ तत्वों से हुआ है। इन आठ तत्वों में से पांच तत्व को हम सभी जानते हैं। आओ जानते हैं पांच तत्व क्या है।
हिन्दू धर्म के अनुसार इस ब्रह्मांड की उत्पत्ति क्रम इस प्रकार है- अनंत-महत्-अंधकार-आकाश-वायु-अग्नि-जल-पृथ्वी। अनंत जिसे आत्मा कहते हैं। पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि, आकाश, मन, बुद्धि और अहंकार यह प्रकृति के आठ तत्व हैं। उक्त सभी की उत्पत्ति आत्मा या ब्रह्म की उपस्थिति के कारण है।
आकाश के पश्चात वायु, वायु के पश्चात अग्नि, अग्नि के पश्चात जल, जल के पश्चात पृथ्वी, पृथ्वी से औषधि, औषधियों से अन्न, अन्न से वीर्य, वीर्य से पुरुष अर्थात शरीर उत्पन्न होता है।- तैत्तिरीय उपनिषद
1. पृथ्वी तत्व : इसे जड़ जगत का हिस्सा कहते हैं। हमारी देह जो दिखाई देती है वह भी जड़ जगत का हिस्सा है और पृथ्वी भी। इसी से हमारा भौतिक शरीर बना है, लेकिन उसमें तब तक जान नहीं आ सकती जब तक की अन्य तत्व उसका हिस्सा न बने। जिन तत्वों, धातुओं और अधातुओं से पृथ्वी बनी है उन्हीं से यह हमारा शरीर भी बना है।
2. जल तत्व : जल से ही जड़ जगत की उत्पत्ति हुई है। हमारे शरीर में लगभग 70 प्रतिशत जल विद्यमान है उसी तरह जिस तरह की धरती पर जल विद्यमान है। जितने भी तरल तत्व जो शरीर और इस धरती में बह रहे हैं वो सब जल तत्व ही है। चाहे वो पानी हो, खून हो, वसा हो, शरीर में बनने वाले सभी तरह के रस और एंजाइम।
3. अग्नि अत्व : अग्नि से जल की उत्पत्ति मानी गई है। हमारे शरीर में अग्नि ऊर्जा के रूप में विद्यमान है। इस अग्नि के कारण ही हमारा शरीर चलायमान है। अग्नि तत्व ऊर्जा, ऊष्मा, शक्ति और ताप का प्रतीक है। हमारे शरीर में जितनी भी गर्माहट है वो सब अग्नि तत्व ही है। यही अग्नि तत्व भोजन को पचाकर शरीर को निरोगी रखता है। ये तत्व ही शरीर को बल और शक्ति वरदान करता है।
4. वायु तत्व : वायु के कारण ही अग्नि की उत्पत्ति मानी गई है। हमारे शरीर में वायु प्राणवायु के रूप में विद्यमान है। शरीर से वायु के बाहर निकल जाने से प्राण भी निकल जाते हैं। जितना भी प्राण है वो सब वायु तत्व है। धरती भी श्वांस ले रही है। वायु ही हमारी आयु भी है। जो हम सांस के रूप में हवा (ऑक्सीजन) लेते हैं, जिससे हमारा होना निश्चित है, जिससे हमारा जीवन है। वही वायु तत्व है।
5. आकाश तत्व : आकाश एक ऐसा तत्व है जिसमें पृथ्वी, जल, अग्नि और वायु विद्यमान है। यह आकाश ही हमारे भीतर आत्मा का वाहक है। इस तत्व को महसूस करने के लिए साधना की जरूरत होती है। ये आकाश तत्व अभौतिक रूप में मन है। जैसे आकाश अनन्त है वैसे ही मन की भी कोई सीमा नहीं है। जैसे आकाश में कभी बादल, कभी धूल और कभी बिल्कुल साफ होता है वैसे ही मन में भी कभी सुख, कभी दुख और कभी तो बिल्कुल शांत रहता है। ये मन आकाश तत्व रूप है जो शरीर मे विद्यमान है।
इन पंच तत्व से ऊपर एक तत्व है जो आत्मा (ॐ) है। जिसके होने से ही ये तत्व अपना काम करते हैं।
