July 24, 2026
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    सेहत /शौर्यपथ /गुड़ का इस्तेमाल सर्दियों में सबसे ज्यादा किया जाता है। चीनी की जगह गुड़ का इस्तेमाल करने से खांसी-जुकाम से बचाव होने के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता में बढ़ोत्तरी होती है। सेहत के लिए गुड़ बहुत गुणकारी होता है। वहीं, क्या आप जानते हैं कि खाना खाने के बाद एक टुकड़ा गुड़ खाने से न सिर्फ आपका खाना आसानी से पच जाता है बल्कि इससे आपका वजन भी कंट्रोल में रहता है। ऐसा लम्बे समय तक करने से आपके पेट की चर्बी भी नहीं बढ़ती। आइए, जानते हैं गुड़ के फायदे-
    इन गुणों से भरा है गुड़
    गुड में विटामिन -A और विटामिन -B, सुक्रोज, ग्लूकोज, आयरन, कैल्शियम, फास्फोरस, पोटेशियम, जस्ता, मैग्नेशियम तत्व पाए जाते हैं। फास्फोरस की मात्रा अधिक रहती है। गुड़ में कई तरह के आवश्यक मिनरल्स और विटामिन होते है। जो त्वचा के लिए प्राकृतिक क्लींजर का काम करते है। ये शरीर को अंदर से साफ रखते है, जो त्वचा के ग्लो करने के लिए बहुत आवश्यक होता है शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में गुड़ सहायक होता है। गुनगुने पानी या फिर चाय में शक्कर की जगह गुड़ पीना चाहिए, इससे सेहत और सुंदरता दोनों बनी रहती हैं।
    कंट्रोल रहेगा ब्लड प्रेशर
    गुड़ ब्लरड प्रेशर को कंट्रोल करने का काम भी करता है। खासतौर पर हाई ब्लड प्रेशर से परेशान लोगों को रोजाना गुड़ खाने की सलाह दी जाती है।
    शरीर बनेगा मजबूत और एक्टिव
    गुड़ शरीर को मजबूत और एक्टिव बनाए रखता है। शरीरिक कमजोरी दूर करने के लिए दूध के साथ गुड़ का सेवन करने से ताकत आती है और शरीर ऊर्जावान बना रहता है। अगर आपको दूध नहीं पसंद है तो एक कप पानी में पांच ग्राम गुड़, थोड़ा सा नींबू का रस और काला नमक मिलाकर सेवन करने से आपको थकान महसूस नहीं होगी।
    आंखों के लिए फायदेमंद
    गुड़ का सेवन आंखों के लिए बहुत फायदेमंद है। गुड़ खाने से आंखों की कमजोरी दूर होती है। यही नहीं गुड़ आंखों की रोशनी बढ़ाए रखने में बहुत मददगार है।
    दिमाग के लिए गुणकारी
    गुड़ आपके मूड को अच्छान बनाने का काम भी करता है। यही नहीं अगर आपको माइग्रेन की श‍िकायत है तो रोजाना गुड़ खाने से बहुत फायदा होगा। नियमित रूप से गुड़ खाने से आपका दिमाग मजबूत बना रहेगा और याद्दाश्तम भी अच्छीे रहेगी।
    सर्दी-जुकाम में कारगर
    गुड़ सर्दी-जुकाम भगाने में काफी असरदार है। काली मिर्च और अदरक के साथ गुड़ खाने से सर्दी-जुकाम में आराम मिलत है। अगर किसी को खांसी की श‍िकायत है तो उसे चीनी के बजाए गुड़ खाना चाहिए। गुड़ को अदरक के साथ गर्म कर खाने से गले की खराश और जलन में राहत मिलती है।
    हड्डियां रहेंगी मजबूत
    गुड़ में भरपूर मात्रा में कैल्शिायम और फास्फो्रस पाया जाता है। यह दोनों तत्व् हड्डियों को मजबूती देने में बेहद मददगार हैं। गुड़ के साथ अदरक खाने से जोड़ों के दर्द से छुटकारा मिलता है।

