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0 अभी तक 5 स्पर्श क्लिनिक खुल चुके हैं जिले में
0 निम्हास द्वारा डॉक्टर्स की ट्रेनिंग अंतिम दौर में
जशपुर / शौर्यपथ / जिले में आत्महत्या दर को कम करने के लिए `लक्ष्य’ कार्यक्रम शुरू किया गया है जिसके अंतर्गत 42 स्पर्श क्लिनिक खोले जायेगें जहां मानसिक रोगियों की निशुल्क जांच और उपचार किया जाएगा| अभी तक जिले में 5 स्पर्श क्लिनिक खोले जा चुके हैं। माह अंत तक सभी चिन्हित 42 जगहों पर स्पर्श क्लिनिक खुल जाएंगे।
कलेक्टर महादेव कावरे की अध्यक्षता में शत प्रति मानसिक रोगियों की जांच और उपचार के लक्ष्य के साथ यह कार्यक्रम चलाया जा रहा है। आत्महत्या दर को 2022 तक 15 प्रति लाख करने और जिले के 34 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, 8 सामुदायिय स्वास्थ्य केंद्रों में 42 स्पर्श क्लिनिक शुरू करवाना इस कार्यक्रम का लक्ष्य है। स्पर्श क्लिनिक एक ऐसी जगह है जहां मानसिक रोगियों के इलाज के साथ-साथ उनका नाम भी गोपनीय रखा जाता है। कोरोना संक्रमण काल में लोगों की नौकरियों का छूटना, बेघर होना और संक्रमण का डर होने के कारण मानसिक तनाव का होना स्वाभाविक है। ऐसे में स्पर्श क्लिनिक द्वारा काउंसलिंग कर सभी को तनाव से बचने के आवश्यक उपायों के बारे में जानकारी प्रदान की जा रही है। कोरोना के इस दौर में टेलीमेडिसिन सुविधा एक बेहतर विकल्प के रूप में उभरी है जिस पर लोग अपनी समस्या का निदान पा रहे हैं। इस सुविधा का लाभ लेने के लिए लोगों को टोलफ्री नंबर 104 पर कॉल करना होता है। उसके बाद विशेषज्ञों द्वारा उनको परामर्श दिया जाता है।
जिला मानसिक चिकित्सा के नोडल अधिकारी डॉ. कांशीराम खुसरो बताते हैं: “आत्महत्या के मामले में जिले की दर 24.85 व्यक्ति प्रति लाख है जो राष्ट्रीय आत्महत्या के दर से बहुत ज्यादा है। आत्महत्या की दर को 2022 तक 15 व्यक्ति प्रति लाख तक करने का हमारा लक्ष्य है। इसके लिए बीते आठ सप्ताह से सीएचसी, सीएचसी व जिला अस्पताल के आरएम और डॉक्टर्स की ट्रेनिंग निम्हास (नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एण्ड अलीड स्कीनकेस (निम्हास- बेंगलुरू) के डॉ. गोपी गजा द्वारा लिया जा रहा है। अगले सप्ताह के गुरूवार और शुक्रवार को ट्रेनिंग का आखिरी सेशन है। ‘’
विदित हो कि मानसिक रोग आत्महत्या की एक बड़ी वजह होती है। तनावग्रस्त व्यक्ति अक्सर तनाव से निपटने के लिए कई बार आत्महत्या की राह चुन लेता है या फिर मानसिक रोग का उपचार न होने के कारण रोगी अपनी जान लेता है। मानसिक रोगों से जुड़ी गलत धारणाओं की वजह से परिवार ऐसे रोगों को छिपाते है। बीते 6 महीने में जशपुर जिले में 100 से अधिक लोगों ने आत्महत्या की है और 220 से अधिक लोगों ने आत्महत्या का प्रयास किया है।
शुरूआत में ही उपचार जरूरी : डॉ. खुसरो
