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सम्पादकीय लेख / शौर्यपथ / कोरोना, बारिश और त्योहारों के समय गरीब वर्ग को अन्न से संबल देने का प्रयास सराहनीय और स्वागतयोग्य है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ताजा घोषणा मूल रूप से देश के दरिद्र नारायण की सुधि लेने की ऐसी कोशिश है, जिसकी उम्मीद पिछले एक महीने से बंधी हुई थी। सरकार ने जुलाई से नवंबर तक पूरे पांच महीने तक देश के करीब 80 करोड़ जरूरतमंदों को पांच-पांच किलो गेहूं या चावल और चना मुफ्त देने का जो फैसला किया है, उससे देश को एक मानवीय आधार मिलेगा। यह आधार पूरे गुजारे के लिए भले पर्याप्त न हो, लेकिन इससे अभावग्रस्त परिवारों का मनोबल बढे़गा। इस राहत के उपरांत वे अपने थोडे़ से प्रयास या रोजगार योजनाओं का लाभ उठाकर अपने दिन ठीक से गुजार सकेंगे। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के नवंबर तक विस्तार से अभावग्रस्त लोगों को अपने यथास्थान रहने की प्रेरणा भी मिलेगी। विशेष रूप से बिहार जैसे श्रमिक बहुल राज्य में छठ पूजा का बहुत महत्व है, जिसे प्रधानमंत्री ने भी जाहिर किया है। बड़ी संख्या में ऐसे कामगार होंगे, जो अब नवंबर में छठ पूजा के समापन के बाद ही यात्रा की योजना बनाएंगे। बेशक, देखने वाले इस घोषणा को चुनाव से जोड़कर भी देखेंगे, लेकिन वह भी इस योजना के व्यापक महत्व से इनकार नहीं कर पाएंगे। एक और अच्छी बात है कि इस योजना का श्रेय किसानों और ईमानदार करदाताओं को दिया गया है।
जब देश में कोरोना का संक्रमण बढ़ता जा रहा है, तब सरकार का लोक-कल्याणकारी स्वरूप सशक्त होना ही चाहिए। इस योजना के विस्तार पर अगर 90 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च होंगे, तो कोई बात नहीं। इस देश में ऐसी क्षमता है कि वह गरीबों के साथ खड़ा हो सकता है। यदि कोरोना के समय अमेरिका की कुल जनसंख्या से तीन गुना अधिक लोगों को हमारी सरकारों ने मुफ्त अनाज दिया है, तो कोई आश्चर्य नहीं। बहरहाल, यह भी जरूरी है कि ऐसी उदार योजनाओं का लाभ पूरी ईमानदारी से जरूरतमंदों तक पहुंचे। निचले स्तर पर वितरण से जुड़े लोगों के लिए भी यह परीक्षा और दरिद्र नारायण की सच्ची सेवा का समय है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी बहाने से किसी भी जरूरतमंद को योजनाओं के लाभ से वंचित न किया जाए।
प्रधानमंत्री के भाषण में एक और महत्वपूर्ण बात शामिल है, जो सबका ध्यान खींच रही है। ‘एक देश एक राशन कार्ड’ की घोषणा वैसे तो वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मई महीने के मध्य में ही कर दी थी और उन्होंने यह भी बता दिया था कि ऐसा मार्च 2021 में संभव हो जाएगा, लेकिन प्रधानमंत्री के बोलने से लोगों की उम्मीदें और बढ़ गई हैं। एक देश एक राशन कार्ड लंबे समय से इस देश की जरूरत रही है। सभी राज्य अगर इस व्यवस्था को मिलकर पहले ही साकार कर लेते, तो संभव है, कोरोना के समय लाखों की संख्या में लोगों को अपने घर न लौटना पड़ता। जो जहां है, वहीं रहता और वहीं उसे राशन कार्ड के तहत जरूरी सामान और अनाज उपलब्ध करा दिया जाता। अब समय आ गया है कि एक देश एक राशन कार्ड और मुफ्त अनाज जैसे बुनियादी इंतजामों को स्थानीय सियासत से परे रखकर मदद का स्थाई ढांचा विकसित किया जाए। ऐसी मदद की व्यवस्था जितनी उदार और व्यापक बनेगी, हमारा देश उतनी ही राहत और खुशी महसूस करेगा।
नजरिया /शौर्यपथ / इस साल दसवीं में बागपत की रिया जैन ने दसवीं की बोर्ड परीक्षा में पहला स्थान प्राप्त किया है। रिया ने 96.67 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। बागपत की रहने वाली रिया श्रीराम एस एम इंटर कॉलेज की छात्रा है। इस परीक्षा में आठ लाख से अधिक विद्यार्थी बैठे थे। रिया के पिता भारत भूषण की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। वह पटरी पर चुन्नियां बेचने का काम करते हैं। घर का गुजारा मुश्किल से चलता है। रिया की फीस देने को भी पैसे नहीं थे। तब स्कूल मैनेजमेंट ने रिया की फीस चुकाई। पिता अपनी बच्ची की सफलता से बहुत खुश हैं। उन्हें शहर के बड़े-बड़े अधिकारी फोन करके बधाई दे रहे हैं। वह कहते हैं कि उनकी बेटी के कारण ही यह सब हो सका। रिया की सफलता इस बात का प्रमाण है कि मेहनत से बड़ी से बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। पैसे की तंगी भी उसमें बाधा नहीं बनती। अगर कोई बाधा है, तो मदद के हाथ भी उठते हैं। जैसे, उसकी परेशानी जानकर स्कूल प्रबंधन आगे आया। रिया ने बताया कि वह हर रोज चौदह-पंद्रह घंटे पढ़ाई करती थी। मुश्किलों का हल उसने परिश्रम में ढूंढ़ा। परेशानी से हार न मानने का उसका फैसला अनुकरणीय है।
दूसरे स्थान पर बाराबंकी के अभिमन्यु वर्मा रहे, उन्हें 95.83 प्रतिशत अंक मिले। तीसरा स्थान भी बाराबंकी के योगेश प्रताप सिंह को मिला। छोटे शहरों के इन बच्चों की कहानियां अभूतपूर्व हैं। ऐसी ही एक बच्ची के पिता मजदूर हैं। लॉकडाउन के दौरान उनका काम भी छूट गया था, मगर उसने भी बहुत अच्छे अंक प्राप्त किए हैं।
