September 11, 2026
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    राजनांदगांव

    राजनांदगांव (1782)

    राजनांदगांव / शौर्यपथ / कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी टोपेश्वर वर्मा ने रेमडेसिविर इंजेक्शन व अन्य जीवनरक्षक औषधियों की उपलब्धता के लिए दिशा-निर्देश जारी किया है। वर्तमान में राजनांदगांव जिले में कोविड-19 संक्रमण की स्थिति लगातार बढ़ती जा रही है जिसमें मरीजों के इलाज हेतु इंजेक्शन रेमडेसिविर व अन्य जीवनरक्षक औषधियों की आवश्यकता होती है। वर्तमान में स्थानीय प्रशासन द्वारा शासकीय, निजी अस्पतालों को कोविड-19 मरीजों के इलाज की अनुमति प्रदान की गई है। प्रायः देखने में यह आ रहा है कि भर्ती मरीजों के परिजनों को चिकित्सालय में औषधि उपलब्ध नहीं होने पर चिकित्सक पर्ची में दवाई लिखकर बाहर से लाने हेतु सलाह दे रहे हैं, जिसके कारणवश मरीज के परिजन अनावश्यक रूप से औषधि के अभाव में इधर-उधर भटक रहे हैं।
    मरीजों को समय पर औषधि उपलब्ध कराने एवं उनके परिजनों को अनावश्यक रूप से परेशानी ना हो इस आशय से संबंधितों को निर्देशित किया जाता है कि शासकीय, निजी अपस्ताल, नर्सिंग होम में कोविड से संक्रमित मरीजों के लिए आवश्यक जीवन रक्षक दवाईयों की उपलब्धता एवं आवश्यकता हेतु अस्पताल संचालक से समन्वय कर भर्ती मरीज हेतु आवश्यक दवाई की उपलब्धता सुनिश्चित करें। जिससे संक्रमण की कठिन परिस्थितियों में मरीज को तत्काल जीवनरक्षक औषधि उपलब्ध हो सके एवं उनके परिजनों को अनावश्यक रूप से औषधि हेतु भागदौड़ ना करना पड़े।
    इस हेतु उपसंचालक खाद्य एवं औषधि प्रशासन जिला राजनांदगांव अपने अमले के सहयोग से स्थानीय स्टाकिस्ट से समन्वय स्थापित कर निजी कोविड-19 अस्पतालों को रेमडेसिविर व अन्य जीवनरक्षक दवाइयों की उपलब्धता एवं आवश्यकता के आधार पर उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। रेमडेसिविर इंजेक्शन की उपलब्धता के पश्चात् मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा अपने स्तर पर शासकीय कोविड-19 अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों में इंजेक्शन रेमडेसिविर व अन्य जीवनरक्षक औषधि की उपलब्धता सुनिश्चित करें।
    अस्पताल अधीक्षक सह संयुक्त संचालक भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी स्मृति शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय संबद्ध चिकित्सालय राजनांदगांव द्वारा अपने स्तर पर कोविड अस्पताल पेंड्री में इंजेक्शन रेमडेसिविर व अन्य जीवनरक्षक औषधि की उपलब्धता सुनिश्चित करेंगे। इंजेक्शन रेमडेसिविर का क्रय-विक्रय कोविड-19 अस्पताल द्वारा मेडिकल एजेंसी से लेकर अस्पताल के कोविड-19 मरीजों को किया जाएगा। साथ ही यह सुनिश्चित करें कि कोई भी शासकीय, निजी अस्पताल के चिकित्सकों द्वारा मरीज अथवा उनके परिजनों को कोई भी औषधि के लिए पर्ची अथवा बाहर से औषधि लाने के लिए बाध्य नहीं करेंगे एवं शिकायत पाये जाने पर विधिसम्मत् कार्रवाई की जाएगी। शासकीय, निजी अस्पताल प्रबंधन संबंधित से आपसी समन्वय कर व्यवस्था करें।

