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रायपुर / शौर्यपथ / कोरोना के कारण लगाये गये लॉकडाउन पीरियड में समाज के बुजुर्गो, दिव्यांगजनों और निराश्रितों को राहत पहंुचाने छत्तीसगढ़ सरकार ने विशेष प्रयास किये हैं। पूरे राज्य के साथ बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में भी नियमित पेंशन राशि समय पर उपलब्ध कराने के अलावा प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के अंतर्गत भी 44 हजार 978 हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया है। प्रति हितग्राही एक हजार रूपये के मान से 5-5 सौ रूपये दो किश्तों में लगभग 4 करोड़ 50 लाख रूपये हितग्राहियों के खाते में जमा किये गये हैं। समाज के संवेदनशील तबके से जुड़े होने की वजह से उन्हें नगद संगवारी के सहयेाग से उनके गांव एवं घर पर जाकर राशि मुहैया कराई गई है। लॉकडाउन अवधि में सहज तरीके से घर पहंुच पेंशन सेवा प्रदाय करने वाले जिले के नगद संगवारी परियोजना को काफी सराहना मिली है।
लॉकडाउन की अवधि में लोगों के लिए बैंक जा कर पैसा आहरण करना कठिन था। ऐसी स्थिति में नगद संगवारी पेंशनधारियों के लिए लाईफलाईन साबित हुए हैं। जिले में सक्रिय 320 नगद संगवारियों ने कोरोना संक्रमण की विषम परिस्थिति में भी पेंशनधारियों के घर-घर जाकर लगभग 5 करोड़ 60 लाख रू राशि का नगद भुगतान किया है। जिससे दिव्यांग एव बुर्जुग पंेशनधारियों को आवागमन में होने वाली परेशानियों तथा बैंको के बाहर लम्बी-लम्बी कतारो से छुटकरा मिला है।
कोरोना काल में समाज कल्याण विभाग के संरक्षण में जिले के दिव्यांग समूह भी जागरूकता फैलाने में समान रूप से सक्रिय रहे। संगी-साथी दिव्यांग समूह, लाहोद, अन्नपूर्णा दिव्यांगसमूह, लटुवा, सक्षम दिव्यांग समूह, ताराशिव ने कोरोना से बचाव के लिए ढेरों मास्क सिलाई कर तैयार किये। उन्होंने गांव में घर-घर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, किराना दुकानदारों, सब्जीवालो, कोटवार आदि को लगभग 3 हजार 500 मास्क का निःशुल्क वितरण किया गया। विभाग की पहल पर मास्क की बेहतर क्वालिटी को देखते हुए सरकारी विभागों द्वारा दिव्यांग समूह से 17 हजार से अधिक मास्क की खरीददारी की गई है, जिससे समूहों का लगभग 1 लाख 90 हजार रूपये का व्यवसाय हुआ है। दिव्यांग समूह के संचालक श्री राम पटेल का कहना है कि प्रशासन के इस प्रकार सहयोग से दिव्यांग साथियों को लॉकडाउन अवधि में संकट के समय में स्वरोजगार के अवसर प्राप्त हुआ और आत्मनिर्भरता मिली है।
समाज कल्याण विभाग द्वारा स्थानीय निकायों एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों के सहयोग से 1लाख 70 हजार से अधिक निराश्रितों, जरूरतमंदों एवं प्रवासी श्रमिकों हेतु सूखा राशन सामग्री एवं भोजन पैकेट की व्यवस्था की गई। इनमें 212 दिव्यांगजन एवं 46 तृतीय लिंग समुदाय के लोग शामिल थे। इन्हें 15 किलो चॉवल, 02 किलो दाल,तेल,साबुन,मसाले और हरी सब्जी का पैकेट बना कर प्रदान किया गया। कोरोना अवधि में विभागीय योजनार्गत 67 परिवारो को राष्टीªय परिवार सहायता के तहत 13 लाख 40 हजार रू का बैंक खाते के माध्यम से वितरण किया गया। 11 दिव्यंाग नवदम्पत्ति को निःशक्त विवाह प्रोत्साहन अन्तर्गत 6 लाख रूपए की सहायता राशि प्रदाय की गई। नोवल कोरोना वायरस कोविड-19 का वृ़द्धजनो में तेजी से होने वाले संक्रमण को ध्यान मे रखते हुए वृद्धाश्रम मे विशेष सावधानी बरती गई हेै।
रायपुर / शौर्यपथ / हौसले और स्वावलंबन से शारीरिक अक्षमता को भी हराया जा सकता है। जगदलपुर के गंगानगर वार्ड निवासी निवासी दिव्यांग संतोष के इसी हौसले को मुख्यमंत्री युवा स्व-रोजगार का संबल मिला और अब उन्होंने दिव्यांगता को अपने हौसले के सामने विफल कर दिया है। दोनों पैरों से दिव्यांग संतोष कुमार शर्मा ने हिम्मत की और अपने वार्ड में ही किराना दुकान को अपनी आय का जरिया बनाया। छत्तीसगढ़ सरकार ने उन्हें मुख्यमंत्री युवा स्व-रोजगार योजना के तहत प्रशिक्षण और एक लाख का ऋण देकर उनके व्यवसाय को आगे बढ़ाने में सहयोग किया। इससे दिव्यांग संतोष का जीवन आत्मनिर्भर हो गया है। वह खुद के साथ अपने परिवार का भी पालन-पोषण करने में सक्षम बन गए हैं।
संतोष जन्म से एक वर्ष बाद से ही दोनों पैरों से चलने में असमर्थ हो गए। उनकेे पिता श्री रामजुलन मजदूरी कर परिवार का पूरे पालन-पोषण करते थे। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। पैसों की तंगी देखते हुए श्री संतोष ने 12 वीं तक शिक्षा प्राप्त करने के बाद 06 हजार की जमा पूंजी से एक किराना दुकान शुरू किया। कम बजट के कारण व्यवसाय कम चलता था। इसी बीच संतोष शर्मा को जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र से संचालित मुख्यमंत्री युवा स्व-रोजगार योजना की जानकारी मिली, उन्होंने उद्योग केंद्र से संपर्क किया। उद्योग अधिकारियों ने उन्हें मार्गदर्शन दिया और उनके निवेदन पर किराना व्यवसाय के लिए ऋण प्रकरण तैयार कर बैंक को प्रेषित किया। बैंक से एक लाख का ऋण स्वीकृत किया गया।
जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र द्वारा संतोष को एक सप्ताह का उद्यमिता प्रशिक्षण भी दिया गया जिससे उन्हें व्यवसाय चलाने संबंधी नई जानकारियां मिली। प्रशिक्षण के बाद योजना के अनुसार उद्योग विभाग ने 15 हजार मार्जिन मनी अनुदान स्वीकृत किया। बैंक द्वारा फरवरी 2020 में उन्हें 01 लाख रूपए का ऋण दिया गया। एक लाख रूपये की लागत से उन्होंने किराना एवं डेली नीड्स का शहर के गीदम रोड़ में प्रारंभ किया। व्यवसाय से अब उन्हें पर्याप्त आय हो रही है। इससे वे बैंक को 26 सौ रूपए की ऋण की किश्त नियमित जमा करते हुए अपने परिवार का भरण पोषण भी कर रहे हैं। युवाओं हेतु स्वरोजगार योजना को लाभकारी बताते हुए श्री संतोष कहते है कि ’काम ढूंढने वाले नहीं, काम देने वाले बनें’।
रायपुर / शौर्यपथ / खाद्य मंत्री अमरजीत भगत ने प्रदेश की सभी शासकीय उचित मुल्य की दुकानों में सी.सी.टी.व्ही कैमरा शीघ्र लगाने के निर्देश दिए हैं। श्री भगत ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित सभी जिलों के खाद्य अधिकारियों की बैठक में खाद्यान्न भण्डारण और वितरण की समीक्षा की। उन्होंने राज्य के सभी पहुंचविहीन क्षेत्रों की राशन दुकानों में खाद्यान्न भण्डारण और वितरण की जानकारी ली और तीन दिन के भीतर चार माह के लिए पर्याप्त मात्रा में खाद्यान्न भण्डारण करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी राशन कार्डधारी परिवारों के सदस्यों की आधार सिडिंग शीघ्र करने को कहा है, ताकि अगस्त माह में वन नेशन वन राशन कार्ड योजना छत्तीसगढ़ मंे भी शुरू की जा सके। उन्होंने कहा कि राज्य के सभी राशन दुकानों की दीवारों को तिरंगा कलर से पोताई करने के निर्देश दिए गए थे। जिन दुकानों में पोताई का कार्य नहीं हो पाया है, उन दुकानों में एक सप्ताह के भीतर पोताई कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि तिरंगा कलर में पोताई होने से प्रदेश की राशन दुकानों में एकरूपता आएगी और अंजान व्यक्ति भी देखकर पहचान जाएगा राशन दुकान को।
मंत्री ने राशन दुकानों का युक्तियुक्तकरण करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि 8 लाख से अधिक एपीएल परिवारों के राशन कार्ड बनाए गए हैं। राशन कार्डाें की संख्या बढ़ने से राशन दुकानों की संख्या भी बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक ग्राम पंचायतों में एक-एक राशन दुकान एवं शहरी क्षेत्रों के वार्डाें में आवश्यकता के अनुरूप एक या दो राशन दुकान खोले जाए, जहां नए राशन दुकान खोलने की जरूरत हो उसका प्रस्ताव शीघ्र देने को कहा है। मंत्री भगत ने कहा कि नए राशन दुकान में तिरंगा कलर से पोताई और सीसीटीव्ही कैमरा लगाने के बाद ही दुकान का संचालन शुरू किया जाए। श्री भगत ने प्रदेश के जिन उचित मूल्य की दुकानों की शिकायतें आयी है, उसका तत्काल निराकरण करने के निर्देश दिए हैं। श्री भगत ने खाद्य विभाग द्वारा कोरोना काल में लोगों को खाद्यान्न उपलब्ध कराने के कार्य को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि विषम परिस्थितियों में भी नागरिकों एवं प्रवासी श्रमिकों को समय पर राशन उपलब्ध कराया गया वह बड़ी उपलब्धि है।
खाद्य विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने बताया कि राज्य के शहरी क्षेत्रों के 50 प्रतिशत से अधिक उचित मूल्य की दुकानों में सीसीटीव्ही कैमरा लगाए जा चुके हैं। सभी दुकानों में एक सप्ताह के भीतर सीसीटीव्ही कैमरा लगवाने के निर्देश जिला खाद्य अधिकारियों को दिए गए हैं। राशन दुकानों में सीसीटीव्ही कैमरा लगने के बाद सॉफ्टवेयर के माध्यम से उपभोक्ता मोबाईल पर अपने राशन दुकानों को देख सकेेंगे और राशन दुकान खुली या बंद होने की जानकारी घर बैठे ले सकेंगे। इसके माध्यम से सभी उचित मूल्य की दुकानों में होने वाली गतिविधियोें की जानकारी भी मिलेगी और इसकी मॉनिटरिंग भी आसानी से हो सकेगी। बैठक में विशेष सचिव मनोज सोनी, एमडी मार्कफेड सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।
आजकल लोग बीमार होने पर डॉक्टर के पास जाने के बजाए गूगल की शरण में जा रहे हैं। यहां वे अपने लक्षणों के आधार पर बीमारी के बारे में सर्च कर रहे हैं और उसका निदान जानने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन एक शोध में खुलासा किया गया है कि तीन में से दो लोगों को गूगल पर गलत जानकारी मिलती है।
यह ट्रेंड उनकी सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। यह शोध ऑस्ट्रेलिया के पर्थ में स्थित एडिथ कोवान विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने किया। इसके लिए उन्होंने 36 से अधिक अंतरराष्ट्रीय वेब-आधारित लक्षण की जांच करने वाली वेबसाइट्स का विश्लेषण किया। उन्होंने पाया कि लक्षण के आधार पर रोग की पहचान वाले मामले केवल 36 फीसदी ही सही पाए गए। यही नहीं सिर्फ 52 फीसदी मामलों में ही बीमारी की सही जानकारी को सर्च रिजल्ट में शीर्ष तीन में दर्शाया गया।
गूगल द्वारा चिकित्सकों के पास जाने की चेतावनी भी आधे से ज्यादा मामलों में गलत पाई गई। केवल 49 फीसदी मामलों में ही डॉक्टर के पास जाने की सलाह दी गई।
49 % लोगों को ही डॉक्टर के पास जाने की सलाह दी गई
36 % लक्षण के आधार पर रोग की पहचान वाले मामले सही मिले
कई बीमारी पता नहीं होती-
शोध बताता है कि ऐसी वेबसाइटों के पास स्थानीय बीमारियों का डाटा नहीं होता। ऑस्ट्रेलिया में वे रॉस रिवर फीवर और हेंड्रा वायरस को नहीं पहचान पाते। डाटा के आधार पर शोधकर्ताओं ने कहा कि इमरजेंसी के दौरान चिकित्सकों से मिलने की सलाह सिर्फ 60 फीसदी मामलों में ही सही पाई गई।
