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सेहत / शौर्यपथ / अक्सर हेल्दी फूड का सेवन हम यह सोचकर किसी भी समय कर लेते हैं कि यह तो सेहत के लिए अच्छा ही होगा। लेकिन क्या आप जानते हैं सही खाने का सेवन गलत समय पर करने से आपकी सेहत को फायदा नहीं नुकसान होता है। आइए जानते हैं ऐसे 5 हेल्दी फूड जिनका गलत समय पर सेवन करने से सेहत को होता है भारी नुकसान।
खाली पेट केला-
केला आपकी सेहत और खूबसूरती दोनों का ध्यान रखता है। बावजूद इसके खाली पेट केले का सेवन करना आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। खाली पेट केला खाने से शरीर की ऊर्जा खत्म होने के साथ व्यक्ति इंटेस्टाइनल सिंड्रोम और दस्त जैसी परेशानी का सामना कर सकता है। अगर आप केले का सेवन ब्रेकफास्ट में करना चाहते हैं तो उसका शेक बनाकर पिएं।
रात को चावल खाना -
चावल में कार्बहाइड्रेट की मात्रा अधिक होने की वजह से यह पचने में लंबा समय लेते हैं। इसके अलावा इसमें मौजूद हाई कैलोरी आपके बढ़ाते वजन का कारण भी बन सकती है।
ज्यादा गर्म दूध का सेवन-
दूध में मौजूद लैक्टोज की अधिक मात्रा उम्र बढ़ने के साथ इसके पचान में दिक्कत पैदा करती है। हल्के गर्म दूध का सेवन शाम को करने से रात को नींद अच्छी आती है।
खाने से पहले दही का सेवन-
दही में मौजूद लैक्टिक एसिड खाली पेट आपको नुकसान पहुंचा सकता है। यह आपके पेट की अम्लता को कम कर देता है। दही का सेवन रात के भोजन के बाद और सोने से एक घंटे पहले करने से शरीर में प्रोटीन की मात्रा बढ़ती है और मांसपेशियों का विकास होता है।
रात के भोजन में डबल चीज फूड-
टोस्ट हो या पिज्जा चीज के बिना दोनों का ही स्वाद अधूरा है। पर क्या आप जानते हैं गलत समय पर चीज का सेवन आपके पेट को नुकसान पहुंचा सकता है। चीज में फैट की मात्रा अधिक होने की वजह से इसे पचाना आसन नहीं होता। यही वजह है कि चीज का सेवन रात या शाम को करने से बचना चाहिए।
शौर्यपथ / ऑयली स्किन वाले लोग जानते हैं कि वो हर ब्यूटी प्रॉडक्ट आंख बंद करके इस्तेमाल नहीं कर सकते क्योंकि घरेलू हो या बाजार के ब्यूटी ट्रिक्स उन्हें लगभग सारी ही चीजें फायदे की जगह साइडइफेक्ट्स दे देती हैं। ऐसे में कुछ भी इस्तेमाल करने से पहले वो काफी सोच-विचार करते हैं। आपकी या आपके किसी दोस्त की भी ऑयली यानी तैलीय त्वचा है, तो आप इन घरेलू फैसपैक को उन्हें सजेस्ट कर सकते हैं, जिससे कि उनके चेहरे पर नेचुरल निखार आ सके और वो भी बिना साइड इफेक्ट्स के-
मुल्तानी मिट्टी फैसपैक
मुल्तानी मिट्टी ऐसी चीज है जिसे आप बस पानी या गुलाब जल के साथ भी घोलकर हर दिन चेहरे पर लगाएं, तो फेस पर तेल आने की समस्या दूर होने लग जाएगी। वैसे इस पैक के असर को और बढ़ाना चाहते हैं तो इसमें नींबू का रस और दही मिलाया जा सकता है। आप इस फैसपैक को गर्मियों में इस्तेमाल करेगी, तो इसका असर ज्यादा होगा।
खीरे का फैसपैक
खीरे को कद्दूकस कर लें और उसमें एक टी-स्पून नींबू का रस मिलाएं। इस मिक्स को फ्रिज में रख दें और ठंडा हो जाने पर स्किन पर लगाएं। चाहे तो आप इसे आइस ट्रे में डालकर जमा सकती हैं और फिर क्यूब्ज से चेहरे की मसाज कर सकती हैं। ये दोनों तरीके आपको ऑयली स्किन से छुटकारा दिलाने के साथ ही पोर्स के साइज को भी छोटा करने में मदद करेंगे।