डॉ कांशीराम खुसरो ने बताया: “मानसिक रोगों के साथ अक्सर गलत भ्रांतियां जुडी होती हैं जिस कारण ऐसे लोग उपचार के लिए नहीं आते हैं और मानसिक तकलीफ को दूसरों को बताते भी नहीं हैं। मानसिक रोग का अगर शुरू में ही उपचार हो तो रोगी पूरी तरह से ठीक हो सकता है और सामान्य जीवन व्यतीत कर सकता है। जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत किसी भी प्रकार के मानसिक रोग के उपचार के लिए जिला चिकित्सालय में स्पर्श क्लिनिक के माध्यम से आत्महत्या या आत्महत्या के प्रयास के रोगी, तम्बाकू के नशे के आदि, शराब के आदी, तनाव ग्रस्त, सायकोसिस, न्युरोसिस के रोगियों सहित अन्य मानसिक रोगी को निशुल्क परामर्श प्रदान की जा रही है।‘’
क्या कहते हैं आंकड़ें
राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वे 2015-16 के अनुसार छत्तीसगढ़ में 11.66 % लोग मासिक रोगों से पीड़ित हैं और 14.06% लोग जीवन काल में किसी प्रकार के मानसिक विकार से ग्रसित होते हैं। इन में तंबाकू खाने के आदि 29.86% और शराब पीने के आदि 7.14 % लोग है। प्रदेश में 1.59% लोगों को डिप्रेशन यानि अवसाद है और 2.38 % लोगों को स्ट्रेस है जबकि 1% से कम लोगों को गंभीर मानसिक रोग है। नेशनल क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो के अनुसार 2019 में छत्तीसगढ़ में आत्महत्या की दर 26.4 प्रति लाख थी जो पूरे राष्ट्र में चौथे नंबर पर है।
कलेक्टर की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना पर हुई बैठक
धमतरी |शौर्यपथ |खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय भारत सरकार की आत्मनिर्भर भारत (प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन) योजना के क्रियान्वयन को लेकर कलेक्टर जयप्रकाश मौर्य ने आज दोपहर एक बजे जिला स्तरीय समिति की बैठक ली। उन्होंने जिले में चावल आधारित उद्योगों की संभावनाओं व स्थापना को लेकर जानकारी ली तथा कृषि उत्पादन संगठनों (एफपीओ) को इससे जोड़ने के निर्देश दिए।
कलेक्टोरेट सभाकक्ष में आयोजित बैठक मंे कलेक्टर एवं समिति के अध्यक्ष ने कहा धमतरी मुख्यतः चावल उत्पादक जिला है और इस क्षेत्र में लघु उद्योगों की स्थापना की असीम संभावनाएं हैं। ऐसे में चावल आधारित उद्योगों को प्राथमिकता के आधार पर स्थापित किया जा सकता है, जिससे नवीन रोजगार सृजित हो सकेंगे। बैठक में प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन (आत्मनिर्भर भारत) योजना के बारे में जानकारी देते हुए महाप्रबंधक उद्योग एवं व्यापार केन्द्र एसपी गोस्वामी ने बताया कि विभाग द्वारा मुरमुरा, राइस नूडल्स, राइस पेपर, राइस स्टार्च, तथा चावल पापड़ मुरकू निर्माण पर आधारित उद्योग की कार्ययोजना तैयार की गई है।