    हमर युवा, हमर अभिमान, फ्री म टिका छत्तीसगढ़ के पहचान

    राजनांदगांव / शौर्यपथ / जिला कांग्रेस अध्यक्ष पदम सिंह कोठारी ने कहां कि छत्तीसगढ़ राज्य पूरे देश में जन कल्याणकारी फैसले लेने वाला प्रथम राज्य बन कर सामने उभर रहा है। वर्तमान समय में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी द्वारा 18 वर्ष से 45 वर्ष के लोगों को कोरोना वैक्सीन मुफ्त में लगाने की बात कहकर जनहित फैसले की ओर एक और कदम बढ़ाया है। यह फैसला लेकर माननीय मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी ने छत्तीसगढ़ प्रदेश का जिम्मेदार मुखिया होने का अपना कर्तव्य निभाया है। साथ ही जिला अध्यक्ष पदम कोठारी ने केंद्र की मोदी सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि मोदी सरकार युवा विरोधी, गरीब विरोधी है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में कहा था कि वैक्सीन के लिए 35,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए है और स्वास्थ्य पर कुल 2.4 लाख करोड़ खर्च करने का ऐलान किया था। अब सवाल यह उठता है कि केंद्र सरकार के 35,000 करोड़ के वैक्सीनेशन बजट से 18 वर्ष से 45 वर्ष की आयु वर्ग के वैक्सीनेशन का खर्च केंद्र सरकार क्यों वहन नहीं कर रही है ? एक ही कंपनी के कोविशिल्ड वैक्सीन की कीमत केंद्र के लिए ₹150/डोज राज्य के लिए ₹400/डोज एवं निजी अस्पतालो के लिए ₹600/डोज अलग अलग रखना समझ से परे है।
    क्या मोदी जी आपदा में अवसर तलाश कर रहे हैं ? जबकि कोरोना से लड़ने के नाम पर इकट्ठा किए गए एक लाख करोड़ के पीएम केयर्स फंड से वैक्सीनेशन की राशि खर्च की जा सकती थी। पीएम केयर्स फंड को सूचना के अधिकार से भी बाहर रखकर प्रधानमंत्री मोदी ने अपने गैर जिम्मेदाराना रवैये का परिचय दिया है।

