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दुर्ग / शौर्यपथ / जिले के भिलाई में स्थित सुधीर सीटी स्कैन एंड रिसर्च सेंटर द्वारा आपदा में अवसर की भरपूर तलाश जारी है . यहाँ कोविद के मरीज से सीटी स्कैन ( चेस्ट ) के शासन द्वारा तय दर से कही ज्यादा की रकम की मांग की जा रही है . ऐसा ही मामला वर्तमान में सामने आया जब कोविद संक्रमित मरीज जो कुछ दिनों पहले पोजिटिव था एवं वर्तमान में रिपोर्ट निगेटिव है फिर से चेस्ट पेन होने से भिलाई स्थित सुधीर सीटी स्कैन एंड रिसर्च सेंटर में जब जाँच कराने पहुंचा तो जांच के लिए 4000 की मांग की गयी मरीज के विरोध करने व शासन के तय दर बताने के बाद भी अस्पताल प्रबंधन नहीं माना एवं साफ कह दिया कि शासन द्वारा ऐसी किसी बात की जानकारी नहीं है जबकि प्रशासन द्वारा सभी निजी अस्पतालों को तय दर में ही जाँच करने का आदेश तीन चार दिन पहले ही दे दिया गया था .
ऐसे में देखने वाली बात यह होगी कि शासन ऐसे निजी अस्पताल जो आपदा में भी जेब भरने में लगे हुए है जिला प्रसासन किस तरह की कार्यवाही करता है .
बता दे कि राज्य सरकार ने कोरोना मरीजों के उपचार के दौरान हाई रिजाल्यूशन एचआरसीटी इंवेस्टिगेशन की आवश्यकता होने पर निजी चिकित्सालयों और डायग्नोस्टिक केंद्रों के लिए दरें निर्धारित की हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार सीटी चेस्ट विदाउट कान्ट्रास्ट फार लंग्स के लिए 1,870 रुपये, सी टी चेस्ट विद कान्ट्रास्ट फार लंग्स के लिए 2,354 रुपये निर्धारित शुल्क रखा गया है। आदेश में कहा गया है कि प्रदेश के सभी निजी चिकित्सालयों द्वारा कोविड -19 मरीजों के इलाज के लिए छत्तीसगढ़ शासन द्वारा निर्धारित शुल्क ही लिया जाए तथा आइसीएमआर एवं राज्य शासन द्वारा तय किए गए ट्रीटमेंट प्रोटोकाल का पालन करते हुए केवल आवश्यक जांच ही कराई जाए। कोविड 19 मरीजों का आरटीपीसीआर, ट्रूनाट या फिर एंटीजेन टेस्ट केवल आइसीएमआर एवं राज्य शासन द्वारा अधिकृत पैथालॉजी केन्द्रों अथवा अस्पतालों में ही किया जाए। उपरोक्त आदेश का उल्लंघन एपिडेमिक डिसीज एक्ट 1897, छत्तीसगढ़ पब्लिक ऐक्ट1949 तथा छत्तीसगढ़, एपिडेमिक डिसीज कोविड 19 रेगुलेशन एक्ट 2020 के तहत दंडनीय होगा।
पटना / शौर्यपथ / कृषि बिल पर जब से भाजपा की सबसे पुराने सहयोगियों में से एक शिरोमणि अकाली दल की एकमात्र केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने इस्तीफा दिया है, इसका प्रभाव बिहार विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ NDA में खासकर सीटों के बंटवारे पर देखा जा रहा है. एक ओर जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस्तीफे की अगली सुबह शुक्रवार को बिहार के मुख्यमंत्री और NDA के मुख्यमंत्री का चेहरा नीतीश कुमार के बारे में यहां तक कह डाला कि नीतीश बाबू जैसा सहयोगी हो तो कुछ भी संभव है. वहीं माना जा रहा है कि नीतीश और बिहार भाजपा के नेताओं के एक गुट के दबाव में अब केंद्रीय नेतृत्व लोक जनशक्ति पार्टी के चिराग पासवान को गठबंधन से अलग करने के बजाय किसी भी शर्त पर अब साथ रखेगी.