बच्चे आफत में भी सफलता हासिल कर सकते हैं। गरीबी उन्हें आगे बढ़ने से नहीं रोक पाती। इससे मध्यवर्ग के उन माता-पिता को जरूर सबक लेना चाहिए, जिन्हें लगता है कि जब तक बच्चे किसी नामी-गिरामी स्कूल में नहीं पढ़ेंगे, तब तक वे कुछ कर ही नहीं सकते। इसके लिए उनकी गुंजाइश हो न हो, वे बड़े-बड़े स्कूलों की तरफ भागते हैं। कर्ज भी लेना पड़े, तो बच्चों की ऊंची फीस भरते हैं। दिल्ली में यह मारामारी बहुत दिखाई देती है। आज के दिन में, जब बहुत से लोगों की नौकरियां चली गई हैं, वे बातचीत में पहली चिंता यही प्रकट करते हैं कि अब बच्चों की हजारों की फीस और ऊपरी खर्चे कहां से देंगे? बच्चे को किसी सरकारी स्कूल में भेजना नहीं चाहते। समाज और जान-पहचान वालों में हंसी उड़ेगी, सो अलग। इसके अलावा माता-पिता सोचते हैं कि जिन कठिनाइयों का सामना उन्होंने अपने बचपन में किया था, वे अपने बच्चों को उनसे बचाएं। इसीलिए वे बच्चे की हर इच्छा पूरी करने की कोशिश करते हैं, जबकि अनेक विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को मुश्किलों का सामना करना सिखाना चाहिए, क्योंकि माता-पिता उनकी मदद करने के लिए हमेशा नहीं रहेंगे। इस दुनिया का सामना उन्हें अपने दम पर ही करना होगा। यह भी कहा जाता है कि जिन बच्चों ने कभी कठिनाइयां नहीं देखीं, यदि उनके सामने अचानक मुश्किलें आएं, तो वे उनका सामना नहीं कर पाते हैं। वे उनसे दूर भागते हैं। कई बार अवसाद का शिकार हो जाते हैं। और आत्महत्या जैसे घातक कदम भी उठा लेते हैं।
रिया जैन के बारे में जानकर अपने पुराने नेता याद आते हैं। कितनों की कहानियां हमने पढ़ी हैं। गांधीजी अपनी पुस्तक सत्य के प्रयोग में अनेक परेशानियों का जिक्र करते हैं, पर कभी घुटने नहीं टेकते हैं। परेशानियों का सामना करने का हौसला उनमें हमेशा दिखाई देता है। किसी भी बड़ी हस्ती को बनाने में चुनौतियों का बड़ा हाथ होता है। इसी तरह से भूतपूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का उदाहरण है। बताया जाता है कि नदी पार करके उन्हें स्कूल जाना पड़ता था। वह तैरकर नदी पार करते थे। जाहिर है, मल्लाह को देने के लिए पैसे नहीं रहे होंगे। जब वह प्रधानमंत्री बने, तब भी उनके पास बहुत मामूली कपड़े थे। उन्हें फटे कपड़े पहनने से भी परहेज नहीं था। उन्होंने पद के कारण अपने रहन-सहन और सादगी से कोई समझौता नहीं किया। इस तरह की कथाओं से हमारा इतिहास भरा पड़ा है। सादगी एक बड़ा जीवन मूल्य है। पंक्ति के अंतिम आदमी की चिंता ने भी इसे हमेशा बनाए रखा है। अपने बड़े नेताओं के संघर्ष और उनकी सफलता से भी तो बहुत कुछ सीखा जा सकता है।
सोहनलाल द्विवेदी की मशहूर पंक्तियां हैं, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
(ये लेखिका के अपने विचार हैं)क्षमा शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार
मेलबॉक्स / शौर्यपथ / दुनिया भर में कोरोना वायरस का कहर जारी है। पूरी प्रबलता के साथ इससे बचने के उपाय भी ढूंढ़े जा रहे हैं, मगर अब तक सफलता हाथ नहीं लगी है। हालात की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार ने भी ठोस कदम उठाए हैं। यहां लॉकडाउन का विकल्प भी अपनाया गया। इस दौरान बेशक कई परेशानियां आईं, जैसे- विकास दर का गिरना, शैक्षणिक कार्यों में स्थिरता, मजदूरों और गरीब वर्गों पर भुखमरी की मार, मगर हम सब कहीं न कहीं सुरक्षित जरूर थे। हालांकि, जैसे-जैसे अनलॉक की प्रक्रिया शुरू हुई, लोगों ने समझा कि शायद वे अब कोरोना से बच गए हैं। जिस वक्त हमें सर्वाधिक सचेत रहने की जरूरत है, हम उसी समय लापरवाही कर रहे हैं। इस कारण से हमारे देश में कोरोना का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। हमें यह समझना होगा कि सरकार तभी तक सहायक है, जब हम खुद सावधान हैं। चूंकि यह जंग लंबी चलेगी, इसलिए सबको मिलकर सावधानी से धैर्यपूर्वक इसका सामना करना होगा।
निशा कश्यप, औरंगाबाद, बिहार
यादों में नागार्जुन
पिछले दिनों ज्येष्ठ पूर्णिमा को हमने बाबा नागार्जुन का जन्मदिन मनाया। बाबा का जन्म दरभंगा के तरौनी गांव में हुआ था और अपनी अनोखी लेखनी से उन्होंने देश-दुनिया में नाम कमाया। वह घुमक्कड़ी के शौकीन और फक्कड़ स्वभाव के थे। देखा जाए, तो मनुष्य अनुभवों से ही सीखता है और सीखने की इस प्रक्रिया में यात्राएं अलग मुकाम रखती हैं। यही वजह है कि नागार्जुन की लेखनी में आम लोग थे, उनका दर्द था और उनकी उम्मीदें थीं। उन्होंने खुद एक बार कहा था कि जिसने जनजीवन को नजदीक से नहीं देखा, वह भला अच्छी रचनाएं कैसे कर सकता है? बहरहाल, जिस तरह की उनकी लेखनी सांप्रदायिक और फासीवादी ताकतों के खिलाफ रही, उसकी आज भी हमें जरूरत है। ऐसे कवि कभी नहीं मरते।
गौरव सक्सेना, करमगंज, इटावा
अच्छा फैसला
भारत सरकार ने चीन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उसके 59 एप प्रतिबंधित कर दिए। भारत की संप्रभुता और अखंडता के लिए यह एक सराहनीय कदम है। करोड़ों भारतीय इन एप से जुड़े थे, और उनके डाटा के गलत इस्तेमाल की आशंका बढ़ रही थी। टिक टॉक पर तो बच्चे और युवा वीडियो बनाने के इतने आदी हो गए थे कि ज्यादातर किशोरों का वक्त हमेशा मोबाइल पर ही बीतने लगा था। अब चूंकि चीन के प्रति लोगों की भावनाएं बदली हैं, इसलिए सरकार ने भी सुखद फैसला लिया है। ऐसा करके सरकार ने देश की जनता के विश्वास को और अधिक मजबूत किया है। स्वदेश प्रेम की भावना को दृढ़ करके हमें पूरी सकारात्मकता के साथ अपनी सरकार का साथ देना चाहिए।
