July 23, 2026
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    दूध से बनने वाला दही हर तरह से गुणकारी है, क्योंकि इसमें ऐसे तत्व मौजूद हैं, जो कई तरह की बीमारियों से बचाव करते हैं। दही खाने में जितना स्वादिष्ट है, उतना ही स्वास्थ्य और सौंदर्य की दृष्टि से लाभकारी भी है। अधिकतर मरीजों को डाइटीशियन भी दही खाने की सलाह देते हैं, ताकि वो जल्दी से ठीक हो जाएं। यह अजीब है कि दूध से बनने वाला दही दूध से भी ज्यादा गुणकारी है। इसका कारण है कि दूध में अधिक मात्रा में फैट होता है, जिसकी अधिकता शरीर को नुकसान पहुंचाती है। इसके विपरीत दही में फैट बहुत कम होता है, जो शरीर के लिए फायदेमंद है।


    सेहत /शौर्यपथ / दही मे पाए जाने वाले पोषक तत्व

    दही में सबसे ज्यादा मात्रा में कैलोरी पाई जाती है, इसके अलावा इसमें प्रोटीन, विटामिन-डी, कैल्शियम होता है और फास्फोरस, लेक्टोज और आयरन तत्व भी शामिल होते हैं। दही खाने से कई तरह की शारीरिक परेशानियां ठीक हो सकती हैं। आइए जानते हैं कि दही से कैसे शारीरिक समस्याओं का निराकरण किया जा सकता है -

    पाचन शक्ति मजबूत करने के लिए

    दही खाने से पाचनशक्ति मजबूत होती है और पेट से संबंधित समस्याएं जैसे कब्ज, एसिडीटी आदि ठीक होती हैं। लिवर, किडनी और अल्सर की समस्या से ग्रसित लोगों को रोज ताजा दही खाना चाहिए, इससे उन्हें फायदा होगा।

    दिल की बीमारियां ठीक करने के लिए

    आजकल लोग जंक फूड खाने के आदि हो गए हैं और खानपान भी अनियमित हो गया है। अधिक वसायुक्त भोजन खाने से लोग दिल से जुड़ी बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। जैसे हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल में असंतुलन जैसी परेशानियां बढ़ रही हैं। दिल के मरीजों के लिए दही काफी फायदेमंद होता है, क्योंकि इसमें फैट कम होता है और यह कोलेस्ट्रॉल व ब्लड प्रेशर के लेवल को संतुलित रखने में मदद करता है।

    हड्डियों की परेशानियों को दूर करने के लिए

    दही में कैल्शियम होने के कारण यह हड्डियों के लिए भी काफी लाभकारी है। दांत के लिए भी कैल्शियम जरूरी होता है। ऐसे में दही का सेवन शरीर का ढांचागत मजबूती देता है।

    रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए

    दही में लेक्टबेसिलस बैक्टीरिया मौजूद होते हैं, जो शरीर के कीटाणुओं से लड़ने में सहायक होते हैं और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इसलिए दही का सेवन रोज करना चाहिए।

    वजन कम करने के लिए

    दही खाने से वजन भी कम किया जा सकता है क्योंकि दही खाने से पेट में खाने की पूर्ति हो जाती है और अधिक समय तक भूख भी नहीं लगती है। दही शरीर की वसा को कम करने में सहायक होता है और इससे प्रोटीन विटामिन्स भी मिल जाते हैं। व्यायाम करने के साथ ही रोज दही खाने से वजन कम किया जा सकता है।

    त्वचा में निखार लाने के लिए

    दही खाने से त्वचा में भी निखार आता है और धूप से जली हुई त्वचा भी ठीक होती है। दही का इस्तेमाल न सिर्फ खाने के लिए किया जाता है, बल्कि इसका उपयोग त्वचा को निखारने के लिए फैसपैक के रूप में भी किया जाता है। इससे मुंहासे और चेहरे के दाग धब्बे भी दूर होते हैं। दही में विटामिन सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो त्वचा की कोशिकाओं को संगठित करने में मदद करता है और टॉक्सिन को दूर करने में मदद करता है।

     