इन्ही पांच तत्वों को सामूहिक रूप से पंचतत्व कहा जाता है। इनमें से शरीर में एक भी न हो तो बाकी चारों भी नहीं रहते हैं। किसी एक का बाहर निकल जाने ही मृत्यु है। आत्मा को प्रकट जगत में होने के लिए इन्हीं पंच तत्वों की आवश्यकता होती है। जो मनुष्य इन पंच तत्वों के महत्व को समझकर इनका सम्मान और इनको पोषित करता है वह निरोगी रहकर दीर्घजीवी होता है।
धर्म संसार / शौर्यपथ / गीता उपदेश भले ही श्रीकृष्ण ने रणक्षेत्र में दिए हैं, परन्तु हम महिलाओं के जीवन में रोजमर्रा के काम और जिंदगी की गुजर-बसर किसी जंग से कम नहीं। ये उपदेश केवल ज्ञान अर्जित करने व भक्ति मात्र का साधन नहीं है, यह आत्मसात करके जीने की कला है। कथा सुनने-सुनाने, दान-पुण्य, ज्ञान बघारने का शस्त्र नहीं बल्कि जीवन के कठिनतम मार्ग को आसान करने का शस्त्र है। दीवार पर लटके गीता संबंधी श्लोक, उपदेश, फोटो मोक्ष नहीं देते।
नहीं उन्हें पठन-पाठन मात्र से गुन सकते हो। इन्हें आजमाने के आलावा कोई और रास्ता जिंदगी की राह आसान नहीं बनाता।
इसके लिए न तो आपको किसी आडम्बर की जरुरत है, न किसी विशिष्टता की। जरुरत है केवल खुद को जानने और खुद को खुश कैसे रखें ऐसी विधा की, जो सामान्य बुद्धि के साथ भी घरेलू जिंदगी को भी कारगर बनाने की अपार शक्ति रखती है, वो है गीता... ऐसी ही कुछ बातें आज हम जानते हैं जो हम महिलाओं के जीवन को सबल, शांत, आत्मविश्वासी और आनंददायक बनाती है।
उदारता- हमारा मूल स्वभाव है. जन्मजात, पैदाईशी हममें मातृत्व, दया, प्रेम, वात्सल्य होता है। उसे बरक़रार रखें। प्रकृति और पर्यावरण, जीव-जंतु सभी के लिए उदार दृष्टिकोण रखें। सामाजिक जीवन अपने आप मधुरता लिए हो जाएगा।
कला से प्रेम- मोरपंख, व बांसुरी धारण करना, संस्कृति व पर्यावरण के प्रति लगाव श्रीकृष्ण ने सिखाया, हम अपने आसपास हमेशा कलात्मक, शौकीन, सकारात्मक, खुश और हर पल जिन्दादिली से जीने व जीने देने वाले हमेशा कलाप्रेमी होते हैं।
आत्मभाव में रहना- नाम, पद, प्रतिष्ठा, संप्रदाय, धर्म, स्त्री या पुरुष हम नहीं हैं। ये सब समय के साथ बदलने वाली चीजें हैं। ये शरीर अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी, आकाश से बना है और इसी में मिल जाएगा। लेकिन आत्मा स्थिर है और हम आत्मा हैं। आत्मा कभी न मरती है, न इसका जन्म है और न मृत्यु! आत्मभाव में रहना ही मुक्ति है। इसलिए अमीर नहीं-अमर होने की दिशा में कार्य करते चलें।
नजरिए को शुद्ध करें- हमें अपने देखने के नजरिए को शुद्ध करना होगा और ज्ञान व कर्म तथा वास्तविकता को एक रूप में देखना होगा, जिससे हमारा नजरिया बदल जाएगा। सुनी सुनाई बातों के बजाय घटनाक्रम के सन्दर्भ की समझने की कोशिश कर बात को सुलझाने की कोशिश करें। कई छोटे-बड़े मसले पारिवारिक जीवन में आते हैं जिन्हें हमें ही निपटना होता है।