हरीश कुमार शर्मा, दिल्ली
विकल्प तलाशना जरूरी
हमारी सरकार द्वारा चीनी एप को प्रतिबंधित किए जाने से कुछ तो प्रभाव पडे़गा ही। आखिर हमारे बाजार का उपयोग करके चीन हमारे विरुद्ध ही अपने संसाधनों का इस्तेमाल कर रहा था। कम कीमत और अधिक उत्पादन के कारण चीन की कंपनियां पूरी दुनिया में अपना दबदबा बनाती जा रही हैं। यह एक ऐसी आर्थिक शक्ति है, जिसका हाथ दूसरे देश भी नहीं छोड़ना चाहते। यही कारण है कि भारत के पड़ोसी देश भी चीन के पाले में जाते हुए दिख रहे हैं। पाकिस्तान के बाद अब नेपाल भी कहीं न कहीं भारत के खिलाफ जाने की सोचने लगा है। साफ है, हमें अब हर सीमा पर सावधान रहना होगा। ऐसे में, किसी भी वस्तु का बहिष्कार करने से पहले हमें उसका विकल्प तलाशना होगा। उसके अपने देश में उत्पादन पर ध्यान देना होगा। ऐसा करने पर ही बहिष्कार प्रभावी हो सकेगा। अन्यथा एक बहिष्कार से कोई खास प्रभाव नहीं पड़ेगा।
मोहम्मद आसिफ
जामिया नगर, दिल्ली
ओपिनियन / शौर्यपथ /केंद्र सरकार ने 59 स्मार्टफोन एप को प्रतिबंधित करके चीन के प्रति अपना सख्त रुख दिखाया है। अब तक भारत में भी यही सोच हावी थी कि दोनों देशों का कारोबारी रिश्ता जितना मजबूत होगा, उतनी ही राजनीतिक घनिष्ठता बढ़ेगी, जिससे दोनों मुल्कों का नैसर्गिक विकास होगा। कहा भी जा रहा था कि मौजूदा सदी एशिया की है, जिसमें चीन और भारत मिलकर तरक्की की एक नई इबारत लिख सकते हैं। मगर चीन की हरकतें बताती हैं कि वह इससे इत्तिफाक नहीं रखता। उसकी नजर में यह सदी ‘चीन-केंद्रित’ है, जिसमें भारत की कोई जगह नहीं है। पूर्वी लद्दाख के गलवान का खूनी संघर्ष उसकी इसी सोच का नतीजा था। मगर अब कई चीनी एप पर पाबंदी लगाकर भारत ने साफ कर दिया है कि भारतीय बाजार में चीन की कंपनियों का दखल और सीमा पर खूनी टकराव, दोनों साथ-साथ नहीं चल सकते।
सवाल यह है कि चीन को इससे कितना नुकसान और हमें कितना फायदा होगा? इसके आर्थिक नुकसान का आकलन फिलहाल संभव नहीं है, क्योंकि ज्यादातर एप मुफ्त होते हैं। मगर, उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ने से एप पर आने वाले विज्ञापनों से डेवलपर्स (एप बनाने वाली कंपनी) को काफी फायदा मिलता है। चीन अपने यहां से यही लाभ उठाता रहा है। सेंसर टावर के आंकड़े बताते हैं कि 2019 में डाउनलोड किए गए नॉन-गेमिंग एप (खेल से जुड़े एप से अलग) में टिक टॉक सबसे ऊपर था, जबकि शीर्ष 10 एप में छह चीन के थे। चीन ने यह पैठ महज चार वर्षों में बनाई थी, क्योंकि इसी आंकडे़ के मुताबिक, 2015 में अपने यहां अमूमन अमेरिकी एप लोकप्रिय थे। यह देखते हुए कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा खुला बाजार है, केंद्र सरकार के फैसले से चीन को मिलने वाले फायदे में स्वाभाविक तौर पर कमी आ सकती है।
जाहिर है, यह आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाया गया पहला ठोस कदम है। यह हमारे लिए अवसरों के कई दरवाजे खोल सकता है। संभव है कि आने वाले दिनों में चीन से आयात पर रोक लगे और फिर, उन उत्पादों का स्वेदशी निर्माण हो। दरअसल, चीन किसी भी देश के बाजार में इसलिए दबदबा बनाता रहा है, क्योंकि उसके उत्पाद सस्ते होते हैं। प्रतिस्पद्र्धा खुले बाजार की मांग है, पर चीन की कंपनियां अपने सरकार द्वारा मिलने वाले प्रोत्साहन की वजह से उत्पादों की कीमतें अपेक्षाकृत कम रखती हैं। चीन की सरकार अपनी कंपनियों को सब्सिडी देकर दूसरे देश के बाजारों में पैठ जमाने में मदद करती है, और यह सुविधा सरकारी ही नहीं, निजी कंपनियों को भी हासिल है। नतीजतन, चीनी कंपनियां अन्य देशों के बाजार पर कब्जा करने में सफल रही हैं। भारत में भी उनके बढ़ते दबदबे की वजह यही है। यहां मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक ही नहीं, इन्फ्रास्ट्रक्चर में भी चीन की कंपनियां ठेके हासिल कर रही हैं। ऐसे में, यदि भारतीय बाजार के दरवाजे उनके लिए बंद हो जाते हैं, तो उनकी आर्थिक सेहत को काफी चोट पहुंचेगी।
चीनी एप पर जासूसी के आरोप बेजा नहीं हैं। हमें यह तो नहीं पता कि अपने एप के माध्यम से चीन ने अब तक हमारी कितनी जानकारियां हासिल कर ली हैं, मगर वह किस तरह से हमारा डाटा इकट्ठा कर रहा है, इसे कैमस्कैनर नामक एक एप के उदाहरण से समझा जा सकता है। इस एप से हम जिस दस्तावेज को स्कैन करते हैं, वह भारत से बाहर चीनी कंपनी के सर्वर पर सेव हो जाता है। इसका अर्थ है कि कैमस्कैनर से स्कैन की गई कोई जानकारी गोपनीय नहीं रहती। संभवत: इन्हीं वजहों से साल 2017 में रक्षा मंत्रालय ने अपने अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए चीन से संचालित 42 एप के इस्तेमाल पर पाबंदी लगा दी थी। कहा तो यह भी जाता है कि चीन ने अपनी डिजिटल इंडस्ट्री अमेरिका से चोरी करके तैयार की है। चीन पर जासूसी करने का आरोप पिछले दिनों अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट सी ओब्रेन ने भी लगाया है। 26 जून को दिए गए अपने एक वक्तव्य में उन्होंने बताया है कि किस तरह चीन से आने वाले छात्र अमेरिकी विश्वविद्यालयों से गे्रजुएट करने के बाद अमेरिकी कंपनियों में काम हासिल करते हैं और यहां की तकनीक चुराकर चीन ले जाते हैं।
