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रायपुर / शौर्यपथ / प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि सभ्य समाज में एक भी अपराधिक घटना अस्वीकार्य है। कांग्रेस सरकार अपराधों पर पूर्ण नियंत्रण के लिये काम कर रही है। भाजपा द्वारा घटना विशेष के आधार पर पूरे राज्य के कानून व्यवस्था पर सवाल खड़ा करना गलत है। जब राज्य में भाजपा की सरकार थी तब की अपेक्षा राज्य में अपराधों में कमी आई है। राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य के नागरिकों विशेष कर महिलाओं को भय मुक्त जीवन जीने का वातावरण देने को प्राथमिकता में रखा। यही कारण है कि राज्य में अपराधों और महिला अत्याचार की घटनाओं में कमी आयी। सरकार की कानून व्यवस्था के प्रति मुस्तैदी का ही परिणाम है कि राज्य में नक्सल जैसे घटनाओ में भी कमी आयी है। छत्तीसगढ़ शांति का टापू है। वर्तमान सरकार में प्रशासनिक सक्रियता और प्रतिबंधात्मक कार्यवाही तेजी से बढ़ी है जिसके चलते ना केवल अपराधों में नियंत्रण हो रहा है, बल्कि अपराधी भी पकड़े जा रहे हैं। प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल ने पहले दिन ही स्पष्ट संदेश दिया कि कोई भी व्यक्ति संविधान और कानून से ऊपर नहीं है और अपनी कार्यवाहीयों से इस तथ्य को प्रमाणित भी किया है। कोई भी आरोपी, कोई भी अपराधी, कोई भी षड्यंत्रकारी कानून और संविधान के दायरे से बाहर नहीं है। अब तक किसी भी बड़ी घटना में अपराधीयों पर त्वरित कार्यवाही हुई है। प्रत्येक जिलों में विशेष सेल बनाकर जमीन मकान खाली करवाने का गिरोह रमन राज में चलाया जाता था। रमन सरकार के 15 साल के कुशासन में क्राइम ब्रांच वसूली एजेंट का काम करती रही है। प्रशासनिक आतंकवाद और अराजकता रमन सरकार के संरक्षण में प्रदेश में फलते फूलते रही, जिसे भूपेश बघेल सरकार ने खत्म किया है। भारतीय जनता पार्टी के 15 साल के दौरान प्रदेश से 27 हजार से अधिक महिलाएं गायब हुई जिस पर भाजपा नेता मौन रहे। गंगा पांडे जैसे भाजपा नेता मानव तस्करी में संलिप्त रहे। झलियामार, मीना खलखो और मन मडकम हिड़मे जैसे बलात्कार और हत्या के प्रकरण रमन राज में होते है। नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी ओपी गुप्ता को रमन सरकार के दौरान मुख्यमंत्री निवास में संरक्षण मिलता रहा। जगत पुजारा, पोडियम लिंगा और धर्मेंद्र चोपड़ा जैसे भारतीय जनता पार्टी के एजेंटों का नक्सल कनेक्शन भी सर्वविदित है।
प्रदेश कांग्रेस, संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि पूर्व के रमन सरकार अपराध को नियंत्रित करने में असफल रही है भाजपा नेताओं के संरक्षण में तस्करी करने वाले अवैध कार्य करने वाले अपराधी फलते फूलते रहे हैं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरकार बनने के बाद कानून मजबूती से जनता को सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं अपराधियों में कानून का ख़ौफ़ दिख रहा है एनसीआरबी के आंकड़ों के राज्य में अपराध नियंत्रण की गवाही दे रही है वर्तमान में भूपेश बघेल सरकार हत्या, लूट, डकैती जैसे गंभीर अपराधों में लगातार गिरावट आ रही है। बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराध में 47 प्रतिशत और महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में 58 प्रतिशत की कमी आई है। नक्सल घटनाओं में 80 परसेंट और नक्सल हमलों में शहादत में 76 प्रतिशत की कमी एक बड़ी उपलब्धि है। मुद्दों के दिवालियापन से जूझ रहे भारतीय जनता पार्टी के नेता अनर्गल बयानबाजी कर छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ियों को बदनाम करने नित नए साजिश रच रहे हैं। धरमलाल कौशिक और छत्तीसगढ़ के भाजपा नेताओं इसी तरह से झूठ, भ्रम और गलत बयानी करके अपनी विश्वसनीयता खोते जा रहे हैं।
रायपुर / शौर्यपथ / प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कोण्डागांव में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुये कहा कि पूर्ववर्ती रमन सरकार के लापरवाही के कारण हाईकोर्ट में आरक्षण रद्द हुआ। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग के 58 प्रतिशत आरक्षण को बिलासपुर उच्च न्यायालय द्वारा रद्द किये जाने का फैसला आया।
भाजपा की लापरवाही के कारण आरक्षण के खिलाफ फैसला आया। रमन सरकार ने अपने दायित्व का ईमानदारी से निर्वहन नहीं किया था। कांग्रेस सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर किया है। हम आदिवासी समाज की लड़ाई लड़ेंगे।
उनकी सरकार की लापरवाही, अकर्मण्यता और गैर जिम्मेदाराना रवैये का नतीजा यह फैसला है। रमन सरकार ने 2011 में आरक्षण को 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 58 प्रतिशत करने का निर्णय लिया था। 2012 में हाईकोर्ट में चुनौती दी गयी थी।
सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों जिसमें इंदिरा साहनी का फैसला प्रमुख के अनुसार कोई भी राज्य सरकार यदि 50 प्रतिशत से ज्यादा आरक्षण करती है तो अत्यंत विशेष परिस्थितियों, विचार एवं तथ्यों के साथ कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष प्रस्तुत करना होगा। इसका भी ख्याल नहीं किया गया।
छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग के आरक्षण को बढ़ाने के तमाम तर्कसंगत कारण और विशेष परिस्थितियां है लेकिन भारतीय जनता पार्टी और रमन सरकार की नीयत में खोट थी। उन्होंने अदालत में राज्य की 95 प्रतिशत आबादी के हक में तर्क नहीं दिया और जनता को उसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
जब आरक्षण को बढ़ाने का निर्णय हुआ उसी समय सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार राज्य सरकार को अदालत के सामने आरक्षण को 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ाने की विशेष परिस्थितियों और कारण को बताना था। तत्कालीन रमन सरकार अपने इस दायित्व का सही ढंग से निर्वहन नहीं कर पायी। 2012 में बिलासपुर उच्च न्यायालय में 58 प्रतिशत आरक्षण के खिलाफ याचिका दायर हुई तब भी रमन सरकार ने सही ढंग से उन विशेष कारणों को प्रस्तुत नहीं किया जिसके कारण राज्य में आरक्षण को 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 58 प्रतिशत किया गया।
रमन सरकार ने आरक्षण में संशोधन के पहले सुप्रीम कोर्ट के पूर्ववर्ती फैसले को ध्यान में नहीं रखा। बाद में दोबारा संशोधित जवाब पेश करते हुए कुछ डेटा प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया, लेकिन वो भी प्रर्याप्त नहीं थे।