    सेहत / शौर्यपथ / सब्जी विक्रेताओं से शहर के करीब एक दर्जन से अधिक लोग कोविड-19 संक्रमित हो चुके हैं लोगों को चिंता सताने लगी है कि कहीं सब्जी के माध्यम से कोरोना वायरस घरों में नहीं घुस रहा है। इसे लेकर लोग कई तरह की सावधानियां भी बरत रहें हैं

    वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि इससे डरने की नहीं सावधानी बरतने की जरूरत है। सब्जी मंडी में कोविड-19 का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने सेक्टर-16 और डबुआ सब्जी मंडी को शनिवार से चार दिनों के लिए बंद करने का नर्णिय लिया है। यहां से करीब 8 से 10 सब्जी विक्रेता और आढ़ती इसकी चपेट में आ चुके हैं।

    ऐसे में बाजार से सब्जी खरीदने को लेकर लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं। उन्हें यह चिंता सताने लगी है कि आखिर सब्जियों को खरीदें कैसे? कोविड-19 संक्रमण के दौरान सब्जियों को खरीदने का सही तरीका क्या है? खुद को कोरोना से कैसे बचाए। वहीं, आहार रोग विशेषज्ञ शिल्पा ठाकुर कई गुर बता रही हैं।

    सब्जी विक्रेताओं से कोविड-19 संक्रमण लगातार बढ़ रहा है। पिछले एक सप्ताह के दौरान डबुआ सब्जी मंडी, एनआईटी-एक, मुजेसर और सेक्टर 16 सब्जी मंडी से करीब 12 लोग इसकी चपेट में आ गए हैं। अब सब्जी के माध्यम से घर में घुसने वाले कोराना वायरस का डर सताने लगा है। एनआईटी पांच स्थित सुषमा नागर का कहना है कि कोविड-19 संक्रमण के डर से घर से निकलना तो बंद हो गयाा। खाने पर कैसे अंकुश लगाया जा सकता है।

    फल और सब्जियों को धोने के खास तरीके

    सब्जियों और फलों को 10 मिनटपानी में भिगो कर छोड़ दे, उसके बाद धो लें
    फूलगोभी, पालक, बंदगोभी को दो प्रतिशत नमक वाले गर्म पानी से धोएं
    सब्जियों को पानी से धोने के बाद सिरका या नींबू वाले पानी से धोएं तो बेहतर
    छिलका सहित खाने वाले फलों को एक घंटे तक पानी में भिगोएं
    अगर सब्जियां अच्छी हैं तो उन्हें कुछ देर धूप में भी रख सकते हैं
    सब्जी को एक दिन बाद बनाने का प्रयास करें
    सब्जी धोने से पहले और सब्जी धोने के बाद हाथों को साबुन से धोएं
    क्या खाएं, क्या नहीं खाएं?

    पौष्टिक आहार की मात्रा अधिक लें
    मसालेदार खाना,तेल कम प्रयोग करें
    खाने में सलाद का सेवन करें
    फलों के नियमित सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है
    ड्राईफ्रूट्स का इस्तेमाल करें और खाने में दालों का उपयोग करें
    ''कोरोना वायरस से घबराने की नहीं, सावधानियां बरतने की जरूरत है। सब्जियों से वायरस नहीं आता, भीड़ में मौजूद संक्रमित व्यक्ति से ही कोरोना वायरस का संक्रमण आपके घर में आता है। सब्जियों को कपड़े के थैले में लाएंष सब्जी को बाहर निकालकर उसे अच्छी तरह धो लें। वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए आपको संतुलित आहार की जरूरत है।''

    सेहत / शौर्यपथ / चावल अब केवल पेट भरने की वस्तु नहीं रही बल्कि इसे कुपोषण की समस्या को दूर करने के लिए प्रोटीन और जिंक जैसे पोषक तत्वों से लैस कर दिया गया है तथा इसकी खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के प्रयास से देश में काम से कम धान की छह बायोफोटिफाइड किस्मों का विकास किया गया है जो जीवन के लिए जरूरी तथा शारीरिक विकास में सहायक प्रोटीन और जिंक से भरपूर है ।