साफ है, केंद्र सरकार के ताजा फैसले से न सिर्फ हम अपने डाटा को सुरक्षित रखने में सफल हो सकेंगे, बल्कि भारतीय एप को भी इससे प्रोत्साहन मिलेगा। तमाम क्षेत्रों में चीन पर बढ़ी हमारी निर्भरता को कम करने की भी यह एक अच्छी शुरुआत है। हालांकि, हमारे स्टार्ट-अप में चीन का काफी निवेश है, इसलिए बायकॉट और पाबंदी के इतर हमारी कोशिश यह भी होनी चाहिए कि चीनी निवेशकों को हतोत्साहित करें। इसके लिए हमें आने वाले समय में बाजार या निवेश में अपनी हिस्सेदारी बढ़ानी होगी और चीन की हिस्सेदारी कम करनी होगी। पिछले पांच वर्षों में जिस तरह से हमारी साइबर दुनिया में चीन का दखल बढ़ा है, उसी तरह से अगले पांच साल में उसे कम करने का लक्ष्य हमें बनाना होगा।
जरूरत चीन का विकल्प खोजने की भी है। हरेक क्षेत्र में हमें उसका तोड़ निकालना होगा। चीन से यदि हम अपना आयात रोकते हैं, तो हमें उन उत्पादों को अपने यहां बनाना होगा या फिर दूसरे देशों से उनका आयात करना होगा। इलेक्ट्रॉनिक चीजों के आयात के लिहाज से दक्षिण कोरिया, ताइवान और जापान जैसे देश चीन का विकल्प बन सकते हैं।
चीन का दबदबा घटाना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि यह स्थानीय विकल्पों को खत्म कर देता है। जैसे, चीन की ज्यादातर इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनियां सरकारी हैं, इसलिए सरकारी प्रोत्साहन पाकर वे बहुत कम कीमतों में ढांचागत निर्माण करती हैं। इससे स्थानीय कंपनियों का काम सिमटने लगता है। यह परंपरा अब बंद हो जानी चाहिए। चीन को आर्थिक चोट पहुंचाने की शुरुआत करके भारत सरकार ने यह साफ कर दिया है कि सीमा पर तनाव का जवाब सिर्फ बंदूक नहीं है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)प्रांजल शर्मा, डिजिटल नीति विशेषज्ञ
दुर्ग / शौर्यपथ / आज सुबह 6:30 बजे प्रारंभ हुई तेज बारिश से शहर की निचली बस्तियों में तेजी से पानी भरने की सूचना जैसे ही मिली महापौर धीरज बाकलीवाल ने तत्काल निगम की टीम को लेकर अधिकारियों के साथ मौके का मुआयना किया जहां-जहां पानी भराव की स्थिति थी निकासी की व्यवस्था कराएं । इसके अंतर्गत सिंधी कालोनी,रायपुर नाका,पद्मनाभपुर,शंकर नगर क्षेत्र, गुरुद्वारा के पीछे अग्रेसन चौक के पास महात्मा गांधी मार्केट, मालवीय नगर,प्रेम नगर सिकोला बस्ती की नालियों, नाला की स्थिति का जायजा लिया ।
जिला कलेक्टर सर्वेश्वर नरेन्द्र भूरे ने निगम आयुक्त इंद्रजीत बर्मन के साथ बारिश से जलभराव वाली स्थलों का भ्रमण कर जायजा लिया । उन्होंने गिरधारी नाला शंकर नाला संतरा बाड़ी सदानी नगर आदि क्षेत्रों का भ्रमण कर पानी निकासी की व्यवस्था करने निगम के स्वास्थ्य विभाग के दल को निर्देश दिए । बारिश के पानी का प्रवाह तेज था और दबाव भी इसके चलते दुर्गा चौक शंकर नगर क्षेत्र में के कुछ गली और बस्तियों में नाला से नीचे जगह होने के कारण पानी का भराव वहां हो गया था । भ्रमण के दौरान जहां भी पानी भरने की समस्या आईइस संबंध में जिला कलेक्टर श्री भूरे के निर्देश पर आयुक्त श्री भ्रमण द्वारा आने वाले समय के लिए जलभराव ना हो इसकी कार्य योजना बनाने की बात बताई गई। शहर के नालियों और नाला का मेहता सफाई होने के कारण 2 घंटे लगातार बारिश होने के बावजूद कहीं पर भी अधिक देर तक घरों में पानी भरने की समस्या नहीं आई डेढ़ से 2 घंटे के अंदर पानी का बहाव से पूरा क्षेत्र खाली हो गया ।
महापौर बाकलीवाल ने बताया सुबह के समय जैसे ही बारिश चालू हुई उसके आधे घंटे के बाद से लगातार अनेक बस्तियों से मुझे सूचना मिली वे निगम की टीम को लेकर तत्काल मौके पर पहुंचे । उन्होंने निगम अधिकारियों ईई मोहनपुरी गोस्वमी,जितेंद्र समैया,आरके पालिया के साथ भ्रमण कर शहर के किसी भी नाली और नाला में जाम की स्थिति ना हो इसका ध्यान रखने निर्देश विभागीय अधिकारी को दिए। साथ ही जलभराव से बचाव का स्थायी समाधान हेतु विस्तृत कार्य योजना तैयार करने निर्देश दिये । उन्होंनें न्यू पुलिस लाइन नाले के पानी के प्रवाह को कम करने नाले में बने एनीकेट के वाल को बंद करवा कर तालाब में पानी को डायवर्ट करवाया ।
उन्होनें ,उरला,दीपक नगर,आदर्श नगर, मुक्त नगर, केलाबाड़ी, कसारीडीह के अलावा अन्य जगहों के मुख्य नालाओं व बस्तियो का भी भ्रमण किए। इस दौरान पूर्व महापौर आर. एन वर्मा पूर्व सभापति राजकुमार नारायणी पार्षद सतीश देवांगन विजेन्द्र भारद्वाज काशीराम कोसरे, आयुष शर्मा,अजय मिश्रा,हेमंत तिवारी एव अन्य मौजूद थे।
दुर्ग / शौर्यपथ / सहकारी बैंक के संचालक मंडल की अहम बैठक आज जिला सहकारी बैंक के मुख्यालय में हुई। यहां लोन प्रकरणों की स्वीकृति के संबंध में विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में कलेक्टर ने कहा कि पशुपालन के लिए एवं ग्रामीण विकास के अन्य कार्य के लिए किसानों द्वारा कार्य करने की इच्छा जताई जाती है। बैंक इस ओर उन्हें प्रेरित करें। ऐसे मामलों में बैंक की गाइडलाइन के मुताबिक बैंक ऋण आवेदन स्वीकार करें और इन पर उचित निर्णय कर इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई करें। बैठक में कलेक्टर ने कहा कि पशुधन को आगे लाने से खेती किसानी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि किसानों की आय को बढ़ाना है तो पशुधन की ओर उन्हें प्रोत्साहित करना होगा।