    शौर्यपथ / वास्तु शास्त्र की तरह की फेंगशुई शास्त्र में धन और तरक्की संबंधी कई उपायों को बताया गया है। धन लाभ और तरक्की के लिए लोग कई तरह के उपाय करते हैं। फेंगशुई शास्त्र में ऊंट का शो-पीस लाइफ के मुश्किल समय को काटने में मदद करता है। फेंगशुई शास्त्र के अनुसार, अगर बिजनेस में लाभ नहीं हो रहा या कर्मचारी काम करने से जी चुराते हैं तो व्यापार में लाभ और प्रोड्क्टिविटी को बढ़ाने के लिए ऊंट को लगाना शुभ होता है।
    इसी तरह फेंगशुई के अनुसार, अगर व्यक्ति को करियर में लगातार असफलताओं का सामना करना पड़ रहा है या कड़ी मेहनत के बावजूद भी अपेक्षित रिजल्ट की प्राप्ति नहीं हो रही है। मान्यता है कि इस स्थिति में अपने स्टडीरूम या ऑफिस में ऊंट की मूर्ति को लगाने से शुभ लाभ मिलते हैं। कहा जाता है कि ऊंट की मूर्ति लगाने के बाद आप जो भी काम करते हैं, उनमें आपका फोकस बढ़ जाता है और करियर संबंधी दिक्कतें दूर हो जाती हैं।
    मान्यता है कि अगर घर में धन संबंधी दिक्कत है तो ऊंट के जोड़े को घर में लाकर रखने से धन का आगमन तेजी से होता है। कहते हैं कि ऐसा करने से धीरे-धीरे आर्थिक स्थिति सुधरने लगती है। घर में पॉजिटिव और खुशनुमा माहौल रखने के लिए एक, दो या कई ऊंट की तस्वीर या ऊंट के जोड़ों की मूर्ति को घर पर उत्तर-पश्चिम दिशा में लगाना चाहिए। कहते हैं कि ऐसा करने से घर के सदस्यों को मानसिक तौर पर शांति मिलती है।
    फेंगशुई के अनुसार, जीवन में आ रही मुश्किलों से बचने के लिए भी ऊंट की मूर्ति रखना शुभ माना जाता है। कहते हैं कि ऊंट की मूर्ति व्यक्ति की सहन-शक्ति बढ़ाती है। जिससे व्यक्ति सही निर्णय लेने में सफल होता है।

    धर्म संसार / शौर्यपथ / महात्मा विदुर महाभारत के प्रमुख पात्रों में से एक हैं। उनकी बुद्धिमत्ता और नीतियों को आज भी पूजा जाता है। महात्मा विदुर को दूरदर्शी और महान ज्ञाता माना जाता है। आज भी विदुर जी की नीतियों को अपना कर लोग जीवन में आगे बढ़ते हैं। महात्मा विदुर ने ऐसी 6 चीजों के बारे में बताया है, जिनके होने से व्यक्ति संसार के सभी सुखों को भोग पाता है। कहा जाता है कि यह 6 चीजें जिन व्यक्तियों के पास होती हैं, वह काफी भाग्यशाली होते हैं। जानिए व्यक्ति की उन चीजों के बारे में जिनसे चमकता है उसका भाग्य-
    1. विदुर नीति के अनुसार, जो स्त्री-पुरुष मीठा बोलते हैं। उनके पर मां सरस्वती और मां लक्ष्मी का आशीर्वाद बना रहता है। शास्त्रों के अनुसार, वाणी में मां सरस्वती का वास होता है। कहते हैं कि बुरा और कटु बोलने वाले लोगों का स्वभाव उनकी भाषा की तरह ही बुरा हो जाता है। विदुर जी के अनुसार, मधुर वाणी वाले व्यक्ति का भाग्य भी पूरा साथ देता है।
    2. विदुर जी कहते हैं कि हर माता-पिता की चाह होती है कि उसका पुत्र आज्ञाकारी हो। उसके कुल का नाम रोशन करे। विदुर नीति के अनुसार, अगर संतान आज्ञाकारी नहीं होती है तो वह कुल का नाश कर देती है। ऐसे में जिनकी संतान आज्ञाकारी होती है वह सुखी और भाग्यशाली होते हैं।
    3. विदुर जी कहते हैं कि रोगों से शरीर कमजोर पड़ जाता है। बीमार व्यक्ति की मानसिक और शारीरिक क्षमता नष्ट होने लगती है। वह कोई भी काम अच्छे से नहीं कर पाता है। बार-बार बीमार होने के कारण वह धन भी संचित नहीं कर पाता है। अगर व्यक्ति निरोगी होता है, तो वह भाग्यशाली माना जाता है।
