July 24, 2026
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    खाना खजाना / शौर्यपथ /सर्दियों में अक्सर शाम को कुछ चटपटा खाने का मन करता है। ऐसे में मन में यह सवाल उठना लाजमी है कि ऐसा क्या खाया जाए जो हेल्दी होने के साथ-साथ स्वादिष्ट भी हो। तो आपके ऐसे ही एक सवाल का जवाब है मटर की कचौड़ी। यह रेसिपी खाने में जितनी टेस्टी है बनने में उतनी ही आसान भी है। तो आइए जान लेते हैं कैसे बनाई जाती है ये टेस्टी रेसिपी।
    मटर की कचौड़ी बनाने के लिए सामग्री-
    2 कप गेहूं का आटा या मैदा, 2 टीस्पून तेल, नमक स्वादानुसार, 1 कप हरी मटर, 2 टीस्पून तेल पिट्ठी भूनने के लिए, चुटकी भर हींग, 1/2 टीस्पून जीरा, 1 टीस्पून धनिया पाउडर , 1/2 टीस्पून सौंफ पाउडर, 1/2 टीस्पून लाल मिर्च पाउडर, 1 टीस्पून गरम मसाला, 1/4 टीस्पून अमचूर पाउडर, हरी मिर्च बारीक कटी हुई, 1 इंच अदरक, नमक स्वादानुसार, तेल तलने के लिए
    मटर की कचौड़ी बनाने की विधि-
    गूंथे हुए आटे को सेट होने के लिए 20 मिनट के लिए एक तरफ रख दें। पिट्ठी तैयार करने के लिए मटर के दानों को ग्राइंडर में दरदरा पीस लें। पैन में तेल डालकर गर्म करें। फिर उसमें हींग और जीरा डालें।
    जीरा ब्राउन होने के बाद धनिया पाउडर, सौंफ, हरी मिर्च, अदरक डालकर हलका सा भूनें और मटर का पेस्ट डालें। फिर लाल मिर्च, गर्म मसाला, अमचूर, हरा धनिया और नमक डालकर मटर को 3-4 मिनट तक भूनें। अब पिट्ठी तैयार है।
    नींबू के आकार का आटा लेकर लोई बनाएं। उसे हथेली पर रखकर थोड़ा दबाकर बीच में एक छोटी चम्मच पिट्ठी भरकर गोल करें। अब भरी हुई लोई को हथेली से दबाकर उसका आकार थोड़ा सा बढ़ा लें, इससे लोई में मटर की पिट्ठी एकसार हो जाती है। भरी हुई लोई को बेलन से बेल लें। इसी तरह बाकी कचौरियां भी तैयार कर लें। बेली हुई कचौरी को एक-एक करके गर्म तेल में डालें और पलट कर दोनों ओर से सेंकें।
    तली हुई कचौरियां किसी प्लेट पर पेपर नैपकिन बिछाकर निकाल लें। इसी तरह सारी कचौरियां तल लें। अब कचौरियों को हरे धनिये की चटनी के साथ गर्मागर्म सर्व करें।

    सेहत /शौर्यपथ / नारियल हमारे लिए प्रकृति का उपहार है। नारियल हमारी त्वचा के लिए बहुत उपयोगी है लेकिन हम उसके गुणों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। हम यहां आपको बता रहे हैं कि आप नारियल तेल से किस प्रकार सुन्दरता पा सकते हैं।
    * प्राइमर के रूप में प्रयोग करें - जब आप बाहर जाने के लिए तैयार हों तब आप फाउंडेशन लगाने से पहले नारियल तेल को प्राइमर के तौर पर लगाएं। इसकी सिर्फ कुछ बूंदें अपने चेहरे पर थपका कर पूरे चेहरे पर फैला लें। यह फाउंडेशन के लिए बेस का काम करेगा और साथ ही चेहरे को मॉइश्चराइजर भी प्रदान करेगा। आप इसे चिक बोन पर थोड़ा ज्यादा लगा सकतीं हैं जिससे यह हाईलाइट हो जाए।
    * बालों के लिए है संजीवनी बूटी- नियमित रूप से नारियल तेल का प्रयोग बालों की खूबसूरती को बढ़ाता है। उन्हें अल्ट्रावॉयलेट किरणों से बचाता है और उन्हें नरम और सिल्की बनाता है। डस्ट, प्रदूषित वातावरण से बचाता है। आपके बालों को प्रोटीन देता है और उन्हें मजबूत, चमकदार और स्वस्थ बनाता है। यह आपके बालों से दो मुंहे बालों वाली समस्या को पूरी तरह समाप्त करने का अद्भुत काम कर सकता है।
    * आपकी त्वचा के लिए-यदि आप अपनी त्वचा से प्यार करते हैं तो नारियल तेल आपके लिए कुंजी है। यह आपकी त्वचा को हाइड्रेटेड रखता है और प्रदूषण से बचाता है। बदलते मौसम में त्वचा की रक्षा करता रहता है। यह एक प्राकृतिक मॉइस्चराइज़र है। नारियल तेल का त्वचा को डिटॉक्सीफाय करता है, इसलिए नहाने के बाद नियमित रूप से त्वचा पर नारियल तेल लगाएं।
    * बॉडी स्क्रब बनाएं- नारियल तेल में शक्कर मिलाएं और पूरे शरीर पर धीरे-धीरे रगड़ें और धो लें। आप पाएंगे अपनी त्वचा पर जादुई चमक।
    * मेकअप रिमूवर के रूप में- नारियल तेल सबसे अच्छा क्लिंज़र माना जाता है। मेक अप उतारने के लिए एक कॉटन पैड पर तेल लें और मेकअप रिमूव करें। यह मेकअप तो हटाएगा ही साथ ही त्वचा के भीतर से गंदगी और बैक्टीरिया भी हटाएगा।