क्रोध पर काबू, मन को शांत रखें- अपने क्रोध पर काबू रखें। क्रोध से भ्रम पैदा होता है और भ्रम से बुद्धि विचलित होती है, हम चिड़चिड़ापन लिए घूमते हैं। ऐसे स्वभाव वालों को कोई पसंद नहीं करता। अकेलापन व भय बढ़ने लगता है तब ये हमारे आत्मविश्वास के दुश्मन बन जाते हैं। इसलिए अशांत मन को शांत करने के लिए अभ्यास और विश्वास को पक्का करते जाओ। यही गीता भी सिखाती है।
अपना काम स्वयं करें, पहले विचार करें-
हम जो भी कर्म करते हैं उसका फल हमें ही भोगना पड़ता है। इसलिए कर्म करने से पहले विचार कर लेना चाहिए। कोई और काम पूर्णता से करने से कहीं अच्छा है कि हम अपना ही काम करें। भले वह अपूर्ण क्यों न हो। दखलंदाजी की आदत आपको अपमान के लिए प्रेषित करती हैं।
कोई काम बड़ा-छोटा नहीं- सारथी बनना, युधिष्ठिर की ओर से दूत बन कर जाने से भी श्रीकृष्ण ने कभी गुरेज नहीं किया। नैतिक व सत्य, न्याय के लिए उन्होंने सभी कार्य किए। हमारे जीवन में भी ऐसे ही कई कम हैं जो हम अपनी दृष्टि से छोटा-बड़ा आंकते हैं जो हमें प्रगति मार्ग से भटकाते हैं।
समता का भाव व निर्बल का साथ- कोशिश करें सभी के प्रति समता का भाव हो। कठिन है पर असंभव नहीं। ये भाव हमें आंतरिक सुख देता है। श्रीकृष्ण की तरह हमेशा निर्बल, कमजोर परन्तु सत्यनिष्ठ व न्याय पर अटल का साथ दें। जैसे सुदामा, पांडवों का साथ श्रीकृष्ण ने दिया।
अहंकार रहित अन्याय का प्रतिकार- नारी हमेशा नारायणी है। श्रीकृष्ण नारायण के अवतार हैं। उन्हीं का अंश हम भी हैं। अपनी शक्ति को पहचान अन्याय का विरोध करना ही गीता हमें सिखाती है। श्रीकृष्ण ने जरुरत पड़ने पर अपना सुदर्शन चक्र भी उन्हीं हाथों की उंगली पर धारण किया शत्रु शमन,दमन किया जिनसे वे बांसुरी की मधुर व मृदुल स्वर लहरियां निकलने के लिए उपयोग करते रहे।
परिवर्तन संसार का नियम है- यहां सब बदलता रहता है. इसलिए सुख-दुःख, लाभ-हानि, जय-पराजय, मान-अपमान आदि में एक भाव में स्थित रहकर हम जीवन का आनंद ले सकते हैं। आज जो आपके साथ हैं वे कल अपने स्वार्थ के लिए पाला बदल लेंगें। रामायण में भी उल्लेखित है-‘स्वारथ लागि करहिं सब प्रीति इसलिए बनते-बिगड़ते पारिवारिक, सामाजिक संबंधों का विलाप न ही करें तो बढ़िया है।
वर्तमान का आनंद लो- बीते कल और आने वाले कल की चिंता अनावश्यक रूप से नहीं करनी चाहिए, क्योंकि जो होना है वही होगा। जो होता है, अच्छा ही होता है, इसलिए वर्तमान का आनंद लो। कोरोना जैसी कई महामारियां और प्राकृतिक विपदाएं हमें समय समय पर सबक सिखाने आतीं हैं। अहंकार को तोड़ सर्वशक्तिमान की ताकत का अहसास दिलाती हैं। अपने को भगवान के लिए अर्पित कर दो। फिर वो हमारी रक्षा करेगा और हम दुःख, भय, चिन्ता, शोक और बंधन से मुक्त हो जाएंगे।
गीता केवल हमारी धार्मिक आस्था का ग्रंथ मात्र नहीं है, ये दर्शन है कर्मों का, जीने की कला का। प्रकृति, कला, न्याय, धर्म, नैतिक आचरण, आत्म-सम्मान से जीने का पथ प्रदर्शन करती गीता हमारी सृष्टि का निर्माण करने में अपनी कोख के योगदान की महिमा,शक्ति, सम्मान की गाथा भी कहती है। आओ सीखें, जानें, आसान से इन उपायों को जो हमें ‘हम’ होने का ज्ञान कराती है। हमसे हमीं को मिलवाती है गीता...
