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April 30, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

 

रायपुर ।
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है तथा ईंधन आपूर्ति पूरी तरह सामान्य बनी हुई है। विभाग ने आम नागरिकों से किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।

पश्चिम एशिया में उत्पन्न परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार लगातार भारत सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के संपर्क में है, ताकि प्रदेश की ईंधन आवश्यकताओं की निर्बाध पूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

प्रदेश में पर्याप्त स्टॉक, आपूर्ति नियमित

खाद्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राज्य में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। आपूर्ति की साप्ताहिक समीक्षा नियमित रूप से की जा रही है, जिससे आम उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। प्रदेश में संचालित 2,516 पेट्रोल पंपों तथा तीनों प्रमुख ऑयल कंपनियों के डिपो में पर्याप्त मात्रा में पेट्रोल और डीजल उपलब्ध है।

आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 में प्रदेश की मासिक पेट्रोल आवश्यकता 1.01 लाख किलोलीटर के मुकाबले 1.27 लाख किलोलीटर (126 प्रतिशत) पेट्रोल की आपूर्ति की गई। वहीं अप्रैल 2026 में 23 अप्रैल तक 1.60 लाख किलोलीटर पेट्रोल प्राप्त हो चुका है।

इसी प्रकार मार्च 2026 में डीजल की आवश्यकता 1.64 लाख किलोलीटर के विरुद्ध 3.00 लाख किलोलीटर (183 प्रतिशत) डीजल की आपूर्ति की गई। जबकि अप्रैल 2026 में 23 अप्रैल तक 1.38 लाख किलोलीटर डीजल की आपूर्ति की जा चुकी है। यह स्पष्ट करता है कि प्रदेश में मांग के अनुरूप पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।

जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई

अधिकारियों ने बताया कि जमाखोरी और कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के लिए सभी जिलों में आकस्मिक निरीक्षण और छापेमारी की कार्रवाई जारी है। राज्य स्तर से लेकर जिला स्तर तक नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं। आम नागरिकों की शिकायतों के समाधान के लिए विभागीय कॉल सेंटर (1800-233-3663) भी सक्रिय रूप से कार्यरत है।

औद्योगिक उपभोक्ताओं को दिए गए विशेष निर्देश

23 अप्रैल 2026 को खाद्य विभाग के संचालक की अध्यक्षता में तीनों ऑयल कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में यह जानकारी सामने आई कि कुछ औद्योगिक उपभोक्ता रिटेल आउटलेट से डीजल खरीद रहे हैं, जिससे अस्थायी दबाव की स्थिति बनती है। इस पर कंपनियों को निर्देशित किया गया है कि वे मांग के अनुरूप आपूर्ति सुनिश्चित करें।

22 दिन का पेट्रोल, 15 दिन का डीजल स्टॉक उपलब्ध

वर्तमान स्थिति के अनुसार प्रदेश में लगभग 77,111 किलोलीटर पेट्रोल उपलब्ध है, जो लगभग 22 दिनों की आवश्यकता के बराबर है। इसी प्रकार 84,295 किलोलीटर डीजल उपलब्ध है, जो करीब 15 दिनों की खपत के लिए पर्याप्त है।

राज्य सरकार ने पुनः आश्वस्त किया है कि प्रदेश में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है तथा आपूर्ति पूरी तरह सामान्य बनी हुई है।

राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर पंचायत पदाधिकारी सम्मेलन में बोले मुख्यमंत्री, गांवों के विकास में जनप्रतिनिधियों की भूमिका बताई अहम

रायपुर ।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि डबल इंजन की सरकार पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाकर विकसित भारत की मजबूत नींव तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में गांवों के समग्र विकास का नया अध्याय लिखा जा रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय आज राजधानी रायपुर स्थित डीडीयू ऑडिटोरियम में राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर आयोजित पंचायत पदाधिकारी सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने प्रदेशवासियों और पंचायत प्रतिनिधियों को पंचायती राज दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रियता से ही गांवों का समग्र विकास संभव है और अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ सुनिश्चित किया जा सकता है।

पंचायत से शुरू हुआ मेरा राजनीतिक सफर: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत पंच और सरपंच के रूप में की थी। पंचायत स्तर पर कार्य करते हुए प्राप्त अनुभव ही आगे की जिम्मेदारियों के निर्वहन में सहायक बने। उन्होंने कहा कि आज अनेक जनप्रतिनिधि पंचायत से अपना सफर शुरू कर देश के उच्च सदनों तक पहुंचे हैं। गांवों को स्वच्छ, स्वस्थ और सुंदर बनाने में पंचायतों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और जमीनी स्तर पर बेहतर कार्यों से ही प्रभावी नीतियां तैयार होती हैं।