    धान का सी आर धान 31० प्रोटीन से भरा है जबकि डी डी आर धान 45 , डी डी आर धान 48 , डी डी आर धान 49 और जिनको राइस एम एस जिंक से लैस है । सी आर धान 311 ( मुकुल) प्रोटीन और जिंक दोनों की कमी को दूर करता है ।
    प्रोटीन टिश्यू के विकास और उसकी मरम्मत के लिए जरूरी अमीनो एसिड तैयार करता है । इसकी कमी से लोगों का बौद्धिक विकास प्रभावित होता है और कई बार इसकी कमी से मौत भी हो जाती है । लाइसिन प्रोटीन में ब्लॉक तैयार करता है । इसकी कमी से अनेमिया की शिकायत हो सकती है और शारीरिक विकास रुक सकता है । जिंक एक प्रकार का खनिज है जिसकी कमी से शारीरिक विकास रुकता है और शरीर रचना की कई क्रियाएं प्रभावित होती है।

    आम तौर पर चावल में सात से आठ प्रतिशत प्रोटीन होता है जबकि सी आर धान 31० में 1०.3 प्रतिशत प्रोटीन है । राष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान कटक ने इस किस्म का विकास किया है । खरीफ सीजन के लिए यह किस्म उपयुक्त है जो 125 दिनों में तैयार होता है और प्रति हेक्टेयर 45 क्विंटल तक की पैदावार देता है । ओडिशा , मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में इसकी खेती की जाती है ।

    डी डी आर धान 45 में 22.6 पी पी एम जिंक पाया जाता है जबकि प्रचलित किस्मों में इसकी मात्रा 12 से 16 पी पी एम होती है । करीब 13० दिनों में तैयार होने वाली इस किस्म की प्रति हेक्टेयर 5० क्विंटल पैदावार है । भारतीय धान अनुसंधान संस्थान हैदराबाद ने इसका विकास किया है जो खरीफ सीजन के लिए उपयुक्त है तथा कनार्टक , तमिलनाडु , आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में इसकी खेती की जाती है ।

    भारतीय धान अनुसंधान संस्थान हैदराबाद ने ही डी डी आर धान 48 किस्म का विकास किया है जिसमें 24 पी पी एम जिंक है । करीब 138 दिनों में तैयार होने वाली इस किस्म की प्रति हेक्टेयर 52 क्विंटल पैदावार है । आंध्र प्रदेश , तेलंगाना , तमिलनाडु , केरल और कनार्टक में इसकी खेती की जाती है ।

    डी डी आर धान 49 में 25.2 पी पी एम जिंक हैं जिसकी प्रति हेक्टेयर 5० क्विंटल पैदावार है । खरीफ और रबी सीजन में की जाती है जो 13० दिनों में तैयार हो जाती है । केरल , गुजरात और महाराष्ट्र में इसकी खेती की जाती है । जिनको राइस एम एस में 27.4 पी पी एम जिंक है जिसकी पैदावार 58 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है । पश्चिम बंगाल , ओडिशा और छत्तीसगढ़ में इसकी खेती की जाती है ।

    सी आर धान 311 में 1०.1 प्रतिशत प्रोटीन और 42 पी पी एम जिंक है । राष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान कटक ने इसका विकास किया है जो प्रति हेक्टेयर 46.2 क्विंटल की पैदावार देता है । करीब 124 दिनों में तैयार होने वाली इस किस्म की खेती ओडिशा में की जा रही है ।

     

    खाना खजाना / शौर्यपथ / मीठे के शौकीन लोग मीठा खाने के लिए किसी त्योहार या मौके के मोहताज नहीं होते। मीठे का नाम सुनते ही मन में गाजर का हलवा,मूंग दाल हलवा या फिर लौकी के हलवे का ख्याल सबसे पहले आता है। लेकिन मीठे में एक डेसर्ट ऐसा भी है जो डाइनिंग टेबल पर आते ही स्वाद में इन सब हलवों की छुट्टी कर देता है। जी हां और वो है कद्दू का हलवा। तो देर किस बात की क्यों न आज ही घर पर परिवार के लोगों को यह मीठा सरप्राइज दिया जाए। चलिए जानते हैं कैसे बनाया जाता है कद्दू का हलवा।

    सामग्री-
    3 कप कद्दू
    1 कप पानी
    2 चम्मच खरबूज के बीज
    2 चम्मच घी
    1/2 कप चीनी
    1 मुट्ठी ड्राई फ्रूट्स
    4 हरी इलायची

