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May 02, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

नई दिल्ली/लॉस एंजिल्स ।
भारत को आने वाले दशकों में वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करने के लिए महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों में नेतृत्व अनिवार्य है। यह बात केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लॉस एंजिल्स में वर्चुअल रूप से आयोजित अखिल-आईआईटी पूर्व छात्र सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही।

उन्होंने स्पष्ट किया कि अब भारत को केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि नवाचार का निर्माता, डिजाइनर और वैश्विक चालक बनना होगा।

2047 का विजन: तकनीक बनेगी विकास की धुरी

डॉ. सिंह ने कहा कि विकसित भारत@2047 का लक्ष्य विज्ञान, तकनीक और नवाचार पर आधारित है।
उन्होंने भारत की हालिया उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा:

  • अंतरिक्ष कार्यक्रम का विस्तार
  • जैव प्रौद्योगिकी में तेज प्रगति
  • डीप-टेक स्टार्टअप्स का उभार

ये सभी संकेत हैं कि भारत नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

उभरती तकनीकें: राष्ट्रीय सुरक्षा से वैश्विक प्रतिस्पर्धा तक

मंत्री ने चार प्रमुख क्षेत्रों को भारत के भविष्य के लिए निर्णायक बताया:

  • सेमीकंडक्टर
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI)
  • रोबोटिक्स
  • क्वांटम टेक्नोलॉजी

उन्होंने कहा कि ये क्षेत्र न केवल आर्थिक मजबूती बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को भी परिभाषित करेंगे।

आईआईटी एलुमनाई और प्रवासी भारतीय: वैश्विक कड़ी

डॉ. जितेंद्र सिंह ने आईआईटी के पूर्व छात्रों और भारतीय प्रवासी समुदाय को भारत और वैश्विक नवाचार इकोसिस्टम के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु बताया।
उन्होंने इनके योगदान को रेखांकित किया:

  • निवेश और स्टार्टअप समर्थन
  • मेंटरशिप और शोध सहयोग
  • नीतिगत भागीदारी

शिक्षा-उद्योग-सरकार का त्रिकोण

उन्होंने तकनीकी नेतृत्व के लिए शिक्षा, उद्योग और सरकार के बीच गहरे सहयोग की आवश्यकता बताई।
नई शिक्षा पहल जैसे ऋषिहुड विश्वविद्यालय में सज्जन अग्रवाल स्कूल ऑफ टेक्नोलॉजी को उन्होंने इसी दिशा में एक उदाहरण बताया।

संदेश स्पष्ट: साझेदारी से ही बनेगा टेक्नोलॉजी लीडर भारत

डॉ. सिंह ने आईआईटी एलुमनाई से आह्वान किया कि वे:

  • उभरती तकनीकों में निवेश बढ़ाएं
  • भारतीय संस्थानों के साथ सहयोग करें
  • युवा प्रतिभाओं को मार्गदर्शन दें

उन्होंने विश्वास जताया कि सामूहिक प्रयासों से भारत न केवल 2047 तक विकसित राष्ट्र बनेगा, बल्कि वैश्विक तकनीकी प्रगति में भी अग्रणी भूमिका निभाएगा।

गंगटोक ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 27-28 अप्रैल को सिक्किम के दौरे पर रहेंगे, जहां वे राज्य स्थापना के 50वें वर्ष (स्वर्ण जयंती) के समापन समारोह में शामिल होंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री 4,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, शिलान्यास और शुभारंभ करेंगे।

स्वर्ण जयंती समारोह में भागीदारी

28 अप्रैल को सुबह प्रधानमंत्री पालजोर स्टेडियम, गंगटोक में आयोजित समापन समारोह में शामिल होंगे और जनसभा को संबोधित करेंगे। इससे पहले वे गंगटोक स्थित ऑर्किडेरियम का दौरा कर राज्य की समृद्ध पारिस्थितिक और पुष्प विरासत का अवलोकन करेंगे।

हर क्षेत्र में विकास की बड़ी पहल

प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की जाने वाली परियोजनाएं कई अहम क्षेत्रों को कवर करती हैं:

  • बुनियादी ढांचा और कनेक्टिविटी
  • स्वास्थ्य और शिक्षा
  • बिजली और शहरी विकास
  • पर्यावरण संरक्षण
  • पर्यटन और कृषि

इनका उद्देश्य सिक्किम में समग्र और समावेशी विकास को गति देना है।

स्वास्थ्य और शिक्षा को मजबूती

  • यांगंग में 100 बेड का आयुर्वेद अस्पताल (शिलान्यास)
  • एनआईटी देवराली में सोवा रिग्पा अस्पताल (उद्घाटन)
  • सिक्किम विश्वविद्यालय का स्थायी परिसर
  • हेलेन लेपचा मेडिकल कॉलेज, डेंटम व्यावसायिक कॉलेज
  • 160 स्कूलों में आईटी-सक्षम शिक्षा परियोजना

कनेक्टिविटी और ऊर्जा क्षेत्र में सुधार

  • तीस्ता नदी पर दो डबल-लेन स्टील आर्च ब्रिज
  • बिरधांग-नामची सड़क का उन्नयन
  • गंगटोक में पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का सुदृढ़ीकरण

शहरी विकास और पर्यावरण संरक्षण

  • मिनी सचिवालय और सिविल सेवा संस्थान
  • शहरी गरीब आवास और पुलिस आवास परियोजनाएं
  • सिंगतम में सीवरेज सिस्टम और नदी प्रदूषण नियंत्रण योजनाएं

पर्यटन और धार्मिक अवसंरचना को बढ़ावा

  • रिज प्रीसिंक्ट का पुनर्विकास
  • कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़ी सुविधाएं
  • इको-टूरिज्म और तीर्थ स्थलों का विकास
  • कृष्णा प्रणामी मंगलधाम में यात्री निवास

कृषि और युवाओं के लिए पहल

  • IFFCO प्रोसेसिंग प्लांट का उद्घाटन
  • रंगपो में इंडोर क्रिकेट सुविधाएं

पूर्वोत्तर विकास का संकेत

प्रधानमंत्री का यह दौरा केवल परियोजनाओं का उद्घाटन नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर भारत, विशेषकर सिक्किम के सतत और तेज विकास के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता का संकेत है।

स्वर्ण जयंती वर्ष में यह पहल सिक्किम को बुनियादी ढांचे, पर्यटन, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

श्रीनगर, ।
भारत के खेल भविष्य को नई दिशा देने के उद्देश्य से केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने ‘श्रीनगर खेल संकल्प’ का शुभारंभ किया। तीन दिवसीय चिंतन शिविर के समापन अवसर पर जारी इस दस्तावेज़ ने खिलाड़ी-केंद्रित, समन्वित और सहयोगात्मक खेल व्यवस्था के निर्माण के लिए केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की एकजुट प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

खिलाड़ी केंद्र में, सरकार सहयोग में

‘श्रीनगर खेल संकल्प’ का मूल फोकस एक ऐसे खेल पारिस्थितिकी तंत्र पर है, जहां

  • खिलाड़ी विकास प्राथमिकता हो
  • केंद्र और राज्य मिलकर संसाधनों का समन्वय करें
  • खेल निकायों में पारदर्शिता और पेशेवर ढांचा विकसित हो

डॉ. मांडविया ने स्पष्ट किया कि खेल अब केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण, सामाजिक एकता और युवा सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण माध्यम है।

खेल संस्कृति से आर्थिक विकास तक

संकल्प में खेलों को बहुआयामी विकास के इंजन के रूप में प्रस्तुत किया गया है:

  • खेल अवसंरचना का विस्तार
  • प्रतिभा पहचान और पोषण
  • क्षेत्रीय खेल क्लस्टर का विकास
  • खेल पर्यटन और रोजगार सृजन
  • भारत को वैश्विक खेल आयोजनों की मेजबानी के लिए तैयार करना

यह दृष्टिकोण खेलों को स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और वैश्विक प्रतिष्ठा से सीधे जोड़ता है।

विविधता ही ताकत: राज्यों को मिली भूमिका

संकल्प में भारत की भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधता को ताकत मानते हुए राज्यों को अपने-अपने क्षेत्र के अनुसार खेल मॉडल विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।
इससे स्थानीय प्रतिभाओं को उभरने का अवसर मिलेगा और ग्रासरूट स्तर पर खेल संस्कृति मजबूत होगी।

