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June 02, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

बेमेतरा । शौर्यपथ । *आस्था और आदर्श के अयोध्या में श्रीराम मंदिर भूमिपूजन के मंगलमय बेला पर युवा सेवा संघ बेमेतरा के अध्यक्ष सोनू साहू ने अपने पुर्वजों के श्री राम जानकी मंदिर में पूजा अर्चना कर दीप प्रज्वलित करके श्री राम जी की आरती उतारकर विश्व मे चल रहे वैश्विक महामारी से विश्व को बचाने के लिए प्रार्थना करते हुए सोनू साहू ने बताया।अयोध्या रघुवंशी राजाओं की कौशल जनपद की बहुत पुरानी राजधानी थी। वैवस्वत मनु के पुत्र इक्ष्वाकु के वंशजों ने इस नगर पर राज किया था। इस वंश में आगे चलकर राजा हरिशचंद्र, भगिरथ, सगर आदि के बाद राजा दशरथ 63वें शासक थे। इसी वंश के राजा भारत के बाद श्रीराम ने शासन किया था। उनके बाद कुश ने एक इस नगर का पुनर्निर्माण कराया था। कुश के बाद बाद सूर्यवंश की अगली 44 पीढ़ियों तक इस पर रघुवंश का ही शासन रहा। फिर महाभारत काल में इसी वंश का बृहद्रथ, अभिमन्यु के हाथों महाभारत के युद्ध में मारा गया था। बृहद्रथ के कई काल बाद तक यह नगर मगध के मौर्यों से लेकर गुप्तों और कन्नौज के शासकों के अधीन रहा। अंत में यहां महमूद गजनी के भांजे सैयद सालार ने तुर्क शासन की स्थापना की और उसके बाद से ही अयोध्या के लिए लड़ाइयां शुरु हो गई। उसके बाद तैमूर, तैमूर के महमूद शाह और फिर बाबर ने इस नगर को लूटकर इसे ध्वस्त कर दिया था। अयोध्या का इतिहास प्राचीन है, और आज करोड़ो भक्तों की पुकार प्रभु श्री राम ने सुन ली और आज भूमि पूजन हुआ और अब मंदिर निर्माण शूर होगा यह रामभक्तो के लिए अत्यंत हर्ष की घड़ी है।अनंत कोटी अखिल ब्रम्हांडनायक के आशीष एवं समस्त सनातनियों के अथक प्रयास से आज भारतवर्ष गौरवान्वित है। सबके आराध्य प्रभु श्री राम जी के भव्य मंदिर का भूमि पूजन उत्सव की आप सभी सनातनी भाईयों और बहनों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें !*

दुर्ग । शौर्यपथ । खेल, राजनीती और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अपने आवाज़ का जादू बिखेरने वाले दुबे जी भिलाई स्टील प्लांट वॉलीबॉल क्लब के भूतपूर्व सचिव तथा सुलझे हुए राष्ट्रीय वॉलीबॉल निर्णायक भी थे l उन्होने कई अखिल भारतीय, राष्ट्रीय तथा अन्तर स्टील प्लांट वॉलीबॉल प्रतियोगिता में निर्णायक की भूमिका निभाई थी l आज दिनांक 06/08/2020 को अचानक दिल का दौरा पड़ने से उनका दुखद निधन हुआ l वे 63 वर्ष के थे l बारह जनवरी 1958 को जन्मे दुबे जी जनवरी 2018 में भिलाई स्टील प्लांट के WSD विभाग से सेवानिवृत हुए l अपने चहेतों के बीच वे हमेशा पंडितजी के नाम से बुलाए जाते थे l भिलाई स्टील प्लांट द्वारा आयोजित ऐसा कोई खेल प्रतियोगिता नहीं था जिसमे एन के दुबे जी ने कुशल मंच संचालन नहीं किया होगा l वॉलीबॉल, फुटबॉल, बास्केटबॉल, तैराकी से ले कर सांस्कृतिक और राजनितिक कार्यक्रमों में भी वे सबका मन मोह लेते थे l उनकी अंतिम यात्रा उनके सेक्टर चार निवास स्थान से रामनगर मुक्ति धाम के लिए दिनांक 7/8/2020 को सुबह 11:30 AM बजे प्रस्थान करेगी l दुबे जी के निधन से वॉलीबॉल खेल से लेकर पूरा खेल जगत में शोक व्याप्त है, वहीँ दुर्ग जिला वॉलीबॉल संघ, भिलाई स्टील प्लांट, वॉलीबॉल क्लब, छत्तीसगढ़ वॉलीबॉल संघ के सभी पदाधिकारयों ने नन्द किशोर दुबे के आकस्मिक निधन पर दुःख प्रकट करते हुए कहा की अत्यंत मृदुभाषी और मिलनसार दुबे जी की आवाज़ और उनका मंच संचालन हमेशा याद आएगा l