दुर्ग / शौर्यपथ / 37 छ.ग. बटालियन एनसीसी दुर्ग के कमान अधिकारी कर्नल हेमंत दुबे के निर्देशानुसार व प्राचार्य डॉ आरके साहू के सतत प्रेरणा से ले० डॉ ० हरीश कुमार कश्यप के निर्देशन में कल्याण स्नातकोत्तर महाविद्यालय के एनसीसी कैडेटों द्वारा सामाजिक सेवा और सामुदायिक विकास हेतु विभिन्न गतिविधियां की जा रही है साथ ही जन जन के बीच स्वच्छता हेतु जागरूकता अभियान भी समय-समय पर कर रही है । जिससे समाज के सभी व्यक्ति स्वच्छता को अपने जीवन शैली में अपना सके और राष्ट्र निर्माण में अपना बहुमूल्य योगदान दे सकें । दिसंबर महीने में एसएससीडी एक्टीविटी के अंतर्गत आज एनसीसी छात्र सैनिकों ने सर्वप्रथम कोसानाला जाकर वहां पर गौतम बुद्ध की प्रतिमा की साफ सफाई की उसके पश्चात सेक्टर 6 भिलाई में सुभाष चंद्र बोस की व भीमराव अंबेडकर की तथा रेलवे क्रॉसिंग सुपेला के पास स्थित जयप्रकाश नारायण जी की प्रतिमा की साफ सफाई की गई साथ ही आसपास के परिसर की भी सफाई की गई और लोगों के बीच यह संदेश पहुंचाने का प्रयास किया गया कि अपने आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखें व स्वयं भी स्वच्छ व स्वस्थ रहें ।
समस्त कार्यक्रम का संचालन लेफ्टिनेंट डॉ हरीश कुमार कश्यप के द्वारा किया गया एवं प्रत्येक प्रतिमा की सफाई के पूर्व महान व्यक्तित्व के धनी व त्यागमूर्ति धर्मगुरु गौतम बुद्ध जी, आजादी के लिए अपनी जान न्यौछावर करने वाले महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सुभाष चंद्र बोस के बारे में , बहुमुखी प्रतिभा के धनी और भारत के संविधान के निर्माता डॉ० भीमराव आंबेडकर व सामाजिक जागरूकता व समानता फैलाने वाले जयप्रकाश नारायण जी जैसे महापुरुषों के बारे में व्यापक जानकारी दी गई । आज के इस एसएससीडी कार्यक्रम में मुख्य रूप से कैडेट गोविंद ,फणींद्र ,दुर्गेश, के० अजय राव, गगन साहू, कोमल, सोनू, राहुल, विशाल सहित 90 कैडेटों ने अपना अमूल्य योगदान दिया।
दुर्ग / शौर्यपथ / मौजूदा वैश्विक महामारी के बावजूद, इस साल भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भिलाई में कैंपस प्लेसमेंट ने नई ऊँचाइयों को प्राप्त किया है। इस साल कुल 150 छात्रों ने प्लेसमेंट के लिए पंजीकरण किया है। अब तक आईआईटी भिलाई के छात्रों ने अमेजॅन, कॉमवॉल्ट, पेटीएम, एयर एशिया, एबीबी, टीसीएस रिसर्च इनोवेशन, एलएंडटी, रिलायंस जियो और रेडिसिस जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों से 46 ऑफर प्राप्त किए हैं। वैश्विक महामारी कोविड-19 के चलते हुए, खराब अर्थव्यवस्था का इस साल नियुक्तियों पर बहुत ही कम प्रभाव रहा है। हायरिंग प्रक्रिया सुचारु रूप से ऑनलाइन मोड पर की गई, और पिछले वर्ष की अपेक्षा इस साल छात्रों की प्लेसमेंट पैकेज में वृद्धि हुई है। इस साल का उच्चतम पैकेज 31.97 लाख सालाना का है, जो की अमेजॅन ने दिया है ।
