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रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ की पावन धरा पौराणिक काल से दुनिया को अपनी ओर खींचती रही है। मर्यादा पुरूषोत्तम राम का ननिहाल चंदखुरी छत्तीसगढ़ में है। राम छत्तीसगढ़ियों की जीवन-शैली और दिनचर्या का अंग हैं। प्रातः छत्तीसगढ़ के लोग उठकर एक-दूसरे से राम-राम कह कर अभिवादन करते हैं। छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति में हर मामा अपने भान्जे को राम मानता है, आस्था से उसके पैर पड़ता है। पुरातन काल से छत्तीसगढ़ में राम लोगों के मानसपटल पर भावनात्मक रूप से जुड़े हैं। वहीं पर भगवान राम ने 14 वर्ष वनवास के दौरान लम्बा समय छत्तीसगढ़ की धरा पर गुजारा था। वनवास के दौरान श्रीराम छत्तीसगढ़ के जिन स्थानों से गुजरे थे उसे राम वन गमन पथ के रूप में विकसित करने कार्य योजना बनाई गई, जिसकी शुरूआत चंदखुरी से हो चुकी हैं।
राम वन गमन पर्यटन परपिथ के अंतर्गत जांजगीर चांपा जिले में शिवरीनारायण, बलौदा बाजार में तुरतुरिया, रायपुर में चंदखुरी और गरियाबंद के राजिम में परिपथ के विकास कार्यों की शुरूआत हो चुकी है। इसी तरह से राम वन गमन पर्यटन परिपथ में कोरिया जिले में सीतामढी हर-चौका, सरगुजा में रामगढ़, धमतरी में सप्तऋषि आश्रम, बस्तर में जगदलपुर, सुकमा में रामाराम सहित करीब 75 स्थलों को चिन्हांकित कर लिया गया है। अब मुख्यमंत्री के निर्देशन में छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी योजना राम वन गमन परिपथ को विकसित करने का कार्य प्रारंभ हो गया है। इस योजना से लोगों की आस्था के अनुरूप राम की यादों को पौराणिक धार्मिक कथाओं से सुनते आ रहे लोग इन पौराणिक महत्व के स्थल को देख सकेगें। छत्तीसगढ़ की पावन भूमि पर्यटन तीर्थ स्थल के रूप में विकसित होने के साथ यहां रोजगार के साधनों का विकास होगा। अंदरूनी दुर्गम वन क्षेत्रों में सड़क परिवहन भी विकसित होगा जिससे कई आर्थिक गतिविधियों का स्वयं संचालन होने लगेगा। देश और दुनिया के आस्थावान लोग रामायण सर्किट की धार्मिक तीर्थ यात्रा पर निकलेंगे तो भगवान राम के ननिहाल के दर्शन करेंगे। ( साभार -एम.एल. चौधरी ,सहायक संचालक)
// शहीद महेन्द्र कर्मा के नाम पर तेंदूपत्ता संग्राहक , सामाजिक सुरक्षा योजना का शुभारंभ
// प्रदेश के 12.50 लाख तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों को मिलेगा लाभ
// गोधन न्याय योजना के तहत गोबर विक्रेताओं को मिला पहला भुगतान, मुख्यमंत्री श्री बघेल ने अंतरित किए 1.65 करोड़ रूपए
// 46 हजार 964 गोबर विक्रेताओं को मिला लाभ
// शहीद महेन्द्र कर्मा को उनकी जयंती पर दी गई श्रद्धांजलि
// मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से गोबर विक्रेताओं से की चर्चा
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि गोधन न्याय योजना देश-दुनिया की एक अनूठी योजना है। इस योजना पर सभी लोगों की निगाह है। उन्होंने कहा कि येाजना के शुरूआत के एक पखवाड़े के भीतर इसके उत्साह जनक परिणाम देखने और सुनने को मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजना ग्रामीणों, किसानों और पशुपालकों के जीवन में बदलाव लाने वाली तथा लोगों को बारहों महीने रोजगार देने वाली योजना है। मुख्यमंत्री बघेल आज अपने निवास कार्यालय में आयोजित गरिमामय कार्यक्रम में राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘गोधन न्याय योजना’ के तहत गोबर खरीदी के पहले भुगतान का शुभारंभ करते हुए उक्त बातें कही। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर 46 हजार 964 गोबर विक्रेताओं के खाते में एक करोड़ 65 लाख रूपए की राशि आनलाइन अंतरित की।