    सेहत /शौर्यपथ सर्दियों का इंतजार अधिकतर लोगों को होता है। जितना इंतजार सर्दियों के मौसम का होता है, उतना शायद ही किसी और मौसम का होता होगा। और वैसे भी कहते हैं कि हम सर्दी के मौसम में खुद की जितनी देखभाल करेंगे, उसका उतना ही फायदा हमें गर्मी के मौसम में मिलेगा।
    चाहें बात करें सर्दियों में डाइट की या हमारी त्वचा की देखभाल की, इस समय हम जितना खुद पर ध्यान देंगे, यह उतना ही अच्छा माना जाता है। वहीं इस समय ठंडी हवाओं से भी खुद की देखभाल जरूरी होती है।
    अधिकतर लोगों में सर्दियों के मौसम में चेहरे व बॉडी में ड्राईनेस जैसी समस्या देखी जाती है। उसका एक कारण सर्द हवाएं भी होती हैं, क्योंकि सर्द हवाएं हमारे चेहरे से नमी छीन लेती हैं। इसी कारण ड्राईनेस जैसी समस्याएं सर्दियों में आम हो जाती हैं।
    आखिर कैसे हम सर्दियों के मौसम में रख सकते हैं खुद का ख्याल? किन बातों का रखना चाहिए विशेषतौर पर ध्यान? आइए जानते हैं इस लेख में।
    अधिकतर हम देखते हैं कि सर्दियों के मौसम में लोग बहुत गर्म पानी से नहाना पसंद करते हैं लेकिन वे यह बात नहीं जानते कि ज्यादा गर्म पानी का इस्तेमाल करने से हमारी स्कीन में ड्राईनेस आ जाती है और प्राकृतिक नमी खत्म हो जाती है। बहुत गर्म पानी हमारे शरीर के लिए नुकसानदायक होता है और यह हमारे शरीर से नमी को छीन लेता है। इसलिए जितना हो सके, ज्यादा गर्म पानी से नहाने से बचें।
    जब भी आप नहाने जाएं तो अपने पूरे शरीर पर सरसों या जैतून के तेल से अच्छी तरह मालिश करें और उसके बाद ही नहाने जाएं। यह आपके शरीर में नमी बनाए रखेगा और रूखेपन से निजात दिलाएगा।
    नहाने के बाद आप ग्लीसरीन का इस्तेमाल कर सकती हैं। नहाने के तुरंत बाद हल्के गीले शरीर में थोड़ा-सा ग्लीसरीन लें और पूरे शरीर पर लगा लें। इससे त्वचा में दिनभर सॉफ्टनेस बनी रहेगी।
    आप उबटन का इस्तेमाल कर सकती हैं। उबटन के लिए बेसन, मलाई, दूध व शहद को आपस में मिला लें और नहाने से पहले पूरे शरीर पर लगाकर नहा लें। यह आपके शरीर को तरो-ताजा रखेगा और ड्राईनेस को भी दूर कर देगा।
    शहद और मलाई इन दोनों को समान मात्रा में मिलाकर आप अपने चेहरे पर इस्तेमाल कर सकती हैं। यह आपके चेहरे में कोमलता लाएगा, साथ ही ग्लो के लिए भी यह अच्छा फेस पैक है।
    ठंड के मौसम में हम बहुत कम पानी पीते हैं जिसके कारण डिहाइड्रेशन की समस्या हो जाती है। इसलिए ठंड में भी वॉटर इंटेक का पूरा ध्यान रखें।
    फ्रूट्स आपकी सेहत के लिए बहुत जरूरी होते हैं। यह आपको एनर्जी तो देते ही हैं, साथ ही मौसमी फलों का सेवन करना भी जरूरी हो जाता है। इसलिए मौसम जो भी हो, आप मौसमी फल का सेवन जरूर करें।
    रोज रात में सोने से पहले आप नाइट क्रीम का इस्तेमाल जरूर करें। यह आपकी स्कीन को हेल्दी रखने में मदद करेगी।
    ग्लिसरीन व नींबू दोनों को समान मात्रा में मिलाकर रात को सोने से पहले लगाएं। यह एक नेचुरल मॉइस्चराइजर का काम करता है।

    सेहत /शौर्यपथ /कोरोनावायरस के बीच बर्ड फ्लू की खबर ने लोगों के मन में डर पैदा कर दिया है। ऐसे में जरूरी है कि हमें इस बारे में पूरी जानकारी रहें ताकि जागरूक और समझदारी के साथ हम अपने कदम आगे बढ़ा सके तो आइए जानते हैं क्या है बर्ड फ्लू और इसके लक्षण.....
    बर्ड फ्लू क्या है

    बर्ड फ्लू यह एक ऐसा वायरस है जो
    एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस कि वजह से होता है। इस वायरस से खतरा पक्षियों और इंसानों दोनों को ही माना जाता है। ये वायरस एक पक्षी से दूसरे पक्षी में फैलता है। बर्ड फ्लू से संक्रमित पक्षियों के संपर्क में यदि जानवर भी आता है या फिर
    इंसान भी आए तो
    ये वायरस उनको अपनी चपेट में ले सकता है।

    क्या हैं बर्ड फ्लू के लक्षण-
    बर्ड फ्लू के लक्षणों की बात करें तो बर्ड फ्लू होने पर कफ, बुखार, सांस की परेशानी, गले में खराश, मांसपेशियों में दर्द,
    बैचेनी जैसी परेशानी हो सकती है। इसलिए सतर्कता और समझदारी
    के साथ आगे बढ़ना जरूरी है। किसी भी तरह की कोई परेशानी होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।

    सावधानी जरूरी हैं-
    ये वायरस सबसे तेजी से मुर्गियों में फैलता है। अगर संक्रमित पक्षी मृत हो और इसका सेवन किया जाएं तो ये इंसानों के शरीर में पहुंच सकता है और उन्हें संक्रमित कर सकता है। ये वायरस संक्रमित पक्षी के मल, लार में लगभग 10 दिनों तक जिंदा रह सकता है। ऐसे लोग जो मुर्गीपालन के कार्यो से जुड़ें है उन्हें वायरस के संपर्क में आने का खतरा ज्यादा होता है। इसके अलावा अगर संक्रमित पक्षियों के संपर्क में आते है या कच्चा या अच्छी तरह से पका हुआ चिकन, अंडा खाते है तो भी इस वायरस की चपेट में आने का खतरा बना रहता है।