शौर्यपथ लेख ( शरद पंसारी ) / ५ अगस्त भारत के इतिहास में दर्ज हो गया ५ अगस्त हिन्दुओ के लिए बहुत बड़ा दिन था ५ अगस्त को सदियों से चले अ रहे विवाद का अंत और नए भारत का उदय हुआ . ५ अगस्त २०२० का दिन राम मंदिर निर्माण के भूमि पूजन के साथ ही हिन्दू धर्म में आस्था रखने वालो के लिए एक ऐतिहासिक दिन था इसी दिन मर्यादा पुरषोत्तम राम के जन्मभूमि में राम मंदिर निर्माण कार्य का भूमि पूजन कर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने इतिहास में अपना नाम दर्ज कर लिया . . इस दिन पुरे देश में दीपावली का माहौल था और आम जनता कोरोना आपदा को भूल कर राम धुन में खो गयी हर घर रौशनी थी वही कुछ लोगो को जलन थी कुछ को मलाल था तो कोई मुहूर्त की बात करते हुए मनमानी का आरोप लगा कर अपनी विकृत मानसिकता को उजागर कर रहा था इन सबके बीच सभी बातो को दरकिनार करते हुए सभी विवादों को अनदेखी करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर का शिलान्यास कर हिन्दुओ की आस्था को मूर्त रूप देने के कार्य का शुभारम्भ कर दिया .
       प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की जनता के दिलोमे है और इसका साकष्ट प्रमाण है लोकसभा का २०१९ का आम चुनाव जिसमे भारत के कई प्रदेशो में भाजपा की सत्ता ना रहते हुए भी जनता ने प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई में सरकार बनाने के लिए अपना समर्थन दिया और पूर्ण बहुमत से देश की कमान मोदी के हाँथ सौपी . आज के माहौल की बात करे तो आज भी भारत की जनता देश की कमान नरेंद्र मोदी के हाँथ में आने वाले चुनाव में भी देगी ऐसा ही प्रतीत हो रहा है . प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्तमान भारत के करिश्माई नेता है जिनके आगे भाजपा के अन्य नेता सही विपक्ष के सभी नेता बौने है .
          किन्तु इसी भारत में मोदी के अनुयायी के कुछ ऐसे रूप है जो मोदी की छवि को धूमिल करने से बाज नहीं आते चाटुकारिता की सारी हदे पार कर अपरोक्ष रूप से हुन्दुओ की भावना को ठेंस पहुंचा ही देते है . कुछ दिनों पहले ऐसे ही भाजपा के कद्दावर नेता ने मोदी की तुलना सुरों के देवता ( महादेव ) से कर दी जबकि स्वयं पीएम मोदी माँ दुर्गा के उपासक है और महांकाल के भक्त ऐसे में महाकाल की बराबरी का स्वयं मोदी भी नहीं सोंच सकते किन्तु चाटुकारिता करने वाले अपनी राजनैतिक स्थिति को सुरक्षित रखने ये हदे भी पार कर गए . ऐसा ही किस्सा अभी हाल ही में हुआ जिन प्रभु श्री राम की चरणों में पी मोदी ने दंडवत प्रणाम करते है उसी राम लला को रास्ता दिखाते हुए एक फोटो देश के वरिष्ठ पत्रकार और निजी चेनेल के मालिक रजत शर्मा ने अपने ट्वीट पर पोस्ट कर शब्दों का खेल खेल कर चाटुकारिता की मिसाल पेश कर दी हालाँकि इस पोस्ट के बाद रजत शर्मा का ये ट्वीट काफी ट्रोल हुआ . तस्वीर में ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे प्रभु श्री राम को राह दिखाते हुए उनके घर अयोध्या ले जा रहे है पीएम मोदी . क्या इस जगत में कोई भी ऐसा है जो प्रभु श्री राम को रास्ता दिखा सके जो जगत को रास्ता दिखाते है जो इन्सान क्या राजनितिक पार्टी को भी अपने नाम के सहारे सत्ता के शिखर पर बैठा देते है ऐसे प्रभु श्री राम को कोई राह दिखा सकता है . प्रभु श्री राम मर्यादा के देवता है किन्तु रजत शर्मा ने अपने पोस्ट में जिस तस्वीर को प्रकाशित किया वो क्या हिन्दू धर्म के लिए सही है क्या मोदी को बड़ा बताने के चक्कर में राम को छोटा कर रहे है वो भी उस राम को जिनके नाम के सहारे ही कइयो की जिन्दगी बदल जाती है वस राम के नाम का हिन्दू धर्म में बड़ा महत्तव है सिर्फ नाम से ही पत्थर भी पानी में तैर जाते है ऐसे राम को मोदी से छोटा बताना कहा तक सही है .


          रजत शर्मा देश के जाने मने वरिष्ठ पत्रकार है उन्होंने दुनिया देखी है विपरीत परिस्थिति में भी अपने आपको स्थापित किया है जब मोदी सिर्फ एक प्रदेश के मुखिया थे तब भी पत्रकारिता जगत में उनका नाम था किन्तु ५ अगस्त के उनके पोस्ट का मै पुरजोर विरोध करता हूँ . मेरी नजर में भगवान् राम से बड़ा कोइ नहीं चाहे वो मोदी हो चाहे वो रजत शर्मा हो .क्योकि राम अयोध्या में ही नहीं हर हिन्दू की आत्मा में वास करते है . प्रभु राम की ही माया होगी ये कि उनके स्थान पर कब कब क्या क्या होना है मेरे मत के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अच्छे कर्मो का ही नतीजा है कि उन्हें ये सौभाग्य मिला राम लला के भव्य मंदिर के निर्माण की पहली शिला उनके द्वारा रखा जाए .कब कब क्या होना है ये निर्धरित करने वाले राम ही है वो ही है जो अपने भक्तो को अर्श से फर्श और फर्श से अर्श कही भी पहुंचा सकते है जो पुरे जगत के राजा है उनके पास क्या कमी सब उनके ही आशीर्वाद से होता है राजा हो या फ़कीर हर कोई उनके सामने नतमस्तक है उनकी राह पर चलता है या चलने की कोशिश करता है . परितोष भी राम देते है सज़ा भी राम देते है उनका न्याय निश्छल है . जय श्री राम ( लेखक के निजी विचार )

धर्म संसार / शौर्यपथ / भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को कजरी तीज मनाते हैं। यह त्योहार इस साल 6 अगस्त को पड़ रहा है। कजरी तीज को बूढ़ी तीज या सातूड़ी तीज के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से पति की लंबी आयु और सुख समृद्धि की प्राप्ति के साथ मनोकामनाएं भी पूरी होती है। इस व्रत को शाम को चंद्रमा के निकलने के बाद उसे अर्घ्य देकर खोला जाता है।