    4. विदुर जी के अनुसार, मनुष्य के पास ज्ञान ही एक मात्र ऐसा धन है, जिसे कोई चोरी नहीं कर सकता है। शास्त्रों के अनुसार, ज्ञान ही इंसान ही सबसे बड़ी ताकत है। विदुर जी कहते हैं कि ज्ञान मुश्किल समय में व्यक्ति का हमेशा साथ निभाता है। वर्तमान समय में ज्ञान ही आय का सबसे बड़ा साधन है।
    5. विदुर जी के अनुसार, व्यक्ति को अपनी जरुरतों को पूरा करने के लिए आय के साधन को जुटाना पड़ता है। जिस व्यक्ति के पास आय के साधन नहीं होते हैं, उसे दुर्भाग्यशाली मानते हैं। धनहीन व्यक्ति को अपनी जरुरतों को पूरा करने के लिए दूसरों के सामने हाथ फैलाने पड़ते हैं। विदुर जी कहते हैं कि जिन लोगों के पास आय के साधन होते हैं, उन्हें खुद को भाग्यशाली मानना चाहिए।
    6. विदुर जी कहते हैं कि एक सफल इंसान के पीछे एक स्त्री का हाथ होता है। कहा जाता है कि एक स्त्री चाहे तो घर को स्वर्ग या नर्क में बदल सकती है। विदुर जी कहते हैं कि जिस व्यक्ति के पास अच्छे स्वभाव और अच्छे आचरण वाली स्त्री होती है, वह व्यक्ति वास्तव में भाग्यशाली होता है।

    भिलाई / शौर्यपथ / शिरोमणि पुरस्कार योजना के अंतर्गत पाली शिरोमणि एव कर्म शिरोमणि पुरस्कार का सम्मान समारोह का आयोजन रेल मिल विभाग के सभागार में किया गया। इस सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में रेल मिल एवं रोल टर्निंग शॉप के विभाग प्रमुख एम एम गद्रे, मुख्य महाप्रबंधक,(आरएसएम, आरटीएस एवं आरपीडीबी) उपस्थित थे। भिलाई इस्पात संयंत्र के शिरोमणि पुरस्कार योजना के तहत उत्कृष्ट एवं अनुकरणीय कार्य निष्पादन के लिए संयंत्र के रेल मिल एवं रोल टर्निंग शॉप के इन्दिवार अवस्थी,(प्रबंधक) तथा मंगेश कुमार,(सहायक प्रबंधक)को पाली शिरोमणि पुरस्कार एवं श्रीप्रवीण कुमार मेहता (मास्टर ओपेरटर-रोल टर्निंग), खेमलाल निषादराज (ओसीटी), ओम प्रकाश(ओसीटी), श्री अमोली राम देव्हारी(क्रेन ओपेरटर), रमेश कुमार द्विवेदी (मास्टर ओसीटी ),. चोवा राम (आपरेटिव सा), अलोक प्रसन्ना (अस्सिटेंट रोलर), मोहम्मद आफताब आलम (सीनियर ओसीटी), रंजित कुमार नायक (सीनियर कंट्रोलमैन), पुरुषोत्तम प्रसाद कश्यप, (तकनीशियन-विद्युत), जी आनंद राओ,(सीनियर ऑपरेटिव–फर्नेस), गुलशन कुमार केशव मरकम(एसीटी), प्रेमनाथ (सीनियर तकनीशियन-यांत्रिकी), नवीन चंद्र बोस(एसीटी), मोहम्मद आसिम (मेनिपुलेटर), अरुण कुमार सोनी(सीनियर ओसीटी), को कर्म शिरोमणि पुरस्कार हेतु चयन हुआ ।
    कर्म शिरोमणि पुरस्कार एवं पाली शिरोमणि का मुख्य उद्धेश्य अपने कार्यस्थल में नवीनता, बेहतर संसाधनों का उपयोग एवं संगठनात्मक उद्देश्यों को पूरा करने, सुरक्षा के मानक मापदण्डों के साथ विभाग में उल्लेखनीय प्रदर्शन करने वाले कर्मठ एवं सृजनशील कार्मिको को विशेष पहचान प्रदान कर सम्मानित करना है । समारोह में चयनित कार्मिको को एम एम गद्रे,मुख्य महाप्रबंधक,(आरएसएम, आर टीएस एवं आरपीडीबी) द्वारा स्मृती चिन्ह ,प्रशस्ति पत्र,उनके जीवनसाथी को प्रशंसा पत्र तथा एक मिठाई का कूपन देकर सम्मानित किया गया ।
