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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
कवर्धा/कबीरधाम | शौर्यपथ समाचार | ब्यूरो चीफ: प्रवीण गुप्ता
कबीरधाम पुलिस ने एक बार फिर अपनी संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण का परिचय देते हुए एक अज्ञात मानसिक रूप से अस्वस्थ महिला को सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराने की सराहनीय पहल की है। पुलिस की तत्परता और संवेदनशील कार्रवाई के चलते महिला को अब उचित देखभाल और इलाज मिल रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिनांक 2 मई को थाना कोतवाली को सूचना मिली कि ग्राम डबराभाट में लगभग 25 से 30 वर्ष की एक महिला, जो मानसिक रूप से अस्वस्थ प्रतीत हो रही थी, गांव में इधर-उधर भटक रही है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची और महिला से बातचीत करने का प्रयास किया, लेकिन वह अपना नाम और पता बताने में असमर्थ रही।
महिला की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए पुलिस उसे थाना कोतवाली लेकर आई, जहां से जिला अस्पताल में उसका स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया। इसके बाद उसे सुरक्षित वातावरण में रखने के लिए सखी सेंटर में रखा गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों—पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पुष्पेंद्र बघेल एवं अमित पटेल, तथा उप पुलिस अधीक्षक (मुख्यालय) आशीष शुक्ला—के निर्देशन में महिला को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
न्यायालय ने महिला की मानसिक स्थिति और उसकी पहचान अज्ञात होने के कारण उसे मानसिक स्वास्थ्य केंद्र सेंदरी, बिलासपुर में भर्ती कराने का आदेश दिया। आदेश के पालन में 5 मई 2026 को पुलिस द्वारा महिला को विधिवत सेंदरी मानसिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां अब उसका उपचार जारी है।
कबीरधाम पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी को उक्त महिला के संबंध में कोई भी जानकारी प्राप्त हो, तो वे तत्काल थाना कोतवाली कबीरधाम या पुलिस कंट्रोल रूम (मोबाइल नंबर: 9479192499) पर सूचना दें, ताकि महिला को उसके परिजनों से मिलाने में सहायता मिल सके।
यह पहल न केवल पुलिस की कर्तव्यनिष्ठा को दर्शाती है, बल्कि समाज के प्रति उसकी मानवीय जिम्मेदारी का भी एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत करती है।
ब्यूरो चीफ: प्रवीण गुप्ता
कबीरधाम जिला के पुलिस अधीक्षक धर्मेन्द्र सिंह (भा.पु.से.) के निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पुष्पेन्द्र बघेल व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमित पटेल के मार्गदर्शन तथा उप पुलिस अधीक्षक मुख्यालय श्री आशीष शुक्ला के दिशा निर्देश में थाना कोतवाली पुलिस टीम के द्वारा लगातार असामाजिक तत्वों के विरुद्ध एवं अवैध गतिविधियों जैसे अवैध शराब बिक्री एवं परिवहन, जुआ,सट्टा पर प्रभावी नियंत्रण हेतु लगातार सघन अभियान चलाया जा रहा है।
इसी तारतम्य में आज दिनांक 6 मई 2026 को विश्वसनीय मुखबिर के सूचना के आधार पर कोतवाली पुलिस टीम द्वारा ट्रांसपोर्ट नगर मरघट के पास घेराबंदी कर जांच की गई। कार्यवाही के दौरान दो व्यक्तियों को अवैध शराब का परिवहन करते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया।