    *राजनांदगांव। Shouryapath । जिला भाजपा पिछड़ा वर्ग अध्यक्ष पार्षद दल के प्रवक्ता शिव भजन सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल मैं 7 घंटे तक बिजली बंद होना प्रदेश सरकार की नाकामी है। उन्होंने कहा कि आखिर प्रदेश सरकार राजनांदगांव के प्रति उदार दिल क्यों नहीं है। इसीलिए प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह कहते हैं कि प्रदेश के मुख्यमंत्री बदलापुर की राजनीति कर रहे हैं। श्री वर्मा ने आगे कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री, या प्रभारी मंत्री, स्वास्थ्य मंत्री राजनांदगांव आऐ या ना आऐ इसका कोई मतलब नहीं है। परंतु जनहित को ध्यान रखते हुए व्यवस्था पर विशेष ध्यान रखना चाहिए। मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में 7 घंटे बिजली बंद होना। जनरेटर खराब होगा उस समय कोरोना से पीड़ित मरीजों की दशा क्या होगी मरीज तड़पते रहे चीखते चिल्लाते रहे वेंटिलेटर पर जो मरीज थे उनकी क्या हालत होगी यह प्रदेश की सरकार आंखें खोल कर सोचे। स्वास्थ्य विभाग के संविदा कर्मचारियों को प्रदेश सरकार हर माह वेतन नहीं देते हैं, कभी-कभी तो 2 से 3 माह में इन लोगों का पेमेंट होता है जिसके वजह से इन कर्मचारियों का मनोबल मरीजों के प्रति कम होते जा रहा है, उन्होंने यह भी कहा कि किसी अधिकारी को हटाने या ना हटाने से कोई बहुत बड़ा बदलाव नहीं होगा। सरकार सिस्टम में बदलाव करें। 500 करोड़ का मेडिकल कॉलेज जहां पर व्यवस्था जीरो है इतनी बड़ी मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर नर्स स्टाफ की कमी व्यवस्था की कमी वहीं दूसरी तरफ डॉक्टर नर्स स्टाफ को दो तीन महीने तक इनको पेमेंट नहीं हो पाता ऐसे अनेकों उदाहरण है जिसे सुधार किया जाना जरूरी है, इसी प्रकार सरकारी अस्पतालों में खाने की नहीं की व्यवस्था भी चरमराई हुई है जिला प्रशासन इन सब कमियों को पूरा करने के बजाए अपने वाहवाही करने में लगे हुए हैं। सरकारी अस्पतालों में मरीजों को जो खाना दिया जा रहा है वह खाना मुंह में डालने लायक भी नहीं है जिससे खाने की कमी के वजह से मरीजों की हालत दिन-ब-दिन खराब होते जा रही है जबकि कोविड-19 को देखते हुए मरीजों को दवाई के साथ अच्छी खाना देने में जिला प्रशासन सहित राज्य सरकार विफल होते हुए नजर आ रहे हैं। महापौर को महापौर निधि से प्रभारी मंत्री के द्वारा पचास लाख रुपए खर्च करने का अधिकार दिया है,और वही मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था आपको स्वयं सुधारना था, और वही एक रूम में कोविड-19 खोलने की जरूरत नहीं था, क्योंकि मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर कोविड-19 मरीजों को ही देखेंगे, मेडिकल कॉलेज में वेंटिलेटर और अन्य कोई भी समान नहीं है, तो फिर यह दोहोरी नीति महापौर क्यों चला रही है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के महापौर ने कहा कि मेडिकल कॉलेज में ना सुविधा है, न स्टाफ है और भोजन व्यवस्था पूरी तरह खराब है। साथ ही इस बात को भी स्वीकार किया कि वेंटीलेटर भी अभी तक चालू नहीं कर पाए।

       राजनांदगांव / शौर्यपथ / कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा ने आज दिग्विजय स्टेडियम स्थित डिस्ट्रिक वार रूम में कोविड-19 समीक्षा बैठक के दौरान कहा कि कोविड-19 हॉस्पिटल में मरीज स्वस्थ होने के बाद भी डॉक्टर द्वारा डिस्चार्ज करने पर घर नहीं जा रहे है। जिसके कारण कोरोना से संक्रमित जरूरतमंद मरीजों को ऑक्सीलेटेड बेड नहीं मिल पा रहा है। स्वस्थ हुए मरीजों द्वारा ऐसा करना अपराध की श्रेणी में आता है। उन्होंने ऐसे करने वाले मरीजों पर कार्रवाई करने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। मरीज के स्वस्थ होने के बाद घर नहीं जाने से अन्य जरूरतमंद मरीजों को हॉस्पिटल में जगह नहीं मिल पा रही है। साथ ही इन मरीजों के ठीक होने के बाद भी हॉस्पिटल में रहने से अन्य संक्रमित मरीजों से फिर से संक्रमित होने की संभावना बनी रहती है। ऐसे मरीज जो स्वस्थ हो गए हैं और जिनको हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया गया है, वे घर जाएं, जिससे अन्य मरीजों को ऑक्सीलेटेड बेड उपलब्ध होगा।
    कलेक्टर वर्मा ने शासकीय मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन मरीजों की आवश्यकता के अनुरूप ऑक्सीजन सिलेण्डर की व्यवस्था करने कहा। उन्होंने कहा कि जिले की सीमा क्षेत्रों को सील करके कड़ी निगरानी रखें। बाहर से आने वाले सभी लोगों का कोविड टेस्ट करें। उन्होंने रेल्वे स्टेशन में कोविड टेस्ट की भी जानकारी ली। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों से कोविड संक्रमण के अधिक केस आ रहे है। वहां लोगों को आइसोलेट करने की जरूरत है। कोरोना से मृत्यु होने पर प्रोटोकाल का पालन करते हुए शव का अंतिम संस्कार करें। जिन घरों में कोरोना से मृत्यु हो रही है, वहां के सभी सदस्यों का अनिवार्य रूप से कोरोना टेस्ट जरूर कराएं।
    कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा ने जिले में कोविड-19 के टेस्ट की जानकारी लेते हुए कहा कि टेस्टिंग किट पर्याप्त संख्या में उपलब्ध है। कोविड केयर सेंटर में होने वाली मृत्यु तथा वहां से डिस्चार्ज लोगों की रिपोर्ट भी प्रस्तुत करें। जिले में कोविड निगेटिव और पॉजिटिव आने वाले लोगों की एन्ट्री करें। साथ ही संक्रमण से ठीक होने वाले मरीजों का डाटा भी रखें। इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ अजीत वसंत, अपर कलेक्टर सीएल मारकण्डेय, नगर निगम आयुक्त आशुतोष चतुर्वेदी, एसडीएम मुकेश रावटे, डिप्टी कलेक्टर विरेन्द्र सिंह, डिप्टी कलेक्टर राहुल रजक, डीएसपी लोकेश देवांगन, डीपीएम गिरीश कुर्रे, जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. बीएल कुमरे, जिला शिक्षा अधिकारी एचआर सोम, ईडीएम सौरभ मिश्रा, शासकीय मेडिकल कालेज के अरविंद चौधरी एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