    पुरस्कृत कार्मिको ने अपने उदगार व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह के पुरस्कार से उनका मनोबल बढ़ा है एवं उन्हें और बेहतर कार्य करने की प्रेरणा मिली है । कार्यक्रम का संचालन नरेन्द्र इंगले, वरि. प्रबंधक (कार्मिक) ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन सुश्री समायला अंसारी,सहायक प्रबंधक (कार्मिक) ने किया ।

    भिलाई / शौर्यपथ / भिलाई इस्पात संयंत्र ने कोरोना संकटकाल में भी अपनी सृजनशीलता को नई उड़ान देने में कामयाबी हासिल की है। क्वालिटी कंसेप्ट्स के नेशनल कन्वेंशन प्रतियोगिता में पार-एक्सीलेंस एवार्ड जीतने का एक नया रिकार्ड कायम किया है। क्वालिटी सर्कल फोरम आफ इंडिया (क्यूसीएफआई) द्वारा आयोजित नेशनल क्वालिटी कंसेप्ट्स कन्वेंशन-2020 (एनसीक्यूसी-2020) के प्रतियोगिता परिणाम घोषित किए गए। इस प्रतियोगिता में बीएसपी की 61 टीमों ने भाग लिया, जो अब तक का सर्वश्रेष्ठ रिकार्ड है। संकटकाल में भी सभी 61 टीमों ने पुरस्कार जीत कर राष्ट्रीय स्तर पर भिलाई के सृजन का झंडा बुलंद किया। व्यावसायिक उत्कृष्टता विभाग द्वारा दिए गए मार्गदर्शन व प्रशिक्षण ने इस रिकार्ड तोड़ परफार्मेंस में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बीई विभाग के विभागाध्यक्ष व महाप्रबंधक मनोज दुबे के नेतृत्व में सहायक महाप्रबंधक प्रकाश कुमार साहू, उप प्रबंधक रवि कुमार तथा सुनील कुमार देशमुख ने योगदान दिया। बीएसपी की कुल 61 टीमों ने अपने-अपने विभाग के लिए किए गए माडिफिकेशन, क्रियान्वयन और कार्यों के बेहतर पद्घति विकास में किए गए सृजनशील कार्यों को लिखित रूप में प्रस्तुत किया। जिसमें से 36 टीमों के रचनात्मक कार्यों को पार एक्सीलेंस एवार्ड से नवाजा गया। यह अब तक का सर्वाधिक पार एक्सीलेंस एवार्ड जीतने का एक नया रिकार्ड है।
    36 पार-एक्सीलेंस एवार्ड जीतकर बनाया एक नया रिकार्ड
    टाउनशिप में निगम क्षेत्र का कचरा डंप, अब बीएसपी प्रबंधन करेगा ऐसी कार्रवाई
    इस प्रतियोगिता में 61 टीमों ने अपने-अपने विभागों में किए गए सृजनशील कार्यों पर केस स्टडी लिखकर जमा किया। इन केस स्टडीज का मूल्यांकन विशेषज्ञ जजों के माध्यम से कराया गया। कोरोना महामारी को देखते हुए इस वर्ष क्यूसीएफआई ने प्रत्यक्ष प्रस्तुतियां पर रोक लगा दी थी। अत: इस वर्ष लिखित प्रस्तुत केस स्टडी का मूल्यांकन और नालेज टेस्ट कर सीधे परिणाम की घोषणा की गई। बीएसपी की टीमों ने अपना परचम लहराते हुए 36 टीमों ने पार-एक्सीलेंस एवार्ड और 21 टीमों ने एक्सीलेंस एवार्ड, चार टीमों ने डिस्टिंग्विश एवार्ड प्राप्त कर भिलाई का नाम रोशन किया है।

    खाना खजाना /शौर्यपथ /आज हम आपके लिए छुहारा हलवा बनाने की रेसिपी लेकर आए हैं। ठंड के दिनों में यह हलवा खास फायदेमंद होता है। छुहारा में आयरन भी काफी मात्रा में होता है, जिससे यह खून की कमी से जूझ रहे लोगों के लिए भी अच्छा माना जाता है। यह बहुत स्‍वादिष्‍ट होता है।
    छुहारा– 200 ग्राम (दूध में 6 घंटे भीगे हुए),
    दूध– 1/2 लीटर,
    शक्कर– 100 ग्राम,
    देशी घी– 04 बड़े चम्मच,
    नारियल– 02 बड़े चम्मच (कद्दूकस किया हुआ),
    बादाम– 10-12 नग,
    काजू– 10-12 नग,
    किशमिश– 10-12 नग,
    इलायची पाउडर– 01 छोटा चम्मच।
    विधि :