नीम फैसपैक
आपको नीम की पत्तियां धोकर पीस लेनी है, इसके बाद इसमें नीबू का रस मिला लें। आप इसे रोजाना न लगाएं बल्कि हफ्ते में तीन से चार बार लगा सकते हैं। इससे आपके चेहरे पर जितने भी दाग-धब्बे हैं, वो दूर हो जाएंगे। साथ ही दिनों-दिन आपका चेहरा निखरता जाएगा।
मसूर दाल फैसपैक
दो चम्मच मसूर की दाल का पाउडर लें और उसमें एक चम्मच दही व गुलाब जल मिलाएं। इस पैक को अच्छे से मिक्स करने के बाद चेहरे पर लगाएं। यह न सिर्फ ऑयली स्किन की समस्या को दूर करेगा बल्कि स्किन भी ज्यादा सॉफ्ट बन जाएगी।
सेहत / शौर्यपथ /कोरोनाकाल में घर से लेकर ऑफिस तक के काम का दबाव बढ़ गया है। ऐसे में रात में बच्चों को सुलाने में मशक्कत करनी पड़े तो मन में खीज पैदा होना लाजिमी है। अगर काफी देर तक घुमाने-टहलाने और लोरी सुनाने के बाद भी आपके लाडले की आंखों में नींद नहीं भरती तो परेशान मत होइए। लंदन के मशहूर मसाज विशेषज्ञ फिलिप डेविस ने मालिश की ऐसी विधि सुझाई है, जिससे आपका बच्चा मिनटों में नींद के आगोश में चला जाएगा।
मां-बाप की मशक्कत-
-मां-बाप को बच्चे के जन्म के शुरुआती एक साल में 04 घंटे 44 मिनट की औसत नींद मिलती है
-50 रातों की नींद गंवाने के बराबर है यह आंकड़ा, स्वस्थ वयस्कों को आठ घंटे रोजाना सोना चाहिए
-54 मिनट औसतन रोजाना बच्चे को सुलाने में लगते हैं, तीन बार औसतन रात में उठता है बच्चा
-02 मील रोजाना चलना-फिरना होता है मां-बाप का बच्चे को बहलाने, फुसलाने, सुलाने की प्रक्रिया में
पूरे शरीर में लगाएं तेल-
-सरसों, नारियल या जैतून का तेल लें, सिर से लेकर पांव तक हल्के हाथों से हर एक अंग में लगाएं
-अब ऊपर से नीचे की तरफ धीमी गति से हाथ फिराते हुए 10 से 15 मिनट तक बच्चे की मालिश करें
बातों में उलझाए रखें-
-मसाज करते समय चेहरे पर मुस्कराहट जरूर बनाए रखें
-बच्चे से धीमे स्वर और तुतलाती भाषा में प्यार-भरी बातें करें
-तेज मालिश करने से बचें, बच्चा रोए तो उस पर चिल्लाएं नहीं
खास जगहों पर मसाज जरूरी-
-नाक का ऊपरी हिस्सा : दोनों भौहों के बीच नाक के शुरुआती हिस्से पर अंगूठे और तर्जनी उंगली से हल्की मालिश करें। बच्चे का मन शांत करने में मदद मिलती है।
-हथेली : दोनों हथेलियों पर धीमे-धीमे से हाथ फिराएं। पांचों उंगलियों के बीच के स्थान पर कम से कम 30 सेकेंड तक हल्की मसाज दें। दांत दर्द की समस्या दूर होगी।
-पेट : दर्द, गैस, कब्ज की समस्या से राहत दिलाने और पाचन तंत्र को मजबूत बनाने के लिए पेट पर बाईं से दाईं ओर गोलाई में हल्के हाथ से पांच मिनट तक मसाज करें।
-पंजे : अंत में बच्चे के दोनों पैरों के पंजे अपने हाथों में लें। अब पंजे के बीच के हिस्से को अंगुठे से 10 से 15 सेकेंड के लिए दबाएं। उसका मस्तिष्क पूरी तरह से शांत हो जाएगा।
मन शांत करने में मददगार-
-हल्के हाथों की मालिश लव हार्मोन ‘ऑक्सिटोसिन’ का स्तर बढ़ाने के साथ ही स्ट्रेस हार्मोन ‘कॉर्टिसोल’ का उत्पादन घटाने में कारगर
-इससे बच्चे के मस्तिष्क में मौजूद अतिरिक्त ऊर्जा के शांत पड़ने से तन-मन को सुकून महसूस होता है, शरीर में सुस्ती भी छाती है