    राजनांदगांव / शौर्यपथ / कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा ने आज दिग्विजय स्टेडियम स्थित डिस्ट्रिक वार रूम में कोविड-19 समीक्षा बैठक के दौरान कहा कि कोविड-19 हॉस्पिटल में मरीज स्वस्थ होने के बाद भी डॉक्टर द्वारा डिस्चार्ज करने पर घर नहीं जा रहे है। जिसके कारण कोरोना से संक्रमित जरूरतमंद मरीजों को ऑक्सीलेटेड बेड नहीं मिल पा रहा है। स्वस्थ हुए मरीजों द्वारा ऐसा करना अपराध की श्रेणी में आता है। उन्होंने ऐसे करने वाले मरीजों पर कार्रवाई करने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। मरीज के स्वस्थ होने के बाद घर नहीं जाने से अन्य जरूरतमंद मरीजों को हॉस्पिटल में जगह नहीं मिल पा रही है। साथ ही इन मरीजों के ठीक होने के बाद भी हॉस्पिटल में रहने से अन्य संक्रमित मरीजों से फिर से संक्रमित होने की संभावना बनी रहती है। ऐसे मरीज जो स्वस्थ हो गए हैं और जिनको हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया गया है, वे घर जाएं, जिससे अन्य मरीजों को ऑक्सीलेटेड बेड उपलब्ध होगा।
    कलेक्टर वर्मा ने शासकीय मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन मरीजों की आवश्यकता के अनुरूप ऑक्सीजन सिलेण्डर की व्यवस्था करने कहा। उन्होंने कहा कि जिले की सीमा क्षेत्रों को सील करके कड़ी निगरानी रखें। बाहर से आने वाले सभी लोगों का कोविड टेस्ट करें। उन्होंने रेल्वे स्टेशन में कोविड टेस्ट की भी जानकारी ली। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों से कोविड संक्रमण के अधिक केस आ रहे है। वहां लोगों को आइसोलेट करने की जरूरत है। कोरोना से मृत्यु होने पर प्रोटोकाल का पालन करते हुए शव का अंतिम संस्कार करें। जिन घरों में कोरोना से मृत्यु हो रही है, वहां के सभी सदस्यों का अनिवार्य रूप से कोरोना टेस्ट जरूर कराएं।
    कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा ने जिले में कोविड-19 के टेस्ट की जानकारी लेते हुए कहा कि टेस्टिंग किट पर्याप्त संख्या में उपलब्ध है। कोविड केयर सेंटर में होने वाली मृत्यु तथा वहां से डिस्चार्ज लोगों की रिपोर्ट भी प्रस्तुत करें। जिले में कोविड निगेटिव और पॉजिटिव आने वाले लोगों की एन्ट्री करें। साथ ही संक्रमण से ठीक होने वाले मरीजों का डाटा भी रखें। इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ अजीत वसंत, अपर कलेक्टर सीएल मारकण्डेय, नगर निगम आयुक्त आशुतोष चतुर्वेदी, एसडीएम मुकेश रावटे, डिप्टी कलेक्टर विरेन्द्र सिंह, डिप्टी कलेक्टर राहुल रजक, डीएसपी लोकेश देवांगन, डीपीएम गिरीश कुर्रे, जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. बीएल कुमरे, जिला शिक्षा अधिकारी एचआर सोम, ईडीएम सौरभ मिश्रा, शासकीय मेडिकल कालेज के अरविंद चौधरी एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