आरक्षण को बढ़ाने के लिये तत्कालीन सरकार ने तत्कालीन गृहमंत्री ननकी राम कंवर की अध्यक्षता में 2010 में मंत्रिमंडलीय समिति का भी गठन किया था। रमन सरकार ने उसकी अनुशंसा को भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया जिसका परिणाम है कि अदालत ने 58 प्रतिशत आरक्षण के फैसले को रद्द कर दिया।
कांग्रेस की सरकार बनने के बाद अंतिम बहस में तर्क प्रस्तुत किया गया मंत्रिमंडलीय समिति के बारे में जानकारी दी गयी लेकिन पुराने हलफनामे उल्लेख नहीं होने के कारण अदालत ने स्वीकार नहीं किया।
इस प्रकरण में जब राज्य सरकार की अंतिम बहस हुई तो खुद महाधिवक्ता मौजूद रहे थे। उन्होंने मंत्रीमंडलीय समिति की हजारों पन्नों की रिपोर्ट को कोर्ट में प्रस्तुत किया था। लेकिन कोर्ट ने ये कहते हुए उसे खारिज कर दिया कि राज्य शासन ने कभी भी उक्त दस्तावेजों को शपथ पत्र का हिस्सा ही नहीं बनाया। लिहाजा, कोर्ट ने उसे सुनवाई के लिए स्वीकार नहीं किया।
यदि किसी वर्ग के आरक्षण में कटौती किये बिना ईमानदारी से दूसरे वर्ग के आरक्षण को बढ़ाया जाता तो यह स्थिति निर्मित नहीं होती, जब सभी वर्ग संतुष्ट होता तो कोई कोर्ट में चुनौती नहीं होती।
यदि आरक्षण बढ़ाया था तो उसके विशेष कारणों को बताने की जवाबदेही भी सरकार को थी। रमन सरकार ने नहीं बताया।
आरक्षण रद्द किये जाने का विपरीत प्रभाव अब तक हुये एडमिशन में न पड़े और भर्तियां हुई है इस पर न पड़े। इसके लिये अदालत से विशेष निवेदन किया गया। अदालत ने इसको माना भी इस फैसले का अभी तक की भर्तियों पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
हमारा मानना है कि राज्य के सभी वंचित वर्ग को उनकी आबादी के अनुपात में आरक्षण दिया जाये, एससी के आरक्षण में कटौती न, एसटी को पूरा आरक्षण मिले, ओबीसी को पूरा मिले रमन सरकार ने यही सावधानी नहीं बरता था।
रायपुर/ शौर्यपथ / अनुसूचित जनजाति वर्ग के आरक्षण में कटौती की दोषी पूर्ववर्ती रमन सरकार है। भाजपा कितनी भी नौटंकी कर ले उसकी गलती छुपने वाली नहीं है। प्रदेश का आदिवासी समाज भाजपा को माफ नहीं करेगा। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि कांग्रेस आदिवासी समाज के सामने भाजपा की इस बदनीयती को बेनकाब करेगी। कांग्रेस बतायेगी रमन सरकार ने जानबूझकर ऐसा फैसला लिया था जो कोर्ट में रद्द हो जाये। अपने फैसले को बचाने के लिये ठोस उपाय नहीं करने के रमन सिंह की बदनीयती सामने आई है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि कांग्रेस सरकार बिलासपुर उच्चन्यायालय के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गयी है। कांग्रेस आदिवासी समाज के हितो के लिये पूरी कानूनी लड़ाई लड़ेगी। हमें पूरा-पूरा भरोसा है राज्य के आदिवासी, अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग सभी के साथ न्याय होगा। उनकी आबादी के अनुपात में आरक्षण का लाभ मिलेगा। पूर्ववर्ती रमन सरकार ने यदि 2012 में बिलासपुर कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किये गये मुकदमे में सही तथ्य रखे होते तथा 2011 में आरक्षण को 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 58 प्रतिशत करने के समय दूसरे वर्ग के आरक्षण की कटौती के खिलाफ निर्णय नहीं लिया होता तब आरक्षण की सीमा 50 से बढ़कर 58 हो ही रही थी तो उस समय उसे 4 प्रतिशत और बढ़ा देते सभी संतुष्ट होते कोर्ट जाने की नौबत नहीं आती और न आरक्षण रद्द होता।