    कद्दू का हलवा बनाने की वि​धि-
    कद्दू का हलवा बनाने के लिए सबसे पहले कद्दू को छिलके निकालकर उसे छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें। कद्दू काटने के बाद सभी ड्राई फ्रूट्स को भी बारीक काट लें। अब एक प्रेशर कुकर को गैस पर मध्यम आंच पर रख दें। कुकर में थोड़ा सा घी गर्म करके उसमें कटा हुआ कद्दू डालकर करीब 10 मिनट तक चलाएं। जब कद्दू पानी छोड़ने लगे तो उसमें थोड़ा सा पानी और डालकर उसे अच्छे से मिला लें। अब कुकर बंद करके उसमें 4 से 5 सीटी लगा लें।

    जब प्रेशर कुकर की सारी सीटी निकल जाएं तो ढक्कन खोलकर देख लें कि कद्दू पका है या नहीं। इसके बाद गैस को धीमी आंच पर करके कद्दू को मैश करके थोड़ी देर के लिए ऐसे ही रख दें।अब कद्दू में चीनी और इलायची पाउडर मिला कर तब तक चलाएं जब तक कि वह गाढ़ा न हो जाए। गाढ़ा होने के बाद खरबूजे के बीज और ड्राई फ्रूट्स डालकर हलवे को एक मिनट तक पकाते रहें। जब हलवा बन जाए तो उसे एक सर्विंग बाउल में निकालकर खरबूजे के बीज और कटे हुए ड्राई फ्रूट्स से गार्निश करके सर्व करें। अब इस हलवे को ठंडा या गर्म, हर तरह से खा सकते हैं।

     

             पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ का मंदिर रहस्यों से भरा हुआ है। पुराणों के अनुसार, पुरी में भगवान विष्णु ने पुरुषोत्तम नीलमाधव के रूप में अवतार लिया। यह मंदिर भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है। इनकी नगरी जगन्नाथपुरी या पुरी कहलाई। पुरी को चार धाम में से एक माना जाता है। पुरी को धरती का बैकुंठ भी कहा गया है।

    इस मंदिर में भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ भगवान विराजमान हैं। चैतन्य महाप्रभु इस नगरी में कई साल रहे। पुरी की रथयात्रा विश्व की सबसे बड़ी रथयात्रा मानी जाती है। इस मंदिर का रसोई घर दुनिया का सबसे बड़ा रसोईघर माना जाता है। कितने भी श्रद्धालु मंदिर में आ जाएं, लेकिन यहां अन्न की कभी कमी नहीं होती है। मंदिर के पट बंद होते ही प्रसाद भी समाप्त हो जाता है। रसोईघर में चूल्हे पर एक के ऊपर एक सात बर्तन रखकर प्रसाद तैयार किया जाता है और सबसे ऊपर वाले बर्तन का प्रसाद सबसे पहले तैयार होता है। मंदिर के शिखर पर लगा पवित्र सुदर्शन चक्र अष्टधातु से निर्मित है। इसे स्‍थापित करने की तकनीक आज भी रहस्‍य है। पुरी में आप कहीं भी हों, सुदर्शन चक्र को हमेशा सामने ही पाएंगे। मंदिर के शिखर पर लगा ध्वज हमेशा हवा के विपरीत लहराता है। कहा जाता है कि इस मंदिर के ऊपर से कभी कोई पक्षी या विमान नहीं उड़ पाता है। एक पुजारी मंदिर के 45 मंजिला शिखर पर स्थित ध्वज को रोजाना बदलते हैं। कहा जाता है कि अगर एक दिन भी ध्वज नहीं बदला गया तो मंदिर 18 वर्षों के लिए बंद हो जाएगा। मंदिर के मुख्य गुंबद की छाया किसी भी समय जमीन पर नहीं पड़ती है। महान सिख सम्राट महाराजा रणजीत सिंह ने मंदिर को प्रचुर मात्रा में स्वर्ण दान किया था। उन्होंने वसीयत की थी कि कोहिनूर हीरा इस मंदिर को दान कर दिया जाए।

     

    लाइफस्टाइल /शौर्यपथ / कड़ी मेहनत के बावजूद भी अगर सफलता का रास्ता आपको कोसों दूर लग रहा हैं, जिसकी वजह से आपके भीतर छिपा आत्मविश्वास कम होने लगा है तो घबराइए मत बस जीवन में कामयाबी हासिल करने के लिए अपनाएं ये 5 सक्सेस मंत्र।

