July 27, 2026
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    भिलाई / शौर्यपथ / भिलाई निगम क्षेत्र के समस्त जोन कार्यालय में आज जनदर्शन आयोजित हुआ! जिसमें 69 आवेदन प्राप्त हुए! सबसे अधिक आवेदन जोन कार्यालय जोन क्रमांक एक नेहरू नगर में प्राप्त हुआ है! नेहरू नगर में प्राप्त हुए 53 आवेदन में से 19 का निराकरण किया जा चुका है वही शिवाजी नगर जोन में एक आवेदन का निराकरण किया गया! निगम क्षेत्र के रहवासियों के विभिन्न प्रकार की समस्याओं एवं शिकायतों के निराकरण के लिए आयुक्त ऋतुराज रघुवंशी के निर्देश पर मुख्य कार्यालय सहित प्रत्येक जोन कार्यालय में जनदर्शन का आयोजन किया जा रहा है, जिसके माध्यम से भिलाई शहर के निवासी अपनी समस्याओं एवं शिकायतों को लेकर निगम दफ्तर पहुंच रहे हैं!
    जनदर्शन के माध्यम से लोगों की समस्याओं का निराकरण किया जा रहा है! जो समस्या त्वरित निराकरण योग्य है उसे तत्काल निराकरण किया जा रहा है, शेष को समाधान करने के लिए संबंधित विभाग को अग्रेषित कर निराकरण का फीडबैक लिया जा रहा है! निगम प्रशासन और शहर के रहवासी से बेहतर समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से जनदर्शन आयोजित किया जा रहा है ताकि लोगों की समस्याओं को गंभीरता पूर्वक लेकर उनके आवेदनों का गुणवत्तापूर्ण निराकरण किया जा सके! निगम में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है ऐसे में लोगों की समस्याओं का सीधा निराकरण निगम कर रही है! मुख्य कार्यालय में माह के प्रथम एवं अंतिम शनिवार एवं जोन कार्यालय में प्रत्येक सोमवार को जनदर्शन प्रात: 11:00 से 1:30 तक आयोजित हो रहा है! आज के जनदर्शन में नेहरू नगर जोन कार्यालय में 53 आवेदन, वैशाली नगर जोन कार्यालय में चार आवेदन, मदर टैरेसा नगर में 8 आवेदन तथा शिवाजी नगर में 4 आवेदन प्राप्त हुए! जिसमें से 20 आवेदन का त्वरित रूप से निराकरण किया गया! आज के जनदर्शन में मुख्यत: सीवरेज लाइन, सामान्य राशन कार्ड बनाने, फ्री होल्ड, नाली निर्माण, नाली संधारण, पट्टा स्थायीकरण, अवैध निर्माण, पुलिया संधारण, पाइप कनेक्शन, अवैध अतिक्रमण, पानी निकासी, सडक़ निर्माण कार्य, विद्युत पोल लगाने, भवन अनुज्ञा के विपरीत निर्माण एवं सुलभ की सफाई कराने से संबंधित आवेदन प्राप्त हुए!

    दुर्ग (रिसाली ) / शौर्यपथ / पेयजल समस्या समेत अन्य मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराने नगर पालिक निगम रिसाली के अधिकारी सप्ताह में दो दिन क्षेत्र भ्रमण करेंगे। निगम आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे के निर्देश पर नोडल अधिकारी रमाकांत साहू के नेतृत्व में सोमवार को 5 वार्ड का भ्रमण किया। नोडल अधिकारी ने हैंडपंप से हवा निकलते देख बीआरपी कालोनी वार्ड 16 में टैंकर से जल प्रदाय करने निर्देश दिए।