गुनगुना दूध पिलाना भी फायदेमंद-
-सोने-जगने का समय तय करें, उसे रोज अमल में भी लाएं
-रात में बिस्तर पर आने के बाद बच्चे को गुनगुना दूध पिलाएं
-कमरा हल्का ठंडा रखें, मुलायम गद्दे पर सुलाएं, लोरी सुनाएं
सेहत / शौर्यपथ / रक्तचाप बढ़ने के डर से एकदम फीका खाना खाते हैं? अगर हां तो संभल जाइए। नमक के सेवन में जरूरत से ज्यादा कटौती संक्रामक रोगों का सबब बन सकती है। लंदन स्थित रॉयल फ्री हॉस्पिटल का हालिया अध्ययन तो कुछ यही बयां करता है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक नमक की अति की तरह ही, इसकी कमी भी बुरी है। दरअसल, लंबे समय तक कम मात्रा में नमक खाने से शरीर में ‘इंटरल्यूकिन-17’ का उत्पादन ठप पड़ जाता है। ‘इंटरल्यूकिन-17’ एक तरह की श्वेत रक्त कोशिका है, जो विषाणुओं को पहचानने और उन्हें नष्ट करने में प्रतिरोधक तंत्र की मदद करती है। इसकी कमी से इनसान संक्रामक रोगों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है।
किडनी रोगियों के लिए घातक-
-अध्ययन दल में शामिल प्रोफेसर जैक पमबेरटॉन-व्हिटली की मानें तो किडनी रोगियों को चिकित्सकीय सलाह के बगैर खाने में नमक की मात्रा नहीं घटानी चाहिए। खासकर ‘जिटेलमैन सिंड्रोम’ और ‘बार्टर सिंड्रोम’ से जूझ रहे मरीजों को। दरअसल, इन दोनों ही बीमारियों में किडनी से सोडियम छनने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। यही वजह है कि इनकी जद में आए मरीजों को बार-बार फंगल और मूत्र संक्रमण से जूझना पड़ता है।
डायबिटीज के मरीज भी रहें सतर्क-
व्हिटली ने बताया कि डायबिटीज रोगी या फिर थायरॉयड और डिप्रेशन के इलाज में कारगर दवाएं खाने वाले मरीजों को बार-बार पेशाब लगने की शिकायत सता सकती है। इससे उनके शरीर में सोडियम का स्तर घटने का जोखिम रहता है। सोडियम की कमी चक्कर, कमजोरी, सुस्ती, थकान और भ्रम की शिकायत को जन्म दे सकती है। अध्ययन के नतीजे ‘जर्नल नेचर कम्युनिकेशन्स’ के हालिया अंक में प्रकाशित किए गए हैं।
शरीर को कितनी जरूरत-
-स्वस्थ वयस्कों को रोजाना 2300 मिलीग्राम अधिकतम सोडियम का सेवन करना चाहिए
-अमेरिकी सीडीसी के मुताबिक 3400 मिलीग्राम से ज्यादा सोडियम खा रहे औसत वयस्क
ये तीन खतरे भी मौजूद-
1.सोडियम की मात्रा में अत्यधिक कमी इंसुलिन के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने का सबब बन सकती है, जिससे ब्लड शुगर बढ़ने लगता है।
2.शरीर के विभिन्न अंगों में खून की आपूर्ति करने के लिए हृदय को सोडियम की जरूरत पड़ती है, इसकी कमी से हार्ट फेल होने का खतरा रहता है।
3.विभिन्न अध्ययनों में देखा गया है कि सोडियम का स्तर घटने से बैड कोलेस्ट्रॉल और ट्राईग्लिसराइड का स्तर बढ़ता है, जो दिल के लिए घातक है।
सेहत / शौर्यपथ घर में अकेले रहने और नकरात्मक सोच के चलते मस्तिष्क पर अधिक जोर देने पर अल्जाइमर बीमारी होने की संभावना रहती है। यह बीमारी बुजुर्गों में अधिक मिलती है। इससे दूर रहने के लिए व्यक्ति को सभी माहौल में रहने की आदत होनी चाहिए। साथ ही लोगों से संपर्क रखना चाहिए।