अकालियों के सरकार से निकलने के बाद बिहार भाजपा के नेता मान रहे हैं कि सीटों के समझौते में नीतीश कुमार की चलेगी, क्योंकि फिलहाल उन्हें नाराज करने की स्थिति में भाजपा अब नहीं रही. भले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यह कहें कि बिहार में मंडियों को खत्म करने वाले नीतीश बाबू पहले मुख्यमंत्री थे लेकिन यह भी सच है कि धान की खरीद का NDA शासन में कभी लक्ष्य नहीं पूरा किया जा सका हैं, जबकि कृषि और सहकारिता दोनों विभाग भाजपा के पास वर्षों से हैं. भले बिहार में यह मुद्दा नहीं बनता है लेकिन फिलहाल शिवसेना और अकाली दल की नाराजगी के बाद भाजपा जनता दल यूनाइटेड की नाराजगी नहीं झेल सकती. हालांकि उनका मानना है कि भाजपा अपने सहयोगियों को कैसे नीचा दिखाती है, इस कटु सच को जनता दल यूनाइटेड और नीतीश कुमार से बेहतर कौन जानता है.
जनता दल यूनाइटेड के नेताओं का कहना है कि BJP के साथ 2017 में सरकार बनाने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पटना विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में जैसे ही केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाने की नीतीश कुमार की मांग को खारिज किया, उसी दिन लग गया था कि नरेंद्र मोदी अपने सहयोगियों को कुछ ज्यादा भाव नहीं देते हैं. दूसरा प्रकरण लोकसभा चुनाव के तुरंत बाद हुआ, जब नीतीश कुमार ने 40 सीटें बिहार से लोकसभा चुनाव में दिलाने के वादे के बाद 39 सीटों पर विजय के बाद संख्या के आधार पर जब मंत्रिमंडल में हिस्सेदारी की मांग की तो पीएम मोदी ने उनकी इस मांग को भी खारिज कर दिया और नीतीश कुमार ने भी सांकेतिक रूप से मंत्रिमंडल में शामिल होने के न्योता को ठुकरा दिया था, लेकिन अब अकालियों के इस्तीफे के बाद भाजपा के पास सीटों के तालमेल में नीतीश कुमार की बातें मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं है.
भाजपा के पास नीतीश के अलावा अब चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी की शर्तों को मानने के अलावा कोई और चारा नहीं है. चिराग पासवान ने पांच दिनों पहले तक सार्वजनिक रूप से यह कहा था कि सीटों के समझौते पर फिलहाल BJP के किसी भी नेता ने उनसे कोई बातचीत नहीं की है लेकिन अब BJP के नेता मानते हैं कि पहले से जो चिराग को अलग-थलग रखने की नीतीश कुमार की योजना पर बिहार भाजपा की एक प्रभावशाली नेताओं का गुट काम कर रहा था, इसको बदली परिस्थिति में प्राप्त करने के अलावा उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है. इन नेताओं का कहना है कि अगर चिराग बागी हो गए तो भले ही नीतीश कुमार और BJP मिलकर चुनाव जीत लें लेकिन कई राज्यों में दलितों के सेंटीमेंट पर उसका काफी प्रतिकूल असर पड़ेगा. इन नेताओं का कहना है कि पहले ही बिहार के दलित नेताओं ने सार्वजनिक रूप से यह बात कही थी कि कैसे BJP के 6 वर्षों के शासनकाल में दलित छात्र हो या सरकारी नौकरी में काम करने वाले दलित कर्मचारी, उनके हितों के खिलाफ फैसले आए हैं और सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी रह गई. इस पृष्ठभूमि में अब BJP के नेता कह रहे हैं कि उनको भी साथ लेकर चलना अब हमारी मजबूरी है.