    -गोमय यज्ञ भष्म से हो सकती है ऑक्सीजन की पूर्ति, धन भी बचेगा और पर्यावरण भी
    - पंचगव्य यानि देशी गाय का गोघृत, दूध, दही, गोवर व गोमूत्र से निर्मित वस्तुओं का उपयोग करने वाला सुरक्षित है कोरोना वायरस से
    - राजनांदगांव व डोंगरगढ़ में अनेकों लोग पंचगव्य सेवन करके अपने को सुरक्षित व निर्भय कर रहे महसूस ,दैनिक यज्ञ से वायरस संक्रमण घटेगा, रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी

    राजनांदगांव / शौर्यपथ / कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण और बढ़ती मृत्युदर पर चिंता व्यक्त करते हुए माँ पंचगव्य अनुसंधान केन्द्र प्रभारी व पंचगव्य चिकित्सक आर्य प्रमोद अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि पारम्परिक चिकित्सा पद्धति को नजरअंदाज करने व सही जानकारी के अभाव में आज कोरोना वायरस का संक्रमण व मृत्युदर दिनोदिन बढ़ती ही जा रही है। अत: हमें अपनी पारम्परिक वैदिक चिकित्सा की ओर लौटना ही होगा। आर्य प्रमोद नें बताया कि जो चिकित्सा बड़े-बड़े अस्पतालों में हो रही है, वह चिकित्सा आपके पास ही उपलब्ध है।
    वैज्ञानिक शोधों के आधार पर व स्वयं के अनुभव के आधार पर भी यह बात सिद्ध हो चुकी है कि गोमय के यज्ञ भस्म में 46 प्रतिशत तक ऑक्सीजन है। दो चम्मच भस्म 1 लीटर पानी में डालकर सेवन करें तो शरीर में ऑक्सीजन की कमी को पूरा किया जा सकता है। पारम्परिक चिकित्सा से अनजान लोग ऑक्सीजन सिलेण्डर के लिए भटक रहे हैं, महंगी राशि का भुगतान कर रहे हैं और व्यवस्था न मिलने पर अपनी जान भी गंवा रहे हैं।
    पंचगव्य चिकित्सक आर्य प्रमोद ने बताया कि राजनांदगांव व डोंगरढ़ में पंचगव्य आधारित चिकित्सा सुविधा पिछले पांच वर्षों से निरंतर संचालित है। यहां गौमूत्र का सेवन करने वाले लोगों में रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ी है। जिससे वे अनेक गंभीर व जटिल रोगों से मुक्त हो चुके हैं। साथ ही वे वर्तमान में कोरोना वायरस के संक्रमण से भी मुक्त हैं व भयरहित होकर लोगों के लिए प्रेरक बने हुऐ हैं। कोरोना वायरस से बचने के लिए वेक्सीनेशन की सरकार की मुहिम के बाद भी वायरस से संक्रमण व मृत्युदर बढ़ रही है, इसका मुख्य कारण है कि आज हर व्यक्ति के मन में डर घर कर गया है। जैसा कि मनोवैज्ञानिक सिद्धान्त है कि भय से हमरा इम्युन सिस्टम काफी कमजोर होने लगता है और विभिन्न बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। उन्होनें वैज्ञानिक व धार्मिक आधार पर बताया कि पंचगव्य उत्पादों में यदि हम प्रतिदिन गोवर के कंड़े में चावल व गौघृत मिलाकर मंत्र के साथ आहुति दें तो निश्चित रूप से वायरस इंफेकशन से बचेंगे और हम भयमुक्त भी हो सकेंगे।
    पंचगव्य औषधि के लिए सुकुदैहान में सिद्धि पैथोलॉजी लैब, गौ प्रचार रथ सुभाष द्वार पोष्ट ऑफिस चौक राजनांदगांव, गुरूकृपा जलाराम मंदिर कैलाश नगर, गौ नेचुरल कमला कॉलेज त्रिपाठी टॉवर, रेमन शॉप कौरीनभाठा, गौमूत्र चिकित्सा केंद्र स्टेट बैंक के पास सेठ पारा डोंगरगढ़ व माँ पंचगव्य अनुसंधान केन्द्र ग्राम लीटिया राजनांदगांव से पंचगव्य औषधि प्राप्त कर सकते हैं।