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कार्यक्रम की शुरूआत में शहीद महेन्द्र कर्मा की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके नाम पर प्रदेश में ‘तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना‘ का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने पूर्व मंत्री और लोकप्रिय नेता शहीद श्री महेंद्र कर्मा की जयंती पर उनके तैलचित्र पर माल्यार्पण उन्हेें विनम्र श्रद्धंाजलि दी। इस अवसर पर मंत्रिमंडल के सभी सदस्यगणों ने भी शहीद श्री कर्मा को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा है कि श्री महेन्द्र कर्मा बस्तर टाइगर के नाम से जाने जाते थे, वे आदिवासियांे के हक की हर लड़ाई में दमदारी से खड़े रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गोधन न्याय योजना देश-दुनिया में अपने तरह की पहली अनूठी योजना है, जिसमें पशुपालकों, किसानों से 2 रूपए प्रति किलो की दर पर गौठानों में खरीदी की जा रही है। इस योजना के माध्यम से एक ओर जहां पशुपालकों को आर्थिक लाभ होगा, दूसरी ओर प्रदेश में जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा। इस योजना से लोगों को कई फायदे मिलेंगे। इससे गांवों में बारह महीने लोगों को रोजगार सुलभ होगा। गोबर विक्रय करने से ग्रामीणों, किसानों और पशुपालकों को नियमित आमदनी होगी। इसके अलावा गौठानों में गोबर से वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन होगा। खुले में चराई पर रोक लगेगी और किसान एक से अधिक फसलों का उत्पादन कर सकेंगे। इससे पशुओं के संरक्षण तथा संवर्धन को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि राज्य के हर गौठानों में रोजगार ठौर स्थापित किए जाएंगे। गौठानों में इसके लिए एक-एक एकड़ जमीन को आय मूलक व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन के लिए सुरक्षित रखा जाएगा। इनमें समूहों के सदस्य गोबर से वर्मी कम्पोस्ट के अलावा गौमूत्र से फिनाईल तथा औषधि का निर्माण, साबुन, अगरबत्ती का निर्माण, धान कुट्टी मशीन के माध्यम से चावल निकालने और सिलाई मशीन के माध्यम से सिलाई-बुनाई आदि जैसी विभिन्न गतिविधियों का प्रशिक्षण एवं संचालन सुगमता से कर सकेंगे और इससे उन्हें गांव में ही रोजगार और जीवन यापन का जरिया मिलेगा।
इससे पूर्व मुख्यमंत्री बघेल ने जशपुर, जांजगीर-चांपा, सुकमा, बलौदाबाजार जिले कीे विभिन्न गौठान समितियों, स्व-सहायता समूह की महिलाओं, पशुपालक एवं गोबर विक्रेताओं से गोधन न्याय योजना के संबंध में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने गोबर विक्रय करने वाले लोगों से भुगतान की राशि प्राप्त होेने, महिला स्व-सहायता समूहों से उनके द्वारा संचालित गतिविधियों विशेषकर वर्मी कम्पोस्ट खाद के निर्माण एवं विक्रय की स्थिति, गौठानों में आने वाले पशुओं की संख्या एवं उनके चारे-पानी के प्रबंध के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने गौठान समितियों से गौठानों में वर्मी कम्पोस्ट टांका पर्याप्त संख्या में तैयार करने तथा स्थानीय स्तर पर ग्रामोद्योग से जुड़ी गतिविधियों का संचालन गौठानों में सुनिश्चित करने की बात कही। मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा 31 प्रकार के लघु वनोपज की खरीदी समर्थन मूल्य पर की जा रही है। लघु वनोपज के वेल्यू एडिशन के कार्य गौठानों में करके अतिरिक्त लाभ अर्जित किए जाने की दिशा में हम सब को मिलकर काम करना है। उन्होंने कहा कि गोधन न्याय योजना के माध्यम से समाज के सभी वर्ग के लोगों को न्याय योजना का लाभ मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने राज्य में इस योजना की लोकप्रियता और इसकी सफलता को देखते हुए अपने मंत्रिमंडलीय सहयोगियों के साथ ही मुख्य सचिव एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को बधाई और शुभकामनाएं दी।
