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नई दिल्ली / शौर्यपथ/ जेल से छूटने के बाद डॉक्टर कफील खान ने आज कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी से मुलाकात की. डॉक्टर कफ़ील खान की जेल से रिहाई के बाद कांग्रेस महासचिव ने कफ़ील खान और उनके परिजनों से फोन पर बातचीत कर उनका हालचाल लिया था और हरसंभव मदद का वादा किया था. कफ़ील खान ने अपने परिवार के साथ प्रियंका गांधी से मुलाकात की.
डॉक्टर कफ़ील खान दिल्ली में अपने परिवार के साथ कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी से मिले. डॉक्टर कफ़ील के साथ उनकी पत्नी और बच्चे भी प्रियंका गांधी से मिले.दिल्ली में हुई इस मुलाकात के वक्त यूपी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू और अल्पसंख्यक कांग्रेस के चेयरमैन शाहनवाज आलम मौजूद थे.
यूपी में कांग्रेस पार्टी ने डॉक्टर कफ़ील की रिहाई के लिए एक बड़ा अभियान चलाया था. पूरे सूबे में हस्ताक्षर अभियान, विरोध प्रदर्शन और पत्र लिखकर कांग्रेसियों ने डॉक्टर कफ़ील खान की रिहाई के लिए आवाज़ बुलंद की थी.
डॉक्टर कफील खान को भड़काऊ भाषण के मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तारी के बाद हाल ही में जेल से रिहा कर दिया गया. उनके कांग्रेस में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही थीं. उन्होंने कुछ दिन पहले इस पर विराम लगाते हुए कहा कि वे डॉक्टर हैं और डॉक्टर ही बने रहना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि वे कांग्रेस ही नहीं, कोई दूसरी पार्टी भी ज्वाइन करने का नहीं सोच रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किसी अन्य मामले में फंसाए जाने की आशंका के मद्देनजर मानवता के आधार पर मेरी मदद की थी लेकिन इसका यह मतलब नहीं लगाया जाना चाहिए कि मैं कांग्रेस में शामिल होने जा रहा हूं.'
नई दिल्ली / शौर्यपथ / भारत में कोरोनावायरस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. हालांकि, इसी बीच सोमवार को देश के कई राज्यों में आंशिक रूप से स्कूल खोल दिए गए. वहीं, देश में सबसे बड़ा पर्यटन स्थल ताजमहल भी पर्यटकों के लिए खोल दिया गया. मार्च में लॉकडाउन के पहले से ही ताजमहल बंद था, लेकिन 21 सितंबर यानी आज से ताजमहल एक बार फिर जनता के लिए खोल दिया गया है.
भारत में सोमवार तक कोरोना के मामले 54 लाख के पार हो चुके हैं. सबसे ज्यादा मामले वाले देशों में भारत दूसरे नंबर पर यानी बस USA से आगे है और यह स्थिति भी जल्द बदल सकती है. लेकिन मार्च से लगे लॉकडाउन के बीच लाखों लोगों का रोजगार खत्म हो गया है और लाखों लोगों की रोजी-रोटी पर बन आई है, जिसके चलते केंद्र की मोदी सरकार का फोकस अर्थव्यवस्था को खोलने पर है. पिछले कुछ महीनों में सरकार ने लॉकडाउन में लगातार छूट को बढ़ाया है और अब लगभग सबकुछ खोल दिया गया है. स्कूल-कॉलेजों को भी आंशिक रूप से और कुछ शर्तों के साथ खोल दिया गया है, हालांकि, कई राज्यों ने अभी भी स्कूलों को न खोलने का फैसला किया है.
कई लोगों का मानना है कि उन्हें अब वायरस के साथ रहने की आदत डालनी होगी. ताजमहल देखने अपने परिवार के साथ आए बैंक कर्मचारी अयूब शेख ने कहा, 'बहुत से लोगों ने लॉकडाउन के चलते अपना रोजगार खो दिया है. लोगों ने बहुत झेला और वक्त आ गया है कि अब सबकुछ पूरी तरह से खोल दिया जाए. हमें वायरस से डर नहीं लगता है. अगर हमें संक्रमण होना है तो हो जाएगा. बहुत से लोग इससे मर नहीं रहे हैं. मुझे नहीं लगता है कि ये इतनी जल्दी जाएगा, हमें इसकी आदत डाल लेनी चाहिए.'