यह एक सिंड्रोम है-
अधिकांश लोग साइबरक्रॉ्ड्रिरयाक सिंड्रोम के शिकार होते हैं। इसके तहत सिरदर्द या बीमारी का पहला लक्षण दिखते ही गूगल पर सर्च करना शुरू कर देते हैं। लेकिन, हकीकत यह है कि इन वेबसाइट या एप को बहुत सावधानी से देखना चाहिए, क्योंकि आपकी मेडिकल हिस्ट्री इन्हें नहीं पता होती।
कोरोना के बाद इजाफा-
कोरोना संकट के बाद छोटी-मोटी बीमारियों जैसे पेट दर्द या हल्के जुकाम से पीड़ित लोग भी डॉक्टरों के पास जाने से बच रहे हैं। वे गूगल पर ही लक्षणों की पहचान करवाने वाले लोगों से बीमारी का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। इनकी संख्या में अचानक इजाफा हुआ है।
डॉक्टर का कोई विकल्प नहीं-
शोधकर्ता मिशेला हिल ने कहा, ये प्लेटफॉर्म डॉक्टर का विकल्प नहीं हो सकते। ये सिर्फ सुरक्षा की झूठी भावना प्रदान कर सकते हैं।
इन्हें सबसे ज्यादा खोजा गया-
-लगातार खांसी और बुखार
-डायबिटीज के लक्षण
-उच्च रक्तचाप के लक्षण
-पेट दर्द
धर्म संसार /शौर्यपर्थ / आषाढ़ माह में शुक्ल पक्ष त्रयोदशी के दिन माता पार्वती को समर्पित जया-पार्वती व्रत किया जाता है। विशेष रूप से महिलाओं द्वारा किए जाने वाले इस व्रत के प्रभाव से अखंड सौभाग्यवती होने का वरदान प्राप्त होता है। अविवाहित लड़कियों द्वारा इस व्रत के रहने से शीघ्र ही विवाह होता है और भरा पूरा परिवार मिलता है। सुखमय जीवन के लिए विवाहित स्त्रियों को यह व्रत अवश्य रखना चाहिए। इस पावन व्रत का पुण्य वट सावित्री व्रत के समान माना जाता है। इस व्रत को विजया पार्वती व्रत भी कहा जाता है।
मान्यताओं के अनुसार इस व्रत का रहस्य भगवान विष्णु ने मां लक्ष्मी को बताया था। इस व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की विधि विधान से पूजा अर्चना करें। मां पार्वती का ध्यान कर सुख-सौभाग्य और गृह शांति के लिए सच्चे मन से प्रार्थना करें। घर के मंदिर में भगवान शिव-माता पार्वती की मूर्ति स्थापित करें। इस व्रत में नमक का सेवन पूरी तरह से वर्जित माना जाता है। व्रत में गेहूं का आटा, सब्जियां भी नहीं खानी चाहिए। व्रत के दौरान फलाहार कर सकते हैं। इस व्रत के प्रभाव से संतान की प्राप्ति होती है। श्रद्धापूर्वक जया पार्वती व्रत का विधि-विधान से पालन करने से माता पार्वती प्रसन्न होती हैं और हर मनोकामना पूर्ण करती हैं। व्रत समाप्ति के एक रात पहले रात्रि जागरण करना चाहिए। इसे जयापार्वती जागरण कहते हैं।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / कहते हैं आप जीवन के किसी भी कठिन दौर से क्यों न गुजर रहे हो लेकिन आपको संभालने के लिए उम्मीद की एक किरण ही काफी है। जैसे, आपका मूड कितना भी खराब क्यों न हो लेकिन कुछ विचार या छोटी-छोटी बातें ऐसी होती हैं, जिन्हें देखकर हमारी उदासी हट जाती है और हम सकारात्मकता से भर जाते हैं। एक नजर डालते हैं ऐसे ही ऊर्जावान विचारों पर जो जीवन की किसी भी तरह की निराशा हावी होने पर आपको सकारात्मकता से भर देगी-
आपकी कल्पना ही आपकी सीमा है
कहते हैं आपको जब तक कोई नहीं रोक सकता जब तक कि आप अपनी सीमा निर्धारित न कर लें। ऐसे में आपको अपनी कल्पनाओं में हमेशा कुछ बड़ा सोचना है, जिससे कि आपमें कुछ अच्छा करने और आगे बढ़ने की ललक बने रहे।
छोटी-छोटी चीजें आपके अच्छे दिन लाती हैं
आज जो काम आपको छोटा लग रहा है, वो एक दिन आपको दुनिया भर में पहचान दिलाएगा।ऐसे में छोटे-छोटे प्रयासों को बिल्कुल बंद न करें। हमेशा जीवन की छोटी-छोटी चीजों को पूरा करते हुए बड़े अर्थ साधें।
संघर्ष में अपनी ताकत तलाशें
आप जीवन में संघर्षों को परेशानियां नहीं बल्कि अपनी ताकत तलाशने के मौकों के रूप में देंखे। आप पाएंगे कि हर संघर्ष को पार करने के बाद आपका व्यक्तित्व काफी अच्छा हो जाएगा।
बीते हुए कल को आज पर हावी न होने दें
आपको बीते हुए कल को आज पर हावी नहीं होने देना है। हरिवंशराय बच्चन की कविता ‘जो बीत गई वो बात गई’ पर अमल करते हुए नए सिरे से हर दिन जीवन की नई शुरुआत करें।
चिकन या मटन बिरयानी तो आपने कई बार खाई होगी, अब अपनी बिरयानी डिश में कुछ नई रेसिपीज को जोडऩा चाहते हैं, तो आप फिश बिरयानी भी ट्राई कर सकते हैं। आइए, जानते हैं इसकी रेसिपी-
सामग्री :
मछली 750 ग्राम,
बासमती चावल 500 ग्राम (30 मिनट तक भीगे हुए),
दही– 01 कप (फेंटा हुआ),
प्याज 04 (बारीक कटा हुआ),
हरी मिर्च 06 (बारीक कटे हुए),
हरी धनिया 01 गड्डी (कटी हुई),
नींबू का रस 01 छोटा चम्मच,
अदरक-लहसुन पेस्ट 02 छोटे चम्मच,
तेल आवश्यकतानुसार।
विधि :
फिश बिरयानी बनाने के लिए सबसे पहले मछली को अच्छी तरह से साफ करके धो लें। उसके बाद आधा दही एक बाउल में निकालें और उसमें नींबू का रस और अदरक लहसुन का पेस्ट मिला लें। तैयार मिश्रण को मछलियों के ऊपर डाल कर उसे अच्छी तरह से लपेट लें और ढक कर रख दें।
अब भीगे हुए चावल को धो कर एक बर्तन में निकाल लें। उसमें जरूरत भर का पानी और थोड़ा सा नमक मिलाएं और उसे 75 त्न तक पका लें।
एक कड़ाही में थोड़ा सा तेल डाल कर उसे गर्म करें। तेल गर्म होने पर उसमें प्याज डालें और सुनहरा होने तक भून लें। इसके बाद कड़ाही में टमाटर और बचा हुआ दही डालें और पांच मिनट तक पका लें।
जब टमाटर नरम हो जाए, उसमें मछली के पीस और हरी मिर्च डाल दें और आंच को धीमी करके चलाते हुए पकाएं। जब मछली अच्छी तरह से सिक जाए, कड़ाही को गैस से उतार कर अलग रख दें।