ग्रामीण विकास योजनाओं से गांवों में आया बदलाव

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से ग्रामीणों को पक्के मकान उपलब्ध हो रहे हैं और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से गांवों की कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। अटल डिजिटल सेवा केंद्रों के जरिए बैंकिंग, बिजली बिल भुगतान, पेंशन और बीमा जैसी सेवाएं अब ग्रामीणों के लिए सुलभ हो गई हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। महिलाओं के लिए महतारी सदन का निर्माण भी तेजी से किया जा रहा है, जिनसे महिलाओं को सीधा लाभ मिल रहा है।

उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से पंचायतों में संचालित सभी विकास कार्यों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने का आग्रह किया, ताकि गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ योजनाओं का क्रियान्वयन हो सके। उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन 2.0 के तहत हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें पंचायतों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

सुशासन तिहार में निभाएं सक्रिय भूमिका

मुख्यमंत्री ने आगामी सुशासन तिहार का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके तहत आमजनों की समस्याओं के समाधान के लिए विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से अपने क्षेत्रों की समस्याओं की पहचान कर उनके समाधान में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। साथ ही मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना के तहत लंबित बिजली बिलों पर सरचार्ज माफी और अतिरिक्त रियायत का लाभ अधिक से अधिक ग्रामीणों तक पहुंचाने की अपील की।

पंचायतों को हर संभव संसाधन उपलब्ध कराएगी सरकार

राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने कहा कि डबल इंजन की सरकार पंडित दीनदयाल उपाध्याय की मंशा के अनुरूप अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों को बधाई देते हुए कहा कि प्रदेश में पंचायतों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार विकास कार्यों की स्वीकृति दी जा रही है।

सम्मेलन को सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल और राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा ने भी संबोधित किया।


मुख्यमंत्री ने विभिन्न परियोजनाओं के स्टालों का किया अवलोकन

मेगा स्वास्थ्य शिविर और नवाचार आधारित योजनाओं की सराहना

सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने जिला प्रशासन रायपुर द्वारा आयोजित विभिन्न परियोजनाओं के स्टालों का अवलोकन किया। उन्होंने प्रोजेक्ट छांव के अंतर्गत आयोजित मेगा स्वास्थ्य शिविर की सराहना की तथा सिलाई-कढ़ाई प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिलाओं से चर्चा कर उनके आजीविका संवर्धन के प्रयासों की प्रशंसा की।

मुख्यमंत्री ने नवजात शिशुओं में जन्मजात हृदय रोगों की पहचान हेतु प्रोजेक्ट धड़कन, देहदान को प्रोत्साहित करने के लिए प्रोजेक्ट दधीचि, किसानों को नवाचार से जोड़ने के लिए प्रोजेक्ट नैनो, प्रोजेक्ट रचना, प्रोजेक्ट स्मृति पुस्तकालय, प्रोजेक्ट पाई-पाई, ग्लोबल गांव, ज्ञान भारतम, प्रोजेक्ट सिग्नल, मेरा गांव मेरी पहचान, प्रोजेक्ट अजा और प्रोजेक्ट बिजनेस दीदी सहित विभिन्न नवाचार आधारित परियोजनाओं का अवलोकन किया। इस दौरान हितग्राहियों को प्रशस्ति पत्र एवं आर्थिक सहायता भी वितरित की गई।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रोजेक्ट आरोग्यम के कटआउट और प्रोजेक्ट हैंडी के अंतर्गत तैयार शासन की योजनाओं की संक्षिप्त पुस्तक का विमोचन भी किया। उन्होंने जिला प्रशासन द्वारा संचालित इन गतिविधियों को आमजन के लिए लाभकारी बताते हुए उनके प्रयासों की सराहना की।

इस अवसर पर विधायक श्री अनुज शर्मा, विधायक श्री इंद्र कुमार साहू, तेलघानी विकास बोर्ड के अध्यक्ष श्री जितेंद्र साहू, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन सहित त्रि-स्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

खरीफ 2026 के लिए 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक आवंटित, कालाबाजारी व जमाखोरी पर सख्त कार्रवाई के निर्देश

रायपुर ।
राज्य में खरीफ सीजन 2026 के दौरान किसानों को खाद की किसी प्रकार की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। पंजीकृत रकबे के अनुरूप सभी किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा। कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम ने यह जानकारी देते हुए कहा कि राज्य सरकार उर्वरक आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए व्यापक रणनीति पर कार्य कर रही है।

पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण आयातित उर्वरकों की आपूर्ति प्रभावित होने की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने अग्रिम तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रयासों से खरीफ सीजन 2026 के लिए केन्द्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ को 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का लक्ष्य आवंटित किया गया है। इसमें यूरिया 7.25 लाख मीट्रिक टन, डीएपी 3 लाख मीट्रिक टन, एमओपी 80 हजार मीट्रिक टन, एनपीके 2.5 लाख मीट्रिक टन तथा एसएसपी 2 लाख मीट्रिक टन शामिल हैं।

गोदामों में 7.48 लाख मीट्रिक टन खाद उपलब्ध

मंत्री श्री नेताम ने बताया कि वर्तमान में राज्य के गोदामों और सहकारी समितियों में लगभग 7.48 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है। 30 मार्च की स्थिति के अनुसार स्टॉक में यूरिया 2,43,717 मीट्रिक टन, डीएपी 1,05,631 मीट्रिक टन, एनपीके 1,69,109 मीट्रिक टन, एमओपी 50,431 मीट्रिक टन और एसएसपी 1,78,657 मीट्रिक टन शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य है कि पारदर्शिता के साथ सभी किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराया जाए।

वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग पर जोर

पश्चिम एशियाई संकट के मद्देनजर रासायनिक उर्वरकों की संभावित कमी को देखते हुए विभाग द्वारा किसानों को वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके तहत एनपीके 12:32:16, 20:20:0:13, हरी खाद, जैविक खाद तथा नैनो उर्वरकों की उपलब्धता बढ़ाई जा रही है।

मंत्री श्री नेताम ने स्पष्ट किया कि उर्वरकों की कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए जिला स्तर पर उड़नदस्ता दल और निगरानी समितियों का गठन किया गया है। किसी भी स्तर पर गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

खरीफ 2026 की तैयारियों की समीक्षा

कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती शहला निगार ने रायपुर और दुर्ग संभाग के अधिकारियों की बैठक लेकर खरीफ 2026 की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि पीएम किसान पोर्टल से एग्रीस्टेक पोर्टल में किसानों का पंजीयन शीघ्र पूर्ण किया जाए तथा बीज एवं उर्वरक वितरण के लिए नई ई-वितरण प्रणाली लागू की जाए।

उन्होंने रासायनिक खाद के विकल्प के रूप में हरी खाद, जैव उर्वरक और नील-हरित काई के उपयोग को बढ़ावा देने तथा उर्वरकों की जमाखोरी, कालाबाजारी और डायवर्जन रोकने के लिए जिलों को कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए।

दलहन-तिलहन और उद्यानिकी फसलों पर विशेष फोकस

प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (प्राइस सपोर्ट स्कीम) के तहत दलहन और तिलहन फसलों के उपार्जन को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही प्रत्येक जिले में सुगंधित धान के उत्पादन को बढ़ावा देने, दलहन-तिलहन फसलों के विस्तार तथा उद्यानिकी क्षेत्र में ऑयल पाम, मखाना और मसाला फसलों के उत्पादन को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है।

 

बिलासपुर ।
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के प्रभावी क्रियान्वयन में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए 50 हजार से अधिक ग्रामीण परिवारों को पक्के आवास उपलब्ध कराए हैं। यह सफलता प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), पीएम जनमन योजना तथा मुख्यमंत्री आवास योजना के समन्वित और प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम है, जिससे हजारों जरूरतमंद परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन की नई शुरुआत मिली है।

राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर जिले ने ग्रामीण विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज करते हुए 50 हजार 44 परिवारों को पक्के आवास उपलब्ध कराए। जिला प्रशासन द्वारा योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और समयबद्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। इस दौरान 781.13 करोड़ रुपये की राशि सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से हस्तांतरित की गई, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई और निर्माण कार्यों में तेजी आई।

विकासखंडवार प्रदर्शन में मस्तूरी अव्वल

क्षेत्रवार आंकड़ों पर नजर डालें तो मस्तूरी विकासखंड 14 हजार 973 आवासों के साथ जिले में शीर्ष पर रहा। इसके बाद बिल्हा में 13 हजार 762, कोटा में 11 हजार 205 और तखतपुर में 10 हजार 104 आवासों का निर्माण पूर्ण किया गया। ये आंकड़े प्रशासनिक दक्षता और जमीनी स्तर पर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को दर्शाते हैं।