    उल्लेखनीय है कि कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेन्द्र भूरे ने नगरीय निकाय क्षेत्र में प्रत्येक अधिकारी को मॉर्निंग विजिट करना अनिवार्य किया है। इसी क्रम में रिसाली निगम के अधिकारियों ने वार्ड 17 शिव पारा स्टेशन मरोदा, 18 एचएससीएल कालोनी स्टेशन मरोदा, 19 विजय चैक स्टेशन मरोदा, 20 शंकर पारा स्टेशन मरोदा, 21 सूर्या नगर और 16 बीआरपी कालोनी का निरीक्षण किया। श्रमिक बाहुल्य इन क्षेत्रों में आमतौर पर पेयजल समस्या को दूर करने नोडल अधिकारी ने प्रभारी उपअभियंता को 15 दिनों की मोहलत दी। क्षेत्र भ्रमण में कार्यपालन अभियंता आर के साहू, सहायक अभियंता बी के सिंह, उपअभियंता उमयंती ठाकुर, स्वास्थ्य अधिकारी बृजेन्द्र परिहार, एल्डरमेन संगीता सिंह उपस्थित थी।
    बंद पड़े हैण्डपंप की होगी जांच
    एच.एस.सी.एल. कालोनी व बीआरपी कालोनी में आधा दर्जन हैण्डपंप से पानी की जगह हवा निकल रहा हैं। निगम क्षेत्र के सार्वजनिक बोर पर नागरिक निर्भर है। पानी के लिए अधिक दूरी तय करना प? रहा है। इसे देख नोडल अधिकारी ने हैण्डपंप का परीक्षण कर उसे ठीक करने के निर्देश दिए। हैण्डपंप ठीक नहीं होने पर टैंकर से जल आपूर्ति की जाएगी।
    विजय नगर के 4 गलियों में नही बिछा है पाइप
    अमुत मिशन के तहत वार्ड 19 विजय चैक स्टेशन मरोदा के 4 गली में पाइप लाइन नही बिछाए जाने पर नोडल अधिकारी ने नाराजगी जाहिर की। उन्होने अमृत मिशन के एजेंसी को लाइन बिछाने तत्काल पत्र लिखने निर्देश दिए।
    नागरिकों ने की शिकायत
    वार्ड 20 शंकर पारा (उत्कल नगर) के नागरिकों ने लोकनिर्माण विभाग दुर्ग द्वारा किए जा रहे गली सीमेंटीकरण की शिकायत की। गली सीमेंटीकरण गुण्वत्ताहीन और जगह-जगह पानी ठहराव होना पाया गया। नागरिकों की शिकायत पर नोडल अधिकारी ने लोकनिर्माण विभाग दुर्ग को सूचित करने निर्देश दिए।
    नल स्टैंड पोस्ट का होगा संधारण
    निरीक्षण के दौरान अधिकांश वार्ड का नल व बोरिंग स्टैंड पोस्ट क्षग्रिस्त होना पाया गया। जिसकी वजह से आस पास के क्षेत्र में गंदा पानी का ठहराव हो रहा है। नोडल अधिकारी ने सभी पोस्ट का संधारण कर शंकर पारा में नाली निर्माण के लिए प्रस्ताव बनाने के निर्देश दिए।

    भिलाई / शौर्यपथ / भिलाई इस्पात संयंत्र के कार्मिक विभाग द्वारा अपने कर्मियों को बेहतर सुविधा देने हेतु किए जा रहे प्रयासों में एक कदम और बढाते हुए कार्मिकों को सेवानिवृत्ति के समय विभिन्न प्रपत्रों को भरने की कवायद से छुटकारा दिला दिया है । अब माह फरवरी 2021 से सेवानिवत्त् होने वाले कार्मिक अपना अंतिम भुगतान आवेदन सीधे कम्प्युटर से ऑनलाइन शुभकामना माड्यूल के माध्यम से ई.सहयोग में कर सकतेहैं।
    इस प्रणाली से पूर्व कार्मिक अपने सेवानिवृत्ति की तिथि से लगभग 2 माह पूर्व एक पुस्तिका शुभकामना कार्मिक विभाग से प्राप्त करते थे जिसमें रिटायरमेंट के पष्चात् प्राप्त होने वाले सभी भुगतानों तथा औपचारिकताओं को पूर्ण करने हेतु दिषानिर्देषों का संकलन होता था।सभी फार्म भरकर अपने कार्मिक कार्यालय में रिटायर होने वाले माह के प्रथम सप्ताह तक जमा करना होता था तत्पश्चात् कार्मिक को रिटायरमेंट के अंतिम दिन पूरा भुगतान प्राप्त हो जाता था।
    संयंत्र के कार्मिक विभाग ने अपनी अनवरत सुधार की निति के तहत अपने कार्मिकों को बेहतर सुविधा देने के उद्देष्य से कर्मी को उनके रिटायरमेंट के अंतिम कार्यदिवस को पूर्ण भुगतान उपलब्ध कराने के पूर्व प्रचलित कार्य विधि में और सुधार करते हुए इसे ऑनलाइन कर दियाहै। अब वे रिटायर होने वाले माह के 15 तारीख तक ऑनलाइन आवेदन मात्र से अंतिम भुगतान हेतु आवेदन ऑनलाइन कर सकते हैं इस ऑनलाइन प्रणाली से कार्मिक के द्वारा भरे जाने वाले विवरणमें त्रुटि होने की संभावना नहीं रही है क्योंकि इस प्रणाली में कार्मिक का डाटा पहले से भरा हुआ होता है।कार्मिक को अपने विवरण को केवल सत्यापित करना होगा ।