उन्होंने बताया कि योजना के तहत खाद्य प्रसंस्करण इकाई स्थापित करने के लिए सहायता दी जाएगी, जिसके तहत उन्नयन के लिए विद्यमान संगठित खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को अधिकतम 10 लाख रूपए तक की अनुदान सहायता से परियोजना लागत की 35 प्रतिशत क्रेडिट लिंक्ड अनुदान की सहायता योजना के तहत की जाएगी। साथ ही वर्किंग कैपिटल के तौर पर खाद्य प्रसंस्करण में कार्यरत स्वसहायता समूहों के प्रति सदस्य को 40 हजार रूपए की दर से प्रारंभिक पूंजी प्रदाय योग्य होगी। इसके अलावा उन्होंने योजना के लिए पात्रता एवं मापदण्ड, आवेदन करने की प्रक्रिया, समूहों का श्रेणीकरण सहित योजना के प्रमुख बिन्दुओं के बारे में बैठक में बताया। जिला पंचायत के सी.ई.ओ. मयंक चतुर्वेदी ने बिहान के तहत गठित समूहों को इस योजना के दायरे में लाकर अधिकाधिक महिलाओं को जोड़ने की बात कही। इस अवसर पर संबंधित विभाग के अधिकारीगण उपस्थित थे।
बालोद / शौर्यपथ / कलेक्टर जनमेजय महोबे ने जिले में कोविड-19 टीकाकरण के सुचारू रूप से संचालन हेतु आज संयुक्त जिला कार्यालय के सभाकक्ष में जिला टाॅस्क फोर्स समिति की बैठक ली। उन्होंने जिले में प्रथम चरण में लगाए जा रहे कोविड-19 टीकाकरण की प्रगति की विस्तारपूर्वक चर्चा की और आवश्यक निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। उन्होंने अब तक कोविड-19 टीकाकरण किए गए हितग्राहियों की संख्या की जानकारी ली। कलेक्टर ने शासन द्वारा निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप शतप्रतिशत कोरोना जांच करने के निर्देश दिए।
जिला टीकाकरण अधिकारी डाॅ.एस.के.सोनी ने बताया कि जिले में कोविड-19 टीकाकरण कार्य प्रगति पर है। अब तक 5229 हितग्राहियों को कोविशील्ड का पहला डोज लगाया जा चुका है जो कि कुल लक्ष्य का 72.27 प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि कोविड-19 टीकाकरण के द्वितीय चरण हेतु पुलिस विभाग, राजस्व विभाग एवं नगरीय निकाय के हितग्राहियों की सूची राज्य स्तर पर कोविन पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है। डाॅ. सोनी ने बताया कि जिले को कोविशील्ड की 8,690 डोज प्राप्त हो चुका है। इससे पहले कोविशील्ड की 3840 डोज प्राप्त हुआ था। उन्होंने बताया कि जिले को अब तक कुल कोविशील्ड वैक्सीन 12,530 डोज प्राप्त हो चुका है। जिसमें से 5,320 डोज का उपयोग किया जा चुका है। बैठक में कोविड-19 टीकाकरण के जिला नोडल अधिकारी एवं डिप्टी कलेक्टर अभिषेक दीवान, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. जे.पी.मेश्राम, सिविल सर्जन डाॅ. एस.एस.देवदास, जिला कार्यक्रम प्रबंधक डाॅ. भूमिका वर्मा सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
बालोद / शौर्यपथ / कलेक्टर जनमेजय महोबे ने आज संयुक्त जिला कार्यालय के सभाकक्ष में मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण पुरस्कार 2020 के अंतर्गत शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए जिले के 42 शिक्षकों को प्रतीक चिन्ह एवं प्रशस्ती पत्र प्रदान कर सम्मानित किया और उन्हें बधाई दी। इस अवसर पर कलेक्टर ने कहा कि शिक्षक बच्चों को शिक्षित कर एक सशक्त राष्ट्र एवं समाज के निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षक मेहनत और लगन से बच्चों को पढ़ाने के लिए विभिन्न नवाचार के माध्यम से बेहतर प्रयास किए जो सराहनीय है। उन्होंने शिक्षकों से आगे भी इसी तरह के प्रयास जारी रखने प्रोत्साहित किया। कलेक्टर ने बच्चों को व्यवहारिक शिक्षा देने पर भी जोर दिया।