अब एक पैन लेकर उसे गैस पर धीमी आंच पर रखें। पैन में सबसे पहले एक तिहाई पका हुआ चावल डालें। उसके ऊपर से आधी मछली और आधी धनिया की पत्ती डालें और बराबर फैला दें। फिर उसके ऊपर से एक तिहाई चावल की लेयर बना कर डाल दें।
अब चावल के ऊपर बची हुई मछली डाल कर ऊपर से बचे हुए चावल की लेयर लगा दें। अब पैन को ढक कर लगभग 15 मिनट तक पकाएं उसके बाद बिरयानी को अच्छी तरह से चला कर मिक्स कर लें और गैस को बंद कर दें।
आपकी आपकी बिरयानी तैयार है। बस इसे हरी धनिया से गार्निश करें और अचार अथवा चटनी के साथ गर्मा-गरम परोसें।
सेहत /शौर्यपथ / कब्ज एक छोटा-सा शब्द है लेकिन जिन लोगों को अक्सर कब्ज की समस्या रहती है, वो बेहतर तरीके से जानते हैं कि यह किस तरह आपकी लाइफ डिस्टर्ब करती है। पेट साफ न होने से शारीरिक परेशानियों के साथ कई स्किन प्रॉब्लम्स भी हो जाती हैं। ऐसे में आपको अपना ख्याल रखने के लिए अपनी कुछ आदतों में सुधार करना चाहिए। कुछ ऐसी आदते होती हैं जिसकी वजह से आपको कब्ज की परेशानी होती रहती है। कब्ज की बात करें, तो आम कब्ज से लेकर गंभीर तरह की कब्ज की बीमारी इसमें शामिल है. जैसे कभी-कभार होने वाला कब्ज, क्रॉनिक कॉन्स्टिपेशन (कब्ज बहुत ज्यादा बढ़ जाने पर), यात्रा या उम्र से संबंधित कब्ज। कब्ज में हमारी आंतें मल को छोड़ नहीं पातीं। कब्ज होने के आम कारण हैं-
खानपान
खानपान में किसी भी तरह का बदलाव कब्ज का कारण बन सकता है, जैसे अचानक बहुत ज्यादा तैलीय खाना खाने या वजन घटाने के लिए खाने पर नियंत्रण करने की वजह से भी कब्ज हो जाता है। इसके अतिरिक्त यदि आप बहुत ज्यादा वसायुक्त चीजें पसंद करते हैं या शराब और कॉफी पीते हैं तो भी कब्ज के शिकार हो सकते हैं।
कम पानी पीना
कुछ लोग बहुत कम पानी पीते हैं। ऐसे लोग मानते हैं कि दिन में दो गिलास पानी पी लें तो भी उनका काम चल जाएगा, लेकिन इससे हमारे पाचन तंत्र और शरीर की जरूरतें पूरी नहीं होतीं।
व्यायाम
क्या आप रोजाना कसरत करते हैं? रोजाना न सही, सप्ताह में चार दिन तो करते होंगे। नहीं? पाचन तंत्र के बिगडऩे या कब्ज होने की यह सबसे बड़ी वजह है। शारीरिक व्यायाम के अभाव में हमारा मेटाबॉलिज्म खराब हो जाता है। मेटाबॉलिज्म के कमजोर पड़ते ही हमारी पाचन क्रिया गड़बड़ हो जाती है।
दवाएं
कुछ दवाओं के सेवन से भी कब्जियत हो जाती है। ज्यादातर मामले पेन किलर्स की वजह से देखने को मिले हैं। कुछ विटामिन और आयरन की खुराक से भी यह समस्या हो जाती है। ऐसे में डॉक्टर से राय लेकर आप इन दवाओं के साथ स्टूल सॉफ्टनर दवाएं ले सकते हैं।
यह है उपचार
नीबू पानी
नीबू हमारे शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। अगर कभी कब्ज हो जाए तो एक गिलास गर्म पानी में एक नीबू का रस और शहद मिलाएं और पी लें।
दूध और दही
कब्ज की समस्या को दूर करने के लिए पेट में अच्छे बैक्टीरिया का भी होना जरूरी है। सादे दही से आपको प्रोबायोटिक मिलेगा, इसलिए आप दिन में एक से दो कप दही जरूर खायें। इसके अलावा यदि बहुत परेशान हैं तो एक गिलास दूध में एक से दो चम्मच घी मिला कर रात को सोते समय पिएं, लाभ होगा।
आयुर्वेद
सोने से पहले दो या तीन त्रिफला टैबलेट गर्म पानी के साथ लें। त्रिफला हरड़, बहेड़ा और आंवले से बना होता है। ये तीनों पेट के लिए लाभकारी हैं। त्रिफला रात में अपना काम शुरू कर देता है।
खाने में फाइबर
एक दिन में एक महिला को औसतन 25 ग्राम फाइबर की जरूरत होती है, वहीं एक पुरुष को 30 से 35 ग्राम फाइबर की आवश्यकता होती है। अपने पाचन तंत्र को दोबारा ट्रैक पर लाने के लिए आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि आप हर दिन अपनी जरूरत के अनुसार फाइबर की खुराक ले रहे हैं।
शौर्यपथ / बॉलीवुड इंडस्ट्री की मशहूर कोरियोग्राफर सरोज खान के निधन से मजोरंजन जगत को तगड़ा झटका लगा है। उन्हें सांस लेने की तकलीफ के चलते 20 जून को मुंबई के बांद्रा में स्थित गुरु नानक हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, लेकिन डॉक्टर्स की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें नहीं बचाया जा सका। सरोज को शुक्रवार सुबह मलाड के कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। इस दौरान उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए उनके परिवारवाले और कुछ रिश्तेदार ही मौजूद थे। सरोज खान के प्रति शोक प्रकट करने के लिए प्रार्थना सभा तीन दिन बाद होगी।
सरोज खान डायबिटीज और इससे संबंधित बीमारियों से जूझ रही थीं। इसके चलते उन्होंने बीच में अपने काम से एक लंबा ब्रेक लिया था। साल 2019 में सरोज ने 'कलंक' और 'मणिकर्णिकाः द क्वीन ऑफ झांसी' में एक-एक गाने को कोरियॉग्राफ किया था। 'कलंक' में उन्होंने 'तबाह हो गए' गाने को कोरियोग्राफ किया था, जिसमें माधुरी दीक्षित ने बेहतरीन डांस कर सभी का दिल जीत लिया था।
गौरतलब है कि सरोज खान पिछले 40 साल में दो हजार से भी ज्यादा गानों को कोरियोग्राफ किया था। उन्होंने फिल्म देवदास के गाने 'डोला रे डोला', 'श्रृंगारम' के सारे गाने, 'जब वी मेट' के 'ये इश्क हाये' के लिए नैशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। फिल्म 'गुरु', 'देवदास', 'खलनायक', 'हम दिल दे चुके सनम', 'बेटा', 'सैलाब', 'चालबाज' और 'तेजाब' के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड से नवाजा जा चुका है।