    छुहारा का हलवा बनाने के लिए सबसे पहले बादाम और काजू को कतर लें। किशमिश के डंठल निकाल दें। साथ ही चाकू की मदद से छुहारे के बीज निकाल दें। छुहारे के गूदे को मिक्सी में डालें और हल्का दरदरा (ज्यादा महीन नहीं) पीस लें।
    अब एक फ्राई पैन में घी डाल कर उसे गर्म करें। घी गर्म होने पर आंच मीडियम कर दें और पैन में छुहारे का पेस्ट डाल कर उसे पन्द्रह-बीस मिनट तक भून लें। जब छुहारे का पेस्ट सुनहरा होने लगे, उसमें शक्कर और दूध डाल दें और धीमी आंच पर चलाते हुए पकाएं।
    जब दूध पूरी तरह से सूख जाए और उसमें से घी अलग होने लगे, तो उसमें बादाम, काजू, किशमिश और इलायची पाउडर डाल दें और दो मिनट तक पकाने के बाद ढक दें।
    आपका छुहारा का हलवा तैयार है। इसे ठंडा करके इस्‍तेमाल करें। वैसे अगर आप चाहें, तो इसे फ्रिज में रख कर 10 दिनों तक इस्तेमाल कर सकते हैं।

    धर्म संसार /शौर्यपथ /पौष मास में कृष्ण पक्ष एकादशी को सफला एकादशी कहा जाता है। श्री हरि भगवान विष्णु को समर्पित इस पावन व्रत को लेकर मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। यह एकादशी कल्याण करने वाली है। यह व्रत अति मंगलकारी और पुण्यदायी है। एकादशी के दिन श्री हरि भगवान विष्‍णु की उपासना और व्रत रखने से घर-परिवार में सुख-शांति आती है।
    सफला एकादशी के दिन सूर्यदेव को अर्घ्य दें। भगवान श्री हरि विष्णु की विधि-विधान से पूजा करें। फूल, फल, गंगाजल, पंचामृत व धूप-दीप से भगवान श्री हरि विष्णु की आरती करें। भगवान श्रीहरि की पूजा के समय सफेद चंदन का टीका माथे पर लगाएं। ऊं नमो भगवते वासुदेवाय का जाप करें। भगवान श्रीहरि विष्णु को इस दिन रेशम का पीला धागा या वस्त्र अर्पित करें। इससे सफलता के मार्ग खुल जाते हैं। पूजा के बाद इस धागे को अपने दाहिने हाथ में बांधें। इस व्रत में दीपदान व रात्रि जागरण का विशेष महत्त्व है। इस व्रत से सभी कार्यों में सफलता मिलती है, इसलिए इसका नाम सफला एकादशी है। सफला एकादशी व्रत में भगवान विष्णु के साथ मां एकादशी की पूजा का भी विधान है। मान्यता है कि जो मनुष्य सफला एकादशी का व्रत विधि-विधान से करता है, उसे समस्त तीर्थों का फल प्राप्त होता है। मोहमाया के प्रभाव से मुक्ति मिलती है। छल-कपट की भावना दूर हो जाती है। इस व्रत में जरूरतमंदों को दान करें। शाम को दीप दान अवश्य करें। रात में भगवान का संकीर्तन करते हुए जागरण करें।

    धर्म संसार /शौर्यपथ /साल 2021 में कुल चार ग्रहण लगेंगे। जिसमें से दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण होंगे। इस साल का पहला चंद्र ग्रहण 26 मई को लगेगा। यह पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा। भारत में इस चंद्र ग्रहण को उपछाया ग्रहण के तौर पर देखा जा सकेगा। साल का पहला चंद्र ग्रहण भारत में दिखेगा लेकिन इसे देश के कुछ हिस्सों में नहीं देखा जा सकेगा।
    साल का दूसरा चंद्र ग्रहण 19 नवंबर को लगेगा। यह आंशिक चंद्र ग्रहण होगा। इसे भारत, अमेरिका, उत्तरी यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और प्रशांत महासागर में देखा जा सकेगा। साल का दूसरा चंद्र ग्रहण भारत मे अरुणाचल और असम के कुछ हिस्सों में चंद्रोदय के समय नजर आएगा। ज्योतिष शास्त्र में चंद्र ग्रहण को एक अशुभ घटना माना जाता है। ग्रहण के दौरान लोग कई तरह की सावधानियां बरतते हैं। जानिए चंद्र ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या नहीं-