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि आरक्षण को बढ़ाने का निर्णय हुआ उसी समय सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार राज्य सरकार को अदालत के सामने आरक्षण को 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ाने की विशेष परिस्थितियों और कारण को बताना था। तत्कालीन रमन सरकार अपने इस दायित्व का सही ढंग से निर्वहन नहीं कर पायी। 2012 में बिलासपुर उच्च न्यायालय में 58 प्रतिशत आरक्षण के खिलाफ याचिका दायर हुई तब भी रमन सरकार ने सही ढंग से उन विशेष कारणों को प्रस्तुत नहीं किया जिसके कारण राज्य में आरक्षण को 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 58 प्रतिशत किया गया। आरक्षण को बढ़ाने के लिये तत्कालीन सरकार ने तत्कालीन गृहमंत्री ननकी राम कंवर की अध्यक्षता में मंत्री मंडलीय समिति का भी गठन किया था। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में भी कमेटी बनाई गयी थी। रमन सरकार ने उसकी अनुशंसा को भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया जिसका परिणाम है कि अदालत ने 58 प्रतिशत आरक्षण के फैसले को रद्द कर दिया। रमन सरकार की बदनीयती से यह स्थिति बनी है।
रायपुर / शौर्यपथ /
राज्यसभा सदस्य सरोज पांडे के द्वारा कोयला संकट के चलते बीएसपी के प्लांट बंद होने की सूचना पर अनभिज्ञता जाहिर करने पर कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा नेत्री एवं राज्यसभा सदस्य सरोज पांडे को भिलाई स्टील प्लांट में जाकर वीडियो बनाना चाहिए जहां बीते 6 दिनों से कोयला नहीं होने के चलते प्लांट में उत्पादन बंद है एवं मोदी सरकार ने अडानी प्रेम में मनमानी करते हुए मात्र कोयला ढुलाई के लिए बीते कई माह से लोकल और एक्सप्रेस ट्रेनों को बंद कर दिया है और वो लोकल ट्रेन स्टेशन में जंग खाते हुए खड़ी है और जनता नवरात्रि के पावन पर्व पर देवीदर्शन करने के लिए ट्रेन ढूंढ रही है।
प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि मोदी सरकार ने अडानी प्रेम के चलते विदेश से आयातित महंगे कोयले को उद्योगों को इस्तेमाल करने का जो तुगलकी फरमान जारी किया है जिसके चलते भारत के नवरत्न कंपनियों एवं निजी क्षेत्र के कंपनियों में तालाबंदी की स्थिति निर्मित हुई है और जनता को यात्रा करने के लिए ट्रेन भी नहीं मिल रहा है 100 से अधिक पावर प्लांट जो बिजली उत्पादन करते थे वह भी अब महंगे कोल के चलते उत्पादन को बंद कर दिये है ।जबकि देश के पास अकूत मात्रा में कोल का भंडारण है उसके बावजूद सिर्फ कोल किंग अपने मित्रों को फायदा पहुँचाने विदेश के महंगा कोयला को इस्तेमाल करने का दबाव डाला जारहा है और इसके लिए अनैतिक तरीका इस्तेमाल कर रही है।