पूछताछ में आरोपियों ने अपना नाम (1) विनायक वर्मा, पिता – धनेश वर्मा, उम्र – 25 वर्ष, निवासी – बैहरसरी, थाना बोड़ला, जिला कबीरधाम (2) टेकराम वर्मा, पिता – रामेश्वर वर्मा, उम्र – 27 वर्ष, निवासी – बैहरसरी, थाना बोड़ला, जिला कबीरधाम बताया। आरोपियों के कब्जे से कुल 90 नग देशी प्लेन शेरा शराब (प्रत्येक 180 एम.एल.), कुल 16.200 बल्क लीटर, जिसकी अनुमानित कीमत 7,200/- रुपये तथा परिवहन में प्रयुक्त होंडा मोटरसाइकिल (कीमत लगभग 50,000/- रुपये ) जब्त की गई। इस प्रकार कुल 57,200/- रुपये मूल्य की सामग्री जप्त कर विधिवत कब्जे में ली गई।
आरोपियों का उक्त कृत्य छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के अंतर्गत दंडनीय पाए जाने पर थाना कोतवाली में अपराध क्रमांक 179/2026 पंजीबद्ध कर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई किया गया।
कबीरधाम पुलिस द्वारा अवैध गतिविधियों के विरुद्ध इसी प्रकार सख्त एवं सतत कार्यवाही आगे भी जारी रहेगी।
बालोद/ शौर्यपथ /
बालोद जिले के डौंडी लोहारा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम हथोद में देर रात एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां जहरीले सांप के काटने से 6 वर्षीय मासूम बच्ची की मौत हो गई।
मिली जानकारी के अनुसार, डिंपल चौहान (उम्र 6 वर्ष) अपने माता-पिता के साथ घर के फर्श पर सो रही थी। रात करीब 12 बजे के आसपास उसे जहरीले सांप ने काट लिया, लेकिन परिजनों को इसकी भनक नहीं लगी।
कुछ समय बाद बच्ची की तबीयत बिगड़ने लगी और उसे उल्टी-दस्त होने लगे। परिजनों ने इसे सामान्य समस्या समझते हुए घरेलू उपचार के रूप में नींबू पानी आदि दिया। हालांकि, हालत में सुधार नहीं होने पर जब उन्होंने आसपास देखा तो बिस्तर के पास जहरीला सांप दिखाई दिया, जिससे घटना का अंदेशा हुआ।
इसके बाद परिजन तत्काल बच्ची को डौंडी लोहारा अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां जांच के दौरान सांप के काटने की पुष्टि हुई। उपचार के दौरान ही मासूम डिंपल ने दम तोड़ दिया।
कोंडागांव / शौर्यपथ समाचार
कोंडागांव जिले के बनियागांव क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। कुछ दिन पूर्व शौर्यपथ समाचार द्वारा इस गंभीर मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया था, जिसमें फर्जी नक्शे के आधार पर जमीन की बिक्री और नियमों की खुलेआम अनदेखी का खुलासा किया गया था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि खबर प्रकाशित होने के बाद भी जिला प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई या जांच प्रतिवेदन सामने नहीं आया है।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ विधानसभा में धमतरी और कांकेर में अवैध प्लाटिंग के मामलों को लेकर गंभीर चर्चा हुई थी, जिसके बाद एक विशेष जांच समिति का गठन किया गया था। इसी कड़ी में कोंडागांव के बनियागांव में हो रही अवैध प्लाटिंग का मामला भी सामने आया। उम्मीद थी कि समिति इस पर शीघ्र कार्रवाई करेगी, लेकिन अब तक न तो जांच की प्रगति स्पष्ट है और न ही कोई आधिकारिक रिपोर्ट सार्वजनिक की गई है।