आगरा के ताजमहल को हर साल 70 लाख से ज्यादा लोग देखने आते हैं लेकिन 17 मार्च से ही यह बंद है. अधिकारियों का कहना है कि कोविड-19 गाइडलाइंस लागू किए गए हैं. सोमवार को 200 से कुछ ज्यादा लोग ताजमहल पहुंचे थे. यहां पर रोज आने वाले पर्यटकों की संख्या 5,000 तक सीमित रखी गई है. स्पेन से आए पर्यटक ऐन्होआ पर्रा ने कहा, 'कोरोनावायरस हर देश में है. हम हर जरूरी बचाव के कदम उठा रहे हैं. हमें सावधान रहना होगा लेकिन अगर हमें संक्रमण होना है तो हो जाएगा.' वहीं एक स्थानीय कर्मचारी सतीश ने कहा कि 'ताजमहल से कितनों को रोजगार मिलता है. बिजनेस वापस शुरू कर अच्छा लग रहा है.'
नई दिल्ली/ शौर्यपथ / रेप केस में आरोपी यूपी के पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति को झटका लगा है. इलाहाबाद हाईकोर्ट के दो महीने की अंतरिम जमानत देने के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है. प्रजापति को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है. यूपी सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने यह कदम उठाया है. प्रजापति को मेडिकल ग्राउंड पर हाईकोर्ट ने अंतरिम जमानत दी थी. गत चार सितंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने पूर्व खनन मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति को अंतरिम जमानत दी है. अखिलेश यादव सरकार में मंत्री रहे प्रजापति सामूहिक दुष्कर्म के आरोप में लखनऊ जेल में बंद हैं. कोर्ट ने पांच लाख रुपये के पर्सनल बॉन्ड तथा दो जमानतदारों की शर्त के साथ उन्हें जमानत दी थी.
गायत्री प्रसाद प्रजापति ने हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में अपनी अंतरिम बेल की अर्जी दी थी. कोर्ट ने सुनवाई के बाद दो महीने की अंतरिम जमानत की मंजूरी दी. कोर्ट ने शर्त रखी थी कि वह अंतरिम जमानत के दौरान देश छोड़कर बाहर नहीं जाएंगे. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के जस्टिस वेद प्रकाश वैश्य ने जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए दो महीने की अंतरिम बेल मंजूर की थी. दो महीने बाद गायत्री प्रसाद प्रजापति को सरेंडर करना था. गायत्री प्रजापति को तीन साल में पहली बार जमानत मिली थी. इस अंतरिम जमानत के लिए गायत्री प्रजापति को तीन साल पांच महीना और 20 दिन का इंतजार करना पड़ा था. बता दें कि प्रजापति ने 15 मार्च 2017 को सरेंडर किया था.
गायत्री प्रजापति को मेडिकल ग्राउंड पर बेल की मंजूरी मिली थी. गायत्री ने अपनी एप्लिकेशन में हार्ट, इन्फेक्शन इत्यादि की दिक्कत बताई थी. यह बेल लखनऊ के गौतम पल्ली थाने में दर्ज रेप के मुकदमे में मिली थी. बताते चलें कि गायत्री प्रसाद प्रजापति इस समय अपना इलाज पीजीआई में करा रहे हैं. वहीं कोर्ट ने साफ कहा था कि जमानत पर बाहर रहने के दौरान गायत्री द्वारा किसी भी तरह से पीड़ित परिवार को न डराया जाएगा न ही धमकाया जाएगा. साथ ही किसी भी तरह से उन्हें प्रभवित नहीं किया जाएगा.