    इस ऑनलाइन प्रणाली को सोमितआइचए उप महाप्रबंधक ;सीएण्डआईटी तुषाररॉय चौधरी, वरिष्ठ प्रबंधक का.नियमन एचआरआईएस एवं सुश्री निषा बाउल उप प्रबंधक का.एचआरआईएस द्वारा विकसित किया गया। इस प्रणाली के फलीभूत होने में कार्मिक एवं प्रषासन विभाग के प्रमुख श्री एस के दुबेए मुख्य महाप्रबंधक;सीएण्डआईटीद्ध पी के झाए वित्त विभाग के प्रमुख सुरेष रंगानी, मुख्य महाप्रबंधक वित्तद्ध बी एन अग्रवालए कार्मिक प्रमुख श्रीमती निषा सोनी एवं महाप्रबंधक का.नियमन एचआरआईएस श्रीमती अनुराधा सिंह का मार्गदर्षन रहा । इस के सफल कार्यान्वयन में वित्तविभाग एफसीसी कार्मिक कर्म.सेवाएं अनुभाग एवं कार्मिक नियमन अनुभाग का योगदान सराहनीय रहा।

    दुर्ग / शौर्यपथ /  राजेश श्रीवास्तव जिला एवं सत्रन्यायाधीश अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग के मार्गदर्शन में श्री रामजीवन देवांगन अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं श्री अजीत कुमार राजभानू अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा ग्राम कचांदुर एवं छावनी ग्राम में विशेष जागरूकता अभियान के अंतर्गत बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के बारे में एवं बाल विवाह से हो रही परेशानियों के संबंध में जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि बाल विवाह बच्चों के अधिकारों का अतिक्रमण करता है। जिससे उन पर हिंसा शोषण तथा यौन शोषण का खतरा बना रहता है। बाल विवाह ल?कियों और ल?कों दोनों पर असर डालता हैए लेकिन इसका प्रभाव ल?कियों पर अधिक प?ता है। बाल विवाह बचपन खत्म कर देता है। बाल विवाह बच्चों की शिक्षा स्वास्थ्य और संरक्षण पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। 
    बाल विवाह का सीधा असर ना केवल लडकियों पर बल्कि उनके परिवार और सामुदाय पर भी होता है। बाल विवाह अधिनियम के अंतर्गत 21 वर्ष से कम आयु के पुरुष या 18 वर्ष से कम आयु की महिला के विवाह को बाल विवाह की श्रेणी में रखा जाएगा। इस अधिनियम के अंतर्गत बाल विवाह को दंडनीय अपराध माना गया है। साथ ही बाल विवाह करने वाले वयस्क पुरुष या बाल विवाह को संपन्न कराने वालों को इस अधिनियम के तहत 2 वर्ष के कठोर कारावास या एक लाख रुपए का जुर्माना या दोनों सजा से दंडित किया जा सकता हैए किंतु किसी महिला को कारावास से दंडित नहीं किया जाएगा। इस अधिनियम के अंतर्गत किए गए अपराध संज्ञेय और गैर जमानती होंगे। इस अधिनियम के अंतर्गत अवयस्क बालक के विवाह को अमान्य करने का भी प्रावधान है। बाल विवाह समाज की जड़ों तक फैली बुराई लैंगिक असमानता और भेदभाव का ज्वलंत उदाहरण है। 