उम्र बढ़ने के साथ ही तमाम तरह की बीमारियां हमारे शरीर को निशाना बनाना शुरू कर देती हैं। वहीं अल्जाइमर भी इसमें प्रमुख बीमारी है, यह बुजुर्ग लोगों में देखने को मिलती है। उम्र बढ़ने के साथ-साथ याद करने की क्षमता कम होती रहती है और बातों को भूल जाते हैं। इस बीमारी को कम करने के लिए हर साल 21 सितंबर को विश्व अल्जाइमर्स-डिमेंशिया दिवस मनाया जाता है ।
इसी के तहत 21 से 27 सितंबर तक चलने वाले राष्ट्रीय डिमेंशिया जागरूकता सप्ताह के तहत प्रदेश के हर जिले में विभिन्न कार्यक्रमों के जरिये इस बीमारी की सही पहचान और उससे बचाव के उपायों के बारे में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
कोलंबिया अस्पताल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. नीरज अग्रवाल ने बताया कि अल्जाइमर की बीमारी में याददाश्त और सोचने की क्षमता खत्म हो जाती है। महामारी के समय में जो लोग अल्जाइमर से पीड़ित हैं उन्हें ज्यादा देखभाल की होती है। उन्हे हाथ की सफाई, मास्क पहनने, सामाजिक दूरी को बनाए रखने के लिए याद दिलाना जरूरी है।
महामारी ने लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित किया है। वे इस वजह से पोस्ट ट्रॉमाटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीएसटीडी) से पीड़ित हो गए हैं। इसकी वजह से अल्जाइमर से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ सकती है। अर्टफिसियल इंटेलिजेंस जैसी कई तकनीक हैं, जिससे अल्जाइमर की बीमारी का इलाज बहुत ही प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। इस बीमारी के में परिवार और समाज के लोगों का सहयोग बेहद जरूरी है।
सेहत / शौर्यपथ / गुस्सा, चिड़चिड़ापन और धीरे-धीरे रोजमर्या की छोटी-छोटी चीजें भूलने लगना, ये सभी अल्जाइमर के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। अल्जाइमर एक तरह का मानसिक विकार है। इस बीमारी में दीमाग की कोशिकाओं पर असर पड़ता है।
चिकित्सकों के मुताबिक शराब और धूम्रपान करने वालों में इसके होने का खतरा ज्यादा रहता है। यही कारण है कि अब युवा वर्ग में भी ये बीमारी पाई जाने लगी है। जीवन शैली में बदलाव के कारण केवल पुरुष ही नहीं बल्कि महिलाएं भी इससे ग्रस्त पाई जाती हैं।
पारस अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. रजनीश कुमार का कहना है कि लोगों को खुलकर इस बीमारी के बारे में जागरूक करना जरूरी हो गया है। तनाव, श्रवण दोष, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, डायबिटीज और सामजिक रूप से अलग रहना इसके मुख्य कारणों में शामिल है। इसके अलावा धूम्रपान और शराब का अधिक सेवन भी इस बीमारी का खतरा बढ़ाता है।
शराब पीने से एमिलॉयड प्लेक को खत्म करने की दिमाग की कोशिकाओं की क्षमता प्रभावित होती है और ऐसे लोगों में अल्जाइमर विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है। तनावपूर्ण जीवन और कई कामों के बोझ की वजह से यह बीमारी होने पर याददाश्त की कमी होने लगी है।
लॉकडाउन ने मरीजों की परेशानी बढ़ाई-
कोलंबिया अस्ताल के सहालकार चिकित्सक डॉ. अपूर्वा शर्मा का कहना है कि अल्जाइमर की बीमारी एक प्रोग्रेसिव कंडीशन होती है, जिसमे मस्तिष्क की कोशिकाओं को याददाश्त, रास्ते, भाषा, ध्यान और योजना बनाने की क्षमता में कमी करता है। देखभाल करने वालों को अल्जाइमर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को क्वालिटी लाइफ प्रदान करने में मुश्किल आती है और यह तनावपूर्ण भी होता है।