प्रशासनिक सुधार और ‘माय भारत’ से युवा सहभागिता

चिंतन शिविर के अंतिम दिन तीन प्रमुख बिंदुओं पर गहन चर्चा हुई:

  • खेल प्रशासन में सुधार: पारदर्शिता, जवाबदेही और पेशेवर ढांचा
  • खेल सामग्री निर्माण: भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा
  • युवा सहभागिता: ‘माय भारत’ प्लेटफॉर्म के जरिए नेतृत्व और भागीदारी बढ़ाना

फिट इंडिया का संदेश

समापन दिवस की शुरुआत “संडे ऑन साइकिल” साइक्लोथॉन से हुई, जिसमें डॉ. मांडविया और राज्य मंत्री रक्षा खडसे ने भाग लेकर फिटनेस और जनभागीदारी का संदेश दिया।

निष्कर्ष: एकीकृत प्रयास, वैश्विक लक्ष्य

‘श्रीनगर खेल संकल्प’ ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत का खेल भविष्य खंडित प्रयासों से नहीं, बल्कि एकीकृत और समन्वित रणनीति से तय होगा।

यह पहल केवल खिलाड़ियों के प्रदर्शन को बेहतर बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि एक स्वस्थ, सशक्त और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भारत के निर्माण की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

चंडीगढ़, ।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय का तीन दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर चंडीगढ़ में एक स्पष्ट संदेश के साथ संपन्न हुआ—अब सामाजिक न्याय केवल नीतिगत घोषणाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समयबद्ध, मापनीय और जमीनी परिणामों के रूप में दिखाई देगा। “अंत्योदय का संकल्प, अमृत काल का प्रतिबिंब – विकसित भारत@2047” थीम पर केंद्रित इस शिविर में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने व्यापक और कार्रवाई योग्य सिफारिशों पर सहमति दी।

नीतियों से आगे, व्यावहारिक समाधान पर फोकस

केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने स्पष्ट किया कि यह शिविर “इरादों से क्रियान्वयन” की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
उन्होंने कहा कि चर्चा केवल नीति निर्माण तक सीमित नहीं रही, बल्कि

  • छात्रवृत्ति वितरण
  • नशामुक्ति
  • वरिष्ठ नागरिक कल्याण
  • दिव्यांगजनों के प्रमाणन
  • ट्रांसजेंडर समुदाय के पुनर्वास

जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक समाधान तलाशे गए।

पांच थीमेटिक समूहों में बना ठोस एक्शन प्लान

शिविर के दौरान पांच समूहों ने अलग-अलग आयामों पर गहन मंथन किया:

  • अंत्योदय से आत्मनिर्भरता: SC समुदायों के कौशल विकास, आजीविका और पीएम-अजय के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर
  • समावेश, पहचान और एकीकरण: डीएनटी/एनटी/एसएनटी समुदायों के लिए SEED योजना और सटीक पहचान प्रणाली
  • आर्थिक सशक्तिकरण: SC, OBC और वंचित वर्गों के लिए ऋण और उद्यमिता तक आसान पहुंच
  • सुगमता (Accessibility): 2027-28 तक बाधा-मुक्त मानकों और सार्वजनिक ढांचे में सार्वभौमिक डिजाइन लागू करने की योजना
  • दिव्यांगजनों का प्रमाणन: तकनीक आधारित, तेज और पारदर्शी प्रमाणन प्रणाली

2027 जनगणना और ट्रांसजेंडर कल्याण पर विशेष ध्यान

शिविर में कुछ महत्वपूर्ण राष्ट्रीय स्तर के निर्णयों पर सहमति बनी:

  • जनगणना-2027 में दिव्यांगजनों का समुचित समावेश
  • SEED योजना को और मजबूत करना
  • SC/OBC वर्गों के आर्थिक सशक्तिकरण को गति देना
  • SMILE योजना के तहत ट्रांसजेंडर समुदाय के पुनर्वास, गरिमा गृह और संरक्षण तंत्र को विस्तार