स्थानीय स्तर पर आरोप हैं कि जमीन दलालों ने स्कूल मैदान के बीच का फर्जी नक्शा दिखाकर प्लॉट बेचे हैं। यह मामला टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के नियमों के सीधे उल्लंघन का संकेत देता है। आरोप यह भी हैं कि इस पूरे प्रकरण में राजस्व अमले—विशेष रूप से आरआई और पटवारी—की मिलीभगत से इन गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन जांच में देरी से संदेह और गहराता जा रहा है।
शौर्यपथ समाचार द्वारा लगातार इस मुद्दे को उठाए जाने के बावजूद प्रशासन की निष्क्रियता कई सवाल खड़े कर रही है। विधानसभा में मामला उठने और जांच टीम गठित होने के बाद भी यदि कार्रवाई नहीं होती, तो यह न केवल प्रशासनिक सुस्ती को दर्शाता है, बल्कि अवैध कारोबार में लगे तत्वों के हौसले भी बढ़ा सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन इस गंभीर मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करेगा, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा। आने वाले दिनों में प्रशासन की कार्रवाई इस पूरे मामले की दिशा तय करेगी।
नरेश देवांगन
जगदलपुर, शौर्यपथ। आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए सरकारी घोषणाएं तेज़ हैं, मगर डिमरापाल में तस्वीर कुछ और ही कहानी कहती दिख रही है। सवाल सीधा है—जब अस्पताल ही नियमित रूप से संचालित न हो, तो मरीज इलाज कहां कराएं? योजनाओं की चमक और ज़मीनी हकीकत के बीच यह फासला न सिर्फ व्यवस्थाओं पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि आयुर्वेद की साख पर भी असर डाल सकता है। और सबसे दिलचस्प बात—निगरानी तंत्र को जैसे यह सब दिखता ही नहीं, या दिखता है तो दर्ज नहीं होता।
इसी कड़ी में शासकीय आयुर्वेद औषधालय डिमरापाल चर्चा में है, जहां सेवाएं कथित तौर पर “हफ्ते में एक-दो दिन” तक सिमट गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि डॉक्टर की नियमित अनुपस्थिति के चलते उन्हें छोटे-छोटे इलाज के लिए भी इधर-उधर भटकना पड़ता है, जबकि रजिस्टरों में सब कुछ ‘समय पर’ और ‘नियमित’ बताया जाता है।
“शौर्यपथ” टीम के निरीक्षण में सोमवार से बुधवार तक चिकित्सा अधिकारी मौजूद नहीं मिलीं। गुरुवार—सियान जतन —पर अस्पताल में उपस्थिति दर्ज कर सेवाएं दी जाती दिखीं। ग्रामीणों के शब्दों में, “यहां इलाज नहीं, हाजिरी का कैलेंडर चलता है।”
सूत्रों के अनुसार, उपस्थिति और ओपीडी आंकड़ों के बीच अंतर की आशंका जताई जा रही है। संबंधित चिकित्सा अधिकारी ने अनौपचारिक बातचीत में पारिवारिक कारणों—विशेषकर छोटे बच्चों की देखभाल—का हवाला देते हुए बताया कि वे प्रतिदिन उपस्थित नहीं हो पातीं। साथ ही यह भी संकेत दिया कि मरीजों की संख्या कम होने के बावजूद नियमित आंकड़े प्रस्तुत करने का दबाव रहता है, जिसके चलते प्रविष्टियों में अंतर आ सकता है। सवाल यह है कि अगर आंकड़े ही इलाज बन जाएं, तो मरीज का भरोसा किस पर टिका रहेगा?
मामले की सूचना जिला आयुर्वेद अधिकारी को दिए जाने पर त्वरित कार्रवाई का आश्वासन मिला और 20 दिन पहले शिकायत भी सौंपी गई। लेकिन “तत्काल” शब्द फिलहाल फाइलों में ही सक्रिय नजर आता है—स्थानीय स्तर पर किसी ठोस कार्रवाई की पुष्टि अब तक सामने नहीं आई है। ऐसे में यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या व्यवस्था में ‘सब ठीक है’ मान लेना ही नई कार्यप्रणाली बन गई है?