वीएमवेयर और नीडलए.आई जैसी बड़ी कंपनियों ने आईआईटी भिलाई के तीन छात्रों को 19.3 लाख के सालाना पैकेज पर प्री-प्लेसमेंट ऑफर भी दिया है। प्लेसमेंट कार्यालय के संकाय प्रभारी डॉ. धीमान साहा ने कहा कि इस साल भी हमने पहले सत्र में सकारात्मक रुझान देखा है। आईआईटी भिलाई के छात्रों ने प्रतिष्ठित कंपनियों से ऑफर हासिल करके अपनी सक्षमता साबित की है और संस्थान ने कठिन परिस्थियों के बावजूद अनुमान से बेहतर प्रदर्शन किया है। पिछले प्लेसमेंट सीजन में 135 कंपनियों ने पंजीकरण करवाया था और इन शीर्ष कंपनियों ने हमारे प्रतिभावान छात्रों को नियुक्त करने में काफी रुचि दिखाई थी। बीते वर्ष अग्रणी कंपनियों में 82 जॉब ऑफरस के साथ आईआईटी भिलाई के प्रथम बैच के छात्रों ने एक नई मिसाल कायम की थी। प्लेसमेंट कार्यालय इस सत्र के अंत तक शेष छात्रों को सफलतापूर्वक प्लेसमेंट दिलाने के लिए तत्पर है।
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए शुरू किये गये महत्वाकांक्षी योजना ’पढ़ई तुंहर दुआर’ के हमारे नायक कालम में गुरुवार 24 दिसम्बर से ब्लॉग लेखन राजभाषा छत्तीसगढ़ी में शुरू हो रहा हैं। छत्तीसगढ़ी भाषा में शिक्षक और विद्यार्थियों के ब्लॉग अपलोड किए गए हैं। ’पढ़ई तुंहर दुआर’ कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों को ऑनलाइन और ऑफलाइन अध्यापन विधियों के माध्यम से पढ़ाई की सुविधा मुहैया कराई जा रही है। यह कार्यक्रम निरन्तर अपनी सफलता की ओर अग्रसर है।
इसके गुरूवार 24 दिसम्बर से हमारे नायक कॉलम में छत्तीसगढ़ी भाषा में शिक्षक और विद्यार्थी दोनों के ब्लॉग अपलोड किए गए हैं, जिसमें शिक्षक संवर्ग से बेमेतरा जिले की शिक्षिका श्रीमती शीतल बैस, जिन्होंने दर्जनभर से अधिक कहानियों का अनुवाद स्टोरी वीवर की वेबसाइट में किया है तथा विद्यार्थी संवर्ग से विशेष आवश्यकता वाली विद्यार्थी रायपुर जिले की कुमारी मुस्कान शर्मा शामिल हैं। यह दोनों ब्लॉग छत्तीसगढ़ की राजभाषा छत्तीसगढ़ी में आज अपलोड हुए हैं, जिसे रायपुर जिले के ब्लॉग लेखक लोकेश कुमार वर्मा है। यह लोकेश कुमार वर्मा का 20 वां ब्लॉग है। हमारे नायक कॉलम के सफल संचालन में सराहनीय योगदान देने के लिए डॉ.एम. सुधीश, सहायक संचालक, समग्र शिक्षा छत्तीसगढ़ ने ब्लॉग लेखक टीम के नेतृत्वकर्ता गौतम शर्मा और उनकी पूरी टीम को शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।