अखिलेश यादव सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे गायत्री प्रजापति के खिलाफ 2017 में सामूहिक दुष्कर्म का केस दर्ज हुआ था. केस में तीन जून, 2017 को गायत्री के अलावा छह अन्य पर चार्जशीट दाखिल की गई थी. इसके बाद 18 जुलाई, 2017 को लखनऊ की पॉक्सो स्पेशल कोर्ट ने सातों आरोपियों पर केस दर्ज करने का आदेश दिया था.
नई दिल्ली / शौर्यपथ/ केंद्र सरकार ने सोमवार को बताया कि देश में वर्ष 2017 और 2018 के दौरान पुलिस द्वारा सख्त राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत करीब 1200 लोगों को हिरासत में लिया गया था, जिनमें से 563 अभी तक हिरासत में हैं. केंद्रीय मंत्री गृह राज्य मंत्री जी. किशन रेड्डी ने राज्यसभा में एक लिखित प्रश्न के जवाब में कहा कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की वर्ष 2018 की नवीनतम प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, सभी राज्यों में से मध्य प्रदेश ने वर्ष 2017 और वर्ष 2018 में रासुका के तहत सबसे अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया और उसके बाद उत्तर प्रदेश का स्थान आता है. उन्होंने कहा कि इस सख्त कानून के तहत वर्ष 2017 में देश के विभिन्न हिस्सों में कुल 501 लोगों को हिरासत में लिया गया, इसमें से 229 को को समीक्षा बोर्ड के द्वारा छोड़ दिया गया और 272 अभी हिरासत में हैं.
इसी तरह, वर्ष 2018 में, देश भर में रासुका के तहत 697 लोगों को हिरासत में लिया गया जिसमें से 406 को समीक्षा बोर्डों द्वारा रिहा किया गया जबकि 291 हिरासत में हैं. मध्य प्रदेश में, वर्ष 2017 और वर्ष 2018 में एनएसए के तहत 795 लोगों को हिरासत में लिया गया था. समीक्षा बोर्डों द्वारा 466 लोगों को रिहा किया गया जबकि 329 हिरासत में हैं. मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में, वर्ष 2017 और वर्ष 2018 में रासुका के तहत 338 लोगों को हिरासत में लिया गया जिसमें से समीक्षा बोर्ड द्वारा 150 लोगों को रिहा कर दिया गया जबकि 188 हिरासत में हैं.
नई दिल्ली / शौर्यपथ / केंद्र सरकार ने राज्यसभा में अवैध प्रवासियों को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में सोमवार को कहा कि अवैध प्रवासी भारत में 'बहुत गुप्त तरीके से छुप-छुपाकर' आते हैं, ऐसे में उनका पता लगाना, हिरासत में लेना और फिर उन्हें वापस भेजने की 'प्रक्रिया चल रही है.' सरकार से पूछा गया था कि क्या सरकार के पास देश में अवैध प्रवासियों का कोई रिकॉर्ड है?
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में बताया कि 'अवैध प्रवासी बहुत ही गुप्त तरीके से बिना किसी वैध दस्तावेज के देश में घुसते हैं. ऐसे विदेशी नागरिकों का पता लगाने, उन्हें हिरासत में लेने और फिर उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया चल रही है.'
बता दें कि सालों की कार्रवाई के बाद बांग्लादेश से पिछले दशकों में अवैध रूप से भारत आए प्रवासियों की पहचान करने के लिए बनाए जा रहे National Register of Citizens की फाइनल लिस्ट पिछले साल सामने आई थी. इनमें लगभग 19 लाख लोगों का नाम लिस्ट से बाहर रह गए थे. केंद्र का कहना है कि जिन लोगों के नाम लिस्ट में नहीं आए हैं, उनके पास हर कानूनी रास्ता चुनने का विकल्प है और तब तक उन्हें अवैध घोषित नहीं किया जाएगा.