कार्यक्रम के शुभारंभ में कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने गोधन न्याय योजना की अब तक की गतिविधियों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की परिकल्पना आज मूर्तरूप ले चुकी है। यह योजना ग्राम पंचायतों के बाद गांव तक विस्तारित होगी। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने गोबर खरीदी के एवज में गोबर विक्रेताओं को 15 दिन के भीतर उनके बैंक खाते में राशि के भुगतान का जो वादा किया था, वह आज पूरा हो रहा है। इस योजना के तहत हर 15वें दिन गोबर विक्रेताओं को भुगतान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गोधन न्याय योजना के तहत 20 जुलाई से 1 अगस्त तक राज्य में कुल 4140 गौठानों में पंजीकृत 65 हजार 694 हितग्राहियों में से 46 हजार 964 हितग्राही द्वारा 82 हजार 711 क्विंटल गोबर का विक्रय किया गया, जिसकी कुल राशि 2 रूपए प्रति किलो की दर से 1 करोड़ 65 लाख रूपए पशुपालकों के बैंक खातों में जमा की गई है। इस योजना से 38 प्रतिशत महिला हितग्राही, 48 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग, 39 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति, 8 प्रतिशत अनुसूचित जाति एवं 5 प्रतिशत सामान्य वर्ग के हितग्राही लाभान्वित हुए हैं। गोबर खरीदी का आगामी भुगतान 20 अगस्त को किया जाएगा। कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. एम. गीता ने प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस योजना के अंतर्गत राज्य के रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, धमतरी और बालोद जिलों में सबसे अधिक गोबर विक्रय किया गया है। इसी प्रकार नगरीय क्षेत्रों में रायपुर एवं दुर्ग के पशुपालकों ने सबसे ज्यादा गोबर विक्रय किया गया है।
प्रदेश में शुरू हुई शहीद महेन्द्र कर्मा तेन्दूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना
प्रदेश में आज से शुरू हुई शहीद महेन्द्र कर्मा तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना में तेंदूपत्ता संगहण कार्य में लगे पंजीकृत संग्राहक परिवार के मुखिया (50 वर्ष से अधिक आयु न हो) की सामान्य मृत्यु पर नामांकित व्यक्ति अथवा उत्तराधिकारी को 2 लाख रूपए की अनुदान सहायता राशि प्रदान की जाएगी। दुर्घटना से मृत्यु होने पर दो लाख रूपए अतिरिक्त प्रदान किया जाएगा। दुर्घटना में पूर्ण विकलांगता की स्थिति में 2 लाख रूपए और आंशिक विकलांगता की स्थिति में एक लाख रूपए की सहायता अनुदान राशि दी जाएगी।
वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशा के अनुरूप तेन्दूपत्ता संग्राहकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए विशुद्ध रूप से वन विभाग द्वारा संचालित होने वाली शहीद महेन्द्र कर्मा तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि तेन्दूपत्ता संग्राहकों को बीमित किए जाने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा संचालित बीमा योजना के बंद होने के कारण प्रदेश सरकार द्वारा यह सामाजिक सुरक्षा योजना तेन्दूपत्ता संग्राहकों के लिए शुरू की जा रही है। उन्होंने कहा कि वन विभाग द्वारा संचालित इस योजना के तहत बीमा दावा के प्रकरणों का तत्परता से निराकरण एवं पीड़ित परिवार को एक माह के भीतर दावा राशि का भुगतान हो सकेगा। उन्होंने कहा कि संग्राहक परिवार के मुखिया की 50 से 59 आयु वर्ष के बीच सामान्य मृत्यु होती है, तो 30 हजार रूपए, दुर्घटना में मृत्यु होने पर 75 हजार रूपए, दुर्घटना में पूर्ण विकलांगता की स्थिति पर 75 हजार रूपए और आंशिक विकलांगता की स्थिति में 37 हजार 500 रूपए की सहायता अनुदान राशि परिवार के नामांकित व्यक्ति अथवा उत्तराधिकारी को दी जाएगी।