छत्तीसगढ़ शासन स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला के द्वारा पढ़ई तुंहर दुआर के कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश के शिक्षकों और बच्चों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सीजीस्कूल पोर्टल पर हमारे नायक कॉलम को जोड़ा गया है, जिसमें प्रतिदिन एक शिक्षक और एक विद्यार्थी की कहानी अपडेट किया जाता है। हमारे नायक कॉलम में नायक का चयन प्रदेश के सभी जिलों से कुछ चुनिंदा शिक्षकों, विद्यार्थियों तथा शिक्षा सारथियों को उनके द्वारा किये गये उत्कृष्ट कार्यों की समीक्षा के आधार पर किया जाता है। अभी तक हमारे नायक कॉलम में विगत 8 महीनों में लगभग 400 नायक पोर्टल में स्थान प्राप्त कर चुके हैं।
हमारे नायक कॉलम में प्रत्येक माह नए-नए थीम के साथ कार्य प्रारंभ होता है। हमारे नायक कॉलम में प्रतिदिन चयनित नायकों की कहानी तैयार करने के लिए एक राज्य स्तरीय कुशल ब्लॉग राईटर्स टीम कार्य कर रही है, इस टीम का कुशल नेतृत्व डॉ. एम. सुधीश, सहायक संचालक, समग्र शिक्षा छत्तीसगढ़ के मार्गदर्शन में सूरजपुर जिले के शिक्षक गौतम शर्मा के द्वारा किया जा रहा है ।
अभी तक शिक्षक संवर्ग से ऑनलाइन कक्षा, लाउडस्पीकर कक्षा, पढ़ई तुंहर पारा तथा ऑगमेंटेड रियलिटी शिक्षण तकनीक तथा विद्यार्थी संवर्ग में सर्वाधिक ऑनलाइन कक्षा में सम्मिलित होने वाले विद्यार्थी, सर्वाधिक शंका पूछने वाले विद्यार्थी, पोर्टल पर सर्वाधिक शैक्षणिक सामग्री देखने वाले विद्यार्थी और मोहल्ला क्लास का सफल संचालन करने वाले शिक्षा सारथियों को हमारे नायक के रूप में चयन किया गया है। वर्तमान आठवें चरण में स्टोरीवीवर की वेबसाइट में सर्वाधिक कहानियां लिखकर अपडेट करना तथा वेबसाइट पर उपलब्ध कहानियों का छत्तीसगढ़ के विभिन्न लोक भाषाओं में अनुवाद करने वाले शिक्षकों तथा विशेष आवश्यकता वाले प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का चयन हमारे नायक के रूप में किया जा रहा है। वर्तमान में स्टोरीवीवर वेबसाइट पर राज्य भर के बहुत सारे शिक्षक बहुत सी स्वरचित कहानियों को लिखकर अथवा वेबसाइट पर उपलब्ध कहानियों को अनुवाद कर अपलोड कर चुके हैं।
हमारे नायक के आठवें चरण में हिन्दी, अंग्रेजी के साथ ही साथ छत्तीसगढ़ की अन्य स्थानीय भाषाओं में भी ब्लॉग लेखन का कार्य किया जा रहा है। जल्द ही संस्कृत भाषा के साथ छत्तीसगढ़ की स्थानीय भाषा गोंडी, सरगुजिया, कुरूख आदि भाषा में ब्लॉग लेखन किए जाने की योजना है, जो हिंदी अनुवाद के साथ हमारे कॉलम में अपलोड किया जायेगा। इस चरण से राज्य भर के विभिन्न भाषाओं में ब्लॉग पढ़ने का अवसर मिल सकेगा।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