नारी शक्ति बनी सफलता की मजबूत आधारशिला

इस ऐतिहासिक सफलता में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही। जिले में 113 महिलाओं को ‘रानी मिस्त्री’ के रूप में प्रशिक्षित कर निर्माण कार्य में शामिल किया गया, जिससे वे आत्मनिर्भर बनीं। वहीं 331 महिलाओं को ‘डीलर दीदी’ बनाकर निर्माण सामग्री की आपूर्ति की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके अलावा 2,231 महिलाओं को शटरिंग सामग्री किराये पर उपलब्ध कराने के लिए प्रोत्साहित किया गया, जिससे निर्माण कार्यों में तेजी आई और महिलाओं के लिए आय के नए अवसर विकसित हुए।

प्रदेश में दूसरा स्थान, मजबूत योजना का परिणाम

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत वर्ष 2016-17 से 2025-26 तक बिलासपुर जिले ने 1 लाख 3 हजार 873 आवास पूर्ण कर छत्तीसगढ़ में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। यह उपलब्धि जिले की मजबूत कार्ययोजना, सतत मॉनिटरिंग और जनसहभागिता का परिणाम है।

योजना का मानवीय पक्ष भी उतना ही प्रेरणादायक है। ग्राम डारसागर की झांगली बैगा और ग्राम नेवसा की कैलाशा बाई जैसी हितग्राही, जो वर्षों तक कच्चे मकानों में कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन कर रही थीं, आज पक्के घर में सुरक्षित और सम्मानपूर्वक जीवन जी रही हैं। उनके लिए यह घर केवल चार दीवारें नहीं, बल्कि सुरक्षा, आत्मसम्मान और बेहतर भविष्य का प्रतीक है।

सम्मान और सुरक्षा की नई नींव

कलेक्टर बिलासपुर ने इस उपलब्धि को जिले के लिए गौरवपूर्ण बताते हुए कहा कि ये 50 हजार से अधिक घर केवल ईंट और सीमेंट की संरचनाएं नहीं, बल्कि गरीब परिवारों के सम्मान और सुरक्षा की मजबूत नींव हैं। वहीं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने कहा कि भविष्य में भी पारदर्शिता और प्रतिबद्धता के साथ प्रत्येक पात्र हितग्राही तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।

जनसंपर्क अधिकारियों को जिम्मेदारी से कार्य करने के निर्देश, परिणाम आधारित मूल्यांकन की चेतावनी

रायपुर ।
जनसंपर्क आयुक्त श्री रजत बंसल ने कहा है कि वर्तमान डिजिटल युग में जनसंपर्क अधिकारियों के लिए न्यू एज मीडिया की सभी विधाओं में दक्ष होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बदलते समय के साथ नई तकनीकों और संचार माध्यमों को अपनाना ही प्रभावी जनसंपर्क की कुंजी है।

आयुक्त श्री बंसल आज नवा रायपुर स्थित संवाद कार्यालय में जनसंपर्क संचालनालय एवं जिला जनसंपर्क अधिकारियों की बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जनसंपर्क का कार्य अत्यंत जिम्मेदारीपूर्ण है और इसे पूरी गंभीरता के साथ निभाना चाहिए। शासन और जनता के बीच जनसंपर्क अधिकारी एक महत्वपूर्ण सेतु की भूमिका निभाते हैं, इसलिए किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रत्येक अधिकारी के कार्यों का मूल्यांकन उनके परिणामों के आधार पर किया जाएगा।

बैठक में उन्होंने मंत्रिगणों, विभागीय सचिवों, विभागाध्यक्षों तथा जिला कलेक्टरों के साथ नियमित संपर्क और समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे सूचनाओं का समयबद्ध और प्रभावी आदान-प्रदान संभव होगा, जो शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और प्रचार-प्रसार के लिए अत्यंत आवश्यक है।

आयुक्त श्री बंसल ने आगामी एक मई से प्रारंभ होने वाले प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार के प्रचार-प्रसार की तैयारियों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का व्यापक प्रचार सुनिश्चित करने के लिए प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का अधिकतम उपयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक माध्यम का प्रभावी उपयोग करते हुए योजनाओं की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना आवश्यक है।

उन्होंने विशेष रूप से जोर देते हुए कहा कि राज्य में संचालित विकास कार्यों और योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों के वास्तविक अनुभवों को वीडियो पोस्ट और समाचारों के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाया जाए, ताकि अन्य नागरिक भी योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित हो सकें। साथ ही प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया के साथ सतत संपर्क एवं समन्वय बनाए रखने के निर्देश भी दिए गए।