उन्होंने बताया कि इस बीमारी से ग्रस्त मरीजों को विशेष देखभाल की जरूरत होती है। लॉकडाउन ने अल्जाइमर के मरीजों के लिए थोड़ी मुश्किल बढ़ा दी है। ऐसे मरीज कहीं जा नहीं सकते, किसी से मिल नहीं सकते, इस तरह से उन पर साइकोलॉजिकल दबाव बढ़ गया है।
हमें जरुरत है की हम इन मरीजों को ज्यादा से ज्यादा समय दें ताकि वो अच्छे से रिकवरी कर सकें। उन्होंने बताया कि कोविड-19 का समय खासकर वृद्ध मरीजों के लिए बहुत ही मुश्किल भरा रहा है और उनको डायगनोसिस करने में बहुत ही कमी आई है।
65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में ये दिक्कत ज्यादा-
आर्टेमिस अस्पताल के6 न्यूरोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. सुमित सिंह का कहना है कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, याददाश्त प्रभावित होती जाती है, लेकिन विस्मृति किसी भी उम्र में हो सकती है। अधिकांश लोगों में भूलने की समस्या उम्र के साथ-साथ बढ़ती जाती है।
65 वर्ष से अधिक उम्र के कम से कम आधे से अधिक लोगों का कहना है कि अपनी युवावस्था की तुलना में अब वे चीजें ज्यादा भूलने लगे हैं। उन्हें वृद्धावस्था का अनुभव होने लगता है, भूलने की यह समस्या उम्र बढऩे के कारण हो रही हो, यह जरूरी नहीं, क्योंकि वृद्धावस्था के दौरान पर्याप्त दिमागी कसरत नहीं होती है। इसलिए, दिमाग और शरीर दोनों को सक्रिय बनाए रखने वाली गतिविधियों में हिस्सा लेने से विस्मृति को कम किया जा सकता है।
उनके अनुसार यदि आपको या किसी और को याददाश्त से जुड़ी कोई गंभीर समस्या महसूस होती है तो अपने डॉक्टर से बात करें। जो लोग इससे पीड़ित हैं उन्हें समस्या को आगे बढऩे से रोकने के लिए पहले से ही कदम उठाने चाहिए। रक्तचाप को नियंत्रित करना, कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज के उच्च स्तर को नियंत्रित करना और उसका इलाज करना और धूम्रपान से परहेज करने जैसे उपाय करके इससे बचा जा सकता है।
अल्जाइमर के लक्षण-
-चिड़चिड़ापन
-सोचने की क्षमता कम होना
-याददाश्त कम हो जाना
-उदासीनता
-भटकाव
-व्यवहार में परिवर्तन
खेल / शौर्यपथ / मार्कस स्टोइनिस (53 रन और दो विकेट) के जबरदस्त ऑलराउंड खेल और तेज गेंदबाज कगिसो रबाडा के सटीक सुपर ओवर (दो विकेट) की बदौलत दिल्ली कैपिटल्स ने किंग्स इलेवन पंजाब को रविवार को सांसों को रोक देने वाले आईपीएल-13 के बेहद रोमांचक मुकाबले में सुपर ओवर में पराजित कर दिया। पंजाब की टीम रबाडा के सुपर ओवर में दो रन ही बना सकी और उसने कप्तान लोकेश राहुल तथा ग्लेन मैक्सवेल के विकेट गंवा दिए। दिल्ली को जीत के लिए तीन रन बनाने थे और उसने बिना कोई विकेट खोए ये रन बना लिए। मोहम्मद शमी के पास सुपर ओवर में बचाने के लिए कुछ नहीं था और पंजाब को निराश होना पड़ा। हार के साथ ही इस मैच में किंग्स इलेवन पंजाब के नाम एक शर्मनाक रिकॉर्ड दर्ज हो गया है।