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि प्रदेश ने भाजपा को 9 सांसद दिए हैं जिनमें से एक मंत्री का दायित्व भी निर्वहन कर रहे हैं एक राज्यसभा के सदस्य हैं लेकिन भाजपा सांसदों का रवैया और निष्क्रियता का नुकसान छत्तीसगढ़ के तीन करोड़ जनता को हो रहा है भाजपा के सांसद अपने जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं कर रहे है।बीते कई माह से प्रदेश की जनता को ट्रेन की सुविधा नहीं मिल पा रही है बिना किसी सूचना के बिना किसी कारण के यहां से होकर गुजरने वाली एवं यहां स्थानीय स्तर पर चलने वाली लोकल ट्रेनों को बंद कर दिया गया है और जनता परेशान है और भाजपा के सांसद गधे के सिर से गायब सिंग की तरह गायब है।
कवर्धा / शौर्यपथ /
कवर्धा विधानसभा के विधायक व मंत्री मोहम्मद अकबर के कार्य को देखते हुए लोगों का रुझान कांग्रेस पार्टी की ओर बढ़ रहा है। यही वजह हैं कि बीते एक हफ्ते में कवर्धा विधानसभा से एक हजार से अधिक लोगों ने कांग्रेस का दामन थामा है। स्थिति ऐसी है कि कवर्धा विधायक व मंत्री अकबर के दौरे कार्यक्रम के दौरान भाजपा से अलग होकर नेता कांग्रेस पार्टी में प्रवेश कर रहे। दरअसल सोमवार को कवर्धा विधायक व मंत्री अकबर अपने विधानसभा क्षेत्र के दौरे पर पहुंचे थे। ऐसे में ग्राम रौचन व रवेली के ग्रामीणों ने कांग्रेस के हाथ को अपनाया है। मंत्री श्री अकबर के समक्ष लोग बड़ी संख्या में कांग्रेस प्रवेश कर रहे है। ऐसे में कबीरधाम जिले के राजनीति में सरगर्मी की स्थिति बन गई है। मंत्री अकबर के कार्यक्रमों में भी लोग कांग्रेस से जुड़ने का ऐलान कर रहे हैं। मंत्री अकबर ग्राम रौचन तथा रवेली पहुंचे तो वहां कार्यक्रम में युवाओं के समूह ने कांग्रेस पार्टी के साथ जुड़ने का ऐलान किया। उनका मंत्री अकबर ने तिरंगा गमछा पहनाकर स्वागत किया। न केवल पुरुष बल्कि महिलाएं भी कांग्रेस पार्टी से जुड़ रही है। गौरतलब है कि सोमवार को पिछड़ा वर्ग महासभा की जिला अध्यक्ष पूर्णिमा चंद्राकर के नेतृत्व में 250 लोगों ने कांग्रेस प्रवेश किया है, जिसमें अधिकांश महिलाएं हैं। ये लोग जिले के अलग अलग स्थानों के हैं। पूर्णिमा चंद्राकर पिछड़ा वर्ग महासभा के पदाधिकारी की हैसियत से काफी सक्रिय रही है। उसकी सक्रियता का लाभ कांग्रेस पार्टी की मिल सकता है।
और भी है संपर्क में...इस बयान से राजनीतिक सरगर्मी बढ़ी
सोमवार को कवर्धा विधायक व मंत्री अकबर के सामने भाजपा के पूर्व नगर पालिका उपाध्यक्ष टेकसिंह जांगडे, ओबीसी महासभा की जिला अध्यक्ष पूर्णिमा चंद्राकर, नपा के वार्ड क्रमांक 27 के पूर्व पार्षद उदित झारिया, नपा कवर्धा के पूर्व भाजपा पार्षद प्रत्याशी वार्ड 17 रोहित जांगडे ने कांग्रेस पार्टी में प्रवेश किया है। इस दौरान मंत्री अकबर व कांग्रेस के बड़े नेताओं ने कवर्धा शहर के जी श्याम प्लाजा में प्रेस कांफ्रेंस रखी। तक मीडिया से चर्चा के दौरान मंत्री श्री अकबर ने बड़ा बयान दिया था कि उनके संपर्क में और भी लोग है, जो कांग्रेस में शामिल होना चाहते है। इस बयान से कवर्धा विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ी हुई है। क्योंकि लगातार भाजपा के बड़े नेता कांग्रेस में प्रवेश कर रहे है। गौरतलब है कि रविवार को राजनांदगांव लोकसभा सांसद संतोष पांडेय के चचेरे भाई विजय पांडेय ने रायपुर स्थिति मंत्री अकबर के निवास कार्यालय में कांग्रेस प्रवेश किया था। इसके ठीक दूसरे दिन सोमवार को कवर्धा में अन्य भाजपा नेताओं ने कांग्रेस प्रवेश कर लिया।