बैठक के दौरान जनसंपर्क आयुक्त ने प्रचार-प्रसार कार्य में लापरवाही बरतने पर तीन जिला जनसंपर्क अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने सभी अधिकारियों को सक्रिय और जिम्मेदार तरीके से कार्य करते हुए शासन की योजनाओं को आमजन तक प्रभावी रूप से पहुंचाने का आह्वान किया।

बैठक में अपर संचालक सर्वश्री उमेश मिश्रा, संजीव तिवारी, आलोक देव तथा श्रीमती हर्षा पौराणिक सहित संचालनालय और जिलों के जिला जनसंपर्क अधिकारी उपस्थित रहे।

सूचना प्रौद्योगिकी पर राज्य स्तरीय कार्यशाला सम्पन्न, अधिकारियों को नई तकनीकों से अपडेट रहने के निर्देश

रायपुर ।
मुख्य सचिव श्री विकासशील ने कहा है कि शासन की फ्लैगशिप योजनाओं का लाभ आम जनता तक शीघ्र और प्रभावी रूप से पहुंचाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का अधिकतम उपयोग किया जाना आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों से नई और उभरती तकनीकों को अपनाते हुए नागरिक सेवाओं को अधिक सरल और सुलभ बनाने पर जोर दिया।

मुख्य सचिव आज मंत्रालय महानदी भवन में उभरती नवीन सूचना प्रौद्योगिकियों पर आधारित एक दिवसीय कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सूचना एवं संचार से जुड़े संस्थानों को अपने मोबाइल ऐप, वेबसाइट और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म नागरिक केन्द्रित और उपयोग में आसान बनाने चाहिए, ताकि आम लोगों को योजनाओं का लाभ लेने में किसी प्रकार की परेशानी न हो।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र (एनआईसी) के अधिकारियों को नई आईटी तकनीकों से हमेशा अपडेट रहना चाहिए, जिससे शासन की योजनाओं का लाभ हितग्राहियों तक तेजी से पहुंचाया जा सके।

सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव श्री अंकित आनंद ने राज्य स्तरीय सूचना केन्द्र और जिला सूचना विज्ञान केन्द्रों के अधिकारियों से उनके संस्थानों में उपलब्ध संसाधनों, उपकरणों और आवश्यकताओं की जानकारी प्राप्त की।

कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र, नई दिल्ली के उप महानिदेशक श्री दयानंद साहा ने कहा कि विभिन्न नवीन सूचना प्रौद्योगिकियों के माध्यम से सरकारी योजनाओं के जरिए नागरिकों को बेहतर सेवाएं प्रदान की जा सकती हैं।

कार्यशाला में ट्रिपल आईटी के संचालक एवं कुलपति प्रोफेसर डॉ. ओम प्रकाश व्यास ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग और उसके संभावित लाभों पर विस्तार से जानकारी दी। इसके अलावा एनआईसी छत्तीसगढ़ के संयुक्त संचालक श्रीकांत पाण्डे ने साइबर सुरक्षा पर अपने विचार साझा किए। संयुक्त संचालक श्री अभिजीत कौशिक, श्री उपेन्द्र सिंह सहित अन्य आईटी विशेषज्ञों ने भी प्रतिभागियों को विभिन्न तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी।

कार्यशाला में राज्य के विभिन्न जिलों से आए जिला सूचना विज्ञान अधिकारियों तथा राज्य स्तरीय अधिकारियों के बीच नागरिक सेवाओं में सूचना प्रौद्योगिकी के बेहतर उपयोग और शासन की फ्लैगशिप योजनाओं का लाभ हितग्राहियों तक शीघ्र पहुंचाने के विषय में विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

 

रायपुर ।
काटाबहरा (नगवाही) निवासी समलू मरकाम अपनी पत्नी कपूरा मरकाम, जो थायराइड कैंसर के चौथे स्टेज से पीड़ित हैं और चलने-फिरने में असमर्थ हैं, को बाइक में लिटाकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा ने तुरंत संज्ञान लिया और एम्बुलेंस बुलवाकर पीड़िता को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। साथ ही मुख्य चिकित्सा अधिकारी को महिला के समुचित उपचार के निर्देश दिए। महिला को बेहतर इलाज के लिए रायपुर स्थित मेकाहारा में भर्ती कराया जाएगा।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि 11 नवंबर को ग्राम कांटाबहरा (नगवाही) निवासी समलू मरकाम द्वारा अपनी पत्नी को बाइक में लिटाकर उपचार के लिए ले जाने की सूचना प्राप्त होने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम 12 नवंबर को उनके घर पहुंची। टीम ने पीड़िता को 108 एम्बुलेंस के माध्यम से बेहतर उपचार हेतु रायपुर भेजा, जहां मेकाहारा के कैंसर रिसर्च यूनिट में भर्ती कर विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में इलाज किया गया।