    ग्रहण काल में क्या नहीं करना चाहिए-
    1. मान्यता है कि ग्रहण के दौरान तेल लगाना, जल पीना, बाल बनाना, कपड़े धोना और ताला खोलने जैसे कार्य नहीं करने चाहिए।
    2. कहा जाता है कि ग्रहण काल में भोजन करने वाले मनुष्य जितने अन्न के दाने खाता है, उसे उतने सालों तक नरक में वास करना पड़ता है।
    3. मान्यता है कि ग्रहण काल में सोने से व्यक्ति रोगी होता है।
    4. चंद्र ग्रहण में तीन प्रहर का भोजन करना वर्जित माना जाता है।
    5. ग्रहण के दिन पत्ते, तिनके, लकड़ी और फूल आदि नहीं तोड़ने चाहिए।
    6. ग्रहण काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए।
    चंद्र ग्रहण के दौरान क्या करें-
    1. ग्रहण शुरू होने से पहले खुद को शुद्ध कर लें। ग्रहण शुरू होने से पहले स्नान आदि कर लेना शुभ माना जाता है।
    2. ग्रहण काल में अपने इष्ट देव या देवी की पूजा अर्चना करना शुभ होता है।
    3. चंद्र ग्रहण में दान करना बेहद शुभ माना जाता है। ग्रहण समाप्त होने के बाद घर में गंगा जल का छिड़काव करना चाहिए।
    4. ग्रहण खत्म होने के बाद एक बार फिर स्नान करना चाहिए। कहते हैं कि ऐसा शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
    5. ग्रहण काल के दौरान खाने-पीने की चीजों में तुलसी का पत्ता डालना चाहिए।

    सेहत /शौर्यपथ / आयुर्वेद में कुछ ऐसी चीजें बताई गई हैं जिनके नियमित सेवन से न सिर्फ विभिन्न रोगों से मुक्ति मिलती है बल्कि इससे त्वचा भी युवा बनी रहती है। इन आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों में से एक है आंवला। विटामिन-सी से भरपूर आंवला, हर मौसम में लाभदायक होता है। यह आंखों, बालों और त्वचा के लिए तो फायदेमंद है ही, साथ ही इसके और भी कई फायदे हैं, जो आपके शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं। अक्सर आंवला खासकर आंवला जूस के सेवन को लेकर कई लोग दुविधा में रहते हैं कि इसका सेवन कब करना चाहिए।
    कब और कितनी मात्रा में पीना चाहिए आंवला जूस
    सुबह खाली पेट आंवला जूस केवल 10 मिलीग्राम ही लें।बढ़ाकर 20 मिलीग्राम कर सकते हैं।इससे ज्यादा आंवला जूस का सेवन सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है।अलग-अलग समय पर इसे दो बार में भी ले सकते हैं।
    आंवला और इसका जूस पीने के फायदे-
    -आंखों के लिए आंवला अमृत समान है, यह आंखों की रोशनी को बढ़ाने में सहायक होता है। इसके लिए रोजाना एक चम्मच आंवला के पाउडर को शहद के साथ लेने से लाभ मिलता है और मोतियाबिंद की समस्या भी खत्म हो जाती है।
    -बुखार से छुटकारा पाने के लिए आंवले के रस में छौंक लगाकर इसका सेवन करना चाहिए, इसके अलावा दांतों में दर्द और कैविटी होने पर आंवले के रस में थोड़ा सा कपूर मिला कर मसूड़ों पर लगाने से आराम मिलता है।