सरोज के निजी जीवन की बात करें उन्होंने 13 साल की उम्र में इस्लाम धर्म कबूल कर 43 साल के बी. सोहनलाल से शादी कर ली थी। दोनों की उम्र में 30 साल का फासला था। सरोज ने हालांकि सोहनलाल की ये दूसरी शादी थी। पहली शादी से उनके चार बच्चे थे। एक इंटरव्यू में सरोज ने बताया था कि मैंने अपनी मर्जी से इस्लाम धर्म कबूल किया था। उस वक्त मुझसे कई लोगों ने पूछा कि मुझ पर कोई दबाव तो नहीं है लेकिन ऐसा नहीं था। मुझे इस्लाम धर्म से प्रेरणा मिलती है।
निधन से भावुक हुईं माधुरी दीक्षित, ट्वीट कर कहा- मैं बिखर गई हूं
साल 2020 में बॉलीवुड के कई सितारे दुनिया को अलविदा कहकर चले गए। शुक्रवार को कोरियोग्राफर सरोज खान का निधन हो गया है। वह काफी समय से बीमारी चल रही थीं। हाल ही में उन्हें बांद्रा स्थित हॉस्पिटल में ए़डमिट कराया गया था, जहां पर उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से बॉलीवुड को गहरा सदमा लगा है। 2000 गानों को कोरियोग्राफ कर चुकी सरोज को बॉलीवुड सेलेब्स श्रद्धांजलि दे रहे हैं। अब एक्ट्रेस माधुरी दीक्षित ने अपना दुख बयां किया है।
माधुरी ने ट्विटर अकाउंट पर एक पोस्ट शेयर किया है। उन्होंने लिखा, ''मैं दोस्त और गुरु सरोज खान के निधन से बिखर गई हूं। डांस में अपनी पूरी क्षमता तक पहुंचने में मेरी मदद करने के लिए मैं हमेशा उनकी आभारी रहूंगी। दुनिया ने आज एक अद्भुत प्रतिभाशाली इंसान को खो दिया। मैं आपको बहुत मिस करूंगी। परिवार के प्रति संवेदना प्रकट करती हूं।''
इसके अलावा जेनेलिया डिसूजा, रितेश देशमुख, मनोज बाजपेयी, सुनील ग्रोवर, निमरत कौर ने सरोज खान को याद करते हुए इमोशनल ट्वीट किया है। मशहूर कोरियोग्राफर रेमो डिसूजा ने इंस्टाग्राम अकाउंट पर सरोज खान के साथ अपनी कुछ तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा, ''मैं बहुत खुशनसीब हूं कि मुझे आपके साथ डांस करने का मौका मिला। मुझे इतना सबकुछ सिखाने के लिए आपको दिल से शुक्रिया। आपको हमेशा याद किया जाएगा। आप हमेशा हमारे दिल में रहेंगी।
रितेश देशमुख ने ट्वीट किया कि रेस्ट इन पीस सरोज खान जी। यह नुकसान बॉलीवुड और फिल्म प्रेमियों के लिए अकल्पनीय है। मुझे फिल्म अलादीन में आपने द्वारा कोरियोग्राफ किए जाने का सुख मिला। जेनेलिया डिसूजा ने लिखा, आरआईपी सरोज जी। मैं भगवान की शुक्रगुजार हूं कि मुझे आपके द्वारा कोरियोग्राफ किए जाने का मौका मिला। भगवान इस दुख की घड़ी में आपके परिवार को ताकत दें। वहीं, एक्टर सुनील ग्रोवर ने ट्वीट करते हुए लिखा, ''सरोज खान जी की निधन की खबर से शॉक्ड हूं। उनके जाने से एक युग का अंत हो गया। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे।
नजरिया / शौर्यपथ / हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार और बीमा नियामक ‘आईआरडीएआई’ से पूछा है कि मानसिक रूप से बीमार लोगों को स्वास्थ्य बीमा के दायरे में क्यों नहीं लाया गया? कोर्ट में याचिका दायर करके कहा गया है कि मानसिक स्वास्थ्य को ‘स्वास्थ्य बीमा’ के दायरे में न रखा जाना संविधान के समता मूलक व भेदभाव न करने संबंधी कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन है। गौरतलब है कि मानसिक स्वास्थ्य कानून 2017 की धारा 21(4) में बीमा पॉलिसी में मानसिक रोगों को भी शामिल किए जाने का प्रावधान है।
जिस तरह से पिछले दो-तीन दशकों में मानसिक बीमारियों में वृद्धि हुई है, उसे देखते हुए यह आवश्यक हो जाता है कि इनसे जूझ रहे लोगों को आर्थिक संरक्षण मिले, ताकि वे बेहतर तरीके से अपना इलाज करा सकें। दरअसल, इस समस्या के मूल में वह मिथक है, जिसे शायद बीमा कंपनियां भी अप्रत्यक्ष रूप से स्वीकार करती हैं कि मानसिक बीमारियां लाइलाज होती हैं। इसी से ये उपेक्षा का शिकार रही हैं। अभी हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने विश्व-समुदाय से आग्रह किया है कि ‘बढ़ते दबावों का सामना कर रहे लोगों की रक्षा करने के लिए और ज्यादा प्रयास करने होंगे। उनके मुताबिक, तथाकथित सामाजिक कलंक और भेदभाव का शिकार होने से अक्सर यह पीड़ा और ज्यादा गहरी हो जाती है।’
यह एक कटु सत्य है कि मानसिक रोगों को सामाजिक कलंक के रूप में देखे जाने के कारण ज्यादातर लोग अपनी मानसिक परेशानियों में पेशेवर मदद हासिल करने से परहेज करते हैं। मानसिक रोगियों की संख्या बढ़ने के पीछे यह एक बड़ी वजह है। दिसंबर 2019 में लांसेट द्वारा जारी एक रिपोर्ट में भारत में 1990 से 2017 तक मानसिक स्वास्थ्य को लेकर क्या स्थिति रही, उसका विश्लेषण किया गया है। लांसेट के आंकड़ों के अनुसार, 2017 तक भारत में हर सात में से एक व्यक्ति किसी न किसी तरह के मानसिक रोग से पीड़ित है।