    असफल होने से न डरें-
    कई बार जीवन में मिलने वाली असफलता व्यक्ति का मनोबल तोड़कर रख देती है। ऐसे में सफलता हासिल करने के लिए जरूरी है सबसे पहले अपने मन से खुद के असफल होने का डर निकाल दीजिए। असफलता का डर ही व्यक्ति को कड़ी मेहनत के बावजूद सफलता के शिखर पर नहीं पहुंचने देता है।

    लोगों से बढ़ाएं संपर्क-
    जीवन में वही व्यक्ति सफल होता है जो मेहनत के साथ-साथ लोगों के साथ अपने संपर्क भी मधुर बनाए रखता है। ऐसा करने से उसे विभिन्न बातों के बारे में जानकारी सहज रूप से प्राप्त हो जाती है जो उसे उसके लक्ष्य तक पहुंचने में उसकी मदद करती है।

    प्रतिस्पर्धा के लिए हमेशा रहें तैयार-
    सफल होने के लिए व्यक्ति को हमेशा प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार रहना चाहिए। इसके अलावा हमेशा अपने कॉम्पिटिटर से भी नई-नई चीजें सीखने की कोशिश करनी चाहिए। वह किस तरह सफल हो रहे हैं, इस बात से इंस्प्रेशन लें ताकि भविष्य में जरूरत पड़ने पर आप भी उसी युक्ति से जीवन में सफलता हासिल कर सकें।

    जीवन में बनाएं अपने खुद के नियम-
    पर्सनल लाइफ हो या प्रोफेशनल, हर व्यक्ति को जीवन में अपना लक्ष्य हासिल करने के लिए कुछ उसूल जरूर बनाने चाहिए। ऐसा करने से व्यक्ति अनुशासन से बंधा रहता है जो उसे सफलता की सीढ़ी चढ़ने में मदद करता है।

    निरन्तर करें प्रयास-
    हर महान व्यक्ति ने जीवन में सफलता हासिल करने के लिए कठिन परिश्रम का ही सहारा लिया है। सफल होने के लिए व्यक्ति को अपने पहले प्रयास में की गई गलती को खोजना चाहिए। उस गलती को सुधारने की कोशिश करें। धीरे-धीरे सफलता के रास्ते की बाधा बनने वाली आपकी सारी कमियां दूर हो जाएंगी।

     

    धर्म संसार / शौर्यपथ / हमारे देश में देवी को प्रसन्न करने के लिए अनेक व्रत और त्योहार मनाए जाते हैं। नवरात्र भी इनमें से एक है, लेकिन ज्यातादर लोग सिर्फ दो नवरात्र (चैत्र व शारदीय नवरात्र) के बारे में ही जानते हैं। बहुत कम लोग ही यह जानते हैं कि एक वर्ष में चार नवरात्र आते हैं। चैत्र और आश्विन मास के नवरात्र सामान्य रहते हैं, जबिक माघ और आषाढ़ मास के नवरात्र गुप्त रहते हैं। गुप्त नवरात्र में विशेष रूप से तंत्र-मंत्र से संबंधित उपासना की जाती है।

    आषाढ़ मास के गुप्त नवरात्र 22 से 29 जून तक रहेंगे। पंडित राजकुमार शास्त्री के अनुसार इन दिनों दस महाविद्याओं की आराधना की जाती है। ये दस महाविद्याएं हैं- काली, तारा देवी, त्रिपुर-सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुरी भैरवी, मां धूमावती, मां बगलामुखी, मातंगी व कमला देवी। महाविद्याओं की पूजा पूरे विधि-विधान के साथ ही की जानी चाहिए, अन्यथा पूजा का विपरीत असर भी हो सकता है। इसीलिए किसी योग्य ब्राह्मण के मार्गदर्शन में ही गुप्त नवरात्र की पूजा करनी चाहिए।

    गुप्त नवरात्र का महत्व
    आपको जानकर आश्चर्य होगा कि गुप्त नवरात्र का महत्व प्रकट नवरात्र से अधिक होता है। ये नवरात्र साधकों के लिए खास होते हैं। इन समय साधक को सिद्धिया मिलती हैं। इन नवरात्रों में दस महाविद्याओं की साधना करके साधक मनोवांछित फल पा सकते हैं।