इस अवसर पर मंत्री सर्वश्री रविन्द्र चौबे, मोहम्मद अकबर, ताम्रध्वज साहू, टी. एस. सिंहदेव, डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, डॉ. शिव कुमार डहरिया, कवासी लखमा, गुरू रूद्र कुमार, अमरजीत भगत, श्रीमती अनिला भेंड़िया, संसदीय सचिव श्री शिशुपाल सोरी एवं चंद्रदेव राय, मुख्यमंत्री के सलाहकार श्री प्रदीप शर्मा, श्री रूचिर गर्ग, श्री विनोद वर्मा, मुख्य सचिव आर. पी. मण्डल, अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू एवं अमिताभ जैन, कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. एम. गीता, वन विभाग के प्रमुख सचिव मनोज पिंगुआ सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
रायपुर / शौर्यपथ / राज्य शासन की मंशा के अनुरूप वर्षों से काबिज वन भूमि का मालिकाना हक मिलने से वनवासियों को खुशी है, वहीं अब वे काबिज वन भूमि पर बेदखली के भय से मुक्त होकर कृषि कार्य कर रहे हैं।
कांकेर जिले के अंतागढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम कोलर के कालीराम को वन भूमि का मालिकाना हक मिलने से उनके जीवन में खुशियों की बहार आ गई है। राज्य शासन द्वारा वन अधिकार पट्टा वितरण करने की योजना की सराहना करते हुए श्री कालीराम कहते हैं कि वर्षों से काबिज 2 एकड़ वन भूमि का वन अधिकार पट्टा मिलने से मेरी चिंता दूर हो गई है और बेदखली का भय भी समाप्त हो गया है। उन्होंने बताया कि शासन द्वारा मनरेगा के तहत मेरी उबड़-खाबड़ जमीन पर समतलीकरण का कार्य होने से जहां मेरी भूमि कृषि योग्य हो गई है। वहीं मेरे द्वारा 2 एकड़ में धान की फसल लगाई गई है। कालीराम अपने खेत में लहलहाती फसलों को देखकर भविष्य में होने वाली आमदनी के बारे में सोच कर काफी खुश हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा वनवासियों और किसानों के हित में किए जा रहे कार्यों की मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।
पथ पर पग-पग पर होंगे श्रद्धालुओं को भगवान श्रीराम के दर्शन
प्रवेश द्वार से लेकर लैंपपोस्ट तक सब कुछ होगा राम मय
मुख्यमंत्री के समक्ष हुआ कार्ययोजना का प्रस्तुतीकरण
रायपुर / शौर्यपथ / कोरिया से सुकमा तक निर्मित होने वाला राम वन गमन पथ कदम-कदम पर राम-मय होगा। छत्तीसगढ़ शासन ने जो कार्ययोजना तैयार की है, उसमें तीर्थ एवं पर्यटनों स्थलों के द्वार से लेकर लैंप-पोस्ट और बैंच तक के सौंदर्यीकरण का विशेष ध्यान रखा गया है। श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को राम वन गमन पथ की यात्रा के दौरान पग-पग पर भगवान श्रीराम के दर्शन होंगे। राम वन गमन पथ के मुख्य मार्ग सहित उप मार्गों की कुल लम्बाई लगभग 2260 किलोमीटर है। इस मार्ग के किनारे जगह-जगह संकेतक तीर्थ स्थलों एवं पर्यटनों की जानकारी सहित भगवान श्रीराम के वनवास से जुड़ी कथाएं देखने और सुनने को मिलेंगी। वन गमन पथ के दोनों ओर विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण भी किया जा रहा है, ताकि यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों के दिलों दिमाग में प्रभु श्रीराम के वनवास का अहसास बना रहे। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की प्राथमिकता वाली राम वन गमन परियोजना का कान्सेप्ट प्लान तैयार हो चुका है।
मुख्यमंत्री बघेल की उपस्थिति में आज मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में पर्यटन सचिव पी.अनबलगन ने इस संबंध में योजना की विस्तृत जानकारी पावरप्वांईट प्रेजेंटेशन के माध्यम से दी। 137 करोड़ 75 लाख रुपये की कुल लागत वाली इस परियोजना पर इसी अगस्त महीने के अंतिम सप्ताह से काम शुरु हो जाएगा। इसकी शुरुआत रायपुर के निकट स्थित चंदखुरी से होगी। चंदखुरी भगवान राम का ननिहाल है। यहां माता कौशल्या का प्राचीन मंदिर है, जो सातवीं शताब्दी का है। माता कौशल्या मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण तथा विकास के लिए 15 करोड़ 45 लाख रुपये की योजना तैयार की गई है।