कलेक्टर ने मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण पुरस्कार 2020 के अंतर्गत शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले जिले के तीन शिक्षकों को ज्ञान दीप पुरस्कार तथा प्रत्येक ब्लाॅक से उत्कृष्ट कार्य करने वाले तीन-तीन शिक्षकों को शिक्षादूत पुरस्कार एवं पढ़ई तुंहर दुआर के अंतर्गत उत्कृष्ट कार्य करने वाले 24 शिक्षकों को प्रतीक चिन्ह एवं प्रशस्ती पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर जिला शिक्षा अधिकारी आर.एल ठाकुर, जिला मिशन समन्वयक पी.सी.मरकले, विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी एवं शिक्षकगण उपस्थित थे।
-प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 6 करोड़ 29 लाख रूपए की लागत से 10.3 किलोमीटर किया जा रहा सड़क का निर्माण
राजनांदगांव / शौर्यपथ / जिले के अम्बागढ़ चौकी विकासखंड के अंतर्गत बांधाबाजार से आमाटोला तक सड़क निर्माण का कार्य तेजी से चल रहा है। इस सड़क की लम्बाई 10.3 किलोमीटर और चौड़ाई 9 मीटर है। कलेक्टर श्री टोपेश्वर वर्मा ने अपने सप्ताहिक दौरे में बांधाबाजार से आमाटोला तक निर्माणाधीन सड़क का मुआयना किया। सड़क का निर्माण प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत किया जा रहा है। इसकी लागत 6 करोड़ 29 लाख 23 हजार रूपए है। कलेक्टर श्री वर्मा ने अधिकारियों को गुणवत्ता के साथ सड़क निर्माण पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सड़क का निर्माण निर्धारित समय में पूरा किया जाना चाहिए। कार्यपालन अभियंता श्री पीपी खरे ने बताया कि यह सड़क 4 ग्राम ढाढूटोला, तोयागोंदी, हांडीटोला और मांगाटोला से गुजरेगी। इसके निर्माण होने से लोगों को आवागमन में सुविधा होगी। इस अवसर पर एसडीएम मोहला सीपी बघेल, सीईओ जनपद पंचायत मोहला जीएल चुरेन्द्र सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
- प्रदेश की एकमात्र संस्था, जहां विभिन्न तरह की दिव्यांगता के लिए उपचार एवं पुनर्वास के लिए किया जा रहा कार्य
- समाज को दिव्यांगजनों के प्रति संवेदनशील बनाने की जरूरत : क्षेत्रीय संयोजित केन्द्र (सीआरसी) के निदेशक कुमार राजू
राजनांदगांव / शौर्यपथ / सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय भारत सरकार के अधीन एनआईईपीआईडी सिकंदराबाद के अंतर्गत संचालित दिव्यांगजन कौशल विकास, पुनर्वास एवं सशक्तिकरण क्षेत्रीय संयोजित केन्द्र (सीआरसी) राजनांदगांव में दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण एवं उनके जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाने की दिशा में निरंतर प्रतिबद्ध कार्य किया जा रहा है। यह संस्था प्रदेश की एकमात्र संस्था है, जहां विभिन्न तरह की दिव्यांगता के लिए उपचार एवं दिव्यांगजनों के पुनर्वास के लिए कार्य किए जा रहे हैं। क्षेत्रीय संयोजित केन्द्र (सीआरसी) के निदेशक श्री कुमार राजू ने कहा कि हमें समाज को दिव्यांगजनों के प्रति संवेदनशील बनाने की जरूरत है। सीआरसी द्वारा दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कार्य किया जा रहा है, ताकि वे भी समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें। उन्होंने बताया कि यहां सात विभाग कार्य कर रहे हैं।