    गुप्त नवरात्र में संहारकर्ता देवी-देवताओं के गणों एवं गणिकाओं अर्थात भूत-प्रेत, पिशाच, बैताल, डाकिनी, शाकिनी, खण्डगी, शूलनी, शववाहनी, शवरूढ़ा आदि की साधना की जाती है। ऐसी साधनाएं शाक्त मतानुसार शीघ्र ही सफल होती हैं। दक्षिणी साधना, योगिनी साधना, भैरवी साधना के साथ पंच मकार (मद्य, मछली, मुद्रा, मैथुन, मांस) की साधना भी इसी नवरात्र में की जाती है।

    गुप्त नवरात्र में दुर्गा सप्तशती का पाठ
    नवरात्र के दौरान श्री दुर्गा सप्तशती के पाठ को अत्‍यधिक महत्‍वपूर्ण माना गया है। इस दुर्गा सप्‍तशती को ही शतचण्डि, नवचण्डि अथवा चण्डि पाठ भी कहते हैं और रामायण के दौरान लंका पर चढ़ाई करने से पहले भगवान श्रीराम ने इसी चंडी पाठ का आयोजन किया था, जो कि शारदीय नवरात्र के रूप में आश्विन मास की शुक्‍ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तिथि तक रहती है।

    इसीलिए नवरात्र के दौरान नव दुर्गा के नौ रूपों का ध्‍यान, उपासना व आराधना की जाती है तथा नवरात्र के प्रत्‍येक दिन मां दुर्गा के एक-एक शक्ति रूप का पूजन किया जाता है। ब्रह्मदेव ने कहा कि जो मनुष्‍य दुर्गा सप्तशती का पाठ करेगा उसे सुख मिलेगा।

    तांत्रिक क्रिया के लिए उपयुक्त समय
    आम नवरात्र में सात्विक और तांत्रिक दोनों तरह की पूजा होती है लेकिन गुप्त नवरात्र में अधिकतर तांत्रिक पूजा होती है। तांत्रिक सिद्धियां पाने के लिए यह एक अच्छा अवसर है। इसके लिए किसी सूनसान जगह पर जाकर दस महाविद्याओं की साधना करें। नवरात्र तक माता के मंत्र का 108 बार जाप भी करें। यही नहीं सिद्धिकुंजिकास्तोत्र का 18 बार पाठ करें।. ब्रम्ह मुहूर्त में श्रीरामरक्षास्तोत्र का पाठ आपको दैहिक, दैविक और भौतिक तापों से मुक्त करता है।

    इन बातों का रखें ध्यान:

    सर्वप्रथम एक स्वच्छ स्थान चुनकर देवी की स्थापना करें। स्थान ऐसा हो, जहां किसी का आना जाना न हो।
    स्वयं के साथ घर-परिवार में भी तामसिक भोजन का उपयोग न करें। किसी भी स्त्री को देवी के रूप में ही देखें।
    अच्छे परिणाम के लिए गुप्त नवरात्र में साधना की गोपनीयता अनिवार्य है। जो साधना कर रहा हो और जो (ब्राह्मण) साधना करा रहा हो को ही यह बात हो तो अतिउत्तम है।
    साधना के समय पूजा सामग्री का विशेष तौर पर ध्यान रखें, कुछ भी कम या छूटे नहीं।
    गुप्त नवरात्र तांत्रिक साधनाएं करने के लिए जाना जाता है। इस साधना से देवी प्रसन्न होती हैं तथा मनचाहा वर देती हैं।

      रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ शासन द्वारा शिक्षण सत्र 2020-21 में प्रयास आवासीय विद्यालय में कक्षा 9वीं में और एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में कक्षा 6वीं में प्रवेश के लिए चयन परीक्षा की तिथियों में संशोधन किया गया है। संशोधित कार्यक्रम के अनुसार प्रयास आवासीय विद्यालयों के कक्षा 9वीं में प्रवेश के लिए परीक्षा 14 जुलाई को सुबह 10.30 से 1.00 बजे तक आयोजित की जाएगी। इसी प्रकार एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में कक्षा 6वीं में प्रवेश हेतु चयन परीक्षा संशोधित तिथि के अनुसार 16 जुलाई को प्रातः 10.30 से 12.30 बजे तक आयोजित होगी। 
        राज्य शासन के आदिम जाति तथा अनुसूचित जनजाति विकास विभाग द्वारा इस संबंध में सभी जिलों के सहायक आयुक्तों को प्रवेश हेतु चयन परीक्षा के संशोधित कार्यक्रम के अनुसार व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए है। उल्लेखनीय है कि प्रयास आवसीय विद्यालयों में प्रवेश के लिए पूर्व में चयन परीक्षा 24 जून को और एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में प्रवेश हेतु चयन परीक्षा 26 जून को होनी थी। इन परीक्षाओं की तिथियों में संशोधन किया गया है। अब संशोधित कार्यक्रम के अनुसार प्रयास आवासीय विद्यालय में प्रवेश हेतु चयन परीक्षा 14 जुलाई को और एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में प्रवेश हेतु चयन परीक्षा 16 जुलाई को निर्धारित की गई है।  

       रायपुर / शौर्यपथ /  खाद्य एवं संस्कृति मंत्री  अमरजीत भगत ने आज सीतापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत धरमपुर में वन विभाग के उच्च तकनीक रोपणी का शिलान्यास किया। वन विभाग द्वारा धरमपुर में करीब 5 हेक्टेयर क्षेत्र में कैम्पा योजना के तहत उन्नत तकनीक रोपणी विकसित किया जाएगा। पौधों की रोपणी उन्नत तकनीक से होगी जिससे पौधे स्वस्थ एवं उन्नत होंगे। इस मौक पर मंत्री भगत ने कहा कि जीवन के लिए पेड़ और जंगलों का होना बहुत जरुरी है। पेड़ से हमें जीवन दायनी ऑक्सीजन मिलती है। ऑक्सीजन की कमी न हो इसके लिए अब शहरों में ऑक्सीजोन बनाकर पेड़ों को सहेजने का काम किया जा रहा है। गांव में अभी ऐसी स्थिति नही आई है। लेकिन जंगलों को नही बचाएंगे तो यहां भी स्थित बिगड़ सकती है इसलिये जंगलों को बचाएं और अधिक से अधिक पेड़ लगाएं।
        मंत्री ने मैनपाट जनपद पंचायत परिसर में वृक्षारोपण किया। उन्होंने 5 नवीन ग्राम पंचायतों में नवीन भवन का शिलान्यास एवं 64 लोगों को स्वेच्छानुदान राशि का चेक वितरित किया। इसी प्रकार बतौली विकासखंड में 2 नवीन ग्राम पंचायतों में पंचायत भवन निर्माण के लिए भूमिपूजन किया तथा 67 हितग्राहियों को स्वेच्छानुदान राशि का चेक वितरित किया। साथ ही सीतापुर जनपद के 132 लोगों को स्वेच्छानुदान का चेक प्रदान किया। इस मौके पर मैनपाट जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती उर्मिला खेस, मुख्य वन संरक्षक श्री एबी मिंज, डी एफओ,एस डीएम सहित अन्य अधिकारी एवं नागरिक उपस्थित थे।
     