नई दिल्ली / शौर्यपथ / जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और लोकसभा सदस्य फारूक अब्दुल्ला ने शनिवार को केंद्र शासित प्रदेश की मौजूदा स्थिति का मुद्दा शनिवार को सदन में उठाया और कहा कि चीन की तरह दूसरे पड़ोसी देश से भी बातचीत होनी चाहिए. उन्होंने सदन में शून्यकाल के दौरान कहा कि वे उन सभी लोगों का आभार प्रकट करना चाहते हैं जिन्होंने उनके हिरासत में रहने के दौरान समर्थन जताया. हिरासत से रिहा होने के बाद पहली बार लोकसभा में आपनी बात रखते हुए नेशनल कांफ्रेंस के नेता ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में प्रगति होनी चाहिए थी लेकिन वहां कोई प्रगति नहीं हुई है.
उन्होंने कहा, "आज हमारे बच्चों और दुकानदारों के पास 4जी इंटरनेट की सुविधा नहीं है, जबकि पूरे देश में है." उन्होंने जम्मू-कश्मीर में कुछ लोगों के कथित मुठभेड़ में मारे जाने का उल्लेख किया और कहा कि मुझे खुशी है कि सेना ने माना कि शोपियां में गलती से तीन आदमी मारे गए. अब्दुल्ला ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि संबंधित परिवारों को उचित मुआवजा मिलेगा.
उन्होंने पाकिस्तान का नाम लिए बगैर कहा कि हम जिस तरह से चीन से बात कर रहे हैं उसी तरह पड़ोसी से बात करनी पड़ेगी, रास्ता निकालना पड़ेगा. अब्दुल्ला ने कहा कि अगर हिंदुस्तान तरक्की कर रहा है तो क्या जम्मू-कश्मीर को तरक्की नहीं करनी चाहिए. पिछले साल जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने और राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांटने के बाद सरकार ने फारुक अब्दुल्ला, उनके बेटे उमर अब्दुल्ला, पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती समेत कई नेताओं के नजरबंद कर दिया था.
धर्म संसार / शौर्यपथ / हिंदू कैलेंडर में अनुसार हर तीसरे साल में अतिरिक्त मास यानी अधिक मास जुड़ता है। इसका कारण सूर्य और चंद्रमा की वार्षिक चाल में 11 दिनों का अंतर होता है, जिसे पाटने के लिए हर तीसरे वर्ष अधिक को जोड़ दिया जता है। इससे वर्ष में संतुलन हो जाता है जबकि उसे वर्ष चंद्रमास 13 माह का हो जाता है। इस बार अधिकमास 18 सितंबर से प्रारंभ होकर 16 अक्टूबर 2020 तक रहेगा।
अधिकमास के अधिपति देवता भगवान विष्णु है। इस मास की कथा भगवान विष्णु के अवतार नृःसिंह भगवान और श्रीकृष्ण से जुड़ी हुई है। इस मास में श्रीकृष्ण, श्रीमद्भगवतगीता, श्रीराम कथा वाचन और श्रीविष्णु भगवान के श्री नृःसिंह स्वरूप की उपासना विशेष रूप से की जाती है। इस माह उपासना करने का अपना अलग ही महत्व है।
इस माह में अधिक मास के 33 देवताओं की पूजा का महत्व है- विष्णु, जिष्णु, महाविष्णु, हरि, कृष्ण, भधोक्षज, केशव, माधव, राम, अच्युत, पुरुषोत्तम, गोविंद, वामन, श्रीश, श्रीकांत, नारायण, मधुरिपु, अनिरुद्ध, त्रीविक्रम, वासुदेव, यगत्योनि, अनन्त, विश्वाक्षिभूणम्, शेषशायिन, संकर्षण, प्रद्युम्न, दैत्यारि, विश्वतोमुख, जनार्दन, धरावास, दामोदर, मघार्दन एवं श्रीपति जी की पूजा से बड़ा लाभ होता है।