    धर्म संसार / शौर्यपथ / हिन्दू पंचांग अनुसार किसी भी कार्य को प्रारंभ करने के लिए तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण को देखना जरूरी है। इसी से शुभ लग्न और मुहूर्त पता चलता है। वार, तिथि, माह, लग्न और मुहूर्त का एक संपूर्ण विज्ञान है। जो लोग इस हिन्दू विज्ञान अनुसार अपनी जीवनशैली ढाल लेते हैं वे सभी संकटों से बचे रहते हैं, तो आइये जानते हैं कि बुधवार का क्या महत्व है और क्या है इसके संबंध में 10 रोचक बातें।
    1. सूर्य के सबसे निकटतम ग्रह है बुध। इसी के कारण एक वार का नाम बुधवार। बुध का व्यास लगभग 5140 किलोमीटर है और गुरुत्वाकर्षण शक्ति पृथ्वी की अपेक्षा एक चौथाई है। सौर मंडल का सबसे छोटा और प्रकाशमान बुध ग्रह सूर्य से लगभग 59200000 किलोमीटर दूर है। 48 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से यह 28 दिनों में सूर्य की परिक्रमा कर लेता है। इसे अपनी धुरी पर एक चक्कर लगाने में 60 दिन लगते हैं।
    बुधवार को क्या करें और क्या नहीं, जानिए
    2. बुधवार की प्रकृति चर और सौम्य मानी गई है। चर का अर्थ चलायमान होता है, जो स्थिर नहीं है। कन्या और मिथुन राशियां बुध की राशियां हैं। हालांकि ये दोनों राशियां चर राशि के अंतर्गत नहीं आती हैं। बुधवार और शुक्रवार के दिन आने वाले पुष्य नक्षत्र में कोई कार्य नहीं करते हैं।
    3. ज्योतिष अनुसार यह भगवान गणेश और लाल किताब अनुसार माता दुर्गा का दिन है। परंतु इसके देवता बुध हैं जो चंद्रमा के पुत्र हैं। बुध चंद्रमा के पुत्र हैं। उनकी माता का नाम रोहिणी है। उन्हें विद्वान और अथर्ववेद का ज्ञाता माना जाता है। उनका विवाह वैवस्वत मनु की पुत्री इला से हुआ। देवों की सभा में बुध को राजकुमार कहा गया है।
    4. कुंडली में बुध यदि शुभ है तो बहन, मौसी और बुआ की स्थिति ठीक रहती है। सुंदर देह वाला ऐसा व्यक्ति ज्ञानी और चतुर होता है। सोच-समझकर बोलता है। उसकी बातों का असर होता है। ईमानदार और सच्चाई से चलने वाले बुध प्रबल व्यक्ति का रुतबा होता है। सूंघने की शक्ति गजब की होती है। व्यापार और नौकरी में किसी भी प्रकार की अड़चन नहीं आती। लोग इसीलिए बुधवार का उपवास करते हैं कि उनकी नौकरी और व्यापार अच्छे से चलता रहे।
    5. कमजोर मस्तिष्क वालों को बुधवार के दिन उपवास रखना चाहिए, क्योंकि बुधवार का दिन बुद्धि प्राप्ति का दिन होता है। बुद्धवार के व्रत से बुध ग्रह की शांति तथा धन, विद्या और व्यापार में वृद्धि होती है।
    6. बुधवार के दिन सूखे सिंदूर का तिलक लगाएं, दुर्गा माता और गणेशजी की पूजा करें, पूर्व, दक्षिण और नैऋत्य दिशा में यात्रा कर सकते हैं। इस दिन जमा किए गए धन में बरकत रहती है। मंत्रणा, मंथन और लेखन कार्य के लिए भी यह दिन उचित है। ज्योतिष, शेयर, दलाली जैसे कार्यों के लिए भी यह दिन शुभ माना गया है।
    7. इस दिन उत्तर, पश्‍चिम और ईशान में यात्रा न करें। बुधवार को धन का लेन-देन नहीं करना चाहिए, बुधवार को लड़की की माता को सिर नहीं धोना चाहिए, ऐसा करने से लड़की का स्वास्थ्य बिगड़ता है या उसके समक्ष कोई कष्ट आता है।
    8. बिगड़े काम बनाने के लिए बुधवार को गणेश मंत्र का स्मरण करें-
    त्रयीमयायाखिलबुद्धिदात्रे बुद्धिप्रदीपाय सुराधिपाय।
    नित्याय सत्याय च नित्यबुद्धि नित्यं निरीहाय नमोस्तु नित्यम्।
    अर्थात भगवान गणेश आप सभी बुद्धियों को देने वाले, बुद्धि को जगाने वाले और देवताओं के भी ईश्वर हैं। आप ही सत्य और नित्य बोधस्वरूप हैं। आपको मैं सदा नमन करता हूं। कम से कम 21 बार इस मंत्र का जप जरुर होना चाहिए।
    ग्रह दोष और शत्रुओं से बचाव के लिए-
    गणपूज्यो वक्रतुण्ड एकदंष्ट्री त्रियम्बक:।
    नीलग्रीवो लम्बोदरो विकटो विघ्रराजक:।।
    धूम्रवर्णों भालचन्द्रो दशमस्तु विनायक:।
    गणपर्तिहस्तिमुखो द्वादशारे यजेद्गणम्।।
    ये भगवान गणेश जी के बारह नाम है। इन नामों का जप उचित स्थान पर बैठकर किया जाए तो यह उत्तम फलदायी है। जब पूरी पूजा विधि हो जाए तो कम से कम 11 बार इन नामों का जप करना शुभ होता है।