पशुपालन के साथ मछलीपालन के लिए भी प्रोत्साहित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि क्रेडिट उपलब्ध होने से किसान इन चीजों की ओर आगे बढ़ते हैं। हमें किसानों को प्रोत्साहित करना है और उनकी राह आसान करनी है। जिले में हम किसानों को प्रगतिशील उद्यमों को अपनाने की सलाह दे रहे हैं। इसके लिए बैंक की मदद भी आवश्यक होगी। इस तरह के मामलों में ऋण आसानी से मिलने से किसानों की राह आसान हो जाती है। बैठक में बैंक के सावधि जमा के ब्याज दरों से संबंधित एवं बैंक के अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
भिलाई / शौर्यपथ / आचार्य नरेंद्र देव स्मृति जन अधिकार अभियान समिति रूआबांधा भिलाई ने एचएससीएल भिलाई के वर्तमान जनरल मैनेजर एसके सिन्हा पर भिलाई स्टील प्लांट के टेंडर में अनियमितता बरते जाने का आरोप लगाया है। समिति के संयोजक आर पी शर्मा ने इस संबंध में पीके गुप्ता अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक एनबीसीसी इंडिया लिमिटेड नई दिल्ली और राजेंद्र चौधरी प्रबंध निदेशक एचएससीएल को विस्तृत पत्र लिखकर शिकायत की है और दोनों टेंडर की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। आर पी शर्मा ने अपने पत्र में कहा है कि एनबीसीसी इंडिया लिमिटेड में विलय के बाद ऐसा लगा कि एचएससीएल का भविष्य उज्ज्वल होने वाला है, जिसमें कंपनी के ठेका मजदूर का भला हो सकता है। लेकिन यहां के मौजूदा मैनेजमेंट की कारगुजारियों से ऐसा प्रतीत होता ही नहीं है। यहां पदस्थ जनरल मैनेजर एसके सिन्हा अपने चाहने वाले लोगों का आर्थिक हित येनकेन प्रकारेण साधने में लगे हैं।
ऐसे ही दो मामले हैं, जिन पर एनबीसीसी मैनेजमेंट को तत्काल संज्ञान लेने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि भिलाई इस्पात संयंत्र की यूनिवर्सल रेल मिल से जुड़ा टेंडर (एनआईटी नंबर 873) जानबूझ कर एचएससीएल ने अपने चहेते ठेकेदार के लिए न सिर्फ छोड़ा बल्कि गंभीर मामला यह है कि इसके लिए एचएससीएल के लेटरहेड, जीएम के सील व साइन को भी कथित तौर पर बेच दिया है। टेंडर छोडऩे की इस प्रवृत्ति से साफ जाहिर होता है कि भिलाई स्टील प्लांट के ठेका माफियाओं के साथ मिल कर यह आर्थिक हित साधने यह कृत्य किया गया है। इसमें कितना आर्थिक लेनदेन हुआ है, यह जांच का विषय है।
इसी तरह भिलाई स्टील प्लांट की रेल एंड स्ट्रक्चरल मिल से जुड़ा टेंडर (एनआईटी नंबर-745) टेंडर एचएससीएल ने लिया है। ऐसा प्रतीत होता है कि इस टेंडर में भी आर्थिक उपार्जन के लिए अपने ठेकेदार को ठेका दिलाने जीएम व्याकुल है। जबकि बीएसपी टेंडर लेने के बाद एचएससीएल को ओपन टेंडर करना है। उन्होंने कहा कि एचएससीएल में रजिस्टर्ड कांट्रेक्टर हैं, तो इनको ओपन टेंडर करना चाहिए लेकिन यहां भी अपने मनमाफिक चहेते ठेकेदार को देने की योजना बनाई जा रही है। अगर ऐसा होता है तो यह गंभीर रूप से भ्रष्टाचार की श्रेणी में आएगा।
आर पी शर्मा ने अपने पत्र में कहा है कि मौजूदा मैनेजमेंट को एचएससीएल और इस कंपनी में काम करने वाले लोगों की परवाह नहीं है, वो अपना आर्थिक उपार्जन करने की फिराक में लगे हुए हैं। उन्होंने मांग की है कि रेल एंड स्ट्रक्चरल मिल का टेंडर ओपन पद्धति से किया जाए और यूनिवर्सल रेल मिल का जो टेंडर छोड़ा गया है, उसे किस ठेकेदार को दिया गया है उसकी पूरी जांच हो। यह इसलिए आवश्यक है क्योंकि प्रधानमंत्री भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टालरेंस की बात करते हैं और उनके अधीन यह सारी अनियमितताएं हो रही है। इसलिए इस पर एनबीसीसी मैनेजमेंट को सख्त कदम उठाने की जरूरत है।
सेहत / शौर्यपथ / कोरोना काल में लोग अपने शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए सारे जतन कर रहे हैं। आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों का खूब इस्तेमाल कर रहे हैं। दालचीनी, तुलसी, गिलोय, काली मिर्च, सोंठ आद की खूब डिमांड है। पहले की तुलना में इस वक्त इनकी खपत बढ़ गई है।
डॉक्टरों के मुताबिक जिन लोगों के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक है, वह कोरोना वायरस से बचे हैं। इसीलिए लोग अब अपने शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए पूरी तरह जुटे हैं। आयुर्वेदिक दवाओं एवं जड़ी बूटियों का इस्तेमाल कर रहे हैं। आमतौर पर खाने में इस्तेमाल होने वाली दालचीनी एवं काली मिर्च का लोग जोशांदा या काढ़ा बनाकर भी पी रहे हैं। खाने में भी इसका खूब इस्तेमाल किया जा रहा है। बाजार में सोंठ की बिक्री भी बढ़ गई है। लोग इसका इस्तेमाल कई तरह से कर रहे हैं। तुलसी का उपयोग चाय या फिर काढ़ा में किया जा रहा है। गिलोय को भी लोग पानी में उबालकर पी रहे हैं। दुकानदार अहमद रशीद बताते हैं कि पहले इन सामग्रियों की बिक्री बहुत कम होती थी, लेकिन माहभर से इनकी डिमांड बढ़ गई। लोग अधिक मात्रा में आकर ले जा रहे हैं। डिमांड अधिक होने से कीमत भी बढ़ी हुई है। डॉक्टर भी इन सामग्रियों को रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में कारगर बता रहे हैं। घरों में चाय की जगह काढ़ा: कोरोना की वजह से कई घरों में देखने को मिल रहा है कि वहां सुबह-शाम चाय की जगह काढ़ा ही बनाया जा रहा है। बुजुर्ग से लेकर बच्चों तक सभी को इसे पीने के लिए दिया जा रहा है। मां-बाप बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए दूध में हल्दी भी डालकर दे रहे हैं।