पूर्व भाजपा नेता खुलकर समर्थन कर रहे
लगातार कांग्रेस प्रवेश के कारण जिले की राजनीतिक चर्चा गर्म हो रहीं है। इसके पीछे भी बड़ा कारण है, क्योंकि पूर्व में जो भाजपा नेता रहे है, वे कांग्रेस में आने के बाद राज्य के कांग्रेस सरकार के कार्य को खुलकर समर्थन कर है। कांग्रेस पार्टी में प्रवेश का प्रमुख कारण कवर्धा विधानसभा में हो रहे विकास कार्य तथा मंत्री अकबर का सहज,सरल व्यवहार होना है। अपने कार्यक्रमों में मंत्री विकास कार्यों के लिए राशि की घोषणा में कोई कमी नहीं कर रहे हैं। लगभग 40 अलग-अलग समाजों को भवन के लिए भूखंड और अपने विधायक निधि की राशि देकर उन्होंने समाजों का दिल भी जीत लिया है।
यूथ आइकॉन बन रहे मंत्री अकबर
युवाओं के बीच में भी मंत्री अकबर काफी लोकप्रिय हो रहे है। दरअसल सोमवार को कवर्धा विधानसभा दौरा कार्यक्रम के दौरान ग्राम रौचन व रवेली में ग्रामीण युवाओं ने कांग्रेस में प्रवेश किया। कांग्रेस प्रवेश के पीछे कारण विधानसभा क्षेत्र में विकाय कार्य व युवाओं के बीच में मंत्री की अच्छी पकड़ मानी जा रही है। स्थिति ऐसी है कि कवर्धा विधायक व मंत्री अकबर युवाओं के बीच में यूथ आइकॉन बन रहे है। ग्राम रौचन व रवेली में कांग्रेस प्रवेश किए युवाओं का कहना था कि मंत्री अकबर द्वारा युवाआें के लिए बहुत से कार्य करा रहे है। युवाओं की हर समस्या का निराकरण किया जा रहा है। कॉलेज में सीट वृद्वि करना, ग्राम राम्हेपुर स्थित शक्कर कारखाना में एथेनॉल प्लांट का प्रारंभ कर रोजगार के लिए प्रयास किया जा रहा है। इसके अलावा विधानसभा क्षेत्र में शिविर के माध्यम से ड्राइविंग लाइसेंस बनाया जा रहा है। अब तक शिविर के माध्यम से करीब 500 से अधिक युवाओं का लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस बनाया जा चुका है।
भाजपा में खलबली, बड़े नेताओं का हो सकता है दौरा
दूसरी ओर कांग्रेस प्रवेश के इस अभियान से भाजपा में भी खलबली का माहौल है। क्योंकि खुद पार्टी के पूर्व नेता सीधे मंत्री अकबर से संपर्क कर कांग्रेस प्रवेश कर रहे है। भाजपा से भगदड़ को रोकने प्रदेश भाजपा के नेताओं का दौरा कवर्धा में होने का अनुमान लगाया जा रहा है या फिर कबीरधाम जिले के प्रमुख भाजपा पदाधिकारियों को प्रदेश मुख्यालय बुलाया जा सकता है। प्रदेश के 15 वर्षों तक मुख्यमंत्री रहे रमन सिंह का कवर्धा दौरा भी जल्द हो सकता है।
दुर्ग। शौर्यपथ । दुर्ग कांग्रेस में काफी सालों तक वोरा परिवार का दबदबा रहा किंतु वर्तमान स्थिति में अगर देखा जाए तो दुर्ग कॉन्ग्रेस अब दो फाड़ स्थिति में नजर आ रही है दुर्ग कांग्रेस में सक्रिय अध्यक्ष के रूप में कार्यकाल निभाने वाले आर एन वर्मा पूर्व महापौर को हटाने के बाद जब नए कांग्रेस अध्यक्ष गया पटेल को यह जिम्मेदारी दी गई तब से दुर्ग कांग्रेस में संगठन निष्क्रिय स्थिति में ही नजर आती है मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सभा में खाली कुर्सियां इस बात का प्रमाण है कि दुर्ग कांग्रेस संगठन कितनी ज्यादा निष्क्रिय है वही राजीव भवन उद्घाटन के