तेलंगाना के सांसद डॉक्टर बांदा प्रकाश ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से यह साफ करने को कहा था कि सरकार बताए कि उसके पास अवैध प्रवासियों के आंकड़े हैं या नहीं और अगर हैं तो इसकी जानकारी दे. हालांकि, मंत्रालय की ओर से कुछ विशेष सवालों के जवाब नहीं दिए गए और एक साधारण सा जवाब दिया गया कि केंद्र के पास कानून की धाराओं के तहत ऐसी शक्तियां मिली हुई हैं, जिनके आधार पर वो 'देश में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को हिरासत में लेकर वापस भेज सकता है.'
हालांकि, एनआरसी की आखिरी लिस्ट फिलहाल पड़ी हुई धूल खा रही है क्योंकि असम की सरकार ने इसमें गड़बड़ियां बताते हुए मान्यता देने से इनकार कर दिया है. असम के लिए इस लिस्ट के बड़े मायने हैं क्योंकि राज्य ने बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासियों की पहचान करने और फिर उन्हें वापस भेजने को लेकर 1979 से लेकर 1985 तक छह साल लंबा अभियान देखा है. यहां पर अगले साल अप्रैल में विधानसभा चुनाव होने हैं.
नई दिल्ली / शौर्यपथ / रबी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य को केंद्र सरकार की कैबिनेट कमेटी ने मंजूरी दे दी है. कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति ने यह मंजूरी दी है. किसानों की चिंता को देखते हुए एक महीने पहले ही न्यूनतम समर्थन मूल्य मंजूरी दे दी गई है. लोकसभा में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर किसानों से जुड़े मुद्दों पर बोलेंगे.
किसानों से जुड़े बिलों का किसान विरोध कर रहे हैं. उन्हें आशंका है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) खत्म हो सकता है. इस आशंका को दूर करने के लिए सरकार ने एक महीने पहले ही इसकी मंजूरी दे दी है.
लोकसभा में कांग्रेस के सदस्य मनीष तिवारी ने सोमवार को कहा कि संसद में पारित हुए कृषि संबंधी दो विधेयकों के कारण देश के किसानों में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद को लेकर आशंकाएं उत्पन्न हो गई हैं जिन्हें सरकार को दूर करना चाहिए. निचले सदन में शून्यकाल के दौरान इस मुद्दे को उठाते हुए तिवारी ने कहा कि अक्तूबर के आखिरी हफ्ते में धान की खरीद शुरू हो जाती है और किसानों के लिए यह महत्वपूर्ण होती है. लेकिन संसद में पारित हुए कृषि संबंधी दो विधेयकों और लोकसभा में पारित आवश्यक वस्तु से संबंधित विधेयक के कारण किसानों में एमएसपी पर खरीद को लेकर आशंकाएं उत्पन्न हो गई हैं.
नई दिल्ली / शौर्यपथ / गाजीपुर शहर के महुआबाग मोहल्ला स्थित सरकारी जमीन पर होटल बनाने के आरोप में बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी की पत्नी, उनके दोनों पुत्रों सहित 12 लोगों के विरुद्ध जिला प्रशासन ने शहर कोतवाली में मामला दर्ज कराया है .राजस्व विभाग के अधिकारी के अनुसार जांच के बाद यह तथ्य सामने आया है कि नगर स्थित मौजा मुहम्मदपट्टी में गाटा संख्या 98 व 99 सरकारी बंजर खाते में दर्ज है. इसके बावजूद रवींद्रनाथ, श्रीकांत,नंदलाल द्वारा किसी वैधानिक अधिकार के बिना ही मुख्तार अंसारी की पत्नी अफसा अंसारी, बेटे अब्बास अंसारी व उमर अंसारी के पक्ष में 29 अप्रैल 2005 को रजिस्ट्री की गयी.
इसी प्रकार एक दूसरे भूखंड को बिना किसी अधिकार के सैयद कैसर हुसैन, जफर अब्बास और सैयद सादिक हुसैन द्वारा 23 सितंबर 2005 को अफसा अंसारी को बेचा गया. खरीदारों ने अपनी व्यवस्था अनुसार राजस्व रिकॉर्ड में नाम भी दर्ज करा लिया.