दालचीनी, तुलसी, गिलोय, काली मिर्च, सोंठ के सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है। इसके उपयोग से कोई नुकसान नहीं है। प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए आयुष मंत्रालय ने भी जड़ी बूटियों का फार्मूला भेजा है। इनमें उक्त सामग्रियां भी शामिल हैं। इन सब के साथ अगर लोग गुनगुने पानी का भी सेवन करें तो ज्यादा फायदेमंद होगा।
सेहत / शौर्यपथ / कोरोना काल में उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) और तनाव के मामले बढ़े जरूर हैं, पर इसका घरेलू समाधान भी है। ताजा शोध से पता चला है कि काले तिल के नियमित सेवन से हाइपरटेंशन को काबू में रखा जा सकता है। थाईलैंड के महिडोल विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने उच्च रक्तचाप पर अपने शोध के बाद यह दावा किया है।
अध्ययन में पाया गया कि चार सप्ताह तक काले तिल के सेवन से रक्तचाप में छह प्रतिशत तक की कमी आई है। शोधकर्ताओं ने पाया कि तिल में मौजूद मैग्निशियम,उच्च पॉलीसेचुरेटेड फैटी एसिड,फाइटोस्टेरॉल और लिगनान समेत अन्य तत्व रक्तचाप को दुरुस्त रखने में मददगार हैं।
भोजन में मैग्निशियम की कम मात्रा रहने से रक्तचाप बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है। क्लीनिकल ट्रॉयल में भी पाया गया कि मैग्निशियम लेने से रक्तचाप घटाने में मदद मिलती है।
इसके पहले ऑस्ट्रेलिया के मेंजिस हेल्थ इंस्टीट्यूट क्वींसलैंड एंड स्कूल ऑफ मेडीसिन ने भी अपने अध्ययन में पाया था कि काले तिल का सेवन रक्तचाप को कम रखने में सहायक है।
काला तिल खनिजों का खजाना:
काला तिल मैगनीज, मैग्निशियम, कॉपर, कैल्शियम, आयरन, फॉस्फोरस और जिंक जैसे खनिज तत्वों का स्रोत है। इसके अलावा इसमें विटामिन बी-1 और पाचन को सुगम बनाने वाले फाइबर भी पाए जाते हैं।
शारीरिक सक्रियता जरूरी:
शोधकर्ताओं ने रक्तचाप घटाने के लिए शरीरिक रूप से ज्यादा सक्रिय रहने, स्मोकिंग से दूर रहने तथा कॉफी-चाय और कोला जैसे पेय से दूर रहने की सलाह दी है। गौरतलब है कि हाइपरटेंशन का हृदय की बीमारियों और असामयिक मौत से सीधा संबंध है।
क्या है रक्तचाप:
रक्तचाप का अभिप्राय इस बात से है कि अपकी धमनियों पर रक्त कितना दबाव डालता है। यदि किसी का रक्तचाप 120/80 एमएम एचजी मापा गया, तो इसमें पहला नंबर यानी 120 उस दबाव को दर्शाता है जो हृदय द्वारा रक्त को पंप करते समय उत्पन्न होता है। इसे सिस्टोलिक रक्तचाप भी कहते हैं। दूसर नंबर यानी 80 उस दबाव को दर्शाता है जब हृदय शिथिल होकर खून को अपने अंदर भरता है, इसे डायस्टोलिक रक्तचाप कहते हैं।
दुर्ग / शौर्यपथ / कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भूरे ने आज मानसून को लेकर सतर्कता की तैयारियों को लेकर बैठक ली। उन्होंने कहा कि इस बार काफी बारिश होने की संभावना है। इस बात की पूरी आशंका है कि नालों में उफान आए। इसलिए प्रशासनिक अमला पूरी तरह मुस्तैद रहे। एक बार माकड्रिल कर ले कि किस प्रकार आपदा की स्थिति में लोगों को सुरक्षित जगहों तक पहुंचाया जाएगा। उनके खाने पीने और जीवनरक्षक दवाओं के इंतजाम किस तरह होगा, यह माकड्रिल के दौरान देख लें। उन्होंने सभी एसडीएम से पूछा कि किन जगहों पर बाढ़ की आशंका होती है। पिछले साल के बारे में भी उन्होंने जानकारी ली। उन्होंने कहा कि राजस्व अमला, निगम अमले और फूड विभाग के साथ इस संबंध में आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित कर लें।
उन्होंने कहा कि भवनों का चिन्हांकन कर इनकी जानकारी दी जाए। साथ ही उन्होंने सीएमएचओ से पूछा कि स्नेक बाइट आदि की आशंका मानसून के दौरान होती है। इसके लिए एंटी वेनम है या नहीं। सीएमएचओ ने बताया कि इसका पर्याप्त स्टाक अभी है। उन्होंने कहा कि बारिश के दौरान संक्रामक रोग भी फैलते हैं। ऐसे क्षेत्रों में क्लोरिनिकरण का काम भी सतत रूप से हो, इस संबंध में उन्होंने पीएचई के अधिकारियों को निर्देशित किया।