धर्म ग्रंथों के अनुसार श्री नृःसिंह भगवान ने इस मास को अपना नाम देकर कहा है कि अब मैं इस मास का स्वामी हो गया हूं और इसके नाम से सारा जगत पवित्र होगा। इस महीने में जो भी मुझे प्रसन्न करेगा, वह कभी गरीब नहीं होगा और उसकी हर मनोकामना पूरी होगी। इसलिए इस मास के दौरान जप, तप, दान से अनंत पुण्यों की प्राप्ति होती है।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / अपने लक्ष्य के अनुसार ही आपको अपनी प्राथमिकताएं चुननी होती है। ऐसे में कई बार ऐसा होता है कि हम अस्थायी चीजों को अपनी प्राथमिकता समझकर उनपर अपना पूरा ध्यान देने लगते हैं, जबकि ऐसा करने से हमारे हाथ अंत में निराशा ही लगती है। आज हम आपको ऐसे टिप्स के बारे में बताएंगे, जिन्हेंं अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करने से आप कभी भी निराश नहीं होंगे और आपको सफलता जरूर मिलेगी-
टाइम टेबल बनाना
आप कॉलेज, कोचिंग या ऑफिस कहीं भी जाते हैं, अगर आपने कोई लक्ष्य रखा है, तो सबसे पहले अपना टाइम टेबल बनाएं। आप अपने 24 घंटे को किस हिसाब से मैनेज करते हैं, यह बेहद जरुरी है। आप पेपर या मोबाइल चेक लिस्ट में टाइम टेबल सेव कर सकते हैं।
नींद पूरी करें
आप अपनी प्राथमिकताओं में नींद को भी जोड़ लें। आपके पास काम निपटाने के अलावा जितना भी टाइम बचता है, उसमें अपनी नींद पूरी कर लें। नींद न लेने की वजह से आपका दिमाग सही से काम नहीं कर पाएगा।
आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति
जीवन में कई बार ऐसे मौके आएंगे, जब आपका विश्वास डगमगाने लग जाएगा और आपको लगेगा कि आपका लक्ष्य व्यर्थ है, लेकिन उस वक्त आपको इन नकरात्मकताओं से दूर रहकर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना है।
पेपर पर अपने लक्ष्य को लिखें
इसके लिए आपको थोड़ी दिमागी कसरत भी करनी पड़ेगी। बेहतर होगा कि आप अपना लक्ष्य पेपर पर लिखकर उससे जुड़ी चुनौतियां भी लिख लें, इससे आपको उन चुनौतियों से कैसे लड़ना है, यह भी अंदाजा हो जाएगा।
समय व्यर्थ करने वाले और नकरात्मक लोगों से दूरी
आपको समय व्यर्थ करने वाले लोगों और नकरात्मक स्वभाव वाले लोगों से दूरी बनाकर रखनी है। इससे आप अपने लक्ष्य पर ध्यान दे पाएंगे।
सेहत / शौर्यपथ / आज पूरा विश्व कोरोना महामारी के खौफ में डूबा हुआ है। गौर करने वाली बात यह है कि कोरोना और समान्य फ्लू के लक्षणों में काफी समानता होने की वजह से लोग संक्रमित व्यक्ति को शुरूआती समय में ही लक्षण देखकर पहचान नहीं पा रहे हैं। ऐसे में चलिए आपको बताते आखिर कौन सा है वो प्रमुख लक्षण जो करता है समान्य फ्लू को कोरोना से अलग।
व्यक्ति में सूखी खांसी का लक्षण दिखना COVID-19 से संक्रमित होने का सबसे बड़ा कारण हो सकता है। अगर आप किसी प्रदूषण वाली जगह में रहते हैं तो आपको खांसी किसी एलर्जी की वजह से भी हो सकती है।
क्या आपकी खांसी और सर्दी कोविड -19 का है संकेत-