“जागरूकता से सुलभता” और प्रक्रिया सरलीकरण पर जोर

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने यह स्वीकार किया कि योजनाओं की सफलता का मूल आधार है:

  • जागरूकता बढ़ाना
  • प्रक्रियाओं को सरल बनाना
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म का अधिक उपयोग
  • स्पष्ट समयसीमा तय करना

इस दिशा में छात्रवृत्ति, पेंशन, पुनर्वास और अन्य लाभों को बिना देरी और बाधाओं के सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने पर विशेष बल दिया गया।

टेक्नोलॉजी और समन्वय बनेगा गेमचेंजर

केंद्रीय मंत्री ने टेक्नोलॉजी-सक्षम सुशासन, बेहतर मॉनिटरिंग और केंद्र-राज्य समन्वय को सामाजिक न्याय के प्रभावी क्रियान्वयन की कुंजी बताया।

निष्कर्ष: इरादों से परिणाम की ओर

तीन दिवसीय यह चिंतन शिविर एक स्पष्ट दिशा देकर समाप्त हुआ—

सामाजिक न्याय को अब केवल योजनाओं और घोषणाओं तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि सबसे गरीब और कमजोर वर्गों के जीवन में वास्तविक, मापनीय बदलाव लाने पर फोकस किया जाएगा।

इस साझा संकल्प के साथ देश ने 2047 तक एक समावेशी, सशक्त और न्यायसंगत विकसित भारत की दिशा में ठोस कदम बढ़ा दिए हैं।

नई दिल्ली / 

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने सुप्रसिद्ध फोटोग्राफर रघु राय के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है और उन्हें कला का एक ऐसा पर्याय बताया है जिन्होंने अपने लेंस के माध्यम से भारत की जीवंतता को अमर बना दिया। श्री मोदी ने कहा कि श्री रघु राय का कार्य गहन संवेदनशीलता, गहराई और विविधता से परिपूर्ण था, जिसने भारत के जनजीवन के विभिन्न पहलुओं को संजोया और उन्हें लोगों के करीब लाया। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि फोटोग्राफी और संस्कृति की दुनिया में उनका योगदान अद्वितीय है और उनका निधन कला जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट में लिखा:

“श्री रघु राय जी को कला के एक ऐसे पर्याय के रूप में याद किया जाएगा, जिन्होंने अपने लेंस के माध्यम से भारत की जीवंतता को अमर बना दिया। उनकी फोटोग्राफी में गहन संवेदनशीलता, गहराई और विविधता थी। इसने लोगों को भारत के जनजीवन के विभिन्न पहलुओं के और अधिक करीब लाया। उनका निधन फोटोग्राफी और संस्कृति की दुनिया के लिए एक अपूरणीय क्षति है। दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार, प्रशंसकों और फोटोग्राफी जगत के साथ हैं। ओम शांति।”

दुर्ग। नगर पालिक निगम दुर्ग के बाजार विभाग में नियमों को ताक पर रखकर 'अवैध' को 'वैध' बनाने का खेल धड़ल्ले से जारी है। ताजा मामला इंदिरा मार्केट के सी-ब्लॉक से जुड़ा है, जहां आवंटन की शर्तों का सरेआम उल्लंघन हो रहा है। आश्चर्य की बात यह है कि इस गंभीर अनियमितता की पूरी जानकारी होने के बावजूद बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा की निष्क्रियता अब संदेह के घेरे में है। शहर में चर्चा है कि क्या एक ग्रेड-3 स्तर का कर्मचारी, जिले के कड़क आईएएस अधिकारी और निगम आयुक्त सुमित अग्रवाल को भी गुमराह करने में सफल हो रहा है?