अब नजरें इस बात पर हैं कि क्या जिम्मेदार अधिकारी इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई करेंगे, या फिर डिमरापाल का औषधालय यूं ही कागज़ों में रोज़ खुलता रहेगा और ज़मीन पर हफ्ते में एक-दो दिन ही दिखाई देगा।
मुंबई | (शौर्यपथ समाचार)
वृत्तचित्र, एनिमेशन और लघु फिल्म निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण मंच ‘वेव्स डॉक बाज़ार’ का दूसरा संस्करण 16 से 18 जून 2026 तक मुंबई में आयोजित किया जाएगा। यह आयोजन 19वें मुंबई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (एमआईएफएफ) के साथ एनएफडीसी कॉम्प्लेक्स में होगा, जहां देश-विदेश के फिल्म निर्माता, वितरक, निवेशक और तकनीकी विशेषज्ञ एक साथ जुटेंगे।
वेव्स डॉक बाज़ार को ऑडियो-विज़ुअल उद्योग में उभरती प्रतिभाओं को बढ़ावा देने और उन्हें वैश्विक पहचान दिलाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यह मंच फिल्म निर्माताओं को सहयोग, मार्गदर्शन, बाजार तक पहुंच और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्किंग के अवसर प्रदान करेगा।
इस आयोजन के प्रमुख आकर्षणों में ‘व्यूइंग रूम’ शामिल है, जहां हाल ही में पूर्ण या पोस्ट-प्रोडक्शन में मौजूद फिल्मों को चुनिंदा खरीदारों, वितरकों और निवेशकों के सामने प्रदर्शित किया जाएगा। यह एक सुरक्षित मंच होगा, जहां फिल्म निर्माताओं को वितरण, सह-निर्माण और वित्तीय सहयोग के अवसर मिलेंगे।
इसके साथ ही ‘वर्क-इन-प्रोग्रेस (डब्ल्यूआईपी) लैब’ भी आयोजित की जाएगी, जिसमें डॉक्यूमेंट्री और एनिमेशन फिल्मों के रफ-कट चरण के प्रोजेक्ट्स को विशेषज्ञों से मार्गदर्शन मिलेगा। अनुभवी फिल्म निर्माता, संपादक और अंतरराष्ट्रीय सलाहकार प्रतिभागियों को अपनी फिल्मों को बेहतर बनाने के लिए सुझाव देंगे।
पहली बार इस आयोजन में वीआर (वर्चुअल रियलिटी), एआर (ऑगमेंटेड रियलिटी) और एक्सआर (एक्सटेंडेड रियलिटी) आधारित कंटेंट पर केंद्रित एक उभरता बाजार भी प्रस्तुत किया जाएगा, जो इमर्सिव स्टोरीटेलिंग और नई तकनीकों को बढ़ावा देगा।
वेव्स डॉक बाज़ार 2026 के लिए व्यूइंग रूम और डब्ल्यूआईपी लैब में भागीदारी हेतु आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इच्छुक प्रतिभागी 15 मई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह मंच उन फिल्म निर्माताओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो अपने प्रोजेक्ट्स के लिए वितरण, निवेश या अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन के अवसर तलाश रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह आयोजन भारतीय और वैश्विक फिल्म उद्योग के बीच सेतु का काम करेगा और रचनात्मकता के साथ-साथ तकनीकी नवाचार को भी नई दिशा देगा।
नई दिल्ली | (शौर्यपथ समाचार)
भारतीय इस्पात क्षेत्र ने अप्रैल 2026 में अपनी मजबूत वृद्धि की गति को बरकरार रखते हुए उत्पादन, खपत और कीमतों के मोर्चे पर सकारात्मक संकेत दिए हैं। घरेलू मांग में मजबूती और अवसंरचना व विनिर्माण क्षेत्रों में लगातार गतिविधियों के चलते उद्योग में स्थिरता और विस्तार का रुझान देखने को मिला।
आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 में कच्चे इस्पात का उत्पादन 14.09 मिलियन टन रहा, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 5.8 प्रतिशत अधिक है। तैयार इस्पात का उत्पादन 13.05 मिलियन टन तक पहुंचा, जबकि इसकी खपत 12.99 मिलियन टन रही, जिसमें 8.1 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। यह वृद्धि देश में निर्माण और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में जारी तेजी को दर्शाती है।
हालांकि पिग आयरन का उत्पादन 0.69 मिलियन टन रहा, जिसमें सालाना आधार पर 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, लेकिन समग्र रूप से इस्पात क्षेत्र की स्थिति मजबूत बनी रही।
व्यापार के क्षेत्र में भारत अप्रैल 2026 में मामूली रूप से शुद्ध आयातक बना रहा। इस दौरान आयात 0.68 मिलियन टन और निर्यात 0.47 मिलियन टन रहा। पिछले वर्ष की तुलना में आयात में 30.8 प्रतिशत और निर्यात में 24.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो वैश्विक बाजार में भारत की सक्रिय भागीदारी को दर्शाता है।
क्षमता विस्तार के मोर्चे पर भारत 2030 तक 300 मिलियन टन वार्षिक उत्पादन क्षमता के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है। वर्तमान में यह क्षमता लगभग 220 मिलियन टन प्रति वर्ष है। एसएआईएल, टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील, जेएसपीएल और एएमएनएस जैसी प्रमुख कंपनियां बड़े निवेश के साथ विस्तार कर रही हैं। टाटा स्टील द्वारा लुधियाना में 3,200 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित 0.75 मिलियन टन क्षमता वाला ग्रीन स्टील संयंत्र इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
ग्रीन स्टील पहल के तहत भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। एनआईएसएसटी द्वारा 15 राज्यों के 90 उत्पादकों को ग्रीन स्टील प्रमाणपत्र जारी किए जा चुके हैं, जिनमें अधिकांश उत्पादों को 5-स्टार रेटिंग प्राप्त हुई है। यह पर्यावरण अनुकूल उत्पादन की दिशा में उद्योग की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
कीमतों के मोर्चे पर अप्रैल 2026 में सभी प्रमुख इस्पात उत्पादों में सुधार देखने को मिला। टीएमटी और रीबार की कीमतों में 2.6 प्रतिशत की मासिक वृद्धि हुई, जबकि एचआर कॉइल और जीपी शीट की कीमतों में क्रमशः 6.3 प्रतिशत और 7.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
कच्चे माल की कीमतों में मिश्रित रुझान रहा, लेकिन घरेलू लौह अयस्क की कीमतों में 10-11 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। वहीं अंतरराष्ट्रीय कोकिंग कोयले की कीमतों में वृद्धि से उत्पादन लागत पर दबाव बना हुआ है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बुनियादी ढांचे में बढ़ते निवेश और विनिर्माण क्षेत्र के विस्तार के चलते भारतीय इस्पात उद्योग आने वाले समय में भी मजबूत बना रहेगा। हालांकि ऊर्जा सुरक्षा, कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक व्यापारिक परिस्थितियां इस क्षेत्र के लिए प्रमुख चुनौतियां बनी रहेंगी।
(स्रोत: अप्रैल 2026 के लिए अनंतिम जेपीसी डेटा)
लखनऊ | (शौर्यपथ समाचार)
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान दो दिवसीय लखनऊ प्रवास पर हैं, जहां वे 6 और 7 मई को आयोजित होने वाले “फ्रूट होराइज़न-2026” कार्यक्रम में भाग लेंगे। यह आयोजन देश के बागवानी और फल उत्पादन क्षेत्र को नई दिशा देने के उद्देश्य से किया जा रहा है, जिसमें किसानों से लेकर वैज्ञानिकों और निर्यातकों तक सभी प्रमुख हितधारकों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है।