अंबलगन ने बताया कि इस परियजोना के तहत लगभग 2260 किलोमीटर सड़कों का विकास किया जाएगा। लगभग 1400 किलोमीटर सड़कों के दोनों ओर वृक्षारोपण कार्य किया जाएगा। राम वन गमन पथ पर पहले चरण में जिन 9 स्थानों का चयन किया गया हैं, उन सभी में आकर्षक लैंडस्केप तैयार किया जाएगा। इन सभी स्थानों पर पर्यटकों के लिए नागरिक सुविधाओं का विकास सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। विश्वस्तरीय अधोसंरचनाओं के निर्माण के दौरान उच्च कोटि का प्री-कास्ट और फेब्रीकेशन वर्क सुनिश्चित किया जाएगा। सभी स्थानों पर भव्य द्वार बनाए जाएंगे, जिनके शीर्ष पर भगवान राम का धनुष और उसकी प्रत्यंचा पर रखा हुआ तीर होगा। द्वार पर जय श्रीराम के घोष के साथ राम-पताका लहरा रही होगी। तीर्थ-पर्यटनों पर स्थापित किये जाने वाले लैंपोस्ट भी प्राचीन काल की याद दिलाएंगे। इनके शीर्ष पर भी भगवान श्रीराम की आकृति होगी। एक अन्य डिजाइन में लैंपपोस्ट के शीर्ष पर भी तीर-धनुष स्थापित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि राम वन गमन परिपथ में कोरिया से लेकर सुकमा तक सूचनात्मक स्वागत द्वार स्थापित किये जाएंगे। यात्रियों को इससे पता चल सकेगा कि वे परिपथ पर सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। किसी पडाव में पहुंचने पर एक खास डिजाइन का साइन बोर्ड उनका स्वागत करेगा। परिपथ में सड़क के किनारे विभिन्न स्थानों की दूरी और दिशा बताने वाले डायरेक्शन-पोस्ट भी स्थापित किए जाएंगे।
इस बात का भी ध्यान रखा गया है कि पर्यटन-तीर्थों में धार्मिक-स्थलों के आसपास सजने वाले पूजन-सामग्रियों के परंपरागत बाजार को भी व्यवस्थित कर नये तरह से डिजाइन किया जाए। इन बाजारों में आधुनिक तरीके से निर्मित, किंतु प्राचीनता की याद दिलाते स्टाल स्थापित किये जाएंगे। पर्यटकों की सुविधा के लिए पार्किंग स्थलों को भी अधिक सुरक्षित और सुव्यवस्थित किया जाएगा।
सभी पर्यटन-तीर्थों में विशेष साज सज्जा वाले पर्यटक सूचना केंद्र स्थापित किये जाएंगे। राम वन गमन पथ का रूट मैप तैयार कर संबंधित विभागों को भेज दिया गया है। चंदखुरी, शिवरीनारायण, तुरतुरिया और राजिम के लिए परियोजना-रिपोर्ट तैयार की जा चुकी है। शिविरीनरायण ब्रिज के ऊपर लेजर लाइट शो का इंतजाम भी होगा। धमतरी जिले में सप्तऋषि आश्रम का सौंदर्यीकरण तथा विकास किया जाना है। नगरी को पर्यटन हब के रूप में विकसित किए जाने की योजना है। विभिन्न स्थानों पर बायोडायवर्सिटी पार्क का भी निर्माण किया जाएगा।
पर्यटन विभाग द्वारा इतिहासकारों से चर्चा कर विभिन्न शोध पत्रों और प्राचीन मान्यताओं के आधार पर छत्तीसगढ़ में राम वन गमन पथ के 75 स्थलों को चिन्हित किया गया है। प्रथम चरण में जिन 9 स्थलों का विकास किया जा रहा है, उनमें सीतामढ़ी हरचौका (कोरिया), रामगढ़ (सरगुजा), शिवरीनारायण (जांजगीर-चांपा), तुरतुरिया (बलौदाबाजार), चंदखुरी (रायपुर), राजिम (गरियाबंद), सिहावा सप्तऋषि आश्रम (धमतरी), जगदलपुर (बस्तर) और रामाराम (सुकमा) शामिल हैं। फिलहाल प्रथम चरण में 5 स्थलों के विकास एवं सौंदर्यीकरण की कार्ययोजना तैयार कर निर्माण कार्यों की स्वीकृति दी जा चुकी है। एक वर्ष की अवधि में निर्माण एजेंसियों द्वारा कार्ययोजना के अनुसार कार्यों को पूरा कराया जाएगा।

कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने राम वन गमन पथ के प्रमुख स्थलों के बारे में जनसामान्य को जानकारी देने के लिए सड़क के किनारे उपयुक्त स्थलों पर साइनबोर्ड लगाए जाने का सुझाव दिया। चंदखुरी स्थिति माता कौशल्या मंदिर परिसर सहित अन्य धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों के विकास एवं सौंदर्यीकरण के संबंध में मंत्री मोहम्मद अकबर, टी.एस. सिंहदेव, ताम्रध्वज साहू, डॉ. शिव कुमार डहरिया, अमरजीत भगत ने कई उपयोगी सुझाव भी दिए। इस दौरान मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, कवासी लखमा, गुरु रुद्रकुमार, मंत्री श्रीमती अनिला भेंडिया, संसदीय सचिव शिशुपाल सोरी, चंद्रदेव राय, मुख्यमंत्री के सलाहकार विनोद वर्मा, प्रदीप शर्मा, रूचिर गर्ग, मुख्य सचिव आर.पी. मंडल, अपर मुख्यसचिव अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, प्रधान मुख्य वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी, प्रमुख सचिव वन मनोज कुमार पिंगुआ , कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ.एम.गीता, मुख्यमंत्री के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
रायपुर / शौर्यपथ / रायपुर में आयुर्वेदिक डॉक्टर की पत्नी के साथ बलात्कार का मामला सामने आया है। मामला खम्हारडीह थाना क्षेत्र अंतर्गत अवंति विहार का है जहां आयुर्वेदिक डॉक्टर अपने परिवार सहित 8 साल पूर्व उत्तर प्रदेश से छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में निवास करने पहुंचे थे। उत्तर प्रदेश छोडऩे की वजह पति के बिजनेस पार्टनर द्वारा छेड़छाड़ किया जाना था।
घटना की जानकारी देते हुए थाना प्रभारी ममता शर्मा अली ने बताया कि आरोपी बलबीर सिंह व बबलू सैफी अली द्वारा वर्ष 2019 में थाना क्षेत्र अंतर्गत पीडि़ता का बलात्कार किया गया व उसकी अश्लील फोटो खींच ली गई ,आरोपियों द्वारा लगातार अश्लील फोटो वायरल करने की धमकी दी जाती रही। पीडि़ता ने पुलिस को बताया कि आरोपी उसके पति व बच्चों को भी जान से मारने की धमकी दिया करते थे जिसके कारण वह डर के चलते घटना का जि़क्र किसी को नहीं किया। अब लगातार मानसिक प्रताडि़त होने के बाद पीडि़ता ने घटना की जानकारी अपने पति को दी जिसके बाद पीडि़ता ने अपने परिजनों के साथ पहुंच थाना में रिपोर्ट दर्ज करवाया।
थाना प्रभारी शर्मा ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ ढ्ढक्कष्ट की धारा 376,506,34 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। आरोपी उत्तरप्रदेश के निवासी है।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल विश्व आदिवासी दिवस पर 9 अगस्त को जिलों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित कार्यक्रमों को सम्बोधित करेंगे। कोविड-19 संकट को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष विश्व आदिवासी दिवस पर सार्वजनिक कार्यक्रमों का आयोजन नहीं किया जाएगा।
राज्य शासन द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि विश्व आदिवासी दिवस 9 अगस्त को सभी जिलों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम में समस्त जिले के हितग्राहियों को वन अधिकार मान्यता पत्र के वितरण के साथ ही आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग द्वारा संचालित आवासीय विद्यालय एकलव्य और प्रयास के उत्कृष्ट विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया जाएगा।
सचिव आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग डी.डी. सिंह ने आयोजन के संबंध में सभी जिला कलेक्टरों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कलेक्टरों से कहा गया है कि जिलों में वन अधिकार मान्यता पत्रों का वितरण करें। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिलों में आयोजित कार्यक्रमों को सम्बोधित करेंगे। इस दौरान कुछ जिलों के वन अधिकार मान्यता प्राप्त हितग्राहियों से चर्चा की जाएगी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में कुछ लाभार्थियों को वन अधिकार मान्यता पत्र का वितरण भी किया जाएगा।