    9.बुध ग्रह और लाल किताब : बुध ग्रह यदि कमजोर है तो लाल किताब के अनुसार सूंघने की शक्ति क्षीण हो जाती है और जातक तुतलाने लगता है। समय पूर्व ही दांत खराब हो जाते है। मित्र से संबंध बिगड़ जाते हैं। बुध यदि केतु और मंगल के साथ है तो मंदा फल मिलता है। शत्रु ग्रहों से ग्रसित बुध का फल मंदा ही रहता है। विशेषत: यह नौकरी या व्यापार में नुकसान दे सकता है। संभोग की शक्ति क्षीण कर देता है। इसके अलावा आपके मकान की स्थिति भी बुध के खराब होने की निशानी बताता है। बुध के मकान के चारों ओर खाली जगह होती है। हो सकता है कि यह मकान सभी मकानों से अलग अकेला ही हो। मकान के साथ चौड़े पत्तों के वृक्ष होंगे। गुरु और चंद्र के वृक्ष के साथ न होगा और अगर हुआ तो वह घर बुध की दुश्मनी का पुख्ता प्रमाण माना जाएगा।
    10. बुध ग्रह के उपाय : दुर्गा माता की भक्ति करें। बुधवार को नाक छिनवाकर दूसरे दिन गुरु का दान करें और नाक में 43 दिन तक चांदी का तार डालकर रखें। बेटी, बहन, बुआ और साली से अच्छे संबंध रखें। बुधवार के दिन गाय को हरा चारा खिलाएं। साबुत हरे मूंग का दान करें और सबसे जरूरी यह कि झूठ ना बोलें। बुधवार के दिन तुलसी का गिरा हुआ पत्ता धोकर खाना बहुत शुभ होता है। अपने साथ हरा रुमाल जरूर रखें। बुधवार के दिन दुर्गा माता के मंदिर में जाएं और उन्हें हरे रंग की चूड़ियां चढ़ाएं या 9 कन्याओं को हरे रंग का रुमाल बांटें। ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम: मंत्र का जाप बुधवार के दिन करना बेहद शुभकारी होता है। इसके अलागा गणेश मंत्र या दुर्गा माता के मंत्र का भी जाप कर सकते हैं।
    भगवान गणेश को अतिप्रिय है बुधवार का दिन। शीघ्र फलदायी होती है बुधवार की गणेश पूजा। शास्त्रों में भगवान गणेश जी को विघ्नहर्ता अर्थात सभी तरह की परेशानियों को खत्म करने वाला बताया गया है।
    कैसे करें पूजा?
    प्रातः काल स्नान ध्यान आदि से निवृत्त होकर पूजा स्थल पर पूर्व या उत्तर दिशा की और मुख कर के आसन पर विराजमान होकर सामने श्री गणेश यन्त्र की स्थापना करें। शुद्ध आसन पर बैठकर सभी पूजन सामग्री को एकत्रित कर पुष्प, धूप, दीप, कपूर, रोली, मौली लाल, चंदन, मोदक आदि गणेश भगवान को समर्पित कर, गणेशजी को सूखे सिंदूर का तिलक लगाएं और इनकी आरती करें। अंत में भगवान गणेश जी का स्मरण कर ॐ गं गणपतये नमः का 108 नाम मंत्र का जाप करना चाहिए।
    बुधवार की पूजा के 10 लाभ:
    1.बुधवार की प्रकृति चर और सौम्य मानी गई है। ज्योतिष अनुसार यह भगवान गणेश और लाल किताब अनुसार दुर्गा माता का दिन है। कमजोर मस्तिष्क वालों को बुधवार के दिन उपवास रखना चाहिए, क्योंकि बुधवार का दिन बुद्धि प्राप्ति का दिन होता है।
    2. पुराणों में गणेशजी की भक्ति शनि सहित सारे ग्रहदोष दूर करने वाली भी बताई गई हैं।
    3. प्रत्येक बुधवार के शुभ दिन गणेशजी की उपासना से व्यक्ति का सुख-सौभाग्य बढ़ता है और उसके जीवन से सभी तरह की रुकावटें दूर होती हैं।
    4. बुधवार के दिन घर में सफेद रंग के गणपति की स्थापना करने से समस्त प्रकार की तंत्र शक्ति का निवारण होता है।
    5. इसी प्रकार यदि परिवार में गृह कलेश हो तो बुधवार के दिन दूर्वा के गणेशजी की प्रतिकात्मक प्रतिमा बनाएं। इसे अपने घर के देवालय में स्थापित करें और प्रतिदिन इसकी विधि-विधान से पूजा करें।
    6. धन प्राप्ति के लिए बुधवार के दिन श्री गणेश को घी और गुड़ का भोग लगाएं। बाद में यह घी व गुड़ गाय को खिला दें। ये उपाय करने से धन संबंधी समस्या का निदान हो जाता है।
    7.गणेश या दुर्गा मंदिर के बाहर बैठी किसी कन्या को बुधवार के दिन साबुत बादाम देना चाहिए। इससे घर की बीमारी दूर होती है।
    8. इस दिन जमा किए गए धन में बरकत रहती है। बुधवार को धन का लेन-देन नहीं करना चाहिए।
    9. बिगड़े काम बनाने के लिए बुधवार को गणेश मंत्र का स्मरण करें-
    त्रयीमयायाखिलबुद्धिदात्रे बुद्धिप्रदीपाय सुराधिपाय।
    नित्याय सत्याय च नित्यबुद्धि नित्यं निरीहाय नमोस्तु नित्यम्।
    अर्थात भगवान गणेश आप सभी बुद्धियों को देने वाले, बुद्धि को जगाने वाले और देवताओं के भी ईश्वर हैं। आप ही सत्य और नित्य बोधस्वरूप हैं। आपको मैं सदा नमन करता हूं। कम से कम 21 बार इस मंत्र का जप जरुर होना चाहिए।
    10. ग्रह दोष और शत्रुओं से बचाव के लिए-
    गणपूज्यो वक्रतुण्ड एकदंष्ट्री त्रियम्बक:।
    नीलग्रीवो लम्बोदरो विकटो विघ्रराजक:।।
    धूम्रवर्णों भालचन्द्रो दशमस्तु विनायक:।
    गणपर्तिहस्तिमुखो द्वादशारे यजेद्गणम्।।
    ये भगवान गणेश जी के बारह नाम है। इन नामों का जप उचित स्थान पर बैठकर किया जाए तो यह उत्तम फलदायी है। जब पूरी पूजा विधि हो जाए तो कम से कम 11 बार इन नामों का जप करना शुभ होता है।