इस मैच में सुपर ओवर में पहले बल्लेबाजी करते हुए किंग्स इलेवन पंजाब ने दिल्ली कैपिटल्स को जीत के लिए मात्र तीन रन का लक्ष्य दिया। इसी के साथ किंग्स इलेवन पंजाब सुपर ओवर में दूसरी टीम को सबसे कम रनों का लक्ष्य देने वाली टीम बन गई है। इससे पहले मिशेल जॉनसन ने राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ और जसप्रीत बुमराह ने गुजरात लॉइंस के खिलाफ सुपर ओवर में 6 रन दिए थे जिससे टीम को सात रनों का लक्ष्य मिला था।
इस मैच में दिल्ली ने मार्कस स्टोइनिस की मात्र 21 गेंदों पर सात चौकों और तीन छक्कों की मदद से बनी 53 रन की विस्फोटक अर्धशतकीय पारी के दम पर 20 ओवर में आठ विकेट पर 157 रन का चुनौतीपूर्ण स्कोर बनाया जबकि पंजाब ने 20 ओवर में आठ विकेट पर 157 रन बनाए और मैच टाई हो गया। मैच अब फैसले के लिए सुपर ओवर में चला गया जिसमें दिल्ली ने आसानी से जीत हासिल कर ली। स्टोइनिस ने आखिरी ओवर को पांचवीं गेंद पर मयंक अग्रवाल को आउट किया और अंतिम गेंद पर क्रिस जॉर्डन को आउट कर स्कोर टाई करा दिया। अग्रवाल ने 60 गेंदों पर सात चौकों और चार छक्कों की मदद से 89 रन बनाए लेकिन उनका पांचवीं गेंद पर आउट होना निणार्यक रहा। स्टायरिस ने यहीं से मैच का पासा पलट दिया।
मनोरंजन / शौर्यपथ / बॉलीवुड एक्ट्रेस करीना कपूर खान आज अपना 40वां जन्मदिन मना रही हैं। ऐसे मौके पर उन्होंने छोटी-सी पार्टी रखी थी, जिसमें परिवार के लोग शामिल रहे। ग्लैमर और स्टाइल क्वीन करीना कपूर खान इस पार्टी में बिना मेकअप के नजर आईं। बहन करिश्मा कपूर ने पार्टी की कुछ फोटोज शेयर करते हुए करीना कपूर खान को बर्थडे विश किया है। उन्होंने कैप्शन में लिखा, ‘बर्थडे गर्ल, हम सभी तुमसे बहुत प्यार करते हैं। हैप्पी बर्थडे।’
करिश्मा कपूर ने जो फोटोज शेयर की हैं उसमें सैफ अली खान, पिता रणधीर कपूर, मां बबीता कपूर और कुछ नजदीकी रिश्तेदार और दोस्त नजर आ रहे हैं। इसके अलावा करीना कपूर खान केक के साथ पोज देती भी नजर आ रही हैं।
करीना कपूर खान सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव हैं। वह अपनी पर्सनल लाइफ से लेकर प्रोफेशनल लाइफ के अपडेट्स फैन्स संग शेयर करती रहती हैं। बर्थडे से एक दिन पहले करीना कपूर ने अपनी एक ब्लैक एंड व्हाइट फोटो शेयर करते हुए लिखा था, ‘जैसे ही मैं अपना 40वें साल में एंटर कर रही हूं। मैं बैठना चाहती हूं और प्यार करना, हंसना, माफ करना, भूलना और सबसे महत्वपूर्ण बात प्रार्थना करना और मुझे ताकत देने के लिए धन्यवाद कहना चाहती हूं। हाय! बिग 40, इसे बड़ा बनाना।’
बताते चलें कि करीना कपूर खान और सैफ अली खान दोबारा पैरेंट्स बनने वाले हैं। करीना इस समय अपना प्रेग्नेंसी पीरियड एंजॉय कर रही हैं। खुद को फिट रख रही हैं। करीना कपूर खान फिल्म लाल सिंह चढ्डा में नजर आने वाली हैं। हाल ही में खबर आई थी कि फिल्म में करीना के बेबी बंप को छिपाने के लिए वीएफएक्स का इस्तेमाल किया जाएगा। करीना को 'लाल सिंह चड्ढा' के लिए अभी 100 दिन की शूटिंग करनी है। ऐसे में उम्मीद है कि वह सितंबर या फिर अक्टूबर में फिल्म की टीम को जॉइन करेंगी और अपने हिस्से का शूट पूरा करेंगी।
24 घंटे में ही निरस्त हो गई नगर पंचायत उतई के एल्डरमैन कि सूची...रिसाली निगम के नियुक्ती से भी कार्यकर्ता नाराज...