नियमों की धज्जियां: 'नो रेंट' की शर्त, फिर भी किराए पर दुकान

इंदिरा मार्केट सी-ब्लॉक के भूतल पर सीढ़ी के बगल स्थित एक दुकान को लेकर निगम के आवंटन पत्र में स्पष्ट शर्त थी कि संचालक इसे किसी अन्य को किराए पर नहीं दे सकेगा। इसके बावजूद, उक्त दुकान को न केवल किराए पर दिया गया है, बल्कि वहां खुलेआम व्यापार संचालित हो रहा है।

डेढ़ महीने की खामोशी: मार्च के प्रथम सप्ताह में ही बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा को इस अवैध संचालन की बिंदुवार जानकारी दी गई थी। तब उन्होंने 'जल्द कार्रवाई' का आश्वासन दिया था, लेकिन डेढ़ महीना बीत जाने के बाद भी फाइलें दबी हुई हैं। यह देरी बाजार अधिकारी की कार्यप्रणाली पर 'मिलीभगत' और 'अपना राजस्व बढ़ाने' जैसे गंभीर आरोप लगा रही है।

बाजार प्रभारी शेखर चंद्राकर का 'मौन' सुशासन पर सवाल

लोकतंत्र में जब अधिकारी लापरवाह हों, तो जनप्रतिनिधियों से हस्तक्षेप की उम्मीद की जाती है। परंतु, बाजार विभाग के प्रभारी शेखर चंद्राकर की इस पूरे मामले पर रहस्यमयी चुप्पी ने आग में घी डालने का काम किया है। शहर में चर्चा का बाजार गर्म है कि क्या बाजार प्रभारी भी 'सुशासन' के बजाय 'निजी राजस्व' की राह पर चल पड़े हैं? आखिर क्यों एक निर्वाचित प्रतिनिधि, सरकारी नियमों के इस खुले उल्लंघन पर मौन है?

क्या गुमराह हो रहे हैं निगम आयुक्त सुमित अग्रवाल?

दुर्ग निगम आयुक्त सुमित अग्रवाल अपनी प्रशासनिक दृढ़ता और पारदर्शिता के लिए जाने जाते हैं। लेकिन, बाजार विभाग की यह स्थिति उनकी कार्यप्रणाली को भी संदेह के घेरे में ला रही है।

क्या अभ्युदय मिश्रा जैसे कर्मचारी आयुक्त तक सही जानकारी पहुंचने ही नहीं दे रहे?

क्या एक ग्रेड-3 कर्मचारी के पास इतनी ताकत है कि वह शासन की छवि को धूमिल कर सके?

क्या महापौर श्रीमती अलका बाघमार के नेतृत्व वाले निगम प्रशासन में भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हो चुकी हैं?

निष्कर्ष: कार्रवाई या सिर्फ खानापूर्ति?

लिखित शिकायत का इंतजार करने का तर्क देने वाले अधिकारी यह भूल रहे हैं कि जब अपराध और उल्लंघन सार्वजनिक हो, तो कार्रवाई के लिए कागज नहीं, बल्कि नीयत की जरूरत होती है। यदि जल्द ही इस अवैध दुकान और इसके पीछे के 'संरक्षकों' पर कार्यवाही नहीं हुई, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि दुर्ग निगम में 'जनहित' नहीं, बल्कि 'अधिकारी हित' सर्वोपरि है।

फिलहाल, जनता की नजरें अब आयुक्त सुमित अग्रवाल पर टिकी हैं—क्या वे इस भ्रष्टाचार के मकड़जाल को काटकर दोषियों पर गाज गिराएंगे?

शौर्यपथ दैनिक राशिफल विशेष | 26 अप्रैल 2026, रविवार

ग्रह-नक्षत्रों की चाल में बदलाव, कई राशियों के लिए अवसर तो कुछ के लिए सावधानी का संकेत

आज का दिन खगोलीय दृष्टि से विशेष माना जा रहा है। चंद्रमा की स्थिति और ग्रहों के संयोग कई राशियों के जीवन में नए संकेत दे रहे हैं। आइए जानते हैं 12 राशियों का आज का विस्तृत राशिफल, एक समाचार शैली में—

? मेष (Aries)

आज का दिन उत्साह से भरा रहेगा। कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, लेकिन खर्चों पर नियंत्रण जरूरी है।

? वृषभ (Taurus)

धैर्य और संयम से काम लेने का दिन है। पारिवारिक मामलों में संतुलन बनाए रखें। निवेश सोच-समझकर करें।

? मिथुन (Gemini)

संचार और संपर्क के लिए दिन उत्तम है। नई योजनाओं की शुरुआत हो सकती है। मित्रों से सहयोग मिलेगा।