राजस्व अधिकारी के अनुसार ढाई माह की गहन जांच के बाद प्रशासन ने रविवार को कोतवाली में मुख्तार की पत्नी, दोनों बेटों तथा सरकारी जमीन को अवैध तरीके से बेचने वालों के खिलाफ धोखाधड़ी की सुसंगत धाराओं में मामला दर्ज कराया है.
शौर्यपथ लेख / कृषि बिल जिसे पास करवाने के लिए मेरी नजर में मत विभाजन होना था नहीं हुआ संख्या बल के आधार पर भारत के सबसे बड़े बिल को पास कर दिया गया . कृषि बिल पर कौन राजनीती कर रहा ये हमारा मुद्दा नहीं है मुद्दा ये है कि कृषि बिल को जो कि किसानो के लिए एक महत्तवपूर्ण बिल है क्योकि भारत को कृषि प्रधान देश कहा जाता है ऐसे में बिल पास करवाने का जो तरीका निकाला गया क्या हो सही था . क्या संख्या बल के दम पर चुने हुए सांसद बिना किसी की राय लिए कृषको के भाग्यविधाता बनने की कोशिश नहीं कर रहे है . इतने बड़े विधेयक को पास करने की इतनी जल्दबाजी क्यों की गयी क्या यही भारत का लोकतंत्र है जहा संख्या बल के दम पर विपक्ष को दबाया जा रहा है . इस बिल पर कौन राजनीति कर रहा है सत्ता पक्ष या विपक्ष ये अलग मुद्दा है किन्तु यहाँ जिस तरह नियमो की अनदेखी की जा रही है क्या ये एक नए प्रथा को जन्म नहीं दे रहा है . चलिए ये मान लिया जाए कि कृषि बिल किसानो के हित का है तो सरकार इस बात को लिखित में क्यों नहीं दे रही है कि किसानो को उनकी फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलेगा . संसद में इस बात को ऑन रिकार्ड क्यों नहीं स्वीकार कर रही है कि किसानो को समर्थन मूल्य ( न्यूनतम मूल्य ) प्राप्त होगा . चलो मान लिया जाये कि मोदी सरकार किसानो के हित के लिए आगे बढ़ रही है तो इस बात में आखिर सरकार को परेशानी क्यों हो रही है संसद में लिखित में न्यूनतम समर्थन मूल्य की बात को स्वीकार करने में . आज राज्यसभा में सबको यह बात तो दिखी कि किस तरह से सांसदों का उग्र व्यवहार था किन्तु ये कोई क्यों नहीं देख रहा है कि आखिर इतने उग्र क्यों हुए सांसद कि उन्हें उप सभापति के चेयर तक जाना पडा रुल बुक फाड्नी पड़ी और माइक से छेड़खानी करने की नौबत आयी . चाहे कोई भी स्थिति हो इस तरह का व्यवहार निंदनीय है किन्तु क्या ये सही है कि रुल बुक के अनुसार अगर कोई भी सांसद किसी बिल के लिए मत विभाजन की मांग करता है तो सदन के सभापति / उपसभापति को नियमानुसार सदन के सदस्यों की मांग को माननी पड़ती है और मत विभाजन की प्रक्रिया निभानी होती है किन्तु यहाँ क्या हुआ एक से ज्यादा सदस्य मत विभाजन की मांग करते रहे रुल बुक के अनुछेद की याद दिलाते रहे सदन के लिए बनाए गए नियमो के अनुसरण की बात करते रहे किन्तु सदन के अनुछेद को नहीं माना गया . जब सदन के अनुछेद को नहीं माना जा रहा है तो फिर रुल बुक का क्या औचित्य शायद यही पीड़ा लेकर सदन के सदस्य / सदस्यों ने रुल बुक को फाड़ दिया होगा खैर रुल बुक को फाड़ने वाले और सदन के नियमो की अवहेलना करने वाले सांसदों को एक हफ्ते के लिए सस्पेंड कर दिया गया है किन्तु की सिर्फ सदस्यों की ही गलती हुई इस सारे घटना क्रम में और किसी की गलती नहीं है . क्या सदन में संख्या बल है तो जंगल राज की तरह व्यवहार होगा सरकार का . लोकतंत्र में सर्व सम्मति का उच्च स्थान है किन्तु साथ ही विपक्ष की बात को सुनने का और निराकरण करने की परम्परा भी रही है किन्तु क्या वर्तमान स्थिति में ऐसा हो रहा है कोई भी बात स्पष्ट रूप से आखिर क्यों नहीं कही जा रही है सदन के बाहर जिस बात के वादे किये जा रहे है वही बात सदन के अंदर कहने में आखिर क्या परेशानी . अगर मन साफ़ है और नियत सही है तो सदन के अंदर भी उसी बात को कही जा सकती है जिसे बाहर बार बार सफाई देने के लिए कहा जा रहा है .