कोरोना का खौफ लोगों के दिलों में इस कदर बैठ गया है कि पास बैठे व्यक्ति के छींकने या खासने पर ही लोग सहम जाते हैं , कहीं उन्हें भी कोरोना न हो जाए। हालांकि हर बार ऐसा हो ये जरूरी नहीं है।विशेषज्ञों की मानें तो कोरोना का सबसे प्रमुख लक्षण किसी चीज को सूंघने की क्षमता का प्रभावित होना होता है।
इस लक्षण को पहचानकर न करें अनदेखा-
कोरोना के बाकी लक्षणों की ही तरह कोरोना से संक्रमित व्यक्ति के भीतर सूंघने, स्वाद पहचानने का क्षमता थोड़ी या ज्यादा प्रभावित होने लगती है, इस लक्षण को अनदेखा न करें। कोरोना से संक्रमित कुछ लोगों में यह लक्षण प्रमुख तौर पर देखे गए हैं।
हालांकि, अभी तक इस बात की कोई पुष्टि नहीं हो पाई है कि सूंघने की शक्ति का कम होना कोरोना का लक्षण है। विशेषज्ञों के अध्ययन के अनुसार घर पर ही कोरोना के लक्षण जैसे सूंघने की शक्ति का कम होना, सांस लेने में कठिनाई का अनुभव होने जैसे लक्षणों का परीक्षण करके इस जानलेवा वायरस से बचाव किया जा सकता है।
खाना खजाना / शौर्यपथ / गोभी मंचूरियन एक इंडो- चाइनीज रेसिपी है, जिसे खाना हर वर्ग के लोग पसंद करते हैं। गोभी मंचूरियन को आप किसी पार्टी में भी स्टार्टर की तरह सर्व कर सकती हैं। यह बेहद पसंद की जाने वाली डिश है। इसे ग्रेवी या ड्राई दोनों तरह से बनाया जा सकता है। तो देर किस बात की अगर आपका भी कुछ क्रिस्पी चटपटा खाने का मन कर रहा है तो ट्राई करें ये टेस्टी गोभी मंचूरियन ।
गोभी मंचूरियन बनाने के लिए सामग्री-
-1 बड़े आकार की गोभी
-3 बड़े चम्मच कॉर्न फ्लोर
-5 बड़े चम्मच मैदा
-1 छोटा चम्मच अदरक-लहसुन का पेस्ट
-1/2 कप पानी
-2 बड़े प्याज बारीक कटे हुए
-1 बड़े साइज की शिमला मिर्च बारीक कटी हुई
-2 हरी मिर्च बारीक कटी हुई
-2 चम्मच सोया सॉस
-2 चम्मच चिली सॉस
-2 चम्मच रेड चिली सॉल
-2 चम्मच सिरका
2 चम्मच टोमेटो केचप
-तलने के लिए तेल
-नमक स्वादानुसार
गोभी मंचूरियन बनाने का तरीका-
गोभी मंचूरियन बनाने के लिए सबसे पहले प्याज और शिमला मिर्च को बारीक काटकर साथ ही अदरक-लहसुन का पेस्ट भी तैयार कर लें। अब एक बर्तन में पानी उबालकर इसमें कटी हुई गोभी के टुकड़ों को 5 मिनट के लिए डाल दें। ध्यान रखें कटे हुए गोभी के टुकड़े न तो बहुत ज्यादा छोटे हों और न ही बड़े। गर्म पानी से 5 मिनट बाद गोभी के टुकड़ों को निकालकर साफ पानी से धो लें। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि गोभी में अगर कोई कीड़ा हो तो वह आसानी से बाहर आ जाए।
अब एक बड़ा बाउल लेकर इसमें मैदा, कॉर्न फ्लोर, अदरक-लहसुन का पेस्ट और नमक डालकर मिश्रण को अच्छी तरह से मिलाएं। अब इस मिश्रण में पानी डालकर न ज्यादा गाढ़ा और न ज्यादा पतला घोल तैयार कर लें। इसी घोल में गोभी के टुकड़े डालकर अच्छे से मिला दें।
अब कढ़ाई में तेल गर्म करके उसमें मीडियम आंच पर गोभी को हल्का भूरा होने तक तलें। सभी तले हुए टुकड़ों को एक तरफ अलग रख लें। अब इसी तेल में अदलक-लहसुन का पेस्ट, हरी मिर्च, बारीक कटी शिमला मिर्च और प्याज डालें और अच्छी तरह से इन्हें भी फ्राई करें।