शुभ मुहूर्त-

तृतीया तिथि प्रारंभ- सुबह 10 बजकर 50 मिनट से
तृतीया तिथि समाप्ति- रात 12 बजकर 15 मिनट पर।
चंद्रोदय का समय- रात 9 बजकर 8 मिनट पर।

 

कैसे करें पूजा-

कजरी दिन के दिन सुबह स्नान के बाद साफ सुथरे कपड़े पहनने चाहिए। इस दिन जौ, गेहूं, सत्तू ,चने, चावल और घी को मिलाकर कई तरह के पकवान बनाए जाते हैं। सुहागिनें इस दिन माता पार्वती और महादेव की विधि-विधान से पूजा करती हैं। चंद्रोदय के बाद इस व्रत को खोला जाता है। इस दौरान कजरी तीज की व्रत कथा भी पढ़ना शुभ माना जाता है।

चंद्रमा को कैसे दें अर्घ्य-

कजरी तीज में बाद की पूजा के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देना शुभ माना जाता है। सबसे पहले चंद्रमा को मौली, अक्षत और रोली अर्पित करें। इसके बाद अपने स्थान पर खड़े होकर चंद्रमा को अर्घ्य दें। इसके बाद व्रत को पानी या कुछ मीठा खाकर खोला जाता है।

 

लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / ग्रूमिंग एक बहुत ही जरूरी खुद की त्वचा का खयाल रखने का एक रूटीन होता है और इसके लिए सभी महिलाओं को वक्त निकालना चाहिए. एक ग्रूमिंग किट को महिलाओं को देने के लिए अच्छे तोहफे के रूप में भी देखा जा सकता है, जिसमें त्वचा को रिलेक्स करने के सभी प्रोडक्टस मौजूद हों. महिलाएं, अक्सर ग्रूमिंग सेशन के बाद कॉन्फिडेंट और खूबसूरत महसूस करती हैं. ऐसे में किसी ओर के आपको ग्रूमिंग किट गिफ्ट करने का इंसजार क्यों करना, जब आप खुद अपनी पर्सनलाइज्ड ग्रूमिंग किट बना सकती हैं.

एक आदर्श ग्रूमिंग किट वो होती है, जिसमें आपकी स्किन के मुताबिक ब्यूटी प्रोडक्टस शामिल हों और कुछ ऐसे प्रोडक्ट्स हो, जिनका इस्तेमाल आप किसी फंक्शन से पहले कर सकती हैं. तो चलिए हम आपको बताते हैं कि आपको अपनी ग्रूमिंग किट में किन प्रोडक्ट्स एड करना चाहिए.

1. क्लेंजिंग जेल
पहला स्टेप हमेशा क्लेंजिंग से शुरू होता है और इसलिए आपको अपने चेहरे की क्लेंजिंग के लिए एक क्लेंजर की आवश्यकता है. अगर आपको कभी ऐसा लगे कि आपका चेहरा डल हो गया है तो आप एक हाइड्रेटिंग क्लेंजिंग जेल या फॉम का इस्तेमाल कर सकती हैं, जो तुरंत आपके चेहरे को निखार देगा. तो अपने सामान्य साबुन या फिर फेसवॉश को जेंटल और हाइड्रेटिंग क्लेंजिंग जेल से बदल दें.

2. शॉवर जेल
अगर आपने अभी तक शॉवर जेल ट्राय नहीं किए हैं,तो आपको बता दें कि ये त्वचा के लिए बहुत ही शानदार होते हैं. आपको अंदाजा नहीं है कि शॉवर जेल का इस्तेमाल न करने से आप क्या मिस कर रही हैं. ये आपके नहाने के समय की सारी वाइब्स को बदल सकता है. साबुह आपकी त्वचा के लिए हार्श होते हैं और लंबे वक्त में आपकी त्वचा को डल कर देते हैं. वहीं शॉवर जेल आपकी त्वचा के लिए जेंटल होता है और त्वचा को सॉफ्ट रखता है. अपने एक्सपीरियंस को बेहतर बनाने के लिए आप अपनी पसंद की खुशबू वाले शॉवर जेल का इस्तेमाल कर सकती हैं.

3. बॉडी लोशन
अपनी त्वचा को कोमल बनाए रखने के लिए आपको शॉवर के बाद अपनी त्वचा पर बॉडी लोशन लगाना चाहिए. आपकी ग्रूमिंग किट बिना बॉडी लोशन के पूरी नहीं होगी. एक बॉडी लोशन आपकी ग्रूमिंग किट में जरूर होना चाहिए.

4. मोइश्चर
मोइश्चराइज्ड त्वचा हैपी त्वचा होती है और अगर आपको अपनी त्वचा से प्यार है तो आपको ये मंत्र याद कर लेना चाहिए. एक अच्छा, प्राकृतिक मोइश्चराइजर आपकी ग्रूमिंग किट में जरूर होना चाहिए. ये आपकी त्वचा के दिखने के तरीके को पूरी तरह से बदल सकता है. अपने चेहरे को क्लेंज करने के बाद आप मोइश्चराइजर की एक लेयर लगाएं क्योंकि इससे आफकी त्वचा कोमल होगी.

5. मिनिएचर परफ्यूम
क्या आपने कभी इस बात पर ध्यान दिया है कि जब आप अच्छा स्मैल करते हैं तो अच्छा महसूस करते हैं. आपकी खुशबू का आपके मूड पर काफी अधिक प्रभाव पड़ता है. इससे आपका कॉन्फिडेंस बड़ता है और आपको दिनभर लोगों को कॉम्प्लिमेंट्स मिलते हैं. आप रोजाना के लिए इस्तेमाल के लिए सामान्य डियो और परफ्यूम रखें लेकिन कुछ मिनिएचर परफ्यूम अपनी ग्रूमिंग किट में भी अपने खास दिनों के लिए रखें.