    नजरिया /शौर्यपथ /भारत सात बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) का अस्थाई सदस्य रह चुका है। अब उसके सामने अपने आठवें कार्यकाल को खास बनाने की चुनौती है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अस्थाई सदस्य के रूप में 2012 में अपना सातवां कार्यकाल पूरा करने के तत्काल बाद भारत ने सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता के लिए अपना अभियान शुरू कर दिया था। इस दिशा में सार्वजनिक रूप से साल 2013 में पहला ठोस कदम उठाया गया था, जब अफगानिस्तान ने भारत के पक्ष में सुरक्षा परिषद में अस्थाई सदस्यता के लिए अपना दावा करने की योजना से कदम पीछे खींच लिए थे। तब संयुक्त राष्ट्र में एशिया प्रशांत समूह के अन्य 54 सदस्य देशों में से कोई देश भारत को चुनौती देने के लिए आगे नहीं आया था। वह पाकिस्तान भी नहीं, जिसने सुरक्षा परिषद में भारत के चुनाव का स्वागत करने से इनकार कर दिया था।
    इस बार 2019 में भी एशिया-प्रशांत देशों के समूह ने सर्वसम्मति से भारत को अपने उम्मीदवार के रूप में समर्थन दिया, जिसके परिणामस्वरूप पिछले सप्ताह भारत को 192 वोटों में से 184 के साथ जोरदार जीत हासिल हुई। अस्थाई सदस्यता की राह में किसी देश ने भारत का विरोध नहीं किया। यह एक ऐसी मुश्किल जीत है, जो कई सुखद संयोगों से मिली है। 1 जनवरी, 2021 से शुरू होने वाला भारत का दो साल का कार्यकाल अपने अंतिम वर्ष में देश की स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ और पहली बार दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के जी-20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी के साथ सामने आएगा। अब सवाल उठता है, सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता के लिए प्रचार के साथ इस पूरे कार्य या पैकेज को कैसे अंजाम दिया जाए? क्या भारत इस बार फिर स्थाई सदस्यता के लिए जोर लगाने को ठीक से तैयार है?
    बेशक, भारत ने 2011 से शुरू हुए अपने सातवें कार्यकाल का उपयोग न केवल स्थाई सदस्यता के अपने दावे को चमकाने के लिए, बल्कि इसे मुमकिन बनाने के लिए भी किया था। कुछ भारतीय विशेषज्ञों ने इसे स्थाई सदस्यता के लिए पूर्वाभ्यास भी कहा था। तब भारत ने कोशिश की, हालांकि उसकी कोशिशों का कोई तात्कालिक नतीजा नहीं निकला था, पर भारत इस मामले या मांग को आगे बढ़ाने में जरूर कामयाब हुआ था। सरकारों के बीच वार्ता, जिसे इंटर गवर्नमेंट निगोशिएशन (आईजीएन) भी कहते हैं, आगे बढ़ी थी और साल 2015 में पाठ (या लिखत-पढ़त) आधारित वार्ताओं तक पहुंच गई थी।
    भारत ने 1 जनवरी से अपना आठवां कार्यकाल शुरू करने की योजना बनाई है। इसी इरादे से एक नए व्यापक विचार के तहत बहुपक्षीय तंत्र बनाने को प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है। यह अपनी स्थाई सदस्यता के लिए पूरे पैकेज के तहत फिर कोशिश करने का एक और तरीका है। साथ ही, अन्य प्राथमिकताएं भी हैं, जैसे आतंकवाद के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अनुमोदन व्यवस्था का गैर-राजनीतिकरण करना, लेकिन कुल मिलाकर, भारत के लिए सुरक्षा परिषद में सुधार का मुद्दा उचित ही शीर्ष पर है। ठीक इसी समय भारत अपनी अस्थाई सदस्यता का उपयोग इस तरह करे, ताकि पता चले कि इसकी क्या सार्थकता है और क्या नहीं है। सुरक्षा परिषद में किसी फैसले पर ‘हां’ या ‘नहीं’ वोट करना एक अनुपस्थित वोट के आत्म-औचित्य की तुलना में कहीं अधिक दम और चरित्र रखता है।
    सुरक्षा परिषद के किसी भी स्थाई सदस्य के साथ गुट न बनाना एक खूबी हो सकती है। स्थाई सदस्यों अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और चीन के साथ गुट नहीं बनाते हुए दशकों तक गुटनिरपेक्षता से बंधे रहना उस वक्त भारत के लिए ठीक रहा था। अब भारत सहज आधार पर अपना एक स्टैंड ले और इसके साथ ही किसी स्थाई सदस्य देश के साथ मुखर-पक्षधरता को आजमाए, तो इसके बड़े रणनीतिक फायदे मुमकिन हैं।
    235 ई, 43वीं स्ट्रीट, न्यूयॉर्क सिटी, इसी इमारत में साल 1993 से भारत का स्थाई आयोग मौजूद है। मैनहट्टन के पड़ोस में यह इमारत सिर्फ इसलिए नहीं खड़ी है, क्योंकि यह सबसे ऊंची है, बल्कि यह दिवंगत आर्किटेक्ट चाल्र्स कोरिया की साहसिक और मुखर वास्तु-कला के अपने चरित्र के कारण भी शोभायमान है। यह समय है, जब हम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वैसे ही भाव-स्वभाव के साथ पेश आएं। यशवंत राज, अमेरिका में हिन्दुस्तान टाइम्स संवाददाता

     

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