अधिकारी ने बताया कि पूर्व में गले में गांठ और दर्द की शिकायत होने पर पीड़िता को प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र रेगांखार जंगल ले जाया गया था। वहां पदस्थ चिकित्सक ने जिला स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से चर्चा कर महिला को रायपुर रेफर किया। वर्ष 2024 में करीब एक वर्ष तक महिला का इलाज रायपुर स्थित एम्स, मेकाहारा, डीकेएस अस्पताल सहित कुछ निजी अस्पतालों में चला।

इसके बाद जनवरी 2025 में महिला को एक माह के लिए मुंबई स्थित टाटा मेमोरियल अस्पताल में भर्ती कर उपचार कराया गया। उपचार उपरांत उन्हें घर लाया गया, लेकिन परेशानी दोबारा बढ़ने पर 12 नवंबर 2025 को स्वास्थ्य विभाग द्वारा उन्हें फिर रायपुर ले जाया गया। 12-13 नवंबर को मेकाहारा तथा 14 से 19 नवंबर 2025 तक एम्स में भर्ती कर कीमोथेरेपी दी गई। 20 नवंबर को उन्हें घर लाया गया, जहां वे स्वास्थ्य लाभ ले रही थीं।

वर्तमान में महिला की तबीयत पुनः बिगड़ने पर उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें रायपुर में भर्ती कर आगे का उपचार कराया जाएगा।

दुर्ग/ राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर जिले के सभी 300 ग्राम पंचायतों एवं उनके आश्रित ग्रामों में विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया गया। इन ग्राम सभाओं में ‘नवा तरिया आय के जरिया’, जनगणना, प्रधानमंत्री आवास योजना सहित अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।

जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री बजरंग कुमार दुबे द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकारियों को ग्राम सभाओं में अनिवार्य रूप से शामिल होने के निर्देश दिए गए थे, जिसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में ग्रामीणों की सहभागिता देखने को मिली।

ग्राम सभाओं में ग्राम पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से ‘संपदा’ ऐप में परिसंपत्तियों का अपलोड, ‘मोर गांव मोर पानी’ महाअभियान के अंतर्गत जल संरक्षण एवं आजीविका संवर्धन, तथा ‘नवा तरिया आय के जरिया’ जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही जनगणना के लिए स्वयं गणना पत्रक भरने की प्रक्रिया एवं उससे संबंधित जानकारियों के प्रति ग्रामीणों को जागरूक किया गया।

कलेक्टर दुर्ग श्री अभिजीत सिंह द्वारा पूर्व में ही सभी ग्राम पंचायतों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। निर्देशानुसार ग्राम सभाओं में जनप्रतिनिधियों एवं सम्मानित नागरिकों को आमंत्रित कर शासन की विभिन्न योजनाओं की जानकारी साझा की गई।

मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री बजरंग कुमार दुबे ने बताया कि ग्राम सभाओं में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ अंतर्गत लखपति दीदियों एवं उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों का सम्मान किया गया। साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) एवं महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत जल संरक्षण एवं आजीविका बढ़ाने के उपायों पर ग्रामीणों से सुझाव लिए गए।

इसी क्रम में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में संचालित “मोर गांव मोर पानी महाअभियान” के अंतर्गत एक अभिनव पहल की गई है। इसके तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत में पंचायत भवन की दीवारों पर गांव के जलस्तर (वॉटर लेवल) की जानकारी प्रदर्शित की जा रही है, जिससे आम नागरिक अपने क्षेत्र के भू-जल स्तर से अवगत हो सकें।

‘जल-दूत’ मोबाइल ऐप के माध्यम से जलस्तर से संबंधित आंकड़े संकलित कर पोर्टल पर अपलोड किए जा रहे हैं तथा एकरूपता के साथ दीवार लेखन कार्य किया जा रहा है। इस पहल से ग्रामीणों में जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन एवं भू-जल पुनर्भरण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।

ग्राम पंचायत रसमड़ा में आयोजित ग्राम सभा में भी ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। ग्राम सभा में सरपंच श्रीमती मोतीराम निषाद, उपसरपंच बालकिशन निषाद, ग्राम पंचायत सचिन कमिनी चंद्राकर, पंच बसंत निर्मलकर, कौशल्या साहू, संजू कुमार निषाद एवं प्रीति शिक्का सहित अन्य ग्रामीण उपस्थित रहे।