6. मैनिक्योर किट
एक मैनिक्योर किट को आपको अपनी ग्रूमिंग किट में सबसे पहले रखना चाहिए. ग्रूमिंग किट का मतलब ये तो है कि आप अपनी जरूरत की सारी चीजें उसमें रखें लेकिन इसके साथ ही उसमें ऐसे प्रोडक्टस भी रखें, जिनके लिए आप आसानी से वक्त नहीं निकाल पाती हैं. एक मैनिक्योर किट इसका सही उदाहरण है. आपको अपने नेल्स का मैनिक्योर करके जरूर अच्छा लगेगा लेकिन आपको इसे रोज करने की जरूरत नहीं है.

7. रेजर या ट्रिमर
एक रेजर या ट्रिमर को आपको अपनी ग्रूमिंग किट में जरूर रखना चाहिए. इसके लिए आप तीन ब्लेड वाले रेजर का इस्तेमाल कर सकती हैं, जो त्वचा को नुकसान नहीं पहुंचाता. बस इस बात का ध्यान रखें कि ये साफ और सुखा हो.

वहीं ट्रिमर आज के वक्त में महिलाओं के लिए जरूरी प्रोडक्ट बन गया है. खासकर तब जब बात चेहरे के बालों की होती हैं.

8. फेस मास्क
हम फेस मास्क को कभी भी ज्यादा क्रेडिट नहीं देते हैं. हालांकि, अपनी त्वचा पर हफ्ते में कम से कम दो बार अच्छे फेस पैक का इस्तेमाल करने से आपकी त्वचा स्वस्थ रहती है. इसलिए आप अपनी ग्रूमिंग किट में फेस मास्क रखें. हालांकि, इस दौरान अपनी स्किन टाइप को ध्यान में रखते हुए ही फेस मास्क का चुनाव करें.

9. लिप बाम
लिप बाम किसी भी लड़की के पसंदीदा प्रोडक्ट में से एक होता है. ये आपके लिप्स को सॉफ्ट और हाइड्रेट रखता है और लिपस्टिक भी आसानी से लग जाती है.

10. कॉम्पैक्ट
अगर आप मेकअप के बहुत बड़े फैन हैं तो आपको हमेशा अपनी ग्रूमिंग किट में कॉम्पैक्ट रखना चाहिए. ये आपकी त्वचा को ईवन टोन देगा और मेकअप ब्लंडर्स को ठीक करता है.

 

लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / अच्छी त्वचा के लिए एक्सफोलिएटिंग, क्लेंजिंग, टोनिंग और मोइश्चराइजिंग करना जरूरी है. ये चार चीजें स्वस्थ और ग्लोइंग स्किन के स्तंभ हैं. हम सब ये जानते हैं कि क्लेंजिंग क्या होती है. हालांकि, बहुत से लोग ये नहीं जानते हैं कि क्लेंजिंग और टोनिंग दोनों साथ-साथ चलते हैं. एक ओर जां क्लेंजिग आपके चेहरे को साफ करता है तो वहीं टोनर बची हुई धूल-मिट्टी को हटाने का काम करता है.

हालांकि, यदि आपकी ऑयली स्किन है तो आपके लिए क्लेंजिंग और टोनिंग दोनों ही बहुत अधिक जरूरी है. टोनिंग की मदद से आपके पोर्स छोटे हो जाते हैं और स्किन का पीएच स्केल बना रहता है. इसके साथ ये आपके चेहरे पर प्रोटेक्शन लेयर बनाते हैं और मोइश्चराइजर लगाने से पहले एक बेस तैयार कर देते हैं. साथ ही यहां दिए गए टोनर्स को आप आसानी से घर पर बना सकते हैं.

1. सेब का सिरका

- एक चम्मच सेब का सिरका और एक कप पानी को मिक्स कर लें.
- अब कॉटन पैड को इसमें भिगो लें और चेहरे को साफ कर लें.

2. पुदीने की पत्तियां

- 6 कप पानी उबालें.
- अब इसमें कुछ पुदीने की पत्तियों को डालें.
- इस मिक्स्चर को ठंडा होने दें.
- कॉटन पैड को इसमें भिगो लें और अपने चेहरे को साफ कर लें.
3. नींबू का रस और पेपरमिंट टी

- एक चम्मच नींबू का रस और पेपरमिंट टी बैग लें और इसमें 1 कप गर्म पानी मिला लें.
- टी बैग को पानी में बैठ जाने दें और कुछ मिनट के लिए इस पानी को ऐसे ही छोड़ दें.
- अब पानी में से टी बैग निकाल लें और पानी को ठंडा होने दें.
- कॉटन पैड को इसमें भिगोएं और अपने चेहरे को साफ कर लें.

4. एलोवेरा जेल

- एलोवेरा की एक पत्ती को काटे और उसमें से जेल निकाल लें.
- एक कप पानी में 2 चम्मच जेल को अच्छे से मिला लें.
- इस सॉल्यूशन को अपने चेहरे पर कॉटन पैड से लगाएं.
- ये सॉल्यूशन आपके सनबर्न और रैश को भी ठीक करता है.

5. खीरा
- आधा ताजा खीरा लें और इसके छोटे छोटे टुकड़े कर लें.
- अब एक बर्तन में एक कप पानी डालें और कटा हुआ खीरा डालें.
- पानी में खीरे को ब्लेंड कर लें.
- इसे ठंडा होने दें और फिर छनी से पानी को छान लें.
- कॉटन पैड की मदद से इसे अपने चेहरे पर लगाएं.

6. बर्फ का पानी

- बर्फ के पानी में कॉटन पैड को डालें और इसे अपने चेहरे पर लगाएं.
- आप चाहें तो सीधे बर्फ को भी अपने चेहरे पर रगड़ सकती हैं.

7. कच्ची अंबी का बीज
- कुछ कच्ची अंबी के बीज लें.
- इन बीज को पानी के बर्तन में रखें और उसे 30 मिनट के लिए उबाल लें.
- पानी को ठंडा होने दें
- हर बार मुंह धोने के बाद इस टोनर का अपने चेहरे पर इस्तेमाल करें.