पहले दिन 6 मई को गोमतीनगर स्थित होटल रेनेसां में केंद्रीय मंत्री श्री चौहान निर्यातकों और उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ सीधा संवाद करेंगे। इस दौरान फल निर्यात को बढ़ावा देने, वैश्विक बाजार की चुनौतियों, गुणवत्ता सुधार और प्रतिस्पर्धात्मक रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा होगी। शाम को प्रगतिशील निर्यातकों के साथ विशेष बैठक भी प्रस्तावित है, जिसमें निर्यात क्षमता बढ़ाने और नए बाजारों तक पहुंच बनाने पर जोर रहेगा।
दूसरे दिन 7 मई को मुख्य कार्यक्रम आईसीएआर के केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा में आयोजित होगा। यहां श्री चौहान किसानों, पौधशाला संचालकों और प्रसंस्करण क्षेत्र से जुड़े लोगों के साथ संवाद करेंगे। इसके पश्चात मुख्य सत्र में उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री श्री सूर्य प्रताप शाही और श्री दिनेश प्रताप सिंह भी शामिल होंगे।
कार्यक्रम के एजेंडे में फल उत्पादन की गुणवत्ता, वैल्यू एडिशन, निर्यात बढ़ाने की रणनीति, “जीरो रिजेक्शन” नीति, एफपीओ (FPO), एफपीसी (FPC) और स्वयं सहायता समूहों (SHG) की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। इस मंच के माध्यम से नई तकनीकों, आधुनिक प्रसंस्करण पद्धतियों और अंतरराष्ट्रीय बाजार के अवसरों पर भी चर्चा होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि “फ्रूट होराइज़न-2026” जैसे आयोजन किसानों की आय बढ़ाने, बागवानी क्षेत्र में नवाचार लाने और भारत को वैश्विक फल निर्यात के क्षेत्र में मजबूत स्थिति दिलाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। कार्यक्रम में केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी एवं वैज्ञानिक भी मौजूद रहेंगे, जिससे नीति और तकनीक के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होने की उम्मीद है।
नरेश देवांगन
जगदलपुर, शौर्यपथ। राज्य में अवैध रेत उत्खनन पर सख्ती के दावे भले कागज़ों में मजबूत दिखते हों, लेकिन ज़मीनी हकीकत ग्राम पंचायत बनियागांव के आश्रित ग्राम बेलगांव में कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। कुछ दिन पहले माइनिंग विभाग द्वारा रेत उत्खनन में लगी मशीन को जब्त कर ‘बड़ी कार्रवाई’ का दावा जरूर किया गया, मगर अब वही क्षेत्र फिर से रेत निकासी का केंद्र बनता नजर आ रहा है।
सूत्रों और स्थानीय स्तर पर मिल रही जानकारियों के मुताबिक, प्रस्तावित टेंडर प्रक्रिया से पहले ही खदान से दिन-रात ट्रैक्टरों के जरिए रेत निकासी की गतिविधियां जारी रहने की बात सामने आ रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि एक मशीन की जब्ती के बाद क्या अवैध उत्खनन पर प्रभावी रोक लग पाई, या फिर यह कार्रवाई केवल सीमित असर तक ही रह गई?
चर्चा यह भी है कि जब तक विभाग टेंडर प्रक्रिया पूरी करेगा, तब तक खदान के भंडार पर असर पड़ सकता है। यानी टेंडर के समय वास्तविक स्थिति प्रभावित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