कृषि बिल में आखिर ऐसी क्या बात है जो किसानो को तो परेशान कर रही है साथ ही सरकार के घटक दल भी विरोध कर रहे है किन्तु यहाँ एक बार फिर संख्या बल का नशा सर पर होने का दंभ दिख रहा है जिसके कारण यह भी नहीं दिख रहा है कि सालो पुरानी साथी पार्टी की नारजगी का भी कोई असर सरकार पर नहीं पड़ रहा है . आज भले ही सारी बाते आपके पक्ष में हो किन्तु ये समय है यहाँ इंदिरा गांधी जैसी सरकार को भी धुल चाटनी पड़ी है राजनितिक के मैदान में . इस देश में ऐसे ऐसे राजनितिक कारनामे हुए है कि जब सारा देश मोदी के पक्ष में था तब दिल्ली विधान सभा में भाजपा को मुह की खानी पड़ी , छत्तीसगढ़ में स्थिति बदतर हुई , सत्ता के कारण शिवसेना - भाजपा में दरार हो गयी - सत्ता के खेल में जनता की पसंद को दरकिनार कर मध्यप्रदेश , हरियाणा , गोवा , कर्णाटक ,बिहार में कैसे सरकार बनी ये सभी ने देखा यहाँ कितने बार लोकतंत्र की हत्या हुई इस पर सब मौन रहे .

कृषि बिल से सरकार का कहना है कि इससे किसानो को बहुत लाभ होगा और विपक्ष का कहना है कि नुक्सान होगा . किसानो को क्या और कैसे फायदा होगा ये किसान को समझाने की जिम्मेदारी बिल पास करवाने वालो की होती है / सरकार की होती है आखिर सरकार क्यों नहीं किसानो के शंकाओ का समाधान कर रही . सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या मर्यादा तोड़ने की सारी जिम्मेदारी सिर्फ विपक्ष की होती है सत्ता पक्ष की नहीं होती ताली एक हाँथ से नहीं बजती और यही हाल कल संसद में हुआ . कल के व्यवहार से ऐसा प्रतीत हो रहा था कि सरकार के बिल को पास करवाने के लिए प्रश्नकाल को भी दफन करने का फैसला क्या सही है आखिर उपसभापति ने विपक्ष की मांग को भी क्यों नहीं माना , प्रवर समिति में भेजने की मांग को भी क्यों नहीं माना क्या ये निति संगत है . कृषि बिल संसद में ध्वनी मत से पास हुआ किन्तु संसद फेल हो गया . हाउस रुल 252 के अनुसार कोई भी सदस्य चाहता है या चेयरमेन के फैसले को चेलेंज करता है तो रुल 252 के तहत मत विभाजन का आदेश देना होता है किन्तु जिस तरह से कल की कार्यवाही हुई उससे साफ सन्देश जाता है कि सरकार किसी भी तरह से बिल उसी दिन पास कराना चाहती थी और हुआ भी यही कृषि बिल ध्वनी मत से पास हो गया और आठ सांसद एक हफ्ते के लिए सस्पेंड हो गए .