    प्रत्येक परिवार को मिला 100 दिन का रोजगारWhatsApp Image 2021-01-05 at 5.37.21 PM.jpeg

     धमतरी / शौर्यपथ /   गांव का समृद्ध विकास एक कुशल शासक के कार्य को दर्शाता है। जब यह कार्य गांव के हित में हो तो निश्चित इसकी चर्चा चहूं ओर होती है। गांव का विकास, योजना से निर्मित परिसंपत्ति का संरक्षण, संवर्धन होने से विकास कार्यों के प्रति लोगों के सोच में परिवर्तन आने लगता है। सकारात्मक सोच का परिणाम शासन की महत्वाकांक्षी योजना को बिना आड़े आये आबाद गति से क्रियान्वित करती है। 
    ग्राम पंचायत गोजी विकासखंड कुरूद मुख्यालय से 17 किलोमीटर की दूरी और धमतरी जिला मुख्यालय से 42 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ज्यादातर ग्रामीण कृषि पर निर्भर है। कृषि कार्य हेतु ट्रैक्टर, बैलगाड़ी एवं पशुपालकों के मवेशियों के आने-जाने के लिए बड़ी समस्या थी। बरसात कि दिनों में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। विकास कार्यों में आ रही समस्याओं का समाधान महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना से पूर्ण हुआ। वर्ष 2019-20 में हीरा से गोसाईं खेत तक मिट्टी धरसा सड़क निर्माण कार्य राशि 6.93 लाख रूपये, वर्ष 2020-21 में बजरंगबली मंदिर से रोहित घर तक धरसा सड़क निर्माण कार्य राशि 5.94 लाख रूपये, मुख्य मार्ग से शमशान घाट तक धरसा मिट्टी सड़क निर्माण कार्य राशि 3.29 लाख रूपये, लक्ष्मण घर से राधाकृष्ण मंदिर धरसा मिट्टी सड़क निर्माण कार्य राशि 4.18 लाख रूपये, विश्वा यादव खेत से बिसे ब्यारा तक धरसा मिट्टी सड़क निर्माण कार्य राशि 4.61 लाख रूपये के कार्य कराये गये। धरसा सड़क निर्माण हेतु किसानों की लंबी मांग थी। अब किसानों की सारी समस्याएं दूर हुई और आवागमन का मार्ग प्रशस्त हुआ। 
    इसी तरह वर्ष 2019-20 में नया तालाब निर्माण कार्य राशि 9.97 लाख,  रूपये, शमशान घाट तालाब सह घाट निर्माण कार्य राशि 9.66 लाख, वर्ष 2020-21 में रामसागर तालाब गहरीकरण सह पींिचंग निर्माण कार्य राशि 9.97 लाख रूपये, जुन्ना तालाब गहरीकरण सह पीचिंग निर्माण कार्य राशि 10.00 लाख रूपये, हीरा तालाब गहरीकरण सह पीचिंग निर्माण कार्य राशि 9.98 लाख रूपये जिला कार्यालय से स्वीकृति दी गई। 
    अब तक महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना से राशि 59.25 लाख रूपये के कार्य कराये जा चुके हैं। जाॅबकार्डधारी परिवारों की सक्रिय भागीदारी से पंचायत के कार्योंं को नया आयाम दिया गया। इस तरह 257 जाॅबकार्डधारी परिवार के कुल 450 श्रमिकों ने रोजगार नियोजित कर 27729 मानव दिवस अर्जित किया गया। तथा 197 नियोजित श्रमिकों को 100 दिवस का रोजगार दिया गया। कोरोना वायरस (कोविड-19) लाॅकडाउन के दौरान तत्काल उनके खाते में मजदूरी का भुगतान कराया गया। 
    जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने बताया कि-कोरोना वायरस संक्रमण के दौरान ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार मुहैया कराकर जीविकोपार्जन हेतु आर्थिक समृद्धि का सुरक्षा दिया गया। संकट के समय यह राशि श्रमिकों के परिवार में संजीवनी की तरह काम आये। मनरेगा से श्रमिकों को आर्थिक समृद्धि का बढ़ावा देना योजना का मुख्य लक्ष्य है।
    सुश्री कुंती देवांगन कार्यक्रम अधिकारी जनपद पंचायत कुरूद ने बताया कि-उच्चाधिकारियों के  निर्देशानुसार प्रत्येक पंचायतों में कार्य स्वीकृत कराने के निर्देश दिये गये थे। पंचायत की सजगता से ग्रामीण श्रमिकों को मांग अनुसार रोजगार उपलब्ध कराया गया। लाॅकडाउन में मनरेगा कार्य से इन श्रमिकों को बड़ी राहत मिली।
    सरपंच श्री थानेश्वर तारक ने बताया कि-ग्रामीण एवं श्रमिकों के समन्वय से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना से विकास कार्यों की सहभागिता सुनिश्चित हुई। आवश्यकतानुसार मूलभूत के कार्य होने से ग्रामीण कृषकों को भी आवागमन के साधन से मुश्किल आसान हुई। पंचायत का सपना साकार हुआ। लोगों में शासन के प्रति विश्वास बढ़ा। 

    राष्ट्रीय स्तर पर संकटकाल में भी सृजन का किया झंडा बुलंद


    भिलाई / शौर्यपथ / भिलाई इस्पात संयंत्र ने कोरोना संकटकाल में भी अपनी सृजनशीलता को नई उ?ान देने में कामयाबी हासिल की है क्वालिटी कंसेप्ट्स के नेशनल कन्वेंशन प्रतियोगिता में पार-एक्सीलेंस एवार्ड जीतने का एक नया रिकॉर्ड कायम किया है।
    क्वालिटी सर्कल फोरम ऑफ इण्डिया (क्यूसीएफआई) द्वारा आयोजित नेशनल क्वालिटी कंसेप्ट्स कन्वेंशन-2020(एनसीक्यूसी-2020) के प्रतियोगिता परिणाम घोषित किए गए। इस क्वालिटी कंसेप्ट्स प्रतियोगिता में सेल-बीएसपी की 61 टीमों ने भाग लिया जो अब तक का सर्वश्रेष्ठ रिकॉर्ड है। संकटकाल में भी सभी 61टीमों ने पुरस्कार जीत कर राष्ट्रीय स्तर पर भिलाई के सृजन का झंडा बुलंद किया ।
    36 पार-एक्सीलेंस एवार्ड जीतकर बनाया एक नया रिकॉर्ड
    इस प्रतियोगिता में 61 टीमों ने अपने-अपने विभागों में किए गए सृजनशील कार्यों पर केस स्टडी लिखकर जमा किया। इन केस स्टडीज का मूल्यांकन विशेषज्ञ जजों के माध्यम से कराया गया। कोरोना महामारी को देखते हुए इस वर्ष क्यूसीएफआई ने प्रत्यक्ष प्रस्तुतियाँ पर रोक लगा दी थी। अत: इस वर्ष लिखित प्रस्तुत केस स्टडियों का मूल्यांकन और नॉलेज टेस्ट कर सीधे परिणाम की घोषणा की गई। सेल-बीएसपी की टीमों ने अपना परचम लहराते हुए 36 टीमों ने पार-एक्सीलेंस एवार्ड और 21 टीमों ने एक्सीलेंस एवार्ड 04 टीमों ने डिस्टिंग्विश एवार्ड प्राप्त कर भिलाई का नाम रोशन किया है। इस प्रकार सेल-बीएसपी की टीमों ने कुल 36 टीमों ने पार एक्सीलेंस एवार्ड जीतकर एक नया रिकॉर्ड कायम किया है।
    विभिन्न क्वालिटी कंसेप्ट्स में की भागीदारी
    बीएसपी की टीमों ने प्रतियोगिता के प्रत्येक वर्ग में भाग लिया। सभी वर्गों में पार एक्सीलेंस एवार्ड जीतकर अपने इनोवेशन की धमक दिखाई। विदित हो कि इन प्रतियोगिताओं में क्वालिटी सर्कल, 5-एस सिस्टम तथा लीन क्वालिटी सर्कल के तहत तीन वर्गों में आयोजित की जाती है। यह पहली बार हुआ है कि बिजनेस एक्सीलेंस विभाग (बीई विभाग) के मार्गदर्शन में सेल-बीएसपी की टीमों ने तीनों वर्गों में अपनी भागीदारी देकर अपनी उत्कृष्टता सिद्ध की है।
    बीई विभाग का उत्कृष्ट योगदान
    व्यावसायिक उत्कृष्टता विभाग द्वारा दिए गये मार्गदर्शन व प्रशिक्षण ने इस रिकार्ड तो? परफोर्मेंस में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बीई विभाग के विभागाध्यक्ष व महाप्रबंधक श्री मनोज दुबे के नेतृत्व में सहायक महाप्रबंधक श्री प्रकाश कुमार साहू,उप प्रबंधक रवि कुमार तथा सुनील कुमार देशमुख ने बेहतरीन योगदान दिया।
    पार-एक्सीलेंस एवार्ड विजेता टीमें
    बीएसपी की कुल 61 टीमों ने अपने-अपने विभाग के लिए किए गए मॉडिफिकेशन, काईजन क्रियान्वयन और कार्यों के बेहतर पद्धति विकास में किए गए सृजनशील कार्यों को लिखित रूप में प्रस्तुत किया। जिसमें से 36 टीमों के रचनात्मक कार्यों को पार एक्सीलेंस एवार्ड से नवाजा गया। यह अब तक का सर्वाधिक पार एक्सीलेंस एवार्ड जीतने का एक नया रिकॉर्ड है। पार एक्सीलेंस एवार्ड प्राप्त टीमों में शामिल हैं-सृष्टि, क्रिएटिव, शौर्य, जागृति, चैतन्य, प्रयास, जागरूक होता इंसान, क्षितिज, विकास, प्रवाह, सौजन्य, धवल, उत्कर्ष, अभिनंदन, सुगम, निर्मल, आकार (सभी 5-एस टीमें)। इसी प्रकार लीन क्वालिटी सर्कल टीमों में शामिल हैं-नवोदय, प्रज्ञान, साहस, सेफ्टी प्रमोटर्स, संकल्प, समर्थ। इसी क्रम में क्वालिटी सर्कल वर्ग में पार एक्सीलेंस एवार्ड प्राप्त करने वाली टीमों में शामिल हैं-नवसृजन, शौर्य, पलाश, शार्दुल, अनवरत, टीएमटी मास्टर्स, आदर्श, पहल, प्रखर, अविरल, अभियान ,समर्पण,सजग ।
    नेशनल कन्वेंशन में सर्वाधिक टीमें भेजने का नया रिकॉर्ड
    इतिहास गवाह है कि सेल-बीएसपी ने अपने सृजनहार कार्मिकों के नवाचार कार्यों को सदैव ही प्रोत्साहित करता आ रहा है। कोरोना के इस संकटकाल में भी बीएसपी प्रबंधन ने रिकॉर्ड 61 टीमों को नेशनल कन्वेंशन में भेजकर क्वालिटी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुन: सिद्ध किया है। इनोवेटिव कार्यों को बढावा देने के लिए बीएसपी प्रबंधन सदैव अग्रणी रहा है। कोरोना संकट में भी बीएसपी के सृजनहारों ने जहाँ अपनी क्रिएटिविटी को नई ऊँचाई दी वहीं बीएसपी प्रबंधन ने भी इस सृजनशील कार्मिकों को यथोचित मंच देकर इनका मनोबल बढाया है।