8. कैमोमाइल
- 5 मिनट के पानी में कैमोमाइल चाय की पत्ति के बैग को उबालें.
- अब इसे ठंडा होने दें और फिर एक बोतल में ये पानी डाल लें.
- हर बार मुंह धोने के बाद अपने चेहरे पर कॉटन पैड की मदद से इसे लगाएं.

9. नींबू का रस

- 1 कप पानी में 1 चम्मच नींबू का रस मिला लें.
- इस सॉल्यूशन को कॉटन पैड की मदद से अपने चेहरे पर लगाएं.
- आप चाहें तो सीधे नींबू के छिलके को अपने चेहरे पर रगड़ सकती हैं.
- इससे आपके चेहरे से टैन हटेगा और ऑयल भी कंट्रोल होगा.

10. ग्रीन टी
- ग्रीन टी बैग को उबालें और इसे ठंडा होने दें.
- इस चाय को हर बार मुंह धोने के बाद टोनर के रूप में लगाएं.

बता दें कि ऑयली त्वचा के लिए टोनर बेहद आवश्यक हैं और ये आपकी त्वचा को फ्रेश और ग्रीस फ्री रखते हैं. इसके अलावा ये मुंहासों को होने से रोकते हैं.

 

नजरिया / शौर्यपथ / आज हिरोशिमा दिवस है। साल 1945 में 6 अगस्त के दिन ही दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका ने इस जापानी शहर पर ‘लिटिल ब्यॉय’ नामक परमाणु बम गिराए थे। और इसके तीन दिनों बाद 9 अगस्त को जापान के ही नागासाकी में ‘फैट मैन’ नामक एक अन्य परमाणु बम गिराया गया था। इन बमों की तबाही ऐसी मची कि दोनों शहरों में लगभग साढ़े तीन लाख लोग झटके में मारे गए, जबकि विकिरण का प्रभाव ऐसा फैला कि बाद की कई पीढ़ियां विकलांग पैदा होती रहीं। आज विश्व में परमाणु हथियारों की संख्या लगभग 13,450 हो गई है, जिनकी मारक क्षमता इन दोनों बमों से कई गुना ज्यादा है। ये हथियार अपने अल्पकालीन और दीर्घकालीन प्रभाव से मानव सहित पृथ्वी के अधिकांश जीवन को समाप्त करने की विध्वंसक क्षमता रखते हैं। बेशक शीत युद्ध के चरम के समय की तुलना में आज परमाणु हथियारों के खिलाफ जागरूकता बढ़ी है, फिर भी तमाम विशेषज्ञ यही मानते हैं कि परमाणु हथियारों से जुड़ा खतरा कम नहीं हुआ है, बल्कि बढ़ गया है।
इसके अनेक कारण दिखाई देते हैं। पहली वजह तो यह है कि उस समय अमेरिका और रूस के बीच परमाणु हथियारों के नियंत्रण की जो संधियां या समझौते थे, उनका असर तेजी से कम होता जा रहा है। इनमें से एक संधि ‘द इंटरमीडिएट-रेंज न्यूक्लियर फोर्सेस’ (आईएनएफ) 2019 में टूट चुकी है, जबकि दूसरी बड़ी संधि ‘न्यू स्टार्ट’ के अगले साल फरवरी में नवीनीकरण की संभावना बहुत कम है, क्योंकि इसकी तैयारी बहुत धीमी नजर आ रही है। दूसरा कारण यह है कि परमाणु शस्त्र कम करने के समझौते समय के साथ-साथ कई कमियों के शिकार हो गए। वर्ष 1987, 1991 और 1993 में अमेरिका और सोवियत संघ (या रूस) के बीच तीन महत्वपूर्ण समझौते हुए थे, जिनका व्यापक स्तर पर स्वागत किया गया था और यह माना गया था कि अब इन दोनों देशों में बडे़ पैमाने पर परमाणु शस्त्र नष्ट किए जाएंगे, पर वास्तविक स्थिति मानव विकास रिपोर्ट 1994 बताती है, जिसके मुताबिक, ‘इन संधियों से तनाव कम तो हुआ, लेकिन इनकी अपनी सीमाएं हैं। इनमें यह निर्देश नहीं दिया गया है कि ‘वारहेड’ को ही नष्ट कर दिया जाए।’
एक समय था, जब परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का खतरा मुख्य रूप से दो बड़ी ताकतों अमेरिका और रूस की ओर से था, पर अब परमाणु हथियार नौ देशों के पास हैं। इतना ही नहीं, आतंकवादियों के पास भी छोटे परमाणु हथियार पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। फिर, चार-पांच ऐसे देश भी हैं, जो निकट भविष्य में परमाणु हथियार प्राप्त कर सकते हैं। एक अनुमान यह भी जताया गया है कि अमेरिका से संबंध अधिक तनावपूर्ण होने के बाद चीन तेजी से अपने परमाणु शस्त्र बढ़ा सकता है। हाल ही में स्टॉकहोम पीस रिसर्च संस्थान ने भी अपनी रिपोर्ट में बताया है कि जिन देशों के पास परमाणु हथियार हैं, वे सभी इनके आधुनिकीकरण की दौड़ में हैं। इसके अलावा, युद्ध में परमाणु हथियारों के ‘टैक्टिकल’ हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की आशंका भी जताई जा रही है। इसका अर्थ है कि किसी देश की बढ़ती सेना को रोकने के लिए रणभूमि में इसका इस्तेमाल हो सकता है।
इन्हीं तमाम कयासों को ध्यान में रखते हुए कई विशेषज्ञ यह मानने लगे हैं कि परमाणु हथियारों का खतरा बढ़ रहा है। इसके अतिरिक्त, जिस तरह से अंतरिक्ष क्षेत्र का सैन्यीकरण तेजी से बढ़ रहा है, वह भी चिंता का विषय है। दुनिया में अमन-शांति बहाल करने की दिशा में काम करने वाले कई संस्थानों का मानना है कि किसी भी हालत में अंतरिक्ष क्षेत्र में किसी परमाणु हथियार का प्रवेश नहीं होना चाहिए। ऐसे में, मौजूदा वक्त की मांग यही है कि परमाणु हथियारों की विध्वंसकता के अभिशाप से धरती को मुक्त किया जाए। इसके लिए विश्व स्तर पर सभी अमनपसंद नागरिकों और संस्थाओं को एक बड़ा वैश्विक अभियान चलाना चाहिए।
इसमें कोई दोराय नहीं कि संयुक्त राष्ट्र के अधिकांश सदस्य देश भी परमाणु हथियारों से मुक्त धरती के पैरोकार हैं। हम भी परमाणु हथियार विहीन धरती के उद्देश्य का समर्थन करते हैं, जबकि हम एक परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र हैं। हम इसलिए इसमें मुखर हैं, क्योंकि परमाणु शक्ति होने के बावजूद एक जिम्मेदार राष्ट्र का अपना दायित्व बखूबी समझते हैं।
(ये लेखक के अपने विचार हैं) भारत डोगरा, सामाजिक कार्यकर्ता