आकुपेशनल थैरेपी कक्ष में 22 वर्षीय शुभम साहू की स्थिति में निरंतर सुधार आया है। केन्द्र में आने के पहले उसके घुटने और हाथ के पंजे मुड़े हुए थे तथा वह कोई कार्य नहीं कर पाता था। लेकिन अब शुभम स्वयं आत्मनिर्भर बना है और दो वर्षों के ईलाज के बाद अपना व्हीलचेयर स्वयं चला सकता है। वह अपना सामान भी स्वयं लेने की स्थिति में है। भिलाई से ईलाज से आने वाली नन्ही बच्ची आटिज्म से पीडि़त है। लेकिन दो हप्तों के ईलाज के बाद वह अब आसानी से बातों की प्रतिक्रिया देती है। 50 वर्षीय मनीष गुप्ता ने बताया कि उनकी गर्दन में ट्यूमर हुआ था और सर्जरी के बाद शरीर अकड़ गया था। यहां ईलाज के बाद चलने में दिक्कत नहीं हो रही है। 8 वर्षीय बालक आकाश सिंह को आईक्यू डिसएबिलिटी के हल्के लक्षण हैं, जो अब धीरे-धीरे दूर हो रही है। आक्यूपेशनल थैरेपी कक्ष में देव आशीष ने बताया कि लकवाग्रस्त बच्ची का भी यहां ईलाज किया जा रहा है और स्थिति में काफी सुधार है। मैप एक्टीविटी, न्यूरो डेवल्पमेंट थैरेपी, सेंसरी, इंटीग्रेसन थैरेपी, डेली एक्टीविटी लीविंग ट्रेनिंग, एडाप्टीव डिवाईस, स्पिलिंट की सुविधा है। श्रवण एवं वाक् विशेषज्ञ श्री गजेन्द्र कुमार साहू ने बताया कि श्रवणबाधित बच्चों का कॉक्लियर इम्प्लांट करने से इस प्रकार के बच्चे पूर्ण रूप से सामान्य बच्चों की तरह बोल एवं सुन सकते हैं एवं उनकी शिक्षा में भी पूरी तरह से विकास होता हैं । विशेष शिक्षा विभाग में सहायक प्राध्यापक श्री राजेंद्र प्रवीण ने बताया कि सभी प्रकार विशेष बच्चों को किस प्रकार के शिक्षा दिया जाता है तथा इसके साथ ही दृष्टिबाधित बच्चों के लिए ब्रेललिपि के माध्यम से पढ़ाई की व्यवस्था की गई है।
प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम के तहत लघुकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रम, जागरूकता अभियान एवं सतत् पुनर्वास शिक्षा कार्यक्रम का आयोजन नियमित रूप से संचालित की जा रही है। इसके द्वारा अभिभावकों, दिव्यांगजनों एवं प्रोफेशनल का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कृत्रिम अंग विभाग श्री अभिनंदन नायक ने बताया कि कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण प्रत्यंंग विभाग द्वारा दिव्यांगों का आकलन एवं मूल्यांकन कर तथा उन्हें कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण प्रदान करके सक्षम एवं आत्मनिर्भर की दिशा में कार्य कर रहा है। श्रवण एवं वाक विभाग द्वारा वाक प्रशिक्षण एवं श्रवण क्षमता की जांच की जा रही है। वाक