भिलाई / शौर्यपथ / घोडग़ी पारा सिरसा कला मे खतरनाक मलेरिया फेलसी फेरम ने दस्तक दे दी है वार्ड न 37 निर्मलकर परिवार मे एक सदस्य को बुखार की शिकायत थी जिला मलेरिया विभाग मे जाचं उपरांत उसकी रिपोर्ट पाजिटिव आई है शहरी स्वास्थ्य कार्यक्रम चरोदा भिलाई 3 के प्रभारी बीईईटीओ सैय्यद असलम ने बताया कि सिरसा कला वार्ड एक परिवार के एक सदस्य को फेलसी फेरम पाजिटिव आया है उसके बाद काम्बेट टीम लगाकर रैपिड फीवर सर्वेक्षण कारकर मलेरिया रक्त पटिका बनाई गई है जिनका जांच भिलाई 3 मे लैब मे कराया जाएगा। मुख्य चिकित्सा एंव स्वास्थ्य अधिकारी डा गंभीर सिंह ठाकुर ने बताया कि इस सीजन मे मलेरिया लार्वा अधिक एक्टिव हो जाता है मचछर बढ जाते इसलिए जुन माह से इसके प्रतिरोधक रोकथाम गतिविधि शुरू कर दी जाती है। खंड चिकित्सा अधिकारी डा आशीष शर्मा व भिलाई 3 के चिकित्सा अधिकारी डा पीयम सिह ने बताया फेलसी फेरम मलेरिया जान लेवा हो सकता है यदि समय पर मरीज का उपचार नहीं हो तो इसलिए बुखार आने पर मलेरिया जाचं जरूर कराऐ ।
राजनांदगांव / शौर्यपथ / अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए भूमिपूजन होने पर जहां पूरा देश उत्सव मनाया। वहीं शहर के मोतीपुर में भी दीपावली मनाई गई। युवाओं ने घर-घर एवं मंदिरों में भगवा झंडे लगाए। वार्डवासियों ने भी अपने घरों में दीप जलाए, घरों के आंगन में रंगोलियां बनाई, फटाखे फोड़े, दीपदान कर भगवान श्रीराम की पूजा अर्चना की।
गोबर से निर्मित पानी में तैरने वाले दीपक से किया गया दीपदान-
इस उत्सव की घड़ी में मां पंचगव्य अुनसंधान केन्द्र ग्राम लिटिया द्वारा उपलब्ध गोबर से निर्मित पानी में तैरने वाले दीपक से वार्डवासियों ने मोतीपुर के तालाब में दीपदान भी किया। संस्था के प्रभारी आर्य प्रमोद कश्यप ने बताया कि गोबर का दीया प्रकृति के अनुकूल रहता है एवं जल को स्वच्छ बनाता है। साथ ही यह जल को प्रदूषित होने से बचाता है।
रायपुर / शौर्यपथ / वन विभाग को कवर्धा वनमंडल के अंतर्गत भारेमदेव वन्य प्राणी अभ्यारण चिल्फी परिक्षेत्र नंदनी टोला में 29 जुलाई को मृत एक नर बायसन प्रकरण को महज 05 दिनों में सुलझाने में बड़ी कामयाबी मिली है। इसमें ग्राम कुमान और नंदनी गांव के सभी 9 आरोपियों के विरूद्ध अपराध दर्ज कर गिरफ्तार करते हुए जेल भेज दिया गया है।
इस पूरे प्रकरण को सुलझाने में एक ओर जहां वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का मागर्दशन रहा तो वहीं दूसरी ओर आरोपियों की पहचान करने में अचानकमार टाईगर रिजर्व के जर्मन शेफर्ड स्निफर डॉग नेरो से भी अहम मद्द मिली। ग्राम कुमान और नंदनी गांव के 9 ग्रामीणों द्वारा वन्यप्राणी बायसन की अवैध शिकार की नीयत से जी.आई. विद्युत तार के करंट का उपयोग कर उक्त घटना को अंजाम दिया गया था। कवर्धा वन मंडल की टीम द्वारा 4 अगस्त को 9 आरोपियों को जी.आई.तार से बिजली का करंट देकर वन्य प्राणी बायसन के अवैध शिकार के अपराध में गिरफ्तार किया गया। इनके विरूद्ध वन्य प्राणी (संरक्षण) अधिनियम तथा भारतीय वन अधिनियम के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध किया गया। वन्य प्राणी गौर या बायसन के अवैध शिकार के प्रकरण में सभी नौ आरोपियों को कवर्धा वन मंडल द्वारा चालान कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां न्यायालय के आदेश के तहत गिरफ्तार किए गए सभी 9 आरोपियों को जेल भेज दिया गया है।
रायपुर / शौर्यपथ / प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी प्रदेश में स्वतंत्रता दिवस, 15 अगस्त गरिमामय तरीके से मनाया जाएगा। इस वर्ष कोविड-19 महामारी को ध्यान में रखते हुए विशेष सावधानी बरतते हुए आयोजन किए जाएंगे। राज्य शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने स्वतंत्रता दिवस समारोह के आयोजन के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए है। जिसके तहत भारत सरकार गृह मंत्रालय एवं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा कोविड-19 से बचाव हेतु जारी सभी निर्देशों का पालन एवं उपाय सुनिश्चित करते हुए कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।