कढ़ाई में सिरके के साथ चारों तरह के सॉस डालकर उसमें फ्राइड गोभी के टुकड़े डालकर 4 से 5 मिनट तक के लिए मीडियम आंच पर पकाएं। आपकी गर्मा-गर्मा गोभी मंचूरियन सर्विंग के लिए बनकर तैयार है।
खाना खजाना / शौर्यपथ / सुबह का नाश्ता अगर हेल्दी हो तो व्यक्ति पूरा दिन फ्रेश और एनर्जेटिक फील करता है। ऐसे ही एक केरल के एक नाश्ते का नाम है रवा अप्पम। ये खाने में तो बाकी साउथ इंडियन रेसिपीज की तरह टेस्टी होता ही है लेकिन स्वाद के साथ-साथ ये आपकी सेहत और ब्रेकफास्ट के लिए हेल्दी ऑप्शन भी है। तो आइए जानते हैं कैसे बनाया जाता है वेजिटेबल रवा अप्पम।
रवा अप्पम बनाने के लिए सामग्री-
-रवा- 1/2 कप
-दही - 1/2 कप
-हरी मटर- 1/2 कप
-फूलगोभी- 1/2 कप
-साबूत सरसों- 1/2 टेबल स्पून
-अदरक- ½ टेबल स्पून
-हरी मिर्च- 3
-करी पत्ता- 8-9
-बेकिंग सोडा- ¼ टेबल स्पून
-तेल- 2 टेबल स्पून
-नमक- स्वादानुसार
रवा अप्पम बनाने का तरीका-
रवा अप्पम बनाने के लिए सबसे पहले फूलगोभी और हरी मिर्च को बारीक काटकर अदरक के साथ मिक्सर में उसका पेस्ट बना लें। अब एक बाउल में रवा और दही मिक्स कर लें। इस मिश्रण में फूलगोभी, मटर, हरी मिर्च, अदरक का पेस्ट और नमक डालकर अच्छी तरह मिला लें। यदि मिश्रण ज्यादा गाढा़ लगे तो उसमें थोडा सा पानी डालकर उसे पतला कर लें। अब इस मिश्रण को थोड़ी देर ढककर अलग रख दें ताकि रवा फूल जाए।
अब तेज आंच पर एक कढ़ाई में तेल डालकर उसे गर्म कर लें। तेल गर्म होने पर उसमें सरसों ,करी पत्ता डालकर थोड़ा सा भून लें। अब इस तड़के को मिश्रण में डालकर मिला लें। अब मिश्रण में बेकिंग सोडा या ईनो फ्रूट सॉल्ट का इस्तेमाल करें। अब अप्पम मेकर को गर्म करके उसके प्रत्येक खाने में थोडा-थोडा तेल डालकर इस मिश्रण को सभी खानों में थोडा-थोडा भर दें। मिश्रण डालने के बाद अप्पम मेकर को ढककर धीमी आंच पर अप्पम पकने का इंतजार करें। ध्यान रखें अप्पम सेकते समय गैस की आंच हल्की रखें, तेज आंच रखने पर अप्पम जल सकते हैं।
जब अप्पम एक साइड से गोल्डन ब्राउन सिक जाए तो इसे दूसरी साइड पलट दें और फिर से ढककर पकाएं। अप्पम को दोनों ओर से गोल्डन ब्राउन होने तक पका लें। जब अप्पम दोनों तरफ से गोल्डन ब्राउन हो जाए तो गैस बंद कर दें। आपका रवा अप्पम तैयार है, इसे आप प्लेट में निकालकर हरे नारियल की चटनी, टमाटर की चटनी, मीठी चटनी, धनिये की चटनी या टमैटो सॉस के साथ सर्व करें।
खेल / शौर्यपथ / क्रिकेट फैन्स का भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के सबसे सफल कप्तानों में से एक महेंद्र सिंह धोनी का एक बार फिर खेल के मैदान पर खेलते देखने का सपना शनिवार 19 सितम्बर सच हो गया। धोनी की बेशक मैदान पर वापसी हो गई हो लेकिन इसके लिए उन्होंने लंबा समय लिया है। उन्होंने अपना आखिरी मैच पिछले साल न्यूजीलैंड के खिलाफ 9 जुलाई 2019 को इंग्लैंड में खेला था। धोनी उस मैच में रनआउट हो गए थे और भारत सेमीफाइनल में हारकर टूर्नामेंट से बाहर हो गया था। इस तरह धोनी ने 437 दिनों बाद कोई प्रतिस्पर्धी मैच खेला। आर्इपीएल के आगाज मैच में हर किसी की नजरें धोनी पर थीं क्योंकि वो पिछले महीने इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद पहली बार खेलने उतरे थे। इस मौके पर उनकी पत्नी साक्षी धोनी ने एक प्यारा प्यारी सोशल मीडिया पर शेयर की है।