बाधित लोगों को प्रशिक्षण दिया जाता है। जैसे श्रवण बाधित, मानसिक मंदता के स्वर एवं भाषा को ठीक करना है एवं श्रवण यंत्र आवश्यकतानुसार दिया जाता है। भौतिक चिकित्सा (फिजियो थैरेपी) विभाग श्री आशीष परासर ने बताया कि बिना दवा के विभिन्न मशीनों तथा व्यायामों द्वारा हर उम्र के लोगों को स्वास्थ्य लाभ दिया जा रहा है। यह स्नायु संबंधी बीमारी जोड़ों व हाथ पैरों का दर्द व अकडऩ मांसपेशियों की कमजोरी, जन्मजात विकृतियां, हड्डी टूटने के बाद की अक्षमता, रीढ़ की हड्डी संबंधी चोट, खिलाडिय़ों में किसी प्रकार की अक्षमता का निराकरण तथा चिकित्सा करती है। ऑक्यूपेशनल थेरेपी विभाग में व्यवसायिक चिकित्सा दिन-प्रतिदिन की क्रिया में स्वयं की देखभाल में खाली समय में खेल में तथा कौशलों के विकास तथा संभावित क्रिया में उपयोग होता है। इसके साथ-साथ कार्यों को वातावरण अनुरूप मरीजों के वर्तमान क्षमता को देखकर अनुकूल बनाया जाता है एवं मरीज को ज्यादा से ज्यादा स्वतंत्र एवं आत्मनिर्भर बनाया जाता है। साथ ही साथ मरीजों के जीवन को अधिक से अधिक गुणवत्तापूर्ण बनाते हैं। ये सभी उम्र व्यवसाय एवं दैनिक क्रियाकलापों में आत्मनिर्भर बनाने में उपयोगी साबित होता है। विशेष शिक्षा विभाग में विशेष शिक्षा में आवश्यकता वाले बच्चों को शैक्षणिक आकलन करके तथा उनकी पहचान करके व्यक्तिगत शैक्षणिक कार्यक्रम बनाया जाता है। संबंधित समस्या भाषायी अधिगम समस्या का निवारण होता है। दृष्टिबाधितों के लिए ब्रेल प्रशिक्षण, दृष्टिबाधितों स्वयं छड़ी के द्वारा चलने का प्रशिक्षण, बोलता पुस्तकालय की व्यवस्था, दैनिक क्रियाओं का प्रशिक्षण, व्यक्तित्व विकास हेतु परामर्श व मार्गदर्शन, आवश्यकतानुसार उपकरण प्रदान किया जाता है। श्रीमती श्रीदेवी ने बताया कि अपने नैदानिक मनोविज्ञान विभाग सभी तरह के दिव्यांगों के लिए मनोवैज्ञानिक आकलन होता है। पुनर्वास तथा प्रबंधन योजना, मानसिक मंदता से ग्रसित बच्चों के लिए बौद्धिक जागरण, व्यववहार परिमार्जन, परामर्श एवं मार्गदर्शन दिया जाता है। टीम में प्रशासनिक अधिकारी श्री सूर्यकांत बेहरा, एमएचआरएच (कोर्डिनेटर) श्रीमती श्रीदेवी, एमएचआरएच सदस्य श्री गजेन्द्र कुमार साहू अपनी सेवाएं दे रहे हंै।
दुर्ग / शौर्यपथ / नगर पालिक निगम दुर्ग द्वारा लुचकी पारा में सुलभ शौचालय के पीछे अतिक्रमण हटाकर आंनबाड़ी भवन का निर्माण कराया जा रहा है। लुचकी पारा में आंगनबाड़ी केन्द्र किराये के मकान पर चलता था आंगनबाड़ी की आवश्यकता को देखते हुये मांग अनुसार शासकीय रिक्त भूमि पर अज्ञात लोगों द्वारा जहॉ अतिक्रमण किया गया था उन्हें हटाकर आंगनबाड़ी भवन का निर्माण किया जा रहा है। आस-पास के अतिक्रमणकर्ताओं द्वारा आंगनबाड़ी निर्माण में अवरोध पैदा किया जा रहा था । आयुक्त इंद्रजीत बर्मन के निर्देशानुसार निगम अधिकारियों ने पुलिस बल ले जाकर भवन के दरवाजा खिड़की लगाकर भवन निर्माण के कार्य को पूरा किया । कार्यवाही के दौरान कार्यपालन अभियंता आर0के0 पाण्डेय, उपअभियंता विश्वनाथ मिश्रा, अतिक्रमण अधिकारी शिव शर्मा, एवं उनकी टीम और दुर्ग थाना पुलिस बल मौजूद था ।