    यह आर्थिक और सामाजिक ताकतों की परस्पर क्रिया.प्रतिक्रिया का परिणाम है। जिन समुदायों में बाल विवाह की प्रथा प्रचलित है वहां छोटी उम्र में लडकी की शादी करनाए उन समुदायों की सामाजिक प्रथा और दृष्टिकोण का हिस्सा है तथा यहां लडकियों के मानवीय अधिकारों की निम्न दशा दर्शाता है। बाल विवाह से भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और यहां पीढी दर पीढी लोगों को गरीबी की ओर धकेलता है। जिन लड़कियों और लडक़ों की शादी का कम उम्र में कर दी जाती है उनके पास अपने परिवार की गरीबी दूर करने और देश के सामाजिक व आर्थिक विकास में योगदान देने के लिए कौशलए ज्ञान और नौकरियां पाने की क्षमता कम होती है। जल्दी शादी करने से बच्चे भी जल्दी होते हैं और जीवन काल में बच्चों की संख्या भी ज्यादा होती है। जिससे घरेलू खर्च का बोझ बढता है। बाल विवाह बंद करने के लिए बहुत से देशों में पर्याप्त निवेश की कमी का एक कारण यह भी है कि इस कुप्रथा को जड से खत्म करने के लिए वित्तीय तौर पर उचित तर्क नहीं दिए गए हैं। लड़कियों को लडक़ों की तुलना में बराबर महत्व ना दिए जाने के कारण यह धारणा है कि लड़कियों की शादी करने के अलावा कोई अन्य वैकल्पिक भूमिका नहीं है। उनसे यहां उम्मीद की जाती है कि वे शादी की तैयारी के लिए घर के काम.काज करें और घरेलू जिम्मेदारी उठाएं। बाल विवाह एक कुप्रथा है यहां प्राचीन काल में प्रचलित थी। जब लडके.लडकियों का विवाह बहुत ही कम उम्र में कर दिया जाता था। बाल विवाह केवल भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में होते रहे हैं। भारत सरकार ने बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 1 न वंबर 2007 को लागू किया।

    कोरोना संक्रमण को थामने में कोरोना वारियर्स का अहम योगदान , गोंडवाना भवन में आयोजित हुआ कार्यक्रम

    दुर्ग / शौर्यपथ / कोरोना के गंभीर खतरे को देखते हुए भी अपनी जान जोखिम में रखकर कोरोना वारियर्स ने जिस प्रकार लोगों की सेवा की और जिले में कोरोना संक्रमण के बढ़ते खतरे को नियंत्रित कियाए इसके लिए वे प्रशंसा के पात्र हैं। यह बात गृह एवं पीडब्ल्यूडी मंत्री श्री ताम्रध्वज साहू ने गोंडवाना भवन में आयोजित कार्यक्रम के अवसर पर कही। गृह मंत्री ने कहा कि कोरोना वारियर्स ने कोविड संक्रमण के पीक के दौर में लोगों की सहायता की ,रात.दिन मेहनत की। दुर्ग जिला औद्योगिक जिला है और यहाँ दूसरे राज्यों से मूवमेंट काफी होता है। इसके चलते यहाँ कोविड संक्रमण तेजी से फैलने की आशंका काफी थी। कोरोना वारियर्स ने इस विपदा को रोकने के लिए अहम कार्य किया।
    गृह मंत्री ने कहा कि सामाजिक संगठनों की भी इसमें अच्छी भागीदारी रही। उन्होंने लाकडाउन के वक्त लोगों की काफी मदद की। लाकडाउन के वक्त फंसे हुए लोगों को कोरोना वारियर्स से बहुत सहायता मिली। कोरोना वारियर्स द्वारा इलाज की त्वरित उपलब्धता के चलते बहुत से मरीजों की जान बच सकी। कार्यक्रम ओम सत्यम शिक्षण एवं जनविकास समिति की ओर से आयोजित किया गया था। अध्यक्ष श्री सीताराम ठाकुर एवं सचिव श्री दिलीप ठाकुर ने इस अवसर पर गृह मंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया। इस मौके पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती शालिनी यादवए जनपद अध्यक्ष दुर्ग श्री देवेंद्र देशमुखए जीवनदीप समिति के सदस्य श्री दुष्यंत देवांगन एवं अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।