रिसाली निगम की सूचि पर भी उठ रहे सवाल
दुर्ग ग्रामीण / शौर्यपथ / प्रदेश के गृह मंत्री साहू के विधानसभा के अंतर्गत एक नगर पंचायत और एक नगर निगम आते है जिसमे उतई पंचायत में एल्डरमैन के नाम की घोषणा होते ही जबरदस्त विरोध के कारण मात्र 24 घंटे के अन्दर ही जारी सूचि को शासन को निरस्त करना पड़ा . सूचि के निरस्त होते ही ये तो साफ़ हो गया कि स्थानीय विधायक के द्वारा किये गए नामो की अनुशंषा से कार्यकर्ता नाराज है . नामो की अनुशंषा तो स्थानीय विधायक और प्रदेश के गृह मंत्री ने ही की होगी किन्तु इन नामो को सरकाने वाले को क्या ये नहीं मालूम था कि इन नामो का विरोध होगा . जब से कांग्रेस सत्ता में आयी है तब से ही कई जमीनी कार्यकर्ता नाराज चल रहे है और लगातार उपेक्षा होने की बात कर रहे है पुराने कार्यकर्ताओ के अंदर का गुस्सा सूचि जारी होने के बाद आखिरकार फुट ही पडा और जबरदस्त विरोध के चलते सूचि जारी हो गयी . सूचि में नाम परिवर्तन तो हो जाएगा और हो सकता है इस बार जमीनी कार्यकर्ताओ को पुराने कार्यकर्ताओ को मौका मिल जाए किन्तु जो हुआ उसे वापस नहीं बदला जा सकता . जो ग़ुस्सा कार्यकर्ताओ के अंदर था और जिस प्रकार विरोध हुआ उससे इस तरफ इशारा है कि स्थानीय विधायक जमीनी हकीकत को नहीं देख पा रहे है और चाटुकारों से घिरे हुए है . वर्तमान की घटना को देखने के बाद एक बात याद आयी जब स्थानीय विधायक को प्रदेश में गृह मंत्री की खुर्सी मिली तब एक कार्यकर्ता सम्मलेन में ये बात कही गयी थी गृहमंत्री साहू के द्वारा कि कोई भी कार्यकर्ता जब चाहे तब मिल सकता है क्योकि कार्यकत्र्ता की मेहनत से ही चुनाव में विजय प्राप्त हुई है इस लिए हर कार्यकर्ता की बात का सम्मान किया जाएगा तब सभा में खूब जयजयकार हुई थी किन्तु धीरे धीरे कार्यकर्ता दूर होते गए और चाटुकार नजदीक शायद इन्ही कारणों से जमीनी कार्यकर्ताओ के मन मे धीरे धीरे बगावत के सुर थे जो आज बुलंद हो गए और एक विवाद का जन्म हो गया .
ऐसी ही हालत से नवनिर्मित रिसाली निगम भी गुजर रहा है . रिसाली निगम के निर्माण का वादा गृह मंत्री साहू ने चुनाव के पूर्व किया था और वादा निभाया भी किन्तु इस वादा निभाने का ये मतलब नहीं हुआ कि अब जमीनी कार्यकर्ताओ की मर्जी का कोई ख्याल नहीं रखा जायेगा . जैसा कि देखने को मिला है सोशल मिडिया में कि किस तरह कार्यकत्र्ता तो क्या पदाधिकारी भी अपने आप को आहात महसूस कर रहे है और मंत्री जी से सवाल पुच रहे है कि कौन है ये एल्डरमैन और कब कांग्रेस में आया गए क्या जमीनी कार्यकर्ताओ का उपयोग सिर्फ चुनाव में झंडा उठाने तक के लिए किया जाता रहेगा ऐसे कई सवाल होंगे जो अभी कार्यकर्ताओ और पुराने कांग्रेसी के मन में विचरण कर रहे होंगे . आज मंत्री जीई प्रदेश के कद्द्वर मंत्री है किन्तु शायद ये भूल गए कि दुर्ग ग्रामीण विधानसभा के ये वही कार्यकत्र्ता है जो उनके लिए दिन रात मेहनत किये और चुनाव में जीत दिलाई .
इसमें कोई दो राय नहीं कि रिसाली निगम बनाने में मंत्री साहू की अहम् भूमिका रही है किन्तु कार्यकर्ताओ के बिना न पार्टी है और पार्टी के बिना कोई पद .वर्तमान में ऐसे कार्यकर्ता आहात है जो सालो से कांग्रेस के लिए मैदान में जमे रहे है इस उम्मीद में कि जब सत्ता आएगी तो सत्ता का लाभ भी मिलेगा किन्तु जैसा सोशल मिडिया में चर्चा हो रही है उससे जमीनी और पुराने कार्यकत्र्ता नाराज तो है ही आहत भी है . अब तो मंत्री जी के उपर ही निर्भर करता है कि कि रिसाली निगम के लिए ज़ारी सूचि में फेर बदल की पहल करे या रूठे कार्यकर्ताओ को मनाये जो भी हो किन्तु दुर्ग ग्रामीण कांग्रेस को जो भी करना होगा जल्द ही करना होगा चार महीने बाद रिसाली निगम में चुनाव होने वाले है ऐसे में अगर स्थिति को नहीं संभाला गया तो रिसाली निगम की सत्ता से हाँथ धोना पड़ सकता है कांग्रेस को क्योकि रिसाली क्षेत्र में भाजपा महासचिव राज्यसभा सांसद जो उनका गृह क्षेत्र भी है सक्रीय है ऐसे में वर्तमान विरोध का समाधान नहीं निकला तो निकाय चुनाव में इसके दुष्परिणाम भी सामने आ सकते है .