? कर्क (Cancer)

भावनात्मक उतार-चढ़ाव संभव है। कार्यस्थल पर सावधानी बरतें। स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें।

? सिंह (Leo)

नेतृत्व क्षमता में वृद्धि होगी। किसी बड़े निर्णय का समय आ सकता है। सम्मान और प्रतिष्ठा में वृद्धि के योग हैं।

? कन्या (Virgo)

आज योजनाएं सफल होंगी। मेहनत का फल मिलेगा। शिक्षा और करियर में प्रगति के संकेत हैं।

⚫ तुला (Libra)

संतुलन बनाए रखने का दिन है। रिश्तों में मधुरता आएगी। आर्थिक मामलों में सतर्क रहें।

⚪ वृश्चिक (Scorpio)

गुप्त योजनाएं सफल हो सकती हैं। आत्मविश्वास बढ़ेगा। लेकिन किसी पर अधिक भरोसा न करें।

? धनु (Sagittarius)

यात्रा के योग बन रहे हैं। करियर में नए अवसर मिल सकते हैं। सकारात्मक सोच बनाए रखें।

? मकर (Capricorn)

कार्य में स्थिरता रहेगी। परिवार का सहयोग मिलेगा। निवेश के लिए समय अनुकूल है।

? कुंभ (Aquarius)

नई सोच और रचनात्मकता का दिन है। तकनीकी और व्यवसायिक क्षेत्र में लाभ संभव है।

? मीन (Pisces)

आध्यात्मिक झुकाव बढ़ेगा। मानसिक शांति मिलेगी। आर्थिक मामलों में सावधानी जरूरी है।

? विशेष विश्लेषण

आज चंद्रमा की स्थिति कई राशियों के लिए मानसिक स्पष्टता और निर्णय क्षमता को प्रभावित करेगी। जहां एक ओर सिंह, कन्या और मकर राशि वालों के लिए सफलता के संकेत हैं, वहीं कर्क और मीन राशि को स्वास्थ्य और भावनाओं पर ध्यान देने की सलाह दी गई है।

? निष्कर्ष:

26 अप्रैल 2026 का दिन मिश्रित प्रभाव लेकर आया है—कुछ राशियों के लिए उन्नति के द्वार खुलेंगे, तो कुछ को सतर्कता और संयम से आगे बढ़ना होगा।

पिता ने नौकरी के लिए अपनाई ‘हल्बा’ पहचान, जमीन के लिए ‘कलार’—बेटी को अनुकंपा नियुक्ति में फिर उठा बड़ा सवाल


कोंडागांव/बीजापुर | विशेष रिपोर्ट (शौर्यपथ)

छत्तीसगढ़ के कोंडागांव और बीजापुर जिलों से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि जाति प्रमाण पत्र की पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। मामला एक ही व्यक्ति द्वारा अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग जाति का उपयोग कर लाभ लेने और उसके बाद उसकी संतान को अनुकंपा नियुक्ति मिलने से जुड़ा है।

प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, कोंडागांव जिले के एरला क्षेत्र में जमीन मालिक मेहतु राम सेठिया (पिता घासीराम) ने जमीन संबंधी दस्तावेजों में अपनी जाति ‘कलार’ दर्ज कराई। वहीं, बीजापुर जिले में जाकर उन्होंने स्वयं को ‘हल्बा’ (अनुसूचित जाति) बताकर आदिवासी विकास विभाग के अंतर्गत कन्या आश्रम ईलमिडी में जलवाहक के पद पर 1 फरवरी 1994 को नियुक्ति प्राप्त की।

यहां तक मामला केवल फर्जी जाति के सहारे सरकारी नौकरी पाने तक सीमित था, लेकिन असली सवाल उनकी मृत्यु के बाद खड़ा हुआ।

अनुकंपा नियुक्ति में भी गड़बड़ी?
मेहतु राम की मृत्यु के पश्चात उनकी पुत्री कुमारी कमला सेठिया को 15 फरवरी 2013 को कलेक्टर कार्यालय, बीजापुर (आदिवासी शाखा) द्वारा जारी पत्र क्रमांक 8766 के तहत सहायक ग्रेड-3 के पद पर नियुक्त किया गया। हैरानी की बात यह है कि इस नियुक्ति में बेटी की जाति ‘कलार’ दर्शाई गई है।

अब बड़ा सवाल यह उठता है कि—

  • जब पिता की नौकरी ‘हल्बा’ (SC) जाति के आधार पर थी, तो बेटी को ‘कलार’ (OBC/अन्य) जाति में अनुकंपा नियुक्ति कैसे मिली?
  • क्या नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान जाति सत्यापन नहीं किया गया?
  • क्या यह महज लापरवाही है या फिर सुनियोजित मिलीभगत?