    सेहत / शौर्यपथ /सर्दियों का मौसम अपने साथ सेहत से जुड़ी कुछ परेशानियां भी साथ लेकर आता है, जिसमें सर्दी खांसी आम है। बदलता मौसम स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों को भी न्यौता देता है। अगर आप भी सूखी खांसी से परेशान
    है, तो हम आपको इस लेख में कुछ ऐसे उपायों के बारे में बता रहें है जिन्हें अपनाकर आप इन सेहत समस्या से निजात पा सकते है। आइए जानते हैं....
    तो आइए जानते हैं कि कैसे आप बदलते मौसम के साथ रख सकते हैं अपनी सेहत का ख्याल?
    अदरक और नमक से आपको सूखी खांसी से निजात मिल सकती है। इसके लिए आप 1 अदरक लीजिए और इसमें थोड़ा-सा नमक लगाकर इसका सेवन करें। यह उपाय आपकी खांसी को भी ठीक करेगा, साथ ही आपके गले को भी साफ करेगा।
    मुलेठी की चाय भी आपको सूखी खांसी से आराम दिला सकती है।
    हल्दी वाला दूध सूखी खांसी को ठीक करने के लिए बहुत कारगर है। इसका सेवन आपको रात को सोने से पहले करना है।
    गर्म पानी पीने से आपका मेटाबॉलिज्म रेट बढ़ता है, मगर इससे भी ज्यादा यह सूखी खांसी को खत्म करने में असरदार होता है। दिन में अगर आप 3 बार गर्म पानी पी लेंगे तो आपको खांसी में काफी राहत मिलेगी।
    भाप आपको तुरंत और प्रभावी परिणाम भी दे सकती है। गर्म पानी की भाप एक सरल घरेलू उपाय है जिसे आप किसी भी समय फॉलो कर सकते हैं। यह कोल्‍ड और खराश से लड़ने में मददगार है।

    सेहत /शौर्यपथ / चुकंदर का सेवन स्वास्थ्य के लिहाज से काफी फायदेमंद होता है। कुछ लोग इसका सेवन सलाद के रूप में करते है, तो कुछ जूस बनाकर पीना पसंद करते हैं। आज हम आपको चुकंदर के ऐसे फायदों के बारे में बता है जिसके सेवन से आप बीमारियों से कोसों दूर रहेंगे और सेहतमंद बने रहेंगे। आइए जानते हैं.....
    1. चुकंदर का सेवन करने से एनीमिया, कब्ज, माहवारी की समस्या दूर होती है।
    2. चुकंदर का सेवन शरीर में खून की मात्रा बढ़ाता है, इसलिए महिलाओं के लिए ये किसी वरदान से कम नहीं है।
    3. चुकंदर का सेवन सलाद व जूस के रूप में करना काफी फायदेमंद होता है। इसमें आयरन, पोटेशियम, फास्फोरस, कैल्शियम, विटामिन डी और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में होते हैं।
    4. आयुर्वेद में बताया गया है कि यह खून तो बढ़ाता ही है, साथ ही पेशाब संबंधी समस्याओं को भी दूर करता है।
    5. चुकंदर में भरपूर मात्रा में फाइबर होता है जिस वजह से ये कब्ज और बवासीर की तकलीफ को दूर करने में सहायक होता है।
    6. चुकंदर का सेवन शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकाल देता है और इस कारण रक्त साफ हो जाता है।
    7. इसे नियमित खाया जाए तो ये शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि करता है।
    8. चुकंदर शरीर में कैल्शियम को बढ़ाता है, जिससे हड्डियां मजबूत होती हैं।
    9. चुकंदर के नियमित सेवन से त्वचा में निखार आता है और स्किन ग्लोइंग बनती हैं।