 

सम्पादकीय लेख / शौर्यपथ /करोड़ों भारतीयों की आस्था के प्रतीक मर्यादा पुरुषोत्तम राम के जन्मस्थल पर भव्य मंदिर का सपना सदियों पुराना था, और अब जब वह साकार रूप लेने लगा है, तो स्वाभाविक ही तमाम आस्थावान लोगों के लिए यह खुशी का एक अवसर है। अयोध्या में मंदिर-निर्माण का शुभारंभ करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल एक सूत्र वाक्य दोहराया कि ‘राम सबके हैं और सब राम के हैं।’ इस वाक्य के गहरे निहितार्थ हैं। यह एक समरस समाज का आधार वाक्य है। निर्माण की प्रस्तावना है। यह प्रस्तावना धर्म के दायरे से आगे जाकर राष्ट्र-निर्माण से जुड़ती है। जाहिर है, राष्ट्र का निर्माण कभी थमता नहीं, वह हर पल आकार लेता रहता है। अपने नागरिकों में, अपनी संस्थाओं के जरिए। और किसी भी समाज में संस्थाओं का निर्माण होता है, उनमें जनता के अटूट विश्वास से। इसलिए मंदिर-निर्माण का यह अवसर याद दिला रहा है कि हमें अपनी राष्ट्रीय संस्थाओं की मर्यादा को भी कमतर नहीं करना चाहिए।
एक ऐसे दौर में, जब हम कुदरती व मानवीय विध्वंसों से लोहा ले रहे हैं, निर्माण का महत्व कहीं अधिक शिद्दत से महसूस होना चाहिए। हमें कितना कुछ गढ़ना अभी शेष है, यह महामारी हमें बता रही है और देश की सरहदें भी इसके संकेत कर रही हैं। गौर कीजिए, देश में कोविड-19 से मरने वालों की तादाद 40 हजार तक पहुंच गई है और उनमें से कई सारे लोगों की जान हम इसलिए नहीं बचा सके, क्योंकि हमारे पास उनके इलाज की माकूल व्यवस्था नहीं थी। लाखों भारतीय हर साल बाढ़ की चपेट में आकर महीनों खानाबदोश जिंदगी जीते हैं। ऐसे में, एक सशक्त भारत रचने के लिए न सिर्फ हमें अभी बहुत सारे अस्पतालों व स्कूलों की दरकार है, बल्कि अनगिनत पुलों, पनाहगाहों, ताल-तलैयों और सीमाओं पर सड़कों-बंकरों के जाल की भी आवश्यकता है। जाहिर है, इनके लिए बहुत सारे संसाधनों की जरूरत है। और यह कोई बाहर वाला हमें नहीं देगा। इस देश के नागरिकों को अपने कर्म से अर्जित करने पड़ेंगे। राष्ट्र-निर्माण के लिए उनमें भाईचारे की कमी नहीं पड़नी चाहिए।
अयोध्या में कारसेवकों की कमी न पहले थी और न भविष्य में पडे़गी। कभी किसी धर्म के आयोजन में लोग अपनी श्रद्धा से न धन की कमी पड़ने देते हैं और न श्रम-बल की। आज भारत-निर्माण को भी उसी भाव की जरूरत है। खासकर कोरोना काल में देश को अपने नागरिकों की श्रद्धा युक्त समझदारी की बहुत जरूरत है। धीरोदात्त राम ने अपने जीवन में धीरज के साथ विकट संकटों का सामना किया, तभी वह जीत का पथ निर्माण कर सके थे। अयोध्या में प्रधानमंत्री का संयम के साथ कोरोना के मुकाबले का आह्वान राम के इसी रूप से प्रेरित था। धैर्य के साथ सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन करके ही हम इस महामारी से अपने देश को मुक्ति दिला सकते हैं। एक लंबे विवाद और ध्वंस के पटाक्षेप के बाद अयोध्या की फिजाओं ने खुशियों की खुनक महसूस की है। और इस दिन की पटकथा लिखने में पूरे भारत के नागरिक समाज ने अपने धैर्य, उत्साह, संतोष और समझदारी की रोशनाई मिलाई है। भारत-निर्माण के लिए इसी भाव को स्थाई रूप देने की जरूरत है। बहुलतावादी भारत में बन रहा भव्य राम मंदिर हमारे सामाजिक-सामुदायिक भाईचारे और शांति का संदेश पूरी दुनिया को दे सके, यह पूरा देश चाहेगा। आखिरकार राम सबके हैं और सब राम के हैं।

 