होमगार्ड के अधिकारियों को उन्होंने गोताखोरों के बारे में पूछा। पिछले साल कहां जरूरत पड़ी थी इस बारे में जानकारी भी ली। अधिकारियों ने बताया कि पिछले बार पाटन में एक व्यक्ति सिकोला में फंसा था। कलेक्टर ने कहा कि इस बार बारिश काफी ज्यादा होने की उम्मीद है। इसके साथ ही पहले ही जलस्रोत में पानी पर्याप्त है। ऐसी स्थिति में इस बात की आशंका है कि बाढ़ का खतरा बना रहे। ऐसे में कंट्रोल रूम में अधिकारी सक्रिय रूप से नजर रखें। इसकी नियमित रिपोर्ट जिला मुख्यालय में देते रहें। उन्होंने रेन गेज के बारे में जानकारी ली।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि रेन गेज पर नजर रखें। यह न केवल बारिश की स्थिति बताता है अपितु इससे बीमा प्रकरणों का संबंध भी होता है। कलेक्टर ने मानसून के दौरान सभी ब्लाकों में बिजली की स्थिति के बारे में भी पूछा। उन्होंने कहा कि कहीं भी लोड शेडिंग की स्थिति नहीं होनी चाहिए। यदि ऐसी स्थिति तकनीकी कारणों से उत्पन्न हो तो इसे त्वरित रूप से ठीक कर लें। धमधा क्षेत्र में बिजली जाने की समस्या पर उन्होंने विद्युत विभाग के अधिकारियों से इस संबंध में त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए।
दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग NSUI के तत्वधान में आज हेमचंद यादव दुर्ग विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति महोदया जी से मिल करके कोरोनो महामारी समाजिक दुष्प्रभाव के कारण महाविद्यालयो में नए सत्र से नए सिलेबस पाठ्य पुस्तकें से आगे की पढ़ाई संचालित कराए जाने की संभावना को देखते हुए दुर्ग जिला कार्यकारिणी अध्यक्ष सोनू साहू के निर्देशानुसार शहर अध्यक्ष हितेश सिन्हा के नेतृत्व में #NSUI ने सिलेबस में बदलाव होने से छात्र-छात्राओं को भविष्य में विभिन्न तरह के परेशानियों से सामना करना पड़ेगा जिसे देखते हुए कुलपति मैडम को ज्ञापन सौपा और अगली कक्षा के लिए नए पाठ्यक्रम लागू नही किया जाए साथ ही सभी कक्षाओं के पाठ्यक्रम सिलेबस को पूर्व की भांति यथावत रखे जाने की मांग किए
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री बघेल ने इंस्टीट्यूट आफ चार्टर्ड एकाउंटेंटस ऑफ इंडिया से जुड़े देशभर के सीए से ग्राम पंचायतों और नगरीय प्रशासन के काम काज में कसावट और वित्तीय प्रबंधन को मजबूत बनाने के लिए सहयोग का आव्हान किया है। उन्होंने कहा है कि छत्तीसगढ़ में बहुत सी वनोपज हैं जिनकी पैदावार देश के अन्य हिस्सों में नहीं होती है। वर्तमान में इन वनोपजों के संग्रहण के बाद इनका प्रसंस्करण छतीसगढ़ के बाहर होता है। यदि इंस्टीट्यूट आफ चार्टर्ड एकाउंटेंटस ऑफ इंडिया इनके प्रसंकरण के लिए निवेश छत्तीसगढ़ में लाने की पहल करते हैं तो इससे प्रदेश के उत्पादकों और संग्राहकों को लाभ मिलेगा और इनका निर्यात अन्य हिस्सों में करने से वहां की आवश्यकता की पूर्ति भी होगी। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने आज अपने निवास कार्यालय से इंस्टीट्यूट आफ चार्टर्ड एकाउंटेंटस ऑफ इंडिया द्वारा ‘रिसर्जेट छत्तीसगढ़‘ विषय पर आयोजित वेबिनार में देशभर के चार्टर्ड एकाउंटेंट्स को सम्बोधित किया। उन्होंने सभी को आगामी एक जुलाई को सीए दिवस की अग्रिम शुभकामनाएं दी।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर आईसीएआई की रायपुर शाखा को नया रायपुर में छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों के लिए सीए की कोचिंग इंस्टीट्यूट और कार्यालय भवन के लिए जमीन उपलब्ध कराने की घोषणा की। उन्होंने इस अवसर पर वेबीनार की ई-स्मारिका का विमोचन भी किया।
मुख्यमंत्री बघेल ने आईसीएआई द्वारा छत्तीसगढ़ के एक हजार उद्यमियों को निर्यात के लिए तैयार करने में सहयोग के प्रस्ताव का स्वागत करते हुए इसके लिए सहमति प्रदान की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ के हर गांव में गौठान और चारागाह विकसित किए जा रहे हैं। इनमें एक एकड भूमि महिला स्व सहायता समूहों की आर्थिक और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए आरक्षित की गई है। आईसीएआई उद्योगपतियों और महिला समूहों से टाईअप कर वहां अपनी आवश्यकतानुसार निर्धारित गुणवत्ता की सामग्रियां तैयार कराकर उन्हें अपने ब्रांड में बेच सकते हैं। इस काम के लिए महिला समूहों को लाभांश का हिस्सा देकर उन्हें आमदनी का जरिया उपलब्ध कराने में मदद कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए अनुकूल वातावरण है। यहां कुशल और अकुशल श्रमिक, भूमि, जल और विद्युत उपलब्ध है। राज्य सरकार की नई औद्योगिक नीति की विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि कोलकता, सूरत और मुम्बई के बाद रायपुर में बड़ा जेम्स एण्ड ज्वेलरी पार्क बनाया जा रहा है। उन्होंने इस अवसर पर सुराजी गांव योजना, राजीव गांधी किसान न्याय योजना, गोधन न्याय योजना, लघुवनोपज संग्रहण, मनरेगा सहित कोविड नियंत्रण तथा लॉकडाउन में कृषि और उद्योगो तथा व्यापारिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए किए गए प्रयासों की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले साल हमारा यह अनुभव रहा है कि किसान, वनवासियों की जेब में पैसा डालने से छत्तीसगढ़ वैश्विक मंदी से अछूता रहा है। इस साल भी हमने राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत किसानों को 5750 करोड़ रूपए की राशि दे रहे है। इसी प्रकार सर्वाधिक कीमत में तेन्दूपत्ता की खरीदी कर रहे है। इसके साथ ही राज्य में 31 लघुवनोपजों की खरीदी समर्थन मूल्य पर की जा रही है। इसका असर बाजार में देखने को मिला। छत्तीसगढ़ में 3 हजार ट्रेक्टर बिके, कंपनियां मांग के अनुसार ट्रेक्टर की आपूर्ति नही कर पा रहीं है। आईसीएआई के राष्ट्रीय अघ्यक्ष श्री अतुल गुप्ता ने कहा कि उनका संगठन राज्य सरकार को हर सहयोग देने के लिए तैयार है। उन्होंने नगरीय निकार्यों में नए रेवेन्यू जनरेट करने में सहयोग करने, पंचायतों के मेनेजमेंट, स्नातक के बाद छात्रों को सीए के मार्गदर्शन में तीन साल गहन प्रशिक्षण जैसे कार्य संचालित करने में राज्य सरकार के साथ सहयोग का प्रस्ताव दिया।