जारी निर्देश के तहत स्वतंत्रता दिवस का राज्य स्तरीय समारोह राजधानी रायपुर में स्थानीय पुलिस परेड ग्राउंड में आयोजित होगा जहां पर मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ध्वजारोहण करेंगे। ध्वजारोहरण उपरांत पुलिस एवं अद्र्धसैनिक बलों की टुकडिय़ों द्वारा सलामी दी जायेगी। मुख्यमंत्री के द्वारा जनता के नाम संदेश दिया जाएगा। कार्यक्रम में कोरोना वारियर्स डॉक्टरों, पुलिस कर्मियों, स्वास्थ्य कर्मियों एवं स्वछता कर्मियों को विशेष रूप से आमंत्रित करते हुए उन्हें सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम में आने वाले सभी लोगों को मास्क पहनना और सामाजिक दूरी आदि का पालन करना अनिवार्य होगा।
इसी तरह जिला स्तर पर स्वतंत्रता दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के द्वारा ध्वजारोहरण किया जाएगा। इसके उपरांत पुलिस एवं नगर सैनिकों की टुकडिय़ों द्वारा सलामी दी जाएगी। मुख्य अतिथि के द्वारा प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा जनता के नाम प्रेषित संदेश का वाचन किया जाएगा। जिला स्तरीय कार्यक्रम में भी कोरोना वारियर्स डॉक्टरों, पुलिस कर्मियों, स्वास्थ्य कर्मियों एवं स्वछता कर्मियों को विशेष रूप से आमंत्रित कर उन्हें सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम में आने वाले सभी लोगों को मास्क पहनना और सामाजिक दूरी आदि का पालन करना अनिवार्य होगा।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर तहसील एवं जनपद स्तर पर सार्वजनिक समारोह आयोजित नहीं होंगे। जनपद कार्यालयों में जनपद अध्यक्ष एवं नगरीय निकायों में नगरीय निकाय के महापौर या अध्यक्षों द्वारा ध्वजारोहरण किया जाएगा। पंचायत मुख्यालयों में सरपंच द्वारा एवं बड़े गांवों में गांव के मुखिया द्वारा ध्वजारोहण किया जाएगा और सामूहिक रूप से राष्ट्रीय गान गाया जाएगा। सामान्य प्रशासन विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार राज्य, जिला, ब्लाक एवं पंचायत स्तर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में किसी भी स्थिति में स्कूली छात्र-छात्राओं को एकत्र नहीं किया जाएगा। आयोजित कार्यक्रमों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन नहीं किया जाएगा। गणमान्य अतिथियों को भी सीमित संख्या में आमंत्रित किया जाएगा। बैठक व्यवस्था में सामाजिक एवं व्यक्तिगत दूरी का विशेष रूप से पालन किया जाएगा।
प्रदेश की राजधानी रायपुर एवं अन्य जिला मुख्यालयों में आयोजित होने वाले मुख्य समारोह प्रात: 9 बजे से शुरू होंगे। इसे देखते हुए रायपुर एवं अन्य जिला मुख्यालयों में स्थित शासकीय कार्यालयों को ध्वजारोहण प्रात: 8 बजे के पूर्व सम्पन्न कर लिए जाएंगे ताकि उन कार्यालयों के अधिकारी और कर्मचारी जिले के मुख्य समारोह में शामिल हो सके। सभी विभाग के कार्यालय प्रमुखों द्वारा उनके कार्यालय में ध्वजारोहरण का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके पश्चात् राष्ट्रीय गान जन-गण-मन गाया जाएगा। सभी शासकीय एवं सार्वजनिक भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाएगा। स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को रात्रि में प्रदेश के सभी शासकीय एवं सार्वजनिक भवनों तथा राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों पर रोशनी की जाएगी।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