ओपिनियन / शौर्यपथ / खुशी, खूबसूरती और खैर-खैरियत के साथ श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर के निर्माण का शुभारंभ हो गया है। यह सिर्फ मेरे भारत के लोगों के संस्कार, संस्कृति और संकल्प की शक्ति का ही करिश्मा है। मुझे याद है, सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से पहले मेरे सरकारी निवास पर 5 नवंबर, 2019 को धार्मिक और सामाजिक क्षेत्रों में सक्रिय 100 से ज्यादा प्रबुद्ध लोगों की बैठक हुई थी। गौर करने की बात है कि उस बैठक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी भी मौजूद थे। बैठक में सभी ने एकमत से यह तय किया था कि सुप्रीम कोर्ट का अयोध्या मुद्दे पर जो भी फैसला आएगा, उसका दोनों पक्ष पूरा सम्मान भी करेंगे और स्वीकार भी करेंगे। जब फैसला आया, तब सभी पक्षों ने वैसा ही किया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले को किसी ने भी अपनी जीत या हार के रूप में नहीं लिया और सभी ने शांति-सद्भाव के साथ फैसले को स्वीकार किया।
अब श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर के निर्माण का शुभारंभ हो गया है, उधर सुन्नी वक्फ बोर्ड को भी मस्जिद निर्माण के लिए पांच एकड़ जमीन भी दे दी गई है। बोर्ड ने निर्माण के लिए समिति का भी गठन कर दिया है।
अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर का भूमि पूजन सद्भाव और समरसता के साथ संपन्न होना ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की ताकत और ‘अनेकता में एकता’ की शक्ति के साथ पूरी दुनिया में हिन्दुस्तान की धाक मजबूत करता है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम किसी सीमित दायरे में नहीं बांधे जा सकते। वह न केवल हिन्दुस्तान, बल्कि पूरी मानवता के लिए आदर्श हैं।
कवि अल्लामा इकबाल ने अपनी मृत्यु (1938) से पूर्व मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के लिए जो कहा था, वह एक बार फिर हमें गर्व का एहसास कराता है।
लबरेज है शराब-ए-हकीकत से जाम-ए-हिंद।
सब फलसफी हैं खित्ता-ए-मगरिब के राम-ए-हिंद।।
यह हिंदियों के फिक्र-ए-फलक रस का है असर।
रिफअत में आसमां से भी ऊंचा है बाम-ए-हिंद।।
इस देस में हुए हैं हजारों मलक सरिश्त।
मशहूर जिनके दम से है दुनिया में नाम-ए-हिंद।।
है राम के वुजूद पे हिन्दोस्तां को नाज।
अहले-नजर समझते हैं उनको इमाम-ए-हिन्द।।
दशकों से जिस मुद्दे ने भारत के लोगों को बेचैन कर रखा था, जिसके समाधान के लिए महंत रामदास जी परमहंस और हाशिम अंसारी एक ही रिक्शे से मुकदमे की पैरवी के लिए अदालत जाया करते थे। हाशिम अंसारी के मन में भी भगवान राम के प्रति भरपूर श्रद्धा थी, तभी तो इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के बाद उन्होंने कहा था, ‘अब यह विवाद यहीं खत्म होना चाहिए, श्रीराम जन्मभूमि पर राम मंदिर का निर्माण हो, अयोध्या का विकास हो, अब यही मेरी तमन्ना है’। तब से अब तक सरयू में खूब पानी बह चुका है, अब न महंत रामदास जी परमहंस इस दुनिया में हैं, और न हाशिम अंसारी। खुशी की बात यह है कि हाशिम अंसारी के बेटे कल के भव्य ऐतिहासिक आयोजन के साक्षी बने हैं। भारत का इतिहास इस बात का गवाह रहेगा कि कितना लंबा खिंचा है अयोध्या का यह मामला। आज सम्मान, सहमति और सद्भाव के सुंदर माहौल में यह विवाद खत्म ही नहीं हुआ, बल्कि श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर का सपना भी साकार होने जा रहा है।
सबसे खूबसूरत बात यह है कि देश के न किसी मोहल्ले में तनाव है, न किसी शहर में अशांति, और न किसी गांव में हंगामा, सभी ने इस ऐतिहासिक अवसर का स्वागत किया है। सब इस गौरवपूर्ण क्षण के गवाह बनकर आनंदित हैं। यही नहीं, आज के कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों ने भगवान श्रीराम को संपूर्ण मानवता, इंसानियत और इंसाफ का प्रतीक बताया है।
हमारे देश के मुस्लिम समाज को किसी विदेशी आक्रमणकारी की करतूतों-गुनाहों का गुनहगार नहीं समझा जा सकता। इस ऐतिहासिक क्षण का उसने भी सकारात्मक सोच के साथ स्वागत किया है। एक मुल्क के तौर पर हमारी प्राथमिकताएं सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक प्रगति है। यह बदलते हुए भारत की नई पीढ़ी समझ चुकी है, इसलिए नरेंद्र मोदी सरकार के आने के बाद समाज का हर हिस्सा प्रगति में बराबर का हिस्सेदार और भागीदार बन रहा है। उदाहरण के लिए, अभी-अभी प्रशासनिक सेवाओं के परिणाम आए हैं, जिसमें अल्पसंख्यक समाज के 187 नौजवान चुने गए हैं। इन नौजवानों में बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के होनहार भी शामिल हैं। मोदी सरकार के ‘बिना भेदभाव सबके सशक्तीकरण, काबिलियत की कद्र’ का नतीजा है कि आज समाज के सभी वर्ग तरक्की की दिशा में हमसफर बन रहे हैं। इसी तरह, साल 2017-2018 के भी प्रशासनिक सेवाओं के परिणाम काफी उत्साहवद्र्धक रहे हैं। आजादी के बाद सबसे ज्यादा अल्पसंख्यक समाज के लोग प्रशासनिक सेवाओं में अब चुने जा रहे हैं। जो लोग आज तक मुस्लिम समाज को भावनात्मक मुद्दों में उलझाकर वास्तविक सवालों से भरमाने का चक्रव्यूह रचते रहे, उनको भी अब यह अच्छी तरह समझ में आ रहा है कि मोदी सरकार का ‘विकास का मसौदा’, ‘वोट के सौदे’ से कोसों दूर है।
हमने सदियों पुराने सद्भाव के जिस रास्ते को चुना है, वही ‘नए भारत, मजबूत भारत, समावेशी भारत’ की नई इबारत लिखेगा। भारत की संस्कृति समावेशी सोच से भरपूर रही है। हिन्दुस्तान अकेला देश है, जहां दुनिया के सभी धर्मों के मानने वाले रहते हैं, जहां समाज के सभी वर्गों के धार्मिक, सामाजिक अधिकार सुरक्षित हैं। भारत अकेला देश है, जहां मंदिरों के घंटे, मस्जिदों की अजान, गुरुद्वारों की गुरुवाणी, चर्च की प्रार्थनाओं की गूंज हमेशा बनी रहती है। विभिन्न धर्मों की मिली-जुली यह गूंज दुनिया को हिन्दुस्तान के समावेशी समाज का खूब एहसास कराती है।
बुधवार को भव्य राम मंदिर के निर्माण के शुभारंभ का संदेश पूरी दुनिया के लिए स्पष्ट है कि भारत में किसी ने इसे अपनी विजय नहीं कहा। सभी ने मानवता और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई। सभी ने सद्भाव से भरपूर समावेशी समाज के संकल्प को दोहराया। यह हमारे लिए सबक भी है और संदेश भी। हमें इसी सबक या संदेश को आने वाले दिनों में भी सार्थक करते चलना है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं) मुख्तार अब्बास नकवी, केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री