नियम क्या कहते हैं?
सामान्यतः अनुकंपा नियुक्ति में मृतक कर्मचारी की सेवा शर्तों और मूल दस्तावेजों के आधार पर ही आश्रित को नौकरी दी जाती है। ऐसे में जाति का अंतर गंभीर अनियमितता की ओर संकेत करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी प्राप्त की है, तो यह न केवल आपराधिक कृत्य है बल्कि उसकी सेवा भी अवैध मानी जा सकती है।

प्रशासन पर उठते सवाल
इस पूरे प्रकरण में संबंधित विभाग, सहायक आयुक्त कार्यालय और नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों की भूमिका संदेह के घेरे में है। सवाल यह भी है कि—

  • क्या दस्तावेजों की जांच केवल औपचारिकता बनकर रह गई है?
  • क्या “लेन-देन” के जरिए नियमों को दरकिनार किया गया?

गंभीर अपराध और सिस्टम की विफलता
एक ही व्यक्ति द्वारा नौकरी के लिए अलग जाति और जमीन के लिए अलग जाति का उपयोग करना, फिर उसी परिवार के सदस्य को अलग आधार पर सरकारी नौकरी मिलना—यह न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि उन पात्र उम्मीदवारों के साथ भी अन्याय है जो सही तरीके से अवसर पाने के हकदार थे।


अब आगे क्या?
यह मामला सामने आने के बाद प्रशासन के लिए निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करना आवश्यक हो गया है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो न केवल नियुक्ति रद्द हो सकती है बल्कि संबंधित अधिकारियों पर भी विभागीय और कानूनी कार्रवाई तय मानी जा रही है।


(शौर्यपथ की पड़ताल जारी है… )

 

रायपुर ।
देश को खेल महाशक्ति बनाने की दिशा में केंद्र और राज्यों के बीच गंभीर मंथन का सिलसिला शुरू हो गया है। अरुण साव ने श्रीनगर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय खेल चिंतन शिविर में भाग लेते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ खेलों में समग्र विकास के लिए पूरी तरह तैयार है और देश के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ेगा।

यह महत्वपूर्ण शिविर शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस सेंटर में प्रारंभ हुआ, जिसमें देशभर के खेल मंत्री, विशेषज्ञ और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हो रहे हैं।


?? खेल शक्ति भारत बनाने की दिशा में राष्ट्रीय मंथन

इस राष्ट्रीय आयोजन में मनसुख मांडविया और रक्षा निखिल खडसे सहित विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के खेल मंत्री शामिल हुए।

छत्तीसगढ़ की ओर से उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव के साथ खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार ने राज्य का प्रतिनिधित्व किया।

श्री साव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न के अनुरूप 2047 तक भारत को खेल महाशक्ति बनाने के लक्ष्य को लेकर केंद्र और राज्य सरकारें एकजुट होकर कार्य कर रही हैं।


? पहले दिन तीन प्रमुख विषयों पर हुआ गहन मंथन

1️⃣ मेडल स्ट्रेटजी – ‘खेलो इंडिया’

पहले सत्र में ‘मेडल स्ट्रेटजी – खेलो इंडिया’ पर गहन चर्चा हुई।

  • प्रशिक्षकों की क्षमता विकास (Coach Development) पर सहमति
  • 2048 तक भारत को ओलंपिक पदक तालिका में शीर्ष 5 देशों में शामिल करने का रोडमैप
  • खेल विकास में स्पोर्ट्स साइंस को अहम आधार माना गया