इस वेबीनार में देशभर के चार्टर्ड अकाउंटेंट्स शामिल हुए। उद्योग विभाग के प्रमुख सचिव मनोज कुमार पिंगुआ और लघु वनोपज संघ के एमडी संजय शुक्ला, आईसीएआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष अतुल गुप्ता और पब्लिक व गवर्नमेंट फाइनेंसियल मैनेजमेंट कमेटी के अध्यक्ष धीरज खंडेलवाल सहित अनेक पदाधिकारी इस कार्यक्रम में जुड़े। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की रायपुर शाखा के अध्यक्ष सीए किशोर बरड़िया और सचिव रवि ग्वालानी मुख्यमंत्री निवास में उपस्थित थे। वेबिनार में छत्तीसगढ़ चेम्बर्स ऑफ कामर्स, कैट और उरला इंडस्ट्रिज एसोसिएशन के पदाधिकारी भी जुड़े।
दुर्ग / शौर्यपथ / विद्या श्री परिवार के नाम से शहर में पहचाने जाने वाले विद्या श्री ट्रेवेल्स के संचालक सेक्टर 8 भिलाई निवासी संदीप जैन अपने छोटे भाई श्रीकांत जैन के परिवार द्वारा कुछ दिन पहले किये नेत्रदान की घोषणा से इतने प्रभावित हुए कि आज अपनी पत्नी साक्षी जैन के जन्मदिन पर उनके पुरे परिवार ने नेत्रदान करने का निर्णय लिया व,इसके लिए उन्होंने अपने घर पर संस्था के सदस्यों को आमंत्रित कर संदीप जैन,साक्षी जैन उनके पुत्र देवेश जैन व मानस जैन द्वारा नेत्रदान का घोषणा पत्र नवदृष्टि फाउंडेशन के अनिल बल्लेवार,राज आढ़तिया व सत्येंद्र जैन को सौंपा,
इस अवसर पर संदीप कि मौसी 73 वर्षीय कि श्रीमती तारा जैन ने अपने पुत्र राजेश कुमार जैन के साथ देहदान कि वसीयत अनिल बल्लेवार,राज आढ़तिया व सत्येंद्र जैन को सौंपी, संदीप ने बताया उनके छोटे भाई के नेत्रदान कि घोषणा पर जो सम्मान संस्था द्वारा किया गया व उनके परिवार के निर्णय कि सराहना पुरे समाज द्वारा कि गयी जिससे वह बहुत प्रभावित हुए और परिवार से चर्चा कर निर्णय लिया,
संस्था के संस्थापक सदस्य अनिल बल्लेवार ने श्रीमती तारा जैन के देहदान को साहसिक बताया व उनसे बात कर उनके ज़ज़्बे कि तारीफ कि व कहा इस उम्र में समाज के प्रति ऐसी सोच होना प्रशंसनीय है,ऐसे लोगों से प्रेरणा लें तो समाज में नई ऊर्जा आएगी,श्री बल्लेवार ने बताया तारा जैन के पति बीएसपी के कोक ओवन के एजीएम के पद पर पदस्थ थे उनकी मृत्यु के बाद तारा जैन अपने पुत्र राजेश के साथ अपने पद्मनाभपुर स्थित निवास पर रहती हैं,
राज आढ़तिया ने जानकारी दी मेडिकल कि पढ़ाई कर रहे छात्रों हेतु कैडेवर(मृत मानव शरीर) कि बहुत कमी है अतः हमारी संस्था का प्रयास है कैडेवर कि कमी जल्द से जल्द दूर हो ताकि छात्र सही रिसर्च कर सकें, नव दृष्टि फाउंडेशन के अनिल बल्लेवार, कुलवंत भाटिया,राज आढ़तिया, सत्येंद्र जैन,प्रवीण तिवारी ,मुकेश आढ़तिया , हरमन दुलई, प्रभु दयाल उजाला, प्रमोद बाघ, रितेश जैन, जितेंद्र हासवानी, गोपी रंजन दास, धर्मेंद्र शाह, पियूष मालवीय, मुकेश राठी, संतोष राजपुरोहित, किरण भंडारी, चेतन जैन, चन्दन मिश्रा, यतीन्द्र चावड़ा, नत्थू अग्रवाल, खुर्शीद अहमद, आकाश मसीह, अनुराग तैलंग, वीरेंद्र पाली, अभय माहेश्वरी , प्रफुल्ल जोशी, संजीव श्रीवास्तव, विवेक साहू , शैलेश कारिया, हरपाल सिंह, मनीष जोशी, प्रसाद राव, दीपक बंसल ने जैन परिवार के देहदान व नेत्रदान के निर्णय प्रशंसा की व परिवार को शुभकामनाएं दी।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / मनीला के एक आर्किटेक्ट फर्म ने तैरने वाले घरों का एक ऐसा डिजाइन पेश किया है जो समुद्र के तल में एंकर से बंधे रहेंगे और समुद्र की लहरों के साथ गोते खाएंगे। डाडा डिजाइन नामक कंपनी ने कहा करेंट्स फॉर करेंट्स नामक यह आवास परियोजना कठोर प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति का मुकाबला कर सकती है। वे कहते हैं कि यह अस्थायी घर दूर-दराज के क्षेत्रों में विश्वसनीय बिजली के बुनियादी ढांचे की कमी को भी दूर कर सकते हैं।
हर घर को समुद्र के तल में एंकर की मदद से बांधा जाएगा। इसमें सौर और लहरों से बिजली बनाने के लिए तकनीक लगाई जाएगी। इन्हें प्लास्टिक एंकर से बांधा जाएगा। कंपनी ने कहा, तटों पर रहने वाले समुदायों के पास जमीन और संसाधनों की कमी होती है। इसके अलावा समुद्र की लहरों और तूफानों के कारण भी उन्हें काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
वे सबसे अस्थिर परिस्थितियों में रहने के लिए मजबूर हैं, इसलिए उन्हें सुरक्षित और स्थायी आश्रयों की सख्त जरूरत है। ऐसे में यह घर उनकी समस्याओं का समाधान बनेगा। ये घर समुद्र में आने वाले परिवर्तनों के अनुसार खुद को ढालते रहेंगे।
दक्षिण पूर्वी एशिया में काफी प्राकृतिक आपदाएं आती रहती हैं। फिलिपींस, इंडोनेशिया, वियतनाम सबसे संवेदनशील इलाकों में शुमार है। यहां समुद्री तूफानों से लोगों को काफी नुकसान पहुंचता है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