सोशल मिडिया पर किस तरह हो रही बात जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह उपेक्षित महसूस कर रहे कांग्रेसी कार्यकर्त्ता ...






दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग शहर में आज से फिर से जिला प्रशासन के आदेश अनुसार लॉक डाउन लगाया गया,किंतु जिलाधीश महोदय ने तर्क दिया कि महापौर सहित अन्य जनप्रतिनिधि मंडल व कुछ व्यवपारी संगठन के सलाह पर हम शहर को लॉक डाउन करने जा रहे हैं,ऐसे में मोदी आर्मी संगठन का मानना है दुर्ग शहर के महापौर स्वयं अस्वस्थ्य हैं जिन्हें फ़ूल भेंट कर हम उनके उत्तम स्वस्थ की कामना करते हैं,वरना वो ना ही उदासीन होते ना ही ऐसी सलाह जिलाधीश महोदय को देते,ज्ञात हो कि जिला प्रशासन दो सप्ताह के लिए पूर्व में भी लॉक डाउन घोषित कर चुका है,प्रदेश अध्यक्ष वरुण जोशी ने कहा शहर खुलने के बाद से महापौर जी का मुख्य काम था शहर के इन्दिरा मार्केट सहित मुख्य बाजारों व वार्डो को दिनचर्या आरम्भ होने से पूर्व और बाज़ार बन्द होने के बाद सेनेटाइज करवाते,मगर यह उनसे नहीं हुआ,शहर में बने सामाजिक भवनों को कोविड सेंटर बनाने के लिए सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों से चर्चा करते यह भी उनसे नहीं हुआ,अपनी सरकार से ही चर्चा कर शराब दुकानों को संचालन नहीं करने की मांग करते यह भी उनसे नहीं हुआ,यदपी सरकार नहीं सुनती तो जिला प्रशासन से अनुरोध करके शराब दुकानों में मास्क और सेनेटाइज अनिवार्य करवाते मगर यह भी उनसे नहीं हुआ,मगर बिना सोचे समझे उन्होंने लॉक डाउन की मांग प्रशासन से कर दी,एक परिवार का सदस्य मार्केट के दुकानों और उद्योगों में कार्य करना जाता है तो उसे मुश्किल उतना ही वेतन मिलता है जिससे उसका घर चल सके,अब लॉक डाउन लगने से क्या उन्हें उनका वेतन मिलेगा,क्या इस लॉक डाउन से कोरोना पर हम अंकुश लगा पाएंगे,जबसे यह आदेश लागू करने की घोषणा की गई बाजारों में दौगुनी भीड़ लग गई,लोगों में इस बात की भी शंका रही की दस दिनों का लॉक डाउन कहीं लंबा न हो,इसलिए शहर के हर निवासियों ने अधिक राशन लेने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग को आवश्यक नहीं समझा और प्रशासन भी बाजार में मंहगे दामों पर मिल रहे वस्तुओं पर नियंत्रण नहीं कर सका,आज छोटे व्यापारी और शहर वासी तो घर में बैठ गए मगर जब यह लॉक डाउन हटेगा तो क्या शराब दुकानों में होने वाली भीड़ पर अंकुश लगेगा शायद नहीं,हम कोरोना से लड़ने के लिए न ही सही नियत ला पाए और न ही कोई नीति बना पाए,जबकि केंद्र सरकार के गाइड लाइन के अनुसार सिर्फ हमें कंटेंटमेंट जॉन ही घोषित करना था,मगर शहर के विभिन्न वार्डो में पीड़ित मिलते गए और कोई भी वार्ड कंटेंटमेट में तब्दील नहीं किया गया,इसलिए हमें लगता है शहर के प्रथम नागरिक ही अस्वस्थ हैं तो शहर कैसे स्वस्थ होगा,इस दौरान मोदी आर्मी के वरुण जोशी, मितेश पटेल,शुभम यादव,दुर्गेश रामटेके, धीरज,यज्ञकांत यादव उपस्थित रहे!
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