उल्लेखनीय है कि 73वें संविधान संशोधन के तहत पंचायती राज व्यवस्था को संवैधानिक दर्जा प्राप्त है। प्रत्येक वर्ष 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मनाया जाता है। जिले के ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे ग्राम सभाओं में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेकर योजनाओं का लाभ उठाएं तथा अपने गांव के विकास में सक्रिय सहभागिता निभाएं।

 

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नई दिल्ली | 

भारतीय राजनीति के गलियारों में आज उस वक्त हड़कंप मच गया जब आम आदमी पार्टी (AAP) के किले में अब तक की सबसे बड़ी सेंध लगी। राज्यसभा में पार्टी के 10 सांसदों में से 7 ने बागी रुख अख्तियार करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। इस बड़े राजनीतिक उलटफेर का नेतृत्व पार्टी के कद्दावर नेता राघव चड्ढा कर रहे हैं।

दो-तिहाई का जादू: दलबदल कानून से बचाव

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राघव चड्ढा ने स्पष्ट किया कि यह केवल कुछ सांसदों का जाना नहीं, बल्कि विधिवत 'विलय' है।

संवैधानिक ढाल: चूंकि अलग होने वाले सांसदों की संख्या कुल संख्या (10) की दो-तिहाई (70%) है, इसलिए संविधान की दसवीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) के तहत इन सांसदों की सदस्यता पर खतरा कम रहने की संभावना है।

शक्ति प्रदर्शन: इस कदम से राज्यसभा में AAP की ताकत अब सिमट कर केवल 3 सांसदों तक रह गई है।

भाजपा का दामन थामने वाले दिग्गज चेहरे

भाजपा में शामिल होने वाले सात सांसदों की सूची ने राजनीतिक विशेषज्ञों को चौंका दिया है:

राघव चड्ढा (नेतृत्वकर्ता)

संदीप पाठक (संगठन के रणनीतिकार)

अशोक मित्तल

स्वाति मालीवाल

हरभजन सिंह (पूर्व क्रिकेटर)

विक्रमजीत सिंह साहनी

राजेंद्र गुप्ता

बगावत की पटकथा: आखिर क्यों टूटी पार्टी?

सूत्रों की मानें तो इस बड़े विद्रोह की नींव कुछ दिन पहले ही रखी गई थी। राघव चड्ढा को राज्यसभा में उप-नेता के पद से हटाकर उनकी जगह अशोक मित्तल को नियुक्त करना इस पूरे घटनाक्रम का तात्कालिक कारण माना जा रहा है। पार्टी के भीतर पद और प्रतिष्ठा को लेकर पनपा यह असंतोष आज एक बड़े विभाजन के रूप में सामने आया।

AAP का पलटवार: 'पंजाब के साथ गद्दारी'

इस घटनाक्रम के बाद आम आदमी पार्टी ने हमलावर रुख अपना लिया है। पार्टी नेतृत्व ने इसे लोकतंत्र की हत्या और जनादेश का अपमान बताया है:

"यह पंजाब की जनता के पीठ में छुरा घोंपने जैसा है। जो लोग छोड़कर गए हैं, वे पंजाब के हितों के लिए 'गद्दार' साबित हुए हैं।" > — संजय सिंह, सांसद (AAP)

भगवंत मान: पंजाब के मुख्यमंत्री ने इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए इसे अनैतिक बताया है।

अरविंद केजरीवाल: दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया के जरिए भाजपा पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा ने एक बार फिर पंजाबियों के साथ "धक्का" (अन्याय) किया है।

निष्कर्ष

2026 का यह घटनाक्रम न केवल आम आदमी पार्टी के भविष्य के लिए एक बड़ी चुनौती है, बल्कि राज्यसभा के समीकरणों को भी पूरी तरह बदलने वाला है। अब देखना यह होगा कि क्या सदन में इन सांसदों की सदस्यता बरकरार रहती है या कानूनी पेचीदगियां नया मोड़ लेकर आएंगी।

विशेष रिपोर्ट

भिलाई/दुर्ग: किसी भी नगर निगम की 'शहरी सरकार' का अस्तित्व जनसुविधाओं और पारदर्शिता की नींव पर टिका होता है। पीडब्ल्यूडी, स्वास्थ्य और बिजली जैसे विभाग अक्सर चर्चा में रहते हैं, लेकिन वर्तमान में बाघमार सरकार का बाजार विभाग भ्रष्टाचार और अवैध वसूली का नया 'कमीशन केंद्र' बनता जा रहा है। सवाल यह है कि इस लूट की जड़ में आखिर कौन है? निगम प्रशासन के अधिकारी अभ्युदय मिश्रा, जनप्रतिनिधि शेखर चंद्राकर, या फिर खुद महापौर अलका बाघमार की चुप्पी?