    धर्म संसार / शौर्यपथ / श्रीरामचरित मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास ने श्रीरामचरित मानस लिखने से पहले हनुमान चालीसा लिखी थी और फिर हनुमान की कृपा से ही वे श्रीरामचरित मानस लिख पाए। कहते हैं कि तुलसीदासजी ने ही बजरंग बाण भी लिखा था। आओ जानते हैं कि बजरंग बाण का पाठ क्यों करना चाहिए और क्या रखना चाहिए सावधानी।
    कहते हैं कि गोस्वामी तुलसीदास पर काशी में किसी तांत्रिक ने मारण मंत्र का प्रयोग किया था। तब तुलसीदास जी के शरीर पर फोड़े निक आए थे। इसके बाद तुलसीदास जी ने बजरंग बाण का पाठ पढ़कर हनुमान जी से गुहार लगाई थी। बजरंग बाण के पाठ से एक दिन में सारे फोड़े ठीक हो गए थे। तभी से माजा जाता है कि यह पाठ शत्रुओं पर अचूक वार करता है।
    1. क्यों करते हैं बजरंग बाण का पाठ? : बहुत से व्यक्ति अपने कार्य या व्यवहार से लोगों को रुष्ट कर देते हैं, इससे उनके शत्रु बढ़ जाते हैं। कुछ लोगों को स्पष्ट बोलने की आदत होती है जिसके कारण उनके गुप्त शत्रु भी होते हैं। यह भी हो सकता है कि आप सभी तरह से अच्छे हैं फिर भी आपकी तरक्की से लोग जलते हो और आपके विरुद्ध षड्‍यंत्र रचते हो। ऐसे समय में यदि आप सच्चे हैं तो बजरंग बाण का पाठ आपको बचाता है और शत्रुओं को दंड देता है।
    2. सच्चे और पवित्र लोग ही करें इसका पाठ : बजरंग बाण से शत्रु को उसके किए की सजा मिल जाती है, लेकिन इसका पाठ एक जगह बैठकर अनुष्ठानपूर्वक 21 दिन तक करना चाहिए और हमेशा सच्चाई के मार्ग पर चलने का संकल्प लेना चाहिए, क्योंकि हनुमानजी सिर्फ सच्चे और पवित्र लोगों का ही साथ देते हैं। 21 दिन में तुरंत फल मिलता है। कभी किसी का बुरा करने की कामना के साथ बजरंग बाण का पाठ नहीं करना चाहिए। किसी भी अनैतिक कार्य की पूर्ति के लिए या फिर किसी से विवाद की स्थिति में विजय पाने के लिए बजरंग बाण का पाठ नहीं करना चाहिए। कर्म करना जीवन में बहुत आवश्यक होता है इसलिए बिना प्रयास के ही किसी कार्य में सफलता पाने के उद्देश्य से बजरंग बाण का पाठ न करें। धन, ऐश्वर्य या किसी भी भौतिक इच्छा की पूर्ति के लिए बजरंग बाण का पाठ नहीं करना चाहिए।
    3. सावधानी : बजरंग बाण के बारे में कहा जाता है कि इसका प्रयोग हर कहीं, हर किसी को नहीं करना चाहिए। जब व्यक्ति घोर संकट में हो तब ही इसका प्रयोग करना चाहिये। प्रयोग करने के पूर्व इसे सिद्ध करना होता है। इसका प्रयोग करते वक्त सावधानी रखना चाहिए। किसी भी प्रकार की त्रुटि नहीं होना चाहिए। जितनी बार बजरंग बाण पाठ का संकल्प लें, उतनी बार रुद्राक्ष की माला से पाठ करें। बजरंग का बाण पाठ करते समय ध्यान रखें कि शब्दों का उच्चारण साफ और स्पष्ट होना चाहिए। अगर आप किसी विशेष मनोकामना की पूर्ति के लिए बजरंग बाण का पाठ कर रहे हैं तो कम से कम 41 दिनों तक यह पाठ नियमपूर्वक करें। आपको जितने दिन तक बजरंग बाण का पाठ करना हो उतने दिनों में ब्रह्मचर्य का पूर्णतया पालन करना जरूरी है। जितने दिन भी आपको बजरंग बाण का पाठ करना हो उतने दिनों तक किसी प्रकार का नशा या तामसिक चीजों का सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिए।
    4. विधिवत रूप से करें पाठ : बजरंग बाण का पाठ करके के लिए हनुमानजी के चित्र या मूर्ति के समक्ष कुशासन (एक विशेष प्रकार की घास से बना आसन) पर बैठकर विधिवत उनकी पूजा अर्चना करने के बाद इसका पाठ करना चाहिए।
    5. कब करें ये पाठ : बजरंग बाण का पाठ अक्सर शनिवार को ही किया जाता है, परंतु मंगलवार को भी इसका पाठ कर सकते हैं।
    6. पाठ के पूर्व क्या करें : बजरंग बाण का पाठ करने के पूर्व संकल्प अवश्य लें कि आपका कार्य जब भी होगा, हनुमानजी के निमित्त नियमित कुछ भी करते रहेंगे। इसके अलावा रामजी की स्तुति पढ़ें और फिर विधिवत पूजा के बाद पाठ करें। पाठ पूर्ण हो जाने के बाद भगवान राम का स्मरण और कीर्तन करें।
    7. घी का दीप जलाएं : पाठ के पूर्व घी का दीपक चलाएं जिसमें पांच बत्ती हो। इसी के सात गुग्गल की सुगंध भी फैलाएं।
    8. अर्पित करें ये सामग्री : हनुमानजी को चमेली का तेल, गुड़, चना, जनेऊ, पान का बिड़ा आदि अर्पित करें। चूरमा, लड्डू और अन्य मौसमी फल भी अर्पित कर सकते हैं।
    9. शनि, राहु-केतु से मिलती है मुक्ति : घटना-दुर्घटना को राहु-केतु और शनि अंजाम देते हैं। जैसे अचानक आग लग जाना, आपकी गाड़ी का एक्सिडेंट हो जाता या किसी मुसिबत का अचानक आ जाना। हनुमानजी आपको सभी तरह की घटना और दुर्घटना से बचा लेते हैं। इसके लिए आप सदा उनकी शरण में रहकर प्रतिदिन बजरंग बाण पाठ कर सकते हैं।
    10. मंगल दोष से मुक्ति : यदि किसी की कुंडली में मांगलिक दोष है जिसके कारण विवाह नहीं हो पा रहा है या विवाह होने के बाद वैवाहिक जीवन में संकट पैदा हो रहा है तो उसे नियमित रूप से मंगलवार के दिन बजरंग बाण का पाठ करना चाहिए। अगर नियमपूर्वक निष्ठा के साथ बजरंग बाण का पाठ किया जाए, तो इससे मांगलिक दोष का निवारण जल्द हो सकता है।
    यदि किसी कारणवश आप श्री बजरंग बाण का नित्य पाठ करने में असमर्थ हो तो प्रत्येक मंगलवार को यह पाठ अवश्य पढ़ना चाहिए। अपने किसी भी इष्ट कार्य की सिद्धि के लिए मंगल अथवा शनिवार का दिन चुन लें।