    -शरीर में गर्मी बढ़ जाने पर आंवल सबसे बेहतर उपाय है। आंवले के रस का सेवन या आंवले को किसी भी रूप में खाने पर यह ठंडक प्रदान करता है। हिचकी तथा -उल्टी होने की पर आंवले के रस को मिश्री के साथ दिन में दो-तीन बार सेवन करने से काफी राहत मिलेगी।
    -चेहरे के दाग-धब्बे हटाकर उसे खूबसूरत बनाने के लिए भी आंवला आपके लिए उपयोगी होता है। इसका पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाने से त्वचा साफ, चमकदार होती है और झुर्रियां भी कम हो जाती हैं।
    इन चीजों के साथ सेवन करने के फायदे
    -आवंला कूटकर पेस्ट के रूप में तैयार कर लें।दो चम्मच आंवला का गूदा और दो चम्मच शहद मिलाकर सुबह-शाम लें। जुकाम नहीं होगा, अगर है तो वह ठीक हो जाएगा।
    -6-7 दिन तक खाली पेट एक चम्मच केवल आंवला जूस पिएं। इससे पेट के कीड़े मरेंगे।पेट साफ होगा।
    -डायबिटीज़ की समस्या से जूझ रहे लोग भी आंवला जूस का सेवन कर सकते हैं।आंवला ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में कारगर है।
    -पेशाब में जलन हो तो खाली पेट आंवला और शहद मिलाकर पिएं। राहत मिलेगी।
    -खांसी के लिए भी आंवला काफी फायदेमंद है।आंवले का मुरब्बा दूध के साथ लें। खांसी में आराम मिलेगा।
    -सफेद बालों को काला करने में आंवला कारगर है। नारियल के तेल में दो से तीन साबुत आंवला रात में भिगोकर रखें। सुबह में इस तेल की मालिश करें।बाल काले हो जाएंगे और मजबूत भी होंगे।

    सेहत /शौर्यपथ / आमतौर पर मूली के पत्तों को कई लोग फेंक देते हैं लेकिन आपको बता दें कि मूली के पत्तों में मूली से भी ज्यादा पोषण होता है। ऐसे में आपको मूली के पत्ते खाने के फायदे जान लेने चाहिए, जिससे कि आप मूली की तरह ही इसके पत्तों का सेवन कर सकें।
    मूली के पत्तों में पोषक तत्व
    मूली के पत्ते विटामिन ए, विटामिन बी, सी के साथ ही क्लोरीन, फास्फोरस, सोडियम, आयरन, मैग्नीशियम और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं और पेट के लिए फायदेमंद होने के साथ ही मूत्र विकारों में भी बेहद लाभकारी होते हैं।
    फायदे
    -मूली के पत्ते विटामिन ए, विटामिन बी, सी के साथ ही क्लोरीन, फास्फोरस, सोडियम, आयरन, मैग्नीशियम और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं जो आपके पेट के लिए काफी फायदेमंद होते हैं।
    -मूली के पत्तों का प्रयोग आप सब्जी या पराठे बनाने में कर सकते हैं। इसका सेवन करने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में इजाफा होता है और थकान महसूस नहीं होती।
    -पाइल्स यानि बवासीर के रोगियों के लिए मूली एवं इसके पत्तों की सब्जी खाना बेहद फायदेमंद होता है। रोजाना इसके प्रयोग से आपकी समस्या समाप्त हो सकती है।
    -इसमें सोडियम होता है और यह शरीर में नमक की कमी को पूरा करता है, इसलिए लो ब्लडप्रेशर के मरीजों के लिए भी यह बेहद फायदेमंद है। इसके अलावा इसमें मौजूद एंथेकाइनिन दिल के लिए फायदेमंद होता है।
    -इसमें फाइबर भरपूर होता है इसलिए यह कब्ज से राहत देता है। वहीं इसके रस को पानी और मिश्री के साथ पीने पर पीलिया रोग में लाभ मिलता है। इतना ही नहीं यह बालों का झड़ना भी कम करता है।

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