इन सबमे सबसे बड़ी बात जो ध्यान देने वाली है उसके अनुसार वर्तमान सरकार एनडीए -2 में कुल 82 बिल पास हुए जिसमे से 17 बिल प्रवर समिति को / मत विभाजन के लिए भेजे गए यानी कि लगभग २० प्रतिशत बिल में विपक्ष की राय को महत्तव दिया गया उसी तरह एनडीए 1 में 25 प्रतिशत बिल को पास कराने के लिए विपक्ष के राय को महत्तव दिया गया वही अगर यूपीए 2 ( सरकार ) की बात करे तो 71 प्रतिशत बिल के लिए विपक्ष की राय ली गयी वही यूपीए -1 में 60 प्रतिशत बिल पास होने के लिए विपक्ष को महत्तव दिया गया . इन आंकड़ो से ही साफ़ नजर आता है कि वर्तमान सरकार संख्या बल के आधार पर किस तरह बिल पास करवा रही है . बिल पास होने के कई मायने है पूर्ण बहुमत से बिल पास होना मतलब सभी की पूर्ण सहमती , मत विभाजन से बिल पास होना मतलब वो बिल जिस पर विपक्ष सवाल उठा रही है और सत्ता पक्ष समर्थन कर रही है ऐसे बिल के पास होने के लिए सदन के चेयर पर्सन द्वारा मत विभाजन करवाना और बहुमत के आधार पर बिल को पास या फेल करना जिसमे विवाद की स्थिति अल्प समय के लिए होती है किन्तु ध्वनिमत से बिल पास करना यानी कि विपक्ष की शंकाओं को नजर अंदाज करते हुए सत्ता पक्ष बल संख्या के आधार पर बिल को पास करवा लेती है उसे ध्वनिमत से पास हुआ बिल करार दिया जाता है और ऐसा ही कृषि बिल के साथ हुआ राज्यसभा में कृषि बिल विवादों के बीच विपक्ष की मांगो को नजरंदाज कर यहाँ तक कि सत्ता के घटक दलों की भावना को भी नजर अंदाज कर पास करा लिया गया और एक नए प्रथा का श्री गणेश जो हुआ है उस पर एक सीढ़ी और आगे बढ़ गयी सरकार इस तरह कृषि प्रधान देश में जमीनी किसानो से चर्चा किये बिना सरकार ने एक नए नियम को लागू कर दिया अब इससे किसानो को फायदा है या नुक्सान ये तो आने वाला समय ही बताएगा . ( शरद पंसारी - संपादक - शौर्यपथ दैनिक समाचार पत्र )
शौर्यपथ / सूर्य सौरमंडल का आधार है। सभी ग्रह सूर्य की परिक्रमा करते हैं। सूर्य के कारण पृथ्वी पर जीवन है और दिन रात होते हैं। सूर्य अग्नि तत्व और क्रूर स्वभाव का ग्रह पुर्लिंग की श्रेणी में आता है। इसकी राशि सिंह है और मेष राशि में उच्च होते हैं। यह कृतिका, उत्तराफाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा नक्षत्रों का स्वामी है। सूर्य की स्वराशि सिंह है, उच्च राशि मेष है और नीच राशि तुला है। सूर्य की महादशा छह वर्ष की होती है। मेष,वृषभ, सिंह, धनु और कुंभ लग्नों में सूर्य कारक और शुभ होता है। सूर्य की मित्र राशियां कर्क, वृश्चिक और मीन है और शत्रु राशियां वृष,तुला और कुंभ है। सूर्य जिस स्थान पर होता है उस भाव से सप्तम भाव को पूर्ण दृष्टि से देखता है। सूर्य सिंह राशि के 20 अंश तक मूल त्रिकोण में रहता है।
सूर्य की प्रकृति स्वस्थ,वर्ण क्षत्रिय और रस कटु होता है। सूर्य का व्यक्ति के सिर और मुख पर आधिपत्य होता है। काल पुरुष के अनुसार सूर्य आत्म कारक ग्रह होता है। शुक्र,शनि, राहु, सूर्य के शत्रु ग्रह हैं। बुध सम है। चंद्र ,मंगल, गुरु मित्र हैं। सूर्य के देव शिव हैं और उनका गोत्र कश्यप है। सूर्य आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य और अश्लेषा नक्षत्र में बलवान होता है। सूर्य प्रशासनिक सेवाओं का कारक होता है यह व्यक्ति को नेतृत्व क्षमता प्रदान करता है।