    इनका हुआ सम्मान. इस मौके पर स्वास्थ्य प्रशासन से डॉण् बीआर कोसरिया, नेत्र विशेषज्ञ जिला चिकित्सालय दुर्ग, डॉ, एके साहू रेडियोलाजिस्ट, डॉ, अरुण सिंह सहायक नेत्र अधिकारीए नेत्र विभाग जिला चिकित्सालय, सुश्री हर्षा मिश्रा स्त्री रोग विशेषज्ञए वीवाय हास्पिटल, श्री रमण गंधर्व फार्मासिस्ट जिला चिकित्सालय दुर्ग, , विकास उपाध्याय फार्मासिस्टए , एलण् खान मैट्रनए थोटे ड्राइवर, जयराजन पिल्ले सफाई कर्मी का सम्मान किया गया। पुलिस प्रशासन की ओर से सीएसपी विवेक शुक्ला एवं पन्ना यादव का सम्मान किया गया।

    दुर्ग / शौर्यपथ / सिटी बसों का दम निकालने के बाद ठेका एजेंसी ने इसके संचालन से हाथ खड़े कर दिए हैं। भिलाई नगर निगम सिटी बस संचालन के लिए अधिकृत ठेका एजेंसी को कभी भी ब्लेक लिस्टेड कर सकती है। इसके साथ ही भिलाई-दुर्ग के लोगों को सस्ते व सुन्दर सफर के बेहतर विकल्प की सुविधा प्राप्त करने नये सिरे से होने वाली प्रक्रिया का इंतजार करना पड़ेगा।
    कोरोना महामारी ने भिलाई-दुर्ग में सस्ते व सुन्दर सफर के विकल्प के रूप में लोकप्रिय रही सिटी बसों की सुविधा को छीन लिया है। निगम के जिम्मेदार अधिकारियों की मानें तो सिटी बसों का संचालन कर रही ठेका एजेंसी ने अब आगे काम करने के प्रति हाथ खड़े कर दिए हैं। ऐसे में अब निगम प्रशासन के पास ठेका एजेंसी को ब्लेक लिस्टेट करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता बचता नहीं है। अब दुर्ग जिले में नये सिरे से प्रक्रिया के बाद ही सिटी बसों की सडक़ पर वापसी संभव हो सकती है।
    गौरतलब रहे कि वर्ष 2015 में केन्द्र सरकार की अर्बन ट्रांसपोर्ट योजना के तहत भिलाई-दुर्ग में सिटी बसों का संचालन शुरू हुआ था। भिलाई-दुर्ग के लिए 37 करोड़ खर्च कर 70 बसों का लाया गया था। इसमें कुछ-कुछ राशि सिटी बस की सुविधा वाले निकायों को भी देना था। लेकिन शिवाय भिलाई निगम के सिटी भी निकाय ने राशि नहीं दी। भिलाई निगम ने कुल 10 करोड़ रुए इस परियोजना के लिए दिए थे। बावजूद इसके 70 में से 56 बसों का परिचालन ही विभिन्न रूट पर होता रहा। सिटी बस परिचालन का ठेका दुर्ग-भिलाई ट्रांजिट प्रायवेट लिमिटेड को दिया गया।
    यह कहना गलत नहीं होगा कि दुर्ग-भिलाई ट्रांजिट प्रायवेट लिमिटेड ने सिटी बसों को अपनी कमाई का जरिया बनाकर दम निकाल दिया। समय-समय पर होने वाले जरुरी मेंटेनेंस को नजर अंदाज करने से सडक़ पर दौड़ रही 56 बसें पुरी तरह से कंडम हो गई। वहीं 13 बस परमिट जारी नहीं होने की वजह से डिपो में खड़ी-खड़ी कंडम हो गई। जबकि एक बस को जामुल के पास दुर्घटना के चलते आक्रोशत भीड़ ने जला दिया था।
    यहां पर यह बताना भी जरुरी है कि गत वर्ष मार्च के अंतिम दिनों में कोरोना संक्रमण के चलते घोषित पहले लॉकडाउन से ही सिटी बसों का परिचालन पूरी तरीके से बंद है। खास बात यह है कि कोरोना काल से पहले ही ज्यादातर सिटी बसें कंडम होने के कगार पर पहुंच चुकी थी। ऐसी बसें पूरे कोरोना काल में एक ही जगह पर लंबे समय तक खड़ी रहकर और भी ज्यादा कंडम हो गई है। बताते हैं अगर ठेका कंपनी उन्हीं बसों को फिर से चलाने के लायक बनाना चाहे तो प्रत्येक बस में औसतन डेढ़ से दो लाख रुपए का खर्च अनुमानित है। ठेका एजेंसी ने इस खर्च से हाथ खड़े कर दिया है।