    हनुमान जी का एक चित्र या मूर्ति जप करते समय सामने रख लें। ऊन अथवा कुशासन बैठने के लिए प्रयोग करें। इस पाठ को करने के लिए शुद्ध स्थान तथा शांत वातावरण आवश्यक है। अत: ऐसी जगह का चुनाव करके श्री बजरंग बाण का चमत्कारी पाठ पढ़ें। इस पाठ से जीवन दुर्भाग्य, दारिद्रय, भूत-प्रेत का प्रकोप और शारीरिक कष्ट सभी का नाश हो जाता है और जीवन में शुभता का संचारण होता है। यहां पढ़ें श्री बजरंग बाण का चमत्कारी पाठ-
    बजरंग बाण ध्यान
    श्रीराम
    अतुलित बलधामं हेमशैलाभदेहं।
    दनुज वन कृशानुं, ज्ञानिनामग्रगण्यम्।।
    सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं।
    रघुपति प्रियभक्तं वातजातं नमामि।।
    दोहा
    निश्चय प्रेम प्रतीति ते, विनय करैं सनमान।
    तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान।।
    चौपाई
    जय हनुमन्त सन्त हितकारी। सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी।।
    जन के काज विलम्ब न कीजै। आतुर दौरि महा सुख दीजै।।
    जैसे कूदि सिन्धु वहि पारा। सुरसा बदन पैठि विस्तारा।।
    आगे जाय लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुर लोका।।
    जाय विभीषण को सुख दीन्हा। सीता निरखि परम पद लीन्हा।।
    बाग उजारि सिन्धु मंह बोरा। अति आतुर यम कातर तोरा।।
    अक्षय कुमार को मारि संहारा। लूम लपेटि लंक को जारा।।
    लाह समान लंक जरि गई। जै जै धुनि सुर पुर में भई।।
    अब विलंब केहि कारण स्वामी। कृपा करहु प्रभु अन्तर्यामी।।
    जय जय लक्ष्मण प्राण के दाता। आतुर होई दुख करहु निपाता।।
    जै गिरधर जै जै सुख सागर। सुर समूह समरथ भट नागर।।
    ॐ हनु-हनु-हनु हनुमंत हठीले। वैरहिं मारू बज्र सम कीलै।।
    गदा बज्र तै बैरिहीं मारौ। महाराज निज दास उबारों।।
    सुनि हंकार हुंकार दै धावो। बज्र गदा हनि विलम्ब न लावो।।
    ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं हनुमंत कपीसा। ॐ हुँ हुँ हुँ हनु अरि उर शीसा।।
    सत्य होहु हरि सत्य पाय कै। राम दुत धरू मारू धाई कै।।
    जै हनुमन्त अनन्त अगाधा। दुःख पावत जन केहि अपराधा।।
    पूजा जप तप नेम अचारा। नहिं जानत है दास तुम्हारा।।
    वन उपवन जल-थल गृह माहीं। तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं।।
    पाँय परौं कर जोरि मनावौं। अपने काज लागि गुण गावौं।।
    जै अंजनी कुमार बलवन्ता। शंकर स्वयं वीर हनुमंता।।
    बदन कराल दनुज कुल घालक। भूत पिशाच प्रेत उर शालक।।
    भूत प्रेत पिशाच निशाचर। अग्नि बैताल वीर मारी मर।।
    इन्हहिं मारू, तोंहि शमथ रामकी। राखु नाथ मर्याद नाम की।।
    जनक सुता पति दास कहाओ। ताकी शपथ विलम्ब न लाओ।।
    जय जय जय ध्वनि होत अकाशा। सुमिरत होत सुसह दुःख नाशा।।
    उठु-उठु चल तोहि राम दुहाई। पांय परौं कर जोरि मनाई।।
    ॐ चं चं चं चं चपल चलन्ता। ॐ हनु हनु हनु हनु हनु हनुमंता।।
    ॐ हं हं हांक देत कपि चंचल। ॐ सं सं सहमि पराने खल दल।।
    अपने जन को कस न उबारौ। सुमिरत होत आनन्द हमारौ।।
    ताते विनती करौं पुकारी। हरहु सकल दुःख विपति हमारी।।
    ऐसौ बल प्रभाव प्रभु तोरा। कस न हरहु दुःख संकट मोरा।।
    हे बजरंग, बाण सम धावौ। मेटि सकल दुःख दरस दिखावौ।।
    हे कपिराज काज कब ऐहौ। अवसर चूकि अन्त पछतैहौ।।
    जन की लाज जात ऐहि बारा। धावहु हे कपि पवन कुमारा।।
    जयति जयति जै जै हनुमाना। जयति जयति गुण ज्ञान निधाना।।
    जयति जयति जै जै कपिराई। जयति जयति जै जै सुखदाई।।
    जयति जयति जै राम पियारे। जयति जयति जै सिया दुलारे।।
    जयति जयति मुद मंगलदाता। जयति जयति त्रिभुवन विख्याता।।
    ऐहि प्रकार गावत गुण शेषा। पावत पार नहीं लवलेषा।।
    राम रूप सर्वत्र समाना। देखत रहत सदा हर्षाना।।
    विधि शारदा सहित दिनराती। गावत कपि के गुन बहु भांति।।
    तुम सम नहीं जगत बलवाना। करि विचार देखउं विधि नाना।।
    यह जिय जानि शरण तब आई। ताते विनय करौं चित लाई।।
    सुनि कपि आरत वचन हमारे। मेटहु सकल दुःख भ्रम भारे।।
    एहि प्रकार विनती कपि केरी। जो जन करै लहै सुख ढेरी।।
    याके पढ़त वीर हनुमाना। धावत बाण तुल्य बनवाना।।
    मेटत आए दुःख क्षण माहिं। दै दर्शन रघुपति ढिग जाहीं।।
    पाठ करै बजरंग बाण की। हनुमत रक्षा करै प्राण की।।
    डीठ, मूठ, टोनादिक नासै। परकृत यंत्र मंत्र नहीं त्रासे।।
    भैरवादि सुर करै मिताई। आयुस मानि करै सेवकाई।।
    प्रण कर पाठ करें मन लाई। अल्प-मृत्यु ग्रह दोष नसाई।।
    आवृत ग्यारह प्रतिदिन जापै। ताकी छांह काल नहिं चापै।।
    दै गूगुल की धूप हमेशा। करै पाठ तन मिटै कलेषा।।
    यह बजरंग बाण जेहि मारे। ताहि कहौ फिर कौन उबारे।।
    शत्रु समूह मिटै सब आपै। देखत ताहि सुरासुर कांपै।।
    तेज प्रताप बुद्धि अधिकाई। रहै सदा कपिराज सहाई।।
    दोहा
    प्रेम प्रतीतिहिं कपि भजै। सदा धरैं उर ध्यान।।
    तेहि के कारज तुरत ही, सिद्ध करैं हनुमान।।

     

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