    राजनादगांव / शौर्यपथ / जिले में निरंतर कोरोना के संक्रमित लोगों की संख्या बढ़ रही है जिसमे किसी उम्र दराज नहीं बच पा रहे है। गांव से शहर तक के अस्पतालों में डॉक्टर, नर्सो, पैरामेडिकल की सेवा की सख्त आवश्यकता इस हेतु मेडिकल कॉलेज के सदस्य और वरिष्ठ कांग्रेसी अशोक फड़नवीस ने कलेक्टर टीके वर्मा को पत्र लिखा। जिसमें ध्यानाकर्षण हुए कहा कि रायगढ़ के कलेक्टर ने इस कोरोना महामारी से जूझ रही जनता के हित व पीड़ित व्यक्ति को समय पर इलाज हेतु समस्त स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टर, नर्सो के साथ पैरामेडिकल डिग्रीधरियों की सेवा के लिए उनकी नियुक्ति की जाये। जिससे जिले को बहुत राहत होगी व जिला मेडिकल अस्पताल के साथ कोविड सेंटर पर दबाव भी कम होगी। लोगों की शिकायतों का निराकरण समय पर किया जा सकेगा।
    शहर की सामाजिक संस्थाओं द्वारा लगभग 300 बेड तैयार कर रखे है, उसका लाभ भी कोरोना पेसेंट को मिलेगा, सामाजिक संस्था सभी भी प्रकार की सेवा तत्पर है, किंतु डॉक्टरों, नर्सो की कमी के कारण वे भी मजबूर हो गए है। इस हेतु प्रदेश के मुख्या भूपेश बघेल, स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव, प्रभारी मंत्री जो को वस्तु स्थिति से अवगत किया जाएगा।

    राजनांदगांव / शौर्यपथ / सहायक औषधि नियंत्रक संजय सिंह झाड़ेकर ने बताया कि कोविड-19 संक्रमण के उपचार में उपयोग की जाने वाली रेमडिसिविर इंजेक्शन  कुल 256 वायल्स प्राप्त हुए हैं। सन फार्मास्युटिकल से 160 वाइल्स एवं ज्याडस केडिला से 96 वाइल्स प्राप्त हुए हैं। उन्होंने बताया कि जीवन रेखा हॉस्पिटल राजनांदगांव में 25 वाइल्स, सिटी हॉस्पिटल राजनांदगांव में 20 वायल्स, संजीवनी मनकी राजनांदगांव में 25 वाइल्स, समदा राजनांदगांव में 10 वाइल्स इस तरह कुल 70 वाइल्स वितरित कराया गया है। रामाधीन मार्ग स्थित अविनाश मेडिकल स्टोर्स में 186 वाइल्स प्रदाय कर वितरण किया गया।