जिनकी कुंडली में सूर्य अशुभ होता या नीच का होता है तो वह व्यक्ति अपने पिता से दूरी बना लेता है क्योंकि कुंडली में सूर्य पिता का कारक होता है। पिता को प्रसन्न करने से सूर्य प्रसन्न हो जाते हैं। सूर्य कन्या की कुंडली में पृथक्कारी ग्रह होता है। यदि सूर्य सप्तम भाव में हो या सप्तम दृष्टि हो और सप्तम भाव पर कोई शुभ प्रभाव न हो तो द्विविवाह योग बनाता है। सूर्य यदि अपनी उच्च राशि मेष को सप्तम दृष्टि से देखें तो उससे भाव की हानि करता है। अष्टम में सूर्य या अष्टमेश होने पर सूर्य को दोष नहीं लगता है। अष्टम में सूर्य या अष्टमेश सूर्य होने से व्यक्ति के अंदर रिसर्च की भावना होती है। वह शोध कार्य में रुचि रखता है। पैतृक सम्पत्ति या अचानक धन लाभ के योग बनते हैं। यदि आपकी कुंडली में सूर्य का अशुभ प्रभाव पड़ रहा है तो आप को नियमित रूप से गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए। तांबे के लोटे से सूर्य को प्रात:काल जल प्रदान करना चाहिए। पिता एवं पिता तुल्य व्यक्तियों की सेवा सम्मान करना चाहिए। माणिक्य सूर्य का रत्न है। कमजोर सूर्य को पुष्ट करने के लिए माणिक्य रत्न को भी धारण किया जा सकता है।
जीवनशैली / शौर्यपथ / जीवन में स्थिरता लाने के लिए मानसिक शांति और संतुष्टि आवश्यक है। मन अगर अशांत रहता है तो हर कदम पर परेशानियों से सामना हो सकता है। हमारे घर या कार्यक्षेत्र में मौजूद वास्तु दोष भी मानसिक तनाव को बढ़ाते हैं। वास्तु में कुछ आसान से उपाय बताए गए जो मानसिक शांति प्राप्त करने में सहायक हो सकते हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
मानसिक शांति पाने के लिए कभी भी अपना घर किसी एकांत जगह पर न बनवाएं। घर हमेशा आबादी में होना चाहिए। घर को हमेशा स्वच्छ रखें। घर में परिजनों से धीमी आवाज में और प्रेमपूर्वक बात करें। घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर ऊं और स्वास्तिक का चिह्न बनाएं। सुबह और शाम घर या कार्यक्षेत्र में अगरबत्ती जलाएं। प्रतिदिन गायत्री मंत्र का जाप करें। सुबह उठकर घर के बुजुर्गों के पैर छुएं। रचनात्मक कार्यों में रुचि बढ़ाएं। भूख से कम खाना खाएं। परिवारिक समस्याओं को लेकर मन अशांत रहता है तो कच्चे दूध को कुल्लड़ में लें और शहद मिलाकर उसे घर, मुख्य द्वार पर छिड़क दें। घर में कभी भी मकड़ी का जाला न बनने दें। इससे मानसिक तनाव बढ़ता है। रसोईघर को हमेशा स्वच्छ रखें। घर के किसी कोने में अंधेरा न रहने दें। सोने से पहले अपने बिस्तर की सफाई करें और स्वच्छ चादर बिछाएं। शयनकक्ष में कभी भी पैर दरवाजे की ओर कर न सोएं। सोते वक्त बेड के नीचे या इसके सिरहाने जूते-चप्पल नहीं होने चाहिए। शयनकक्ष में झाड़ू, अंगीठी, नशीले पदार्थ नहीं रखना चाहिए।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