भारत में मानसिक रोगों में सबसे ज्यादा भागीदारी अवसाद की हैै। यूं तो विश्व भर में मानसिक रोगियों की संख्या निरंतर बढ़ रही है, लेकिन पश्चिम के लोकतांत्रिक देशों के उलट हमारे यहां मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता और चेतावनी की व्यवस्थाओं का अभाव है। वैसे इस बीमारी के कारणों को लेकर कई अध्ययन हुए हैं। फ्रांस की यूनिवर्सिटी ऑफ वर्सेल्स सेंट क्वेंटिन एन वैलेंस के शोधकर्ताओं ने इंग्लैंड में 16 से 69 साल के 25,000 लोगों पर किए गए अध्ययन के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला कि वहां आम तौर पर होने वाली दिमागी परेशानी का संबंध अकेलेपन से है। विश्व भर में दिमागी बीमारियों को लेकर किए गए अमूमन सभी शोध इसी निष्कर्ष के इर्द-गिर्द घूमते हैं। भारत की भी यही स्थिति है। ऐसे में, विचार का विषय यह है कि उन रास्तों को ढूंढ़ा जाए, जिनसे इस समस्या का हल मिल सके।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट बताती है कि भारत में लगभग 7.5 प्रतिशत आबादी मानसिक रोगों से जूझ रही है। बावजूद इसके यहां मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए धन का आवंटन बहुत कम है। भारत में हर दस लाख आबादी पर सिर्फ तीन मनोचिकित्सक हैं। मनोवैज्ञानिक सलाहकारों का अनुपात तो इससे भी कम है। आज जब तरह-तरह का दबाव हमारे ऊपर बढ़ रहा है, हम इस रोग की उपेक्षा नहीं कर सकते।
इस संबंध में हम जिम्बाब्वे का मॉडल अपना सकते हैं। जिम्बाब्वे के मनोवैज्ञानिक डिक्सन चिबांदा ने अवसादग्रस्त लोगों की मदद के लिए नायाब तरीका निकाला। मनोचिकित्सकों की कमी का तोड़ निकालने के लिए उन्होंने साल 2006 से आज तक 400 बुजुर्ग महिलाओं को प्रशिक्षण देकर एक ‘ग्रैंड मदर्स क्लब’ का गठन किया है। जब डिक्सन ने पाया कि अस्पतालों में जगह कम है, तो उन्होंने इसका हल ‘फ्रेंडशिप बेंच’ के रूप में निकाला। सार्वजनिक पार्कों में ऐसी बेंचें लगाई गईं, जहां ये बुजुर्ग महिलाएं लोगों से उनकी भाषा में बात करती हैं। डिक्सन का यह प्रयास असरदार साबित हुआ। आज दादियों-नानियों की मदद से अवसाद के इलाज के कार्यक्रम कई देशों में चलाए जा रहे हैं। मानसिक बीमारी हमारे लिए भी एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। इसे लेकर गहन चिंतन व प्रयासों की जरूरत है। इस प्रयास में ‘फे्रंडशिप बेंच’ एक बेहतर विकल्प हो सकती है।
(ये लेखिका के अपने विचार हैं)ऋतु सारस्वत, समाजशास्त्री
सम्पादकीय लेख / शौर्यपथ / विश्व मंच पर चीन की भारत विरोधी हरकतें जितनी पुरानी हैं, उतनी ही दुखद और निंदनीय भी। संयुक्त राष्ट्र के मंच पर चीन फिर एक बार इस साजिश में लगा था कि पाकिस्तान के पक्ष में और परोक्ष रूप से भारत के खिलाफ एक निंदा प्रस्ताव पारित हो जाए। पाकिस्तान की ओर से चीन द्वारा पेश प्रस्ताव में विगत दिनों कराची में हुए आतंकी हमले के लिए भारत को इशारों में ही घेरने की साजिश थी। यह प्रस्ताव खुद चीन ने तैयार किया था। वैसे तो किसी भी आतंकी हमले की संयुक्त राष्ट्र के मंच से निंदा सही है, लेकिन इस मंच का नाजायज फायदा किसी को उठाने नहीं देना चाहिए। खुशी की बात है, भारत के समर्थक देश सजग थे और पहले जर्मनी ने इस प्रस्ताव को रोका और फिर अमेरिका भी आगे आया, इससे चुपचाप इस प्रस्ताव को पारित करा ले जाने की चीनी-पाकिस्तानी साजिश नाकाम हो गई। भारत के लिए चिंता की बात यह थी कि पहले पाकिस्तान के विदेश मंत्री और उसके बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री भी कराची आतंकी हमले के लिए भारत को जिम्मेदार ठहरा चुके हैं। इसलिए ऐसे आतंकी हमले की निंदा का चुपचाप प्रस्ताव करना और उसके लिए किसी निर्दोष देश की ओर इशारा करना चीन जैसे कथित वीटो पावर प्राप्त देश को कतई शोभा नहीं देता।
बहरहाल, चीन की ऐसी हरकतों के प्रति केवल भारत ही नहीं, अब दुनिया के अन्य महत्वपूर्ण देश भी सजग हो गए हैं। दुनिया में कहीं भी आतंकी हमला हैवानियत से कम नहीं, लेकिन ऐसे किसी हमले के जरिए कूटनीति और राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश भी हैवानियत से कम नहीं है। अपने यहां जायज आवाज उठाने वालों को भी आजीवन करावास देने वाला चीन न जाने कैसे पाकिस्तानी आतंकियों का खुलकर बचाव करता रहा है? जमीनी रूप से आतंकवाद के पोषण में पाकिस्तान की हरसंभव मदद करने से लेकर संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की पक्षधरता तक चीन का कोई भी पहलू दुनिया से छिपा नहीं है। अब खबर आई है कि म्यांमार में अरकान नामक हथियारबंद संगठन को चीन धन और हथियार दे रहा है, ताकि वे भारतीय इलाकों में अशांति फैला सकें।
यह बात भी छिपी नहीं है कि हम चुपचाप उसकी साजिशें झेलते रहे हैं। लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है, जब भारत ने मजबूर होकर अपनी नीतियों में परिवर्तन शुरू किया है। लंबे अरसे बाद भारत की खामोशी टूटी है और उसने जेनेवा में मानवाधिकार संबंधी परिषद की बैठक में हांगकांग का मुद्दा उठाया है। हांगकांग में भारतीय मूल की आबादी भी बड़ी संख्या में रहती है, अत: भारत ने कहा है कि वह इस मामले पर नजर रखे हुए है। भारत का इतना कहना भी पर्याप्त है। चीन को समझ लेना चाहिए कि आम तौर पर तिब्बत से ताइवान और यहां तक कि भारतीय इलाकों में चीनी दावों के प्रति भी अपेक्षाकृत शालीनता बरतने वाला भारत अब नई दिशा में बढ़ चला है। भारत के खिलाफ लगातार साजिशें करने की चीनी नीति को अब जवाब मिलने लगा है। दुनिया का सबसे विशाल लोकतांत्रिक देश भारत अपनी कूटनीति के प्रति सजग है। चीन के प्रति केवल भारत ही नहीं, बल्कि अमेरिका और ब्रिटेन में भी बड़ी नाराजगी है। कोई भी देश चीन की अतार्किक मनमानी या हस्तक्षेप को झेलना नहीं चाहेगा। विश्व मंच पर चीन को वह फसल अब काटनी पडे़गी, जो वह भारत और अन्य देशों में बोता रहा है।