    राजनंदगांव / शौर्यपथ / कोरोना संक्रमण का सबसे खतरनाक दौर इस समय चल रहा है। सभी तरफ स्वास्थ्य सेवाओं पर बुरा असर पड़ रहा है। मरीजों को इलाज में परेशानी हो रही है। इस संकट में एक-दूसरे का सहारा बनने की जरूरत है। निःस्वार्थ सेवा की कहानियां जीवन के विभिन्न पहलुओं से हमें रुबरु कराती है। गुरूद्वारा बंदीछोड़ पतशाही तुमड़ीबोड़, राजनांदगांव शांति, सम्मान, समानता के आदर्शों पर कार्य कर रही है। गुरुद्वारा से ज्ञानी नरिन्दर सिंह जी और सेवादारों द्वारा राजनांदगांव जिले के वनांचल साल्हेवारा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के मरीजों के लिए मॉस्क दिया गया।
    गौरतलब है कि गुरुद्वारा बंदीछोड़ पतशाही तुमड़ीबोड राजनांदगांव के सेवादार गत वर्ष हजारों प्रवासी मजदूरों के मदद में भी आगे आए थे। वनांचल क्षेत्र में सहयोग के लिए आगे आना निःसन्देह काबिले तारीफ है। सेवादार ज्ञानी नरिन्दर सिंह जी कहते है कि हर व्यक्ति भगवान के समान है, चाहें उनका धर्म, जातिए लिंग या पंथ कोई भी हो। देश में फैले कोरोना महामारी के बीच लगातार जनसेवा कर रहे हैं।

    राजनांदगांव /शौर्यपथ / कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा है कि सैम्पल टेस्टिंग के समय अपना सही पता एवं मोबाईल नंबर की जानकारियां प्रदान करें, ताकि कोरोना संक्रमण को बढऩे से रोका जा सके। उन्होंने कहा है कि सैम्पल देते समय गलत पता एवं मोबाईल नंबर देने के कारण संक्रमित व्यक्ति को न तो उपचार मिल पाता है और न ही वह होम आईसोलेशन में रहता है। जिसकी वजह से वह स्वयं संक्रमित होता ही है, दूसरों को भी संक्रमित करता है।
    कलेक्टर वर्मा ने कहा कि सैम्पल टेस्ंिटग के दौरान गलत पता एवं मोबाईन नंबर देने से कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग का कार्य प्रभावित होता है। कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य है। इसमें कोविड-19 पॉजिटिव मरीज से संपर्क स्थापित कर मरीज एवं उनके संपर्क में आने वाले उनके परिजनों एवं अन्य संभावित संक्रमित लोगों के स्वास्थ्य के संबंध में समस्त जानकारियां एकत्र की जाती हैं। इसके माध्यम से होम आइसोलेशन के मरीजों के स्वास्थ्य संकेतकों, दवाइयों इत्यादि की जानकारी ली जाती है तथा आवश्यकता पडऩे पर हॉस्पिटल में भर्ती किए जाने के लिए एम्बुलेंस सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है। लेकिन यह देखा जा रहा है कि कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग के दौरान सैम्पल देते समय कुछ लोगों द्वारा अपना गलत पता, मोबाईल नंबर दिया जा रहा है। जिससे कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग करने में स्वास्थ्य विभाग की टीम को अत्यधिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
    स्वयं मरीज को स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिलने एवं अनावश्यक विलंब होने से मृत्यु होने की भी संभावना बनी रहती है। इनका यह कृत्य मोहल्ले एवं क्षेत्र में संक्रमण में होने वाली वृद्धि का भी कारक है। कलेक्टर ने समस्त नागरिकों से अपील है कि सैम्पल टेस्टिंग के समय अपना सही पता एवं मोबाईल नंबर की जानकारियां प्रदान करें। गलत जानकारियां प्रदान करने वाले लोगों के विरूद्ध आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत दण्डात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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