समय जिस प्रकार से पूरा संचालन दुर्ग ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष एवं वर्तमान महापौर नगर निगम चरोदा निर्मल को संभाला उससे भी या संदेश जाता है कि दुर्ग कांग्रेस संगठन सिर्फ नाम मात्र की ही नजर आ रही है वहीं अगर वर्तमान राजनीतिक परिवेश में देखा जाए तो दुर्ग कांग्रेस में एक समय बिना वोरा बंगले की रजामंदी के कोई कार्य नहीं होता था आज कई गुट सामने आ चुके हैं प्रदेश के गृह मंत्री के समर्थकों की संख्या दुर्ग में भी बहुतायत हो गई है , वही भिलाई विधायक देवेंद्र यादव को भी अपना नेता मानने वाले दुर्ग में है दूसरी तरफ राजेंद्र साहू , राजेश यादव, लक्ष्मण चंद्राकर, प्रतिमा चंद्राकर ,के समर्थकों की संख्या भी काफी बढ़ गई है । हालांकि सामने सभी एक होने कि बात करते है किंतु वास्तविक स्थिति इससे बिल्कुल जुदा है । ऐसा इसलिए भी कहा जा सकता है क्योंकि इन राजनेताओं का किसी पर्व हो या किसी नेता के बधाई संदेश में लगने वाले फोटो की प्राथमिकता और संख्या से ही यह साफ हो जाता है कि कौन किस गुट का समर्थक है और कौन किस गुट का विरोधी हाल ही में मुख्यमंत्री के जन्म दिवस की बधाई पर जिस प्रकार से पोस्टर वार नजर आया उससे यह तो साफ हो गया कि दुर्ग में अब कांग्रेस दो हिस्सों में बढ़ चुका है ऐसे में दुर्ग में यह चर्चा जोरों पर है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेसमें भीतरी घात अपनी चरम सीमा पर है यह जिस प्रकार से विधायक अरुण वोरा के समर्थकों की संख्या लगातार गिरती जा रही है उससे चर्चा यह भी है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में विधायक वोरा कि हार है भी हो सकती है जिस प्रकार से विधायक के खिलाफ दुर्ग में कई कांग्रेसी मुखर हो गए हैं कई सामने से तो कई पर्दे के पीछे से मुखर हुए हैं उससे आने वाले चुनाव में विधायक वोरा के लिए काफी मुश्किल है खड़ी हो सकती हैं । जिस तरह से कांग्रेस से बगावत कर निगम चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने वाले आज करीबी बन गए हैं वह भी कई कांग्रेसियों को रास नहीं आ रहा । वहीं दूसरी ओर शहर की बदहाल स्थिति भी विधायक वोरा के लिए मुश्किलें खड़ा कर देंगे आज शहर की स्थिति काफी बदहाल है चाहे वह सड़क समस्या हो नाली समस्याओं सफाई समस्या हो बिजली समस्या हो या पानी समस्या हर मामले में दुर्ग शहर की स्थिति काफी दयनीय है । निगम क्षेत्र के हर कार्य में विधायक वोरा के अपरोक्ष दखल से भी कांग्रेसियों में काफी नाराजगी है ।
चर्चा यहां तक है कि दुर्ग के सामाजिक स्तर में अपनी पहचान बनाने वाले कई दिग्गज भी और अब वोरा बंगले से नाराज चल रहे हैं वहीं कई कांग्रेसी पार्षद और एम आई सी सदस्य भी उपेक्षा के शिकार होकर बंगले से दूर हो गए हैं भले ही आज सामने समर्थन में नजर आते हैं किंतु जमीनी स्तर पर सभी दूरी बनाते जा रहे हैं अगर ऐसा ही चलता रहा तो आने वाले विधानसभा चुनाव में निश्चित ही कांग्रेस को दुर्ग की सीट गवानी पड़ सकती है वैसे यह भी कहा जाता है कि विधायक वोरा चुनाव के पहले सभी नाराज लोगों को साध लेंगे जैसा कि हर बार साधते आए हैं अब देखना यह है कि बाहर से एक दिखने वाली कांग्रेस अंदर से कब एक होगी....