सबसे चिंताजनक पहलू यह बताया जा रहा है कि कथित गतिविधियां विभागीय जानकारी के दायरे में होने के बावजूद प्रभावी नियंत्रण नहीं दिख रहा है। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि अपेक्षित है, लेकिन जिम्मेदारों की चुप्पी कई सवाल जरूर खड़े कर रही है—क्या यह लापरवाही है या समन्वय की कमी? क्योंकि जिस स्तर पर रेत निकासी की बातें सामने आ रही हैं, वह स्थानीय निगरानी से जुड़ा विषय भी माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री द्वारा अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए जा चुके हैं, लेकिन बेलगांव की स्थिति इन निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करती नजर आ रही है। एक मशीन की जब्ती के बाद भी यदि गतिविधियां जारी रहने की बातें सामने आती हैं, तो यह कार्रवाई की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
यदि समय रहते ठोस और त्वरित कदम नहीं उठाए गए, तो टेंडर प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और खदान के संसाधनों पर भी असर पड़ने की आशंका है। ऐसे में आवश्यक है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है, तो नियमानुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि शासन की मंशा, राजस्व और पर्यावरणीय संतुलन की प्रभावी सुरक्षा हो सके।
लेखक: शरद पंसारी, संपादक – शौर्यपथ समाचार
भारतीय लोकतंत्र केवल चुनावी जीत-हार का खेल नहीं है, बल्कि यह नेताओं के चरित्र, उनकी संवेदनशीलता और जनता के प्रति उनके व्यवहार का भी आईना है। हाल के दिनों में राजनीतिक चर्चाओं में दो प्रमुख नाम—तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी—एक बार फिर तुलना के केंद्र में हैं।
हालांकि, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि एम.के. स्टालिन के चुनाव हारने या कोलाथुर में हार के बाद पहुंचने जैसी खबरों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। ऐसे में इस विषय को एक व्यापक राजनीतिक व्यवहार और नेतृत्व शैली के संदर्भ में समझना अधिक उचित होगा।
स्टालिन: संयम और संवाद की राजनीति
एम.के. स्टालिन की राजनीतिक शैली को अक्सर शांत, संतुलित और संगठन-केंद्रित माना जाता है। वे द्रविड़ राजनीति की उस परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसमें जनता के साथ निरंतर संवाद और संगठन की मजबूती को प्राथमिकता दी जाती है।
यदि कोई नेता कठिन समय में भी जनता के बीच जाकर उनका आभार व्यक्त करता है, तो यह लोकतांत्रिक परिपक्वता का संकेत माना जाता है। DMK का इतिहास इस बात का गवाह है कि पार्टी ने कई बार हार के बाद मजबूत वापसी की है।
ममता बनर्जी: संघर्ष और विवादों के बीच नेतृत्व
ममता बनर्जी भारतीय राजनीति की सबसे जुझारू नेताओं में से एक रही हैं। उन्होंने लंबे संघर्ष के बाद सत्ता प्राप्त की और कई बार उसे कायम रखा। उनकी छवि एक आक्रामक और जनांदोलन से उभरी नेता की है।
हालांकि, समय-समय पर उनके राजनीतिक रुख—विशेषकर विपक्ष या चुनावी परिणामों को लेकर—विवादों में भी रहे हैं। लोकतंत्र में सवाल उठाना स्वाभाविक है, लेकिन उसकी निरंतरता और शैली सार्वजनिक धारणा को प्रभावित करती है।
जनादेश और जननेता का संबंध
लोकतंत्र में जनादेश सर्वोपरि होता है। एक परिपक्व नेता वही होता है जो:
जीत में विनम्रता बनाए रखे
हार में धैर्य और जनता के प्रति आभार प्रकट करे
कठिन समय में भी संवाद का रास्ता न छोड़े
निष्कर्ष: व्यवहार ही बनाता है स्थायी छवि
नेताओं की असली पहचान चुनावी परिणामों से नहीं, बल्कि उनके व्यवहार से बनती है।
संयम, संवाद और संगठन—दीर्घकालिक राजनीति की नींव हैं