 

अम्बिकापुर / शौर्यपथ / कलेक्टर संजीव कुमार झा की अध्यक्षता में मंगलवार को स्वतंत्रता दिवस की तैयारी हेतु सर्किट हाउस के सभाकक्ष में सभी विभाग एवं कार्यालय प्रमुखों की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में कोविड 19 के रोकथाम हेतु शासन द्वारा जारी दिशा निर्देशों के तहत मास्क एवं सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन करते हुए स्वतंत्रता दिवस मनाने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही स्कूली बच्चो द्वारा संस्कृतिक कार्यक्रम एवं विभागीय झांकी का आयोजन नही करने का निर्णय लिया गया। कलेक्टर ने समारोह के सफल एवं गरिमापूर्ण आयोजन हेतु विभिन्न विभागों के अधिकारियों को दायित्व सौपते हुए समय-सीमा में दायित्वों का निर्वहन हेतु निर्देशित किया। बैठक में जिला पंचायत सीईओ  कुलदीप शर्मा, वनमंडलाधिकारी  पंकज कमल, अपर कलेक्टर एएल ध्रुव, नगर निगम आयुक्त  हरेश मण्डावी, एसडीएम अजय त्रिपाठी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
कलेक्टर ने स्वतंत्रता दिवस समारोह के जिला स्तरीय कार्यक्रम पीजी कॉलेज ग्राउण्ड में आयोजित करने हेतु परेड ग्राउण्ड की तैयारी, मंच व्यवस्था, माईक, पोडिएम, कबूतर, पुष्पगुच्छ एवं गुब्बारे की व्यवस्था, मंच संचालन, झण्डे की व्यवस्था, पेयजल, स्वल्पाहार, चिकित्सा सुविधा, फायर ब्रिगेड, आमंत्रण कार्ड, मुख्य अतिथियों का स्वागत, पण्डाल एवं कुर्सी की व्यवस्था, पार्किंग व्यवस्था, पुरस्कार व्यवस्था, फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी, मिष्ठान्न वितरण, स्वागत द्वार सहित अन्य कार्यो के लिए अधिकारियों को कर्तव्यस्थ किया । उन्होंने कोविड 19 के संक्रमण से बचाव हेतु समारोह स्थल पी.जी.कॉलेज मैदान के सभी प्रवेश द्वारों में थर्मल स्कैनर एवं सैनिटाइजर की व्यवस्था सुनिश्चित कराने निर्देशित किया।
कलेक्टर ने सभी विभाग एवं कार्यालय प्रमुखों को अपने-अपने कार्यालय में सोशल डिस्टनसिंग का पालन करते हुए ध्वजारोहण का कार्यक्रम प्रातः 7.00 बजे आयोजित करने कहा। उन्होंने सभी जिला अधिकारियों को अपने कार्यालयों में ध्वजारोहण कर प्रातः 7.30 बजे तक कलेक्टोरेट परिसर स्थित ध्वजारोहण स्थल पर उपस्थित होने के निर्देष दिए।
स्वतंत्रता दिवस की जिला स्तरीय आयोजन हेतु पीजी कॉलेज ग्राउण्ड में मैदान की साफ-सफाई, टेन्ट एंव पण्डाल, साउण्ड व म्यूजिक सिस्टम की व्यवस्था के लिए लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को दायित्व सौंपा गया। इसके साथ ही विभिन्न विभागों के उत्कृष्ट अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित करने हेतु सभी विभाग प्रमुखों को उत्कृष्ट अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा किए गए उल्लेखनीय कार्य का विवरण प्रस्तुत करते हुए 10 अगस्त तक सूची प्रस्तुत करने निर्देषित किया गया।
स्वतंत्रता दिवस समारोह के आयोजन पूर्व 13 अगस्त को कार्यक्रमों का निर्धारित ड्रेस के साथ पी.जी. कॉलेज ग्राउण्ड में प्रातः 9 बजे से रिहर्सल किया जाएगा। इस अवसर पर सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को उपस्थित होने निर्देशित किया गया ।

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