ओपिनियन / शौर्यपथ / इस हफ्ते की शुरुआत में, जब भारत सरकार ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देकर टिक टॉक सहित 59 चीनी एप पर पाबंदी लगाई, तब देश भर में हर्ष और विलाप, दोनों तरह के स्वर सुनाई दिए। कुछ के लिए सरकार की यह पहल चीन के साथ हुए सीमा-संघर्ष के खिलाफ एक वाजिब प्रतिक्रिया थी, तो अन्य लोगों ने पेटीएम, जोमैटो जैसी भारतीय कंपनियों में शामिल चीन के शेयरधारकों के खिलाफ भी दंडात्मक प्रतिबंध लगाने का आह्वान किया। मगर एक सच यह भी है कि सरकार के इस फैसले से भारतीय डिजिटल उद्यमियों की पूरी पीढ़ी राहत महसूस कर रही है, बावजूद इसके कि उपरोक्त किसी भी तर्क से वह बेशक इत्तिफाक न रखती हो।
देशों का द्विपक्षीय रिश्ता एक जटिल मसला है, विशेष रूप से कटुता के लंबे इतिहास वाले पड़ोसियों के बीच। इसमें आपसी व्यापार, विदेशी संबंध और अंतरराष्ट्रीय संचार को प्रभावित करने के लिए मुद्दों का मूल-बिंदु से विस्तार किया जा सकता है। भारत में चीनी एप पर प्रतिबंध ठीक ऐसा ही मामला है। यह सामने वाले को महज तकलीफ पहुंचाने वाला कदम है, जो भविष्य की वार्ताओं में मोलभाव का हमारा हथियार बन सकता है। इससे दोनों देशों के बीच लद्दाख में जारी तनातनी का कतई हल नहीं निकलेगा। इसे चीन के पूर्ण बहिष्कार का संकेत समझने की गलती भी नहीं की जानी चाहिए। फिर भी, इस प्रतिबंध का भारत के घरेलू डिजिटल सेवा उद्योग के लिए गहरा निहितार्थ है।
दरअसल, पिछले कुछ दशकों से विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) की तरफ ही हमारी आर्थिक नीतियों का जोर रहा है। भारत की विशाल, नौजवान और आकांक्षी आबादी स्वाभाविक तौर पर सभी प्रकार की विदेशी वस्तुओं और सेवाओं के लिए एक आकर्षक बाजार है। अपने दरवाजे विदेशी कारोबारियों के लिए कुछ-कुछ खोलकर सरकारों ने वर्षों से इस अवसर को भुनाया भी है। हालांकि, इस रुख की वजह से भारतीय कंपनियों को भी विदेशी प्रतियोगियों के खिलाफ मैदान में उतरने में मदद मिली है। मगर, भारत कोई अकेला देश नहीं है, जो अपने बाजार पर नियंत्रण रखता है। औद्योगिकीकरण की अपनी यात्रा में यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया व अधिकांश विकसित देशों ने भी ऐसा किया है। बाजार-पहुंच और विदेशी स्वामित्व की बाधाएं दुनिया भर में हैं और तमाम तरह के चलन, व देशों के बीच व्यापार को व्यवहार-कुशल बनाने के एकमात्र उद्देश्य के साथ विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) भी अस्तित्व में है।
हालांकि, भारत में दूरसंचार लाइसेंस, फ्रीक्वेंसी के आवंटन और नीलामी के इर्द-गिर्द ही बहसें सिमटती गई हैं, आधुनिक दूरसंचार की सहायता से होने वाले कारोबार की तरफ बहुत कम ध्यान दिया गया। ऐसा इसलिए है, क्योंकि नई पीढ़ी की डिजिटल सेवाओं के कामकाज के बारे में बहुत से लोगों को पता नहीं है। भारत के उपभोक्ता बाजार में विदेशी कंपनियों का कितना दखल हो, यह व्यापार और राजनीति में तीखी बहस का विषय रहा है। नागरिक उड्डयन, ऑटोमोबाइल, फार्मास्यूटिकल्स, बीमा, बैंकिंग, खुदरा, रेलवे, यहां तक कि आउटसोर्सिंग भी ऐसे उद्योग हैं, जिनके लिए विदेशी निवेश और बाजार में पहुंच को मंजूरी बारीक जांच-पड़ताल के बाद ही मिली है। मगर अब तक इस पर शायद ही गंभीर चर्चा हुई है कि एक अरब से अधिक डिजिटल उपभोक्ताओं तक पहुंच बनाने के लिए विदेशी कंपनियों को कितना अधिकार देना चाहिए। स्थिति को और बेहतर समझने के लिए विमानन उद्योग से इसकी तुलना कर सकते हैं।
साल 2014 में हवाई यात्रा करने वाले भारतीयों की संख्या 17 करोड़ थी, जो 2019 में दोगुनी हो गई। इस क्षेत्र में वर्तमान और पिछली सरकारों ने विदेशी प्रत्यक्ष निवेश बढ़ाने की तरफ पर्याप्त ध्यान दिया और हर वर्ष यहां विदेशी कंपनियों को अनुमति दी गई। मगर भारतीय डिजिटल दुनिया को कीमती नहीं माना गया, जबकि अपने यहां टिक टॉक के अनुमानित 12 करोड़ उपभोक्ता हैं और वाट्सएप के 40 करोड़। यह हर साल हवाई यात्रा करने वाले भारतीयों की संख्या से कहीं अधिक है।
अब इसकी तुलना जरा चीन से करें। चीन का चर्चित ‘ग्रेट फायरवाल’ नियमों और तकनीक का ऐसा मजबूत संयोजन है कि चीन में सूचना, सामग्री और डाटा का स्वतंत्र आवागमन संभव ही नहीं है। इसी वजह से चिनगारी (टिक टॉक का भारतीय संस्करण) जैसे एप के लिए अपना मालिकाना हक चीनी हाथों में सौंपे बिना चीन की आभासी दुनिया में काम करना असंभव होगा। वाट्सएप पर तो वर्षों से वहां पाबंदी लगी हुई है। वहां स्थानीय एप वीचैट के एक अरब से अधिक उपयोगकर्ता हैं और इसमें वाट्सएप को आसानी से टक्कर दे सकने की संभावना है। यही नहीं, चीन फेसबुक, यू-ट्यूब, गूगल, इंस्टाग्राम, स्पॉटिफाई, विकिपीडिया, गूगल मैप्स जैसी अन्य सेवाओं का भी उपयोग नहीं करता, जबकि इन पर हमारी रोजाना की निर्भरता है। इन जैसी सेवाओं के लिए वहां स्थानीय एप हैं, जिनमें से कई तो अपेक्षाकृत बडे़ उपभोक्ता-आधार वाले और बेहतर हैं। यहां तक कि कनाडा, फ्रांस और यूरोपीय संघ के देशों में भी कुछ सख्त नियम-कानून हैं, जिससे उन्होंने बड़ी डिजिटल कंपनियों को भी खास रियायत देने के लिए मजबूर किया है। लिहाजा, भारत सरकार द्वारा लगाए गए इस प्रतिबंध को दुनिया व्यापक तौर पर समझेगी।