दुर्ग / शौर्यपथ / सड़क सुरक्षा माह के 19 वें शुक्रवार को प्रशांत ठाकुर, पुलिस अधीक्षक, दुर्ग के निर्देश पर आम नागरिकों को यातायात नियम के प्रति जागरूक करने के लिए शहीद उद्यान सेक्टर-05 से रैली का शुभारंभ कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सतीश कुमार वाजपेयी, कमांडेट सीआईएसएफ भिलाई एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रोहित कुमार झा, शहर द्वारा हरी झण्डी दिखाकर रैली को रवाना किया गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में मुख्य अतिथियों के उद्बोधन पश्चात इप्टा रंगमंच सेक्टर 01 के द्वारा सडक सुरक्षा एवं दुर्घटनाओं के कारण को प्रदर्शित करते हुए नुक्कड नाटक प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी भागीदारियों एवं उद्यान में प्रात: भ्रमण के लिए आये आम नागरिकों को यातायात नियम का सदैव पालन करने हेतु शपथ दिलाया गया।
इस अवसर पर श्रीमती प्रज्ञा मेश्राम, अति.पुलिस अधीक्षक ग्रामीण, अजीत यादव, पुमनि कार्यालय, विवेक शुक्ला, नगर पुलिस अधीक्षक, दुर्ग, आकाशराव गिरपुंजे, पुलिस अनुविभागीय अधिकारी,पाटन, गुरजीत सिंह उप पुलिस अधीक्षक यातायात, जयलाल मरकाम, सहायक सेनानी प्रथम वाहिनी, रणधीर सिंह, उप सेनानी सीआईएसएफ सेक्टर 03, निलेश द्विवेदी, रक्षित निरीक्षक दुर्ग, श्रीमती श्रुति सिंह, यातायात जोन प्रभारी दुर्ग, श्रीमती भारती मरकाम, यातायात जोन प्रभारी आकाश गंगा, सुश्री लता चौरे, यातायात जोन प्रभारी सिविक सेन्टर एवं श्री डी.पी.पात्रे, यातायात जोन प्रभारी भिलाई-03 इंसपेक्टर जसपाल सिंह, इंसपेक्टर अनीष कुमार, इंसपेक्टर बिमलेश ठाकुर इंसपेक्टर डी.पी.सिंह सीआईएसएफ सेक्टर 03 एवं यातायात के अधिकारी कर्मचारी उपस्थित रहें।
इस सायकल रैली में दुर्ग पुलिस के जवान के साथ-साथ केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल भिलाई इस्पात संयंत्र, फ्रंटियर छत्तीगढ़ बी.एस.एफ के जवान, एसएसबी रिसाली, ट्रैफिक वार्डन एवं आम नागरिक कुल-750 लोग शामिल हुए सायकल रैली शहीद उद्यान सेक्टर 05 से रवाना होकर सर्वप्रथम जयंती स्टेडियम, भिलाई होटल, ग्लोब चौक, बेरोजगार चौक, 7 मिलियन चौक, 2.5 मिलियन चौक, सेक्टर 02 चौक, बीएसएनएल चौक, कुुल-10 किमी भ्रमण कर मुर्गा चौक सेक्टर 01 में समाप्त किया गया।
दुर्ग / शौर्यपथ / राजेश श्रीवास्तव जिला एवं सत्र न्यायाधीश अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के मार्गदर्शन में आज जागरूकता कार्यक्रम में हरीश कुमार अवस्थी विशेष न्यायाधीश, श्रीमती शुभ्रा पचैरी अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं डॉ.् ममता भोजवानी अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने उपस्थित होकर बताया कि भारत में यातायात के संकेत का पालन करना अतिआवश्यक है । इससे सड़क दुर्घटना से बचा जा सकता है। आजकल छोटे बच्चे भी ड्राइविंग करते है, उन्हे यातायात के नियम की ना तो समझ होती है, ना ही वो उसका पालन करना चाहते है। वे तो बस आगे निकलने की दौड़ मे शामिल होते है। कुछ साधारण यातायात के नियम है, जिनका पालन करके हम हमारे यातायात को बेहतर बना सकते है।