साक्षी ने इस पोस्ट को अपने इंस्टाग्राम की स्टोरी पर शेयर किया है। इसमें धोनी मैच शुरू होने से पहले बात करते नजर आ रहे हैं। साक्षी ने इस पोस्ट को आईपीएल फ्रेंचाइजी चेन्नई सुपर किंग्स को टैग भी किया है। बता दें इस पूरे साल कोरोना वायरस की वजह से धोनी ने अपनी फैमिली के साथ काफी लंबा समय बिताया है। धोनी जो अक्सर सोशल मीडिया से दूर रहते हैं, ऐसे में उनकी पत्नी साक्षी ने उनके फैन्स के लिए धोनी की फोटो और वीडियो शेयर करती रहती थीं।
धोनी के साथ उनकी पत्नी साक्षी और बेटी जीवा कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए यूएई नहीं गए हैं। हालांकि ऐसी खबरें हैं कि साक्षी टूर्नामेंट के दूसरे हाफ में यूएई जा सकती हैं। टूर्नामेंट के आगाज मैच में धोनी की कप्तानी में चेन्नई को जीत हासिल हुई। मुंबई इंडियंस ने टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 162 रन बनाए। इसके जवाब में सीएसके की तरफ से अंबाती रायुडु और फाफ डु प्लेसिस की शानदार बल्लेबाजी के दम पर चेन्नई ने पांच विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया। अंबाती रायुडु को मैन ऑफ द मैच चुना गया।
मनोरंजन / शौर्यपथ /एक्ट्रेस पायल घोष ने हाल ही में अनुराग कश्यप पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। पायल का कहना है कि अनुराग ने उनके साथ जबरदस्ती की थी। अनुराग पर आरोप लगाने के बाद पायल ट्विटर पर ट्रेंड कर रही हैं। बता दें कि पायल ने हिन्दी, साउथ और पंजाबी फिल्मों में काम किया है। पायल ने 2017 में आई फिल्म 'पटेल की पंजाबी शादी' से बॉलीवुड डेब्यू किया था। इस फिल्म में परेश रावल और ऋषि कपूर लीड रोल में थे।
पायल इसके अलावा टीवी का पॉप्युलर शो साथ निभाना साथिया में भी नजर आ चुकी हैं। शो में वह राधिका के किरदार में नजर आई थीं।
पायल सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और अपनी कई ग्लैमरस तस्वीरें शेयर करती रहती हैं।
आपको बता दें कि इससे पहले अभिनेत्री पायल घोष ने कुछ साल पहले पैनिक अटैक आने और दवा लेने के कारण वजन बढ़ने जैसे अनुभवों के बारे में खुलकर बताया था। पायल ने बताया था कि कैसे वह इस स्थिति से बाहर निकलीं।
पायल ने कहा था, '2 साल पहले मेरा वजन 72 किलो था क्योंकि मुझे पैनिक अटैक आते थे और दवाइयों के कारण मेरा वजन बढ़ गया था। मैं एक्सरसाइज भी नहीं करती थी क्योंकि मुझे डर था कि अगर मेरे दिल की धड़कनें बढ़ जाएंगी तो मेरी मौत हो जाएगी।'
पायल ने फिर अपनी बॉडी पर काम करना शुरू किया। अच्छी डाइट ली और एक्सरसाइज की और अब उनका वजन 55 किलो है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