नोट *यह लेख दुर्ग के निवासियों एवम राजनीतिक से जुड़े लोगों से चर्चा के आधार पर
भिलाई / शौर्यपथ / भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव ने 19 सितंबर को एक लेटर जारी करके खुर्सीपार निवासी डी. काम राजू पिता श्री डी. कामराजू पिता स्व. श्री रजैय्या पता- क्वा. नं.-1 / जी, सड़क-37 जोन-2, वार्ड-50 खुर्सीपार भिलाई जिला-दुर्ग
(छ.ग.) को अपना विधायक प्रतिनिधि नियुक्त किए है। विधायक श्री यादव ने बताया कि कार्यालय कलेक्टर जिला-दुर्ग एवं नगर पालिक निगम भिलाई में होने वाली समस्त बैठको तथा कार्यों को लेकर बेहतर समन्वय बनाएं रखने के लिए डी काम राजू को अपना विधायक प्रतिनिधि नियुक्त किए है। डी काम राजू के विधायक प्रतिनिधि नियुक्त होने पर उन्होंने विधायक देवेंद्र यादव का आभार जताया और कहा कि वे पूरी निष्ठा और इमानदारी से काम करेंगे। विधायक प्रतिनिधि नियुक्त होने पर कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारियों ने डीकाम राजू को पष्प भेंट कर बधाई और शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर लोककर्म प्रभारी, एकांश बंछोर एमआईसी सदस्य नीता सिंह गेरा, जोन अध्यक्ष भूपेद्र यादव, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष तुलसी पटेल सहित खुर्सीपार क्षेत्र के सभी पार्षद व छाया पार्षद उपस्थित रहे।
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ प्रदेश निर्वाचन अधिकारी हुसैन दलवाई की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ प्रभारी पी.एल. पुनिया, प्रभारी सचिव डॉ. चंदन यादव की उपस्थिति में कांग्रेस के नवनिर्वाचित प्रदेश प्रतिनिधियों की बैठक प्रदेश मुख्यालय राजीव भवन में आयोजित किया गया। बैठक में दो महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित हुये। पहला प्रस्ताव मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रखा जिसमें कहा गया प्रदेश के पदाधिकारियों एवं कांग्रेसजनों की भावनानुरुप भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी को बनाये जाने हेतु सर्वसम्मति से प्रस्ताव रखता हूं। इस प्रस्ताव का समर्थन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम, वरिष्ठ नेता डॉ. चरणदास महंत, मंत्री टी.एस. सिंहदेव, मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया, मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह ने किया।
दूसरा प्रस्ताव प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने रखा जिसमें कहा गया कि समस्त प्रदेश कांग्रेस प्रतिनिधिगण इंडियन नेशनल कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष आदि जैसे पदाधिकारियों सहित कार्यकारिणी सदस्यों, प्रदेश चुनाव समिति और राज्य के एआईसीसी सदस्यों को नामित करने के लिए अधिकृत करने के लिये सर्वसम्मति से प्रस्ताव रखा इस प्रस्ताव का समर्थन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, वरिष्ठ नेता डॉ. चरणदास महंत, मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया ने किया।
दोनों ही प्रस्तावों का सभी प्रदेश प्रतिनिधियों ने हाथ उठाकर समर्थन किया।
रायपुर / शौर्यपथ /
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि भाजपा कार्यकारणी का बदलाव कर अपने जनता के दिये गये धोखे पर पर्दा नहीं डाल सकती। जनता भूली नहीं है 2003 में भाजपा ने हर बेरोजगार युवा को 500 बेरोजगारी भत्ता देने का वायदा किया था, हर आदिवासी को 10 लीटर वाली जर्सी गाय देने का वायदा किया था, हर आदिवासी परिवार से एक को सरकारी नौकरी देने का वायदा भी भाजपा ने किया था लेकिन इन वायदों को तीन बार सरकार बनाने के बाद भी पूरा नहीं किया था। 2008 के चुनाव में भाजपा ने किसानों को पूरे पांच साल 200 रु बोनस देने का वायदा किया लेकिन एक साल के बाद नहीं दिया, अकेले 2008 से 2013 के बीच 3880 करोड़ रु धान के बोनस का पैसा जो वायदा किया था भाजपा ने नहीं दिया था। 2013 के चुनाव में भी भाजपा ने धान की कीमत 2100 देने का वायदा किया और 300 रु बोनस पूरे पांच साल देने की बात कही, साथ ही किसान के द्वारा पैदा किये एक-एक दाना धान खरीदी का वचन भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में दिया था सरकार बनाने के बाद भाजपा भूल गयी।
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