आक्रामकता और आरोप—तात्कालिक लाभ तो दे सकते हैं, लेकिन छवि को प्रभावित भी करते हैं
एम.के. स्टालिन और ममता बनर्जी, दोनों ही अपने-अपने राज्यों की मजबूत राजनीतिक हस्तियां हैं। लेकिन उनकी कार्यशैली और प्रतिक्रिया का अंतर यह दर्शाता है कि लोकतंत्र में नेतृत्व केवल सत्ता तक सीमित नहीं, बल्कि आचरण और दृष्टिकोण का भी विषय है।
राजनांदगांव |
छत्तीसगढ़ की 'मदर टेरेसा' कही जाने वाली और प्रसिद्ध समाज सेविका पद्मश्री फूलबासन बाई यादव के साथ कल (5 मई) एक रूह कंपा देने वाली घटना घटी। राजनांदगांव जिले में बदमाशों ने फिल्मी अंदाज में उनका अपहरण करने की कोशिश की, जिसे छत्तीसगढ़ पुलिस की सतर्कता और सूझबूझ ने नाकाम कर दिया। इस मामले में पुलिस ने एक मुख्य आरोपी महिला सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया है।
सेल्फी के बहाने रची गई साजिश: घटना का पूरा विवरण
जानकारी के अनुसार, मुख्य आरोपी खुशबू साहू (निवासी बेमेतरा) अपने अन्य साथियों के साथ राजनांदगांव के सुकुलदैहान गांव स्थित फूलबासन बाई के निवास पर पहुंची। आरोपियों ने बड़ी चतुराई से इस साजिश को अंजाम दिया:
बहाना: खुशबू ने फूलबासन जी को घर से बाहर बुलाया और कहा कि कार में एक दिव्यांग महिला बैठी है जो उनके साथ सेल्फी लेना चाहती है।
अपहरण: जैसे ही फूलबासन बाई कार के पास पहुंचीं, आरोपियों ने उन्हें जबरदस्ती खींचकर गाड़ी के अंदर डाल लिया और तेजी से फरार हो गए।
कार के अंदर बर्बरता: पकड़े जाने के डर से आरोपियों ने कार के भीतर ही फूलबासन जी के हाथ-पैर बांध दिए और उनके मुंह में कपड़ा ठूंस दिया ताकि वे मदद के लिए शोर न मचा सकें।
चिखली पुलिस चौकी पर 'मिर्गी' का ड्रामा और गिरफ्तारी
अपहरणकर्ता खैरागढ़ मार्ग की ओर भाग रहे थे, लेकिन उनकी किस्मत ने साथ नहीं दिया। चिखली पुलिस चौकी के पास पुलिस की टीम रूटीन चेकिंग कर रही थी।
पुलिस का संदेह: जब संदिग्ध कार को रोका गया, तो घबराए हुए आरोपियों ने पुलिस को गुमराह करने के लिए झूठ बोला कि "फूलबासन जी को मिर्गी का दौरा पड़ा है और वे उन्हें जल्दबाजी में अस्पताल ले जा रहे हैं।"
सतर्क पुलिसकर्मी की पहचान: चेकिंग के दौरान एक पुलिसकर्मी ने कार के भीतर बंधक स्थिति में पद्मश्री फूलबासन बाई को पहचान लिया। संदिग्ध स्थिति देख पुलिस ने तुरंत घेराबंदी कर चारों आरोपियों (2 महिला और 2 पुरुष) को हिरासत में ले लिया।
क्यों हुआ अपहरण? साजिश के पीछे की कहानी
प्रारंभिक जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। मुख्य आरोपी खुशबू साहू पिछले 4 महीनों से फूलबासन जी के संपर्क में थी। पुलिस को संदेह है कि:
बेमेतरा क्षेत्र में स्वयं सहायता समूहों (SHG) के नाम पर अवैध वसूली की कोई बड़ी योजना थी।
रोजगार प्रशिक्षण के बहाने पद्मश्री के नाम का उपयोग कर कोई बड़ा वित्तीय लाभ कमाने की साजिश रची जा रही थी।
वर्तमान स्थिति
पुलिस की त्वरित कार्रवाई की पूरे राज्य में सराहना हो रही है। पद्मश्री फूलबासन बाई अब सुरक्षित हैं और उन्हें उनके घर पहुंचा दिया गया है। पुलिस आरोपियों से कड़ी पूछताछ कर रही है ताकि इस अपहरण कांड के पीछे छिपे असली मकसद और किसी बड़े गिरोह के शामिल होने की पुष्टि की जा सके।
"अपराधियों के हौसले बुलंद थे, लेकिन पुलिस की एक छोटी सी रूटीन चेकिंग ने छत्तीसगढ़ की एक महान हस्ती को बड़ी अनहोनी से बचा लिया।"
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