अपने वाहन की पार्किंग का ध्यान रखे. अपने वाहन की पार्किंग इस तरह से ना करे कि वह दूसरों के लिए मुश्किल बन जाए। आप थोड़े समय के लिए भी पार्किंग करना चाहेए तब भी सही जगह पर ही करेए ताकि दूसरों को कोई दिक्कत ना हो।
सड़क पर ड्राइव करते समय ओवेरटेक ना करें. जब भी आप ड्राइव करते हैए तो किसी से रेस ना लगाए। यह जरूरी नही कि कोई आपसे आगे निकल गयाए तो आप भी उससे आगे निकले और यातायात के नियम को तोड़े, अगर आप यातायात के नियम का पालन करते हुये गाड़ी चलाते है तो यह आपके साथ-साथ दूसरों के लिए भी अच्छा होगा।
बहुत ज्यादा और लगातार हॉर्न का उपयोग न करें- अगर आप लगातार हॉर्न बजाते है तो इसका मतलब यह नही कि आगे लगा हुआ जाम जल्दी क्लियर हो जाएगा। इससे सिर्फ सामने वाले व्यक्ति पर दबाव बनता है और ध्वनि प्रदूषण फैलता है। इससे अच्छा होगा कि आप थोड़ा इंतजार करे और सामने वाले को निकलने का मौका दे।
एक तरफा रोड- जब आप एक तरफा रोड मे होते है, तो उसे फॉलो करे तथा उसे तोड़े नही। यह कुछ दूरी के लिए होता है। यह ड्राईवर की सुविधा के लिए ही बना होता है तो इसे फॉलो करे। अगर कोई अपना समय को बचाने की उम्मीद से गलत साइड में चलता है तो वह अपने साथ. साथ दूसरों का भी समय खराब करता है।
लेन अनुशासन- अगर आप किसी लेन मे हो तो उसे फॉलो करे। बिना किसी अनुदेश के लेन को तोड नही अगर कोई व्यक्ति आपने समय को बचाने की दृष्टि से लेन को तोड़ता है तो वह आने वाले की वाहनो को प्रभावित करता है।
यू.टर्न . यह ध्यान रखिए की यू.टर्न ड्राईवर का अधिकार नही है । यह बस ड्राईवर की सुविधा के लिए बना होता है। जब भी आप यू.टर्न पर हो तो आगे पीछे के ट्रैफिक को देख ले तथा सभी की सुविधाओं को देखते हुए यू.टर्न ले।
हाथ सिग्नल. अगर आप हाथ सिग्नल का उपयोग करते हैए तो यह आपके पीछे चल रहे व्यक्ति के लिए सुविधा होती है। इससे आपके पीछे चल रहा व्यक्ति आपके साइड को समझ कर सेफ ड्राइविंग कर सकता है। यातायात संकेत और यातायात नीति. यह जो यातायात संकेत और यातायात नीति होती है। यह उस जगह पर ड्राईवर को किसी कारण से दी होती है ताकि वह इसे ठीक से प?े और फॉलो करे। यातायात संकेत और यातायात नीति के दिये जाने का सबसे ब?ा कारण हमारी सड़को के ट्रैफिक को बेहतर बनाना है।
गति प्रतिबंध. ड्राइविंग करते समय गति सबसे बड़ा फैक्टर होता है। अक्सर देखा जाता है कि रोड के अच्छे होने पर ड्राईवर के द्वारा स्पीड बड़ा ली जाती है, परन्तु ऐसा नही होना चाहिए। कम से कम सिटी मे तो स्पीड लिमिट को फॉलो करना चाहिए। भारत में इन नियमों को फॉलो करके दुर्घटना होने के खतरे से बचा जा सकता हैं।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