2️⃣ केंद्र–राज्य समन्वय से मजबूत होगी खेल व्यवस्था

दूसरे सत्र ‘खेलो भारत नीति – केंद्र एवं राज्य समन्वय’ में कई अहम निर्णयों पर चर्चा हुई—

  • खिलाड़ियों की प्रतिभा पहचान (Talent Identification) को मजबूत करना
  • खेल अकादमियों का मानकीकरण
  • विद्यालयों में शारीरिक शिक्षा अनिवार्य करने पर जोर
  • खेल शिक्षकों की भर्ती और उन्नत प्रशिक्षण
  • खिलाड़ियों का राष्ट्रीय डाटा-बेस तैयार करने पर सहमति

इस दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि खिलाड़ियों का लक्ष्य केवल नौकरी नहीं, बल्कि देश के लिए पदक जीतना होना चाहिए।


⚖️ डोपिंग और खेल नैतिकता पर सख्त रुख

तीसरे सत्र में डोपिंग और खेल नैतिकता पर गंभीर चर्चा हुई।
इस सत्र में ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा ने खिलाड़ियों के लिए सुरक्षित और पेशेवर वातावरण सुनिश्चित करने तथा सेफ गार्डिंग ऑफिसर्स की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया।

साथ ही प्रतिबंधित दवाओं के उपयोग पर कड़े नियम बनाने और डोपिंग को अपराध की श्रेणी में लाने की नीति को दोहराया गया।


? गांव-गांव से उभरें खिलाड़ी— यही लक्ष्य

उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि छत्तीसगढ़ का लक्ष्य है—

  • हर गांव और हर शहर से नए खिलाड़ी तैयार हों
  • ग्रामीण क्षेत्रों में खेल संस्कृति विकसित हो
  • जमीनी स्तर पर खेल अधोसंरचना का विस्तार हो
  • बच्चों को खेल गतिविधियों के लिए अधिक समय मिले

? 26 अप्रैल तक चलेगा राष्ट्रीय चिंतन शिविर

यह दो दिवसीय शिविर 26 अप्रैल 2026 तक जारी रहेगा।
केंद्रीय युवा कार्य और खेल मंत्रालय द्वारा लगातार दूसरे वर्ष इस आयोजन का संचालन किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य—

  • खेल नीतियों में सुधार
  • वैश्विक स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन
  • भारत को खेल शक्ति बनाने की दिशा में ठोस रणनीति तैयार करना है।

  रायपुर, /नक्सलमुक्त आबूझमाड़ क्षेत्र में अब बुनियादी सुविधाओं का निर्माण कार्य तेजी से किये जा रहे हैं । अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों में सड़क, जल निकासी, ओवरहेड टैंक, लघु सिंचाई योजना सहित अन्य कार्यो ने जोर पकड़ लिया है । पिछले दिनों नक्सलमुक्त आबूझमाड़ में सीटीई की टीम ने विभिन्न निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया ।

टीम ने नारायणपुर के हरिमार्कटोला, सड़क का निरीक्षण किया। टीम ने देखा कि निर्मित सड़कों मोटाई और चौड़ाई को सही मानक स्तर की है, इसी तरह ग्राम दूरस्थ ओरछा ब्लाक में निर्मित शेड की निरीक्षण किया गया । जिले के ग्राम पालकी में निर्मित ओवरहेड टैंक की टीम ने निरीक्षण किया। इसी तरह से जल संसाधन विभाग के अंतर्गत बैनूर रिजर्वायर के नवीनीकरण कार्य का निरीक्षण किया गया। टीम ने निर्माण कार्यों में लगे अधिकारियों से निर्माण कार्यों की विस्तार से जानकारी ली एवं अधिकारियों को जरूरी मार्गदर्शन भी दिया।

नक्सलमुक्त बस्तर में अब विभिन्न निर्माण कार्यों के निरीक्षण करने जांच एजेन्सीयों के दल आसानी से पहुंच रहे हैं। तकनीकी टीमों द्वारा निर्माण कार्यों को कराने स्थानीय अधिकारियों को उचित मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है, जिससे अब सुदूर अबूझमाड़ में निर्माण कार्य गुणवत्ता पूर्ण तेजी से किए जाने लगे हैं।

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