    काम नहीं आया कलेक्टर का आदेश
    कलेक्टर दुर्ग डॉ सर्वेश्वर नरेन्द्र भूरे का सिटी बसों का परिचालन कोविड 19 की गाइड लाइन के अनुसार फिर से शुरू करने का आदेश काम नहीं आया। कलेक्टर ने दो माह पहले प्रशासनिक बैठक में जनहित की दृष्टि से सिटी बसों का परिचालन पुन: शुरू कराने जिम्मेदार अधिकारियों को निर्देशित किया था। बताते हैं जिसके बाद ठेका एजेंसी पर अधिकारियों ने दबाव भी बनाया लेकिन सिटी बसों के अनुपयोगी हो जाने और मरम्मत में लगने वाले खर्च को वहन कर पाने में बेबस बताकर ठेका एजेंसी ने हाथ खड़े कर दिए।

    दुर्ग / शौर्यपथ / प्रशांत ठाकुर, पुलिस अधीक्षक, दुर्ग के निर्देशानुसार तथा उप पुलिस अधीक्षक, श्री गुरजीत सिंह, (यातायात) के नेतृत्व में यातायात पुलिस के वाट्सअप नंबर में शिकायत किया गया था कि 01 काला एवं पीला रंग की मोडीफाईड बिना नंबर वाहन तेज रफ्तार से बटालियन के पास भिलाई की ओर फटाके की आवाज निकालते हुए जा रहा है जो कि किसी दुर्घटना का कारण बन सकता है तत्पश्चात यातायात मुख्यालय (ट्रैफिक टॉवर) से वायरलेस के द्वारा उक्त वाहन को पकडने हेतु पाइंट दिये जाने पर उक्त वाहन को पकड़ कर वाहन चालक से ड्रायविंग लायसेंस और वाहन के कोई भी कागजात नहीं पेश करने पर वाहन को जप्त कर न्यायालय पेश करने हेतु सुरक्षार्थ रखा गया था। जिसे मोहन सिंह कोर्राम, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जिला दुर्ग के न्यायालय प्रस्तुत किये जाने पर न्यायाधीश द्वारा वाहन चालक पर नये मोटर व्हीकल एक्ट के तहत 20000/-रूपये अर्थदण्ड से दंडित किया गया। यातायात पुलिस द्वारा आम नागरिकों से यह अपील है कि वाट्सअप नंबर का अधिक से अधिक उपयोग कर सडक की व्यवस्था पर प्रत्येक नागरिक अपनी भागीदारी दे जिससे आपके शहर के यातायात व्यवस्था बेहतर हो सके। 

    जांजगीर- चांपा / शौर्यपथ / कलेक्टर यशवंत कुमार ने आज जिला चिकित्सालय जांजगीर परिसर स्थित टीकाकरण केंद्र में कोविड-19,का टीका लगवाकर टीकाकरण के द्वितीय चरण का शुभारंभ किया। इस अवसर पर कलेक्टर ने उपस्थित लोगों से चर्चा करते हुए कहा कि कोविड वेक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है । अपनी बारी आने पर स्वेच्छा से टीकाकरण केंद्र आकर टीका लगवाएं। उन्होंने कहा कि टीका लगवाने के बाद टीकाकरण केन्द्र में आधा घंटा डाॅक्टरों की निगरानी में रूकें और चिकित्सक की अनुमति के बाद प्रस्थान करें।
    इस दौरान कलेक्टर ने चिकित्सा अधिकारियों से चर्चा कर प्रथम चरण में किए गए टीकाकरण की जानकारी ली। डिप्टी कलेक्टर करुण डहरिया ने भी आज कोविड-19,का टीका लगवाया। सीएमएचओ डाँ. एस आर बंजारे ने बताया कि टीकाकरण के द्वितीय चरण का शुभारंभ आज से हुआ है। द्वितीय चरण में राजस्व, पुलिस, जेल, पंचायत और नगरीय निकाय के अधिकारियों, कर्मचारियों को टीका लगाया जाएगा। प्रथम चरण में हेल्थ वर्कर्स और महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों का टीकाकरण किया गया। उन्होंने बताया कि प्रथम चरण में छूटे हुए हेल्थ वर्कर्स का टीकाकरण जारी रहेगा ।
    उन्होंने बताया कि जिले में 60 टीकाकरण केंद्र प्रस्तावित है। जिसमें से 35 केंद्र प्रारंभ हो चुके हैं।
    सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा निर्मित ‘कोविशील्ड’ की वैक्सीन लगाई जा रही है-
    छत्तीसगढ़ को भारत सरकार द्वारा पहली खेप में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा निर्मित ‘कोविशील्ड’ टीके उपलब्ध कराए गए हैं। ये टीके आईसीएमआर द्वारा प्रमाणित हैं। इन सब की जानकारी कोविड पोर्टल में एंट्री की गई है। टीकाकरण के बाद किसी भी तरह की प्रतिकूल घटना या आपात स्थिति के प्रबंधन के लिए राज्य स्तर से लेकर टीकाकरण स्थलों तक एईएफआई (एडवर्स इवेंट फालोइंग इम्यूनाइजेशन ) प्रबंधन प्रणाली सुदृढ़ की गई है।
    28 दिनों के अंदर दूसरी खुराक लेना आवश्यक-
    वैक्सीन की पहली खुराक के 28 दिनों के अंदर दूसरी खुराक लेना होगा। सेकंड डोज लेने के दो सप्ताह के अंदर आम तौर पर एंटीबाडी का सुरक्षात्मक स्तर इम्यूनिटी विकसित होती है। वैैैक्सीन लगाने के बाद भी कोविड अनुरूप व्यवहार करना आवश्यक होगा जिससे कोरोना के खतरे को कम किया जा सकेगा। कोविड-19, के टीके मेडिकल प्रोटोकॉल का पालन करते हुए लगाए जा रहे हैं। टीका लगाने के बाद हितग्राही को आधे घंटे निगरानी कक्ष में रखा जाता है। टीका लगाने में कोई शंका, डर नहीं होना चाहिए, क्योंकि इसमें इनएक्टिव वायरस का उपयोग किया गया है। टीकाकरण के दौरान सिविल सर्जन डाँ. अनिल जगत, जिला टीकाकरण अधिकारी डाँ. पुष्पेन्द्र लहरे सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कर्मचारी उपस्थित थे।

    धमतरी / शौर्यपथ / भारत सरकार नीति आयोग द्वारा श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम तथा काॅर्पोरेट सेक्टर के सहयोग से डिजिटल लाइवलीहुड एक्सेस प्लेटफाॅर्म ‘उन्नति- रोजगार से विकास तक‘ विकसित किया जा रहा है। कलेक्टर श्री जयप्रकाश मौर्य ने बताया कि ‘उन्नति‘ भारत सरकर द्वारा विकसित किया गया एक डिजिटल समाधान है, जिसका उद्देश्य बेरोजगार युवक एवं युवतियों और श्रमिकों को आजीविका प्रदान करना है। यह एक प्रकार का श्रमिक-नियोक्ता मिलान मंच है जो काम की तलाश करने वाले, नौकरी चाहने वालों और नौकरी प्रदाय करने वाले नियोजकों के बीच की खाई को पाटने का प्रयास करता है तथा अच्छी सुविधाओं के साथ अच्छे श्रमिकों की तलाश करता है। उन्होंने बताया कि यह एक ओमनी चैनल प्लेटफाॅर्म है जो वर्तमान में फोन और वेब पोर्टल पर उपलब्ध है। वेब प्लेटफाॅर्म की दृष्टि से यह विभिन्न सरकारी योजना के साथ आजीविका को सुविधाजनक बनाने में सक्षम है। कलेक्टर ने बताया कि बेरोजगार युवा, श्रमिक तथा नियोक्ता उक्त डिजिटल प्लेफाॅर्म से जुड़कर शासन द्वारा संचालित योजना का अधिकाधिक लाभ उठा सकते हैं तथा जरूरतमंद लोगों को प्रेरित कर सकते हैं। इसके लिए वेब पोर्टल https://employer.unnati.gov.in/ पर नियोक्ता पंजीकृत होकर रोजगार के अवसरों की जानकारी अद्यतन कर सकते हैं तथा योग्य श्रमिकों का चयन कर सकते हैं। साथ ही मोबाइल एप https://play.google.com/store/apps/ details?id=nic.goi.unnati/ पर इच्छुक श्रमिक पंजीकृत होकर नियोक्ताओं के द्वारा साक्षात्कार किए गए उपयुक्त रोजगार के लिए आवेदन कर सकते हैं।

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