आधुनिक दुनिया में क्लाउड पर सूचनाओं को जमा करके रखने का चलन बढ़ा है, इसलिए भौगोलिक सीमाएं अब काफी हद तक बेमानी हो गई हैं। बेहतर व विकसित अर्थव्यवस्थाओं से आने वाली बड़ी कंपनियों को मुफ्त और पूरे भूगोल तक पहुंच से पर्याप्त लाभ मिलती रही है, जबकि छोटी कंपनियों के लिए मुकाबला समान नहीं रह पाता है। स्थानीय कंपनियों का समर्थन करना देशों के लिए सामान्य बात है। बड़ी डिजिटल कंपनियों को पता है कि इसी कारण स्थानीय निवेश के नियम जटिल हो सकते हैं। भारतीय स्टार्टअप्स में भी तभी तक चीनी निवेश की अनुमति होनी चाहिए, जब तक कि उस पर नियमबद्ध प्रभावी नियंत्रण बना रहे। मुफ्त बाजार का हिमायती होने के नाते मेरा यह भी मानना है कि इस तरह के नियम लंबे समय में प्रभावहीन हो जाएंगे। लिहाजा, हालिया प्रतिबंध भारतीय उद्यमियों के लिए एक अच्छा मौका है कि वे बाजार में बन आए खालीपन को तेजी से भरें। उन्हें जल्द ही यह करना होगा, क्योंकि वक्त बीत रहा है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)ज्योतिर्मय साहा, संस्थापक सीईओ, ऑगस्ट मीडिया
/ 19 एकड़ में विकसित ऑक्सीजोन में 4 हजार से अधिक पौधे
// शहरवासी अब बीच शहर में शुद्ध आबो-हवा के साथ लेंगे सैर का आनंद
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल राजधानी रायपुर के हृदय स्थल में 19 एकड़ में बनाए गए ऑक्सीजोन का आज लोकार्पण किया। करीब 11 करोड़ की लागत से बने इस ऑक्सीजोन से नगरवासी अब बीच शहर में शुद्ध आबो-हवा के साथ सैर और भ्रमण का भरपूर आनंद उठा सकेंगे। यह नगर के रौनक के साथ ही पर्यावरण संरक्षण में अहम भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहर की हरियाली बढ़ाने की दिशा में ऑक्सीजोन एक महत्वपूर्ण कदम है। लोकार्पण के अवसर पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने यहां सफेद चंदन का पौधा लगाया।
कलेक्टोरेट परिसर के समीप बनाए गए इस ऑक्सीजोन में 12 एकड़ में अब तक 4 करोड़ रूपए की राशि व्यय कर 75 प्रजातियों के 4 हजार से अधिक पेड़-पौधे लगाए गए हैं। इस ऑक्सीजोन के बनने से शहर के पर्यावरण में सुधार के साथ ही युवाओं, बुजुर्गो बच्चों सहित शहरवासियों को सुबह-शाम सैर और मनोरंजन के लिए बेहतर स्थान मिलेगा। इस अवसर पर वन मंत्री मोहम्मद अकबर, नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिव कुमार डहरिया, राज्यसभा सांसद श्रीमती छाया वर्मा, नगर निगम रायपुर के महापौर एजाज ढेबर, रायपुर उत्तर के विधायक कुलदीप सिंह जुनेजा सहित जनप्रतिनिधिगण उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा है कि शहरों में भी ज्यादा से ज्यादा हरियाली हो। यह राज्य सरकार का प्रयास है। रायपुर का ऑक्सीजोन इस दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। हमें सबकी भागीदारी से ऑक्सीजोन की हरियाली को बनाए रखना होगा। उन्होंने कहा कि रायपुर शहर के लोगों को लंबे समय से ऑक्सीजोन की प्रतिक्षा थी। आज उनका यह इंतजार पूरा हुआ। ऑक्सीजोन सुबह और शाम की सैर करने वालों के लिए एक बहुत बढिय़ा स्थान है। ऑक्सीजोन में प्रदेश के वनों में पाये जाने वाली वृक्षों की प्रजातियों के पौधे भी रोपे गए हैं। पुराने वृक्षों को बचाकर रखा गया है। बरसात में वन विभाग द्वारा पूरे प्रदेश में बड़े पैमाने में वृक्षारोपण किया जा रहा है। जो लोग घर में पौधे लगाना चाहते हैं उनकों घर पहुंचाकर पौधे दिए जा रहे हैं। नदी, नालों के किनारे खाली जगह पर भी वृक्षारोपण किया जा रहा है।
ऑक्सीजोन में बच्चों के खेलने के लिए झूले, फिसलपट्टी और ओपन एयर जिम के उपकरण लगाए गए हैं। ऑक्सीजोन में पौधरोपण और संरक्षण के प्रयासों के कारण एक वर्ष में ही यहां हरियाली दिखने लगी है और पक्षी तथा तितलियां बड़ी संख्या में अपना बसेरा बनाने लगे हैं। इसकी सुन्दरता और हरीतिमा देखते ही बनती है। ऑक्सीजोन में लॉन विकसित किए गए हैं और छोटा गुलाब गार्डन भी लगाया गया है।
मॉर्निंग और इविनिंग वाक के लिए ऑक्सीजोन में 3 किलोमीटर से अधिक लम्बाई में पाथवे और पगड़ंडियां तैयार की गई हैं। इसके अलावा यहां दो वाटर बॉडी है, जिसमें से एक प्राकृतिक और दूसरी निर्मित की गई है। वर्षा का सारा पानी चैनल से होकर इसमें इकठ्ठा होता है और इससे पौधों की सिंचाई की व्यवस्था की गई है। यहां एक प्राकृतिक वाटर फॉल भी बनाया गया है, जो रात में लाईट्स में बड़ा सुन्दर दिखता है। यहां बांस निर्मित 8 पगौडा बनाए गए हैं और जगह-जगह छोटी चट्टानों और पत्थरों से संरचनाएं भी तैयार की गई है। युवाओं के लिए आकर्षक सेल्फी जोन भी बनाया गया है।
ऑक्सीजोन में आम, जामुन, सीताफल, आंवला तथा अमरूद जैसे फलदार वृक्ष और तितलियों को आकर्षित करने के लिए जारूल, अमलतास, कचनार, मौलश्री, आकाशनीम जैसे फूलदार पौधे लगाए गए हैं। यहां 503 पुराने वृक्षों को संरक्षित किया गया है और पार्किंग पाथवे वाटर बॉडी में आने वाले पेड़ों को भी नहीं काटा गया है। इस अवसर पर मुख्य सचिव आर. पी. मण्डल, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, कमिश्नर जी. आर. चुरेन्द्र, कलेक्टर डॉ. एस. भारतीदासन, प्रधान मुख्य वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी, छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के पीसीसीएफ राजेश गोवर्धन, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय यादव और आयुक्त नगर निगम रायपुर सौरभ कुमार सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