पार्किंग के नाम पर खुली लूट: बोर्ड गायब, वसूली बेहिसाब

बाजार विभाग की कार्यप्रणाली पर सबसे बड़ा कलंक इंदिरा मार्केट की पार्किंग व्यवस्था है। नियम कहते हैं कि निगम द्वारा तय शुल्क की पट्टिका (बोर्ड) सार्वजनिक रूप से लगनी चाहिए, ताकि जनता को पता चले कि उन्हें कितना भुगतान करना है। बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा महीनों से बोर्ड लगाने का आश्वासन दे रहे हैं, लेकिन धरातल पर सन्नाटा है।

इस सन्नाटे की आड़ में ठेकेदार जनता से दो गुनी-तीन गुनी वसूली कर रहे हैं। क्या यह महज प्रशासनिक लापरवाही है या फिर जनता की जेब से निकलने वाले इस अतिरिक्त पैसे का एक हिस्सा विभाग के गलियारों तक पहुँच रहा है? अधिकारी की निष्क्रियता उनकी कार्यक्षमता पर नहीं, बल्कि उनकी निष्ठा पर सवाल खड़ा करती है।

मौन 'प्रभारी': कर्तव्य से विमुख शेखर चंद्राकर

जनप्रतिनिधि जनता और प्रशासन के बीच की कड़ी होते हैं। बाजार प्रभारी के रूप में शेखर चंद्राकर को एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन भ्रष्टाचार के इतने गंभीर मामलों पर उनका 'मौन' रहस्यमयी है।

क्या प्रभारी जी इतने 'निष्क्रिय' हैं कि उन्हें अपने विभाग की लूट दिखाई नहीं दे रही?

या फिर यह मौन किसी बड़े 'राजनीतिक संरक्षण' और 'आर्थिक साझेदारी' का हिस्सा है?

चुनावी समय में जनता के सामने हाथ जोड़ने वाले प्रतिनिधि अगर कुर्सी मिलते ही ठेकेदारों के हितों के रक्षक बन जाएं, तो यह जनता के जनादेश के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात है।

प्रदेश सरकार के 'सुशासन' पर बाघमार सरकार का 'दाग'

एक तरफ प्रदेश की वर्तमान सरकार नक्सलियों के खात्मे, महिला सुरक्षा और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के लिए सराही जा रही है। बड़े-बड़े अधिकारियों पर गाज गिर रही है। लेकिन उसी प्रदेश की नाक के नीचे चल रही बाघमार सरकार अपनी ही छवि को धूमिल करने में लगी है।

महापौर अलका बाघमार एक तरफ विकास के दावे करती हैं, वहीं दूसरी तरफ उनकी नाक के नीचे उनके जिम्मेदार अधिकारी और पार्षद जनता को लूटने की खुली छूट दे रहे हैं। सामान्य सभा में मामला उठने के बावजूद कार्रवाई न होना यह सिद्ध करता है कि नगर निगम प्रशासन आम जनता के बजाय ठेकेदारों के लिए 'कल्याणकारी' बना हुआ है।

 पेवर ब्लॉक में विकास ढूँढती महापौर, बदहाली में सिसकती जनता

विडंबना देखिए, जिस जनता ने भरोसा कर अलका बाघमार को सत्ता सौंपी, आज वही जनता अवैध कब्जों और ठेकेदारों की मनमानी से त्रस्त है। महापौर पेवर ब्लॉक की गुणवत्ता में भ्रष्टाचार तलाश रही हैं, जबकि उनके बाजार विभाग ने पूरी व्यवस्था को ही भ्रष्टाचार के पेवर ब्लॉक से ढक दिया है।

अगर समय रहते इस 'सफेदपोश' लूट पर लगाम नहीं कसी गई, तो जनता आने वाले समय में न केवल इस शहरी सरकार से हिसाब मांगेगी, बल्कि इसका खामियाजा उस प्रदेश सरकार को भी भुगतना पड़ सकता है जिसकी साफ-सुथरी छवि पर ये स्थानीय कारिंदे कालिख पोत रहे हैं।

 

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